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सीबीजी, वेस्ट टू एनर्जी और बायोफ्यूल से कचरे का होगा बेहतर उपयोग, शहरों की सुधरेगी क्वालिटी आफ लाइफ

ग्रेटर नोएडा वेस्ट मैनेजमेंट आज एक बड़ी बिजनेस अपॉर्चुनिटी भी बन सकता है। सीबीजी, वेस्ट-टू-एनर्जी, बायोफ्यूल और रिसाइक्लिंग एवं री-प्रोसेसिंग जैसे क्षेत्रों में अपशिष्ट का उपयोग कर नए उद्योगों और रोजगार के अवसर पैदा किए जा सकते हैं। नगर विकास मंत्री ए.के. शर्मा ने नोएडा स्थित एक्सपो मार्ट में आयोजित उत्तर प्रदेश के चौथे इंटरनेशनल ट्रेड शो में नगर विकास विभाग की ओर से ठोस अपशिष्ट प्रबंधन विषय पर आयोजित सेमिनार में ये बातें कहीं। उन्होंने नगरों को और अधिक स्वच्छ, सुंदर एवं स्वस्थ बनाने के लिए नवीनतम तकनीक के माध्यम से ठोस अपशिष्ट के वैज्ञानिक एवं व्यवस्थित प्रबंधन पर विशेष बल दिया। उन्होंने बताया कि स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में उत्तर प्रदेश के कई शहरों ने देश में उल्लेखनीय स्थान प्राप्त किया है। नगर विकास मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में प्रदेश सरकार नागरिकों को बेहतर सुविधाएं और स्वच्छ एवं स्वस्थ वातावरण उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ने कहा कि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन केवल स्वच्छता से जुड़ा विषय नहीं है, बल्कि यह हमारे शहरों के स्वास्थ्य, पर्यावरण, अर्थव्यवस्था और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है। प्रभावी ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के माध्यम से हम शहरों को स्वच्छ रखने के साथ ही पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण की दिशा में भी महत्वपूर्ण कार्य कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में स्वच्छ भारत अभियान ने देश में स्वच्छता को जनआंदोलन का स्वरूप दिया है। अब हमारा प्रयास है कि इस जनआंदोलन को और अधिक वैज्ञानिक, व्यवस्थित और स्थायी बनाया जाए। इसके लिए आधुनिक तकनीक, बेहतर प्रबंधन व्यवस्था और जनभागीदारी को साथ लेकर आगे बढ़ने की आवश्यकता है। शर्मा ने लखनऊ के शिवरी स्थित सॉलिड वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट और प्रेरणास्थल की सफलता का उल्लेख करते हुए कहा कि नगरीय क्षेत्रों से प्रतिदिन बड़ी मात्रा में ठोस अपशिष्ट निकलता है। यदि इसका वैज्ञानिक ढंग से प्रबंधन किया जाए तो यही अपशिष्ट एक बड़े अवसर में परिवर्तित हो सकता है।

योगी सरकार की सख्ती का असर, 2.30 करोड़ की अवैध हेरोइन-स्मैक के साथ चार तस्कर गिरफ्तार

लखनऊ/हाथरस  योगी सरकार में उत्तर प्रदेश को नशामुक्त बनाने के लिए अवैध मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान को बड़ी सफलता मिली है। एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) की आगरा ऑपरेशनल यूनिट ने हाथरस में कार्रवाई करते हुए चार तस्करों को गिरफ्तार किया है। टीम ने उनके कब्जे से एक किलोग्राम से अधिक हेरोइन और स्मैक बरामद हुआ है, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 2.30 करोड़ रुपये है। एएनटीएफ आगरा की टीम ने हाथरस के थाना सिकंदराराऊ क्षेत्र में बिजलीघर नगला जलेल पुल के पास कार्रवाई की। गिरफ्तार आरोपियों के पास से हेरोइन और स्मैक के अलावा एक बलेनो कार, चार मोबाइल फोन और नकदी बरामद हुई। बरामदगी के संबंध में थाना सिकंदराराऊ, हाथरस में मुकदमा दर्ज किया गया है। आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत विधिक कार्रवाई की गई है। चार सक्रिय तस्कर गिरफ्तार गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मथुरा के वृंदावन निवासी सुदामा और मोनू कुशवाहा, मथुरा में रह रहे लखीमपुर खीरी निवासी अमित कुमार शुक्ला और मथुरा निवासी प्रीतम सिंह के रूप में हुई है। पूछताछ में आरोपियों ने मादक पदार्थों की खरीद और फुटकर बिक्री से जुड़े होने की बात स्वीकार की। वृंदावन और आस-पास होती थी सप्लाई पूछताछ के अनुसार आरोपी कासगंज निवासी एक व्यक्ति से हेरोइन और स्मैक खरीदकर लाते थे। इसके बाद मादक पदार्थों की छोटी-छोटी पुड़िया बनाकर वृंदावन और आस-पास के क्षेत्रों में महंगे दामों पर बेचते थे। बिक्री से होने वाले मुनाफे को आपस में बांटते थे।

मोदी-योगी सरकार ने बदली काशी की तस्वीर, 13 वर्षों में 52.71 करोड़ पर्यटकों ने किया भ्रमण

