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20 फरवरी डेडलाइन: दिल्ली विधानसभा ने पंजाब अधिकारियों को आखिरी चेतावनी दी

नई दिल्ली दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (आप) नेता आतिशी मार्लेना की टिप्पणी से जुड़े मामले में दिल्ली विधानसभा की विशेषाधिकार कमेटी ने पंजाब सरकार के अफसरों से अपना जवाब देने को 20 फरवरी तक अंतिम मौका दिया है।   दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (आप) नेता आतिशी मार्लेना की टिप्पणी से जुड़े मामले में दिल्ली विधानसभा की विशेषाधिकार कमेटी ने पंजाब सरकार के अफसरों से अपना जवाब देने को 20 फरवरी तक अंतिम मौका दिया है। कमेटी ने शिकायत की कॉपी, एफआईआर और फोरेंसिक रिपोर्ट भी तलब की है। किन-किन अफसरों कों भेजा पत्र दिल्ली विधानसभा की विशेषाधिकार कमेटी ने पत्र लिखकर पंजाब के अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह), पंजाब के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) और जालंधर के पुलिस कमिश्नर को निर्देश दिया है कि वे विपक्ष की नेता आतिशी से संबंधित कथित टिप्पणियों के मामले में अपना लिखित उत्तर 20 फरवरी 2026 तक अनिवार्य रूप से प्रस्तुत करें। पत्र में कमेटी ने स्पष्ट किया है कि यह तिथि अंतिम अवसर के रूप में मानी जाएगी और इसके बाद कोई अतिरिक्त समय नहीं दिया जाएगा। कमेटी ने अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह), पंजाब सरकार से इस प्रकरण से संबंधित महत्वपूर्ण दस्तावेज भी मांगे हैं। इनमें शिकायत की कॉपी एवं उसके संलग्नक, जिनके आधार पर एफआईआर दर्ज की गई, एफआईआर की कमेटी, पंजाब पुलिस के सोशल मीडिया विशेषज्ञ (टेक्निकल सेल) की रिपोर्ट तथा पंजाब की फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी की रिपोर्ट शामिल हैं। जानकारी नहीं देने को अवमानना माना जाएगा कमेटी ने निर्देश दिया है कि सभी जवाब और दस्तावेज निर्धारित समय सीमा के भीतर प्रस्तुत किए जाएं, ताकि प्रक्रिया एवं कार्य संचालन नियमों के अनुसार उन पर विचार किया जा सके। समय पर जानकारी उपलब्ध नहीं कराने की स्थिति में इसे विशेषाधिकार हनन एवं अवमानना के रूप में देखा जा सकता है। पंजाब सरकार ने क्या कहा था यह भी उल्लेखनीय है कि 12 फरवरी 2026 को पंजाब सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह), कार्यालय द्वारा भेजे गए पत्र में कहा गया है कि 5 फरवरी 2026 को दिल्ली विधानसभा सचिवालय द्वारा भेजे गए पत्र से पूर्व इस मामले में कोई डायरेक्ट कम्युनिकेशन प्राप्त नहीं हुआ था। पत्र में यह भी बताया गया है कि डीजीपी पंजाब, पुलिस कमिश्नर जालंधर तथा डायरेक्टर फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी, पंजाब की टिप्पणियां दिल्ली के संबंधित कार्यालयों को भेज दी गई हैं। साथ ही, एक विस्तृत और समेकित औपचारिक उत्तर तैयार किया जा रहा है, जिसे सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति के लिए प्रस्तुत किया गया है। यह मामला सदन के पटल पर दिए गए वक्तव्यों तथा उसके पश्चात पंजाब पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई के संदर्भ में विशेषाधिकार हनन और अवमानना की शिकायतों से संबंधित है। विशेषाधिकार कमेटी वर्तमान में इस पूरे प्रकरण की जांच कर रही है, जिसमें संबंधित अधिकारियों के आचरण तथा दिल्ली विधानसभा सचिवालय द्वारा मांगी गई सूचनाओं और पत्राचार के निपटान की प्रक्रिया भी शामिल है।  

