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सही दवा, शुद्ध आहार अभियान में बड़ी कार्रवाई: एक्सपायरी खाद्य सामग्री नष्ट, दवा दुकानों की सघन जांच

सही दवा, शुद्ध आहार अभियान में बड़ी कार्रवाई: एक्सपायरी खाद्य सामग्री नष्ट, दवा दुकानों की सघन जांच मनेन्द्रगढ़/एमसीबी जिले में आमजन को सुरक्षित खाद्य सामग्री और गुणवत्तापूर्ण दवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से चलाए जा रहे “सही दवा, शुद्ध आहार यही छत्तीसगढ़ का आधार” अभियान के तहत खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। कलेक्टर डी. राहुल वेंकट के निर्देश और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अविनाश खरे के मार्गदर्शन में मनेंद्रगढ़, झगराखांड और खोंगापानी क्षेत्र में सघन निरीक्षण अभियान चलाया गया। निरीक्षण के दौरान खाद्य सुरक्षा टीम ने विभिन्न दुकानों की जांच कर स्वच्छता, गुणवत्ता और लाइसेंस से जुड़े मानकों की पड़ताल की। मनेंद्रगढ़ स्थित मोहनलाल साहू की जलजीरा दुकान में एक्सपायरी विनेगर सिरप मिलने पर उसे मौके पर ही नष्ट कराया गया और संचालक को सख्त चेतावनी दी गई। वहीं प्रांशु गुप्ता की चाट दुकान में प्रतिबंधित खाद्य रंग के उपयोग पर करीब 5 किलो चाट नष्ट कराई गई। अभियान के तहत गन्ना रस और आइसक्रीम विक्रेताओं पर भी विशेष निगरानी रखी गई। कई दुकानों में अस्वच्छ बर्फ और गंदे आइस बॉक्स पाए जाने पर उन्हें हटवाकर साफ-सफाई बनाए रखने के निर्देश दिए गए। डेयरी प्रतिष्ठानों की जांच में जया डेयरी और सिंह डेयरी से पनीर, दही और दूध के नमूने परीक्षण के लिए लिए गए, जबकि कृष्णा डेयरी द्वारा पंजीयन प्रस्तुत नहीं करने पर 3 दिनों के भीतर लाइसेंस जमा करने के निर्देश दिए गए। वहीं औषधि शाखा की टीम ने 14 दवा दुकानों का निरीक्षण किया, जिसमें संदेह के आधार पर 2 दवाओं के नमूने जांच के लिए भेजे गए। 3 प्रतिष्ठानों में नियमों के उल्लंघन पाए जाने पर कारण बताओ नोटिस की प्रक्रिया शुरू की गई है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह 15 दिवसीय विशेष अभियान लगातार जारी रहेगा। प्रशासन का उद्देश्य जहां नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई करना है, वहीं आम जनता को सुरक्षित भोजन और गुणवत्तापूर्ण दवाओं के प्रति जागरूक बनाना भी है। प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे खाद्य सामग्री और दवाएं खरीदते समय उनकी गुणवत्ता, वैधता और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें।

पद्म पुरस्कार 2027 के लिए नामांकन शुरू, गुमनाम नायकों को मिलेगा मंच

पद्म पुरस्कार 2027 के लिए नामांकन शुरू, गुमनाम नायकों को मिलेगा मंच मनेन्द्रगढ़/एमसीबी भारत सरकार ने गणतंत्र दिवस 2027 पर घोषित होने वाले पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्मश्री के लिए नामांकन प्रक्रिया 15 मार्च 2026 से आधिकारिक पोर्टल पर शुरू कर दी है। आवेदन की अंतिम तिथि 31 जुलाई 2027 निर्धारित की गई है। सरकार का उद्देश्य ग्रामीण, वनांचल और शहरी क्षेत्रों में कार्यरत ‘गुमनाम नायकों’ को राष्ट्रीय पहचान दिलाना है। समाज सेवा, शिक्षा, कला, खेल, चिकित्सा, विज्ञान सहित विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्तियों के नामांकन आमंत्रित किए गए हैं। प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि वे अपने क्षेत्र के प्रेरणादायी व्यक्तित्वों को आगे लाकर नामांकन के लिए प्रोत्साहित करें। आवेदन प्रक्रिया में सहयोग के लिए जिला स्तर पर सहायता भी उपलब्ध रहेगी।

