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5 स्पोर्ट्स कॉलेजों में रिकॉर्ड आवेदन, युवाओं का खेलों की ओर बढ़ा रुझान

लखनऊ उत्तर प्रदेश में खेल संस्कृति को नई पहचान दिलाने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में लगातार ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। योगी सरकार की खेलोन्मुख नीतियों और आधुनिक सुविधाओं का ही असर है कि सत्र 2026-27 में स्पोर्ट्स कॉलेजों में प्रवेश के लिए रिकॉर्ड आवेदन प्राप्त हुए हैं। इस बार प्रदेश के पांच स्पोर्ट्स कॉलेजों की 518 सीटों के लिए करीब 2600 छात्रों ने आवेदन कर नया रिकॉर्ड बनाया है। यह आंकड़ा बताता है कि प्रदेश के युवा अब खेलों को केवल शौक नहीं, बल्कि अपने भविष्य और करियर के रूप में देखने लगे हैं। पिछले साल 1800 के करीब आए थे आवेदन लखनऊ, गोरखपुर, सैफई, सहारनपुर और फतेहपुर समेत कुल 5 स्पोर्ट्स कॉलेज में कक्षा 6, 9 और 11 में प्रवेश के लिए ऑनलाइन आवेदन मांगे गए थे। इस साल 2600 के करीब आवेदन आये हैं। जबकि पिछले साल 1800 के करीब आवेदन आए थे। इतनी बड़ी संख्या में आए आवेदन यह साबित करते हैं कि प्रदेश के युवाओं का भरोसा सरकारी खेल संस्थानों पर तेजी से बढ़ी है। इस बार चयन प्रक्रिया को पूरी तरह मेरिट और प्रदर्शन आधारित बनाया गया है। प्रारंभिक चयन परीक्षा 100 अंकों की रखी गई थी, जिसमें 50 अंक फिजिकल टेस्ट और 50 अंक स्किल एवं गेम टेस्ट के निर्धारित किए गए। दोनों परीक्षाओं में न्यूनतम 40 प्रतिशत अंक प्राप्त करना अनिवार्य किया गया था।  3 से 6 जून के बीच होगी मुख्य चयन परीक्षा प्रारंभिक परीक्षा में सेलेक्ट होने वाले अभ्यर्थियों को मुख्य चयन परीक्षा में शामिल किया जाएगा। प्रारंभिक परीक्षा में लखनऊ और कानपुर मंडल में पिछले साल 264 खिलाड़ी शामिल हुए थे, जिसके सापेक्ष में इस वर्ष 393 खिलाड़ियों ने प्रतिभाग किया है। मुख्य चयन परीक्षा भी 100 अंकों की होगी, जिसमें खिलाड़ियों की शारीरिक क्षमता और खेल कौशल का विस्तृत परीक्षण किया जाएगा। खेलवार एवं कॉलेजवार मुख्य चयन परीक्षा का आयोजन 3-4 जून तथा 5-6 जून को किया जाएगा। इसमें फिजिकल टेस्ट के 50 अंक और गेम व स्किल टेस्ट के 50 अंक निर्धारित किए गए हैं।  परीक्षा में पास अभ्यर्थियों की होगी जैविक आयु जांच फिजिकल टेस्ट में न्यूनतम 40 प्रतिशत यानी 20 अंक प्राप्त करना जरूरी होगा। खेल विशेषज्ञ मैदान पर अभ्यर्थियों की प्रतिभा का परीक्षण करेंगे। इसमें खेल तकनीक परीक्षा (स्किल टेस्ट) के लिए 30 अंक और गेम टेस्ट के लिए 20 अंक निर्धारित किए गए हैं। प्रदर्शन के आधार पर विशेषज्ञ अंक देंगे। मुख्य चयन परीक्षा का परिणाम खेल साथी पोर्टल पर जारी किया जाएगा और चयन समिति का निर्णय अंतिम एवं सर्वमान्य होगा। मुख्य चयन परीक्षा के बाद अंतिम श्रेष्ठता सूची तैयार कर कॉलेज वेबसाइट, खेल साथी पोर्टल पर जारी किया जाएगा। मुख्य चयन परीक्षा की श्रेष्ठता सूची में शामिल अभ्यर्थियों की जैविक आयु जांच केंद्रीय व्यवस्था के तहत कराई जाएगी। विभिन्न खेलों के लिए अलग-अलग जिलों में यह प्रक्रिया होगी। अंतिम ट्रायल भी पूर्ण पारदर्शिता के साथ कराया जाएगा संपन्न अभ्यर्थियों की जैविक आयु जांच अभिभावकों की सहमति से कराई जाएगी। जैविक आयु जांच में उपयुक्त पाए गए अभ्यर्थियों की काउंसलिंग आयोजित की जाएगी। इसमें प्रमाणपत्रों का सत्यापन कर रिक्त सीटों और कॉलेज वरीयता के आधार पर प्रवेश प्रक्रिया पूरी की जाएगी। प्रबंध समिति उत्तर प्रदेश के सचिव एवं स्पोर्ट्स कॉलेज लखनऊ के प्रधानाचार्य दीपेंद्र यादव ने बताया कि प्रारंभिक ट्रायल पूर्ण पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ कराया गया है और अंतिम ट्रायल भी पूर्ण पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि हमारा लक्ष्य है कि इस सत्र की तुलना में अगले सत्र 3 से 4 गुना ज्यादा आवेदन आएं।

