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वायरल तस्वीरों के बाद बड़ा एक्शन, IPS रतन लाल डांगी सस्पेंड

रायपुर राज्य सरकार ने पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारी आईजी IPS रतन लाल डांगी को निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई उनके आपत्तिजनक फोटो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद की गई है। इसका आदेश गृह (पुलिस) विभाग, छग शासन ने जारी किया है। प्रारंभिक तौर पर यह पाया गया है कि IPS रतन लाल डांगी ने अपने पद की गरिमा के अनुरूप आचरण नहीं किया और ऐसा व्यवहार किया जो नैतिकता और सेवा नियमों के खिलाफ है। उन पर पद के प्रभाव का दुरुपयोग करने और स्थापित सामाजिक मानकों का उल्लंघन करने के आरोप भी लगे हैं। आदेश में कहा गया है कि उनकी गतिविधियां सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से प्रसारित हुईं, जिससे पुलिस विभाग की छवि पर नकारात्मक असर पड़ा। इस आधार पर उनके खिलाफ अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियम 1968 के तहत कार्रवाई प्रस्तावित की गई है। फिलहाल IPS रतन लाल डांगी को निलंबित कर विभागीय जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। निलंबन अवधि के दौरान रतन लाल डांगी का मुख्यालय पुलिस मुख्यालय, नवा रायपुर निर्धारित किया गया है। जारी आदेश के अनुसार निलंबन अवधि में उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता प्रदान किया जाएगा। साथ ही सक्षम अधिकारी की अनुमति के बिना वे मुख्यालय नहीं छोड़ सकेंगे। शासन की इस कार्रवाई को प्रशासनिक अनुशासन बनाए रखने की दिशा में सख्त कदम माना जा रहा है।

खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026: अंजलि मुंडा बनीं पहली महिला गोल्ड मेडलिस्ट

रायपुर कभी-कभी जीवन की दिशा एक छोटे से निर्णय से बदल जाती है। ओडिशा की 15 वर्षीय अंजलि मुंडा की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। वर्ष 2022 में कक्षा में खेल चयन के दौरान उन्होंने तैराकी को चुना। एक ऐसा खेल जिसे वे उस समय सिर्फ मनोरंजन के रूप में जानती थीं। आज, वही निर्णय उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर ऐतिहासिक उपलब्धि तक ले आया है। ओडिशा के जाजपुर जिले के गहिरागड़िया गांव की रहने वाली अंजलि ने रायपुर में आयोजित खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 में 200 मीटर फ्रीस्टाइल स्पर्धा में 2:39.02 सेकंड का समय निकालकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इसके साथ ही वे इस प्रतियोगिता की पहली महिला स्वर्ण पदक विजेता बन गईं। साधारण पृष्ठभूमि से आने वाली अंजलि चार भाई-बहनों में सबसे छोटी हैं। उनके पिता एक स्थानीय फैक्ट्री में वैन चालक हैं। 10 वर्ष की आयु में वे कलिंगा इंस्टिट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज से जुड़ीं, जहां उन्हें निःशुल्क शिक्षा और प्रशिक्षण मिला। यहीं से उनके खेल करियर की नींव मजबूत हुई। शुरुआत में वे अपनी बड़ी बहन से प्रेरित थीं, जो तीरंदाजी में सक्रिय हैं, लेकिन अंजलि ने तैराकी को अपना मार्ग चुना। उनकी मेहनत जल्द ही रंग लाई और तैराकी शुरू करने के एक वर्ष के भीतर ही उन्होंने एक स्थानीय प्रतियोगिता में रजत पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। अंजलि अपनी सफलता का श्रेय अपने कोचों और खेल मंत्रालय की ‘अस्मिता लीग’ पहल को देती हैं। वर्ष 2024 में संबलपुर में आयोजित इस लीग में उन्होंने दो रजत पदक जीते थे, जिससे उनका आत्मविश्वास बढ़ा। इसके बाद गुवाहाटी में आयोजित अस्मिता स्विमिंग लीग (ईस्ट जोन) में भी उन्होंने दो रजत पदक हासिल किए। हालांकि, इस उपलब्धि के बावजूद अंजलि संतुष्ट नहीं हैं। उनका लक्ष्य अपने 2:25 के व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ समय को बेहतर करना है। लगातार यात्रा और थकान के बावजूद उन्होंने अपने प्रदर्शन से सभी को प्रभावित किया। अब अंजलि की नजर आगामी स्पर्धाओं- 50 मीटर बैकस्ट्रोक, 100 मीटर बैकस्ट्रोक और 200 मीटर इंडिविजुअल मेडली पर है, जहां वे अपने प्रदर्शन को और बेहतर करने के इरादे से उतरेंगी। अंजलि मुंडा की यह सफलता न केवल उनकी मेहनत का परिणाम है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि सही अवसर और मार्गदर्शन मिलने पर प्रतिभा किस तरह नई ऊंचाइयों को छू सकती है।

