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यूपीपीसीएस-2025: 23 सितंबर से शुरू होगा विशेष मॉक इंटरव्यू कार्यक्रम

लखनऊ उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की यूपीपीसीएस-2025 मुख्य परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों को साक्षात्कार की तैयारी के लिए विशेष अवसर मिलेगा। समाज कल्याण मंत्रालय की पहल पर 23 सितंबर से विशेष मॉक इंटरव्यू कार्यक्रम शुरू किया जा रहा है। इसका उद्देश्य अभ्यर्थियों को वास्तविक साक्षात्कार के लिए तैयार करना और उनके व्यक्तित्व, संचार कौशल व आत्मविश्वास को निखारना है। कार्यक्रम का आयोजन गोमती नगर स्थित छत्रपति शाहू जी महाराज शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान, भागीदारी भवन में किया जाएगा। आईएएस-पीसीएस अधिकारी और विशेषज्ञ बताएंगे इंटरव्यू की बारीकियां मॉक इंटरव्यू में उत्तर प्रदेश प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी (उपाम) से जुड़े आईएएस-पीसीएस अधिकारी और विषय विशेषज्ञ अभ्यर्थियों का मार्गदर्शन करेंगे। इसमें साक्षात्कार की तैयारी की रणनीति, सवालों के प्रभावी जवाब देने, व्यक्तित्व प्रस्तुतीकरण, संचार कौशल और आत्मविश्वास बनाए रखने जैसे पहलुओं पर अभ्यास कराया जाएगा। अभ्यर्थियों को अपनी कमियों की पहचान कर उन्हें सुधारने का अवसर भी मिलेगा। कई चरणों में संचालित होने वाला यह कार्यक्रम अभ्यर्थियों को वास्तविक इंटरव्यू के माहौल से परिचित कराने में मदद करेगा। मनोरंजन, खेलकूद और जिम की उपलब्ध कराई जा रही सुविधा प्रदेश में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी को सुविधाजनक बनाने के लिए समाज कल्याण मंत्रालय की ओर से आठ आवासीय कोचिंग केंद्र भी संचालित किए जा रहे हैं। इन केंद्रों में अभ्यर्थियों को निःशुल्क आवासीय प्रशिक्षण के साथ मेस, पुस्तकालय, इंटरनेट, टेस्ट सीरीज और अध्ययन सामग्री जैसी सुविधाएं मिल रही हैं। इसके साथ मनोरंजन, खेलकूद और जिम की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है। निःशुल्क मॉक इंटरव्यू में सभी वर्गों के सफल अभ्यर्थियों को अवसर समाज कल्याण विभाग के उप निदेशक आनंद कुमार सिंह ने बताया कि यह मॉक इंटरव्यू निःशुल्क होगा। समाज कल्याण विभाग के छत्रपति शाहू जी महाराज शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान, भागीदारी भवन और प्रदेश के अन्य परीक्षा पूर्व प्रशिक्षण केंद्रों से प्रशिक्षण लेने वाले अभ्यर्थियों के साथ मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना के अभ्यर्थी भी इसका लाभ उठा सकेंगे। इसके अलावा यूपीपीसीएस-2025 मुख्य परीक्षा में सफल किसी भी वर्ग के इच्छुक अभ्यर्थी मॉक इंटरव्यू में शामिल हो सकेंगे। इस पहल के जरिए प्रदेश सरकार प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं को परीक्षा के अगले और महत्वपूर्ण चरण के लिए अतिरिक्त मार्गदर्शन उपलब्ध करा रही है।

अमेरिका, ब्रिटेन,जर्मनी समेत दुनिया के दिग्गजों का लखनऊ में होगा ‘टेक महाकुंभ’

