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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सरस्वती विद्या मंदिर वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय बसहवा का किया भूमि पूजन व शिलान्यास

बस्ती/लखनऊ, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत की शिक्षा कैसी होनी चाहिए। आजादी के पांच साल के बाद जब तत्कालीन सरकारें इस दिशा में प्रयास नहीं कर पाईं, तब नाना जी ने गोरखपुर से इस प्रयास को बढ़ाया था। उसके पीछे का ध्येय था कि भारत, भारतीयता, परंपरा,  संस्कृति और मातृभाव से ओतप्रोत ऐसे शिक्षण संस्थान की स्थापना आवश्यक है, जो देश को फिर से विश्व गुरु के रूप में स्थापित करने में योगदान दे सके। इसकी शुरूआत शिक्षा के मंदिरों से ही होती है। शिक्षण संस्थान केवल अक्षर ज्ञान के माध्यम ही नहीं, बल्कि बालक के सर्वांगीण विकास की आधारशिला हैं। शिक्षा यदि संस्कार, मूल्यों-आदर्शों, मातृभूमि, महापुरुषों, राष्ट्रीयता के प्रति समर्पण का भाव पैदा नहीं कर पा रही है तो वह कुशिक्षा और भटकाव है। आजादी के तत्काल बाद उसका समाधान सरस्वती शिशु मंदिर से प्रारंभ हुआ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को सरस्वती विद्या मंदिर वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय बसहवा का भूमि पूजन, शिलान्यास, पौधरोपण व पुस्तक का विमोचन भी किया। आरएसएस के तत्कालीन प्रचारक नाना जी देशमुख के नेतृत्व में सरस्वती शिशु मंदिर की पहली शाखा गोरखपुर में स्थापित की गई थी। विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षण संस्थान के मातृभूमि होने का सौभाग्य गोरक्ष प्रांत को प्राप्त है। विद्या भारती के अंतर्गत संचालित हजारों शिक्षण-प्रशिक्षण संस्थान राष्ट्र निर्माण के जिस अभियान के साथ जुड़े हैं, उसकी ताकत देश-दुनिया समझती है। शिशु मंदिर से निकले छात्र समाज का नेतृत्व भी कर रहे और मार्गदर्शन भी सीएम योगी ने कहा कि पाठ्यक्रम सरकार तैयार करती है। सरकार सहयोग करे या न करे। बिना सरकार की सहायता के अपने दम और स्वयंसेवकों के सहयोग से भारतीयता के प्रति अनुराग रखने वाले नागरिकों के माध्यम से सरस्वती शिशु मंदिर ने इस कार्यक्रम को आगे बढ़ाया। गोरखपुर के पक्कीबाग में जब पहला सरस्वती शिशु मंदिर स्थापित हुआ तो उस समय मात्र पांच छात्र थे, लेकिन आज शिशु मंदिर के 12 हजार विद्यालय हैं। यह संस्थान बच्चों के अंदर भारत व भारतीयता के प्रति नागरिक के रूप में कर्तव्यों का बोध कराने और सुयोग्य नागरिक बनाने के लिए राष्ट्रीय दायित्व का ईमानदारी से निर्वहन कर रहा है। सरस्वती शिशु मंदिर से निकले छात्र समाज को नेतृत्व भी दे रहे और मार्गदर्शन भी कर रहे हैं।   शिक्षा से होती देश के समर्थ, आत्मनिर्भर व शक्तिशाली होने की शुरुआत   सीएम योगी ने कहा कि देश के समर्थ, आत्मनिर्भर व शक्तिशाली होने की शुरुआत शिक्षा से होती है। दुनिया में समृद्धि की चर्चा होती है तो पहला पैरामीटर शिक्षा, फिर स्वास्थ्य, उसके बाद कृषि-जल संसाधन, तब कौशल विकास व रोजगार होता है। फिर पर्यावरण को ध्यान में रखकर विकास की बात होती है। यह पैरामीटर तय करते हैं कि समग्र विकास के लक्ष्य को प्राप्त कर सकेंगे। इस मंशा के साथ जब कोई अभियान बढ़ता है तो वह न केवल देशहित, बल्कि मानवता का मार्ग भी प्रशस्त करता है। आज का कार्यक्रम सुयोग्य नागरिकों को गढ़ने, तलाशने और तराशने का महत्वपूर्ण मंच शुरू करने जा रहा है। इसके माध्यम से भारत के सुयोग्य नागरिक विकसित करने का मंच विकसित हो रहा है। बिना प्लानिंग कार्य करने से चूक जाते हैं सीएम ने कहा कि जब बिना किसी प्लानिंग कार्य करते हैं तो चूक जाते हैं। हर व्यवस्था, प्रबंधन, सरकार, कॉरपोरेट घराना वर्ष भर की योजना बनाता है, फिर लघु, मध्यम व दीर्घ अवधि के कार्यक्रम तय करता है। इसके माध्यम से आगे के लक्ष्यों को प्राप्त करके हम भी सशक्त होंगे और भावी पीढ़ी, संस्थान को भी समर्थ भी बना पाएंगे। सरकार हर साल बजट प्रस्तुत करती है। इसमें विजन होता है कि एक वर्ष, फिर पांच वर्ष, दस वर्ष, 25 वर्ष की योजना क्या होगी। भारत की आजादी के अमृत महोत्सव वर्ष पर पीएम मोदी ने आगामी 25 वर्ष की कार्ययोजना तैयार करने को कहा।  भारत को विकसित बनाने के लिए पंच प्रण को जीवन का हिस्सा बनाने को कहा।   विरासत का करना होगा सम्मान सीएम ने कहा कि विरासत का सम्मान करना होगा। हमारे पूर्वजों (1953 में श्यामा प्रसाद मुखर्जी) ने संकल्प लिया था कि एक देश में दो विधान, दो निशान, दो प्रधान नहीं चलेंगे। कश्मीर में शेष भारत का कानून लागू करने का शंखनाद किया था। उन्हें बलिदान भी देना पड़ा। 1952 में कांग्रेस ने बाबा साहेब के न चाहने के बावजूद जबरन लागू किया, लेकिन पीएम मोदी ने डॉ. मुखर्जी के संकल्प को साकार कर आतंकवाद व भारत विरोधी गतिविधियों-साजिशों को समाप्त करके कश्मीर को भारत के कानून के साथ जोड़ा। 500 वर्ष का इंतजार समाप्त हुआ और अयोध्या में रामललाा के मंदिर का निर्माण हुआ। विपक्षी दल चाहते थे कि यह नहीं होना चाहिए। सीएम ने कहा कि प्रभु श्रीराम आदर्श व भारतीयता के प्रतीक है। जब महर्षि वाल्मिकी ने नारद जी से पूछा कि मुझे कुछ लिखना है, ऐसा कौन सा आदर्श है। तब उन्होंने कहा कि इस धरती पर एक ही चरित्र है, आप श्रीराम पर लिखें। हमें महर्षि वाल्मीकि, प्रभु राम,  श्रीकृष्ण की परंपरा पर गौरव की अनुभूति है। भारत और भारतीयता के लिए जिन महापुरुषों व स्वतंत्र भारत में सीमाओं की रक्षा करते हुए जिन्होंने बलिदान दिया, वे सभी हमारे आदर्श हैं। उनका सम्मान और विरासत का संरक्षण करना हर भारतीय का दायित्व है। विदेशियों ने भारत को लूटकर अर्जित किया, जबकि भारत ने पुरुषार्थ से समृद्धि को बनाया सीएम ने गुलामी के अंशों को सर्वथा समाप्त करने पर भी चर्चा की। बोले कि गुलामी की मानसिकता देश के अंदर छा गई थी। भारतीय को हेय और विदेशी को संपन्न की दृष्टि से देखे जाने लगा। इस दुष्प्रवृत्ति पर 11 वर्ष में आपने रोक लगाते हुए देखा होगा। जो भारतीय है, वह सर्वश्रेष्ठ है और वह ऐसा इसलिए है, क्योंकि जो विदेशियों ने भारत को लूटकर अर्जित किया है, जबकि भारत ने अपने पुरुषार्थ से समृद्धि को बनाया था। 400 वर्ष पहले भारत दुनिया की नंबर एक अर्थव्यवस्था थी। दुनिया की अर्थव्यवस्था में भारत का योगदान 25 फीसदी था। जब देश आजाद हुआ तो भारत का योगदान केवल दो फीसदी रह गया। भारत को लूटा गया। भारत और भारतीयता के मन में यह भाव पैदा किया गया कि भारतीयों को आदर्श के रूप में प्रस्तुत करने वालों को लोग हतोत्साहित करते थे। … Read more