हरी खाद से खेती में बढ़ेगा उत्पादन, मिट्टी की सेहत में सुधार की उम्मीद

हरी खाद- खेती में बढ़ेगा उत्पादन, मिट्टी की सेहत होगी बेहतर              रायपुर आज के दौर में टिकाऊ खेती की ओर बढ़ना समय की मांग है। रसायनों के बोझ तले दबती मिट्टी को राहत देने के लिए हरी खाद एक बेहतरीन समाधान बनकर उभरी है। यह न केवल फसलों की पैदावार बढ़ाती है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए जमीन की उर्वरता को भी सुरक्षित रखती है। मिट्टी बचेगी, तो किसान बचेगा और किसान बचेगा, तो देश समृद्ध होगा।          कृषि विभाग द्वारा किसानों को खेती में हरी खाद के उपयोग के लिए प्रेरित किया जा रहा है, जिससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने और उत्पादन में सुधार लाने में मदद मिल सके। विभाग के अनुसार धान के खेतों में लगातार रासायनिक उर्वरकों के अधिक उपयोग से मिट्टी में लाभदायक सूक्ष्म जीवों की गतिविधियां कम हो रही हैं और मिट्टी की संरचना भी प्रभावित हो रही है। क्या है हरी खाद?        हरी खाद वह सहायक फसल है जिसे मुख्य फसल बोने से पहले खेत में उगाया जाता है और फूल आने की अवस्था में ही उसे हल चलाकर मिट्टी में दबा दिया जाता है। ढैंचा, सनई, लोबिया, मूंग और उड़द जैसी फसलें हरी खाद के लिए सबसे उपयुक्त मानी जाती हैं। हरी खाद के तहत कई फसलों का उपयोग किया जाता है जिनमें दलहनी और बिना दलहनी फसलें शामिल होती हैं। हरी खाद के लिए झाड़ियों और पेड़ों की पत्तियों, टहनियों को भी उपयोग में ला सकते हैं, लेकिन इसके लिए विशेष रूप से ढैंचा फसलों का उपयोग किया जाता है। इन फसलों को खेतों में लगाकर भूमि में सुधार किया जाता है। मिट्टी की सेहत में सुधार       हरी खाद का सबसे बड़ा प्रभाव मिट्टी की भौतिक और रासायनिक संरचना पर पड़ता है। यह मिट्टी में नाइट्रोजन और कार्बनिक पदार्थों (ह्यूमस) की मात्रा को तेजी से बढ़ाती है। हरी खाद मिट्टी को भुरभुरा बनाती है, जिससे हवा का संचार बढ़ता है और पौधों की जड़ें गहराई तक जा पाती हैं। इसके उपयोग से मिट्टी की पानी सोखने की शक्ति बढ़ जाती है, जो सूखे के समय फसलों के लिए जीवन रक्षक साबित होती है। उत्पादन में वृद्धि और लागत में कमी         जब मिट्टी स्वस्थ होती है, तो उत्पादन का बढ़ना निश्चित है। हरी खाद के प्रयोग से पैदावार में 15 प्रतिशत से 20 प्रतिशत तक की वृद्धि देखी जा सकती है। यूरिया और अन्य रासायनिक खादों पर निर्भरता कम हो जाती है, जिससे किसान की फसल की लागत घटती है। मित्र कीटों से फसल का संरक्षण करता है। यह जमीन के भीतर लाभकारी सूक्ष्मजीवों और केंचुओं की संख्या बढ़ाने में मदद करती है। हरी खाद बनाने की सही विधि       क्षेत्र की जलवायु के अनुसार सनई या ढैंचा का चुनाव करें। बुवाई का समय मानसून की शुरुआत (जून-जुलाई) इसके लिए सबसे उपयुक्त है। जब फसल लगभग 40-50 दिन की हो जाए और उसमें फूल आने लगें, तब उसे पाटा लगाकर या रोटावेटर की मदद से मिट्टी में मिला दें। पलटने के बाद 10-15 दिनों तक खेत में नमी बनाए रखें ताकि खाद अच्छी तरह सड़कर मिट्टी का हिस्सा बन जाए। हरी खाद के प्रयोग से  बढ़ेगी आय         हरी खाद केवल एक उर्वरक नहीं है, बल्कि यह मिट्टी का उपचार है। यदि किसान हर दूसरे या तीसरे साल अपने खेत में हरी खाद का प्रयोग करें, तो न केवल उनकी आय बढ़ेगी, बल्कि हम समाज को रसायनों से मुक्त, शुद्ध और पौष्टिक अनाज भी उपलब्ध करा पाएंगे। कृषि के लिए एक वरदान हरी खाद            हरी खाद का उपयोग कृषि के लिए एक ष्वरदानष् के समान है। वर्तमान समय में रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक प्रयोग से मिट्टी की उपजाऊ शक्ति कम हो रही है, ऐसे में हरी खाद (ळतममद डंदनतम) प्राकृतिक तरीके से मिट्टी को पुनर्जीवित करने का सबसे सुलभ विकल्प है।                कृषि विभाग द्वारा खरीफ फसल से पूर्व हरी खाद के बीज उपलब्ध कराने की भी पहल की जा रही है। इसके लिए क्षेत्रीय ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों के माध्यम से किसानों से मांग लेकर बीज उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है।               धनंजय राठौर         संयुक्त संचालक जनसंपर्क 

