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बस्तर में विकास कार्यों का जायजा ले रहे उप मुख्यमंत्री अरुण साव, निर्माण कार्यों का लगातार निरीक्षण

उप मुख्यमंत्री अरुण साव का बस्तर में निर्माण कार्यों का निरीक्षण जारी  मिशन अमृत के तहत निर्माणाधीन इंटेक-वेल और वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का लिया जायजा, स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स का काम भी देखा  रायपुर उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने अपने बस्तर प्रवास के चौथे दिन आज सुकमा में मिशन अमृत 2.0 के अंतर्गत शहर में पेयजल आपूर्ति की व्यवस्था को मजबूत करने बनाए जा रहे वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने योजना के तहत शबरी नदी पर निर्माणाधीन इंटेक-वेल के कार्यों को भी देखा। उन्होंने पानी टंकी और पाइपलाइन विस्तार के कार्यों को भी तेजी से पूर्ण करते हुए जनवरी-2027 से मिशन अमृत की इस योजना से सुकमा में जल की आपूर्ति प्रारंभ करने के निर्देश दिए। केंद्र सरकार की मिशन अमृत 2.0 के तहत नगर पालिका द्वारा 86 करोड़ की लागत से सुकमा शहर की पेयजल व्यवस्था का सुदृढ़ीकरण किया जा रहा है। इसका 54 प्रतिशत काम पूरा कर लिया गया है। उप मुख्यमंत्री साव ने नगरीय प्रशासन विभाग के अधिकारियों से कहा कि सुकमा की आगामी 25 वर्षों की जरूरत को ध्यान में रखकर इसका निर्माण किया जा रहा है। निर्माण और निर्माण सामग्री की गुणवत्ता से किसी प्रकार का समझौता नहीं करना है। काम में तेजी बरकरार रखते हुए नियत समय में इसे पूर्ण करना है।  उप मुख्यमंत्री साव ने लोक निर्माण विभाग द्वारा सुकमा के कुम्हाररास में 11 करोड़ 62 लाख रुपए की लागत से बनाए जा रहे स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स का भी निरीक्षण किया। उन्होंने कार्यों में तेजी लाते हुए अधिकारियों और निर्माण एजेंसी से दिसम्बर तक इसे पूर्ण करने को कहा। करीब 10 एकड़ में बन रहे स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में फुटबॉल मैदान, एथलेटिक्स ट्रैक, इंडोर बैडमिंटन कोर्ट, प्रशासनिक भवन, बॉक्स-क्रिकेट, स्वीमिंग-पूल जैसी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। इसके निर्माण से सुकमा की खेल प्रतिभाओं को अपने कौशल को निखारने एक सर्वसुविधायुक्त अधोसंरचना और सुविधाएं मिलेंगी। अब तक इसका 50 प्रतिशत काम पूरा हो गया है।  तीनों कार्यों के निरीक्षण के दौरान कलेक्टर अमित कुमार भी उप मुख्यमंत्री के साथ थे।

नैनो उर्वरकों से खेती बन रही अधिक लाभकारी, किसानों को मिल रहे बेहतर परिणाम

नैनो उर्वरकों से खेती बन रही अधिक लाभकारी, किसानों को मिल रहे बेहतर परिणाम कम लागत, अधिक दक्षता और बेहतर उत्पादन से बढ़ रहा किसानों का भरोसा रायपुर,  कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों के बढ़ते उपयोग से किसानों को उत्पादन बढ़ाने और लागत कम करने में मदद मिल रही है। नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी जैसे उन्नत उर्वरकों का उपयोग प्रदेश के किसानों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। इनके प्रयोग से फसलों को आवश्यक पोषक तत्व अधिक प्रभावी ढंग से प्राप्त हो रहे हैं, जिससे उत्पादन क्षमता और गुणवत्ता दोनों में सुधार देखने को मिल रहा है। सरगुजा जिले के अम्बिकापुर विकासखंड के ग्राम कंचनपुर के प्रगतिशील किसान राम लखन राजवाड़े ने नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी के उपयोग से मिले सकारात्मक अनुभव साझा किए हैं। लगभग 10 एकड़ कृषि भूमि में विभिन्न फसलों की खेती करने वाले राजवाड़े ने बताया कि उन्होंने पत्ता गोभी, धान तथा अन्य फसलों में नैनो उर्वरकों का प्रयोग किया, जिससे फसलों की वृद्धि और विकास में अच्छे परिणाम प्राप्त हुए।उन्होंने बताया कि नैनो उर्वरकों का छिड़काव सीधे पौधों पर किया जाता है, जिससे पोषक तत्वों का अवशोषण अधिक प्रभावी ढंग से होता है। परिणामस्वरूप फसल को आवश्यक पोषण समय पर प्राप्त होता है और उत्पादन क्षमता में वृद्धि देखने को मिलती है। धान की फसल में भी बेहतर वृद्धि तथा विकसित बालियों के रूप में सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार नैनो यूरिया और नैनो डीएपी उर्वरकों की उपयोग दक्षता बढ़ाने में सहायक हैं। इनके प्रयोग से उर्वरकों की आवश्यकता कम होती है, जिससे खेती की लागत में कमी आती है। साथ ही पोषक तत्वों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होने से पर्यावरणीय प्रभाव भी कम होता है और मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने में मदद मिलती है। राज्य सरकार एवं कृषि विभाग किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। प्रशिक्षण, प्रदर्शन और जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से किसानों को नैनो उर्वरकों के उपयोग और उनके लाभों की जानकारी प्रदान की जा रही है। इसका सकारात्मक प्रभाव प्रदेश के कृषि क्षेत्र में दिखाई दे रहा है। नैनो उर्वरकों का सफल उपयोग करने वाले किसान अब अन्य कृषकों को भी इस तकनीक को अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। उनका मानना है कि आधुनिक कृषि पद्धतियों के माध्यम से कम लागत में बेहतर उत्पादन प्राप्त कर खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाया जा सकता है।