सीमा पर अलर्ट: नेपाल में प्रदर्शन, पीलीभीत और लखीमपुर खीरी में एसएसबी ने बढ़ाई निगरानी

पीलीभीत /लखीमपुर खीरी नेपाल में प्रदर्शन के कारण बिगड़े हालात को देखते हुए पीलीभीत और लखीमपुर खीरी जिले में भारत-नेपाल सीमा पर सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। सीमा पर चौकसी बढ़ाने के साथ ही आने-जाने वाले लोगों की गहन जांच की जा रही है। पीलीभीत जिले में अफसरों के निर्देश पर माधोटांडा और हजार थाना पुलिस ने एसएसबी के साथ सीमा क्षेत्र में गश्त तेज कर दी है। सीमा पर तैनात सुरक्षाकर्मी हर गतिविधि पर पैनी नजर बनाए हुए हैं। पुलिस के साथ खुफिया तंत्र भी सक्रिय कर दिया गया है ताकि संदिग्ध गतिविधियों पर तत्काल कार्रवाई हो सके। सीमा पर प्रवेश करने वाले और बाहर जाने वाले हर व्यक्ति की जांच की जा रही है, साथ ही वाहनों की तलाशी भी ली जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मौजूदा हालात को देखते हुए सुरक्षा के सभी मानकों का पालन किया जा रहा है। स्थानीय लोगों को सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को देने की अपील की गई है। फिलहाल सीमा क्षेत्र पूरी तरह सुरक्षित है। किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पुलिस और प्रशासन पूरी तरह तैयार है। गौरीफंटा बॉर्डर पर भी सर्तकता बढ़ी लखीमपुर खीरी के पलियाकला में भारत-नेपाल के गौरीफंटा बॉर्डर पर भी सुरक्षा एजेंसियों ने सतर्कता बरतनी शुरू कर दी है। यहां पर पुलिस व एसएसबी के जवान चेकिंग कर रहे हैं। नेपाल के धनगढ़ी शहर में चल रहे प्रदर्शन के बीच मंगलवार को बॉर्डर पर भी काफी चौकसी दिखाई दी। सुरक्षा एजेंसियां दलबल के साथ चेकिंग में लगी रही। नेपाल जाने-आने वाले लोगों की चेकिंग की जा रही है।  

अहर्निश प्रासंगिक हैं युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ के विचार

