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हाइवा से टकराने से कार सवार युवक-युवती की मौत

बिलासपुर. जिले में फिर रफ्तार का कहर देखने को मिला है. सड़क हादसे में कार सवार युवक-युवती की मौत हो गई. तेज रफ्तार कार अनियंत्रित होकर सड़क के दूसरी ओर चली गई, जिसके बाद हाइवा से जा भिड़ी. हादसे में कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई है. बताया जा रहा है कि कार में चार दोस्त शराब पार्टी के बाद घूमने के लिए निकले हुए थे. घटना गुरुवार की दरमियानी रात की है. अब इससे जुड़ा हुआ लाइव सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है. वहीं मृतकों की पहचान हो गई है. जानकारी के मुताबिक, घटना सरकंडा थाना इलाके के नूतन चौक की है. जांजगीर के रहने वाले 4 दोस्त टाटा नेक्सॉन में सवार थे. बताया जा रहा है कि वह शराब पार्टी के बाद घूमने के लिए निकले थे. नूतन चौक के पास चालक ने कार से नियंत्रण खो दिया. तेज रफ्तार में ब्रेक लगने पर कार का पिछला चक्का फिसल गया. कार मुड़कर सड़क की दूसरी ओर चली गई और मुरुम लोड हाइवा से टक्कर गई. हादसे में युवती समेत 2 लोगों की मौत हुई है. मृतकों की पहचान हिमांशु राठौर और अंशु चंद्रा के रूप में हुई है.

पोगो पर इतिहास रचने आ रहा है ‘ओमी नंबर ओवन’, भारतीय एनीमेशन को मिला नया सुपरस्टार!

पोगो पर इतिहास रचने आ रहा है ‘ओमी नंबर ओवन’ – भारतीय एनीमेशन को मिला नया सुपरस्टार! धनबाद  भारतीय बच्चों के मनोरंजन जगत में एक नया, ताज़ा और बेहद आकर्षक अध्याय जुड़ चुका है। वेककीटुंस  स्टूडियो की बहुप्रतीक्षित ओरिजिनल एनिमेटेड सीरीज़ ‘ओमि नंबर1’ ने 15 दिसंबर 2025 को पोगो चैनल पर शानदार शुरुआत की है। यह शो केवल हँसी-मज़ाक तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों के लिए एक ऐसी रंगीन और भरोसेमंद दुनिया रचता है, जिससे वे खुद को जोड़ सकें। सीईओ निलॉय कांती बिस्वास का विज़न वैक्कीटूंस स्टूडियो के सीईओ निलॉय कांती बिस्वास ने बताया कि ‘ओमि नंबर1’ को एक साधारण कॉमेडी शो की तरह नहीं, बल्कि एक मजबूत कहानी और किरदारों से भरी सीरीज़ के रूप में गढ़ा गया है। इसका मकसद बच्चों को केवल हँसाना ही नहीं, बल्कि उन्हें प्रेरित करना और उनकी कल्पनाओं को नई उड़ान देना है। सालों की मेहनत, जुनून और टीमवर्क का नतीजा इस सीरीज़ के दो पूरे सीज़न तैयार करने में कई वर्षों की अथक मेहनत लगी। दिन-रात की कड़ी मेहनत, बार-बार किए गए बदलाव और पूरी स्टूडियो टीम की निरंतर लगन ने इस सपने को हकीकत में बदला। बिस्वास ने कहा कि शो का ऑन-एयर होना क्रिएटर्स के लिए एक भावनात्मक और गर्व का क्षण है, क्योंकि अब यह रचना सीधे दर्शकों के दिलों तक पहुंचेगी। इंडस्ट्री दिग्गजों का मजबूत सहयोग उन्होंने वार्नर ब्रॉस. डिस्कवरी के अर्जुन नोहरवार और साई अभिषेक का विशेष धन्यवाद किया, जिनके सहयोग से यह सीरीज़ पोगो तक पहुंची। साथ ही सोनी के अंबेश तिवारी, रोनोजॉय चक्रवर्ती और अक्षिता खुल्लर की भूमिका को भी सराहा, जिन्होंने इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने और स्टूडियो के साथ मिलकर काम करने में अहम योगदान दिया। कब देखें ‘ओमि नंबर 1? अब बच्चों की शाम और भी मज़ेदार होने वाली है, क्योंकि ‘ओमि नंबर 1 ' हर सोमवार से शुक्रवार पोगो चैनल पर प्रसारित होगा। क्यों खास है ‘ओमि नंबर 1’? भारतीय सोच और संस्कृति से जुड़ी कहानी बच्चों से तुरंत जुड़ने वाले मज़ेदार किरदार हास्य के साथ सकारात्मक संदेश भारतीय एनीमेशन इंडस्ट्री का नया मील का पत्थर   'ओमि नंबर 1’ केवल एक कार्टून नहीं, बल्कि भारतीय एनीमेशन की बढ़ती ताकत, रचनात्मकता और वैश्विक पहचान की ओर बढ़ता एक मजबूत कदम है। आने वाले दिनों में यह शो बच्चों का नया फेवरेट बनने के लिए पूरी तरह तैयार है। अजय मुखोपाध्याय/ धनबाद

