samacharsecretary.com

पेंड्रा के मेधावी विद्यार्थियों से वीडियो कॉल

रायपुर छत्तीसगढ़ में बोर्ड परीक्षाओं में सफलता हासिल करने वाले विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन करते हुए कैबिनेट मंत्री  राजेश अग्रवाल ने अपने प्रभार क्षेत्र पेंड्रा के मेधावी विद्यार्थियों ताहिरा खान, भूमिका और ओंकार केंवट से वीडियो कॉल के माध्यम से संवाद किया। इस दौरान उन्होंने विद्यार्थियों को उनकी उत्कृष्ट सफलता पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।        मंत्री  अग्रवाल ने कहा कि विद्यार्थियों की यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार के लिए बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने विद्यार्थियों के परिश्रम, अनुशासन और समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि उनकी सफलता अन्य विद्यार्थियों के लिए भी प्रेरणास्रोत बनेगी। उन्होंने विद्यार्थियों को आगे भी इसी लगन और मेहनत के साथ अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया।        इस अवसर पर उन्होंने छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल की कक्षा 10 वीं एवं 12 वीं की मुख्य परीक्षा में सफल होने वाले सभी विद्यार्थियों को बधाई देते हुए उनके अभिभावकों और गुरुजनों के योगदान की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की सफलता में शिक्षकों के मार्गदर्शन और अभिभावकों के सहयोग की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। मंत्री  अग्रवाल ने सभी सफल विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए उन्हें आगे की पढ़ाई और जीवन में निरंतर सफलता प्राप्त करने के लिए शुभकामनाएँ दीं।

केले के पत्तों से किया गया विशेष देखभाल

रायपुर जिला अस्पताल बीजापुर के विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई (SNCU) में एक अत्यंत दुर्लभ एवं गंभीर बीमारी से पीड़ित नवजात शिशु का सफलतापूर्वक उपचार कर उसे नया जीवन प्रदान किया गया है। ग्राम कोरसागुड़ा कोरसागुड़ा, बासागुड़ा विकासखण्ड उसूर निवासी शांति मोटू पूनेम के नवजात को 4 अप्रैल 2026 को गंभीर अवस्था में भर्ती किया गया था। जांच में शिशु को Staphylococcal Scalded Skin Syndrome नामक अत्यंत दुर्लभ त्वचा रोग से पीड़ित पाया गया, जिसमें त्वचा जलने जैसी स्थिति में छिलने लगती है और संक्रमण तेजी से फैलता है। यह बीमारी बहुत ही कम मामलों में देखने को मिलती है। शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. नेहा चव्हाण के नेतृत्व में टीम ने 25 दिनों तक लगातार गहन उपचार, एंटीबायोटिक थेरेपी एवं विशेष नर्सिंग देखभाल प्रदान की। उपचार के दौरान शिशु की अत्यंत नाजुक और प्रभावित त्वचा की सुरक्षा के लिए विशेष सावधानियां बरती गईं। शिशु को बाहरी संक्रमण और घर्षण से बचाने हेतु पारंपरिक एवं सहायक उपाय के रूप में स्वच्छ एवं स्टरलाइज किए गए केले के पत्तों का उपयोग किया गया। इन पत्तों को बिस्तर के रूप में इस प्रकार बिछाया गया कि नवजात की त्वचा को मुलायम और सुरक्षित सतह मिले, जिससे शरीर पर रगड़ कम हो और संक्रमण का खतरा घटे। साथ ही नियमित रूप से पत्तों को बदलकर स्वच्छता बनाए रखी गई, जिससे बच्चे को एक संक्रमण-रहित वातावरण मिल सके। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. बी. आर. पुजारी एवं सिविल सर्जन डॉ. रत्ना ठाकुर के मार्गदर्शन में उपचार सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस उपलब्धि में कलेक्टर श्री संबित मिश्रा एवं जिला पंचायत सीईओ श्रीमती नम्रता चौबे के मार्गदर्शन एवं सतत प्रशासनिक सहयोग की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने में मदद मिली। शिशु के परिजनों ने भावुक होकर कहा कि उन्होंने अपने बच्चे के जीवित रहने की उम्मीद लगभग खो दी थी, लेकिन चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ के समर्पण, निरंतर देखभाल और अथक प्रयासों ने उनके बच्चे को नया जीवन दे दिया। उन्होंने इसे अपने परिवार के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं बताया और पूरे चिकित्सा दल के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया। यह सफलता दर्शाती है कि अब दूरस्थ क्षेत्रों में भी गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हो रही हैं और जिला अस्पताल बीजापुर का SNCU क्षेत्रवासियों के लिए आशा का केंद्र बनकर उभर रहा है।

