samacharsecretary.com

उत्तर बस्तर कांकेर : ग्राम पंचायत चारगांव में जिला स्तरीय जनसमस्या निवारण शिविर 12 दिसम्बर को

उत्तर बस्तर कांकेर  कलेक्टर श्री निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर के निर्देशानुसार जिले के आम नागरिकों की आवश्यकताओं, शिकायतों एवं समस्याओं के समाधान के लिए जिला स्तरीय जनसमस्या निवारण शिविर का आयोजन किया जा रहा है। इसी कड़ी में आगामी 12 दिसम्बर शुक्रवार को कोयलीबेड़ा विकासखण्ड के ग्राम पंचायत चारगांव में जनसमस्या निवारण शिविर शिविर लगाई जाएगी, जिसमें ग्राम पंचायत चारगांव, छोटेबोदेली, पोरोण्डी, सिकसोड़, सुलंगी, तुरसानी और बदरंगी इत्यादि ग्राम पंचायतों के ग्रामीण शामिल होंगे। शिविर में शासन की लोक कल्याणकारी योजनाओं का अधिकाधिक लाभ उठाने के लिए ग्रामीणों को प्रोत्साहित किया जाएगा, साथ ही योजनाओं का लाभ उठाने में कोई कठिनाई आ रही हो तो उसका समाधान भी शिविर में किया जाएगा। कलेक्टर ने जनसमस्या निवारण शिविर में सभी जिला स्तरीय, ब्लॉक स्तरीय एवं क्लस्टर स्तर के अधिकारी-कर्मचारियों को अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने के निर्देश दिए हैं।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा- ‘रक्षक पाठ्यक्रम’ से छात्रों के भविष्य की सुरक्षा और जिम्मेदारी में होगा सुधार

रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की उपस्थिति में राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग एवं प्रदेश के छह विश्वविद्यालयों के मध्य “रक्षक पाठ्यक्रम” के लिए एमओयू संपन्न हुआ। बाल अधिकार एवं संरक्षण पर आधारित यह अनूठा पाठ्यक्रम देश में अपनी तरह का पहला शैक्षणिक नवाचार है।  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि “रक्षक पाठ्यक्रम छात्रों के सुरक्षित और जिम्मेदार भविष्य के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।” उन्होंने कहा कि यह पाठ्यक्रम युवाओं को न केवल रोजगार के अवसर प्रदान करेगा, बल्कि बाल अधिकार संरक्षण के क्षेत्र में आवश्यक विशेषज्ञता भी विकसित करेगा। उन्होंने कहा कि कई बार बच्चे भूलवश या भ्रमित होकर गलत दिशा में चले जाते हैं क्योंकि वे अबोध होते हैं। ऐसे बच्चों को सही मार्ग पर लाना हम सभी का सामूहिक दायित्व है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि पिछले दो वर्षों में राज्य सरकार ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की गारंटी के अधिकांश वादों को पूरा कर लिया है। किसानों के बकाया बोनस, महिलाओं के लिए महतारी वंदन योजना और सबके लिए आवास जैसे महत्वपूर्ण संकल्पों को साकार किया गया है। उन्होंने कहा कि 350 से अधिक प्रशासनिक सुधार लागू कर छत्तीसगढ़ सुशासन के मार्ग पर तेजी से अग्रसर है और इसी उद्देश्य से सुशासन एवं अभिसरण विभाग की स्थापना भी की गई है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने रक्षक पाठ्यक्रम को रिकॉर्ड समय में तैयार करने और विश्वविद्यालयों में इसे लागू करने के लिए आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा और उनकी पूरी टीम को बधाई दी। महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी रजवाड़े ने कहा कि बाल अधिकार संरक्षण के क्षेत्र में व्यापक प्रयासों की आवश्यकता है। बच्चों से भिक्षावृत्ति कराना, परित्यक्त बच्चों का पुनर्वास, और संवेदनशील मामलों का समाधान—ये सभी अत्यंत चुनौतीपूर्ण विषय हैं। उन्होंने कहा कि “यह पाठ्यक्रम संवेदनशील, सजग और सेवा-भावयुक्त युवा तैयार करने में मील का पत्थर साबित होगा।” उन्होंने इसे राष्ट्रीय स्तर का नवाचार बताते हुए कहा कि भविष्य में छत्तीसगढ़ इस क्षेत्र में अग्रणी राज्य के रूप में पहचाना जाएगा। उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा ने पाठ्यक्रम को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने आयोग और सभी छह विश्वविद्यालयों को पाठ्यक्रम लागू करने हेतु बधाई दी। यह एक वर्षीय स्नातकोत्तर “पीजी डिप्लोमा इन चाइल्ड राइट्स एंड प्रोटेक्शन पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर, संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय, सरगुजा, कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, रायपुर, आंजनेय विश्वविद्यालय, रायपुर, एमिटी विश्वविद्यालय, रायपुर और श्री शंकराचार्य प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी, भिलाई-दुर्ग में प्रारम्भ होगा। क्या है रक्षक पाठ्यक्रम प्रदेश के किसी भी विश्वविद्यालय में अब तक ऐसा पाठ्यक्रम उपलब्ध नहीं था, जो युवाओं को बाल अधिकार संरक्षण के क्षेत्र में प्रशिक्षित करते हुए रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए। इस आवश्यकता को देखते हुए आयोग द्वारा “रक्षक – बाल अधिकार संरक्षण पर एक वर्षीय स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम” को विकसित किया गया है। इस पाठ्यक्रम से युवाओं को सैद्धांतिक एवं विधिक ज्ञान, विभागीय योजनाओं, संस्थाओं और प्रायोगिक प्रक्रियाओं की गहरी समझ, बाल संरक्षण इकाइयों आदि के सम्बन्ध में जानकारी उपलब्ध होगी।संवेदनशीलता, जागरूकता और बाल-अधिकारों की आत्मिक समझ विकसित करने वाला यह पाठ्यक्रम युवाओं को इस क्षेत्र में कुशल, समर्पित और प्रभावी मानव संसाधन के रूप में तैयार करेगा। आयोग द्वारा पाठ्यक्रम के संचालन, प्रशिक्षण, परामर्श और मार्गदर्शन की संपूर्ण सुविधा विश्वविद्यालयों को निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा, ,पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर से कुलसचिव प्रो शैलेंद्र पटेल,प्रो ए के श्रीवास्तव,संत गहिरा गुरु विश्विद्यालय सरगुजा कुलपति  प्रो राजेंद्र लाकपाले, कुलसचिव शारदा प्रसाद त्रिपाठी, कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय रायपुर के कुलपति एवं रायपुर संभाग आयुक्त श्री महादेव कावरे, कुलसचिव सुनील कुमार शर्मा,आंजनेय विश्वविद्यालय रायपुर कुलपति डॉ. टी.रामाराव कुलसचिव डॉ. रूपाली चौधरी, एमिटी विश्वविद्यालय रायपुर कुलपति डॉ. पीयूष कांत पाण्डेय, कुलसचिव डॉ. सुरेश ध्यानी, शंकराचार्य प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी भिलाई दुर्ग चांसलर डॉ.आई.पी. मिश्रा, कुलपति डॉ ए. के झा एवं डॉ जया मिश्रा, आयोग के सचिव प्रतीक खरे सहित अन्य विभागीय अधिकारीगण उपस्थित थे।