छत्तीसगढ़ के अमिताभ जैन बने मुख्य सूचना आयुक्त

नवा रायपुर. छत्तीसगढ़ राज्य में सूचना के अधिकार (RTI) के सुचारू और प्रभावी कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग में महत्वपूर्ण नियुक्तियां की हैं। सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 15(3) के अंतर्गत राज्यपाल के निर्देशानुसार राज्य मुख्य सूचना आयुक्त और राज्य सूचना आयुक्त के पदों पर नियुक्ति की गई। अमिताभ जैन (से.नि. भा.प्र.से.) को छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग में राज्य मुख्य सूचना आयुक्त के पद पर नियुक्त किया गया है। उनका कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से ही यह नियुक्ति प्रभावी होगी। राज्य के उच्चतम सूचना अधिकारी के रूप में अमिताभ जैन की जिम्मेदारी होगी कि वे सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत सभी मामलों और अपीलों का निष्पक्ष और समयबद्ध निपटान सुनिश्चित करें। इसलिए अटका था मामला दरअसल राज्य मुख्य सूचना आयुक्त के पद पर लंबे समय से नियुक्ति की चर्चा चल रही थी. लेकिन कोर्ट में मामला होने की वजह से नियुक्ति में देर होना बताया जा रहा है. अब रिटायर्ड  CS अमिताभ जैन की नियुक्ति इस पद पर कर दी गई है. साथ ही राज्य सूचना आयुक्त के पद पर रिटायर्ड IAS उमेश अग्रवाल और पत्रकार शिरीष चंद्र मिश्रा की नियुक्ति की गई है. बता दें कि 3 साल के लिए ये नियुक्तियां की गई हैं. आदेश में ये लिखा  सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार इन सभी नियुक्तियों की सेवा शर्तें, वेतन एवं अन्य भत्ते भारत सरकार की अधिसूचना दिनांक 24 अक्टूबर 2019 के तहत “सूचना का अधिकार (केंद्रीय सूचना आयोग एवं राज्य सूचना आयोगों में पदावधि, वेतन, भत्ते एवं सेवा की अन्य शर्तें) नियम, 2019” के अंतर्गत निर्धारित होंगे.आदेश छत्तीसगढ़ के राज्यपाल के नाम से तथा उनके आदेशानुसार जारी किया गया है. रिटायर्ड IAS उमेश अग्रवाल और पत्रकार शिरीष मिश्रा बने आयुक्त राज्यपाल के नाम और आदेश से जारी नियुक्ति आदेश में छत्तीसगढ़ राज्य सूचना आयोग में सूचना आयुक्त के पद पर भी दो नियुक्ति की गई है. रिटायर्ड आईएएस ऑफिसर उमेश अग्रवाल और पत्रकार शिरीष मिश्रा को आयुक्त बनाया गया है.  आदेश में ये भी लिखा सामान्य प्रशासन विभाग की तरफ से अधिसूचना जारी की गई है. जारी अधिसूचना के अनुसार राज्य मुख्य सूचना आयुक्त और राज्य सूचना आयुक्त की पदावधि, वेतन, भत्ते और सेवा की शर्ते भारत सरकार की अधिसूचना 24-10-2019 सूचना का अधिकार (केंद्रीय सूचना आयोग में केंद्रीय सूचना आयुक्त, सूचना आयुक्तों, राज्य सूचना आयोग में राज्य मुख्य सूचना आयुक्त और सूचना आयुक्तों की पदावधि, वेतन, भत्ते और सेवा की शर्ते ) नियम 2019 के अधीन होंगे. 

रायपुर में पुलिस कमिश्नरी व्यवस्था लागू होने से पहले, इन तीन IPS अफसरों के नाम पर चर्चा तेज

