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संजय निषाद बोले: तुष्टिकरण करते रहे तो जिस तरह बंगाल में दीदी साफ हुईं, उसी तरह सपा साफ हो जाएगी

मुगलों द्वारा लाए गए धर्म के आधार पर आरक्षण नहीं दिया जा सकता, अखिलेश पर संजय निषाद का तीखा हमला संजय निषाद बोले: तुष्टिकरण करते रहे तो जिस तरह बंगाल में दीदी साफ हुईं, उसी तरह सपा साफ हो जाएगी फूलन देवी ने आरक्षण मांगा था तो पार्टी से बाहर कर दी गई थीं, वह मार भी दी गईं: संजय निषाद लखनऊ  उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री संजय निषाद ने आरक्षण के मुद्दे पर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव पर जमकर निशाना साधा है। निषाद ने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव पिछड़ों का हक मारकर मुगलों द्वारा लाए गए धर्म को आरक्षण देना चाहते हैं। निषाद ने जोर देते हुए कहा कि संविधान सभा ने भी ऐसा करने से मना कर दिया था। संजय निषाद ने कहा कि अखिलेश यादव की प्रेस कांफ्रेंस ने पीडीए के एजेंडे की पोल खोल दी है। पिछड़ों के अधिकारों पर डांका डालने का काम किया गया है। उन्होंने कहा, 'जब संविधान सभा की बैठक हुई और जब संविधान सभा में आरक्षण की बात आई, उस समय धर्म के आधार पर इसको देना मना कर दिया था क्योंकि जो भारतीय धर्म हैं भारतीय सभ्यता है, उस पर मुगलों ने आक्रमण किया। भारत के ऊपर अंग्रेजों ने आक्रमण किया। तो मुगलों के द्वारा लाए गए धर्म के आधार पर आरक्षण नहीं दिया जा सकता। भीम राव अंबेडकर ने भी इसका विरोध किया था। ' सपा और इंडी गठबंधन पर साधा निशाना संजय निषाद ने सपा और इंडी गठबंधन पर निशाना साधते हुए कहा, ‘इन लोगों ने जस्टिस रंगनाथ मिश्र कमेटी बनाकर ओबीसी आरक्षण में से हिस्सा काटकर मुसलमानों को आरक्षण देने का प्रयास किया था। आंध्र प्रदेश में इनकी दोस्त कांग्रेस ने मुसलमानों को ओबीसी आरक्षण दिया। कर्नाटक में मुस्लिम जातियों को ओबीसी में शामिल कर पिछड़ों के अधिकारों को कमजोर किया।’ पश्चिम बंगाल का जिक्र पश्चिम बंगाल का जिक्र करते हुए निषाद ने कहा,  ‘पश्चिम बंगाल में 118 मुस्लिम जातियों को ओबीसी में शामिल करके वर्षों तक पिछड़ों के हक पर डकैती डाली। कोलकाता हाई कोर्ट ने इस असंवैधानिक कदम को रद्द किया। जिस तरीके से वहां पिछड़ों के हक पर डकैती डाली गई। उनका आरक्षण मुसलमानों को दिया गया। वहां के लोग एक हुए और वहां की सरकार को हटा दिया।’ निषाद ने कहा ने आगे कहा, ‘यहां पर (यूपी में) भी इंडी गठबंधन मुसलमानों की आवाज तो उठाता है, लेकिन देश को आजाद कराने वाली पिछड़ी और उजड़ी जातियों की आवाज नहीं उठाता। समाजवादी पार्टी का अगर यही रवैया रहा तो जिस तरीके से बंगाल में दीदी साफ हुईं, उसी तरीके सपा का सूपड़ा साफ हो जाएगा।’ निषाद ने किया फूलन देवी का जिक्र संजय निषाद ने यह भी कहा कि अन्य जातियों के नेता यह भी सोचें कि उन्हें सपा के समय में क्या मिला? फूलन देवी ने जैसे ही आरक्षण की बात की, किसानों के हक की बात की, उन्हें पार्टी से बाहर कर दिया गया था। बाद में वह मारी भी गईं। आप इस अन्याय को समझ सकते हैं। ओबीसी की किसी भी जाति के साथ अन्याय नहीं होगा, ये हमारे एनडीए का संकल्प है। ****

