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भिलाई टाउनशिप में अवैध निर्माण पर बीएसपी प्रबंधन करेगा सख्त कार्रवाई

भिलाई नगर. भिलाई इस्पात संयंत्र प्रबंधन ने भिलाई टाउनशिप क्षेत्र में अनाधिकृत निर्माण एवं नियमों के उल्लंघन के मामलों को गंभीरता से लेते हुए स्पष्ट किया है कि टाउनशिप क्षेत्र में किसी भी प्रकार का अवैध निर्माण या अतिरिक्त विस्तार नियमितीकरण योग्य नहीं है. प्रबंधन ने आबंटियों को चेतावनी दी है कि नियमों की अनदेखी कर किए गए निर्माण पर नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी. भिलाई टाउनशिप में लीज/लाइसेंस/ आबंटन के आधार पर प्रदत्त दुकान, आवास अथवा अन्य परिसरों के सभी आबंटियों से कहा है कि बी.एस.पी. टाउनशिप क्षेत्र एवं इसकी संपत्तियाँ लोक परिसर ( अनाधिकृत अधिभोगियों का निष्कासन) अधिनियम, 1971 के अंतर्गत अधिसूचित लोक परिसर की श्रेणी में आता है. इन परिसरों का आबंटन, प्रबंधन एवं संचालन बी. एस. पी. द्वारा निर्धारित नियमों एवं शर्तों के अनुसार किया जाता है. इन शर्तों के तहत आबंटियों को किसी भी प्रकार का अतिरिक्त अथवा अनाधिकृत निर्माण करने की अनुमति नहीं है. बी. एस. पी. प्रबंधन की पूर्व स्वीकृति के बिना किया गया कोई भी निर्माण नियम विरुद्ध एवं अवैध माना जाएगा. बीएसपी के समस्त आबंटियों से कहा गया है कि वे किसी भी प्रकार का अनाधिकृत निर्माण न करें तथा आबंटन की सभी शर्तों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करे. यह स्पष्ट किया गया है कि अनाधिकृत भवन अथवा नियमाविरुद्ध निर्माण का किसी भी परिस्थिति में नियमितीकरण संभव नहीं है. यदि कोई आबंटी नियमितीकरण संबंधी कोई प्रक्रिया प्रारंभ करता है, तो वह पूर्णतः उसके स्वयं के जोखिम एवं व्यय पर होगी. निगम अथवा अन्य किसी प्राधिकरण के साथ की गई ऐसी कोई भी नियमितीकरण कायर्वाही बी.एस.पी. पर बाध्यकारी नहीं होगी. बीएसपी ने कहा है कि कतिपय समाचार पत्रों में प्रकाशित सूचना एवं नगर निगम, भिलाई द्वारा 25 फरवरी को जारी तथा 26 फरवरी के समाचार पत्रों में प्रकाशित नोटिस के माध्यम से यह ज्ञात हुआ है कि बी. एस. पी. द्वारा लीज पर प्रदत्त आवासीय, व्यावसायिक एवं अन्य परिसरों में लीजधारकों / आबंटियों द्वारा किए गए अनाधिकृत विस्तार एवं निर्माण के मामलों को नगर पालिक निगम अधिनियम, 1956 के प्रावधानों के अंतर्गत नगर पालिक निगम, भिलाई द्वारा नियमितीकरण किए जाने की प्रक्रिया प्रारंभ की गई है. इस संबंध में निगम द्वारा संबंधित लीजधारकों / आबंटियों से आवेदन आमंत्रित किए गए थे, जिन्होंने दुकान /मकान/ अन्य परिसरों में निर्धारित सीमा से अधिक निर्माण किया है. नियमितीकरण संबंधी प्रक्रिया या नोटिस बीएसपी पर बाध्यकारी नहीं उक्त संदर्भित नोटिस (निगम का नोटिस 25 फरवरी) के संबंध में यह स्पष्ट किया गया है कि बी. एस. पी. प्रबंधन द्वारा नगर पालिक निगम, भिलाई की उक्त कार्यवाही से स्वयं को असंबद्ध किया जाता है. अतः नगर निगम, भिलाई द्वारा जारी किसी भी प्रकार की नियमितीकरण संबंधी प्रक्रिया या नोटिस बी. एस. पी. पर बाध्यकारी नहीं है. नगर पालिक निगम अधिनियम, 1956 के प्रावधानों का हवाला देते हुए यह भी स्पष्ट किया गया है कि अनाधिकृत निर्माण या नियमविरुद्ध विस्तार को नियमित करने का अधिकार निगम प्रशासन के पास नहीं है. आवंटन की शर्तों व सुरक्षा मानकों का पूर्णतः पालन करें बीएसपी प्रबंधन ने सभी आबंटियों से अपील की है कि वे टाउनशिप क्षेत्र में किसी भी प्रकार का अतिरिक्त या अनाधिकृत निर्माण न करें तथा आबंटन की शर्तों एवं सुरक्षा मानकों का पूर्णतः पालन करें. भिलाई टाउनशिप की सुव्यवस्था, सुरक्षा एवं नियोजित विकास सुनिश्चित करना संयंत्र प्रबंधन की प्राथमिकता है. इसी उद्देश्य से नियमों के अनुपालन को अनिवार्य बनाया गया है, ताकि नगर की मूल संरचना, नागरिक सुविधाओं एवं सार्वजनिक सुरक्षा से कोई समझौता न हो.

