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गैस माफिया पर शिकंजा: दुर्ग में 599 सिलेंडर जब्त, खाद्य विभाग की बड़ी कार्रवाई

दुर्ग. घरेलू गैस सिलेंडरों की आपूर्ति एवं वितरण को निर्बाध रूप से बनाये रखने के लिए जिले में निरंतर छापेमारी की कार्रवाई की जा रही है. जांच के क्रम में ग्राम पंचायत रसमड़ा के बोरई इंडस्ट्रीयल ग्रोथ सेंटर में स्थित पापुशा गैसेस प्रा. लि. की आकस्मिक जांच जिला खाद्य कार्यालय के अधिकारियों द्वारा की गई. उक्त सेंटर में कान्फिडेंस पेट्रोलियम इंडिया लिमिटेड द्वारा 2 विभिन्न ब्रांडों गो गैस एवं गैस प्वाइंट के नाम से गैस सिलेंडरों की सप्लाई डीलर के माध्यम से उपभोक्ताओं को की जाती है. सार्वजनिक वितरण प्रणाली से भिन्न समानांतर विपणन प्रणाली के रूप में पापुशा गैसेस प्रा. लि. तथा कान्फिडेंस पेट्रोलियम इंडिया लिमिटेड द्वारा कार्य किया जाना पाया गया. खाद्य नियंत्रक अनुराग भदौरिया से मिली जानकारी अनुसार फर्म की जांच में कुल 599 गैस सिलेंडर पाए गए. गैस सिलेंडरों में रिफिलिंग के लिए 03 बुलेट भी पाए गए, जिसमें 2841 कि.ग्रा. एलपीजी भंडारित होना पाया गया. जांच के समय फर्म में विभिन्न सिलेंडरों में पेंटिंग का काम किया जा रहा था तथा सिलेंडरों के नेट वेट, टेयर वेट तथा सिलेंडरों की एक्सपायरी डेट अंकित की जा रही थी. मांगे जाने पर उक्त कार्य से संबंधित कोई भी दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया गया. फर्म द्वारा प्रस्तुत स्टाक पंजी तथा भौतिक सत्यापन में अंतर पाया गया. फर्म के मैनेजर द्वारा जानकारी दी गई कि अतुल रबर को डीलर के रूप में उनके द्वारा सप्लाई की जाती है किन्तु उक्त डीलर वैधता अथवा करार किये जाने आदि के संबंध में कोई भी दस्तावेज नहीं दिया गया. इस प्रकार उक्त फर्म का समानांतर विपणनकर्ता के रूप में कार्य करना पाया गया किन्तु फर्म द्वारा इस संबंध में कोई जानकारी नहीं दी गई और न ही रेटिंग प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया गया. फर्म द्वारा कलेक्टर दुर्ग को किसी प्रकार की जानकारी नही दी जा रही है. इस प्रकार पापुशा गैस प्रा.लि. रसमड़ा तथा कान्फिडेंस पेट्रोलियम इंडिया लिमिटेड द्वारा द्रवीकृत पेट्रोलियम गैस (प्रदाय और वितरण विनियमन) आदेश 2000 की विभिन्न कंडिकाओं जैसे- एलपीजी के विक्रय का अप्राधिकृत कारोबार करने, द्रवीकृत पेट्रोलियम गैस उपस्करों के कब्जा, कार्यस्थल पर स्टाक और कीमत को प्रदर्शित नही करने, रजिस्टर का सही लेखा नहीं रखने, रेटिंग प्रमाण पत्र प्रस्तुत नही करना आदि का उल्लंघन पाये जाने पर 599 नग गैस सिलेंडर तथा 2841 किग्रा एलपीजी जब्त किया गया.

