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प्रदेशभर में प्राचीन पांडुलिपियों की खोज के लिए तेज हुआ सर्वे अभियान

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य सरकार भारतीय ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम उठा रही है। इसी क्रम में प्रदेश में ज्ञान भारतम् मिशन के तहत प्राचीन पांडुलिपियों की खोज, संरक्षण और डिजिटलीकरण का व्यापक अभियान तेज कर दिया गया है। योगी सरकार का उद्देश्य देश की प्राचीन बौद्धिक विरासत को सुरक्षित रखते हुए आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना है।       इस दौरान पर्यटन विभाग के अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात ने बताया कि भारत सरकार के ज्ञान भारतम मिशन के अंतर्गत दुर्लभ पाण्डुलिपियों के संरक्षण का कार्य किया जा रहा है। इस अभियान को गति प्रदान करते हुए सरकारी एवं गैर-सरकारी संस्थानों, मठों, मंदिरों, शैक्षणिक संस्थानों, निजी एवं सार्वजनिक पुस्तकालयों तथा व्यक्तियों के पास उपलब्ध पाण्डुलिपियों को स्कैन कर पोर्टल पर अपलोड कराया जाए, ताकि देश की सांस्कृतिक एवं बौद्धिक धरोहर का संरक्षण सुनिश्चित हो सके।       प्रदेशभर में चलाए जा रहे सर्वे अभियान के दौरान अब तक हजारों दुर्लभ पांडुलिपियों की पहचान की जा चुकी है। इनमें धर्म, दर्शन, आयुर्वेद, ज्योतिष, साहित्य, संगीत, इतिहास और भारतीय संस्कृति से जुड़ी महत्वपूर्ण पांडुलिपियां शामिल हैं। विशेष रूप से वाराणसी, अयोध्या और रामपुर में सबसे अधिक पांडुलिपियां प्राप्त हुई हैं, जिनमें कई सदियों पुरानी दुर्लभ हस्तलिखित सामग्री भी शामिल है।    राज्य सरकार द्वारा विश्वविद्यालयों, पुस्तकालयों, मठ-मंदिरों, निजी संग्रहकर्ताओं और शोध संस्थानों के सहयोग से विशेष सर्वे टीमों का गठन किया गया है। ये टीमें गांव-गांव और ऐतिहासिक स्थलों तक पहुंचकर प्राचीन दस्तावेजों और हस्तलिखित ग्रंथों का पता लगा रही हैं। मिशन के तहत पांडुलिपियों का वैज्ञानिक तरीके से संरक्षण, डिजिटलीकरण और सूचीकरण भी किया जाएगा ताकि शोधार्थियों और विद्यार्थियों को इसका लाभ मिल सके।     दरअसल, उत्तर प्रदेश सदियों से भारतीय ज्ञान परंपरा का प्रमुख केंद्र रहा है। काशी, अयोध्या, मथुरा और रामपुर जैसे शहरों में संस्कृत, फारसी, अरबी और हिंदी की अनेक दुर्लभ पांडुलिपियां सुरक्षित हैं। अब “ज्ञान भारतम् मिशन” के माध्यम से इन्हें व्यवस्थित रूप से संरक्षित किया जा रहा है। यह अभियान केवल दस्तावेजों के संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत की सांस्कृतिक पहचान और गौरव को पुनर्स्थापित करने का प्रयास भी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक विरासत और पारंपरिक ज्ञान को वैश्विक मंच पर स्थापित करने की दिशा में कार्य कर रहे हैं। ज्ञान भारतम् मिशन उसी विजन को आगे बढ़ाने वाला महत्वपूर्ण अभियान माना जा रहा है।

एडीए बोर्ड बैठक: जूता मंडी और ग्रेटर आगरा में तय हुई नई दरें, बड़े फैसले पास

आगरा आगरा विकास प्राधिकरण की 152वीं बोर्ड बैठक में बुधवार को ग्रेटर आगरा और जूता मंडी में भूमि की दरों पर मुहर लगाई गई। ग्रेटर आगरा में आवासीय भूखंड 33 हजार रुपये और जूता मंडी में भूतल पर 78 हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर से मिल सकेंगे। इसके अलावा एडीए की सीमा में 98 नए गांवों को भी शामिल किया जाने का फैसला हुआ। मंडलायुक्त नगेंद्र प्रताप की अध्यक्षता में एडीए बोर्ड बैठक में बुधवार को कई अहम फैसले हुए। ग्रेटर आगरा और जूता मंडी के अलावा ताजनगरी फेज-2 के जर्जर ईडब्ल्यूएस आवासों को गिराने और आवंटियों को दूसरी जगह शिफ्ट करने का निर्णय हुआ। वहीं, इनर रिंग रोड के टोल प्लाजा को मानसून से पहले चालू करने के निर्देश दिए गए हैं। बैठक में शहर के विकास, सीमा विस्तार और नई योजनाओं को लेकर कई प्रस्ताव सर्वसम्मति से पास हो गए।   बैठक में हुए यह निर्णय….. ग्राम रायपुर-रहनकलां में प्रस्तावित ग्रेटर आगरा योजना में आवासीय भूखंड (प्लॉट) की दर 33 हजार रुपये प्रति वर्गमीटर होगी। वहीं, ग्रुप हाउसिंग के लिए यह दर आवासीय से डेढ़ गुना लगभग 50 हजार और व्यावसायिक भूखंडों के लिए 66 हजार रुपये वर्ग मीटर होगी। सार्वजनिक सुविधाओं वाले भूखंड आवासीय दर पर ही मिलेंगे। ताजनगरी फेज-2 में प्राधिकरण द्वारा बनाए गए दुर्बल आय वर्ग के भवनों को गिराया जाएगा। आईआईटी रुड़की और पीडब्ल्यूडी की जांच में इन भवनों को जर्जर और खतरनाक घोषित किया गया है। मंडलायुक्त ने निर्देश दिए हैं कि यहां रहने वाले आवंटियों की सहमति लेकर उन्हें दूसरी जगह शिफ्ट किया जाए और उसके बाद इन जर्जर इमारतों को ध्वस्त कर यहां नई प्लानिंग की जाए। 98 गांव होंगे शामिल, 21 किए जाएंगे बाहर: प्राधिकरण के विकास क्षेत्र का दायरा अब और बढ़ जाएगा। एडीए की सीमा में 98 नए गांवों को शामिल करने के संशोधित प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। वहीं, पहले से अधिसूचित 19 पूरे गांव और 2 आंशिक गांवों को एडीए की सीमा से बाहर किया जाएगा। – मौजा पट्टी पचगई में पीपीपी मॉडल पर एक इंटरनेशनल इंडोर स्टेडियम बनाया जाएगा, जिसके लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। – खेरिया मोड़ के पास खाली पड़ी नजूल की जमीन को कब्जे में लेकर उसकी बाउंड्री कराई जाएगी। खेल विभाग के साथ मिलकर इसका इस्तेमाल खेल गतिविधियों के लिए होगा। – ककुआ-भांडई आवासीय योजना में कन्वेंशन सेंटर बनाने के लिए एजेंसी से अनुबंध की प्रक्रिया चल रही है। बोर्ड सदस्यों ने दिए ये सुझाव – बैठक में बोर्ड सदस्य शिवशंकर शर्मा और नागेंद्र दुबे गामा ने कई जनहित के मुद्दे उठाए। प्राधिकरण में नक्शा (मानचित्र) आवेदन के बाद हर हाल में एक महीने के भीतर उसका निस्तारण किया जाए। – ऐसी कॉलोनियां जो सहकारी आवास समितियों ने पास कराई थीं, लेकिन अब समितियां वजूद में नहीं हैं, उनका सर्वे कर उन्हें नगर निगम को हस्तांतरित किया जाएगा। – पुराने शहर में एएसआई संरक्षित स्मारकों से 100 मीटर के बाहर एनओसी की बाध्यता खत्म करने के मुद्दे पर भी आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए। मानसून से पहले शुरू होगा टोल प्लाजा मंडलायुक्त ने इनर रिंग रोड के दूसरे चरण में बन रहे नए टोल प्लाजा की भी समीक्षा की। इसका 80 फीसदी काम पूरा हो चुका है। उन्होंने एनएचएआई से एमओयू कर बारिश से पहले हर हाल में गुणवत्ता के साथ इसका निर्माण पूरा करने के निर्देश दिए हैं। बैठक में जिलाधिकारी मनीष बंसल, एडीए उपाध्यक्ष एम. अरुन्मौली, सचिव संजय कुमार, मुख्य अभियंता संजीव कुमार आदि मौजूद रहे।  