माओवादी संगठन के पोलित ब्यूरो मेंबर गणपति करेंगे आत्मसमर्पण!

जगदलपुर. तेलंगाना में एक बार फिर माओवादी संगठन को बड़ा झटका लग सकता है. माओवादी संगठन के पोलित ब्यूरो मेंबर और पूर्व जनरल सेक्रेट्री मुप्पाला लक्ष्मण राव उर्फ गणपति के आत्मसमर्पण को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं. गणपति, माओवादी संगठन का इस वक्त सबसे वरिष्ठ और कद्दावर चेहरा माना जाता है. करीब चार दशक तक अंडरग्राउंड रहकर संगठन को दिशा देने वाला गणपति, देशभर में माओवादी गतिविधियों का रणनीतिक मास्टरमाइंड रहा है. 1970 के दशक में नक्सल का विचारधारा अपनाने वाला 2004 से 2018 तक महासचिव के पद पर रहा. साल 2018 में गणपति ने बढ़ती उम्र और गंभीर स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए CPI (माओवादी) के महासचिव पद से इस्तीफा दे दिया था, लेकिन इसके बाद भी वह संगठन के शीर्ष नेतृत्व में शामिल बना रहा. सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, गणपति के खिलाफ देश के अलग-अलग राज्यों में 150 से अधिक गंभीर मामले दर्ज हैं जिनमें हत्या, विस्फोट, देशद्रोह और यूएपीए जैसे आरोप शामिल हैं. गणपति पर पूरे देश में करीब 3.5 करोड़ रुपए का इनाम घोषित है. छत्तीसगढ़ में 1 करोड़ रुपए का तो पड़ोसी राज्य तेलंगाना में 25 लाख रुपए का ईनाम रखा गया है. अगर आत्मसमर्पण की ये खबरें आधिकारिक रूप से पुष्टि होती हैं, तो यह माओवादी संगठन के लिए अब तक का सबसे बड़ा नैतिक और रणनीतिक झटका माना जाएगा. सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि गणपति के हटने के बाद पहले ही संगठन कमजोर पड़ा है, और अब यह घटनाक्रम नक्सल नेटवर्क के पूरी तरह टूटने की दिशा में बड़ा संकेत हो सकता है. फिलहाल, सुरक्षा एजेंसियां पूरे मामले पर कड़ी निगरानी रखे हुए हैं, और आधिकारिक बयान का इंतजार किया जा रहा है.

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अधिकारियों-कर्मचारियों संग खेली होली