ओडिशा की अंजलि मुंडा ने महिलाओं की 200 मीटर इंडिविजुअल मेडले में एक और स्वर्ण पदक जीता

रायपुर कर्नाटक के तैराक मणिकांता एल ने शानदार प्रदर्शन जारी रखते हुए 200 मीटर इंडिविजुअल मेडले में अपना तीसरा लगातार स्वर्ण पदक जीतकर स्वर्ण पदकों की हैट्रिक पूरी की। वहीं ओडिशा की अंजलि मुंडा ने महिलाओं की स्पर्धा में अपना दूसरा स्वर्ण पदक हासिल किया। यह उपलब्धियां उन्होंने गुरुवार को यहां खेले जा रहे खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स के दूसरे दिन हासिल कीं। मेजबान छत्तीसगढ़ के लिए भी खुशी की बात रही, जहां स्थानीय तैराक अनुष्का भगत ने महिलाओं की 200 मीटर इंडिविजुअल मेडले में दूसरा स्थान हासिल कर अपना दूसरा रजत पदक जीता। खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स के इस पहले संस्करण में 30 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश हिस्सा ले रहे हैं, जिसमें लगभग 3800 खिलाड़ी नौ खेलों में प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। तीरंदाजी, एथलेटिक्स, फुटबॉल, हॉकी, तैराकी, वेटलिफ्टिंग और कुश्ती में कुल 106 स्वर्ण पदक दांव पर हैं, जबकि मल्लखंब और कबड्डी को प्रदर्शन खेल के रूप में शामिल किया गया है। मणिकांता, जिन्होंने बुधवार को 100 मीटर ब्रेस्टस्ट्रोक और 50 मीटर बटरफ्लाई में स्वर्ण पदक जीते थे, ने अपना दबदबा जारी रखते हुए 200 मीटर इंडिविजुअल मेडले 2ः25.93 सेकंड में जीत लिया। त्रिपुरा के रियाज त्रिपुरा (2ः34.04 सेकंड) ने रजत और ओडिशा के कान्हू सोरेन (2ः36.21 सेकंड) ने कांस्य पदक जीता। महिलाओं की 200 मीटर इंडिविजुअल मेडले में अंजलि मुंडा ने 2ः53.82 सेकंड के समय के साथ स्वर्ण पदक अपने नाम किया। छत्तीसगढ़ की अनुष्का भगत (2ः59.33 सेकंड) ने रजत और ओडिशा की अंजलि मलिक (3ः06.13 सेकंड) ने कांस्य पदक जीता। पदक तालिका में कर्नाटक छह स्वर्ण और दो रजत पदकों के साथ शीर्ष पर है, जबकि ओडिशा तीन स्वर्ण, एक रजत और चार कांस्य पदकों के साथ दूसरे स्थान पर है। वेटलिफ्टिंग में असम की मोनिखा सोनोवाल और मिजोरम के इसाक मालसावम्तलुआंगा ने चोट से जूझते हुए शानदार प्रदर्शन कर स्वर्ण पदक जीते। मोनिखा ने घुटने की चोट के बावजूद महिलाओं के 48 किलोग्राम वर्ग में 57 किग्रा स्नैच और 75 किग्रा क्लीन एंड जर्क के साथ कुल 132 किग्रा उठाकर स्वर्ण पदक जीता। ओडिशा की दीपा रानी मलिक (120 किग्रा) ने रजत और अंडमान-निकोबार की अलास्का अलीना (115 किग्रा) ने कांस्य पदक हासिल किया। मोनिखा, जो असम के धेमाजी जिले से हैं, ने बताया कि तीन महीने पहले अभ्यास के दौरान उनका घुटना मुड़ गया था और कोच उन्हें प्रतियोगिता से हटाने पर विचार कर रहे थे, लेकिन उन्होंने खेलने का फैसला किया। उन्नीस साल के खिलाड़ी ने कहा,” मैं इस प्रतियोगिता को मिस नहीं करना चाहती थी क्योंकि मैं राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाना चाहती थी। मुझे खुशी है कि मैं दबाव में अच्छा प्रदर्शन कर सकी।” मिजोरम के इसाक मालसावम्तलुआंगा भी पीठ की चोट से जूझ रहे थे। स्नैच में 108 किग्रा उठाने में संघर्ष के कारण वह दूसरे स्थान पर थे, लेकिन क्लीन एंड जर्क में शानदार वापसी करते हुए 130 किग्रा उठाकर कुल 235 किग्रा के साथ स्वर्ण पदक अपने नाम किया। झारखंड के बाबूलाल हेम्ब्रम (230 किग्रा) ने रजत और ओडिशा के सुब्रत नाइक (228 किग्रा) ने कांस्य पदक जीता।

