samacharsecretary.com

छत्तीसगढ़ में पहुंची झारखंड आवास बोर्ड की टीम, आवासीय योजनाओं और प्रक्रियाओं का करेगी अवलोकन

रायपुर झारखंड राज्य आवास बोर्ड की 6 सदस्यीय उच्चस्तरीय टीम अध्ययन प्रवास पर छत्तीसगढ़ पहुंची है। यह दल 15 से 18 अप्रैल 2026 तक राज्य में प्रवास कर छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल की आवासीय योजनाओं, नियमों, प्रक्रियाओं और नवाचारों का विस्तृत अध्ययन करेगा। आज छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल द्वारा अध्ययन दल को योजनाओं, नीतियों और कार्यप्रणाली से संबंधित विस्तृत जानकारी दी गई। इस दौरान अपर आयुक्त श्री हर्ष कुमार जोशी ने तकनीकी विषयों पर प्रस्तुतीकरण दिया। मुख्य संपदा अधिकारी श्री सुनील कुमार सिंह ने संपत्ति प्रबंधन, मार्केटिंग, विक्रय प्रणाली एवं आईटी आधारित प्रक्रियाओं की जानकारी साझा की। वहीं मुख्य लेखा अधिकारी श्रीमती पूजा मिश्रा शुक्ला ने वित्तीय प्रबंधन पर प्रकाश डाला। उपायुक्त श्री बी.बी. सिंह एवं कार्यपालन अभियंता श्री संदीप साहू ने भी तकनीकी पहलुओं और कार्यप्रणाली से दल को अवगत कराया। अध्ययन दल को यह भी बताया गया कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय, मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी और मंडल के अध्यक्ष श्री अनुराग सिंह देव के मार्गदर्शन में आम नागरिकों को किफायती आवास उपलब्ध कराने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। प्रमुख उपलब्धियों में पिछले एक वर्ष में 1100 करोड़ रुपए की 5145 संपत्तियों का विक्रय, ओटीएस-2 के तहत 174 करोड़ रुपए की 1105 पुरानी संपत्तियों का निस्तारण, आबंटी पोर्टल एवं एआई चैटबोट की सुविधा शामिल है। साथ ही पिछले दो वर्षों में 3050 करोड़ रुपए की लागत से 78 आवासीय परियोजनाओं की शुरुआत तथा 7 रि-डेवलपमेंट परियोजनाओं के प्रस्ताव भी प्रस्तुत किए गए। उल्लेखनीय है कि झारखंड राज्य आवास बोर्ड द्वारा वर्ष 2000 के अधिनियम में संशोधन या नए कानून के निर्माण के उद्देश्य से इस अध्ययन दल का गठन किया गया है। दल आवासीय क्षेत्रों में अवैध व्यावसायिक उपयोग को “मिश्रित उपयोग” में परिवर्तित करने की प्रक्रियाओं का भी अध्ययन कर रहा है। गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ और झारखंड दोनों राज्यों का गठन वर्ष 2000 में हुआ था, लेकिन छत्तीसगढ़ में गृह निर्माण मंडल द्वारा आवासीय योजनाओं का विस्तार तेजी से किया गया, जिससे आम नागरिकों को किफायती दरों पर पक्के मकान उपलब्ध हो सके हैं।