रायपुर. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ पूरे उत्साह और उमंग के साथ होली का पर्व मनाया। पारंपरिक फाग गीतों और हर्षोल्लास के वातावरण में रंग और उल्लास से सराबोर इस अवसर पर सभी ने एक-दूसरे को गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएँ दीं। अधिकारियों और कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री साय को गुलाल लगाकर उन्हें बधाई दी, वहीं मुख्यमंत्री साय ने भी आत्मीयता के साथ सभी को गुलाल लगाकर रंगोत्सव की शुभकामनाएँ दीं और स्नेह, विश्वास तथा आपसी भाईचारे का संदेश दिया। अधिकारियों-कर्मचारियों संग होली मुख्यमंत्री साय ने कहा कि होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि आपसी प्रेम, सद्भाव और सामाजिक समरसता का प्रतीक है। यह पर्व समाज में एकता, भाईचारे और सकारात्मकता की भावना को सुदृढ़ करता है तथा जीवन में नई ऊर्जा और उत्साह का संचार करता है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के पर्व हमें आपसी मतभेद भुलाकर मिल-जुलकर आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आज मुख्यमंत्री निवास में आयोजित होली मिलन समारोह में सभी से आत्मीय भेंट कर उन्हें अत्यंत प्रसन्नता हुई। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों, साथियों और प्रदेशवासियों के साथ स्नेह, विश्वास और अपनत्व के रंग साझा करना इस पर्व की सबसे बड़ी विशेषता है। उन्होंने कहा कि प्रदेशवासियों का स्नेह और आशीर्वाद ही जनसेवा के उनके संकल्प को और अधिक सशक्त बनाता है। मुख्यमंत्री साय ने प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हुए सभी को होली की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की कि रंगों का यह पावन पर्व सभी के जीवन में सुख, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और नई ऊर्जा का संचार करे तथा हमारा छत्तीसगढ़ निरंतर विकास और खुशहाली के नए आयाम स्थापित करता रहे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक अमित कुमार, रायपुर के पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला सहित मुख्यमंत्री सचिवालय एवं निवास कार्यालय के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।

सिग्नल ओवरशूट के कारण बिलासपुर में पटरी से गिरे मालगाड़ी के 9 वैगन

बिलासपुर. बिलासपुर रेल मंडल में एक बार फिर सिग्नल ओवरशूट के कारण मालगाड़ी के 9 वैगन पटरी से उतर गए। इस मामले में संबंधित विभाग की टीम ने जांच शुरु कर दी है। पूछताछ में चालक का कहना है कि जिस समय यह घटना हुई उस समय ट्रेन की स्पीड केवल 40 किलोमीटर प्रति घंटे थी। इसके अलावा उसे आगे की स्थिति की कोई भी जानकारी नहीं है। बिलासपुर रेल मंडल में ट्रेन के डिरेलमेंट और एक ट्रेन से दूसरी ट्रेन के बीच आपसी टक्कर की घटनाएं कम नहीं हो रही है। आटोमेटिक सिग्नलिंग प्रणाली के बावजूद रेल प्रशासन भी घटना पर किसी तरह का कोई काबू नहीं कर पा रही है। बिलासपुर रेल मंडल के सिस्टम को सीआरएस ने भी खराब बताया है, जिसके बाद भी कोई सुधार कार्य नहीं हो रहा है। जानकारी के अनुसार 26 फरवरी को चालक प्रमोद कुमार और सहायक चालक महाकेश मीणा बिजूरी से खाली एन बाक्स मालगाड़ी लेकर रवाना हुए थे। सोनपुर स्टेशन पार करने के बाद अचानक बीपी प्रेशर ड्राप हुआ और गाड़ी देर रात 2 बजकर 52 मिनट पर अचानक खड़ी हो गई। अचानक मालगाड़ी के खड़े होने पर चालक ने सहायक चालक को चेक करने के लिए भेजा। सहायक चालक ने देखा कि इंजन से 13वां, 14वां, 15वां, 16वां, 17वां, 18वां, 19वां वैगन एवं ब्रेकवैन से दूसरा और तीसरा वैगन पटरी से उतर गया है। जांच में चालक से पूछताछ की गई, जिन्होंने मालगाड़ी और इंजन में किसी तरह की कोई समस्या नहीं होने, अचानक बीपी प्रेशर ड्राप होकर गाड़ी खड़ी होने और पटरी से उतरने के अलावा गाड़ी की स्पीड 40 किलोमीटर प्रति रफ्तार की होने की जानकारी दी। इसके अलावा अन्य प्रश्नों के संबंध में उनकी ओर से कोई उत्तर नहीं दिया गया। फिलहाल इस मामले में विभागीय टीम के अफसर अपनी जांच करने के बाद आगे की रिपोर्ट देंगे, जिसके बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी

स्कूल गार्डन बना पोषण का आधार, छात्रों को मिल रही हरी-भरी सेहत

रायपुर बच्चों को मिल रहा पौष्टिक आहार विद्यालय की बगिया से विद्यालय की बगिया से थाली तक एक अनूठी पहल है, जिसमें छात्र स्कूल परिसर में उगी ताजी, जैविक सब्जियां सीधे अपने मिड-डे मील (मध्याह्न भोजन) में खाते हैं। यह न केवल पौष्टिक आहार सुनिश्चित करता है, बल्कि छात्रों को प्रकृति, श्रम और खेती का व्यावहारिक ज्ञान भी देता है, जिससे वे आत्मनिर्भर बनते हैं। बच्चों को मिल रहा पौष्टिक आहार विद्यालय की बगिया से  छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले के रामानुजनगर के विद्यालयों में किचन गार्डन की एक अनूठी पहल बच्चों के पोषण और व्यावहारिक शिक्षा दोनों को नई दिशा दे रही है। जिला शिक्षा अधिकारी के निर्देशन एवं विकास खंड शिक्षा अधिकारी के मार्गदर्शन में संचालित इस योजना के अंतर्गत माध्यमिक शाला पतरापाली का किचन गार्डन पोषण सुदृढ़ीकरण का एक प्रेरक उदाहरण बनकर उभरा है। विद्यालय परिसर में शिक्षकों के मार्गदर्शन में विकसित इस बगीचे से नियमित रूप से ताज़ी एवं पौष्टिक सब्जियाँ प्राप्त हो रही हैं, जिन्हें मध्यान्ह भोजन में शामिल कर विद्यार्थियों को अतिरिक्त पोषण प्रदान किया जा रहा है। इसी कड़ी में आज विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक किचन गार्डन से लगभग 4 किलोग्राम ताज़ी सेमी (फली) की तुड़ाई की।           बच्चों ने स्वयं पौधों की देखभाल, सिंचाई, निदाई-गुड़ाई और तुड़ाई जैसी गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी निभाई, जिससे उन्होंने श्रम का महत्व तो समझा ही, साथ ही कृषि एवं पर्यावरण के प्रति व्यावहारिक ज्ञान भी अर्जित किया। विद्यालय के शिक्षक योगेश साहू ने बताया कि इस योजना का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को पोषणयुक्त भोजन उपलब्ध कराना, जैविक खेती के प्रति जागरूकता फैलाना और उन्हें व्यवहारिक शिक्षा से जोड़ना है। ताज़ी सब्जियों के उपयोग से मध्यान्ह भोजन की गुणवत्ता और पौष्टिकता दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिसका बच्चों के स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव स्पष्ट रूप से दिख रहा है।          विद्यालय परिवार का मानना है कि इस प्रकार की गतिविधियाँ बच्चों में प्रकृति प्रेम, जिम्मेदारी और आत्मनिर्भरता की भावना विकसित करती हैं। इस अवसर पर विद्यालय के शिक्षक कृष्णकुमार यादव, अनिता सिंह, योगेश साहू, रघुनाथ जायसवाल सहित अभिभावकगण एवं स्थानीय समुदाय के सदस्य उपस्थित रहे। अभिभावकों ने विद्यालय प्रबंधन और शिक्षकों की इस पहल की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए कहा कि ऐसी योजनाएँ बच्चों के स्वास्थ्य और भविष्य दोनों के लिए अत्यंत लाभकारी हैं। विद्यालय प्रशासन ने संकल्प व्यक्त किया है कि आगे भी किचन गार्डन में विभिन्न मौसमी सब्जियों की खेती जारी रखी जाएगी, ताकि बच्चों को पोषण और ज्ञान दोनों निरंतर मिलते रहें।