उत्तर बस्तर कांकेर : लिंग आधारित हिंसा समाप्ति पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजित

उत्तर बस्तर कांकेर  कलेक्टर श्री निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर के निर्देशानुसार महिला एवं बाल विकास अधिकारी द्वारा महिला सशक्तिकरण केन्द्र (हब) एवं ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ योजनांतर्गत लिंग आधारित हिंसा समाप्ति पर 16 दिवसीय विशेष जागरूकता अभियान के अंतर्गत चारामा परियोजना के महिला कलस्टर संगठन ग्राम हल्बा में आयोजित किया गया। कार्यक्रम मंे लिंग आधारित हिंसा कारण एवं दुष्प्रभाव तथा इसे समाप्त करने में हमारी भूमिका बारे में जानकारी दी गई। साथ ही महिलाओं एवं बालिकाओं को उपलब्ध विशेष अधिकारों पर चर्चा की गई। इस अवसर पर बाल विवाह मुक्त अभियान के तहत शपथ भी दिलाई गई एवं महिला एवं बाल विकास विभाग की विभिन्न योजनाओं ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, महिला हेल्पलाइन 181, सखी वन स्टॉप सेन्टर, सखी निवास, शक्ति सदन, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना, घरेलू हिंसा, सी बॉक्स पोर्टल, पोक्सो एक्ट, चाइल्ड हेल्पलाइन 1098, बाल विवाह एवं विभागीय योजनाओं की जानकारी दी गई। जागरूकता रैली के माध्यम से बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का नारा लागाते हुए प्रचार-प्रसार किया गया। उक्त कार्यक्रम में जिला पंचायत सदस्य श्रीमती तेजेश्वरी सिन्हा, श्री महंत टांडिया, महिला सशक्तिरण केन्द्र (हब) से जिला मिशन समन्वयक, जेण्डर विशेषज्ञ, वित्तीय साक्षरता समन्वय विशेषज्ञ, चाइल्ड लाइन समन्वयक, चैतन्य संस्था से जेण्डर समन्वयक, पुलिस चौकी थाना प्रभारी व टीम हल्बा एवं बिहान समूह की महिलाएं उपस्थित थीं।

रायगढ़ मेडिकल कॉलेज में नई सुविधा: न्यूरोसर्जन, यूरो सर्जन और नेफ्रोलॉजी डॉक्टर उपलब्ध

रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य के तरक्की और सुशासन के सफर में स्वास्थ्य सुविधाओं का भी विस्तार लगातार हो रहा है। इसी दिशा में स्व. लखीराम अग्रवाल स्मृति शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय से संबद्ध संत बाबा गुरु घासीदास जी स्मृति शासकीय चिकित्सालय रायगढ़ में दिवंगत अधिष्ठाता डॉ विनीत जैन के द्वारा किए गए प्रयासो के उपरांत शहर के सुप्रसिद्ध न्यूरोसर्जन डॉ नितीश नायक ,यूरोसर्जन डॉ के.डी. खरे एवं नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. मीना पटेल सप्ताह में एक दिन चिकित्सा परामर्श देकर इलाज करेंगे। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपस्थिति को रायगढ़ मेडिकल कालेज में आने वाले मरीजों के लिए लाभदायक बताया है। उन्होंने कहा कि शासन का प्रयास है कि लोगों को उनके शहरों और गांवों के आसपास ही बेहतर और उच्च चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध हों ताकि उन्हें इलाज के लिए लंबी दूरी न तय करनी पड़े और त्वरित तथा बेहतर इलाज से उन्हें स्वास्थ्य लाभ मिले। अस्पताल अधीक्षक डॉ एम. के. मिंज ने बताया कि न्यूरोसर्जन डॉ. नितीश नायक (मस्तिष्क/रीढ़ की हड्डी के सर्जन),प्रत्येक मंगलवार प्रातः 10:00 बजे से दोपहर 01:00 बजे तक , यूरो सर्जन डॉ  के.डी. खरे  (मूत्ररोग विशेषज्ञ) शुक्रवार को चिकित्सालय के भूतल में सर्जरी विभाग की ओ.पी .डी .कक्ष क्रमांक 01 में और नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ मीना पटेल (किडनी/गुर्दा रोग विशेषज्ञ) चिकित्सालय के प्रथम तल में मेडिसिन विभाग के ओ. पी.डी. कक्ष क्रमांक 01 में सप्ताह के प्रत्येक शुक्रवार प्रातः (सुबह )10:00 बजे से दोपहर 01:00 बजे तक  चिकित्सा परामर्श के लिए उपलब्ध रहेगे। इसका लाभ रायगढ़ अंचल सहित आसपास के क्षेत्रों के संबंधित मरीजों को मिलेगा। इससे इलाज के लिए बड़े शहरों पर निर्भरता कम होगी। डॉ. नितीश नायक न्यूरोसर्जन (मस्तिष्क/रीढ़ की हड्डी के सर्जन "मस्तिष्क की गांठ,  ब्रेन ट्यूमर,स्पाइनल इंज्यूरी,साईटिका, मस्तिष्क की गंभीर चोट, दिमाग का इन्फेक्शन होना, रक्त का थक्का (स्ट्रोक), कमर दर्द, लकवा की बीमारी, रीढ़ की हड्डी का दर्द, मांसपेशी (नसों) के दर्द चलने में कठिनाई, मांसपेशी का कमजोर होना, सिरदर्द, हाथ पांव में दर्द, उठने-बैठने में परेशानी होना और मिर्गी चक्कर आना आदि गंभीर बीमारियों का परामर्श देकर इलाज करेंगे।

रायपुर : किहकाड़ स्टापडेम निर्माण कार्य के लिए एक करोड़ रूपए स्वीकृत

रायपुर छत्तीसगढ़ शासन, जल संसाधन विभाग द्वारा नारायणपुर जिले के विकासखण्ड-ओरछा के किहकाड़ स्टापडेम निर्माण कार्य के लिए एक करोड़ नौ लाख 35 हजार रूपए स्वीकृत किए गए है। प्रस्तावित कार्य के पूर्ण होने के उपरांत जल संवर्धन, निस्तारी, पेयजल एवं किसानों के द्वारा स्वयं के साधन से 30 हेक्टेयर खरीफ क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध होगी। जल संसाधन विभाग मंत्रालय महानदी भवन से सिंचाई योजना के कार्यों को पूर्ण कराने मुख्य अभियंता जल संसाधन विभाग जगदलपुर को प्रशासकीय स्वीकृति दी गई है।

रायपुर: गिधवा-परसदा में बनेगा देश का प्रमुख पक्षी संरक्षण केंद्र, वन मंत्री केदार कश्यप की घोषणा