मजदूरी की बेड़ियों को तोड़ ‘‘मल्टी-फार्मिंग‘‘ के नायक बने ललित यादव

रायपुर दंतेवाड़ा जिले के गीदम विकासखंड अंतर्गत ग्राम गुमड़ा में आज एक नई क्रांति की सुखद आहट सुनाई दे रही है। यह कहानी किसी बड़े उद्योगपति की नहीं, बल्कि 36 वर्षीय एक ऐसे जुझारू व्यक्तित्व की है जिसने मजदूरी के कठिन दौर से निकलकर अपनी तकदीर खुद लिखी है। ललित यादव, जो कभी अपनी आजीविका के लिए दूसरों के खेतों और निर्माण कार्यों पर निर्भर थे, आज अपने गांव में बहुआयामी खेती और डेयरी व्यवसाय के जरिए समृद्धि की एक नई मिसाल पेश कर रहे हैं। उनकी यह यात्रा वर्ष 2013 में मात्र 6 गायों के साथ शुरू हुई थी, जो आज उनके अटूट साहस और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के कारण 25 गायों के एक विशाल कुनबे में तब्दील हो चुकी है। ललित की सफलता का सबसे बड़ा राज पारंपरिक खेती को आधुनिक तकनीक से जोड़ना रहा है। पशुपालन विभाग के निरंतर सहयोग और मार्गदर्शन से उन्होंने अपनी डेयरी को न केवल व्यवस्थित किया, बल्कि जर्सी और एचएफ क्रॉस जैसी उन्नत नस्लों को अपनाकर दूध उत्पादन में क्रांतिकारी परिवर्तन लाया। वर्तमान में उनके फार्म से प्रतिदिन 70 से 80 लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है, जो बाजार में 70 रुपये प्रति लीटर की दर से बिककर उनकी आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ कर रहा है। उत्पादन बढ़ाने के लिए उन्होंने नेपियर घास की खेती का सहारा लिया, जिससे पशुओं को बारहमासी पौष्टिक चारा तो मिलता ही है, साथ ही चारे पर होने वाले बाहरी खर्च में भी भारी कटौती हुई है। ललित की दूरदर्शिता केवल डेयरी तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि उन्होंने आय के स्रोतों को विविधता प्रदान करने के लिए ‘‘मल्टी-फार्मिंग‘‘ का मॉडल तैयार किया। डेयरी के साथ-साथ वे छोटे स्तर पर मुर्गी पालन और सब्जी उत्पादन भी कर रहे हैं, जिससे उन्हें साल भर नियमित नकद आय प्राप्त होती रहती है। दूध की अधिकता होने पर वे मूल्य संवर्धन की दिशा में कदम बढ़ाते हुए पनीर का निर्माण करते हैं, जो 400 रुपये प्रति किलो की दर से हाथों-हाथ बिक जाता है। इसके साथ-साथ वे डेयरी व्यवसाय से प्राप्त होने वाले गोबर खाद की भी क्षेत्र के किसानों में भारी डिमांड है जो उनकी आय का सर्वाधिक महत्वपूर्ण अंग है यहा तक कि अन्य जिलों के किसान जैविक खाद के रूप में 3000 से 3500 रुपये प्रति ट्रैक्टर की दर से खरीदने उनके द्वार तक पहुँचते हैं। शासन की कल्याणकारी योजनाओं और बैंकिंग सुविधाओं का सही तालमेल ललित के व्यवसाय विस्तार में मील का पत्थर साबित हुआ। उन्होंने डेयरी शेड और फेंसिंग जैसी सुविधाओं के लिए बैंक से लिए गए 3 लाख रुपये के ऋण को अपनी कड़ी मेहनत से समय से पूर्व ही चुकता कर अपनी विश्वसनीयता सिद्ध कर दी है। आज इस पूरे उपक्रम में उनका परिवार एक मजबूत स्तंभ की तरह खड़ा रहता है। अपनी माँ के संघर्षों को याद करते हुए ललित भावुक होकर बताते हैं कि उनकी माँ ने एक आंगनबाड़ी सहायिका के रूप में विपरीत परिस्थितियों में उन्हें पढ़ाया-लिखाया, और आज उन्हीं के संस्कारों का फल है कि वे न केवल आत्मनिर्भर बने हैं, बल्कि पूरे क्षेत्र के किसानों के लिए एक प्रेरक प्रकाश स्तंभ बनकर उभरे हैं। ललित यादव की यह सफलता इस बात का जीवंत प्रमाण है कि यदि सही मार्गदर्शन और ईमानदारी से प्रयास किए जाएं, तो ग्रामीण अंचलों में भी खुशहाली का नया अध्याय लिखा जा सकता है।

