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कांगेर घाटी में ‘ग्रीन गुफा’ का आगाज, पर्यटन स्थल को मिलेगा नया जीवन—आधिकारिक घोषणा

रायपुर छत्तीसगढ़ की कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान अपनी अद्भुत प्राकृतिक सुंदरता, समृद्ध जैव विविधता और विश्व-प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों के लिए देश-विदेश में विख्यात है। इसी कड़ी में अब कांगेर घाटी में एक और अनोखी प्राकृतिक स्थलाकृति सामने आई है, जिसे “ग्रीन केव” (ग्रीन गुफा) नाम दिया गया है। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार राज्य सरकार द्वारा पर्यटन और वन्य धरोहरों के संरक्षण एवं संवर्धन को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है। वन मंत्री कश्यप ने स्पष्ट किया है कि ग्रीन गुफा के पर्यटन मानचित्र में शामिल होने से कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान में पर्यटन को नया आयाम मिलेगा, जिससे स्थानीय रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और क्षेत्रीय विकास को गति प्राप्त होगी और शीघ्र ही पर्यटक इस अद्भुत गुफा की प्राकृतिक खूबसूरती का प्रत्यक्ष अनुभव कर सकेंगे। वन विभाग द्वारा आवश्यक तैयारियां पूर्ण किए जाने के बाद शीघ्र ही इस गुफा को पर्यटकों के लिए खोले जाने की योजना है। उल्लेखनीय है कि यह ग्रीन गुफा कोटुमसर परिसर के कंपार्टमेंट क्रमांक 85 में स्थित है। गुफा की दीवारों और छत से लटकती चूने की आकृतियों (स्टैलेक्टाइट्स) पर हरे रंग की सूक्ष्मजीवी परतें पाई जाती हैं, जिसके कारण इसे “ग्रीन केव” नाम दिया गया है। चूना पत्थर और शैल से निर्मित यह गुफा कांगेर घाटी की दुर्लभ और विशिष्ट गुफाओं में से एक मानी जा रही है। ग्रीन गुफा तक पहुंचने का मार्ग बड़े-बड़े पत्थरों से होकर गुजरता है। गुफा में प्रवेश करते ही सूक्ष्मजीवी जमाव से ढकी हरी दीवारें पर्यटकों को आकर्षित करती हैं। आगे बढ़ने पर एक विशाल कक्ष दिखाई देता है, जहां से भीतर की ओर चमकदार और विशाल स्टैलेक्टाइट्स तथा फ्लो-स्टोन (बहते पानी से बनी पत्थर की परतें) देखने को मिलती हैं, जो गुफा की प्राकृतिक भव्यता को और भी बढ़ा देती हैं। घने जंगलों के मध्य स्थित यह गुफा अपनी अनोखी संरचना और प्राकृतिक सौंदर्य के कारण पर्यटकों के लिए एक नया आकर्षण केंद्र बनने जा रही है। वन विभाग द्वारा गुफा की सुरक्षा एवं नियमित निगरानी की जा रही है। साथ ही पर्यटकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए पहुंच मार्ग, पैदल पथ तथा अन्य आवश्यक आधारभूत संरचनाओं का विकास कार्य प्रगति पर है। वन विभाग द्वारा कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान के पर्यटन विकास के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इस पहल में प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वनबल प्रमुख व्ही. श्रीनिवासन तथा प्रमुख मुख्य वन संरक्षक (वन्य प्राणी) अरुण पांडे का मार्गदर्शन भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

बस्तर में माओवादी हिंसा की दिशा बदलने का वक्त, 60 लाख के इनामी माओवादी की हुई शिनाख्त

