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नारंगी बैराज परियोजना के सर्वेक्षण कार्य के लिए 4.82 करोड़ रुपये स्वीकृत

नारंगी बैराज परियोजना के सर्वेक्षण कार्य के लिए 4.82 करोड़ रुपये स्वीकृत रायपुर छत्तीसगढ़ शासन, जल संसाधन विभाग द्वारा बस्तर जिले के विकासखण्ड-बस्तर की नारंगी बहुउद्देशीय बैराज परियोजना के सर्वेक्षण कार्य के लिए 4 करोड़ 82 लाख 99 हजार रूपए स्वीकृत किए गए है। सर्वेक्षण कार्य कराने के लिए मुख्य अभियंता गोदावरी कछार जल संसाधन विभाग जगदलपुर को प्रशासकीय स्वीकृति दी गई है।

कबीरधाम जिले में सिंचाई योजना के कार्यों के लिए 15.86 करोड़ रुपये स्वीकृत

कबीरधाम जिले में सिंचाई योजना के कार्यों के लिए 15.86 करोड़ रुपये स्वीकृत रायपुर  छत्तीसगढ़-शासन जल संसाधन विभाग द्वारा कबीरधाम जिले विभिन्न सिंचाई योजनाओं के कार्यों के लिए 15 करोड़ 86 लाख 8 हजार रुपये स्वीकृत किये गये हैं।    जल संसाधन विभाग द्वारा स्वीकृत सिंचाई योजनाओं में कबीरधाम जिले के नरसिंहपुर जलाशय के शीर्ष कार्य एवं नहरों का मरम्मत कार्य के लिए एक करोड़ 71 लाख 47 हजार रूपए स्वीकृत किए गए है। योजना के कार्य पूर्ण होने से 45 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिलेगी। विकासखण्ड पंडरिया के कामठी जलाशय के नहरों का लाईनिंग कार्य के लिए 4 करोड़ 82 लाख 98 हजार रूपए स्वीकृत किए गए है। योजना के कार्य पूर्ण होने से 112 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिलेगी। विकासखण्ड पंडरिया की मोहपार जलाशय के शीर्ष कार्य एवं नहरों का जीर्णेाद्धार तथा लाईनिंग कार्य के लिए 4 करोड़ 99 लाख 15 हजार रूपए स्वीकृत किए गए हैं। योजना के कार्य पूर्ण होने से 95 हेक्टेयर क्षेत्र मंे सिंचाई सुविधा मिलेगी।     इसी तरह से विकासखण्ड सहसपुर लोहारा की दमऊनाला व्यपवर्तन के नहर का लाईनिंग कार्य के लिए 3 करोड़ 76 लाख रूपए स्वीकृत किए गए है। योजना के कार्य पूर्ण होने से 75 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिलेगी। छिरहा डायवर्सन के गेट उन्नयन एवं नहर लाईनिंग कार्य एवं पक्के संरचनाओं का निर्माण कार्य के लिए एक करोड़ 31 लाख 72 हजार रूपए स्वीकृत किए गए है। योजना के कार्य पूर्ण होने से 48 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिलेगी।

