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विशेष आर्टिकल : बेटियों को सशक्त बनाने की राह: कन्या सुमंगला योजना की अनोखी कहानी

विशेष आर्टिकल : कन्या सुमंगला योजना: बेटियों के सपनों को पंख लगाने वाली क्रांतिकारी पहल लखनऊ उत्तर प्रदेश में महिलाओं और बालिकाओं के सशक्तिकरण की दिशा में मिशन शक्ति फेज-5.0 एक मील का पत्थर साबित हो रहा है। इस अभियान का अभिन्न हिस्सा है मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना, जो बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ के संकल्प को साकार करने वाली एक ऐसी योजना है। इस योजना ने न केवल कन्या भ्रूण हत्या जैसी कुरीतियों पर अंकुश लगाया है, बल्कि लाखों बेटियों को शिक्षा और आत्मनिर्भरता की राह दिखाई है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, योजना के तहत अब तक 26 लाख से अधिक बेटियों को लाभ पहुंचाया गया है, जो उत्तर प्रदेश को महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। योजना का उद्देश्य और संरचना: एक विस्तृत नजर मिशन शक्ति के स्वावलंबन स्तंभ के तहत संचालित कन्या सुमंगला योजना का मुख्य उद्देश्य बेटियों के जन्म से लेकर उच्च शिक्षा तक वित्तीय सहायता प्रदान करना है, ताकि परिवारों पर आर्थिक बोझ कम हो और बेटियां बिना रुकावट पढ़ सकें। योजना को छह चरणों में विभाजित किया गया है, जिसमें कुल 25,000 रुपये की धनराशि दी जाती है: • प्रथम चरण: बेटी के जन्म पर 5,000 रुपये (1 अप्रैल 2019 या उसके बाद जन्मी बेटियों के लिए)। • द्वितीय चरण: पूर्ण टीकाकरण पर 2,000 रुपये। • तृतीय चरण: कक्षा-1 में प्रवेश पर 3,000 रुपये। • चतुर्थ चरण: कक्षा-6 में प्रवेश पर 3,000 रुपये। • पंचम चरण: कक्षा-9 में प्रवेश पर 5,000 रुपये। • षष्ठम चरण: कक्षा-10/12 उत्तीर्ण करने पर 7,000 रुपये (स्नातक या 2 वर्षीय डिप्लोमा में प्रवेश के लिए)। पात्रता के मानदंड सरल हैं: लाभार्थी परिवार उत्तर प्रदेश का स्थायी निवासी हो, वार्षिक आय 3 लाख रुपये से कम हो, और परिवार में अधिकतम दो बेटियां लाभार्थी हो सकें। आवेदन ऑनलाइन (mksy.up.gov.in) या ऑफलाइन दोनों तरीकों से किया जा सकता है। योजना ने लिंगानुपात में सुधार लाया है और बाल विवाह जैसी प्रथाओं को कम किया है, जिससे उत्तर प्रदेश का लिंगानुपात राष्ट्रीय औसत से बेहतर हो गया है। प्रेरणादायक कहानी: वाराणसी की प्रिया – योजना की जीवंत मिसाल कन्या सुमंगला योजना की सच्ची ताकत तो उसके लाभार्थियों की सफलता कहानियों में झलकती है। ऐसी ही एक प्रेरक कहानी है वाराणसी की प्रिया सिंह की, जो एक साधारण किसान परिवार से ताल्लुक रखती हैं। प्रिया का जन्म 2020 में हुआ, जब उनके परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर थी कि बेटी की पढ़ाई का खर्च उठाना मुश्किल था। लेकिन मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना ने उनके परिवार को नई उम्मीद दी। प्रिया को योजना के पहले चरण में जन्म पर 5,000 रुपये मिले, जिससे परिवार ने टीकाकरण और पोषण पर खर्च किया। कक्षा-1 में प्रवेश पर 3,000 रुपये से स्कूल फीस और किताबें खरीदी गईं। कक्षा-6 में 3,000 रुपये ने यूनिफॉर्म और स्टेशनरी का इंतजाम किया, जबकि कक्षा-9 में 5,000 रुपये ने अतिरिक्त ट्यूशन की सुविधा प्रदान की। अब कक्षा-10 उत्तीर्ण करने के बाद उन्हें 7,000 रुपये मिल चुके हैं, जिसका उपयोग आईएएस की तैयारी के लिए कोचिंग में किया जा रहा है। प्रिया बताती हैं, "यह पैसा मेरे लिए सिर्फ धन नहीं, बल्कि सपनों का ईंधन है। योजना ने मुझे साबित किया कि बेटी भी परिवार का सहारा बन सकती है।" आज प्रिया न केवल अपनी कक्षा में टॉपर हैं, बल्कि गांव की अन्य लड़कियों को पढ़ाई के लिए प्रेरित भी कर रही हैं। उनकी कहानी मिशन शक्ति के उस विजन को दर्शाती है, जहां हर बेटी एक भविष्य की नारी शक्ति है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का दूरदर्शी नेतृत्व: तारीफ के काबिल योगदान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दूरदृष्टि के बिना कन्या सुमंगला योजना इतनी सफल न होती। उन्होंने 25 अक्टूबर 2019 को योजना का उद्घाटन किया और इसे मिशन शक्ति का मजबूत स्तंभ बनाया। हाल ही में मिशन शक्ति 5.0 के लॉन्च पर लखनऊ में दिए गए अपने भाषण में सीएम योगी ने कहा, "बेटी के जन्म से स्नातक तक 25,000 रुपये का पैकेज देकर हम नारी शक्ति को मजबूत कर रहे हैं। यह योजना बेटियों को आत्मनिर्भर बनाएगी और समाज की कुरीतियों को जड़ से उखाड़ फेंकेगी।" उनके नेतृत्व में योजना ने 26 लाख बेटियों को जोड़ा, जो एक रिकॉर्ड है। योगी जी का यह प्रयास न केवल प्रशासनिक कुशलता का प्रतीक है, बल्कि संवेदनशील शासन का भी उदाहरण। उन्होंने नवरात्रि के कन्या पूजन के दौरान भी जोर दिया कि "कन्या पूजन से हम भविष्य की नारियों को सम्मान दे रहे हैं, और कन्या सुमंगला जैसी योजनाएं इसे साकार कर रही हैं।" योगी आदित्यनाथ का यह समर्पण उत्तर प्रदेश को 'बेटी-रक्षक' राज्य बनाने में मीलों आगे ले गया है। भाजपा सरकार का सराहनीय कदम: महिला सशक्तिकरण की नई मिसाल भाजपा सरकार के इस कदम की सराहना किए बिना न्याय नहीं होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ' अभियान को मजबूत करने वाली यह योजना उत्तर प्रदेश में भाजपा शासन की प्राथमिकता को दर्शाती है। गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए वरदान साबित हुई कन्या सुमंगला ने न केवल आर्थिक सहायता दी, बल्कि सामाजिक परिवर्तन भी लाया। सरकार ने योजना को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाकर पारदर्शिता सुनिश्चित की, जिससे भ्रष्टाचार मुक्त वितरण संभव हुआ। यह कदम नारी सम्मान और समानता की दिशा में भाजपा की प्रतिबद्धता का प्रमाण है, जो पूरे देश के लिए प्रेरणा स्रोत बनेगा। निष्कर्ष: योगी सरकार की दूरदर्शी सोच से सशक्त बेटियां, समृद्ध उत्तर प्रदेश मिशन शक्ति और कन्या सुमंगला योजना मिलकर उत्तर प्रदेश को एक ऐसा राज्य बना रही हैं, जहां हर बेटी सुरक्षित, शिक्षित और आत्मनिर्भर हो। प्रिया जैसी लाखों कहानियां साबित करती हैं कि यह योजना सिर्फ कागजी नहीं, बल्कि जीवन बदलने वाली है। योगी आदित्यनाथ सरकार की यह पहल न केवल प्रशंसनीय है, बल्कि ऐतिहासिक भी है। • 2017 से पहले की अराजकता को याद करें, जब बेटियां घर से बाहर निकलने में डरती थीं। आज योगी सरकार ने महिला पुलिस बीट ऑफिसर, पिंक पेट्रोलिंग, महिला हेल्प डेस्क और 1090 हेल्पलाइन जैसे ठोस कदम उठाकर सुरक्षा का मजबूत कवच तैयार किया है। • कन्या सुमंगला योजना ने 26 लाख बेटियों को सीधे वित्तीय सहायता दी, जिससे लिंगानुपात में 50 अंकों का सुधार हुआ। • डिजिटल पारदर्शिता के जरिए हर पैसा सही हाथों तक पहुंच रहा है … Read more

