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माननीय राष्ट्रपति महोदय के प्रस्तावित छत्तीसगढ़ प्रवास की तैयारियों को लेकर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित

रायपुर  मुख्य सचिव  विकासशील की अध्यक्षता में आज मंत्रालय महानदी भवन में भारत के माननीय राष्ट्रपति महोदया मती द्रौपदी मुर्मू के आगामी दिनों में प्रस्तावित छत्तीसगढ़ प्रवास की तैयारियों के संबंध में समीक्षा बैठक आयोजित की गई। माननीय राष्ट्रपति महोदया का 22 अक्टूबर से 23 अक्टूबर 2026 तक रायपुर एवं जगदलपुर (बस्तर) का प्रवास प्रस्तावित है।    मुख्य सचिव ने अधिकारियों को राष्ट्रपति के प्रवास के दौरान सुरक्षा व्यवस्था, प्रोटोकॉल, आवास, स्वास्थ्य सुविधा और परिवहन के सभी इंतजाम निर्धारित मापदंडों के अनुरूप सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। राष्ट्रपति के संपूर्ण प्रवास कार्यक्रमों के लिए संस्कृति विभाग को नोडल विभाग बनाया गया है।    प्रवास के दौरान राष्ट्रपति महोदय के आयोजित होने वाले प्रमुख कार्यक्रम में लोकभवन, रायपुर एवं बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम, बूढ़ापारा (रायपुर) में कार्यक्रमों के आयोजन में शामिल होना प्रस्तावित है। इसी तरह से लाल बाग ग्राउंड, जगदलपुर (बस्तर) में मुरिया दरबार और बस्तर दशहरा के पावन अवसर पर विशाल सार्वजनिक कार्यक्रम का आयोजन में शामिल होना प्रस्तावित है।  मुख्य सचिव ने रायपुर एवं बस्तर संभाग के कलेक्टरों का राष्ट्रपति के प्रवास के दौरान सभी जरूरी व्यवस्थाओं के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट (रायपुर) तथा माँ दंतेश्वरी एयरपोर्ट (जगदलपुर) से लेकर कार्यक्रम स्थलों तक सुरक्षा, कारकेड और सड़क मार्ग से यात्रा की सुगम व्यवस्था का दायित्व संबंधित जिला कलेक्टरों, पुलिस आयुक्त तथा पुलिस अधीक्षकों को सौंपा गया है।  राष्ट्रपति महोदय एवं उनके साथ आने वाले अतिथियों के ठहरने की व्यवस्था सहित अन्य व्यवस्था के संबंध में विभागीय अधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश दिए। स्वास्थ्य विभाग द्वारा निर्धारित गाइडलाइन्स के अनुसार सर्व सुविधायुक्त चिकित्सा व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।  बैठक में कार्यक्रम स्थलों पर मानक अनुसार डायस (मंच), बैकड्रॉप, निर्बाध विद्युत आपूर्ति (वैकल्पिक व्यवस्था सहित), साउंड-लाइट सिस्टम तथा ग्रीन रूम में कंप्यूटर, प्रिंटर व इंटरनेट की जरूरी तैयारियों के लिए अधिकारियों को दिशा निर्देश दिए गए।  वीडियो कॉन्फ्रेंस से आयोजित बैठक में सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव  अविनाश चम्पावत, संस्कृति एवं पर्यटन विभाग के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन, गृह एवं श्रम विभाग के सचिव  हिमशिखर गुप्ता, संचालक जनसम्पर्क  आशीष टिकरिया सहित लोकभवन के वरिष्ठ अधिकारी, कलेक्टर रायपुर एवं बस्तर, पुलिस मुख्यालय के अधिकारी, पुलिस अधीक्षक रायपुर एवं बस्तर, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, लोक निर्माण विभाग, एयरफोर्स, बीएसएनएल, एयरपोर्ट अथॉरिटी के अधिकारी शामिल हुए।

डेयरी व्यवसाय से संध्या बनीं आत्मनिर्भर, दूध की बिक्री से हर महीने हो रही 15 हजार रुपये की बचत

रायपुर  ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन महिलाओं के लिए आर्थिक आत्मनिर्भरता और नियमित आमदनी का महत्वपूर्ण माध्यम बन रहा है। सरगुजा जिले के ग्राम लमगांव निवासी श्रीमती संध्या ने राज्य डेयरी उद्यमिता विकास योजना से मिले सहयोग को अपनी मेहनत से सफल स्वरोजगार में बदल दिया है। वर्ष 2024 में योजना के तहत मिले अनुदान से उन्होंने अपने डेयरी व्यवसाय को आगे बढ़ाया। आज उन्हें प्रतिदिन लगभग 30 लीटर दूध प्राप्त हो रहा है। दूध की बिक्री से प्रतिमाह लगभग 30 हजार रुपये की आमदनी होती है, जिसमें चारा-पानी एवं अन्य खर्च निकालने के बाद करीब 15 हजार रुपये की बचत हो रही है। संध्या की यह सफलता बताती है कि शासकीय योजनाओं से मिलने वाला सहयोग और पशुपालन के प्रति लगन ग्रामीण परिवारों के लिए नियमित आय का मजबूत आधार बन सकती है। डेयरी व्यवसाय से उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार आया है और भविष्य में व्यवसाय को और विस्तार देने की संभावनाएं भी बढ़ी हैं। वर्ष 2024 में मिला अनुदान, डेयरी व्यवसाय को मिली नई दिशा संध्या बताती हैं कि वर्ष 2024 में उन्हें छत्तीसगढ़ शासन की राज्य डेयरी उद्यमिता विकास योजना के तहत अनुदान प्राप्त हुआ। इस सहायता से गायों के पालन-पोषण और डेयरी व्यवसाय को आगे बढ़ाने में मदद मिली। उन्होंने पशुओं की देखभाल और दूध उत्पादन पर विशेष ध्यान दिया। नियमित मेहनत और बेहतर प्रबंधन से डेयरी व्यवसाय उनके परिवार के लिए आय का महत्वपूर्ण माध्यम बन गया है। प्रतिदिन 30 लीटर दूध उत्पादन, हर महीने हो रही अच्छी आमदनी संध्या के डेयरी व्यवसाय से वर्तमान में प्रतिदिन लगभग 30 लीटर दूध प्राप्त हो रहा है। दूध की बिक्री से उन्हें रोजाना करीब 1,200 रुपये की आय होती है। उनके अनुसार, महीने में लगभग 30 हजार रुपये की आमदनी हो रही है। पशुओं के चारे, पानी और अन्य आवश्यक खर्चों को निकालने के बाद उन्हें प्रतिमाह लगभग 15 हजार रुपये की बचत होती है। इस तरह डेयरी व्यवसाय से उनकी सालाना बचत करीब एक से डेढ़ लाख रुपये तक पहुंच रही है। नियमित रूप से होने वाली इस आमदनी ने संध्या को आर्थिक रूप से अधिक आत्मनिर्भर बनाया है। पशुपालन अब उनके लिए केवल घरेलू गतिविधि नहीं, बल्कि आय अर्जित करने का महत्वपूर्ण व्यवसाय बन गया है। तीन बछियां बनीं भविष्य की नई उम्मीद संध्या ने वर्तमान डेयरी व्यवसाय को आगे बढ़ाने के साथ भविष्य की भी तैयारी शुरू कर दी है। उनकी गायों से तीन बछियां प्राप्त हुई हैं, जिन्हें वे आगे प्रजनन के लिए तैयार कर रही हैं। इन बछियों के बड़े होने से आने वाले समय में उनके पशुधन में वृद्धि होने की संभावना है। इससे दूध उत्पादन बढ़ाने और डेयरी व्यवसाय का विस्तार करने के नए अवसर भी तैयार होंगे। संध्या का प्रयास बताता है कि पशुपालन से होने वाली वर्तमान आय के साथ पशुधन का विकास भी भविष्य की आर्थिक मजबूती का आधार बन सकता है। शासकीय सहयोग से आत्मनिर्भरता की राह हुई आसान राज्य डेयरी उद्यमिता विकास योजना के माध्यम से मिले अनुदान ने संध्या को अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण सहयोग दिया। उन्होंने इस अवसर का उपयोग करते हुए पशुपालन को नियमित आय के साधन के रूप में विकसित किया। संध्या ने योजना के तहत मिले सहयोग के लिए पशुधन विकास विभाग के प्रति आभार व्यक्त किया है। उनका कहना है कि विभागीय सहायता से डेयरी व्यवसाय को आगे बढ़ाने में मदद मिली और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है। लमगांव की संध्या की कहानी ग्रामीण महिलाओं और पशुपालकों के लिए प्रेरक उदाहरण है। शासकीय योजना से मिले सहयोग, पशुओं की बेहतर देखभाल और निरंतर मेहनत के माध्यम से उन्होंने डेयरी व्यवसाय को अपनी आजीविका का मजबूत आधार बनाया है। आज दूध की बिक्री से होने वाली नियमित आमदनी उनके वर्तमान को आर्थिक संबल दे रही है, वहीं बढ़ता पशुधन भविष्य में और आगे बढ़ने की उम्मीद जगा रहा है।