CM साय के नेतृत्व में ग्रामीण परिवारों को मिल रहा आवास, सुरक्षा और सम्मान

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विजन से गांवों तक पहुंची आवास की सौगात, शांति बाई का बदला जीवन मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में जनकल्याणकारी योजनाओं से ग्रामीण परिवारों को मिल रहा सुरक्षा और सम्मान ग्राम पंचायत धनौली की शांति बाई को आवास के साथ विधवा पेंशन से मिला आर्थिक संबल रायपुर, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के विकासखंड गौरेला की ग्राम पंचायत धनौली निवासी श्रीमती शांति बाई के लिए पक्का घर केवल एक मकान नहीं, बल्कि सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन की नई शुरुआत है। कभी मिट्टी के कच्चे घर में बारिश के दिनों की चिंता के बीच जीवन बिताने वाली शांति बाई आज अपने पक्के और सुरक्षित आशियाने में सुकून के साथ जीवन व्यतीत कर रही हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत शांति बाई के परिवार को पक्का आवास उपलब्ध हुआ। प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को बुनियादी सुविधाओं से युक्त पक्का आवास उपलब्ध कराना है। छत्तीसगढ़ में भी केंद्र और राज्य स्तर की योजनाओं के माध्यम से पात्र हितग्राहियों तक विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। शांति बाई के लिए बदली जिंदगी की तस्वीर शांति बाई बताती हैं कि पहले उनका परिवार कच्चे मकान में रहता था। बारिश का मौसम शुरू होते ही घर की सुरक्षा और परिवार की चिंता बढ़ जाती थी। घर के आसपास कीचड़ और पानी जमा होने से रोजमर्रा के काम प्रभावित होते थे। कच्चे घर में रहने के दौरान हर बारिश एक नई परेशानी लेकर आती थी। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्का घर मिलने के बाद उनकी जिंदगी में यह स्थिति बदल गई है। मजबूत दीवारों और सुरक्षित छत वाले नए घर ने परिवार को मौसम की चिंता से काफी राहत दी है। अपने नए आशियाने को देखकर शांति बाई के चेहरे पर संतोष और खुशी साफ दिखाई देती है। प्रधानमंत्री के ‘सबका साथ, सबका विकास’ के विजन से जुड़ा प्रयास शांति बाई के जीवन में आया यह बदलाव केंद्र सरकार की ग्रामीण आवास संबंधी योजनाओं के उस व्यापक उद्देश्य से जुड़ा है, जिसके तहत पात्र ग्रामीण परिवारों को आवासीय सुरक्षा उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाता है। उनके मामले में आवास की सुविधा के साथ सामाजिक सुरक्षा के रूप में विधवा पेंशन का लाभ भी मिल रहा है, जिससे उन्हें नियमित आर्थिक सहायता प्राप्त हो रही है। शांति बाई कहती हैं कि पक्का घर मिलने से परिवार को सुरक्षा और सुविधा मिली है। पेंशन की सहायता से घर के जरूरी खर्चों में भी मदद मिलती है। उनके अनुसार आवास और पेंशन, दोनों का लाभ उनके लिए जीवन को अधिक सुरक्षित बनाने वाला सहयोग साबित हुआ है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में योजनाओं के क्रियान्वयन पर जोर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार केंद्र एवं राज्य की जनकल्याणकारी योजनाओं को पात्र हितग्राहियों तक पहुंचाने पर जोर दे रही है। ग्रामीण परिवारों के जीवन में आवास, सामाजिक सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं का विस्तार इसी समग्र कल्याणकारी दृष्टिकोण का हिस्सा है। शांति बाई का अनुभव इस बात का उदाहरण है कि किसी परिवार के लिए पक्का घर मिलने से केवल रहने की जगह नहीं बदलती, बल्कि सुरक्षा, सुविधा और भविष्य को लेकर विश्वास भी मजबूत होता है। अब बारिश में घर की चिंता नहीं रहती शांति बाई अपने अनुभव साझा करते हुए कहती हैं कि पहले बारिश के दिनों में कच्चे घर को लेकर चिंता बनी रहती थी। अब पक्का घर मिलने के बाद परिवार सुरक्षित महसूस करता है। वे आवास योजना का लाभ मिलने और पेंशन से आर्थिक सहायता प्राप्त होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करती हैं। शांति बाई की कहानी ग्रामीण क्षेत्र में सरकारी योजनाओं के माध्यम से जीवन में आने वाले बदलाव की एक व्यक्तिगत मिसाल है। पक्का आवास उनके परिवार को मौसम की कठिनाइयों से राहत देने के साथ सुरक्षित जीवन का आधार उपलब्ध करा रहा है, वहीं विधवा पेंशन उन्हें आर्थिक सहायता प्रदान कर रही है। पक्का घर, सुरक्षित जीवन और सामाजिक सुरक्षा, शांति बाई के जीवन में इन सुविधाओं का साथ उनके लिए नई उम्मीद और संतोष का आधार बना है।