बहादुरी का बड़ा सम्मान! दिल्ली में राष्ट्रपति के हाथों शौर्य चक्र पाएंगे छत्तीसगढ़ के 3 जवान

बालोद/भानुप्रतापपुर. छत्तीसगढ़ के तीन जवानों को आज नई दिल्ली में राष्टपति द्रौपदी मुर्मू के हाथों प्रतिष्ठित वीरता सम्मान शौर्य चक्र से सम्मानित किया जाएगा. असम रायफल में पदस्थ जवान भोजराम साहू को मणिपुर में आंतकियों के साथ मुठभेड़ में प्रदर्शित अदम्य साहस और वीरता के लिए यह सम्मान प्रदान किया जाएगा. वहीं छत्तीसगढ़ में नक्सल अभियानों के दौरान उल्लेखनीय भूमिका निभाने वाले पुलिस निरीक्षक लक्ष्मण केवट और निरीक्षक रामेश्वर देशमुख भी इस सम्मान से अलंकृत होंगे.  आतंकियों ने पर भारी पड़े भोजराम साहू असम राइफल्स के जवान भोजराम साहू ने बताया कि 15 नवंबर, 2024 को मणिपुर के टेंगनोपाल में आतंकियों के घुसने की सूचना मिली थी. करीब 9:30 बजे आतंकियों के साथ मुठभेड़ हो गई, जिसमें भोजराम साहू को एक गोली भी लगी थी. लेकिन उनका हौंसला नहीं टूटा, जवाब कार्रवाई में भोजराम ने फायरिंग नहीं रोकी. फलस्वरूप आतंकियों को मैदान छोड़कर भागना पड़ा. इस कार्रवाई में 3 आतंकियों की मौत हुई थी. बता दें कि भोजराम साहू, बालोद जिले के आदिवासी विकास खण्ड डौंडी के गांव ढोर्रीठेमा के रहने वाले हैं. वह असम रायफल में पदस्थ हैं. नक्सली मोर्चे पर ‘राम-लक्ष्मण’ ने निभाई अहम भूमिका छत्तीसगढ़ में नक्सल विरोधी अभियानों में अदम्य साहस, नेतृत्व क्षमता और कर्तव्यनिष्ठा का परिचय देने वाले पुलिस अधिकारी निरीक्षक लक्ष्मण केवट और निरीक्षक रामेश्वर देशमुख को आज ‘शौर्य चक्र’ से सम्मानित किया जाएगा. राजनांदगांव और बस्तर के दुर्गम जंगलों में वर्षों से नक्सल विरोधी अभियानों का नेतृत्व कर रहे दोनों जांबाज अफसरों ने कई सफल ऑपरेशनों को अंजाम दिया है. बस्तर में जहां भी उनकी तैनाती रही, वहां उन्होंने अग्रिम मोर्चे पर रहकर सुरक्षा बलों का नेतृत्व किया और नक्सलियों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई की. नक्सल एनकाउंटर स्पेशलिस्ट के तौर पर मिली पहचान पुलिस महकमे में दोनों अधिकारियों को नक्सल एनकाउंटर स्पेशलिस्ट के रूप में जाना जाता है. उपलब्ध जानकारी के अनुसार, निरीक्षक लक्ष्मण केवट अब तक 97 नक्सलियों के खिलाफ सफल अभियानों का हिस्सा रहे हैं, जबकि निरीक्षक रामेश्वर देशमुख 56 नक्सलियों के विरुद्ध हुई कार्रवाइयों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं. 29 नक्सलियों के सफाए वाला ऐतिहासिक ऑपरेशन दोनों अधिकारियों की बहादुरी का सबसे बड़ा उदाहरण 16 अप्रैल 2024 को देखने को मिला, जब कांकेर जिले के छोटे बेठिया थाना क्षेत्र के हापाटोला जंगल में सुरक्षा बलों ने एक बड़े अभियान को अंजाम दिया. इस अभियान में 15 महिला नक्सलियों सहित कुल 29 नक्सली मारे गए थे. छत्तीसगढ़ के नक्सल विरोधी इतिहास में इसे सबसे सफल अभियानों में से एक माना जाता है. ऑपरेशन के दौरान दोनों अधिकारियों ने स्वयं जंगल के भीतर मोर्चा संभालते हुए जवानों का नेतृत्व किया था. पहले भी मिल चुके हैं कई सम्मान निरीक्षक लक्ष्मण केवट को अब तक 6 राष्ट्रपति पुलिस पदक सहित सीआरपीएफ और बीएसएफ के कई वीरता सम्मान प्राप्त हो चुके हैं. वहीं निरीक्षक रामेश्वर देशमुख को भी उनके उत्कृष्ट साहस और सेवा के लिए राष्ट्रपति द्वारा दो बार सम्मानित किया जा चुका है. अब शौर्य चक्र मिलने के साथ उनके नाम एक और प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मान जुड़ जाएगा. “लक्ष्य सिर्फ ऑपरेशन नहीं, शांति स्थापित करना है” सम्मान की घोषणा पर प्रतिक्रिया देते हुए लक्ष्मण केवट ने कहा कि उनका उद्देश्य केवल नक्सलियों के खिलाफ अभियान चलाना नहीं, बल्कि प्रभावित क्षेत्रों में शांति स्थापित करना और लोगों का विश्वास जीतना है. उन्होंने कहा, “हमारा लक्ष्य सिर्फ ऑपरेशन चलाना नहीं है, बल्कि इलाके में शांति स्थापित कर लोगों का विश्वास लौटाना है. हमने अनेक सफल अभियान चलाए हैं, लेकिन सबसे बड़ी सफलता क्षेत्र में सामान्य स्थिति बहाल करना है.” वर्तमान में लक्ष्मण केवट पाखंजूर में पदस्थ हैं, जबकि रामेश्वर देशमुख भानुप्रतापपुर थाना प्रभारी के रूप में सेवाएं दे रहे हैं. नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में वर्षों तक जान जोखिम में डालकर देश की सुरक्षा और शांति के लिए कार्य करने वाले इन दोनों अधिकारियों को मिलने वाला शौर्य चक्र न केवल उनकी बहादुरी का सम्मान है, बल्कि छत्तीसगढ़ पुलिस और सुरक्षा बलों के लिए भी गौरव का क्षण है.  छत्तीसगढ़ पुलिस के लिए यह गौरवपूर्ण क्षण : SP निखिल राखेचा इस गौरवपूर्ण पल को लेकर पुलिस अधिक्षक निखिल आकाश राखेचा ने कहा कि कांकेर पुलिस के साथ पूरे छत्तीसगढ़ की पुलिस के लिए गौरव का विषय है कि कांकेर जिले के दो निरीक्षकों को महामहिम राष्ट्रपति द्वारा यह सम्मान प्रदान किया जा रहा है. आने वाले समय में पूरे छत्तीसगढ़ पुलिस के लिए यह प्रेरणा स्रोत भी रहेगा कि कांकेर जैसे जिले में रहकर लोग इस तरह के उत्कृष्ट कार्यों को अंजाम दे सकते हैं.

वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने किया शुभारंभ, वरिष्ठ नागरिकों के साथ खेली कैरम-लूडो

बुजुर्गों को मिला अपनापन और सम्मान का नया ठिकाना, अंबिकापुर में शुरू हुआ ‘सियान गुड़ी’ डे-केयर सेंटर वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने किया शुभारंभ, वरिष्ठ नागरिकों के साथ खेली कैरम-लूडो योग, स्वास्थ्य जांच, पुस्तकालय, मनोरंजन और सामाजिक सहभागिता की मिलेगी सुविधा रायपुर, वरिष्ठ नागरिकों को सम्मानपूर्ण, सुरक्षित एवं आनंदमय वातावरण उपलब्ध कराने की दिशा में सरगुजा जिले में एक नई पहल की शुरुआत हुई है। समाज कल्याण विभाग द्वारा स्थापित ‘सियान गुड़ी’ (वरिष्ठ नागरिक डे-केयर सेंटर) का शुभारंभ सोमवार को वित्त एवं जिले के प्रभारी मंत्री ओ.पी. चौधरी ने समाज कल्याण एवं महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े की उपस्थिति में किया। इस अवसर पर वित्तमंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि बुजुर्ग समाज की अमूल्य धरोहर हैं। उनके अनुभव और मार्गदर्शन से नई पीढ़ी को दिशा मिलती है। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान और सुखद जीवन को ध्यान में रखते हुए सियान गुड़ी की स्थापना की गई है, जहां उन्हें आवश्यक सुविधाओं के साथ आत्मीय और सकारात्मक वातावरण मिलेगा। महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि वर्तमान समय में व्यस्त जीवनशैली के कारण कई बार बुजुर्ग स्वयं को अकेला महसूस करते हैं। ऐसे में सियान गुड़ी उनके लिए सामाजिक जुड़ाव, स्वास्थ्य संरक्षण और मनोरंजन का सशक्त माध्यम बनेगा। उन्होंने कहा कि यह केंद्र वरिष्ठ नागरिकों के जीवन में नई ऊर्जा और उत्साह का संचार करेगा। उन्होंने बताया कि केंद्र में योग एवं प्राणायाम, फिजियोथेरेपी, प्राथमिक स्वास्थ्य जांच, पुस्तकालय, पारिवारिक परामर्श, सांस्कृतिक गतिविधियां, इंडोर गेम्स, स्वल्पाहार और भोजन जैसी सुविधाएं उपलब्ध रहेंगी। 25 सीटर क्षमता वाले इस डे-केयर सेंटर का संचालन सप्ताह में छह दिन प्रातः 9 बजे से सायं 5 बजे तक किया जाएगा। शुभारंभ कार्यक्रम के दौरान मंत्रीगण एवं जनप्रतिनिधियों ने वरिष्ठ नागरिकों के साथ कैरम और लूडो खेलकर आत्मीय संवाद किया। इस अवसर पर बुजुर्गों को शाल एवं श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया गया तथा व्हीलचेयर और छड़ी का वितरण भी किया गया। यह पहल वरिष्ठ नागरिकों के सामाजिक, मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। मनेंद्रगढ़ रोड में स्थापित इस केंद्र का संचालन समाज कल्याण विभाग के सहयोग से अनामिका वेलफेयर सोसायटी, अंबिकापुर द्वारा किया जाएगा। 60 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिक यहां दिनभर स्वास्थ्य, मनोरंजन और सामाजिक सहभागिता से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों का लाभ उठा सकेंगे। कार्यक्रम में विधायक प्रबोध मिंज, महापौर श्रीमती मंजूषा भगत सहित अन्य जनप्रतिनिधि , कलेक्टर अजीत वसंत, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक राजेश अग्रवाल तथा विभागीय अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।