 जगदलपुर  बस्तर से लेकर तेलंगाना तक फैला माओवादी नेटवर्क अब निर्णायक रूप से टूट चुका है। दशकों से जारी लाल आतंक का ‘रिवर्स काउंटडाउन’ (उल्टी गिनती) शुरू हो गया है। सुरक्षा बलों की सटीक रणनीति, निरंतर दबाव और नेतृत्व के विघटन ने माओवादी संगठन की कमर तोड़ दी है। सुरक्षा एजेंसियों का विश्वास है कि 26 जनवरी को इसकी घोषणा कर दी जाए।  तेलंगाना में पीएलजीए (पीपुल्स लिब्रेशन गुरिल्ला आर्मी) बटालियन नंबर–एक के प्रमुख बारसे देवा उर्फ सुक्का के आत्मसमर्पण और सुकमा में कोंटा एरिया कमेटी प्रमुख के मारे जाने के बाद बस्तर में संगठन लगभग नेतृत्वविहीन हो गया है। पापा राव ही एकमात्र बड़ा नाम शेष अब शीर्ष स्तर पर पापा राव ही एकमात्र बड़ा नाम शेष है। 14 माओवादी शनिवार को सुकमा, बीजापुर में मारे गए थे। उधर, तेलंगाना में बारसे देवा ने अपने 20 साथियों के साथ समर्पण किया था। बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी का कहना है कि माओवादी संगठन का संख्या बल लगातार घट रहा है और नेतृत्व पूरी तरह बिखर चुका है। बस्तर में अब केवल पापा राव शीर्ष स्तर पर बचा है, जबकि जमीनी स्तर पर गिनती के ही माओवादी सक्रिय हैं। यदि बचे हुए माओवादी समय रहते आत्मसमर्पण नहीं करते, तो भविष्य में उनके लिए यह विकल्प भी नहीं बचेगा। पांच महिला सहित 12 माओवादियों की शिनाख्त वहीं सुकमा में बुर्कलंका और पामलूर इलाके में शनिवार को मुठभेड़ में मारे गए पांच महिला सहित 12 माओवादियों की शिनाख्त हो गई है। सभी शवों को जिला मुख्यालय लाया गया, जहां पोस्टमार्टम के बाद स्वजन को सौंपा जाएगा। माओवादियों में डीवीसीएम वेट्टी मंगडू उर्फ मुक्का आठ लाख का इनामी, एसीएम माड़वी हितेश आठ लाख, सीवाईपीसी पोड़ियम जोगा 10 लाख, कोमरम बदरी, झितरू माड़वी, माड़वी मुक्का, मुचाकि मुन्नी, माड़वी जमली, पोड़ियम रोशनी ये सभी एसीएम जिन पर पांच लाख का इनाम घोषित था। इनके अलावा तामो नंदा, मड़कम रामा, मासे ये तीनों पार्टी के सदस्य थे और इन पर दो लाख का इनाम राशि घोषित था। मुठभेड़ स्थल से एके-47, इंसास, एसएलआर राइफल, बीजीएल लांचर, 12 बोर हथियार, वायरलेस सेट, स्कैनर तथा बड़ी मात्रा में जिंदा राउंड बरामद किए गए हैं। हिंसा का भविष्य नहीं सुकमा एसपी किरण चव्हाण ने पत्रवार्ता में कहा कि बस्तर क्षेत्र में शांति और स्थिरता की दिशा में निरंतर व निर्णायक प्रगति हो रही है। हिंसा का कोई भविष्य नहीं है और संवैधानिक व लोकतांत्रिक मूल्यों के माध्यम से ही बस्तर आगे बढ़ सकता है। उन्होंने हिंसा के रास्ते पर चल रहे माओवादी कैडरों से समय रहते मुख्यधारा में लौटने और विकास के भागीदार बनने की अपील की। उन्होंने बताया कि यह कार्रवाई सुरक्षा बलों की सतत रणनीति और मजबूत खुफिया तंत्र का परिणाम है। पत्र में ग्रामीण को दी थी धमकी पत्रवार्ता में यह भी खुलासा हुआ कि घटनास्थल से एक धमकी भरा पत्र बरामद किया गया है, जिसमें माओवादियों ने मेहता ग्राम पंचायत के बालंगतोग गांव के एक ग्रामीण को पुलिस मुखबिर बताते हुए चेतावनी दी है। पत्र में जन अदालत में सजा देने और सुधार न होने पर कार्रवाई की धमकी का उल्लेख है। मोबाइल टावर एसपी ने कहा कि यह माओवादियों की जनविरोधी मानसिकता को दर्शाता है। 41 बड़ी घटनाओं में शामिल था मंगड़ू पुलिस के अनुसार कोंटा एरिया कमेटी का सचिव मंगडू 41 बड़ी घटनाओं में शामिल रहा है, जिनमें ताड़मेटला, बुर्कापाल, एर्राबोर राहत शिविर, दरभागुड़ा, कोताचेरू और मिनपा जैसी भीषण घटनाएं शामिल हैं, जिनमें बड़ी संख्या में जवान और नागरिक बलिदान हुए थे।