नवीन हॉस्टल भवन निर्माण एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के विकास संबंधित अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई

राज्य पिछड़ा वर्ग कल्याण के लिए प्रदेश में होगा अलग से संचालनालय का गठन नवीन हॉस्टल भवन निर्माण एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के विकास संबंधित अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की अध्यक्षता में राज्य पिछड़ा वर्ग सलाहकार परिषद की बैठक संपन्न रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की अध्यक्षता में  विधानसभा स्थित समिति कक्ष में राज्य पिछड़ा वर्ग सलाहकार परिषद की बैठक संपन्न हुई। बैठक में राज्य पिछड़ा वर्ग कल्याण के लिए प्रदेश में अलग से संचालनालय गठन,नवीन हॉस्टल भवन निर्माण एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के विकास संबंधित अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। मुख्यमंत्री  साय ने कहा हमारी सरकार पिछड़ा वर्ग समाज के विकास लिए प्रतिबद्ध है। हम उनकी चिंता कर नये विकास का कार्य कर रही है। राज्य में अन्य पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक वर्ग की बड़ी संख्या निवास करती है, जिनमें  लगभग 95 जातियां एवं उनके उपसमूह निवासरत है। हमारी सरकार अन्य पिछड़ा वर्ग के शैक्षणिक एवं सामाजिक आर्थिक विकास की चुनौतियों के प्रति संवेदनशील है।  हमारी सरकार समाज के महत्वपूर्ण किन्तु विकास में पीछे रह गये इन वर्गों के सामाजिक सांस्कृतिक विरासत का सम्मान करते हुए उनके सर्वांगीण विकास पर विशेष बल देते हुए समग्र विकास के लिए कृत संकल्पित है। संकल्प को पूर्ण करने हेतु हमारी सरकार ने पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक विकास विभाग,मंत्रालय गठित किया है, जिससे इन वर्गों के विकास के लिए गति प्रदान की जा सके तथा इनके लिए नवाचार योजनाओं को लागू किया जा सके। इसके अतिरिक्त इन वर्गों के समस्याओं पर सम्यक रुप से विचार कर समस्या का समाधान किया जा सके, जिससे यह समाज भी विकास की मुख्य धारा में शामिल हो सके।  पिछड़ा वर्ग के विकास हेतु अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन किया गया है तथा पिछड़ा वर्ग कल्याण आयोग भी गठित किया गया है। इसके लिए लौहशिल्प विकास बोर्ड, रजककार विकास बोर्ड तथा तेलघानी विकास बोर्ड भी गठित किया गया है। इन उद्देश्यों की पूर्ति हेतु विभाग ने नवीन मुख्य बजट में इन वर्गों के शैक्षणिक विकास हेतु छात्रावास, आश्रम, प्रयास आवासीय विद्यालय संस्थान स्थापित किये गये है। इसके अतिरिक्त पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति को ऑनलाईन पोर्टल के माध्यम से छात्रवृत्ति विद्यार्थी के खाते में सीधे भुगतान किया जा रहा है। इस हेतु रुपये 150 करोड़ का प्रावधान किया गया है। भुगतान की व्यवस्था को समय-सीमा में पूर्ण करने हेतु नवाचार करते हुए निरंतर मॉनिटरिंग के माध्यम से छात्रवृत्ति की स्वीकृति एवं भुगतान चालू वर्ष में ही किये जाने की व्यवस्था की गई है। प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए विद्यार्थियों के प्रशिक्षण हेतु आर्थिक सहायता की योजना मुख्य बजट में लाई गई है, जिसके माध्यम से इंजीनियरिंग, मेडिकल, यूपीएससी, सीजीपीएससी, एसएससी, रेल्वे, बैंकिंग आदि का प्रशिक्षण प्रदान किया जायेगा। इसके साथ ही विद्यार्थियों के छ.ग. राज्य के भौगोलिक एवं प्राकृतिक संरचनाओं के अध्ययन तथा सांस्कृतिक धरोहरों के संबंध में अभिरुचि के विकास हेतु शैक्षणिक भ्रमण के लिए प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि हमने मुख्य बजट में नवीन योजना मुख्यमंत्री शिक्षा सहयोग योजना लाई गई है, जिसके माध्यम से जिन विद्यार्थियों को छात्रावास में प्रवेश नहीं मिल पाता है, उनको अध्ययन के लिए आर्थिक सहायता प्रदान की जायेगी। अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए वर्तमान में 55 विभागीय छात्रावास स्वीकृत है। वर्तमान में नवीन बजट में 06 जिलों (रायगढ़, मनेंद्रगढ़-चिरमिरी भरतपुर, धमतरी, रायपुर, जशपुर) में अन्य पिछड़ा वर्ग पो. मैट्रिक छात्रावास स्वीकृत किये गये है। इस दौरान राज्य पिछड़ा वर्ग सलाहकार परिषद के अन्य सदस्यों ने महत्वपूर्ण सुझाव दिए। उक्त बैठक में उपमुख्यमंत्री  अरुण साव, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक विकास मंत्री  श्याम बिहारी जायसवाल,राजस्व मंत्री  टंक राम वर्मा, महिला एवं बाल विकास मंत्री मती लक्ष्मी रजवाड़े, स्कूल शिक्षा मंत्री  गजेंद्र यादव, वित्त मंत्री  ओपी चौधरी, मुख्य सचिव  विकासशील,मुख्यमंत्री के प्रमुख  सचिव  सुबोध सिंह सहित अन्य जनप्रतिनिधि गण एवं अधिकारीगण बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