गंगा एक्सप्रेसवे का निर्माण दिसम्बर तक पूरा करने का लक्ष्य, मुख्यमंत्री ने दिए गति बढ़ाने के निर्देश

उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था और औद्योगिक तरक्की की रीढ़ हैं एक्सप्रेसवे: मुख्यमंत्री गंगा एक्सप्रेसवे का निर्माण दिसम्बर तक पूरा करने का लक्ष्य, मुख्यमंत्री ने दिए गति बढ़ाने के निर्देश मुख्यमंत्री ने की यूपीडा के परियोजनाओं की समीक्षा, कहा समयबद्धता और गुणवत्ता सुनिश्चित हो मेरठ-हरिद्वार, नोएडा-जेवर, चित्रकूट-रीवा और विंध्य-पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे के रूट पर हुई गहन चर्चा, मुख्यमंत्री ने एनएचएआई के साथ रूट समन्वय पर दिया बल डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के सभी नोड्स पर स्किल डेवलपमेंट सेंटर स्थापित होंगे: मुख्यमंत्री भूमि आवंटन के तीन वर्ष में निवेश न होने पर आवंटन रद्द किया जाए: मुख्यमंत्री लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को उत्तर प्रदेश इंडस्ट्रियल एक्सप्रेसवे डेवलपमेंट अथॉरिटी (यूपीडा) की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में कहा कि एक्सप्रेसवे केवल सड़कों का जाल नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था और औद्योगिक भविष्य की रीढ़ हैं। उन्होंने निर्देश दिया कि गंगा एक्सप्रेसवे का निर्माण कार्य दिसम्बर तक हर हाल में पूरा कराने के लक्ष्य के साथ तेज गति से आगे बढ़ाया जाए, ताकि राज्य के पश्चिमी और पूर्वी अंचलों के बीच सहज कनेक्टिविटी स्थापित हो सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्येक परियोजना की प्रगति की साप्ताहिक समीक्षा हो और कार्य की गुणवत्ता पर किसी प्रकार का समझौता न हो। बैठक में गंगा एक्सप्रेसवे के विस्तार स्वरूप प्रस्तावित मेरठ-हरिद्वार लिंक एक्सप्रेसवे, नोएडा-जेवर लिंक एक्सप्रेसवे, चित्रकूट-रीवा लिंक एक्सप्रेसवे तथा प्रयागराज, मिर्जापुर, वाराणसी, चंदौली और सोनभद्र तक प्रस्तावित विंध्य एक्सप्रेसवे व विंध्य-पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे के रूट पर विस्तृत चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन नए एक्सप्रेसवे की योजना बनाते समय भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) द्वारा प्रस्तावित एक्सप्रेसवे और हाइवे नेटवर्क का पूरा ध्यान रखा जाए, ताकि दोहराव से बचते हुए राज्य में एकीकृत और समन्वित सड़क तंत्र विकसित हो सके। मुख्यमंत्री ने डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर से जुड़े सभी नोड्स (लखनऊ, कानपुर, झांसी, आगरा, अलीगढ़ और चित्रकूट) में स्किल डेवलपमेंट सेंटर की स्थापना के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन केंद्रों के माध्यम से स्थानीय युवाओं को तकनीकी प्रशिक्षण देकर रक्षा उद्योग से जोड़ना चाहिए, जिससे रोजगार सृजन के साथ ही क्षेत्रीय आत्मनिर्भरता को बल मिलेगा। बैठक में बताया गया कि डिफेंस कॉरिडोर के लिए अब तक लगभग 30,819 करोड़ के निवेश प्रस्ताव मिल चुके हैं। 5039 एकड़ भूमि अधिग्रहीत की जा चुकी है। विभिन्न कंपनियों द्वारा कार्य प्रारंभ भी किया जा चुका है। मुख्यमंत्री ने भूमि आवंटन नीति पर विशेष बल देते हुए कहा कि भूमि आवंटन के तीन वर्ष के भीतर यदि निवेशक द्वारा यथोचित उपयोग नहीं किया जाता है तो ऐसा आवंटन स्वतः निरस्त किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि भूमि उपयोग की निगरानी की पारदर्शी व्यवस्था बनाई जाए और निवेशक को केवल वास्तविक प्रगति की स्थिति में ही आगे की सुविधाएँ दी जाएँ। बैठक में यह भी बताया गया कि एक्सप्रेसवे के किनारे विकसित हो रहे औद्योगिक क्लस्टर और लॉजिस्टिक पार्कों में निवेश आकर्षित करने के लिए यूपीडा ने बिजली, जलापूर्ति, ट्रक टर्मिनल और हेल्थ-इमरजेंसी सुविधाओं की व्यवस्था हेतु समयबद्ध योजना बनाई है।

चुनाव से पहले मायावती की अपील: मुस्लिम वोट बसपा को दें, तभी बीजेपी को रोका जा सकता है

