samacharsecretary.com

बांग्लादेश में सांप्रदायिक हिंसा: हिंदू परिवारों को निशाना, 4 बेटियां लापता

गोपालगंज बांग्लादेश के गोपालगंज जिले से दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। मंगलवार रात कर्फ्यू लागू होने के बाद बांग्लादेश आर्मी ने जमात-ए-इस्लामी के आतंकियों के साथ मिलकर हिंदू घरों पर हमला कर दिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस हमले में कम से कम 12 हिंदू समुदाय के लोगों की हत्या कर दी गई जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हुए हैं। स्थानीय सूत्रों ने बताया कि हमला योजनाबद्ध तरीके से किया गया और हमलावरों ने कई हिंदू परिवारों के घरों को आग के हवाले कर दिया। बताया जा रहा है कि हमलावर  चार हिंदू लड़कियों को भी जबरन अपने साथ ले गए जिनका अब तक कोई सुराग नहीं लगा है। हमले का एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसे लेकर कोई अधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इस हमले के बाद इलाके में दहशत का माहौल है और बड़ी संख्या में हिंदू परिवार सुरक्षित जगहों की तलाश में पलायन कर रहे हैं। हालांकि, अभी तक बांग्लादेश सरकार की ओर से इस घटना पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। गोपालगंज वही इलाका है जो प्रधानमंत्री शेख हसीना का गृह जिला माना जाता है। हालिया दिनों में वहां नेशनल सिटिजन पार्टी और अवामी लीग के बीच टकराव के बाद पहले ही हिंसा भड़क चुकी थी, जिसके चलते प्रशासन ने कर्फ्यू लगा दिया था।इस ताजा हमले से बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय मानवाधिकार संगठनों ने सरकार से जल्द से जल्द लापता लड़कियों को ढूंढने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।  बता दें कि गोपालगंज जिले में बुधवार को शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग और नेशनल सिटिजन पार्टी  के कार्यकर्ताओं के बीच जोरदार झड़पें हुईं, जिसमें अब तक 10 लोगों की मौत  हो चुकी है और दर्जनों लोग घायल हैं। सबसे अहम बात यह है कि यह इलाका शेख हसीना का गृह जनपद माना जाता है  यहीं उनके पिता शेख मुजीब-उर-रहमान का जन्म हुआ था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, नेशनल सिटिजन पार्टी की रैली को रोकने के लिए अवामी लीग के कार्यकर्ताओं ने रास्तों में पेड़ काटकर डाल दिए और हथियारों के साथ घेराबंदी की। कई सरकारी वाहनों में आग भी लगा दी गई। आरोप है कि इसके बाद रैली स्थल पर भी हमला किया गया। झड़पों के दौरान सुरक्षाबलों की ओर से भी गोलीबारी हुई।    

बांग्लादेश में सांप्रदायिक हिंसा: हिंदू परिवारों को निशाना, 4 बेटियां लापता

गोपालगंज बांग्लादेश के गोपालगंज जिले से दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। मंगलवार रात कर्फ्यू लागू होने के बाद बांग्लादेश आर्मी ने जमात-ए-इस्लामी के आतंकियों के साथ मिलकर हिंदू घरों पर हमला कर दिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस हमले में कम से कम 12 हिंदू समुदाय के लोगों की हत्या कर दी गई जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हुए हैं। स्थानीय सूत्रों ने बताया कि हमला योजनाबद्ध तरीके से किया गया और हमलावरों ने कई हिंदू परिवारों के घरों को आग के हवाले कर दिया। बताया जा रहा है कि हमलावर  चार हिंदू लड़कियों को भी जबरन अपने साथ ले गए जिनका अब तक कोई सुराग नहीं लगा है। हमले का एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसे लेकर कोई अधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इस हमले के बाद इलाके में दहशत का माहौल है और बड़ी संख्या में हिंदू परिवार सुरक्षित जगहों की तलाश में पलायन कर रहे हैं। हालांकि, अभी तक बांग्लादेश सरकार की ओर से इस घटना पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। गोपालगंज वही इलाका है जो प्रधानमंत्री शेख हसीना का गृह जिला माना जाता है। हालिया दिनों में वहां नेशनल सिटिजन पार्टी और अवामी लीग के बीच टकराव के बाद पहले ही हिंसा भड़क चुकी थी, जिसके चलते प्रशासन ने कर्फ्यू लगा दिया था।इस ताजा हमले से बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय मानवाधिकार संगठनों ने सरकार से जल्द से जल्द लापता लड़कियों को ढूंढने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।  बता दें कि गोपालगंज जिले में बुधवार को शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग और नेशनल सिटिजन पार्टी  के कार्यकर्ताओं के बीच जोरदार झड़पें हुईं, जिसमें अब तक 10 लोगों की मौत  हो चुकी है और दर्जनों लोग घायल हैं। सबसे अहम बात यह है कि यह इलाका शेख हसीना का गृह जनपद माना जाता है  यहीं उनके पिता शेख मुजीब-उर-रहमान का जन्म हुआ था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, नेशनल सिटिजन पार्टी की रैली को रोकने के लिए अवामी लीग के कार्यकर्ताओं ने रास्तों में पेड़ काटकर डाल दिए और हथियारों के साथ घेराबंदी की। कई सरकारी वाहनों में आग भी लगा दी गई। आरोप है कि इसके बाद रैली स्थल पर भी हमला किया गया। झड़पों के दौरान सुरक्षाबलों की ओर से भी गोलीबारी हुई।    