बिना पंजीकरण प्रचार पर सीजीरेरा की सख्त कार्रवाई

बिना पंजीकरण प्रचार पर सीजीरेरा की सख्त कार्रवाई “डेला रेसकोर्स एंड इंटरनेशनल पोलो क्लब” प्रोजेक्ट पर क्रय-विक्रय व पंजीयन पर अंतरिम रोक रायपुर छत्तीसगढ़ भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण (सीजीरेरा) ने बिना पंजीकरण रियल एस्टेट परियोजना के प्रचार-प्रसार के मामले में सख्त कार्रवाई करते हुए “डेला रेसकोर्स एंड इंटरनेशनल पोलो क्लब” परियोजना पर क्रय-विक्रय एवं पंजीयन पर अंतरिम (प्रारंभिक) रोक लगा दी है। प्राधिकरण द्वारा प्रकरण क्रमांक एसएम-यूआरपी-2026-03599 में संज्ञान लेते हुए पाया गया कि नया रायपुर के सेक्टर-37 स्थित लगभग 55 एकड़ क्षेत्र में प्रस्तावित उक्त परियोजना के प्रमोटर द्वारा रेरा अधिनियम, 2016 की धारा 3 का उल्लंघन किया गया है। जांच में यह तथ्य सामने आया कि संबंधित प्रमोटर ने बिना रेरा पंजीकरण प्राप्त किए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर परियोजना का व्यापक प्रचार-प्रसार किया और आम नागरिकों को बुकिंग के लिए आमंत्रित किया। यह कृत्य अधिनियम के स्पष्ट प्रावधानों के विपरीत है, जिसके अनुसार बिना पंजीकरण किसी भी रियल एस्टेट परियोजना का विज्ञापन, विपणन या विक्रय प्रतिबंधित है। सीजीरेरा द्वारा नियमित निगरानी के दौरान उक्त विज्ञापन संज्ञान में आने पर प्रकरण दर्ज किया गया। उपलब्ध तथ्यों के आधार पर प्रथम दृष्टया उल्लंघन प्रमाणित पाए जाने पर प्राधिकरण ने अपने वैधानिक अधिकारों का प्रयोग करते हुए परियोजना से संबंधित सभी प्रकार के भूखंड, मकान एवं इकाइयों के क्रय-विक्रय और पंजीयन पर अंतरिम रोक लगाने का आदेश जारी किया है। इस संबंध में जिला पंजीयक एवं उप-पंजीयक, रायपुर को निर्देशित किया गया है कि उक्त परियोजना से जुड़े किसी भी विक्रय विलेख का पंजीयन आगामी आदेश तक स्वीकार न किया जाए और आदेश का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए। प्राधिकरण ने आम नागरिकों को सलाह दी है कि किसी भी रियल एस्टेट परियोजना में निवेश करने से पहले उसकी रेरा पंजीयन स्थिति की जांच अवश्य करें, ताकि किसी भी प्रकार के वित्तीय या कानूनी जोखिम से बचा जा सके।

महिलाओं के नाम प्रॉपर्टी होगी आधी कीमत में, UCC ड्राफ्ट पर साय कैबिनेट का ऐतिहासिक फैसला