वनमंत्री केदार कश्यप ने मर्दापाल में विकास कार्यों का किया लोकार्पण

रायपुर. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में ग्रामीण विकास को गति देने के लिए मर्दापाल अंचल की 23 ग्राम पंचायतों में 4 करोड़ 6 लाख 67 हजार रूपए की लागत से विभिन्न विकास कार्यों का शुभारंभ किया गया है। वन मंत्री केदार कश्यप ने क्षेत्र के विभिन्न ग्रामों का दौरा कर इन बुनियादी विकास कार्यों का विधि-विधान से भूमिपूजन किया। इन स्वीकृत विकास कार्यों में मुख्य रूप से सड़क, पुलिया, स्कूल भवन, सामुदायिक भवन, पंचायत भवन, रंगमंच और अटल डिजिटल सुविधा केंद्रों का निर्माण शामिल है। इन परियोजनाओं के पूर्ण होने से स्थानीय ग्रामीणों को बेहतर आधारभूत सुविधाएं मिलेंगी और क्षेत्र के समग्र विकास को एक नई गति प्राप्त होगी। ग्रामवार विकास कार्यों का विवरण ग्राम चांगे लगभग 77.96 लाख रूपए की लागत से पुलिया, नवीन प्राथमिक शाला भवन, सीसी सड़क, रंगमंच और सामुदायिक भवन निर्माण। ग्राम मूलनार में लगभग 90.79 लाख रूपए की लागत से पुलिया, बाउंड्रीवाल, सीसी सड़क तथा अन्य बुनियादी ढांचागत विकास, ग्राम बड़ेकुरुषनार लगभग 88.14 लाख रूपए की लागत से पुलिया, रंगमंच, आहाता, अटल डिजिटल सुविधा केंद्र, नवीन प्राथमिक शाला भवन, सांस्कृतिक भवन और पंचायत भवन का निर्माण, ग्राम बेचा लगभग 21.79 लाख की लागत से रंगमंच एवं माध्यमिक शाला भवन का भूमिपूजन और लोकार्पण, अन्य ग्राम पंचायतें रानापाल, कोंगेरा, मुंगवाल और चेरंग में 28 लाख रूपए तथा हथकली, मटवाल, पेरमापाल, नरिहा और आदनार में लगभग 1 करोड़ रूपए की लागत से सामुदायिक भवन, सीसी सड़क, शाला भवन और पुलिया निर्माण कार्य का भूमिपूजन और लोकार्पण किया गया, शामिल है। गाँवों को आत्मनिर्भर बनाना सरकार की प्राथमिकता- वनमंत्री इस अवसर पर वनमंत्री केदार कश्यप ने कहा कि राज्य सरकार सुदूर गांवों तक विकास की मुख्यधारा पहुंचाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है। सड़क, शिक्षा, सामुदायिक अधोसंरचना और डिजिटल सेवाओं का विस्तार हमारी शीर्ष प्राथमिकता है। श्अटल डिजिटल सुविधा केंद्रोंश् के माध्यम से अब ग्रामीणों को सभी जरूरी शासकीय सेवाओं का लाभ उनके अपने गांव में ही मिल सकेगा। उन्होंने आगे जोड़ा कि सरकार का उद्देश्य केवल निर्माण कार्य कराना नहीं, बल्कि सुशासन के माध्यम से ग्रामीणों के जीवन स्तर में सकारात्मक बदलाव लाकर हर गांव को समृद्ध और आत्मनिर्भर बनाना है।

सियासी बयानबाजी तेज! स्वास्थ्य मंत्री ने कांग्रेस को घेरा, नेता प्रतिपक्ष महंत ने किया पलटवार