प्रदेश के 97 हजार गांवों में स्वच्छ जलापूर्ति में अहम भूमिका निभा रही महिलाएं

लखनऊ, 28 मई: उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने जल जीवन मिशन के तहत फील्ड टेस्टिंग किट (एफटीके) अभियान को महिला सशक्तीकरण और स्वावलंबन का बड़ा जरिया बना दिया है। प्रदेश के 97 हजार से अधिक गांवों में महिलाओं के विशेष समूह को इससे जोड़कर न केवल स्वच्छ और गुणवत्तापूर्ण ग्रामीण जलापूर्ति सुनिश्चित की जा रही है, बल्कि उन्हें तकनीकी रूप से सक्षम भी बनाया गया है। गांवों में पानी की शुद्धता जांचने के बदले मिलने वाले मानदेय से ग्रामीण महिलाओं के लिए अतिरिक्त आय और स्वरोजगार के नए रास्ते भी खुले हैं। नमामि गंगे और ग्रामीण जलापूर्ति विभाग के विशेष सचिव एवं एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर प्रभास कुमार ने बताया कि इस मिशन के तहत प्रदेश के लगभग समस्त ग्राम पंचायतों और राजस्व गांवों में 05-05 महिलाओं के समूह को फील्ड टेस्टिंग किट उपलब्ध कराई गयी है। वर्तमान में प्रदेश के लगभग 97,070 गांवों में इन प्रशिक्षित महिलाओं द्वारा पूरी सक्रियता के साथ जल गुणवत्ता परीक्षण का कार्य किया जा रहा हैं। यह महिलाएं अपने-अपने क्षेत्रों में पेयजल स्रोतों एवं घरेलू नलों के जल नमूनों की नियमित जांच कर रही हैं। गुणवत्ता जांच की इस निरंतरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस चालू वित्तीय वर्ष में अब तक लगभग 63,700 जल गुणवत्ता नमूनों का परीक्षण पूरा किया जा चुका है। पानी की जांच के लिए लंबा इंतजार खत्म ग्राम स्तर पर यह महिलाएं एफटीके के जरिए पाइप लाइन, ट्यूबवेल समेत अन्य पेयजल स्रोतों में हानिकारक रसायनों और बैक्टीरिया का पता लगा रही हैं। संदिग्ध या दूषित जल स्रोतों की समय पर पहचान होने पर विभाग को तुरंत सूचना देती हैं, ताकि दूषित पानी से होने वाली विभिन्न जलजनित बीमारियों की रोकथाम तुरंत की जा सके। पहले जहां पानी की जांच के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता था, वहीं अब फील्ड टेस्टिंग किट के माध्यम से दूषित जल स्रोतों का पता चलते ही उन पर तत्काल कार्रवाई करना संभव हो पा रहा है। अतिरिक्त आय और स्वरोजगार का माध्यम यह कार्यक्रम न केवल पानी की शुद्धता सुनिश्चित कर रहा है, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण का जरिया भी बन रहा है। फील्ड टेस्टिंग कार्य से जुड़ी इन महिलाओं को उनके द्वारा किए जाने वाले परीक्षण कार्य के लिए निर्धारित दरों के अनुसार भुगतान (मानदेय) किया जा रहा है। इन्हें प्रति जांच 20 रुपये की दर से अधिकतम 20 जांच के लिए 400 रुपये का भुगतान मिल रहा है। यह व्यवस्था ग्रामीण परिवेश में रह रही महिलाओं के लिए अतिरिक्त आय अर्जित करने और स्वरोजगार से जुड़ने का एक बेहतरीन माध्यम बन गई है। महिलाओं को तकनीकी प्रशिक्षण महिलाओं को इस कार्य के लिए सक्षम बनाने के उद्देश्य से जल जीवन मिशन के अंतर्गत 'जल गुणवत्ता निगरानी एवं सर्विलांस कार्यक्रम' के तहत विशेष तकनीकी प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में महत्वपूर्ण बिंदुओं को शामिल किया गया है। 1.    फील्ड टेस्टिंग किट (एफटीके) को सही तरीके से संचालित करना। 2.    विभिन्न पेयजल स्रोतों से जल नमूनों का सुरक्षित संग्रहण (कलेक्शन) करना। 3.    पानी में मौजूद विभिन्न प्रकार के पैरामीटर्स की बारीकी से जांच करना। 4.    जांच के बाद तैयार रिपोर्टिंग को मोबाइल ऐप और रजिस्टर में दर्ज करना। 5.    सुरक्षित पेयजल के मानकों एवं स्वच्छता से जुड़ी अन्य आवश्यक जानकारियां प्राप्त करना।

भीषण गर्मी से निपटने की तैयारी तेज, अस्पतालों और बिजली व्यवस्था पर सीएम योगी की नजर

