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श्रम मंत्री के घर विवाह उत्सव में राजनीतिक हस्तियों की चहल-पहल, सीएम और सांसद ज्योत्सना महंत भी पहुँचे

कोरबा मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, उपमुख्यमंत्री अरुण साव और वित्त मंत्री ओपी चौधरी आज एक कार्यक्रम में शामिल होने कोरबा पहुँचे। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय, उपमुख्यमंत्री अरुण साव और वित्त मंत्री ओ पी चौधरी उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन के कोहड़िया स्थित निवास पहुंचे। यहां उन्होंने मंत्री देवांगन के भाई कौशल देवांगन के सुपुत्र विश्वेश देवांगन और मेघा देवांगन के वैवाहिक कार्यक्रम में शामिल हुए और उन्हें आर्शीवाद देते हुए उनके उज्जवल भविष्य की कामना की। वहीं शादी समारोह में कोरबा सांसद ज्योत्सना महंत भी अपने कार्यकर्ताओं के साथ लखन लाल देवांगन के घर पहुंचे उन्होंने भी शादी समारोह में आशीर्वाद देते हुए उज्जवल भविष्य की कामना की। मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री के कोरबा आगमन को लेकर जिला प्रशासन के द्वारा पहले से ही तैयारी की जा रही थी जहां रूमगरा हेलीपैड में पुलिस बल तैनात किए गए थे वह जिस मार्ग से आना था उसे मार्ग के आवाज चाहिए पर कुछ समय के लिए प्रतिबंध लगा दिया गया था इसके अलावा श्रम मंत्री लखन लाल देवांगन के घर के बाहर भी पुलिस बल तैनात किए गए थे। मुख्यमंत्री उपमुख्यमंत्री श्रम मंत्री लखन लाल देवांगन की परिवार वालों के साथ सामूहिक रूप से फोटो खिंचवाये वही उनके निवास स्थान पर उनके रिश्तेदारों से मुलाकात का हाल-चाल जाना।

बलौदाबाजार-भाटापारा में 26,400 पीएम आवास निर्माण के लिए स्वीकृति, 2025-26 में तेजी से विकास

25 हजार 580 हितग्राहियों को पहली किश्त की राशि जारी ग्राम पंचायतों में आवास चौपाल का आयोजन रायपुर, प्रधानमंत्री आवास योजना गरीब परिवारों को पक्का मकान प्रदान करने का क्रांतिकारी कदम है जो ना केवल आवास की कमी को दूर करती है बल्कि ग्रामीण जीवन को मजबूत और आत्मनिर्भर बनाती है। प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण अंतर्गत स्वीकृत सभी आवासों को शीघ्र प्रारंभ कराने एवं समय-सीमा में पूर्ण कराने कलेक्टर बलौदाबाजार के निर्देशानुसार एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी  के मार्गदर्शन में सभी ग्राम पंचायतो में आवास चौपाल का आयोजन कराया जा रहा है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 26 हजार 400 आवास निर्माण स्वीकृत           प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत वर्ष 2025-26 हेतु जिले में 26 हजार 400 आवास निर्माण को स्वीकृत किया गया, जिसमें से प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा राज्योत्सव के अवसर पर 25 हजार 580 हितग्राहियों के खाते में पहली किश्त की राशि जारी की गई। आवास चौपाल का आयोजन सभी ग्राम पंचायतों में तकनीकी अधिकारियों द्वारा किया जा रहा है, जिसमे, सभी नवीन स्वीकृति उपरांत राशि प्राप्त आवास के हितग्राही, पूर्व वर्षाे के स्वीकृति उपरांत अपूर्ण आवास के हितग्राही, राजमिस्त्री, निर्माण, सामाग्री सप्लायर, सरपंच, सचिव एवं अन्य संबंधित शामिल होते हैं। आवास चौपाल का उद्देश्य कनीकी जानकारी उपलब्ध कराना           आवास निर्माण की तकनीकी जानकारी उपलब्ध कराना। रूफ टॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग का निर्माण कराना।  सौर सुजला के तहत सौर पैनल लगवाने की जानकारी देना शामिल है। वर्ष 2025-26 में प्रथम क़िस्त जारी 25 हजार 580 आवास के हितग्राहियों को क़िस्त जारी किए गए हैं। सभी आवासों का निर्माण कार्य प्रारंभ कराना। योजना के तहत कन्वर्जेन्स के माध्यम से मिलने वाले अन्य लाभ का जानकारी देना।  राजमिस्त्री एवं निर्माण सामग्री की उपलब्धता पर पंचायतों में आवास चौपाल में चर्चा की जा रही है ।  अब तक बलौदाबाजार में 56, भाटापारा 34, कसडोल में 24 और पलारी 22 पंचायतों में आवास चौपाल करा किया गया है। इस चौपाल में पूर्व वर्षाे के आवासों को जल्दी पूर्ण कराना। योजना पूर्णतः निःशुल्क अनाधिकृत वसूली से सावधान          प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण पारदर्शी और निःशुल्क योजना है जहां किसी भी स्तर पर कोई शुल्क नही लिया जाता। कलेक्टर बलौदाबाजार ने कहा है कि किसी भी व्यक्ति द्वारा अनाधिकृत वसूली, कमीशन या सुविधा शुल्क की मांग नहीं कर सकता। यदि कोई ब्यक्ति आवास पास करान,े क़िस्त जल्दी दिलाने या अन्य किसी बहाने से पैसा की मांग करता है, अनाधिकृत वसूली करने पर, तत्काल शिकायत जनपद पंचायत सीईओ, सीईओ जिला पंचायत या कलेक्टर कार्यालय में दर्ज करायें। ऐसे मामलों का त्वरित जांच कर दोषी व्यक्ति के विरुद्ध कड़ी कार्यवाही की जाएगी।