ताजमहल की सैर के लिए बुजुर्ग को किया कैद, कार में छोड़कर चला गया पूरा परिवार

आगरा  आगरा में संवंदेनहीनता और अमानवीयता की हदें पार करने वाला मामला सामने आया है। ताजमहल देखने आया एक परिवार बुजुर्ग को कार में ही हाथ-पैर बांधकर छोड़ गया था। जब कुछ लोगों की नजर कार मे बंधे बुजुर्ग पर पड़ी तो हैरान रह गए। गाइडों की मौके पर भीड़ जुट गई। पुलिस को भी मामले की सूचना दी गई। जब तक पुलिस पहुंचती गाइडों ने ही कार का लॉक तोड़कर बुजुर्ग को बाहर निकाल लिया। उनकी हालत भी काफी खराब थी। पुलिस ने एंबुलेंस बुलाकर उन्हें अस्पताल के लिए रवाना किया गया। इसी बीच परिवार भी पहुंच गया। परिवार बुजुर्ग को अपने साथ लेकर चला गया। गुरुवार ताजमहल की पश्चिमी गेट पार्किंग में कुछ गाइडों ने कार के अंदर एक बुजुर्ग को बंद देखा। उनके हाथ पैर बंधे हुए थे। कार बंद होने के कारण उनकी हालत खराब हो रही थी। इस पर गाइडों ने वहां के पार्किंग कर्मचारियों को जानकारी दी। इसके साथ ही सभी ने मिलकर कार का लॉक तोड़ा और उन्हें बाहर निकाला। बुजुर्ग कुछ बोलने की स्थिति में नहीं थे। सूचना पर्यटन पुलिस को दी गई। पुलिस ने एंबुलेंस की मदद से बुजुर्ग को इलाज के लिए भेजा। उनके परिवार की तलाश भी शुरू की गई। बताया जा रहा है कि अगर थोड़ी देर और बुजुर्ग कार में रहते तो शायद उनका दम घुट जाता और मौत हो जाती। उनके एंबुलेंस से रवाना होते ही परिवार भी पहुंच गया। बुजुर्ग के किले तक पहुंचने तक बुजुर्ग के परिवार वाले आ गए। उन्होंने बुजुर्ग को अपने साथ ले लिया। परिवार ने बताया कि वह पहले से पैरालाइज हैं। इसलिए बांध के गए हुए थे। बुजुर्ग को परिवार वाले अपने साथ लेकर चले गए। कार में इस तरह से किसी इंसान को बांधकर ताजमहल देखने की पहले घटना सामने आई है। इससे पहले कई बार पर्यटक अपने साथ लाये गए कुत्तों को कार में बंद कर जाते हैं। कुछ समय पहले इसी तरह बांधे गए एक कुत्ते की मौत हो गई थी।