डिवाइडर का होगा कलात्मक विकास, लगाई जाएंगी थिमेटिक प्रतिमाएं

नई आभा से निखरेंगे गोरखपुर के मुख्य मार्ग, होगा सौंदर्यीकरण डिवाइडर का होगा कलात्मक विकास, लगाई जाएंगी थिमेटिक प्रतिमाएं कहीं वाद्य यंत्र, राष्ट्रीय प्रतीक चिन्ह तो कहीं योग की मुद्राओं की तर्ज पर संवारे जाएंगे डिवाइडर सैलानियों के मन में रच-बस जाएगी विकसित गोरखपुर की सुंदर छवि गोरखपुर  स्मार्ट सिटी गोरखपुर में सड़कों को चौड़ा करने के बाद योगी सरकार उनके सौंदर्य को निखारने की पहल कर रही है। गोरखपुर के मुख्य मार्ग अब नई आभा से निखर उठेंगे। इसके लिए मुख्य मार्गों के डिवाइडर पर थिमेटिक प्रतिमाओं की स्थापना कर उनका कलात्मक विकास किया जाएगा। इस नए प्रोजेक्ट का उद्देश्य राहगीरों और सैलानियों के मन में गोरखपुर की छवि को अविस्मरणीय बनाना है। मुख्य मार्गों के डिवाइडर के कलात्मक विकास की परियोजना को पीपीपी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल पर मूर्त रूप दिया जाएगा। इस प्रोजेक्ट का प्रस्तुतिकरण मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समक्ष किया जा चुका है और नगर निगम बोर्ड में इस संबंध में प्रस्ताव पारित होने के बाद अब काम शुरू होने जा रहा है। एक माह में परियोजना आकार लेने लगेगी। महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव बताते हैं कि गोरखपुर के मार्गों पर बने डिवाइडर का सौंदर्य अब केवल हरियाली तक सीमित नहीं रहेगा। अब उन्हें कलात्मक और सांस्कृतिक पहचान भी मिलेगी। डिवाइडर को थिमेटिक सांस्कृतिक रूप देने के लिए कहीं राष्ट्रीय प्रतीक चिन्ह और वाद्य यंत्रों की आकृतियां दिखाई देंगी तो कहीं योग मुद्राओं की प्रतिमाएं आकर्षण का केंद्र बनेंगी। इसके जरिये गोरखपुर शहर को आधुनिकता के साथ भारतीय संस्कृति तथा परंपरा से जोड़ा जाएगा। महापौर का मानना है कि आने वाले समय में गोरखपुर की सड़कें केवल यातायात का माध्यम नहीं बल्कि कला, संस्कृति और आधुनिक विकास का प्रतीक बनकर लोगों को आकर्षित करेंगी। परियोजना के अंतर्गत प्रमुख चौराहों व मार्गों पर थिमेटिक प्रतिमाएं स्थापित की जाएंगी। इन प्रतिमाओं में संगीत, योग, अध्यात्म और भारतीय जीवनशैली की झलक देखने को मिलेगी। इससे न केवल शहर की सुंदरता बढ़ेगी बल्कि बाहर से आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं के मन में विकसित और व्यवस्थित गोरखपुर की सकारात्मक छवि भी बनेगी। सड़क किनारे आकर्षक लाइटिंग पहले से है। अब डिवाइडर पर हरियाली के बीच कलात्मक संरचनाओं के माध्यम से शहर को नया रूप दिया जाएगा। नगर के प्रवेश मार्गों और प्रमुख यातायात मार्गों को विशेष रूप से चिन्हित कर उनका सौंदर्यीकरण कराया जाएगा ताकि शहर में प्रवेश करते ही लोगों को आधुनिक और स्वच्छ गोरखपुर का अनुभव हो।  प्रमुख मार्गों के डिवाइडर का थिमेटिक विकास करने के लिए चयनित संस्था इंडियन आर्ट एडवरटाइजिंग प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक कृष्ण मोहन बताते हैं कि काम शुरू करने से पहले विभिन्न विभागों की तरफ से जरूरी एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) हासिल कर लिया गया है और एक माह में काम शुरू कर दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि डिवाइडर पर थिमेटिक प्रतिमाओं के साथ ही उसके आसपास बड़े पैमाने पर फूलों के पौधों को लगाकर खूबसूरती को और बढ़ाया जाएगा। संस्था परियोजना कार्य का कुल मिलाकर 30 वर्ष तक अनुरक्षण कार्य भी करेगी।  प्रथम चरण की कार्ययोजना -पैडलेगंज से नौका विहार मार्ग के डिवाइडर पर वाद्य यंत्रों की थीम की प्रतिमाएं लगाई जाएंगी। -असुरन चौराहा से लेकर गुलरिहा तक अध्यात्म और योग मुद्राओं की थीम वाली प्रतिमाओं को लगाया जाएगा।  -यातायात तिराहा से बरगदवा तक के डिवाइडर पर अध्यात्म थीम पर प्रतिमाओं से सजाया जाएगा।  -देवरिया बाईपास मार्ग (चिड़ियाघर मुख्य मार्ग) के डिवाइडर को एनिमल थीम पर विकसित किया जाएगा।

स्वतंत्र देव सिंह बोले- पहले भर्तियों में होती थी लूट, ‘चाचा-भतीजा’ करते थे खेल

जब-जब भर्तियां निकलती थीं 'चाचा-भतीजा' लूटने के लिए झोला लेकर निकल पड़ते थे : स्वतंत्र देव सिंह – सपा सरकार में हुई नियुक्तियों और भर्तियों की योगी सरकार के मंत्रियों ने खोली पोल  – कैबिनेट मंत्री स्वतंत्र देव सिंह और राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने अखिलेश पर साधा निशाना  – 2004-07 पुलिस भर्ती घोटाले पर योगी सरकार के मंत्रियों ने सपा को घेरा – सपा सरकार में भर्ती मतलब सेटिंग और वसूली : स्वतंत्र देव सिंह  – योगी सरकार में पारदर्शी ढंग से हुईं 9 लाख भर्तियां : स्वतंत्र देव सिंह – सपा की असली ऑडिट रिपोर्ट जनता के पास है : असीम अरुण – यूपीपीएससी में एक जाति विशेष को फायदा पहुंचाया गया : असीम अरुण – योगी सरकार में नकल माफिया की कमर तोड़ दी गई, इसीलिए बौखलाए हैं अखिलेश : असीम अरुण  लखनऊ  उत्तर प्रदेश सरकार के दो वरिष्ठ मंत्रियों स्वतंत्र देव सिंह और असीम अरुण ने समाजवादी पार्टी और उसके मुखिया अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि सपा सरकार के दौरान भर्ती प्रक्रिया भ्रष्टाचार, जातिवाद और पैसे के खेल का अड्डा बन चुकी थी। दोनों मंत्रियों ने कहा कि योगी आदित्यनाथ सरकार ने प्रदेश में पारदर्शी और निष्पक्ष भर्ती व्यवस्था स्थापित कर युवाओं का भरोसा लौटाया है, जबकि सपा शासन में नौकरी निकलते ही 'चाचा-भतीजा वसूली तंत्र' सक्रिय हो जाता था। भर्ती निकलते ही झोला लेकर निकल जाते थे चाचा-भतीजा जल शक्ति विभाग के कैबिनेट मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने कहा कि समाजवादी पार्टी की सरकार में जब-जब नियुक्तियों और रोजगार के विज्ञापन निकलते थे, तब-तब चाचा-भतीजा लूट के लिए झोला लेकर निकल जाते थे। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय ट्रांसफर-पोस्टिंग से लेकर भर्ती तक हर जगह खुला रेट चलता था और बिना पैसे व सिफारिश के कोई काम नहीं होता था। उन्होंने कहा कि योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश में लगभग 9 लाख सरकारी भर्तियां पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ हुई हैं। समाज के सभी वर्गों के युवाओं को अवसर मिला है। उन्होंने कहा कि आज हर गांव में 4-5 युवाओं को सरकारी नौकरी मिली है। न जातिवाद चला, न क्षेत्रवाद। केवल योग्यता के आधार पर चयन हुआ।  दलितों और शोषितों को दबाने का काम करती थी सपा सरकार स्वतंत्र देव सिंह ने आरोप लगाया कि सपा शासन में दलितों, पिछड़ों और शोषित वर्गों को व्यवस्थित रूप से दबाने का काम किया गया। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार और लूट-खसोट उस सरकार की कार्यशैली का हिस्सा बन चुके थे। सपा सरकार में हर काम में भ्रष्टाचार था। जनता सब देख चुकी है और समझ चुकी है। 2004-07 की भर्ती घोटाले की ऑडिट रिपोर्ट जनता के सामने है समाज कल्याण, अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने भी अखिलेश यादव की कथित 'पीडीए ऑडिट रिपोर्ट' पर पलटवार करते हुए कहा कि जनता के पास सपा सरकार की असली 'ऑडिट रिपोर्ट' पहले से मौजूद है। उन्होंने कहा कि 2004 से 2007 के बीच मुलायम सिंह यादव सरकार में पुलिस भर्ती घोटाला हुआ था, जिसमें व्यापक धांधली के आरोप लगे। असीम अरुण ने कहा कि मायावती सरकार बनने के बाद 50 से अधिक वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को निलंबित किया गया और पूरी भर्ती प्रक्रिया को निरस्त करना पड़ा। बाद में सीबीआई ने मामले में चार्जशीट दाखिल की। उन्होंने कहा कि मायावती सरकार ने 2007 में पुलिस भर्ती की पारदर्शी व्यवस्था लागू की थी, लेकिन 2012 में अखिलेश सरकार ने उसे खत्म कर 10वीं और 12वीं के नंबर के आधार पर भर्ती शुरू कर दी, जिससे पक्षपात और धांधली के आरोप फिर बढ़े। योगी सरकार ने बिना सिफारिश सवा दो लाख पुलिस भर्ती की असीम अरुण ने कहा कि योगी सरकार ने पहली बार ऐसी भर्ती व्यवस्था दी, जिसमें बिना सिफारिश और बिना पैसे के केवल योग्यता के आधार पर चयन हुआ। उन्होंने बताया कि प्रदेश में अब तक लगभग सवा दो लाख पुलिसकर्मियों की भर्ती पारदर्शी तरीके से कराई गई है और कुल मिलाकर लगभग 9 लाख सरकारी नौकरियां दी गई हैं। उन्होंने कहा कि आज नकल माफिया की कमर टूट चुकी है। परीक्षा माफियाओं पर कार्रवाई हो रही है। इसी वजह से अखिलेश यादव बौखलाए हुए हैं। यूपीपीएससी में एक जाति विशेष की भर्तियां हुईं असीम अरुण ने समाजवादी पार्टी सरकार के दौरान यूपीपीएससी में हुई नियुक्तियों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सपा सरकार ने अनिल यादव को यूपीपीएससी का चेयरमैन बनाया, जिसकी नियुक्ति को हाईकोर्ट ने बाद में रद्द कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि उस दौर में एक जाति विशेष को लाभ पहुंचाने के लिए भर्ती प्रक्रिया प्रभावित की गई। सामान्य वर्ग की सीटों पर भी एक ही जाति के लोगों की भर्ती कराई गई। यही सपा की असली ऑडिट रिपोर्ट है। राहुल गांधी राजनीतिक पर्यटक बन चुके हैं राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए असीम अरुण ने कहा कि कांग्रेस नेता अमेठी और रायबरेली में 'राजनीतिक पर्यटक' की तरह आते हैं और हर बार विवाद पैदा करने की कोशिश करते हैं। उन्होंने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था 7.6 प्रतिशत की दर से आगे बढ़ रही है और यह दुनिया की सबसे तेज गति से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ऊर्जा बचत और विदेशी मुद्रा संरक्षण की दिशा में काम कर रहा है, लेकिन राहुल गांधी ऊल-जुलूल बयान देकर सिर्फ भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। जनता सब जानती है दोनों मंत्रियों ने कहा कि उत्तर प्रदेश की जनता सपा शासन और योगी सरकार के बीच का अंतर स्पष्ट रूप से देख चुकी है। उन्होंने दावा किया कि जहां पहले भर्ती प्रक्रिया जातिवाद और भ्रष्टाचार से प्रभावित रहती थी, वहीं अब पारदर्शिता, तकनीक और मेरिट के आधार पर चयन हो रहा है।