पर्यटन, संस्कृति, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व मंत्री राजेश अग्रवाल ने की विभागीय योजनाओं की उच्चस्तरीय समीक्षा, अधिकारियों को दिए महत्वपूर्ण निर्देश

रायपुर पर्यटन, संस्कृति, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व मंत्री  राजेश अग्रवाल ने आज नवा रायपुर स्थित अपने निवास कार्यालय में पर्यटन, संस्कृति, धर्मस्व एवं पुरातत्व विभाग की योजनाओं और विकास कार्यों की उच्चस्तरीय समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पर्यटन विकास से जुड़ी महत्वाकांक्षी परियोजनाओं को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए निर्धारित समय-सीमा में पूरा किया जाए। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक सुंदरता, ऐतिहासिक धरोहरों, धार्मिक स्थलों और समृद्ध जनजातीय संस्कृति को आधुनिक पर्यटन सुविधाओं से जोड़कर प्रदेश को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर विशिष्ट पहचान दिलाना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। इसके लिए विभागीय योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करते हुए धरातल पर परिणाम दिखाई देने चाहिए। चित्रकोट को ग्लोबल डेस्टिनेशन बनाने की तैयारी तेज मंत्री  अग्रवाल ने बस्तर के विश्वप्रसिद्ध चित्रकोट जलप्रपात को ग्लोबल डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने के लिए आवश्यक प्रक्रियाएं दो सप्ताह के भीतर पूरी करने के निर्देश दिए। उन्होंने निर्धारित समय-सीमा में डीपीआर एवं प्रेजेंटेशन तैयार कर भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय को प्रस्ताव भेजने को कहा। साथ ही सिरपुर पर्यटन विकास की तैयार डीपीआर का प्रस्तुतीकरण करने के निर्देश दिए। 144 पर्यटन स्थलों का सर्वेक्षण पूरा, 20 स्थलों पर प्राथमिकता से विकसित होंगी सुविधाएं छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड द्वारा प्रदेश के 144 पर्यटन स्थलों का गैप फिलिंग असेसमेंट पूरा कर लिया गया है। मंत्री  अग्रवाल ने सर्वेक्षण के आधार पर प्राथमिकता वाले 20 पर्यटन स्थलों में सार्वजनिक शौचालय, स्वच्छ पेयजल एवं अन्य आवश्यक सुविधाएं फास्ट ट्रैक आधार पर विकसित करने के निर्देश दिए। उन्होंने इन सुविधाओं के संचालन एवं रखरखाव के लिए स्थानीय समितियों को जिम्मेदारी देने अथवा सुलभ इंटरनेशनल जैसी संस्थाओं का सहयोग लेने को कहा। राम वनगमन पर्यटन परिपथ के 31 नए स्थलों पर दो माह में शुरू होंगे कार्य मंत्री  अग्रवाल ने राम वनगमन पर्यटन परिपथ के अंतर्गत पूर्व में विकसित स्थलों के अधूरे कार्य शीघ्र पूर्ण करने तथा निर्मित पर्यटन इकाइयों, सार्वजनिक शौचालयों और कैफेटेरिया का संचालन स्थानीय समितियों को सौंपने के निर्देश दिए। उन्होंने नवीन चिह्नित 31 स्थलों पर विकास कार्यों के लिए डीपीआर, निविदा और एजेंसी चयन सहित सभी प्रक्रियाएं दो माह के भीतर पूरी कर कार्यादेश जारी करने तथा निर्माण कार्य प्रारंभ कराने को कहा। प्रथम चरण में चयनित 10 स्थलों के अतिरिक्त बस्तर के एक-दो महत्वपूर्ण स्थलों को शामिल करने तथा आवश्यक बजट प्रस्ताव प्रस्तुत करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने माता कौशल्या धाम चंदखुरी में प्रभु राम की नवीन प्रतिमा को स्थानांतरित कर मंदिर समिति से चर्चा कर जल्द से जल्द मूर्ति स्थापना के निर्देश दिए। रामलला दर्शन योजना के लिए वैकल्पिक ट्रेन संचालन की व्यवस्था  रामलला दर्शन योजना की समीक्षा के दौरान मंत्री  अग्रवाल ने कहा कि श्रद्धालुओं को अयोध्या धाम की यात्रा में किसी प्रकार की असुविधा नहीं होनी चाहिए। आईआरसीटीसी द्वारा पेंट्री बोगी में तकनीकी समस्या के कारण ट्रेन उपलब्ध नहीं कराए जाने की स्थिति में उन्होंने एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (ईओआई) के माध्यम से पृथक एजेंसी चयनित कर वैकल्पिक ट्रेन संचालन की आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। भोरमदेव कॉरिडोर की ऑनलाइन निगरानी, होमस्टे हितग्राहियों को शीघ्र मिलेगी सब्सिडी मंत्री  अग्रवाल ने भोरमदेव कॉरिडोर के निर्माण कार्यों की नियमित समीक्षा और तकनीकी निगरानी के लिए ऑनलाइन पोर्टल विकसित करने तथा संबंधित एजेंसियों को नियमानुसार समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने होमस्टे नीति के अंतर्गत चयनित हितग्राहियों को कैपिटल सब्सिडी शीघ्र उपलब्ध कराने तथा तीन चरणों में सहायता राशि वितरण की आवश्यक तैयारी करने को कहा। पर्यटन मंडल की जिन इकाइयों को तकनीकी कारणों से निजी संस्थाओं को लीज पर देना संभव नहीं है, उनका संचालन स्थानीय समितियों के माध्यम से कराने के निर्देश दिए गए। साथ ही प्रत्येक पर्यटन इकाई में आसपास के प्रमुख पर्यटन स्थलों और उनकी दूरी दर्शाने वाले बड़े सूचना बोर्ड लगाने को कहा गया। पर्यटन मार्गों पर विकसित होंगे सुविधा केंद्र, परियोजनाओं की निगरानी के लिए इंजीनियरों की सेवाएं मंत्री  अग्रवाल ने पर्यटकों की सुविधा के लिए प्रमुख पर्यटन मार्गों पर वेसाइड एमेनिटीज विकसित करने हेतु सभी जिला कलेक्टरों से समन्वय कर भूमि चिह्नित करने और पर्यटन मंडल का लैंड बैंक तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने केंद्र एवं राज्य शासन की निर्माणाधीन पर्यटन परियोजनाओं की तकनीकी मॉनिटरिंग के लिए सर्विस प्रोवाइडर एजेंसी के माध्यम से इंजीनियरों की सेवाएं लेने पर सहमति प्रदान की। बैठक में मुख्यमंत्री पर्यटन मिशन की तैयारियों, कुदरगढ़ रोप-वे निर्माण, मंदिर परिसरों के तालाबों एवं झीलों के जीर्णाेद्धार, मुख्यमंत्री की घोषणाओं से संबंधित लंबित कार्यों तथा स्वीकृत बजट के समयबद्ध उपयोग की भी समीक्षा की गई। मंत्री  अग्रवाल ने प्रदेश के पर्यटन स्थलों को जोड़कर मिनी सर्किट विकसित करने, स्थानीय टूर ऑपरेटरों एवं ट्रैवल एजेंटों के साथ कार्यशाला आयोजित करने तथा केंद्र सरकार की परियोजनाओं के लिए डीपीआर तैयार करने के निर्देश दिए। कलाकारों के लिए डिजिटल पोर्टल होंगे सुदृढ़, पुरातात्विक धरोहरों के संरक्षण पर विशेष जोर संस्कृति विभाग की समीक्षा के दौरान मंत्री  अग्रवाल ने कलाकारों के पंजीयन हेतु संचालित चिन्हारी पोर्टल को अपडेट करने, कलाकार दलों के श्रेणी उन्नयन तथा सांस्कृतिक कार्यक्रमों के पारदर्शी आवंटन के लिए ऑनलाइन पोर्टल विकसित करने के निर्देश दिए। उन्होंने विभिन्न सांस्कृतिक पीठों के संबंधित विभागों को हस्तांतरण और पुनः संचालन की प्रक्रिया शीघ्र पूरी करने को कहा। पुरातत्व विभाग की समीक्षा में सिरपुर के सुरंग टीला और नवा रायपुर स्थित पुरखौती मुक्तांगन में लाइट एंड साउंड शो का नियमित संचालन सुनिश्चित करने, अंबिकापुर जिला पुरातत्व संग्रहालय के उन्नयन तथा रायपुर के महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय में ऐतिहासिक रियासतों से जुड़ी सामग्री के व्यवस्थित प्रदर्शन के निर्देश दिए गए। बैठक में युवा दर्शन योजना में खिलाड़ियों को शामिल करने तथा फिल्म सिटी एवं ट्राइबल कन्वेंशन सेंटर के कार्यों में तेजी लाने पर भी चर्चा हुई। मंत्री  अग्रवाल ने अधिकारियों को सभी परियोजनाओं की नियमित मॉनिटरिंग करने, लंबित प्रकरणों का शीघ्र निराकरण सुनिश्चित करने तथा अगली समीक्षा बैठक में प्रत्येक निर्देश पर की गई कार्रवाई का अद्यतन प्रगति प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पर्यटन विकास के साथ स्थानीय समुदाय की भागीदारी और रोजगार सृजन को बढ़ावा देना भी आवश्यक है। बैठक में पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन, छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के प्रबंध संचालक  सौमिल रंजन चौबे, संस्कृति विभाग के संचालक डॉ. संजय कन्नौजे, पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के उपसचिव  अभिषेक गुप्ता, पर्यटन मंडल … Read more

*विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा हमारी जनजातीय संस्कृति, आस्था और सामूहिक सहभागिता की अनुपम विरासत : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय*

रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से आज शाम राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में बस्तर सांसद महेश कश्यप के नेतृत्व में बस्तर दशहरा समिति, जगदलपुर के प्रतिनिधिमंडल ने सौजन्य मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री साय को विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा पर्व 2026 में शामिल होने के लिए सादर आमंत्रित किया। इस अवसर पर बस्तर की समृद्ध जनजातीय परंपरा के अनुरूप प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को पारंपरिक पागा पहनाकर उनका सम्मान किया। मुख्यमंत्री साय ने आत्मीय आमंत्रण के लिए प्रतिनिधिमंडल का आभार व्यक्त करते हुए बस्तर दशहरा के सफल आयोजन के लिए अपनी शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि बस्तर दशहरा केवल एक पर्व नहीं, बल्कि बस्तर की सदियों पुरानी आस्था, समृद्ध जनजातीय संस्कृति, परंपराओं और सामूहिक सहभागिता की अनुपम विरासत है। इस पर्व में बस्तर की सांस्कृतिक आत्मा और सामाजिक समरसता की सुंदर अभिव्यक्ति दिखाई देती है। हमारी सरकार बस्तर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और जनजातीय परंपराओं के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए प्रतिबद्ध है। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को बस्तर दशहरा की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, इससे जुड़े धार्मिक अनुष्ठानों, परंपराओं तथा इस वर्ष के आयोजन की तैयारियों के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। *75 दिनों तक चलती है आस्था और परंपरा की अनूठी यात्रा* प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को बताया कि विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा लगभग 75 दिनों तक चलने वाला विशिष्ट सांस्कृतिक और धार्मिक पर्व है। हरेली अमावस्या से इसकी पारंपरिक शुरुआत होती है और विभिन्न पूजा-विधानों एवं अनुष्ठानों के साथ यह पर्व आश्विन शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तक चलता है। इस वर्ष 12 अगस्त को पाटजात्रा पूजा विधान के साथ बस्तर दशहरा पर्व का शुभारंभ हुआ। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 10 अक्टूबर को काछनगादी पूजा, 18 अक्टूबर को बेल पूजा तथा 23 अक्टूबर को मुरिया दरबार का आयोजन किया जाएगा। बस्तर दशहरा के विभिन्न अनुष्ठानों में अंचल के अलग-अलग समुदायों की परंपरागत और महत्वपूर्ण भागीदारी रहती है। *मां दंतेश्वरी की आराधना से जुड़ा है बस्तर दशहरा* बस्तर दशहरा अपनी विशिष्ट परंपराओं के कारण देश-दुनिया में अलग पहचान रखता है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि बस्तर में दशहरा भगवान श्रीराम की रावण पर विजय के उत्सव के रूप में नहीं, बल्कि बस्तर अंचल की आराध्य देवी मां दंतेश्वरी के प्रति आस्था और आराधना के महापर्व के रूप में मनाया जाता है। बस्तर दशहरा की परंपरा को ऐतिहासिक मान्यताओं में चालुक्य नरेश पुरुषोत्तम देव से भी जोड़ा जाता है। मान्यता है कि पुरुषोत्तम देव ने पुरी स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर की यात्रा की थी, जहां उन्हें ‘रथपति’ की उपाधि प्राप्त हुई। इसी ऐतिहासिक परंपरा के साथ बस्तर दशहरा में रथ का विशेष महत्व जुड़ा हुआ है। बस्तर दशहरा में मांझी, चालकी, मेम्बर-मेम्बरीन सहित विभिन्न समुदायों और समाज के अलग-अलग वर्गों की जिम्मेदारियां परंपरागत रूप से निर्धारित हैं। धार्मिक अनुष्ठानों से लेकर रथ निर्माण और आयोजन की विभिन्न व्यवस्थाओं तक स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी इसकी विशेषता है। पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही सामूहिक सहभागिता की यह परंपरा बस्तर दशहरा को सामाजिक एकता और सांस्कृतिक समन्वय का अनूठा उदाहरण बनाती है। *देश-दुनिया को आकर्षित करती है बस्तर की जीवंत संस्कृति* विश्व प्रसिद्ध बस्तर दशहरा अपनी भव्य रथयात्रा, विशिष्ट पूजा-अनुष्ठानों, जनजातीय परंपराओं और लोक संस्कृति के कारण देश-विदेश के श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र है। हर वर्ष बड़ी संख्या में लोग इस ऐतिहासिक आयोजन और बस्तर की जीवंत संस्कृति को करीब से देखने के लिए पहुंचते हैं। बस्तर दशहरा जहां सदियों पुरानी सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम है, वहीं यह बस्तर की लोक कला, परंपराओं और पर्यटन को भी व्यापक पहचान देता है। विभिन्न समुदायों की सामूहिक भागीदारी और मां दंतेश्वरी के प्रति अगाध आस्था इस पर्व को विशिष्ट स्वरूप प्रदान करती है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि बस्तर की संस्कृति छत्तीसगढ़ की अमूल्य धरोहर है। बस्तर दशहरा जैसी परंपराएं हमें अपनी जड़ों से जोड़ती हैं और नई पीढ़ी को अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराती हैं। इन परंपराओं का संरक्षण और उन्हें देश-दुनिया तक पहुंचाना हम सभी की साझा जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री को आमंत्रण देने पहुंचे प्रतिनिधिमंडल में बस्तर सांसद महेश कश्यप, परगनाकरेकोट के  मंगलु मांझी,  बलराम मांझी, श्री पदम् चालकी, समारू चालकी, डमरू चालकी, लक्ष्मण मांझी सहित अनेक मांझी, चालकी, मेम्बर-मेम्बरीन एवं बस्तर दशहरा समिति के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