लखनऊ अमेरिका, ब्रिटेन और जर्मनी समेत दुनिया के विभिन्न देशों के उद्यमी, टेक विशेषज्ञ और बड़ी कंपनियों के प्रतिनिधि अगले महीने लखनऊ में जुटेंगे। मौका होगा उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस (यूपीएसआईएफएस) में 23 से 25 अक्टूबर तक प्रस्तावित तीन दिवसीय इंटरनेशनल डायलॉग 2026 का। देश-दुनिया के करीब 1,200 नीति-निर्माताओं, वरिष्ठ अधिकारियों, उद्योगपतियों, वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, स्टार्टअप, न्यायिक व पुलिस अधिकारियों, शिक्षकों और विद्यार्थियों को एक मंच पर लाने की तैयारी है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से क्वांटम टेक्नोलॉजी, साइबर फॉरेंसिक, डाटा सुरक्षा और कानूनी अनुपालन तक भविष्य की तकनीकों पर यहां मंथन होगा।  यूपीएसआईएफएस के संस्थापक निदेशक डॉ. जीके गोस्वामी ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रदेश के युवाओं को नई टेक्नोलॉजी में दक्ष बनाया जा रहा है, जिससे रोजगार तथा नए अवसरों की असीम संभावनाएं बनेंगी। इसी उद्देश्य से इंटरनेशनल डायलॉग के जरिए नीति, उद्योग और शिक्षा जगत को एक साझा मंच पर लाने की तैयारी है। अब इनोवेशन और रोजगारपरकता के जरिए विकसित भारत की संकल्पना को साकार किया जाएगा। सबसे अधिक जोर इस बात पर दिया जा रहा है कि शैक्षणिक संस्थान रिसर्च और प्रतिभा तैयार करें और युवाओं के लिए इंटर्नशिप, रोजगार तथा नए अवसरों का रास्ता खुले। फॉरेंसिक डीएनए, साइबर फॉरेंसिक, डिजिटल साक्ष्य और आधुनिक जांच प्रणाली समझने का मिलेगा मौका तीन दिन के इस वैश्विक संवाद के केंद्र में ऐसी तकनीकें होंगी, जो आने वाले वर्षों में उद्योग से लेकर सुरक्षा और न्याय व्यवस्था तक में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली हैं। एआई, रोबोटिक्स, ड्रोन और 3-डी प्रिंटिंग के साथ क्वांटम कंप्यूटिंग और क्वांटम कम्युनिकेशन पर चर्चा की जाएगी। पोस्ट-क्वांटम तैयारियों और इस क्षेत्र में राष्ट्रीय क्षमता विकसित करने जैसे विषय भी विमर्श का हिस्सा होंगे। इसी तरह फॉरेंसिक डीएनए, साइबर फॉरेंसिक, डिजिटल साक्ष्य और आधुनिक जांच प्रणालियों पर दुनिया भर के विशेषज्ञ विचार रखेंगे। इसके अलावा डाटा प्रोटेक्शन, प्राइवेसी, ऑडिट, गवर्नेंस और लीगल कंप्लायंस के जरिए नई तकनीक के सुरक्षित और जिम्मेदार इस्तेमाल पर भी जोर रहेगा। उद्योग से होगा सीधा संवाद 23 अक्टूबर का पहला दिन टैलेंट एंड इंडस्ट्री एंगेजमेंट के नाम रहेगा। इसका फोकस विद्यार्थियों और युवा पेशेवरों को सीधे उद्योग जगत से जोड़ने पर होगा। कंपनियों और विशेषज्ञों के साथ संवाद के दौरान इंटर्नशिप और प्लेसमेंट से लेकर भविष्य में जरूरी कौशल, तकनीकी मार्गदर्शन और मास्टरक्लास तक आयोजित करने की योजना है। तकनीकी प्रदर्शन के साथ स्टार्टअप को भी मंच मिलेगा। उद्योग और शिक्षण संस्थानों के बीच रिसर्च, पाठ्यक्रम और प्रशिक्षण में सहयोग की संभावनाएं तलाशी जाएंगी। इसके पीछे सोच युवाओं को केवल डिग्री देने तक सीमित न रहकर उन्हें उद्योग और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार करने की है। पॉलिसी-इंडस्ट्री राउंडटेबल, टेक्नोलॉजी शोकेस, इन्वेस्टमेंट डायलॉग और होगा नॉलेज एक्सचेंज 24 अक्टूबर इंटरनेशनल डायलॉग का मुख्य समिट दिवस होगा। इसमें केंद्र और राज्य सरकार के प्रतिनिधियों के साथ वरिष्ठ नीति-निर्माताओं, उद्योग जगत और स्टार्टअप की भागीदारी की योजना है। इस दौरान पॉलिसी-इंडस्ट्री राउंडटेबल, टेक्नोलॉजी शोकेस, इन्वेस्टमेंट डायलॉग और नॉलेज एक्सचेंज जैसे कार्यक्रम होंगे। विभिन्न कंपनियों और संस्थानों के बीच समझौता ज्ञापन तथा साझा शोध की संभावनाएं भी तलाशी जाएंगी। इसका मकसद नीति बनाने वालों और तकनीक विकसित करने वालों के बीच सीधा संवाद स्थापित करना है। युवाओं के लिए इंटर्नशिप से प्लेसमेंट तक का मंच : डॉ. जीके गोस्वामी यूपीएसआईएफएस के संस्थापक निदेशक डॉ. जीके गोस्वामी ने बताया कि समिट का एक बड़ा हिस्सा रोजगार और भविष्य के कौशल पर केंद्रित होगा। युवा पेशेवरों और विद्यार्थियों को मेंटर्स तथा उद्योग के विशेषज्ञों से जोड़ने के साथ इंटर्नशिप, प्लेसमेंट और उद्यमिता नेटवर्क से जोड़ने की योजना है। उद्योग की जरूरतों के अनुसार प्रशिक्षण और पाठ्यक्रम विकसित करने पर भी बातचीत होगी। इसके जरिए यूपीएसआईएफएस ऐसी व्यवस्था विकसित करना चाहता है, जिसमें शिक्षण संस्थानों से निकलने वाले युवा आधुनिक तकनीक को केवल सैद्धांतिक रूप से न जानें, बल्कि उसका व्यावहारिक इस्तेमाल भी समझें। किताबों से लैब तक कानून, यूपीएसआईएफएस दिखाएगा 'लॉ विथ लैब्स' इंटरनेशनल डायलॉग में यूपीएसआईएफएस का 'लॉ विथ लैब्स' मॉडल भी प्रमुखता से सामने आएगा। इसकी अवधारणा कानून की पढ़ाई को वैज्ञानिक साक्ष्य और उभरती आधुनिक तकनीकों के साथ जोड़ने की है। यानी कानून की समझ से प्रयोगशाला, वैज्ञानिक साक्ष्य और अंततः न्याय तक की पूरी कड़ी। संस्थान में फॉरेंसिक डीएनए के साथ एआई, रोबोटिक्स, ड्रोन, 3-डी प्रिंटिंग, साइबर फॉरेंसिक और एडवांस डिजिटल डायग्नोस्टिक्स जैसी आधुनिक तकनीकों से जुड़ी प्रयोगशालाएं हैं। जिसका उद्देश्य ऐसे पेशेवर तैयार करना है जो तकनीक के इस्तेमाल के साथ उससे जुड़े कानूनी और अनुपालन संबंधी पहलुओं को भी समझ सकें। कंपनियों और स्टार्टअप के लिए भी खुलेगा मंच टेक्नोलॉजी कंपनियों, स्टार्टअप, लॉ फर्म, लीगल-टेक कंपनियों और कंप्लायंस से जुड़े संस्थानों को आयोजन में भागीदार बनने का अवसर दिया गया है। इसके लिए सिल्वर श्रेणी में पांच लाख रुपये या अधिक, गोल्ड में आठ लाख रुपये या अधिक और प्लेटिनम में 12 लाख रुपये या अधिक की श्रेणियां निर्धारित हैं। भागीदारी के जरिए टैलेंट डेवलपमेंट, तकनीकी प्रदर्शन, रिसर्च, प्रशिक्षण और पॉलिसी डायलॉग से जुड़ने के अवसर प्रस्तावित हैं। टैलेंट डेवलपमेंट, रिसर्च, इनोवेशन और पॉलिसी सपोर्ट के लिए आगे का रोडमैप तैयार करने की योजना है। यूपीएसआईएफएस इसमें सरकार, उद्योग और शिक्षा जगत के बीच सेतु की भूमिका निभाएगा।