रायपुर रायपुर का पहला कमिश्नर कौन होगा इस पर सस्पेंस बना हुआ है। 15 अगस्त 2025 को रायपुर में कमिश्नरी सिस्टल लागू होने की घोषणा के बाद संभावना जताई जा रही है कि जल्द ही नाम तय हो जाएगा। बता दें कि 31 दिसंबर को हुई कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने 23 जनवरी से कमिश्नरी सिस्टम लागू करने की घोषणा की है। Raipur Commissioner: चल रही कमिश्नर की तलाश सरकार का प्रयास है कि इससे पहले ही कमिश्नर के नाम पर मुहर लग जाए। इसके लिए 7 आईजी स्तर के अधिकारियों को प्रस्तावित सूची में रखा गया है। एक्ट में संशोधन करने 31 दिसंबर को कैबिनेट की बैठक के बाद कमिश्नर की तलाश चल रही है। साथ ही कमिश्नर को मजिस्ट्रियल पॉवर के साथ ही पुलिङ्क्षसग को लेकर महत्वपूर्ण अधिकार देने एक्ट में संशोधन किया गया है। ताकि शस्त्र लाइसेंस, धारा 144 लागू करने और जरूरत के अनुसार कफ्र्यू, आपात स्थिति में तुरंत आदेश जारी करने और सिस्टम में फेरबदल किया जा सके।  रायपुर के पहले पुलिस कमिश्नर के लिए बिलासपुर के आइजी संजीव शुक्ला के साथ दो और नाम सबसे प्रबल दावेदार के रूप में उभरकर सामने आए हैं। इनमें वरिष्ठ आइपीएस बद्री नारायण मीणा और दीपक कुमार झा शामिल हैं। बद्री नारायण मीणा पूर्व में रायपुर एसएसपी रह चुके हैं और प्रशासनिक अनुभव के साथ सख्त कानून-व्यवस्था नियंत्रण के लिए जाने जाते हैं। वहीं दीपक कुमार झा भी फील्ड पोस्टिंग और अनुशासनात्मक कार्यशैली के लिए पहचाने जाते हैं। इससे पहले आइपीएस अजय यादव, सुंदरराज पी, अमरेश मिश्रा समेत अन्य नाम भी कमिश्नर की दौड़ में शामिल रहे हैं। सरकार क्या चाहती है पुलिस मुख्यालय के सूत्रों के मुताबिक सरकार ऐसे अधिकारी को कमिश्नर बनाना चाहती है, जो नई व्यवस्था के शुरुआती दौर में इसे मजबूती से स्थापित कर सके। हालांकि यह भी चर्चा है कि कुछ वरिष्ठ आइपीएस अधिकारियों ने रायपुर का पहला पुलिस कमिश्नर बनने का प्रस्ताव ठुकरा दिया है। इसके पीछे मुख्य कारण पुलिस कमिश्नर के सीमित अधिकार क्षेत्र बताए जा रहे हैं। नई व्यवस्था के तहत कमिश्नर का अधिकार केवल शहरी क्षेत्र तक सीमित रहेगा, जिसमें करीब 22 पुलिस थाने शामिल होंगे, जबकि शेष ग्रामीण क्षेत्र के 11 थानों के लिए एसएसपी तैनात करने की अलग व्यवस्था होगी। एडिशनल कमिश्नर के लिए लाल उम्मेद बने पहली पसंद एडिशनल पुलिस कमिश्नर के पद के लिए रायपुर एसएसपी डा. लाल उम्मेद सिंह शासन की पहली पसंद माने जा रहे हैं। उन्हें पदोन्नत कर इस जिम्मेदारी पर बैठाया जा सकता है। माना जा रहा है कि कमिश्नरेट को सुचारु रूप से चलाने के लिए अनुभवी और मजबूत टीम बनाई जा रही है, जिसमें डा. सिंह की भूमिका अहम होगी। इनके नाम पर विचार कमिश्नर के लिए रायपुर आईजी अमरेश मिश्रा, बिलासपुर के संजीव शुक्ला, दुर्ग के रामगोपाल गर्ग, सरगुजा के दीपक झा और आईजी पीएचक्यू अजय यादव का नाम प्रमुखता के साथ चल रहा है। वहीं, ओपी पाल और आनंद छाबड़ा के नाम भी प्रस्तावित किए गए हैं। उक्त अधिकारियों में किसी एक को कमिश्नर बनाया जाएगा। इसके लिए उच्चस्तर पर विचार-विमर्श चल रहा है। 900 अतिरिक्त बल की तैनाती Raipur Commissioner: नए सिस्टम में आईजी को कमिश्नरी की कमान देने के साथ ही दो एसएसपी, 5 एएसपी, 18 डीएससी के साथ ही फील्ड में 800 से ज्यादा अतिरिक्त जवानों की पोस्टिंग होगी। वहीं, पुलिस थानों की संख्या में इजाफा कर 5 अतिरिक्त थाना और 3 पुलिस चौकी का गठन होगा। बता दें कि इस समय रायपुर शहर और ग्रामीण को मिलाकर 38 पुलिस थाने हैं। इसमें साइबर, ट्रैफिक और अजाक थाना भी शामिल है। दफ्तर और वाहन की व्यवस्था पुराने पीएचक्यू में दफ्तर और कमिश्नर के लिए कार की व्यवस्था राज्य पुलिस मुख्यालय द्वारा की गई है। वहीं, दफ्तर के लिए पुलिस महकमे के तमाम विभागों को कनेक्ट किया गया है। कमिश्नर के ज्वाइन करते ही ऑटो मोड में सिस्टम काम करने लगेगा। 23 जनवरी से लागू होगी व्यवस्था रायपुर में पुलिस कमिश्नरी की घोषणा मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने करीब छह महीने पहले की थी। इसके लिए आइपीएस प्रदीप गुप्ता की अध्यक्षता में गठित टीम ने ओडिशा, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश सहित छह राज्यों की व्यवस्था का अध्ययन किया था। तैयार ड्राफ्ट को कैबिनेट से मंजूरी मिल चुकी है और 23 जनवरी से रायपुर में नई व्यवस्था लागू होगी। इसी दिन कमिश्नर कार्यालय के उद्घाटन की भी संभावना है। कई जिलों में बदल सकते हैं एसपी-एसएसपी पुलिस कमिश्नर व्यवस्था लागू होने से पहले आइपीएस अफसरों के तबादलों को लेकर भी पीएचक्यू में हलचल तेज हो गई है। सूत्रों के अनुसार कवर्धा में पदस्थ एसपी धर्मेंद्र सिंह चवाई को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के गृह जिले जशपुर भेजे जाने की संभावना है। वहीं तमनार हिंसा के बाद सख्त कार्रवाई के लिए पहचाने जाने वाले शशि मोहन सिंह को रायगढ़ का नया एसएसपी बनाया जा सकता है। वहीं दुर्ग से कोरबा में विजय अग्रवाल, दुर्ग में डा. संतोष सिंह, मुंगेली में हरीश राठौर, बेमेतरा में भावना पांडेय, रामकृष्ण साहू को सूरजपुर, भोजराम पटेल को सारंगढ़-बिलागढ़ में तैनाती के संकेत हैं। प्रशांत ठाकुर और सिद्धार्थ तिवारी को पुलिस मुख्यालय में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी जा सकती हैं।  