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को इन्वेस्ट यूपी से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों की समीक्षा की

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को इन्वेस्ट यूपी के अधिकारियों संग बैठक की। इस दौरान उन्होंने ग्राउंड ब्रेकिंग सेरेमनी (जीबीसी 5.0) की विस्तृत समीक्षा की। अधिकारियों ने मुख्यमंत्री जी को बताया कि 7 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव धरातल पर उतरने को तैयार हैं। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि जीबीसी 5.0 के अंतर्गत हर जनपद में निवेश हो, इसका विशेष रूप से ध्यान रखा जाए। उन्होंने जनपदों की पर कैपिटा  इनकम बढ़ाने पर जोर दिया और कहा कि इसके लिए मैन्युफेक्चरिंग पावर को बढ़ावा देना आवश्यक है। इस अवसर पर इन्वेस्ट यूपी के अधिकारियों ने विगत दिनों लीड्स 2025 रैंकिंग में उत्तर प्रदेश को मिले एग्जेम्प्लर अवार्ड को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को समर्पित किया। अधिकारियों ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व और मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश लॉजिस्टिक्स एवं इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में देश का अग्रणी राज्य बनकर उभरा है। मुख्यमंत्री ने इस पुरस्कार के लिए इन्वेस्ट यूपी के अधिकारियों को बधाई दी।  मुख्यमंत्री के समक्ष जीबीसी के दौरान पूरे आयोजन का विस्तार से ब्योरा प्रस्तुत किया गया। इसमें स्टेज डिजाइन से लेकर पाथवे, एग्जीबिशन लेआउट को भी प्रस्तुत किया गया। एग्जीबिशन को 8 जोन में विभाजित किया गया है। पहला जोन- व्हाई यूपी है, जिसमें उत्तर प्रदेश के बदले परिदृश्य को विस्तार से दिखाया जाएगा। जोन 2 में इंफ्रास्ट्रक्चरल ट्रांसफॉर्मेशन, जोन 3 में डिफेंस व एयरोस्पेस, जोन 4 में ईवी एवं ग्रीन एनर्जी सस्टेनिबिलिटी, जोन-5 में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफेक्चरिंग, जोन-6 में टेक्सटाइल्स, जोन-7 में टूरिज्म तथा जोन-8 में फूड प्रोसेसिंग सेक्टर में यूपी में आए सार्थक बदलाव को विस्तार से प्रदर्शित किया जाएगा।  मुख्यमंत्री जी ने कहा कि डिफेंस कॉरिडोर में भूमि की मांग तेजी से बढ़ी है। इसके सापेक्ष हमें भूमि की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर देना होगा। इसके अलावा उन प्रोजेक्ट्स में, जहां वर्षों पूर्व भूमि आवंटित की गई, लेकिन अब तक निवेश नहीं हुआ है। ऐसे प्रोजेक्ट्स के बारे में भी अद्यतन जानकारी हासिल की जानी चाहिए। मुख्यमंत्री जी ने कहा कि आज के समय में सबसे महत्वपूर्ण विषय एफडीआई को आमंत्रित करना है। इसके लिए व्यापक स्तर पर प्रयास करने होंगे। इसके साथ ही पब्लिक से जुड़े मुद्दे हमारी प्राथमिकता में होने चाहिए।  मुख्यमंत्री ने कहा कि एमओयू करते समय संस्थानों की पूरी पड़ताल/जानकारी अनिवार्य रूप से की जानी चाहिए। निवेशकों से जितना अच्छा व्यवहार होगा, समय से उनकी समस्याओं का निस्तारण करेंगे तो वह प्रदेश के लिए ब्रांड अंबेस्डर की तरह कार्य करेंगे। मुख्यमंत्री जी ने लैंडबैंक बढ़ाने पर जोर दिया। इनवेस्टमेंट पर दिए जाने वाले इंसेंटिव्स को इवेंट बनाकर निवेशकों का सम्मान करें और उनका मनोबल बढ़ाएं।  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश अब पारंपरिक औद्योगिक राज्य की छवि से आगे बढ़कर रक्षा निर्माण, इलेक्ट्रॉनिक्स, ग्रीन एनर्जी, डेटा सेंटर, लॉजिस्टिक्स और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग का उभरता हुआ राष्ट्रीय हब बन रहा है।  मुख्यमंत्री के समक्ष उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के अंतर्गत होने वाले उत्तर प्रदेश रक्षा व एफडीआई कॉन्क्लेव 2026 का प्रस्तुतिकरण भी किया गया। बताया गया कि “उत्तर प्रदेश रक्षा और एफडीआई कॉन्क्लेव 2026” प्रदेश की नई औद्योगिक रणनीति का बड़ा मंच साबित होगा, जिसका उद्देश्य उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर (यूपीडीआईसी) में रक्षा एवं एयरोस्पेस उद्योगों को आकर्षित करना, वैश्विक निवेशकों को जोड़ना और उद्योग, सरकार तथा रक्षा संस्थानों के बीच समन्वित इकोसिस्टम विकसित करना है।  कॉन्क्लेव लखनऊ में आयोजित किए जाने का प्रस्ताव है, जिसमें रक्षा मंत्रालय, डीपीएसयू, वैश्विक OEMs, रक्षा विशेषज्ञ, MSMEs और स्टार्टअप्स को एक मंच पर लाया जाएगा। एजेंडा में उत्तर प्रदेश की रक्षा विनिर्माण क्षमता, एयरोस्पेस निवेश, रोजगार प्रोत्साहन नीति 2024, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और डीपीएसयू की भूमिका जैसे विषयों पर विस्तृत पैनल चर्चाएं प्रस्तावित हैं। मुख्यमंत्री जी और रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के संबोधन के साथ बी2जी और बी 2बी इंटरैक्शन भी आयोजित किए जाने की योजना है।   कॉन्क्लेव के अपेक्षित परिणामों में निवेश समझौते (एमओयू), कॉरिडोर विस्तार का रोडमैप, टेस्टिंग एवं सर्टिफिकेशन इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास, उद्योग-सरकार साझेदारी और निवेशकों को स्पष्ट पॉलिसी सपोर्ट शामिल हैं। सरकार का उद्देश्य केवल निवेश आकर्षित करना नहीं बल्कि यूपी में एक दीर्घकालिक डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम तैयार करना है।  प्रस्तुतिकरण में उत्तर प्रदेश की रणनीतिक ताकतों को विस्तार से रेखांकित किया गया है। इसमें बेहतर कनेक्टिविटी, औद्योगिक भूमि की उपलब्धता, कुशल कार्यबल, सिंगल विंडो क्लीयरेंस, अनुसंधान एवं विकास सहयोग और मजबूत लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को प्रमुख आधार बताया गया। साथ ही डीआरडीओ, एचएएल, बीईएल, बोइंग, एयरबस, टाटा, अदाणी जैसी संस्थाओं और कंपनियों की संभावित भागीदारी का उल्लेख करते हुए कहा गया कि यूपी अब रक्षा और एयरोस्पेस निर्माण के लिए तेजी से पसंदीदा गंतव्य बन रहा है। बैठक में मुख्यमंत्री को इन्वेस्ट यूपी की विभिन्न डेस्क के कामकाज से भी अवगत कराया गया। बताया गया कि इलेक्ट्रॉनिक्स डेस्क उत्तर प्रदेश के सबसे प्रभावी निवेश क्षेत्रों में शामिल है। इस डेस्क के अंतर्गत 8,050 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश आवेदन प्राप्त हुए हैं। ऑटोमोबाइल डेस्क में 722 करोड़ रुपये के निवेश आवेदन प्राप्त होने की जानकारी दी गई है। जीसीसी डेस्क के अंतर्गत लगभग 2,487 करोड़, स्टील एंड सीमेंट डेस्क में लगभग 12,232 करोड़, टेक्सटाइल्स डेस्क में लगभग 1,321 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं।  बैठक में कंट्री डेस्क के कामकाज की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री को बताया गया कि जापान से लगभग 50 हजार करोड़ रुपये, सिंगापुर से 40 हजार करोड़ रुपये, जर्मनी और यूके से 5 हजार करोड़ रुपये, ताइवान से 3 हजार करोड़ रुपये, यूएई से 2,074 करोड़ रुपये और दक्षिण कोरिया से 1,600 करोड़ रुपये के संभावित निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। बताया गया कि सिंगापुर और जापान बिजनेस मिशन ट्रिप भी अगस्त में प्रस्तावित है। मुख्यमंत्री ने इन मिशन ट्रिप्स को अच्छे तरीके से संपन्न करने के निर्देश दिए हैं। सरकार का उद्देश्य इन मिशन ट्रिप्स के जरिए उत्तर प्रदेश को एशिया के बड़े विनिर्माण और टेक्नोलॉजी निवेश केंद्र के रूप में स्थापित करना है।