रायपुर. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के लिए कवायद शुरू हो गई है. पद के लिए कई दावेदार हैं, कुछ मुखर हैं, तो कुछ पर्दे के पीछे गुप-चुप तरीके से अपने काम में जुटे हैं. प्रदेश के मुख्य विपक्षी दल के इस अहम पद को लेकर जहां भाजपा नेता और मंत्री तंज कस रहे हैं, तो कांग्रेस नेता भी उसी तंज भरे लहजे में जवाब दे रहे हैं. कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष पद की दौड़ में कई और नेता शामिल होने पर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि पिछले 3 सालों से कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष का मुद्दा प्रदेश में घूम रहा है. अब यह बोरिंग चेप्टर हो चुका है. कांग्रेस को पूरे प्रदेश ने ही भुला दिया है. कांग्रेस की गतिविधियों को याद रखना, बुद्धिमानी वाला काम नहीं है. जब से मैने होश संभाला है, देख रहा कि इनमे आपसी मतभेद ही रहता है. कांग्रेस की परम्परा और संस्कार में ही गुटबाजी है. यहीं समय- समय पर उभरता है. स्वास्थ्य मंत्री के बयान पर नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने कहा कि हमारे में तो ऐसा नहीं है. वो अभी – अभी आए हैं, इनको कहाँ से पता लग गया. कांग्रेस में सब ठीक चल रहा है. उन्होंने कहा कि हम जो चार-पांच लोग अगुवाई कर रहे हैं, उनमें सब ठीक है. सामूहिक नेतृत्व में हम विश्वास करते हैं. चुनाव भी सामूहिक नेतृत्व में होगा. कांग्रेस में कुछ भी निर्णय होता है, तो सामूहिक नेतृत्व के आधार पर होता है. डॉ. महंत ने कहा कि आने वाले समय में जिन – जिन राज्यों में चुनाव होने वाले हैं, उनमें प्रदेश अध्यक्ष बदलने की पूरी संभावना है. छत्तीसगढ़ के बारे में भी चर्चा है. लेकिन जब तक राहुल गांधी का यहां दौरा और जिला अध्यक्षों का प्रशिक्षण नहीं हो जाता, तब तक इसकी कोई जरूरत नहीं है. खाद-बीज को लेकर कांग्रेस का प्रदर्शन चरण दास महंत ने इसके साथ खाद-बीज को लेकर कांग्रेस के प्रदर्शन पर कहा कि सरकार का सब ठीक है, कहना उचित नहीं है. निचले स्तर पर समस्या अभी भी है, गांव में तकलीफ है. गांव में काम नहीं हो रहा है, इसलिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था पूरी तरह से ठप है. इसकी चिंता सबको है, लेकिन मंत्रीगणों को नहीं दिख रहा है. इसमें गंभीरतापूर्वक मुख्यमंत्री को विचार करना चाहिए जो आज की जरूरत है. देश में “अघोषित आपातकाल” जैसे हालात इंडियन एलायंस की बैठक पर नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने कहा कि आज दिल्ली में इंडिया एलायंस की बैठक है. देश में महंगाई, डीजल-पेट्रोल, रसोई गैस और खाद्य सामग्री के बढ़ते दामों पर चर्चा होगी. देश में “अघोषित आपातकाल” जैसे हालात होने का आरोप लगाते हुए कहा कि विपक्ष की भूमिका और आगे की रणनीति पर मंथन होगा.

संघर्ष से सफलता तक: सुकमा के बारसे रोशन ने JEE Advanced में बनाई पहचान, जिला प्रशासन करेगा मदद

होनहार को पंख   सुकमा के आदिवासी किसान के बेटे बारसे रोशन ने JEE एडवांस में गाड़े झंडे  जिला प्रशासन उठाएगा बारसे रोशन के पढ़ाई का पूरा खर्च रायपुर, छत्तीसगढ़ के अति-वनांचल (सुकमा) जिले के होनहार आदिवासी छात्र बारसे रोशन ने JEE एडवांस्ड परीक्षा में ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। पहले ही प्रयास में कैटेगरी रैंक 634 लाकर और अपनी लगन से IIT (भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान) तक का सफर तय कर उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर अंचल का नाम रोशन किया है                  शिक्षा के क्षेत्र में सुदूर और वनांचल क्षेत्र सुकमा के एक आदिवासी छात्र ने राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। विपरीत परिस्थितियों और सीमित संसाधनों के बीच रहने वाले एक साधारण किसान के बेटे ने साबित कर दिया है कि अगर हौसलों में उड़ान हो, तो कोई भी लक्ष्य नामुमकिन नहीं है। जिले के सुदूर वनाँचल के झापरा क्षेत्र के निवासी आदिवासी छात्र बारसे रोशन ने देश की सबसे प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा JEE एडवांस 2026 में कैटेगरी रैंक 634 हासिल कर पूरे छत्तीसगढ़ प्रदेश का नाम रोशन किया है।  जिला प्रशासन बारसे रोशन का किया सम्मान               इस ऐतिहासिक सफलता पर छात्र का उत्साहवर्धन करने के लिए खुद कलेक्टर और जिला प्रशासन आगे आया है। तुंगल डैम में आयोजित एक गरिमामयी कार्यक्रम में कलेक्टर श्री अमित कुमार ने छात्र बारसे रोशन को शाल और श्रीफल भेंटकर सम्मानित किया। पढ़ाई के आड़े नहीं आएगा पैसा कलेक्टर             कलेक्टर श्री अमित कुमार ने इस मौके पर एक बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि रोशन की पढ़ाई की राह में पैसे कभी रोड़ा नहीं बनेंगे। जिला प्रशासन बारसे रोशन की उच्च शिक्षा की पूरी फीस का वहन करेगा, ताकि वह बिना किसी आर्थिक चिंता के देश के शीर्ष संस्थान (IIT) में अपनी पढ़ाई पूरी कर सके। क्षितिज कोचिंग इंस्टीट्यूट बन रहा है बच्चों का सारथी            बारसे रोशन की यह बड़ी सफलता किसी जादू का परिणाम नहीं, बल्कि जिला प्रशासन की सोची-समझी दूरदर्शिता का नतीजा है। जिले के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिए कलेक्टर श्री अमित कुमार और मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) श्री मुकुन्द ठाकुर के सीधे निर्देशन में क्षितिज कोचिंग इंस्टीट्यूट का संचालन किया जा रहा है। जिला शिक्षा अधिकारी श्री जी.आर. मंडावी के मार्गदर्शन और नोडल अधिकारी श्री आशीष राम के सतत पर्यवेक्षण में यह संस्थान सुकमा के आदिवासी और ग्रामीण बच्चों को IIT और मेडिकल जैसी कठिन परीक्षाओं के लिए निशुल्क तैयार कर रहा है। पर्दे के पीछे के नायक, जिन्होंने बदली तकदीर            इस बड़ी सफलता के पीछे जमीनी स्तर पर काम कर रही टीम की कड़ी मेहनत छिपी है। प्रबंधन की कमान संभाल रहे संस्थान के मैनेजर श्री सूरज सिंह ने दिन-रात मेहनत कर सुकमा में एक ऐसा अनुशासित और प्रतिस्पर्धात्मक शैक्षणिक माहौल तैयार किया है, जो आमतौर पर सिर्फ बड़े महानगरों में देखने को मिलता है। इसके साथ ही, क्षितिज संस्थान और कैम्प एकेडमी रायपुर के शिक्षक सुश्री निधि चौहान, अभिषेक नाग, रजनीश पटेल और सोनम सिंह ने बच्चों को न सिर्फ किताबी ज्ञान दिया, बल्कि परीक्षा की सटीक रणनीति और हर मोड़ पर मोटिवेशन देकर इस कठिन परीक्षा के लिए तैयार किया। माता-पिता की आंखों में छलके खुशी के आंसू           बारसे रोशन के माता-पिता दिन-रात खेतों में पसीना बहाकर परिवार का पेट पालते हैं। जब कलेक्टर ने खुद रोशन को सम्मानित किया और भविष्य की पूरी जिम्मेदारी ली, तो माता-पिता की आंखें गर्व और खुशी से छलक उठीं। रोशन और सुनील कुमार की यह सफलता आज सुकमा के हर उस बच्चे के लिए प्रेरणा बन चुकी है, जो अपनी गरीबी या पिछड़ेपन की वजह से बड़े सपने देखने से डरता था।          जिला प्रशासन के इस संवेदनशील और दूरदर्शी कदम की पूरे क्षेत्र में सराहना हो रही है। कलेक्टर, सीईओ और उनकी पूरी टीम ने छात्रों को बधाई देते हुए उम्मीद जताई है कि आने वाले सालों में सुकमा से ऐसे कई और सितारे निकलेंगे जो देश-दुनिया में जिले का नाम चमकाएंगे।