मुख्यमंत्री साय ने समाजसेविका पद्मश्री राजमोहिनी देवी की पुण्यतिथि पर किया नमन

रायपुर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने सामाजिक चेतना और जनसेवा की सशक्त प्रतीक पद्मश्री राजमोहिनी देवी की 6 जनवरी को पुण्यतिथि के अवसर पर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि आदिवासी समाज से निकलकर सामाजिक कुरीतियों और अंधविश्वास के विरुद्ध आजीवन संघर्ष करने वाली स्वर्गीय राजमोहिनी देवी का जीवन सामाजिक परिवर्तन की प्रेरणादायी गाथा है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राजमोहिनी देवी ने विशेष रूप से आदिवासी महिलाओं के अधिकारों, स्वाभिमान और स्वावलंबन के लिए उल्लेखनीय कार्य किए। उन्होंने नशाखोरी, कुप्रथाओं और शोषण के विरुद्ध जनजागरण को अपना ध्येय बनाया और समाज को जागरूक बनाने का महत्वपूर्ण दायित्व निभाया। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि स्वर्गीय राजमोहिनी देवी की निस्वार्थ सेवा, अदम्य साहस और लोकहित के प्रति समर्पण आने वाली पीढ़ियों को सामाजिक न्याय, समानता और मानवीय गरिमा के लिए कार्य करने की निरंतर प्रेरणा देता रहेगा। उनका जीवन और कृतित्व सदैव समाज के लिए पथप्रदर्शक बना रहेगा।

भर्ती परीक्षाओं में निष्पक्षता और पारदर्शिता सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता : मुख्यमंत्री साय

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने पारदर्शिता और समयबद्धता के साथ भर्ती परीक्षाओं को पूर्ण करने के लिए की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक रायपुर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने मंत्रालय महानदी भवन में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय बैठक कर प्रदेश में आयोजित हो रही विभिन्न भर्ती परीक्षाओं की व्यापक समीक्षा की। बैठक का मुख्य उद्देश्य भर्ती प्रक्रियाओं को पूर्णतः पारदर्शी, निष्पक्ष और समयबद्ध ढंग से संपन्न कराना है। इस दौरान उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा भी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि युवा कठिन परिश्रम और समर्पण के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, इसलिए शासन की प्रतिबद्धता है कि उनके साथ किसी भी प्रकार का अन्याय न हो। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी भर्ती परीक्षाएँ पारदर्शी ढंग से आयोजित की जाएँ तथा परीक्षा प्रणाली को वर्तमान चुनौतियों के अनुरूप और अधिक सुदृढ़ किया जाए। उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता स्वीकार्य नहीं होगी और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि परीक्षाओं की शुचिता पर कोई प्रश्नचिह्न न लगे, इसके लिए पारदर्शिता बढ़ाने संबंधी सभी उपायों पर गंभीरतापूर्वक कार्य किया जाएगा। उन्होंने कहा कि भर्ती प्रक्रिया में सुधार सरकार की शीर्ष प्राथमिकताओं में शामिल है। इससे राज्य में भर्ती प्रणाली अधिक सरल, न्यायोचित और समयबद्ध बनेगी। बैठक में पुलिस बल सहित विभिन्न विभागों में चल रही भर्ती प्रक्रियाओं की भी समीक्षा की गई और चयन प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने के निर्देश दिए गए। बैठक में समान अहर्ता वाले पदों के लिए विभिन्न विभागों द्वारा अलग-अलग परीक्षाएँ आयोजित किए जाने की वर्तमान व्यवस्था पर भी चर्चा हुई। समान पात्रता वाले पदों के लिए संयुक्त भर्ती परीक्षा आयोजित करने के प्रस्ताव पर विचार किया गया। इससे न केवल समय और संसाधनों की बचत होगी, बल्कि विभागों को समय पर मानव संसाधन उपलब्ध कराया जा सकेगा। पीएससी की परीक्षा प्रणाली को और अधिक समकालीन, पारदर्शी तथा अभ्यर्थी हितैषी बनाने के संबंध में भी विस्तृत चर्चा की गई। यह भी विचार किया गया कि प्रतियोगी परीक्षाओं के पाठ्यक्रम को वर्तमान आवश्यकताओं एवं समसामयिक विषयों के अनुरूप और अधिक प्रासंगिक बनाया जाए। बैठक में मुख्य सचिव श्री विकास शील, अपर मुख्य सचिव श्रीमती रेणु जी. पिल्लै, अपर मुख्य सचिव श्री मनोज कुमार पिंगुआ, पुलिस महानिदेशक श्री अरुण देव गौतम, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक श्री विवेकानंद सिन्हा, सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव श्री अविनाश चंपावत, मुख्यमंत्री के सचिव श्री मुकेश बंसल, मुख्यमंत्री के सचिव श्री राहुल भगत, मुख्यमंत्री के सचिव श्री पी. दयानंद, सचिव श्री हिमशिखर गुप्ता, उद्योग विभाग के सचिव श्री रजत कुमार, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक श्री एस.आर.पी. कल्लूरी, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक श्री अमित कुमार सहित विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से राजा मोरध्वज आरंग महोत्सव समिति के प्रतिनिधिमंडल ने की सौजन्य मुलाकात