अडानी ग्रुप की एंट्री से चमकी JP की जमीन, खबर आते ही शेयरों में उछाल

कानपुर भारत की सबसे बड़ी प्राइवेट पोर्ट और लॉजिस्टिक्स ऑपरेटर कंपनी अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक जोन (APSEZ) ने आज घरेलू बाजार में एक बहुत बड़ा कॉर्पोरेट सौदा करने का ऐलान किया है। अडानी पोर्ट्स संकट में फंसी कंपनी जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड (JAL) के रेजोल्यूशन प्लान (दिवाला प्रक्रिया समाधान) के तहत जेपी फर्टिलाइजर्स एंड इंडस्ट्रीज लिमिटेड (JFIL) में 100% हिस्सेदारी खरीदने जा रही है। यह पूरा सौदा ₹1,500 करोड़ की नकद (Cash) डील के जरिए होगा। आइए जरा विस्तार से इसकी डिटेल्स जानते हैं। इस अधिग्रहण (Acquisition) के बाद जेपी फर्टिलाइजर्स की सहायक कंपनी कानपुर फर्टिलाइजर्स एंड केमिकल्स लिमिटेड (KFCL) पर अडानी पोर्ट्स का अप्रत्यक्ष (Indirect) नियंत्रण हो जाएगा। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस डील के जरिए अडानी ग्रुप को कानपुर में 243 एकड़ बेशकीमती इंडस्ट्रियल और कमर्शियल जमीन का मालिकाना हक मिल जाएगा, जो आने वाले समय में उत्तर भारत के व्यापार की दिशा बदल सकता है। उम्मीद की जा रही है कि इससे हजारों लोगों को नौकरियां मिलेंगी। भले ही यह सौदा एक फर्टिलाइजर कंपनी का दिख रहा हो, लेकिन अडानी पोर्ट्स की नजर इस कंपनी की कानपुर वाली जमीन पर है। अडानी ग्रुप इस 243 एकड़ जमीन का इस्तेमाल खाद बनाने के लिए नहीं, बल्कि उत्तर भारत में एक विशाल मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क (MMLP) और आधुनिक वेयरहाउसिंग (गोदाम) हब बनाने के लिए करने जा रहा है। रणनीतिक फायदा:- कानपुर को उत्तर भारत का एक प्रमुख व्यापारिक केंद्र माना जाता है। इस जमीन पर लॉजिस्टिक्स पार्क बनने से अडानी ग्रुप का जमीनी ट्रांसपोर्ट नेटवर्क (Inland Logistics) बेहद मजबूत हो जाएगा। कंपनी ने लक्ष्य रखा है कि साल 2031 तक वह देश में अपने मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स पार्कों की संख्या को 12 से बढ़ाकर 16 करेगी और अपनी वेयरहाउसिंग क्षमता को लगभग चार गुना तक बढ़ाएगी। कानपुर का यह प्रोजेक्ट इसी महा-प्लान का एक अहम हिस्सा है। जयप्रकाश एसोसिएट्स (Jaypee Group) लंबे समय से कर्ज के जाल में फंसी थी, जिसके समाधान के लिए नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) में दिवाला प्रक्रिया चल रही थी। इस साल की शुरुआत में वित्तीय लेनदारों (लेंडर्स) के बहुमत के समर्थन से एनसीएलटी ने जेपी एसोसिएट्स के लिए अडानी ग्रुप के ₹14,535 करोड़ के रेजोल्यूशन प्लान को मंजूरी दी थी। दिलचस्प बात यह है कि दिग्गज उद्योगपति अनिल अग्रवाल की कंपनी 'वेदांता' ने इसके लिए अधिक बोली लगाई थी, लेकिन बैंकों और कर्जदाताओं ने वेदांता के प्रस्ताव को खारिज कर अडानी के प्लान पर भरोसा जताया। अडानी पोर्ट्स ने शेयर बाजार को दी जानकारी में बताया कि जेपी एसोसिएट्स के लिए यह रेजोल्यूशन प्लान अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड द्वारा सबमिट किया गया था। इसे मार्च 2026 में NCLT (National Company Law Tribunal) की इलाहाबाद बेंच ने मंजूरी दी थी और बाद में मई 2026 में नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) ने भी इस फैसले को सही ठहराया। इस सौदे के लिए भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (Competition Commission of India) की जरूरी मंजूरी अगस्त 2025 में ही मिल चुकी थी। नियमों के अनुसार, 17 मार्च 2026 को मिली एनसीएलटी की मंजूरी के बाद अगले 90 दिनों के भीतर इस ₹1,500 करोड़ के अधिग्रहण की प्रक्रिया को पूरी तरह से फाइनल (Consummated) कर लिया जाएगा। अडानी पोर्ट्स (Adani Ports and Special Economic Zone Ltd) के शेयरों में आज (21 मई 2026) हल्की लेकिन सकारात्मक तेजी देखने को मिली। खबर लिखे जाने तक स्टॉक 0.78% चढ़कर ₹1,786.40 पर कारोबार कर रहा था। हाल ही में कानपुर फर्टिलाइजर्स (Kanpur Fertilizers) अधिग्रहण और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क विस्तार की खबरों ने निवेशकों का भरोसा मजबूत किया है। जून 2010 में बनी जेपी फर्टिलाइजर्स (JFIL) का सालाना टर्नओवर पिछले कुछ सालों में नाममात्र (FY24 में ₹25,000 और FY25 में ₹2,000) का रह गया था। लेकिन, अडानी ग्रुप के हाथों में आने के बाद इसकी खाली पड़ी जमीनों का उपयोग देश के लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए किया जाएगा। यह डील उत्तर प्रदेश में औद्योगिक विकास और रोजगार के नए रास्ते भी खोलेगी।

शामली-बागपत से दिल्ली तक फैला मिलावटी तेल का नेटवर्क, रोज 1 लाख लीटर खपाने का दावा