जेन नेक्स्ट संवाद में जेन-जी और जेन-अल्फा से रूबरू हुए मुख्यमंत्री

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने कहा कि भारत दुनिया का सबसे युवा देश है और यही युवा शक्ति विकसित एवं सशक्त भारत के निर्माण की सबसे बड़ी ताकत बनेगी। उन्होंने युवाओं से बड़े सपने देखने, अपनी रुचि के अनुरूप लक्ष्य तय करने और पूरी मेहनत एवं समर्पण के साथ उन्हें हासिल करने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि जीवन में सफलता के लिए समय का सदुपयोग, निरंतर परिश्रम और अपने लक्ष्य के प्रति दृढ़ संकल्प सबसे महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री  साय आज शाम राजधानी रायपुर के सड्डू में न्यूज 24 और लल्लूराम डॉट कॉम द्वारा आयोजित ‘जेन नेक्स्ट संवाद 'यंग माइंड्स, मीनिंगफुल कन्वर्सेशंस’ कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान मुख्यमंत्री जेन-जी और जेन-अल्फा के विद्यार्थियों से रूबरू हुए। विद्यार्थियों ने मुख्यमंत्री से उनके जीवन के संघर्ष, राजनीति, शिक्षा, राज्य के आर्थिक विकास, प्रतियोगी परीक्षाओं और जल संरक्षण सहित विभिन्न विषयों पर सवाल किए। मुख्यमंत्री  साय ने सहज और आत्मीय अंदाज में युवाओं के सवालों के जवाब दिए और अपने जीवन के अनुभव भी साझा किए। प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में दुनिया में बढ़ा भारत का मान-सम्मान मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि गुजरात के मुख्यमंत्री और देश के प्रधानमंत्री के रूप में जनता की सेवा करते हुए प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी ने 25 वर्ष पूरे किए हैं। इस अवसर पर पूरे देश में सेवा संकल्प अभियान मनाया जा रहा है।  मुख्यमंत्री  साय ने स्वच्छ भारत मिशन का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी ने जब लाल किले की प्राचीर से स्वच्छता का आह्वान किया था, तब इसे लेकर सवाल भी उठाए गए थे। आज स्वच्छता जन-जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है। घर-घर शौचालय के निर्माण से माताओं-बहनों के सम्मान और स्वास्थ्य की रक्षा हुई तथा गांवों को खुले में शौच से मुक्ति मिली। स्वच्छ भारत मिशन ने स्वच्छता के प्रति सोच और व्यवहार दोनों में बड़ा बदलाव लाया है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में भारत निरंतर सशक्त और समृद्ध राष्ट्र के रूप में आगे बढ़ रहा है। सर्जिकल स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर ने दुनिया को भारत के सामर्थ्य और दृढ़ इच्छाशक्ति से परिचित कराया है। उन्होंने कहा कि आर्थिक दृष्टि से भी भारत ने उल्लेखनीय प्रगति की है।  प्रधानमंत्री  मोदी ने वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण का संकल्प लिया है और आज पूरी दुनिया में भारत का मान-सम्मान बढ़ा है। मुख्यमंत्री  साय ने अपने हालिया सिंगापुर प्रवास का उल्लेख करते हुए कहा कि चार दिनों के प्रवास के दौरान उनकी अनेक प्रमुख कंपनियों के प्रतिनिधियों से चर्चा हुई। वहां उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने भी प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती प्रतिष्ठा का उल्लेख किया। अपना बचपन याद कर मुख्यमंत्री ने बताया – कितना बदल गया है शिक्षा का परिदृश्य युवाओं से संवाद के दौरान मुख्यमंत्री  साय ने अपने विद्यार्थी जीवन की स्मृतियां भी साझा कीं। उन्होंने कहा कि आप सभी से चर्चा करते हुए मुझे अपना बचपन याद आ रहा है। जब मैं बगिया गांव के प्राथमिक विद्यालय में पढ़ता था, तब हमारे स्कूल में पांचवीं बोर्ड की परीक्षा देने की व्यवस्था तक नहीं थी। परीक्षा देने के लिए कई किलोमीटर दूर दूसरे गांव जाना पड़ा और वहां पांच दिनों तक रुककर परीक्षा दी। उस समय स्कूल भवन भी कच्चे होते थे और बारिश के दिनों में छत से पानी टपकता था। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज परिस्थितियां पूरी तरह बदल चुकी हैं। छत्तीसगढ़ में शिक्षा के क्षेत्र में तेजी से विस्तार हुआ है और उच्च शिक्षा की विभिन्न संस्थाएं प्रदेश में उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि पहले राज्य में केवल एक मेडिकल कॉलेज था, जबकि आज 15 मेडिकल कॉलेज हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि आज उन्हें शिक्षा के जो अवसर और सुविधाएं मिल रही हैं, उनका भरपूर सदुपयोग करें और अपने उज्ज्वल भविष्य का निर्माण करें। “कभी नहीं सोचा था सरपंच भी बनूंगा, ईश्वर ने मुख्यमंत्री तक पहुंचा दिया” बीबीए के छात्र अश्मित शिंदे ने मुख्यमंत्री से पूछा कि उन्हें मुख्यमंत्री बनने की प्रेरणा कैसे मिली। सवाल का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री  साय ने अपने जीवन के संघर्षपूर्ण दौर को याद किया। उन्होंने कहा कि मैं जशपुर के बगिया जैसे छोटे से गांव में पला-बढ़ा हूं। जब मैं लगभग 10 वर्ष का था, तब मेरे पिता का आकस्मिक निधन हो गया। भाइयों में सबसे बड़ा होने के कारण छोटी उम्र में ही छोटे भाइयों, मां और दादी की जिम्मेदारी मेरे कंधों पर आ गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने पढ़ाई के साथ खेती-बाड़ी संभाली और छोटे भाइयों को सक्षम बनाने का प्रयास किया। उस समय कभी यह कल्पना भी नहीं की थी कि गांव का सरपंच बनूंगा। सार्वजनिक जीवन में आगे बढ़ते हुए सरपंच से विधायक, सांसद, केंद्रीय राज्यमंत्री और आज मुख्यमंत्री के रूप में प्रदेश की सेवा करने का अवसर मिला। मुख्यमंत्री  साय ने युवाओं से कहा कि उन्होंने हमेशा ‘कर्म ही पूजा है’ के सिद्धांत को जीवन में अपनाया। जो भी जिम्मेदारी मिली, उसे पूरी निष्ठा और ईमानदारी से निभाने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि यदि हम अच्छे उद्देश्य से पूरी निष्ठा के साथ काम करते हैं तो ईश्वर भी हमारा साथ देता है। शायद ईश्वर को मेरे हाथों से लोगों की सेवा करानी थी, इसलिए एक छोटे से गांव के सरपंच को मुख्यमंत्री पद तक पहुंचने का अवसर मिला। समय की कीमत समझें, अपनी रुचि को बनाएं लक्ष्य छात्र करण भोसले ने मुख्यमंत्री से उनके जीवन का मूल मंत्र पूछा। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को समय की कीमत समझनी चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि अभी उनका समय अध्ययन और अपने भविष्य की मजबूत नींव तैयार करने का है। इस समय का जितना अधिक सदुपयोग करेंगे, भविष्य उतना ही बेहतर होगा। सपने हमें मेहनत करने की प्रेरणा देते हैं। हर युवा को अपनी रुचि पहचाननी चाहिए, उसी के अनुरूप लक्ष्य निर्धारित करना चाहिए और उसे हासिल करने के लिए पूरी ऊर्जा से प्रयास करना चाहिए। “जल है तो कल है”—जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने का आह्वान कक्षा नवमीं के छात्र आदित्य राज तिवारी ने मुख्यमंत्री  साय से पूछा कि स्कूली विद्यार्थी जल संरक्षण में किस प्रकार योगदान दे सकते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि “जल है तो कल है।” जलस्तर लगातार नीचे जा … Read more