लखनऊ उत्तर प्रदेश में लगातार बढ़ रहे तापमान और हीट वेव के खतरे को देखते हुए सरकार पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी जिलों के प्रशासनिक अधिकारियों, स्वास्थ्य विभाग, बिजली विभाग और राहत एजेंसियों को सतर्क रहते हुए प्रभावी इंतजाम सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने साफ कहा है कि कि आमजन को गर्मी से राहत दिलाने में किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों को अस्पतालों, पेयजल आपूर्ति और बिजली व्यवस्था पर लगातार निगरानी रखने को कहा है। निर्देश दिए गए हैं कि सरकारी अस्पतालों में हीट स्ट्रोक से प्रभावित मरीजों के उपचार के लिए पर्याप्त बेड, दवाएं, आइस पैक, ओआरएस और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध रहें, ताकि जरूरत पड़ने पर लोगों को तुरंत चिकित्सा सहायता मिल सके। सीएम योगी आदित्यनाथ ने राहत और बचाव कार्य पूरी गंभीरता और तत्परता के साथ संचालित किए जाएं। विशेष रूप से श्रमिकों, बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरती जाए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मजदूरों को लू, थकावट और निर्जलीकरण से बचाने के लिए जरूरी इंतजाम किए जाएं। उन्होंने इसके साथ ही आमजन से भी सतर्क रहने की अपील करते हुए कहा कि लोग दोपहर में तेज धूप में बाहर निकलने से बचें, पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें और हल्के, सूती या खादी के ढीले कपड़े पहनें। बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखने की सलाह भी दी गई है। इसके साथ ही आग लगने की घटनाओं को लेकर भी सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। अपील की कि ऐसी किसी भी लापरवाही से बचें, जिससे आग लगने की आशंका पैदा हो सकती है।

साइबर अटैक से जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र और वेतन व्यवस्था प्रभावित

कानपूर कानपुर नगर निगम की मुख्य आधिकारिक वेबसाइट गुरुवार दोपहर अचानक हैक हो गई। इस हाई-प्रोफाइल साइबर हमले के बाद कानपुर से लेकर देश की राजधानी दिल्ली तक के प्रशासनिक गलियारों और आईटी (IT) महकमे में हड़कंप मच गया है। सरकारी वेबसाइट के हैक होते ही नगर निगम से जुड़ी तमाम ऑनलाइन जनहित सेवाएं पूरी तरह चरमरा गईं, जिससे आम जनता को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। एनआईसी के इंजीनियरों में खलबली जैसे ही वेबसाइट के हैकिंग की भनक लगी, सरकारी डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का संचालन और रखरखाव करने वाली देश की सबसे बड़ी एजेंसी, राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र के इंजीनियरों की टीम तुरंत अलर्ट मोड पर आ गई। दिल्ली और लखनऊ के वरिष्ठ आईटी विशेषज्ञों व इंजीनियरों की फौज इस तकनीकी सेंधमारी को ठीक करने और वेबसाइट को दोबारा बहाल करने में जुट गई है। हालांकि, साइबर हमला इतना तगड़ा है कि खबर लिखे जाने तक वेबसाइट को पूरी तरह चालू नहीं किया जा सका था। जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र से लेकर कर्मचारियों का वेतन तक अटका नगर निगम की मुख्य वेबसाइट हैक होने के कारण इसका सबसे बड़ा और सीधा असर आम जनता से जुड़ी बुनियादी डिजिटल सेवाओं पर पड़ा है। अधिकारियों के मुताबिक, वेबसाइट ठप होने से सबसे ज्यादा जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने की प्रक्रिया प्रभावित हुई है। सैकड़ों लोग अस्पतालों और दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। नगर निगम के महत्वपूर्ण टेंडर विकास कार्यों के ऑनलाइन प्रस्ताव और नगर निगम से जुड़ी अन्य महत्वपूर्ण सेवाएं भी पूरी तरह ब्लॉक हो गई हैं। इतना ही नहीं, इस साइबर सेंधमारी की वजह से नगर निगम के हजारों कर्मचारियों के वेतन और भत्तों से संबंधित महत्वपूर्ण डेटा और ऑनलाइन सेवाएं भी बुरी तरह प्रभावित हुई हैं, जिससे कर्मचारियों में भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है। क्या बोले जिम्मेदार अधिकारी? इस पूरे साइबर संकट और तकनीकी खामी को लेकर जब नगर निगम के आईटी विभाग के आला अधिकारियों से बात की गई, तो उन्होंने मामले की गंभीरता को स्वीकार किया। नगर निगम आईटी विभाग के नोडल अधिकारी राहुल सबबरवाल के अनुसार,वेबसाइट के सर्वर में कुछ गंभीर दिक्कतें आई हैं और हैकिंग की आशंका को देखते हुए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं। एनआईसी के विशेषज्ञ इंजीनियरों की टीम लगातार सिस्टम की बारीकी से जांच कर रही है और इसे ठीक करने में जुटी है। हमारी कोशिश है कि जल्द से जल्द सभी ऑनलाइन सेवाओं को सुरक्षित तरीके से बहाल कर दिया जाए ताकि जनता को और अधिक परेशानी न उठानी पड़े।  