मानसून की एंट्री करीब, मौसम विभाग ने जारी की बारिश और तेज हवाओं की चेतावनी

रायपुर. छत्तीसगढ़ के कुछ इलाकों में बारिश हो रही है, लेकिन रायपुर, दुर्ग, राजनांदगांव समेत ज्यादार हिस्सों में भीषण गर्मी जारी है. दिन में धूप की तपिश और रात में गर्म हवाओं और उमस से लोगों को परेशानी का सामने करना पड़ रहा है. बीते 24 घंटे में अधिकतम तापमान में कोई बदलाव नहीं हुआ है. मौसम विभाग ने 12 जून से बारिश की गतिविधि बढ़ने की संभावना जताई है. प्रदेश में रविवार को मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, सबसे ज्यादा तापमान रायपुर में 42.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. वहीं सबसे न्यूनतम तापमान 23.2 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड हुआ. इसके अलावा कुछ इलाकों में पानी भी बरसा. कुसमी में 7 सेमी, कापू में 3 सेमी और बलरामपुर, कांसाबेल, पोदी उपरोरा में 1 सेमी बारिश हुई.  4 दिनों में छत्तीसगढ़ पहुंचेगा मानसून  मौसम विज्ञानी एच. पी. चंद्रा ने बताया कि दक्षिण पश्चिम मानसून नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा के कुछ भाग, असम और अरुणाचल प्रदेश में आज दिनांक 7 जून को पहुंच गया है। इसके आगे बढ़ने के लिए  परिस्थितियों अनुकूल है. अगले तीन से चार दिनों में महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना के कुछ भाग आंध्र प्रदेश के कुछ भाग, तमिलनाडु के शेष भाग, छत्तीसगढ़ के कुछ भाग, उड़ीसा के कुछ भाग, उप हिमालयीन पश्चिम बंगाल और सिक्किम के कुछ भाग में पहुंचने की संभावना है। प्रदेश में सोमवार को एक-दो स्थानों पर हल्की वर्षा या गरज चमक के साथ छींटें पड़ने की संभावना है। कुछ जगहों पर बिजली गिरने और गरज-चमक के साथ अंधड़ के आसार हैं. फिलहाल अधिकतम तापमान में कोई विशेष बदलाव नहीं होने की संभावना है. वजहीन 12 जून के बाद बारिश की गतिविधि बढ़ सकती है.  रायपुर में आज कैसा रहेगा मौसम ? राजधानी रायपुर में आज सुबह से बादल छाए हुए हैं. मौसम विभाग ने दिन में बादल छाए रहने के अलावा बारिश या आंधी की संभावना जताई है. अधिकतम तापमान 42 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तामपान 29 डिग्री सेल्सियस के आसपास रह सकता है. प्रमुख शहरों के तापमान बालोद में 41.7 डिग्री सेल्सियस  बेमेतरा में 41.5 डिग्री सेल्सियस कवर्धा में 41.5 डिग्री सेल्सियस  दुर्ग में 41.2 डिग्री सेल्सियस बिलासपुर में 41 डिग्री सेल्सियस  राजनांदगांव में 40.9 डिग्री सेल्सियस जगदलपुर में 38.4 डिग्री सेल्सियस  अंबिकापुर में 36.6 डिग्री सेल्सियस