रानी लक्ष्मी बाई स्कूटी योजना: पहले चरण में 45 हजार छात्राओं को मिलेगा लाभ

लखनऊ उत्तर प्रदेश के सरकारी विश्वविद्यालयों और डिग्री कॉलेजों में पढ़ने वाली मेधावी छात्राओं के लिए एक बेहद शानदार खबर है। राज्य की योगी आदित्यनाथ सरकार ने अपने चुनावी वादे को अमलीजामा पहनाने के लिए 'रानी लक्ष्मी बाई स्कूटी योजना' के तहत छात्राओं को मुफ्त स्कूटी देने की तैयारियां तेज कर दी हैं। पहले चरण में 45 हजार छात्राओं को स्कूटी मिल सकती है। आगामी विधानसभा चुनावों से ठीक पहले इस महत्वाकांक्षी योजना को धरातल पर उतारने के लिए पात्रता और मेरिट तय करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। बुधवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद उच्च शिक्षा विभाग के आला अधिकारियों के साथ एक अहम समीक्षा बैठक की। सीएम योगी की अधिकारियों को फटकार, जल्द नियम तय करने के निर्देश उच्च स्तरीय बैठक के दौरान जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्कूटी वितरण को लेकर अब तक तैयार की गई पात्रता, नियमों और रूपरेखा के बारे में पूछा, तो अधिकारियों ने बताया कि इस पर अभी अंतिम नियम और ड्राफ्ट तैयार नहीं हो सका है। इस पर मुख्यमंत्री ने नाराजगी जाहिर करते हुए अधिकारियों को सख्त लहजे में निर्देश दिए कि बिना किसी देरी के जल्द से जल्द गाइडलाइंस और पात्रता के नियम निर्धारित किए जाएं, ताकि योजना के अगले चरण का काम शुरू हो सके। सीएम ने साफ कहा कि प्रक्रिया को पारदर्शी और त्वरित बनाकर मेधावी छात्राओं को जल्द से जल्द स्कूटी का वितरण सुनिश्चित किया जाए पहले चरण के लिए 400 करोड़ का भारी-भरकम बजट आवंटित मुख्यमंत्री के कड़े रुख के बाद अब उच्च शिक्षा विभाग मुफ्त स्कूटी वितरण के लिए मेरिट का पैमाना तय करने में जुट गया है। विभाग इस बात पर मंथन कर रहा है कि छात्राओं का चयन स्नातक (UG) व स्नातकोत्तर (PG) कक्षाओं में प्रथम वर्ष के अंकों के आधार पर किया जाए या फिर अंतिम वर्ष के परीक्षा परिणामों को आधार बनाया जाए। आपको बता दें कि राज्य सरकार ने इस योजना के लिए पहले ही ₹400 करोड़ का भारी-भरकम बजट स्वीकृत कर रखा है। शिक्षा विभाग के आकलन के अनुसार, इस बजट के जरिए पहले चरण में प्रदेश की लगभग 45,000 सबसे मेधावी छात्राओं को मुफ्त स्कूटी दी जा सकती है। हालांकि, लाभार्थियों की अंतिम संख्या पर आखिरी मुहर शासन स्तर से ही लगाई जाएगी 9 लाख छात्राओं में से होगा मेधावियों का चयन मौजूदा आंकड़ों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के विभिन्न उच्च शिक्षण संस्थानों में स्नातक स्तर पर करीब 9 लाख छात्राएं नामांकित हैं। इन सभी छात्राओं में से कड़ी स्क्रीनिंग और मेरिट लिस्ट के जरिए ही भाग्यशाली मेधावियों का चुनाव किया जाएगा। इस योजना का मुख्य उद्देश्य न केवल बेटियों को उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करना है, बल्कि कॉलेज आने-जाने में उन्हें आत्मनिर्भर और सुरक्षित बनाना भी है। शासन से हरी झंडी मिलते ही विभाग द्वारा ऑनलाइन आवेदन और कॉलेजों के जरिए डेटा जुटाने का काम शुरू कर दिया जाएगा