आधी कीमत में महिलाओं के नाम होगी प्रॉपर्टी, UCC ड्राफ्ट पर साय कैबिनेट का फैसला, प्रदेश की तस्वीर बदलने वाला कदम महिलाओं के नाम प्रॉपर्टी होगी आधी कीमत में, UCC ड्राफ्ट पर साय कैबिनेट का ऐतिहासिक फैसला UCC ड्राफ्ट पर साय कैबिनेट का बड़ा फैसला: महिलाओं को मिलेगी आधी कीमत पर प्रॉपर्टी, प्रदेश की तस्वीर बदलने की दिशा में कदम रायपुर छत्तीसगढ़ की विष्णु देव साय सरकार ने एक ही झटके में प्रदेश की सामाजिक और आर्थिक दिशा बदलने वाले दो बड़े फैसलों पर मुहर लगा दी है। बुधवार को रायपुर में हुई कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री ने UCC यानी यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने के लिए हाई-लेवल कमेटी के गठन और महिलाओं के लिए प्रॉपर्टी रजिस्ट्री शुल्क में 50% कटौती का ऐलान किया। इसका उद्देश्य राज्य में कानूनों में एकरूपता लाना और महिलाओं को संपत्ति का अधिकार दिलाने में मदद करना है, जिसे ड्राफ्ट तैयार कर विधानसभा में पेश किया जाएगा। UCC के लिए रंजना देसाई फॉर्मूला छत्तीसगढ़ सरकार ने वही रास्ता चुना है जो उत्तराखंड ने अपनाया था। रिटायर्ड जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में बनने वाली कमेटी नागरिकों, कानूनी विशेषज्ञों और संस्थाओं से सीधा संवाद करेगी। एक समर्पित वेब पोर्टल के जरिए जनता की राय ली जाएगी। इसका मकसद शादी, तलाक, विरासत और गोद लेने जैसे मामलों में धर्म-आधारित व्यक्तिगत कानूनों को खत्म कर एक समान कानून लाना है। खजाने पर 153 करोड़ की चोट कैबिनेट ने महिलाओं के लिए प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन शुल्क में 50% की छूट को मंजूरी दी है। हालांकि, इससे सरकारी खजाने पर 153 करोड़ रुपये का सालाना बोझ पड़ेगा, लेकिन सरकार इसे खर्च नहीं बल्कि निवेश मान रही है। प्रशासन का तर्क है कि इससे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में महिलाओं के नाम पर संपत्ति का स्वामित्व बढ़ेगा, जो लंबे समय में सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करेगा। 2026 के बड़े मिशन की तैयारी UCC का मुद्दा सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरा राजनीतिक महत्व रखता है। रंजना प्रकाश देसाई वही जस्टिस हैं जिन्होंने उत्तराखंड के UCC ड्राफ्ट में मुख्य भूमिका निभाई थी। उन्हें छत्तीसगढ़ की कमान सौंपना यह साफ करता है कि सरकार बिना किसी देरी के एक सटीक और कानूनी रूप से मजबूत मॉडल चाहती है। वहीं, रजिस्ट्री में छूट देना एक चतुर आर्थिक दांव है, जो मध्यम वर्ग की महिलाओं को सीधे तौर पर सरकार से जोड़ता है। यह कदम विपक्षी दलों के लिए महिला कार्ड और सांप्रदायिक कार्ड दोनों को एक साथ फेल करने की रणनीति जैसा है।     छत्तीसगढ़ में UCC का ड्राफ्ट तैयार करने के लिए हाई-लेवल कमेटी गठित।     जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई के नेतृत्व में जनता और विशेषज्ञों से ली जाएगी राय।     महिलाओं के लिए प्रॉपर्टी रजिस्ट्री फीस अब आधी होगी, जिससे मालिकाना हक बढ़ेगा।     राजस्व में ₹153 करोड़ की कमी के बावजूद इसे सामाजिक निवेश बताया गया।     कमेटी की सिफारिशों को मंजूरी के बाद विधानसभा में विधेयक के रूप में लाया जाएगा।  

छत्तीसगढ़ में जनगणना 2027 के तहत स्व-गणना की शुरूआत : अब नागरिक खुद भर सकेंगे अपनी जानकारी

रायपुर.  छत्तीसगढ़ में जनगणना 2027 के पहले चरण के तहत मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना के तारतम्य में 16 से 30 अप्रैल 2026 तक स्व-गणना की प्रक्रिया की शुरूआत हुई है। आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में मुख्य सचिव विकासशील ने स्व-गणना के तहत स्वयं अपनी जानकारी दर्ज की। इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव गृह मनोज कुमार पिंगुआ, छत्तीसगढ़ जनगणना निदेशक कार्तिकेय गोयल सहित जनगणना निदेशालय के अधिकारी भी मौजूद थे। मुख्य सचिव ने प्रदेशवासियों से अपील की है कि इस सुविधा का अधिक से अधिक उपयोग करें और अपनी जानकारी स्वयं भरकर जनगणना में सक्रिय भागीदारी निभाएं। राज्य में 16 अप्रैल से 30 अप्रैल 2026 तक नागरिकों को स्व-गणना के माध्यम से अपनी जानकारी दर्ज करने का अवसर दिया गया है। आज अपर मुख्य सचिव गृह मनोज कुमार पिंगुआ ने भी स्व-जनगणना के तहत अपनी जानकारी पोर्टल पर जानकारी दर्ज की। स्व-गणना के लिए se.census.gov.in पोर्टल पर जाकर आसानी से विवरण भरा जा सकता है।  मुख्य सचिव ने कहा है कि यह पहल जनगणना प्रक्रिया को आसान, पारदर्शी और अधिक विश्वनीय बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे लोग अपनी सही और पूरी जानकारी स्वयं साझा कर सकेंगे। स्व-गणना अवधि समाप्त होने के बाद, 1 मई से 30 मई तक जनगणना टीम घर-घर जाकर लोगों से जानकारी एकत्रित करेगी। प्रगणक घर-घर आकर जानकारी दर्ज करेंगे। हर मकान की जानकारी दर्ज की जाएगी। घर की स्थिति, सुविधाएं और मूलभूत जानकारी संकलित की जाएगी। जिन्होंने स्व-गणना के तहत जानकारी दर्ज की है वे जनगणना प्रगणकों के घर आने पर उनसे SE ID जरूर साझा करें। यदि कोई स्व-गणना नहीं कर पाते है तो चिंता करने की जरूरत नहीं है। छत्तीसगढ़ राज्य में 1 मई से 30 मई 2026 तक की अवधि में प्रगणक आपके घर आकर जानकारी अवश्य दर्ज करेंगे। सभी नागरिकों से अनुरोध किया गया है कि वे इस अवसर का लाभ उठाकर देश के विकास में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें। इस अवसर पर जनगणना निदेशालय के संयुक्त संचालक प्रदीप साव सहित अन्य अधिकारी शामिल हुए।