17 मरीज रेफर, 14 आयुष्मान कार्ड, 11 को मुफ्त चश्मा, स्वास्थ्य बस्तर अभियान की बड़ी सफलता

रायपुर स्वास्थ्य बस्तर अभियान के तहत सुकमा जिले में एक प्रेरणादायक पहल सामने आई है, जहां दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्र के मरीज को बेहतर इलाज दिलाने के लिए स्वास्थ्य टीम ने सराहनीय प्रयास किया। कलेक्टर श्री अमित कुमार के निर्देशन तथा मार्गदर्शन में पोटकपल्ली स्वास्थ्य विभाग की टीम ने पुटेपढ़ गांव से मरीज को पहले किस्टाराम और फिर जिला अस्पताल सुकमा तक पहुंचाया। इस दौरान मरीज ने कुल 310 किलोमीटर का लंबा सफर तय किया, जिससे समय पर उपचार संभव हो सका। यह सफलता सतत स्क्रीनिंग, प्रभावी काउंसलिंग, समय पर रेफरल और मजबूत फॉलो-अप व्यवस्था के कारण संभव हो पाई। सेक्टर मेडिकल ऑफिसर के समन्वय और स्वास्थ्य कर्मियों की मेहनत ने इस अभियान को और अधिक प्रभावी बना दिया। दुर्गम इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अभियान के अंतर्गत किस्टाराम और मरईगुड़ा के अंदरूनी गांवों से कुल 17 मरीजों को जिला अस्पताल रेफर किया गया। इनमें से 14 मरीजों के आयुष्मान कार्ड मौके पर बनाकर प्रिंट किए गए, ताकि इलाज के दौरान आर्थिक परेशानी न हो। वहीं 2 अस्थमा और 2 पैरों में सूजन से पीड़ित मरीजों को विशेष जांच और उपचार के लिए भेजा गया। इसके साथ ही कोंटा क्षेत्र से आए मरीजों की आंखों की जांच कर 11 मरीजों को निःशुल्क चश्मा वितरित किया गया, जबकि मोतियाबिंद से पीड़ित मरीजों को ऑपरेशन की सलाह दी गई। मरईगुड़ा सेक्टर और पोटकपल्ली टीम के स्वास्थ्य कर्मियों के प्रयासों ने यह साबित कर दिया कि स्वास्थ्य बस्तर अभियान दूरस्थ क्षेत्रों के लिए वास्तव में जीवनदायी पहल बनकर उभर रहा है।