1.25 लाख उपभोक्ताओं को फायदा: लखनऊ में बिजली कटौती और लो-वोल्टेज से मिलेगा छुटकारा

 लखनऊ यूपी की राजधानी लखनऊ के पारा क्षेत्र के लोगों को अगले महीने से बड़ी राहत मिलने जा रही है। इलाके में रहने वाले करीब 1.25 लाख उपभोक्ताओं को जल्द बिजली कटौती व लो-वोल्टेज से निजात मिलेगी। पिछले लंबे समय से बिजली संकट की मार झेल रहे निवासियों को अगले महीने समस्या से राहत मिल जाएगी। लेसा द्वारा निर्माणाधीन न्यू एफसीआई उपकेंद्र अगले माह तक यह पूरी तरह बनकर तैयार हो जाएगा। इससे पारा, प्रभातपुरम, मुनेश्वरपुरम, चौधरीटोला, चिलौली, रेवरी, सलेमपुर पतौरा, नरौरा, वादरखेड़ा, जनता विहार, बुद्धेश्वर विहार, पिंक सिटी, भटपामऊ सहित आसपास की करीब तीन दर्जन से अधिक कॉलोनियों की बिजली व्यवस्था सुधर जाएगी। आक्रोशित उपभोक्ता कई बार उपकेंद्र पर हंगामा और सड़क जाम तक कर चुके वर्तमान में पुराने एफसीआई उपकेंद्र की कुल क्षमता 25 एमवीए है, जिसमें 10-10 एमवीए के दो और 05 एमवीए का एक पावर ट्रांसफार्मर लगा है। इस उपकेंद्र पर लगभग 26 हजार उपभोक्ताओं का भार है। भीषण गर्मी के दौरान बिजली की मांग बढ़ते ही ट्रांसफार्मर ओवरलोड हो जाते हैं, जिससे आए दिन ट्रिपिंग और घंटों की कटौती होती है। इस समस्या के कारण क्षेत्र के आक्रोशित उपभोक्ता कई बार उपकेंद्र पर हंगामा और सड़क जाम तक कर चुके हैं। 5-5 एमवीए के दो नए पावर ट्रांसफार्मर स्थापित किए जा रहे लेसा ने इसी समस्या के समाधान के लिए पुराने उपकेंद्र परिसर में ही नया केंद्र बनाने का निर्णय लिया। इसमें 5-5 एमवीए के दो नए पावर ट्रांसफार्मर स्थापित किए जा रहे हैं। इस विस्तार के बाद क्षेत्र के लगभग 1.25 लाख लोगों को निर्बाध बिजली मिल सकेगी। अधिकारी बोले अमौसी जोन में मुख्य अभियंता के राम कुमार ने बताया कि न्यू एफसीआई उपकेंद्र का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है और अगले महीने तक यह चालू हो जाएगा। इससे प्रभातपुरम और मुनेश्वरपुरम जैसे बड़े इलाकों को बेहतर वोल्टेज और निर्बाध सप्लाई मिलेगी। साथ ही पुराने उपकेंद्र का भार कम होने से तकनीकी खामियां भी कम होंगी। कहीं केबल में आग, कहीं ट्रांसफार्मर फुंके उधर, राजधानी में भीषण गर्मी और उमस के बीच बिजली विभाग की जर्जर व्यवस्था ने आम जनता को बेहाल कर दिया है। शहर से लेकर ग्रामीण अंचलों तक बिजली कटौती और लो-वोल्टेज की समस्या ने विकराल रूप ले लिया है। मंगलवार रात से बुधवार शाम तक शहर के विभिन्न हिस्सों में केबल फाल्ट, ट्रांसफार्मर खराबी और अंडरग्राउंड केबल में आग लगने की घटनाओं से हाहाकार मचा रहा। लोग पूरी रात सो नहीं सके और सड़कों पर टहलकर वक्त काटने को मजबूर हुए।