रायपुर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से आज मंत्रालय महानदी भवन में राजा मोरध्वज आरंग महोत्सव 2026 समिति के प्रतिनिधिमंडल ने सौजन्य मुलाकात की। इस अवसर पर कौशल विकास मंत्री श्री गुरु खुशवंत साहेब उपस्थित थे। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय को राजा मोरध्वज आरंग महोत्सव में मुख्य अतिथि के रुप में आमंत्रित किया। इस अवसर पर श्री के.के. भारद्वाज, डॉ. संदीप जैन, श्री नरेंद्र लोधी, श्री गोविंद वर्मा, श्री पुष्कर साहू, श्री संतोष लोधी, श्री अशोक चंद्राकर, श्री देवनाथ साहु, श्री राकेश सोनकर, श्री हीरामन कोसले, श्री विक्रम परमार, श्री चंद्रशेखर साहू, श्री गणेश राम साहू, दूजे राम धीवर उपस्थित थे।

बस्तर के स्कूलों में अब विद्या समीक्षा केंद्र ऐप से लगेगी हाजिरी

जगदलपुर. बस्तर जिले की शासकीय शिक्षण संस्थाओं में शिक्षकों और विद्यार्थियों की उपस्थिति दर्ज करने की प्रक्रिया को अब पूरी तरह से हाईटेक किया जा रहा है। जिला शिक्षा अधिकारी ने जिले के सभी विकासखंड शिक्षा अधिकारियों और प्राचार्यों को निर्देशित किया है कि अब से शासकीय स्कूलों में उपस्थिति राज्य शासन द्वारा तैयार किए गए विद्या समीक्षा केंद्र मोबाइल ऐप के माध्यम से अनिवार्य रूप से दर्ज की जाएगी। इस कवायद का मुख्य उद्देश्य भारत सरकार के निर्देशों के अनुरूप प्रतिदिन की उपस्थिति का डेटा शिक्षा मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय विद्या समीक्षा केंद्र को भेजना है, जहां इसकी नियमित समीक्षा की जा सकेगी। इस नई व्यवस्था को लागू करते हुए विभाग ने एक बेहद महत्वपूर्ण तकनीकी निर्देश भी दिया है, जिसकी अनदेखी करने पर शिक्षकों की उपस्थिति मान्य नहीं होगी। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि शिक्षकों को यह मोबाइल ऐप विद्यालय परिसर में पहुंचने के बाद ही अपने फोन में इंस्टॉल और पंजीकृत करना होगा। दरअसल, पंजीकरण के समय ऐप जीपीएस तकनीक का उपयोग कर विद्यालय की लोकेशन को सेव कर लेता है। यदि कोई शिक्षक विद्यालय से बाहर रहकर या घर से ऐप को इंस्टॉल या रजिस्टर करने का प्रयास करता है, तो सर्वर में पहले से मौजूद विद्यालय की लोकेशन और शिक्षक की वर्तमान लोकेशन आपस में मेल नहीं खाएगी। ऐसी स्थिति में लोकेशन मैच न होने के कारण शिक्षक अपनी ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज नहीं कर पाएंगे, इसलिए सभी को विद्यालय में उपस्थित होकर ही इंस्टॉलेशन की प्रक्रिया पूरी करने की हिदायत दी गई है।