बस्तर में गृहमंत्री का अचानक दौरा: रात में CRPF कैंप पहुंचे विजय शर्मा, सुरक्षा बनी चुनौती

बस्तर. छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री व गृहमंत्री विजय शर्मा ने बुधवार को बस्तर संभाग के नक्सल प्रभावित इलाकों का दौरा करते हुए एक महत्वपूर्ण संदेश दिया। वे बस्तर से दंतेवाड़ा, बारसूर और माडुम घाटी होते हुए सड़क मार्ग से रात करीब 9 बजे सातधार स्थित CRPF कैंप पहुंचे। यह वही मार्ग है, जो कभी नक्सल गतिविधियों के कारण बेहद संवेदनशील और जोखिम भरा होता था। ऐसे इलाके में गृहमंत्री का सड़क मार्ग से सफर करना सुरक्षा व्यवस्था में आए बदलाव और सरकार के बढ़ते आत्मविश्वास को दर्शाता है। बताया जा रहा है कि छत्तीसगढ़ के इतिहास में यह पहला मौका है, जब कोई गृहमंत्री इस तरह सड़क मार्ग से इन दुर्गम और पूर्व में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों से होते हुए सातधार कैंप तक पहुंचे हैं। गृहमंत्री विजय शर्मा के इस दौरे को बस्तर में शांति और विकास की दिशा में एक अहम संकेत माना जा रहा है। स्थानीय स्तर पर भी इस यात्रा को लेकर उत्साह देखा गया और इसे नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सामान्य हालात लौटने के रूप में देखा जा रहा है।

कांकेर में सुरक्षा बलों की बड़ी सफलता, 33 लाख के इनामी 6 माओवादी हथियारों समेत आत्मसमर्पण

कांकेर कांकेर जिला अंतर्गत दो दिनों में राजनांदगांव-कांकेर बॉर्डर डिवीजन के 05 माओवादी कैडर एवं मिलिट्री कंपनी-05 के 01 कैडर ने हिंसा का मार्ग त्यागकर मुख्यधारा में शामिल हुए हैं। आत्मसमर्पण करने वालों में स्वरूपा उसेंडी के ऊपर 8 लाख और शेष प्रत्येक माओवादी पर 5-5 लाख का इनाम घोषित था। कुल 33 लाख के इनामी माओवादियों ने पुलिस के सामने घुटने टेके हैं। हथियारों के साथ पहुंचे नक्सली, पुनर्वास नीति से हुए प्रभावित आत्मसमर्पित माओवादी कैडरों में एसीएम मंगेश पोडियमी, एसीएम गणेश वीके, एसीएम मंगती जुर्री, एसीएम हिडमे मरकाम उर्फ सुनीता, एसीएम राजे और पीपीसीएम स्वरूपा उसेंडी (पीएलजीए कंपनी-05) शामिल हैं। पुनर्वास हेतु आगे आए इन माओवादी कैडरों द्वारा कुल 03 हथियारों के साथ आत्मसमर्पण किया गया है, जिसमें 01 नग एसएलआर तथा 02 नग .303 राइफल शामिल हैं। पुनर्वास हेतु आगे आए माओवादी कैडरों से प्राप्त जानकारी के आधार पर इलाके में सक्रिय अन्य माओवादी कैडरों से संपर्क स्थापित कर उन्हें भी मुख्यधारा में शामिल कराने के प्रयास जारी हैं। बस्तर आईजी की अपील, मुख्यधारा में लौटें शेष बचे माओवादी वे सभी 06 माओवादी कैडर जिन्होंने पुनर्वास का मार्ग चुना है, उनके सामाजिक मुख्यधारा में पुनः एकीकरण तथा हथियारों की औपचारिक सुपुर्दगी आदि की कार्रवाई संपूर्ण प्रक्रिया पूर्ण होने के पश्चात आयोजित की जाएगी। पुलिस महानिरीक्षक, बस्तर रेंज सुंदरराज पट्टलिंगम ने एक बार फिर शेष बचे कुछ माओवादी कैडरों से हिंसा त्यागकर मुख्यधारा में शामिल होने की अपील दोहराई। उन्होंने कहा कि जो कैडर शांतिपूर्ण एवं सम्मानजनक जीवन जीने के लिए आगे आएंगे, उन्हें पुनर्वास नीति के अंतर्गत सभी प्रकार की सहायता प्रदान की जाएगी। यह उल्लेखनीय है कि सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर पिछले 26 महीनों में 2700 से अधिक माओवादी कैडर मुख्यधारा में शामिल हो चुके हैं।