 शामली हरियाणा के बहालगढ़, यूपी के बागपत, शामली और मेरठ से डीजल व पेट्रोल की तस्करी केवल वेस्ट यूपी तक सीमित नहीं है, बल्कि दिल्ली, हरियाणा और देहरादून तक बड़े स्तर पर की जा रही है। गिरोह के सदस्य 72 से 80 रुपये प्रति लीटर तक डीजल-पेट्रोल उपलब्ध कराने का दावा कर रहे हैं। संवाददाता ने तस्करी के इस खेल की हकीकत जानने के लिए 12 दिन तक लगातार पड़ताल की। जांच में सामने आया कि हरियाणा के बहालगढ़, यूपी के शामली, बागपत और मेरठ से सस्ता तेल टैंकरों और ड्रमों के जरिये दिल्ली, बिजनौर, बुलंदशहर, हापुड़, सहारनपुर, मेरठ, गाजियाबाद और देहरादून तक पहुंचाया जा रहा है। प्रतिदिन एक लाख लीटर से अधिक तेल विभिन्न शहरों में खपाया जा रहा है। एक ड्रम में 260 लीटर पेट्रोल 75 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से 19,500 रुपये में, जबकि डीजल 72 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से 18,720 रुपये में उपलब्ध कराया जा रहा है।  तेल माफियाओं से संवाददाता की बातचीत में यह खुलासा हुआ स्थान- सोनीपत का बहालगढ़, मेन रोड पर बाइक की दुकान के सामने संवाददाता : भाई, हाल ही में एक नया पेट्रोल पंप खुला है, मिलावटी डीजल और पेट्रोल चाहिए, मिल जाएगा क्या। गुर्गा : मिल जाएगा, मगर भाई अभी कमी चल रही है। संवाददाता : रेट बताओ, वही मिलेगा। गुर्गा : पेट्रोल 75 जबकि, डीजल 72 रुपये लीटर उपलब्ध करा दिया जाएगा। संवाददाता : कोई दिक्कत तो नहीं होगी। गुर्गा : ड्रम जहां कहो उतरवा देंगे संवाददाता : सैंपल के तौर पर पेट्रोल दो। गुर्गा : 100 रुपये लेकर दो बोतल पेट्रोल दे देता है। संवाददाता : ठीक है, मैं आपको कल बताता हूं। स्थान- शामली के कैराना में कांधला रोड पर संवाददाता : भाई माल चाहिए, मिल जाएगा क्या। गुर्गा : पेट्रोल 82, जबकि डीजल 80 रुपये लीटर मिलेगा। संवाददाता : कहां-कहां उपलब्ध करा दोगे। गुर्गा : हमारी सर्विस ऑल इंडिया है, वेस्ट यूपी में तो कोई दिक्कत ही नहीं है। स्थान- बागपत के बड़ौत की छपरौली चुंगी संवाददाता : भाई, पेट्रोल और डीजल कितने में मिलेगा। गुर्गा : भाई, ईरान युद्ध के बाद से ज्यादा कमी चल रही है। पेट्रोल 82, जबकि डीजल 68 रुपये लीटर मिलेगा। संवाददाता : कहां-कहां पहुंचा सकते हो। गुर्गा : शामली, बिजनौर, मेरठ, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, हरियाणा के किसी भी जिले और दिल्ली कहीं भी पहुंचा देंगे।  एक लीटर पर बच रहे 23 रुपये हाल ही में डीजल और पेट्रोल की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। शामली में पेट्रोल 98.64 रुपये प्रति लीटर, जबकि डीजल 91.95 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है, जबकि माफिया 72 से 80 रुपये प्रति लीटर तक तेल बेच रहे हैं। यानी एक लीटर पर इन्हें 23 रुपये तक का मुनाफा हो रहा है। मिलावटी तेल के प्रयोग से वाहनों को यह होता है नुकसान कार मैकेनिक रिजवान और साजिद के अनुसार मिलावटी तेल के नुकसान 1. गाड़ी की स्वाभाविक आवाज बदल जाती है। 2. वाल्व कट सकते हैं 3. गाड़ी ज्यादा धुआं देती है 4. माइलेज कम हो जाता है 5. गाड़ी रुक-रुक कर चलती है 6. रिंग-पिस्टन खराब हो सकते हैं 7. इंजन सीज होने का खतरा रहता है 8. तेल की खपत बढ़ जाती है 9. जहरीला धुआं निकलता है  

योगी सरकार का बड़ा एक्शन, 9 वरिष्ठ IPS अफसरों की नई तैनाती

लखनऊ  उत्तर प्रदेश सरकार ने पुलिस प्रशासन में बड़ा फेरबदल करते हुए गुरुवार को 9 आईपीएस अधिकारियों के तबादले कर दिए हैं. इस प्रशासनिक बदलाव में चार वरिष्ठ एडीजी रैंक के अधिकारियों को पदोन्नति देकर डीजी पद पर नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं. सरकार के इस फैसले को पुलिस व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ एवं प्रभावी बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है आलोक सिंह PAC के नए DG होंगे इस फेरबदल में सबसे प्रमुख नियुक्तियों में आलोक सिंह को प्रोविंशियल आर्म्ड कांस्टेबुलरी (पीएसी) का नया डीजी बनाया गया है. इससे पहले वे कानपुर जोन में एडीजी पद पर कार्यरत थे. वहीं बिनोद कुमार सिंह को सीआईडी एवं साइबर क्राइम का डीजी नियुक्त किया गया है. वे इसी विभाग में एडीजी के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे थे।  