PM मोदी के समक्ष IIM रायपुर में सुरक्षा मंथन, DGP–IG सम्मेलन का अंतिम दिन

रायपुर नवा रायपुर स्थित IIM रायपुर परिसर में चल रहा 60वां अखिल भारतीय DGP–IG सम्मेलन आज अपने अंतिम चरण में पहुंच गया। तीसरे दिन का कार्यक्रम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति के साथ शुरू हुआ। सुबह उन्होंने 6 बजे योग का अभ्यास किया, जिसके बाद 8:30 बजे सभी अधिकारियों के साथ सामूहिक फोटो लिया गया। लगभग 9 बजे ब्रेकफास्ट के दौरान पीएम ने वरिष्ठ अधिकारियों से अनौपचारिक बातचीत की। करीब 10 बजे से औपचारिक बैठकें प्रारंभ हुईं। पहले सत्र में पुलिस व्यवस्था में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग और इसके भविष्य पर चर्चा हुई। इसके बाद दूसरे सत्र में वैश्विक परिदृश्य में उभरते जियो-पॉलिटिकल चुनौतियों पर गहन विमर्श किया गया। दोपहर में टी ब्रेक के तुरंत बाद R&AW द्वारा राष्ट्रीय सुरक्षा, बाहरी खतरों और बदलते सुरक्षा ढांचे पर विस्तृत प्रेजेंटेशन दिया गया। दोपहर बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डेलीगेट्स, अवार्ड प्राप्त अधिकारियों और विशेष आमंत्रितों से मुलाकात की। इस दौरान इंटेलिजेंस ब्यूरो के अधिकारियों को राष्ट्रपति पदक सम्मानित किया गया। लगभग 3 बजे शहरी पुलिसिंग में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले तीन शहरों को पुरस्कार दिया गया, जिसके बाद प्रधानमंत्री ने सम्मेलन को संबोधित किया। प्रधानमंत्री के भाषण व फोटो सेशन के उपरांत वे करीब 4 बजे IIM रायपुर से प्रस्थान करेंगे। अगले सत्र में पुलिस स्पोर्ट्स और उससे जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा होगी। लगभग 5:10 बजे तीन दिवसीय सम्मेलन का औपचारिक समापन होगा। यह सम्मेलन देश के शीर्ष पुलिस अधिकारियों को राष्ट्रीय सुरक्षा, कानून-व्यवस्था और परिचालन चुनौतियों पर खुलकर संवाद करने का मंच देता है। प्रधानमंत्री मोदी ने 2014 से इस आयोजन को नए आयाम दिए हैं, जिसके कारण इसे देश के अलग-अलग स्थलों पर अधिक व्यापक और सहभागी रूप में आयोजित किया जा रहा है। गुवाहाटी, कच्छ, हैदराबाद, टेकनपुर, केवड़िया, पुणे, लखनऊ, नई दिल्ली, जयपुर और भुवनेश्वर जैसे शहर इस आयोजन की मेजबानी कर चुके हैं।