रायपुर: सरगुजा में पीएम आवास निर्माण में तेजी, योजनाओं को मिला नया जोश

रायपुर : सरगुजा जिले में पीएम आवास निर्माण ने पकड़ी रफ्तार एक माह में 1628.60 लाख रुपये अंतरित रायपुर सरगुजा जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत आवास निर्माण कार्यों में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है। जिले में स्वीकृत कुल 1,02,210 आवासों में से 80,296 आवास पूर्ण किए जा चुके हैं, जो 50 प्रतिशत से अधिक उपलब्धि को दर्शाता है। इस माह 1,781 आवासों का निर्माण कार्य पूर्ण हुआ है। निर्माण कार्यों को गति देने के लिए हितग्राहियों को किश्तों की राशि आधार आधारित डीबीटी प्रणाली के माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों में समय-सीमा के भीतर अंतरित की जा रही है। वित्तीय वर्ष 2024-26 में स्वीकृत 36,306 आवासों में से 18,782 आवास पूर्ण हो चुके हैं। योजना के तहत प्रत्येक हितग्राही को 1.20 लाख रुपये की राशि स्वीकृति, प्लिंथ एवं पूर्णता चरण में जियो-टैग आधारित सत्यापन के पश्चात प्रदान की जाती है। अब तक 35,125 हितग्राहियों को प्रथम किश्त (40,000 रुपये), 23,419 को द्वितीय किश्त (55,000 रुपये) तथा 10,367 हितग्राहियों को तृतीय किश्त (25,000 रुपये) जारी की जा चुकी है। विगत एक माह में 1,634 आवास पूर्ण करते हुए 1,349.05 लाख रुपये की राशि जारी की गई। साथ ही कुल मिलाकर 1,628.60 लाख रुपये हितग्राहियों के खातों में अंतरित किए गए। इसके अतिरिक्त मनरेगा के अंतर्गत 90 मानव-दिवस का मजदूरी भुगतान तथा स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय निर्माण उपरांत 12,000 रुपये की अतिरिक्त सहायता भी प्रदान की जा रही है। पीएम जनमन योजना के तहत जिले में 2,565 पहाड़ी कोरवा हितग्राहियों को स्वीकृति प्रदान की गई है, जिनमें से 1,385 आवास पूर्ण हो चुके हैं। प्रति हितग्राही 2.00 लाख रुपये की सहायता राशि चार चरणों में जारी की जाती है। विगत एक माह में 73 जनमन आवास पूर्ण हुए तथा 217 लाख रुपये की राशि जारी की गई। मुख्यमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत जिले में 1,024 आवास स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से 214 आवास पूर्ण हो चुके हैं। पिछले एक माह में 74 आवास पूर्ण करते हुए 62.55 लाख रुपये की राशि हितग्राहियों के खातों में अंतरित की गई है। आवास निर्माण में प्रगति सुनिश्चित करने के लिए 45 आवास मित्रों एवं 218 रोजगार सहायकों को कुल 61.97 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई है। वर्तमान में जिले में किसी भी हितग्राही की किश्त भुगतान हेतु लंबित नहीं है, जो प्रशासन की पारदर्शी एवं सक्रिय कार्यप्रणाली को दर्शाता है। आवास निर्माण से संबंधित किसी भी समस्या या सुझाव के लिए हितग्राही राज्य शासन द्वारा जारी निःशुल्क हेल्पलाइन नंबर 1800-233-1290 पर संपर्क कर सकते हैं।

कच्चे से पक्के आशियाने का सफर, जनमन योजना ने रनिया बाई को दिया सम्मानभरा जीवन

रायपुर कभी भिक्षाटन और दिहाड़ी मजदूरी से जीवन यापन करने वाली श्रीमती रनिया बाई के परिवार के लिए हर दिन एक नई चुनौती लेकर आता था। कोरिया जिला के बैकुण्ठपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत गढ़तर में रहने वाला यह परिवार कच्ची झोपड़ी में मौसम की मार झेलते हुए जीवन गुजार रहा था। पति अवतार साय के साथ रनिया बाई को जब महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम के तहत अकुशल श्रम में रोजगार मिलने लगा, तब कुछ राहत मिली, लेकिन स्थायी आवास का सपना अब भी दूर था। परिस्थितियां तब बदलीं जब प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की दूरदर्शी पहल पर संचालित ‘प्रधानमंत्री जनमन योजना‘ के अंतर्गत उन्हें पक्के मकान के लिए सहायता स्वीकृत हुई। ग्राम पंचायत के सहयोग और अपनी मेहनत से उन्होंने नया पक्का घर बनाया। अब उनके पास सुरक्षित आवास और शौचालय की सुविधा है। रनिया बाई बताती हैं कि बरसात की रातें अब चिंता में नहीं, सुकून में गुजरती हैं। बच्चों के भविष्य को लेकर भी मन में विश्वास जागा है। सिर्फ आवास ही नहीं, बल्कि अंत्योदय राशन कार्ड से नियमित खाद्यान्न और आयुष्मान भारत योजना के तहत स्वास्थ्य सुरक्षा ने उनके जीवन को स्थिरता दी है। साथ ही राष्ट्रीय पेंशन योजना का लाभ भी मिल रहा है।   शासन की योजनाओं का समुचित लाभ मिलने से एक निराश्रित परिवार की जिंदगी में आशा, सुरक्षा और आत्मविश्वास का नया अध्याय जुड़ गया है।