रायगढ़ में उद्योगों में तीन सालों में 55 मजदूरों की मौत, 63 घायल – सुरक्षा मानकों की कमी बनी बड़ी वजह

रायगढ़  छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में उद्योगों में लगातार हादसे हो रहे हैं। औद्योगिक सुरक्षा विभाग ने एक आंकड़ा जारी किया है जिसके मुताबिक, पिछले 3 साल में अलग-अलग उद्योगों में हुए हादसे में काम करने वाले 55 लोगों की जान जा चुकी है, वहीं 63 लोग घायल हुए हैं। जहां घटनाएं हुई उनमें एनआर इस्पात, रायगढ़ इस्पात, एमएसपी स्टील एंड पवार लिमिटेड, एनआरवीएश स्पंज प्लांट, जिंदल स्टील एंड पावर प्लांट, सिंघल स्पंज प्लांट, बीएस स्पंज प्राइवेट लिमिटेड, नवदुर्गा फ्युल प्राइवेट लिमिटेड, शारदा एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड समेत कई प्लांट शामिल हैं। ज्यादातर मामलों में सुरक्षा मानकों में कमी के कारण हादसा उजागर हुआ है। 3 साल में 55 मजदूरों की मौत औद्योगिक सुरक्षा विभाग के मुताबिक, साल 2023 में 9 प्लांटों में हादसों के मामले सामने आए। जिसमें 9 मजदूरों की मौत हो गई और 6 गंभीर व 6 सामान्य रूप से घायल हुए। इसके बाद आकड़ों का ग्राफ भी बढ़ते गया। साल 2024 में उद्योगों में 22 हादसे हुए और इसमें 23 मजदूरों की मौत हो गई। जबकि 14 गंभीर और 18 सामान्य रूप से घायल हुए। इसके अलावा साल 2025 में भी 22 हादसों में 23 लोगों की जान चले गई और 9 गंभीर व 10 सामान्य रूप से घायल होकर अस्पताल पहुंचे। सुरक्षा मानकों की कमी के कारण घटनाएं विभागीय जानकारों ने बताया कि उद्योगों में हादसे अक्सर सुरक्षा मानकों की कमी के कारण हो रहे हैं। जिसमें मजदूरों को बिना सुरक्षा व मनमाने तरीके से काम कराया जाता है। पिछले कुछ सालों में देखा गया कि अधिक हादसे बॉयलर फटने या कन्वेयर बेल्ट और मशीन की चपेट में आने से हुई है। उत्पादन बढ़ाने के दबाव में सुरक्षा नियमों की अनदेखी और पुराने पड़ चुके उपकरणों का रखरखाव न होना भी मौतों की मुख्य वजह बतायी जा रही है। 3 महीने में 25 आपराधिक प्रकरण दर्ज औद्योगिक स्वास्थ्य व सुरक्षा विभाग के उप संचालक राहुल पटेल ने बताया कि कारखानों में लगातार हादसों को देखते हुए नियमित रूप से जांच की जा रही है। पूर्व में हुए हादसों में निरीक्षण में कई कमियां पाई गई। ऐसे में पिछले 3 माह में उद्योगों के खिलाफ 25 आपराधिक प्रकरण दर्ज कराया गया है। इसके अलावा जांच के दौरान जिन-जिन प्लांटों में सुरक्षा को लेकर कमियां मिलती हैं, उन्हें नोटिस जारी कर सुधार के निर्देश दिए जाते हैं। औद्योगिक सुरक्षा विभाग के मुताबिक, साल 2023 में 9 प्लांटों में हादसों के मामले सामने आए। जिसमें 9 मजदूरों की मौत हो गई और 6 गंभीर व 6 सामान्य रूप से घायल हुए। इसके बाद आकड़ों का ग्राफ भी बढ़ते गया। साल 2024 में उद्योगों में 22 हादसे हुए और इसमें 23 मजदूरों की मौत हो गई। जबकि 14 गंभीर और 18 सामान्य रूप से घायल हुए। इसके अलावा साल 2025 में भी 22 हादसों में 23 लोगों की जान चले गई और 9 गंभीर व 10 सामान्य रूप से घायल होकर अस्पताल पहुंचे। सुरक्षा मानकों की कमी के कारण घटनाएं विभागीय जानकारों ने बताया कि उद्योगों में हादसे अक्सर सुरक्षा मानकों की कमी के कारण हो रहे हैं। जिसमें मजदूरों को बिना सुरक्षा व मनमाने तरीके से काम कराया जाता है। पिछले कुछ सालों में देखा गया कि अधिक हादसे बॉयलर फटने या कन्वेयर बेल्ट और मशीन की चपेट में आने से हुई है। उत्पादन बढ़ाने के दबाव में सुरक्षा नियमों की अनदेखी और पुराने पड़ चुके उपकरणों का रखरखाव न होना भी मौतों की मुख्य वजह बतायी जा रही है। 3 महीने में 25 आपराधिक प्रकरण दर्ज औद्योगिक स्वास्थ्य व सुरक्षा विभाग के उप संचालक राहुल पटेल ने बताया कि कारखानों में लगातार हादसों को देखते हुए नियमित रूप से जांच की जा रही है। पूर्व में हुए हादसों में निरीक्षण में कई कमियां पाई गई। ऐसे में पिछले 3 माह में उद्योगों के खिलाफ 25 आपराधिक प्रकरण दर्ज कराया गया है। इसके अलावा जांच के दौरान जिन-जिन प्लांटों में सुरक्षा को लेकर कमियां मिलती हैं, उन्हें नोटिस जारी कर सुधार के निर्देश दिए जाते हैं।

