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UPITS 2026 बनेगा ग्रामीण अर्थव्यवस्था का ग्लोबल मंच, खरीदारों से सीधे जुड़ेंगे यूपी के उद्यमी

यूपीआईटीएस 2026 : डेयरी और मत्स्य क्षेत्र को मिलेगा वैश्विक बाजार निवेशकों और खरीदारों से सीधे जुड़ेंगे उत्तर प्रदेश के उद्यमी ग्रामीण अर्थव्यवस्था को वैश्विक बाजार से जोड़ने का सशक्त मंच बनेगा यूपीआईटीएस मछली पालन से दुग्ध उत्पादन तक दिखेगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था की नई तस्वीर देश-विदेश के खरीदारों से रूबरू होंगे डेयरी क्षेत्र से जुड़े 14 प्रमुख स्टेकहोल्डर्स और मत्स्य क्षेत्र से जुड़ीं आठ प्रमुख कंपनियां लखनऊ  उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो (यूपीआईटीएस)-2026 में प्रदेश के डेयरी व मत्स्य क्षेत्र की उपलब्धियों, संभावनाओं और उद्यमिता की नई तस्वीर देखने को मिलेगी। 25 से 29 सितंबर तक ग्रेटर नोएडा स्थित इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में होने वाले इस अंतरराष्ट्रीय ट्रेड शो में मत्स्य एवं डेयरी को प्रमुख फोकस सेक्टर के रूप में शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य इन क्षेत्रों में उत्तर प्रदेश की विविध क्षमताओं को देश-विदेश के खरीदारों, निवेशकों और कारोबारियों के सामने प्रस्तुत करना है। बड़े बाजार से जुड़ेंगे डेयरी और मत्स्य क्षेत्र के स्टेकहोल्डर्स डेयरी और मत्स्य क्षेत्र प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था, रोजगार और स्वरोजगार से सीधे जुड़े हैं। ट्रेड शो में इन क्षेत्रों से संबंधित सरकारी योजनाओं, उत्पादों, सेवाओं, तकनीकों और उद्यमिता के अवसरों को व्यापक मंच मिलेगा। इससे किसानों, दुग्ध उत्पादकों, मत्स्य पालकों, स्वयं सहायता समूहों व उद्यमियों को अपने कार्य और उत्पादों को बड़े बाजार से जोड़ने का अवसर मिलेगा। प्रसंस्करण, कोल्ड चेन, पैकेजिंग और विपणन में विकसित होंगे उद्यमिता के अवसर मत्स्य क्षेत्र में उत्पादन बढ़ाने के साथ आधुनिक तकनीक, बेहतर प्रबंधन, प्रसंस्करण और विपणन की संभावनाओं को भी सामने लाया जाएगा। यूपीआईटीएस 2026 में मछली पालन, इससे जुड़े उत्पादन, फीड, प्रसंस्करण, कोल्ड चेन, पैकेजिंग और विपणन जैसे क्षेत्रों में उद्यमिता के अवसरों को प्रदर्शित किया जाएगा। इससे मत्स्य पालकों और उद्यमियों को नए बाजारों तक पहुंच बनाने में मदद मिल सकती है। इसी तरह पशुधन, पशु स्वास्थ्य, दुग्ध उत्पादन और इससे जुड़े व्यवसायों की पूरी श्रृंखला ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करती है। ट्रेड शो के माध्यम से इन गतिविधियों में उपलब्ध संभावनाओं और कारोबार के अवसरों को भी व्यापक बाजार के सामने रखने का प्रयास किया जाएगा। एक मंच पर प्रदर्शित होगी ग्रामीण अर्थव्यवस्था की विविधता यूपीआईटीएस में अंतरराष्ट्रीय खरीदारों, घरेलू बी2बी खरीदारों, घरेलू बी2सी ग्राहकों के माध्यम से मत्स्य व डेयरी क्षेत्र से जुड़े उद्यमियों के लिए अपने उत्पादों और सेवाओं को नए खरीदारों तक पहुंचाने की संभावनाएं बढ़ेंगी। डेयरी और मत्स्य विभाग की सरकारी योजनाओं एवं नीतियों के साथ निजी क्षेत्र, उद्यमियों, निवेशकों, निर्यातकों और खरीदारों को एक मंच पर लाने का प्रयास किया जा रहा है। मत्स्य और पशुपालन जैसे कृषि-संबद्ध क्षेत्रों की भागीदारी से प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की ताकत और विविधता को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा। इससे उत्पादन से लेकर प्रसंस्करण, पैकेजिंग, विपणन और बाजार तक पूरी वैल्यू चेन में नए कारोबारी संपर्क विकसित होने की संभावनाएं बनेंगी।   यूपीआईटीएस में मत्स्य विभाग की ओर से इन्हें मिलेगा मंच 👉पीवीआर एक्वा – गाजियाबाद 👉 ग्रोवेल फीड – लखनऊ 👉 देवी फीड्स – बाराबंकी 👉 फिश व्हाइट – वाराणसी 👉 मणि एग्रो हब – मुरादाबाद 👉 एबिस ग्रुप – अयोध्या 👉 दयाल ग्रुप – लखनऊ 👉 एडवांस फिश फार्म – मेरठ डेयरी क्षेत्र की देश-प्रदेश की 14 कंपनियों की रहेगी मौजूदगी 👉 नमस्ते इंडिया 👉 गंगोल सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ लिमिटेड 👉 भारत एसकेवाईआर एंड दूध प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड 👉 सिंहानिया मिल्क प्रोडक्ट्स प्रा. लि. (मलाई धारा) 👉 वीआरएस फूड्स लिमिटेड 👉 क्रीमी फूड्स लिमिटेड 👉 सीपी मिल्क एंड फूड प्रोडक्ट्स प्रा. लि. (ज्ञान डेयरी) 👉 भोले बाबा मिल्क 👉 अमूल (गुजरात को-ऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन लिमिटेड) 👉 न्यू एरा डेयरी इंजीनियर्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड 👉 ज्यूड्स मिल्क 👉 अल्फा मिल्क फूड 👉 श्याम डेयरी 👉 पराग डेयरी वर्जन  उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो के चतुर्थ संस्करण (25 से 29 सितंबर) के आयोजन में डेयरी व मत्स्य विभाग की भी महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी। अतिथि व आगंतुक दुग्ध-मत्स्य क्षेत्र में उत्तर प्रदेश की प्रगति से रूबरू होंगे। आयोजन में दुग्ध उत्पादकों, मत्स्य पालकों, स्टेक होल्डर्स, कंपनियों आदि की भी सहभागिता रहेगी। दोनों विभागों की तैयारी पूरी हो गई है। धनलक्ष्मी के.  दुग्ध आयुक्त/महानिदेशक, मत्स्य उत्तर प्रदेश