‘नाम बदलकर श्रेय लूट रही सरकार’—मोहल्ला क्लीनिक विवाद पर सौरभ भारद्वाज के गंभीर आरोप

नई दिल्ली दिल्ली की राजनीति में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर एक बार फिर घमासान तेज हो गया है। आम आदमी पार्टी (आप) के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने दिल्ली सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार मोहल्ला क्लीनिकों और पुरानी डिस्पेंसरियों का नाम बदलकर ‘आयुष्मान आरोग्य मंदिर’ रख रही है और इसे नई उपलब्धि के रूप में पेश कर रही है। सौरभ भारद्वाज ने कहा कि दिल्ली सरकार 370 आरोग्य मंदिर खोलने का दावा कर रही है, लेकिन मुख्यमंत्री को जनता को यह बताना चाहिए कि इनमें से कितने केंद्र नई इमारतों में संचालित हो रहे हैं और कितने पहले से चल रही स्वास्थ्य सुविधाओं में ही नाम बदलकर शुरू किए गए हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि इन 370 में से कितने पहले मोहल्ला क्लीनिक थे, कितने दिल्ली सरकार की डिस्पेंसरियां थीं और कितने एमसीडी की स्वास्थ्य इकाइयां थीं। आप नेता ने आरोप लगाया कि सरकार जमीन पर कोई नई स्वास्थ्य संरचना खड़ी करने के बजाय पूर्ववर्ती अरविंद केजरीवाल सरकार के दौरान शुरू किए गए मोहल्ला क्लीनिकों का नाम बदलकर वाहवाही लूटने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि अधिकांश आरोग्य मंदिर उन्हीं भवनों में चल रहे हैं जहां पहले से स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध थीं और वहां तैनात डॉक्टर, फार्मासिस्ट व अन्य स्टाफ भी वही हैं। सौरभ भारद्वाज ने यह भी आरोप लगाया कि सीएम रेखा गुप्ता ने मोहल्ला क्लीनिकों के स्टाफ से वादा किया था कि किसी की नौकरी नहीं जाएगी, लेकिन बाद में कई कर्मचारियों को हटाया गया। उन्होंने कहा कि इससे न केवल कर्मचारियों के परिवारों पर आर्थिक संकट आया है, बल्कि सरकार की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े हुए हैं। आप नेता ने कहा कि दिल्ली की जनता सच्चाई जानती है और केवल नाम बदलने से स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक स्थिति नहीं सुधरती। उन्होंने मुख्यमंत्री से पारदर्शिता बरतते हुए विस्तृत आंकड़े सार्वजनिक करने की मांग की, ताकि स्पष्ट हो सके कि वास्तव में कितने नए आरोग्य मंदिर बनाए गए हैं और कितने पुराने ढांचे को ही नया नाम दिया गया है।