बिलासपुर के कोनी-मोपका बाइपास के लिए 83 करोड़ की योजना, अब टू-लेन नहीं, बनेगा फोरलेन

बिलासपुर  मोपका-सेंदरी बाइपास की जर्जर सड़क की किस्मत बदलने वाली है। शासन से पहले ही 58 करोड़ की मंजूरी मिल चुकी थी, लेकिन अब इस प्रोजेक्ट को भविष्य की जरूरतों और बढ़ते ट्रैफिक को देखते हुए फोरलेन बनाने का निर्णय लिया गया है। लोक निर्माण विभाग ने 83 करोड़ रुपये का नया संशोधित प्रस्ताव शासन को भेजा है, जो शहर की यातायात व्यवस्था के लिए मील का पत्थर साबित होगा। सड़क मरम्मत और चौड़ीकरण का प्रस्ताव मोपका-सेंदरी बाइपास को लेकर पूर्व में केवल सड़क मरम्मत और चौड़ीकरण का प्रस्ताव था। लेकिन बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला ने भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए इसमें बड़े बदलाव का सुझाव दिया। विधायक की पहल पर अब इसे कंक्रीट फोरलेन सड़क के रूप में विकसित किया जाएगा। यह मार्ग मोपका से चिल्हाटी होते हुए सीधे एनएच-49 से जुड़ जाएगा, जिससे बिलासपुर एक बड़े रिंग रोड नेटवर्क का हिस्सा बन जाएगा। प्रोजेक्ट को फोरलेन बनाने के पीछे सबसे बड़ा तर्क बिलासपुर-सीपत फोरलेन का निर्माण है। राज्य शासन ने बिलासपुर-सीपत फोरलेन को आधिकारिक मंजूरी प्रदान कर दी है और इसका काम जल्द शुरू होने वाला है। चूंकि सीपत रोड से भारी ट्रैफिक का दबाव रहेगा, ऐसे में सेंदरी-मोपका बाइपास का भी फोरलेन होना तकनीकी और व्यावहारिक रूप से अनिवार्य हो गया है। इन दोनों सड़कों के आपस में जुड़ने से पूरे क्षेत्र का विकास तेजी से होगा। फोरलेन बनने से बढ़ेगी सुविधा, हजारों राहगीरों को होगा सीधा लाभ बाइपास के फोरलेन होने और एनएच-49 से सीधे जुड़ाव के कारण रायगढ़, जांजगीर, अकलतरा और पड़ोसी राज्य ओडिशा जाने वाले वाहनों को बिलासपुर शहर के भीतर घुसने की जरूरत नहीं होगी। इसके अलावा बैमा नगोई, खमतराई, बिरकोना, सेलर व अन्य ग्रामीण क्षेत्रों से भारी वाहन सीधे चिल्हाटी मार्ग से निकल सकेंगे, जिससे नेहरू चौक से गोल बाजार होते हुए गांधी चौक तक लगने वाले जाम से मुक्ति मिलेगी और यात्रा के समय में कम से कम 30 से 40 मिनट की बचत होगी। कनेक्टिविटी का नया हब बनेगा चिल्हाटी नए प्रस्ताव के तहत सड़क को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह एनएच-130 को मोपका के जरिए एनएच-49 से जोड़ देगा। इससे बिलासपुर के चारों ओर एक मजबूत ट्रांसपोर्ट कारिडोर तैयार होगा। कांक्रीट रोड होने के कारण भारी वाहनों के दबाव से सड़क जल्दी खराब नहीं होगी और धूल व प्रदूषण से स्थानीय निवासियों को राहत मिलेगी। बिलासपुर-सीपत मार्ग भी होगा फोरलेन राज्य शासन ने बिलासपुर से सीपत तक के लगभग 19 किलोमीटर लंबे मार्ग को फोरलेन बनाने की बहुप्रतीक्षित मांग को पूरा करते हुए मंजूरी दे दी है। सीपत में एनटीपीसी का बड़ा संयंत्र होने और आगे कोरबा जिले की सीमा को जोड़ने के कारण इस मार्ग पर भारी वाहनों का दबाव लगातार बना रहता है। वर्तमान में यह सड़क टू लेन होने के कारण दुर्घटनाओं का केंद्र बनी रहती है। मार्ग के फोरलेन बनने से न केवल औद्योगिक यातायात को सुगमता मिलेगी, बल्कि सेंदरी-मोपका बाइपास के साथ मिलकर यह पूरे क्षेत्र की कनेक्टिविटी को बदल देगा।

कोरबा: ऑनलाइन अटेंडेंस सिस्टम से कार्यालयों में अनुशासन और पारदर्शिता में सुधार, विभागों में समयपालन की आदत बनी