राज्यसभा की 10 सीटों पर यूपी में सियासी हलचल, सपा को 2 सीटों की उम्मीद

लखनऊ यूपी में राज्यसभा की 10 सीटों और विधान परिषद की 11 सीटों को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है. अगले दो महीने में इन सीटों के लिए चुनाव और चयन की पूरी प्रक्रिया पूरी होगी. राज्यसभा की इन 10 सीटों का कार्यकाल 25 नवंबर को खत्म हो रहा है, जिनमें बीजेपी की 8, सपा की 1 और बसपा की 1 सीट शामिल है. बसपा के राज्यसभा से पूरी तरह खाली होने के बीच अब सबकी नजर बीजेपी और एनडीए के अतिरिक्त वोटों पर टिकी है, जबकि सपा के खाते में 2 सीटों का गणित बनता दिख रहा है।  लखनऊ से मिली जानकारी के मुताबिक, अक्टूबर और नवंबर में त्योहारों के साथ-साथ सियासी समीकरण भी तेजी से बदलेंगे. जिन बीजेपी सदस्यों का कार्यकाल खत्म हो रहा है, उनमें पूर्व डीजीपी बृजलाल, सीमा द्विवेदी, नीरज शेखर, गीता शाक्य, हरदीप सिंह पुरी, अरुण सिंह और बीएल वर्मा शामिल हैं. डॉ. दिनेश शर्मा का कार्यकाल भी 25 नवंबर तक था, लेकिन अंडमान-निकोबार के एलजी बनने के बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया, इसलिए उनकी सीट पर भी अब चुनाव होगा. इसके अलावा सपा के वरिष्ठ नेता रामगोपाल यादव और बसपा के रामजी गौतम का कार्यकाल भी समाप्त हो रहा है।  सूत्रों की मानें तो अक्टूबर के दूसरे पखवाड़े में राज्यसभा चुनाव का कार्यक्रम घोषित हो सकता है. आमतौर पर अधिसूचना जारी होने से लेकर मतगणना तक पूरी प्रक्रिया में करीब 20 दिन का समय लगता है. यूपी विधानसभा में कुल 403 सीटें हैं, लेकिन पिछले एक साल में 6 विधायकों के निधन के बाद अभी विधायकों की संख्या 397 रह गई है. मौजूदा गणित के हिसाब से राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए करीब 37 विधायकों के वोट चाहिए होंगे।  बसपा विधानसभा में पहले ही शून्य हो चुकी है और रामजी गौतम का कार्यकाल खत्म होते ही पार्टी राज्यसभा में भी शून्य हो जाएगी. सपा के पास 101 विधायक हैं, जिससे उसे 2 सीटें मिलने का रास्ता बनता है और करीब 7 वोट अतिरिक्त बच जाएंगे. वहीं बीजेपी के पास 256 विधायक हैं और सहयोगी दलों को जोड़कर एनडीए का आंकड़ा करीब 289 बताया जा रहा है।  तीन निर्दलीय विधायकों और राजा भैया की पार्टी के 2 विधायकों के समर्थन से यह आंकड़ा 294 तक पहुंच जाता है, हालांकि सुभासपा के 2 विधायकों के सपा की तरफ झुकाव के चलते एनडीए की असल ताकत करीब 292 ही मानी जा रही है. इस हिसाब से बीजेपी और उसके सहयोगी दल 7 सीटें आसानी से जीत सकते हैं, लेकिन उसके बाद भी एनडीए के पास वोट बचेंगे जिससे दूसरी पसंद के वोट 10वीं सीट का फैसला कर सकते हैं। 

गोंडा में बिजली मीटर की रीडिंग में गड़बड़ी, 16 हजार यूनिट हेराफेरी से मचा हड़कंप

लखनऊ यूपी के विद्युत वितरण क्षेत्र देवीपाटन मंडल में बकाया वसूली और लाइन लॉस घटाने के महा अभियान में बड़ी गड़बड़ी पकड़ी गई है। गोंडा जिले में बड़गांव खण्ड प्रथम के परसोनी बनवारा में 16853 यूनिट की स्टोर रीडिंग पकड़ी गई। रीडिंग में 16 हजार यूनिट की हेराफेरी सामने आई है। बडगांव उपखण्ड अधिकारी भरत सिंह ने संबंधित मीटर रीडर और कार्यदायी संस्था टेरासॉफ्ट के विरुद्ध कार्रवाई की संस्तुति की है। मुख्य अभियंता यदुनाथ यथार्थ के निर्देश पर उत्तरी, खरगूपुर, चांदपुर, शिवपुरा, चरचरी, चौधरीडीह और रहवा जैसे हाई लॉस फीडरों पर 10 से 15 टीमें तैनात की गई हैं। ये टीमें घर-घर जाकर बकाया जमा करा रही हैं और नेवर पेड उपभोक्ताओं को नोटिस दे रही हैं। नोटिस के बाद भी भुगतान न करने पर संयोजन काटे जाएंगे। जांच में गोण्डा में 15, बहराइच में 12 और बलरामपुर-श्रावस्ती में 14 कुल 41 जगह बिजली चोरी पकड़ी गई, जिन पर एफआईआर की कार्रवाई की जा रही है। सोमवार को गोंडा जिले में 743 नोटिस पर 44.47 लाख, बहराइच में 790 नोटिस पर 65.17 लाख और बलरामपुर-श्रावस्ती में 939 नोटिस पर 55.13 लाख की वसूली हुई। मुख्य अभियंता यदुनाथ यथार्थ ने कहा कि बकाया बिलों का समय से भुगतान कर उपभोक्ता विद्युत व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने में सहयोग करें। उन्होंने दो टूक कहा कि विभागीय कार्यों में लापरवाही बरतने, स्टोर रीडिंग करने वाले को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जायेगा और उनके विरुद्ध कठोर कार्रवाई जारी रहेगी। रामापुर में 40 कनेक्शन काटे : अधिशासी अभियंता रणबीर सिंह के निर्देश पर विद्युत दुबहा गांव में सघन विद्युत चेकिंग अभियान एवं राजस्व वसूली कैंप का आयोजन किया गया। इस कार्रवाई से बकायादारों और बिजली चोरी करने वालों में हड़कंप मचा रहा। अभियान के दौरान विद्युत विभाग की टीम ने बड़े पैमाने पर जांच की। बकाया भुगतान न करने पर लगभग 40 उपभोक्ताओं के बिजली कनेक्शन मौके पर ही काट दिए गए। वहीं, 15 उपभोक्ताओं ने कार्रवाई से बचते हुए मौके पर ही 65,000 रुपये का राजस्व जमा कराया। जांच के दौरान 5 उपभोक्ताओं के मीटर में रीडिंग स्टोर पाई गई, जिसे टीम ने मौके पर ही अपडेट कर नया बिल जारी किया। अवर अभियंता अर्जुन कुमार पाल ने सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि यदि किसी भी व्यक्ति ने बिना बकाया जमा किए चोरी से दोबारा केबल जोड़ने का प्रयास किया, तो उसके खिलाफ विद्युत अधिनियम की धारा दर्ज कर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। छोटे फाल्ट को ठीक करने में लग रहे 14 से 20 घंटे, लोग परेशान परसपुर में नगर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में कटौती को लेकर उपभोक्ताओं में नाराजगी है। नगर के गिरीश नारायण सिंह सहित अन्य उपभोक्ताओं का कहना है आए दिन रात करीब 9-10 बजे लाइन में फाल्ट होने से बिजली कट जाती है। छोटे फाल्ट को ठीक करने में भी 14 से 20 घंटे तक का समय लग जा रहा है। गर्मी में रातभर बिजली न रहने से वृद्धों, बीमारों और छोटे बच्चों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। बताते हैं कुछ प्रभावशाली लोगों के कनेक्शन को दूसरे फेस से जोड़कर आपूर्ति बहाल कर दी जाती है, जबकि उड़े वाले फेस से जुड़े सैकड़ों परिवार पूरी रात बिजली के इंतजार में रात काटनी पड़ रही हैं। कुछ सक्षम लोग मजबूरी में जनरेटर चलाते हैं, जिससे ध्वनि और वायु प्रदूषण की समस्या भी बढ़ती है। उपभोक्ताओं ने अधिकारियों से मांग की है कि फाल्ट होने पर तत्काल मरम्मत की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए और विद्युत आपूर्ति शीघ्र बहाल हो। साथ ही चेतावनी दी है कि व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो नगरवासी उच्च अधिकारियों और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि से शिकायत करेंगे।