रिजल्ट से असंतुष्ट छात्रों के लिए बड़ा अपडेट, 10वीं-12वीं में पुनर्मूल्यांकन के लिए 14 मई तक मौका

रायपुर. छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल ने हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी मुख्य परीक्षा 2026 के परिणाम जारी होने के बाद छात्रों के लिए अहम निर्देश जारी किए हैं। जो विद्यार्थी अपने प्राप्त अंकों से संतुष्ट नहीं हैं वे पुनर्गणना, पुनर्मूल्यांकन और उत्तर पुस्तिका की छाया प्रति के अवलोकन के लिए आवेदन कर सकते हैं। मंडल द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, छात्र 14 मई 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। गौरतलब है कि हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी परीक्षा का परिणाम 29 अप्रैल 2026 को घोषित किया गया। मंडल ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा परिणाम जारी होने की तिथि से 15 दिनों के भीतर ही आवेदन करना अनिवार्य होगा। निर्धारित समय सीमा के बाद किसी भी प्रकार का आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा। छात्रों को सलाह दी गई है कि वे निर्धारित समय सीमा के भीतर आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से आवेदन प्रक्रिया पूरी करें, ताकि किसी भी प्रकार की असुविधा से बचा जा सके।

आत्मसमर्पण के बाद बढ़ी अंदरूनी कलह, Naxal Central Committee का देवजी पर बड़ा हमला

जगदलपुर. नक्सल मोर्चे से बड़ी खबर सामने आई है, जहां माओवादी संगठन के भीतर आंतरिक टकराव खुलकर सामने आ गया है। नॉर्थ कोऑर्डिनेशन कमेटी (NCC) द्वारा जारी एक प्रेस नोट में आत्मसमर्पण कर चुके शीर्ष माओवादी नेता वेणुगोपाल देवजी पर तीखा हमला किया गया है। NCC ने अपने बयान में स्पष्ट रूप से कहा है कि देवजी अब संगठन के लिए “गद्दार” हैं और उनके आत्मसमर्पण के बाद संगठन का उनसे कोई संबंध नहीं रह गया है। इस बयान के बाद माओवादी खेमे में हलचल और तेज हो गई है। आत्मसमर्पण के बाद बढ़ा विवाद बता दें कि वेणुगोपाल देवजी के आत्मसमर्पण को लेकर संगठन के भीतर लंबे समय से असंतोष की स्थिति बताई जा रही थी। अब NCC के ताजा बयान ने इस विवाद को सार्वजनिक रूप से और बढ़ा दिया है। संगठन ने यह भी कहा है कि उनका संघर्ष अब भी जारी रहेगा और वे सशस्त्र आंदोलन को ही अंतिम रास्ता मानते हैं। ‘गोरिल्ला युद्ध’ जारी रखने का दावा प्रेस नोट में NCC ने दोहराया है कि संगठन कमजोर जरूर हुआ है, लेकिन वह खत्म नहीं हुआ है। बयान में कहा गया है कि वे “गोरिल्ला युद्ध” के जरिए अपनी गतिविधियों को आगे बढ़ाते रहेंगे और “क्रांति” को जारी रखेंगे। प्रतिबंध हटाने की मांग खारिज, आंतरिक एकता का दावा देवजी द्वारा माओवादी संगठन पर लगे प्रतिबंध को हटाने की मांग को भी NCC ने सिरे से खारिज कर दिया है। संगठन ने इसे व्यक्तिगत राय बताते हुए कहा कि यह विचार संगठन की आधिकारिक नीति नहीं है। अपने बयान में NCC ने यह भी दावा किया है कि संगठन के भीतर किसी भी तरह की दरार या मतभेद नहीं हैं और वे पूरी तरह एकजुट हैं।