सीमा हैदर का असर भारी, गुलाम को पीछे हटना पड़ा एक मोर्चे पर

ग्रेटर नोएडा चार बच्चों को लेकर पाकिस्तान से भागकर भारत आई सीमा हैदर ने अपने पाकिस्तानी पति गुलाम हैदर के खिलाफ एक जंग में जीत हासिल करती दिख रही है। दोनों के बीच कानूनी लड़ाई भले ही अभी जारी है, लेकिन सोशल मीडिया पर दोनों के बीच लंबे समय तक चली कुश्ती में गुलाम हैदर अब हांफ गया है।   चार बच्चों को लेकर पाकिस्तान से भागकर भारत आई सीमा हैदर ने अपने पाकिस्तानी पति गुलाम हैदर के खिलाफ एक जंग में जीत हासिल करती दिख रही है। दोनों के बीच कानूनी लड़ाई भले ही अभी जारी है, लेकिन सोशल मीडिया पर दोनों के बीच लंबे समय तक चली कुश्ती में गुलाम हैदर अब हांफ गया है। एक तरफ जहां सीमा हैदर यूट्यूब से होने वाली कमाई से सचिन का ना सिर्फ घर चला रही है, बल्कि नया मकान भी बनवा दिया है तो दूसरी तरफ गुलाम उसे गाली दे-देकर थक चुका है। हैदर ने सोशल मीडिया से दूरी बना ली है। दरअसल, सीमा हैदर के भारत आने के बाद जब वह पकड़ी गई तो मीडिया और सोशल मीडिया में वह बहुत चर्चित हो गई। इस बीच सीमा हैदर के पाकिस्तानी पति गुलाम हैदर ने भी सोशल मीडिया पर एंट्री मारी। सीमा की तरह वह भी फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म पर मशहूर हो गया। एक तरफ लोग सीमा की प्रेम कहानी सुनते तो दूसरी तरफ गुलाम हैदर की झुंझलाहट को देखते थे। लाइक्स, कॉमेंट और व्यूज के जरिए होने वाली कमाई ने हैदर को भी एक नया रोजगार दे दिया था। गुलाम हर दिन वीडियो बनाने लगा। कभी लाइव आकर तो कभी लंबे-लंबे वीडियो बनाकर व्यूज बटोरने लगा। वह कभी सीमा हैदर को गालियां देता, कभी उसका नाम लेकर थूकता, कभी अपने बच्चों को वापस पाने की तड़प दिखाता, कभी भारत सरकार से बच्चों की वापसी के लिए गुहार लागाता था। इधर से सीमा कुछ कहती तो अगले दिन गुलाम उसका जवाब लेकर हाजिर होता था। सीमा के डांस वीडियो, सचिन के संग रोमांस, सचिन के बच्चे की मां बनने आदि से जुड़े वीडियो पर गुलाम हर दिन यूट्यूब लाइव करने लगा। शांत पड़ चुका है गुलाम हैदर एक तरफ सीमा के व्यूज बढ़ते चले गए तो दूसरी तरफ एक ही बात को हर दिन दोहराने की वजह से गुलाम हैदर के व्यूज घटने लगे। धीरे-धीरे वह कम वीडियो बनाने लगा और अब पिछले एक महीने से पूरी तरह शांत पड़ चुका है। इंस्टाग्राम, फेसबुक के साथ ही उसने यूट्यूब पर भी आना बंद कर दिया है। गुलाम हैदर आखिरी बार करीब एक महीने पहले यूट्यूब पर लाइव हुआ था और तब उसने सीमा की बजाय बिहार के सीएम नीतीश कुमार पर अपनी भड़ास निकाली थी। डॉ. नुसरत का हिजाब हटाए जाने से वह बौखलाया हुआ था। इधर यूट्यूब की कमाई से सीमा की बल्ले-बल्ले एक तरफ जहां गुलाम हैदर शांत पड़ चुका है तो दूसरी तरफ सीमा हैदर पूरी तरह एक व्लॉगर बन चुकी है। बच्चों को पालने से लेकर बाहर जाने, घर के कामकाज से जुड़े वीडियो बनाकर वह यूट्यूब से अच्छी कमाई कर रही है। सीमा ने कभी अपनी कमाई का खुलासा तो नहीं किया लेकिन हाल हमें उसने एक बार फिर कहा कि यूट्यूब की कमाई से ही सचिन का घर चल रहा है और उन्होंने नया मकान भी बनवा लिया है। सचिन दूसरी बार पिता बनने जा रहा है तो सीमा छठे बच्चे को जन्म देने वाली है।

दिल्ली शराब नीति मामला: केजरीवाल और सिसोदिया की बढ़ीं मुश्किलें? आरोप तय करने पर फैसला सुरक्षित