महाअष्टमी विशेष: बंजारी मंदिर में नाग-नागिन के दर्शन की मान्यता, भक्तों का लगा तांता

रायपुर. नवरात्रि के आठवें दिन महाअष्टमी के अवसर पर राजधानी रायपुर के देवी मंदिरों में भक्तिमय माहौल देखने को मिल रहा है। आज मां महागौरी की पूजा की जा रही है और शहर के तमाम मंदिरों में विशेष धार्मिक आयोजन हो रहे हैं। अष्टमी के मौके पर रायपुर के विभिन्न देवी मंदिरों में सुबह से ही हवन, पूजन और आरती का दौर जारी है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए मंदिरों में पहुंच रहे हैं, जिससे हर जगह आस्था का सैलाब नजर आ रहा है। बंजारी मंदिर में उमड़ा जनसैलाब रावांभाठा स्थित बंजारी माता मंदिर में भी सुबह से ही भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिली। श्रद्धालु माता के दर्शन कर सुख-समृद्धि की कामना कर रहे हैं। बंजारी माता मंदिर को लेकर मान्यता है कि इसे बंजारा समाज द्वारा खोजा गया था, जिसके कारण इसका नाम बंजारी माता मंदिर पड़ा। मंदिर के गर्भगृह में स्थापित प्रतिमा को लेकर कहा जाता है कि यह मां बगलामुखी की मूर्ति है, जो पास के जंगल से प्राप्त हुई थी। नाग-नागिन की अनोखी मान्यता मां बंजारी मंदिर से जुड़ी एक खास मान्यता भी प्रचलित है। बताया जाता है कि यहां दर्शन के लिए नाग-नागिन के जोड़े आते हैं। पुजारियों के अनुसार पहले एक जोड़ा देखा जाता था, लेकिन अब समय के साथ कई जोड़े यहां नजर आने लगे हैं।

युवा उद्यमिता को मिल रही नई उड़ान, योगी सरकार के विजन को लखीमपुर के अब्दुल ने किया साकार