अब कोई सैफई सिंडिकेट प्रतिभावान छात्रों के हितों पर डकैती डालने का दुस्साहस नहीं कर सकता: मुख्यमंत्री

नियुक्ति पाने वालों से पैसे मांगने वाले को जेल में सड़ना पड़ेगा: सीएम योगी अब कोई सैफई सिंडिकेट प्रतिभावान छात्रों के हितों पर डकैती डालने का दुस्साहस नहीं कर सकता: मुख्यमंत्री पिछले एक सप्ताह में 5297 युवाओं को नियुक्ति पत्र मिले, हम नियुक्ति पत्र देते जाएंगे, सैफई सिंडिकेट गिनती रहे: सीएम योगी जिनके कारनामों से प्रदेश थर्राता था और दुनिया शक की निगाहों से देखती थी, वे आज उपदेश देते फिर रहे: मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग द्वारा चयनित 3567 अभ्यर्थियों को वितरित किए नियुक्ति पत्र चयनितों में प्रधानाचार्य, प्रधानाध्यापक, प्रवक्ता (पीजीटी) और सहायक अध्यापक (टीजीटी) के पद शामिल 2015-16 में जिस अभ्यर्थी से मांगे गए थे आठ लाख रुपये, उसी अभ्यर्थी का सपना हुआ साकार: मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री ने कहा- शिक्षक केवल नौकरी नहीं, नए भारत के निर्माण की आधारशिला तैयार करने का दायित्व संभालें लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग द्वारा चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र वितरित करते हुए कहा कि अब कोई सैफई सिंडिकेट प्रतिभावान छात्रों के हितों पर डकैती डालने का दुस्साहस नहीं कर सकता। इसीलिए उत्तर प्रदेश पुलिस में अच्छा काम करने वाले अधिकारियों को आयोग और बोर्डों की दिशा-दशा सुधारने का दायित्व दिया गया है। पहले युवाओं को उनके अधिकार से वंचित कर दिया जाता था। लेकिन, अब नियुक्ति पाने वाले किसी भी अभ्यर्थी से पैसे की मांग करने वाले को जेल में सड़ना पड़ेगा। आज का कार्यक्रम केवल नियुक्ति पत्र वितरण का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि उत्तर प्रदेश की माध्यमिक शिक्षा से जुड़े चारों स्तंभ, सहायक अध्यापक, प्रवक्ता, प्रधानाध्यापक और प्रधानाचार्य को एक साथ जोड़ने वाला विशेष अवसर है। यहां 3,567 लोगों का चयन कर उनके हाथों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के आत्मनिर्भर एवं विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने का महत्वपूर्ण दायित्व दिया गया है।  हम नियुक्ति पत्र देते जाएंगे, वे गिनते जाएं मुख्यमंत्री ने कहा कि आज 3,567 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दिए जा रहे हैं और पिछले एक सप्ताह में वह 5,297 युवाओं को नियुक्ति पत्र वितरित कर चुके हैं। पिछले नौ वर्ष में 9.5 लाख युवाओं को नियुक्ति पत्र वितरित किए गए हैं। हमने सैफई सिंडिकेट से कहा है कि हम नियुक्ति पत्र देते जाएंगे, वे गिनते जाएं। सीएम ने तंज कसा कि यदि गिनती नहीं आती हो तो शिवपाल जी के सानिध्य में बैठ जाएं, बहुत अच्छी गिनती सीख जाएंगे।  2015-16 में घूसखोरी का शिकार बने युवा का सपना साकार मुख्यमंत्री ने हाल में नियुक्ति पत्र प्राप्त करने वाले एक नौजवान के इंटरव्यू का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उस युवक की आंखों में आंसू भरे थे और उसने बताया कि 2015-16 में भी उसने इस पद के लिए आवेदन किया था। उससे आठ लाख रुपये की मांग की गई थी। वह खेत बेचकर पैसा लेकर आया, लेकिन तब तक उससे अधिक पैसा देने वाला दूसरा व्यक्ति आ गया और वह नौकरी से वंचित रह गया। आज उसका सपना साकार हुआ है और जिस पद के लिए उसने आवेदन किया था, उसी पद पर उसे नियुक्ति मिल गई है। पूरी प्रक्रिया निरस्त की गई और उस युवा को नियुक्ति पत्र प्राप्त हुआ।  किसी ने लेनदेन की बात की तो जेल में सड़ेगा मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने कैशलेस चिकित्सा सुविधा सभी शिक्षकों को दी है। यह सुविधा शासकीय सहायता प्राप्त विद्यालयों के शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को भी दी गई है। बेसिक शिक्षा में रसोइयों, शिक्षामित्रों और अन्य संबंधित कर्मियों को भी इसका लाभ दिया गया है, जिससे वे निश्चिंत होकर कार्य कर सकें। किसी भी शिक्षक को ज्वाइनिंग में दिक्कत नहीं होनी चाहिए। यदि किसी प्रबंधक की कोई जिज्ञासा है तो वह शासन के समक्ष उपलब्ध कराए, लेकिन नियुक्ति पत्र प्राप्त होने के बाद यदि किसी प्रधानाचार्य, प्रधानाध्यापक, प्रवक्ता या शिक्षक से किसी ने लेनदेन की बात की तो उसे जेल में सड़ना पड़ेगा। हमें सख्त सख्त कार्रवाई पर मजबूर होना पड़ेगा। अगले छह महीने में एक लाख और युवाओं को सरकारी नौकरी मुख्यमंत्री ने कहा कि नौ साल में साढ़े नौ लाख युवाओं को सरकारी नौकरी दी गई है। अगले छह महीने के अंदर एक लाख और युवाओं को सरकारी नौकरी देने जा रहे हैं। जब लोग परिणाम पूछते हैं तो मैं कहता हूं कि परिणाम यह है कि जो उत्तर प्रदेश नौ वर्ष पहले बीमारू राज्य कहा जाता था, आज भारत की अर्थव्यवस्था का ग्रोथ इंजन बना हुआ है। बॉटम फाइव से टॉप-थ्री में आया है। उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को तीन गुना करने और प्रति व्यक्ति आय को तीन गुना करने में सफलता मिली है। यही युवाओं की ऊर्जा और प्रतिभा है। यूपी के सामने पहचान का संकट खड़ा किया गया था सीएम योगी ने कहा कि आज यूपी के नौजवानों के लिए पूरी दुनिया खुली है। जिन लोगों ने उनके सामने पहचान का संकट खड़ा किया था, वे यहां नौकरी देते नहीं थे और दुनिया ‘यूपी वाला’ कहकर हमारे युवाओं को शक की निगाहों से देखती थी। जिनके कारनामों से प्रदेश थर्राता था, वही लोग आज उपदेश देते फिर रहे हैं। आज नियुक्ति पाने वालों में बहुत से ऐसे होंगे जिन्होंने पहली बार प्रतियोगी परीक्षा दी होगी। कई ऐसे भी होंगे जिन्हें पहले अवसर नहीं मिला होगा। यदि किसी ने पहली बार प्रतियोगी परीक्षा दी है तो स्वाभाविक रूप से दस वर्ष पहले उसकी उम्र 13 से 16-17 वर्ष के बीच रही होगी। उस उम्र में बच्चा मां-बाप पर ज्यादा आश्रित रहता है और माता-पिता उसकी हर जरूरत पूरी करने में योगदान देते हैं। ऐसे बच्चों को यह बताने की आवश्यकता है कि 2017 के पहले क्या होता था। परीक्षा कोई देता था और नियुक्ति पत्र उसे दिया जाता था, जिसने फॉर्म तक नहीं भरा होता था। यह अराजकता, बेईमानी और भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा थी। एक शिक्षक 100 छात्रों से संवाद करे तो 3,567 शिक्षक 3.5 लाख से अधिक बच्चों का मार्गदर्शन करेंगे मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि एक शिक्षक प्रतिवर्ष 100 छात्रों के साथ इंटरेक्शन करता है तो 3,567 शिक्षक एक वर्ष में 3.5 लाख से अधिक बच्चों के साथ संवाद और उनका मार्गदर्शन करेंगे। बच्चों को गाइड करना, उनका मार्गदर्शन करना ही नए भारत की आधारशिला है। भारत … Read more