इसके अलावा जय नारायण सिंह, जो अब तक पावर कारपोरेशन में डीजी के पद पर थे, उन्हें आर्थिक अपराध शाखा (EOW) का नया डीजी बनाया गया है. इसी तरह डीके ठाकुर को नागरिक सुरक्षा एवं विशेष सुरक्षा बल से स्थानांतरित कर होमगार्ड विभाग का डीजी नियुक्त किया गया है।  अनुपम कुलश्रेष्ठ को कानपुर जोन का ADG बनाया गया एडीजी स्तर पर भी कई अहम बदलाव किए गए हैं. अनुपम कुलश्रेष्ठ, जो अब तक आगरा जोन की एडीजी थीं, उन्हें कानपुर जोन का नया एडीजी बनाया गया है. वहीं यातायात एवं सड़क सुरक्षा की जिम्मेदारी संभाल रहे ए. सतीश गणेश को अब एडीजी क्राइम की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है।  एसके भगत ADG आगरा जोन बने इसी क्रम में आरके स्वर्णकार, जो एडीजी पीएसी के पद पर कार्यरत थे, उन्हें पावर कारपोरेशन का एडीजी नियुक्त किया गया है. इसके साथ ही एसके भगत को एडीजी क्राइम से हटाकर आगरा जोन का नया एडीजी बनाया गया है. आईजी स्तर पर भी बदलाव किया गया है, जिसमें गीता सिंह को अभियोजन निदेशालय से स्थानांतरित कर प्रशिक्षण निदेशालय का नया आईजी नियुक्त किया गया है।  यह व्यापक तबादला आदेश उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा जारी किया गया है. प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, इस फेरबदल का उद्देश्य पुलिस व्यवस्था में दक्षता बढ़ाना, कानून-व्यवस्था को मजबूत करना और विभिन्न महत्वपूर्ण विभागों में कार्यक्षमता को नई दिशा देना है. सरकारी आदेश के बाद पुलिस महकमे में नई जिम्मेदारियों को लेकर अधिकारियों के बीच हलचल तेज हो गई है और सभी अधिकारी जल्द ही अपने-अपने नए पदभार संभालेंगे।  IPS अधिकारियों की तबादला सूची 1. जय नरायन सिंह (बैच: 1994) पुरानी तैनाती: पुलिस महानिदेशक / अपर पुलिस महानिदेशक, उ०प्र० पावर कॉरपोरेशन लि०, लखनऊ नई तैनाती: पुलिस महानिदेशक, ई०ओ०डब्ल्यू० (EOW), उ०प्र०, लखनऊ 2. ध्रुव कान्त ठाकुर (बैच: 1994) पुरानी तैनाती: पुलिस महानिदेशक, नागरिक सुरक्षा, उ०प्र० (अतिरिक्त प्रभार: विशेष सुरक्षा बल) नई तैनाती: पुलिस महानिदेशक/महासमादेष्टा, होमगार्ड, उ०प्र०, लखनऊ (अतिरिक्त प्रभार: नागरिक सुरक्षा, उ०प्र०) 3. बिनोद कुमार सिंह (बैच: 1994) पुरानी तैनाती: पुलिस महानिदेशक, सी०आई०डी०, उ०प्र०, लखनऊ (अतिरिक्त प्रभार: साइबर क्राइम, उ०प्र०) नई तैनाती: पुलिस महानिदेशक, सी०आई०डी०, उ०प्र०, लखनऊ (अतिरिक्त प्रभार: साइबर क्राइम और यू०पी०-112, लखनऊ)  4. आलोक सिंह (बैच: 1995) पुरानी तैनाती: पुलिस महानिदेशक / अपर पुलिस महानिदेशक, कानपुर जोन, कानपुर नई तैनाती: पुलिस महानिदेशक, पीएसी (PAC) मुख्यालय, उ०प्र०, लखनऊ (अतिरिक्त प्रभार: विशेष सुरक्षा बल, उ०प्र०) 5. अनुपम कुलश्रेष्ठ (बैच: 1995) पुरानी तैनाती: अपर पुलिस महानिदेशक, आगरा जोन, आगरा नई तैनाती: अपर पुलिस महानिदेशक, कानपुर जोन, कानपुर 6. ए० सतीश गणेश (बैच: 1996) पुरानी तैनाती: अपर पुलिस महानिदेशक, यातायात एवं सड़क सुरक्षा, निदेशालय, उ०प्र०, लखनऊ नई तैनाती: अपर पुलिस महानिदेशक, यातायात एवं सड़क सुरक्षा, निदेशालय, लखनऊ (अतिरिक्त प्रभार: अपर पुलिस महानिदेशक, अपराध, उ०प्र०, लखनऊ) 7. डॉ० आर० के० स्वर्णकार (बैच: 1996) पुरानी तैनाती: अपर पुलिस महानिदेशक, पीएसी (PAC) मुख्यालय, उ०प्र० नई तैनाती: अपर पुलिस महानिदेशक, उ०प्र० पावर कॉरपोरेशन लि०, लखनऊ 8. एस० के० भगत (बैच: 1998) पुरानी तैनाती: अपर पुलिस महानिदेशक, अपराध, उ०प्र०, लखनऊ नई तैनाती: अपर पुलिस महानिदेशक, आगरा जोन, आगरा 9. गीता सिंह (बैच: 2007) पुरानी तैनाती: पुलिस महानिरीक्षक (IG), अभियोजन, उ०प्र०, लखनऊ नई तैनाती: पुलिस महानिरीक्षक (IG), प्रशिक्षण निदेशालय, उ०प्र०, लखनऊ