योगी सरकार की सख्ती का असर, पूरे यूपी में शांति और नियमों के बीच मनी बकरीद

 चंदौली/संभल/आगरा/अयोध्या उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में मुस्लिम समुदाय के अकीदतमंदों ने ईदगाहों और मस्जिदों के भीतर बकरीद की नमाज शांतिपूर्ण ढंग से अदा की. राज्य सरकार की सख्त गाइडलाइन का पालन सुनिश्चित कराने के लिए पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी ड्रोन कैमरों, सीसीटीवी और भारी बल के साथ मुस्तैद रहे. चंदौली, अयोध्या, हापुड़, संभल, औरैया, कौशांबी, गाजीपुर, फिरोजाबाद, सुल्तानपुर, सहारनपुर और आगरा में तैनात मजिस्ट्रेटों की निगरानी में खुले में कुर्बानी और सड़कों पर नमाज को पूरी तरह रोका गया. नमाजियों ने मुल्क में भाईचारे, तरक्की और खुशहाली की सामूहिक दुआएं मांगीं और सुरक्षा व्यवस्था के बीच एक-दूसरे को गले लगाकर त्योहार की मुबारकबाद दी। चंदौली में ड्रोन कैमरों से नजर और गाइडलाइन का पालन चंदौली में बकरीद का त्योहार बेहद हर्षोल्लास और शांति के साथ संपन्न हुआ. सुबह होते ही लोग ईदगाह और मस्जिदों की तरफ बढ़े और नमाज अदा की. जिले में तकरीबन 280 से अधिक चिन्हित स्थानों पर नमाज का आयोजन किया गया था. इमाम और नमाजियों ने बताया कि सरकार द्वारा जारी सभी निर्देशों का अक्षरशः अनुपालन किया गया. चंदौली के एसपी आकाश पटेल ने बताया कि सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए सभी ईदगाहों पर भारी फोर्स तैनात की गई थी और संवेदनशील इलाकों पर ड्रोन कैमरों से पैनी नजर रखी गई थी। रामनगरी अयोध्या में शांतिपूर्ण माहौल और आला अफसरों की मौजूदगी रामनगरी अयोध्या में भी बकरीद का पर्व पूरी तरह शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ. शहर के सिविल लाइन स्थित मुख्य ईदगाह में बड़ी संख्या में पहुंचे नमाजियों ने अकीदत के साथ सजदा किया. शासन के सख्त निर्देशों के कारण नमाज केवल मस्जिदों और ईदगाह परिसर के भीतर ही संपन्न कराई गई. सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेने के लिए डीएम शशांक त्रिपाठी और एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर स्वयं सुबह से मौके पर डटे रहे. नगर निगम की तरफ से ईदगाह परिसर में विशेष साफ-सफाई और पेयजल की मुकम्मल व्यवस्था की गई थी। हापुड़ में अलर्ट मोड पर पुलिस और 57 मस्जिदों में नमाज हापुड़ जिले में बकरीद की नमाज को लेकर सुबह से ही पुलिस और प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर नजर आया. शहर के मुख्य ईदगाह सहित करीब 57 मस्जिदों में अलग-अलग निर्धारित समय पर अकीदतमंदों ने नमाज अदा की और देश में खुशहाली की मन्नतें मांगीं. पूरे क्षेत्र को सुरक्षित रखने के लिए चप्पे-चप्पे पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था. सुरक्षा चक्र को मजबूत बनाए रखने के लिए जिलाधिकारी कविता मीणा और पुलिस अधीक्षक कुंवर ज्ञानंजय सिंह खुद अपनी टीम के साथ मौके पर मुस्तैद दिखाई दिए। फर्रुखाबाद में भाईचारे की मिसाल और अफसरों का गश्त फर्रुखाबाद में भी बकरीद का पावन त्योहार अमन, चैन और आपसी भाईचारे के संदेश के साथ संपन्न हो गया. जिले के शहरी और ग्रामीण इलाकों को मिलाकर कुल 229 स्थानों पर सुबह से ही नमाजियों की भारी भीड़ जुटने लगी थी. सभी ईदगाहों और मस्जिदों में नमाज अदा कर देश की तरक्की और समृद्धि के लिए विशेष दुआएं मांगी गईं. जिले के आला प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी लगातार क्षेत्रों में भ्रमण करते रहे. अधिकारियों ने नमाजियों को त्योहार की बधाई दी और आपसी सौहार्द बनाए रखने की अपील की। संभल में इंटीग्रेटेड कंट्रोल रूम से निगरानी और जोनल व्यवस्था संभल जिले में बकरा ईद की नमाज को सकुशल संपन्न कराने के लिए कड़े प्रशासनिक प्रबंध देखने को मिले. पूरे जिले को 5 जोन और 16 सेक्टर में विभाजित किया गया था, जहां प्रत्येक सेक्टर में पुलिस के साथ मजिस्ट्रेट तैनात रहे. जिले के कुल 828 स्थलों पर नमाज शांतिपूर्ण ढंग से हुई और 14 निर्धारित स्थानों पर ही कुर्बानी की गई. तीन कंपनी पीएसी और आरआरएफ की तैनाती के साथ-साथ, ढाई सौ से अधिक सीसीटीवी कैमरों के जरिए इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से संवेदनशील मिश्रित आबादी वाले इलाकों की निगरानी की गई। संभल में सोशल मीडिया पर नजर और अधिकारियों की मुस्तैदी संभल के डीएम अंकित खंडेलवाल और एसपी केके बिश्नोई के अलावा एएसपी, सीओ और एसडीएम सुबह से ही क्षेत्र में गश्त पर रहे. प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया कि सड़कों पर नमाज न हो और खुले में कुर्बानी न दी जाए. इसके अलावा, शांति व्यवस्था को बनाए रखने के लिए पुलिस की सोशल मीडिया मॉनिटरिंग टीम इंटरनेट पर कुर्बानी के वीडियो या भड़काऊ पोस्ट डालने वालों पर पैनी नजर रख रही थी. खुफिया विभाग को भी पूरी तरह सक्रिय रखा गया ताकि किसी भी तरह के अफवाह को तुरंत रोका जा सके। औरैया में हजरत बाबा शाह जमाल शाह ईदगाह पर उमड़ी भीड़ औरैया जिले में ईद उल अजहा का पर्व पूरे श्रद्धा भाव और उल्लास के साथ मनाया गया. सुबह से ही शहर काजी अब्दुल समद मियां चिश्ती की इमामत में हजरत बाबा शाह जमाल शाह स्थित मुख्य ईदगाह में हजारों की तादाद में मुस्लिम समुदाय के लोग नमाज अदा करने पहुंचे. नमाज मुकम्मल होने के बाद मुल्क में अमन और खुशहाली की दुआएं मांगी गईं और लोगों ने गले मिलकर मुबारकबाद दी. जिला और पुलिस प्रशासन की मुस्तैदी के चलते ईदगाह और उसके आसपास के सभी इलाकों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम रहे। कौशांबी में चार सुपर जोन और संवेनशील क्षेत्रों पर पहरा यूपी के कौशाम्बी जिले में भी बकरीद का त्योहार भाईचारे और सौहार्दपूर्ण वातावरण के बीच मनाया गया. जिले की 84 ईदगाहों और 282 मस्जिदों में अकीदतमंदों ने नमाज अदा की. जिला प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर पूरे जिले को 4 सुपर जोन और 39 सेक्टरों में बांट रखा था. इन सभी सेक्टरों में भारी संख्या में पुलिस बल, पीएसी और प्रशासनिक अधिकारियों की तैनाती की गई थी. संवेदनशील माने जाने वाले इलाकों में विशेष सतर्कता बरती गई, जिससे पूरा त्योहार शांतिपूर्ण ढंग से निपट गया। गाजीपुर में 550 स्थानों पर नमाज और बच्चों को मिली टॉफी गाज़ीपुर जनपद में जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला और पुलिस अधीक्षक डॉ. ईरज राजा की मौजूदगी में बकरीद का त्योहार शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ. जिलाधिकारी के अनुसार, जनपद की लगभग 350 मस्जिदों और 150 ईदगाहों समेत कुल 550 स्थानों पर नमाज अदा की गई. शहर के विशेश्वरगंज स्थित मुख्य ईदगाह पर पहुंचे दोनों आला अधिकारियों ने नमाजियों को त्योहार की बधाई दी और नमाजी बच्चों के बीच टॉफियां बांटीं. शासन के निर्देशों के क्रम में जिले में … Read more