छत्तीसगढ़ के मेकाहारा हॉस्पिटल के डॉक्टरों ने ब्रश करते समय फटी गर्दन की नस में की दुर्लभ सर्जरी

रायपुर. पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय रायपुर से संबद्ध डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय के हार्ट, चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग ने एक बार फिर चिकित्सा जगत में ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की है। गर्दन की मुख्य धमनी कैरोटिड आर्टरी के अपने आप फट जाने जैसी अत्यंत दुर्लभ और जानलेवा स्थिति में हार्ट, चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग के चिकित्सकों ने समय रहते जटिल सर्जरी कर 40 वर्षीय मरीज की जान बचा ली। यह मामला न केवल छत्तीसगढ़ में पहली बार सामने आया है, बल्कि अब तक विश्व मेडिकल जर्नल में ऐसे केवल 10 ही प्रकरण दर्ज हैं। ब्रश करते समय अचानक रप्चर (फटी) हुई गर्दन की धमनी रायपुर निवासी 40 वर्षीय मरीज जब सुबह घर पर दांत साफ कर रहा था, तभी अचानक उसके गले में तेज दर्द हुआ और देखते ही देखते पूरे गर्दन में सूजन आ गई। कुछ ही क्षणों में मरीज बेहोश हो गया। परिजन उसे तत्काल अम्बेडकर अस्पताल के आपातकालीन विभाग लेकर गए। सीटी एंजियोग्राफी जाँच से पता चला दुर्लभ केस गर्दन के नसों की सीटी एंजियोग्राफी जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि मरीज की दायीं कैरोटिड आर्टरी फट चुकी है और उसके चारों ओर गुब्बारानुमा संरचना बन गई है, जिसे कैरोटिड आर्टरी स्यूडोएन्युरिज्म (Carotid Artery Pseudoaneurysm) कहा जाता है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मरीज को तत्काल हार्ट, चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग में में डॉ कृष्ण कांत साहू के पास भेजा गया। 50 से 60% सफलता दर वाली सर्जरी, हर पल था जोखिम भरा यह ऑपरेशन अत्यंत जोखिमपूर्ण था। गर्दन में खून के अत्यधिक जमाव के कारण धमनी को पहचानना बेहद कठिन था। जरा सी चूक से मरीज की जान जा सकती थी या ऑपरेशन के दौरान मस्तिष्क में खून का थक्का पहुंचने से लकवा या ब्रेन डेड होने का खतरा था। मरीज और परिजनों को सभी जोखिमों की जानकारी देकर सर्जरी की सहमति ली गई। बोवाइन पेरिकार्डियम पैच से की गई धमनी की मरम्मत लगभग कई घंटे चले इस चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन में बोवाइन पेरिकार्डियम पैच की सहायता से फटी हुई कैरोटिड आर्टरी को अत्यंत सावधानीपूर्वक रिपेयर किया गया। सर्जरी पूरी तरह सफल रही और राहत की बात यह रही कि मरीज को किसी भी प्रकार का लकवा नहीं हुआ। वर्तमान में मरीज पूरी तरह स्वस्थ है। स्वतः कैरोटिड आर्टरी का फटना अत्यंत दुर्लभ सामान्यतः कैरोटिड आर्टरी के फटने की घटनाएं एथेरोस्क्लेरोसिस, ट्रॉमा, कनेक्टिव टिश्यू डिसऑर्डर,संक्रमण या ट्यूमर से ग्रस्त मरीजों में देखी जाती हैं, लेकिन यह मरीज पूरी तरह स्वस्थ था। अपने आप कैरोटिड आर्टरी का फटना (Spontaneous Carotid Artery Rupture) चिकित्सा जगत में अत्यंत दुर्लभ माना जाता है। क्या होती है कैरोटिड आर्टरी कैरोटिड आर्टरी गर्दन के दोनों ओर स्थित प्रमुख धमनी होती है, जो हृदय से मस्तिष्क तक रक्त का प्रवाह सुनिश्चित करती है। इसके क्षतिग्रस्त होने पर मरीज की जान को तत्काल खतरा होता है। स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने इस दुर्लभ मामले की सफल सर्जरी एवं अभूतपूर्व सफलता पर चिकित्सा महाविद्यालय के डीन डॉ. विवेक चौधरी, मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. संतोष सोनकर सहित हार्ट, चेस्ट एवं वैस्कुलर सर्जरी टीम को बधाई देते हुए इसे संस्थान के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि बताया है।