CM साय का नववर्ष और नव संकल्प का संदेश, चैत्र नवरात्रि और गुड़ी पड़वा पर दी शुभकामनाएं

नववर्ष, नव ऊर्जा और नव संकल्प का संदेश: मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने दी चैत्र नवरात्रि, नव संवत्सर और गुड़ी पड़वा की शुभकामनाएं रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने प्रदेशवासियों को चैत्र नवरात्रि, हिंदू नववर्ष (नव संवत्सर) एवं गुड़ी पड़वा के पावन अवसर पर हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई दी है। उन्होंने इस मंगल अवसर पर प्रदेश के प्रत्येक नागरिक के जीवन में सुख, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और शांति की कामना की है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि चैत्र मास के प्रथम दिन से प्रारंभ होने वाला हिंदू नववर्ष नव ऊर्जा, नव संकल्प और नव चेतना का प्रतीक है। इसी पावन अवसर से शक्ति उपासना के महापर्व चैत्र नवरात्रि का भी शुभारंभ होता है, जो श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक आस्था के साथ पूरे देश में मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि गुड़ी पड़वा विशेष रूप से महाराष्ट्र सहित देश के विभिन्न हिस्सों में नववर्ष के स्वागत का उत्सव है, जो आशा, उत्साह और समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं का प्रतीक है। यह पर्व समाज में सकारात्मक ऊर्जा, नव शुरुआत और उत्सवधर्मिता का संदेश देता है। मुख्यमंत्री  साय ने छत्तीसगढ़ की समृद्ध देवी परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि मां शीतला, मां दंतेश्वरी, महामाया, बम्लेश्वरी, कंकाली, बिलईमाता और चंद्रहासिनी देवी जैसे विविध स्वरूपों में प्रदेश की आस्था और संस्कृति गहराई से रची-बसी है। यह आध्यात्मिक विरासत प्रदेश की पहचान को सशक्त बनाती है। उन्होंने कहा कि नवरात्रि के इन पावन दिनों में छत्तीसगढ़ की धरती भक्ति, साधना और शक्ति आराधना से आलोकित हो उठती है। देवी उपासना केवल आध्यात्मिक ऊर्जा ही नहीं देती, बल्कि सामाजिक समरसता, सकारात्मक सोच और आंतरिक चेतना का भी संचार करती है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि सुशासन सरकार प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को सहेजते हुए विकास और विश्वास के नए आयाम स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने मां भगवती से प्रार्थना करते हुए कहा कि उनकी कृपा से छत्तीसगढ़ निरंतर विकास के पथ पर अग्रसर रहे और प्रदेश के प्रत्येक परिवार में सुख, शांति और समृद्धि का वास बना रहे।

बस्तर में साक्षरता महापर्व, 22 मार्च को नव-साक्षर करेंगे उल्लास महापरीक्षा में भागीदारी