रायपुर : गिधवा-परसदा बनेगा देश का प्रमुख पक्षी संरक्षण केंद्र: वन मंत्री केदार कश्यप बर्ड इंटरप्रिटेशन सेंटर का लोकार्पण एवं बर्ड सफारी का शुभारंभ 270 से अधिक पक्षी प्रजातियों को मिलेगा सुरक्षित प्राकृतिक आवास रायपुर प्रदेश के प्रसिद्ध प्रवासी पक्षी आश्रयस्थल गिधवा-परसदा क्षेत्र में आज छत्तीसगढ़ के वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री  केदार कश्यप ने बर्ड इंटरप्रिटेशन सेंटर का लोकार्पण एवं बर्ड सफारी का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में हजारों ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों और पर्यावरण प्रेमियों की उपस्थिति ने इस ऐतिहासिक क्षण को विशेष बना दिया। मंत्री  कश्यप ने कहा कि गिधवा-परसदा पक्षियों के संवर्धन, संरक्षण और पर्यटन के क्षेत्र में देश में नया कीर्तिमान स्थापित करेगा। यह क्षेत्र अंतर्राष्ट्रीय मानचित्र पर छत्तीसगढ़ का गौरव बढ़ाएगा। विदेशी और दुर्लभ पक्षियों का सुरक्षित आश्रय मंत्री  कश्यप ने बताया कि इस क्षेत्र में 270 से अधिक प्रजातियों के विदेशी व स्वदेशी पक्षी नियमित रूप से प्रवास करते हैं और स्थानीय जैव विविधता को समृद्ध बनाते हैं। दशकों से यह क्षेत्र साइबेरिया, यूरोप और मध्य एशिया से आए पक्षियों के लिए सुरक्षित प्राकृतिक आवास रहा है। उन्होंने कहा कि बर्ड इंटरप्रिटेशन सेंटर के माध्यम से पर्यटक अब पक्षियों के जीवन, व्यवहार, प्रवास चक्र और जैव विविधता को वैज्ञानिक दृष्टि से समझ सकेंगे। उन्होंने आगे कहा कि क्षेत्रवासियों की संवेदनशीलता और भावनात्मक जुड़ाव के कारण यह क्षेत्र देश का अनोखा वेटलैंड बन सका है। आने वाले समय में यह क्षेत्र भारत का सबसे बड़ा बर्ड-वॉचिंग हब बनेगा। पर्यटन एवं रोजगार को मिलेगा बढ़ावा  कश्यप ने कहा कि बर्ड सफारी के संचालन से स्थानीय युवाओं को होम-स्टे, गाइडिंग, बोटिंग, ईको-टूरिज्म, लोकल उत्पाद बिक्री और ट्रांसपोर्ट सेवाओं के माध्यम से बड़ी संख्या में रोजगार उपलब्ध होगा। उन्होंने बताया कि वेटलैंड क्षेत्र को और विकसित करने हेतु सोलर लाइटिंग, बर्ड वॉचिंग टॉवर, सूचना केंद्र, जैवविविधता अध्ययन केंद्र, पार्किंग स्थल और पर्यटक सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा। भारतीय संस्कृति में पक्षियों का महत्व वन मंत्री  कश्यप ने कहा कि भारतीय संस्कृति में पक्षियों और जीव-जंतुओं को हमेशा पूजनीय स्थान प्राप्त रहा है। वैदिक काल से लेकर आधुनिक युग तक पक्षियों को शुभता, समृद्धि और पर्यावरण संतुलन का प्रतीक माना गया है। उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे जैव विविधता के संरक्षण में जिम्मेदार भूमिका निभाएं। खाद्य मंत्री  दयालदास बघेल बोले-आज क्षेत्रवासियों का सपना साकार हुआ कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री  दयालदास बघेल ने कहा कि वे स्वयं इस क्षेत्र से जुड़े रहे हैं और बचपन से यहां पक्षियों के विचरण को देखते आए हैं। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के लोगों ने वर्षों पहले संकल्प लिया था कि किसी भी प्रवासी पक्षी को क्षति नहीं पहुंचानी है। इसी संकल्प ने गिधवा-परसदा को पक्षी विहार के रूप में विकसित कर दिया है। उन्होंने कहा कि आज का दिन केवल कार्यक्रम नहीं, बल्कि क्षेत्रवासियों के लिए गौरव और उत्साह का पर्व है। यह स्थल अब देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित करेगा। कार्यक्रम को विधायक  ईश्वर साहू और कलेक्टर  रनवीर शर्मा ने नागरिकों से पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता और प्राकृतिक आवासों को सुरक्षित रखने में सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की। भारत का उभरता हुआ अंतर्राष्ट्रीय बर्ड-वॉचिंग सर्किट गिधवा-परसदा वेटलैंड का भूगोल प्राकृतिक जलाशयों, विशाल आर्द्रभूमियों तथा शांत वातावरण से समृद्ध है, जो प्रवासी पक्षियों हेतु आदर्श माना जाता है। यहाँ हर वर्ष सितंबर से मार्च के मध्य बारहेड गूज, कॉमन टील, पिंटेल डक, नॉर्दर्न शवलर, ब्लैक-नेक्ड स्टॉर्क, पेंटेड स्टॉर्क, ओपनबिल्ड स्टॉर्क, सारस क्रेन सहित 270 प्रजातियों के पक्षी विचरण करने आते हैं। राज्य सरकार का लक्ष्य है कि गिधवा-परसदा को राष्ट्रीय बर्ड-वॉचिंग साइट के रूप में मान्यता मिले इसे अंतर्राष्ट्रीय बर्ड-वॉचिंग सर्किट में शामिल किया जाए इस क्षेत्र को रैमसर साइट के रूप में प्रस्तावित करने की प्रक्रिया और तेज की जाए। अंतर्राष्ट्रीय बर्ड-वॉचिंग सर्किट में शामिल बर्ड वॉचिंग टॉवर, इंटरप्रिटेशन गैलरी, पर्यटक स्वागत केंद्र, प्रकृति अध्ययन केंद्र, सोलर पाथवे, नाव संचलन व्यवस्था, सुरक्षित पक्षी दमेजपदह ्रवदम , डिजिटल मॉनिटरिंग और जियो-टैगिंग प्रणाली शामिल होंगें। कार्यक्रम में विधायक  दीपेश साहू, रजककार विकास बोर्ड अध्यक्ष  प्रहलाद रजक, जनपद अध्यक्ष हेमा दिवाकर, जनपद अध्यक्ष खोरबाहरा राम साहू, जिला अध्यक्ष अजय साहू, पूर्व विधायक अवधेश चंदेल, एसडीएम नवागढ़ दिव्या पोटाई, जिला पंचायत सदस्य मधु राय  प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख  वी. निवास राव, मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक  अरुण पांडे, मुख्य वन संरक्षक दुर्ग सु एम. मर्सीबेला, दुर्ग संभाग के सभी मुख्य वनमंडलाधिकारी सहित स्थानीय जनप्रतिनिधिगण, स्कूली बच्चे तथा बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे। 270 प्रजाति के पक्षी विचरण करने आते हैं गिधवा-परसदा में  उल्लेखनीय है कि यह क्षेत्र अपने प्राकृतिक सौंदर्य, शांत वातावरण तथा हर वर्ष बड़ी संख्या में आने वाले प्रवासी पक्षियों के लिए जाना जाता है। यहां विभिन्न तालाबों, प्राकृतिक आर्द्रभूमि, संरक्षण क्षेत्रों तथा प्रवासी पक्षियों के आसरे का उपयुक्त स्थल है। वर्तमान मौसम में गिधवा-परसदा पहुंची पक्षी मार्च माह तक यहां विचरण कर अपने मुल्क वापस होंगी। यहां विशेष रूप से बारहेड गूज, नॉर्दर्न शवलर, कॉमन टील, पिनटेल डक, पेंटेड स्टॉर्क, ओपनबिल्ड स्टॉर्क, ब्लैक-नेक्ड स्टॉर्क, सारस क्रेन सहित 270 प्रजाति के पक्षी विचरण करते हैं। गिधवा-परसदा वेटलैंड राज्य ही नहीं, बल्कि देश के प्रमुख बर्ड-वॉचिंग स्थल के रूप में उभर रहा है। गिधवा-परसदा को अंतर्राष्ट्रीय पहचान दिलाने का लक्ष्य राज्य सरकार की मंशा है। गिधवा-परसदा पक्षी विहार को राष्ट्रीय स्तर के साथ-साथ अंतर्राष्ट्रीय बर्ड-वॉचिंग सर्किट में भी शामिल किया जा सके। इसके लिए आधारभूत सुविधाओं का विकास, सूचनात्मक साइनबोर्ड, बर्ड वॉचिंग टॉवर, सोलर लाइटिंग, जैवविविधता अध्ययन केंद्र जैसी योजनाओं पर विस्तार से कार्य किया जाएगा। भारत को प्रमुख पक्षियों का स्वर्ग बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम  गिधवा-परसदा में बर्ड इंटरप्रिटेशन सेंटर और बर्ड सफारी का शुभारंभ न केवल छत्तीसगढ़ की जैव विविधता को संरक्षित करेगा, बल्कि प्रदेश के पर्यटन, शोध, शिक्षा और पर्यावरणीय संवर्धन के क्षेत्र में एक नया इतिहास रचेगा। यह पहल निश्चित रूप से गिधवा-परसदा को भारत का प्रमुख पक्षी स्वर्ग बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। शीघ्र निराकरण हेतु पत्र सादर प्रेषित है।