अपराध पर योगी का प्रहार: 8 वर्षों में यूपी में 30,000 अपराधी गिरफ्तार

लखनऊ  योगी सरकार की मजबूत कानून व्यवस्था देश ही नहीं विदेशों में भी सुर्खियों में है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पिछले आठ वर्षों में यूपी पुलिस जीरो टॉलरेंस नीति के तहत अपराध और अपराधियों पर लगातार ताबड़तोड़ कार्रवाई कर रही है। यही वजह है कि यूपी पुलिस ने वर्ष 2017 से लेकर अब तक प्रदेश में कुल 30 हजार से ज्यादा अपराधियों को मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किया, जबकि मुठभेड़ के दौरान 9 हजार से ज्यादा अपराधियों को पैर में गोली लगी। यूपी पुलिस ने अपराधियों की धरपकड़ के लिए अब तक 14 हजार से अधिक कार्रवाई की, जिससे प्रदेश में कानून का राज स्थापित हुआ। डीजीपी राजीव कृष्ण ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर अपराधियों पर नकेल कसने के लिए लगातार कार्रवाई की जा रही है। पिछले आठ वर्षों में यूपी पुलिस द्वारा अपराधियों की धरपकड़ के लिए 14,973 कार्रवाई की गई। इस दौरान 30,694 अपराधियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। पुलिस पर हमला करने वाले 9,467 अपराधियों के पैर में गोली लगी, जबकि 238 अपराधी मारे गए। प्रदेश में सबसे अधिक पश्चिम के मेरठ जोन में कार्रवाई की गई। यहां पर पुलिस ने 7,969 अपराधी गिरफ्तार किए, जबकि 2,911 घायल हुए। इसी तरह आगरा जोन में 5,529 अपराधी गिरफ्तार किए गए, जबकि 741 घायल हुए। वहीं, बरेली जोन में 4,383 अपराधी पकड़े गए और 921 घायल हुए। इसके अलावा वाराणसी जोन में 2,029 अपराधी अरेस्ट किए गए और 620 घायल हुए। डीजीपी ने बताया कि कमिश्नरेट में सबसे अधिक गौतमबुद्धनगर में 1,983 गिरफ्तार किए गए और 1,180 घायल हुए। गाजियाबाद कमिश्नरेट में 1,133 गिरफ्तार किए गए और 686 घायल हुए। इसके अलावा आगरा कमिश्नरेट में 1,060 अपराधी गिरफ्तार किए गए और 271 घायल हुए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश की सत्ता संभालते ही सबसे पहला लक्ष्य प्रदेश में कानून का राज स्थापित करना और अपराधियों को नेस्तनाबूद करना रखा। उनकी स्पष्ट चेतावनी थी कि अपराधियों के लिए उत्तर प्रदेश में कोई जगह नहीं है। वे अपराध छोड़ दें या प्रदेश छोड़ दें। इस दिशा में उठाए गए सख्त कदमों ने प्रदेश में कानून व्यवस्था को एक नई दिशा दी है। इसके लिए सीएम योगी ने न केवल पुलिस बल को अत्याधुनिक हथियारों और प्रशिक्षण से सुसज्जित किया, बल्कि उनके मनोबल को भी ऊंचा किया। पिछले आठ वर्षों की सख्त नीति और अभियान का ही नतीजा है कि आज उत्तर प्रदेश देश के सबसे सुरक्षित राज्यों में गिना जाने लगा है।

अनिरुद्धाचार्य ने अखिलेश पर साधा निशाना, बोले – द्वेष की भावना से नहीं होती राष्ट्र सेवा

लखनऊ समाजवादी पार्टी चीफ अखिलेश यादव और अनिरुद्धाचार्य के बातचीत का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। जिसमें अखिलेश यादव ने अनिरुद्धाचार्य से कहा था कि उनके रास्ते अलग-अलग हैं। अब इसे लेकर अनिरुद्धाचार्य ने सपा प्रमुख पर तंज कसा है। उन्होंने कहा है कि राजा अगर प्रजा के प्रति द्वेष रखेगा तो देश की सेवा कैसे कर पाएगा। कथावाचक अनिरुद्धाचार्य ने अखिलेश यादव पर तंज कस हुए कहा,"एक नेता ने रास्ते में हमसे पूछा कि भगवान का नाम क्या है, मैंने कहा कि भगवान के बहुत सारे नाम हैं आप बताओं आपकों कौन सा सुनना है। दरअसल जब कोई व्यक्ति सवाल करता है तो पहले एक चीज याद कर लेता है। जब आप वहीं बताएंगे तो उसे लगता है कि आप ठीक बता रहे हैं लेकिन वह नहीं बताया तो उसे लगेगा कि गलत बता रहे हैं। अगर कोई मां अपने बेटे से सवाल करे कि ये बताओ लेकिन नहीं बता पाया तो मां ये नहीं कहेगी कि तेरा रास्ता, अलग मेरा रास्ता अलग।" अनिरुद्धाचार्य ने व्यंग कसते हुए आगे कहा, "सोचिए वह नेता पूर्व सीएम रह चुके हैं। वह मुझसे कहते हैं कि आपका रास्ता अलग, मेरा रास्ता अलग। क्योंकि मैंने उनके पूछे प्रश्न का उत्तर उनके मन मुताबिक नहीं दिया। मैंने वहीं उत्तर दिया जो सच है। अगर आप लिखा नहीं मान रहे हैं तो आपसे कोई नहीं जीत सकता। सोचिए वह राजा होकर कह रहे हैं कि आप अलग हम अलग। राजा को चाहिए कि प्रजा को पुत्र की तरह प्यार करें। सोचिए कि जब राजाओं के अंदर इस तरह का द्वेष है। तो इन राजाओं से इस देश की कैसी सेवा करेंगे। इनके भीतर तो प्रजा के प्रति नफरत है। बोल रहे हैं कि तुम्हारा रास्ता अलग-हमारा रास्ता अलग। प्रेम इसको नहीं कहते हैं।" कथावाचक ने कहा, "यदि नहीं आता हमको, नहीं बता पाए आपके प्रश्न का उत्तर तो आप ही बता देते। मैंने पूछा कि आप ही बता दीजिए तो उन्होंने नहीं बताया। कहा कि आपके रास्ते अलग हमारे रास्ते अलग। क्या राजा का व्यवहार एक सामान्य व्यक्ति के साथ ऐसा होना सही है। अब देखिए जब सीएम सबसे श्रेष्ठ पद पर हैं और प्रजा के प्रति इतना द्वेष है तो आप सबको एक साथ लेकर कैसे चल सकते हैं।"  