कोरबा ऑनलाइन अटेंडेंस व्यवस्था से बढ़ी कार्यालयीय अनुशासन और पारदर्शिता, सभी विभागों में समयपालन का दिख रहा असरऑनलाइन अटेंडेंस व्यवस्था से बढ़ी कार्यालयीय अनुशासन और पारदर्शिता, सभी विभागों में समयपालन का दिख रहा असर छत्तीसगढ़ शासन द्वारा एक जनवरी 2026 से समस्त शासकीय अधिकारियों-कर्मचारियों के लिए आधार आधारित ऑनलाइन उपस्थिति अनिवार्य किए जाने के बाद जिले के सभी कार्यालयों में उल्लेखनीय सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिल रहे हैं। कलेक्ट्रेट कोरबा में स्वयं कलेक्टर श्री कुणाल दुदावत प्रतिदिन प्रातः 10 बजे से पूर्व ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज कर कार्यालय पहुंच रहे हैं। कलेक्टर के समयपालन का प्रत्यक्ष प्रभाव अन्य अधिकारियों-कर्मचारियों पर भी दिखाई दे रहा है और अब अधिकांश कर्मचारी समय से पूर्व कार्यालय पहुंचने लगे हैं। ऑनलाइन उपस्थिति सिस्टम के लागू होने के बाद विभागीय कार्यों में निर्धारित समय पर गति आने लगी है। अधिकारियों-कर्मचारियों को कार्यालय आने एवं जानेकृदोनों समय अपनी उपस्थिति मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से दर्ज करानी अनिवार्य कर दी गई है। कार्यालयों के निर्धारित लोकेशन को आधार बेस सिस्टम में फीड किया गया है, जिससे उपस्थिति केवल कार्यालय परिसर के आसपास रहते हुए ही लगाई जा सकती है। इससे अनाधिकृत अनुपस्थिति, देरी से आने तथा समय पूर्व कार्यालय छोड़ने जैसी समस्याओं पर प्रभावी नियंत्रण हुआ है। शासन की इस पारदर्शी व्यवस्था की सर्वत्र सराहना हो रही है। आम नागरिकों एवं जनप्रतिनिधियों की यह प्रमुख शिकायत रहती थी कि कर्मचारी समय पर उपस्थित नहीं रहते और कई अधिकारी दौरे के नाम पर कार्यालय से अनुपस्थित पाए जाते हैं। ऑनलाइन अटेंडेंस के चलते अब ऐसी शिकायतों में भी स्पष्ट कमी आई है और कार्य संस्कृति में सकारात्मक सुधार देखा जा रहा है। शहर के आमनागरिक परमेश्वर यादव का कहना है कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने बेहतरीन पहल की है। यह व्यवस्था बहुत पहले लागू हो जानी चाहिए थी। अस्पताल, तहसील और स्कूल सभी जगह स्थिति खराब होने की शिकायत रहती है। सरकारी अस्पताल में समय पर डॉक्टर नहीं आते हैं, नर्स भी नहीं रहती। तहसील में बाबू नहीं आया होता है और अन्य कार्यालयों में भी किसी काम से जाने पर मालूम होता है कि वे नहीं हैं। अब ऑनलाइन अटेंडेंस से व्यवस्था में सुधार होगा। उनकी मांग है कि सभी ऑफिस में सीसीटीवी भी लगानी चाहिए। इस संबंध में जिला जनसंपर्क अधिकारी श्री कमलज्योति ने बताया कि आधार बेस ऑनलाइन उपस्थिति व्यवस्था न केवल समयपालन को बढ़ावा देती है, बल्कि विभागीय कार्यों की निरंतरता एवं पारदर्शिता को भी सुदृढ़ करती है। उन्होंने कहा कि शासन द्वारा नियुक्त अधिकारियों-कर्मचारियों का दायित्व है कि वे निर्धारित समयानुसार कार्यालय पहुंचे और आमजन से जुड़े कार्यों को समय पर पूरा करें। पीआरओ कमलज्योति ने यह भी कहा कि शासन की यह पहल अत्यंत सराहनीय है और इसे और अधिक कड़ाई से लागू किए जाने की आवश्यकता है। जो अधिकारी-कर्मचारी बिना ठोस कारण के समय पर उपस्थित नहीं होते, उनके प्रति विभागीय कार्रवाई तथा आवश्यक होने पर वेतन कटौती जैसे प्रावधान लागू किए जाने चाहिए। इससे समयपालन करने वाले कर्मचारियों को प्रोत्साहन मिलेगा और लापरवाह कर्मचारियों में भी जवाबदेही की भावना विकसित होगी। उन्होंने विशेष रूप से स्कूलों, अस्पतालों, तहसीलों तथा आमनागरिकों से प्रत्यक्ष रूप से संबंधित सेवाओं वाले कार्यालयों में इस व्यवस्था को और अधिक कठोरता से लागू करने की आवश्यकता पर बल दिया।

बंदूक नहीं, संवाद और विकास ही स्थायी समाधान: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