रायपुर की फुटबॉल अकादमी से टीम इंडिया तक किरण की उड़ान, रूस के खिलाफ दिखाएंगी दम

रायपुर छत्तीसगढ़ की बेटी किरण पिस्दा अब भारतीय महिला फुटबॉल टीम की जर्सी में अंतरराष्ट्रीय मैदान पर अपना दमखम दिखाएंगी। खेल एवं युवा कल्याण विभाग की रायपुर आवासीय बालिका फुटबॉल अकादमी की इस प्रतिभावान खिलाड़ी का भारतीय सीनियर महिला फुटबॉल टीम में चयन हुआ है। किरण की इस कामयाबी ने एक बार फिर साबित किया है कि राज्य सरकार का प्रोत्साहन, बेहतर खेल सुविधाएं और व्यवस्थित प्रशिक्षण मिलने पर प्रदेश की बेटियां अंतरराष्ट्रीय स्तर तक अपनी पहचान बना सकती हैं। किरण की उपलब्धि से उत्साहित उप मुख्यमंत्री तथा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री  अरुण साव ने उनसे वीडियो कॉल पर बातचीत कर बधाई दी। उन्होंने कहा कि किरण ने अपनी मेहनत और प्रतिभा से पूरे छत्तीसगढ़ को गौरवान्वित किया है। उप मुख्यमंत्री  अरुण साव ने किरण पिस्दा को बधाई देते हुए कहा कि भारतीय महिला फुटबॉल टीम में उनका चयन पूरे प्रदेश के लिए गर्व का विषय है। यह उनकी प्रतिभा, कठिन परिश्रम और निरंतर प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने किरण के माता-पिता, प्रशिक्षकों और रायपुर आवासीय बालिका फुटबॉल अकादमी को भी इस उपलब्धि के लिए बधाई दी।  साव ने विश्वास जताया कि किरण भारतीय टीम के लिए शानदार प्रदर्शन कर छत्तीसगढ़ का नाम रोशन करेंगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश की प्रतिभाशाली बेटियों को बेहतर प्रशिक्षण, आधुनिक खेल सुविधाएं और राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखाने के अवसर उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। किरण की इस सफलता में खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा संचालित बालिका फुटबॉल अकादमी की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। अकादमी में मिले नियमित प्रशिक्षण, अनुशासित वातावरण, तकनीकी मार्गदर्शन और प्रतिस्पर्धात्मक अवसरों ने किरण की प्रतिभा को निखारने में अहम योगदान दिया है। राज्य सरकार द्वारा खिलाड़ियों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं और प्रोत्साहन का ही परिणाम है कि अकादमी की खिलाड़ी अब भारतीय सीनियर महिला फुटबॉल टीम तक पहुंच रही हैं। विभाग का उद्देश्य प्रदेश की खेल प्रतिभाओं को व्यवस्थित प्रशिक्षण देकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धाओं के लिए तैयार करना है। किरण की सफलता इस दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। भारतीय सीनियर महिला टीम में किरण पिस्दा की यह शानदार वापसी भी है। इससे पहले वे वर्ष 2022 में नेपाल में आयोजित एसएएफएफ वीमेन्स चैंपियनशिप (SAFF Women's Championship) में भारतीय सीनियर महिला टीम का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। अब इस महीने होने वाले फीफा (FIFA) इंटरनेशनल मैच विंडो में उन्हें रूस के खिलाफ दो अंतरराष्ट्रीय मैत्री मुकाबलों के लिए भारतीय टीम में चुना गया है। पहला मुकाबला 8 अक्टूबर को शाम छह बजे कोलकाता के किशोर भारती क्रीड़ांगन में निर्धारित है। दूसरा मुकाबला 11 अक्टूबर को इसी मैदान पर खेला जाएगा। इन मुकाबलों में किरण को एक बार फिर सीनियर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा। किरण को राष्ट्रीय टीम तक पहुंचाने में रायपुर आवासीय बालिका फुटबॉल अकादमी की कोच सरिता कुजूर के प्रशिक्षण और मार्गदर्शन की भी अहम भूमिका है। सरिता कुजूर खिलाड़ियों के तकनीकी कौशल के साथ उनकी मानसिक मजबूती, आत्मविश्वास, निर्णय लेने की क्षमता और मैच के दबाव में बेहतर प्रदर्शन करने पर विशेष ध्यान देती हैं। खिलाड़ियों के खेल का नियमित आकलन कर उनकी तकनीकी एवं मानसिक कमियों को दूर करना उनकी प्रशिक्षण पद्धति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। किरण की सफलता में इस निरंतर प्रशिक्षण और व्यक्तिगत मार्गदर्शन का बड़ा योगदान रहा है। खेल एवं युवा कल्याण विभाग की संचालक मती आकांक्षा शिक्षा खलखो ने भी किरण पिस्दा के भारतीय महिला फुटबॉल टीम में चयन पर बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि किरण की उपलब्धि प्रदेश की खेल प्रतिभाओं के लिए गौरव का विषय है। यह उनकी कड़ी मेहनत, प्रशिक्षकों के मार्गदर्शन और परिवार के सहयोग का परिणाम है। उन्होंने विश्वास जताया कि किरण की सफलता छत्तीसगढ़ की अन्य बालिका खिलाड़ियों को भी बड़े लक्ष्य निर्धारित करने और उन्हें हासिल करने के लिए प्रेरित करेगी। रायपुर की आवासीय फुटबॉल अकादमी से भारतीय सीनियर टीम तक किरण पिस्दा का सफर प्रदेश में खेल प्रतिभाओं को निखारने के लिए किए जा रहे प्रयासों की अहम सफलता है। राज्य सरकार के प्रोत्साहन और अकादमी में मिले तकनीकी एवं मानसिक प्रशिक्षण ने उनकी प्रतिभा को नई ऊंचाई दी है। अब छत्तीसगढ़ के खेलप्रेमियों की निगाहें रूस के खिलाफ होने वाले अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों पर हैं, जहां प्रदेश की यह बेटी भारतीय टीम की ओर से अपने खेल के प्रदर्शन के लिए तैयार है।

जीएसटी कानून से गिरफ्तारी की शक्ति हटाने की सिफारिश, मुकदमा चलाने की सीमा एक करोड़ से बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव

रायपुर प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की कर व्यवस्था को सरल, पारदर्शी और व्यापार अनुकूल बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। नई दिल्ली के भारत मंडपम में केंद्रीय वित्त मंत्री मती निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में आयोजित 57वीं जीएसटी परिषद की बैठक में व्यापारियों, उद्यमियों और उद्योग जगत को बड़ी राहत देने वाले अनेक महत्वपूर्ण प्रक्रियागत सुधारों की सिफारिश की गई है। बैठक में शामिल छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री  ओ.पी. चौधरी ने इन निर्णयों को व्यापार सुगमता, कर प्रशासन में पारदर्शिता और उद्यमिता को प्रोत्साहन देने की दिशा में युगांतकारी सुधार बताया है। वित्त मंत्री  चौधरी ने बैठक के उपरांत कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले वर्ष जीएसटी 2.0 के माध्यम से कर की दरों में व्यापक सुधार कर देश की जनता और व्यापार जगत को बड़ी राहत दी गई थी। अब 57वीं जीएसटी परिषद की बैठक में प्रक्रियागत सुधारों (Procedural Reforms) और प्रक्रियाओं के सरलीकरण (Procedural Simplification) पर विशेष जोर दिया गया है। इन सुधारों का उद्देश्य व्यापारियों पर अनावश्यक अनुपालन बोझ कम करना, कर प्रशासन को अधिक जवाबदेह बनाना और कारोबार के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करना है। जीएसटी कानून से गिरफ्तारी की शक्ति हटाने की सिफारिश, छोटे मामलों में मिलेगी राहत वित्त मंत्री  चौधरी ने बताया कि जीएसटी परिषद ने कर कानून से गिरफ्तारी की शक्ति से संबंधित धारा 69 को हटाने की महत्वपूर्ण सिफारिश की है। इसके साथ ही मुकदमा चलाने के लिए कर राशि की सीमा वर्तमान एक करोड़ रुपये से बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव है। सामान्य जुर्माने की राशि भी 25 हजार रुपये से घटाकर अधिकतम 10 हजार रुपये करने की सिफारिश की गई है। उन्होंने कहा कि इन बदलावों का उद्देश्य सामान्य प्रक्रियागत त्रुटियों और छोटे मामलों में व्यापारियों को अनावश्यक कानूनी परेशानियों से राहत देना है। हालांकि जानबूझकर कर चोरी और धोखाधड़ी करने वालों के विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई जारी रहेगी। इससे ईमानदारी से व्यापार करने वाले करदाताओं का विश्वास बढ़ेगा और कर प्रशासन अधिक संतुलित एवं व्यावहारिक बनेगा। ई-वे बिल जांच में बड़े बदलाव, मालवाहक वाहनों की आवाजाही होगी सुगम वित्त मंत्री  चौधरी ने कहा कि ई-वे बिल की जांच से संबंधित प्रक्रियाओं में भी महत्वपूर्ण सुधार प्रस्तावित किए गए हैं। नए प्रावधानों के अनुसार किसी मालवाहक वाहन को जांच के लिए रोकने से पहले ठोस सूचना होना आवश्यक होगा। इसके लिए संयुक्त आयुक्त अथवा उससे उच्च स्तर के अधिकारी की अनुमति भी अनिवार्य होगी। उन्होंने बताया कि ई-वे बिल की जांच संबंधित राज्य में ही की जा सकेगी, जहां माल भेजने वाला अथवा प्राप्त करने वाला स्थित हो। केवल रास्ते में पड़ने वाले राज्यों में मालवाहक वाहनों को जांच के नाम पर नहीं रोका जाएगा।  चौधरी ने कहा कि इन सुधारों से परिवहन के दौरान होने वाली अनावश्यक देरी कम होगी। माल की आवाजाही तेज होने के साथ लॉजिस्टिक्स लागत घटाने, आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाने और व्यापारिक गतिविधियों को सुगम बनाने में मदद मिलेगी। इसका लाभ छत्तीसगढ़ सहित देशभर के व्यापारियों, परिवहन व्यवसायियों और औद्योगिक इकाइयों को मिलेगा। रिफंड प्रक्रिया होगी स्वचालित, व्यापारियों की फंसी पूंजी जल्द होगी उपलब्ध वित्त मंत्री  चौधरी ने बताया कि जीएसटी रिफंड प्रणाली को अधिक तेज, पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने के लिए महत्वपूर्ण सुधारों की सिफारिश की गई है। इसके अंतर्गत इलेक्ट्रॉनिक कैश लेजर में जमा अतिरिक्त राशि का पूरा रिफंड सिस्टम द्वारा स्वतः स्वीकृत किया जा सकेगा। इसके लिए किसी अधिकारी की अलग से मंजूरी लेने की आवश्यकता नहीं होगी। उन्होंने बताया कि निर्यात और उलटे शुल्क ढांचे (Inverted Duty Structure) से संबंधित मामलों में रिफंड दावे की 90 प्रतिशत राशि तत्काल मंजूर करने का प्रावधान प्रस्तावित है। साथ ही रिफंड आवेदन की जांच की समय-सीमा 15 दिन से घटाकर 10 दिन करने की सिफारिश की गई है।  चौधरी ने कहा कि रिफंड प्रक्रिया में तेजी आने से व्यापारियों और उद्यमियों की कार्यशील पूंजी लंबे समय तक अटकी नहीं रहेगी। समय पर राशि उपलब्ध होने से व्यवसाय संचालन, उत्पादन और नए निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा। विशेष रूप से निर्यातकों और छोटे एवं मध्यम उद्योगों को इससे बड़ी सुविधा मिलेगी। जीएसटी पंजीयन होगा आसान, छोटे ऑनलाइन विक्रेताओं को बड़ी सुविधा वित्त मंत्री  चौधरी ने कहा कि जीएसटी पंजीयन और उसमें संशोधन की प्रक्रियाओं को भी सरल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। प्रस्तावित व्यवस्था के अंतर्गत मुख्य व्यवसाय स्थल को छोड़कर पंजीयन संबंधी अन्य जानकारियों में संशोधन पोर्टल के माध्यम से स्वतः किया जा सकेगा। इसी प्रकार पंजीयन निरस्त कराने की प्रक्रिया भी अधिक सरल और स्वचालित होगी। उन्होंने बताया कि ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के माध्यम से वस्तुओं की बिक्री करने वाले छोटे व्यापारियों को भी राहत देने की सिफारिश की गई है। ऐसे विक्रेताओं को प्रत्येक राज्य में अलग कार्यालय स्थापित करने की अनिवार्यता से राहत मिलेगी।  चौधरी ने कहा कि डिजिटल व्यापार और ई-कॉमर्स के तेजी से बढ़ते अवसरों को देखते हुए यह सुधार अत्यंत महत्वपूर्ण है। इससे छोटे व्यापारियों, स्टार्टअप और नए उद्यमियों को कम लागत में अपने उत्पादों को देशभर के बाजारों तक पहुंचाने में सहायता मिलेगी। इनपुट टैक्स क्रेडिट का दायरा बढ़ेगा, उद्योगों की लागत कम करने में मिलेगी मदद वित्त मंत्री  चौधरी ने बताया कि जीएसटी परिषद ने इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) की सुविधा का दायरा बढ़ाने संबंधी महत्वपूर्ण सिफारिशें भी की हैं। प्रस्तावित प्रावधानों के अंतर्गत आउटडोर कैटरिंग, स्वास्थ्य एवं जीवन बीमा, टेलीकॉम टावर तथा फैक्ट्री परिसर के बाहर स्थापित पाइपलाइन पर भी पात्रता के अनुसार इनपुट टैक्स क्रेडिट की सुविधा उपलब्ध हो सकेगी। उन्होंने कहा कि इनपुट टैक्स क्रेडिट का विस्तार होने से कर पर कर लगने की समस्या कम होगी तथा उद्योगों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की लागत घटाने में सहायता मिलेगी। इससे औद्योगिक निवेश, उत्पादन क्षमता और उद्यमिता को प्रोत्साहन मिलेगा। छोटे करदाताओं को नोटिस और जुर्माने में राहत, लेट फीस में भी मिलेगी छूट वित्त मंत्री  चौधरी ने कहा कि जीएसटी परिषद की सिफारिशों में छोटे व्यापारियों और सामान्य करदाताओं को अनावश्यक कानूनी एवं आर्थिक बोझ से राहत देने पर विशेष ध्यान दिया गया है। प्रस्तावित प्रावधानों के अनुसार 10 हजार रुपये से कम कर राशि वाले मामलों में नोटिस जारी नहीं किया जाएगा। इसी प्रकार धोखाधड़ी से संबंधित नहीं होने वाले मामलों में निर्धारित समय … Read more

शांति, सुरक्षा, विश्वास और विकास ने बस्तर में खोलीं नई संभावनाएं, कहा-आने वाले समय में बनेगा देश का अग्रणी संभाग