लैंडिंग के दौरान बड़ा हादसा टला, Lucknow रनवे पर बंदर आने से यात्रियों की थमी सांसें

लखनऊ. राजधानी के चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर एक बड़ा हादसा टल गया। जब रायपुर जा रही एक फ्लाइट के रनवे पर अचानक एक बंदर आ गया।पायलट ने तुरंत इमरजेंसी ब्रेक लगा दिया, जिससे 132 यात्रियों और क्रू सदस्यों की जान बच गई। घटना की जांच के लिए नागरिक उड्डयन विभाग ने आदेश दिए हैं। बताया जा रहा है कि इस फ्लाइट में 132 यात्री और क्रू सदस्य सवार थे। 132 में से आधे से ज्यादा यात्री रायपुर के रहने वाले थी। जानकारी के अनुसार फ्लाइट रनवे पर तेज गति से दौड़ रहा था और टेकऑफ की प्रक्रिया में था। इसी दौरान अचानक बंदर रनवे पर आ गया। जिसे तुरंत पायलट ने देख लिया और इमरजेंसी ब्रेक लगा दिया। पायलट की सूझबूझ से 132 लोगों की जान बच गई। घटना के दौरान कुछ समय के लिए विमान में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। एयरपोर्ट प्रशासन सूचना मिलते ही हरकत में आया और कुछ समय के लिए रनवे को बंद कर दिया गया। फिर बंदर को पकड़ने के लिए पूरे परिसर में अभियान चलाया गया। एयरपोर्ट से जुड़े अफसरों ने बताया कि फ्लाइट में सवार सभी यात्री सुरक्षित हैं और विमान को किसी प्रकार का नुकसान नहीं हुआ है। इधर, नागरिक उड्डयन विभाग ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं। उन्होंने एयरपोर्ट प्रशासन से इस पूरी घटना की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। बता दें कि फ्लाइट टेकऑफ के दौरान रनवे पर किसी भी जीव या वस्तु का आना खतरनाक साबित हो सकता है। इस स्थिति को बर्ड स्ट्राइक या रनवे इंट्रूजन कहा जाता है और इससे विमान के इंजन या पहियों को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है। पायलट ने यदि समय रहते एक्शन नहीं लिया होता तो बड़ी जनहानि हो सकती थी।