लखपति दीदी योजना में छत्तीसगढ़ की बड़ी उपलब्धि, 13.96 लाख महिलाएं आत्मनिर्भर

छत्तीसगढ़ में 13.96 लाख महिलाएं बनीं लखपति दीदी लखपति महिला पहल की राज्य स्तरीय स्टीयरिंग समिति की तृतीय बैठक संपन्न लक्ष्य के 179 प्रतिशत महिलाएं लखपति दीदी बन हुईं आत्मनिर्भर रायपुर  पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ द्वारा संचालित लखपति महिला पहल को प्रदेश में उल्लेखनीय सफलता मिली है। भारत सरकार द्वारा वर्ष 2023-26 के लिए छत्तीसगढ़ को 7.82 लाख ग्रामीण महिलाओं को लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। इसके विरुद्ध अब तक प्रदेश की 13.96 लाख ग्रामीण महिलाओं को लखपति दीदी की श्रेणी में लाकर आत्मनिर्भर बनाया गया है। यह निर्धारित लक्ष्य का 179 प्रतिशत है।        लखपति महिला पहल की राज्य स्तरीय स्टीयरिंग समिति की तृतीय बैठक मंगलवार को नवा रायपुर स्थित महानदी भवन में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव श्री भीम सिंह की अध्यक्षता में संपन्न हुई। बैठक में राज्य के 27 विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ के मिशन संचालक श्री अश्वनी देवांगन ने लखपति महिला पहल के अंतर्गत प्रदेश में संचालित गतिविधियों और अब तक हुई प्रगति की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की। विभागीय अभिसरण से महिलाओं की आय बढ़ाने पर जोर        बैठक में विभिन्न विभागों के साथ अभिसरण के माध्यम से स्व-सहायता समूहों से जुड़ी ग्रामीण महिलाओं की आय में वृद्धि करने तथा उन्हें स्थायी आजीविका के अवसरों से जोड़ने पर विस्तृत चर्चा हुई। महिलाओं को विभिन्न आर्थिक गतिविधियों, स्वरोजगार और आजीविका के स्थायी साधनों से जोड़कर उनकी वार्षिक आय में वृद्धि सुनिश्चित करने के प्रयासों को और गति देने पर भी विचार-विमर्श किया गया। महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल        लखपति महिला पहल का उद्देश्य ग्रामीण स्व-सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को विविध आजीविका गतिविधियों से जोड़कर उनकी आय में निरंतर वृद्धि करना और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। बैठक में इस दिशा में विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष जोर दिया गया। इस अवसर पर पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग तथा छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ के अधिकारी-कर्मचारी भी उपस्थित रहे।