नई दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी की राउज एवेन्यू कोर्ट ने गुरुवार को दिल्ली शराब घोटाला मामले में आरोप तय करने पर आदेश सुरक्षित रख लिया। स्पेशल जज जितेंद्र सिंह ने सीबीआई और अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और 21 अन्य आरोपियों की दलीलें सुनने के बाद अपना ऑर्डर सुरक्षित रख लिया। अब इस नजरें अदालत के फैसले पर टिकी हैं। देखना होगा कि कोर्ट अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया पर आरोप तय करने के आदेश देती है या नहीं… क्या आरोप? अदालत 27 फरवरी को अपना फैसला सुना सकती है। सीबीआई ने सबसे पहले 2022 में आरोप पत्र दाखिल किया था। इसके बाद उसकी ओर से पूरक आरोप पत्र पेश किए गए थे। आरोप है कि दिल्ली आबकारी नीति को अपने पक्ष में करवाने के लिए शराब कारोबारियों की साउथ लॉबी की ओर से 100 करोड़ रुपये दिए गए थे। 23 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट इस मामले में सीबीआई की ओर से 23 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई है। इन आरोपियों में अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, के. कविता, कुलदीप सिंह, नरेंद्र सिंह, विजय नायर, अभिषेक बोइनपल्ली, अरुण रामचंद्र पिल्लई, मुथा गौतम, समीर महेंद्रू, अमनदीप सिंह ढल, अर्जुन पांडे, बुच्चीबाबू गोरंटला, राकेश जोशी, दामोदर प्रसाद शर्मा, प्रिंस कुमार, चनप्रीत सिंह रायत, अरविंद कुमार सिंह, दुर्गेश पाठक, अमित अरोड़ा, विनोद चौहान, आशीष माथुर और पी सरथ चंद्र रेड्डी शामिल हैं। आरोप तय करने के लिए पर्याप्त सबूत- सीबीआई सीबीआई ने कहा कि साजिश के अपराध को पूरी तरह से देखा जाना चाहिए। आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने के लिए पर्याप्त सामग्री मौजूद है। सीबीआई की तरफ से एएसजी डीपी सिंह और वकील मनु मिश्रा पेश ने अपनी दलीलों में कहा कि सभी आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए काफी सबूत और आधार मौजूद हैं। केजरीवाल के खिलाफ ठोस सबूत नहीं- बचाव पक्ष वरिष्ठ वकील एन हरिहरन ने अपनी दलील में कहा कि अरविंद केजरीवाल के खिलाफ आरोप तय करने के लिए कोई ठोस सबूत नहीं है। केजरीवाल के खिलाफ कुछ भी आपत्तिजनक नहीं मिला है। केजरीवाल के खिलाफ चार्जशीट पिछली चार्जशीट की बस एक कट-पेस्ट कॉपी है। वह उस समय मुख्यमंत्री के रूप में केवल अपना आधिकारिक दायित्वों का निर्वहन कर रहे थे। केजरीवाल के खिलाफ आरोप कट-पेस्ट वरिष्ठ वकील एन हरिहरन ने यह भी कहा कि ऐसा कोई सबूत नहीं है जो उनके साउथ लॉबी से पैसे लेने के अनुरोध से जोड़ता हो। केजरीवाल का नाम पहली चार्जशीट या उसके बाद की 3 पूरक चार्जशीट में नहीं था। उनका नाम चौथी पूरक चार्जशीट में आया। यह भी कहा गया कि चौथी चार्जशीट का विषय वही है जो पिछली चार्जशीट का था। केजरीवाल के खिलाफ लगाए आरोप कट पेस्ट ही हैं। पैसे लेने के लिए कहने के कोई सबूत नहीं अदालत ने वरिष्ठ वकील से मगुंटा के बयान के बारे में विस्तार से जानकारी मांगी है जो अब सरकारी गवाह बन गया है। आरोप है कि किसी ने मगुंटा को केजरीवाल की ओर से पैसे देने के लिए कहा था। यह भी बताया गया कि राघव मगुंटा पहले आरोपी था लेकिन बाद में उसे सरकारी गवाह बना दिया गया। वरिष्ठ वकील एन हरिहरन ने अपनी दलील में कहा कि ऐसा कोई सबूत या लिंक नहीं है जिससे यह साबित हो सके कि केजरीवाल ने किसी से भी साउथ लॉबी से पैसे लेने के लिए कहा था।