  पुण्यतिथि आश्विन कृष्ण तृतीया पर बुधवार को गोरखनाथ मंदिर में सीएम योगी की अध्यक्षता में होगी श्रद्धांजलि सभा लोक कल्याण को समर्पित रहा महंत दिग्विजयनाथ जी का जीवन गोरखपुर, कर्ता के प्रति कृतज्ञता का भाव व्यक्त करने, विरासत पर गौरव की अनुभूति करने और गुरु के प्रति सम्मान प्रकट करने की सनातनी परंपरा की संवाहक गोरक्षपीठ में प्रतिवर्ष स्मृतिशेष गुरुजन की स्मृति में अध्यात्म और राष्ट्रीयता के सुर गुंजित होते हैं। अवसर होता है युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज और राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की पुण्यतिथि पर साप्ताहिक श्रद्धांजलि समारोह का। इस वर्ष ब्रह्मलीन महंतद्वय की स्मृति में श्रीमद्भागवत महापुराण कथा 4 सितंबर से और समाज व राष्ट्र को प्रभावित करने वाले समसामयिक विषयों पर चिंतन-मंथन के सांगोष्ठिक कार्यक्रम 5 सितंबर से जारी हैं। इस साप्ताहिक कार्यक्रम के तहत आश्विन कृष्ण तृतीया पर 10 सितंबर (बुधवार) को ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज की 56वीं पुण्यतिथि पर तथा आश्विन कृष्ण चतुर्थी पर 11 सितंबर (गुरुवार) को ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की 11वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में किया जाएगा। पुण्य स्मरण का यह कार्यक्रम गोरखनाथ मंदिर के महंत दिग्विजयनाथ स्मृति सभागार में होगा जहां देशभर के प्रमुख संतजन उपस्थित रहेंगे। पुण्यतिथि समारोह में बुधवार को ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ की स्मृतियों के जीवंत होने के इस अवसर पर यह जानना भी प्रासंगिक है कि उन्हें युगपुरुष क्यों कहा जाता है। भौतिक विद्यमानता न होने के बावजूद जो व्यक्तित्व अपने कार्यों-विचारों से अपने बाद की पीढ़ियों का मार्गदर्शन करते हैं, सही अर्थों में युगपुरुष होते हैं। कारण, हरेक कालखंड में उनके बताए मार्गों, विचारों और आदर्शों की प्रासंगिकता रहती है। ऐसे ही युगपुरुष हैं ब्रह्मलीन गोरक्षपीठाधीश्वर महंत दिग्विजयनाथ। वर्ष 1935 से 1969 तक नाथपंथ के विश्व विख्यात पीठ के कर्ता-धर्ता रहे ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ की बुधवार (आश्विन कृष्ण तृतीया) को 56वीं पुण्यतिथि है।  पांच दशक से अधिक समय से उनके व्यक्तित्व व कृतित्व को श्रद्धा भाव से न केवल नमन-स्मरण किया जाता है बल्कि उनपर अमल करने का संकल्प भी लिया जाता है। महंत जी न केवल गोरखनाथ मंदिर के वर्तमान स्वरूप के शिल्पी रहे बल्कि उनका पूरा जीवन राष्ट्र, धर्म, अध्यात्म, संस्कृति, शिक्षा व समाजसेवा के जरिये लोक कल्याण को समर्पित रहा। तरुणाई से ही वह देश की आजादी की लड़ाई में जोरदार भागीदारी निभाते रहे तो देश के स्वतंत्र होने के बाद सामाजिक एकता और उत्थान के लिए। इसके लिए शैक्षिक जागरण पर उनका सर्वाधिक जोर रहा। महंत दिग्विजयनाथ का जन्म वर्ष 1894 में वैशाख पूर्णिमा के दिन चित्तौड़, मेवाड़ ठिकाना ककरहवां (राजस्थान) में हुआ था। उनके बचपन का नाम नान्हू सिंह था। पांच वर्ष की उम्र में 1899 में इनका आगमन गोरखपुर के नाथपीठ में हुआ। अपनी जन्मभूमि मेवाड़ की माटी की तासीर थी कि बचपन से ही उनमें दृढ़ इच्छाशक्ति और स्वाभिमान से समझौता न करने की प्रवृत्ति कूट कूटकर भरी हुई थी। उनकी शिक्षा गोरखपुर में ही हुई और उन्हें खेलों से भी गहरा लगाव था। 15 अगस्त 1933 को गोरखनाथ मंदिर में उनकी योग दीक्षा हुई और 15 अगस्त 1935 को वह इस पीठ के पीठाधीश्वर बने। वह अपने जीवन के तरुणकाल से ही आजादी की लड़ाई में हिस्सा लेते रहे। देश को स्वतंत्र देखने का उनका जुनून था कि उन्होंने 1920 में महात्मा गांधी द्वारा चलाए गए असहयोग आंदोलन के समर्थन में स्कूल छोड़ दिया। उन पर लगातार आरोप लगते थे कि वह क्रांतिकारियों को संरक्षण और सहयोग देते हैं। 1922 के चौरीचौरा के घटनाक्रम में भी उनका नाम आया लेकिन उनकी बुद्धिमत्ता के सामने ब्रिटिश हुकूमत को झुकना पड़ा और उन्हें रिहा कर दिया गया। श्रीराम मंदिर आंदोलन में ब्रह्मलीन महंतश्री की रही महती भूमिका अयोध्या में भगवान श्रीराम के मंदिर के निर्माण को लेकर हुए आंदोलनों में गोरक्षपीठ की महती भूमिका से सभी वाकिफ हैं। ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ इस आंदोलन में नींव के पत्थर हैं। 1934 से 1949 तक उन्होंने लगातार अभियान चलाकर आंदोलन को न केवल नई ऊंचाई दी बल्कि 1949 में वह श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन के नेतृत्वकर्ता भी रहे। 22-23 दिसंबर 1949 को अयोध्या में भगवान रामलला की मूर्ति प्रकट होने के नौ दिन पहले महंत दिग्विजय नाथ के नेतृत्व में अखंड रामायण के पाठ का आयोजन शुरू हो गया था। रामलला के प्रकट होने के समय महंत जी स्वयं वहां उपस्थित थे। पांच सौ वर्षों के इंतजार के बाद अयोध्या में प्रभु श्रीराम अपनी जन्मभूमि स्थित मंदिर में विराजमान हो चुके हैं। प्रभु रामलला के मंदिर निर्माण के लिए चले आंदोलन को उनके बाद उनके शिष्य महंत अवेद्यनाथ ने निर्णायक बनाया तो कोर्ट के फैसले के बाद मंदिर निर्माण की शुभ घड़ी तब आई जब राज्य की सत्ता का नेतृत्व भी गोरक्षपीठ के पीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ कर रहे हैं। ऐसे में जब भी अयोध्या के श्रीराम मंदिर का जिक्र होगा, तो वर्तमान गोरक्षपीठाधीश्वर के दादागुरु ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ आप ही स्मरित होंगे। पूर्वांचल में शैक्षिक क्रांति के अमर नायक हैं महंत दिग्विजयनाथ महंत दिग्विजयनाथ का नाम पूर्वांचल में शैक्षिक क्रांति लाने वाले नायक के रूप में अमर है। उन्होंने गोरखपुर और आसपास के क्षेत्रों के लिए शिक्षा की जो ज्योति जलाई, उससे आज पूरा अंचल प्रकाशित हो रहा है। शिक्षा क्रांति के लिए उन्होंने 1932 में महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की स्थापना की। एक किराए के मकान में परिषद के अंतर्गत महाराणा प्रताप क्षत्रिय स्कूल शुरू हुआ। 1935 में इसे जूनियर हाईस्कूल की मान्यता मिली और 1936 में हाईस्कूल की भी पढाई शुरू हुई। नाम 'महाराणा प्रताप हाई स्कूल' हो गया। इसी बीच महंत दिग्विजयनाथ के प्रयास से गोरखपुर के सिविल लाइंस में पांच एकड भूमि महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद को प्राप्त हो गयी और महाराणा प्रताप हाईस्कूल का केन्द्र सिविल लाइंस हो गया तथा देश के आजाद होते समय यह विद्यालय महाराणा प्रताप इन्टरमीडिएट कालेज के रुप में प्रतिष्ठित हुआ। 1949-50 में इसी परिसर में महाराणा प्रताप डिग्री कालेज की स्थापना महंतजी की अगुवाई में हुई। शिक्षा को लेकर उनकी सोच दूरदर्शी और निजी हित से परे थी। यही वजह थी कि उन्होंने 1958 में अपनी संस्था महाराणा प्रताप डिग्री कालेज को गोरखपुर विश्वविद्यालय की स्थापना हेतु दान में दिया। बाद में परिषद की तरफ से उनकी स्मृति में दिग्विजयनाथ स्नातकोत्तर महाविद्यालय की स्थापना … Read more

दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए रोजगार मेलों के आयोजन पर जोर दे रही योगी सरकार