उद्योग एवं सार्वजनिक उपक्रम मंत्री लखनलाल देवांगन ने किया वेदांता पावर प्लांट के घटनास्थल का निरीक्षण

रायपुर.  छत्तीसगढ़ शासन के वाणिज्य उद्योग,  श्रम, सार्वजनिक उपक्रम एवं आबकारी विभाग के मंत्री लखनलाल देवांगन ने आज सक्ती जिले के डभरा ब्लॉक के ग्राम सिंघीतराई स्थित वेदांता पावर प्लांट में 14 अप्रैल को हुए हादसे के बाद घटनास्थल का निरीक्षण किया। उन्होंने मृत श्रमिकों के प्रति श्रद्धांजलि व्यक्त करते हुए घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना की। मंत्री देवांगन ने सिंघीतराई में ही कलेक्टर अमृत विकास टोपनो, पुलिस अधीक्षक प्रफुल्ल ठाकुर तथा वेदांता प्रबंधन के अधिकारियों की बैठक ली। उन्होंने श्रम कानूनों के अनुरूप घटना के तकनीकी पहलुओं की गहराई से जाँच कराने तथा दोषियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए। बैठक में वेदांता प्रबंधन के चीफ हेड ऑफ ऑपरेशन सुशील बेहरा ने घटना से संबंधित जानकारी दी। इस दौरान बॉयलर विशेषज्ञ गुंजन शुक्ला ने हादसे की प्रारंभिक संभावनाओं के बारे में अवगत कराया। मंत्री देवांगन ने कलेक्टर को निर्देश दिए कि जाँच पूरी सतर्कता और सूक्ष्मता से की जाए तथा प्रभावित परिवारों को मुआवजा, रोजगार और दुर्घटना में दिव्यांग होने की स्थिति में पेंशन जैसी सुविधाएँ सुनिश्चित की जाएँ। उन्होंने श्रमिकों के ईएसआईसी और पीएफ से संबंधित जानकारी भी ली। मंत्री ने स्पष्ट कहा कि दोषियों को किसी भी परिस्थिति में बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री ने मृतकों और घायलों के लिए मुआवजे की घोषणा की है और मुख्यमंत्री स्वयं घटना की लगातार मॉनिटरिंग कर रहे हैं। अस्पताल में उपचार करा रहे घायल मजदूरों से मिले उद्योग मंत्री उद्योग, श्रम, वाणिज्य, आबकारी एवं सार्वजनिक उपक्रम मंत्री लखनलाल देवांगन ने वेदांता पावर प्लांट दुर्घटना में घायल मजदूरों से मुलाकात की, जो रायगढ़ जिले के विभिन्न अस्पतालों में उपचाररत हैं। उन्होंने मेडिकल कॉलेज अस्पताल, एपेक्स हॉस्पिटल, मेट्रो हॉस्पिटल तथा जिंदल–फोर्टिस हॉस्पिटल पहुँचकर घायलों का हालचाल जाना, परिजनों से चर्चा की और शासन की ओर से सभी आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने की जानकारी दी। मंत्री ने अस्पताल प्रबंधन को घायलों के बेहतर और निरंतर उपचार के निर्देश दिए। उन्होंने श्रमिकों को आश्वस्त किया कि कंपनी के मुआवजे के अतिरिक्त प्रधानमंत्री तथा मुख्यमंत्री द्वारा घोषित सहायता राशि भी प्रदान की जाएगी। उन्होंने कहा कि जब तक आप पूर्ण रूप से स्वस्थ नहीं हो जाते, आपका उपचार सतत रूप से चलता रहेगा।