प्रतिमाह कमा रहीं 8 से 10 हजार रूपये

रायपुर जिले के कोंटा विकासखंड अंतर्गत नियद नेल्लानार ग्राम पोलमपल्ली की करतम सविता ने यह साबित कर दिया है कि यदि मेहनत को शासन की सही योजनाओं का साथ मिल जाए, तो ग्रामीण महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता का रास्ता आसान हो जाता है। जिला सीईओ  मुकुन्द ठाकुर के मार्गदर्शन में संचालित छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन और ‘लखपति दीदी’ अभियान से जुड़कर सविता ने मजदूरी के जीवन से बाहर निकलते हुए अपने परिवार के लिए सम्मानजनक और स्थायी आय का साधन तैयार किया है। करतम सविता बताती हैं कि पहले उनका परिवार मजदूरी और छोटे-मोटे कामों पर निर्भर था, जिससे आर्थिक स्थिति लगातार कमजोर बनी रहती थी। लेकिन ‘प्रिया स्व-सहायता समूह’ से जुड़ने के बाद उन्हें नई दिशा मिली। समूह के माध्यम से 60 हजार रुपये का ऋण लेकर उन्होंने ‘कृति किराना स्टोर’ की शुरुआत की, जिससे आज उनका परिवार आर्थिक रूप से मजबूत हो रहा है और गांव में उनकी पहचान एक सफल महिला उद्यमी के रूप में बन गई है। आज सविता की किराना दुकान से सालाना 1 से 2 लाख रुपये तक की शुद्ध आय अर्जित कर रही हैं। यह आय केवल आर्थिक लाभ नहीं, बल्कि उनके आत्मविश्वास और परिवार की खुशहाली का आधार बन गई है। सविता बताती हैं कि अब उन्हें रोज़गार के लिए भटकना नहीं पड़ता, बल्कि दुकान से नियमित आमदनी होती है और परिवार में सुख-शांति के साथ समृद्धि आई है। उनके व्यवसाय में परिवार के सभी सदस्य सहयोग करते हैं, जिससे बच्चों की पढ़ाई और भविष्य भी सुरक्षित हो रहा है। कलेक्टर  अमित कुमार ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन एवं ‘लखपति दीदी’ अभियान के माध्यम से जिले की महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का कार्य तेज गति से किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि जिले में नवाचार पहल के तहत दूरस्थ अंचलों की महिलाओं को स्व-सहायता समूहों से जोड़ने के लिए 4 सेवा एक्सप्रेस संचालित की जा रही है, जिसके माध्यम से अब तक लगभग साढ़े 5 हजार महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ के रूप में आत्मनिर्भर बनाया गया है, जो जिले के लिए एक बड़ी और ऐतिहासिक उपलब्धि है। लखपति दीदी योजना महिलाओं को केवल आर्थिक संबल ही नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, सम्मान और एक नई पहचान भी प्रदान कर रही हैं। अपनी सफलता पर खुशी जताते हुए सविता ने कहा कि शासन की योजनाओं ने ग्रामीण महिलाओं के सपनों को पंख दिए हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन और ‘लखपति दीदी’ अभियान जैसी पहल ने उन्हें मजदूरी छोड़कर अपना व्यवसाय स्थापित करने का अवसर दिया। आज वे गर्व से कहती हैं कि वे आत्मनिर्भर हैं और उनके जैसे अनेक ग्रामीण महिलाएं शासन की योजनाओं से नई पहचान बना रही हैं।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में छत्तीसगढ़ जनजातीय सलाहकार परिषद की बैठक सम्पन्न

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज मंत्रालय, महानदी भवन में आयोजित छत्तीसगढ़ जनजातीय सलाहकार परिषद की बैठक में जनजातीय समुदाय के सर्वांगीण विकास को लेकर व्यापक चर्चा की गई और अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।  मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि बस्तर, जो भौगोलिक रूप से केरल से भी बड़ा क्षेत्र है, दशकों तक विकास से वंचित रहा, लेकिन अब वहां योजनाओं का तीव्र विस्तार हो रहा है और विकास की नई धारा स्थापित हो रही है। मुख्यमंत्री ने जनजातीय संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए देवगुड़ी और सरना स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही अवैध अतिक्रमण को रोकने के लिए प्रभावी और कड़े कदम उठाने पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि “धरती आबा ग्राम उत्कर्ष योजना” के माध्यम से प्रदेश के 6600 गांवों में शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं सुदृढ़ की जा रही हैं, जबकि पीएम जनमन योजना के अंतर्गत 32 हजार आवास स्वीकृत किए जा चुके हैं। बैठक में “नियद नेल्ला नार योजना” की उल्लेखनीय सफलता पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री  साय ने इसके अगले चरण के रूप में “नियद नेल्ला नार 2.0” को शीघ्र लागू करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि इस उन्नत पहल के माध्यम से सुदूर अंचलों में बिजली, पानी, सड़क और राशन जैसी मूलभूत सुविधाओं का और अधिक विस्तार किया जाएगा। इसके साथ ही “मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर योजना” के तहत 36 लाख लोगों की स्वास्थ्य जांच का कार्य निरंतर प्रगति पर है। मुख्यमंत्री  साय ने जनजातीय भूमि के दीर्घकालीन लीज पर दोहन के मामलों की जांच के निर्देश दिए। साथ ही कोरवा और संसारी उरांव जातियों को अनुसूचित जनजाति सूची में शामिल किए जाने के प्रस्ताव को शीघ्र केंद्र सरकार को प्रेषित करने के निर्देश भी दिए। शिक्षा और आधारभूत संरचना को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री  साय ने छात्रावासों की सीट वृद्धि, उनके बेहतर रखरखाव तथा शिक्षकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उन्होंने नक्सल मुक्त क्षेत्रों में बच्चों के लिए त्वरित शिक्षण व्यवस्था विकसित करने और खुले में कक्षाएं संचालित न करने के स्पष्ट निर्देश दिए। अम्बिकापुर नेशनल हाईवे के निर्माण में हो रही धीमी प्रगति पर नाराजगी व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री  साय ने कार्यों को समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूर्ण करने के निर्देश दिए। साथ ही बरसात के दौरान कटने वाले मार्गों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता पर बल दिया।  आदिम जाति विकास विभाग के मंत्री एवं परिषद के उपाध्यक्ष रामविचार नेताम ने कहा कि बस्तर, सरगुजा सहित प्रदेश के दूरस्थ जनजातीय अंचलों में लंबे समय तक नक्सलवाद विकास की सबसे बड़ी बाधा बना रहा। बीते चार दशकों की इस चुनौती से मुक्ति मिलने के बाद अब इन क्षेत्रों में जनकल्याणकारी योजनाओं का प्रभावी एवं तेज क्रियान्वयन संभव हो सका है, जिसका सीधा लाभ स्थानीय लोगों तक पहुंच रहा है। उन्होंने कहा कि अब जनजातीय समुदाय तेजी से विकास की मुख्यधारा से जुड़ रहा है और उन्हें आगे बढ़ने के नए अवसर प्राप्त हो रहे हैं।  नेताम ने यह भी बताया कि नक्सलवाद के खात्मे के बाद योजनाओं का जमीनी स्तर पर बेहतर क्रियान्वयन सुनिश्चित हुआ है। सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करते हुए स्वीकृत योजनाओं को समयबद्ध रूप से पूर्ण करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से संवेदनशील मुद्दों का त्वरित एवं प्राथमिकता के आधार पर निराकरण करने पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि विशेष पिछड़ी जनजातियों के बसाहटों तक अब बिजली, पानी और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाएं पहुंच रही हैं। साथ ही नए छात्रावासों के निर्माण से दूरस्थ क्षेत्रों की प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का बेहतर अवसर मिल रहा है, जिससे उनके समग्र विकास का मार्ग प्रशस्त हो रहा है। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री  अरुण साव, वनमंत्री  केदार कश्यप, बस्तर विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष सु लता उसेंडी, सरगुजा क्षेत्र विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष मती गोमती साय, मध्य क्षेत्र विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष  प्रणव मरपच्ची, विधायक मती रायमुनी भगत, विधायक  चैतराम अटामी, विधायक  विक्रम उसेंडी, विधायक मती उद्देश्वरी पैकरा, विधायक  नीलकंठ टेकाम, विधायक  आशाराम नेताम, मुख्य सचिव  विकासशील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, आदिम जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव  सोनमणि बोरा, पुलिस महानिदेशक  अरुण देव गौतम सहित विभिन्न विभागों के सचिव एवं परिषद के सदस्य उपस्थित थे।