बकरीद से पहले ताजमहल विवाद: संरक्षित स्मारक के भीतर आयोजन की जांच शुरू

आगरा आगरा के ताजमहल में भजन-कीर्तन किए जाने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं। बकरीद से एक दिन पहले सामने आए इस वीडियो में कुछ लोग ताजमहल की मुख्य गुंबद के नीचे बैठकर भजन-कीर्तन करते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो वायरल होने के बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) और सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। एएसआई अधिकारी कलन्दर बिन्द ने बताया कि वायरल वीडियो की जानकारी केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) को भेज दी गई है और मामले की जांच कराई जा रही है। अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि वीडियो कब का है और इसमें दिखाई दे रहे लोग कौन हैं। अधिकारियों का कहना है कि वीडियो की सत्यता और घटना की परिस्थितियों की जांच की जा रही है। ताजमहल में भजन-कीर्तन का वीडियो वायरल करीब एक मिनट दो सेकंड के वीडियो में भगवा वस्त्र पहने कुछ लोग भजन-कीर्तन करते नजर आ रहे हैं। वहीं आसपास बैठे अन्य लोग तालियां बजाते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो रिकॉर्ड करने वाला व्यक्ति भी यह कहता सुनाई दे रहा है कि ताजमहल में भजन-कीर्तन हो रहा है। वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।  आगरा के ताजमहल में पर्यटकों के भजन-कीर्तन करने का वीडियो वायरल हो रहा है। जिसमें 30-35 लोग मुख्य मकबरे के नीचे चमेली फर्श पर बैठकर कीर्तन करते दिख रहे हैं। ये वीडियो एक मिनट दो सेकेंड का है। CISF के हवाले ताजमहल की सुरक्षा ताजमहल देश के सबसे संवेदनशील और संरक्षित स्मारकों में गिना जाता है। इसकी आंतरिक सुरक्षा की जिम्मेदारी सीआईएसएफ के पास है, जबकि बाहरी सुरक्षा व्यवस्था उत्तर प्रदेश पुलिस और ताज सुरक्षा पुलिस संभालती है। परिसर में प्रवेश से पहले पर्यटकों की एयरपोर्ट जैसी जांच की जाती है। इसके अलावा सीसीटीवी कैमरे, मेटल डिटेक्टर, बैगेज स्कैनिंग और संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षाकर्मियों की तैनाती रहती है। ऐसे में वीडियो सामने आने के बाद यह सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इतनी सख्त सुरक्षा व्यवस्था के बीच स्मारक के भीतर इस तरह का आयोजन कैसे हुआ। ताजमहल को लेकर कई बार उठे विवाद ताजमहल को लेकर पहले भी कई बार विवाद हो चुके हैं। कुछ हिंदुत्ववादी संगठन ताजमहल को तेजोमहालय बताते हुए यहां धार्मिक अनुष्ठान कराने की मांग करते रहे हैं। पूर्व में ताजमहल परिसर में भगवा झंडा फहराने और शिव चालीसा पाठ करने जैसी घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं। शाहजहां उर्स के दौरान भी धार्मिक आयोजनों को लेकर विवाद होते रहे हैं। जांच में जुटी सुरक्षा एजेंसियां वायरल वीडियो के बाद लोगों का कहना है कि यदि संरक्षित स्मारक के भीतर इस प्रकार का आयोजन हुआ है तो यह सुरक्षा व्यवस्था और नियमों के पालन दोनों के लिए गंभीर विषय है। फिलहाल एएसआई और सुरक्षा एजेंसियां पूरे मामले की जांच में जुटी हैं।