जल संरक्षण के साथ ही ग्रामीण आजीविका संवर्धन का प्रभावी माध्यम

रायपुर राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना: मजबूत हुई आजीविका की राह जिले के विकासखण्ड लोरमी अंतर्गत ग्राम पंचायत औराबांधा में एक छोटी-सी पहल ने ग्रामीण आजीविका को नई दिशा दी है। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत हितग्राही किसान किशन सिंह के खेत में निर्मित “आजीविका डबरी” आज जल संरक्षण, सिंचाई और मछली पालन का सशक्त माध्यम बन चुकी है। हितग्राही किशन सिंह ने बताया कि पहले सिंचाई के लिए पानी की कमी बनी रहती थी, लेकिन अब डबरी बनने से खेत में वर्षभर पानी उपलब्ध रहेगा और मछली पालन से आय भी बढ़ेगी।  जिले में कलेक्टर  कुन्दन कुमार एवं जिला पंचायत सीईओ  प्रभाकर पाण्डेय के मार्गदर्शन में आजीविका डबरी न केवल जल संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि ग्रामीण आजीविका संवर्धन का भी प्रभावी माध्यम बन रहा है। योजना के तहत स्वीकृत 1.94 लाख रुपये की लागत से इस डबरी का निर्माण कराया गया। कार्य के दौरान कुल 792 मानव दिवस सृजित किए गए, जिससे स्थानीय मजदूरों को गांव में ही रोजगार मिला और पलायन में कमी आई। निर्मित डबरी अब खेतों के लिए जीवनदायिनी साबित हो रही है। वर्षा जल संचयन और भू-जल रिचार्ज के माध्यम से सिंचाई सुविधा सुनिश्चित हुई है, जिससे खरीफ और रबी दोनों मौसमों में फसल उत्पादन की संभावना बढ़ी है। पहले जहां पानी की कमी के कारण फसल प्रभावित होती थी, वहीं अब किसान आत्मविश्वास के साथ बहुफसली खेती की ओर अग्रसर है। साथ ही, डबरी में मछली पालन की योजना से अतिरिक्त आय का स्थायी स्रोत विकसित हो रहा है, जो परिवार की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ बना रहा है। जिले में आजीविका संवर्धन की दृष्टि से आजीविका डबरी निर्माण की अभिनव पहल व्यापक स्तर पर क्रियान्वित की जा रही है। वर्ष 2025-26 हेतु कुल 285 डबरी निर्माण कार्य स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से 218 कार्य प्रारंभ हो चुके हैं और 20 पूर्ण किए जा चुके हैं। शेष कार्यों को मार्च 2026 तक पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित है। यह पहल जल संरक्षण के साथ-साथ कृषि, पशुपालन और मत्स्य पालन को एकीकृत कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को स्थायित्व प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