केंद्रीय बजट 2026-27 को लेकर सक्रिय हुए तोखन साहू, वित्त मंत्री से मिलकर रखी छत्तीसगढ़ की बड़ी मांगें

रायपुर आगामी केंद्रीय बजट 2026-27 की तैयारियों के बीच केंद्रीय आवासन और शहरी कार्य राज्य मंत्री एवं बिलासपुर लोकसभा सांसद तोखन साहू ने सोमवार को नई दिल्ली स्थित कर्तव्य भवन में वित्त एवं कॉर्पोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण से शिष्टाचार भेंट की। इस अवसर पर उन्होंने छत्तीसगढ़ के समग्र आर्थिक विकास और आधारभूत ढांचे को मजबूत करने से जुड़ी तीन महत्वपूर्ण परियोजनाओं के प्रस्ताव सौंपे और इन्हें बजट में शामिल करने का आग्रह किया। मुलाकात के दौरान सांसद तोखन साहू ने कहा कि छत्तीसगढ़ खनिज, ऊर्जा और औद्योगिक संसाधनों से समृद्ध राज्य है, लेकिन इन संसाधनों के बेहतर उपयोग के लिए मजबूत परिवहन और बुनियादी ढांचे की जरूरत है। इसी क्रम में उन्होंने जिन तीन परियोजनाओं को “गेम-चेंजर” बताया, उन पर विस्तार से चर्चा की गई। कटघोरा–डोंगरगढ़ रेल लाइन को 100 प्रतिशत केंद्रीय सहायता की मांग तोखन साहू ने वित्त मंत्री से कटघोरा–डोंगरगढ़ रेल लाइन परियोजना को 100 प्रतिशत केंद्र पोषित किए जाने की मांग की। उन्होंने कहा कि यह रेल लाइन ऊर्जा सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके माध्यम से कोरबा कोयला क्षेत्र से पश्चिमी भारत तक कोयला और अन्य खनिजों की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी। उन्होंने इसे छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि देश की औद्योगिक जरूरतों के लिए भी एक “लाइफलाइन” करार दिया। बिलासपुर में रेल वैगन निर्माण कारखाने का प्रस्ताव सांसद साहू ने बिलासपुर में रेल वैगन निर्माण कारखाने की स्थापना का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने बताया कि दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) का मुख्यालय बिलासपुर में स्थित है और पास ही भिलाई इस्पात संयंत्र मौजूद है, जिससे कच्चे माल की उपलब्धता आसान होगी। इस परियोजना से रेलवे को लागत में लाभ मिलेगा और साथ ही छत्तीसगढ़ के हजारों युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे। बिलासपुर हवाई अड्डे के विस्तार और आधुनिकीकरण की मांग मुलाकात में बिलासपुर हवाई अड्डे के विस्तार और आधुनिकीकरण का मुद्दा भी उठाया गया। तोखन साहू ने कहा कि बिलासपुर राज्य का प्रमुख औद्योगिक और प्रशासनिक केंद्र है, ऐसे में यहां बड़े विमानों के संचालन की आवश्यकता है। उन्होंने एयरबस A320 और बोइंग 737 जैसे विमानों के संचालन के लिए रनवे विस्तार और आधुनिक सुविधाओं के विकास हेतु विशेष बजटीय प्रावधान की मांग की। ‘गति शक्ति’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ विजन से जोड़ा प्रस्ताव तोखन साहू ने कहा कि ये तीनों परियोजनाएं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘गति शक्ति’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ विजन के अनुरूप हैं। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि इन योजनाओं के लागू होने से छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी और देश की जीडीपी में भी उल्लेखनीय योगदान होगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सांसद द्वारा रखे गए प्रस्तावों पर सकारात्मक रुख दिखाया और छत्तीसगढ़ के विकास से जुड़ी योजनाओं पर हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार राज्यों के संतुलित और समावेशी विकास के लिए प्रतिबद्ध है।