गांव में ही मिला न्याय—अकलाडोंगरी लिंक कोर्ट से राजस्व मामलों का त्वरित समाधान

रायपुर.  धमतरी जिला प्रशासन द्वारा दूरस्थ और डूबान प्रभावित क्षेत्रों में राजस्व सेवाओं को सरल एवं सुलभ बनाने की दिशा में किया जा रहा नवाचार अब प्रभावी परिणाम देने लगा है। जीप।प्रशासन के मार्गदर्शन में ग्राम पंचायत भवन अकलाडोंगरी में आयोजित लिंक कोर्ट के माध्यम से आज कई राजस्व प्रकरणों का मौके पर ही त्वरित निराकरण किया गया, जिससे ग्रामीणों को बड़ी राहत मिली। लिंक कोर्ट की कार्यवाही में बड़ी संख्या में ग्रामीण अपने आवेदन लेकर पहुंचे। पीठासीन अधिकारी ने संवेदनशीलता और तत्परता के साथ सुनवाई करते हुए त्रुटि सुधार के 3 मामलों का तत्काल निराकरण किया। इसके अलावा फौती नामांतरण के 2, क्रय-विक्रय आधारित नामांतरण के 2, भूमि सीमांकन का 1 तथा खाता विभाजन का 1 नया आवेदन प्राप्त हुआ। आज की कार्यवाही की खास उपलब्धि एक जटिल और विवादित नामांतरण प्रकरण का स्थानीय स्तर पर समाधान रहा। इस मामले में सभी 12 हितबद्ध पक्षकारों के बयान मौके पर ही दर्ज किए गए, जिससे लंबे समय से लंबित प्रक्रिया को गति मिली और अनावश्यक विलंब समाप्त हुआ। लिंक कोर्ट के आयोजन से ग्रामीणों को अब तहसील मुख्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ रहे हैं। गांव में ही सुनवाई होने से समय और धन दोनों की बचत हो रही है, साथ ही पारदर्शी प्रक्रिया से प्रशासन के प्रति विश्वास भी मजबूत हो रहा है। जिला प्रशासन ने राजस्व सेवाओं को जन-जन तक पहुंचाने के लिए यह व्यवस्था सुनिश्चित की है कि प्रत्येक गुरुवार को अकलाडोंगरी और प्रत्येक शुक्रवार को बोरई में नियमित रूप से लिंक कोर्ट आयोजित किया जाए। इससे दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों को अपने ही क्षेत्र में शासन की सेवाओं का लाभ मिल रहा है। गांव में त्वरित न्याय और प्रक्रियाओं के सरलीकरण से संतुष्ट ग्रामीणों ने इस पहल की सराहना करते हुए प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया। यह पहल सुशासन और जनसेवा के प्रति प्रशासन की प्रतिबद्धता का सशक्त उदाहरण बनकर उभर रही है।

सुशासन तिहार-2026 के लिए राज्य सरकार की व्यापक तैयारी, मुख्यमंत्री साय ने कलेक्टरों को दिए विस्तृत निर्देश