पद्मश्री सम्मानित शायर बशीर बद्र का जीवन और साहित्यिक योगदान

मेरठ उर्दू के प्रसिद्ध शायद बशीर बद्र का गुरुवार को निधन हो गया। वह लंबे समय से बीमार चल रहे थे। बशीर बद्र ने 91 साल की उम्र में अंतिम सांस ली। बशीर की पत्नी राहत बद्र ने शायर के निधन की जानकारी सोशल मीडिया एकाउंट पर साझा करते हुए लिखा, बशीर साहब लेफ्ट अस…प्रेयर्स। बशीर बद्र के निधन से पूरे साहित्य जगत में शोक की लहर है। बशीर बद्र को आधुनिक गजल के लिए उस्ताद माना जाता है। बशीर बद्र को साहित्य क्षेत्र में योगदान के लिए पद्मश्री अवार्ड भी मिल चुका है। 15 फरवरी 1935 को अयोध्या में जन्मे शायद बशीर बद्र ने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से अपनी उच्च शिक्ष और पीएचडी की थी। बशीर बद्र ने यहीं पर उर्दू के प्रोफेसर के रूप में सेवाएं भी दी थीं। बशीर बद्र को आसानी भाषाओं में गजलें लिखने में महाभारत हासिल थी। उन्होंने गजल विधा में कई नए और ठेठ शब्दों को शामिल किया था। बतादें कि बीमारी के कारण बशीर बद्र ने कई सालों से शायरी से किनारा कर लिया था। 1987 में मेरठ में दंगों में बशीर बद्र का जलाया गया था घर उर्दू शायरी से लोगों के दिलों पर राज करने वाले बशीर बद्र का 1987 के मेरठ के सांप्रदायिक दंगों में उनका घर जला दिया गया था। इस घटना में उनकी कई ऐतिहासिक रचनाएं और कविताएं हमेशा के लिए जलकर राख हो गई थीं। इस घटना के बाद से वे हमेशा के लिए भोपाल में शिफ्ट हो गए थे। मेरठ कॉलेज में लेक्चरार रह चुके हैं बशीर बद्र 1973 में बशीर बद्र ने एएमयू से पीएचडी की थी और 12 अगस्त 1974 को उन्होंने मेरठ कॉलेज के उर्दू विभाग में बतौर लेक्चरर ज्वाइन किया था। वे शायरी के ऊंचे मुकाम पर थे। जिस वक्त उन्होंने मेरठ कॉलेज ज्वाइन किया वे शायरी की दुनिया में जाने पहचने नाम थे।यही वजह रही कि जब तक उन्होंने नौकरी की, तब तक उन्हें पीएचडी की उपाधि की जरूरत नहीं पड़ी। उनका नाम ही पीएचडी से बड़ा हो गया था। शंहशाह-ए-गजल बशीर बद्र को 2018 में मिला था जोश-ए-उर्दू अवार्ड उर्दू शायद बशीर बद्र को जोश-ए-उर्दू-2018 अवार्ड से नवाजा गया था। दुबई की साहित्यिक संस्था बज्म-ए-उर्दू के पदाधिकारियों ने भोपाल स्थित उनके घर पहुंचकर यह अवार्ड दिया था। 6 जुलाई शुक्रवार को डॉ. बशीर बद्र का आवास पर जब अवार्ड पहुंचा तो पूरा घर ही चहक उठा था। दुबई की नामचीन साहित्यिक संस्था बज्म-ए-उर्दू ने डॉ. बशीर बद्र को ‘जोश-ए-उर्दू-2018 के तहत शॉल ओढ़ाकर चांदी की हैंडमेड शील्ड दी थी।