योगी सरकार के जीरो टॉलरेंस को वैज्ञानिक जांच की धार, मुख्यमंत्री योगी के निर्देश पर 75 जिलों की पुलिस होगी अपग्रेड

यूपी में अपराधियों पर और कसेगा शिकंजा, ‘स्पेशल 32’ संभालेंगे क्राइम सीन मैनेजमेंट योगी सरकार के जीरो टॉलरेंस को वैज्ञानिक जांच की धार, मुख्यमंत्री योगी के निर्देश पर 75 जिलों की पुलिस होगी अपग्रेड छह बैच में प्रशिक्षित 600 अफसरों में से चुने गए 32 विशेषज्ञों को फॉरेंसिक साइंस और क्राइम सीन मैनेजमेंट की मास्टर ट्रेनिंग लखनऊ उत्तर प्रदेश में अपराधियों के खिलाफ अब और सख्ती की तैयारी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति को अब वैज्ञानिक जांच की धार देने की कवायद शुरू की गई है। अपराध के बाद घटनास्थल पर छूटे साक्ष्यों को सुरक्षित रखने और वैज्ञानिक तरीके से जांच को आगे बढ़ाने के लिए पुलिस के ‘स्पेशल 32 अफसर’ तैयार किए जा रहे हैं। छह बैच में 100-100 अफसरों को 40 दिन का प्रशिक्षण दिए जाने के बाद चयनित इन 32 अधिकारियों को अब फॉरेंसिक साइंस और क्राइम सीन मैनेजमेंट में मास्टर ट्रेनिंग दी जा रही है। आगे इनकी विशेषज्ञता का इस्तेमाल सभी 75 जिलों में पुलिस की क्राइम सीन मैनेजमेंट क्षमता को मजबूत करने में किया जाएगा। अब वैज्ञानिक तरीके से घटनास्थल को सुरक्षित कर छोटे से छोटे साक्ष्य की पहचान के जरिए जांच को मजबूत आधार मिलेगा। इसके साथ ही अपराधियों के खिलाफ तेजी से सख्त कार्रवाई की जा सकेगी। इसी सोच के साथ उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट आफ फॉरेंसिक साइंस (UPSIFS), लखनऊ में 32 अधिकारियों को मास्टर ट्रेनिंग के जरिए विशेष रूप से तैयार कर रहा है। प्रशिक्षण में कृत्रिम घटनास्थल तैयार कर अधिकारियों की व्यावहारिक दक्षता भी परखी जाएगी। 600 की ट्रेनिंग से चुने गए ‘स्पेशल अफसर’ छह बैच में 100-100 पुलिस अधिकारियों को पहले ही 40 दिन का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इन अधिकारियों ने अपने-अपने जिलों में अन्य पुलिसकर्मियों को भी प्रशिक्षित किया। अब इन्हीं प्रशिक्षित अधिकारियों में से चयनित टॉप 32 अफसरों को फॉरेंसिक और क्राइम सीन मैनेजमेंट में विशेषज्ञता के अगले स्तर तक ले जाया जा रहा है। यूपीएसआईएफएस के संस्थापक निदेशक डॉ. जीके गोस्वामी ने बताया कि यह स्पेशल ट्रेनिंग उन पुलिस अधिकारियों को दी जा रही है, जो प्रशिक्षण के दौरान टॉप पर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस बार पुलिस अधिकारियों की व्यावहारिक दक्षता को और बेहतर किया जाएगा। इसके लिए कृत्रिम घटनास्थल तैयार कर उनकी क्षमता का परीक्षण भी किया जाएगा। क्राइम सीन मैनेजमेंट पर विशेष ध्यान देने की जरूरत : डॉ. जीके गोस्वामी  डॉ. गोस्वामी ने कहा कि आपराधिक जांच में आने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए क्राइम सीन मैनेजमेंट पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। इसी उद्देश्य से यूपीएसआईएफएस ने हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग की पहल की है। फॉरेंसिक साइंस और क्राइम सीन मैनेजमेंट की मास्टर ट्रेनिंग में व्यावहारिक अनुभव यानी एक्सपीरिएंशियल लर्निंग पर जोर दिया जा रहा है। विशेषज्ञों के लेक्चर के साथ हैंड्स-ऑन सेशन के जरिए अधिकारियों को विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी जा रही है। हर सुराग की होगी वैज्ञानिक पड़ताल प्रशिक्षण में घटनास्थल से तलाशी और जब्ती के नियम, क्राइम सीन नोट्स, फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी, पहचान और साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया पर फोकस किया जा रहा है। फिंगरप्रिंट और खून के नमूने जैसे साक्ष्यों को वैज्ञानिक तरीके से पहचानने और सुरक्षित रूप से एकत्र करने की बारीकियां भी सिखाई जा रही हैं। इसका उद्देश्य यह है कि घटनास्थल पर मौजूद महत्वपूर्ण साक्ष्य अनदेखे न रह जाएं और उन्हें सही तरीके से संरक्षित कर आगे की विवेचना में इस्तेमाल किया जा सके। इससे जांच को साक्ष्य आधारित मजबूत आधार मिलने की संभावना बढ़ेगी। दिन हो या रात, हर क्राइम सीन की तैयारी प्रशिक्षण में दिन और रात के अलग-अलग समय तथा विभिन्न स्थानों पर क्राइम सीन समेत व्यावहारिक जानकारी भी दी जा रही है। इसके अलावा वास्तविक घटनास्थल पर आने वाली चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए अधिकारियों को फील्ड वर्क का महत्व समझाया जा रहा है। पुलिस अधिकारियों को ऐसी परिस्थितियों से निपटने के लिए भी तैयार किया जा रहा है, जहां अपराध के साक्ष्य नष्ट करने, साक्ष्य छिपाने या गलत जानकारी देने का प्रयास किया जा सकता है। इसके जरिए घटनास्थल को सुरक्षित रखने और वैज्ञानिक जांच की प्रक्रिया को व्यवस्थित ढंग से आगे बढ़ाने पर जोर है। ‘स्पेशल 32’ बनेंगे विशेषज्ञ कड़ी छह बैच में प्रशिक्षित 600 अफसरों के बाद अब 32 अधिकारियों को मास्टर ट्रेनिंग देने से प्रशिक्षण व्यवस्था को अगले स्तर पर ले जाने की तैयारी है। इनकी विशेषज्ञता का लाभ आगे जिलों में क्राइम सीन मैनेजमेंट से जुड़े अन्य पुलिस अधिकारियों की क्षमता बढ़ाने में लिया जा सकेगा। इस पूरी कवायद का बड़ा उद्देश्य अपराध की जांच में घटनास्थल, सुराग, वैज्ञानिक साक्ष्य और विवेचना के बीच की कड़ी को मजबूत करना है। साक्ष्यों का बेहतर संरक्षण और वैज्ञानिक तरीके से संग्रह जांच को बेहतर आधार देगा और न्यायिक प्रक्रिया में तथ्य प्रस्तुत करने की गुणवत्ता को भी मजबूत करेगा। जीरो टॉलरेंस को मिलेगी वैज्ञानिक जांच की धार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर अपराध के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति के साथ पुलिस की जांच व्यवस्था को भी लगातार मजबूत करने पर जोर है। प्रदेशवासियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने वाली व्यवस्था में गंभीर अपराधों के घटनास्थल से साक्ष्य जुटाने और उनकी वैज्ञानिक जांच की क्षमता महत्वपूर्ण है। ‘स्पेशल 32’ इसी व्यवस्था की विशेषज्ञ कड़ी होंगे। इनका प्रशिक्षण पूरा होने के बाद इनके अनुभव और विशेषज्ञता का इस्तेमाल व्यापक पुलिस प्रशिक्षण में किया जाएगा, जिससे 75 जिलों में क्राइम सीन मैनेजमेंट और वैज्ञानिक विवेचना की क्षमता को और मजबूत करने की दिशा में काम आगे बढ़ सकेगा।