योगी सरकार में साक्षरता को जन-जन तक पहुंचाने की पहल, 75 जिलों में 5.10 लाख शिक्षार्थियों ने दी परीक्षा

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश में शिक्षा की पहुंच को समाज के प्रत्येक वर्ग तक विस्तार देने के प्रयासों के क्रम में उल्लास-नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के अंतर्गत रविवार को मूलभूत साक्षरता परीक्षा आयोजित की गई। प्रदेश के सभी 75 जनपदों में एक साथ आयोजित इस परीक्षा में लगभग 5.10 लाख शिक्षार्थियों ने प्रतिभाग किया। परिषदीय विद्यालयों के साथ कारागारों और बाल सुधार गृहों में भी परीक्षा केंद्र बनाए गए, जिससे साक्षरता अभियान को समाज के विविध वर्गों तक पहुंचाया जा सके। ज्ञात हो कि उल्लास-नव भारत साक्षरता कार्यक्रम का उद्देश्य 15 वर्ष एवं उससे अधिक आयु वर्ग के असाक्षरों को मूलभूत साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान उपलब्ध कराना है। रविवार को हुई परीक्षा के साथ प्रदेश के सभी 75 जनपदों में साक्षरता की इस प्रक्रिया का महत्वपूर्ण चरण पूरा हुआ। विद्यालयों, कारागारों और बाल सुधार गृहों तक पहुंचे इस अभियान के माध्यम से पढ़ने-लिखने की बुनियादी क्षमता को जीवन के आवश्यक कौशल से जोड़ने की दिशा में प्रयास आगे बढ़ाया गया है। 75 जिलों में एक साथ परखी गई साक्षरता उल्लास-नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित परीक्षा में शिक्षार्थियों के मूलभूत पढ़ने-लिखने तथा संख्यात्मक ज्ञान का आकलन किया गया। प्रदेश के सभी जनपदों में निर्धारित केंद्रों पर आवश्यक व्यवस्थाओं के साथ परीक्षा संपन्न कराई गई। लगभग 5.10 लाख शिक्षार्थियों की सहभागिता ने प्रदेश में संचालित वयस्क साक्षरता अभियान के व्यापक दायरे को रेखांकित किया। विद्यालय से कारागार तक पहुंचा साक्षरता का संदेश इस परीक्षा की विशेषता यह रही कि साक्षरता का अवसर परिषदीय विद्यालयों तक सीमित न रहकर कारागारों एवं बाल सुधार गृहों तक भी पहुंचा। अलग-अलग सामाजिक परिस्थितियों से आने वाले शिक्षार्थियों को मूलभूत साक्षरता और संख्यात्मक ज्ञान से जोड़ने के उद्देश्य से इन स्थानों पर भी परीक्षा आयोजित की गई। चंदौली और जौनपुर में भारत सरकार की टीम ने किया निरीक्षण परीक्षा के निरीक्षण एवं निगरानी के लिए भारत सरकार की टीम जनपद चंदौली एवं जौनपुर में उपस्थित रही। टीम द्वारा निर्धारित परीक्षा केंद्रों का निरीक्षण कर परीक्षा संचालन एवं व्यवस्थाओं का जायजा लिया गया। राज्य मुख्यालय से तीन जिलों में पहुंची निगरानी टीम प्रदेश स्तर पर साक्षरता एवं वैकल्पिक शिक्षा निदेशालय/राज्य साक्षरता मिशन प्राधिकरण, उत्तर प्रदेश, लखनऊ से भी अधिकारियों ने विभिन्न जनपदों में पहुंचकर परीक्षा केंद्रों का निरीक्षण किया। श्री अनिल भूषण चतुर्वेदी, शिक्षा निदेशक बेसिक/साक्षरता ने जनपद लखनऊ, श्रीमती नीलम, उप निदेशक, साक्षरता ने जनपद प्रतापगढ़ तथा श्रीमती प्रतिमा मिश्रा, सहायक निदेशक, साक्षरता ने जनपद सोनभद्र में परीक्षा केंद्रों का निरीक्षण किया।

यूपी नीट यूजी-2026: दूसरे चरण की काउंसलिंग का संशोधित कार्यक्रम जारी, 21 सितंबर से च्वाइस फिलिंग