लखनऊ बहुजन समाज पार्टी (बसपा) अध्यक्ष मायावती ने बुधवार को कहा कि मुस्लिम समाज को एकजुटता के साथ समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस के बजाय सीधे बहुजन समाज पार्टी (बसपा) का समर्थन करना चाहिये ताकि भाजपा की घातक राजनीति को चुनाव में हराया जा सके। उन्होंने कहा कि सपा के समर्थन में मुस्लिम समाज के एकतरफा वोट देने के बावजूद वह (सपा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को हराने में विफल रही। बसपा नेता मायावती ने पार्टी के जनाधार को बढ़ाने के लिये बुधवार को यहां ‘बसपा मुस्लिम समाज भाईचारा संगठन’ की विशेष बैठक की अध्यक्षता की तथा मुस्लिम समाज को बसपा में जोड़ने के लिए जरूरी दिशा-निर्देश दिये। मायावती ने कहा,‘‘वर्ष 2022 के पिछले विधानसभा चुनाव तथा उससे पहले के चुनाव से यह पूरी तरह से स्पष्ट है कि उप्र में मुस्लिम समाज का पूरे तन, मन, धन से जबरदस्त समर्थन मिलने के बावजूद समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पार्टी भाजपा को हराने में विफल रहीं। इसके विपरीत बसपा ने मुस्लिम समाज का काफी कम समर्थन पाकर भी भाजपा को परास्त करने में सफल रही और वर्ष 2007 में बसपा की बहुमत के साथ सरकार बनी।’’ पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि सपा और कांग्रेस, दोनों ने ऐतिहासिक रूप से ‘दलित-विरोधी, पिछड़ा-विरोधी और मुस्लिम-विरोधी’ राजनीति की है। उन्होंने कहा कि उनकी ‘गलत नीतियों और गतिविधियों’ के कारण ही उत्तर प्रदेश में भाजपा मजबूत हुई है। मायावती ने कहा, ‘‘न केवल 2022 के विधानसभा चुनाव में, बल्कि लगभग हर चुनाव में, इन पार्टियों – सपा और कांग्रेस – ने भाजपा को हराने के लिए नहीं, बल्कि बसपा को नुकसान पहुंचाने के लिए छल-कपट समेत हर संभव हथकंडा अपनाया। एकतरफा मुस्लिम वोट पाने के बावजूद, वे भाजपा को रोकने में नाकाम रहे। मुस्लिम समुदाय को इस सच्चाई को जल्द से जल्द समझ लेना चाहिए।’’ मुख्यमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल को याद करते हुए मायावती ने कहा, ‘‘एक पार्टी और एक सरकार के रूप में, बसपा ने मुसलमानों को हर स्तर पर सुरक्षा, संरक्षा और उचित प्रतिनिधित्व की गारंटी देकर उनका वास्तविक कल्याण सुनिश्चित किया। हमने उनके जीवन, संपत्ति और आस्था की रक्षा के लिए उत्कृष्ट कानून-व्यवस्था प्रदान की और जातिवाद और सांप्रदायिकता पर काफी हद तक अंकुश लगाने का काम किया।’’ उन्होंने आगे कहा कि बसपा सरकार ऐसी पहली सरकार थी जिसने अन्याय, अराजकता और आपराधिक तत्वों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया और पीड़ितों को न्याय सुनिश्चित करने के लिए काम किया। उन्होंने जोर देकर कहा, ‘‘हमने उत्तर प्रदेश को दंगों, शोषण, अन्याय और भय से मुक्त बनाया, जबकि अन्य दलों के बड़े-बड़े दावे खोखले साबित हुए क्योंकि उनकी कथनी और करनी में बहुत फर्क है।’’ मायावती ने कहा, ‘‘दलित, आदिवासी, पिछड़ा वर्ग, मुस्लिम और अन्य धार्मिक अल्पसंख्यक समुदाय के लाखों लोग बसपा के ‘बहुजन समाज’ के अभिन्न अंग हैं। पार्टी का मिशन राजनीतिक सशक्तिकरण के माध्यम से इन वंचित और उपेक्षित समुदायों का उत्थान करना है, ताकि वे संविधान के मानवीय और कल्याणकारी सिद्धांतों के अनुसार सम्मान और आत्मसम्मान का जीवन जी सकें, जो भारत को वास्तव में महान बनाने के लिए आवश्यक है।’’ बैठक में मुस्लिम समाज भाईचारा संगठन के पदाधिकारियों के साथ-साथ उत्तर प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष एवं सभी जिलाध्यक्ष व मंडल प्रभारी भी उपस्थित थे, जिन्हें निर्वाचन आयोग द्वारा विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से सम्बन्धित दिशा-निर्देशों के संबंध में भी अवगत कराया गया। बसपा अध्यक्ष ने पार्टी नेताओं को बूथ स्तर पर यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि किसी भी पात्र मतदाता का नाम सूची से बाहर ना रहे। उन्होंने पार्टी नेताओं को निर्देश दिया कि वे उन लोगों की मदद करें जिनके नाम सूची में नहीं हैं और उनके निर्धारित प्रपत्र भरकर आवश्यक दस्तावेज संलग्न करें ताकि उनका नाम सूची में शामिल हो सके। मायावती ने मुख्यमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान मुसलमानों के कल्याण के लिए अपनी सरकार द्वारा की गई विभिन्न पहलों का भी विवरण दिया।  

बिहार में राजद और कांग्रेस का कार्यकाल कलंक से कम नहींः सीएम योगी

बिहार विधानसभा चुनाव उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने शाहपुर विधानसभा में की जनसभा, भाजपा प्रत्याशी राकेश रंजन ओझा के पक्ष में कमल खिलाने की अपील  2005 से पहले बिहार अराजकता, गुंडागर्दी व माफियाराज का शिकार हो गया था, 20 वर्ष में अथक परिश्रम कर नीतीश सरकार ने उससे उभाराः मुख्यमंत्री  सीएम योगी का कटाक्ष- यूपी में माफिया की छाती पर जब बुलडोजर दौड़ता है तो सपा वाले फातिहा पढ़ने चले जाते हैं भोजपुर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को दूसरी रैली शाहपुर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी राकेश रंजन ओझा के पक्ष में की। सीएम ने स्थानीय भाषा में संवाद की शुरुआत की और मतदाताओं से कमल खिलाने की अपील की। यहां उन्होंने विपक्षी दलों (राजद, कांग्रेस) को खूब धोया। सीएम ने कहा कि इंद्रदेव के आशीर्वाद से यह तय हो गया है कि फिर से एनडीए सरकार बिहार में बनेगी।  योगी के निशाने पर रही कांग्रेस व राजद   सीएम योगी ने कांग्रेस व राजद को निशाने पर रखा। बोले कि इन लोगों ने विकास कार्यों को पूरा नहीं किया, क्योंकि जो पशुओं का चारा खा जाए, वह मनुष्य का हक भी डकार जाता है। आज मोदी जी के नेतृत्व में सबका साथ, सबका विकास के भाव के साथ हर नौजवान, गरीब, किसान, माता-बहन को योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है। मोदी जी के कार्यकाल में 25 करोड़ लोग गरीबी रेखा से उबरकर स्वावलंबन के पथ पर आगे बढ़े हैं। अब बिहार से पलायन नहीं होता, बल्कि यहां से निकले इंजीनियर बिहार को प्रगति पथ पर आगे बढ़ा रहे हैं। सीएम ने बिहार की प्रतिभा की सराहना की।बोले कि यहां के नौजवानों में ईश्वर प्रदत्त बुद्धि है। थोड़ा सा प्लेटफॉर्म मिले तो बिहार का नौजवान दुनिया को अपनी बुद्धि से आकर्षित रखने का सामर्थ्य रखता है। देश में जहां भी बिहार के युवाओं ने कार्य किया, अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है।  राजद व कांग्रेस के समय भगवान भरोसे हो गई थी बेटी-बहन की सुरक्षा  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि बिहार पर भारत का हर नागरिक गौरव की अनुभूति करता है। सीएम ने बिहार की धरती के महापुरुषों, लोकतंत्र सेनानियों का जिक्र किया और कहा कि यहां का अतीत गौरवशाली रहा, लेकिन राजद का 15 वर्ष और उससे पहले कांग्रेस का कार्यकाल कलंक से कम नहीं है। इस दौरान बिहार के नागरिकों को पहचान के संकट से गुजरना पड़ता था। नौजवान पलायन,  किसान आत्महत्या,  व्यापारी डरा-सहमा रहता था और बेटी-बहन की सुरक्षा भगवान भरोसे हो गई थी। बिहार ने जब 2005 में अंगड़ाई ली और नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए सरकार बनी तो माफिया की उल्टी गिनती शुरू हो गई। बिहार नई दिशा की ओर आगे बढ़ा। बिहार में आज वह सब कुछ है, जो 50 वर्ष पहले हो जाना चाहिए। यहां कनेक्टिविटी, बाढ़ प्रबंधन, स्कूली शिक्षा, मेडिकल, इंजीनियरिंग कॉलेज समेत गरीबों के लिए अनेक योजनाएं हैं।  2005 से पहले अराजकता व गुंडागर्दी की चपेट में आकर माफियाराज का शिकार हो गया था बिहार  मुख्यमंत्री ने कहा कि 2005 के पहले परिवारवाद का दंश झेल रहा बिहार अराजकता व गुंडागर्दी की चपेट में आकर माफियाराज का शिकार हो गया था, लेकिन 20 वर्ष में अथक परिश्रम कर नीतीश सरकार ने उसे उभारने में बड़ी मदद की। आज बिहार पर कोई प्रश्न नहीं खड़ा करता। जो बिहार के नागरिकों की आकांक्षा है, आज यहां वह सब कुछ है। उन्होंने अपील की कि बिहार के विकास में चल रही रफ्तार थमनी नहीं चाहिए। डबल इंजन सरकार बुलेट ट्रेन की स्पीड से बिहार की प्रगति को बढ़ा सके, इसके लिए आपका आह्वान करता हूं।  राम मंदिर का विरोध करती थी कांग्रेस, राजद व सपा  सीएम योगी ने कहा कि बिहार में आज विकास व विरासत भी है। राम-कृष्ण-शिव, बाबा महेंद्र नाथ, महर्षि विश्वामित्र,  महात्मा बुद्ध, बाबू जगजीवन राम, डॉ. राजेंद्र प्रसाद की परंपरा ही हमारी विरासत है। सीएम ने बिहारवासियों से पूछा कि राम मंदिर बनने से आप खुश हैं, जवाब आया हां। सीएम ने कहा कि कांग्रेस, राजद व यूपी में इनका पार्टनर समाजवादी पार्टी राम मंदिर का विरोध कर रहे थे। यह लोग अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण नहीं करा पाते। कांग्रेस कहती थी कि राम हुए ही नहीं, राजद ने कहा कि हम मंदिर नहीं बनने देंगे। सपा रामभक्तों पर गोली चलाती थी। हम तब भी कहते थे कि गोली चले या डंडा, रामलला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे। आज मंदिर बन गया।  जनसभा स्थल पर बुलडोजर देख बोले योगी- यूपी में यह माफिया की छाती पर दौड़ता है जनसभा स्थल पर बुलडोजर देख सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि एनडीए की भाजपा सरकार जो कहती है, करके दिखाती है। हमने कहा था कि माफिया राज का अंत करेंगे और किया भी। यूपी में माफिया की छाती पर बुलडोजर दौड़ता है तो सपा व उसके पार्टनर्स को सिर्फ फातिहा पढ़ने का अवसर मिलता है। बिहार भी जंगलराज से उभरकर प्रगति के नए प्रतिमान को स्थापित कर रहा है। योगी ने अपील की कि बिहार जिस दिशा में बढ़ा है, वह गति रूकनी, थमनी, झुकनी नहीं चाहिए।