रायपुर.  छत्तीसगढ़ में सुशासन को और अधिक सुदृढ़ एवं प्रभावी बनाने के उद्देश्य से राज्य सरकार वर्ष 2025 की तर्ज पर इस वर्ष “सुशासन तिहार 2026” का आयोजन व्यापक स्तर पर करने जा रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस संबंध में प्रदेश के सभी जिला कलेक्टरों को पत्र जारी कर अभियान के सफल क्रियान्वयन हेतु विस्तृत दिशा-निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि जन शिकायतों का समयबद्ध निराकरण सुशासन की आधारशिला है। उन्होंने कहा कि आम नागरिकों को पारदर्शी, सरल और त्वरित सेवाएं उपलब्ध कराना राज्य शासन की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। गत वर्ष आयोजित सुशासन तिहार के सकारात्मक परिणामों को देखते हुए इस वर्ष इसे और अधिक व्यापक स्वरूप में लागू किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कलेक्टरों को निर्देशित किया है कि 30 अप्रैल 2026 तक जिलों में लंबित प्रकरणों के निराकरण के लिए विशेष अभियान चलाया जाए। इसके अंतर्गत भूमि संबंधी प्रकरण जैसे नामांतरण, बंटवारा और सीमांकन को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके साथ ही मनरेगा अंतर्गत लंबित मजदूरी भुगतान, हितग्राही मूलक योजनाओं के लंबित प्रकरण, आय, जाति एवं निवास प्रमाण पत्र, बिजली एवं ट्रांसफार्मर संबंधी समस्याएं तथा हैंडपंप सुधार जैसे मुद्दों का त्वरित समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने पात्र हितग्राहियों को उज्ज्वला योजना, राशन कार्ड, आयुष्मान भारत योजना तथा सामाजिक सुरक्षा पेंशन जैसी योजनाओं का लाभ दिलाने पर विशेष जोर दिया है।  सुशासन तिहार के तहत 1 मई से 10 जून 2026 तक प्रदेशभर में जन समस्या निवारण शिविर आयोजित किए जाएंगे। ग्रामीण क्षेत्रों में 15 से 20 ग्राम पंचायतों के समूह तथा शहरी क्षेत्रों में वार्ड क्लस्टर के आधार पर शिविर लगाए जाएंगे। इन शिविरों में न केवल जन समस्याओं का समाधान किया जाएगा, बल्कि शासन की योजनाओं के प्रति जन-जागरूकता भी बढ़ाई जाएगी। पात्र हितग्राहियों को मौके पर ही योजनाओं का लाभ प्रदान करने की व्यवस्था की जाएगी। शिविरों में प्राप्त आवेदनों का अधिकतम एक माह के भीतर निराकरण सुनिश्चित करने तथा प्रत्येक आवेदक को उसके आवेदन की स्थिति से अवगत कराने के भी निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए हैं कि अभियान के दौरान मंत्रीगण, सांसद एवं विधायक, साथ ही मुख्य सचिव और प्रभारी सचिव समय-समय पर शिविरों में शामिल होकर व्यवस्थाओं का निरीक्षण करेंगे और आमजन से सीधा संवाद स्थापित करेंगे। इससे प्रशासनिक जवाबदेही और पारदर्शिता को मजबूती मिलेगी।  अभियान के दौरान मुख्यमंत्री विष्णु देव साय स्वयं विभिन्न जिलों का दौरा कर विकास कार्यों एवं योजनाओं के क्रियान्वयन का औचक निरीक्षण करेंगे। वे हितग्राहियों से सीधे संवाद कर फीडबैक भी प्राप्त करेंगे। इसके अतिरिक्त जिला मुख्यालयों पर अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठकें आयोजित कर शिविरों में प्राप्त आवेदनों के निराकरण की स्थिति और योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की जाएगी। निरीक्षण एवं समीक्षा के बाद मुख्यमंत्री प्रेसवार्ता को संबोधित करेंगे तथा सामाजिक संगठनों और नागरिकों से सुझाव भी प्राप्त करेंगे। सुशासन तिहार 2026 को जन आंदोलन का स्वरूप देने के उद्देश्य से जनसंपर्क विभाग एवं जिला प्रशासन को व्यापक प्रचार-प्रसार के निर्देश दिए गए हैं। विभिन्न संचार माध्यमों के जरिए अधिक से अधिक नागरिकों को अभियान से जोड़ने की रणनीति बनाई जा रही है।  मुख्यमंत्री ने सभी कलेक्टरों से अपेक्षा की है कि वे आवश्यक तैयारियां सुनिश्चित करते हुए इस अभियान को जनभागीदारी का सशक्त माध्यम बनाएं, ताकि प्रदेश के प्रत्येक नागरिक तक शासन की योजनाओं का लाभ प्रभावी ढंग से पहुंच सके।