निर्माणाधीन जगदेव राम उरांव कल्याण आश्रम चिकित्सालय का प्रभारी सचिव अंकित आनंद ने किया निरीक्षण, कार्यों का लिया जायजा

निर्माणाधीन जगदेव राम उरांव कल्याण आश्रम चिकित्सालय का प्रभारी सचिव श्री अंकित आनंद ने किया निरीक्षण निर्धारित मानकों के अनुरूप तेज गति से हो रहे निर्माण कार्य की सराहना रायपुर जशपुर जिले के प्रभारी सचिव श्री अंकित आनंद ने आज जशपुर में निर्माणाधीन जगदेव राम उरांव कल्याण आश्रम चिकित्सालय का निरीक्षण कर निर्माण कार्यों की प्रगति का जायजा लिया। उन्होंने अस्पताल भवन के निर्माण कार्य को निर्धारित मानकों के अनुरूप एवं तेज गति से संचालित किए जाने पर संबंधित एजेंसी और अधिकारियों की सराहना की। निरीक्षण के दौरान प्रभारी सचिव ने कहा कि अस्पताल के पूर्ण होने के बाद यह क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा देगा तथा स्थानीय लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य केंद्र के रूप में कार्य करेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि यहां मरीजों को विशेषज्ञ चिकित्सकों की बेहतर और आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध होंगी। उन्होंने निर्माण कार्यों की विस्तृत जानकारी लेते हुए अधिकारियों को गुणवत्ता बनाए रखते हुए निर्धारित समय-सीमा में कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए। इस अवसर पर कलेक्टर श्री रोहित व्यास, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अभिषेक कुमार, एसडीएम जशपुर श्री विश्वास राव मस्के, छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड के कार्यपालन अभियंता श्री प्रफुल्ल चौरे सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे। उल्लेखनीय है कि इस अत्याधुनिक चिकित्सालय का निर्माण एनटीपीसी लारा के सीएसआर मद से लगभग 35 करोड़ 53 लाख रुपये की लागत से कराया जा रहा है। अस्पताल का भूमिपूजन 7 अप्रैल 2025 को मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय द्वारा किया गया था। वर्तमान में छह मंजिला भवन के ग्राउंड फ्लोर सहित चार मंजिलों की ढलाई का कार्य पूर्ण हो चुका है तथा निर्माण कार्य तेजी से प्रगति पर है। प्रस्तावित अस्पताल में ग्राउंड फ्लोर पर इमरजेंसी सेवाएं, प्रथम तल पर ओपीडी, द्वितीय एवं तृतीय तल पर वार्ड, चतुर्थ तल पर आईसीयू तथा पंचम तल पर ऑपरेशन थियेटर की व्यवस्था होगी। 100 बिस्तरों वाले इस अस्पताल में 15 ओपीडी कक्ष, 4 आईसीयू, 4 ऑपरेशन थियेटर, फिजियोथेरेपी यूनिट, पैथोलॉजी लैब, सीटी स्कैन, डायलिसिस, एक्स-रे, एमआरआई, ईसीजी, इमरजेंसी वार्ड सहित अन्य आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। अस्पताल के शुरू होने से जशपुर जिले और आसपास के क्षेत्रों के लोगों को बेहतर एवं सुलभ स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिलेगा।