रायपुर: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने हीराबाई झरेका बघेल को राष्ट्रीय हस्तशिल्प पुरस्कार से सम्मानित किया

 रायपुर : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के हाथों हीराबाई झरेका बघेल राष्ट्रीय हस्तशिल्प पुरस्कार से सम्मानित पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने दी बधाई एवं शुभकामनाएं     रायपुर राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने छत्तीसगढ़ की प्रतिभाशाली धातुकला शिल्पकार श्रीमती हीराबाई झरेका बघेल को उनकी उत्कृष्ट कलात्मक उपलब्धियों के लिए राष्ट्रीय हस्तशिल्प पुरस्कार से सम्मानित किया है। यह पुरस्कार छत्तीसगढ़ की समृद्ध धातुकला परंपरा को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित स्थान दिलाने के लिए उनकी सराहनीय सेवा का प्रतीक है। राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने आज नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित राष्ट्रीय हस्तशिल्प समारोह में देश भर के हस्तशिल्पियों को सम्मानित किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता केंद्रीय वस्त्र मंत्री श्री गिरिराज सिंह ने की, इस मौके पर राज्य मंत्री श्री पबित्रा मार्गेरिटा कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप उपस्थित थीं।     पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने इस उपलब्धि पर श्रीमती हीराबाई झरेका बघेल को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। मंत्री श्री अग्रवाल ने कहा कि श्रीमती हीराबाई झरेका ने छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत और धातुकला क्षेत्र में अपना उत्कृष्ट योगदान दिया है। उन्होंने छत्तीसगढ़ को विश्व पटल पर गौरवान्वित किया है। उनकी यह उपलब्धि प्रदेश के लिए गर्व की बात है। उनका यह कार्य न केवल हमारी कला को संरक्षित करता है, बल्कि नये कलाकारों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है।      श्री राजेश अग्रवाल ने आगे कहा कि श्रीमती हीराबाई झरेका की अद्भुत सफलता पर छत्तीसगढ़ सरकार और संस्कृति विभाग की ओर से हार्दिक अभिनंदन। हमारे कलाकारों की उत्कृष्टता और उनका समर्पण ही हमारी सांस्कृतिक विरासत को जीवंत बनाए रखने का मूल आधार है। संस्कृति विभाग निरंतर प्रयासरत है कि वह धातुकला के शिल्पियों एवं कलाकारों को तकनीकी प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता एवं उचित मंच प्रदान करे, जिससे वे अपनी कला को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित कर सकें। यह हमारा कर्तव्य है कि हम अपनी सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करते हुए विश्व के सामने मजबूती से प्रस्तुत करें।     संस्कृति विभाग छत्तीसगढ़ के शिल्पकारों के कौशल संवर्धन के लिए विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रम, वित्तीय सहायता एवं प्रदर्शनियों का आयोजन करता रहता है, जिससे कि वे अपनी कला को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शित कर सकें।  विभाग का उद्देश्य है कि प्रदेश के धातुकला एवं हस्तशिल्प क्षेत्र को संरक्षित करते हुए युवाओं को रोजगार के अवसर प्रदान किए जाएं और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित किया जाए। श्रीमती हीराबाई झरेका को राष्ट्रीय हस्तशिल्प पुरस्कार प्राप्त होने से न केवल छत्तीसगढ़ की कला एवं संस्कृति की प्रतिष्ठा बढ़ी है बल्कि यह पूरे प्रदेश के शिल्पकारों के लिए एक नई प्रेरणा भी बनी हैं।

रायपुर: ग्रामीण बस योजना को जीवनरेखा बताते हुए परिवहन मंत्री केदार कश्यप ने की सराहना