सफलता की कहानी: पलाश फूल से बढ़ती आजीविका और समृद्धि

सफलता की कहानी: पलाश फूल से बढ़ती आजीविका और समृद्धि रायपुर पलाश (टेसू या ढाक) का फूल न केवल प्राकृतिक सुंदरता का प्रतीक है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था, आजीविका और स्वास्थ्य के लिए एक बहुमूल्य संसाधन है। इसके नारंगी-लाल फूलों को जंगल की आग भी कहा जाता है, जो वसंत ऋतु में ग्रामीण क्षेत्रों में समृद्धि लाते हैं। पलाश के फूल, बीज और गोंद (कमरकस) आयुर्वेद में चर्म रोग, पेट के कीड़े, डायबिटीज, और यौन स्वास्थ्य में सुधार के लिए प्रयुक्त होते हैं। इन औषधीय उत्पादों को बेचकर भी ग्रामीण अपनी आय बढ़ाते हैं। औषधीय और सांस्कृतिक फूल है पलाश               पलाश फूल (ब्यूटिया मोनोस्पर्मा), जिसे टेसू, ढाक या “जंगल की आग” (फ्लेम ऑफ द फॉरेस्ट) भी कहा जाता है, भारत का एक महत्वपूर्ण औषधीय और सांस्कृतिक फूल है। बसंत ऋतु में खिलने वाले इसके आकर्षक नारंगी फूल न केवल प्राकृतिक सुंदरता बढ़ाते हैं, बल्कि औषधीय उपयोग, प्राकृतिक होली रंग और त्वचा की देखभाल में भी काम आते हैं। छत्तीसगढ़ के वन मण्डल कटघोरा में पलाश के वृक्ष बड़ी संख्या में पाए जाते हैं। पसान, केन्दई, जटगा, एतमानगर, कटघोरा, चौतमा और पाली जैसे क्षेत्रों में इसकी भरपूर उपलब्धता है। यहां के आदिवासी और वनवासी परिवारों के लिए लघु वनोपज संग्रहण आजीविका का प्रमुख साधन है। पलाश फूल का संग्रहण मुख्यत मार्च-अप्रैल माह में किया जाता है। छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ, रायपुर द्वारा वर्ष 2025 में इसका संग्रहण दर 11.50 रूपए प्रति किलोग्राम निर्धारित किया गया। यह दर संग्राहकों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य दिलाने में मददगार साबित हुई है। कटघोरा वनमण्डल में पलाश फूल का संग्रहण लगातार बढ़ रहा है          वर्ष 2022-23 में 116 संग्राहकों से 402 क्विंटल, वर्ष 2023-24 में 40 संग्राहकों से 58 क्विंटल,वर्ष 2024-25 में 107 संग्राहकों से 147 क्विंटल और वर्ष 2025-26 में 20 संग्राहकों से 76 क्विंटल संग्रहण किया गया इसके साथ ही साथ पलाश के मूल्य में भी वृद्धि हुई है। वर्ष 2022-23 में 900 रुपये प्रति क्विंटल मिलने वाला पलाश वर्ष 2024-25 में बढ़कर 1150 रुपये प्रति क्विंटल हो गया। इसके बाद संघ मुख्यालय द्वारा इसे 1600 रुपये प्रति क्विंटल की दर से विक्रय किया गया, जिससे संग्राहकों को बेहतर लाभ मिला। 20 संग्राहकों को कुल 87,400 रुपए का भुगतान             वन धन विकास केंद्र पसान, मोरगा, डोंगानाला, गुरसियां और मानिकपुर के माध्यम से संग्रहण कार्य को संगठित रूप दिया गया है। इन केंद्रों ने स्थानीय लोगों को प्रशिक्षण, संग्रहण और विपणन में सहयोग प्रदान किया। वर्ष 2025-26 में पलाश फूल संग्रहण करने वाले 20 संग्राहकों को कुल 87,400 रुपए का भुगतान किया गया, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई और जीवन स्तर में सुधार आया। यह पहल शासकीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसमें लघु वनोपज के माध्यम से ग्रामीण और आदिवासी परिवारों को रोजगार और आय के अवसर मिल रहे हैं। ग्रामीण रोजगार का एक बड़ा साधन पलाश के फूल        पलाश के फूल मां लक्ष्मी को अत्यंत प्रिय माना जाता है, इसलिए इन्हें पूजा-पाठ में उपयोग किया जाता है। मान्यता है कि इन्हें तिजोरी में रखने से धन-समृद्धि बढ़ती है। पलाश के पत्तों से बने पत्तल और दोने शादियों और अन्य आयोजनों में इको.फ्रेंडली विकल्प के रूप में बहुत लोकप्रिय हैं, जो ग्रामीण रोजगार का एक बड़ा साधन है। आगामी सीजन में कटघोरा वनमण्डल के सभी समितियों में व्यापक प्रचार-प्रसार कर अधिक से अधिक लोगों को पलाश फूल संग्रहण से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। इससे न केवल आजीविका के अवसर बढ़ेंगे, बल्कि वन संसाधनों का सतत और समुचित उपयोग भी सुनिश्चित होगा। पलाश सिर्फ फूलों की नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता,आजीविका और समृद्धि की नई उड़ान की कहानी है।  पलाश के फूलों से प्राकृतिक और हर्बल गुलाल, रंग          पलाश के फूलों का सबसे बड़ा व्यावसायिक उपयोग होली के लिए प्राकृतिक और हर्बल गुलाल, रंग बनाने में होता है। आदिवासी और ग्रामीण महिलाएं पलाश ब्रांड के माध्यम से इन फूलों से इको-फ्रेंडली रंग तैयार कर अपनी आजीविका बढ़ा रही हैं।