वाराणसी गंगा के अर्धचन्द्राकार घाट, मंदिरों की घंटियां, संकरी गलियों की अपनी-अलग पहचान और सदियों पुरानी परंपराएं काशी को दुनिया के दूसरे शहरों से अलग बनाती हैं। यही वजह है कि देश-दुनिया के लोगों के लिए काशी हमेशा से आस्था और आकर्षण का केंद्र रही है।  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने समय के साथ यहां सुविधाओं का विस्तार किया। प्राचीन विरासत को सहेजते हुए आधुनिक सुविधाओं के विस्तार ने काशी को देश-विदेश के पर्यटकों के लिए सुरक्षित और आकर्षक गंतव्य बनाया है। यही वजह है कि यहां पर्यटकों की संख्या साल-दर साल बढ़ती जा रही है। पर्यटन विभाग के अनुसार वर्ष 2014 से जुलाई 2026 तक  52 करोड़, 71 लाख 41 हजार 814 भारतीय और विदेशी पर्यटकों ने काशी का भ्रमण किया। इनमें 52 करोड़ 40 लाख 46 हजार 803  भारतीय और 30 लाख 95 हजार 11 विदेशी पर्यटक शामिल हैं। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2014 में जितने पर्यटक काशी आए, वर्ष 2016 के जुलाई माह तक ही उससे 4 करोड़ 10 लाख 70 हजार 422  अधिक लोग आ चुके हैं। पर्यटकों की बढ़ती संख्या से काशी की अर्थव्यवस्था को मिली नई रफ्तार   पर्यटकों की लगातार बढ़ती संख्या काशी की बदलती तस्वीर को दर्शाती है, जिसका सीधा असर काशी की स्थानीय अर्थव्यवस्था और पर्यटन उद्योग पर भी पड़ा है। पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने से होटल, गेस्ट हाउस, रेस्तरां, नाव संचालन, फूल-माला, पूजा सामग्री , टैक्सी-ऑटो, टूर एवं ट्रैवल सेवाओं के साथ-साथ स्थानीय बाजारों और हस्तशिल्प उत्पादों की मांग में वृद्धि हुई है। इससे पर्यटन से जुड़े छोटे कारोबारियों, दुकानदारों, नाविकों, गाइडों, कारीगरों और सेवा क्षेत्र में काम करने वाले लोगों के लिए रोजगार और आय के नए अवसर बने हैं।  इस तरह पर्यटन अब केवल धार्मिक और सांस्कृतिक अनुभव तक सीमित नहीं है, बल्कि काशी की स्थानीय अर्थव्यवस्था को गति देने वाले महत्वपूर्ण क्षेत्रों में शामिल हो रहा है।    सुव्यवस्थित विकास के साथ बढ़ा काशी का आकर्षण वर्ष 2014 में केंद्र में मोदी सरकार और वर्ष 2017 में उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के गठन के बाद काशी में विकास और पर्यटन को नई गति मिली। सड़क, रेल और हवाई कनेक्टिविटी के विस्तार, बेहतर सार्वजनिक सुविधाओं, स्वच्छता, घाटों के विकास और प्रमुख धार्मिक एवं ऐतिहासिक स्थलों के सौंदर्यीकरण से काशी का पर्यटन अनुभव लगातार समृद्ध हुआ है। पर्यटकों की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पर्यटन अवसंरचना तथा कानून-व्यवस्था को मजबूत किया गया, वहीं नए पर्यटन अनुभवों का भी विस्तार हुआ । काशी विश्वनाथ धाम के विकास से मंदिर क्षेत्र में श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए सुविधाएं बढ़ीं, घाटों के सौंदर्यीकरण, बेहतर साफ-सफाई, सारनाथ के विकास और गंगा में रिवर क्रूज जैसी गतिविधियों ने पर्यटन के दायरे को और व्यापक किया। आज काशी में धार्मिक, आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और विरासत पर्यटन के साथ आधुनिक सुविधाओं का संगम दिखाई देता है। सदियों पुरानी परंपराएं नए कलेवर में पर्यटकों को आकर्षित कर रही हैं। विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर काशी की यह बदलती तस्वीर बताती है कि विरासत को सहेजते हुए आधुनिक सुविधाओं का विस्तार पर्यटन को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकता है।   वर्जन  "हमारा प्रयास है कि काशी की सदियों पुरानी परंपराओं को सुरक्षित रखते हुए पर्यटकों को आधुनिक पर्यटन से जोड़ा जाए, ताकि दुनिया भर के पर्यटक यहां आकर केवल दर्शन ही नहीं, बल्कि काशी की संस्कृति, विरासत और जीवन शैली का भी अनुभव लेकर लौटें।"  जयवीर सिंह पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री ,उत्तर प्रदेश  वर्ष 2014 से जुलाई 2026 तक वाराणसी में पर्यटकों की संख्या -वर्ष-भारतीय पर्यटक-विदेशी पर्यटक-कुल पर्यटक -2014 –52,02,236 –2,87,761–54,89,997 -2015 –54,13,927–3,02,370– 57,16,297 -2016 –56,00,146 –3,12,519– 59,12,665 -2017– 59,47,355–34,860–62,82,215 -2018 –60,95,890 –3,49,270 –64,45,160 -2019 – 64,47,775– 3,50,000– 67,97,775 -2020 – 8,76,303–1,06,189 –9,82,492 -2021–30,75,913 –2,566 – 30,78,479 -2022 –7,11,47,310– 83,741–7,12,31,051 -2023–8,52,71,729 – 2,01,904 – 8,54,73,633 -2024–10,97,87,811– 3,09,932 –11,00,97,743 -2025 –17,27,52,530 – 3,21,358 –17,30,73,888 – 2026 जुलाई तक  – 4,64,27,878–1,32,541– 4,65,60,419

राहुल गांधी के गढ़ रायबरेली से अखिलेश की PDA रथयात्रा, सपा-कांग्रेस रिश्तों पर बढ़ी हलचल