सौर सुजला योजना से बदली किसान चरण सिंह की खेती की तस्वीर

रायपुर दंतेवाड़ा जिले के ग्राम मुरकी निवासी किसान चरण सिंह ठाकुर के लिए सौर सुजला योजना खेती में नई संभावनाओं का आधार बनी है। योजना के तहत स्थापित सोलर पंप से सिंचाई की सुविधा मिलने के बाद उन्होंने न केवल अपनी कृषि गतिविधियों का विस्तार किया, बल्कि खेती के साथ मछली पालन को जोड़कर आमदनी का अतिरिक्त साधन भी तैयार किया है। विकासखंड दंतेवाड़ा के ग्राम मुरकी में रहने वाले ठाकुर पहले सिंचाई के लिए पारंपरिक साधनों और पानी की उपलब्धता पर निर्भर थे। पर्याप्त एवं नियमित सिंचाई सुविधा नहीं होने के कारण खेती का दायरा सीमित था। सौर पंप लगने से उनकी यह समस्या काफी हद तक दूर हो गई। अब उन्हें सिंचाई के लिए बिजली अथवा डीजल पर निर्भर नहीं रहना पड़ता और वे समय पर फसलों को पानी दे पा रहे हैं। सिंचाई की सुविधा मिलने के बाद ठाकुर खरीफ और रबी, दोनों मौसमों में खेती कर रहे हैं। वे धान के साथ उड़द और अरहर जैसी दलहनी फसलें उगा रहे हैं। इसके अलावा लौकी, भिंडी, करेला, बरबट्टी सहित विभिन्न मौसमी सब्जियों का उत्पादन कर स्थानीय बाजार में बिक्री से अतिरिक्त आय अर्जित कर रहे हैं। फसलों में विविधता आने से उनकी खेती अधिक उपयोगी और लाभकारी हुई है। श्री ठाकुर ने सौर पंप की सुविधा का उपयोग केवल खेतों की सिंचाई तक सीमित नहीं रखा है। वे इसके माध्यम से तालाब में पानी की उपलब्धता बनाए रखते हुए मछली पालन भी कर रहे हैं। खेती और मछली पालन के समन्वित प्रयास से उपलब्ध भूमि एवं जल संसाधनों का बेहतर उपयोग हो रहा है और परिवार के लिए आय के अलग-अलग स्रोत विकसित हुए हैं। इन्हीं गतिविधियों के माध्यम से उनकी वार्षिक आमदनी में 80 से 90 हजार रुपये का इजाफा हुआ है। श्री ठाकुर बताते हैं कि सोलर पंप ने खेती के प्रति उनका भरोसा बढ़ाया है। अब वे मौसम के साथ अलग-अलग फसलें और सब्जियां उगा पा रहे हैं। मछली पालन से भी अतिरिक्त आय मिल रही है। सौर ऊर्जा से संचालित होने के कारण पंप पर ईंधन का खर्च नहीं आता, जिससे खेती की लागत कम रखने में मदद मिलती है। दूरस्थ एवं आदिवासी बहुल दंतेवाड़ा जिले में सौर सुजला योजना किसानों तक स्वच्छ ऊर्जा आधारित सिंचाई सुविधा पहुंचाकर उनकी खेती को नया आधार दे रही है। चरण सिंह ठाकुर का उदाहरण बताता है कि सिंचाई के भरोसेमंद साधन और उपलब्ध संसाधनों के बेहतर उपयोग से किसान परंपरागत खेती से आगे बढ़कर बहुफसली कृषि, सब्जी उत्पादन और मछली पालन जैसी गतिविधियां अपनाते हुए अपनी आय बढ़ा सकते हैं।