आतंकी नेटवर्क पर बड़ी कार्रवाई: छांगुर बाबा का भतीजा सब्रोज गिरफ्तार

बलरामपुर  उत्तर प्रदेश के बलरामपुर में विवादों में घिरे जलालुद्दीन उर्फ छांगुर बाबा के नजदीकी लोगों पर सुरक्षा एजेंसियां लगातार शिकंजा कस रही हैं। गुरुवार देर रात 1 बजे स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने उनके भतीजे मोहम्मद सब्रोज को गिरफ्तार कर लिया। सब्रोज उतरौला थाना क्षेत्र के रेहरा माफी गांव का निवासी है, जहां छांगुर बाबा ने अपनी पत्नी को 2 बार चुनाव लड़वाया था। मिली जानकारी के मुताबिक, एसटीएफ की टीम गुरुवार रात लगभग 1 बजे उतरौला बस स्टॉप पर पहुंची, जहां सब्रोज मोटरसाइकिल पर खड़ा था। टीम ने उसे रोककर पूछताछ शुरू की और मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया। मोहम्मद सब्रोज का नाम पहले से ही एटीएस की एफआईआर में दर्ज था। इस गिरफ्तारी के बाद छांगुर बाबा के नेटवर्क के अन्य सहयोगियों के लिए मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। एसटीएफ पूरे मामले की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। एटीएस गवाह पर हमला इससे पहले अवैध धर्मांतरण के मामले में बयान ना बदलने पर छांगुर बाबा के गुर्गों ने एटीएस के गवाह हरजीत कश्यप पर हमला किया था। हरजीत को बुरी तरह से पीटा गया और जान से मारने की धमकी दी गई। पुलिस ने इस मामले में तीन आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। हरजीत कश्यप ग्राम रसूलाबाद के निवासी हैं और उन्होंने छांगुर पर जबरन धर्मांतरण कराने का आरोप लगाया था। हरजीत के अनुसार, छांगुर के गुर्गों रियाज, कमालुद्दीन और नव्वाब ने उन्हें धमकाते हुए कहा कि रसूलाबाद गांव पाकिस्तान जैसा है, और यहां रहकर मुसलमानों से बगावत करने पर उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। साथ ही धमकी दी कि योगी सरकार के बाद उनकी कार्रवाई की जाएगी। बयान देने के बाद हुई मारपीट हरजीत ने बताया कि उन्होंने 3 जुलाई को लखनऊ में छांगुर बाबा के खिलाफ जबरन धर्म परिवर्तन कराने के मामले में बयान दिया था। इसके बाद 7 जुलाई को वे दवा लेने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जा रहे थे, तभी उतरौला चौराहा के पास तीनों आरोपियों ने उन्हें रोककर पीटना शुरू कर दिया और 24 घंटे के अंदर लखनऊ जाकर बयान बदलने की धमकी दी। प्रभारी निरीक्षक उतरौला कोतवाली अवधेश राज सिंह ने बताया कि मामले की जांच जारी है और आरोपियों को जल्द गिरफ्तार किया जाएगा।   छांगुर के करीबी की तलाश एटीएस की टीम बीते मंगलवार रात गोंडा के धानेपुर क्षेत्र के रेतवागाड़ा गांव में छांगुर बाबा के एक करीबी की तलाश में पहुंची। जांच के दौरान रमजान नाम के शख्स का नाम सामने आया। वह कव्वाली कार्यक्रमों में ढोलक बजाता था और इसी सिलसिले में उसकी मुलाकात छांगुर से हुई थी। कहा जाता है कि छांगुर ने रमजान को धर्म परिवर्तन के लिए लोगों को तैयार करने की जिम्मेदारी दी थी। ग्रामीणों के अनुसार रमजान की 2024 में मौत हो गई। एटीएस ने रमजान के नाम वाले एक अन्य व्यक्ति के बारे में भी जानकारी जुटाई है। प्रशासन इस पूरे मामले में सतर्क है और छांगुर बाबा के खिलाफ कार्रवाई तेज कर रहा है।  

ग्राम प्रधान से लेकर मुख्यमंत्री तक बनेगा एकीकृत सिस्टम, यूपी में डिजिटल प्रशासन का नया मॉडल