डिजिटल क्रांति: छत्तीसगढ़ में अब घर बैठे मिलेंगी भूमि संबंधी सभी ऑनलाइन सेवाएं

राजस्व विभाग की नई पहल ​डिजिटल क्रांति: छत्तीसगढ़ में अब घर बैठे मिलेंगी भूमि संबंधी सभी ऑनलाइन सुविधाएँ ​रायपुर          मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ राज्य सरकार का राजस्व विभाग आम नागरिकों को बड़ी राहत प्रदान करते हुए भूमि और राजस्व संबंधी सेवाओं को पूरी तरह डिजिटल, पारदर्शी और पेपरलेस बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। 'सुशासन' के संकल्प को साकार करते हुए, अब नागरिकों को खसरा-बी-1, नामांतरण और अन्य महत्वपूर्ण कार्यों के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने की आवश्यकता नहीं है। नागरिकों की सुविधा हमारी प्राथमिकता-मुख्यमंत्री विष्णु देव साय     मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राजस्व विभाग की इस डिजिटल पहल पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि हमारी सरकार तकनीक के माध्यम से शासन को जनता के द्वार तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। राजस्व सेवाओं का डिजिटलीकरण आम आदमी के समय और श्रम की बचत सुनिश्चित करेगा। यह पारदर्शी और जवाबदेह प्रशासन की दिशा में एक बड़ा कदम है। ​ भ्रष्टाचार मुक्त और सुगम राजस्व प्रशासन का लक्ष्य – राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा      राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा ने जानकारी दी कि विभाग अपनी कार्यप्रणाली में आमूलचूल परिवर्तन कर रहा है। हमारा उद्देश्य तकनीक के उपयोग से मानवीय हस्तक्षेप को कम करना है, जिससे पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता आए। 'डिजिटल इंडिया भू-अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम' (DILMP) के माध्यम से हम राज्य को अत्याधुनिक राजस्व तंत्र प्रदान कर रहे हैं, जिससे नागरिक घर बैठे अपनी भूमि का विवरण प्राप्त कर सकें। ​निःशुल्क डिजिटल हस्ताक्षरयुक्त प्रति ​मोबाइल ऐप की सुविधा और SMS से अपडेट       ​राजस्व विभाग द्वारा दी जा रही प्रमुख ऑनलाइन सुविधाओं में नागरिक अब ​निःशुल्क    खसरा और बी-1 की डिजिटल रूप से हस्ताक्षरित प्रति राज्य के किसी भी कोने से कभी भी बिल्कुल मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं। खसरा या बी-1 में किसी भी संशोधन या बदलाव की सूचना सीधे पंजीकृत मोबाइल नंबर पर रियल-टाइम SMS अलर्ट  के माध्यम से प्राप्त होती है, जो किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ को रोकने में सहायक है। कृषि ऋण के लिए बैंक में गिरवी रखी गई भूमि की जानकारी पोर्टल पर उपलब्ध है, जिससे खरीद-बिक्री के समय पारदर्शिता बनी रहती है। अब नामांतरण के लिए बार-बार आवेदन नहीं करना पड़ता। उप पंजीयक कार्यालय में पंजीयन होते ही स्वतः नामांतरण प्रक्रिया शुरू हो जाती है। इसी तरह गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध विशेष मोबाइल ऐप के जरिए नागरिक कहीं से भी अपने स्मार्टफोन से जमीन का रिकॉर्ड देख और डाउनलोड कर सकते हैं। राजस्व विभाग के इन नवाचारों से छत्तीसगढ़ राज्य राजस्व प्रशासन में एक नई डिजिटल क्रांति का गवाह बन रहा है।       ​       अत्याधुनिक तकनीक से सुसज्जित राजस्व प्रशासन DILMP के तहत राज्य की सभी तहसीलों में 'मॉडर्न रिकॉर्ड रूम' स्थापित कर राजस्व प्रशासन को पूरी तरह अत्याधुनिक और पेपरलेस बनाना है। इन सुविधाओं का उद्देश्य नागरिकों को सशक्त बनाना और समय की बचत करना है। डिजिटल इंडिया भू-अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम (DILMP) ​वर्ष 2008-09 में शुरू हुई। यह केंद्र-प्रवर्तित योजना 1 अप्रैल 2016 से पूर्णतः केंद्रीय योजना के रूप में संचालित है।​ वर्तमान में  राज्य के 20 हज़ार 286 गांवों के खसरा और 19 हज़ार 694 गांवों के नक्शों का कंप्यूटरीकरण कार्य पूर्ण किया जा चुका है। इसके साथ ही, 'प्रधानमंत्री गतिशक्ति योजना' के तहत 18,959 गांवों के नक्शों की जियोरेफरेंसिंग (Georeferencing) कर उन्हें अत्याधुनिक बनाया गया है। राज्य के सभी 105 उप पंजीयक कार्यालयों को तहसील कार्यालयों के साथ ऑनलाइन जोड़कर एक एकीकृत नेटवर्क तैयार किया गया है, जिससे काम में गति और सटीकता आई है। ​असर्वेक्षित ग्रामों का सर्वेक्षण         राज्य के 1 हज़ार 89 ग्रामों का सर्वेक्षण किया गया, जिनमें से 1,018 का नक्शा उपलब्ध कराया गया है। प्रथम चरण में 717 गांवों का और 454 गांवों का द्वितीय चरण में सत्यापन पूर्ण हो चुका है। इसके साथ ही 233 गांवों का डेटा 'भुईयां' एवं 'भू-नक्शा' सॉफ्टवेयर में अपलोड किया जा चुका है।         ​इसी तरह राज्य की 50 तहसीलों में आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर राजस्व सर्वेक्षण का कार्य किया जा रहा है। राज्य के कुल 252 में से 172 तहसीलों में मॉडर्न रिकॉर्ड रूम स्वीकृत हैं, जिनमें से 155 का कार्य पूर्ण हो चुका है। इसके साथ ही राज्य के राजस्व ​कार्यालयों का डिजिटलीकरण एवं इंटरकनेक्टिविटी का कार्य तेजी से किया जा रहा है। राज्य के सभी 105 उप पंजीयक कार्यालयों को ऑनलाइन कर उन्हें तहसील कार्यालयों के साथ इंटरनेट के माध्यम से जोड़ दिया गया है। ​प्रधानमंत्री गतिशक्ति योजना के तहत राज्य के सभी राजस्व ग्रामों के खसरा नक्शों का जियोरेफरेंसिंग (Georeferencing) कार्य किया जा रहा है। राज्य के कुल 19,694 गांवों में से 18,959 गांवों में यह कार्य पूर्ण हो चुका है।       इस डिजिटल पहल से आम नागरिकों को अनावश्यक भागदौड़ से मुक्ति मिली है और राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली में स्पष्टता और सुगमता आई है, जो निश्चित रूप से राज्य के चहुंमुखी विकास में सहायक सिद्ध होगी।​