डबरी, मछली पालन और बहुफसली खेती से बदली तकदीर—सगनू बने गांव के प्रेरणास्रोत

रायपुर. ग्रामीण विकास की दिशा में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) एक प्रभावी माध्यम के रूप में उभरकर सामने आया है। यह योजना केवल रोजगार उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं रहकर स्थायी परिसंपत्तियों के निर्माण के माध्यम से ग्रामीण परिवारों को आत्मनिर्भर बनाने में भी अहम भूमिका निभा रही है। इसका जीवंत उदाहरण अरौद डुबान क्षेत्र के ग्राम कलारबाहरा निवासी सगनू राम की प्रेरक सफलता कहानी है। सगनू राम एक छोटे कृषक परिवार से हैं। सीमित भूमि और वर्षा आधारित खेती के कारण उनकी आय अस्थिर रहती थी। सिंचाई की सुविधा न होने से वे वर्ष में केवल एक ही फसल ले पाते थे, जिससे परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर बनी रहती थी। परिस्थितियों में बदलाव तब आया जब उन्हें ग्राम पंचायत के माध्यम से मनरेगा योजना की जानकारी मिली। उन्होंने वर्ष 2023-24 में अपने खेत में 25×25 मीटर की डबरी निर्माण के लिए आवेदन किया, जिसे स्वीकृति मिली। लगभग 2.98 लाख रुपये की लागत से निर्मित इस डबरी ने उनके खेत में स्थायी जल स्रोत उपलब्ध करा दिया। डबरी बनने के बाद उनकी खेती में उल्लेखनीय परिवर्तन आया। अब वे नियमित सिंचाई कर पा रहे हैं, जिससे 2 एकड़ में धान की खेती का उत्पादन और गुणवत्ता दोनों बढ़े हैं। इसके साथ ही कृषि विभाग के सहयोग से उन्होंने 1.5 एकड़ में माड़िया (रागी) की खेती शुरू की, जिससे उन्हें लगभग 60 हजार रुपये की अतिरिक्त आय हुई। सगनू राम ने डबरी का उपयोग मछली पालन के लिए भी किया, जिससे उन्हें करीब 30 हजार रुपये तक की अतिरिक्त आमदनी होने लगी। इस तरह जल संरक्षण, बहुफसली खेती और मछली पालन को जोड़कर उन्होंने एक सशक्त और टिकाऊ आजीविका मॉडल विकसित किया है। उन्होंने आधुनिक कृषि पद्धतियों—जैसे फसल चक्र, जैविक खाद का उपयोग और बेहतर जल प्रबंधन तकनीकों—को भी अपनाया है, जिससे उत्पादन बढ़ने के साथ लागत में कमी आई है। भविष्य में वे सब्जी उत्पादन और ड्रिप सिंचाई तकनीक अपनाने की योजना बना रहे हैं। आज सगनू राम न केवल आर्थिक रूप से सशक्त हुए हैं, बल्कि गांव के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बन चुके हैं। उनकी सफलता से प्रेरित होकर अन्य ग्रामीण भी मनरेगा के तहत डबरी निर्माण और उन्नत कृषि गतिविधियों की ओर आगे बढ़ रहे हैं। इस सफलता के पीछे ग्राम पंचायत, मनरेगा योजना और कृषि विभाग का समन्वित प्रयास रहा है। समय पर मार्गदर्शन और सहायता ने सगनू राम के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया है। सगनू राम की यह कहानी साबित करती है कि योजनाओं का सही उपयोग और नवाचार के साथ किया गया परिश्रम सीमित संसाधनों में भी आत्मनिर्भरता की राह खोल सकता है। यह ग्रामीण भारत के लिए आशा, प्रेरणा और विकास का सशक्त संदेश है।

छत्तीसगढ़ में बैंकिंग इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत: सीएम साय ने खोला SBI का नया भवन