लखनऊ समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 24 सितंबर 2026 को कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के संसदीय क्षेत्र रायबरेली से अपनी पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) रथयात्रा की शुरुआत की है। अखिलेश यादव ने रायबरेली का चुनाव राहुल गांधी को सीधे चुनौती देने के लिए किया है। अखिलेश ने इस यात्रा की शुरुआत अमेठी से इसलिए नहीं की क्योंकि उससे वह राहुल गांधी को सीधा संदेश नहीं दे पाते। वर्तमान में राहुल गांधी रायबरेली से लोकसभा के सांसद हैं। कांग्रेस पार्टी की स्थिति अमेठी और रायबरेली में भी अच्छी नहीं है। 2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी की अमेठी और रायबरेली लोकसभा सीट की 10 विधानसभा सीटों में से सात पर ज़मानत जब्त हो गई थी। राहुल गांधी 2024 में सिर्फ सपा के समर्थन के कारण ही रायबरेली से चुनाव लड़ने की हिम्मत कर सके थे।   2022 के विधानसभा चुनाव आंकड़ों के अनुसार, अमेठी लोकसभा सीट के तहत आने वाली 5 विधानसभा सीटों का प्रदर्शन इस प्रकार रहा था। तिलोई में भाजपा/अपना दल को 99,472 वोट (48.54%), सपा को 71,643 वोट (35%), कांग्रेस को 21,978 वोट (10.7%) और बसपा को 6,120 वोट (2.99%) मिले। सलोन में भाजपा/अपना दल को 87,715 वोट (43.79%), सपा को 85,604 वोट (42.7%), कांग्रेस को 11,439 वोट (5.71%) और बसपा को 9,335 वोट (4.66%) मिले। जगदीशपुर में भाजपा/अपना दल को 89,315 वोट (43.94%), सपा को 27,971 वोट (13.8%), कांग्रेस को 66,491 वोट (32.7%) और बसपा को 10,198 वोट (5.02%) प्राप्त हुए। गौरीगंज में भाजपा/अपना दल को 72,077 वोट (35.53%), सपा को 79,040 वोट (39%), कांग्रेस को 28,964 वोट (14.3%) और बसपा को 9,872 वोट (4.87%) मिले। अमेठी विधानसभा में भाजपा/अपना दल को 70,121 वोट (36.93%), सपा को 88,217 वोट (46.5%), कांग्रेस को 14,080 वोट (7.42%) और बसपा को 10,202 वोट (5.37%) हासिल हुए। इस प्रकार अमेठी लोकसभा क्षेत्र में भाजपा/अपना दल को 4,18,700 वोट (41.82%), सपा को 3,52,475 वोट (35.2%), कांग्रेस को 1,42,956 वोट (14.3%) और बसपा को 45,727 वोट (4.57%) मिले। रायबरेली लोकसभा सीट के तहत आने वाली विधानसभा सीटों पर प्रदर्शन इस प्रकार रहा था। बछरावां में भाजपा/अपना दल को 62,935 वोट (30.04%), सपा को 65,747 वोट (31.4%), कांग्रेस को 56,835 वोट (27.1%) और बसपा को 13,730 वोट (6.55%) मिले। हरचंदपुर में भाजपा/अपना दल को 78,009 वोट (38.69%), सपा को 92,498 वोट (45.9%), कांग्रेस को 16,230 वोट (8.05%) और बसपा को 7,335 वोट (3.64%) मिले। रायबरेली विधानसभा सीट पर भाजपा/अपना दल को 1,02,429 वोट (44.51%), सपा को 95,254 वोट (41.4%), कांग्रेस को 14,954 वोट (6.5%) और बसपा को 9,331 वोट (4.06%) प्राप्त हुए। सरेनी में भाजपा/अपना दल को 62,359 वोट (28.78%), सपा को 66,166 वोट (30.5%), कांग्रेस को 42,702 वोट (19.7%) और बसपा को 38,155 वोट (17.6%) हासिल हुए। ऊंचाहार में भाजपा/अपना दल को 75,893 वोट (35.79%), सपा को 82,514 वोट (38.9%), कांग्रेस को 9,985 वोट (4.71%) और बसपा को 34,692 वोट (16.4%) मिले। रायबरेली लोकसभा सीट का कुल योग देखें तो भाजपा/अपना दल को 3,81,625 वोट (35.67%), सपा को 4,02,179 वोट (37.6%), कांग्रेस को 1,40,706 वोट (13.2%) और बसपा को 1,03,243 वोट (9.65%) मिले। अखिलेश यादव के इस कदम के जवाब में उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने बयान दिया है कि यदि अखिलेश यादव रायबरेली और अमेठी जा सकते हैं, तो कांग्रेस भी समाजवादी पार्टी के गढ़ जैसे कन्नौज, इटावा और सैफई का रुख कर सकती है। अजय राय के इस बयान के जवाब में समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और जसवंतनगर से विधायक शिवपाल सिंह यादव ने कहा कि जसवंतनगर और इटावा में कांग्रेस को एक भी वोट नहीं मिलेगा। अजय राय और शिवपाल यादव की जुबानी जंग से पूर्व कांग्रेस सांसद इमरान मसूद और समाजवादी पार्टी सांसद इकरा हसन के बीच भी बयानबाजी हो रही है। कन्नौज और इटावा जिलों की छह में से चार विधानसभा सीटों पर कांग्रेस पार्टी ने 2022 में चुनाव लड़ा था, जहां उसका प्रदर्शन बहुत कमजोर रहा। छिबरामऊ से कांग्रेस प्रत्याशी विजय कुमार को 1,194 वोट (0.42%) मिले और वह 7वें स्थान पर रहे। कन्नौज से विनीता देवी को 1,786 वोट (0.66%) मिले और वह 5वें स्थान पर रहीं। इटावा से मोहम्मद राशिद को 1,476 वोट (0.6%) मिले तथा वह 5वें स्थान पर रहे। भरथना से स्नेह लता दोहरे को 1,854 वोट (0.75%) मिले और वह 5वें स्थान पर रहीं। अखिलेश यादव का यह कदम कांग्रेस पार्टी के साथ सीटों के तालमेल से पूर्व ही अपनी ताकत का अहसास करवाने का प्रयास है। कांग्रेस और सपा गठबंधन के बीच भविष्य के सीट-बंटवारे की चर्चाओं के बीच राहुल गांधी के गढ़ से इस यात्रा को शुरू करने को लेकर राजनीतिक गलियारों में विभिन्न कयास लगाए जा रहे हैं कि सपा राज्य में खुद को मजबूत स्थिति में दिखाना चाहती है। कांग्रेस पार्टी की स्थिति उत्तर प्रदेश में काफी कमजोर है। 2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी केवल दो सीट जीत सकी थी। इसके अलावा कांग्रेस पार्टी चार सीटों पर दूसरे पायदान पर रही। कांग्रेस पार्टी ने राज्य में 399 सीटों पर चुनाव लड़कर 387 सीटों पर ज़मानत जब्त करवाई थी। कांग्रेस पार्टी 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा के साथ गठबंधन करके चुनाव लड़ी थी और छह सीटें जीतने में सफल हुई थी, जिसमें अमेठी और रायबरेली की लोकसभा सीटें भी शामिल हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस अमेठी लोकसभा सीट से भाजपा की स्मृति ईरानी से चुनाव हार गई थी। 2019 में चुनाव हारने के डर से राहुल गांधी ने पहले ही केरल के वायनाड से नामांकन दाखिल कर दिया था। सपा को डर है कि अगर कांग्रेस पार्टी मजबूत हो गई तो उसका मुस्लिम जनाधार खिसक जाएगा और पार्टी कमजोर हो जाएगी, इसलिए सपा कांग्रेस को उसकी औकात में रखना चाहती है। दूसरी तरफ, कांग्रेस पार्टी का प्रयास है कि वह सपा को कमजोर करे जिससे कि कांग्रेस पार्टी मजबूत हो सके। दोनों पार्टियों में मुस्लिम वोट बैंक के लिए आपस में प्रतिद्वंदिता है, जिसके तहत सहयोग के साथ ही अंदर ही अंदर आपसी प्रतिस्पर्धा भी देखी जाती है। कांग्रेस पार्टी का एक प्रयास यह भी है कि पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की तरह ही उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव को कमजोर किया जाए। ममता बनर्जी को कमजोर करने के लिए कांग्रेस पार्टी ने उनके साथ कोई … Read more