बस्तर में साक्षरता का महापर्व : 22 मार्च को उल्लास महापरीक्षा में अपना हुनर दिखाएंगे नव-साक्षर जगदलपुर बस्तर जिले में शिक्षा और ज्ञान की अलख जगाने के लिए जिला प्रशासन ने तैयारी कर ली है। इसी कड़ी में रविवार 22 मार्च को जिले भर में उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम के अंतर्गत महापरीक्षा का भव्य आयोजन होने जा रहा है। इस महत्वपूर्ण अवसर को लेकर कलेक्टर श्री आकाश छिकारा ने जिले के जन-जन से जुड़ने और इस अभियान को सफल बनाने की पुरजोर अपील की है। उन्होंने कहा कि यह परीक्षा उन बुजुर्गों और युवाओं के लिए स्वावलंबन की एक नई शुरुआत है, जो किसी कारणवश अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूरी नहीं कर पाए थे।     कलेक्टर श्री छिकारा ने जिले के सभी विकासखंडों और ग्रामीण क्षेत्रों में सक्रिय साक्षरता केंद्रों के माध्यम से अधिक से अधिक नव-साक्षरों को इस महापरीक्षा में शामिल करने पर जोर दिया है। उन्होंने मैदानी स्तर पर कार्यरत शिक्षकों, प्रेरकों और स्वयंसेवकों को निर्देशित किया है कि वे घर-घर जाकर परीक्षा के प्रति उत्साह का माहौल बनाएं, ताकि कोई भी नव-साक्षर इस अवसर से वंचित न रह जाए। कलेक्टर का मानना है कि जब जिले का हर नागरिक पढ़ना-लिखना और बुनियादी गणना करना सीख जाएगा, तभी बस्तर विकास की मुख्यधारा में मजबूती से खड़ा हो सकेगा। इस महापरीक्षा की तैयारियों को लेकर जिला प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है। परीक्षा केंद्रों का निर्धारण इस प्रकार किया गया है कि सुदूर वनांचलों में रहने वाले प्रतिभागियों को भी परीक्षा देने में कोई असुविधा न हो। आगामी 22 मार्च को होने वाले इस मूल्यांकन में प्रतिभागियों की पढ़ने, लिखने और साधारण अंकगणित की क्षमता को परखा जाएगा, जिसके बाद सफल उम्मीदवारों को बुनियादी साक्षरता का प्रमाण पत्र प्रदान किया जाएगा। यह प्रमाण पत्र न केवल उनकी शैक्षणिक योग्यता का प्रतीक होगा, बल्कि उनके भीतर एक नया आत्मविश्वास भी पैदा करेगा। कलेक्टर ने जिले के प्रबुद्ध नागरिकों से भी आग्रह किया है कि वे अपने आसपास के नव-साक्षरों को प्रोत्साहित कर परीक्षा केंद्र तक लाने में अपनी सहभागिता निभाएं, ताकि बस्तर जिले को पूर्ण साक्षर बनाने का सपना साकार हो सके।