लखनऊ उत्तर प्रदेश में योगी सरकार द्वारा चलाई जा रहीं महत्वकांक्षी योजनाएं आज युवाओं के लिए उम्मीद की किरण बन चुकीं हैं। सरकारी योजनाओं के माध्यम से प्रदेश के युवाओं को न केवल आर्थिक सहायता मिल रही है, बल्कि आत्मविश्वास और आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा भी मिल रही है। लखीमपुर खीरी के ग्राम श्रीनगर के रहने वाले अब्दुल माबूद ने योगी सरकार के विजन को धरातल पर उतारा है।  अब्दुल माबूद ने अपनी मेहनत और सरकारी योजना के माध्यम से रेडीमेड गारमेंट का सफल व्यवसाय खड़ा किया है। उन्होंने साल 2021 में उत्तर प्रदेश खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड के माध्यम से ‘प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम योजना’ के तहत 10 लाख रुपये के ऋण के लिए आवेदन किया था। जिसके बाद सरकारी योजना से मिली वित्तीय सहायता ने उनके सपनों को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस आर्थिक सहायता से उन्होंने आधुनिक मशीनें खरीदीं और अपने छोटे से काम को एक संगठित उद्योग का रूप दे दिया। उनके यूनिट में हर महीने करीब 5 से 6 हजार लोअर (ट्रैक पैंट) बनते हैं। अब्दुल माबूद का यह उद्यम केवल उनके लिए कमाई का साधन ही नहीं, बल्कि आसपास के लोगों के लिए भी रोजगार का साधन बना है। इस उद्योग से न सिर्फ 24 लोगों को रोजगार मिला, उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति भी मजबूत हुई है। लागत और खर्चों के बाद अब्दुल की शुद्ध मासिक आय 50 हजार रुपये से अधिक है। योजना का लाभ लेने के लिए ऑनलाइन आवेदन उत्तर प्रदेश में खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के माध्यम से ‘प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम योजना’ का लाभ लेने के लिए ऑनलाइन आवेदन करना होता है। यह प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी है। ‘प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम योजना’ का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में नए सूक्ष्म उद्यमों की स्थापना के माध्यम से रोजगार के अवसर पैदा करना है। पारंपरिक कारीगरों और बेरोजगार युवाओं को सूक्ष्म उद्यम स्थापित करने के लिए बैंक ऋण के साथ मार्जिन मनी सब्सिडी प्रदान करना है। इच्छुक युवा पूर्ण जानकारी प्राप्त करके आधिकारिक पोर्टल KVIC PMEGP e-Portal के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

चैनपुर में ऐतिहासिक भूमि पूजन, जनभागीदारी के साथ विकास का नया अध्याय शुरू

मनेन्द्रगढ़/एमसीबी जिले के विकास इतिहास में एक नया स्वर्णिम अध्याय उस समय जुड़ गया, जब चैनपुर में 3 करोड़ 1 लाख 32 हजार रुपये की लागत से बनने वाले अत्याधुनिक जिला पंचायत भवन का भव्य भूमि पूजन समारोह उत्साह, श्रद्धा और गरिमा के साथ संपन्न हुआ। वैदिक मंत्रोच्चार और विधि-विधान के साथ आयोजित इस कार्यक्रम में प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने मुख्य अतिथि के रूप में भूमि पूजन कर इस महत्वपूर्ण परियोजना की नींव रखी। इस अवसर पर जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और बड़ी संख्या में आम नागरिकों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को जनभागीदारी का सशक्त उदाहरण बना दिया। भूमि पूजन के बाद राष्ट्र के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए राष्ट्रीय गीत का सामूहिक गायन और छत्तीसगढ़ राज्य गीत की भावपूर्ण प्रस्तुति दी गई। जनप्रतिनिधियों की गरिमामयी उपस्थिति कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष मती यशवंती सिंह, जिला अध्यक्ष चंपादेवी पावले, नगर पालिका अध्यक्ष प्रतिमा सरजू यादव, उपाध्यक्ष धर्मेन्द्र पटवा सहित कई जनप्रतिनिधि मंच पर मौजूद रहे। सभी अतिथियों का पुष्पगुच्छ भेंट कर आत्मीय स्वागत किया गया। प्रशासनिक मजबूती का बनेगा केंद्र एसडीएम लिंगराज सिदार ने इसे जिले के लिए गौरवपूर्ण दिन बताते हुए कहा कि 301.32 लाख रुपये की लागत से बनने वाला यह भवन प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करेगा और विकास कार्यों को नई गति देगा। विकास योजनाओं की विस्तृत झलक मुख्य अतिथि श्याम बिहारी जायसवाल ने अपने संबोधन में कहा कि लंबे समय से जिला पंचायत भवन की आवश्यकता महसूस की जा रही थी, जिसे आज साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। उन्होंने कहा कि यह भवन प्रशासनिक कार्यों को पारदर्शी और प्रभावी बनाएगा। उन्होंने छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के समय अटल बिहारी वाजपेयी के सपनों को याद करते हुए कहा कि एमसीबी जिला प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध है और यहां अपार विकास संभावनाएं हैं। कृषि, रोजगार और बुनियादी ढांचे पर फोकस केवई नदी से 50 हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा केल्हारी से कठौतिया तक डबल लाइन सड़क निर्माण प्रस्ताव स्वीकृत ‘वीबी रामजी’ योजना के तहत 125 दिनों का रोजगार समय पर भुगतान न होने पर ब्याज सहित राशि देने का प्रावधान गरीबों और किसानों के लिए बड़ी घोषणाएं 18 लाख प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत। हर घर में शौचालय सुविधा सुनिश्चित। दो वर्षों में कच्चे मकानों को पक्के मकानों में बदलने का लक्ष्य। कोदो, कुटकी और रागी जैसे मोटे अनाजों को बढ़ावा शिक्षा और स्वास्थ्य में विस्तार चिरमिरी में हॉर्टिकल्चर और पॉलीटेक्निक कॉलेज नर्सिंग कॉलेज की स्थापना मनेंद्रगढ़ में 220 बिस्तरों वाले अस्पताल की स्वीकृति नेतृत्व की सराहना और भविष्य की उम्मीदें जिला अध्यक्ष चंपादेवी पावले ने इसे ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए कहा कि इस भवन के निर्माण से जनसेवा और योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी। उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि उनकी नीतियों से गांव-गांव तक विकास पहुंच रहा है। कुल मिलाकर, चैनपुर में बनने वाला यह जिला पंचायत भवन न केवल प्रशासनिक ढांचे को मजबूती देगा, बल्कि ग्रामीण विकास, जनसेवा और पारदर्शिता की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा।