कृत्रिम गर्भाधान से अपने डेयरी फार्म में तैयार कर रहे उन्नत नस्ल की बछिया, बाहर से गाय खरीदने की जरूरत हुई कम

रायपुर  पीढ़ियों से चले आ रहे गौपालन को आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक पशुपालन पद्धतियों से जोड़कर लुण्ड्रा विकासखंड के ग्राम पंचायत दोरना निवासी राजनाथ यादव ने इसे सफल डेयरी व्यवसाय का रूप दिया है। पशु चिकित्सा विभाग के मार्गदर्शन में कृत्रिम गर्भाधान, नस्ल सुधार और बेहतर पशु प्रबंधन को अपनाकर उन्होंने अपने डेयरी व्यवसाय को विस्तार दिया है। आज उनकी डेयरी में 40 से 50 गायों से प्रतिदिन करीब 300 से 350 लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है और यह परिवार के लिए नियमित एवं मजबूत आजीविका का साधन बनी है। कृत्रिम गर्भाधान से अपने फार्म में तैयार कर रहे उन्नत नस्ल की बछिया राजनाथ यादव बताते हैं कि उनके परिवार में उनके पिता के समय से ही गौपालन किया जाता रहा है। पहले परिवार स्थानीय नस्ल की गाय और भैंस पालता था। समय के साथ उन्होंने पशुपालन में आधुनिक तकनीकों को अपनाने का निर्णय लिया और एचएफ नस्ल की गायें खरीदीं। इसके बाद पशु चिकित्सा विभाग के सहयोग से उन्नत नस्ल के सीमन से कृत्रिम गर्भाधान कराना शुरू किया। इसका परिणाम यह हुआ कि अब उनके डेयरी फार्म में ही बेहतर नस्ल की बछिया तैयार हो रही हैं। इससे उन्हें डेयरी के विस्तार के लिए बार-बार बाहर से गाय खरीदने की आवश्यकता कम हुई है। नस्ल सुधार से बढ़ा दुग्ध उत्पादन, सालाना 10 से 12 लाख रुपये तक मुनाफा राजनाथ बताते हैं कि उन्नत नस्ल की बछिया तैयार होने और पशुओं के बेहतर प्रबंधन से उनकी डेयरी की क्षमता बढ़ी है। वर्तमान में उनके पास लगभग 40 से 50 गायें हैं, जिनसे प्रतिदिन 300 से 350 लीटर तक दूध का उत्पादन हो रहा है। इससे परिवार को नियमित आमदनी मिल रही है। राजनाथ के अनुसार डेयरी व्यवसाय से उन्हें सालाना लगभग 10 से 12 लाख रुपये तक का मुनाफा हो रहा है। पशु चिकित्सा विभाग का मार्गदर्शन बना डेयरी विकास का आधार राजनाथ बताते हैं कि पशु चिकित्सा विभाग के अधिकारी-कर्मचारी समय-समय पर उनके पशुओं की देखरेख के लिए पहुंचते हैं। पशुओं के स्वास्थ्य, नस्ल सुधार और कृत्रिम गर्भाधान से संबंधित आवश्यक जानकारी और तकनीकी मार्गदर्शन भी दिया जाता है। विभागीय सहयोग से बेहतर नस्ल की बछिया तैयार करने और डेयरी व्यवसाय को आगे बढ़ाने में उन्हें मदद मिली है। उन्नत किसान के रूप में सम्मान से बढ़ा उत्साह राजनाथ को उन्नत किसान के रूप में सम्मान भी मिला है, जिससे उनका उत्साह और बढ़ा है। उन्होंने कहा कि पशुधन विकास और डेयरी गतिविधियों को मिल रहे प्रोत्साहन से पशुपालकों के लिए आजीविका के नए अवसर तैयार हो रहे हैं। उन्होंने पशुधन विकास को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। साथ ही पशु चिकित्सा विभाग द्वारा समय-समय पर दिए जा रहे मार्गदर्शन और सहयोग के लिए धन्यवाद दिया। परंपरा से व्यवसाय तक का सफर सेवा संकल्प अभियान के तहत राजनाथ यादव की ‘सेवा की कहानी’ बताती है कि परंपरागत गौपालन में आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक पशुपालन पद्धतियों को अपनाकर आजीविका को नया स्वरूप दिया जा सकता है। उन्नत नस्ल, कृत्रिम गर्भाधान, बेहतर पशु प्रबंधन और विभागीय मार्गदर्शन के सहारे राजनाथ ने गौपालन को अपने परिवार के लिए व्यवस्थित और लाभकारी डेयरी व्यवसाय में बदल दिया है।

