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अदालत का फैसला: नाबालिग से दुष्कर्म के आरोपी को उम्रकैद, पीड़िता को मिला 4 लाख का मुआवजा

बिलासपुर. नाबालिक को भागकर दुष्कर्म के मामले में आरोपी युवक को पास्को एक्ट के तहत 20 वर्ष कारावास की सजा सुनाई गई है. तखतपुर थाना क्षेत्र के इस मामले में जिला एवं जिला न्यायालय में विशेष अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम एफटीसी पास्को अधिनियम पीठासीन अधिकारी पूजा जायसवाल की अदालत ने आरोपी जयकुमार लहरे उर्फ कलुआ को 20 वर्ष कारावास की सजा सुनाई. अदालत ने 4 लाख पीड़िता को देने का आदेश भी दिया है. न्यायालय ने इस घटना को अपराधिकृत मानते हुए टिप्पणी की है कि जिस समय नाबालिक पीडि़ता को भगा कर ले गया. अपराधी घटना की गई उसमें पीड़िता की उम्र 18 वर्ष से कम थी. पीड़ित बच्चों के मन में उसके स्वास्थ्य विकास पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है. न्यायालय ने कहा है कि आरोपी युवक का यह कृत्य पीड़ित बच्चों के मन पर घृणित कृत्य का प्रभाव आजीवन रहेगा. स्वास्थ्य विकास पर भी पड़ेगा. घटना के समय पीड़िता की आयु 18 वर्षों से कम थी. इसलिए हमारे पास उच्च न्यायालय के विवादित निर्णय को रद्द करने और ट्रायल कोर्ट के निर्णय को बहाल करने के अलावा और कोई विकल्प नहीं है. न्यायाधीश पूजा जायसवाल ने दोनों पक्षों की गवाही के बाद आरोपी जय कुमार लहरें को 20 वर्ष कारावास की सजा सुनाई. साथ ही शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक मनीषा नंदी ने पैरवी की है. ये है पूरी घटना  तखतपुर थाना क्षेत्र के पीड़िता के पिता ने 2024 को थाना तखतपुर में उपस्थित होकर रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसकी नाबालिक पुत्री को 8 नवंबर 2024 की सुबह 11 बजे बिना बताए कहीं चली गई है और आज तक वापस नहीं आई है. पूछताछ के दौरान पतासाजी में रिश्तेदारी में पता चला कि किसी ने बहला-फुसलाकर कर उनकी नाबालिक बेटी को अपहरण करके ले गया है. पुलिस ने अपनी विवेचना में पाया कि आरोपी ने हीं नाबालिक को भगा कर ले गया है. मौका नक्शा तैयार कर घटनास्थल का निरीक्षण व नक्शा तैयार कर पीडि़ता के माता-पिता के बयान दर्ज करने के बाद विवेचना के दौरान पता चला कि आरोपी जयकुमार लहरे ने 22 नवंबर 2024 को ईंट भट्टा उत्तर प्रदेश में इसे बहला फुसलाकर कर भगाकर ले गया था. पुलिस ने उत्तर प्रदेश के ईंट भट्टा से नाबालिक को बरामद किया. पीड़िता का बयान दर्ज कर 13 नवंबर 2024 को आरोपी जयकुमार लहरे को धारा 180 बीएनएस से महिला थाना को प्रतिवेदन प्रेषित कर गिरफ्तार किया गया.

विश्व स्वास्थ्य दिवस पर सिम्स में ‘जेंडर फॉर हेल्थ’ विषय पर आयोजन, 100 से अधिक छात्रों ने लिया भाग