  लखनऊ, योगी सरकार ने दिव्यांगजनों के सशक्तीकरण के लिए अपनी प्रतिबद्धता को और मजबूत करते हुए विभागीय योजनाओं को पात्र लाभार्थियों तक समयबद्ध तरीके से पहुंचाने के लिए व्यापक रणनीति तैयार की है। इसके तहत आधुनिक तकनीक और सोशल मीडिया का सहारा लिया जाएगा ताकि योजनाओं की जानकारी समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। योगी सरकार ने दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग को वर्षभर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए हैं, जिससे योजनाओं की पहुंच और प्रभावशीलता को बढ़ाया जा सके। योगी सरकार ने निर्देश दिया है कि योजनाओं की जानकारी को ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में फैलाने के लिए मीडिया, सोशल मीडिया, विद्यालयों, पंचायतों, नगरीय निकायों और स्थानीय शिविरों के माध्यम से जागरूकता अभियान चलाया जाए। इस अभियान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र लाभार्थी योजनाओं के लाभ से वंचित न रहे। पात्र विद्यार्थियों को समय से पहले मिलेगी छात्रवृत्ति आगामी 2 अक्टूबर, गांधी जयंती के अवसर पर विभाग द्वारा विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिसमें पात्र विद्यार्थियों को समय से पहले छात्रवृत्ति वितरित की जाएगी। यह पहली बार होगा जब छात्रवृत्ति का वितरण समय से पूर्व सुनिश्चित किया जाएगा। अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि योजनाओं का जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। योगी सरकार ने प्रत्येक पात्र लाभार्थी को योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की है। दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए रोजगार मेलों का आयोजन दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए योगी सरकार ने रोजगार मेलों के आयोजन पर भी जोर दिया है। ये मेले विभागीय स्तर पर आयोजित किए जाएंगे, जिससे दिव्यांगजनों को स्वरोजगार और रोजगार के अवसर प्राप्त हो सकें। विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे योजनाओं के प्रचार-प्रसार को और प्रभावी बनाने के लिए रचनात्मक तरीके अपनाएं। सोशल मीडिया के माध्यम से योजनाओं की जानकारी को वायरल करने और स्थानीय स्तर पर शिविरों के आयोजन से जागरूकता बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। दिव्यांगजन सशक्तीकरण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) नरेन्द्र कश्यप ने बताया कि योगी सरकार की इस पहल से न केवल दिव्यांगजनों को आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त किया जाएगा, बल्कि उनकी प्रतिभा और क्षमता को समाज में एक नई पहचान भी मिलेगी। योगी सरकार का यह कदम उत्तर प्रदेश को दिव्यांग सशक्तीकरण के क्षेत्र में अग्रणी बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।

स्किल्ड युवा और गांव बनेंगे विकसित उत्तर प्रदेश के ध्वजवाहक

‘विकसित यूपी @2047’ : युवा को ज्ञान, सबको घरबार स्किल्ड युवा और गांव बनेंगे विकसित उत्तर प्रदेश के ध्वजवाहक 2047 तक यूपी को 6 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने में जुटे योगी आदित्यनाथ – हर परिवार को पक्का घर, हर गांव को बुनियादी सुविधाएं देने का संकल्प  – यूपी बनेगा स्किल्ड और सेमी-स्किल्ड युवाओं का सबसे बड़ा प्रदाता – कृषि अनुसंधान और फूड प्रोसेसिंग से बढ़ेगी किसानों की आय – पश्चिमांचल की तरह पूर्वांचल और बुंदेलखंड भी बनेगा विकास का मॉडल  – 2017 से पहले शिक्षा और गांवों में थी अव्यवस्था, अब बन रहा विकास का सेंटर – ग्रामीण आवास में आई क्रांति- 36.57 लाख घर स्वीकृत, 36.34 लाख हुए पूरे – 3310 आईटीआई और 2138 पॉलीटेक्निक से युवाओं को मिल रहे नए अवसर लखनऊ  उत्तर प्रदेश को वर्ष 2047 तक ‘विकसित यूपी’ के रूप में स्थापित करने का विजन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तय किया है। इस विजन के मुख्य आधार में से एक है ग्रामीण युवा को उच्च शिक्षा के साथ ही ग्राम स्वच्छता एवं ग्रामीण अवसंरचना को सुदृढ़ बनाना। सरकार का मानना है कि यदि अगले 22 वर्षों में इन दोनों क्षेत्रों में बड़े परिवर्तन किए जाएं तो प्रदेश 6 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनकर भारत की विकास यात्रा में अहम योगदान देगा। 2017 से पहले की स्थिति साल 2017 से पहले प्रदेश उच्च शिक्षा और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में कई चुनौतियों से जूझ रहा था। शिक्षा व्यवस्था रोजगार उन्मुख नहीं थी और तकनीकी शिक्षा के संस्थान सीमित थे। प्रदेश में केवल 526 पॉलीटेक्निक और 2642 आईटीआई संचालित हो रहे थे। अनुसंधान और नवाचार का बुनियादी ढांचा भी कमजोर था। ग्रामीण क्षेत्र की तस्वीर भी उतनी ही चिंताजनक थी। लाखों परिवार पक्के मकानों से वंचित थे। गांवों में सड़क, बिजली, पेयजल जैसी सुविधाओं का व्यापक अभाव था। ग्राम पंचायतें संसाधनों और क्षमता की कमी से जूझ रही थीं, जिससे योजनाओं का असर जमीनी स्तर पर नहीं दिख पाता था। 2017 से 2025 : विकास की नई दिशा योगी सरकार ने बीते साढ़े आठ वर्षों में उच्च शिक्षा और ग्रामीण विकास दोनों क्षेत्रों में ठोस कदम उठाए। "एक मंडल, एक विश्वविद्यालय" की दिशा में आगे बढ़ते हुए अब प्रदेश में 24 राज्य और 49 निजी विश्वविद्यालय हैं। इस दौरान 6 नए राज्य विश्वविद्यालय और 23 नए निजी विश्वविद्यालय स्थापित किए गए। तकनीकी शिक्षा में भी बड़ा विस्तार हुआ। आईटीआई की संख्या बढ़कर 3310 और पॉलीटेक्निक संस्थानों की संख्या 2138 हो गई। टाटा टेक्नोलॉजीज के साथ करार कर 150 से अधिक सरकारी आईटीआई को आधुनिक तकनीक से लैस किया गया। गुणवत्ता सुधार के लिए 95 से अधिक संस्थानों को एनएएसी की मान्यता मिली और 67 संस्थान राष्ट्रीय रैंकिंग में शामिल हुए। युवाओं को डिजिटल युग से जोड़ने के लिए 49.86 लाख टैबलेट और स्मार्टफोन भी वितरित किए गए। ग्रामीण विकास में ऐतिहासिक बदलाव ग्रामीण अवसंरचना के क्षेत्र में सरकार ने करोड़ों लोगों के जीवन को बदलने वाला काम किया। अब तक 56.90 लाख परिवारों को पक्के घर मिले हैं। पीएम आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत 36.57 लाख घर स्वीकृत हुए और इनमें से 36.34 लाख का निर्माण पूरा हो चुका है। गांवों को सड़क नेटवर्क से जोड़ने पर भी जोर दिया गया। 165 ब्लॉक मुख्यालय दो लेन सड़कों से जुड़े, 1385 किलोमीटर नई सड़कें बनीं और 25 हजार किलोमीटर सड़क का चौड़ीकरण व मजबूतीकरण किया गया। जल सुरक्षा के लिए अमृत सरोवर बनाए गए और 550 ग्राम पंचायतों को अटल भूजल योजना से जोड़ा गया। पंचायती राज व्यवस्था को मजबूत करने के लिए 24,489 पंचायत भवन बनाए गए। हर ग्राम पंचायत को सचिवालय मिला और पंचायत सहायकों की नियुक्ति हुई। अब हर गांव में शासन की योजनाओं की निगरानी और क्रियान्वयन की मजबूत व्यवस्था है। मुख्यमंत्री का मिशन 'विकसित यूपी 2047' प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विजन 'विकसित भारत @2047' को पूरा करने के लिए उत्तर प्रदेश को ग्रोथ इंजन बनकर इसमें पूरा सहयोग देना होगा। पीएम मोदी के विजन को मिशन मोड में पूरा करने का संकल्प मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लिया है। उन्होंने आगामी 22 वर्षों में यूपी को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का रोडमैप स्पष्ट किया है। 2030 तक लक्ष्य है कि प्रदेश के गांव केवल उत्पादन ही नहीं बल्कि उत्पादकता और निर्यात में भी अग्रणी बनें। इसके लिए सीड पार्क, उन्नत बीज, फसल विविधिकरण और फूड प्रोसेसिंग जैसी व्यवस्थाओं का विस्तार होगा। दीर्घकालिक लक्ष्य के तहत 2047 तक अनाज, फल और सब्जियों की उत्पादकता को विश्वस्तरीय स्तर पर ले जाया जाएगा। आधुनिक कृषि अनुसंधान और नवाचार केंद्र स्थापित होंगे। दुग्ध और अंडा उत्पादन में यूपी को विश्व में शीर्ष पर पहुंचाया जाएगा और पशुधन विज्ञान के अंतरराष्ट्रीय संस्थानों की स्थापना की जाएगी। इसके साथ ही हर परिवार को पक्का मकान, अपशिष्ट प्रबंधन की आधुनिक प्रणाली, गरीबी का उन्मूलन और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी। पूर्वांचल और बुंदेलखंड को पश्चिमांचल के बराबर लाकर क्षेत्रीय असमानता समाप्त करने का लक्ष्य है। 6 ट्रिलियन डॉलर की ओर प्रदेश का लक्ष्य वर्ष 2047 तक 6 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का है। यह भारत की अनुमानित जीडीपी का 20 प्रतिशत होगा। इसके लिए 2025 से 2047 तक लगातार 16 प्रतिशत की विकास दर बनाए रखना जरूरी है। उच्च शिक्षा और कौशल विकास से तैयार कार्यबल घरेलू व वैश्विक उद्योगों को गति देगा। ग्रामीण अवसंरचना और कृषि उत्पादकता बढ़ने से आय और खपत में वृद्धि होगी। इन दोनों क्षेत्रों का संयुक्त योगदान ही यूपी को 26 लाख रुपये प्रति व्यक्ति आय के स्तर तक ले जाएगा।    