ड्रोन निगरानी से अवैध खनन पर हुआ कड़ा प्रहार

रायपुर  मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ने अवैध खनन और खनिजों के अवैध परिवहन पर लगाम कसने के लिए तकनीक और नवाचार का सहारा लेते हुए एक बड़ी और निर्णायक पहल की है। इसी कड़ी में अब खनन क्षेत्रों में ड्रोन से निगरानी की शुरुआत कर दी गई है, जो राज्य में कानून व्यवस्था, खनिज संसाधन की सुरक्षा तथा राजस्व संरक्षण की दिशा में अहम कदम साबित हो रहा है।              राज्य सरकार की स्पष्ट मंशा है कि किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि को जड़ से खत्म किया जाए। आधुनिक तकनीकों के उपयोग से अब खनन क्षेत्रों में रियल टाइम निगरानी संभव हो सकेगी, जिससे अवैध उत्खनन, परिवहन और संबंधित गतिविधियों पर तुरंत कार्रवाई की जा सकेगी। यह कदम न केवल राजस्व हानि को रोकेगा, बल्कि अवैध कारोबार में लिप्त तत्वों के लिए कड़ा संदेश भी साबित होगा। खनिज विभाग का मैदानी अमला पहले से ही अवैध खनन के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई कर रहा था, लेकिन अब ड्रोन तकनीक के जुड़ने से इस कार्रवाई की गति और सटीकता दोनों बढ़ेंगी। ड्रोन से लगभग 5 किलोमीटर तक की रेंज और 120 मीटर तक ऊंचाई से निगरानी की क्षमता के चलते बड़े और दुर्गम भौगोलिक क्षेत्रों पर भी पैनी नजर रखी जा रही है। ड्रोन के माध्यम से संदिग्ध गतिविधियों की तुरंत पहचान कर मौके पर कार्रवाई की जा सकेगी, जिससे अवैध गतिविधियों में संलिप्तों के बच निकलने की संभावना लगभग समाप्त हो जाएगी।                 खनिज विभाग के अधिकारियों के अनुसार, ड्रोन में उच्च-रिज़ॉल्यूशन कैमरा, नाइट विजन और एआई आधारित विश्लेषण प्रणाली जैसी आधुनिक सुविधाएं मौजूद हैं, जो व्यापक और सटीक निगरानी सुनिश्चित करती हैं। इसके जरिए बड़े और दुर्गम खनन क्षेत्रों पर भी आसानी से नजर रखी जा सकती है। यह पहल स्पष्ट संकेत देती है कि राज्य सरकार अवैध खनन के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर काम कर रही है। सरकार का यह साहसिक निर्णय न केवल कानून का सख्ती से पालन सुनिश्चित करेगा, बल्कि खनिज संसाधनों के संरक्षण और पारदर्शी राजस्व व्यवस्था को भी मजबूत करेगा। ड्रोन निगरानी की यह नई व्यवस्था राज्य में सुशासन और तकनीकी नवाचार का मजबूत उदाहरण बनकर उभर रही है।           इसी कड़ी में 29 अप्रैल 2026 को जिला कांकेर के तहकापार रेत खदान क्षेत्र में ड्रोन तकनीक का उपयोग करते हुए सघन निगरानी और छापामार कार्रवाई की गई। कार्रवाई के दौरान अवैध उत्खनन और परिवहन में संलिप्त वाहनों एवं उपकरणों की पहचान की गई। ड्रोन निगरानी शुरू होते ही अवैध गतिविधियों में शामिल लोग अपने वाहन छोड़कर मौके से फरार हो गए। इसके बाद केंद्रीय उड़नदस्ता दल और कलेक्टर (खनिज शाखा) के निर्देशन में कार्रवाई करते हुए महानदी के किनारे भूईगांव की सीमा पर विशेष अभियान चलाकर एक चेन माउंटेन पोकलेन मशीन जेसीबी (215 एलसी) तथा एक हाईवा (क्रमांक CG08AV0975) जब्त किया गया।