भीषण गर्मी में बड़ा झटका: लखनऊ के 9 सबस्टेशन ठप, सप्लाई बाधित

लखनऊ भीषण गर्मी में घंटों बिजली कटौती से शहर में हाहाकार मचा है। मंगलवार को दक्षिण के जिन सब स्टेशनों पर लोगों ने हंगामा किया था, बुधवार को भी वहां लोग आक्रोशित होकर सड़कों पर नारेबाजी करते नजर आए। इन लोगों के लिए बुरी खबर यह है कि अभी दक्षिण के नौ सब स्टेशनों से जुड़े 10 लाख उपभोक्ताओं को 15 दिन बिजली और रुलाएगी। ऐसा इसलिए है क्योंकि सेंट्रल यूपी गैस लिमिटेड (सीयूजीएल) के कर्मचारियों ने उत्तर प्रदेश पावर ट्रांसमिशन लिमिटेड (यूपीपीटीएल) के किदवईनगर स्थित ट्रांसमिशन उपकेंद्र की दो केबल काट दी हैं। पनकी पावर हाउस से आईं ये केबल क्षतिग्रस्त होने से उपकेंद्र बैठ गया और इससे जुड़े नौ सब स्टेशन पूरी ठप हो गए। इस कारण लोग भीषण गर्मी में बेहाल हो रहे हैं। यूपीपीटीएल गुरुवार से मरम्मत कार्य शुरू कराएगा जिसमें 15 दिन का समय लगेगा। इस लापरवाही पर क्षतिपूर्ति व केस दर्ज कराने के लिए जिलाधिकारी को पत्र भेजा है। यूपीपीटीएल का किदवईनगर में 220/33 केवी जीआईएस ट्रांसमिशन उपकेंद्र है जहां से पनकी पावर हाउस से 220 केवी की लाइनें डालकर बिजली पहुंचाई जाती है। इस उपकेंद्र से दक्षिण के नौ सबस्टेशन जुड़े हैं। तीन मई की सुबह सीयूजीएल किदवईनगर में पाइप लाइन डलवाने के लिए खोदाई करा रहा था। इस दौरान लापरवाही से खोदाई करते हुए पनकी पावर हाउस से इस उपकेंद्र में आई 220 केवी की एक-एक हजार एमएम की दो कॉपर केबल काट दीं। इससे उपकेंद्र बैठ गया और इससे जुड़े सबस्टेशनों की आपूर्ति ठप हो गई। पनकी पावर हाउस से इस उपकेंद्र में आने वाली एक्सएलपी केबल से आपूर्ति बंद कराई गई। इसके बाद खोदाई शुरू करा क्षतिग्रस्त केबल का वर्क ऑर्डर तैयार हुआ। फिर टेंडर प्रक्रिया कर मटेरियल मंगाया गया। अब गुरुवार से काम शुरू कराया जाएगा। वैकल्पिक स्रोत से दी जा रही बिजली किदवईनगर ट्रांसमिशन उपकेंद्र के ब्रेकडाउन होने पर इससे जुड़े उपकेंद्रों को नौबस्ता सहित अन्य उपकेंद्रों से जोड़कर बिजली आपूर्ति की जा रही है। भीषण गर्मी की वजह से बिजली की मांग में वृद्धि हुई है। इससे वैकल्पिक स्रोतों पर लोड बढ़ने लगा जिससे रोस्टिंग शुरू की गई। स्थिति यह है कि रोस्टिंग के बाद जब सब स्टेशन पर बिजली आपूर्ति शुरू की जा रही है तो कमजोर जॉइंट वाली एबीसी केबल में आग लग रही है। इससे भी विद्युत आपूर्ति प्रभावित हो रही है।   ये सबस्टेशन हैं प्रभावित ई-ब्लॉक गुजैनी, विद्युत कॉलोनी, विश्व बैंक बर्रा, पराग डेयरी, दबौली, हंसपुरम, मंडी परिषद, कर्रही और तात्याटोपेनगर। ये वहीं सबस्टेशन हैं जहां पिछले पांच दिन से बिजली को लेकर हाहाकार मचा है। एक सबस्टेशन से करीब 20 हजार तक कनेक्शन हैं। एक परिवार में अमूमन पांच से छह लोग होते हैं, इस हिसाब से करीब दस लाख उपभोक्ता प्रभावित हैं।  केस्को ने की सहयोग की अपील केस्को की प्रबंध निदेशक नेहा जैन ने कहा है कि उपभोक्ताओं को निर्बाध विद्युत आपूर्ति उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। क्षतिग्रस्त भूमिगत केबल की मरम्मत कार्य संबंधित इकाई शुरू करा रही है। बिजली व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए तकनीकी वर्टिकल में दो अतिरिक्त अधिशासी अभियंताओं की तैनाती की गई है। पीक ऑवर्स में निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए उपकेंद्रों पर अतिरिक्त अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई है। प्रभावित क्षेत्रों के उपभोक्ता सहयोग दें।  किदवईनगर जीआईएस ट्रांसमिशन उपकेंद्र के केबल बनाने का मटेरियल एकत्र करने में समय लगता है। उसके बाद एक सप्ताह टेंडर प्रक्रिया में लगते हैं। अब मटेरियल एकत्र हो गया है और गुरुवार से काम शुरू होगा। इसमें 10 से 15 दिन लग सकते हैं। केबल क्षतिग्रस्त करने पर सीयूजीएल के खिलाफ केस दर्ज कराने के लिए जिलाधिकारी को पत्र दिया है। क्षति का आकलन किया जा रहा है। – शैलेश गुप्ता, चीफ इंजीनियर, यूपीपीटीएल  