मुख्यमंत्री ने ‘मोदी के राज्य से लौटकर’ पुस्तक का किया विमोचन

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने आज यहां छत्तीसगढ़ विधानसभा स्थित अपने कार्यालय के सभा कक्ष में युवा पत्रकार सु निशा द्विवेदी की पुस्तक 'मोदी के राज्य से लौटकर' का विमोचन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि यात्रा वृत्तांत से पाठकों के लिए इतिहास और संस्कृति की तस्वीर सजीव हो जाती है। पुस्तक में सु निशा द्विवेदी ने एक पत्रकार की नजर से गुजरात यात्रा का वर्णन किया है जो बहुत सराहनीय है।  मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि जनसेवा के क्षेत्र में कार्य कर रहे नेतागण और लोकतंत्र के चौथे स्तंभ हमारे पत्रकार साथियों के जीवन में यह एक समानता है कि दोनों ही अपने कार्यक्षेत्र में हमेशा व्यस्त रहते हैं। सक्रिय पत्रकारिता के बीच यात्रा वृत्तांत जैसी रचना के लिए समय निकाल पाना जरूर कठिन रहा होगा। ये बहुत सुखद है कि सु द्विवेदी ने अध्ययन भ्रमण के अनुभवों को किताब के रूप में हम सभी के सामने लेकर आई हैं।  मुख्यमंत्री ने कहा कि विगत वर्ष अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर पत्रकार बहनों से मिलना हुआ था। मुलाकात में महिला पत्रकारों के अध्ययन भ्रमण के विषय में भी चर्चा हुई। ये बहुत खुशी की बात है कि पहली बार छत्तीसगढ़ की 26 महिला पत्रकारों का दल गुजरात राज्य के भ्रमण पर गया। भ्रमण से लौटने के बाद मैंने मुख्यमंत्री निवास में पत्रकार बहनों से मुलाकात की। उसी समय मैंने उन्हें यह सुझाव दिया था कि वे अपनी यात्रा के अनुभवों को जरूर लिखें।  मुख्यमंत्री  साय ने कहा इस वर्ष के बजट में भी हमने पत्रकारों के एक्सपोजर विजिट का प्रावधान किया है। हमारे पत्रकार साथी बड़े परिश्रम से सामाजिक सरोकार का कार्य करते हैं। हमारी सरकार हर स्तर पर पत्रकार साथियों को प्रोत्साहित कर रही है। अभी तक पत्रकारों के विविध दल महाराष्ट्र, तमिलनाडु, केरल, गुजरात, राजस्थान जैसे अनेक राज्यों में हुए हैं।  मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि गुजरात भ्रमण का उद्देश्य महिला पत्रकारों को विकास के मॉडल को देखने, समझने और उससे सीखने का अवसर देना था। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी इच्छा थी कि इस यात्रा को कोई महिला पत्रकार पुस्तक के रूप में लिखे, और यह पुस्तक उसी भावना का परिणाम है। इस अवसर पर महिला एवं बाल विकास मंत्री मती लक्ष्मी राजवाड़े, विधायक  सुशांत शुक्ला, मुख्यमंत्री के सचिव  राहुल भगत, जनसंपर्क आयुक्त डॉ रवि मित्तल, रायपुर प्रेस क्लब के अध्यक्ष  मोहन तिवारी सहित अनेक पत्रकारगण उपस्थित रहे।

पर्यटन नक्शे पर उभरेगा धमनी गांव, ईको-टूरिज्म का बन रहा नया केंद्र

रायपुर शुरू हुई नौकाविहार सुविधा प्रकृति के करीब, पर्यावरण को नुकसान पहुँचाए बिना और स्थानीय संस्कृति व वन्यजीवों का सम्मान करते हुए की जाने वाली यात्रा है। इसका मुख्य उद्देश्य वन एवं वन्यजीव का संरक्षण, शिक्षा और स्थानीय समुदायों को लाभ पहुँचाना ही ईको-पर्यटन है। बलौदाबाजार वनमण्डल के अंतर्गत महानदी के तट पर स्थित ग्राम धमनी अब तेजी से ईको-पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित हो रहा है। वन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन और प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) अरुण कुमार पाण्डेय के सहयोग से यहां ईको-विलेज के रूप में विकास कार्य किए जा रहे हैं। इसी क्रम में पर्यटकों के लिए नौकाविहार (बोटिंग) सुविधा शुरू की गई है। अब यहां आने वाले पर्यटक प्राकृतिक वातावरण के बीच नदी में नौकायन का आनंद ले सकेंगे। प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करते हुए स्थानीय लोगों को रोजगार उपलब्ध कराना है। परियोजना के तहत गांव के युवाओं और महिला स्व- सहायता समूहों को रोजगार के अवसर मिल रहे हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है। इस योजना का उद्देश्य पर्यटकों की सुविधा के लिए ठहरने की व्यवस्था भी विकसित की जा रही है, ताकि लोग प्रकृति के करीब रहकर शांत वातावरण का अनुभव कर सकें। वनमण्डलाधिकारी श्री धम्मशील गणवीर ने बताया कि यह पहल जनसहभागिता से संचालित हो रही है, जो वन संरक्षण और ग्रामीण विकास का अच्छा उदाहरण है। कार्यक्रम में वन विभाग के अधिकारी- कर्मचारी और स्थानीय ग्रामीण बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।  वन विभाग का लक्ष्य है कि आने वाले समय में धमनी को प्रदेश के प्रमुख ईको-टूरिज्म स्थलों में शामिल किया जाए।