गोवा के मंत्री रमेश तावड़कर ने CM साय से की सौजन्य भेंट, जनजातीय कल्याण और खेल विकास पर चर्चा

CM साय से गोवा के मंत्री रमेश तावड़कर की सौजन्य भेंट: जनजातीय कल्याण और खेल विकास को लेकर हुई सार्थक चर्चा रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में गोवा के खेल एवं युवा मामले तथा जनजातीय कल्याण मंत्री रमेश तावड़कर ने सौजन्य मुलाकात की। मुख्यमंत्री साय ने छत्तीसगढ़ प्रवास पर आए तावड़कर का आत्मीय स्वागत करते हुए उन्हें बस्तर आर्ट का प्रतीक चिन्ह एवं जशपुर के स्थानीय उत्पाद भेंट किए। मुख्यमंत्री साय ने तावड़कर से जनजातीय कल्याण और खेलों के विकास से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार खेलों को प्रोत्साहन देने के लिए निरंतर प्रयासरत है और राज्य में आधुनिक खेल अधोसंरचना विकसित कर प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को आगे बढ़ने का अवसर प्रदान किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि देश के प्रथम ‘खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स’ का आयोजन छत्तीसगढ़ में होना राज्य के लिए गौरव का विषय है। यह आयोजन न केवल जनजातीय प्रतिभाओं को राष्ट्रीय मंच प्रदान करेगा, बल्कि उनकी सांस्कृतिक पहचान और आत्मविश्वास को भी नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा। उल्लेखनीय है कि रमेश तावड़कर के नेतृत्व में गोवा सरकार का प्रतिनिधिमंडल ‘खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स’ में सहभागिता हेतु छत्तीसगढ़ प्रवास पर है। यह प्रतिनिधिमंडल खेल आयोजन में भागीदारी के साथ-साथ छत्तीसगढ़ मुक्तांगन, आदिवासी संग्रहालय सहित राज्य की समृद्ध जनजातीय संस्कृति और विरासत से जुड़े विभिन्न स्थलों का अवलोकन भी करेगा।

पुनर्वासित युवाओं के प्रशिक्षण का किया अवलोकन, वेलकम एवं इलेक्ट्रिकल टूल किट का किया वितरण