किसानों पर मौसम की दोहरी मार, फसलें बर्बाद और मंडी में धान के भाव गिरे

अलीगढ़ यूपी के अलीगढ़ में शुक्रवार की रात को आसमान से गिरी हल्की बौछार आधी रात के बाद रिमझिम बारिश में बदल गई। इस दौरान तेज ठंडी हवाओं ने जहां एक तरफ गर्मी से राहत दी तो वहीं ये हवाएं किसानों पर आफत बनकर टूटी। कई ग्रामीण इलाकों में किसानों की पकी फसल जमींदोज हो गई। धान, बाजरा और ज्वार की फसल में नुकसान बताया गया है। रिमझिम बारिश गर्मी से राहत प्रदान करने वाली तो रहीं लेकिन इस बारिश ने किसान का हिसाब बिगाड़ दिया। इस समय अधिकतर खेतों में धान की फसल खड़ी है। कुछ की फसल पक चुकी है तो कुछ पर बालियां आ रही हैं। ऐसे में तेज हवा ने फसल को जमीन पर बिछा दिया। इस प्राकृतिक आपदा में किसान कुछ न कर सके। सिर पर हाथ रखे किसान अपने नुकसान का आंकलन कर रहे हैं। जिले में धान का रकबा 1 लाख 64 हजार हेक्टेयर है। लगभग सभी जगहों से नुकसान की सूचनाएं आ रही हैं। कृषि विभाग की टीम भी बारिश के दौरान विभिन्न ब्लॉक में भ्रमणशील रही। इस दौरान अकराबाद, गोंडा, गभाना, हरदुआगंज, गंगीरी में फसल नुकसान की बात कही जा रही है। वहीं धनीपुर में भी खेतों में धान जमीन पर आ गया है। धान पानी में डूबने से गुणवत्ता प्रभावित होती है। बाबूपुर के किसान चौ. नवाब सिंह ने बताया कि उनकी पांच एकड़ में लगी धन की फसल जमीन पर बिछ गई है। मौसम विभाग के अनुमान के अनुसार रविवार को भी इसी तरह बारिश की स्थिति रह सकती है। ऐसे में किसानों को आशंका सता रही है कि बचा हुआ धान भी न गिर जाए। धान के अलावा किसानों की बाजरा और ज्वार की फसल में भी नुकसान बताया गया है। जिला कृषि अधिकारी धीरेंद्र सिंह चौधरी ने बताया कि टीम जगह-जगह जाकर खेतों की स्थिति देख रही है। खेतों की स्थिति को सूचीबद्ध किया जा रहा है। तेज हवा व बारिश से फसल को नुकसान गभाना में शनिवार को सुबह से तेज हवा के साथ पड़ी बारिश धान की फसल के लिए नुकसानदायक रही। धान के साथ ही बाज़रा की फसल खेतों में गिर गई। तहसील क्षेत्र में सैकड़ों एकड़ धान की फसल जमीन पर लेट गई है। किसानों को इस बात की आशंका सता रही है कि, कही फिर इसी तरह तेज बारिश हो गई तो खेत में पानी लग जायेगा और गिरी फसलों की बालियां अंकुरित होने लगेंगी। किसान लालपुर निवासी ललित, पनिहावर निवासी वीरपाल, भरतरी निवासी हीरेश कुमार मलिकपुरा निवासी शेरपाल सिंह का कहना है कि यह बारिश नुकसानदायक है। किसानों ने प्रशासन से जांच कर कर मुआवजे की मांग की है। किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें चंडौस में शनिवार सुबह से रही लगातार बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। खेतों में पानी भरने से जहां धान की फसल जलमग्न हो गई है, वहीं तेज बारिश के चलते कई खेतों में खड़ी फसल गिर गई। इससे किसानों को नुकसान की आशंका है। ताजपुर के किसान रुकनपाल् सिंह तोमर पुत्र जोगिंदर सिंह तोमर की करीब 10 बीघा धान की फसल बारिश के कारण खेत में गिर गई। किसान के अनुसार फसल गिरने से उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है। मंडी में धान की बंपर आवक बारिश से भाव धड़ाम खैर में कृषि उत्पादन मंडी समिति में धान की बंपर आवक के बीच शनिवार को हुई बारिश ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी। बारिश से मंडी में खुले में पड़ा धान भीग गया। वहीं धान के भाव में भी अचानक गिरावट आ गई। शुक्रवार तक करीब चार हजार रुपये क्विंटल तक बिक रहा धान शनिवार को घटकर 3000 से 3500 रुपये क्विंटल तक पहुंच गया। भाव गिरने से किसानों को आर्थिक नुकसान की चिंता सताने लगी है। वहीं मंडी में धान की खरीद भी प्रभावित हुई।