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में योगी सरकार जल्द ऐसी तकनीकी व्यवस्था लागू करने जा रही है जिससे मुख्यमंत्री कार्यालय से लेकर ग्राम प्रधान तक और सभी विभाग एक ही नेटवर्क से जुड़ जाएंगे। वन स्टेट वन नेटवर्क योजना आईटी एंड इलेक्ट्रॉनिक विभाग तैयार कर रहा है। जिससे प्रदेश को तकनीकी रूप से सशक्त बनाया जा सकेगा। यह जानकारी बुधवार को आईटी एंड इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्री सुनील कुमार शर्मा ने दी। अपने सरकारी आवास पर पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि सचिवालय से लेकर जिला मुख्यालय और ग्राम सभा स्तर तक सभी संस्थाएं मजबूत डिजिटल नेटवर्क से जोड़ी जाएंगी। विभागों में बेहतर तालमेल होगा और कामकाज में तेजी के साथ पारदर्शिता भी बढ़ेगी। डेटा सुरक्षा और संचार व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए लागू की जा रही इस योजना के लिए तकनीकी विशेषज्ञों और विभिन्न एजेंसियों के साथ मंथन किया जा रहा है। राजधानी में एआई सिटी की स्थापना की जा रही उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के बढ़ते प्रयोग को देखते हुए राजधानी में एआई सिटी की स्थापना की जा रही है। जमीन आवंटन का कार्य किया जा रहा है और जल्द दूसरे शहरों में भी एआई सिटी स्थापित की जाएगी। इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग पालिसी भी लागू होने वाली है। मंत्री ने कहा कि इस नीति के तहत वे उपकरण और पुर्जे, जो अभी विदेशों से मंगाए जाते हैं, उन्हें अब उत्तर प्रदेश में ही तैयार किया जा सकेगा। इससे प्रदेश में निवेश बढ़ेगा और नई कंपनियां आएंगी, जिससे रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। मंत्री ने बताया कि योजना को अमली जामा पहनाने के लिए तकनीकी विशेषज्ञों और विभिन्न एजेंसियों से विचार-विमर्श किया जा रहा है। डाटा सुरक्षा और संचार व्यवस्था को मजबूत बनाना इस योजना का मुख्य उद्देश्य है। मंत्री ने जानकारी दी कि आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआइ) के बढ़ते उपयोग को देखते हुए लखनऊ में एआइ सिटी की स्थापना की जा रही है। इसके लिए जल्द ही जमीन आवंटन की प्रक्रिया पूरी होगी। इसके बाद प्रदेश के अन्य प्रमुख शहरों में भी एआइ सिटी विकसित की जाएगी। प्रदेश में जल्द ही इलेक्ट्रानिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग पालिसी भी लागू होने वाली है। मंत्री ने कहा कि इस नीति के तहत वे उपकरण और पुर्जे, जो अभी विदेशों से मंगाए जाते हैं, उन्हें अब उत्तर प्रदेश में ही तैयार किया जा सकेगा। इससे प्रदेश में निवेश बढ़ेगा और नई कंपनियां आएंगी, जिससे रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। वार्ता के दौरान सरकारी स्कूलों के विलय और धर्मांतरण से जुड़े सवालों पर मंत्री ने कहा कि विपक्ष अच्छे कार्यों में भी बाधा डालता है। उन्होंने आरोप लगाया कि धर्मांतरण मामले में सिर्फ छांगुर नाम का एक व्यक्ति नहीं, बल्कि पूरा गिरोह सक्रिय है, जिसे बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने सपा को परिवारवाद की पार्टी बताया और कहा कि भाजपा एक कार्यकर्ता आधारित लोकतांत्रिक पार्टी है, जो राष्ट्रहित में निर्णय लेती है। मंत्री सुनील कुमार शर्मा ने सपा पर हमला बोला उन्होंने कहा कि धर्मांतरण के कार्य में सिर्फ छांगुर ही नहीं बल्कि पूरा गिरोह सक्रिय है और किसी को भी बक्शा नहीं जाएगा। स्कूल मर्जर और अन्य मुद्दों पर उन्होंने विपक्ष को कटघरे में खड़ा किया और कहां की वह हर अच्छे कार्य में अवरोध पैदा करता है। सपा परिवारवादी पार्टी है और भाजपा कार्यकर्ताओं की पार्टी है ।