योगी सरकार के आईजीआरएस पोर्टल से जन शिकायतों के निस्तारण में आई तेजी, पीड़ितों को मिल रहा त्वरित न्याय

जनशिकायतों के निस्तारण में योगी सरकार का देवीपाटन मंडल अव्वल, मीरजापुर मंडल ने हासिल किया दूसरा स्थान    योगी सरकार के आईजीआरएस पोर्टल से जन शिकायतों के निस्तारण में आई तेजी, पीड़ितों को मिल रहा त्वरित न्याय   मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मॉनीटरिंग से शिकायतों का समयबद्ध हो रहा निस्तारण  – आईजीआरएस की अगस्त माह की रिपोर्ट में जनमानस की शिकायतों के निस्तारण में देवीपाटन मंडल ने पहले स्थान पर  – रिपोर्ट में मीरजापुर दूसरे तो अलीगढ़ मंडल है तीसरे स्थान पर, शिकायतों के निस्तारण के बाद मंडलायुक्त ले रहे फीडबैक  – मंडलायुक्तों की मॉनीटरिंग, विभागीय आख्या की जांच और शिकायकर्ता के फीडबैक से समस्या के समाधान में आ रही तेजी लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की निगरानी से जन शिकायतों के निस्तारण की प्रक्रिया में अभूतपूर्व तेजी आई है। योगी सरकार के आईजीआरएस पोर्टल से शिकायतों के समाधान में न केवल पारदर्शिता आई है, बल्कि पीड़ितों को त्वरित न्याय भी मिल रहा है। योगी सरकार ने अपने कार्यकाल में प्रशासनिक सुधारों और तकनीकी उपायों को अपनाकर शिकायतों के निस्तारण को सुनिश्चित किया है। वहीं, आईजीआरएस की अगस्त माह की रिपोर्ट में देवीपाटन मंडल ने जन शिकायतों के निस्तारण में बाजी मारी है और प्रदेश में पहला स्थान प्राप्त किया है। इसी तरह प्रदेशभर में मीरजापुर मंडल ने दूसरा और अलीगढ़ मंडल ने तीसरा स्थान प्राप्त किया है।  हर माह रेंडम पांच शिकायतकर्ता से दवीपाटन मंडलायुक्त खुद लेते हैं निस्तारण का फीडबैक देवीपाटन मंडलायुक्त शशि भूषण लाल सुशील ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप जनशिकायतों का प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण किया जा रहा है। इसके लिए देवीपाटन मंडल के जिलों क्रमश: श्रावस्ती, बहराइच, गोंडा और बलरामपुर में जनशिकायतों के पारदर्शी और त्वरित समाधान के लिए कई बिंदुओं पर लगातार काम किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि जिलों में जनशिकायतों की निस्तारण की रिपोर्ट की लगातार मॉनीटरिंग की जाती है। मंडलायुक्त ने बताया कि वह खुद मंडल के सभी जिलों के जनशिकायतों के निस्तारण के पहलुओं की मॉनीटरिंग करते हैं। इसके साथ ही रेंडम पांच शिकायतकर्ता से मंडलायुक्त कार्यालय से फीडबैक लिया जाता है ताकि यह पता चल सके कि पीड़ित की शिकायत पर वास्तविकता में एक्शन लिया गया है या फिर रिपोर्ट ही लगायी गयी है। इसके साथ ही हर माह जनशिकायतों के मामलों की विभागीय आख्या की जांच की जाती है। यही वजह है कि देवीपाटन मंडल ने जन शिकायतों के निस्तारण में प्रदेश भर में पहला स्थान प्राप्त किया है। मंडलायुक्त ने बताया कि अगस्त माह की आईजीआरएस रिपोर्ट में दवीपाटन मंडल को पूर्णांक 120 में से 105 अंक प्राप्त हुए हैं और सफलता दर 87.50 प्रतिशत है।    मीरजापुर मंडल ने दूसरा तो अलीगढ़ मंडल ने तीसरा स्थान प्राप्त किया योगी सरकार द्वारा लांच आईजीआरएस (एकीकृत शिकायत निवारण प्रणाली) पोर्टल नागरिकों की शिकायतों के समाधान के लिए एक महत्वपूर्ण प्लेटफॉर्म है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर कई सुधारों के बाद यह अत्यधिक प्रभावी साबित हुआ है। आईजीआरएस की अगस्त की रिपोर्ट के अनुसार मीरजापुर मंडल ने जन शिकायतों के निस्तारण में प्रदेशभर में दूसरा प्राप्त किया है। मीरजापुर मंडलायुक्त ने बताया कि अगस्त माह की आईजीआरएस रिपोर्ट में मीरजापुर मंडल को पूर्णांक 120 में से 96 अंक प्राप्त हुए हैं और सफलता दर 80 प्रतिशत है। इसी तरह अलीगढ़ मंडल ने जनशिकायतों के निस्तारण में पूरे प्रदेश में तीसरा स्थान प्राप्त किया है। अलीगढ़ मंडलायुक्त संगीता सिंह ने बताया कि अगस्त माह की आईजीआरएस रिपोर्ट में अलीगढ़ मंडल को पूर्णांक 120 में से 93 अंक प्राप्त हुए हैं और सफलता दर 77.50 प्रतिशत है। इसके साथ ही टॉप फाइव मंडल में बस्ती मंडल ने चौथा और प्रयागराज मंडल ने पांचवां स्थान प्राप्त किया है। इन मंडलों ने शिकायतों के निस्तारण में समय की बचत और पीड़ितों से फीडबैक लेकर सुधार की प्रक्रिया को तेज किया है। इससे यह सुनिश्चित हुआ कि कोई भी शिकायत अनसुलझी न रहे और समाधान की प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी और समयबद्ध हो। साथ ही अधिकारियों के फील्ड विज़िट्स ने इस प्रक्रिया को और भी प्रभावी बना दिया है।  