‘वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था’ लक्ष्य की दिशा में बढ़ रहे कौशल मिशन के कदम

‘वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था’ के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में चल रहे कौशल विकास कार्यक्रमों की प्रगति पर हुई चर्चा लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार युवाओं के कौशल विकास, आत्मनिर्भरता और स्थानीय रोजगार को प्राथमिकता देते हुए ठोस कदम उठा रही है। योगी सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश का हर युवा अपने कौशल के बल पर रोजगार या स्वरोजगार से जुड़कर विकसित उत्तर प्रदेश, विकसित भारत के संकल्प को साकार करे। सरकार के प्रयासों से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वोकल फॉर लोकल और स्किल इंडिया मिशन को राज्य स्तर पर नई गति मिल रही है। प्रदेश के व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन मुख्यालय, अलीगंज, लखनऊ में समीक्षा बैठक की। बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था’ लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में चल रहे कौशल विकास कार्यक्रमों की प्रगति पर चर्चा हुई। अधिक से अधिक युवा आईटीआई से जोड़े जाएं मंत्री अग्रवाल ने कहा कि योगी सरकार के प्रयासों से आईटीआई से पासआउट छात्रों को देश की अग्रणी कंपनियों में बेहतर प्लेसमेंट मिल रहा है, जिससे प्रदेश के युवाओं में कौशल शिक्षा को लेकर उत्साह बढ़ा है। उन्होंने निर्देश दिए कि इन सफलताओं का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए ताकि अधिक से अधिक युवा आईटीआई संस्थानों में प्रवेश लेकर अपनी रुचि के अनुसार कोर्स पूरा करें और रोजगार एवं स्वरोजगार से जुड़ सकें। छात्रों को औद्योगिक भ्रमण कराया जाए उन्होंने कहा कि हर जिले में विभिन्न उद्योगों से समन्वय स्थापित कर छात्रों का औद्योगिक भ्रमण (इंडस्ट्री विजिट) कराया जाए और उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षण एवं प्लेसमेंट सुनिश्चित किया जाए। इसके लिए मिशन द्वारा एक इंडस्ट्री विजिट कैलेंडर और टाइम-टेबल तैयार किया जाएगा। मंत्री अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि योगी सरकार उद्योगों को कौशल विकास मिशन और आईटीआई संस्थानों से जोड़ने के लिए ठोस पहल कर रही है, ताकि छात्रों को उद्योगों की वास्तविक आवश्यकताओं के अनुरूप प्रशिक्षण मिल सके और रोजगार के अधिक अवसर उत्पन्न हों। उन्होंने स्किल मित्र पोर्टल पर छात्रों की प्लेसमेंट स्थिति अद्यतन रखने और कोर्स को इंडस्ट्री डिमांड बेस्ड बनाने के निर्देश दिए। प्रत्येक माह की 21 तारीख को प्लेसमेंट ड्राइव सरकार के निर्देशानुसार सभी नोडल आईटीआई संस्थान प्रत्येक माह की 21 तारीख को प्लेसमेंट ड्राइव आयोजित करेंगे। इन ड्राइव्स में डेलॉइट इंडिया की महत्वपूर्ण भूमिका होगी, जो कंपनियों की भागीदारी सुनिश्चित करेगा। अब तक Subros Ltd., Creature Industries, Dixon Technologies, Havells, Pepsico और Sona BLW जैसी प्रमुख कंपनियों में आईटीआई छात्रों का चयन और प्लेसमेंट हुआ है। इसके अलावा Gyan Dairy, Alpha Engineers (TATA Motors Ancillary), Mohannah Enterprises, Kashi Industries और Avionics Sparrow जैसी इकाइयों में औद्योगिक भ्रमण कराए गए, जिससे छात्रों को प्रत्यक्ष औद्योगिक अनुभव प्राप्त हुआ। विभिन्न संस्थाओं के साथ योगी सरकार लगातार कर रही साझेदारी  बैठक में यह भी बताया गया कि ऑटोमोटिव स्किल्स डेवलेपमेंट काउंसिल (ASDC), फर्नीचर एंड फिटिंग सेक्टर स्किल काउंसिल (FFSC) तथा ज्ञान डेयरी जैसी संस्थाओं के साथ योगी सरकार लगातार साझेदारी कर रही है। नोएडा, गोरखपुर और सहारनपुर में फर्नीचर सेक्टर के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) स्थापित करने की दिशा में कार्य तेजी से प्रगति पर है। बैठक में प्रमुख सचिव डॉ. हरि ओम, मिशन निदेशक पुलकित खरे, अपर निदेशक प्रिया सिंह, विभागीय अधिकारीगण तथा डेलॉइट इंडिया के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

20 साल जेल काटने के बाद लौटा था घर, नीतीश कटारा केस का दोषी सुखदेव सड़क दुर्घटना में मरा