पक्के आशियानों से संवर रही जिंदगी, खुशहाल जीवन का मिला नया आधार

रायपुर हर परिवार का सपना होता है कि उसका अपना ऐसा घर हो, जहां परिवार सुरक्षित वातावरण में रह सके और मौसम की चुनौतियों की चिंता न हो। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए इस सपने को पूरा करने में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। योजना के माध्यम से पात्र परिवारों को आवास निर्माण के लिए सहायता मिल रही है, जिससे कच्चे और असुरक्षित मकानों से निकलकर अनेक परिवार अपने पक्के आशियाने में पहुंच रहे हैं। शहरों में योजना से लाभान्वित परिवारों के अनुभव बताते हैं कि पक्का मकान मिलने से उनके रहन-सहन में सकारात्मक बदलाव आया है। कोरबा के पोड़ीबहार निवासी  आनंद राम लंबे समय से कच्चे मकान में रह रहे थे। बारिश के दिनों में टपकती छत, सीलन और जहरीले जीव-जंतुओं का डर परिवार की परेशानी बढ़ाता था। आवास स्वीकृत होने और किश्तों में सहायता प्राप्त होने के बाद उन्होंने निर्माण शुरू किया। आज उनका पक्का घर परिवार को सुरक्षा और सुकून दे रहा है। वे इसे अपने परिवार के बेहतर भविष्य की नींव बताते हैं। कोसाबाड़ी की मती ललिता रजक ने भी बरसों से पक्के घर का सपना संजोया था। खराब आर्थिक परिस्थितियों के कारण मकान निर्माण कठिन था। योजना के सहयोग से उनका यह सपना पूरा हुआ और परिवार को स्थायी आवास के साथ सुरक्षा, सुविधा एवं आत्मविश्वास का अनुभव मिला। वे अपने पक्के घर को परिवार की खुशियों और सुरक्षित भविष्य का आधार मानती हैं। काशीनगर निवासी मती गुंजा साहू का परिवार भी लंबे समय तक कच्चे मकान में रहा। बारिश के दौरान पानी टपकने और सीलन की समस्या के साथ सांप-बिच्छुओं का डर बना रहता था। पीएम आवास (शहरी) 2.0 के तहत उन्हें तीन किश्तों में लगभग 2.50 लाख रुपये की सहायता मिली। अपनी बचत राशि के साथ उन्होंने पक्के मकान का निर्माण पूरा किया। आज उनका परिवार सुरक्षित वातावरण में सुकून से रह रहा है। छुरीकला नगर पंचायत के  सुनील कुमार तिवारी के परिवार की कहानी भी आवास योजना से आए बदलाव को सामने रखती है। वे मिट्टी से बने दो कमरों के मकान में पत्नी और बेटी के साथ रहते थे। सीमित आय के बीच पक्का मकान बनाना कठिन था। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 2.26 लाख रुपये की स्वीकृत लागत में केंद्रांश और राज्यांश की सहायता प्राप्त हुई, जिसके बाद उनका पक्का घर तैयार हुआ। वे कहते हैं कि योजना ने उनके परिवार को सुरक्षित आवास के साथ बेहतर भविष्य की उम्मीद दी है। पथर्रीपारा निवासी  सनातन प्रसाद पाठक भी पहले कच्चे मकान में रहते थे। ठेका मजदूरी से परिवार का भरण-पोषण करने वाले  पाठक के लिए हर बारिश चिंता लेकर आती थी। योजना का लाभ मिलने के बाद उनका पक्का मकान तैयार हुआ और परिवार को मौसम की परेशानियों से राहत मिली। इसी क्षेत्र के  धरम लाल ध्रुव के परिवार ने भी योजना के सहयोग से अपना पक्का घर बनाया। उनका कहना है कि मजबूत छत और दीवारों वाले घर में अब परिवार सुरक्षित और सुकून से रह रहा है। लाभार्थी परिवारों ने प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के प्रति योजना के संचालन तथा जरूरतमंद परिवारों तक इसका लाभ पहुंचाने के लिए आभार व्यक्त किया है। उनका कहना है कि आवास निर्माण के लिए मिली सहायता ने उनके वर्षों पुराने सपने को पूरा करने में महत्वपूर्ण सहयोग दिया है। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) से नगरीय निकायों के आर्थिक रूप से कमजोर अनेक परिवारों को आवास निर्माण का सहारा मिल रहा है। किसी के लिए यह वर्षों पुराने सपने का पूरा होना है, तो किसी के लिए परिवार की सुरक्षा और स्थायित्व की नई शुरुआत। पक्के आशियाने के साथ इन परिवारों के जीवन में सुविधा, आत्मविश्वास और बेहतर भविष्य की नई उम्मीद जुड़ रही है।