पशु चिकित्सा एवं पशुपालन विज्ञान में डॉ. भीष्मदेव साहू को “डॉ सी एम सिंह नेशनल एक्सीलेंस अवार्ड

रायपुर सरगुजा जिले के पशु चिकित्सालय मंगारी प्रभारी एवं अनुभवी वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. भीष्मदेव साहू को पशु चिकित्सा और पशुपालन विज्ञान के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मान “डॉ. सी एम सिंह एक्सीलेंस अवार्ड इन वेटरनरी साइंसेस -2026” से सम्मानित किया गया है। इस पुरस्कार के लिये देश और विदेश के 8 संस्थान के द्वारा मूल्यांकन किया गया। इस गौरवपूर्ण उपलब्धि से पूरे प्रदेश, विशेषकर जिला बालोद, सरगुजा, उतई नगर एवं साहू समाज में हर्ष और गर्व का माहौल है। इस उपलब्धि के लिए पशुधन विकास मंत्री  रामविचार नेताम ने बधाई एवं शुभकामनाएं दी है। डॉ. साहू वर्तमान में छत्तीसगढ़ शासन के पशु चिकित्सा सेवाओं के अंतर्गत सरगुजा जिले के अंबिकापुर स्थित उप संचालक कार्यालय से संबद्ध हैं और विकासखंड बतौली के मंगारी पशु चिकित्सालय प्रभारी के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। वे पिछले लगभग 15 वर्षों से राज्य शासन में पशु चिकित्सा सर्जन के रूप में कार्यरत हैं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले पशुपालन क्षेत्र को सशक्त बनाने में निरंतर महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। संगम डॉ. साहू ने अपने कार्यकाल में पशु चिकित्सा सेवा, जन कल्याणकारी योजनाओं को अधिक प्रभावी, सुलभ और वैज्ञानिक बनाने की दिशा में उल्लेखनीय कार्य किए हैं। उनके पास मजबूत फील्ड अनुभव के साथ-साथ गहन अनुसंधान पृष्ठभूमि भी है। पशु कल्याण, निदान, चिकित्सा और आधुनिक उपचार पद्धतियों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता उन्हें एक विशिष्ट पहचान दिलाती है। उन्होंने पशु रोग (लम्पी स्किन डिजीज, थनौती), कृत्रिम गर्भधान विषय पर राज्य और जिला स्तर पर पशु चिकित्सक, क्षेत्र अधिकारी और सहयोगियों को ट्रेनिंग  प्रदान किये।

जनगणना 2027: छत्तीसगढ़ में मकान सूचीकरण एवं गणना कार्य हेतु व्यापक तैयारियां, वीसी के माध्यम से समीक्षा