पुलिस विभाग में एक साथ 14 पुलिसकर्मियों का तबादला, जानें किसे कहां किया गया तैनात

रायपुर   छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेंड्रा मरवाही जिले में एक बार फिर पुलिस विभाग में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल हुआ है। यहां एक साथ 14 पुलिसकर्मियों के ट्रांसफर के आदेश जारी हुए हैं। यह आदेश एसपी मनोज खेलारी द्वारा जारी किए गए। इसके तहत 5 टीआई (निरीक्षक), 2 सब इंस्पेक्टर (उप-निरीक्षक), 1 एएसआई (सहायक उप-निरीक्षक), 2 प्रधान आरक्षक और 4 आरक्षकों को इधर उधर किया गया है। नए आदेश के मुताबिक, ​ शनिप रात्रे को गौरेला थाना प्रभारी, शैलेंद्र सिंह को मरवाही थाना प्रभारी बनाया गया है। वहीं सिद्धार्थ शुक्ला को यातायात प्रभारी नियुक्त किया गया है, जो जिले की यातायात व्यवस्था को सुधारने का जिम्मा संभालेंगे। प्रशासनिक और सामाजिक स्तर पर महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए अंजना केरकेट्टा को नवगठित अजाक थाना के साथ-साथ महिला थाना प्रभारी का दोहरा दायित्व दिया गया है। इसके साथ ही अजय वारे को शिकायत शाखा का प्रभारी और मनोज हनौतिया को साइबर सेल की जिम्मेदारी सौंपी गई है। गौरतलब है कि जिले में पहली बार अजाक (अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण) थाने का गठन किया गया है, जो विशेष शिकायतों के निवारण की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। ​