छांगुर बाबा का मेरठ कनेक्शन एयर होस्टेस बनने का था सपना, मॉडलिंग का दिया झांसा

उत्तर प्रदेश ATS ने छांगुर और नसरीन पर ले सकती है बड़ा फैसला, कई राज खुलने बाकी मास्टरमाइंड छांगुर बाबा का भतीजा सोहराब गिरफ्तार, आजमगढ़ में बड़ी कार्रवाई छांगुर बाबा का मेरठ कनेक्शन एयर होस्टेस बनने का था सपना, मॉडलिंग का दिया झांसा मेरठ उत्तर प्रदेश में धर्मांतरण रैकेट से जुड़े हाई-प्रोफाइल केस में जांच एजेंसियों ने शिकंजा कस दिया है. मामले की तह तक पहुंचने के लिए यूपी एटीएस अब मुख्य आरोपी छांगुर बाबा और उसकी साथी नसरीन का नार्को और पॉलीग्राफ टेस्ट कराने की तैयारी में है. सूत्रों के अनुसार, दोनों से हुई पूछताछ में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं. लेकिन कुछ अहम सवालों के जवाब अब तक अधूरे हैं, जिनकी गुत्थी सुलझाने के लिए यह टेस्ट जरूरी माना जा रहा है. एटीएस सूत्रों का कहना है कि छांगुर, नसरीन और उनके सहयोगी नवीन रोहरा ने पूछताछ में कई राज खोले हैं, लेकिन कई जानकारियां या तो अधूरी हैं या जानबूझकर भ्रम फैलाने वाली. ऐसे में एजेंसियों को शक है कि ये आरोपी सच्चाई छुपाने की कोशिश कर रहे हैं. अब तक चार गिरफ्तार यूपी धर्मांतरण के मामले में एटीएस ने अब तक चार लोगों को गिरफ्तार कर लिया है , जिसमें 5 जुलाई को छांगुर और उसकी कारखास नीतू को गिरफ्तार किया था. उसके बाद उनकी रिमांड मांगी गई थी. कोर्ट ने Ats को नीतू और छांगुर की 7 दिनों की PCR दी थी, जिसमें ये दोनों 10 जुलाई से लेकर 16 जुलाई तक ATS के पास थे. इस दौरान Ats ने इनसे तमाम अलग-अलग तरीके से पूछताछ भी है. इस पूछताछ में नीतू और छांगुर के बताए गए तथ्यों के अलावा नीतू के पति नवीन उर्फ जमालुद्दीन के बताए तथ्यों को भी खंगाला गया है जिसमें कई पहलू सामने है. तो वहीं कुछ पहलू भ्रमित करने वाले हैं , जिस कारण अब एटीएस उनका नार्को और पॉलीग्राफ टेस्ट करने की लिए सोच रही है. दूसरी ओर प्रवर्तन निदेशालय ने छांगुर के कई देशी और विदेशी खातों की जांच भी शुरू कर दी है. ईडी ने इस मामले में छापेमारी भी की है. मास्टरमाइंड छांगुर बाबा का भतीजा सोहराब गिरफ्तार, आजमगढ़ में बड़ी कार्रवाई उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले से छांगुर बाबा से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई। अवैध धर्मांतरण गिरोह के मास्टर माइंड छांगुर बाबा के भतीजे सोहराब को आजमगढ़ से गिरफ्तार कियाहै। ये कार्रवाई बुधवार देर रात यूपी एसटीेफ ने उतरौला से की है। सोहराब पर आजमगढ़ में धर्मांतरण कराने का आरोप लगा है। बता दें कि इससे पहले जलालुद्दीन उर्फ छांगुर बाबा और उसकी सहयोगी नीतू उर्फ नसरीन को यूपी एटीएस पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। इस मामले में मामले में अब तक 5 लोग गिरफ्तार किए जा चुके हैं छांगुर बाबा का मेरठ कनेक्शन एयर होस्टेस बनने का था सपना, मॉडलिंग का दिया झांसा दिल्ली और वेस्ट यूपी में धर्मांतरण कराने वाले छांगुर बाबा और उसके करीबी बदर अख्तर सिद्दीकी के नेटवर्क की पोल अब खुलती जा रही है। इस गैंग का मेरठ से भी पुराना कनेक्शन सामने आया है। मेरठ के सरूरपुर क्षेत्र के भूनी गांव की रहने वाली प्रिया त्यागी वर्ष 2019 में इसी गिरोह का शिकार बनी थी। वह दिल्ली में एयर होस्टेस का कोर्स कर रही थी, तभी इस्लामाबाद, लिसाड़ीगेट मेरठ निवासी बदर अख्तर सिद्दीकी के संपर्क में आई। बदर ने उसे मॉडलिंग और बेहतर जीवनशैली का झांसा देकर अपने जाल में फंसा लिया। कुछ ही समय बाद प्रिया लापता हो गई, जिसके बाद परिजनों ने सरूरपुर थाने में अपहरण की धारा में रिपोर्ट (मुकदमा संख्या 223/2019) दर्ज कराई। हालांकि, प्रिया बालिग थी, इसलिए कोर्ट ने उसे अपनी मर्जी से कहीं भी रहने की छूट दी। लेकिन 18 अक्टूबर 2019 को जब वह वापस घर लौटी, तो परिजनों और पुलिस को चौंका देने वाले खुलासे किए। प्रिया ने बताई बदर की हैवानियत प्रिया ने बताया कि बदर ने उसे जबरन नशे की लत लगवाई, कई बार सिगरेट से जलाया, भूखा रखा और धर्मांतरण का लगातार दबाव बनाया। यह वही तरीका था, जिसे अब छांगुर बाबा और बदर पर लगे ताजा आरोपों में दोहराया जा रहा है। उस समय भी प्रिया के पिता दर्शन त्यागी ने पुलिस को बताया था कि उनकी बेटी नोएडा की गौर सिटी में पढ़ाई कर रही थी, तभी बदर ने उसे निशाना बनाया। कई लड़कियों के गायब होने का आरोप प्रिया की वापसी के बाद, उसके परिजनों ने बदर अख्तर के खिलाफ कई अन्य युवतियों को गायब करने के भी आरोप लगाए थे। उन्होंने बताया था कि असिया नाज पुत्री कमर हुसैन निवासी चुड़ीवालान, दिल्ली भी बदर के संपर्क में आने के बाद लापता हो गई थी। पुलिस उसे आज तक तलाश नहीं सकी। इसके अलावा एक आशा नाम की लड़की भी लापता बताई गई थी, जिसका कोई सुराग नहीं मिला। वहीं अंतरा शर्मा नाम की युवती ने बदर से शादी की थी, लेकिन 2019 में कोर्ट से तलाक हो गया था। इन सभी मामलों में पुलिस की जांच उस वक्त निष्क्रिय रही, जिससे धर्मांतरण गैंग का पर्दाफाश छह साल पहले ही हो सकता था। ड्रग्स और ब्रेनवॉश का नेटवर्क छांगुर बाबा और बदर के नेटवर्क को लेकर अब जो खुलासे हो रहे हैं, वो साल 2019 की प्रिया कांड से मेल खाते हैं। युवतियों को पहले नशा देकर मानसिक रूप से कमजोर किया जाता था और फिर ब्रेनवॉश कर धर्मांतरण के लिए मजबूर किया जाता था। प्रिया और उसके पिता पहले ही इन तरीकों की जानकारी पुलिस को दे चुके थे, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। अब जब छांगुर और बदर के खिलाफ कई राज्यों में शिकंजा कस रहा है, तो मेरठ की यह पुरानी घटना इस नेटवर्क की गहराई और तैयारी को उजागर करती है। यह सवाल भी खड़ा होता है कि अगर 2019 में ही इस मामले को गंभीरता से लिया जाता, तो कितनी ही बेटियां बच सकती थीं।    