गणित तार्किक सोच, रचनात्मकता, जिज्ञासा एवं समस्या-समाधान की क्षमता विकसित करने का प्रभावी माध्यम

रायपुर  विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के प्रति रूचि, नवाचार और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से राज्य में विभिन्न शैक्षणिक एवं जन-जागरूकता गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसी क्रम में छत्तीसगढ़ रीजनल साइंस सेंटर, रायपुर द्वारा गणित शिक्षण को सरल, रूचिकर, गतिविधि-आधारित एवं रचनात्मक बनाने के उद्देश्य से 22 एवं 23 सितंबर को ‘द आर्ट ऑफ टीचिंग मैथमेटिक्स : फ्रॉम फीयर टू फैसिनेशन’ विषय पर दो दिवसीय इंटरैक्टिव सत्र का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन उप मुख्यमंत्री एवं विज्ञान प्रौद्योगिकी मंत्री विजय शर्मा के मार्गदर्शन तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा तथा छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद एवं रीजनल साइंस सेंटर के महानिदेशक प्रशांत कविश्वर के नेतृत्व में किया गया। कार्यक्रम के प्रथम दिवस 22 सितंबर को रायपुर के चार विकासखंडों से विज्ञान एवं गणित विषय के लगभग 120 शिक्षकों ने ऑफलाइन सहभागिता की। रायपुर जिले के अन्य शिक्षकों के लिए सत्र का ऑनलाइन प्रसारण भी किया गया। प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों को गणित को केवल पाठ्यपुस्तक, सूत्रों और गणनाओं तक सीमित न रखते हुए गतिविधियों, प्रयोगों, अनुभवों तथा दैनिक जीवन से जोड़कर पढ़ाने की विभिन्न तकनीकों से परिचित कराया गया। हैंड्स-ऑन गतिविधियों के माध्यम से यह समझाया गया कि कठिन प्रतीत होने वाली गणितीय अवधारणाओं को भी सरल, रोचक और सहज तरीके से विद्यार्थियों तक पहुंचाया जा सकता है। कार्यक्रम के दूसरे दिन 23 सितंबर को बी.एड. एवं डी.एड. विद्यार्थियों के लिए विशेष इंटरैक्टिव सत्र आयोजित किया गया। इसमें एससीईआरटी के बी.एड. एवं डी.एड. विद्यार्थी, पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के बी.एड. विद्यार्थी तथा आईटीईपी के विद्यार्थियों ने सहभागिता की। सत्र का उद्देश्य भावी शिक्षकों को गणित शिक्षण की नवीन, गतिविधि-आधारित एवं व्यावहारिक पद्धतियों से परिचित कराना रहा, ताकि वे भविष्य में कक्षा में गणित को अधिक प्रभावी एवं आनंददायक तरीके से प्रस्तुत कर सकें। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ रीजनल साइंस सेंटर, रायपुर के परियोजना निदेशक प्रभारी डॉ. शैलेश कुमार सिंह ने कहा कि गणित को विद्यार्थियों के लिए केवल सूत्रों और गणनाओं का विषय न बनाकर सोचने, समझने, प्रश्न पूछने और समाधान खोजने का माध्यम बनाया जाना चाहिए। उन्होंने गतिविधि-आधारित एवं अनुभवात्मक शिक्षण को गणितीय अवधारणाओं को सहज रूप से समझाने का प्रभावी माध्यम बताते हुए भावी शिक्षकों को कक्षा में नवीन शिक्षण तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित किया। ऑल इंडिया रामानुजन सोसाइटी के निदेशक एवं रामानुजन टैलेंट सर्च फाउंडेशन, बेंगलुरु के मैथ कोच बी. एन. राव ने प्रशिक्षण के दोनों दिवसों पर प्रतिभागियों के साथ संवाद करते हुए गणित शिक्षण की नवीन एवं गतिविधि-आधारित विधियों पर मार्गदर्शन दिया। उन्होंने हैंड्स-ऑन गतिविधियों, व्यावहारिक उदाहरणों, गणितीय खेलों और दैनिक जीवन से जुड़े उदाहरणों के माध्यम से बताया कि किस प्रकार गणितीय अवधारणाओं को सरल और आनंददायक बनाया जा सकता है। उन्होंने शिक्षकों से विद्यार्थियों को केवल उत्तर बताने के बजाय स्वयं सोचने, तर्क करने, प्रश्न पूछने और समाधान खोजने के लिए प्रेरित करने पर विशेष जोर दिया। सत्र के दौरान यह भी रेखांकित किया गया कि छोटे-छोटे प्रयोग, गतिविधियां, प्रश्नोत्तरी और रचनात्मक अभ्यास विद्यार्थियों में गणित के प्रति रुचि एवं जिज्ञासा विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। दो दिवसीय कार्यक्रम के माध्यम से वर्तमान शिक्षकों के साथ-साथ भावी शिक्षकों को भी गणित शिक्षण की नवीन पद्धतियों से जोड़ने का प्रयास किया गया। कार्यक्रम में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि गणित केवल अंकों और सूत्रों का विषय नहीं है, बल्कि यह विद्यार्थियों में तार्किक सोच, रचनात्मकता, जिज्ञासा एवं समस्या-समाधान की क्षमता विकसित करने का प्रभावी माध्यम है। कार्यक्रम के सफल आयोजन में छत्तीसगढ़ रीजनल साइंस सेंटर की टीम, संबंधित अधिकारियों एवं कार्यक्रम से जुड़े सभी सहयोगियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।  