मोबाइल मेडिकल यूनिट बनी वनांचलों की संजीवनी, साढ़े तीन महीनों में 2000+ ग्रामीणों का हुआ इलाज

​वनांचलों की 'संजीवनी' बनी मोबाइल मेडिकल यूनिट: साढ़े तीन माह में 2000 से अधिक ग्रामीणों का हुआ निःशुल्क उपचार ​विशेष पिछड़ी जनजातियों के द्वार तक पहुँचा अस्पताल  पीएम जनमन योजना से बदली दुर्गम क्षेत्रों की तस्वीर ​रायपुर     छत्तीसगढ़ के दूरस्थ वनांचलों और दुर्गम पहाड़ियों पर बसे विशेष पिछड़ी जनजाति बाहुल्य क्षेत्रों के लिए शासन की मोबाइल मेडिकल यूनिट (MMU) एक वरदान साबित हो रही है। 'अस्पताल खुद ग्रामीण के द्वार' की परिकल्पना को साकार करते हुए, इस सेवा ने पिछले साढ़े तीन महीनों में 2035 लोगों को उनके ही मोहल्ले में स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई हैं। ​पैदल चलने की मजबूरी हुई खत्म    ​पूर्व में इन क्षेत्रों के ग्रामीणों को सामान्य इलाज के लिए भी कई मील पैदल चलना पड़ता था। प्रधानमंत्री जनमन योजना के अंतर्गत 15 जनवरी 2026 से संचालित यह यूनिट विशेष पिछड़ी जनजाति 'कमार' बाहुल्य ग्राम बल्दाकछार और औराई सहित कसडोल क्षेत्र के अन्य गांवों में निरंतर कैंप लगा रही है। अब सुदूर बस्तियों के लोगों को शहर के चक्कर काटने की आवश्यकता नहीं रह गई है। ​एक ही छत के नीचे जांच और दवा      ​इस चलते-फिरते अस्पताल में सुविधाओं का पूरा तामझाम मौजूद है। प्रत्येक यूनिट में एक मेडिकल ऑफिसर, लैब टेक्निशियन, नर्स और ड्राइवर की दक्ष टीम तैनात रहती है। ​निःशुल्क जांच: बीपी, शुगर, मलेरिया और हीमोग्लोबिन जैसी महत्वपूर्ण जांचें मौके पर ही की जाती हैं।अनुभवी डॉक्टरों द्वारा चिकित्सा सलाह के साथ-साथ मुफ्त दवाइयां भी वितरित की जा रही हैं। ​नियोजित व्यवस्था और मुनादी से सूचना      ​प्रशासन द्वारा कैंप लगाने की तिथि और स्थान एक माह पूर्व ही निर्धारित कर लिया जाता है। ग्रामीणों को समय पर सूचना मिले, इसके लिए गांव-गांव में मुनादी (ढोल बजाकर घोषणा) करवाई जाती है। इससे ग्रामीणों में भारी उत्साह देखा जा रहा है।स्थानीय ग्रामीणों ने कहा कि अस्पताल में लंबी कतारों और परिवहन के सीमित साधनों के कारण पहले हमारा पूरा दिन बर्बाद हो जाता था। अब घर के पास इलाज मिलने से समय और धन दोनों की बचत हो रही है। ​परंपरा से आधुनिकता की ओर बढ़ते कदम       ​इस पहल का सबसे बड़ा सकारात्मक प्रभाव ग्रामीणों की सोच पर पड़ा है। विशेष पिछड़ी जनजाति के लोग जो पहले केवल बैगा-गुनिया या पारंपरिक जड़ी-बूटियों पर निर्भर थे, अब उनमें आधुनिक चिकित्सा पद्धति के प्रति विश्वास जागा है। लोग अब बीमारियों को छिपाने के बजाय समय पर जांच और इलाज को प्राथमिकता दे रहे हैं।