दो नए एक्सप्रेसवे और ई-चार्जिंग स्टेशन से सजेगा यूपी, जानिए किन जिलों को होगा फायदा

आगरा  उत्तर प्रदेश के आगरा शहर को दो नए-नए एक्सप्रेस का तोहफा मिला है। इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती संख्या को देखते हुए राष्ट्रीय भारतीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने बड़ा फैसला लेते हुए ग्वालियर और अलीगढ़ एक्सप्रेसवे को मंजूरी दी है। इन दोनों एक्सप्रेस का निर्माण दो महीने में शुरू हो जाएगा, जो अगले लगभग दो साल तक चलेगा। आगरा के लिए अच्छी बात यह है कि दोनों एक्सप्रेसवे यहीं से शुरू होंगे। इन दोनों एक्सप्रेसवे पर सफर करने वाले लोगों के लिए दोनों तरफ फूड प्लाजा, एक से दो प्रेट्रोल पंप और सीएनजी पंप होंगे।   एक्सप्रेसवे पर मिलेगी चार्जिंग की सुविधा एनएचएआई ने मौजूदा समय में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या में हो रही बढ़ोतरी को भी ध्यान रखा है और एक्सप्रेसवे पर चार्जिंग स्टेशन बनाने का फैसला किया है। एनएचएआई के अधिकारी ने खुद इसका कारण भी बताया है। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिक वाहन का प्रयोग करने वालों की संख्या तेजी से बढ़ रही है और हर सप्ताह नए-नए मॉडल पेश हो रहे हैं। यही वजह है कि हमने एक्सप्रेसवे चार्जिंग स्टेशन लगाने का फैसला किया गया है। बताया गया है कि एक चार्जिंग प्वॉइंट में एक समय में दो वाहन चार्ज हो सकेंगे, जिसमें 15 से 20 मिनट का समय लगेगा। छह लेन के होंगे दोनों एक्सप्रेसवे दोनों एक्सप्रेसवे छह लेन के होंगे, जिनका निर्माण एनएचएआई ग्वालियर और आगरा खंड द्वारा कराया जाएगा। ग्वालियर से रोहता, आगरा तक एक्सप्रेसवे के निर्माण पर 4200 करोड़ रुपये का खर्चा आएगा। इस दौरान चंबल नदी पर हैंगिंग ब्रिज भी बनेगा। जब एक्सप्रेसवे बनकर तैयार हो जाएगा तो आगरा से ग्वालियर की दूरी सिर्फ 88 किलोमीटर रह जाएगी, साथ ही सफर का समय भी घटकर सिर्फ डेढ़ घंटे का रह जाएगा। इस समय इस सफर को तय करने में ढाई घंटे लगते हैं। अलीगढ़ एक्सप्रेसवे की लागत 3400 करोड़ बात करें खंदौली से अलीगढ़ तक बनने वाले एक्सप्रेसवे की तो यह 64 किलोमीटर लंबा होने वाला है, जिसे यमुना एक्सप्रेस से भी जोड़ा जाएगा। जब यह बनकर तैयार हो जाएगा तो इससे लोगों को हाथरस और अलीगढ़ पहुंचना आसान हो जाएगा। इस एक्सप्रेसवे की लागत 3400 करोड़ बताई जा रही है, जिसका निर्माण अक्टूबर से शुरू होना है।