बिलासपुर विश्व स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर सिम्स चिकित्सालय, बिलासपुर में “जेंडर फॉर हेल्थ” थीम पर एक व्यापक एवं जागरूकता से भरपूर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य समाज में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना एवं जेंडर समानता के महत्व को रेखांकित करना रहा। कार्यक्रम के अंतर्गत विभिन्न प्रतियोगिताएं एवं शैक्षणिक गतिविधियां आयोजित की गईं, जिसमें छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान क्विज, पोस्टर मेकिंग एवं स्लोगन प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया, जिसमें लगभग 100 से अधिक छात्र-छात्राओं ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। प्रतिभागियों ने स्वास्थ्य, स्वच्छता, लैंगिक समानता एवं समाज में जागरूकता से जुड़े विषयों पर अपने विचार रचनात्मक रूप से प्रस्तुत किए। प्रतियोगिताओं के माध्यम से छात्रों ने यह संदेश दिया कि स्वस्थ समाज के निर्माण में सभी वर्गों की समान भागीदारी आवश्यक है। यह आयोजन राष्ट्रीय स्तर पर चल रहे विश्व स्वास्थ्य संगठन की थीम “जेंडर फॉर हेल्थ” के अनुरूप किया गया। कम्युनिटी मेडिसिन विभाग के मार्गदर्शन में कार्यक्रम का सफल संचालन हुआ, जिसमें स्वास्थ्य के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई और लोगों को जागरूक करने के लिए प्रेरित किया गया। कार्यक्रम में देशभर के सैकड़ों मेडिकल कॉलेजों में चल रही समान गतिविधियों की जानकारी भी साझा की गई, जिससे प्रतिभागियों को व्यापक दृष्टिकोण प्राप्त हुआ। कार्यक्रम के समापन पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया एवं उनके प्रयासों की सराहना की गई। इस अवसर पर उपस्थित विशेषज्ञों ने छात्रों को स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने और समाज में जागरूकता फैलाने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम में सिम्स चिकित्सालय के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह एवं नोडल अधिकारी डॉ. भूपेंद्र कश्यप की विशेष उपस्थिति रही। इसके साथ ही डॉ. हेमलता ठाकुर, डॉ. मधुमिता मूर्ति, डॉ. अर्चना सिंह  डॉ. प्रवीण श्रीवास्तव, डॉ. सचिन पांडे एवं डॉ. विवेक शर्मा सहित संस्थान के अन्य वरिष्ठ चिकित्सक, स्टाफ एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

गिरते जलस्तर को रोकने के लिए बिलासपुर में नलकूप निर्माण पर रोक

बिलासपुर. जिले में गिरते भू-जल स्तर और संभावित पेयजल संकट को देखते हुए जिला प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए नए नलकूप एवं ट्यूबवेल खनन पर प्रतिबंध लगा दिया है। कलेक्टर द्वारा जारी आदेश के अनुसार यह प्रतिबंध 6 अप्रैल 2026 से 30 जून 2026 तक प्रभावी रहेगा। कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी संजय अग्रवाल द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि जिले के ग्रामीण एवं नगरीय क्षेत्रों में नए नलकूप/ट्यूबवेल खनन पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगाया जाता है। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा प्रस्तुत प्रतिवेदन के आधार पर यह निर्णय लिया गया है, जिसमें बताया गया है कि भू-जल स्तर में लगातार गिरावट आ रही है। इस स्थिति को नियंत्रित करने तथा पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ पेयजल परिरक्षण अधिनियम 1986 की धारा-3 के तहत यह आदेश जारी किया गया है। आदेश के तहत बिलासपुर जिले के विकासखंड बिल्हा, मस्तूरी, तखतपुर एवं कोटा को 6 अप्रैल 2026 से 30 जून 2026 तक जलाभावग्रस्त क्षेत्र घोषित किया गया है। इस अवधि में सक्षम अधिकारी की पूर्व अनुमति के बिना कोई भी व्यक्ति या संस्था नए नलकूप खनन नहीं कर सकेगी। हालांकि, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, नगर निगम एवं नगर पंचायतों जैसी शासकीय एजेंसियों को केवल पेयजल आपूर्ति हेतु आवश्यकता अनुसार नलकूप खनन की अनुमति दी गई है। इसके लिए उन्हें पूर्व अनुमति की आवश्यकता नहीं होगी, लेकिन संबंधित कार्यों की जानकारी अधिकृत अधिकारियों को देना अनिवार्य होगा। जन सुविधा को ध्यान में रखते हुए अत्यंत आवश्यक परिस्थितियों में नलकूप खनन की अनुमति प्रदान करने के लिए अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) बिलासपुर, बिल्हा, मस्तूरी, तखतपुर एवं कोटा को अधिकृत किया गया है। ये अधिकारी अपने-अपने क्षेत्र में अधिनियम के प्रावधानों के अनुरूप अनुमति देने की प्रक्रिया सुनिश्चित करेंगे। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आदेश का उल्लंघन करने पर संबंधित व्यक्ति या संस्था के विरुद्ध नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है।