अब यूनिफॉर्म में नजर आएंगे विश्वविद्यालय और कॉलेज छात्र, यूपी में नया नियम लागू

लखनऊ  उत्तर प्रदेश की राज्यपाल और राज्य विश्वविद्यालयों की चांसलर आनंदीबेन पटेल ने प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों (कॉलेजों) में विद्यार्थियों के लिए यूनिफॉर्म व्यवस्था अनिवार्य रूप से लागू करने के निर्देश दिए हैं. बुधवार को राजभवन में जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय, बलिया से संबद्ध शासकीय और वित्तपोषित महाविद्यालयों की समीक्षा बैठक के दौरान राज्यपाल ने यह बड़ा फैसला सुनाया।  क्यों और कैसे लागू होगा यह नियम? एकरूपता लाना है मकसद वर्तमान में यूपी के कुछ महिला कॉलेजों और सेल्फ-फाइनेंस पाठ्यक्रमों में तो ड्रेस कोड लागू है, लेकिन अधिकांश राज्य विश्वविद्यालयों और डिग्री कॉलेजों में छात्र सामान्य कपड़ों में आते हैं. अब नए आदेश के तहत सभी संस्थान अपने स्तर पर मनपसंद रंग और डिजाइन तय कर यूनिफॉर्म लागू करेंगे, जिससे पूरे कैंपस में एकरूपता बनी रहे।  शिक्षकों की गरिमा पर कड़ा रुख बैठक के दौरान हाल ही में लखनऊ विश्वविद्यालय के जूलोजी विभाग में एक शिक्षक द्वारा छात्रा को परेशान करने और पेपर लीक करने के कथित मामले पर राज्यपाल ने सख्त नाराजगी जताई. उन्होंने दो टूक कहा कि शिक्षक ऐसा कोई काम न करें जिससे गुरु की गरिमा को ठेस पहुंचे. सभी शिक्षकों को समय पर कक्षाएं लेने और छात्रों की उपस्थिति सुनिश्चित करने को कहा गया है।  रोजगार परक और वोकेशनल कोर्स पर जोर छात्राओं को आत्मनिर्भर और स्वरोजगार से जोड़ने के लिए राज्यपाल ने कॉलेजों को शॉर्ट-टर्म वोकेशनल कोर्स शुरू करने के निर्देश दिए हैं. इनमें प्रमुख रूप से- जीएसटी (GST) और अकाउंटेंसी ब्यूटीशियन और मेहंदी कोर्स बिंदी निर्माण मिलेट (मोटे अनाज) आधारित खाना बनाना छात्रों की समस्याओं के लिए कमेटी सभी कॉलेजों और यूनिवर्सिटीज में एक विशेष समिति (कमेटी) बनाई जाएगी, जहां छात्र-छात्राएं बिना किसी डर या झिझक के अपनी शिकायतें और समस्याएं खुलकर साझा कर सकेंगे. इसके अलावा दुर्लभ पुस्तकों के डिजिटलाइजेशन और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स (जैसे इन्फ्लिबनेट) के इस्तेमाल को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया है।  जल्द तैयार करेंगे खाका राज्यपाल के इस निर्देश के बाद, अब उत्तर प्रदेश के सभी उच्च शिक्षण संस्थान अपने स्तर पर यूनिफॉर्म के रंग, पैटर्न और इसे लागू करने की समय-सीमा का खाका तैयार करेंगे। 