ED का बड़ा दांव: केजरीवाल को मिली राहत के खिलाफ अदालत में करेगी अपील

नई दिल्ली ईडी ने समन की अनदेखी करने के मामले में अरविंद केजरीवाल की दोबारा कानूनी घेरेबंदी करने की तैयारी कर ली है। ईडी यानी प्रवर्तन निदेशालय की ओर से दिल्ली हाईकोर्ट को सूचित किया गया कि वह दिल्ली आबकारी मामले में समन का पालन नहीं करने के आरोप में अरविंद केजरीवाल को दो मामलों में बरी करने के निचली अदालत के आदेश को चुनौती देगी। केजरीवाल को मिली राहत को देंगे चुनौती ईडी की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने कहा कि एजेंसी ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील करेगी। इसी साल 22 जनवरी को ट्रायल कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल को उनके खिलाफ दर्ज दो अलग-अलग मामलों में बरी कर दिया था। ये मामले कथित दिल्ली आबकारी नीति घोटाले की जांच में शामिल होने के लिए भेजे गए समन के बाद ईडी के सामने पेश नहीं होने को लेकर दर्ज किए गए थे। याचिका वापस लेने की परमिशन दिल्ली हाई कोर्ट ने गुरुवार को अरविंद केजरीवाल को दिल्ली आबकारी नीति से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस की जांच के सिलसिले में ईडी की ओर से उन्हें जारी समन को चुनौती देने वाली अपनी याचिका वापस लेने की परमिशन दे दी। केजरीवाल के वकील ने कहा कि वह इस मामले को नहीं बढ़ाना चाहते हैं क्योंकि समन के बाद एजेंसी के सामने पेश नहीं होने के कारण दर्ज मामले में उनको पहले ही बरी कर दिया गया है। निचली अदालत ने फैसले में क्या कहा? समन की अनदेखी मामले में यह देखते हुए कि आरोपी एक मौजूदा मुख्यमंत्री थे। उन्हें भी आने-जाने का अपना मौलिक अधिकार था… ट्रायल कोर्ट ने कहा कि समन की सही सेवा को कानूनी चुनौती दी जा सकती है। जांच एजेंसी ईडी यह साबित करने में नाकाम रही है कि केजरीवाल ने जानबूझकर समन की अवहेलना की। नौवें समन के बाद पहुंचे थे हाईकोर्ट बता दें कि केजरीवाल ने ईडी नौवें समन के बाद हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हाईकोर्ट ने 20 मार्च, 2024 को ईडी से जवाब मांगा था। हालांकि अदालत का कहना था कि वह इस स्टेज पर केजरीवाल को कोई अंतरिम राहत नहीं देगी। केजरीवाल को उसी शाम ईडी की ओर से गिरफ्तार कर लिया गया था। फिलहाल केजरीवाल मनी लॉन्ड्रिंग केस में अंतरिम बेल पर हैं। ईडी के क्या हैं आरोप? ईडी का आरोप है कि केस के दूसरे आरोपी पूर्व की एक्साइज पॉलिसी बनाने के लिए केजरीवाल के संपर्क में थे। इससे उन्हें गलत फायदा हुआ। वहीं अपनी अर्जी में केजरीवाल ने गिरफ्तारी, पूछताछ और बेल देने के संबंध में प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट यानी पीएमएलए के कुछ प्रावधानों की संवैधानिक वैधता को भी चुनौती दी है। उन्होंने कई मुद्दे उठाए हैं जिसमें शामिल है कि क्या कोई पॉलिटिकल पार्टी एंटी मनी लॉन्ड्रिंग कानून के तहत आती है।