योगी सरकार ने पेंशन राशि 2500 रुपये से बढ़ाकर 3000 रुपये प्रतिमाह की

कुष्ठावस्था पेंशन योजना बनी सहारा, हजारों दिव्यांगजनों को मिल रहा सम्मान और संबल योगी सरकार ने पेंशन राशि 2500 रुपये से बढ़ाकर 3000 रुपये प्रतिमाह की   नौ वर्षों में लाभार्थियों की संख्या 4765 से बढ़कर 13667 पहुंची पीएफएमएस एवं ई-पेमेंट प्रणाली से सीधे खातों में पहुंच रही पेंशन राशि लखनऊ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में संचालित जनकल्याणकारी योजनाएं समाज के अंतिम व्यक्ति तक राहत एवं सुरक्षा पहुंचाने का कार्य कर रही हैं। इसी क्रम में दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग द्वारा संचालित कुष्ठावस्था पेंशन योजना कुष्ठ रोग से प्रभावित दिव्यांगजनों के लिए आर्थिक एवं सामाजिक संबल का महत्वपूर्ण माध्यम बनकर उभरी है। वर्तमान में प्रदेश के 13 हजार से अधिक लाभार्थियों को इस योजना के अंतर्गत प्रतिमाह 3000 रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। यह योजना ऐसे व्यक्तियों के लिए है जो कुष्ठरोग के शिकार होने के बाद दिव्यांग भी हो जाते हैं। आर्थिक रूप से कमजोर दिव्यांगजनों को मिल रही सहायता दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग द्वारा संचालित इस योजना का उद्देश्य कुष्ठ रोग से प्रभावित आर्थिक रूप से कमजोर दिव्यांगजनों को नियमित आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है। योजना के अंतर्गत ऐसे सभी पात्र दिव्यांगजन लाभान्वित किए जाते हैं, जो उत्तर प्रदेश के मूल निवासी हैं, जिनके परिवार की वार्षिक आय दो लाख रुपये से अधिक नहीं है तथा जो किसी अन्य सरकारी पेंशन योजना का लाभ प्राप्त नहीं कर रहे हैं।  योगी सरकार ने सहायता राशि 2500 से बढ़ाकर 3000 रुपये की योजना के प्रारंभ में लाभार्थियों को 2500 रुपये प्रतिमाह पेंशन प्रदान की जाती थी, जिसे साल 2021 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की संवेदनशील सोच और गरीब कल्याण के प्रति प्रतिबद्धता के दृष्टिगत बढ़ाकर 3000 रुपये प्रतिमाह कर दिया गया था। इससे लाभार्थियों को अतिरिक्त आर्थिक सहायता प्राप्त हुई है और उनके जीवन स्तर में सकारात्मक सुधार आया है। वित्तीय वर्ष 2016-17 में जहां 4765 लाभार्थियों को योजना का लाभ प्राप्त हो रहा था, वहीं वित्तीय वर्ष 2025-26 में यह संख्या बढ़कर 13667 हो गई है। सहायता सीधे लाभार्थी के खाते में भेजी जा रही योजना के अंतर्गत लाभार्थियों का चयन मुख्य चिकित्सा अधिकारी द्वारा जारी दिव्यांगता प्रमाण पत्र के आधार पर किया जाता है। इस योजना के तहत ऐसे व्यक्तियों को पात्र माना जाता है जिनमें कुष्ठरोग का शिकार होने के कारण दिव्यांगता आ जाती है। विशेष बात यह है कि कुष्ठ रोग से प्रभावित व्यक्तियों के लिए दिव्यांगता प्रतिशत की कोई अनिवार्यता निर्धारित नहीं है। पात्र लाभार्थियों को पेंशन की धनराशि पीएफएमएस प्रणाली एवं कोषागार की ई-पेमेंट व्यवस्था के माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों में भेजी जाती है, जिससे पूरी प्रक्रिया पारदर्शी एवं प्रभावी बनी हुई है। योजना के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं आवेदक प्रदेश सरकार द्वारा आवेदन प्रक्रिया को भी पूर्णतः ऑनलाइन किया गया है। पात्र आवेदक sspy-up.gov.in पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन कर योजना का लाभ प्राप्त कर सकते हैं। डिजिटल व्यवस्था लागू होने से ग्रामीण एवं दूरदराज क्षेत्रों के लोगों को भी सुविधा प्राप्त हुई है तथा सरकारी कार्यालयों के अनावश्यक चक्कर लगाने की समस्या में कमी आई है। पारदर्शी तरीके से योजना का लाभ उपलब्ध कराया जा रहा- उप निदेशक दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग के उप निदेशक डॉ. अमित कुमार राय ने बताया कि कुष्ठावस्था पेंशन योजना के माध्यम से कुष्ठ रोग से प्रभावित दिव्यांगजनों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान की जा रही है, जिससे उनके जीवन स्तर में निरंतर सुधार हो रहा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप पात्र व्यक्तियों को समयबद्ध एवं पारदर्शी तरीके से योजना का लाभ उपलब्ध कराया जा रहा है।

शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव, योगी सरकार विकसित करेगी इनोवेशन कल्चर