कुशीनगर करीब 23 साल पहले देश की सबसे चर्चित आपराधिक घटनाओं में से एक नीतीश कटारा हत्याकांड के दोषी सुखदेव यादव उर्फ पहलवान की एक सड़क हादसे में मौत हो गई है। यह हादसा, मंगलवार की रात दस बजे के आसपास यूपी के कुशीनगर के बघौचघाट मोड़ पर हुआ। एक तेज रफ्तार स्कार्पियो की चपेट में आकर एक बाइक पर सवार तीन लोगों में से एक की मौके पर मौत हो गई। जबकि दो लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने स्कार्पियो को कब्जे में लेते हुए दोनों घायलों को सीएचसी पहुंचाया जहां से जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। बाद में पता चला कि हादसे में जिस शख्स की मौत हुई है वह 1992 के देश के चर्चित नीतीश कटारा हत्याकांड में 20 साल की सजा काटकर आया सुखदेव यादव था। सुखदेव कुछ महीने पहले ही घर आया था। कुशीनगर के चौराखास थाना क्षेत्र के तरुवनवा के कुम्भिया टोला का रहने वाला सुखदेव यादव पुत्र विश्वनाथ यादव (उम्र-55 साल) अपने ही गांव के विजय गुप्ता (उम्र-45 साल) और भागवत सिंह (उम्र-50 साल) के साथ मंगलवार को किसी रिश्तेदारी में गया थे। वहां से तीनों एक ही बाइक पर देर रात वापस घर लौट रहे थे। इसी दौरान फाजिलनगर कस्बे के बघौचघाट मोड़ पर तेज गति आ रहे स्कार्पियो की चपेट में आ गए। इस हादसे में सुखदेव यादव की मौके पर ही मौत हो गई। सूचना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने दोनों घायलों को सीएचसी फाजिलनगर पहुंचाया जहां प्राथमिक उपचार के बाद दोनों को जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। घटना के बाद ठोकर मारने वाला वाहन डिवाइडर से टकरा गया। मृतक सुखदेव यादव देश के चर्चित कांड नीतीश कटारा की हत्या के जुर्म में 20 साल की सजा काटने के बाद चार महीने पहले रिहा होकर घर आया था। बता दें कि इस मामले को लेकर लंबी कानूनी प्रक्रिया चली और जब कोर्ट ने हत्या में सजा काट चुके दोषियों की रिहाई का आदेश दिया तो नितीश कटारा की मां ने इसके विरोध भी किया था। इस सम्बन्ध में चौकी प्रभारी मधुरिया ब्रह्मा उपाध्याय ने बताया कि ठोकर मारने वाला वाहन पुलिस के कब्जे में है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। तहरीर मिलने पर मुकदमा दर्ज कर अन्य विधिक कार्रवाई की जाएगी। विकास यादव के साथ सह दोषी था सुखदेव नीतीश कटारा हत्याकांड में पूर्व मंत्री डीपी यादव के बेटे विकास यादव और उनके चचेरे भाई विशाल यादव को 25 साल की जेल की सजा मिली थी। जबकि सह-दोषी सुखदेव यादव को इस मामले में 20 साल के कारावास की सजा सुनाई गई थी। तीनों पर एक विवाह समारोह से नीतीश कटारा का अपहरण करने और फिर विकास की बहन भारती यादव के साथ उसके कथित संबंधों के कारण उसकी हत्या करने का दोषी ठहराया गया था ।  

एथेनॉल उत्पादन व गन्ना क्षेत्रफल में उत्तर प्रदेश देश में प्रथम, किसान हित में सरकार के ठोस कदम

गन्ना किसानों को योगी सरकार का बड़ा उपहार, गन्ना मूल्य ₹30 प्रति कुन्तल बढ़ा पेराई सत्र 2025-26 में अगेती गन्ना ₹400, सामान्य ₹390 प्रति कुन्तल निर्धारित गन्ना मूल्य वृद्धि से किसानों को होगा ₹3,000 करोड़ का अतिरिक्त भुगतान गन्ना किसान केवल उत्पादक नहीं, बल्कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था के सशक्त स्तंभ हैं : लक्ष्मी नारायण चौधरी योगी सरकार में अब तक ₹2.90 लाख करोड़ का रिकॉर्ड भुगतान, पिछली सरकारों से ₹1.42 लाख करोड़ अधिक प्रदेश में संचालित 122 चीनी मिलें, पारदर्शी नीतियों से उद्योग में आया ₹12,000 करोड़ निवेश 8 वर्षों में 4 नई चीनी मिलें स्थापित, 6 पुनः शुरू, 42 में क्षमता विस्तार ‘स्मार्ट गन्ना किसान’ प्रणाली ने खत्म किया बिचौलियों का राज, भुगतान सीधे किसानों के खातों में एथेनॉल उत्पादन व गन्ना क्षेत्रफल में उत्तर प्रदेश देश में प्रथम, किसान हित में सरकार के ठोस कदम लखनऊ योगी सरकार ने एक बार फिर गन्ना किसानों के हित में ऐतिहासिक निर्णय लिया है। पेराई सत्र 2025-26 के लिए गन्ना मूल्य में ₹30 प्रति कुन्तल की वृद्धि की गई है। उत्तर प्रदेश के गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी के अनुसार अब अगेती गन्ना प्रजाति का मूल्य ₹400 प्रति कुन्तल तथा सामान्य प्रजाति का मूल्य ₹390 प्रति कुन्तल निर्धारित किया गया है। इस वृद्धि से गन्ना किसानों को लगभग ₹3,000 करोड़ का अतिरिक्त भुगतान होगा। योगी सरकार के कार्यकाल में यह चौथी बार है जब गन्ना मूल्य में बढ़ोतरी की गई है। यह निर्णय न केवल गन्ना किसानों की आमदनी में वृद्धि करेगा, बल्कि प्रदेश के ग्रामीण अर्थतंत्र में नई ऊर्जा भी भरेगा।  मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी ने कहा कि किसानों के परिश्रम का सम्मान करना हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। गन्ना किसान केवल उत्पादक नहीं, बल्कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था के सशक्त स्तंभ हैं। गन्ना हमारे ग्रामीण जीवन और अर्थव्यवस्था का आधार है और हर किसान को उसकी उपज का उचित मूल्य सही समय पर उपलब्ध कराना सरकार की प्रतिबद्धता है। उन्होंने बताया कि गन्ना किसानों को अब तक ₹2,90,225 करोड़ का भुगतान किया जा चुका है। तुलनात्मक रूप से देखा जाए तो वर्ष 2007 से 2017 के बीच सपा और बसपा सरकारों में किसानों को कुल मात्र ₹1,47,346 करोड़ का भुगतान हुआ था। इस प्रकार सरकार ने मात्र साढ़े आठ वर्षों में पिछली सरकारों के मुकाबले ₹1,42,879 करोड़ अधिक भुगतान कर नया इतिहास रचा है। मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी ने बताया कि प्रदेश में वर्तमान में 122 चीनी मिलें संचालित हैं, जिससे उत्तर प्रदेश देश में दूसरे स्थान पर है। पूर्ववर्ती सरकारों के कार्यकाल में जहां 21 मिलें औने-पौने दामों पर बेची गई थीं, वहीं सरकार के पारदर्शी प्रबंधन और निवेशोन्मुख नीतियों से इस उद्योग में ₹12,000 करोड़ का निवेश आकर्षित हुआ है। पिछले आठ वर्षों में 4 नई चीनी मिलें स्थापित की गईं, 6 बंद मिलें पुनः शुरू की गईं और 42 मिलों की उत्पादन क्षमता में विस्तार हुआ। इससे प्रदेश में 8 नई बड़ी मिलों के बराबर उत्पादन क्षमता में वृद्धि दर्ज हुई है। साथ ही, 2 मिलों में सीबीजी संयंत्र स्थापित किए गए हैं, जिससे गन्ना क्षेत्र में वैकल्पिक ऊर्जा उत्पादन को भी बल मिला है। प्रदेश सरकार की अभिनव पहल ‘स्मार्ट गन्ना किसान’ प्रणाली के माध्यम से गन्ना क्षेत्रफल, सट्टा, कैलेंडरिंग और पर्ची जारी करने की प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन कर दी गई है। अब किसानों को उनकी गन्ना पर्ची सीधे मोबाइल पर प्राप्त होती है और भुगतान डीबीटी के माध्यम से उनके बैंक खातों में पहुंचता है। इस प्रणाली को भारत सरकार ने 'मॉडल सिस्टम' घोषित किया है, जिससे बिचौलियों की भूमिका पूरी तरह समाप्त हो गई है। एथेनॉल उत्पादन में भी उत्तर प्रदेश ने नया कीर्तिमान स्थापित किया है। मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी ने बताया कि सरकार के प्रयासों से राज्य में एथेनॉल उत्पादन 41 करोड़ लीटर से बढ़कर 182 करोड़ लीटर तक पहुंच गया है और आसवनियों की संख्या 61 से बढ़कर 97 हो गई है। गन्ना क्षेत्रफल में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। प्रदेश में गन्ना क्षेत्रफल 20 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 29.51 लाख हेक्टेयर तक पहुंच चुका है, जिससे उत्तर प्रदेश देश में प्रथम स्थान पर आ गया है।

विशेष आर्टिकल :एक जिला एक उत्पाद: स्थानीय हुनर से वैश्विक पहचान तक उत्तर प्रदेश की सफलता गाथा

विशेष आर्टिकल : एक जिला एक उत्पाद (ODOP) UP की आर्थिक क्रांति का प्रतीक – स्थानीय कारीगरों से वैश्विक बाजार तक की यात्रा लखनऊ उत्तर प्रदेश सरकार की एक जिला एक उत्पाद (ODOP) योजना ने न केवल राज्य के पारंपरिक उद्योगों को नई पहचान दी है, बल्कि लाखों लोगों की जिंदगी को बदलकर एक आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था की नींव रखी है। 2018 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा शुरू की गई यह योजना अब 75 जिलों में 74 उत्पादों (मई 2025 में 12 नए उत्पाद जोड़े गए) को कवर कर रही है, जो राज्य को 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था की दिशा में तेजी से ले जा रही है। यह योजना न केवल आर्थिक विकास का माध्यम बनी है, बल्कि स्थानीय कारीगरों, किसानों और उद्यमियों को वैश्विक पटल पर चमकाने का जरिया भी। आइए, जानते हैं कैसे ODOP ने उत्तर प्रदेश को एक नई ऊंचाई दी है। ODOP योजना: एक नजर में ODOP का मूल मंत्र है – हर जिले की अनूठी पहचान को ब्रांड बनाना। योजना के तहत प्रत्येक जिले का एक विशेष उत्पाद चुना जाता है, जैसे आगरा का चमड़ा, लखनऊ की चिकनकारी, मुरादाबाद का पीतल उद्योग, या गोरखपुर की टेराकोटा। सरकार द्वारा प्रदान की जाने वाली सुविधाओं में कौशल विकास, बिना गारंटी ऋण, मार्केटिंग सहायता, ब्रांडिंग और निर्यात प्रोत्साहन शामिल हैं। मुख्य घटक उद्देश्य कौशल विकास 80,000+ कारीगरों को प्रशिक्षण, उपकरण वितरण। वित्तीय सहायता ₹50,000 से ₹5 लाख तक ऋण, 35% तक सब्सिडी। मार्केटिंग ODOP मार्ट पोर्टल, फ्लिपकार्ट जैसे प्लेटफॉर्म पर बिक्री। इंफ्रास्ट्रक्चर 10 कॉमन फैसिलिटी सेंटर (CFC) पूर्ण, 18 निर्माणाधीन। यह योजना 'आत्मनिर्भर भारत' का मजबूत स्तंभ है, जो स्थानीय संसाधनों को वैश्विक बाजार से जोड़ती है। ODOP से प्रदेश में आर्थिक विकास: आंकड़ों की कहानी ODOP ने उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई गति दी है। 2017-18 में राज्य के निर्यात ₹88,967 करोड़ थे, जो 2022-23 में बढ़कर ₹1.74 लाख करोड़ हो गए – यानी लगभग दोगुना। 2025 तक निर्यात में 76% की वृद्धि हुई है, जबकि कुल निर्यात ₹2 लाख करोड़ को पार कर चुका है। • रोजगार सृजन: 40 लाख+ लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार, जिसमें MSME क्षेत्र में 2 करोड़ नौकरियां शामिल हैं। पलायन रुका – अब 90% युवा राज्य में ही रोजगार पा रहे हैं। • निवेश आकर्षण: 2017 से अब तक ₹1,88,000 करोड़ से अधिक निवेश आया। • वैश्विक पहुंच: 15 ODOP उत्पादों को GI टैग मिला, 10 और प्रक्रिया में। फ्लिपकार्ट पर अप्रैल 2020 से अक्टूबर 2021 तक ₹1,000 करोड़ से अधिक की 2 करोड़ ODOP उत्पाद बिके। G20 समिट में PM मोदी ने ODOP उत्पाद उपहार दिए। ODOP-2.0 के तहत ब्रांडिंग, पैकेजिंग और गुणवत्ता सुधार पर जोर दिया जा रहा है, जो 2024-25 में जिला-वार लक्ष्य निर्धारित कर रहा है। यह योजना राज्य को $1 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था के लक्ष्य की ओर ले जा रही है। ODOP से बदली जिंदगियां: प्रेरक सफलता कहानियां ODOP ने साधारण कारीगरों को उद्यमी बना दिया है। हार्दोई जिले के इकबाल हुसैन की कहानी इसका जीवंत उदाहरण है। पारंपरिक हथकरघा व्यवसाय करने वाले इकबाल ने ODOP के तहत ₹10 लाख का ऋण लिया और कुर्ता-पजामा निर्माण शुरू किया। आज वे 50 बुनकरों को रोजगार दे रहे हैं, मासिक टर्नओवर ₹15 लाख है। "पहले बाजार की कमी थी, अब ODOP मार्ट और निर्यात से हमारी उत्पाद वैश्विक हो गए," वे कहते हैं। इसी तरह, हरदोई के ही महाशर हुसैन ने ₹25 लाख ऋण से तौलिया फैक्ट्री लगाई, जो गांव में 30 महिलाओं को रोजगार दे रही है। मुरादाबाद के पीतल कारीगरों ने CFC की मदद से निर्यात दोगुना किया, जबकि आगरा के चमड़ा उद्योग में हजारों युवाओं को कौशल प्रशिक्षण मिला। ये कहानियां साबित करती हैं कि ODOP ने न केवल आय बढ़ाई, बल्कि सामाजिक सशक्तिकरण भी लाया – खासकर महिलाओं और ग्रामीण युवाओं के लिए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रेरक भाषण: ODOP को आत्मनिर्भर भारत का आधार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ODOP को बार-बार अपनी दूरदृष्टि का प्रतीक बताया है। 8 फरवरी 2024 को लखनऊ में ODOP CFC उद्घाटन के दौरान उन्होंने कहा, "ODOP योजना ने पारंपरिक उद्योगों को बाजार में प्रवेश दिलाया और तकनीकी समर्थन दिया। यह आत्मनिर्भर भारत का आधार स्तंभ बन चुकी है, जो उत्तर प्रदेश को गौरवान्वित कर रही है।" उन्होंने बताया कि 2018 से पहले कारीगरों को 'इंस्पेक्टर राज' का सामना करना पड़ता था, लेकिन अब युवा उद्यमी बन रहे हैं। 24 जनवरी 2024 को उत्तर प्रदेश स्थापना दिवस पर अवध शिल्पग्राम में बोलते हुए सीएम योगी ने कहा, "पहले निर्यात ₹86,000 करोड़ था, ODOP ने इसे ₹2 लाख करोड़ कर दिया। चीनी नकली उत्पादों की जगह अब ODOP उत्पाद बाजार में हैं।" G20 समिट के संदर्भ में उन्होंने कहा, "PM मोदी ने ODOP उत्पादों को वैश्विक मंच पर उपहार बनाकर हमारी योजना को अंतरराष्ट्रीय पहचान दी।" 21 सितंबर 2025 को 'सेवा पखवाड़ा' में उन्होंने जोर दिया, "ODOP ने MSME में 2 करोड़ नौकरियां पैदा कीं, जो पलायन रोकने का माध्यम है।" योगी जी के ये उद्गार ODOP को सांस्कृतिक विरासत और आर्थिक प्रगति का संगम बनाते हैं। भाजपा सरकार की ODOP: लाखों लोगों का लाभार्थी, राष्ट्रीय मॉडल भाजपा सरकार की यह योजना लाखों लोगों के जीवन का आधार बनी है। 80,000 कारीगरों को प्रशिक्षण, 40 लाख रोजगार, और ₹2 ट्रिलियन निर्यात – ये आंकड़े साबित करते हैं कि ODOP ने बड़े पैमाने पर लाभ पहुंचाया। योजना की सफलता ने अन्य राज्यों को प्रेरित किया, और केंद्र सरकार ने इसे राष्ट्रीय स्तर पर अपनाया। पारदर्शी ऋण वितरण, डिजिटल मार्केटिंग (ODOP मार्ट पोर्टल), और GI टैगिंग ने भ्रष्टाचार मुक्त विकास सुनिश्चित किया। यह कदम 'वोकल फॉर लोकल' को साकार करता है, जो गरीबी उन्मूलन और समावेशी विकास का प्रतीक है। निष्कर्ष: ODOP – उत्तर प्रदेश का गौरव, भारत का भविष्य ODOP योजना ने उत्तर प्रदेश को आर्थिक महाशक्ति बनाने की राह दिखाई है। कारीगरों की बदली किस्मत, दोगुने निर्यात, और करोड़ों नौकरियां – यह सब योगी सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति का परिणाम है। आइए, हम सब मिलकर 'लोकल को ग्लोबल' बनाएं। अधिक जानकारी के लिए आधिकारिक वेबसाइट odopup.in पर जाएं।

गंगा महोत्सव 2025: योगी सरकार के प्रयास से काशी के घाटों पर बजेगा सुर-ताल का संगम

वाराणसी देव दीपावली से पहले काशी के घाटों पर संगीत, नृत्य व लोक कलाओं की संगीतमय सरिता बहेगी। माँ जान्हवी के पावन तट पर इस वर्ष गंगा महोत्सव का आयोजन 1 से 4 नवम्बर तक किया जाएगा। योगी सरकार के प्रयास से राजघाट पर देशभर के नामचीन कलाकार अपनी प्रस्तुति देकर काशी की इस सांस्कृतिक परंपरा को और भव्य बनाएंगे जिनमें शास्त्रीय, भक्ति तथा लोक संगीत का अद्भुत संगम दिखाई देगा। इस महोत्सव में गायक हंसराज रघुवंशी अपने भजनों से श्रोताओं को भक्ति रस से ओत-प्रोत करेंगे। वहीं, पद्मश्री मालिनी अवस्थी अपने लोक गायन से उत्तर भारत की लोक परंपराओं को जीवंत करेंगी। पद्मश्री गीता चन्द्रन का भरतनाट्यम नृत्य भी कार्यक्रम का विशेष आकर्षण रहेगा। वहीं, नमो घाट पर काशी सांसद सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रतियोगिता के प्रमुख कलाकार भी अपनी प्रस्तुति देंगे। कई मायनों में विशिष्ट होगा आयोजन संयुक्त निदेशक पर्यटन दिनेश कुमार ने बताया कि चार दिवसीय इस उत्सव में गीत, संगीत, नृत्य और वादन की गंगा बहेगी। गंगा महोत्सव के मंच पर लोक और शास्त्रीय संगीत की स्वर लहरियां गूंजेंगी तो साथ ही पारंपरिक नृत्य शैलियों की झलक भी देखने को मिलेगी। महोत्सव में विशेष रूप से गायक हंसराज रघुवंशी आयोजन के अंतिम दिन अपने भजनों से श्रद्धा और भक्ति का भाव जगाएंगे। वहीं, पद्मश्री मालिनी अवस्थी 3 अक्टूबर को लोक गायन से काशी की धरती पर उत्तर भारत की लोक परंपराओं को सजीव करेंगी। इसके अतिरिक्त, 2 अक्टूबर को पद्मश्री गीता चंद्रन भरतनाट्यम की प्रस्तुति देंगी। गंगा महोत्सव के अंतर्गत होने वाली प्रस्तुतियां शाम 4 बजे से शुरू होंगी। READ MORE: CM योगी ने किया चरण सुहावे गुरु चरण यात्रा का स्वागत, कहा- गुरु परंपरा ने भारत को केवल आस्था नहीं, बल्कि… काशी गंगा महोत्सव ये प्रमुख कलाकार देंगे प्रस्तुति प्रथम दिन, 1 नवंबर पं० माता प्रसाद मिश्र एवं पं० रविशंकर मिश्र–कथक युगल नृत्य कविता मोहन्ती–ओडिसी नृत्य विदुषी श्वेता दुबे–गायन विदुषी कमला शंकर–स्लाइड गिटार डॉ० रिपि मिश्र–शास्त्रीय गायन डॉ० दिवाकर कश्यप एवं डॉ० प्रभाकर कश्यप–उपशास्त्रीय गायन रवि शर्मा एवं समूह–ब्रज लोक नृत्य एवं संगीत पं० नवल किशोर मल्लिक–शास्त्रीय गायन READ MORE: CM योगी के विजन को मिल रही उड़ान, उत्तरप्रदेश के हवाई अड्डों से 60 लाख से अधिक यात्रियों ने किया सफर दूसरा दिन, 2 नवंबर शिवानी शुक्ला–गायन प्रवीण उद्भव–तालयात्रा राजकुमार तिवारी उर्फ राजन तिवारी–गायन डॉ० अर्चना आदित्य महास्कर–गायन सवीर, साकार कलाकृति–पारम्परिक लोक नृत्य वन्दना मिश्रा–गायन प्रो० पं० साहित्य नाहर एवं डॉ० पं० संतोष नाहर–सितार एवं वायलिन जुगलबन्दी ओम प्रकाश–भजन गायन पद्मश्री गीता चन्द्रन–भरतनाट्यम तीसरा दिन 3 नवंबर मीना मिश्रा–गायन विशाल कृष्ण–कथक नृत्य दिव्या शर्मा–हिन्दुस्तानी खयाल गायकी राकेश कुमार–जनजातीय लोक नृत्य इन्दु गुप्ता–लोक गायन चेतन जोशी–बांसुरी वादन विदुषी कविता द्विवेदी–ओडिसी नृत्य पद्मश्री मालिनी अवस्थी–लोक गायन चौथा दिन, 4 नवंबर डॉ० शुभांकर डे–गायन डॉ० प्रेम किशोर मिश्र एवं साथी-सितार, सरोद जुगलबन्दी व गायन राहुल रोहित मिश्र–शास्त्रीय गायन रूपन सरकार समन्ता–शास्त्रीय गायन वासुमती बद्रीनाथन–शास्त्रीय गायन शिवानी मिश्रा–कथक समूह नृत्य मानसी रघुवंशी–गायन हंसराज रघुवंशी–भजन गायन