रायपुर : ग्रामीण बस योजना ग्रामीण जनों के लिए जीवनरेखा: परिवहन मंत्री  केदार कश्यप परिवहन मंत्री  केदार कश्यप ने विभागीय कार्यों की समीक्षा की ऑटोमेटेड कंप्यूटरीकृत ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक (ई-ट्रैक) बनाने की योजना रायपुर परिवहन मंत्री  केदार कश्यप की अध्यक्षता में आज मंत्रालय महानदी भवन में विभागीय कामकाज की समीक्षा की गई। बैठक में विभाग द्वारा संचालित विभिन्न परियोजनाओं की प्रगति, विशेषकर ऑटोमेटेड ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक (ई-ट्रैक), ग्रामीण बस योजना और वाहन सुरक्षा से संबंधित कार्यों की विस्तृत समीक्षा की गई। इस अवसर सचिव परिवहन  एस प्रकाश सहित सभी वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। राज्य के सभी परिवहन कार्यालयों में ई-ट्रैक निर्माण की समीक्षा बैठक में बताया गया कि छत्तीसगढ़ के सभी परिवहन कार्यालयों में सेंसर आधारित ऑटोमेटेड कंप्यूटरीकृत ड्राइविंग टेस्ट ट्रैक (ई-ट्रैक) बनाने की योजना लागू है। ई-ट्रैक के माध्यम से कुशल चालक ही लाइसेंस प्राप्त कर सकेंगे, जिससे सड़क सुरक्षा बढ़ेगी और दुर्घटनाओं में कमी आएगी। इस निर्माण कार्य की जिम्मेदारी छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड को सौंपी गई है। आरडीटीसी/डीटीसी निर्माण कार्य निर्धारित समय में पूरा करने के निर्देश’ 24 नवंबर 2025 को सचिव सह-परिवहन आयुक्त की अध्यक्षता में आयोजित वर्चुअल बैठक में समीक्षा करते हुए मंत्री  कश्यप ने कहा कि केंद्र सरकार की मंशा के अनुरूप सभी स्वीकृत आरडीटीसी और डीटीसी भवनों का निर्माण समय पर पूरा होना चाहिए। उन्होंने संचालकों को कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए। ’मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना – ग्रामीण जनों के लिए जीवनरेखा’ बैठक में मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना 2025 की प्रगति का भी विस्तृत प्रस्तुतिकरण किया गया। योजना का उद्देश्य ग्रामीण किसानों, मजदूरों, छोटे व्यापारियों, छात्रों और आम नागरिकों को जनपद, तहसील और जिला मुख्यालय तक सस्ती, नियमित और सुरक्षित बस सुविधा उपलब्ध करवाना है। योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों से बाजार, रोजगार, पढ़ाई और चिकित्सा सुविधाओं तक आसान पहुँचना सुनिश्चित किया जाएगा। सुदूर एवं संवेदनशील क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ा जाएगा। हवाई अड्डों और रेलवे स्टेशनों तक बेहतर आवागमन की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। मंत्री  कश्यप ने कहा कि यह योजना ग्रामीण विकास और सुगम परिवहन व्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। वाहन सुरक्षा के लिए व्हीकल ट्रैकिंग प्लेटफॉर्म की प्रगति महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए निर्भया फ्रेमवर्क के तहत सार्वजनिक वाहनों में व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस (वीएलटी) और इमरजेंसी बटन लगाने की प्रक्रिया की समीक्षा की गई। बैठक में अधिकारियों ने बताया कि अब तक 1 हजार 900 यात्री वाहनों और 5 हजार 800 स्कूल बसों में ट्रैकिंग डिवाइस लगाया जा चुका है। किसी भी आपात स्थिति में पैनिक बटन दबाते ही सूचना परिवहन विभाग के कमांड एवं कंट्रोल सेंटर से पुलिस विभाग के डायल 112 तक पहुँच जाएगी। ऑटोमेटेड फिटनेस सेंटर (एटीएस) तकनीकी जांच में बड़ा सुधार वाहनों की फिटनेस जांच को आधुनिक और पारदर्शी बनाने के लिए राज्य में अब तक 8 ऑटोमेटेड फिटनेस सेंटर (रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर, अंबिकापुर, जगदलपुर, कोरबा, राजनांदगांव, रायगढ) संचालित हैं। मशीनों के माध्यम से की जा रही फिटनेस जांच से तकनीकी गुणवत्ता में सुधार हुआ है। बैठक में अधिकारियों ने मंत्री  कश्यप को बताया कि ऑटोमेटेड फिटनेस सेंटरों के संचालन में गुजरात के बाद छत्तीसगढ़ दूसरे स्थान पर है, यह राज्य के लिए गौरव की बात है। इसके साथ ही जल्द से जल्द जांजगीर-चांपा, बलौदाबाजार, धमतरी, महासमुंद, कांकेर, दंतेवाड़ा, सारंगढ़ और सूरजपुर में भी नए ऑटोमेटेड फिटनेस सेंटर स्थापित किए जाएंगे।

उपमुख्यमंत्री ने 2.97 करोड़ रुपए लागत के सड़क निर्माण कार्य का किया भूमिपूजन

रायपुर : मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के नेतृत्व में ग्रामीण बुनियादी ढांचे को मिल रही मजबूती– उपमुख्यमंत्री  विजय शर्मा उपमुख्यमंत्री ने 2.97 करोड़ रुपए लागत के सड़क निर्माण कार्य का किया भूमिपूजन मोहगांव से कोको तक 4.30 किमी लंबे सड़क निर्माण से हजारों ग्रामवासी होंगे लाभान्वित उप मुख्यमंत्री ने की स्कूल भवन, सायकल स्टैंड, समतलीकरण, सीसी रोड, मुरमीकरण, मंच निर्माण की घोषणा  रायपुर उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा के सतत और दृढ़ प्रयासों का परिणाम है कि कबीरधाम जिला आज शहर से लेकर गाँव तक चौमुखी विकास कर रहा है। इसी कड़ी में उन्होंने आज प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना अंतर्गत ग्राम कोको में 2 करोड़ 97 लाख रुपए की लागत से 4.30 किमी लंबे मोहगांव–छांटा–कोको सड़क निर्माण कार्य का विधिवत भूमिपूजन किया।         यह सड़क केवल यातायात सुविधा का माध्यम नहीं, बल्कि ग्रामीणों के जीवन में आने वाले आर्थिक, शैक्षिक और सामाजिक परिवर्तन का आधार बनेगी। वर्षों से सड़क संपर्क के अभाव में रहे ग्रामीणों के लिए यह निर्माण नई उम्मीद, नया अवसर और नया भविष्य लेकर आएगा। ग्रामवासियों ने सड़क निर्माण के लिए उपमुख्यमंत्री  शर्मा से आग्रह किया था, जिसे उन्होंने प्राथमिकता देते हुए मंजूरी प्रदान की। आज भूमि पूजन के साथ ही इस बहुप्रतीक्षित निर्माण कार्य की औपचारिक शुरुआत हो चुकी है, जिससे पूरा क्षेत्र विकास की नई राह पर आगे बढ़ रहा है।          उप मुख्यमंत्री  शर्मा ने कार्यक्रम में क्षेत्र के विकास के लिए कई घोषणाएँ भी कीं। उन्होंने हायर सेकेंडरी स्कूल भवन निर्माण की घोषणा करते हुए स्कूल परिसर के समतलीकरण के लिए 3.50 लाख रुपए, सी सी रोड के लिए 2.60 लाख रुपए, सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देने हेतु मंच निर्माण के लिए 2.50 लाख रुपए, सहकारी समिति पहुंच मार्ग के लिए सीसी रोड निर्माण, छांटा–कोको मार्ग के बीच मुरमीकरण के लिए 5 लाख रुपए,  विद्यार्थियों की सुविधा के लिए साइकिल स्टैंड निर्माण की घोषणा की। इस दौरान जिला पंचायत अध्यक्ष  ईश्वरी साहू, उपाध्यक्ष  कैलाश चंद्रवंशी सहित जनप्रतिनिधि और ग्रामवासी उपस्थित रहे।       उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा ने भूमिपूजन कार्यक्रम में कहा कि विकास के लिए मजबूत बुनियादी ढांचा आवश्यक है और यह परियोजना स्थानीय समुदाय की जरूरतों को पूरा करेगी। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय की सरकार ग्रामीण विकास के प्रति प्रतिबद्ध है। इस सड़क के बनने से मोहगांव–छांटा–कोको गांव के हजारों ग्रामवासियों को लाभ मिलेगा। आवागमन में सुविधा होगी। बेहतर सड़कों के जरिए शिक्षा, स्वास्थ्य, और व्यापार के नए अवसर साकार होंगे। उन्होंने बताया कि सरकार गांवों में बेहतर सड़कें और सुविधाएं प्रदान करने के लिए लगातार प्रयासरत है। उन्होंने आगे कहा कि इस सड़क के निर्माण से न केवल आवागमन में सुविधा होगी, बल्कि क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिलेगा। गांवों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करना हमारी प्राथमिकता है, ताकि हर व्यक्ति को बेहतर सुविधाएं मिल सकें। उन्होंने कहा कि हम चाहते हैं कि हर क्षेत्र, चाहे वह शहरी हो या ग्रामीण, विकास की मुख्यधारा से जुड़े।