पिता के संघर्ष को मिला साथ – चिरायु योजना ने बचाई अंजलि की जिंदगी

रायपुर  छत्तीसगढ़ शासन की अत्यंत महत्वाकांक्षी चिरायु योजना (राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम) आज प्रदेश में उन मासूमों के लिए जीवनदायिनी सिद्ध हो रही है, जो आर्थिक अभाव और सूचना की कमी के कारण इलाज की राह देख रहे थे। बस्तर की जटिल भौगोलिक परिस्थितियों और सुदूर वनांचल ग्रामों में जहाँ शिक्षा और सुगम आवागमन आज भी एक चुनौती है, वहां यह योजना न केवल बीमारियों की पहचान कर रही है, बल्कि बच्चों को उनके स्वास्थ्य का अधिकार दिलाकर धरातल पर एक सुखद बदलाव ला रही है। विकासखंड बस्तर के ग्राम भोंड की 6 वर्षीय बालिका अंजलि कश्यप की कहानी इसी संकल्प की एक जीवंत मिसाल है, जो जन्मजात नाक के बाहरी ट्यूमर जैसी गंभीर समस्या से जूझ रही थी। अंजलि के परिवार पर दुखों का पहाड़ तब टूटा जब इलाज की प्रारंभिक प्रक्रिया के दौरान ही उसके पिता का निधन हो गया। इस वज्रपात के बाद शिक्षा की कमी और घर की बिगड़ती आर्थिक स्थिति ने माँ देवकी को इतना हताश कर दिया कि उन्होंने सर्जरी का विचार त्याग दिया और इलाज के लिए स्पष्ट मना कर दिया। ऐसी कठिन परिस्थिति में चिरायु टीम ने उम्मीद का दामन नहीं छोड़ा। डॉ. गौरव चौरसिया और डॉ. रेखा जैन के नेतृत्व में समर्पित चिकित्सा दल ने बार-बार अंजलि के घर जाकर परिवार को भावनात्मक संबल दिया और बीमारी की गंभीरता समझाते हुए उन्हें उपचार के लिए प्रेरित किया। कलेक्टर के मार्गदर्शन में स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के समन्वय से न केवल निःशुल्क इलाज का भरोसा दिलाया गया, बल्कि दुर्गम क्षेत्र होने के बावजूद चिरायु वाहन के माध्यम से अंजलि को जिला अस्पताल महारानी जगदलपुर तक पहुँचाया गया। इस दौरान टीम ने बालिका का आयुष्मान कार्ड बनवाने में भी पूर्ण मार्गदर्शन प्रदान किया। अंततः 12 मई 2024 को रायपुर के नवकार हॉस्पिटल में प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. रमेश जैन द्वारा बालिका की सफल सर्जरी संपन्न की गई, जिससे अंजलि को एक नया चेहरा और नया जीवन प्राप्त हुआ। इस पूरी प्रक्रिया की सफलता में स्वास्थ्य विभाग के मैदानी अमले का विशेष योगदान रहा। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संजय बसाक और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की जिला कार्यक्रम प्रबंधक सु रीना लक्ष्मी के सटीक समन्वय से योजना का लाभ समय पर सुनिश्चित हुआ। वहीं जिला प्रारंभिक हस्तक्षेप केंद्र प्रबंधक  शिवम पाराशर द्वारा केस की निरंतर मॉनिटरिंग और वाहन प्रबंधन किया गया, जबकि खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. नारायण सिंह नाग और बीपीएम  राजेन्द्र कुमार बघेल ने जमीनी स्तर की बाधाओं को दूर किया। आज अंजलि पूर्णतः स्वस्थ है और उसकी खिलखिलाती मुस्कान चिरायु योजना की सार्थकता का प्रमाण दे रही है। अंजलि की माँ और समस्त ग्रामीणों ने शासन की इस कल्याणकारी पहल की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए इसे बस्तर के वनांचल में उम्मीद की एक नई किरण बताया है।

पानी की जंग से मिली आज़ादी: जल जीवन मिशन ने बदली फुलमत बाई की तकदीर

रायपुर जल जीवन मिशन से बदली फुलमत बाई की जिंदगी आदिवासी बहुल कोरबा जिले के पोड़ी उपरोड़ा विकासखंड के ग्राम नवापारा की 60 वर्षीय फुलमत बाई कभी पानी की एक-एक बूंद के लिए जूझा करती थीं। घर में नल नहीं होने के कारण उन्हें प्रतिदिन दो से तीन किलोमीटर दूर स्थित ढोढ़ी तक जाना पड़ता था। नाले के पास बने उस अस्थायी स्रोत से बड़े बर्तन में पानी भरकर सिर पर लादकर घर लाना उनकी मजबूरी ही नहीं, बल्कि दिनचर्या बन गई थी। बरसात के दिनों में फिसलन भरे रास्तों पर जोखिम उठाकर ढोढ़ी तक पहुँचना कठिन होता था और गर्मी के मौसम में पानी का स्तर घट जाने पर समस्या और भी विकराल रूप ले लेती थी। बकरी पालन से जीवन यापन करने वाली वृद्धा इस कष्ट को वर्षों से सहती आ रही थीं। लेकिन जल जीवन मिशन के अंतर्गत उनके घर में नल कनेक्शन लगने के बाद उनका जीवन बदल गया। अब रोज सुबह 8 बजे और शाम 4 बजे उनके नल से नियमित रूप से पानी उपलब्ध होता है। फुलमत बाई कहती हैं कि अब उन्हें ढोढ़ी तक नहीं जाना पड़ता, जिससे उनके समय, श्रम और स्वास्थ्य तीनों की बचत हो रही है। फुलमत बाई को महतारी वंदन योजना के तहत प्रतिमाह एक हजार रुपये भी प्राप्त होते हैं, जो उनके दैनिक खर्चों में बड़ी सहारा बनते हैं। सरकारी योजनाओं ने मिलकर उनके जीवन को सरल, सुरक्षित और सम्मानजनक बनाया है।