एम हेल्पलाइन बनी जनसमस्याओं के त्वरित निराकरण का माध्यम

रायपुर  मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के नेतृत्व में शासन-प्रशासन तक आम नागरिकों की शिकायतों की पहुंच और उनके समयबद्ध निराकरण पर जोर दिया जा रहा है। इसी क्रम में सीएम हेल्पलाइन में प्राप्त एक शिकायत पर खनिज विभाग द्वारा त्वरित कार्रवाई करते हुए अवैध रेत परिवहन में संलिप्त 4 ट्रैक्टर वाहनों को जब्त किया गया है।  कलेक्टर  विजय दयाराम के. के निर्देशानुसार गौरेला पेन्ड्रा मरवाही जिले में अवैध रेत खनन एवं परिवहन के विरुद्ध खनिज विभाग द्वारा लगातार निगरानी और कार्रवाई की जा रही है। सीएम हेल्पलाइन में अवैध रेत परिवहन से संबंधित शिकायत प्राप्त होने पर खनिज विभाग की टीम ने तत्काल संज्ञान लेते हुए कोलबिर्रा, पथर्रा एवं मटियाडाड़ क्षेत्र में जांच एवं कार्रवाई की। कार्रवाई के दौरान अवैध रेत परिवहन में संलिप्त पाए गए 4 ट्रैक्टर वाहनों को जब्त किया गया। जब्त किए गए सभी वाहनों को कोटमी चौकी में सुरक्षित रखा गया है। मामले में संबंधित वाहन मालिकों के विरुद्ध खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम के प्रावधानों के तहत नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। खनिज विभाग द्वारा अवैध खनन एवं परिवहन से जुड़े मामलों में नियमानुसार कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। सीएम हेल्पलाइन के माध्यम से प्राप्त शिकायत पर हुई इस त्वरित कार्रवाई से यह भी स्पष्ट होता है कि नागरिकों द्वारा दर्ज कराई गई शिकायतों को संबंधित विभागों तक पहुंचाकर उनके निराकरण की प्रक्रिया को प्रशासनिक स्तर पर आगे बढ़ाया जा रहा है। राज्य के आधिकारिक डिजिटल सेवा तंत्र में शिकायत पटल और आवेदन की स्थिति ट्रैक करने जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं, जिससे नागरिक शासकीय सेवाओं और शिकायतों से संबंधित प्रक्रिया की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।  मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय द्वारा जनसमस्याओं के निराकरण को शासन की कार्यप्रणाली का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाने पर जोर दिया गया है। खनिज विभाग की इस कार्रवाई से अवैध रेत परिवहन पर निगरानी और शिकायतों के आधार पर त्वरित कार्रवाई की प्रक्रिया को बल मिला है। जिले में खनिज संसाधनों के अवैध उत्खनन एवं परिवहन पर प्रभावी नियंत्रण के लिए विभागीय स्तर पर कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।

अटारी स्थित बॉटनिकल गार्डन का होगा पुनर्विकास; पर्यटकों को मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं और नए आकर्षण

रायपुर छत्तीसगढ़ सरकार राज्य की प्राकृतिक धरोहरों को संवारने और पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक बड़ी परियोजना पर कार्य कर रही है। रायपुर के अटारी स्थित प्रसिद्ध नंदनवन को पीपीपी (सार्वजनिक-निजी भागीदारी) मॉडल के तहत नए और आकर्षक स्वरूप में विकसित किया जाएगा। इस कायाकल्प योजना पर लगभग 50 करोड़ रूपए की लागत आएगी। मुख्य सचिव  विकासशील की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में एक उच्च स्तरीय बैठक के दौरान नंदनवन पुनर्विकास की प्रस्तावित परियोजना के प्रस्ताव का प्रस्तुतिकरण किया गया। जिसका नंदन वन पीपीपी समिति द्वारा अनुमोदन किया गया। बैठक में नंदनवन के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और इसे पर्यावरण व पर्यटन के एक बड़े केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में चर्चा की गई। पीपीपी मॉडल पर आधारित योजना के अंतर्गत नंदनवन को आधुनिक एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर के पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए सार्वजनिक-निजी सहभागिता ली जाएगी। बॉटनिकल गार्डन का पुनर्विकास, प्राकृतिक संतुलन और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए बॉटनिकल गार्डन को नए सिरे से संवारा जाएगा। परिसर में पर्यटकों के लिए विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचा, स्वच्छ सुविधाएं और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाएगा। बच्चों और परिवारों के मनोरंजन के लिए नए आकर्षण और गतिविधियां जोड़ी जाएंगी। सुशासन नीति के तहत राज्य सरकार छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक संपदा का संरक्षण करते हुए पर्यटन के क्षेत्र को नई गति दे रही है। नंदनवन का यह पुनर्विकास प्रकृति, पर्यावरण और आधुनिक जन-सुविधाओं का एक बेहतरीन संगम साबित होगा, जिससे स्थानीय व बाहरी पर्यटकों के अनुभव में बड़ा सुधार आएगा। बैठक में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अपर मुख्य सचिव  मनोज कुमार पिंगुआ, पीसीसीएफ  अरूण कुमार पांडेय, विधि एवं विधायी विभाग के प्रमुख सचिव  मनीष कुमार ठाकुर, नीति आयोग के सदस्य  आशीष भट्ट, वित्त विभाग सहित समीति के अन्य सदस्य एवं अन्य विभागों के प्रमुख अधिकारी शामिल हुए।