परिषदीय और केजीबीवी में इनोवेशन कल्चर विकसित करेगी योगी सरकार – 'भारत इनोवेट्स 2026' अभियान के माध्यम से सरकारी स्कूलों के बच्चों को डीप टेक्नोलॉजी और वैज्ञानिक सोच से जोड़ने की तैयारी – विद्यालयों में संगोष्ठी, टेक्नोलॉजी आधारित विशेष कक्षाएं, क्विज और निबंध प्रतियोगिताएं होंगी आयोजित – गांव और कस्बों के बच्चों तक आधुनिक और नवाचार आधारित शिक्षा पहुंचाने की दिशा में बड़ा कदम लखनऊ,  योगी सरकार परिषदीय विद्यालयों के बच्चों को किताबी ज्ञान के साथ-साथ देश के उभरते इनोवेशन और तकनीकी बदलावों से जोड़कर भविष्य के लिए तैयार करने में जुट गई है। 'भारत इनोवेट्स 2026' अभियान के माध्यम से पहली बार गांव और कस्बों के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को डीप टेक्नोलॉजी, रिसर्च, नवाचार और वैज्ञानिक सोच से जोड़ने की बड़ी पहल शुरू की गई है। योगी सरकार का लक्ष्य है कि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े बच्चे तक भी वही आधुनिक सीखने का माहौल पहुंचे, जो अब तक चुनिंदा संस्थानों और बड़े शहरों तक सीमित माना जाता था। सरकार द्वारा अब परिषदीय और केजीबीवी विद्यालयों में संगोष्ठी, टेक्नोलॉजी आधारित विशेष कक्षाएं, नवाचार क्विज और रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से बच्चों में वैज्ञानिक सोच और इनोवेशन कल्चर विकसित करने की तैयारी की जा रही है। शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के क्रम में प्रदेश के सभी परिषदीय और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में 'भारत इनोवेट्स 2026' कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इसके अंतर्गत मई 2026 के दौरान विद्यालयों में शिक्षकों और छात्र-छात्राओं की सहभागिता से विभिन्न नवाचार आधारित गतिविधियां कराई जाएंगी। प्रतियोगिता तथा निबंध लेखन जैसी गतिविधियां आयोजित की जाएंगी कार्यक्रम के अंतर्गत विद्यालयों में 'विकसित भारत के नवाचार परिदृश्य' विषय पर संगोष्ठी, 'डीप टेक्नोलॉजी' विषय पर विशेष कक्षाएं, 'भारत क्विज- भारत के नवाचार को कौन जानता है?' प्रतियोगिता तथा निबंध लेखन जैसी गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। इन गतिविधियों का उद्देश्य बच्चों को केवल सैद्धांतिक जानकारी देना ही नहीं, बल्कि उनमें जिज्ञासा, रचनात्मक सोच और समस्या समाधान की क्षमता विकसित करना है। भविष्य की चुनौतियों के लिए बेहतर तरीके से हो सकेंगे तैयार योगी सरकार की रणनीति है कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे भी देश और दुनिया में हो रहे तकनीकी बदलावों और नवाचारों से परिचित हों। यही कारण है कि अब परिषदीय विद्यालयों में भी इनोवेशन और रिसर्च आधारित गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। जब बच्चों को शुरुआती स्तर पर वैज्ञानिक सोच, तकनीक और नवाचार से जोड़ा जाएगा तो वे भविष्य की चुनौतियों के लिए बेहतर तरीके से तैयार हो सकेंगे। स्वयंसेवी संस्थाओं का भी लिया जाएगा सहयोग विद्यालयों में कार्यक्रमों के आयोजन के लिए स्थानीय स्वयंसेवी संस्थाओं और विशेषज्ञों का सहयोग भी लिया जाएगा। शासन ने निर्देश दिए हैं कि गतिविधियों को अधिक प्रभावी और सहभागितापूर्ण बनाया जाए, ताकि अधिक से अधिक छात्र-छात्राएं इसमें शामिल हो सकें। इसके साथ ही विद्यालयों में आयोजित गतिविधियों की फोटो, वीडियो और नवाचार से जुड़ी जानकारियों का दस्तावेजीकरण भी किया जाएगा। तकनीक और नवाचार संस्कृति से जोड़ने का प्रयास योगी सरकार पहले ही निपुण भारत मिशन, स्मार्ट क्लास, डिजिटल मॉनिटरिंग और स्कूल कायाकल्प जैसे अभियानों के जरिए शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक स्वरूप देने पर काम कर रही है। अब 'भारत इनोवेट्स 2026' अभियान को उसी व्यापक विजन का हिस्सा माना जा रहा है, जिसके तहत सरकारी स्कूलों के बच्चों को भी भविष्य की तकनीक और नवाचार संस्कृति से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