रायपुर: एग्रीस्टैक पोर्टल पर पंजीयन की अंतिम तिथि 15 दिसंबर तक बढ़ाई गई

रायपुर : एग्रीस्टैक पोर्टल में अब पंजीयन 15 दिसंबर तक डुबान क्षेत्र, वन अधिकार पट्टाधारी और छुटे हुए किसान करा सकेंगे पंजीयन कृषि मंत्री  रामविचार के निर्देश पर हुई पंजीयन की तिथि में वृद्धि रायपुर किसान अपने रकबे और फसल आदि के बारे में जानकारी एग्रीस्टैक पोर्टल में अब 15 दिसम्बर तक दर्ज करा सकेंगे। कृषि विकास एवं जैव प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा समिति लॉगिन की सुविधा के लिए सभी कलेक्टरों और संबंधित विभागों को दिशा-निर्देश जारी किए गए है। साथ ही कैरीफारवर्ड, डूबान-वन पट्टाधारी कृषकों के पंजीयन सुविधा के दृष्टिगत रखते हुए पंजीयन की तारीख को 15 दिसम्बर 2025 तक बढ़ा दी गई है।      गौरतलब है कि कृषि मंत्री  राम विचार नेताम द्वारा एग्रीस्टैक पोर्टल में पंजीयन को लेकर आ रही विभिन्न दिक्कतों के मद्देनजर विभागीय अधिकारियों को इस संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी करने निर्देश दिए गए थे। इस संबंध में मंत्रालय महानदी भवन से जारी पत्र में एग्रीस्टैक पोर्टल एवं एकीकृत किसान पोर्टल में पंजीयन और तकनीकी समस्याओं के शीघ्र निराकरण के लिए तहसीलदारों एवं समितियों अंतर्गत कृषि विभाग के नोडल अधिकारियों से अपेक्षा की गई है। एग्रीस्टैक पोर्टल एवं एकीकृत किसान पोर्टल से संबंधित तकनीकी समस्या पर खाद्य विभाग, राजस्व विभाग, संचालनालय कृषि एवं एन.आई.सी. के समन्वय से सभी आवश्यक कार्यवाही की जाए।      गौरतलब है कि कुछ जिलों में पंजीयन विवरण में कुछ कृषकों के खसरों में एकीकृत किसान पोर्टल में फसल प्रविष्टि प्रदर्शित नहीं होने की जानकारी के साथ ही यह भी बताया गया था कि इसे सुधारने का विकल्प एकीकृत किसान पोर्टल के आईडी में उपलब्ध नहीं है। इसी प्रकार पंजीकृत कृषकों के फौत होने के पश्चात उनके वारिसानों हेतु वारिसान पंजीयन का विकल्प उपलब्ध नहीं है। इसके अलावा महाल ग्रामों के खसरें का डाटा एग्रीस्टैक से नही मिलने की समस्या आ रही थी। इस समस्या के निराकरण के लिए कृषि विभाग द्वारा दिशा-निर्देश जारी कर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए है।