जिंदल स्टील ने कोयला गैसीफिकेशन क्रांति से रचा इतिहास, ऊर्जा आत्मनिर्भरता और सस्टेनेबल स्टील की दिशा दिखाई

जिन्दल स्टील ने रचा इतिहास, कोयला गैसीफिकेशन क्रांति से ऊर्जा आत्मनिर्भरता और सस्टेनेबल स्टील की राह दिखाई  रायपुर  जिन्दल स्टील ने उन्नत कोयला गैसीफिकेशन के माध्यम से 'स्वदेशी' कोयले के बेहतरीन उपयोग का मार्ग प्रशस्त किया है, जिससे कम कार्बन वाले स्टील के उत्पादन के साथ-साथ भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती मिली है।  जिन्दल स्टील ने दुनिया में पहली बार एक ऐसी तकनीक (कोयला गैसीफिकेशन) का सफल प्रयोग किया है, जिससे स्वदेशी कोयले से गैस (सिनगैस) बनाकर लोहा (डीआरआई) तैयार किया जा रहा है। सीधे शब्दों में कहें तो कंपनी ने विदेशी गैस या महंगे आयातित कोयले के बजाय अपने देश के कोयले को साफ-सुथरी गैस में बदलकर स्टील बनाने की बड़ी कामयाबी हासिल की है। प्राकृतिक गैस, एलपीजी और प्रोपेन की कमी को दूर करने के लिए जिन्दल स्टील ने अब गैल्वनाइजिंग और कलर कोटिंग लाइन भट्टियों में सिनगैस का सफल प्रयोग किया है, जो स्टील इंडस्ट्री में पहली बार हुआ है। यह प्रयोग आज की कठिन परिस्थितियों में ईंधन की कमी को दूर करने में मददगार साबित हुआ है।  स्टील जगत को नई दिशा दिखाते हुए जिन्दल स्टील ने सिनगैस से ब्लास्ट फर्नेस संचालित कर आयातित कोकिंग कोल पर देश की निर्भरता घटाई है और प्रति टन स्टील उत्पादन में कार्बन उत्सर्जन की मात्रा उल्लेखनीय स्तर तक कम करने में भी कामयाबी हासिल की है। स्टील उत्पादन की वैल्यू चेन में सिनगैस का उपयोग निश्चित रूप से ऊर्जा आत्मनिर्भरता और सस्टेनेबिलिटी के क्षेत्र में एक नया इतिहास रचेगा।  गौरतलब है कि भारत सरकार की भावी नीतियों और प्रोत्साहनों में राष्ट्रीय कोयला गैसीफिकेशन मिशन शामिल है, इसलिए उम्मीद है कि कोयला गैसीफिकेशन तकनीक को अपनाने में तेजी आएगी और ऊर्जा आत्मनिर्भरता के लिए देश में हो रहे इस प्रयास को समर्थन मिलेगा।  इस संबंध में जिन्दल स्टील, अंगुल के कार्यकारी निदेशक श्री पी.के. बीजू नायर ने कहा: "स्वदेशी कोयले से बनी यह गैस (सिनगैस) विदेशों से आने वाले महंगे मेथनॉल, अमोनिया और एलएनजी की जगह ले सकती है। भारत को अपनी तरक्की और विदेशी मुद्रा बचाने के लिए अपने पास मौजूद कोयले के विशाल भंडार का सही उपयोग करना चाहिए। अगर हम कोयला गैसीफिकेशन के साथ कार्बन नियंत्रण की तकनीक (CCUS) का उपयोग करें तो न केवल प्रदूषण कम होगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मानकों (CBAM) पर खरा उतरकर हमारा स्टील, विदेशी बाजारों में और भी मजबूत बनेगा।" स्वदेशी कोयले का उपयोग और उन्नत स्वच्छ कोयला गैसीफिकेशन तकनीक के माध्यम से जिन्दल स्टील, सस्टेनेबल और सस्ता स्टील उपलब्ध कराते हुए 'आत्मनिर्भर भारत' के दृष्टि को आगे बढ़ा रहा है।  जिन्दल स्टील के बारे में  जिन्दल स्टील भारत के शीर्ष स्टील उत्पादकों में से एक है, जो अपनी कार्यक्षमता और बेहतरीन क्वालिटी के लिए दुनिया भर में जाना जाता है। कंपनी का 'माइन-टू-मेटल' मॉडल इसे खास बनाता है, जहां खदानों से लेकर तैयार स्टील तक, सारा काम अपने संसाधनों और आधुनिक तकनीक से होता है। 12 बिलियन डॉलर (करीब 1 लाख करोड़ रुपये) से ज्यादा निवेश के साथ कंपनी के पास अंगुल, रायगढ़ और पतरातू में विश्वस्तरीय स्टील प्लांट हैं। जिन्दल स्टील आज  न केवल भारत में, बल्कि अफ्रीका तक अपने मजबूत नेटवर्क के जरिये देश की तरक्की में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।  