एआई मिशन को गति देगा यूपी डाटा सेंटर क्लस्टर: मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने डाटा सेंटर क्लस्टर, प्रोजेक्ट गंगा और गेहूं प्रसंस्करण नीति की उच्च स्तरीय समीक्षा की एआई मिशन को गति देगा यूपी डाटा सेंटर क्लस्टर: मुख्यमंत्री बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण (बीडा) क्षेत्र से शुरू की जा सकती है परियोजना, बड़े पैमाने पर उपलब्ध है भूमि: मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री ने मंडी शुल्क व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता पर दिया जोर, मंडियों को आधुनिक, स्वच्छ और आकर्षक बनाने का दिया निर्देश मंडियों में साफ-सफाई, रंगाई-पुताई, पर्वों के दौरान लाइटिंग, अतिक्रमण हटाने और बेहतर प्रबंधन की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएः मुख्यमंत्री अल नीनो के संभावित प्रभाव के चलते मुख्यमंत्री ने दिए निर्देश, राज्य के खाद्यान्न भंडार पर्याप्त और मजबूत होने चाहिए “प्रोजेक्ट गंगा” के तहत जिन युवाओं को डिजिटल उद्यमी के रूप में चुना जाए, उन्हें गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण दिया जाएः मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री ने ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क के तेजी से विस्तार और कार्यों में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करने पर बल दिया  लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को प्रदेश के भविष्य की अर्थव्यवस्था से जुड़े तीन महत्वपूर्ण विषयों, उत्तर प्रदेश डाटा सेंटर क्लस्टर (यूपीडीसीसी), प्रोजेक्ट गंगा तथा गेहूं के इन-हाउस प्रसंस्करण को बढ़ावा देने के लिए मंडी शुल्क एवं मंडी सेस में संभावित छूट जैसे महत्वपूर्ण विषयों की उच्च स्तरीय समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने यूपी डाटा सेंटर क्लस्टर (यूपीडीसीसी) की समीक्षा करते हुए कहा कि यह परियोजना उत्तर प्रदेश के एआई मिशन की बुनियादी संरचना तैयार करेगी। उन्होंने कहा कि डाटा सेंटर क्लस्टर केवल एनसीआर क्षेत्र तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि प्रदेश के अन्य हिस्सों को भी इससे जोड़ा जाए। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि इसकी शुरुआत बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण (बीडा) क्षेत्र से की जा सकती है, जहां बड़े पैमाने पर भूमि उपलब्ध है। उन्होंने यह भी कहा कि टाटा समूह सहित बड़ी टेक कंपनियों से संवाद स्थापित कर लखनऊ को “एआई सिटी” के रूप में विकसित करने की दिशा में कार्य किया जाए। बैठक में बताया गया कि उत्तर प्रदेश डाटा सेंटर क्लस्टर  प्रदेश को भारत और ग्लोबल साउथ का सबसे बड़ा  एआई कंप्यूट पावर सेंटर बनाने की दीर्घकालिक रणनीति है। इसका उद्देश्य उत्तर प्रदेश को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा सेंटर, क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर और हाई-टेक डिजिटल मैन्युफैक्चरिंग का वैश्विक केंद्र बनाना है। प्रस्तुतीकरण में कहा गया कि यह केवल एक परियोजना नहीं बल्कि अगले 50 वर्षों के लिए उत्तर प्रदेश की नई आर्थिक संरचना का खाका है। इसके तहत वर्ष 2040 तक 5 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था, 1.5 लाख से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार और 5 गीगावॉट एआई कंप्यूट कॉरिडोर विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। बैठक में बताया गया कि वर्ष 2040 तक दुनिया की नई अर्थव्यवस्था एआई, क्लाउड, साइबर सिक्योरिटी, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक व्हीकल, रोबोटिक्स और स्पेस टेक्नोलॉजी जैसे “फ्यूचर एरेना” के इर्द-गिर्द विकसित होगी, जिनका संयुक्त वैश्विक बाजार 29 से 48 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। भारत के लिए एआई सॉफ्टवेयर एंड सर्विसेज, क्लाउड सर्विसेज, साइबर सिक्योरिटी, सेमीकंडक्टर्स, एयरोस्पेस और ईवी जैसे सेक्टर भविष्य के प्रमुख आर्थिक इंजन होंगे। बैठक में उत्तर प्रदेश की पांच प्रमुख संरचनात्मक ताकतों- भौगोलिक स्थिति, विशाल भूमि उपलब्धता, बड़ी युवा आबादी, तेजी से विकसित हो रहा इंफ्रास्ट्रक्चर और मजबूत नेतृत्व को रेखांकित किया गया। कहा गया कि उत्तर प्रदेश का इनलैंड लोकेशन इसे समुद्री जोखिमों और चक्रवातों से सुरक्षित बनाता है, जबकि एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट, लॉजिस्टिक्स नेटवर्क और पावर इंफ्रास्ट्रक्चर पहले से तेजी से विकसित हो रहे हैं। आईआईटी कानपुर, एनआईटी प्रयागराज और 50 से अधिक इंजीनियरिंग संस्थानों के कारण राज्य में विशाल तकनीकी प्रतिभा उपलब्ध है। बैठक में उत्तर प्रदेश को “एशिया का मोस्ट सिक्योर, स्केलेबल एवं कनेक्टेड इनलैंड एआई टेरिटरी” बताया गया। कहा गया कि देश के लगभग सभी प्रमुख फाइबर नेटवर्क यूपी से होकर गुजरते हैं और राज्य भारत के सभी समुद्री केबल लैंडिंग पॉइंट्स से जुड़ा हुआ है। राज्य के भीतर 5 मिलीसेकंड से कम लेटेंसी तथा मुंबई और चेन्नई जैसे डिजिटल हब तक 5–12 मिलीसेकंड कनेक्टिविटी उपलब्ध है। वैश्विक टेक कंपनियों के लिए यूपी कम लागत, बेहतर स्केलेबिलिटी और अधिक नेटवर्क रिडंडेंसी वाला आदर्श एआई इंफ्रास्ट्रक्चर हब है। प्रोजेक्ट गंगा मुख्यमंत्री ने “प्रोजेक्ट गंगा” यानी गवर्नेंट असिस्टेड नेटवर्क फॉर ग्रोथ एंड एडवांसमेंट की भी समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि जिन युवाओं को डिजिटल उद्यमी के रूप में चुना जाए, उन्हें गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण दिया जाए। उन्होंने कहा कि सर्वेक्षण कार्य करने वाली कंपनियां भी इन युवाओं का उपयोग कर सकें, ऐसी व्यवस्था विकसित की जाए। मुख्यमंत्री ने ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क के तेजी से विस्तार और कार्यों में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करने पर बल दिया। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि शुरुआत से ही डिजिटल उद्यमियों को उचित इंसेंटिव उपलब्ध कराए जाएं। बैठक में बताया गया कि प्रोजेक्ट गंगा ग्रामीण उत्तर प्रदेश में हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड नेटवर्क पहुंचाने की महत्वाकांक्षी पहल है। इसका उद्देश्य केवल इंटरनेट उपलब्ध कराना नहीं बल्कि टेलीमेडिसिन, डिजिटल शिक्षा, स्किल डेवलपमेंट, ई-गवर्नेंस, डिजिटल रोजगार और ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देना है। परियोजना के तहत 10 हजार से अधिक युवाओं को डिजिटल सर्विस प्रोवाइडर (डीएसपी) के रूप में विकसित करने का लक्ष्य है, जिससे लगभग 50 हजार प्रत्यक्ष और 1 लाख से अधिक अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने का अनुमान है। योजना के तहत 20 लाख से अधिक घरों को फाइबर आधारित हाई-स्पीड इंटरनेट नेटवर्क से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। प्रत्येक डीएसपी अपने क्षेत्र में 200 से 300 घरों को कनेक्ट कर सकेगा। महिला उद्यमिता को भी विशेष प्राथमिकता दी गई है और लगभग 50 प्रतिशत महिला उद्यमियों को जोड़ने का लक्ष्य तय किया गया है। बैठक में बताया गया कि केवल मोबाइल इंटरनेट के जरिए सीमित सेवाएं संभव हैं, जबकि वास्तविक डिजिटल परिवर्तन के लिए हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड आवश्यक है। एआई आधारित कृषि, ड्रोन मॉनिटरिंग, स्मार्ट विलेज, वर्चुअल लैब, टेलीमेडिसिन और क्लाउड कंप्यूटिंग जैसी सेवाओं के लिए मजबूत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर जरूरी बताया गया। प्रोजेक्ट गंगा के तहत डीएसपी केवल इंटरनेट सेवा प्रदाता नहीं होंगे, बल्कि वे ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल सेवाओं का संपूर्ण नेटवर्क विकसित करेंगे। वे हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड, आईपीटीवी, ओटीटी एक्सेस, सीसीटीवी समाधान, पब्लिक वाई-फाई, साइबर सिक्योरिटी और एंटरप्राइज कनेक्टिविटी जैसी सेवाएं प्रदान करेंगे। योजना के तहत प्रत्येक डीएसपी को 5 लाख रुपये तक का ब्याज मुक्त ऋण उपलब्ध कराया जाएगा। परियोजना फिलहाल 21 प्राथमिक जिलों में “प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट” के रूप में शुरू करने की तैयारी में है और इसके बाद इसे … Read more

क्षेत्रीय विकास और सुरक्षा मुद्दों पर हुई चर्चा, बैठक में शामिल हुए योगी आदित्यनाथ