पश्चिमी यूपी में लू का प्रकोप, नौतपा से पहले ही झुलसाने लगी गर्मी

मेरठ यूपी के मेरठ में तेज धूप और लू ने लोगों को झुलसा दिया है। सूरज निकलते ही सुबह से ही आसमान से आग बरसती महसूस हो रही है। बुधवार को दिन चढ़ने के साथ तापमान बढ़ता गया। दोपहर तक हालात इतने खराब हो गए कि सड़क और बाजारों में सन्नाटा रहा। तापमान 44 डिग्री तक पहुंच गया, जो इस सीजन का सबसे अधिक गर्म दिन रहा। 25 मई से गर्मी का प्रकोप नौतपा शुरू होने से पारा और बढ़ेगा। वहीं, जिलाधिकारी ने भीषण गर्मी और लू के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए स्कूलों की छुट्टी कर दी है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लोग इन दिनों भीषण गर्मी से झुलस रहे हैं। तापमान 44 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया है। सुबह से ही ऐसा महसूस होने लगता है जैसे आसमान से आग बरस रही हो। लू के थपेड़ शरीर को झुलसा रहे हैं।  नौतपा का भी 25 मई से आगाज हो जाएगा, ऐसे में पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आसमान से आग बरसेगी। 29 मई को एक पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने से थोड़ी राहत मिलने के आसार हैं। बुधवार का दिन सीजन में सबसे गर्म दिन दर्ज किया गया। कृषि विश्वविद्यालय के मौसम वैज्ञानिक डॉ. यूपी शाही ने बताया कि वर्तमान में तापमान तेजी से बढ़ रहा है। कहा कि पश्चिमी हवाओं के प्रभाव और साफ आसमान के चलते गर्मी में और इजाफा हो रहा है।    दोपहर के समय लू चलने से स्थिति और अधिक गंभीर हो रही है, जिससे हीट स्ट्रोक का खतरा भी बढ़ गया है। बाजारों और मुख्य मार्गों पर दोपहर के समय लोगों की आवाजाही काफी कम देखने को मिल रही है। जरूरी काम से बाहर निकलने वाले लोग सिर और चेहरे को ढककर ही निकले। पिछले पांच दिन का तापमान 16 मई- 39.6 17 मई- 41.3 18 मई- 42.4 19 मई- 43.6 20 मई – 44.0 गर्मी और लू के कारण 23 मई तक स्कूलों में अवकाश मेरठ में बढ़ती गर्मी और लू के मद्देनजर जिलाधिकारी वीके सिंह ने 21 से 23 मई तक प्री-प्राइमरी से कक्षा दस तक के सभी बोर्डों के विद्यालयों में अवकाश घोषित किया है। जिलाधिकारी ने कहा कि छात्र-छात्राओं के स्वास्थ्य और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है।   भीषण गर्मी और लू के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों और विद्यालय प्रबंधन को आदेश का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।  प्रशासन ने अभिभावकों से भी अपील की है। अत्यधिक गर्मी के दौरान बच्चों को अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलने दें। पर्याप्त पानी और सावधानियों का ध्यान रखने को कहा गया है। सहारनपुर : 12 साल का टूटा रिकॉर्ड, 44 डिग्री पर पहुंचा पारा सहारनपुर जनपद में गर्मी का 12 साल का रिकॉर्ड टूट गया। बीते 12 वर्षों में 20 मई को अधिकतम तापमान 42 डिग्री से ऊपर नहीं गया था। बुधवार को अधिकतम तापमान 44 व न्यूनतम 26 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मेरठ में भी अधिकतम तापमान 44 डिग्री पर पहुंच गया। बागपत में 43, मुजफ्फरनगर में 42, शामली में 42 और बिजनौर में 41 डिग्री सेल्सियस अधिकतम तापमान दर्ज किया गया।    

यूपी रोडवेज बसों की लाइव ट्रैकिंग से यात्रियों का सफर हुआ ज्यादा सुरक्षित

उत्तर प्रदेश परिवहन निगम की बसों की लाइव ट्रैकिंग से सुरक्षित बनाया जा रहा यात्रियों का सफर प्रतिदिन 16 लाख से ज्यादा यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित कर रही योगी सरकार निगम की 13,500 से अधिक बसों को वीएलटीडी से जोड़ा गया बस के साथ ही ड्राइवरों की हर गतिविधि की हो रही कमांड सेंटर से निगरानी मार्गदर्शी पोर्टल पर यात्री भी बसों की देख पा रहे लाइव लोकेशन लखनऊ  उत्तर प्रदेश की योगी सरकार सड़क दुर्घटनाओं पर रोक लगाने और यात्रियों की सुरक्षा के लिए लगातार प्रयास करती आ रही है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (यूपीएसआरटीसी) यात्रियों को सुरक्षित, सुगम यात्रा का अनुभव देने के लिए बड़े पैमाने पर नवीनतम तकनीक का इस्तेमाल कर रहा है। यूपीएसआरटीसी की लगभग सभी बसों की लाइव ट्रैकिंग हो रही है, ताकि प्रतिदिन इन बसों में सफर करने वाले 16 लाख से अधिक यात्रियों की सुरक्षा पुख्ता की जा सके। यूपीएसआरटीसी के वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक प्रदेश में परिवहन व्यवस्था को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाने के लिए 13,500 से अधिक बसों को व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (वीएलटीडी) से जोड़ा जा चुका है। इसकी ट्रैकिंग लखनऊ स्थित मुख्यालय के कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से हो रही है। बस ड्राइवरों की जवाबदेही भी तय की गई उन्होंने बताया कि इन बसों में प्रतिदिन 16 लाख से अधिक लोग यात्रा कर रहे हैं। बसों की ट्रैकिंग के लिए हर रोज 24 घंटे मुख्यालय का कमांड सेंटर और 20 रीजनल मॉनिटरिंग सेंटर एक्टिव रहते हैं। यहां से बस की ओवर स्पीड, तेज ब्रेक लगाने, तेज गति में बस मोड़ने, तय सीमा से अधिक रफ्तार पर बस चलाने, तय रूट समेत अन्य पर नजर रखी जा रही है। इसकी मुख्यालय से रोज रिपोर्ट तैयार होती है और गलती पाए जाने पर बस ड्राइवर को चेतावनी या कार्रवाई सुनिश्चित की जाती है। इससे प्रदेश में दुर्घटनाओं में काफी कमी लाई जा रही है। पैनिक बटन दबाते ही एक्शन शुरू लाइव ट्रैकिंग के साथ इन बसों में हादसे या आपात स्थिति के लिए पैनिक बटन भी लगाए गए हैं। इनका इस्तेमाल होते ही अलर्ट यूपीएसआरटीसी कमांड सेंटर के साथ यूपी पुलिस के कंट्रोल रूम को भी जाता है। इसके बाद फौरन कंडक्टर से संबंधित विभागों द्वारा बात कर उचित एक्शन लिया जाता है। यूपीएसआरटीसी के मुताबिक हर रोज 5 हजार से अधिक अलर्ट आते हैं। जरूरत के हिसाब से मदद उपलब्ध कराई जाती है। पोर्टल और वेबसाइपट के जरिए यात्रियों को सुविधा यूपीएसआरटीसी के मार्गदर्शी पोर्टल और निगम की वेबसाइपट पर ट्रैक माई बस के जरिए यात्रियों को काफी सुविधा मिल रही है। यात्री बस की लोकेशन कहीं से भी लाइव देख सकते हैं।