रायपुर बस्तर अंचल में शांति, विश्वास और विकास की दिशा में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज हुई है। दंतेवाड़ा जिले में “पूना मारगेम – पुनर्वास से पुनर्जीवन” पहल के अंतर्गत 36 इनामी सहित कुल 63 माओवादियों— जिनमें 18 महिलाएं और 45 पुरुष शामिल हैं — ने हिंसा का रास्ता छोड़कर लोकतांत्रिक और विकास की मुख्यधारा से जुड़ने का संकल्प लिया है। यह केवल आत्मसमर्पण नहीं, बल्कि बस्तर के भविष्य के लिए एक निर्णायक परिवर्तन है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने इस अवसर पर कहा कि यह उपलब्धि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में केंद्र सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति तथा केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह जी की स्पष्ट, बहुआयामी सुरक्षा एवं विकास रणनीति का प्रत्यक्ष परिणाम है। उन्होंने कहा कि यह घटना प्रमाण है कि “बंदूक नहीं, संवाद और विकास ही स्थायी समाधान हैं।” मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार की संवेदनशील पुनर्वास नीति, सटीक सुरक्षा रणनीति और सुशासन आधारित प्रशासनिक दृष्टिकोण के कारण नक्सलवाद अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। माओवादी नेटवर्क का प्रभावी विघटन हो रहा है और बस्तर के सुदूर अंचलों में अब तेज़ी से सड़क, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और डिजिटल कनेक्टिविटी जैसी बुनियादी सुविधाएं पहुंच रही हैं। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि आत्मसमर्पण करने वाले युवाओं को सरकार द्वारा सम्मानजनक पुनर्वास, कौशल प्रशिक्षण, आजीविका और सामाजिक पुनर्स्थापन की समुचित व्यवस्था दी जाएगी ताकि वे आत्मनिर्भर नागरिक बनकर समाज की मुख्यधारा में स्थायी रूप से स्थापित हो सकें। उन्होंने कहा कि बस्तर अब भय नहीं, भविष्य की भूमि बन रहा है — जहां शांति, सुशासन और विकास मिलकर एक स्वर्णिम कल की नींव रख रहे हैं।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय गोवा में आयोजित आदि लोकोत्सव पर्व–2025 में हुए शामिल

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज गोवा के आदर्श ग्राम अमोन, पोंगुइनिम, गोवा में आयोजित 'आदि लोकोत्सव' पर्व–2025 में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने लोकोत्सव को संबोधित करते हुए सभी प्रतिभागियों को बधाई और शुभकामनाएं दीं। कार्यक्रम में गोवा के कला एवं संस्कृति मंत्री डॉ. रमेश तावड़कर उपस्थित थे। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 'आदि लोकोत्सव' के आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि यह लोकोत्सव देश की आदिम संस्कृति से जुड़ने का एक जीवंत उत्सव है, जो भारत की लोक-सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि भारत गांवों का देश है और गांव हमारी आत्मा हैं। गांवों की संस्कृति ही देश की संस्कृति है, जिसे लोकगीतों, लोकनृत्यों, पारंपरिक वाद्ययंत्रों और परंपराओं के माध्यम से जीवंत रखना अत्यंत आवश्यक है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि गोवा सरकार पिछले 25 वर्षों से इस सांस्कृतिक चेतना को जीवित रखने का कार्य कर रही है, जो प्रशंसनीय है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले वर्षों में आदि लोकोत्सव और भी भव्य तथा व्यापक स्वरूप में आयोजित होगा। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भगवान बिरसा मुंडा को नमन करते हुए कहा कि जनजातीय इतिहास अत्यंत गौरवशाली रहा है। भगवान बिरसा मुंडा ने महज 25 वर्ष की अल्पायु में अंग्रेजों को चुनौती दी और अपने अदम्य साहस से इतिहास रच दिया। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज के अनेक महापुरुष ऐसे हैं, जिन्हें देश के इतिहास में उचित स्थान नहीं मिला। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जनजातीय सेनानियों को देशभर में सम्मान और पहचान दिलाने का कार्य किया है। मुख्यमंत्री साय ने रानी दुर्गावती के बलिदान का स्मरण करते हुए कहा कि वे जनजातीय समाज की महान वीरांगना थीं। प्रधानमंत्री मोदी ने उनके गौरव को स्थायी स्वरूप देते हुए मध्यप्रदेश के जबलपुर में एक भव्य संग्रहालय का निर्माण कराया है, जो उनके शौर्य और बलिदान की अमिट स्मृति है। मुख्यमंत्री साय ने अपने संबोधन में छत्तीसगढ़ के जनजातीय सेनानियों के योगदान को विशेष रूप से स्मरण किया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में लगभग 32 प्रतिशत जनजातीय आबादी निवास करती है और यहां के 14 जनजातीय महापुरुषों ने देश की आज़ादी के लिए अपने प्राण न्योछावर किए। उन्होंने कहा कि शहीद वीर नारायण सिंह, वीर गुण्डाधुर, गेंद सिंह जैसे महापुरुषों ने अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष कर देश की स्वतंत्रता के लिए बलिदान दिया। शहीद वीर नारायण सिंह को अंग्रेजों ने राजधानी रायपुर के जय स्तंभ चौक में फांसी दी थी। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि इन जनजातीय नायकों की स्मृति को संरक्षित करने और नई पीढ़ी तक उनके बलिदान की गाथा पहुंचाने के उद्देश्य से नया रायपुर में शहीद वीर नारायण सिंह डिजिटल संग्रहालय का निर्माण किया गया है। यह देश का पहला डिजिटल संग्रहालय है, जिसका उद्घाटन छत्तीसगढ़ स्थापना दिवस पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के करकमलों से हुआ। मुख्यमंत्री साय ने आदि लोकोत्सव में उपस्थित सभी लोगों को छत्तीसगढ़ आकर इस डिजिटल संग्रहालय को देखने का आमंत्रण भी दिया। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि जनजातीय समाज के लिए इससे बड़ा गौरव क्या हो सकता है कि आज देश के सर्वोच्च पद महामहिम राष्ट्रपति के रूप में भी जनजातीय समाज की बेटी सुशोभित हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ जैसे राज्य में आदिवासी समाज का मुख्यमंत्री बनना प्रधानमंत्री मोदी की समावेशी सोच का प्रमाण है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान और प्रधानमंत्री जनमन योजना जैसी पहल का उल्लेख करते हुए कहा कि केंद्र सरकार जनजातीय समाज के समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने श्रद्धेय प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के योगदानों का स्मरण किया और कहा कि उनके कार्यकाल में ही पहली बार देश में आदिम जाति कल्याण मंत्रालय का गठन हुआ, जिसके माध्यम से आज 12 करोड़ से अधिक जनजातीय नागरिकों के विकास के लिए बड़े पैमाने पर बजट और योजनाएं संचालित की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के पहले कार्यकाल में उन्हें उनके साथ कैबिनेट मंत्री के रूप में कार्य करने का अवसर मिला, जिसे वे अपना सौभाग्य मानते हैं। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान पहले नक्सल प्रभावित राज्य के रूप में होती थी, लेकिन आज वह तेजी से बदल रही है। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद की कमर टूट चुकी है और राज्य अब शांति, विकास और निवेश के नए दौर में प्रवेश कर चुका है। जिन क्षेत्रों में पहले निवेश नहीं आते थे, वहां अब उद्योग आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि नई औद्योगिक नीति के तहत अब तक लगभग 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव छत्तीसगढ़ को प्राप्त हो चुके हैं, जो राज्य के आर्थिक भविष्य की नई दिशा तय कर रहे हैं।  