रायपुर अविभाजित मध्यप्रदेश के समय प्रशासनिक सेवाओं में अपनी महत्वपूर्ण सेवाएं दे चुके 11 सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारियों ने बस्तर के बदलते स्वरूप को करीब से देखा। बस्तर प्रवास के दौरान शांति, सुरक्षा, विश्वास और विकास की दिशा में हो रहे बदलावों से रूबरू होकर उन्होंने कहा कि बस्तर अब एक नए दौर में प्रवेश कर चुका है। यहां विकास की असीम संभावनाएं मौजूद हैं और आने वाले समय में बस्तर देश के अग्रणी संभागों में अपनी पहचान स्थापित करेगा। इन सेवानिवृत्त अधिकारियों में  बीएल कुरिल, मति रेणु तिवारी,  मनोहर दुबे,  सुरेन्द्र उपाध्याय,  एसएन रूपला,  भरत अग्रवाल,  टीसी महावर,  डीडी सिंह, मति जय कियावत, मति सुनीता त्रिपाठी,  उल्हास तेलंग शामिल रहे। सेवानिवृत्त अधिकारियों ने बस्तर की प्राकृतिक सुंदरता, समृद्ध संस्कृति और यहां के जनजीवन को करीब से जाना-समझा। उन्होंने चित्रकोट जलप्रपात और तीरथगढ़ जलप्रपात सहित बस्तर के प्रमुख पर्यटन स्थलों का भ्रमण किया। प्रकृति की अनुपम छटा से अभिभूत अधिकारियों ने कहा कि बस्तर प्राकृतिक संपदा के साथ-साथ सांस्कृतिक और मानवीय विविधताओं से भी समृद्ध क्षेत्र है। यहां की लोक परंपराएं, कला-संस्कृति और विरासत इसकी विशिष्ट पहचान हैं।यह सब बस्तर में पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ ही पर्यटकों को आकर्षित करेगा। सरल-सहज और मेहनतकश हैं बस्तर के लोग बस्तर के ग्रामीण अंचलों और लोगों के जीवन को करीब से देखने के बाद सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारियों ने कहा कि यहां के लोग बेहद सीधे-सरल, सहज और मेहनती हैं। विपरीत परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपनी संस्कृति और परंपराओं को सहेजकर रखा है। अधिकारियों ने कहा कि बस्तर की सबसे बड़ी ताकत यहां के लोग हैं, जिनकी मेहनत, सहजता और अपनी संस्कृति के प्रति गहरा जुड़ाव क्षेत्र के विकास को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। मां दंतेश्वरी के दर्शन कर मांगा बस्तर की सुख-समृद्धि का आशीर्वाद बस्तर प्रवास के दौरान सेवानिवृत्त अधिकारियों ने बस्तर की आराध्य देवी मां दंतेश्वरी के दर्शन किए। उन्होंने मां दंतेश्वरी से बस्तर वासियों की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की। उन्होंने कहा कि बस्तर की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पहचान पूरे देश में विशिष्ट है, जिसे संरक्षित रखते हुए विकास की नई संभावनाओं को आगे बढ़ाया जाना चाहिए। अमर वाटिका में शहीद जवानों को दी श्रद्धांजलि  इन सेवानिवृत्त अधिकारियों ने जगदलपुर स्थित अमर वाटिका पहुंचकर कर्तव्यपथ पर अपने प्राण न्यौछावर करने वाले शहीद जवानों को पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि बस्तर में शांति और सुरक्षा स्थापित करने में सुरक्षा बलों के जवानों का त्याग और बलिदान सदैव स्मरणीय रहेगा। उनके बलिदान के कारण आज बस्तर विकास और विश्वास के नए रास्ते पर आगे बढ़ रहा है। पुनर्वासित युवाओं का बढ़ाया हौसला  जगदलपुर स्थित पण्डुम कैफे में सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारियों ने पुनर्वासित युवाओं से भी मुलाकात की। उन्होंने युवाओं से संवाद करते हुए उनके अनुभव जाने और समाज की मुख्यधारा में शामिल होकर विकास की राह पर आगे बढ़ने के उनके संकल्प की सराहना की। अधिकारियों ने युवाओं का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि नई शुरुआत के साथ अपने परिवार और समाज के विकास में योगदान देना ही भविष्य को बेहतर बनाने का सबसे मजबूत रास्ता है। इस दौरान कमिश्नर बस्तर  डोमन सिंह ने इन सेवानिवृत्त अधिकारियों से भेंटकर बस्तर में आकर यहां के लोगों का हौसला-अफजाई करने आभार जताया। माओवाद का खात्मा बस्तर के भविष्य के लिए बड़ी उपलब्धि उक्त सेवानिवृत्त अधिकारियों ने बस्तर में माओवाद के खात्मे को क्षेत्र के भविष्य के लिए एक बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि शांति और सुरक्षा के वातावरण में शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, पर्यटन, कृषि और अन्य क्षेत्रों में विकास की अपार संभावनाएं खुली हैं। बस्तर में विश्वास का वातावरण मजबूत हुआ है और इसका सकारात्मक प्रभाव आमजन के जीवन में दिखाई दे रहा है। उन्होंने बस्तर वासियों को इस बदलाव के लिए बधाई देते हुए कहा कि शांति और विकास की यह यात्रा बस्तर को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी। प्राकृतिक संपदा, समृद्ध संस्कृति, मेहनतकश जनसमुदाय और तेजी से मजबूत हो रही अधोसंरचना के साथ बस्तर आने वाले समय में विकास का अग्रणी केंद्र बनने की क्षमता रखता है।

पिछले 18 महीनों में फार्मा क्षेत्र के 54 निवेश प्रस्ताव, लगभग 19,477 करोड़ रुपए के प्रस्तावित निवेश और 18,646 रोजगार सृजन की संभावना