केवल नगर निगम अथवा पंजीकृत संस्थाओं के माध्यम से ही कराया जाए सीवरेज सफाई का कार्य

रायपुर मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में राज्य अनुश्रवण समिति की बैठक आयोजित मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने कहा है कि राज्य में जबरन दबावपूर्वक मैनुअल स्केवेंजर्स का कार्य करवाने वाले व्यक्तियों पर कड़ाई से कार्यवाही की जाए। उन्होंने सीवरेज सफाई के संबध में स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने के निर्देश दिए। इसके अतर्गत केवल नगर निगम के माध्यम से अथवा पंजीकृत संस्थाओं के माध्यम से ही सीवरेज सफाई का कार्य करवाया जाए। साथ ही सफाई के दौरान सुरक्षा मापदंडों का पूरा ख्याल रखा जाना चाहिए, जिससे कोई भी अप्रिय घटना ना होने पाए।  मुख्यमंत्री  साय ने आज अनुसूचित जाति विकास विभाग के अंतर्गत हाथ से मैला उठाने वाले कर्मियों के नियोजन का प्रतिषेध तथा उनका पुनर्वास अधिनियम, 2013 के प्रभावी क्रियान्वयन के संबंध में राज्य अनुश्रवण समिति की छत्तीसगढ विधानसभा स्थित सभाकक्ष में आयोजित बैठक की अध्यक्षता के दौरान ये निर्देश दिए। मुख्यमंत्री  साय ने कल राज्य के एक निजी बड़े हॉस्पिटल में सेप्टिक टैंक सफाई के दौरान तीन मजदूरों की मौत पर गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि पीड़ित वर्ग को हर संभव सहायता दी जाए साथ ही घटना के जिम्मेदार लोगों पर नियमानुसार कड़ी कार्यवाही की जाए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की अप्रिय घटना ना होने पाए।  इस मौके पर आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव  सोनमणि बोरा ने बताया कि जबरन हाथ से मैला उठाने का कार्य करवाने वाले व्यक्तियों पर ऐक्ट में दंड का भी प्रावधान है, जिसमें एक वर्ष का कारावास अथवा पचास हजार तक जुर्माने का प्रावधान है। उन्होंने बताया कि नगरीय क्षेत्रों में जागरूकता लाने हेतु उचित प्रचार-प्रसार भी किया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि राज्य स्तरीय अनुश्रवण समिति के पुनर्गठन के बाद यह पहली बैठक है। प्रमुख सचिव  सोनमणि बोरा ने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के परिपालन में गाईडलाइन अनुसार प्रदेश के समस्त जिलों में मैनुअल स्केवेंजर्स रिसर्वे करवाया गया है जिसमें सभी जिला कलेक्टर द्वारा मैनुअल स्केवेंजर्स मुक्त का प्रमाण पत्र दिया गया है जो कि प्रदेश के लिए बहुत ही सम्मान एवं गौरव का क्षण है। उन्होंने कहा कि हाथ से मैला उठाने की प्रथा मानवीय मूल्यों एवं संविधान द्वारा स्थापित उच्च आदर्शों के विपरीत है। समाज में हर व्यक्ति को पूरे सम्मान के साथ जीने का अधिकार है। उन्होंने मैन्युअल स्कैवेंजर्स प्रथा के उन्मूलन की दिशा में सराहनीय प्रयास हेतु पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग तथा अन्य सहयोगी विभागों / संस्थानों के समन्वित प्रयास की भी सराहना की। बैठक में वर्ष 2018 में आयोजित पूर्व बैठक का कार्यवाही विवरण प्रस्तुत किया गया। इसके साथ ही माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिनांक 20 अक्टूबर 2023 के आदेश के अनुसरण में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग से प्राप्त मैनुअल स्कैवेजर्स के पुनसर्वेक्षण रिपोर्ट पर राज्य स्तरीय सर्वेक्षण समिति द्वारा चर्चा की गई एवं अनुमोदन किया गया। बैठक में केबिनेट मंत्री गुरू खुशवंत साहेब, विधायक  पुन्नूलाल मोहले,  डोमन लाल कोर्सेवाड़ा,  मुख्य सचिव  विकासशील, पुलिस महानिदेशक  अरूण देव गौतम,  अपर मुख्य सचिव  मनोज पिंगुआ, प्रमुख सचिव  सोनमणि बोरा, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव  भीम सिंह, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के सचिव  बसव राजू  सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित थे।

मिसिर बेसरा को मुख्यधारा में लाने की कवायद तेज: पुलिस की घर तक पहुंच, क्या परिजनों की अपील करेगी असर?