राज्यपाल रमेन डेका ने प्रथम राष्ट्रीय रोवर-रेंजर जंबूरी का किया शुभारंभ

  युवाओं से राष्ट्र निर्माण में योगदान का आह्वान रायपुर,  राज्यपाल रमेन डेका के मुख्य आतिथ्य में जिला मुख्यालय बालोद के समीपस्थ ग्राम दुधली में प्रथम राष्ट्रीय रोवर-रेंजर जंबूरी का आज भव्य शुभारंभ हुआ। राज्यपाल ने इस अवसर पर कहा कि जंबूरी केवल एक शिविर ही नहीं बल्कि एकता, विविधता, भाईचारा और साझा उद्देश्यों का उत्सव है। कार्यक्रम में स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव, भारत स्काउट्स एवं गाइड्स के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अनिल जैन, मुख्य राज्य आयुक्त इंदरजीत सिंह खालसा, राष्ट्रीय व राज्य स्तर के पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में देश के विभिन्न राज्यों से आए रोवर-रेंजर उपस्थित थे। राज्यपाल डेका एवं अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलित कर एवं आसमान में गुब्बारा छोड़कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया गया। समारोह में राज्यपाल एवं अतिथियों द्वारा जंबूरी पत्रिका एवं नए बैज का विमोचन भी किया गया। राज्यपाल श्री रमेन डेका ने इस अवसर पर कहा कि स्काउट-गाइड युवाओं को नेतृत्व कौशल, अनुशासन और सफलता के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे समाज के लिए कम से कम एक सकारात्मक कार्य अवश्य करें और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएं। देश में पहली बार आयोजित हो रही यह राष्ट्रीय रोवर-रेंजर जंबूरी पूरे राष्ट्र के लिए गौरव का विषय है। स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने अपने संबोधन में कहा कि स्काउट-गाइड युवाओं को जीवन मूल्यों, अनुशासन और सामाजिक दायित्वों से जोड़ने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि रोवर-रेंजर देश के वे युवा हैं, जो समाज, राष्ट्र और विश्व के लिए कुछ अच्छा करने का जज्बा रखते हैं। उन्होंने सभी प्रतिभागियों का स्वागत एवं अभिनंदन करते हुए इस आयोजन को छत्तीसगढ़ और देश के युवाओं के लिए सौभाग्यपूर्ण अवसर बताया। इस अवसर पर स्वागत उद्बोधन करते हुए भारत स्काउट गाइड के मुख्य राष्ट्रीय आयुक्त डॉ. केके खण्डेलवाल ने ग्राम दुधली में इस प्रथम राष्ट्रीय रोवर रेंजर जंबूरी आयोजन को एतिहासिक एवं अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। मुख्य राज्य आयुक्त इंदरजीत सिंह खालसा ने कहा कि यह आयोजन छत्तीसगढ़ के स्वर्णिम अध्याय में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने सभी सहयोगियों का आभार व्यक्त किया। विभिन्न राज्यों से उपस्थित रोवर एवं रेंजरों द्वारा आकर्षक मार्चपास्ट कर राज्यपाल डेका एवं अतिथियों को सलामी दी गई। इस प्रथम नेशनल रोवर रेंजर जंबूरी के शुभारंभ अवसर पर विभिन्न राज्यों से उपस्थित रोवर रेंजरों ने नैनाभिराम सांस्कृतिक कार्यक्रमों की रंगारंग प्रस्तुति से भारतीय संस्कृति की बहुरंगी छटा बिखेरी। उल्लेखनीय है कि इस 5 दिवसीय आयोजन में देश के सभी राज्यों के अलावा रेल्वे, नवोदय विद्यालय सहित कुल 33 राज्यों के प्रतिभागी रोवर रेंजर शामिल हो रहे हैं। भारत स्काउट्स गाइड्स के अधिकारी, रोवर रेंजर के अलावा अन्य जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में आम नागरिकगण उपस्थित थे।