योगी सरकार ने बढ़ाई वृद्धावस्था पेंशन, अब हर महीने मिलेंगे ₹1500

 लखनऊ उत्तर प्रदेश में बुजुर्गों के लिए योगी सरकार ने सामाजिक सुरक्षा के मोर्चे पर बड़ा कदम उठाया है. वृद्धावस्था पेंशन की राशि बढ़ाकर ₹1,500 प्रतिमाह कर दी गई है. पहले पात्र बुजुर्गों को ₹1,000 प्रतिमाह की दर से पेंशन मिलती थी. यानी अब सालाना पेंशन राशि बढ़कर ₹18,000 हो गई है. तीन महीने की ₹3,000 पेंशन अब दो किस्तों में पेंशन भुगतान की व्यवस्था में भी बदलाव किया गया है. सितंबर 2026 से सामने आई नई व्यवस्था के अनुसार तीन महीने की कुल ₹3,000 पेंशन अब एक साथ मिलने के बजाय ₹1,500-₹1,500 की दो किस्तों में बैंक खाते में भेजी जा रही है. भुगतान DBT के जरिए सीधे लाभार्थियों के खाते में किया जा रहा है. सरकार ने बजट में भी बढ़ाया इंतजाम बुजुर्गों की पेंशन के लिए सरकार ने अनुपूरक बजट 2026-27 में भी बड़ा प्रावधान किया है. राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना के लिए ₹1,500 करोड़ की अतिरिक्त व्यवस्था की गई है. समाज कल्याण विभाग के लिए कुल ₹1,655 करोड़ का अतिरिक्त प्रावधान किया गया है. किसे मिलेगा पेंशन का लाभ? वृद्धावस्था पेंशन के लिए पात्रता और आवेदन की प्रक्रिया के तहत बुजुर्गों की उम्र, आर्थिक स्थिति और अन्य निर्धारित शर्तें देखी जाती हैं. पेंशन का लाभ लेने के लिए रिकॉर्ड में आधार, बैंक खाता और अन्य जरूरी विवरण सही होना महत्वपूर्ण है. पेंशन नहीं आई तो ये काम जरूर करें अगर नई किस्त खाते में नहीं पहुंची है तो सबसे पहले e-KYC, आधार-बैंक लिंकिंग, NPCI मैपिंग और बैंक खाते की जानकारी जांचनी चाहिए. इनसे जुड़ी गड़बड़ी होने पर भुगतान अटक सकता है. पेंशन का स्टेटस ऑनलाइन चेक किया जा सकता है और समस्या होने पर समाज कल्याण विभाग से संपर्क किया जा सकता है. बुजुर्गों के लिए क्या बदला?     पेंशन: ₹1,000 से बढ़कर ₹1,500 प्रतिमाह     सालाना सहायता: ₹18,000     तीन महीने की राशि: ₹3,000     नई भुगतान व्यवस्था: ₹1,500 + ₹1,500 की दो किस्तें     वृद्धावस्था पेंशन के लिए अनुपूरक बजट में ₹1,500 करोड़     भुगतान: DBT के जरिए बैंक खाते में इस तरह 2026 में यूपी के पात्र बुजुर्गों के लिए सबसे अहम बदलाव पेंशन राशि बढ़ने और भुगतान व्यवस्था में बदलाव का है.