1089 वैकेंसी: सहकारिता विभाग ने BPSC-BSSC को आवेदन भेजे

पटना बिहार में खाली पदों पर बहाली को लेकर सरकार ने रफ्तार तेज कर दी है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा सभी विभागों को रिक्तियों की सूची जारी करने का निर्देश देने के बाद सहकारिता विभाग में गतिविधियां बढ़ गई हैं। विभागीय समीक्षा बैठक में सहकारिता मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार ने साफ कहा कि "जो भी पद खाली हैं, उनकी नियुक्ति जल्द से जल्द होनी चाहिए।" सहकारिता मंत्री प्रमोद कुमार ने कहा, “युवाओं को रोजगार देना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। जब तक विभाग में पर्याप्त स्टाफ नहीं होगा, तब तक योजनाएं धरातल पर नहीं उतरेंगी कैसे? पारदर्शिता, स्पीड और गुणवत्ता – तीनों के लिए मानव संसाधन जरूरी है।” 1089 पदों पर भर्ती की प्रक्रिया शुरू, जानिए पूरी डिटेल कुल 1089 रिक्तियों की अधियाचना अलग-अलग आयोगों को भेजी जा चुकी है।     बीपीएससी को भेजे गए गैजेटेड पद:     सहकारिता प्रसार पदाधिकारी – 502 पद (विज्ञापन जारी, प्रक्रिया चल रही)     स्टेनोग्राफर – 31 पद     जिला सहकारिता ऑडिट अधिकारी – 04 पद बिहार कर्मचारी चयन आयोग को भेजे गए नॉन-गैजेटेड पद:     ऑडिटर – 198 पद     लोअर डिवीजन क्लर्क (LDC) – 257 पद     स्टेनोग्राफर – 07 पद     ऑफिस अटेंडेंट – 90 पद इसके अलावा 69वीं बीपीएससी से चयनित 5 सहायक निबंधक को चार हफ्ते का विशेष प्रशिक्षण देने के लिए बिपार्ड, गया भेजा जा रहा है। मंत्री ने अधिकारियों को चेतावनी दी – “कोई भी पद लंबित नहीं रहना चाहिए। नियुक्ति प्रक्रिया में तेजी लाएं ताकि नए साल से पहले अधिक से अधिक युवा जॉइन कर सकें।

डिप्टी सीएम शर्मा का दावा: चैतू दादा और अनंत के आत्मसमर्पण से नक्सलवाद के बचे 20% का भी अंत तय

रायपुर छत्तीसगढ़ के झीरम घाटी में हुए बड़े नक्सल हमले के मास्टरमाइंड व नक्सली लीडर चैतू और अनंत ने शुक्रवार को आत्मसमर्पण कर दिया है. प्रदेश के डिप्टी सीएम व गृह मंत्री विजय शर्मा ने प्रशासन की इस बड़ी उपलब्धी समेत कई महत्वपूर्ण विषयों पर लल्लूराम डॉट कॉम से बातचीत की. इस दौरान उन्होंने बताया कि बस्तर और समूचे देश से नक्सलवाद खत्म होने के कगार पर है. डिप्टी सीएम शर्मा ने आगे कहा कि चैतू और अनंत ने अपने साथियों के साथ पुर्नवास किया है. बस्तर समेत पूरे देश में नक्सलवाद खत्म होने की कगार पर है. इससे प्रदेश में शांति आनी चाहिए और शांति आ रही है. उन्होंने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह द्वारा नक्सलवाद को जड़ से खत्म करने के संकल्प का जिक्र करते हुए कहा- “गृहमंत्री बनने के साथ ही अमित शाह ने कहा था कि देश में कहीं समस्या है तो समानता के साथ उसे खत्म किया जाएगा. नक्सलवाद को भी इसी संकल्प के साथ खत्म किया जाएगा. साथ ही निर्धारित समय का जिक्र करते हुए कहा कि अब तक 80 प्रतिशत नक्सलवाद समाप्त हो चुका है और मात्र 20 प्रतिशत ही बचा है, जो निर्धारित समय में खत्म हो जाएगा. वहीं बस्तर 2.0 को लेकर उन्होंने कहा कि बस्तर में जल, जंगल, जमीन सब बस्तर के लोगों का है. बस्तर के युवा ही बस्तर को संभालेंगे और वे इसके लिए उत्साहित भी हैं. उन्होंने जीडीपी में बढ़ोतरी को लेकर कहा कि जीडीपी में बढ़ोतरी सुखद है, अमेरिका के टैरिफ के बावजूद जीडीपी में बढ़ोतरी हुई है. ये देश के लोगों के परिश्रम से संभव हुआ है. कांग्रेस जिला अध्यक्ष नियुक्ति पर कसा तंज इसके अलावा उन्होंने कांग्रेस जिला अध्यक्षों की नियुक्ति में बड़े नेताओं के पसंदीदा लोगों को पद मिलने को भी उन्होंने तंज कसा. उन्होंने कहा कि कांग्रेस-भाजपा के परंपराओं में फर्क है. कांग्रेस में व्यक्ति प्रमुख होता है. भाजपा में संस्था और संगठन प्रमुख होता है. इसीलिए कांग्रेस में ऐसी स्थिति पैदा होती है. कलेक्टर गाइडलाइन के खिलाफ कांग्रेस के विरोध पर कसा तंज वहीं जमीन गाईडलाईन दर को लेकर लगातार हो रहे कांग्रेस के विरोध को लेकर विजय शर्मा ने कहा कि अगर जनता, किसी आमजन को तकलीफ है, तो जरूर सुनवाई होगी. लेकिन किसी व्यक्ति विशेष को परेशानी है, उसके लिए कांग्रेस आगे आ रही है, तो उसपर कुछ नहीं हो सकता. वहीं दिल्ली में वायू प्रदूषण को लेकर दिए गए राहुल गांधी के बयान पर उन्होंने कहा कि कांग्रेस के चश्मे से या इटली के चश्मे से नहीं, बल्कि भारत के चश्मे से राहुल गांधी को देखना होगा. तब उन्हें पता चलेगी वास्तविक स्थिति.