मीरजापुर के कालीन कारोबार को मिलेगी वैश्विक पहचान

मीरजापुर योगी सरकार की ओर से उद्योग एवं व्यापार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से नोएडा में 25 सितंबर से उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो (यूपीआईटीएस) का आयोजन किया जा रहा है। प्रदेश सरकार की यह पहल मीरजापुर के कालीन उद्योग को वैश्विक बाजार में नई पहचान दिलाने में मील का पत्थर साबित होगी। इस ट्रेड शो में जनपद के 10 कालीन कारोबारी व 2 मिष्ठान कारोबारी हिस्सा लेकर अपने उत्पादों का प्रदर्शन करेंगे। इस आयोजन में देश-विदेश से आने वाले कारोबारियों और 86 देशों के आयातकों को मीरजापुर में तैयार होने वाले आकर्षक कालीन, दरी और अन्य हस्तशिल्प उत्पादों को करीब से देखने का अवसर मिलेगा। इससे स्थानीय कालीन कारोबारियों को नए बाजार और विदेशी खरीदारों से जुड़ने का मंच मिलेगा। जिला उद्योग प्रोत्साहन एवं उद्यमिता विकास केंद्र के उपायुक्त संदीप कुमार ने बताया कि इंटरनेशनल ट्रेड शो मीरजापुर के कालीन उद्योग को नई उड़ान देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच अंतरराष्ट्रीय कारोबार के बदलते परिदृश्य में स्थानीय कालीन कारोबारियों को नए विदेशी खरीदारों और कारोबारियों से संपर्क स्थापित करने का अवसर मिलेगा। इससे निर्यात के नए रास्ते खुलने की संभावना है। उन्होंने बताया कि ट्रेड शो में मेसर्स रमाशंकर कारपेट, मेसर्स शबनूर कारपेट, मेसर्स इस्तेखार कारपेट तथा मेसर्स बृजेश दरी एवं कारपेट हाल नंबर-9 में अपने उत्पाद प्रदर्शित करेंगे। वहीं मेसर्स परी हैंडीक्राफ्ट, मेसर्स आरएस हैंडीक्राफ्ट, मेसर्स नंदिनी हैंडीक्राफ्ट तथा मेसर्स चैंपियन ट्रेडर्स हाल नंबर-10 में उत्पादों का प्रदर्शन करेंगे। मेसर्स वन पैलेस ऑफ रग्स हाल नंबर-14 और मेसर्स आर्टलाइन क्रिएशन हाल नंबर-15 में अपने उत्पाद प्रदर्शित करेंगे। उपायुक्त ने बताया कि प्रदेश सरकार की एक जनपद एक उत्पाद (ओडीओपी) योजना मीरजापुर के कालीन उद्योग के लिए 'संजीवनी' साबित हुई है। ओडीओपी के माध्यम से मिलने वाली सुविधाओं और आर्थिक सहायता से कालीन कारोबार को प्रोत्साहन मिला है। कारोबार में वृद्धि का सकारात्मक असर कालीन बुनकरों की आर्थिक स्थिति पर भी पड़ा है। स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ने के साथ ही पारंपरिक कालीन निर्माण से जुड़े परिवारों को भी इसका लाभ मिल रहा है। विदेशी मेहमान चखेंगे लाल पेड़ा और बालूशाही का स्वाद उन्होंने बताया कि एक जिला, एक व्यंजन (ओडीओसी) के तहत मीरजापुर के लाल पेड़ा और बालूशाही जैसे प्रसिद्ध स्थानीय उत्पादों को भी इंटरनेशनल ट्रेड शो में वैश्विक मंच मिलेगा। ओम मिष्ठान भंडार और गुरुकृपा स्वीट्स हाल नंबर-16 में अपने उत्पाद प्रदर्शित करेंगे। ट्रेड शो में शामिल होने वाले विदेशी मेहमान मीरजापुर के प्रसिद्ध लाल पेड़े और बालूशाही का स्वाद भी चख सकेंगे। उपायुक्त ने बताया कि स्थानीय कालीनों के साथ मीरजापुर की पारंपरिक मिठाइयों की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुति से जिले के उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध होने की उम्मीद है। इंटरनेशनल ट्रेड शो के माध्यम से मीरजापुर की हस्तशिल्प और खाद्य उत्पादों की पहचान देश वैश्विक स्तर पर पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। इससे स्थानीय कारोबारियों, बुनकरों और कारीगरों को नए ग्राहक और बाजार मिलने के साथ ही जिले की पारंपरिक कला एवं उत्पादों को वैश्विक पहचान मिलेगी।

यूपीआईटीएस में युवाओं की भागीदारी को नया आयाम दे रही योगी सरकार, गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के विद्यार्थी बनेंगे आयोजन का हिस्सा