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा के विस्तार और मेडिकल शिक्षा में प्रवेश प्रक्रिया को पारदर्शी एवं निर्धारित नियमों के अनुरूप संचालित करने की दिशा में यूपी नीट यूजी-2026 की दूसरे चरण की ऑनलाइन काउंसलिंग का संशोधित कार्यक्रम जारी कर दिया गया है। चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण महानिदेशालय, उत्तर प्रदेश की ओर से जारी कार्यक्रम के अनुसार राज्य के राजकीय एवं निजी क्षेत्र के मेडिकल एवं डेंटल कॉलेजों तथा चिकित्सा विश्वविद्यालयों में संचालित एमबीबीएस/बीडीएस पाठ्यक्रम की स्टेट कोटे की सीटों पर प्रवेश के लिए दूसरे चरण की काउंसलिंग की प्रक्रिया निर्धारित समय-सारिणी के अनुसार आगे बढ़ेगी। आधिकारिक यूपी नीट पोर्टल पर भी दूसरे चरण की काउंसलिंग से संबंधित अधिसूचना उपलब्ध है।  संशोधित कार्यक्रम के अनुसार दूसरे चरण की मेरिट सूची 21 सितंबर, 2026 को जारी होगी। इसके बाद अभ्यर्थी 21 सितंबर को अपराह्न 2 बजे से 24 सितंबर को पूर्वाह्न 11 बजे तक ऑनलाइन च्वाइस फिलिंग कर सकेंगे। सीट आवंटन परिणाम 25 सितंबर को जारी किया जाएगा। सीट आवंटित होने वाले अभ्यर्थी 26 सितंबर से 1 अक्टूबर, 2026 तक आवंटन पत्र डाउनलोड कर प्रवेश की प्रक्रिया पूरी कर सकेंगे। महानिदेशालय ने स्पष्ट किया है कि दूसरे चरण में सीटों का आवंटन दूसरे चरण की मेरिट सूची के आधार पर किया जाएगा। काउंसलिंग के लिए पहले से निर्धारित नियम एवं शर्तें लागू रहेंगी। पहले चरण में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों को राहत शासन के दिशा-निर्देशों में कहा गया है कि प्रथम चरण की काउंसलिंग के माध्यम से सरकारी एवं निजी क्षेत्र के मेडिकल कॉलेजों/चिकित्सा विश्वविद्यालयों में जिन अभ्यर्थियों ने प्रवेश ले लिया है, उनका प्रवेश यथावत रहेगा। इससे प्रथम चरण में दाखिला लेने वाले अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है।शासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि 4 राजकीय मेडिकल कॉलेजों में विशेष आरक्षण व्यवस्था से संबंधित मामलों में इलाहाबाद हाईकोर्ट तथा सुप्रीम कोर्ट में लंबित प्रकरणों को ध्यान में रखते हुए संबंधित निर्णयों के अनुरूप आगे की कार्रवाई की जाएगी। महानिदेशालय ने अभ्यर्थियों से नीट यूजी-2026 काउंसलिंग से जुड़ी अद्यतन जानकारी के लिए विभागीय वेबसाइट upneet.gov.in और dgme.up.gov.in को नियमित रूप से देखने की अपील की है। योगी सरकार में चिकित्सा शिक्षा के विस्तार को मिला व्यापक आधार योगी सरकार के कार्यकाल में उत्तर प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा के बुनियादी ढांचे और मेडिकल कॉलेजों की उपलब्धता बढ़ाने पर जोर दिया गया है। वर्तमान यूपी नीट यूजी-2026 काउंसलिंग पोर्टल पर प्रदेश के अनेक राजकीय एवं निजी मेडिकल संस्थान सूचीबद्ध हैं। इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य न्यायालयीन निर्देशों, शासन के निर्णयों और निर्धारित आरक्षण व्यवस्था के अनुरूप काउंसलिंग प्रक्रिया को आगे बढ़ाना है।  हेल्पलाइन से मिलेगी जानकारी हेल्पलाइन: 8189011696, 8189011697, 8189011698, 8189011699, 8189011700 समय: प्रातः 11 बजे से शाम 5 बजे तक।

आरक्षण की चोरी करने वाले आज ज्ञान दे रहे हैं, अंबेडकर को अपमानित करने वाले आज सम्मान की बात करते हैं: अनिल राजभर

लखनऊ समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव की प्रेस कॉन्फ्रेंस में आरक्षण, दलित समाज और बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर को लेकर भाजपा सरकार पर लगे आरोपों का उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर ने तीखा जवाब दिया है। एएनआई से बातचीत में राजभर ने कहा कि सपा के मुखिया प्रदेश की राजधानी में बैठकर प्रतिदिन प्रदेश और सम्मानित जनता को गुमराह करने की कोशिश करते हैं। उनके पास जनता के बीच जाने का समय नहीं है, जनता के बीच जाएंगे भी नहीं। राजभर ने कहा कि आज सपा आरक्षण की बात कर रही है, जबकि उनकी चार सरकारों में पिछड़ों और दलितों के आरक्षण की जितनी डकैती हुई, उतनी शायद ही कभी हुई हो। उन्होंने आरोप लगाया कि आरक्षण की चोरी करने वाले आज आरक्षण पर ज्ञान दे रहे हैं। सपा ने सारे पिछड़ों और अति पिछड़ों का आरक्षण चुराया। जब-जब समाजवादी पार्टी की सरकार बनी, तब-तब आरक्षण की मलाई एक जाति विशेष के लोगों को दी गई। पूरी मलाई खाकर आज ये आरक्षण और बाबा साहब की बात कर रहे हैं। आजम खान पर अनिल राजभर का हमला  उन्होंने कहा कि 2012 से 2017 का दौर याद करना चाहिए। यह साजिश है। समाजवादी पार्टी गुंडों को आगे करके समाज में वैमनस्यता पैदा करने की कोशिश कर रही है। राजभर ने कहा कि अब इसकी भी जांच होगी कि समाजवादी पार्टी के किस गुंडे ने कहां मूर्ति खंडित की। उन्होंने सपा से अपने गिरेबान में झांकने को कहा और आरोप लगाया कि 2012 से 2017 के बीच सपा के संरक्षण में बाबा साहब की मूर्तियों को खंडित करने का काम हुआ। दोहरे चरित्र के लोग हैं सपाई मंत्री ने सवाल किया कि बाबा साहब को भूमाफिया किसने बताया? उन्होंने कहा कि सपा के तत्कालीन मंत्री आजम खान ने बाबा साहब को प्रदेश का सबसे बड़ा भूमाफिया बताया था। जहां बाबा साहब की मूर्तियां लगी हैं और उनके नाम के पार्क बने हैं, वहां यह कहा गया मानो दलित समाज ने उन पर कब्जा कर लिया हो और बाबा साहब सबसे बड़े भूमाफिया हों। राजभर ने कहा कि आज इन्हीं लोगों को बाबा साहब और दलित समाज याद आ रहे हैं। ये दोहरे चरित्र के लोग हैं। आरक्षण की चोरी करने वाले आज आरक्षण पर ज्ञान दे रहे हैं और बाबा साहब को अपमानित करने वाले आज उनके सम्मान की बात कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सपा और उसके नेता जनता को कितना नासमझ समझते हैं, यह उनके बयानों और प्रेस कॉन्फ्रेंस से निकलकर आता है। प्रतिदिन बदल रहे पीडीए का परिभाषा राजभर ने कहा कि चिंता न करें, समाज गुमराह होने वाला नहीं है। प्रदेश उनके असली चेहरे को अच्छी तरह जानता है। पीडीए में दलित का ‘डी’ है, कल क्या कहेंगे पता नहीं। अखिलेश पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि इतना कन्फ्यूज नेता तो हम लोगों ने देखा ही नहीं। प्रतिदिन पीडीए की परिभाषा बदल रहे हैं। जनता सब कुछ देख और समझ रही है। समाजवादी पार्टी की दाल नहीं गलने वाली, निश्चिंत रहें।