डिजिटल छत्तीसगढ़: जिसने दूर रह रही बेटी को दिया सबसे बड़ा सहारा

मीलों की दूरी मिटा दी तकनीक ने—डिजिटल छत्तीसगढ़ की मानवीय मिसाल भुवनेश्वर में रहते हुए भी श्रीमती सोनम त्रिपाठी ने बिलासपुर से अपने दिवंगत पिता का डिजिटल मृत्यु प्रमाण पत्र किया प्राप्त छत्तीसगढ़ की डिजिटल व्यवस्था ने बनाया मुश्किल काम आसान रायपुर,  डिजिटल भारत अभियान और छत्तीसगढ़ शासन की ई-सेवाओं ने आम नागरिकों के जीवन को न सिर्फ आसान बनाया है, बल्कि समय, मेहनत और संसाधनों की बड़ी बचत भी सुनिश्चित की है। भुवनेश्वर में रहने वाली श्रीमती सोनम त्रिपाठी का अनुभव इसका जीवंत उदाहरण है। उन्होंने डिजिटल सेवाओं के सहारे अपने दिवंगत पिता का डिजिटल मृत्यु प्रमाण पत्र प्राप्त किया और अपनी बीमार माताजी के बैंक खाते को बिना किसी परेशानी के भुवनेश्वर में स्थानांतरित करवा लिया। विवाह के बाद भुवनेश्वर में बस चुकी श्रीमती सोनम त्रिपाठी के माता-पिता बिलासपुर में ही रहते थे। पिता का निधन होने के बाद नगरपालिका बिलासपुर ने मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किया। लेकिन जब उनकी माताजी की तबीयत बिगड़ी और उन्हें अपने साथ भुवनेश्वर ले जाना पड़ा, तब एक नई चुनौती सामने आई कि माताजी के बैंक खाते का ट्रांसफर। बैंक ने पिता का डिजिटल मृत्यु प्रमाण पत्र उपलब्ध कराने का आग्रह किया, जिसकी जानकारी श्रीमती त्रिपाठी को पहले नहीं थी, और इसी कारण काम कुछ समय के लिए अटक  गया। इस दस्तावेज़ की आवश्यकता ने परिवार को असमंजस में डाल दिया। इंटरनेट और डिजिटल छत्तीसगढ़ का मिला सहारा श्रीमती त्रिपाठी ने समाधान की तलाश शुरू की और इंटरनेट की मदद से छत्तीसगढ़ के जन्म-मृत्यु पंजीकरण कार्यालय का संपर्क नंबर प्राप्त किया। भुवनेश्वर से ही उन्होंने संबंधित कर्मचारी से संपर्क किया। कार्यालय कर्मचारी ने आवश्यक दस्तावेज़ों, ऑनलाइन प्रक्रिया और प्रमाण पत्र प्राप्ति के चरणों की स्पष्ट एवं सहज जानकारी प्रदान की। डिजिटल व्यवस्था की बदौलत कुछ ही दिनों में उन्हें अपने पिता का डिजिटल मृत्यु प्रमाण पत्र ऑनलाइन उपलब्ध हो गया, और बैंक की समस्त औपचारिकताएँ तुरंत पूर्ण हो गईं। डिजिटल सेवाएँ समय बचाती हैं, परेशानी दूर करती हैं — श्रीमती सोनम त्रिपाठी श्रीमती सोनम त्रिपाठी बताती हैं कि यदि उन्हें डिजिटल प्रक्रिया की जानकारी पहले मिल जाती, तो उनका काम और पहले ही पूरा हो जाता। उनका कहना है कि बैंकिंग, सरकारी सहायता, संपत्ति, पेंशन और अन्य कार्यों में बाधा से बचने के लिए ऐसे दस्तावेज़ समय रहते बनवा लेना चाहिए। मैंने भी भुवनेश्वर से ही ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी की और प्रमाण पत्र कुछ ही दिनों में प्राप्त हो गया। उनका अनुभव बताता है कि सूचना की उपलब्धता, तकनीक का उपयोग और सरकारी सेवाओं का डिजिटलीकरण किस प्रकार जटिल लगने वाले कामों को भी सरल और तेज बनाते हैं। डिजिटल छत्तीसगढ़: अब हर नागरिक के ‘एक क्लिक’ पर सरकारी सेवाएँ छत्तीसगढ़ में पिछले कुछ वर्षों में जन्म-मृत्यु पंजीकरण, शिकायत निवारण, प्रमाण पत्र उपलब्धता और विभिन्न सेवाओं के डिजिटलीकरण ने आमजन की परेशानी को काफी हद तक कम किया है। बिलासपुर से लेकर बस्तर तक हर कोई घर बैठे प्रमाण पत्र, आवेदन स्थिति और अन्य सेवाओं का लाभ उठा पा रहा है। इससे न केवल समय और ऊर्जा की बचत होती है, बल्कि प्रक्रियाएँ पारदर्शी और विश्वसनीय भी बनी हैं।  सोनम त्रिपाठी की यह कहानी उन नागरिकों के लिए प्रेरणा है जो परंपरागत प्रक्रियाओं की कठिनाइयों से परेशान रहते हैं। यह उदाहरण दर्शाता है कि समय पर सूचना, सहयोगी प्रशासन और आधुनिक डिजिटल सेवाओं की सहायता से कोई भी महत्वपूर्ण कार्य शीघ्रता और सरलता से पूरा किया जा सकता है। डिजिटल छत्तीसगढ़ की यह मिसाल न केवल राज्य के डिजिटल परिवर्तन की सफलता को रेखांकित करती है, बल्कि यह भी बताती है कि डिजिटल भारत अभियान कैसे आम नागरिकों के जीवन में वास्तविक बदलाव ला रहा है। छत्तीसगढ़ की डिजिटल सेवाएँ अब आम नागरिकों की जिंदगी में बदलाव ला रही हैं। भुवनेश्वर में रहते हुए भी श्रीमती सोनम त्रिपाठी ने बिलासपुर से अपने दिवंगत पिता का डिजिटल मृत्यु प्रमाण पत्र प्राप्त किया और माताजी के बैंक खाते का ट्रांसफर बिना किसी कठिनाई के पूरा कर लिया—यह हमारे ई-गवर्नेंस सिस्टम की पारदर्शिता, विश्वसनीयता और दक्षता का प्रमाण है। “डिजिटल छत्तीसगढ़” का लक्ष्य ही यही है कि हर नागरिक को घर बैठे, एक क्लिक में, तेज़ और सरल तरीके से सरकारी सेवाएँ उपलब्ध हों। श्रीमती त्रिपाठी का यह अनुभव डिजिटल भारत अभियान और राज्य सरकार की नागरिक-केंद्रित कार्यशैली की सफलता को रेखांकित करता है। – मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय

नवा रायपुर मेडिसिटी: मध्य भारत में स्वास्थ्य क्रांति की नई इबारत लिख रहा है छत्तीसगढ़

हेल्थकेयर हब बनने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है अटल नगर रायपुर, स्वास्थ्य, शिक्षा और अनुसंधान किसी भी विकसित समाज की असली नींव होते हैं। भारत जब वर्ष 2047 के विकसित राष्ट्र के संकल्प की ओर तेजी से बढ़ रहा है, तब गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएँ हमारी प्रमुख प्राथमिकता बन चुकी हैं। इसी दृष्टि से छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा नवा रायपुर अटल नगर में विकसित की जा रही ‘मेडिसिटी’ परियोजना न सिर्फ छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे मध्य भारत में स्वास्थ्य सेवा के नए युग की शुरुआत कर रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय  के नेतृत्व एवं वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी के मार्गदर्शन में यह परियोजना देश की सबसे महत्वाकांक्षी और भविष्यगामी स्वास्थ्य पहल के रूप में उभर रही है। नवा रायपुर अटल नगर पहले से ही शिक्षा, परिवहन, उद्योग और आधुनिक शहरी ढांचे का प्रमुख केंद्र रहा है। अब मेडिसिटी इसे राष्ट्रीय स्तर पर हेल्थकेयर की राजधानी के रूप में स्थापित करने जा रहा है। अत्याधुनिक कनेक्टिविटी, व्यापक परिवहन नेटवर्क और भौगोलिक दृष्टि से रणनीतिक स्थिति नवा रायपुर को न सिर्फ छत्तीसगढ़, बल्कि ओडिशा, मध्यप्रदेश, झारखंड, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, उत्तरप्रदेश और महाराष्ट्र जैसे पड़ोसी राज्यों के लिए भी उन्नत स्वास्थ्य सेवाओं का प्रमुख गंतव्य बना रही है। हर वर्ष 7 करोड़ से अधिक यात्री यहां के एयरपोर्ट और रेल सेवाओं का उपयोग करते हैं, और जल्द ही शुरू होने वाली अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के बाद मेडिकल टूरिज्म के विस्तृत अवसर यहां खुलने वाले हैं। सेक्टर 36–37 में 200 एकड़ में विकसित की जा रही मेडिसिटी में 5,000 से अधिक बेड की क्षमता और देश के अग्रणी हेल्थकेयर समूहों की भागीदारी इस परियोजना को देश के सबसे बड़े स्वास्थ्य शहर के रूप में स्थापित करेगी। मेडिसिटी में मेडिकल यूनिवर्सिटी, नर्सिंग कॉलेज और रिसर्च इंस्टीट्यूट स्थापित किए जा रहे हैं ताकि डॉक्टरों, नर्सों और पैरामेडिकल पेशेवरों की नई और सक्षम पीढ़ी तैयार हो सके। कार्डियोलॉजी, कैंसर साइंस, न्यूरोलॉजी, ऑर्थोपेडिक्स, ऑर्गन ट्रांसप्लांट और मल्टी–स्पेशियलिटी अस्पतालों के साथ अत्याधुनिक डायग्नोस्टिक्स लैब्स यहां स्वास्थ्य सेवाओं को नई ऊँचाइयों पर ले जाएँगे। मरीजों और उनके परिजनों के लिए आवासीय परिसर, छात्रावास, होटल और धर्मशाला जैसी सुविधाएँ इस पूरे क्षेत्र को एक व्यवस्थित ह्यूमन–सेंट्रिक मेडिकल ज़ोन में बदल देंगी। ‘वॉक-टू-हॉस्पिटल’ मॉडल, पर्यावरण अनुकूल डिजाइन, सुगम सार्वजनिक परिवहन कनेक्टिविटी और पीएमजेएवाई व सीजीएचएस जैसी योजनाओं के तहत किफायती उपचार सेवाएँ इस परियोजना को पूरी तरह समावेशी बनाती हैं। उल्लेखनीय है कि नवा रायपुर में पहले से सक्रिय उत्कृष्ट स्वास्थ्य संस्थान इस संरचना को और भी मजबूत आधार प्रदान करते