रायपुर उपमुख्यमंत्री  विजय शर्मा ने पुनर्वास केंद्र दंतेवाड़ा में युवाओं से की मुलाकात उपमुख्यमंत्री  विजय शर्मा ने गुरुवार को दंतेवाड़ा स्थित पुनर्वास केंद्र का निरीक्षण कर पुनर्वासित युवाओं से आत्मीय संवाद किया। इस दौरान उन्होंने युवाओं को इलेक्ट्रिकल टूल किट एवं वेलकम किट का वितरण किया। नवरात्रि के अंतिम दिन उपमुख्यमंत्री  शर्मा ने दंतेवाड़ा पहुंचकर उन्होंने माँ दंतेश्वरी मंदिर में पूजा-अर्चना कर प्रदेश की खुशहाली की कामना की।          इसके पश्चात वे पुनर्वास केंद्र पहुंचे, जहां उन्होंने वहां प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे युवाओं से चर्चा की और उनकी आवश्यकताओं एवं भविष्य की योजनाओं की जानकारी ली। युवाओं ने बताया कि प्रशिक्षण के बाद वे अपने गृह ग्राम लौटकर खेती-किसानी करना चाहते हैं। इस पर  शर्मा ने आश्वस्त किया कि इच्छुक युवाओं को कृषि संबंधी प्रशिक्षण भी उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे वे आत्मनिर्भर बन सकें।          उपमुख्यमंत्री ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि पुनर्वास नीति का उद्देश्य उन्हें मुख्यधारा से जोड़कर सम्मानजनक जीवन प्रदान करना है। उन्होंने युवाओं से अपने अन्य साथियों को भी पुनर्वास के लिए प्रेरित करने का आह्वान किया, ताकि वे भी समाज की मुख्यधारा में शामिल होकर उज्ज्वल भविष्य बना सकें। उन्होंने पुनर्वास केंद्र में उपलब्ध सुविधाओं, भोजन व्यवस्था एवं प्रशिक्षण गतिविधियों की समीक्षा की। युवाओं द्वारा स्वयं भोजन बनाने की इच्छा जताने पर उन्होंने अनुमति प्रदान करते हुए कहा कि इच्छुक युवा स्वेच्छा से भोजन बना सकते हैं।             शर्मा ने निर्देश दिए कि सभी पुनर्वासित युवाओं को ड्राइविंग प्रशिक्षण दिया जाए तथा केंद्र से बाहर जाने से पूर्व उनके ड्राइविंग लाइसेंस बनाना भी सुनिश्चित किए जाएं। उपमुख्यमंत्री उनसे अपील की कि यदि उनके परिजन या पहचान के लोग जेल में निरुद्ध हैं तो वे उनसे मिल सकते हैं या वे पुनर्वास केंद्र में आकर साथियों से मुलाकात कर सकते हैं और यदि वे जेल से पुनर्वास करना चाहें तो भी शासन उनकी हर संभव मदद कर जेल से पुर्नवास कराने को तैयार है।         उल्लेखनीय है कि वर्तमान में केंद्र में कुल 107 युवा प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं, जिनमें 60 बीजापुर एवं 47 दंतेवाड़ा जिले के हैं। यहां इलेक्ट्रिकल, वेल्डिंग, प्लंबिंग, सिलाई और ड्राइविंग जैसे रोजगारपरक प्रशिक्षण प्रदान किए जा रहे हैं। अब तक 7 युवाओं को ड्राइविंग के क्षेत्र में रोजगार उपलब्ध कराया जा चुका है तथा 75 युवाओं को सिलाई मशीन का वितरण किया गया है।        सीआरपीएफ के जवानों का उपमुख्यमंत्री ने किया प्रोत्साहन         गुरुवार को उपमुख्यमंत्री  शर्मा बस्तर से कभी अति संवेदनशील क्षेत्र माने जाने वाले मारडूम घाटी मार्ग से होते हुए चित्रकूट, लोहंडीगुड़ा और बारसूर के रास्ते दंतेवाड़ा पहुंचे थे। इसके माध्यम से उन्होंने लोगों को संदेश दिया कि कभी दुर्गम माने जाने वाले मार्ग भी अब सुगम हो गए हैं। अब लोग बिना किसी भय के रात हो या दिन निर्भय होकर इन पर सफर कर सकते हैं। उन्होंने दंतेवाड़ा स्थित सीआरपीएफ बटालियन कैंप पहुंच, जवानों से मुलाकात कर उनका उत्साहवर्धन किया तथा क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि हमारे सैन्य बलों के शौर्य का ही परिणाम है कि आज बस्तर संभाग में अब तक लोगों की नजरों से छुपे हुए नए नए पर्यटन केंद्रों में पहुंच कर लोग बस्तर के प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद ले रहे हैं और स्थानीय लोगों को इससे रोजगार भी प्राप्त हो रहा है।