फर्जीवाड़े में शामिल आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को सस्पेंड, मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना की जांच जारी

कांकेर. सरकारी योजना का लाभ लेने के लिए एक पहले से शादीशुदा जोड़े द्वारा दोबारा विवाह करने का मामला सामने आया है। यह घटना मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत पखांजूर में आयोजित कार्यक्रम से जुड़ी है। मामले के उजागर होने के बाद महिला एवं बाल विकास विभाग ने जांच कर कार्रवाई की है। जानकारी के अनुसार, 10 फरवरी 2026 को पखांजूर में आयोजित सामूहिक विवाह कार्यक्रम में ग्राम पीवी-34 निवासी सुदीप विश्वास और पीवी-64 निवासी स्वर्ण मिस्त्री ने विवाह किया। जबकि इन दोनों की शादी इससे पहले ही 3 जून 2025 को हो चुकी थी। बताया जा रहा है कि यह जोड़ा संगम सेक्टर का निवासी है, लेकिन योजना का लाभ लेने के लिए इनका पंजीयन 20 किलोमीटर दूर हरनगढ़ सेक्टर में कराया गया। जांच के बाद कार्रवाई मामले के संज्ञान में आने के बाद कलेक्टर निलेश क्षीरसागर के निर्देश पर महिला एवं बाल विकास विभाग ने जांच शुरू की। जांच में दोबारा विवाह की पुष्टि हुई। इसके बाद हरनगढ़ सेक्टर की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता जानवी शाह को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। वहीं, पूरे मामले में निगरानी और सत्यापन की जिम्मेदारी निभाने वाली सुपरवाइजर पुष्पलता नायक के खिलाफ भी विभाग ने कार्रवाई करते हुए उनका वेतन रोक दिया है।

खाद की कालाबाजारी पर प्रशासन का शिकंजा, अधिकारियों ने दुकानों की जांच की

मुंगेली. जिले में यूरिया की निर्धारित कीमत से अधिक दर पर बिक्री की शिकायतों को प्रशासन ने गंभीरता से लेते हुए त्वरित कार्रवाई की है. कलेक्टर कुंदन कुमार और जिला पंचायत सीईओ प्रभाकर पांडेय के निर्देश पर एसडीएम अजय शतरंज, उप संचालक कृषि और नायब तहसीलदार की संयुक्त टीम ने जिला मुख्यालय के विभिन्न निजी कृषि केंद्रों पर औचक निरीक्षण किया. जांच के दौरान सुपर एजेंसी, पंजाब एजेंसी, कैलाश ट्रेडर्स और शक्ति माई कृषि केंद्र सहित कई दुकानों में पहुंचकर अधिकारियों ने मौके पर मौजूद किसानों से सीधे बातचीत की. यूरिया की वास्तविक बिक्री दर, उपलब्धता और वितरण व्यवस्था को लेकर विस्तार से जानकारी ली गई, ताकि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी सामने लाई जा सके. सरकार के मुताबिक खरीफ सीजन 2026 के लिए छत्तीसगढ़ को 15.55 लाख मीट्रिक टन उर्वरक का लक्ष्य आवंटित किया गया है। वर्तमान में राज्य के गोदामों और समितियों में लगभग 7.48 लाख मीट्रिक टन खाद उपलब्ध है, जिससे शुरुआती जरूरतों को पूरा करने की तैयारी है। हाल ही में हुई वर्चुअल बैठक में विभिन्न राज्यों में उर्वरकों की उपलब्धता और वितरण व्यवस्था की समीक्षा की गई। इस दौरान छत्तीसगढ़ की स्थिति भी साझा की गई, जिसमें बताया गया कि राज्य में खाद का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और वितरण व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। आंकड़ों के अनुसार राज्य को आवंटित कुल उर्वरकों में यूरिया, डीएपी, एनपीके, एमओपी और एसएसपी शामिल हैं। वहीं 30 मार्च 2026 की स्थिति में उपलब्ध स्टॉक में भी इन सभी उर्वरकों की पर्याप्त मात्रा मौजूद है, जिससे किसानों को समय पर आपूर्ति सुनिश्चित करने का दावा किया गया है। संभावित कमी की स्थिति से निपटने के लिए सरकार किसानों को वैकल्पिक उर्वरकों के उपयोग के लिए भी प्रेरित कर रही है। इसके तहत जैविक खाद, हरी खाद और नैनो उर्वरकों को बढ़ावा दिया जा रहा है। साथ ही सहकारी समितियों और निजी विक्रय केंद्रों के माध्यम से जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। उर्वरक वितरण में पारदर्शिता लाने के लिए राज्य में जल्द ही ई-उर्वरक वितरण प्रणाली लागू करने की तैयारी है। इस डिजिटल व्यवस्था के जरिए किसानों को उनके पंजीकृत रकबे के अनुसार खाद उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे अनियमितता पर रोक लगेगी। इसके अलावा कालाबाजारी और जमाखोरी को रोकने के लिए जिला स्तर पर उड़नदस्ता दल और निगरानी समितियों को सक्रिय किया जा रहा है। किसी भी तरह की गड़बड़ी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। 

हाईकोर्ट का बड़ा निर्णय: अमित जोगी को जग्गी मर्डर केस में आजीवन कारावास

बिलासपुर. साल 2003 के चर्चित राम अवतार जग्गी हत्याकांड में हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की खंडपीठ ने सीबीआई की अपील (ACQA No. 66/2026) को स्वीकार करते हुए ट्रायल कोर्ट के फैसले को पलट दिया। अनुमति याचिका, जल्द हो सकती है सुनवाई हाईकोर्ट ने तत्कालीन मुख्यमंत्री अजीत जोगी के पुत्र अमित जोगी को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) और धारा 120-बी (अपराधिक षड्यंत्र) के तहत दोषी ठहराया है। कोर्ट ने उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 1,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना अदा नहीं करने की स्थिति में छह माह की अतिरिक्त सश्रम कारावास की सजा का प्रावधान किया गया है। हाईकोर्ट का यह फैसला 31 मई 2007 के ट्रायल कोर्ट के फैसले को पूरी तरह पलट दिया है। उस समय स्पेशल जज (एट्रोसिटी) रायपुर ने अमित जोगी को बरी कर दिया था, जबकि चिमन सिंह, याह्या ढेबर, अभय गोयल और फिरोज सिद्दीकी सहित अन्य 28 आरोपियों को सजा सुनाई गई थी। हाईकोर्ट ने साफ कहा कि “एक ही गवाही के आधार पर कुछ आरोपियों को दोषी ठहराना और मुख्य साजिशकर्ता को बरी कर दिया जाना कानूनी रूप से असंगत और गलत है।” बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर मामला रीओपन किया गया था, जिसके बाद हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई हुई थी। 2003 में हुई थी एनसीपी नेता रामावतार जग्गी की हत्या 4 जून 2003 को एनसीपी नेता रामावतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में 31 अभियुक्त बनाए गए थे, जिनमें से बल्टू पाठक और सुरेंद्र सिंह सरकारी गवाह बन गए थे। अमित जोगी को छोड़कर बाकी 28 लोगों को सजा मिली थी। हालांकि 31 मई 2007 को रायपुर की विशेष अदालत ने सबूतों के अभाव में अमित जोगी को बरी कर दिया था। रामअवतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने अमित जोगी को बरी करने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी, जिस पर अमित के पक्ष में स्टे लगा था। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने केस को हाईकोर्ट भेज दिया। जानिए कौन थे रामावतार जग्गी कारोबारी बैकग्राउंड वाले रामावतार जग्गी देश के बड़े नेताओं में शुमार पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल के बेहद करीबी थे। जब शुक्ल कांग्रेस छोड़कर NCP में शामिल हुए तो जग्गी भी उनके साथ गए। विद्याचरण ने जग्गी को छत्तीसगढ़ में NCP का कोषाध्यक्ष बना दिया था। ये पाए गए थे दोषी जग्गी हत्याकांड में अभय गोयल, याहया ढेबर, वीके पांडे, फिरोज सिद्दीकी, राकेश चंद्र त्रिवेदी, अवनीश सिंह लल्लन, सूर्यकांत तिवारी, अमरीक सिंह गिल, चिमन सिंह, सुनील गुप्ता, राजू भदौरिया, अनिल पचौरी, रविंद्र सिंह, रवि सिंह, लल्ला भदौरिया, धर्मेंद्र, सत्येंद्र सिंह, शिवेंद्र सिंह परिहार, विनोद सिंह राठौर, संजय सिंह कुशवाहा, राकेश कुमार शर्मा, (मृत) विक्रम शर्मा, जबवंत, विश्वनाथ राजभर दोषी पाए गए थे।

पर्वतारोही सुश्री अमिता श्रीवास से जांजगीर-चांपा में मिली सम्मानित मुलाकात

रायपुर. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने जांजगीर-चांपा जिले की युवा पर्वतारोही सुअमिता श्रीवास को उनके आगामी माउंट एवरेस्ट अभियान के लिए शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में पर्वतारोही सुअमिता श्रीवास से मुलाकात के दौरान कहा कि आगामी 9 अप्रैल को सुअमिता विश्व की सर्वोच्च चोटी माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराने के संकल्प के साथ काठमांडू के लिए रवाना हो रही हैं। यह केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि की यात्रा नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ की आकांक्षाओं, साहस और आत्मविश्वास की ऊंची उड़ान है। उन्होंने कहा कि अमिता का यह अभियान इस बात का प्रमाण है कि यदि संकल्प अटल हो, तो कोई भी ऊंचाई असंभव नहीं रहती। प्रदेश की बेटियां आज हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा और परिश्रम से नए मानक स्थापित कर रही हैं और छत्तीसगढ़ को नई पहचान दे रही हैं। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि अमिता श्रीवास ने वर्ष 2021 में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर माउंट किलिमंजारो को फतह कर पहले ही अपनी क्षमता और दृढ़ता का परिचय दिया है। उनका यह सतत प्रयास न केवल उपलब्धि है, बल्कि प्रदेश की युवा पीढ़ी, विशेषकर बेटियों के लिए एक जीवंत प्रेरणा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि अमिता अपने इस साहसिक अभियान में सफलता प्राप्त कर विश्व की सबसे ऊंची चोटी पर देश का तिरंगा फहराएंगी और छत्तीसगढ़ सहित पूरे राष्ट्र का गौरव बढ़ाएंगी। मुख्यमंत्री ने सुअमिता श्रीवास को इस महत्वपूर्ण अभियान के लिए प्रदेशवासियों की ओर से हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। पर्वतारोही अमिता श्रीवास ने CM साय से मुलाकात की। सीएम साय ने कहा, जांजगीर-चांपा की बेटी पर्वतारोही सुश्री अमिता श्रीवास से मुलाकात कर अत्यंत प्रसन्नता हुई। वे आगामी 9 अप्रैल को विश्व की सर्वोच्च चोटी माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराने के संकल्प के साथ काठमांडू के लिए रवाना हो रही हैं – यह पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का क्षण है। अमिता इससे पहले वर्ष 2021 में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर माउंट किलिमंजारो फतह कर देश और प्रदेश का मान बढ़ा चुकी हैं। उनका आत्मविश्वास, दृढ़ संकल्प और लक्ष्य के प्रति समर्पण प्रदेश की हर बेटी के लिए प्रेरणा है। मुझे पूर्ण विश्वास है कि हमारी बेटियां हर चुनौती को पार कर नई ऊंचाइयों को छूने का हौसला रखती हैं। अमिता को इस अभियान के लिए प्रदेशवासियों की ओर से हार्दिक शुभकामनाएं। आपका यह साहसिक प्रयास देश का मान और ऊंचा करेगा। पर्वतारोही सुश्री अमिता श्रीवास अब दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट को फतह करने की तैयारी में जुटी जांजगीर-चांपा जिले की रहने वाली अमिता श्रीवास अब दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट को फतह करने की तैयारी में जुटी हैं. चांपा शहर की रहने वाली अमिता पेशे से एक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता हैं, लेकिन उनके सपने बेहद बड़े और प्रेरणादायक हैं, साधारण परिवार से आने के बावजूद उन्होंने अपने हौसले, मेहनत और जुनून के दम पर दुनिया की सबसे ऊंची चोटी पर तिरंगा फहराने का लक्ष्य तय किया है. सीमित संसाधनों के बावजूद अमिता अपने इस सपने को साकार करने के लिए लगातार कड़ी मेहनत और विशेष प्रशिक्षण ले रही हैं. इससे पहले भी वह कई ऊंची चोटियों पर चढ़ाई कर भारत का तिरंगा लहरा चुकी हैं।  पर्वतारोही अमिता श्रीवास बताती हैं कि उन्होंने हमेशा भीड़ से अलग कुछ करने का सपना देखा था. उनका कहना है कि आमतौर पर लोग एक ही दिशा में चलते हैं, लेकिन उन्होंने तय किया कि उन्हें कुछ अलग करना है. इसी सोच के साथ उन्होंने पर्वतारोहण जैसे चुनौतीपूर्ण क्षेत्र को चुना, ताकि वह अपने जिले जांजगीर-चांपा और छत्तीसगढ़ का नाम रोशन कर सकें. अमिता बताती हैं कि उनकी प्रारंभिक शिक्षा सरकारी स्कूल से हुई है. उन्होंने प्राथमिक पढ़ाई मठ प्राथमिक स्कूल से की, जबकि मैट्रिक की पढ़ाई चांपा के गर्ल्स स्कूल से पूरी की. इसके बाद उन्होंने एमएमआरपीजी कॉलेज से अपनी कॉलेज की पढ़ाई पूरी की।  कई प्रमाणपत्र हासिल किए पर्वतारोहण की शुरुआत उन्होंने साल 2018 में की. उन्होंने राजस्थान के माउंट आबू स्थित सरकारी संस्थान से रॉक क्लाइंबिंग का कोर्स किया, इसके बाद उन्होंने धीरे-धीरे इस क्षेत्र में आगे बढ़ना शुरू किया और अलग-अलग प्रशिक्षण कार्यक्रमों में हिस्सा लिया. पर्वतारोहण के क्षेत्र में भी अन्य क्षेत्रों की तरह लिखित, मौखिक और प्रैक्टिकल परीक्षाएं होती हैं. इन सभी में बेहतर प्रदर्शन करने के बाद ही प्रमाणपत्र मिलता है. अपने प्रशिक्षण के दौरान अमिता ने पश्चिम सिक्किम और उत्तर सिक्किम के पर्वतीय क्षेत्रों में करीब 5500 मीटर की ऊंचाई तक चढ़ाई की है. इसके अलावा उन्होंने उत्तराखंड की प्रसिद्ध चोटी यूटी कांगरी पर भी चढ़ाई की है।   

मौसम ने ली करवट, छत्तीसगढ़ में ठंडक बढ़ी—आज बारिश और बिजली गिरने का अलर्ट

रायपुर. छत्तीसगढ़ में मौसम के अचानक बदले मिजाज से भीषण गर्मी से लोगों को राहत मिली है। इसके साथ ही तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई है। वहीं आज प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश के साथ तेज हवाएं और बिजली गिरने की संभावना है। मौसम विभाग के मुताबिक, प्रदेश में पिछले 24 घंटों के दौरान अधिकतम तापमान में 1 से 2 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई है। वहीं अगले 4 दिनों तक उत्तर और मध्य छत्तीसगढ़ के एक-दो स्थानों पर गरज-चमक के साथ तेज हवाएं चलने, बिजली गिरने और 5 अप्रैल को ओलावृष्टि होने की संभावना है। इसके अलावा अगले 3 दिनों तक अधिकतम तापमान में 1 से 3 डिग्री सेल्सियस तक और गिरावट हो सकती है, इसके बाद तापमान में कोई खास बदलाव नहीं होगा। मौसम सारांश बीते रविवार को प्रदेश के कुछ इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई। प्रदेश में सबसे अधिक तापमान 36.9 डिग्री सेल्सियस जगदलपुर दर्ज किया गया, जबकि न्यूनतम तापमान 19.2 डिग्री सेल्सियस अंबिकापुर में रिकॉर्ड किया गया। वर्षा के प्रमुख आंकड़ों में पौड़ी उपरोरा में 1 सेंटीमीटर बारिश दर्ज हुई। सिनोप्टिक सिस्टम गंगा के पश्चिमी बंगाल से लेकर तेलंगाना तक छत्तीसगढ़ से गुजरते हुए एक निम्न दबाव क्षेत्र सक्रिय है, जो समुद्र तल से करीब 0.9 किमी ऊपर स्थित है। इसी सिस्टम के प्रभाव से मौसम में यह बदलाव देखने को मिल रहा है। प्रदेश में आज कैसा रहेगा मौसम आज प्रदेश के कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। साथ ही एक-दो जगहों पर गरज-चमक के साथ वज्रपात और 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। अगले दो दिनों के बाद भी प्रदेश में हल्की से मध्यम बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है। कुछ स्थानों पर तेज हवाओं और बिजली गिरने व तेज हवा (40-50 केएमपीएच) चलने की संभावना है। रायपुर में कैसा रहने वाला है मौसम रायपुर में आज आसमान आंशिक रूप से मेघमय रहेगा। गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना है। यहां अधिकतम तापमान 37 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 25 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है।

जशपुर में मुख्यमंत्री साय की मौजूदगी, भाजपा स्थापना दिवस व श्रीराम कथा में करेंगे शिरकत

रायपुर. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय आज जशपुर जिले के दौरे पर रहेंगे। इसके अलावा वे आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, मुख्यमंत्री रायपुर स्थित कुशाभाऊ ठाकरे परिसर में भाजपा स्थापना दिवस कार्यक्रम में शामिल होंगे। इसके बाद वे दोपहर में रायपुर से जशपुर के लिए रवाना होंगे। जशपुर पहुंचने के बाद मुख्यमंत्री दोपहर 3 बजे प्रभु श्री रामकथा रसपान कार्यक्रम में शामिल होंगे। कार्यक्रमों में शामिल होने के बाद वे शाम 5:35 बजे जशपुर से रायपुर के लिए प्रस्थान करेंगे। रायपुर पहुंचने के बाद शाम 6:30 बजे वे जिला भाजपा कार्यालय में कार्यकर्ताओं को संबोधित करेंगे। भाजपा का 47वां स्थापना दिवस आज, प्रदेशभर में होंगे कार्यक्रम भारतीय जनता पार्टी का 47वां स्थापना दिवस आज मनाया जा रहा है। इस अवसर पर प्रदेशभर में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया है। सुबह 8:00 बजे भाजपा जिला कार्यालय में स्वच्छता अभियान चलाया जाएगा, जिसमें महिला मोर्चा और अनुसूचित जाति मोर्चा की विशेष भागीदारी रहेगी। इसके बाद सुबह 9 बजे जिला कार्यालय स्थित एकात्म परिसर में ध्वजारोहण कार्यक्रम आयोजित होगा। वहीं, प्रदेश कार्यालय कुशाभाऊ ठाकरे परिसर में सुबह 11:00 बजे ध्वजारोहण किया जाएगा। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय शामिल होकर ध्वजारोहण करेंगे। इसके बाद शाम 5:00 बजे जिला कार्यालय एकात्म परिसर में कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित किया जाएगा, जिसमें मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय भी शामिल होकर कार्यकर्ताओं को संबोधित करेंगे।