झूठ की गूंज में कांग्रेस के युवराज का आचरण नारी शक्ति का अपमान: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

 ग्रेटर नोएडा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी और पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी पर निशाना साधा। राहुल गांधी का नाम लिए बिना उन्हें ‘कांग्रेस का युवराज’ बताते हुए कहा कि अपने झूठ की गूंज में उन्होंने जिस प्रकार का आचरण किया, वह पूरी नारी शक्ति का अपमान है। मुख्यमंत्री ने कहा कि देश को ऐसे लोगों से उम्मीद करना छोड़ देना चाहिए। ये पथभ्रष्ट और मार्ग से भटके हुए लोग हैं, जिनका लक्ष्य समाज में भ्रम पैदा कर अव्यवस्था और अराजकता फैलाना है।   ग्रेटर नोएडा में दो दिवसीय ‘प्रेरणा विमर्श-2026’ के समापन समारोह में मुख्यमंत्री योगी ने पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी के वक्तव्य को दुर्भाग्यपूर्ण और डरावना बताया। उन्होंने कहा कि महत्वपूर्ण संवैधानिक पद पर रहे व्यक्ति से पद की गरिमा के अनुरूप आचरण की अपेक्षा होती है। काश वह भारत की समदृष्टि को समझ पाते तो भारत, भारतीयता और हिंदू दृष्टि को नहीं कोसते। मुख्यमंत्री ने महिला सशक्तीकरण, युवाओं को रोजगार, स्टार्टअप और प्रदेश की अर्थव्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि बीमारू कहा जाने वाला उत्तर प्रदेश अब रेवेन्यू सरप्लस स्टेट और देश का ग्रोथ इंजन बन चुका है।   नारी सशक्तीकरण भाषण से नहीं, काम से होगा मुख्यमंत्री ने कहा कि नारी गरिमा की रक्षा और महिला सशक्तीकरण केवल भाषणों से नहीं होगा। सरकार ने योजनाओं में महिलाओं को प्राथमिकता दी है। देश में तीन करोड़ परिवारों को घरौनी के माध्यम से मकान का मालिकाना अधिकार दिया गया, जिसमें पहला अधिकार महिलाओं का है। 12 करोड़ परिवारों को एलपीजी कनेक्शन और 12 करोड़ घरों में शौचालय की सुविधा दी गई। यूपी में 54 हजार बैंकिंग कॉरेस्पोंडेंट सखी गांवों में बैंकिंग सेवाएं दे रही हैं।   उन्होंने झांसी के बलिनी मिल्क प्रोड्यूसर का उदाहरण देते हुए कहा कि 2019 में पांच महिलाओं से शुरू समूह से आज 62 हजार महिलाएं जुड़ी हैं। इसका टर्नओवर 115 करोड़ रुपये है और प्रत्येक महिला आठ से 10 हजार रुपये महीने कमा रही है। आगरा, काशी, गोरखपुर और लखनऊ में भी मिल्क प्रोड्यूसर काम कर रहे हैं। इनसे करीब चार लाख महिलाएं जुड़ी हैं।   महिला पुलिस 10 हजार से बढ़कर 44 हजार मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 में यूपी पुलिस में केवल 10 हजार महिलाएं थीं, जिनकी संख्या अब 44 हजार हो गई है। अगले तीन-चार महीने में यह आंकड़ा 50 हजार के पार होगा। प्रदेश में महिला वर्कफोर्स की भागीदारी भी 12 प्रतिशत से बढ़कर 36-37 प्रतिशत हो गई है। डिजिटल एंटरप्रेन्योरशिप की नई योजना के तहत आठ हजार न्याय पंचायतों में से चार हजार में महिला उद्यमियों को जोड़कर प्रशिक्षण दिया जाएगा।   9.5 लाख सरकारी नौकरियां, सवा तीन करोड़ को एमएसएमई में काम मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत में सबसे बड़ी युवा शक्ति उत्तर प्रदेश के पास है और प्रदेश में 56 प्रतिशत युवा हैं। पिछले साढ़े नौ वर्ष में 9.5 लाख युवाओं को सरकारी नौकरी दी गई। 96 लाख एमएसएमई इकाइयों में सवा तीन करोड़ युवा काम कर रहे हैं। बेहतर सुरक्षा व्यवस्था के कारण प्रदेश को 50 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले। इनमें 15 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश धरातल पर उतरा और इससे 65 लाख से अधिक युवाओं को नौकरी मिली।   अब यूपी को कोई बीमारू राज्य नहीं कहता मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था, प्रति व्यक्ति आय और बजट तीन गुना हुआ है। नौ-दस वर्ष पहले बीमारू कहा जाने वाला उत्तर प्रदेश आज रेवेन्यू सरप्लस स्टेट और भारत का ग्रोथ इंजन है। अब प्रदेश के सामने पहचान का संकट नहीं है। यह बदलाव विरासत के सम्मान और अपराध व भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति से आया है।   विपक्ष पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि जो लोग पहले यूपी के सामने पहचान का संकट खड़ा करते थे, वे फिर दंगा, कर्फ्यू, समाज को बांटने, भेदभाव, अव्यवस्था और अराजकता का दौर लाना चाहते हैं।   120 से कम थे स्टार्टअप, अब 24 हजार से अधिक मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 से पहले यूपी में 120 से भी कम स्टार्टअप थे, जबकि आज इनकी संख्या 24 हजार से अधिक है। इनमें करीब आधे महिलाओं द्वारा संचालित हैं। उन्होंने पंडित राम प्रसाद बिस्मिल, ठाकुर रोशन सिंह, चंद्रशेखर आजाद, नेताजी सुभाष चंद्र बोस और वीर सावरकर का उल्लेख करते हुए युवाओं से राष्ट्रीय नायकों से प्रेरणा लेने का आह्वान किया।   मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए राष्ट्र प्रथम है। देश सुरक्षित है तो धर्म, उपासना पद्धति, जाति, परिवार और व्यक्ति भी सुरक्षित हैं। नारी और युवा शक्ति का स्वावलंबन ही उत्तर प्रदेश और भारत के स्वावलंबन का आधार बनेगा।   भूतकाल जानेंगे तभी भविष्य के सपने गढ़ेंगे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचारक प्रमुख स्वांत रंजन ने महर्षि अरविंद का उल्लेख करते हुए कहा कि जो समाज अपने भूतकाल के गौरव, वर्तमान की पीड़ा और भविष्य के सपनों को समझता है, वही उन्नति के मार्ग पर आगे बढ़ता है। आचार्य धर्मपाल की पुस्तक ‘द ब्यूटीफुल ट्री’ का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि युवाओं को अपने देश, संस्कृति और उपलब्धियों को जानकर भविष्य के सपने गढ़ने चाहिए।   2020 में शुरू हुई प्रेरणा विमर्श की यात्रा संसद टीवी के संपादक श्याम किशोर ने कहा कि कृपा शंकर के मार्गदर्शन में 2020 में प्रेरणा विमर्श की यात्रा शुरू हुई। इसके तहत स्मारिका, पुस्तकें और ‘केशव संवाद’ प्रकाशित होते हैं। विषय आधारित प्रदर्शनी भी इसका प्रमुख हिस्सा है। समाज और राष्ट्रहित में सकारात्मक पत्रकारिता करने वाली एक महिला को हर वर्ष सम्मानित किया जाता है। उन्होंने बताया कि प्रेरणा विमर्श-2026 का विषय ‘उत्कर्ष नारी सम्मान, युवा स्वाभिमान’ है।   दीप प्रज्ज्वलन से हुआ समापन समारोह का शुभारंभ मुख्यमंत्री योगी ने दीप प्रज्ज्वलित कर समारोह का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में ‘केशव संवाद’ और ‘प्रेरणा विचार’ की वैचारिक यात्रा पर वीडियो दिखाया गया और मुख्यमंत्री को दोनों पत्रिकाओं की प्रतियां सौंपी गईं। एक अन्य वीडियो में प्रदेश की नारी और युवा शक्ति की बदलती तस्वीर प्रस्तुत की गई।   कार्यक्रम में ये रहे मौजूद समारोह में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचारक प्रमुख स्वांत रंजन, गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राणा प्रताप सिंह, प्रेरणा विमर्श के कार्यकारी अध्यक्ष वीके गुप्ता, अध्यक्ष अनिल त्यागी, डॉ. मनमोहन सिंह सिसोदिया, प्रेरणा … Read more