पुरानी मस्जिद हटाने का विवाद: कृषि भवन में नए टेंडर ने बढ़ाई वक्फ बोर्ड की चिंता

नई दिल्ली सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास परियोजना के अंतर्गत नई दिल्ली के कृषि भवन परिसर में स्थित 100 साल से अधिक पुरानी 'कदीमी मस्जिद' के अस्तित्व पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा दिल्ली वक्फ बोर्ड की याचिका खारिज करने और केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (CPWD) द्वारा हाल ही में जारी टेंडर के बाद मस्जिद को हटाए जाने की आशंका बढ़ गई है। हालांकि, केंद्र सरकार ने पूर्व में मस्जिद को सुरक्षित रखने का आश्वासन दिया था। 2024 में दिल्ली हाईकोर्ट ने वक्फ बोर्ड की याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी थी कि बोर्ड तब दोबारा कोर्ट आ सकता है जब उसे सेंट्रल विस्टा परियोजना में अपनी संपत्ति पर खतरा महसूस हो। याचिका में कृषि भवन की मस्जिद सहित छह धार्मिक स्थलों को सुरक्षा देने की मांग की गई थी। सुनवाई के दौरान 1 दिसंबर 2021 को सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को आश्वस्त किया था कि उन धार्मिक स्थलों के साथ कुछ नहीं हो रहा है और सरकार अभी वहां तक नहीं पहुंची है। लेकिन, अब स्थिति बदलती दिख रही है। इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 19 जनवरी 2026 को CPWD द्वारा कृषि भवन और शास्त्री भवन के पुनर्विकास के लिए जारी किए गए टेंडर दस्तावेजों में, मस्जिद को हटाए जाने वाली संरचनाओं की सूची में स्पष्ट रूप से शामिल नहीं किया गया है। इसके बावजूद, टेंडर के साथ संलग्न विस्तृत ड्रॉइंग्स में मस्जिद को नए प्रस्तावित भवन के नक्शे में उसके मूल स्थान पर नहीं दिखाया गया है। वक्फ बोर्ड और इमाम का पक्ष कदीमी मस्जिद कृषि भवन के खुले प्रांगण में स्थित है। यह मुख्य रूप से केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों द्वारा नमाज अदा करने के लिए उपयोग की जाती है। हालांकि यह भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के तहत एक संरक्षित स्मारक नहीं है, लेकिन यह 1970 के दिल्ली प्रशासन के राजपत्र में प्रकाशित वक्फ संपत्तियों की सूची में दर्ज है। वक्फ बोर्ड ने अदालत को बताया था कि यह मस्जिद सरकारी इमारत से भी पुरानी है। बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष अमानतुल्ला खान ने कहा, "सरकार ने अदालत में कहा था कि मस्जिदों को प्रभावित नहीं किया जाएगा। अगर अब वे इसे ध्वस्त करने जा रहे हैं, तो यह गलत है।" CPWD ने कृषि भवन और शास्त्री भवन के स्थान पर 'कॉमन सेंट्रल सेक्रेटेरिएट' (CCS) की इमारतों 4 और 5 के निर्माण के लिए 19 जनवरी को टेंडर जारी किया था। इस टेंडर में बोली लगाने की अंतिम तिथि 13 फरवरी है। CCS 4 और 5 परियोजनाओं की अनुमानित लागत 3,006.07 करोड़ रुपये है और इसे 24 महीने में पूरा किया जाना है। इसके साथ ही, सेंट्रल विस्टा परियोजना के तहत उपराष्ट्रपति के पूर्व आधिकारिक निवास परिसर में स्थित एक मस्जिद और एक मंदिर को पहले ही हटाया जा चुका है।