मध्य क्षेत्रीय परिषद की 26वीं बैठक में शामिल हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने की अध्यक्षता, चार राज्यों के मुख्यमंत्री हुए शामिल कुपोषण उन्मूलन, स्कूल ड्रॉपआउट में कमी लाने, यौन अपराधों में शत-प्रतिशत दोषसिद्धि सुनिश्चित करने एवं राज्य-स्तरीय साइबर हेल्पलाइन जैसे अहम विषयों पर हुई चर्चा  लखनऊ मध्य क्षेत्रीय परिषद की 26वीं बैठक  छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में हुई। बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय गृह व सहकारिता मंत्री अमित शाह ने की। बैठक में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, मेजबान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव व उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर धामी भी मौजूद रहे।  बैठक के उपरांत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट 'एक्स' पर पोस्ट किया। मुख्यमंत्री ने लिखा कि केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में आज छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में आयोजित मध्य क्षेत्रीय परिषद की 26वीं बैठक में सहभाग किया। बैठक में जनकल्याण, सुशासन, क्षेत्रीय विकास, कुपोषण उन्मूलन, स्कूल ड्रॉपआउट में कमी लाने, यौन अपराधों में शत-प्रतिशत दोषसिद्धि सुनिश्चित करने एवं राज्य-स्तरीय साइबर हेल्पलाइन जैसे अहम विषयों पर सार्थक चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने लिखा कि सहकारी संघवाद, समन्वित विकास और राज्यों के मध्य बेहतर तालमेल को नई दिशा देने वाला यह मंच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के 'विकसित भारत' के सामूहिक संकल्प को और अधिक सशक्त करेगा।

माघ मेला 2027 को हाईटेक बनाने की तैयारी, प्रयागराज में शुरू होगी वाटर मेट्रो सेवा

 प्रयागराज  तीर्थराज में नदियों के माध्यम से परिवहन को सुगम बनाने के लिए वाटर मेट्रो चलाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। माघ मेला 2027 में इसके शुभारंभ की तैयारी चल रही है। यहां गंगा और यमुना में वाटर मेट्रो का संचालन किया जाएगा। इसके लिए आठ मेट्रो स्टेशन बनाने का प्रस्ताव जल्द ही तैयार किया जाएगा, जिसके लिए सर्वे का काम पूरा कर लिया गया है।गंगा में दो मेट्रो स्टेशन बनाने पर विचार चल रहा है। यहां दारागंज में नागवासुकि के पास तथा झूंसी में छतनाग के पास स्टेशन बनेगा। इसी तरह संगम में फ्लोटिंग स्टेशन बनाया जाएगा। यमुना में करैलाबाग, बलुआ घाट, बोट क्लब, किला घाट तथा अरैल में स्टेशन बनाए जाएंगे। इन स्टेशनों पर कार्ट और ई-रिक्शा की सुविधा दी जाएगी। साथ ही कैफेटेरिया भी संचालित होगा। भारतीय जलमार्ग प्राधिकरण के अधिकारियों ने बताया कि प्रयागराज में संगम के लिए ही वाटर मेट्रो का प्रमुखता से उपयोग हो सकेगा 18 शहरों में वाटर मेट्रो सेवा शुरू करने की योजना यह पर्यटकों के लिए विशेष रूप से आकर्षण का केंद्र होगा। केंद्र सरकार द्वारा देश के 18 शहरों में वाटर मेट्रो सेवा शुरू करने की योजना के तहत प्रयागराज को पहले चरण के शहरों में शामिल किया गया है। केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्रालय द्वारा जारी योजना के पहले चरण में प्रयागराज, अयोध्या, वाराणसी, श्रीनगर और पटना के साथ-साथ गुवाहाटी को चुना गया है। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य शहर में पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए जल आधारित एक आधुनिक, पर्यावरण अनुकूल और आरामदायक सार्वजनिक परिवहन का साधन प्रदान करना है। इससे शहर के सड़क मार्गों पर ट्रैफिक जाम की समस्या से मुक्ति मिलेगी और यात्रियों का सफर आसान होगा। वाटर मेट्रो नावों को बैट्री और हाइब्रिड ईंधन से चलाया जाएगा, जिससे नदियों में प्रदूषण नहीं होगा। भारतीय जलमार्ग प्राधिकरण के नोडल अधिकारी अशोक कुमार ने बताया कि करैलाबाग से संगम तथा इसके आगे तक इसका संचालन किया जाएगा, जिसका प्रस्ताव तैयार कराया जा रहा है। जल्द ही कोच्चि से वाटर मेट्रो आ जाएगी। इसे पर्यटन विभाग को संचालित करने की जिम्मेदारी दी जाएगी।  

जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत 25-26 मई को होगी शिप्रा तीर्थ परिक्रमा, उज्जैन में तैयारियां तेज