बेल्जियम से आया 308 पहियों का महाकाय ट्रक, UP में देखने उमड़ी सैकड़ों की भीड़

लखनऊ उत्तर प्रदेश के चंदौली का एक वीडयो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा, जिसमें 308 पहियों वाला महाकाय ट्रक पचपेड़वा इलाके में पहुंचा है. नेशनल हाईवे-19 पर खड़े इस विशालकाय ट्रक को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं. तेज हवाओं और लगातार हो रही बारिश के बीच भी लोगों का उत्साह कम नहीं हुआ. लोग सड़क किनारे खड़े होकर 308 पहियों वाले इस महाकाय ट्रक की तस्वीरें और वीडियो बना रहे हैं. कई लोग सेल्फी लेने के लिए सड़क के बीच तक पहुंच जा रहे हैं।   करीब 180 टन वजनी वेसल को लेकर चल रहा यह ट्रक लोगों के बीच कौतूहल पैदा कर रहा है. वहीं लोगों के उत्साह और भीड़ को देखते हुए पुलिसकर्मी भी मौके पर मौजूद हैं, ताकि कोई अनहोनी न हो.जानकारी के मुताबिक, बेल्जियम से समुद्र के रास्ते ओडिशा के पारादीप बंदरगाह पहुंचे करीब 180 टन वजनी लोहे के इस विशाल पार्ट्स को नेशनल हाईवे-19 के जरिए उत्तर प्रदेश के बलरामपुर ले जाया जा रहा है।  308 पहियों वाले ट्रक को देखने पहुंचे लोग  यह ट्रक ओडिशा से झारखंड और बिहार होते हुए उत्तर प्रदेश पहुंचा है. बिहार के कैमूर जिले में पहुंचने के बाद 308 पहियों वाले इस ट्रक पर लदे विशाल लोहे के पार्ट्स का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ. इसके बाद से ही इसे 'वायरल ट्रक' के नाम से जाना जाने लगा. अब वह जहां-जहां से यह गुजर रहा है, वहां इसे देखने के लिए लोगों की भीड़ जुट रही है. ट्रक चालक ने मीडिया से कैमरे पर बात नहीं की लेकिन ऑफ कैमरा उसने अपना नाम शाहनवाज हुसैन बताया और खुद को उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले का रहने वाला बताया।  भीड़ की वजह से आगे नहीं बढ़ पा रहा ट्रक उसके मुताबिक वह ओडिशा के पारादीप बंदरगाह से इस विशाल लोहे के पार्ट्स को लेकर बलरामपुर की ओर जा रहा है. रास्ते में लोगों की भारी भीड़ की वजह से ट्रक को आगे बढ़ाने में काफी परेशानी हो रही है.  308 पहियों वाला यह ट्रांसपोर्टर करीब एक लीटर डीजल में 4  किलोमीटर तक का माइलेज देता है. करीब 40 से 50 लोग इसके साथ चल रहे हैं और भारी भीड़ और रास्ते की परिस्थितियों की वजह से यह ट्रक एक दिन में लगभग 10 से 20 किलोमीटर ही चल पा रहा है।  इस ट्रक को देखने पहुंचे लोगों में भी खासा उत्साह है. गाजीपुर से शक्तिनगर जा रहे त्रिलोकीनाथ ने बताया कि उन्होंने सोशल मीडिया पर इस 'वायरल ट्रक' के वीडियो देखे थे और आज पहली बार इसे सामने से देखने का मौका मिला. उन्होंने परिवार के साथ ट्रक की तस्वीरें भी लीं. वहीं मुगलसराय से पहुंचे साहिल अहमद ने बताया कि उन्होंने इंस्टाग्राम पर इस ट्रक को वायरल होते देखा था. मुगलसराय इलाके में ट्रक पहुंचने की जानकारी मिलने के बाद वह इसे देखने पहुंचे. मौके पर काफी भीड़ मौजूद है।  लोग ट्रक के साथ खिंचवा रहे फोटो इस्लामपुर से पहुंचे शाहजहां ने बताया कि उन्होंने अपनी जिंदगी में पहली बार 308 पहियों वाली गाड़ी पर इतना बड़ा आइटम लदा हुआ देखा है. उन्होंने इसे आकर्षण का केंद्र बताया. उनका कहना है कि उन्हें अंदाजा है कि यह किसी शुगर प्लांट से जुड़ा उपकरण हो सकता है.बारिश की वह से फिलहाल भीड़ कुछ कम हुई है, लेकिन इससे पहले बड़ी संख्या में लोग यहां मौजूद थे. लोग ट्रक के साथ सेल्फी ले रहे हैं और तस्वीरें बना रहे हैं। 

योगी सरकार की पहल से युवा उद्यमियों को उत्पाद, बाजार और कारोबार विस्तार का एक ही मंच पर मिल रहा अवसर

ग्रेटर नोएडा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में युवाओं को नौकरी तलाशने वाले नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की तस्वीर यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो-2026 में आयोजित सीएम युवा एक्सपो-2026 में दिखाई दे रही है। इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में आयोजित एक्सपो के दूसरे दिन युवा उद्यमियों के उत्पादों, कारोबार के नए विचारों और सफल कारोबारी मॉडलों को व्यापक मंच मिला। दूसरे दिन एक्सपो में करीब 15 हजार से अधिक आगंतुक पहुंचे। लोगों ने युवा उद्यमियों के उत्पादों और सेवाओं में रुचि दिखाई। इस दौरान करीब दो लाख रुपये की बी2सी बिक्री हुई, जबकि संभावित खरीदारों, वितरकों और कारोबारी साझेदारों से 1,150 बी2बी पूछताछ दर्ज की गईं। इससे युवा उद्यमियों को अपने उत्पादों के लिए नए बाजार तलाशने और कारोबार को आगे बढ़ाने के अवसर मिले। मंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों ने स्टॉलों का किया भ्रमण दूसरे दिन मंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों ने एक्सपो के विभिन्न हॉल का भ्रमण किया। उन्होंने सीएम युवा के स्टॉलों पर प्रदर्शित उत्पादों और कारोबार मॉडलों की जानकारी ली। युवा उद्यमियों से संवाद करते हुए उनके व्यवसाय, बाजार विस्तार और सीएम युवा योजना से मिले सहयोग के बारे में भी जानकारी प्राप्त की गई। थीम पवेलियन में सामने आए अलग-अलग कारोबार मॉडल थीम पवेलियन में आयोजित सत्र के दौरान प्रोजेक्ट गंगा, मिलेनस्ट-जैविक फूड, द मास्टर ब्रांड्स, पिज्जा ओडिला और द पर्ल टाउन ने अपने उत्पादों, कारोबार मॉडल और भविष्य की विस्तार योजनाओं को प्रस्तुत किया। प्रस्तुतियों के माध्यम से युवा प्रतिभागियों को यह समझने का अवसर मिला कि किसी उत्पाद को बाजार की जरूरत के अनुरूप विकसित कर किस प्रकार उसे सफल कारोबार में बदला जा सकता है। पिच टैंक में युवाओं ने विशेषज्ञों के सामने रखे कारोबार विचार दूसरे दिन आयोजित पिच टैंक में एमिटी यूनिवर्सिटी, आईपीईसी कॉलेज, आईटीएस और जीएल बजाज सहित विभिन्न संस्थानों के चयनित प्रतिभागियों ने निर्णायक मंडल के समक्ष अपने कारोबार विचार और मॉडल प्रस्तुत किए।युवाओं ने अपने उत्पादों और सेवाओं, लक्षित बाजार, आय के मॉडल, कारोबार विस्तार और रोजगार सृजन की संभावनाओं पर प्रस्तुतियां दीं। इस मंच ने युवाओं को अपने विचारों पर विशेषज्ञों की राय लेने और उन्हें बाजार की जरूरत के अनुरूप बेहतर बनाने का अवसर दिया। आर्थिक सहायता के साथ बाजार से जोड़ने पर जोर योगी सरकार की सीएम युवा योजना के माध्यम से युवाओं को उद्यम स्थापित करने के लिए सहयोग उपलब्ध कराने के साथ ही उनके कारोबार को बाजार से जोड़ने पर भी जोर दिया जा रहा है। सीएम युवा एक्सपो इसी दिशा में महत्वपूर्ण मंच बना है। यहां युवाओं को उत्पाद प्रदर्शन और बिक्री के साथ बी2बी संपर्क, ब्रांडिंग, वितरण नेटवर्क और कारोबार विस्तार के अवसर मिल रहे हैं। फ्रेंचाइजी, मशीन आपूर्ति और बिजनेस ऑन व्हील्स जैसे अलग-अलग कारोबारी मॉडल भी युवाओं के सामने प्रस्तुत किए जा रहे हैं। स्थानीय प्रतिभा को बड़े बाजार से जोड़ रहा ट्रेड शो यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में सीएम युवा की भागीदारी का उद्देश्य प्रदेश के युवा उद्यमियों को स्थानीय बाजार से राष्ट्रीय और वैश्विक बाजार तक पहुंच दिलाना है। देश-विदेश से आए खरीदारों, कारोबारी प्रतिनिधियों और संभावित साझेदारों के बीच युवा उद्यमियों को अपने उत्पाद और सेवाएं प्रस्तुत करने का अवसर मिल रहा है। सीएम युवा एक्सपो में जारी गतिविधियां प्रदेश की युवा शक्ति और उद्यमिता की क्षमता को सामने ला रही हैं। योगी सरकार की पहल से युवाओं को स्वरोजगार, नवाचार और कारोबार विस्तार के लिए एक ऐसा मंच मिल रहा है, जहां आर्थिक सहयोग के साथ बाजार और नेटवर्किंग की संभावनाएं भी एक साथ उपलब्ध हैं। आगामी दिनों में भी एक्सपो में उत्पाद प्रदर्शन, कारोबार प्रस्तुतियां, पिच टैंक और कारोबारी संपर्क से जुड़ी गतिविधियां जारी रहेंगी।