रायपुर.  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर के कचहरी चौक स्थित भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की कचहरी शाखा के नवीन एवं अत्याधुनिक परिसर का शुभारंभ किया। इस अवसर पर मुख्य महाप्रबंधक प्रभाष कुमार सुबुद्धि, उप महाप्रबंधक रमेश सिन्हा, प्रबंधक अनिल यादव सहित बैंक के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि यह अत्यंत हर्ष और सौभाग्य का विषय है कि पिछले 50 वर्षों से संचालित एसबीआई की कचहरी शाखा अब नए आधुनिक भवन में स्थानांतरित होकर ग्राहकों को और बेहतर सेवाएं प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि इस नए परिसर में उपभोक्ताओं को अत्याधुनिक बैंकिंग सुविधाएं मिलेंगी, जिससे उनके कार्य और अधिक सहज और त्वरित होंगे। मुख्यमंत्री साय ने बैंकिंग व्यवस्था को देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताते हुए कहा कि भारतीय स्टेट बैंक अपने दायित्वों का उत्कृष्ट निर्वहन कर रहा है और आगे भी ग्राहकों की सेवा में इसी तरह अग्रणी भूमिका निभाता रहेगा। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर शाखा के अधिकारियों और ग्राहकों को शुभारंभ की बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उल्लेखनीय है कि एसबीआई की कचहरी शाखा ने हाल ही में अपनी सेवाओं के 50 वर्ष पूर्ण किए हैं। ग्राहकों को बेहतर, सुविधाजनक और उन्नत बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शाखा को पंडरी रोड स्थित आक्सीजोन क्षेत्र में नए परिसर में स्थानांतरित किया गया है, जहां आधुनिक सुविधाओं के साथ बेहतर बैंकिंग अनुभव सुनिश्चित किया जाएगा।

रायपुर के डॉ. उत्कर्ष त्रिवेदी को ब्रिटिश पार्लियामेंट में अंतरराष्ट्रीय सम्मान, ऑक्सफोर्ड में स्किन डिजीज पर दिया व्याख्यान

लंदन. World Homeopathy Summit 4 के अवसर पर ब्रिटिश पार्लियामेंट में आयोजित भव्य समारोह में रायपुर (छत्तीसगढ़) के प्रतिष्ठित होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. उत्कर्ष त्रिवेदी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया। इस गरिमामय कार्यक्रम में रायपुर, छत्तीसगढ़ सहित विभिन्न स्थानों के 100 होम्योपैथी चिकित्सकों एवं विदेशों से आए 25 चिकित्सकों को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मान प्रदान किया गया। विशेष रूप से प्रसिद्ध होम्योपैथी चिकित्सक डॉ. नीतीश चंद्र दुबे की उपस्थिति ने आयोजन की गरिमा को और बढ़ाया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से ब्रिटिश संसद के सदस्य लॉर्ड रावल एवं शिवानी राजा उपस्थित रहे। साथ ही इंग्लैंड क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान एलिस्टर कुक, इयोन मॉर्गन, स्टुअर्ट ब्रॉड, जोनाथन ट्रॉट एवं डेविड ग्रोवर जैसे अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त व्यक्तित्वों की उपस्थिति ने समारोह को विशेष बना दिया। इस अंतरराष्ट्रीय दौरे के दौरान डॉ. उत्कर्ष त्रिवेदी ने ऑक्सफोर्ड में स्किन डिजीज (त्वचा रोग) विषय पर एक महत्वपूर्ण व्याख्यान भी दिया, जिसमें उन्होंने होम्योपैथी के माध्यम से त्वचा रोगों के प्रभावी उपचार और उसके वैज्ञानिक पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उनके इस व्याख्यान को उपस्थित विशेषज्ञों द्वारा सराहा गया। डॉ. त्रिवेदी को यह सम्मान होम्योपैथी के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट कार्य, मरीजों के प्रति समर्पण एवं अंतरराष्ट्रीय मंच पर रायपुर, छत्तीसगढ़ का नाम गौरवान्वित करने के लिए प्रदान किया गया। सम्मान प्राप्त करने के पश्चात उन्होंने इसे अपने माता-पिता के आशीर्वाद, गुरुजनों के मार्गदर्शन एवं मरीजों के विश्वास का परिणाम बताते हुए इस उपलब्धि को अपने शहर रायपुर और होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति को समर्पित किया। यह उपलब्धि न केवल डॉ. उत्कर्ष त्रिवेदी, बल्कि रायपुर, छत्तीसगढ़ के लिए भी गर्व का विषय है।