जल गंगा संवर्धन अभियान अंतर्गत उज्जैन में 25-26 मई को शिप्रा तीर्थ परिक्रमा भोपाल में होगा 27 मई से 2 जून तक सदानीरा समागम मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में जन अभियान बना जल गंगा संवर्धन अभियान शिप्रा तीर्थ परिक्रमा में लोक गायिका मैथिली ठाकुर और भारतीय नौसेना बैंड की होगी मनमोहक प्रस्तुति सदानीरा समागम में 9 देशों के राजदूत और प्रमुख कॉर्पोरेट प्रतिनिधि होंगे शामिल नदी, तालाब और जल संरचनाओं के संरक्षण पर होगा राष्ट्रीय विमर्श उज्जैन  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश सरकार द्वारा जल आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में निरंतर कार्य किए जा रहे हैं। राज्य में नदी, तालाब और पारंपरिक जल संरचनाओं को संरक्षित एवं संवर्धित करने के उद्देश्य से शुरू किया गया 'जल गंगा संवर्धन अभियान' अब व्यापक जनभागीदारी के साथ एक जन अभियान का रूप ले चुका है। इस अभियान में प्रदेश में अब तक 1 लाख 81 हजार 763 जल संरक्षण संबंधी कार्यों को सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है। जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ द्वारा उज्जैन में 25-26 मई को 'शिप्रा तीर्थ परिक्रमा' का आयोजन किया जा रहा है। इस धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन में प्रसिद्ध लोक गायिका मैथिली ठाकुर सहित कई लोकप्रिय कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देंगे। इसके साथ ही, वीर भारत न्यास द्वारा भोपाल में भारत भवन में 27 मई से 2 जून तक 'सदानीरा समागम' का आयोजन किया जा रहा है। उज्जैन में गंगा दशमी के पावन पर्व पर होगी शिप्रा तीर्थ परिक्रमा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम मुख्यमंत्री के सांस्कृतिक सलाहकार और महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ के निदेशक श्रीराम तिवारी ने बताया कि उज्जैन में गंगा दशमी के अवसर पर होने वाली शिप्रा तीर्थ परिक्रमा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम एक महत्वपूर्ण आयोजन है। 25 मई को शुरू होने वाली यह परिक्रमा रामघाट से प्रारंभ होकर नृसिंहघाट, कर्कराज मंदिर, वेधशाला, महामृत्युंजय द्वार और प्रशांतिधाम शनि मंदिर से होते हुए दत्त अखाड़ा घाट पहुंचेगी। यात्रा के पहले दिन श्रद्धालु यहां रात्रि विश्राम करेंगे। अगले दिन, गंगा दशमी के अवसर पर यह परिक्रमा रणजीत हनुमान मंदिर, भैरवगढ़, सिद्धवट, मंगलनाथ, सांदीपनि आश्रम, गढ़कालिका और गोपाल मंदिर से होते हुए पुनः रामघाट पर पहुंचकर संपन्न होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा इस परिक्रमा के दौरान माँ शिप्रा को 300 फीट की चुनरी अर्पित की जाएगी। उज्जैन में 25-26 मई को आयोजित होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों के तहत रामघाट पर पंडित ढोली बुआ द्वारा नारद कथा गायन परंपरा पर आधारित 'हरिकथा' का आयोजन 17 मई से प्रतिदिन सायं 7:30 बजे किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, दत्त अखाड़ा घाट पर आयोजित भजन संध्या में इंदौर के श्रेयश शुक्ला एवं साथी तथा जबलपुर की लोक गायिका संजो बघेल एवं साथियों द्वारा प्रस्तुतियां दी जाएंगी। 26 मई को होने वाले मुख्य कार्यक्रमों में भारतीय नौसेना (इंडियन नेवी) के बैंड की प्रस्तुति होगी। इसके साथ ही मुंबई के केशवम् बैंड द्वारा भजन जैमिंग और प्रसिद्ध लोक गायिका मैथिली ठाकुर एवं साथियों द्वारा भजनों की प्रस्तुति दी जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव करेंगे भारत भवन में 'सदानीरा समागम' का शुभारंभ न्यासी सचिव तिवारी ने बताया कि भारत भवन में 27 मई से 2 जून 2026 तक 'सदानीरा समागम' का आयोजन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 27 मई को शाम 7 बजे इसका औपचारिक शुभारंभ करेंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्कृति, पर्यटन और धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) धर्मेन्द्र सिंह लोधी करेंगे। इस अवसर पर इसरो हैदराबाद के भू-विज्ञान समूह के समूह निदेशक डॉ. ईश्वर चंद्र दास विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। सात दिवसीय समागम के माध्यम से जल संरक्षण, भारतीय संस्कृति और पंचमहाभूतों (जल, पृथ्वी, वायु, आकाश और अग्नि) पर केंद्रित एक राष्ट्रीय विमर्श आयोजित होगा। इस आयोजन में देश-विदेश के विद्वान, वैज्ञानिक, कलाकार, पर्यावरणविद् और नीति-निर्माता शामिल होंगे। यह पहला अवसर है जब इसरो , जेके ट्रस्ट, एचयूएल फाउंडेशन, जेके सीमेंट, जेएसडब्ल्यू, टाटा ट्रस्ट, एमडीएल, आईजीआरएमएस, हीरो फ्यूचर एनर्जीस, ओएनजीसी, हिन्दुस्तान पावर, वेदांता ग्रुप और टाटा संस जैसी बड़ी कंपनियों व संस्थाओं के प्रतिनिधि जल संरक्षण के विषय पर एक मंच पर एकत्रित हो रहे हैं। इस समारोह में फिजी, त्रिनिदाद एवं टोबैगो, वेनेजुएला, मैक्सिको, सूरीनाम, इक्वाडोर, साइप्रस और नेपाल सहित नौ देशों के राजनयिक प्रतिनिधि भी भाग लेंगे, जिससे यह आयोजन अंतरराष्ट्रीय स्वरूप ले रहा है। सदानीरा समागम में भारतीय दर्शन के पंचमहाभूतों पर आधारित विभिन्न सत्र आयोजित किए जाएंगे। इन सत्रों में भूगर्भीय जल स्रोत, पर्यावरण, नवीकरणीय ऊर्जा, संस्कृति और पारंपरिक ज्ञान पर विशेषज्ञ चर्चा करेंगे। इसमें देश की प्रतिष्ठित संस्थाओं जैसे इसरो, काशी हिंदू विश्वविद्यालय, आईआईएम बोधगया और विभिन्न कॉर्पोरेट संस्थानों के सीएसआर (CSR) प्रमुख हिस्सा लेंगे।समारोह के दौरान प्रतिदिन शाम को नृत्य-नाटिकाएं, लोकगायन और रंगमंचीय प्रस्तुतियां आयोजित की जाएंगी। इनमें भारतीय नौसेना बैंड की सिम्फनी, गोवर्धन लीला, गंगा यात्रा, अमृतमय, नदी गीत, पानी नामा, लघुशंका नगर, जल प्रवाह, नर्मदे हर, स्वानलेक, क्रिटिकल पॉइंट और 'नर्मदा हर कंकर शंकर' जैसी प्रस्तुतियां मुख्य आकर्षण होंगी। इसके साथ ही, दक्षिण कोरिया की 'मूट डांस कंपनी' की प्रस्तुति विशेष रूप से आयोजित की जा रही है। दर्शकों को क्षेत्रीय संस्कृति से जोड़ने के लिए मालवा, निमाड़, बुंदेलखंड और बघेलखंड की लोक-सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी दी जाएंगी। 'सदानीरा समागम' में प्रवाह फिल्म समारोह और जल केंद्रित प्रदर्शनियां होगी प्रमुख आकर्षण समागम में 28 मई से 2 जून तक भारत भवन के 'अभिरंग' सभागार में 'प्रवाह फिल्म समारोह' का आयोजन किया जाएगा। इसमें जल केंद्रित विषयों पर आधारित हिंदी और अंग्रेजी भाषाओं की 15-15 डॉक्यूमेंट्री और डॉक्यू-ड्रामा फिल्मों का प्रदर्शन किया जाएगा। इन फिल्मों में प्रमुख रूप से 'जल संकट', 'गंगा नदी', 'जल डाकू', 'जब हर एक बूंद मायने रखती है', 'खतरे में नदियाँ' और 'आखिरी बूंद' शामिल हैं। इसके साथ ही, परिसर में 'जल, जंगल, जीवन' पर केंद्रित राष्ट्रीय जनजातीय चित्रांकन कार्यशाला और पारंपरिक चित्र शैलियों में जल कार्यशाला का आयोजन भी किया जा रहा है, जिसमें देश भर के कलाकार भाग लेंगे। सदानीरा समागम के दौरान जल पर केंद्रित 4 विशेष प्रदर्शनियां आयोजित की जा रही हैं। इनमें 'लघु चित्रों में जल', 'भूगर्भीय जल स्रोत', 'मध्यप्रदेश में जल गंगा संवर्धन अभियान' और 'जलचर: जलीय जीवन के प्राणतत्व' शामिल हैं। इन प्रदर्शनियों के आयोजन में मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद , बरकतुल्लाह विश्वविद्यालय और क्षेत्रीय प्राकृतिक विज्ञान संग्रहालय, भोपाल सहयोग कर रहे हैं। जल और संस्कृति आधारित 6 पुस्तकों का होगा विमोचन समारोह में … Read more