अखिलेश यादव की सपा प्रवक्ताओं को सलाह- बिना तैयारी डिबेट में न जाएं, सोशल मीडिया पर संभलकर बोलें

लखनऊ  समाजवादी पार्टी के प्रवक्ताओं की शनिवार को बैठक करीब दो घंटे तक चली. इस बैठक में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के साथ-साथ राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव राय और राजकुमार भाटी भी मौजूद रहे. बैठक के दौरान अखिलेश यादव ने प्रवक्ताओं को कई अहम नसीहतें दीं।  जानकारी के मुताबिक, अखिलेश यादव ने कहा कि बिना तैयारी के डिबेट में जाना हास्यास्पद हो जाता है. धर्म और जाति के मुद्दों, जिनसे किसी की भावना आहत हो उनसे बचना है. अखिलेश ने कहा कि बिना तैयारी के नहीं बोलना है।  साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि हर मुद्दे पर बोलने से ज्यादा महत्वपूर्ण चुप रहना होता है, क्योंकि कई बार चुप रहकर भी बड़ा संदेश दिया जा सकता है।  10 सेकंड की रील से पार्टी की छवि बनती-बिगड़ती: अखिलेश यादव अखिलेश यादव ने कहा कि आज सोशल मीडिया का दौर है. आपकी कही हुई बात तेजी से वायरल होती है. 10 सेकंड की रील से पार्टी की छवि बनती और बिगड़ती है।  आपकी कही हुई बात तेजी से वायरल होती है. 10 सेकंड की रील से पार्टी की छवि बनती और बिगड़ती है. अखिलेश ने कहा है कि बिना तैयारी के डिबेट में न जाएं. समाजवादी पार्टी के प्रवक्ताओं की शनिवार को बैठक करीब दो घंटे तक चली. इस बैठक में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के साथ-साथ राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव राय और राजकुमार भाटी भी मौजूद रहे।  बैठक के दौरान अखिलेश यादव ने प्रवक्ताओं को कई अहम नसीहतें दीं. ने कहा कि बिना तैयारी के डिबेट में जाना हास्यास्पद हो जाता है. धर्म और जाति के मुद्दों, जिनसे किसी की भावना आहत हो उनसे बचना है. अखिलेश ने कहा कि बिना तैयारी के नहीं बोलना है।  साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि हर मुद्दे पर बोलने से ज्यादा महत्वपूर्ण चुप रहना होता है, क्योंकि कई बार चुप रहकर भी बड़ा संदेश दिया जा सकता है. रायबरेली से अखिलेश यादव ने शुरू की रथ यात्रा, कांग्रेस और सपा में ठनी! अखिलेश की 'रथयात्रा' पर भड़की कांग्रेस, अजय राय ने दी ये चुनौतीअखिलेश यादव ने कहा कि आज सोशल मीडिया का दौर है।  आपकी कही हुई बात तेजी से वायरल होती है. 10 सेकंड की रील से पार्टी की छवि बनती और बिगड़ती है. यादव ने कहा कि पार्टी प्रवक्ता गंभीरता से पार्टी का पक्ष रखें. हर मुद्दे पर जानकारी इकट्ठा करने के बाद ही बयान दें या डिबेट में शामिल हों. इस बीच सपा प्रमुख ने कुछ दिन पहले रायबरेली में कहा था कि हर तरफ पीडीए की हवा चल रही है और यह चुनाव बीजेपी बनाम पीडीए है।  इस बार 'वोट का बुलडोजर' चलेगा. बता दें, अखिलेश यादव ने रायबरेली से अपनी 'पीडीए रथयात्रा' की शुरुआत की. उन्होंने कहा कि हम सकारात्मक राजनीति कर रहे हैं, जबकि BJP नकारात्मक राजनीति करती है. अखिलेश यादव ने कहा कि पूरा उत्तर प्रदेश देख रहा है कि पीडीए के आंदोलन से बुलडोजर चलाने वाले बचने वाले नहीं हैं।  यादव ने कहा कि पार्टी प्रवक्ता गंभीरता से पार्टी का पक्ष रखें. हर मुद्दे पर जानकारी इकट्ठा करने के बाद ही बयान दें या डिबेट में शामिल हों।  इस बीच सपा प्रमुख ने कुछ दिन पहले रायबरेली में कहा था कि हर तरफ पीडीए की हवा चल रही है और यह चुनाव बीजेपी बनाम पीडीए है. इस बार 'वोट का बुलडोजर' चलेगा. बता दें, अखिलेश यादव ने रायबरेली से अपनी 'पीडीए रथयात्रा' की शुरुआत की।  उन्होंने कहा कि हम सकारात्मक राजनीति कर रहे हैं, जबकि BJP नकारात्मक राजनीति करती है. अखिलेश यादव ने कहा कि पूरा उत्तर प्रदेश देख रहा है कि पीडीए के आंदोलन से बुलडोजर चलाने वाले बचने वाले नहीं हैं. इस बार 'वोट का बुलडोजर' चलेगा और हमेशा के लिए डिमॉलिश कर देगा। 