खुलासा : छांगुर बाबा नेपाल सीमा से सटे गांवों में धर्मांतरण के अड्डे खोलने की तैयारी कर रहा था

 बलरामपुर उत्तर प्रदेश के बलरामपुर में एटीएस की गिरफ्त में आए छांगुर बाबा को लेकर लगातार चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं. सूत्रों के मुताबिक, छांगुर नेपाल सीमा से सटे गांवों में इस्लामिक मूवमेंट फैलाने और धर्मांतरण के अड्डे खोलने की साजिश रच रहा था. इसके लिए उसने 46 गांवों के युवाओं को टारगेट किया था और एक पूरी टीम भी खड़ी कर ली थी.  छांगुर बाबा का मकसद सीमावर्ती युवाओं को कट्टर सोच और जिहाद की तरफ झुकाने का था, जिसके लिए वह जलसों में तकरीरें करता और परचे बांटकर उनकी मानसिकता समझने की कोशिश करता था. चिह्नित युवाओं को आर्थिक रूप से मजबूत करने के लिए वह उन्हें पैसों का लालच भी दे रहा था. सुरक्षा एजेंसियों का दावा है कि छांगुर ने इस्लामिक मूवमेंट फैलाने के लिए लगभग 10 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना बना रखी थी. विदेशों से उसके पास लगातार पैसे आने लगे थे और वह नेपाल में भी अपनी पैठ बनाने की कोशिश में जुटा था. साल 2020 के बाद वह आर्थिक रूप से बेहद मजबूत हो गया. वर्ष 2015 तक जो छांगुर पुरानी बाइक से अंगूठियां और नग बेचता था, वह अब लग्जरी गाड़ियों में घूमने लगा था. उसके करीबियों की संपत्तियां भी तेजी से बढ़ीं. एटीएस की जांच में सामने आया है कि छांगुर बाबा ने सरकारी जमीनों पर भी कब्जा करने का खेल शुरू कर दिया था. उतरौला क्षेत्र में तालाब, चरागाह, खलिहान की जमीनों पर उसकी नजर थी. तहसील कर्मियों की मिलीभगत से उतरौला के एक तालाब की जमीन अपने नाम करा ली थी और बाद में उसे नीतू रोहरा के नाम एक करोड़ रुपये में बेच दिया गया. नगर पालिका के अधिशाषी अधिकारी ने इस तालाब की जमीन पाटने की रिपोर्ट भी प्रशासन को भेजी थी. उतरौला में छांगुर बाबा ने दो जगहों पर कब्जे किए थे, जिनमें से एक कोठी प्रशासन ने गिरा दी है, जबकि दूसरी जगह को लेकर जांच जारी है. छांगुर बाबा के नेटवर्क में 18 अन्य लोगों को भी आरोपी बनाया गया है. अगस्त 2024 में इसके खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई थी, लेकिन करीब आठ महीने तक जांच ही चलती रही. अप्रैल 2025 में इसके बेटे और सहयोगी नवीन रोहरा की गिरफ्तारी के बाद छांगुर का नेटवर्क कमजोर पड़ने लगा और उसके करीबी उससे दूरी बनाने लगे. फिलहाल छांगुर एटीएस की रिमांड कस्टडी में है, जहां उससे पूछताछ जारी है. रिमांड की दो दिन की अवधि और बची है. एटीएस का मानना है कि पूछताछ में इससे और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं.