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एक दूसरे के राज्य के गौरवशाली इतिहास का स्मरण करने का है यह महत्वपूर्ण अवसर – राज्यपाल डेका

लोकभवन में मनाया गया विभिन्न राज्यों का स्थापना दिवस एक दूसरे के राज्य के गौरवशाली इतिहास का स्मरण करने का है यह महत्वपूर्ण अवसर – राज्यपाल डेका 140 करोड़ देशवासियों को जोड़ रहा है एक भारत श्रेष्ठ भारत अभियान – मुख्यमंत्री साय रायपु  राज्यपाल रमेन डेका के मुख्य आतिथ्य में लोकभवन में 7 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों का स्थापना दिवस हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय विशेष रूप से उपस्थित थे।  एक भारत श्रेष्ठ भारत कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित इस समारोह में राज्यपाल डेका ने मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश, दादरा एवं नगर हवेली एवं दमन दीव, बिहार, राजस्थान और ओडिशा राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के स्थापना दिवस के अवसर पर प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी।  राज्यपाल ने कहा कि यह अवसर इन राज्यों की समृद्ध विरासत, ऐतिहासिक परंपराओं और विकास यात्रा को स्मरण करने का महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल पर शुरू की गई एक भारत श्रेष्ठ भारत योजना का उद्देश्य विभिन्न राज्यों की भाषा, संस्कृति और परंपराओं के माध्यम से आपसी समझ और जुड़ाव को बढ़ाना है जिससे भारत की एकता और अखंडता मजबूत होती है।  राज्यपाल ने मिजोरम और अरूणाचल प्रदेश की प्राकृतिक संुदरता और जनजातीय संस्कृति, दादरा एवं नगर हवेली तथा दमन-दीव की पर्यटन एवं औद्योगिक विशेषताओं, बिहार के लोगों का अर्थव्यवस्था एवं विकास में योगदान,  ऐतिहासिक और आध्यात्मिक विरासत, राजस्थान के लोगों के व्यापारिक उन्नति और शौर्य परंपरा तथा ओडिशा के ऐतिहासिक महत्व का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ओडिशा और छत्तीसगढ़ में बहुत समानताएं हैं। राज्यपाल ने कहा कि भारत की विविधता की उसकी सबसे बड़ी ताकत है और ऐसे आयोजन राष्ट्रीय एकता को और अधिक मजबूत बनाते हैं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि एक भारत श्रेष्ठ भारत 140 करोड़ देशवासियों को जोड़ रहा है। भाषा, वेशभूषा, खान-पान में भले ही हम अलग अलग है लेकिन अनेकता में एकता हमारी देश की विशेषता हैं। एक भारत श्रेष्ठ भारत कार्यक्रम इसी भावना को दर्शाता है।  छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच रोटी बेटी के संबंध, राजस्थान के व्यापारियों का छत्तीसगढ़ के व्यापार एवं उद्योग की उन्नति में योगदान सहित अन्य राज्यों की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि एक भारत श्रेष्ठ भारत के तहत हम लोग विभिन्न राज्यों में जाकर वहां की संस्कृति से परिचित हो रहे हैं।   समारोह में राज्यों के प्रतिनिधियों ने अपने राज्यों की विशेषताओं, परंपरा, संस्कृति पर प्रकाश डाला। समारोह में विभिन्न विश्वविद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने सभी राज्यों के सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रंगारंग प्रस्तुति दी। विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों को राज्यपाल ने राजकीय गमछा और स्मृति चिन्ह भेंट किया। उन्होंने भी राज्यपाल को अपने राज्य की ओर से स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया।  कार्यक्रम में राज्यपाल के विधिक सलाहकार भीष्म प्रसाद पाण्डेय के सेवानिवृत्त होने के अवसर पर राज्यपाल ने उनका सम्मान किया। इसी तरह राज्यपाल की उप सचिव सुनिधि साहू ने देहदान का निर्णय लिया है जिसकी सराहना करते हुए डेका ने उन्हें भी सम्मानित किया। कार्यक्रम में विधायक पुरंदर मिश्रा, अन्य जनप्रतिनिधि, राज्यपाल के सचिव डॉ. सी. आर प्रसन्ना, अन्य अधिकारी एवं इन सभी राज्यों के युवा, महिलाएं एवं गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

छत्तीसगढ़ की फुटबॉलर किरण पिस्दा की कहानी: जनजातीय जड़ों से अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक का संघर्ष

जनजातीय जड़ों से अंतर्राष्ट्रीय फलक तक: छत्तीसगढ़ की स्टार फुटबॉलर किरण पिस्दा के संघर्ष की कहानी किरण भारत के लिए खेल चुकी हैं और क्रोएशियन महिला लीग में डिनामो ज़ाग्रेब के लिए भी खेली हैं किसी भी पोज़िशन पर खेलने की क्षमता उनकी सबसे बड़ी ताकत रायपुर  जब खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स के सेमीफाइनल में अरुणाचल प्रदेश के खिलाफ पेनल्टी शूटआउट के दौरान किरण पिस्दा ने गोलकीपिंग के दस्ताने पहने, तब वह अपने अब तक के अनुभवों पर भरोसा कर रही थीं। उन अनुभवों पर, जिन्होंने चुनौतियों और निराशाओं के बीच उन्हें और अधिक मजबूत बनाया।              24 साल की उम्र में किरण अपने खेल कौशल के शिखर पर नजर आती हैं। वह यूरोप में लीग फुटबॉल खेल चुकी हैं और अब बड़े अंतर्राष्ट्रीय टूर्नामेंटों के लिए भारतीय टीम में जगह बनाने की दहलीज पर हैं।          हालांकि, उनका यह सफर बिल्कुल आसान नहीं रहा, भले ही उन्हें स्कूल और परिवार से शुरुआती समर्थन मिला। उनके भाई गिरीश पिस्दा, जो खुद राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी हैं, उनके लिए प्रेरणा बने।          किरण ने साई मीडिया से कहा, “मुझे स्कूल में काफी सपोर्ट मिला। वहीं से मुझे राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर खेलने के मौके मिले और हर चयन के साथ मेरा आत्मविश्वास बढ़ता गया।” इसके बाद किरण शारीरिक शिक्षा में डिग्री हासिल करने के लिए रायपुर आईं। छत्तीसगढ़ महिला लीग के दौरान उन्होंने चयनकर्ताओं का ध्यान खींचा और उन्हें राष्ट्रीय शिविर के लिए बुलावा मिला।             किरण बताती हैं, “उस समय मैं शारीरिक रूप से उतनी फिट नहीं थी और मेरा मानसिक स्तर भी सीनियर खिलाड़ियों के साथ प्रतिस्पर्धा करने के लिए तैयार नहीं था।”  यही कारण रहा कि उस राष्ट्रीय शिविर में उन्हें भारतीय टीम के लिए चयन नहीं मिला। वह कहती हैं, “मुझे एहसास हुआ कि वहां जो अनुभव मिला है, उस पर मुझे काम करना होगा।”             इसके बाद उनके जीवन में आत्म-सुधार का एक कठिन दौर शुरू हुआ। उन्होंने अपनी फिटनेस पर काम किया, मैचों का विश्लेषण करना शुरू किया और अपनी पोज़िशनल समझ को बेहतर बनाया। लेकिन सबसे बड़ा बदलाव उनकी मानसिकता में आया।          वह कहती हैं, “मैंने खुद से कहा कि चाहे कुछ भी हो जाए, मैं नकारात्मक नहीं सोचूंगी। अगर आप नकारात्मक हो जाते हैं, तो उसका सीधा असर आपके प्रदर्शन पर पड़ता है।” इस बदलाव में उनके मेंटर और कोच योगेश कुमार जांगड़ा की महत्वपूर्ण भूमिका रही। किरन ने कहा,“जब भी मुझे लगता है कि मैं अच्छा प्रदर्शन नहीं कर रही हूं या मन खराब होता है, तो मैं उनसे बात करती हूं। वह हमेशा मुझे सकारात्मक रहने और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं।”            किरण की मेहनत का असर धीरे-धीरे दिखने लगा। घरेलू स्तर पर उनके प्रदर्शन ने केरल ब्लास्टर्स जैसे क्लबों के दरवाजे खोले, जहां उन्होंने खुद को और निखारा। उनकी सबसे बड़ी ताकत उनकी बहुमुखी प्रतिभा बन गई। वह कहती हैं, “मैंने स्ट्राइकर के रूप में शुरुआत की, फिर मिडफील्ड में खेली और अब राष्ट्रीय टीम के लिए फुल-बैक के रूप में खेलती हूं। एक फुटबॉलर के रूप में आपको अपनी टीम के लिए कई पोज़िशन पर खेलने के लिए तैयार रहना चाहिए।”            किरण कई बार भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। वह 2022 के सैफ़ चैंपियनशिप स्क्वाड का हिस्सा रही हैं और क्रोएशियन महिला लीग में डिनामो ज़ाग्रेब के लिए भी खेल चुकी हैं। फिर भी, इस मुकाम पर भी असफलताएं उनके सफर का हिस्सा रही हैं। हाल ही में ऑस्ट्रेलिया में आयोजित एएफसी (AFC) महिला एशियन कप जैसे बड़े टूर्नामेंट के लिए चयन न होना उनके लिए एक और परीक्षा थी।          किरण कहती हैं, “बड़े टूर्नामेंट के लिए चयन न होना दुख देता है। हर खिलाड़ी इसे महसूस करता है। लेकिन अब मैं इसे अलग नजरिए से देखती हूं। इसे मैं और मेहनत करने और मजबूत वापसी करने की प्रेरणा मानती हूं।” दबाव को संभालना उनकी पहचान बन चुका है। चाहे टीम में जगह के लिए प्रतिस्पर्धा हो या अहम मैचों में प्रदर्शन, उन्होंने खुद को संयमित रखना सीख लिया है। वह कहती हैं, “ऊंचे स्तर पर खेलते समय दबाव हमेशा रहता है। आपको उसे संभालना सीखना पड़ता है।”             किरण टीम के प्रदर्शन की भूमिका को भी महत्वपूर्ण मानती हैं। उन्होंने कहा, “अगर टीम अच्छा कर रही होती है, तो हर खिलाड़ी आत्मविश्वास से भरा होता है। लेकिन जब टीम हार रही होती है, तो व्यक्तिगत प्रदर्शन भी प्रभावित होता है।” जनजातीय पृष्ठभूमि से आने वाली किरण दूर-दराज के इलाकों के खिलाड़ियों की चुनौतियों को अच्छी तरह समझती हैं। उनका मानना है कि खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स जैसे मंच इस अंतर को पाटने में अहम भूमिका निभा रहे हैं।            वह कहती हैं, “जनजातीय इलाकों में बहुत प्रतिभा है, लेकिन खिलाड़ियों को हमेशा मौके नहीं मिलते। खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स ने उन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच दिया है। इससे उन्हें आत्मविश्वास और राज्य तथा देश के लिए खेलने का सपना देखने की प्रेरणा मिलती है।” जहां तक किरण का सवाल है, उनका फोकस फिलहाल इंडियन वुमेंस लीग जैसी घरेलू प्रतियोगिताओं में लगातार अच्छा प्रदर्शन करने और राष्ट्रीय टीम में नियमित जगह बनाने पर है। लेकिन उनका लक्ष्य इससे कहीं बड़ा है।            वह कहती हैं, “मैं लगातार खुद को बेहतर बनाना चाहती हूं, नियमित प्रदर्शन करना चाहती हूं और बड़े टूर्नामेंट में भारत का प्रतिनिधित्व करना चाहती हूं। अगर आपका चयन नहीं होता, तो इसका मतलब यह नहीं कि आप अच्छे खिलाड़ी नहीं हैं—इसका मतलब है कि आपको और मेहनत करनी होगी।”

15वें वित्त आयोग से बड़ी मदद: अब तेजी से होंगे स्थानीय विकास कार्य

रायपुर. वित्तीय वर्ष के आखिरी 48 घंटों में छत्तीसगढ़ के नगरीय प्रशासन विभाग ने एक शानदार रिकॉर्ड कायम किया है. विभाग ने मिशन मोड में काम करते हुए राज्य के नगरीय निकायों के लिए 15वें वित्त आयोग की 404.66 करोड़ रुपये की बड़ी राशि प्राप्त कर दिखाया. दरअसल, लगातार प्रयासों से वित्तीय वर्ष खत्म होने के ठीक पहले 30 मार्च 2026 को भारत सरकार से 202.33 करोड़ रुपये राज्य को प्राप्त हुई. उप मुख्यमंत्री के निर्देश पर विभाग द्वारा सभी निकायों को तुरंत राशि अंतरित की गई, और अगली किश्त की पात्रता के लिए GTC तैयार कर त्वरित मांग प्रस्तुत किया गया. नियमानुसार ग्रांट ट्रांसफर सर्टिफिकेट समय सीमा में प्रस्तुत होने से केंद्र से अगले किस्त की राशि की पात्रता प्राप्त कर ली गई और कुछ ही घंटों में राशि भी प्राप्त हो गई. ​महज 24 घंटे में हुआ पूरा प्रोसेस मात्र एक दिन के भीतर कोषालय ट्रेजरी से राशि निकाली गई, निकायों को ट्रांसफर की गई और ग्रांट ट्रांसफर सर्टिफिकेट’ GTC तैयार कर केंद्र सरकार को भेज दिया गया. तुरंत मिली दूसरी किश्त इस त्वरित कार्रवाई और केंद्र सरकार आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय और वित्त मंत्रालय के साथ बेहतरीन समन्वय का नतीजा यह रहा कि बिना समय गंवाए 202.33 करोड़ रुपये की दूसरी किश्त भी तुरंत मंजूर हो गई. ​इस प्रकार मान उप मुख्यमत्री जी के लगातार मानिटरिंग एवम केंद्र से बेहतर समन्वय से कुल 404.66 करोड़ रुपये की राशि छत्तीसगढ़ के शहरों के लिए प्राप्त कर ली गई. इस फंड के आने से अब प्रदेश के नगरीय निकायों में विकास कार्यों, पेयजल और स्वच्छता सुविधाओं को एक नई रफ्तार मिलेगी.

छत्तीसगढ़ के नक्सल मुक्त होने की ऐतिहासिक उपलब्धि पर श्रद्धांजलि एवं दीपदान कार्यक्रम आयोजित

बिलासपुर  छत्तीसगढ़ के नक्सल मुक्त होने की ऐतिहासिक उपलब्धि के उपलक्ष्य में भारतीय जनता युवा मोर्चा, जिला बिलासपुर द्वारा सत्यम चौक स्थित शहीद विनोद चौबे जी की स्मृति में श्रद्धांजलि एवं दीपदान कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर उपस्थित जनसमूह ने शहीदों के प्रति अपनी श्रद्धा अर्पित करते हुए दीप प्रज्वलित कर उनके बलिदान को नमन किया। कार्यक्रम में बिलासपुर विधायक माननीय अमर अग्रवाल जी मुख्य रूप से उपस्थित रहे। साथ ही भाजपा जिला अध्यक्ष दीपक सिंह जी, भारतीय जनता युवा मोर्चा जिला अध्यक्ष वैभव गुप्ता जी एवं संगठन के समस्त पदाधिकारी और कार्यकर्ता बड़ी संख्या में शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने छत्तीसगढ़ को नक्सल मुक्त बनाने की दिशा में सुरक्षा बलों और शहीदों के योगदान को याद किया तथा इस उपलब्धि को प्रदेश के विकास और शांति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने युवाओं से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान भी किया। पूरे आयोजन में देशभक्ति का उत्साह और श्रद्धा का भाव देखने को मिला। दीपदान के माध्यम से उपस्थित लोगों ने शहीदों की स्मृति को चिरस्थायी बनाए रखने का संकल्प लिया। यह कार्यक्रम न केवल शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करने का माध्यम बना, बल्कि समाज में एकता, देशभक्ति और जागरूकता का संदेश भी प्रसारित करने में सफल रहा।

अब बिना अनुमति नहीं मिलेगा अवकाश: जनगणना तक लागू कड़े नियम

कोरबा. जनगणना 2027 के महत्वपूर्ण कार्य को सुचारू, व्यवस्थित और समयबद्ध तरीके से संपन्न कराने हेतु कोरबा जिला प्रशासन द्वारा विशेष – तैयारी शुरू की गई है. कलेक्टर एवं प्रमुख जनगणना अधिकारी कुणाल दुदावत के मार्गदर्शन में अपर कलेक्टर एवं जिला जनगणना अधिकारी द्वारा अभियान की गंभीरता को देखते हुए आदेश जारी कर जिले के समस्त अधिकारियों कर्मचारियों के अवकाश पर प्रतिबंध लगाया गया है. जारी निर्देशानुसार जनगणना कार्य में किसी भी प्रकार के व्यवधान को रोकने और अपरिहार्य परिस्थितियों में प्राप्त होने वाले अवकाश आवेदनों के विधिवत – निराकरण हेतु जिला स्तर पर एक – समीक्षा समिति का गठन किया गया है. यह समिति जिले के विभिन्न विभागों के अधिकारी/कर्मचारियों से प्राप्त होने वाले अवकाश आवेदनों की गहन समीक्षा करेगी और अपनी अनुशंसा के साथ प्रस्ताव अंतिम निर्णय हेतु कलेक्टर एवं प्रमुख जनगणना अधिकारी के – समक्ष प्रस्तुत करेगी. गठित समिति में तुलाराम भारद्वाज को अध्यक्ष नियुक्त किया गया है. साथ ही जिला योजना एवं सांख्यिकी अधिकारी मोहन सिंह कंवर को सदस्य सचिव तथा जिला सूचना एवं विज्ञान अधिकारी हेमंत जायसवाल को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है. उल्लेखनीय है कि जनगणना में जिले के प्रत्येक शासकीय सेवक की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है. प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि केवल विशेष और अत्यंत आवश्यक परिस्थितियों में ही समिति की अनुशंसा के आधार पर अवकाश पर विचार किया जाएगा, ताकि गणना कार्य की निरंतरता बनी रहे.

आपातकाल में अब मिलेगी तेज राहत: बस्तर को मिली 15 नई एम्बुलेंस

जगदलपुर. जगदलपुर में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए 15 नई एम्बुलेंस की सौगात दी गई है, महारानी अस्पताल से इन एम्बुलेंसों को विधिवत रवाना किया गया जिससे दूरस्थ क्षेत्रों तक त्वरित चिकित्सा सहायता पहुंच सकेगी, अब हर जिले में एडवांस लाइफ सपोर्ट एम्बुलेंस तैनात की जा रही हैं जिनमें वेंटिलेटर, कार्डियक मॉनिटर और डिफिब्रिलेटर जैसी सुविधाएं मौजूद हैं. यह गाड़ियां चलते-फिरते आईसीयू की तरह काम करेंगी, कुल 69 एम्बुलेंस के नेटवर्क से एएलएस और बीएलएस के बीच बेहतर तालमेल बनेगा, गंभीर मरीजों को मौके पर ही प्राथमिक इलाज मिलने से गोल्डन ऑवर में जान बचाना आसान होगा, इससे निजी एम्बुलेंसों की मनमानी पर भी रोक लगेगी और ग्रामीणों को आर्थिक राहत मिलेगी, जनप्रतिनिधियों और स्वास्थ्य अधिकारियों ने इसे बस्तर के लिए जीवनदायिनी पहल बताया है, यह कदम स्वास्थ्य सेवाओं में क्रांतिकारी बदलाव लाने की दिशा में अहम माना जा रहा है. 16 नई एम्बुलेंस को शामिल बिलासपुर। जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक मजबूत व प्रभावी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है. 108 एम्बुलेंस सेवा में 16 नई एम्बुलेंस को शामिल किया गया है. इन एम्बुलेंसों को बुधवार को जिला कलेक्टोरेट परिसर से विधिवत हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया. नई एम्बुलेंस के शामिल होने से जिले में आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं की पहुंच और गति दोनों में सुधार होने की उम्मीद जताई जा रही है. मौके पर ही मिलेगा उन्नत इलाज नई 16 एम्बुलेंस में से 3 एडवांस लाइफ सपोर्ट (एएलएस) प्रणाली से लैस हैं, जो किसी चलती-फिरती आईसीयू की तरह कार्य करेंगी. इनमें वेंटिलेटर, मॉनिटरिंग सिस्टम, ऑक्सीजन सपोर्ट, डिफिब्रिलेटर सहित अन्य जीवनरक्षक उपकरण उपलब्ध हैं. इससे गंभीर मरीजों को अस्पताल पहुंचने से पहले ही बेहतर प्राथमिक उपचार मिल सकेगा, जो कई मामलों में जीवनरक्षक साबित हो सकता है. बस्तर में बढ़ी सुपर स्पेशियलिटी ताकत जगदलपुर. जगदलपुर के कांटीनेंटल छत्तीसगढ़ सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल ने स्वास्थ्य सुविधाओं के क्षेत्र में नई शुरुआत करते हुए ऑर्थोपेडिक्स विभाग की पहली सर्जरी सफलतापूर्वक पूरी कर ली है, हिप जॉइंट ऑपरेशन के बाद मरीज की स्थिति में तेजी से सुधार ने यह संकेत दे दिया है कि अब बस्तर के मरीजों को बड़े शहरों की ओर भागने की जरूरत कम होगी. डॉ. पुष्पेंद्र राठौर की अगुवाई में यह उपलब्धि अस्पताल के लिए मील का पत्थर साबित हो रही है, अस्पताल में ऑर्थो, गैस्ट्रो, यूरो और न्यूरो की नियमित ओपीडी शुरू होने से मरीजों को एक ही छत के नीचे बेहतर इलाज मिल रहा है, प्रबंधन ने रियायती दरों पर सेवाएं देने की बात भी कही है जिससे आम लोगों को राहत मिलेगी, आने वाले समय में डायलिसिस सुविधा शुरू करने की तैयारी पूरी कर ली गई है. नेफ्रोलॉजी विशेषज्ञों की नियुक्ति से गंभीर मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी, यह पहल बस्तर में स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है, अब क्षेत्र में इलाज की उपलब्धता और भरोसे दोनों में इजाफा हो रहा है, जिससे स्थानीय लोगों की निर्भरता बाहर के शहरों पर कम होगी.

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में ग्रामीणों को मिला पेयजल संकट से मुक्ति

नक्सल प्रभावित सालातोंग में बहने लगी विकास की धारा मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में ग्रामीणों को मिला पेयजल संकट से मुक्ति  जल जीवन मिशन से हर घर पहुंचा नल जल नक्सल प्रभावित सालातोंग में बहने लगी विकास की धारा, क्षेत्र में बदलाव की शुरुआत रायपुर  केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना जल जीवन मिशन ने सुकमा जिले के नक्सल प्रभावित ग्राम सालातोंग में बदलाव की नई इबारत लिख दी है। 15 अगस्त 2019 को शुरू किए गए इस मिशन का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को प्रति व्यक्ति प्रतिदिन न्यूनतम 55 लीटर शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना है। कलेक्टर अमित कुमार के मार्गदर्शन में इसी लक्ष्य को साकार करते हुए नियद नेल्लानार योजना अंतर्गत कोंटा ब्लॉक के दूरस्थ ग्राम सालातोंग में अब हर घर तक नल से स्वच्छ पानी पहुंच रहा है। ग्राम सालातोंग, जो कोंटा से लगभग 100 किमी तथा जिला मुख्यालय सुकमा से 90 किमी दूर स्थित है, लंबे समय तक नक्सल समस्या और पेयजल संकट से जूझता रहा। गांव के लगभग 80 घरों के लोग पीने और घरेलू उपयोग के लिए एक छोटे नाले पर निर्भर थे। गर्मी के मौसम में जब महीनों तक बारिश नहीं होती थी, तब नाले का जलस्तर इतना घट जाता था कि ग्रामीणों को बेहद सीमित मात्रा में पानी निकालना पड़ता था। कई बार पानी के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी, जिससे बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को विशेष परेशानी होती थी। अब जल जीवन मिशन के माध्यम से गांव में 100 नल कनेक्शन प्रदान करने का लक्ष्य निर्धारित कर कार्य तेजी से किया गया, जिससे ग्रामीणों को घर बैठे शुद्ध जल उपलब्ध होने लगा है। मिशन के लागू होने के बाद गांव में न केवल जल संकट दूर हुआ, बल्कि स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता से स्वास्थ्य में भी उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। जलजनित बीमारियों में कमी आई है और ग्रामीणों की जीवनशैली में सकारात्मक परिवर्तन हुआ है। जल जीवन मिशन के तहत सालातोंग में जल संरक्षण और जल सुरक्षा को भी प्राथमिकता दी गई है। गांव के जल स्रोतों सोलर आधारित सिस्टम एवं हैंडपंप का नियमित रूप से जल गुणवत्ता परीक्षण किया जा रहा है। इस कार्य में “जल बहिनियाँ” भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं, जिनमें आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, मितानिन और गांव की शिक्षित महिलाएं शामिल हैं। इन्हें जल गुणवत्ता परीक्षण का प्रशिक्षण देकर सशक्त बनाया गया है, ताकि वे स्वयं पानी की जांच कर ग्रामीणों को सुरक्षित जल उपलब्धता सुनिश्चित कर सकें। ग्रामीणों ने इस मिशन के लिए मुख्यमंत्री और जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अब पानी के लिए भटकना नहीं पड़ता, घर में नल से पानी मिल रहा है, जिससे हमारा जीवन आसान और सुरक्षित हुआ है। जल जीवन मिशन ने सालातोंग में स्वच्छ जल पहुंचाकर यह साबित कर दिया है कि सरकार की योजनाएं जब जमीन पर उतरती हैं, तो दूरस्थ और चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में भी विकास की नई रोशनी पहुंचती है।

हिंसा को पीछे छोड़, कांकेर में नक्सल प्रभावितों को मिल रही नई दिशा और रोजगार के अवसर

हिंसा छोड़कर नई दिशा, नई राह की ओर बढ़ रहे कदम आत्मसमर्पित व नक्सल पीड़ितों को कलेक्टर ने सौंपा नियुक्ति पत्र प्रशिक्षण उपरांत रोजगार देने वाला पहला जिला बना कांकेर रायपुर  मानव समाज का सबसे उत्कृष्ट पहलू सकारात्मक परिवर्तन है, जिससे जीवन में नवाचार और नए विचार जन्म लेते हैं। ऐसा ही बदलाव आत्मसमर्पित माओवादियों के जीवन में दिखाई दे रहा है। जिला प्रशासन की पहल पर उन्हें पहले प्रशिक्षित किया गया और अब कुशल होने के बाद रोजगार भी मुहैया हो रहा है। आत्मसमर्पित माओवादियों को भानुप्रतापपुर के ग्राम मुल्ला (चौगेल) के कैम्प में विभिन्न व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में प्रशिक्षण दिया गया, जिसमें पारंगत होने के बाद प्रशासन के प्रयासों से रोजगार भी दिलाया जा रहा है। मुख्यधारा में लौटकर प्रशिक्षण के उपरांत रोजगार प्रदान करने के मामले में उत्तर बस्तर कांकेर पहला जिला है। कलेक्टर निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर और जिला पंचायत के सीईओ श्री हरेश मंडावी ने आज कलेक्टर कक्ष में आज सुबह 04 आत्मसमर्पित माओवादी व पीड़ितों को नियुक्ति पत्र सौंपा तथा उन्हें नई शुरूआत के लिए अपनी शुभकामनाएं दीं। इनमें पुनर्वासित सगनूराम आंचला एवं नक्सल पीड़ित रोशन नेताम, बीरसिंह मंडावी और संजय नेताम शामिल थे। इन सभी को निजी फर्म का नियुक्ति पत्र प्रदाय किया गया, जहां 15 हजार रूपए प्रतिमाह मानदेय और अन्य प्रकार की वित्तीय सुविधाएं प्राप्त होंगी। श्री आंचला ने बताया कि शिक्षा और सही-गलत की जानकारी के अभाव में माओवादी संगठन से जुड़ गया था। उन्हांने कहा कि मनुष्य की अहमियत मुख्यधारा में जुड़ने के बाद ही पता चली। जीवन के अलग-अलग रंगों व वास्तविक खुशियों की पहचान अब जाकर हुई। श्री आंचला ने शासन-प्रशासन का आभार मानते हुए कहा कि जीने का असली मकसद अब मिला है। इसी तरह माओवाद पीड़ित श्री बीरसिंह मंडावी ने कहा कि ग्राम मुल्ला (चौगेल) के कैम्प में पुनर्जीवन मिला है, जहां निःशुल्क प्रशिक्षण देकर उन्हें कुशल एवं पारंगत बनाया गया। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण के बाद जिला प्रशासन द्वारा रोजगार भी दिया जा रहा है। प्रदेश सरकार की पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर हिंसा का मार्ग छोड़ समाज की मुख्यधारा में लौट रहे हैं। ज्ञात हो कि प्रशिक्षण देकर उन्हें नियोजित करने के मामले में कांकेर बस्तर संभाग का पहला जिला बन गया है। यह शासन की विशिष्ट पहल है, जिसके चलते उन्हें अपनी प्रतिभा निखारने व तराशने तथा उसे नई दिशा देने की कवायद हो रही है। इस प्रकार शासन की सकारात्मक पहल का प्रत्यक्ष लाभ पुनर्वासितों व पीड़ितों को मिल रहा है।

21 जिलों के निरीक्षण में खामियां उजागर, राज्य खाद्य आयोग ने विभागों को दिए सख्त निर्देश

रायपुर छत्तीसगढ़ राज्य खाद्य आयोग के निरीक्षण में 21 जिलों में संचालित शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन में कई कमियां सामने आई हैं। इन खामियों को लेकर आयोग ने सख्ती दिखाते हुए संबंधित विभागों को त्वरित सुधार के निर्देश दिए हैं। आयोग के अध्यक्ष  संदीप शर्मा की अध्यक्षता में नवा रायपुर स्थित कार्यालय में आयोजित अंर्तविभागीय बैठक में खाद्य, महिला एवं बाल विकास, स्कूल शिक्षा और आदिम जाति एवं अनुसूचित जनजाति विभाग के अधिकारियों के साथ समीक्षा की गई। निरीक्षण में उचित मूल्य दुकानों, आंगनबाड़ी केन्द्रों, स्कूलों के मध्यान्ह भोजन और आश्रम-छात्रावासों की व्यवस्था का जायजा लिया गया था। बैठक में बालक छात्रावासों में भोजन की गुणवत्ता और सामग्री आपूर्ति में सुधार की जरूरत बताई गई, जबकि कन्या छात्रावासों की स्थिति बेहतर पाई गई। 21 जिलों से निरीक्षण संबंधी अनुशंसाओं के पालन प्रतिवेदन समय पर नहीं मिलने पर अध्यक्ष ने नाराजगी जताई और शीघ्र रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।आयोग ने निर्देश दिए कि सभी आश्रम-छात्रावासों में दैनिक भोजन मैन्यू और कॉल सेंटर नंबर स्पष्ट रूप से प्रदर्शित किए जाएं, ताकि शिकायत और सुझाव दर्ज किए जा सकें। आंगनबाड़ी केन्द्रों में बच्चों की उपस्थिति ‘पोषण ट्रैकर’ में सही दर्ज करने और आकस्मिक निरीक्षण से उसका मिलान करने को कहा गया। उचित मूल्य दुकानों में अनियमितता पर भी सख्त रुख अपनाते हुए नियमित रूप से दुकान नहीं खोलने, सूचना प्रदर्शित नहीं करने और स्टॉक में गड़बड़ी पाए जाने पर संचालकों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए गए। मध्यान्ह भोजन योजना के तहत प्रदेश में संचालित दो केंद्रीकृत किचनों की व्यवस्था संतोषजनक पाई गई। आयोग ने इन किचनों से अधिक से अधिक स्कूलों को जोड़ने की अनुशंसा की है। इसके अलावा छात्रावासों और स्कूलों में भोजन की गुणवत्ता पर नजर रखने के लिए किसी छात्र को ‘मेस प्रभारी’ बनाने का सुझाव दिया गया। साथ ही सभी संस्थानों में चावल, दाल, सब्जी और खाद्य तेल की निर्धारित मात्रा का प्रदर्शन और उसका पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। अध्यक्ष  शर्मा ने कहा कि अधिकांश जिलों में योजनाएं ठीक चल रही हैं, लेकिन जहां कमियां मिली हैं, वहां जल्द सुधार करना जरूरी है। बैठक में आयोग के सदस्य  राजेंद्र महिलांग,  कुलदीप शर्मा और सदस्य सचिव  राजीव कुमार जायसवाल सहित संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।