यूपी चुनाव से पहले बड़ा सर्वे! फिर लहराएगा भगवा, SP का सामने आया सीटों का आंकड़ा

लखनऊ  यूपी में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। भाजपा, सपा, बसपा, कांग्रेस समेत सभी दलों ने तैयारियां तेज कर दी हैं। पिछले नौ सालों से प्रदेश में भाजपा की सरकार है और योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री हैं। विधानसभा चुनाव से ठीक पहले एक चुनावी सर्वे सामने आया है, जिसमें भाजपा की बंपर जीत का अनुमान जताया गया है। इसमें भाजपा गठबंधन 267 सीटों के साथ प्रदेश में फिर से सरकार बना सकता है, जबकि सपा गठबंधन को 132 सीटें मिलने की संभावना है। बसपा को दो और अन्य के खाते में दो सीटें जा सकती हैं। न्यूज लीडर और मैटराइज के सर्वे के अनुसार, उत्तर प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों पर यह सर्वे किया गया है। इसमें भाजपा गठबंधन को 267 सीटें दी गईं। इसमें से भाजपा को ही अकेले दम पर 246 सीटें मिलती दिख रहीं, जबकि उसके सहयोगी अपना दल (S) को नौ, आरएलडी को तीन, निषाद पार्टी को चार और सुभासपा को एक सीट दी गई है। सर्वे में बताया गया है कि अगर आज चुनाव होते हैं तो भाजपा गठबंधन की सरकार बनेगी। वहीं, समाजवादी पार्टी गठबंधन को राज्य में महज 132 सीटें मिलती दिखाई गई हैं। अगर यह सर्वे सच होता है तो सपा के लिए बड़ा झटका होगा, क्योंकि उसे लगातार तीसरी बार सत्ता से बाहर रहना पड़ेगा। इससे पहले सपा 2012-17 तक यूपी में सत्ता में थी और अखिलेश यादव मुख्यमंत्री थे। इस बार सपा ही अकेले 125 सीटें मिलने का अनुमान है, जबकि उसकी सहयोगी कांग्रेस को सात सीटें मिल सकती हैं। सपा और कांग्रेस में पिछले कई दिनों से बयानबाजी भी तेज है। कांग्रेस की ओर से सांसद इमरान मसूद तीखी बयानबाजी कर रहे हैं, जबकि अब सपा सांसद इकरा हसन भी पलटवार कर रही हैं। भाजपा और सपा गठबंधन को कितने फीसदी वोट शेयर का अनुमान सर्वे के अनुसार, भाजपा को राज्य में 44 फीसदी वोट मिलने का अनुमान है, जबकि सपा गठबंधन को 38 फीसदी वोट मिल सकता है। इस तरह दोनों के बीच छह फीसदी का अंतर रहने की संभावना है, जोकि काफी बड़ा अंतर है। वहीं, बसपा को 0.8 फीसदी और अन्य को दस फीसदी वोट शेयर मिलने का अनुमान है। पिछले दो चुनावों के आंकड़े यूपी चुनाव 2022 में भाजपा ने 403 में से 255 सीटों पर जीत दर्ज की थी और उसका वोट शेयर करीब 41.3 फीसदी रहा था। समाजवादी पार्टी (SP) को 111 सीटें मिलीं और उसका वोट शेयर करीब 32.1 फीसदी था। वहीं बहुजन समाज पार्टी (BSP) सिर्फ एक सीट जीत सकी, जबकि उसका वोट शेयर करीब 12.9 फीसदी रहा। कांग्रेस को 2 सीटें मिलीं। बीजेपी के सहयोगियों अपना दल (एस) को 12 और निषाद पार्टी को 6 सीटें मिलीं। इससे पहले 2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 312 सीटों पर जीत हासिल की थी और उसका वोट शेयर करीब 39.7 फीसदी था। समाजवादी पार्टी को 47 सीटें, बसपा को 19 सीटें और कांग्रेस को 7 सीटें मिली थीं। यानी 2017 से 2022 के बीच बीजेपी की सीटें 57 कम हुईं, लेकिन उसका वोट शेयर बढ़ा। इसके उलट SP की सीटों में 64 का इजाफा हुआ और उसका वोट शेयर भी करीब 10 प्रतिशत अंक बढ़ा, जबकि बसपा और कांग्रेस दोनों के सीटों तथा वोट शेयर में गिरावट आई।