विशेष आर्टिकल :विकसित भारत @2047 की ओर: उत्तर प्रदेश का समर्थ और स्वावलंबी सफर

विशेष आर्टिकल : विकसित भारत @2047: समर्थ और विकसित उत्तर प्रदेश @2047 अभियान लखनऊ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'विकसित भारत @2047' के राष्ट्रीय संकल्प को साकार करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने 'समर्थ उत्तर प्रदेश – विकसित उत्तर प्रदेश @2047: समृद्धि का शताब्दी परिव' अभियान की शुरुआत की है। यह अभियान न केवल राज्य को 2047 तक विकसित बनाने का ब्लूप्रिंट है, बल्कि एक जन आंदोलन के रूप में उभर चुका है, जिसमें 57 लाख से अधिक नागरिकों ने सुझाव दिए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में शुरू यह अभियान तीन मुख्य थीम्स – आर्थिक शक्ति, सृजन शक्ति और जीवन शक्ति – पर आधारित है, जो 12 क्षेत्रों (कृषि, उद्योग, पर्यटन, स्वास्थ्य, शिक्षा आदि) को कवर करता है। आइए, जानें कैसे यह अभियान उत्तर प्रदेश को आर्थिक महाशक्ति बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ा रहा है, लोगों की जिंदगियां बदल रहा है, और भाजपा सरकार का यह कदम लाखों को लाभ पहुंचा रहा है। अभियान का ब्लूप्रिंट: एक नजर में 'विकसित भारत @2047' उत्तर प्रदेश के संदर्भ में 'विकसित यूपी @2047' के रूप में लागू हो रहा है, जिसका लक्ष्य है राज्य की जीडीपी को 9.3% से बढ़ाकर 16% करना, और 2047 तक 6 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाना। अभियान की शुरुआत 3 सितंबर 2025 को लोक भवन में हुई, जहां 400 से अधिक विशेषज्ञों ने कार्यशाला में भाग लिया। मुख्य घटक: थीम फोकस क्षेत्र लक्ष्य 2047 तक आर्थिक शक्ति कृषि, उद्योग, निवेश, पर्यटन 16% वार्षिक विकास दर, 20% रोजगार वृद्धि सृजन शक्ति आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, हरित विकास विश्व स्तरीय सड़कें, सोलर सिटी, AI-आधारित स्मार्ट गांव जीवन शक्ति स्वास्थ्य, शिक्षा, सुरक्षा जीरो पॉवर्टी, 100% साक्षरता, डिजिटल स्वास्थ्य कवरेज अभियान के तहत 75 जिलों में नोडल अधिकारी, बुद्धिजीवी और जनप्रतिनिधियों ने सुझाव एकत्र किए, जो अब विजन डॉक्यूमेंट का आधार बनेंगे। अभियान से प्रदेश में विकास: आंकड़ों की चमकती तस्वीर 2017 से पहले 'बीमारू' राज्य के रूप में जाना जाने वाला उत्तर प्रदेश आज विकास का इंजन बन चुका है। 'विकसित यूपी @2047' अभियान ने इस गति को और तेज किया है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार: • आर्थिक वृद्धि: 2017-25 में जीडीपी 2.5 गुना बढ़ी, 2025-47 के लिए 16% विकास दर का लक्ष्य। राज्य 2030 तक 1 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनेगा। • रोजगार सृजन: 40 लाख+ नई नौकरियां, ग्रामीण युवाओं के लिए 49.86 लाख टैबलेट/स्मार्टफोन वितरित। • इंफ्रास्ट्रक्चर: 95+ संस्थानों को NAAC मान्यता, 67 को राष्ट्रीय रैंकिंग। ग्रामीण सड़कें दोगुनी, 240 करोड़ पौधे लगाए गए। • सामाजिक विकास: शून्य गरीबी का लक्ष्य, स्वास्थ्य और शिक्षा में 100% कवरेज। 24-घंटे विधानसभा बहस में सभी विभागों ने 2025-47 का रोडमैप पेश किया। यह अभियान न केवल सरकारी प्रयास है, बल्कि जन भागीदारी का प्रतीक है – 57 लाख सुझावों से विजन डॉक्यूमेंट तैयार हो रहा है। अभियान से बदली जिंदगियां: प्रेरक सफलता कहानियां 'विकसित यूपी @2047' ने साधारण लोगों को सशक्त बनाया है। यहां कुछ चुनिंदा कहानियां हैं: • अयोध्या की मेयर गिरीश पति त्रिपाठी: अभियान के तहत अयोध्या को सोलर सिटी बनाने पर फोकस। नॉन-टैक्स रेवेन्यू दोगुना, करोड़ों पर्यटकों के लिए स्वच्छ पर्यावरण। "अभियान ने हमें तकनीक-आधारित विकास का रोडमैप दिया," वे कहती हैं। • मथुरा के महावन नगर पंचायत अध्यक्ष मंजू देवी: 10,000 की आबादी वाले क्षेत्र में इंफ्रास्ट्रक्चर क्रांति। ग्रामीण युवाओं को उच्च शिक्षा का अवसर, प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि। "अभियान ने हमारे छोटे गांव को वैश्विक सपनों से जोड़ा," मंजू बताती हैं। • ग्रामीण युवा उद्यमी रामू (फर्जाबाद): अभियान के सुझावों से कृषि-आधारित स्टार्टअप शुरू, 20 युवाओं को रोजगार। पहले मजदूरी, अब मासिक ₹50,000 आय। "विकसित यूपी ने मेरी किस्मत पलट दी," रामू कहते हैं। ये कहानियां दर्शाती हैं कि अभियान ने ग्रामीण से शहरी तक, हर स्तर पर बदलाव लाया – जीरो पॉवर्टी से लेकर डिजिटल इंडिया तक। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रेरक भाषण: अभियान को जन आंदोलन बनाने का संकल्प मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अभियान को बार-बार 'समृद्धि का शताब्दी परिव' बताया है। उनके प्रमुख भाषण: • 3 सितंबर 2025 (लॉन्च पर, लोक भवन): "यदि उत्तर प्रदेश 8 वर्षों में बीमारू से विकास इंजन बन सकता है, तो 2047 तक विकसित राज्य बनना संभव है। यह अभियान हर नागरिक को विकास का साझेदार बनाएगा।" उन्होंने IIT कानपुर की चर्चाओं का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य फिर से ज्ञान और उद्योग का केंद्र बनेगा। • 14 अगस्त 2025 (24-घंटे विधानसभा बहस समापन): "विकसित भारत तभी संभव जब हर राज्य अपनी जिम्मेदारी निभाए। उत्तर प्रदेश इस मिशन का अग्रदूत बनेगा। विजन-2047 दस्तावेज 25 करोड़ लोगों की आकांक्षाओं का आईना है।" उन्होंने 1947-2017 की समीक्षा और 2017-2047 का रोडमैप पेश किया। • 26 सितंबर 2025 (57,000 ग्राम प्रधानों को संबोधन): "ग्राम प्रधान अभियान के सच्चे वास्तुकार हैं। ग्रामोदय से राष्ट्रोदय तक की यात्रा में गांव-गांव सुझाव लाएं।" ये उद्गार योगी जी की दृष्टि को दर्शाते हैं, जहां विकास समावेशी और जन-केंद्रित है। भाजपा सरकार का सराहनीय कदम: लाखों लाभार्थी, राष्ट्रीय मॉडल भाजपा सरकार का यह अभियान लाखों लोगों का सहारा बन चुका है। 53 लाख+ सुझाव, 57,000 ग्राम प्रधानों की भागीदारी, और 400+ विशेषज्ञों की कार्यशालाएं – ये आंकड़े साबित करते हैं कि बड़े पैमाने पर लाभ हो रहा है। 'वोकल फॉर लोकल' को बढ़ावा, सिंगल-यूज प्लास्टिक प्रतिबंध, और 36 करोड़ पौधरोपण जैसे कदम पर्यावरणीय विकास सुनिश्चित कर रहे हैं। यह योजना न केवल उत्तर प्रदेश को मजबूत कर रही, बल्कि विकसित भारत के लिए मॉडल भी बन रही है – पारदर्शी, डिजिटल और जन-भागीदारी आधारित। निष्कर्ष: विकसित यूपी @2047 – सपनों का साकार रूप 'समर्थ उत्तर प्रदेश – विकसित उत्तर प्रदेश @2047' अभियान उत्तर प्रदेश को वैश्विक नेता बनाने की दिशा में मील का पत्थर है। 57 लाख सुझावों से तैयार विजन डॉक्यूमेंट न केवल विकास का रोडमैप है, बल्कि लाखों लोगों की बदली किस्मत का प्रमाण। योगी सरकार ने साबित किया कि जब जनता साझेदार बने, तो असंभव भी संभव हो जाता है। आइए, हम सब मिलकर इस शताब्दी संकल्प को साकार करें। अधिक जानकारी के लिए आधिकारिक पोर्टल पर जाएं।