योगी सरकार के आमंत्रण पर उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल, बिजनेस डेलिगेशन और सांस्कृतिक कलाकार होंगे शामिल

यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में इस बार रूस बनेगा पार्टनर कंट्री योगी सरकार के आमंत्रण पर उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल, बिजनेस डेलिगेशन और सांस्कृतिक कलाकार होंगे शामिल योगी सरकार के आमंत्रण पर रूस ने दी पार्टनर कंट्री बनने की औपचारिक स्वीकृति बिजनेस डेलिगेशन बैंकिंग, ऊर्जा, स्किलिंग, शिक्षा और आईटी/आईटीईएस क्षेत्रों में करेगा सहभागिता 9 सदस्यीय सांस्कृतिक दल भी प्रस्तुत करेगा रूसी कला-संस्कृति ‘डूइंग बिजनेस इन रूस’ पर नॉलेज सेशन की होगी खास प्रस्तुति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 25 सितंबर को करेंगे यूपीआईटीएस 2025 का शुभारंभ  मेगा इवेंट में योगी सरकार की पहल से बढ़ेगा वैश्विक सहयोग लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो मार्ट में लगातार तीसरे वर्ष होने जा रहे उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो 2025 में इस बार रूस पार्टनर कंट्री के रूप में शामिल होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रदेश सरकार ने रूस को इस मेगा इवेंट में सहभागिता के लिए आमंत्रित किया है। रूस की ओर से भी इस आमंत्रण को स्वीकृत कर लिया गया है और इसकी जानकारी प्रदेश सरकार को दे दी गई है। इस मेगा इवेंट में रूस का उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल, उद्योग जगत के प्रमुख प्रदर्शक और सांस्कृतिक कलाकार शो का हिस्सा बनेंगे। उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 25 सितंबर को यूपीआईटीएस 2025 का शुभारंभ करेंगे, जो 29 सितंबर तक चलेगा।  2024 में वियतनाम बना था पार्टनर कंट्री  इससे पहले 2024 में भी योगी सरकार की पहल पर वियतनाम को बतौर पार्टनर कंट्री यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में सम्मिलित किया गया था। इस दौरान भारत और वियतनाम के बीच आर्थिक और व्यापारिक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए वियतनाम-इंडिया फोरम और यूपी-वियतनाम टूरिज्म कॉन्क्लेव आयोजित किया गया था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दोनों देशों के बीच व्यापार एवं पर्यटन संबंधों पर जोर दिया था। उनका मानना है कि उत्तर प्रदेश न केवल भारत का ग्रोथ इंजन है बल्कि वैश्विक निवेश का हब भी बन रहा है। ऐसे में रूस के यूपीआईटीएस 2025 में पार्टनर कंट्री बनने से उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को नई दिशा मिलेगी और प्रदेश के उद्योगों को वैश्विक बाजार तक पहुंचने का अवसर मिलेगा। रूस ने दी पार्टनर कंट्री बनने की स्वीकृति  27 मई 2025 को भारत के मास्को स्थित दूतावास ने रूस के प्रमुख मंत्रालयों—मिनिस्ट्री ऑफ इंडस्ट्री एंड ट्रेड, मिनिस्ट्री ऑफ इकोनॉमिक डेवलपमेंट, मिनिस्ट्री ऑफ साइंस एंड हायर एजुकेशन तथा मिनिस्ट्री ऑफ कल्चर—को औपचारिक निमंत्रण भेजा था। इसके अलावा, रूस के प्रमुख व्यापारिक संगठनों जैसे चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ऑफ रशिया, बिजनेस रशिया, ओपोरा रशिया और विभिन्न सेक्टर-विशेष ट्रेड बॉडीज़ से भी सक्रिय संवाद स्थापित किया गया है। इसके जवाब में रूस की ओर से आमंत्रण को स्वीकार करते हुए अपनी भागीदारी सुनिश्चित की गई है। इस संबंध में रूस की स्वीकृति पत्र भी प्रदेश सरकार को मिल चुका है।  बिजनेस और कल्चरल डेलिगेशन होगा आकर्षण का केंद्र रूस की ओर से आने वाले डेलिगेशन में बैंकिंग, ऊर्जा, स्किलिंग, शिक्षा और आईटी/आईटीईएस सेक्टर से जुड़े प्रतिनिधि शामिल होंगे। वे उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री स्तर के अधिकारियों से भी मुलाकात करेंगे। इसके साथ ही रूस का 9 सदस्यीय सांस्कृतिक दल अपनी प्रस्तुति देगा, जिससे ट्रेड शो में भारत-रूस सांस्कृतिक संबंधों को नई ऊर्जा मिलेगी। नॉलेज सेशन और बिजनेस अवसर ट्रेड शो में एक विशेष ‘डूइंग बिजनेस इन रूस’ नॉलेज सेशन भी आयोजित होगा। इसमें भारतीय और उत्तर प्रदेश के उद्योगपतियों को रूस के व्यापारिक अवसरों और निवेश संभावनाओं के बारे में जानकारी दी जाएगी।  

रेलवे अलर्ट! त्योहारों के सीजन में 46 ट्रेनें रद्द, कई ट्रेनों का रूट बदला – जानें पूरी लिस्ट

मुजफ्फरपुर  त्योहारों में घर लौटने की योजना बना रहे यात्रियों के लिए बड़ा झटका है। गोरखपुर-डोमिनगढ़ तीसरी लाइन और गोरखपुर-नकहा जंगल दोहरीकरण की कमीशनिंग को लेकर 22 से 26 सितंबर तक प्री-इंटरलाकिंग और नन-इंटरलाकिंग कार्य किया जाएगा। इसी कारण रेलवे ने 46 ट्रेनों को रद्द कर दिया है, वहीं कई ट्रेनों का मार्ग परिवर्तित किया गया है। पूर्व मध्य रेल के सीपीआरओ सरस्वती चंद्रा ने बताया कि नन-इंटरलाकिंग कार्य पूरा होने के बाद 26 सितंबर को रेल संरक्षा आयुक्त निरीक्षण करेंगे। इसके बाद डोमिनगढ़ में ट्रेनों के विलंब में कमी आएगी और आगामी त्योहारों (दशहरा, दीपावली, छठ) में अधिक स्पेशल ट्रेनों का संचालन किया जा सकेगा। रद्द की गईं प्रमुख ट्रेनें 12537 मुजफ्फरपुर–प्रयागराज जं. एक्सप्रेस – 22 व 24 सितंबर 15098 जम्मूतवी–भागलपुर अमरनाथ एक्सप्रेस – 23 सितंबर 15047 कोलकाता–गोरखपुर पूर्वांचल एक्सप्रेस – 25 व 27 सितंबर 15705 कटिहार–दिल्ली चंपारण हमसफर – 22 व 25 सितंबर 15273 रक्सौल–आनंद विहार सत्याग्रह एक्सप्रेस – 22 से 27 सितंबर कुल 46 ट्रेनों का संचालन प्रभावित रहेगा। परिवर्तित मार्ग से चलने वाली ट्रेनें 02563 बरौनी–नई दिल्ली क्लोन स्पेशल अब छपरा–औंड़िहार–वाराणसी–प्रयागराज होते हुए जाएगी। 11123 ग्वालियर–बरौनी एक्सप्रेस अब लखनऊ–सुल्तानपुर–वाराणसी–छपरा रूट से चलेगी। 12553 वैशाली एक्सप्रेस अब भटनी–मऊ–वाराणसी–अयोध्या कैंट–बाराबंकी मार्ग से जाएगी। कई अन्य ट्रेनें भी वैकल्पिक मार्गों से चलाई जाएंगी। आंशिक समापन/पुनर्निर्धारण 15027 संबलपुर–गोरखपुर मौर्य एक्सप्रेस का आंशिक समापन देवरिया सदर तक होगा। 15047 कोलकाता–गोरखपुर एक्सप्रेस भी देवरिया सदर तक ही चलेगी। 13507 आसनसोल–गोरखपुर एक्सप्रेस का समापन अब सीवान जं. पर होगा। कई ट्रेनों को 90 मिनट से लेकर 4 घंटे तक की देरी से पुनर्निर्धारित किया गया है। 

हर हाथ को हुनर, हर युवा को रोजगार पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का फोकस

युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने में सहायक साबित हो रहा कौशल विकास कार्यक्रम- मुख्यमंत्री योगी हर हाथ को हुनर, हर युवा को रोजगार पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का फोकस सीएम योगी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में तेजी से बढ़ रहा व्यावसायिक व कौशल प्रशिक्षण नेटवर्क ग्रामीण और शहरी युवाओं को जोड़ने के लिए चलाई जा रही हैं कई योजनाएं आईटीआई, पॉलिटेक्निक और डीडीयू-जीकेवाई जैसे संस्थान और योजनाएं बनीं युवाओं की ताकत उद्योगों की जरूरत के अनुरूप युवाओं को दिया जा रहा प्रशिक्षण कुशल युवाओं से मजबूत होगा आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार कौशल विकास और व्यावसायिक शिक्षा को प्राथमिकता दे रही है। प्रदेश की सबसे बड़ी ताकत इसकी युवा आबादी है और योगी सरकार का लक्ष्य है कि प्रत्येक युवा को उसकी रुचि और योग्यता के अनुसार प्रशिक्षण देकर रोजगार से जोड़ा जाए। “हर हाथ को हुनर और हर युवा को रोजगार” इसी दृष्टिकोण के तहत प्रदेश में कई कौशल विकास योजनाएं संचालित हो रही हैं। उल्लेखनीय है कि भारत सरकार ने 2015 में राष्ट्रीय कौशल विकास और उद्यमिता नीति लागू की थी। योगी सरकार ने इस नीति को जमीनी स्तर तक ले जाकर प्रदेश के युवाओं को अधिक से अधिक लाभ दिलाने का कार्य किया है। प्रदेश के सभी जिलों में आईटीआई, पॉलिटेक्निक, जन शिक्षण संस्थान और दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना जैसे कार्यक्रम युवाओं को प्रशिक्षण देकर रोजगार की राह पर अग्रसर कर रहे हैं। NEP 2020 और योगी सरकार की पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत कक्षा 6 से ही व्यावसायिक शिक्षा को शामिल करने की पहल को उत्तर प्रदेश में तेजी से लागू किया जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट कहा है कि छात्रों को केवल डिग्री नहीं बल्कि रोजगार योग्य शिक्षा और हुनर मिलना चाहिए। इसी सोच के तहत स्कूलों और कॉलेजों में व्यावसायिक प्रशिक्षण को बढ़ावा दिया जा रहा है। उत्तर प्रदेश में बढ़ रहे अवसर योगी सरकार ने युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं— ▪️आईटीआई व पॉलिटेक्निक: इंजीनियरिंग और कंप्यूटर विज्ञान विषयों में व्यावहारिक प्रशिक्षण ▪️डीडीयू-जीकेवाई: ग्रामीण युवाओं को 250 से अधिक क्षेत्रों में प्रशिक्षण और रोजगार ▪️एनआरएलएम: गरीबी रेखा से नीचे के परिवारों और महिलाओं के लिए प्रशिक्षण ▪️एनएपीएस: एमएसएमई इकाइयों में युवाओं को शिक्षुता और वजीफे की सुविधा ▪️जन शिक्षण संस्थान: अशिक्षित और कम शिक्षित वर्गों के लिए प्रशिक्षण रोजगार और स्वरोजगार दोनों पर फोकस मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का मानना है कि कौशल विकास न केवल नौकरी के अवसर बढ़ाता है बल्कि स्वरोजगार की राह भी खोलता है। पर्यटन, आईटी, बैंकिंग, रिटेल और पारंपरिक शिल्प जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षित युवा आत्मनिर्भर बनकर प्रदेश की अर्थव्यवस्था में योगदान दे रहे हैं। उत्तर प्रदेश में बेरोजगारी कम करने के लिए व्यावसायिक शिक्षा और कौशल प्रशिक्षण को तेज गति से लागू किया जा रहा है। उद्योगों और शैक्षणिक संस्थानों के बीच सहयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि युवाओं को उसी तरह का प्रशिक्षण मिले जिसकी बाजार में मांग है।  

25 से 29 सितंबर तक उत्तर प्रदेश आयोजित करेगा यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो का तीसरा संस्करण

यूपी के क्राफ्ट, कुजीन, कल्चर का साक्षात्कार कराने आयोजित होने जा रहा है यूपीआईटीएस-2025 25 से 29 सितंबर तक उत्तर प्रदेश आयोजित करेगा यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो का तीसरा संस्करण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे पांच दिवसीय यूपी आईटीएस का शुभारंभ मुख्यमंत्री ने की ट्रेड शो आयोजन के तैयारियों की समीक्षा, कहा, प्रदेश की ब्रांडिंग का बेहतरीन अवसर है यूपीआईटीएस पार्टनर कंट्री के रूप में इस बार रूस की हो रही है सहभागिता पांच दिवसीय अंतरराष्ट्रीय ट्रेड शो में भाग लेने आ रहे 500 से अधिक खरीदार, 2500 एक्ज़िबिटर्स भी करा चुके पंजीयन $1ट्रिलियन अर्थव्यवस्था, इलेक्ट्रॉनिक्स, ई-कॉमर्स, ओडीओपी, बीमा, आयुष्मान भारत, ब्लू रिवल्यूशन जैसे विषयों पर विशेष सत्र आयोजित हों: मुख्यमंत्री बायर-सेलर मीट का खास मौका, सीएम फेलो करेंगे मदद, यूपी के उत्पादों को मिलेगा वैश्विक मंच आईटी/आईटीईएस, एमएसएमई, स्टार्ट अप, शिक्षा, कृषि, स्वास्थ्य, पर्यटन व संस्कृति, ऊर्जा, ओडीओपी जैसे सेक्टरों के उद्यमियों, आंत्रप्रेन्योर, विनिर्माताओं और निर्यातकों के लिए वैश्विक मंच उपलब्ध कराएगा यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो पद्म पुरस्कार से सम्मानित उत्तर प्रदेश के उद्यमियों और शिल्पकारों की होगी विशेष उपस्थिति मुख्यमंत्री का निर्देश, ट्रेड शो में प्रदेश के सभी प्रमुख विभाग भी अपनी उपलब्धियों का करें प्रदर्शन मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान, पीएम स्वनिधि और पीएम इंटर्नशिप कार्यक्रमों पर केंद्रित विशेष प्रदर्शनी लगाई जाएगी खादी केंद्रित फैशन शो होगा आकर्षण का केंद्र, नॉलेज सेशन में होगा फिक्की, इरडा का विशेष सत्र लखनऊ  उत्तर प्रदेश के 'क्राफ्ट, कुज़ीन और कल्चर' से दुनिया भर के उद्यमियों, विनिर्माताओं और व्यापारियों को परिचित कराने वाले वार्षिक आयोजन 'उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो' (यूपीआईटीएस) का तीसरा संस्करण आगामी 25 से 29 सितम्बर तक ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपोज़िशन मार्ट में आयोजित होने जा रहा है। इस भव्य आयोजन का शुभारंभ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा होगा। तीसरे संस्करण में पार्टनर कंट्री के रूप में रूस की सहभगिता होगी। सोमवार को तैयारियों की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अब तक यूपीआईटीएस के दो संस्करण सफलतापूर्वक आयोजित हो चुके हैं। वर्ष 2023 में हुई शुरुआत ने प्रदेश के निर्यात को नई गति और वैश्विक पहचान दी है। मुख्यमंत्री ने इसे उत्तर प्रदेश के 'क्राफ्ट, कुज़ीन और कल्चर' को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत करने का बेहतरीन अवसर बताते हुए कहा कि यह आयोजन आईटी/आईटीईएस, एमएसएमई, स्टार्टअप, शिक्षा, कृषि, स्वास्थ्य, पर्यटन व संस्कृति, ऊर्जा और ओडीओपी जैसे सेक्टरों के उद्यमियों, आंत्रप्रेन्योर, विनिर्माताओं और निर्यातकों को वैश्विक मंच उपलब्ध कराएगा। उन्होंने निर्देश दिया कि इस वर्ष ट्रेड शो में मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान, पीएम स्वनिधि और पीएम इंटर्नशिप कार्यक्रम पर केंद्रित विशेष प्रदर्शनी लगाई जाए। साथ ही अन्य सभी प्रमुख विभाग भी अपनी उपलब्धियों का प्रदर्शन करें, ताकि यह आयोजन प्रदेश की ब्रांडिंग का सशक्त माध्यम बन सके। मुख्यमंत्री ने बायर-सेलर मीट की व्यवस्था तथा इसमें सहयोग के लिए सीएम फेलो की तैनाती करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने यह भी कहा कि इस बार के।आयोजन में पद्म पुरस्कारों से सम्मानित उत्तर प्रदेश के उद्यमियों/शिल्पकारों को विशेष रूप से आमंत्रित किया जाए। अपर मुख्य सचिव, एमएसएमई ने बताया कि इस बार 2500 से अधिक एक्ज़िबिटर्स ने पंजीयन कराया है, जबकि 500 से अधिक विदेशी खरीदार इसमें भाग लेने आ रहे हैं। इस बार रूस पार्टनर कंट्री के रूप में सहयोग कर रहा है और उसका प्रतिनिधिमंडल ट्रेड शो में शामिल होगा। उन्होंने बताया कि ट्रेड शो के आकर्षणों में खादी केंद्रित फैशन शो प्रमुख है।  मुख्यमंत्री ने कहा कि पांच दिवसीय इस ट्रेड शो के दौरान हर दिन एक विशेष थीम पर नॉलेज सेशन आयोजित किए जाएं। इनमें $1 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था का लक्ष्य, इलेक्ट्रॉनिक्स, ई-कॉमर्स, एफपीओ, बीमा, नीली क्रांति (मत्स्य सेक्टर), ओडीओपी और प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना जैसे विषयों पर केंद्रित सत्र शामिल हों। इसके लिए एपीजे अब्दुल कलाम तकनीकी विश्वविद्यालय, आईआईटी कानपुर और उद्योग जगत की प्रमुख संस्थाओं का सहयोग लिया जाए। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि केंद्रीय मंत्रियों को भी विशेष सत्रों में आमंत्रित किया जाए। मुख्यमंत्री ने गौतमबुद्ध विश्वविद्यालय के छात्रों को आयोजन से जोड़ने के भी निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि विभिन्न राज्यों और अनेक देशों से आने वाले प्रतिभागियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी इस आयोजन की महत्ता को और बढ़ा रही है। ऐसे में प्रदेश के सभी विभागों को इसकी सफलता में सक्रिय भूमिका निभानी होगी। बैठक में मुख्यमंत्री ने गौतमबुद्ध नगर प्रशासन से कार्यक्रम अवधि में यातायात प्रबंधन, आगंतुकों सुरक्षा, सुविधा और स्वच्छता के संबंध में भी आवश्यक निर्देश दिए।