जगदलपुर कुख्यात नक्सली हिड़मा के सरेंडर के लिए अपनाई गई रणनीति को 1 करोड़ के बड़े इनामी नक्सली मिसिर बेसरा के लिए भी झारखंड पुलिस इस्तेमाल कर रही है. झारखंड पुलिस ने पोलित ब्यूरो मेंबर बेसरा को मुख्यधारा में लाने के लिए उसके परिजनों से मुलाकात की. पुलिस ने परिजनों से अपील की कि वे मिसिर बेसरा को समझाएं और हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरित करें. दरअसल माओवादी संगठन अब अपने सबसे कमजोर दौर में बताया जा रहा है. जहां कभी कई पोलित ब्यूरो मेंबर सक्रिय थे, अब महज दो ही बड़े चेहरे बचे हैं. एक ओर तेलंगाना पुलिस गणपति के आत्मसमर्पण की कोशिशों में जुटी है, तो दूसरी तरफ झारखंड पुलिस मिसिर बेसरा को लेकर लगातार दबाव और संवाद दोनों रणनीतियों पर काम कर रही है. खास बात ये है कि सरकार द्वारा तय डेडलाइन अब करीब है. इसी के चलते छत्तीसगढ़, झारखंड और तेलंगाना तीनों राज्यों की पुलिस बड़े माओवादी कैडर को सरेंडर कराने के लिए पूरी ताकत झोंक चुकी है. हिड़मा स्ट्रेटेजी का इस्तेमाल बता दें कि छत्तीसगढ़ के गृहमंत्री विजय शर्मा ने कुख्यात नक्सली हिड़मा को मुख्याधारा में वापल लाने के लिए सुकमा जिले के कोंटा विकासखंड के अतिसंवेदनशील पूर्वर्ती गांव पहुंचे थे. जहां उन्होंने गांव में जनचौपाल का आयोजन किया. इस चौपाल में सभी ग्रामवासी और पूर्वर्ती से संबंध रखने वाले नक्सल नेता माड़वी हिड़मा और बारसे देवा के परिजन भी शामिल हुए. इसमें माड़वी हिड़मा की माता माड़वी पुंजी और बारसे देवा की माता बारसे सिंगे भी शामिल थीं. नक्सली हिडमा और देवा की मां से मुलाकात कर उन्होंने अपील करते हुए कहा कि अपने बेटों से कहो की दोनों हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में शामिल हो जाएं. क्या परिवार की भावुक अपील आएगी काम ? अब देखना होगा कि परिवार की यह अपील बंदूक की आवाज को कितना दबा पाती है. क्या जंगल से निकलकर मुख्यधारा की राह सच में आसान हो पाती है या फिर यह कोशिश भी एक लंबी लड़ाई का हिस्सा बनकर रह जाएगी.

प्रदेशवासियों को बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए सरकार निरंतर प्रयासरत: स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल

रायपुर प्रदेशवासियों को बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए सरकार निरंतर प्रयासरत: स्वास्थ्य मंत्री  श्याम बिहारी जायसवाल प्रदेशवासियों को बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए सरकार निरंतर प्रयासरत: स्वास्थ्य मंत्री  श्याम बिहारी जायसवाल स्वास्थ्य मंत्री  श्याम बिहारी जायसवाल आज विकासखंड धरसींवा अंतर्गत सरोना, रायपुर में 100 बिस्तर वाले नवीन अस्पताल भवन के निर्माण हेतु भूमिपूजन कार्यक्रम में शामिल हुए।  इस अस्पताल के स्थापित होने से क्षेत्र के नागरिकों को सुलभ, गुणवत्तापूर्ण एवं समयबद्ध स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध होंगी। अस्पताल के निर्माण से आसपास के ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों के लोगों को बेहतर इलाज की सुविधा अपने ही क्षेत्र में उपलब्ध हो सकेगी, जिससे उन्हें दूरस्थ स्थानों पर जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय जी के नेतृत्व में प्रदेश में स्वास्थ्य अधोसंरचना को मजबूत करना सरकार की प्राथमिकता है। इसी दिशा में लगातार नए स्वास्थ्य संस्थानों की स्थापना और सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है, ताकि प्रत्येक नागरिक को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं सहज रूप से मिल सकें। स्वास्थ्य मंत्री  श्याम बिहारी जायसवाल ने इस मौके पर कहा कि राज्य सरकार प्रदेशवासियों को बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि नए अस्पतालों के निर्माण एवं सुविधाओं के विस्तार से आमजन को अपने ही क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण इलाज मिल सकेगा, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं में व्यापक सुधार होगा। इस अवसर पर विधायक  राजेश मूणत,  सुनील सोनी,  पुरंदर मिश्रा तथा रायपुर महापौर मती मीनल चौबे, सीजीएमएससी के अध्यक्ष  दीपक म्हस्के सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

जयंती के सशक्त नेतृत्व से बदली गांव की तस्वीर

रायपुर जयंती के सशक्त नेतृत्व से बदली गांव की तस्वीर बस्तर जिले के विकासखंड जगदलपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत आड़ावाल की सरपंच जयंती कश्यप आज ग्रामीण नेतृत्व और महिला सशक्तिकरण की प्रेरणादायक मिसाल बनकर उभरी हैं। उनके उत्कृष्ट कार्यों, स्वच्छता जागरूकता और सामाजिक योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया है। गत 11 मार्च 2026 को सशक्त पंचायत नेत्री अभियान के तहत यूनिसेफ द्वारा उन्हें दिल्ली आमंत्रित किया गया, जहां केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने मंत्रालय में उन्हें सम्मानित किया। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के 12 सरपंच उपस्थित थे, लेकिन बस्तर की जमीनी स्तर पर सक्रिय और कर्मठ नेतृत्व के लिए जयंती कश्यप को विशेष रूप से सराहा गया।         जयंती कश्यप ने अपने गांव में विकास की नई दिशा तय की है। वे पेयजल प्रबंधन, स्वच्छता और साफ-सफाई को प्राथमिकता देते हुए काम कर रही हैं। इसके साथ ही निर्धन परिवारों को आवास उपलब्ध कराने और जरूरतमंद लोगों को सामाजिक सहायता योजनाओं से जोड़ने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।         जल संरक्षण के क्षेत्र में भी उनके प्रयास उल्लेखनीय हैं। “पानी बचाओ” अभियान के तहत वे ग्रामीणों को जल के समुचित उपयोग के लिए प्रेरित कर रही हैं। घरों के वेस्ट पानी का उपयोग किचन गार्डन में करना, वर्षा जल संचयन के लिए तालाब और डबरी निर्माण तथा भूजल स्तर बढ़ाने के लिए वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम और सोखता गड्ढा बनाने जैसे कार्यों को वे गांव-गांव तक पहुंचा रही हैं।          जयंती कश्यप का मानना है कि जल संरक्षण केवल आज की जरूरत नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य की नींव है। उनके नेतृत्व में गांव के लोग न सिर्फ जागरूक हो रहे हैं, बल्कि सक्रिय भागीदारी भी निभा रहे हैं।         आज जयंती कश्यप की यह उपलब्धि न केवल उनके गांव, बल्कि पूरे बस्तर के लिए गर्व का विषय है। उनका समर्पण और कार्यशैली यह दर्शाती है कि यदि इच्छाशक्ति मजबूत हो, तो सीमित संसाधनों में भी बड़ा परिवर्तन संभव है। जयंती कश्यप जैसी सशक्त पंचायत नेत्रियां ग्रामीण भारत के विकास की असली ताकत हैं, जो अपने प्रयासों से समाज में सकारात्मक बदलाव की नई कहानी लिख रही हैं।