लखनऊ  उत्तर प्रदेश की योगी सरकार प्रदेश में आयोजित होने वाले उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो (यूपीआईटीएस) 2026 को केवल व्यापार और निवेश का मंच ही नहीं, बल्कि युवाओं और विद्यार्थियों के लिए सीखने, संवाद करने और वैश्विक कारोबारी वातावरण को समझने का अवसर बनाने पर भी जोर दे रही है। इसी क्रम में गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों की आयोजन में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है। विद्यार्थियों को आयोजन की विभिन्न गतिविधियों में उनकी रुचि और क्षमता के अनुरूप जिम्मेदारियां दी जा रही हैं। यह पहल विद्यार्थियों को कक्षा और परिसर से बाहर निकलकर वास्तविक कारोबारी, उद्यमिता और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के माहौल को समझने का अवसर देगी। आयोजन प्रबंधन से लेकर बी2बी बैठकों तक निभाएंगे भूमिका योजना के अनुसार 25 से 29 सितंबर के दौरान विद्यार्थियों की भागीदारी शटल संचालन, स्कैनिंग, सांस्कृतिक गतिविधियों, नॉलेज सेशन, इंफॉर्मेशन डेस्क और बी2बी मीटिंग्स सहित विभिन्न कार्यों में रहेगी। विद्यार्थियों को केवल दर्शक के रूप में नहीं, बल्कि आयोजन की व्यवस्थाओं में सक्रिय भूमिका निभाने वाले वालेंटियर्स के रूप में जोड़ा गया है।इसके लिए वालेंटियर्स की चार टीमें गठित की गई हैं। इन टीमों के माध्यम से विद्यार्थियों को आयोजन से जुड़ी अलग-अलग जिम्मेदारियों का व्यावहारिक अनुभव मिलेगा। छात्र सहभागिता के लिए फैकल्टी सुपरविजन और नोडल संपर्क की व्यवस्था भी की गई है। स्टार्टअप और उद्यमिता से सीधे जुड़ेंगे विद्यार्थी योगी सरकार की ओर से युवाओं को उद्यमिता और नवाचार से जोड़ने की दिशा में यूपीआईटीएस में विद्यार्थियों के लिए कई विशेष गतिविधियां प्रस्तावित हैं। इनमें यंग एंटरप्रेन्योर हंट के साथ स्टार्टअप/फाउंडर जोन प्रमुख है। स्टार्टअप और फाउंडर जोन में विद्यार्थियों को उद्यमियों एवं फाउंडर्स के साथ 15 मिनट की इंटरैक्शन का अवसर मिलेगा।इसके अलावा करियर कॉर्नर में इंटर्नशिप और लाइव प्रोजेक्ट से संबंधित अवसरों की जानकारी दी जाएगी। इससे विद्यार्थी उद्योग जगत की अपेक्षाओं, रोजगार के अवसरों और वास्तविक प्रोजेक्ट्स की कार्यप्रणाली को करीब से समझ सकेंगे। इंटरनेशनल पासपोर्ट’ से सीखेंगे वैश्विक व्यापार की बारीकियां छात्रों की सहभागिता को सीखने की गतिविधियों से जोड़ने के लिए इंटरनेशनल पासपोर्ट की भी व्यवस्था की गई है। इसमें विद्यार्थियों को 10 से 15 स्टांप अर्जित करने होंगे। इसके साथ फोटो इंस्टॉलेशन और अलग-अलग देशों को प्रदर्शित करने वाली कंट्री वॉल्स भी विद्यार्थियों के लिए आकर्षण का केंद्र रहेंगी। कॉलेज एक्सपो एंबेसडर्स के माध्यम से भी विद्यार्थियों की भागीदारी बढ़ाने की योजना है। इसके तहत प्रत्येक कॉलेज से प्रस्तावित रूप से 5 से 10 विद्यार्थी एंबेसडर के तौर पर जोड़े जा सकते हैं। एक्सपो पासपोर्ट से 8-10 डिस्कवरी टास्क छात्रों के लिए तैयार लर्निंग एंड रिकॉग्निशन एंड फ्रेमवर्क में एक्सपो पासपोर्ट को विशेष स्थान दिया गया है। इसके माध्यम से विद्यार्थियों को 8 से 10 डिस्कवरी टास्क्स पूरे करने होंगे। इसके अलावा 45 से 60 मिनट की गाइडेड थीम्ड ट्रेल्स भी आयोजित की जाएंगी। निर्धारित गतिविधियां पूरी करने वाले विद्यार्थियों को सर्टिफिकेट्स ऑन कंप्लीशन दिए जाएंगे। इस पूरी व्यवस्था का उद्देश्य विद्यार्थियों की यूपीआईटीएस में मौजूदगी को केवल भ्रमण तक सीमित न रखकर उसे अनुभवात्मक सीख से जोड़ना है। युवाओं को वैश्विक अवसरों से जोड़ने की दिशा में कदम गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों की यह भागीदारी यूपीआईटीएस को व्यापार, निवेश और शिक्षा के बीच सेतु बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित होगी। एक ओर विद्यार्थी आयोजन प्रबंधन और स्वयंसेवा का व्यावहारिक अनुभव हासिल करेंगे, वहीं दूसरी ओर उन्हें स्टार्टअप, फाउंडर्स, उद्योग, करियर अवसरों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार की गतिविधियों को नजदीक से देखने का अवसर मिलेगा। इस तरह योगी सरकार के नेतृत्व में यूपीआईटीएस में व्यापार और निवेश के साथ युवा सहभागिता, कौशल, उद्यमिता और अनुभवात्मक शिक्षा को भी आयोजन का हिस्सा बनाया जा रहा है।