खेलते समय प्रेशर IED पर रखा पैर, ग्रामीण इलाके में मासूम गंभीर घायल

बीजापुर छत्तीसगढ़ के बीजापुर में एक ग्रामीण बालक नक्सलियों द्वारा प्लांट किए गए IED की चपेट में आ गया. हादसे में बालक गंभीर रूप से घायल हो गया. उसके पैरों में गंभीर चोट आई है. घटना के बाद उसे 222 बटालियन केरिपु कैंप कोरचोली में प्राथिमक उपचार दिया गया और फिर बेहतर इलाज के लिए बीजापुर अस्पताल रवाना किया गया है. जानकारी के मुताबिक, ग्राम कोरचोली नदीपारा निवासी- राम पोटाम, पिता स्व. लच्छु पोटाम, उम्र 15 वर्ष, सुबह-सुबह लेंड्रा–कोरचोली जंगल क्षेत्र की तरफ घूमने गया था. इसी दौरान माओवादियों द्वारा लगाए गए प्रेशर IED की चपेट में आने से वह गंभीर रूप से घायल हो गया. बता दें, सुरक्षा बलों के जवान लगातार नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सघन सर्चिंग कर माओवादियों द्वारा प्लांट किए गए IED को ढूंढकर निष्क्रिय करने में लगे हुए हैं. ताकि किसी भी ग्रामीण या सुरक्षा बलों को नुकसान न पहुंचे. लेकिन नक्सलियों ने भारी संख्या में जगह-जगह पर IED प्लांट किए हुए हैं, जिसकी चपेट में आकर कई ग्रामीण और जवान घायल हो चुके हैं.

दशकों की खामोशी टूटी: बस्तर के जंगलों में फिर दर्ज हुई बाघ की मौजूदगी

जगदलपुर छत्तीसगढ़ के बस्तर में एक बार फिर जंगलों से उम्मीद की आहट सुनाई दे रही है। दशकों बाद बाघ की मौजूदगी के संकेत ने न सिर्फ वन विभाग बल्कि पूरे संभाग को चौकन्ना कर दिया है। कभी राष्ट्रीय पशु बाघ का मजबूत गढ़ रहा बस्तर, अब एक बार फिर उसी पहचान की ओर लौटता दिख रहा है। संभाग मुख्यालय जगदलपुर से सटे जंगलों में, भानपुरी और मारेगांव बायपास के आसपास बाघ के ताज़ा पगमार्क मिले हैं। खास बात यह है कि इन निशानों के साथ एक शावक का पगमार्क भी देखा गया है, जिससे यह संभावना मजबूत हो गई है कि एक बाघिन अपने नन्हे शावक के साथ नए शिकार क्षेत्र की तलाश में आगे बढ़ रही है। गौरतलब है कि बीते करीब तीन दशकों से कांगेर नेशनल पार्क क्षेत्र में बाघ की सक्रिय मौजूदगी दर्ज नहीं की गई थी। ऐसे में यह पहला मौका हो सकता है जब इस इलाके में बाघ की वापसी को लेकर ठोस संकेत सामने आए हैं। हालांकि यह खबर जितनी उत्साहजनक है, उतनी ही संवेदनशील भी। बाघ की सुरक्षा को लेकर वन विभाग ने विशेष निगरानी टीमें गठित कर दी हैं, जो लगातार बाघ के मूवमेंट रूट पर नजर रखे हुए हैं ताकि उसे किसी तरह का खतरा न हो। क्योंकि यह भी सच्चाई है कि छत्तीसगढ़ में बीते पांच वर्षों में बाघ की खाल तस्करी के सबसे ज्यादा मामले कांकेर जिले से सामने आए हैं। ऐसे में बस्तर जैसे प्राकृतिक पर्यावास में बाघ की वापसी, सुरक्षा की बड़ी जिम्मेदारी भी साथ लेकर आई है। वहीं बस्तर के सीसीएफ आलोक तिवारी के अनुसार, इंद्रावती टाइगर रिजर्व क्षेत्र में फिलहाल छह बाघों की मौजूदगी बताई जा रही है। अब देखना होगा कि क्या बस्तर के जंगल एक बार फिर बाघों का सुरक्षित घर बन पाएंगे, या यह वापसी सिर्फ एक अस्थायी दस्तक बनकर रह जाएगी।