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश फार्मा, बायोटेक और मेडिकल डिवाइस क्षेत्र में निवेश के लिए व्यापक अवसर उपलब्ध करा रहा है। प्रदेश में दवा निर्माण, सक्रिय औषधीय घटक (एपीआई), अनुसंधान, परीक्षण और चिकित्सा उपकरणों के उत्पादन की संपूर्ण मूल्य श्रृंखला विकसित करना राज्य सरकार का लक्ष्य है। मध्यप्रदेश की केंद्रीय भौगोलिक स्थिति, विकसित औद्योगिक क्लस्टर, कुशल मानव संसाधन और निवेश प्रोत्साहन इस दिशा में मजबूत आधार प्रदान करते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मुंबई में फार्मा सेक्टर की राउंड टेबल चर्चा में प्रमुख उद्योग प्रतिनिधियों से संवाद किया। चर्चा में प्रदेश में फार्मा विनिर्माण, अनुसंधान एवं विकास, निर्यात और नई तकनीक पर आधारित निवेश की संभावनाओं पर विचार-विमर्श हुआ। भारत की फार्मा विकास यात्रा में मध्यप्रदेश की मजबूत भागीदारी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारत आज “फार्मेसी ऑफ द वर्ल्ड” के रूप में पहचाना जाता है। भारतीय दवाएं 200 से अधिक वैश्विक बाजारों तक पहुंच रही हैं। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का फार्मा निर्यात 30.47 बिलियन अमेरिकी डॉलर रहा। इस राष्ट्रीय विकास यात्रा में मध्यप्रदेश एक मजबूत, भरोसेमंद और तेजी से उभरता हुआ भागीदार है। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश में निर्मित फार्मा उत्पाद 160 से अधिक देशों तक पहुंचते हैं। वर्ष 2023-24 में प्रदेश से लगभग 11,889 करोड़ रुपए के फार्मा उत्पादों का निर्यात दर्ज किया गया। प्रदेश का मौजूदा विनिर्माण आधार और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों से जुड़ाव नई निवेश परियोजनाओं के लिए अवसर उपलब्ध कराता है। प्रदेश में 300 से अधिक फार्मा कंपनियां, विकसित क्लस्टर और कुशल मानव संसाधन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि प्रदेश में 300 से अधिक फार्मा कंपनियां और 30 से अधिक एपीआई एवं बल्क ड्रग विनिर्माता हैं। इंदौर, पीथमपुर-धार, भोपाल-रायसेन, उज्जैन, ग्वालियर, जबलपुर, देवास, भिंड और मुरैना में फार्मा उद्योग का आधार विकसित हुआ है। इंदौर क्लस्टर में 96 से अधिक, पीथमपुर-धार में 57 से अधिक और भोपाल-रायसेन में 36 से अधिक फार्मा इकाइयां दर्ज हैं। प्रदेश में 40 मेडिकल कॉलेज, 200 से अधिक फार्मेसी कॉलेज और 140 से अधिक इंजीनियरिंग कॉलेज उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश निवेशकों को भूमि के साथ प्रशिक्षित मानव संसाधन, परिवहन संपर्क और बाजार तक पहुंच की सुविधाएं भी उपलब्ध कराता है। यह औद्योगिक परिवेश विनिर्माण के साथ अनुसंधान और तकनीक आधारित गतिविधियों के विस्तार में सहायक है। निवेश प्रस्तावों से उत्पादन तक आगे बढ़ती औद्योगिक गतिविधियां मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि पिछले 18 महीनों में फार्मा क्षेत्र के 54 निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इनमें लगभग 19,477 करोड़ रुपए का प्रस्तावित निवेश और लगभग 18,646 रोजगार सृजन के अवसरों की संभावना है। इनमें से 34 इकाइयों के लगभग 12,306 करोड़  रुपए के निवेश प्रस्तावों के लिए भूमि आवंटित की जा चुकी है। इन परियोजनाओं से लगभग 10,298 रोजगार अवसर सृजित होने की संभावना है। इसी अवधि में 14 इकाइयों ने उत्पादन प्रारंभ किया है। इंदौर , देवास, उज्जैन, भोपाल, धार, रायसेन, सीहोर, ग्वालियर और भिंड जैसे जिलों में नई फार्मा एवं लाइफ साइंस इकाइयों की गतिविधियों से प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में औद्योगिक विकास को गति मिल रही है। निवेश, अनुसंधान और गुणवत्ता के लिए नीतिगत प्रोत्साहन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उद्योग संवर्धन नीति-2025 में फार्मा, बायोटेक और मेडिकल डिवाइस को फोकस सेक्टर बनाया गया है। पात्र स्थायी पूंजी निवेश पर 40 प्रतिशत तक मूल निवेश प्रोत्साहन सहायता (बीआईपीए) का प्रावधान है। एपीआई, बल्क ड्रग और मेडिकल डिवाइस के लिए 1.3 गुना गुणक का प्रावधान भी किया गया है। कंपनी के अपने अनुसंधान एवं विकास कार्यों के व्यय पर 50 प्रतिशत सहायता तथा परीक्षण प्रयोगशालाओं और गुणवत्ता प्रमाणन के लिए अलग-अलग 1 करोड़ रुपए तक सहायता उपलब्ध है। स्वतंत्र अनुसंधान एवं विकास केंद्रों के लिए स्थायी पूंजी निवेश की 25 प्रतिशत सहायता, अधिकतम 25 करोड़  रुपए तक देने का प्रावधान है। निर्यातोन्मुख इकाइयों के लिए माल परिवहन लागत की 50 प्रतिशत सहायता 5 वर्षों तक, अधिकतम 2 करोड़ रुपए की सीमा तक उपलब्ध है। इन प्रावधानों से फार्मा उद्योग में निवेश, अनुसंधान, गुणवत्ता और निर्यात को प्रोत्साहन मिलेगा। पर्यावरण अनुकूल विनिर्माण और आधुनिक तकनीक को प्रोत्साहन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि पर्यावरण अनुकूल विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए अपशिष्ट प्रबंधन पर 5 करोड़ रुपए तक और शून्य तरल अपशिष्ट निर्वहन व्यवस्था पर 10 करोड़ रुपए तक सहायता का प्रावधान है। निजी भूमि पर अधोसंरचना विकास के लिए 5 करोड़ रुपए तक तथा तकनीक हस्तांतरण के लिए एक करोड़ रूपये तक सहयोग उपलब्ध कराया जा सकता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में फार्मा उद्योग के विस्तार के साथ अनुसंधान, गुणवत्ता और पर्यावरण अनुकूल उत्पादन को भी प्राथमिकता दी जा रही है। इन सुविधाओं से उद्योगों को आधुनिक उत्पादन प्रक्रियाएं अपनाने और अपनी तकनीकी क्षमताएं बढ़ाने में सहायता मिलेगी। विक्रम उद्योगपुरी का मेडिकल डिवाइस पार्क में बढ़ रहे निवेश के अवसर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि उज्जैन की विक्रम उद्योगपुरी स्थित मेडिकल डिवाइस पार्क में 57 इकाइयों को आवंटन दिया गया है और 17 इकाइयों ने उत्पादन प्रारंभ कर दिया है। इस क्षेत्र में लगभग 2,374.86 करोड़ रुपए के निवेश और लगभग 9,625 रोजगार अवसरों की संभावना है। मेडिकल डिवाइस पार्क प्रदेश में चिकित्सा उपकरण विनिर्माण के विस्तार का महत्वपूर्ण आधार बन रहा है। फार्मा और चिकित्सा उपकरण उद्योग का विकास उत्पादन, तकनीकी सेवाओं और स्थानीय रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराएगा। रतलाम में मेगा इंडस्ट्रियल पार्क, नई पीढ़ी के फार्मा निवेश पर जोर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि रतलाम में 1,666.3 हेक्टेयर क्षेत्र में मेगा इंडस्ट्रियल पार्क विकसित किया जा रहा है। यहां फार्मा, बायोटेक और केमिकल क्षेत्र के निवेश को प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार एपीआई और तैयार दवाओं के साथ टीके, इंजेक्टेबल दवाएं, जैव प्रौद्योगिकी, कोशिका एवं जीन आधारित उपचार, चिकित्सा उपकरण, परीक्षण, अनुसंधान एवं विकास और अनुबंध आधारित विनिर्माण की संपूर्ण मूल्य शृंखला मध्यप्रदेश में विकसित करना चाहती है। इससे प्रदेश में उच्च कौशल आधारित रोजगार और वैश्विक बाजारों के लिए उत्पादन की संभावनाओं का विस्तार होगा। प्रमुख फार्मा निवेशकों की भागीदारी, दवा निर्माण और अनुसंधान में व्यापक विशेषज्ञता राउंड टेबल मीटिंग में फार्मा उद्योग प्रतिनिधियों में दवा निर्माण, एपीआई, ब्रांडेड एवं जेनेरिक दवाओं, विशेष औषधियों और अनुसंधान के क्षेत्र में कार्यरत प्रमुख कंपनियों के प्रतिनिधि शामिल रहे। उपस्थित फार्मा सेक्टर के निवेशकों ने … Read more

मुख्य सचिव की अध्यक्षता में आदिम जाति विकास संबंधी राज्य स्तरीय कार्य समिति की बैठक सम्पन्न

रायपुर छत्तीसगढ़ शासन, आदिम जाति विकास विभाग के अंतर्गत भारत के संविधान के अनुच्छेद 275(1) के तहत गठित राज्य स्तरीय कार्यसमिति की बैठक आज मंत्रालय महानदी भवन में मुख्य सचिव  विकासशील की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। बैठक में राज्य के जनजातीय क्षेत्रों के सर्वांगीण विकास, बुनियादी ढांचे के सुदृढ़ीकरण, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण से जुड़े विभिन्न प्रस्तावों का सूक्ष्म परीक्षण कर उन्हें अनुमोदित किया गया। प्राथमिकता वाले प्रस्तावों को अंतिम रूप देते हुए, राज्य स्तरीय कार्यकारी समिति के अनुमोदन हेतु परीक्षण पश्चात कुल 3,189 प्राथमिक कार्यों के लिए 246 करोड़ 54 लाख रुपये के प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। बैठक की मुख्य विशेषताएँ और प्रमुख निर्णय बैठक में जनप्रतिनिधियों एवं विभिन्न विभागों से प्राप्त प्रस्तावों पर विस्तार से चर्चा की गई। विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (च्टज्ळ) वाले कुपोषण प्रभावित क्षेत्रों में 185 कम्युनिटी-मैनेज्ड क्रेच (पालना-घर) की स्थापना और संचालन को हरी झंडी दी गई। सांस्कृतिक धरोहर व शिक्षा  जनजातीय क्षेत्रों के पवित्र सामाजिक-सांस्कृतिक स्थलों के जीर्णाेद्धार एवं संरक्षण के पायलट प्रोजेक्ट के साथ-साथ प्राथमिक शालाओं (कक्षा 1 से 5) में 2 वर्षों के लिए बहुभाषी शिक्षण-अधिगम सामग्री के विकास हेतु भी मंजूरी प्रदान की गई। अन्य विकास कार्य बुनियादी ढांचा, शिक्षा, संस्कृति एवं धरोहर, नवीकरणीय ऊर्जा, पेयजल, स्वास्थ्य एवं स्वच्छता, ग्राम व समुदाय विकास सहायता, खेलकूद, पशुपालन, अनुसूचित क्षेत्रों के लोगों के लिए आय सृजन की योजनाएं, तथा सुदृढ़ीकरण एवं प्रशासनिक व्यय से जुड़े प्रस्तावों पर चर्चा के उपरांत उन्हें अनुमोदित किया गया। मुख्य सचिव ने संबंधित विभागीय अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए कि अनुमोदित प्रस्तावों का क्रियान्वयन पूरी गुणवत्ता और पारदर्शिता के साथ सुनिश्चित किया जाए, ताकि कल्याणकारी योजनाओं का सीधा लाभ अंतिम छोर तक बसे जनजातीय अंचलों तक पहुंच सके। इस उच्च स्तरीय बैठक में आदिम जाति विकास विभाग के सचिव  भूवनेश यादव, स्वास्थ्य विभाग के सचिव  अमित कटारिया, स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह, ऊर्जा विभाग के सचिव  सारांश मित्तर, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सचिव  मोहम्मद अब्दुल कैसर हक, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव  भीम सिंह सहित कृषि, वन, महिला एवं बाल विकास और संस्कृति एवं पर्यटन विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।