यूपी विधान परिषद चुनाव: शिक्षक संघ ने खोले पत्ते, 7 सीटों पर उम्मीदवार घोषित

लखनऊ यूपी विधान परिषद चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया गया है। 11 विधान परिषद सीट के लिए 23 अक्टूबर को वोटिंग होगी और 27 अक्टूबर को नतीजे आएंगे। वहीं नामांकन की आखिरी तारीख 6 है। वहीं, विधान परिषद की खंड स्नातक और शिक्षक सीटों पर चुनाव के लिए उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ ने सोमवार को सात प्रत्याशी घोषित किए। फैजाबाद-गोरखपुर शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से तीन बार चुनाव जीतने वाले ध्रुव कुमार त्रिपाठी की सीट पर अभी निर्णय नहीं लिया गया है। सुरेश त्रिपाठी ने अध्यक्ष पद छोड़ दिया है और प्रमोद मिश्रा को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया है। बता दें कि 23 अक्टूबर को होने वाले विधान परिषद की शिक्षक और स्नातक कोटे की 11 सीटों के चुनाव के लिए भाजपा ने पांच कैंडिडेट के नाम पहले ही घोषित कर दिए हैं। भाजपा ने इन पांचों सीटों पर मौजूदा एमएलसी को ही दोबारा टिकट दिया है। 11 सीटों में फिलहाल छह भाजपा, तीन सपा, एक शिक्षक दल और एक निर्दलीय के पास है। इन्हें मिला टिकट उप्र माध्यमिक शिक्षक संघ की राज्य परिषद की बैठक में वाराणसी खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से डॉक्टर प्रमोद कुमार मिश्रा, लखनऊ खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से जगजीवन प्रसाद शुक्ला, बरेली-मुरादाबाद खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से डा. सुनीत गिरि, आगरा खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से डा. दिलीप कुमार अमौरिया, मेरठ खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से डॉक्टर सुशील कुमार पुंडीर, वाराणसी खंड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से चौधरी दिनेश चंद्र रॉय और मेरठ खंड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से डॉक्टर अमित जैन को प्रत्याशी बनाया गया है। इस सीट से अभी किसी को नहीं मिला टिकट उप्र माध्यमिक शिक्षक संघ से फैजबाद-गोरखपुर खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से एमएलसी ध्रुव कुमार त्रिपाठी की सीट पर अभी किसी को टिकट नहीं दिया गया है। यह सीट अभी छोड़ दी गई है। प्रदेशीय उपाध्यक्ष व प्रवक्ता डा. आरपी मिश्रा ने बताया कि इस सीट पर चुनाव लड़ने के लिए किसी भी प्रत्याशी ने अभी तक दावा नहीं किया गया। ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने भी टिकट नहीं मांगा है। सूत्रों की मानें तो ध्रुव कुमार त्रिपाठी सत्ताधारी दल से टिकट मिलने की आस में अभी इंतजार कर रहे हैं। वहीं इलाहाबाद-झांसी खंड शिक्षक सीट पर उप्र माध्यमिक शिक्षक संघ से चुनाव हार चुके सुरेश कुमार त्रिपाठी ने संगठन के अध्यक्ष का पद छोड़ दिया है। अब उप्र माध्यमिक शिक्षक संघ का कार्यकारी अध्यक्ष प्रमोद मिश्रा को बनाया गया है। सुरेश कुमार त्रिपाठी भी सत्ताधारी दल से खंड स्नातक चुनाव में टिकट की चाह रखते हैं और यही कारण है कि व्यक्तिगत कारणों से उन्होंने अध्यक्ष पद छोड़ दिया है। कभी विधान परिषद में उप्र माध्यमिक शिक्षक संघ के शर्मा गुट का दबदबा हुआ करता था। शिक्षक और खंड स्नातक की ज्यादातर सीटों पर उनके प्रत्याशी ही चुनाव जीतते रहे हैं।

यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो 2026: ग्लोबल मंच पर चमकेगा आगरा, 36 उद्यमी लगाएंगे 60 स्टाल