‘यूपी का स्वाद’ से ‘यूपी की खाऊ गली’ तक, एक ही परिसर में मिलेगा प्रदेश के अलग-अलग अंचलों के पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद

लखनऊ/ग्रेटर नोएडा उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो-2026 में प्रदेश की औद्योगिक, कारोबारी और उद्यमशील ताकत के साथ ही उत्तर प्रदेश की समृद्ध खानपान परंपरा भी देश-दुनिया के सामने दिखाई देगी। ट्रेड शो के फूड कोर्ट में प्रदेश के अलग-अलग जनपदों और क्षेत्रों के पारंपरिक व्यंजनों को एक ही स्थान पर प्रस्तुत किया जाएगा। इसके माध्यम से आगंतुकों को उत्तर प्रदेश के विभिन्न अंचलों के विशिष्ट स्वाद का अनुभव एक ही परिसर में मिलेगा। ‘यूपी का स्वाद’ में दिखेगी प्रदेश की खानपान विरासत फूड कोर्ट में ‘यूपी का स्वाद’ के अंतर्गत प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों के प्रसिद्ध व्यंजनों को स्थान दिया गया है। यहां मोदीनगर की जैन शिकंजी, खुर्जा की खुरचन, मुरादाबाद की मुरादाबादी दाल और बिस्कुट रोटी, नोएडा की गुर्जरी थाली, लखनऊ के गलौटी कबाब, टुंडे कबाब और लखनवी बिरयानी तथा वाराणसी का बनारसी पान, टमाटर चाट और कुल्हड़ चाय उपलब्ध रहेगी। इसी क्रम में कानपुर की दही-जलेबी और समोसा चाट, आगरा का पेठा और बेढ़ई संग आलू सब्जी और दालमोट, मथुरा का पेड़ा, प्रयागराज की तहरी, लस्सी और चाट, गोरखपुर का ठेकुआ, बलिया की लिट्टी-चोखा, झांसी का पोहा और बालूशाही, बरेली की आलू टिक्की और सींक कबाब, मेरठ की रेवड़ी और गजक, अयोध्या की गुझिया तथा देसी घी की मिठाइयां, इटावा के मठा के आलू, मुजफ्फरनगर की गजक और गन्ने से जुड़े उत्पाद तथा बरेली की आलू टिक्की और सींक कबाब जैसे स्थानीय स्वाद भी आकर्षण का केंद्र होंगे। यूपी की खाऊ गली’ में दिखेगा क्षेत्रीय स्वाद ट्रेड शो में ‘यूपी की खाऊ गली’ भी विशेष आकर्षण का केंद्र होगी। इसमें बनारस का स्वाद, कानपुर का स्वाद, इलाहाबाद का स्वाद, अवध के व्यंजन, जौनपुर का स्वाद, लखीमपुर का स्वाद, अलीगढ़ का स्वाद, आगरा का स्वाद, मुरादाबाद का स्वाद, खुर्जा का स्वाद, नोएडा का स्वाद, बरेली का स्वाद, गाजियाबाद का स्वाद, बलिया का स्वाद, गोरखपुर का स्वाद और गाजीपुर का स्वाद सहित प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों के खानपान को प्रस्तुत किया जाएगा। इस पहल के माध्यम से प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों की विशिष्ट खानपान परंपराओं को एक बड़े मंच पर प्रदर्शित करने के साथ ही स्थानीय उत्पादों और उनसे जुड़े कारोबार को भी व्यापक पहचान दिलाने का प्रयास किया गया है। ग्रामीण आजीविका से जुड़े उत्पादों को भी मिलेगा मंच फूड कोर्ट में उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन का विशेष फूड स्टॉल भी होगा। यहां ग्रामीण क्षेत्रों में तैयार किए जाने वाले व्यंजनों को प्रदर्शित किया जाएगा। इससे स्थानीय स्तर पर आजीविका से जुड़े समूहों को अपने उत्पादों को बड़े मंच पर प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा। इसके साथ ही फूड कोर्ट में विभिन्न लोकप्रिय खाद्य प्रतिष्ठानों के स्टॉल भी लगाए जाएंगे। इनमें डोमिनोज, वॉव मोमोज, सबवे, वॉव चाइना, केवेंटर, चायोस, टैको बेल, केएफसी, बीकानेरवाला, कोक, बर्गर किंग, सीजन्स कैफे, डोसा किचन, बिटवीन द ब्रेड, बरिस्ता कॉफी, फैट रोल और फ्रूट जूस बार शामिल हैं। उद्योग और निवेश के साथ दिखेगी यूपी की सांस्कृतिक पहचान योगी सरकार के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश को निवेश, उद्योग और निर्यात के साथ-साथ अपनी स्थानीय पहचान को बड़े बाजार से जोड़ने की दिशा में भी आगे बढ़ाया जा रहा है। उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो इसी व्यापक प्रयास का महत्वपूर्ण मंच है, जहां प्रदेश की औद्योगिक क्षमता के साथ स्थानीय उत्पाद, हस्तशिल्प, खानपान और उद्यमिता को भी प्रदर्शित किया जाता है। फूड कोर्ट में प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों के व्यंजनों को एक साथ प्रस्तुत किए जाने से उत्तर प्रदेश की विविधता में एकता और समृद्ध खानपान परंपरा भी सामने आएगी। देश-विदेश से आने वाले खरीदारों, निवेशकों, उद्यमियों और आगंतुकों के लिए यह प्रदेश की आर्थिक क्षमता के साथ उसकी सांस्कृतिक और स्थानीय पहचान से परिचित होने का अवसर भी बनेगा। स्थानीय स्वाद को वैश्विक मंच से जोड़ने की पहल उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो में उद्योग, निवेश और कारोबार के साथ प्रदेश के स्थानीय स्वाद को शामिल करना ‘स्थानीय से वैश्विक’ की अवधारणा को विस्तार देता है। एक ही परिसर में पूर्वांचल, अवध, बुंदेलखंड, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और मध्य उत्तर प्रदेश के अलग-अलग स्वादों की मौजूदगी प्रदेश की खानपान विविधता को रेखांकित करेगी। यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो-2026 में जहां उत्तर प्रदेश की औद्योगिक और कारोबारी क्षमता दुनिया के सामने प्रस्तुत होगी, वहीं ‘यूपी का स्वाद’ और ‘यूपी की खाऊ गली’ के माध्यम से प्रदेश की मिट्टी से जुड़े स्वाद और परंपराओं की खुशबू भी देश-दुनिया तक पहुंचेगी।

ममता को चुनाव हराने की कथित योजना का दावा, ऋतब्रत बोले- कैमक स्ट्रीट से बनी थी रणनीति

कोलकाता  विधानसभा में विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी ने दावा किया है कि 2026 के विधानसभा चुनाव में पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी समेत तृणमूल कांग्रेस के 14 उम्मीदवारों को हराने की योजना पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के निर्देश पर उनके कार्यालय कैमक स्ट्रीट से बनाई गई थी। एक समाचार पत्र को दिए गए साक्षात्कार में उन्होंने दावा किया कि उनके पास इस संबंध में पर्याप्त साक्ष्य हैं और जरूरत पड़ने पर इसे अदालत में पेश किया जा सकता है। यह दावा हालिया मीडिया रिपोर्ट में भी प्रकाशित हुआ है। 'ममता को हराकर संगठन पर कंट्रोल चाहते थे अभिषेक' ऋतब्रत का दावा है कि इसके तहत संबंधित क्षेत्रों में पार्टी एजेंटों को रोकने और महत्वपूर्ण कार्यकर्ताओं को निष्क्रिय करने जैसे कदम उठाए गए। ऋतब्रत के मुताबिक, उद्देश्य ममता बनर्जी को चुनाव में हराकर संगठन और सरकार पर नियंत्रण हासिल करना था। उन्होंने यह भी दावा किया कि उनके पास कथित योजना में शामिल सभी 14 नामों की सूची है। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्ट में उन्होंने पूरी सूची सार्वजनिक नहीं की है। अभिषेक बनर्जी की ओर से इस विशेष दावे पर तत्काल प्रतिक्रिया का उल्लेख नहीं है। भवानीपुर में ममता की हार का भी जिक्र 2026 के विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी भवानीपुर में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से हार गई थीं। चुनाव परिणाम के बाद ममता की ओर से मतदान प्रक्रिया में अनियमितता के आरोप लगाए गए थे, जिनमें पार्टी एजेंटों को मतदान केंद्रों में प्रवेश नहीं देने का आरोप भी शामिल था। ऋतब्रत के मौजूदा दावे के बाद इन आरोपों और उनके बताए कथित घटनाक्रम के बीच संबंध को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, दोनों घटनाओं के बीच सीधे संबंध की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है।

लिपिक संवर्ग सीधी भर्ती-2023 के चयनित अभ्यर्थियों ने निष्पक्ष एवं पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया की सराहना की