हैं। श्री सत्य साई संजीवनी हॉस्पिटल 2012 से बाल हृदय रोग के क्षेत्र में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर का अग्रणी केंद्र है, जहाँ भारत के अलावा बांग्लादेश, पाकिस्तान, अफगानिस्तान और अफ्रीकी देशों से भी मरीज आते हैं। वहीं 2018 से संचालित 170 बिस्तरों वाला बालको कैंसर हॉस्पिटल सेंट्रल इंडिया के 500–600 किमी के दायरे में अत्याधुनिक कैंसर उपचार उपलब्ध कराता है। रायपुर का स्वच्छ वातावरण और कम जीवन–यापन लागत मरीजों के लिए इसे और उपयुक्त बनाती है। मेडिसिटी केवल एक स्वास्थ्य परियोजना नहीं बल्कि आर्थिक गतिविधियों का भी विशाल केंद्र बनेगी। स्वास्थ्य, फार्मा, वेलनेस और सपोर्ट सेवाओं में हजारों रोजगार सृजित होंगे। इसके आसपास किफायती आवास, व्यापारिक प्रतिष्ठान और नई सेवा गतिविधियों का विस्तार राज्य की जीडीपी में भी महत्वपूर्ण योगदान देगा। नवा रायपुर मेडिसिटी छत्तीसगढ़ सरकार का वह संकल्प है जो कहता है—सभी के लिए गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य, कम लागत में उच्च सुविधा और सुरक्षित जीवन की गारंटी। यह केवल एक परियोजना नहीं, बल्कि भारत के स्वस्थ, सुरक्षित और विकसित भविष्य की नई परिभाषा है। आने वाले वर्षों में नवा रायपुर अटल नगर मेडिसिटी न सिर्फ मध्य भारत बल्कि पूरे देश के स्वास्थ्य परिदृश्य में क्रांतिकारी बदलाव लाएगी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक आदर्श हेल्थकेयर मॉडल के रूप में स्थापित होगी। नवा रायपुर मेडिसिटी छत्तीसगढ़ की आर्थिक और सामाजिक प्रगति का ऐसा इंजन बनेगी, जो आने वाले दशकों तक राज्य की विकास रफ्तार को नई दिशा देगा। 200 एकड़ में विकसित हो रही यह विश्वस्तरीय हेल्थकेयर सिटी न सिर्फ उन्नत चिकित्सा सुविधाएँ प्रदान करेगी, बल्कि स्वास्थ्य, फार्मा, वेलनेस, शिक्षा और सेवा क्षेत्रों में हजारों रोजगार सृजित कर राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत आधार देगी। एम्स, बॉम्बे हॉस्पिटल ट्रस्ट, मेडिकल यूनिवर्सिटी और सुपर स्पेशियलिटी संस्थानों की स्थापना से नवा रायपुर राष्ट्रीय हेल्थ हब के रूप में उभरेगा।  मेडिसिटी का मॉडल ‘सुलभता, किफायत और उच्च गुणवत्ता’ के सिद्धांतों पर आधारित है और यह आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ को मेडिकल टूरिज्म, रिसर्च और हेल्थ इकोनॉमी का अग्रणी केंद्र बनाएगा।-वित्त मंत्री श्री ओ पी चौधरी नवा रायपुर अटल नगर में विकसित की जा रही मेडिसिटी  मध्य भारत में स्वास्थ्य क्रांति की नई शुरुआत है। 200 एकड़ में विकसित हो रहा यह विशाल हेल्थकेयर सिटी आने वाले वर्षों में छत्तीसगढ़ ही नहीं, ओडिशा, मध्यप्रदेश, झारखंड, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, उत्तरप्रदेश और महाराष्ट्र सहित पूरे क्षेत्र को अत्याधुनिक, सुलभ और किफायती चिकित्सा सेवाएँ प्रदान करेगा। ‘नवा रायपुर मेडिसिटी’ उच्च गुणवत्ता वाली चिकित्सा सेवाएँ, मेडिकल शिक्षा, अनुसंधान और मेडिकल टूरिज्म सभी को एक ही स्थान पर उपलब्ध कराते हुए भारत के विकसित भविष्य की मजबूत आधारशिला बनेगी। – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