जगदलपुर में एथलेटिक्स में ओडिशा ने चार और झारखंड ने दो स्वर्ण जीते

रायपुर  रेस वॉकर दशरथ तलवार और मिडिल-डिस्टेंस धाविका नागिनी के स्वर्ण पदकों की बदौलत कर्नाटक ने खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स के आठवें दिन अपनी बढ़त और मजबूत कर ली। वहीं छत्तीसगढ़ के गजेंद्र ठाकुर ने पुरुष 800 मीटर में रजत पदक जीता और पुरुष हॉकी टीम ने कांस्य पदक हासिल किया। जगदलपुर के क्रीड़ा परिसर एथलेटिक्स ट्रैक पर दशरथ तलवार ने 45:13.85 के समय के साथ पुरुष 10 किमी रेस वॉक में कर्नाटक को 1-2 की बढ़त दिलाई। उनके साथी दर्शन बगाड़ी (46:25.90) दूसरे स्थान पर रहे, जबकि गुजरात के सागरभाई कटारा (48:16.09) तीसरे स्थान पर रहे। इसके बाद नागिनी ने महिलाओं की 800 मीटर दौड़ में 2:13.80 का समय निकालते हुए स्वर्ण पदक जीता, जिससे कर्नाटक के स्वर्ण पदकों की संख्या 21 हो गई। कर्नाटक ने अब तक आठ रजत और सात कांस्य सहित कुल 36 पदक जीत लिए हैं। छत्तीसगढ़ के गजेंद्र ठाकुर ने पुरुष 800 मीटर में 1:53.82 के समय के साथ रजत पदक हासिल किया। इस स्पर्धा में ओडिशा के दावनिधि मुंडा ने 1:53.33 के समय के साथ स्वर्ण जीता। अपने प्रदर्शन से खुश ठाकुर ने बताया कि उन्होंने एथलेटिक्स में प्रशिक्षण केवल एक साल पहले शुरू किया था। उन्होंने साई मीडिया से कहा, "मैं बिलासपुर के SAI ट्रेनिंग सेंटर में कबड्डी ट्रायल देने आया था, लेकिन मेरी फिटनेस देखकर कोचों ने मुझे ट्रैक इवेंट्स में जाने की सलाह दी। अपने घर में खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में पहला राष्ट्रीय स्तर का पदक जीतकर मैं बेहद खुश हूं।" इससे पहले, छत्तीसगढ़ की पुरुष हॉकी टीम ने पड़ोसी मध्य प्रदेश को 14-6 से हराकर कांस्य पदक जीता। इन दो पदकों के साथ छत्तीसगढ़ की कुल पदक संख्या दो स्वर्ण, आठ रजत और पांच कांस्य हो गई है और टीम समग्र तालिका में 10वें स्थान पर है। एथलेटिक्स प्रतियोगिताओं के सिर्फ एक दिन शेष रहने के बीच, दूसरे स्थान पर काबिज ओडिशा ने बुधवार को चार स्वर्ण पदक जीतकर अपनी चुनौती बरकरार रखी। ओडिशा के लिए दावनिधि मुंडा (पुरुष 800 मीटर), रोशन खड़िया (पुरुष 400 मीटर हर्डल्स), दीपा किसान (महिला हाई जंप) और धनमती जेस (महिला भाला फेंक) ने स्वर्ण पदक जीते। वहीं झारखंड ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए महिलाओं की 400 मीटर हर्डल्स और 10 किमी रेस वॉक में दो स्वर्ण पदक हासिल कर पदक तालिका में अपना तीसरा स्थान मजबूत किया। झारखंड के अब कुल 19 पदक हो गए हैं, जिनमें नौ स्वर्ण, तीन रजत और सात कांस्य शामिल हैं।  उधर,  रायपुर के विवेकानंद कोटा स्टेडियम में खेले गए फुटबॉल सेमीफाइनल मुकाबलों में पश्चिम बंगाल ने गोवा को 5-2 से हराकर फाइनल में जगह बनाई, जबकि छत्तीसगढ़ ने रोमांचक मुकाबले में अरुणाचल प्रदेश को 3-2 से पराजित कर खिताबी मुकाबले में प्रवेश किया।  ओडिशा के लिए दावनिधि मुंडा (पुरुष 800 मीटर), रोशन खड़िया (पुरुष 400 मीटर हर्डल्स), दीपा किसान (महिला हाई जंप) और धनमती जेस (महिला भाला फेंक) ने स्वर्ण पदक जीते। वहीं झारखंड ने भी महिलाओं की 400 मीटर हर्डल्स और 10 किमी रेस वॉक में दो स्वर्ण जीतकर पदक तालिका में अपना तीसरा स्थान मजबूत किया। झारखंड के अब कुल 19 पदक हो गए हैं, जिनमें नौ स्वर्ण, तीन रजत और सात कांस्य शामिल हैं। परिणाम एथलेटिक्स महिला वर्ग 400 मीटर हर्डल्स: शिवानी कुमार (झारखंड) 1:02.06 सेकंड; रजत – आदित्य केएम (केरल) 1:04.60 सेकंड; कांस्य – बसंती माझी (ओडिशा) 1:05.89 सेकंड 800 मीटर: स्वर्ण – नागिनी (कर्नाटक) 2:13.80 सेकंड; रजत – पूर्णिमा सांडिल (ओडिशा) 2:15.88 सेकंड; कांस्य – शांति बाई (मध्य प्रदेश) 2:19.11 सेकंड 10 किमी रेस वॉक: स्वर्ण – नेहा जालक्सो (झारखंड) 1:04:02.46; रजत – अलिश एक्का (ओडिशा) 1:04:59.12; कांस्य – बेथलीन माकरी (मेघालय) 1:05:18.62 हाई जंप: स्वर्ण – दीपा किसान (ओडिशा) 1.45 मीटर; रजत – काहिमा बसुमतारी (असम) 1.45 मीटर; कांस्य – कविता तडिंगी (ओडिशा) 1.43 मीटर भाला फेंक: स्वर्ण – धनमती जेस (ओडिशा) 44.79 मीटर; रजत – सबिता मुर्मू (झारखंड) 43.12 मीटर; कांस्य – अपिक्षा गामित (गुजरात) 41.77 मीटर पुरुष वर्ग 400 मीटर हर्डल्स: स्वर्ण – रोशन खड़िया (ओडिशा) 53.41 सेकंड; रजत – ज्ञानेश्वर वली (महाराष्ट्र) 54.02 सेकंड; कांस्य – मनीष बेदिया (झारखंड) 54.62 सेकंड 800 मीटर: स्वर्ण – दावनिधि मुंडा (ओडिशा) 1:53.33; रजत – गजेंद्र ठाकुर (छत्तीसगढ़) 1:53.82; कांस्य – राहुल उरांव (झारखंड) 1:54.32 10 किमी रेस वॉक: स्वर्ण – दशरथ तलवार (कर्नाटक) 45:13.85; रजत – दर्शन बगाड़ी (कर्नाटक) 46:25.90; कांस्य – सागरभाई कटारा (गुजरात) 48:16.09 फुटबॉल  सेमीफाइनल पुरुष : पश्चिम बंगाल ने गोवा को 5-2 से हराया, छतीसगढ़ ने अरुणाचल प्रदेश को 3-2 से हराया।