आगरा ग्रेटर नोएडा में 25 से 29 सितंबर तक आयोजित होने वाले 'उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो' (यूपीआईटीएस) 2026 में ताजनगरी के उद्यमी अपनी व्यापारिक क्षमता और हुनर की धमक दिखाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली उत्तर प्रदेश सरकार की इस शानदार पहल से आगरा के स्थानीय उद्यमियों, हस्तशिल्पियों और नवाचारियों को एक बड़ा ग्लोबल मंच उपलब्ध हो रहा है। इस वृहद आयोजन में आगरा जनपद की भागीदारी हर साल बढ़ रही है। इस वर्ष जिले के 36 उद्यमी यूपीआईटीएस में हिस्सा लेंगे, जिनके लिए 60 स्टाल आरक्षित किए गए हैं।  नवोदित और महिला उद्यमियों को बड़ा मंच यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में इस बार आगरा के विभिन्न वर्गों के उद्यमियों को अवसर दिया गया है। मेले में ओडीओपी ( एक जनपद एक उत्पाद) श्रेणी के तहत 8 इकाइयों के 10 स्टाल लगेंगे। इसके अलावा महिला उद्यमी, एमएसएमई और युवा उद्यमियों की श्रेणी में 7 इकाइयों के 7 स्टाल लगाए जा रहे हैं। इनमें 4 महिला उद्यमी और 3 युवा उद्यमी शामिल हैं, जो अपने नवाचार को वैश्विक खरीदारों के सामने पेश करेंगे। वहीं व्यापार को निर्यात के स्तर पर ले जाने के लिए 'नवोदित निर्यातक' श्रेणी में 17 इकाइयों के 25 स्टाल और 'नियमित निर्यातक' श्रेणी में 9 इकाइयों के 10 स्टाल लगाए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान के तहत भी एक इकाई पूरे उत्साह के साथ प्रतिभाग कर रही है। आगरा के शिल्प और हुनर की दिखेगी व्यापक रेंज ग्रेटर नोएडा के इंडिया एक्सपो मार्ट में सजने वाले इस ट्रेड शो में आगरा के उत्पादों की शानदार रेंज देखने को मिलेगी। स्टॉलों पर मुख्य रूप से आगरा का विश्व प्रसिद्ध लेदर उत्पाद, मार्बल स्टोन उत्पाद, फुटवियर, लेदर फुटवियर, होम डेकोर, कारपेट, हैंडीक्राफ्ट, हैंडलूम साड़ियां, गारमेंट्स, जरी जरदोजी और इमीटेशन ज्वेलरी का भव्य कलेक्शन प्रदर्शित किया जाएगा। विदेशी मेहमान और बड़े खरीदार आगरा की इस समृद्ध शिल्प कला और हुनर से सीधे रूबरू होंगे। लाइव किचन और लजीज व्यंजनों की रहेगी धूम यूपीआईटीएस में न केवल शिल्प बल्कि ताजनगरी के जायके की भी विशेष धूम रहेगी। ओडीओसी श्रेणी के तहत 5 इकाइयां हिस्सा ले रही हैं। ट्रेड शो में आने वाले देशी-विदेशी खरीदार आगरा के विश्व प्रसिद्ध पेठे का स्वाद चख सकेंगे। इसके साथ ही आगरा की पारंपरिक मिठाइयों व नमकीन का बेहतरीन डिस्प्ले किया जाएगा। एक विशेष 'लाइव किचन' भी यहां का प्रमुख आकर्षण होगी, जहां ताजे और स्वादिष्ट व्यंजन परोसे जाएंगे। वर्जन- उ.प्र. सरकार के प्रयासों से यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो स्थानीय उद्यमियों के लिए व्यापार विस्तार का एक बेहतरीन मंच बन चुका है। इस वृहद आयोजन से हमारे नवोदित और युवा उद्यमियों, विशेषकर महिला उद्यमियों को अंतरराष्ट्रीय व राष्ट्रीय खरीदारों से सीधा संवाद करने, बी2बी मीटिंग करने और अपने व्यापार को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का सुनहरा अवसर मिलेगा। विभाग द्वारा सभी प्रतिभागियों को हर संभव सहयोग व मार्गदर्शन प्रदान किया जा रहा है। शैलेंद्र कुमार, उपायुक्त उद्योग

75 आश्रमों में हर सप्ताह स्वास्थ्य जांच, निःशुल्क दवाएं; पेयजल, टीवी, पुस्तकालय और योग-ध्यान की भी सुविधा

लखनऊ  वृद्धावस्था में बुजुर्गों को सुरक्षित आश्रय के साथ स्वस्थ और सम्मानजनक जीवन मिले, इसके लिए योगी सरकार की ओर से वृद्धाश्रमों में सुविधाओं को लगातार बेहतर किया जा रहा है। समाज कल्याण विभाग की ओर से संचालित प्रदेश के सभी 75 वृद्धाश्रमों में नियमित साप्ताहिक स्वास्थ्य जांच शिविर आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं। इन शिविरों में चिकित्सकों की टीम आश्रम पहुंचकर बुजुर्गों की बीपी, शुगर, नेत्र और सामान्य स्वास्थ्य की जांच करती है। जरूरत के अनुसार उन्हें आवश्यक दवाएं भी निःशुल्क उपलब्ध कराई जाती हैं। हर सप्ताह डॉक्टरों की टीम, स्वास्थ्य पर विशेष निगरानी वृद्धाश्रमों में रहने वाले बुजुर्गों के स्वास्थ्य की नियमित निगरानी के लिए मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को साप्ताहिक स्वास्थ्य जांच शिविर आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं। डॉक्टरों की टीम आश्रमों में पहुंचकर संवासियों की स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों का परीक्षण करती है। बीपी, शुगर और नेत्र जांच के साथ सामान्य स्वास्थ्य की भी जांच की जाती है। आवश्यकता पड़ने पर जरूरी दवाएं निःशुल्क उपलब्ध कराई जाती हैं। इस व्यवस्था का उद्देश्य बुजुर्गों को नियमित स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ना और समय पर चिकित्सीय सहायता उपलब्ध कराना है। पेयजल से पुस्तकालय तक, दैनिक जीवन की सुविधाओं पर जोर समाज कल्याण विभाग की ओर से बुजुर्गों के दैनिक जीवन को सुविधाजनक बनाने के साथ उनके मानसिक और सामाजिक स्वास्थ्य का भी ध्यान रखा जा रहा है। वृद्धाश्रमों में स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था के साथ मनोरंजन के लिए टीवी और पुस्तकालय की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। बुजुर्गों को सक्रिय और सकारात्मक दिनचर्या से जोड़ने के लिए योग और ध्यान के सत्र भी आयोजित किए जा रहे हैं। विभाग की ओर से आश्रमों के बुनियादी ढांचे और दैनिक जीवन स्तर में सुधार की भी निरंतर निगरानी की जा रही है। आश्रय के साथ पेंशन और आयुष्मान का भी सहारा समाज कल्याण विभाग के निदेशक संजीव सिंह ने बताया कि वृद्धाश्रमों में सुविधाओं के विस्तार के साथ बुजुर्गों को आर्थिक और स्वास्थ्य सुरक्षा से जोड़ने पर भी सरकार का जोर है। प्रदेश के 75 वृद्धाश्रमों में वर्तमान में 6,607 बुजुर्ग रह रहे हैं। इनमें 4,901 पात्र वृद्धजनों को वृद्धावस्था पेंशन का लाभ मिल रहा है, जबकि 2,551 बुजुर्गों के आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 और 2026-27 में 1,073 नए बुजुर्गों को सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जोड़ा गया है।