रायपुर राष्ट्रीय महत्व का व्यापक अभियान जनगणना 2027 के प्रथम चरण के अंतर्गत छत्तीसगढ़ राज्य में मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना का फील्ड कार्य 01 मई से 30 मई 2026 तक संचालित किया जाएगा। इस संबंध में तैयारियों, व्यवस्थाओं एवं क्रियान्वयन की प्रगति की समीक्षा जनगणना निदेशक  कार्तिकेय गोयल द्वारा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी जिला कलेक्टरों, नगर निगम आयुक्तों एवं प्रमुख जनगणना अधिकारियों के साथ की गई। बैठक में गृह विभाग, छत्तीसगढ़ शासन के अधिकारी भी उपस्थित रहे। जनगणना निदेशक  कार्तिकेय गोयल ने कहा कि जनगणना एक राष्ट्रीय महत्व का व्यापक अभियान है, जिसके माध्यम से देश की जनसंख्या, आवासीय स्थिति एवं सामाजिक-आर्थिक आंकड़ों का सटीक आकलन किया जाता है, तथा मकान सूचीकरण एवं गणना इसकी आधारशिला है। प्रशिक्षण एवं फील्ड कार्य पर विशेष जोर जनगणना निदेशक  कार्तिकेय गोयल ने निर्देशित किया कि सभी जिलों में प्रगणकों एवं पर्यवेक्षकों का समुचित प्रशिक्षण सुनिश्चित किया जाए। फील्ड कार्य के दौरान डेटा संग्रहण की विधि, डिजिटल उपकरणों के उपयोग तथा संभावित चुनौतियों के समाधान पर विशेष ध्यान दिया जाए। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाए कि कोई भी क्षेत्र गणना कार्य से न छूटे और न ही किसी क्षेत्र का दोहराव हो। पहचान-पत्र एवं स्थानीय सहयोग की व्यवस्था बैठक में निर्देश दिए गए कि सभी प्रगणकों एवं पर्यवेक्षकों को फोटोयुक्त पहचान-पत्र जारी किए जाएं, ताकि आम नागरिकों में किसी प्रकार का भ्रम न रहे। इसके अतिरिक्त नगरीय निकायों एवं उनसे सटे ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित बड़ी आवासीय कॉलोनियों एवं अपार्टमेंट्स में जनगणना कार्य के सुचारू संचालन हेतु आवासीय कल्याण समितियों को आवश्यक निर्देश जारी करने पर भी बल दिया गया। डिजिटल डेटा संग्रहण एवं गुणवत्ता पर जोर जनगणना निदेशक  कार्तिकेय गोयल ने कहा कि इस बार जनगणना के आंकड़े मोबाइल एप के माध्यम से एकत्र किए जा रहे हैं, अतः प्रत्येक प्रविष्टि को अत्यंत सावधानीपूर्वक दर्ज किया जाए। किसी भी प्रकार की त्रुटि या लापरवाही भविष्य की नीतियों एवं योजनाओं को प्रभावित कर सकती है, इसलिए इस कार्य में उच्च स्तर की जिम्मेदारी एवं सतर्कता आवश्यक है। मॉनिटरिंग एवं त्वरित समस्या समाधान कार्य की नियमित निगरानी हेतु प्रभावी मॉनिटरिंग तंत्र विकसित करने के निर्देश दिए गए तथा यह सुनिश्चित करने को कहा गया कि किसी भी प्रकार की तकनीकी समस्या या बाधा उत्पन्न होने पर उसका त्वरित समाधान किया जाए। जनजागरूकता एवं फेक न्यूज पर नियंत्रण जनजागरूकता के महत्व पर बल देते जीहुए जनगणना निदेशक  कार्तिकेय गोयल ने निर्देशित किया कि स्थानीय मीडिया, सोशल मीडिया एवं जनसंपर्क गतिविधियों के माध्यम से आम नागरिकों को जनगणना के प्रति जागरूक किया जाए, ताकि वे स्वेच्छा से सही एवं पूर्ण जानकारी प्रदान करें। साथ ही सोशल मीडिया की सतत निगरानी कर किसी भी प्रकार की जाभ्रामक सूचना या फेक न्यूज का तत्काल खंडन किया जाए। नागरिकों की सुविधा के लिए टोलफ्री नंबर 1855 पर संपर्क की व्यवस्था भी उपलब्ध कराई गई है। समर्पण के साथ कार्य पूर्ण करने का आह्वान अंत में, जनगणना निदेशक  कार्तिकेय गोयल ने सभी अधिकारियों से अपेक्षा व्यक्त की कि वे पूर्ण समर्पण, समन्वय एवं उत्तरदायित्व के साथ इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय दायित्व का निर्वहन करें तथा निर्धारित समय-सीमा के भीतर कार्य को सफलतापूर्वक पूर्ण करें।