ओबीसी आरक्षण पर नई जनगणना की मांग, ग्राम प्रधान संगठन ने उठाई आवाज

 लखनऊ यूपी में ग्राम प्रधानों को ग्राम पंचायतों का प्रशासक बनाए जाने के निर्णय पर जिलों व ब्लॉक स्तर पर कार्यक्रम आयोजित कर सरकार का आभार जताया जाएगा। वहीं राष्ट्रीय पंचायती राज ग्राम प्रधान संगठन नई जनगणना के आंकड़ों से ओबीसी आरक्षण तय करने की मांग कर रहा है। जल्द वह समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग व राज्य सरकार को मांग पत्र सौंपेगा। बुधवार को राष्ट्रीय पंचायती राज ग्राम प्रधान संगठन ने मांग की कि वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर ओबीसी आरक्षण तय करना ठीक नहीं होगा। क्योंकि 15 वर्षों में ग्रामीण आबादी 78 प्रतिशत से घटकर 70 प्रतिशत रह गई है। आठ प्रतिशत आबादी स्थानांतरित हुई है। ऐसे में अब नई जनगणना के आंकड़ों से ही त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए ओबीसी आरक्षण तय किया जाए तो ठीक रहेगा। लखनऊ के एक होटल में आयोजित पत्रकार वार्ता में राष्ट्रीय पंचायती राज ग्राम प्रधान संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अखिलेश सिंह व प्रदेश अध्यक्ष ललित शर्मा ने कहा कि यह ऐतिहासिक निर्णय हुआ है। पहली बार ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाया गया है। जिसकी लड़ाई प्रधानों ने मजबूती से लड़ी और सरकार के समक्ष तथ्यपूर्ण ढंग से अपनी बात रख यह आदेश कराया गया। मध्य प्रदेश, राजस्थान व उत्तराखंड में पहले से यह व्यवस्था लागू है। अब राज्य, जिलों व ब्लॉकों में कार्यक्रम आयोजित कर आभार जताया जाएगा। प्रधान योगी सरकार को चुनाव में रिटर्न गिफ्ट देंगे। संगठन सभी राज्यों में अपना विस्तार करेगा। देश भर के 2.50 लाख प्रधानों के लिए यूनिक वेलफेयर पॉलिसी तैयार कराएगा। 7.32 लाख ग्राम पंचायत सदस्यों का कार्यकाल हुआ खत्म यूपी में अब सभी 57694 निवर्तमान ग्राम प्रधानों ने ग्राम पंचायतों के प्रशासक का पदभार संभाल लिया। अब पांच साल का कार्यकाल पूरा होने के बाद यह निवर्तमान ग्राम प्रधान व सचिव ग्राम पंचायत चलाएंगे। वहीं 7.32 लाख ग्राम पंचायत सदस्यों का पांच साल का कार्यकाल खत्म हो गया है। सभी छह समितियां भंग हो गई हैं। पंचायती राज विभाग की ओर से निवर्तमान ग्राम प्रधानों को प्रशासक के रूप में रूटीन कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं। वह नीतिगत निर्णय नहीं ले सकेंगे। नीतिगत निर्णय का प्रस्ताव जिला पंचायती राज अधिकारी के माध्यम से जिलाधिकारी को भेजा जाएगा और उनकी स्वीकृति से ही यह पास हो सकेगा। प्रशासक समिति बनाए जाने की बजाए प्रधान को ही प्रशासक बनाए जाने के चलते सभी छह समितियां भंग हो गई हैं। ऐसे शिक्षा व स्वास्थ्य समिति, स्वच्छता समिति, जल प्रबंधन समिति व निर्माण कार्य समिति के अध्यक्ष ग्राम पंचायत सदस्यों में से ही किसी को बनाया जाता है। सिर्फ प्रशासनिक व नियोजन एवं विकास समिति का अध्यक्ष ग्राम प्रधान होता है।

उच्च शिक्षण और पॉलीटेक्निक शिक्षकों के लिए बड़ा मौका, मिलेगा 50 हजार का राष्ट्रीय पुरस्कार

 लखनऊ  राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू हो गई है। शिक्षक पांच जुलाई तक वेबसाइट www.awards.gov.in पर आनलाइन आवेदन कर सकेंगे। इस पुरस्कार के लिए उच्च शिक्षण संस्थानों और पालिटेक्निक संस्थानों के शिक्षकों से आवेदन मांगे गए हैं। श्रेणी-एक में उच्च शिक्षण संस्थानों के शिक्षक और श्रेणी-दो में पालिटेक्निक संस्थानों के शिक्षक आवेदन कर सकते हैं। आवेदन प्रक्रिया स्व-नामांकन आधारित है। इसमें पूर्व या वर्तमान कुलपति, निदेशक, प्राचार्य और शिक्षक भी आवेदन कर सकेंगे। आवेदन करने वाले शिक्षकों को अपनी करियर प्रोफाइल के साथ दो से तीन मिनट का वीडियो क्लिप और उसका यूट्यूब लिंक भी भेजना होगा। उच्च शिक्षा संस्थानों के शिक्षकों के लिए 25 और पालिटेक्निक संस्थानों के शिक्षकों के लिए 10 पुरस्कार निर्धारित किए गए हैं। आवेदन करने के लिए शिक्षक के पास कम से कम पांच वर्ष का पूर्णकालिक शिक्षण अनुभव होना जरूरी है। आवेदन के समय शिक्षक की आयु 55 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए। चयन प्रक्रिया में टीचिंग-लर्निंग इफेक्टिवनेस, आउटरीच गतिविधियां, रिसर्च एंड इनोवेशन और फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम को आधार बनाया जाएगा। चयनित शिक्षकों को मेडल, प्रमाणपत्र और 50 हजार रुपये की नकद राशि प्रदान की जाएगी। पुरस्कार पांच सितंबर को शिक्षक दिवस पर दिए जाएंगे।