दंतेवाड़ा में ‘खेत बचाओ अभियान’ शुरू, प्राकृतिक खेती और मिलेट्स को मिलेगा बढ़ावा

रायपुर,   छत्तीसगढ़ राज्य सरकार द्वारा किसानों की आय बढ़ाने, मिट्टी की सेहत सुधारने और लोगों को पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने के लिए प्राकृतिक खेती और मिलेट्स (मोटे अनाजों) की खेती को व्यापक स्तर पर बढ़ावा दिया जा रहा है। यह मिट्टी की उर्वरता को लंबे समय तक बनाए रखती है, पानी बचाती है और उपभोक्ता को जहरीले-मुक्त रसायन वाले खाद्य उत्पाद देती है। इसमें बाहर से महंगी खाद या कीटनाशक खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती, जिससे किसानों की खेती की लागत काफी कम हो जाती है और मुनाफा बढ़ता है। दंतेवाड़ा जिले में “खेत बचाओ अभियान”प्रारंभ             कृषि भूमि की उर्वरता को संरक्षित करने, किसानों की लागत कम करने और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से दंतेवाड़ा जिले में “खेत बचाओ अभियान”प्रारंभ किया जा रहा है। कृषि विभाग द्वारा तैयार इस रणनीतिक कार्ययोजना का उद्देश्य मिट्टी के स्वास्थ्य का पुनर्जीवन, जल संरक्षण, पारंपरिक बीजों का संरक्षण तथा प्राकृतिक कृषि पद्धतियों को जन-आंदोलन के रूप में स्थापित करना है। “खेत बचाओ अभियान” दंतेवाड़ा को प्राकृतिक कृषि, जैव विविधता संरक्षण और किसान समृद्धि की नई पहचान देने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल माना जा रहा है।  मिलेट्स को 'अन्न' का दर्जा           जिले की भौगोलिक परिस्थितियों, समृद्ध आदिवासी परंपराओं और जैव विविधता को ध्यान में रखते हुए तैयार इस अभियान को दंतेवाड़ा के चारों विकासखंडों में चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। अभियान की मूल भावना यह है कि “मिट्टी केवल उत्पादन का माध्यम नहीं, बल्कि एक जीवंत पारिस्थितिकी तंत्र है, जिसकी सुरक्षा भविष्य की खाद्य सुरक्षा और किसान समृद्धि की गारंटी है।” ज्वार, बाजरा, रागी (मड़िया), कोदो और कुटकी जैसी फसलों को प्रोत्साहित करने के लिए कई अहम कदम उठाए जा रहे हैं, इन्हें 'सुपरफूड' और 'अन्न' का दर्जा दिया गया है।  मिलेट्स सामान्य अनाजों की तुलना में बहुत कम पानी और खाद में उग जाते हैं, और सूखा-रोधी होते हैं। अभियान के प्रमुख लक्ष्य          अभियान के तहत मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार, प्राकृतिक खेती का विस्तार, पारंपरिक बीजों का संरक्षण तथा जल एवं नमी संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। किसानों को रासायनिक खेती से धीरे-धीरे प्राकृतिक एवं जैविक खेती की ओर प्रेरित किया जाएगा, जिससे खेती की लागत कम होने के साथ पर्यावरणीय संतुलन भी मजबूत होगा। पांच चरणों में होगा क्रियान्वयन           योजना के तहत सबसे पहले जिले में मृदा स्वास्थ्य मैपिंग और सॉयल हेल्थ कार्ड को सुदृढ़ किया जाएगा। इसके बाद रागी, कोदो, कुटकी जैसे पौष्टिक मिलेट्स एवं स्थानीय फसलों को प्रोत्साहित किया जाएगा। तीसरे चरण में किसानों को जैविक खाद, ब्लू-ग्रीन एल्गी और वर्मी कम्पोस्ट उत्पादन का प्रशिक्षण देकर बाहरी कृषि आदानों पर निर्भरता कम करने का प्रयास किया जाएगा। इसके साथ ही पारंपरिक बीज मंडियों और सामुदायिक बीज बैंकों की स्थापना कर स्थानीय बीजों के संरक्षण को बढ़ावा दिया जाएगा। अंतिम चरण में खेतों की मेड़ों पर ग्लिरिसिडिया जैसे हरित खाद देने वाले पौधों का बड़े पैमाने पर रोपण किया जाएगा। अभियान के अंतर्गत एक लाख पौधों के वितरण और रोपण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। जिले में तय किए गए लक्ष्य           वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए जिले के 135 ग्राम पंचायतों में अभियान लागू किया जाएगा। इसके तहत 4,600 हेक्टेयर क्षेत्र में प्राकृतिक खेती, 4,300 हेक्टेयर में मिलेट्स उत्पादन तथा 40 सामुदायिक बीज बैंकों की स्थापना का लक्ष्य रखा गया है। सरकार मिलेट्स की खेती के तहत क्षेत्र को बढ़ाने, सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से इन पौष्टिक अनाजों को वितरित करने और मिलेट्स आधारित उत्पादों के साथ काम करने वाले उद्यमियों का समर्थन करने के लिए एक ठोस प्रयास कर रही है।  किसानों को होंगे कई लाभ           अभियान के सफल क्रियान्वयन से अगले तीन वर्षों में खेतों के जैविक कार्बन स्तर में वृद्धि होने की संभावना है। रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों पर निर्भरता कम होने से किसानों की उत्पादन लागत में 35 से 40 प्रतिशत तक कमी आ सकती है। वहीं, दंतेवाड़ा के मिलेट्स को राष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने की दिशा में भी नए अवसर खुलेंगे। ये स्थूल एवं सूक्ष्म पोषक तत्वों का अच्छा स्रोत हैं। ये हृदय के लिए फायदेमंद हैं, हड्डियों के स्वास्थ्य में सुधार करते हैं, एनीमिया को रोकते हैं, मधुमेह की शुरुआत को रोकते हैं (ये ग्लाइसेमिक इंडेक्स पर कम हैं), स्वस्थ वज़न बनाए रखते हैं और आँत की सूजन में सुधार करते हैं। कृषि क्षेत्र में नई पहल          दंतेवाड़ा जिले में रागी के साथ-साथ कोदो-कुटकी, ज्वार, बाजरा, मक्का, दलहन और तिलहन जैसी अन्य फसलों की खेती को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। कृषि विभाग किसानों को बहुफसली प्रणाली अपनाने के लिए प्रेरित कर रहा है, ताकि उनकी आय के स्रोत बढ़ सकें और खेती अधिक टिकाऊ बन सके। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यह अभियान केवल खेती की पद्धति में बदलाव नहीं, बल्कि मिट्टी, जल, जैव विविधता और किसान की आजीविका को सुरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यदि योजना निर्धारित लक्ष्यों के अनुरूप सफल होती है, तो दंतेवाड़ा प्राकृतिक खेती और टिकाऊ कृषि मॉडल के रूप में पूरे प्रदेश के लिए उदाहरण बन सकता है।