एनकाउंटर के डर से चैतू का समर्पण: पढ़ाई से नक्सलवाद तक कैसे पहुंचा खूंखार नक्सली

जगदलपुर छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में लंबे समय से सक्रिय 25 लाख रुपए के इनामी नक्सली चैतू उर्फ श्याम दादा ने जवानों के सामने सरेंडर कर दिया। श्याम दादा के सरेंडर से नक्सली संगठन को बड़ा झटका लगा है। चैतू उर्फ दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी का सदस्य था। उसके ऊपर 25 लाख रुपये का इनाम घोषित था। उसके साथ 9 अन्य माओवादियों ने भी हथियार डाल दिए। इन सभी पर कुल 65 लाख रुपए का इनाम घोषित था। चैतू को 2013 के झीरम घाटी नक्सली हमले का मुख्य मास्टरमाइंड माना जाता है। उस हमले में छत्तीसगढ़ कांग्रेस के कई बड़े नेता मारे गए थे। लंबे समय तक वह दरभा डिवीजन का प्रभारी भी रहा। चैतू उर्फ श्याम दादा वर्तमान में DKSZCM कैडर का है। बस्तर के जंगलों में कई बार सुरक्षाबलों की गोलियों से बच निकला था। बस्तर इलाके में फोर्स की बढ़ते दबदबे के बाद चैतू ने अपने साथियों के साथ सरेंडर करने का फैसला किया। वह करीब 45 साल तक नक्सली संगठन से जुड़ा रहा। जानिए चैतू दादा के बारे में चैतू उर्फ श्याम दादा मूल रूप से तेलंगाना का रहने वाला है। वह 1980 में कॉलेज में पढ़ाई के दौरान ही नक्सल संगठन में शामिल हो गया था। नक्सली संगठन में शामिल होने के बाद वह शुरुआत में हिंसात्मक गतिविधियों में शामिल था। उसके बाद 1990 में वह बस्तर इलाके में आकर संगठन के विस्तार के काम में लग गया। इस दौरान इस इलाके में वह करीब 35 साल तक काम किया। उसका मुख्य काम नक्सली संगठन में युवाओं को जोड़ना और भर्ती करना था। सुरक्षाबल के जवानों ने उसे कई बार घेर लिया था लेकिन हर बार वह बचकर निकल जाता था। क्यों किया सरेंडर जवानों के सामने सरेंडर करने पहुंचे चैतू ने मीडिया को बताया कि रूपेश और सोनू दादा ने भी हथियार डाल दिए हैं। नक्सल संगठन में अब कुछ नहीं रखा है। मैं करीब 63 साल हूं लेकिन वर्तमान में परिस्थितियों बदल गई हैं। बदली हुई परिस्थति को देखने के बाद ही मैंने अपने साथियों और हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है। झीरम घाटी हमले का मास्टरमाइंड चैतू उर्फ श्याम दादा उन नक्सलियों में शामिल है जिन्होंने झीरम घाटी हमले की योजना बनाई थी। 25 मई 2013 में दरभा घाटी में कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा पर हमला करवाने में इसका हाथ था। इस हमले में विद्याचरण शुक्ल, महेंद्र कर्मा, नंदकुमार पटेल समेत कई करीब 24 नेताओं को का एनकाउंटर किया था।

तांत्रिक केके श्रीवास्तव की काली कमाई का पर्दाफाश, बेटा भी शामिल; ऑस्ट्रेलिया-चीन में करोड़ों का निवेश

रायपुर पूर्व कांग्रेस सरकार में ठेका दिलाने के नाम पर ठगी करने वाले कथित तांत्रिक कृष्ण कुमार श्रीवास्तव उर्फ केके के खिलाफ पेश चार्जशीट में तेलीबांधा पुलिस ने कई खुलासे किए हैं. पुलिस का दावा है कि केके और उसके बेटे कंचन ने हवाला के जरिए करोड़ों रुपए भेजकर चीन और ऑस्ट्रेलिया में निवेश किए हैं. दोनों के बैंक खातों की जांच में 441 करोड़ रुपए के लेन-देन का रिकॉर्ड मिला है. पुलिस के मुताबिक, पिछली सरकार में बिलासपुर निवासी केके श्रीवास्तव बेहद प्रभावशाली था. वह कई बड़े नेताओं से जुड़ा हुआ था. उसने नोएडा की रावत एसोसिएट कंपनी के मालिक अर्जुन सिंह को स्मार्ट सिटी के तहत 500 करोड़ के ठेके दिलाने का झांसा दिया और उनसे 15 करोड़ रुपए ले लिए. कार से भागा नागपुर, फिर दिल्लीः तेलीबांधा थाने में एफआईआर होने के बाद केके और कंचन फरार हो गए थे. जांच में पाया गया कि युवा कांग्रेसी नेता आशीष शिंदे अपनी कार CG 04PP 0007 में केके को छिपाकर नागपुर ले गया. वहां कुछ दिन रहने के बाद दोनों दिल्ली पहुंचे. लगभग एक महीने तक वहां छिपे रहने के बाद केके भोपाल आया और शिंदे रायपुर लौट गया. लंबी जांच के बाद पुलिस ने 24 जून को केके को भोपाल से गिरफ्तार किया है. 5 खातों में 15 करोड़ रुपए ट्रांसफर: अर्जुन सिंह ने ठेका मिलने की उम्मीद में 10 से 17 जुलाई 2023 के बीच कंचन और केके को 15 करोड़ रुपए भेजे. यह रकम अकाउंट R 14900500, 500000, 0026050, 10126077, 001063400 में ट्रांसफर की गई. इनमें से तीन खाते बिलासपुर के अब्बास अली के नाम पर हैं, जो केके श्रीवास्तव के लिए काम करता था. पिता-पुत्र लगातार अर्जुन से संपर्क में थे, और उन्हें वाट्सएप पर स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट से जुड़े फर्जी दस्तावेज भेजते रहे, जिससे अर्जुन को भरोसा हो गया कि वह काम दिला देंगे. कुछ रकम लौटाने के बाद बाकी पैसा वापस नहीं किया गया. दोनों ने पैसे को निजी उपयोग में खर्च कर दिया. सीबीआई और ईडी करेगी जांच: चार्जशीट में मनी लॉन्ड्रिंग और महादेव सट्टा बुक से संबंध का उल्लेख किया गया है. रिपोर्ट ईडी और सीबीआई को भेजी गई है. ईडी ने जांच शुरू कर दी है और सीबीआई भी जल्द पूछताछ करेगी. महादेव सट्टा मामले की जांच सीबीआई कर रही है और अब तक 120 से अधिक लोगों के बयान लिए जा चुके हैं. इस मामले में केके श्रीवास्तव का नाम सामने आया है. सूत्रों के अनुसार, सीबीआई दिसंबर में पहला चार्जशीट दाखिल करने वाली है. इसमें गिरफ्तार आईपीएस और रापुसे अधिकारियों को बड़ी राहत मिल सकती है. कंचन घूम रहा, रिकॉर्ड में फरार: पुलिस ने कंचन और अब्बास अली को फरार बताया है. जबकि कंचन को रायपुर और बिलासपुर में देखा गया है. पुलिस ने उसे बनारस से हिरासत में लिया था उसे पूछताछ कर छोड़ दिया, जबकि एफआईआर में भी नामजद आरोपी है.

गंदगी देख भड़के सभापति सूर्यकांत राठौड़, स्टेडियम में तुरंत सफाई के आदेश

रायपुर नगर निगम के सभापति सूर्यकांत राठौड़ ने गुरुवार को सरदार बलवीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम का औचक निरीक्षण किया. निरीक्षण के दौरान परिसर में भारी गंदगी, कचरे के ढेर और साफ-सफाई की पूरी तरह से कमी देखकर उन्होंने गहरी नाराजगी जताई. तत्काल सफाई अभियान के निर्देश सभापति राठौड़ ने मौके पर ही जोन-4 के कार्यपालन अभियंता शेखर सिंह को बुलाकर स्टेडियम का निरीक्षण कराया और उन्हें तुरंत नगर निगम की टीम भेजकर सफाई अभियान शुरू करने के निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि स्टेडियम में प्राथमिकता के आधार पर स्वच्छता बहाल की जाए. ठेकेदार पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी राठौड़ ने स्पष्ट चेतावनी दी कि स्टेडियम की सफाई का जिम्मा संभाल रहे ठेकेदार द्वारा यदि तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई नहीं की गई, तो उसका ठेका रद्द कर उसे नगर निगम की ब्लैकलिस्ट में डाल दिया जाएगा. सीवरेज चैंबर्स के टूटे ढक्कन भी बने समस्या निरीक्षण के दौरान सभापति ने स्टेडियम की सीवरेज लाइन के कई चैंबर्स को खुले और ढक्कन टूटा हुआ पाया. इसे गंभीर सुरक्षा संकट मानते हुए उन्होंने कार्यपालन अभियंता को निर्देश दिया कि सभी टूटे ढक्कनों को तत्काल बदलवाया जाए, ताकि किसी प्रकार की दुर्घटना की आशंका न रहे. राठौड़ ने स्पष्ट कहा कि इंडोर स्टेडियम जैसी महत्वपूर्ण सार्वजनिक सुविधा में गंदगी और अव्यवस्था किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं की जाएगी, और नगर निगम सख्त रवैया अपनाएगा.