लखनऊ  उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड की लिपिक संवर्ग सीधी भर्ती-2023 के अंतर्गत चयनित अभ्यर्थियों के चेहरे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हाथों नियुक्ति पत्र पाकर खिल उठे। उन्होंने एक स्वर में कहा कि मेहनत और योग्यता के आधार पर नौकरी मिलने से उनका वर्षों का सपना पूरा हुआ है। चयनित अभ्यर्थियों ने भर्ती प्रक्रिया को निष्पक्ष एवं पारदर्शी बताते हुए योगी सरकार की सराहना की। मेहनत करने वाले अभ्यर्थियों को मिली सफलता लखनऊ निवासी संजीव वर्मा का चयन उपनिरीक्षक (गोपनीय) के पद पर हुआ है। उन्होंने बताया कि परीक्षा 2 नवंबर 2025 को हुई थी और मार्च 2026 में परिणाम आया। संजीव ने कहा कि पूरी नियुक्ति निष्पक्ष एवं पारदर्शी तरीके से हुई है। मेहनत करने वालों को सफलता मिली है। मुख्यमंत्री के हाथों नियुक्ति पत्र पाकर उन्हें गर्व महसूस हो रहा है। लखीमपुर खीरी निवासी रजत गुप्ता ने बताया कि उनका चयन भी उपनिरीक्षक (गोपनीय) के पद पर हुआ है। यूपी पुलिस में यह उनका दूसरा चयन है। वर्ष 2020 में वह आरक्षी पद पर चयनित हुए थे। उन्होंने कहा कि योगी सरकार में भर्तियां निष्पक्ष हो रही हैं। लिखित परीक्षा, टाइपिंग और मेडिकल की प्रक्रिया में भी पारदर्शिता रही। केवल फॉर्म भरने में खर्च किया था पैसा वहीं, पुलिस सहायक उपनिरीक्षक लिपिक पद पर चयनित अंजू भारती ने कहा कि उनका चयन बिना किसी पक्षपात, लेनदेन और सिफारिश के हुआ है। उन्हें केवल फॉर्म भरने में पैसा खर्च किया था। उन्होंने कहा कि योगी सरकार में बिना सिफारिश नौकरी मिलना संभव हो रहा है। इसी पद पर चयनित आदर्श कुमार जैन ने भी भर्ती को निष्पक्ष और पारदर्शी बताते हुए मुख्यमंत्री का आभार जताया। पुलिस सहायक उपनिरीक्षक (लेखा) पद पर चयनित दर्शना बाजपेयी ने कहा कि भर्ती में कहीं भी सिफारिश या लेनदेन की जरूरत नहीं पड़ी। उन्हें केवल योग्यता के आधार पर नियुक्ति मिली है। दर्शना बाजपेयी ने बताया कि तीन साल की तैयारी के बाद मिली सफलता उनके और परिवार के लिए बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के हाथों नियुक्ति पत्र मिलने की उन्होंने कभी कल्पना नहीं की थी। मुख्यमंत्री योगी के हाथों नियुक्ति पत्र पाने की है खुशी पुलिस सहायक उपनिरीक्षक (लेखा) के पद पर चयनित धीरेंद्र सिंह ने बताया कि मेहनत करने वाले अभ्यर्थियों को सफलता मिली है। 5 साल से तैयारी कर रहे थे, अब जाकर सफलता मिली है। आज बहुत खुशी का दिन है, मुख्यमंत्री जी के हाथों नियुक्ति पत्र मिला है। सिद्धार्थ श्रीवास्तव ने बताया कि सहायक उप निरीक्षक (लिपिक) के पद पर उनका चयन हुआ है। पूरी भर्ती निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से सम्पन्न कराई गई है। 2021 से लगातार तैयारी कर रहे थे, आज नियुक्ति पत्र पाकर बहुत अच्छा लग रहा है।

अखिलेश ने आंबेडकर और दलितों को मिटाया, योगी जी ने दिया सम्मान: एमएलसी

लखनऊ विधान परिषद सदस्य व उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम के पूर्व अध्यक्ष डॉ. लालजी प्रसाद निर्मल ने सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव पर निशाना साधा। उन्होंने 2012 से 2017 तक अखिलेश यादव की सपा सरकार के कार्यकाल को सबसे घटिया बताया, कहा-इसमें खूब दलित उत्पीड़न हुए। इनके कार्यकाल में दो लाख दलित अधिकारी रिवर्ट कर दिए गए थे। इन्होंने नई राजस्व संहिता बनाकर दलितों को जमीन आवंटन में मिलने वाली प्राथमिकता को समाप्त कर दिया और इनके सजातीय बंधुओं ने दलितों की जमीनों पर कब्जा कर लिया। डॉ. निर्मल ने आरोप लगाया कि सपा शासन में डॉ. आंबेडकर की मूर्तियों को तोड़ा गया। लखनऊ में इनके कार्यकर्ताओं ने पूर्व मुख्यमंत्री मायावती की प्रतिमा की गर्दन उड़ा दी थी। गाजियाबाद में हज हाउस के उद्घाटन में इनके चहेते मंत्री आजम खान ने डॉ. आंबेडकर को भूमाफिया कहा और रामपुर तारामंडल से डॉ. आंबेडकर का नाम मिटा दिया। एमएलसी ने कहा कि सपा स्थापना काल से ही दलित विरोधी रही है, इसीलिए इन्होंने सार्वजनिक रूप से दलितों के प्रोन्नति में आरक्षण का विरोध किया और लोकसभा में आरक्षण का बिल फाड़ डाला। अपनी सरकार में इन्होंने ठेकेदारी और आउटसोर्स में दलितों का आरक्षण समाप्त कर दिया। डॉ. निर्मल ने सपा और भाजपा सरकार की तुलना की। कहा कि अखिलेश यादव ने आंबेडकर और दलितों को मिटाया तो योगी जी ने उन्हें इन्हें सम्मान दिलाया और दलितों का सशक्तिकरण किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अखिलेश यादव द्वारा समाप्त किए गए  संत रविदास नगर भदोही की बहाली की। कन्नौज मेडिकल कालेज का नाम पुनः डॉ. आंबेडकर के नाम से बहाल किया। उनकी प्रतिमाओं की सुरक्षा और सम्मान के लिए 403 करोड़ रुपये का बजट अवमुक्त किया।  योगी जी ने दलितों की मांग पर ऐशबाग में डॉ. आंबेडकर स्मारक एवं सांस्कृतिक केंद्र की स्थापना भी की ।