जामगुड़ा में 3 हैंडपंप, एक सोलर पंप और एक पॉवर पंप से लोगों को मिल रहा पानी

जामगुड़ा में 3 हैंडपंपों, एक सोलर पंप और एक पॉवर पंप से लोगों को मिल रहा पानी स्कूल के नलकूप की जल आवक क्षमता का परीक्षण कर गर्मियों के लिए वैकल्पिक रनिंग वाटर की व्यवस्था की जाएगी, सहायक अभियंता को व्यवस्था के निर्देश कोसारटेड़ा समूह जलप्रदाय योजना से जामगुड़ा में होती है जल की आपूर्ति, ग्रीष्म ऋतु के कारण अभी नहीं भर पा रही टंकी रायपुर बस्तर जिले के पिपलावंड ग्राम पंचायत के जामगुड़ा बसाहट में अभी 3 हैंडपंपों, एक सोलर पंप और एक पॉवर पंप से लोगों को पानी मिल रहा है। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने ग्रीष्म काल में रनिंग वाटर की वैकल्पिक व्यवस्था के लिए स्कूल परिसर के नलकूप की जल आवक क्षमता का परीक्षण कर 2 हॉर्स-पॉवर का पंप लगाकर स्कूल के साथ ही जामगुड़ा बसाहट में कनेक्शन के निर्देश सहायक अभियंता को दिए हैं।   जल जीवन मिशन के अंतर्गत कोसारटेड़ा समूह जलप्रदाय योजना से जामगुड़ा में पाइपलाइन से जल की आपूर्ति होती है। पहले से संचालित समूह जलप्रदाय योजना में रेट्रोफिटिंग के माध्यम से पिपलावंड में जल आपूर्ति की व्यवस्था बनाई गई है। रेट्रोफिटिंग योजना के तहत यहां 70 लाख 29 हजार रुपए की लागत से 3530 मीटर पाइपलाइन बिछाकर और दो सोलर जलापूर्ति सिस्टम स्थापित कर 237 एफ.एच.टी.सी. (Functional Household Tap Connection) प्रदान किए गए हैं, जिनके काम पूर्ण किए जा चुके हैं। पिपलावण्ड कोसारटेड़ा समूह जलप्रदाय योजना का अंतिम छोर का गांव है, जिसके कारण ग्रीष्म काल में दो महीने टंकी नहीं भरने के कारण पेयजल व्यवस्था बाधित रहती है। अधीक्षण अभियंता और कार्यपालन अभियंता ने जामगुड़ा जाकर व्यवस्थाएं देखीं लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के जगदलपुर परिक्षेत्र के अधीक्षण अभियंता और कार्यपालन अभियंता ने आज पिपलावंड एवं जामगुड़ा का दौरा कर पेयजल आपूर्ति की व्यवस्थाएं देखीं तथा मैदानी अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि पेयजल के लिए एक हजार की आबादी वाले पिपलावंड में अभी 14 कार्यरत हैंडपंप, दो पॉवर पंप और दो सोलर पंप हैं। वहीं 300 जनसंख्या वाले गांव के जामगुड़ा बसाहट में 3 हैंडपंपों, एक सोलर पंप और एक पॉवर पंप से लोगों को पानी मिल रहा है। सरपंच और दुलाय कश्यप से मिलकर जलापूर्ति की जानकारी ली अधीक्षण अभियंता और कार्यपालन अभियंता ने गांव पहुंचकर सरपंच श्री केशवराम बघेल और दुलाय कश्यप से मिलकर पेयजल व्यवस्था की जानकारी ली। दुलाय कश्यप ने बताया कि अमूमन रोड के पार बसे रिश्तेदार द्वारा लूज पाइप से पानी उनके घर तक पहुंचाया जाता है। वह कभी-कभी रोड पार कर पानी लाने जाती है। उन्होंने बताया कि समाज कल्याण विभाग से उसे बैटरीचलित ट्राइसिकल मिली है। इसका उपयोग कर वह पेयजल एवं निस्तारी के लिए अपने रिश्तेदार के निजी नलकूप या 200 मीटर दूर स्कूल के पॉवर पम्प से पानी लाती थी। उनका ट्राइसिकल पिछले दो माह से खराब है। समाज कल्याण विभाग और सरपंच को उन्होंने यह बात बताई है, परंतु सुधार नहीं हो पाने के कारण परेशानी हो रही है।