जैश ने किया हमला, पाकिस्तान पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबाव बढ़ा

नई दिल्ली अंतरराष्ट्रीय मंच संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान एक बार फिर बेनकाब हुआ है. यूएन की सुरक्षा परिषद की नवीनतम रिपोर्ट में बीते साल 10 नवंबर को दिल्ली के लाल किला मेट्रो स्टेशन के बाहर हुए आतंकवादी विस्फोट के तार सीधे तौर पर आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े हैं. रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि इस संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी ली थी. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की 1267 प्रतिबंध समिति की रिपोर्ट में जैश को कई हालिया आतंकी हमलों से लिंक किया गया है. रिपोर्ट के अनुसार जैश प्रमुख मसूद अजहर ने आठ अक्टूबर को महिलाओं की विशेष शाखा ‘जमात-उल-मोमिनात’ बनाने की घोषणा की थी. इस शाखा का मुख्य उद्देश्य आतंकी गतिविधियों में सहयोग और समर्थन प्रदान करना बताया गया है. रिपोर्ट में एक सदस्य देश ने पुष्टि की कि जैश ने कई हमलों की जिम्मेदारी खुद ली है, जिसमें लाल किले के पास का विस्फोट भी शामिल है. दूसरी ओर, एक अन्य सदस्य देश ने जैश को निष्क्रिय बताया, जिसे विशेषज्ञ पाकिस्तान की ओर से दिए गए संकेत के रूप में देख रहे हैं. यह विरोधाभासी बयान सुरक्षा परिषद में पाकिस्तान के दोहरे रवैये को उजागर करता है. रिपोर्ट में यह भी दर्ज है कि 28 जुलाई 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए हमले में शामिल तीन संदिग्ध आतंकी मारे गए थे. पहलगाम हमले की जिम्मेदारी हालांकि अप्रैल में पहलगाम हमले की जिम्मेदारी लश्कर-ए-तैयबा के प्रॉक्सी संगठन ‘द रेसिस्टेंस फ्रंट’ ने ली थी, लेकिन जैश के लिंक को अलग से हाइलाइट किया गया है. पहलगाम हमले के बाद भारत ने निर्णायक कार्रवाई की थी. मई में भारतीय सेना ने पाकिस्तान स्थित आतंकी ढांचे पर सटीक हमले किए, जिसके परिणामस्वरूप चार दिनों तक सीमा पर तीव्र संघर्ष हुआ. इन कार्रवाइयों से जैस और लश्कर के कई ठिकाने नष्ट हुए और कई हाईप्रोफाइल आतंकी मारे गए. भारत ने इन हमलों को आत्मरक्षा में जरूरी बताया और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता की मांग की. रिपोर्ट में जैश और लश्कर को 1990 के दशक से अल-कायदा से संबंधों के कारण संयुक्त राष्ट्र की 1267 प्रतिबंध समिति के तहत प्रतिबंधित रखा गया है. दोनों संगठनों पर हथियार प्रतिबंध, यात्रा प्रतिबंध और वित्तीय प्रतिबंध लागू हैं. मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित किया जा चुका है. विशेषज्ञों का मानना है कि सुरक्षा परिषद की यह रिपोर्ट पाकिस्तान के अच्छे आतंकवादी-बुरे आतंकवादी वाली नीति को एक बार फिर उजागर करती है. जैस की महिलाओं की नई शाखा बनाने की घोषणा से साफ है कि संगठन अपनी गतिविधियां बढ़ाने और नई भर्ती के लिए प्रयासरत है. लाल किले के पास का हमला दिल्ली की सुरक्षा व्यवस्था पर सीधा हमला था, जिसने राष्ट्रीय राजधानी की सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया.

दिल्ली-नोएडा-गुरुग्राम में शुरू होगा Air Taxi सेवा, मिनटों में पहुंचें ऑफिस और अस्पताल

 नई दिल्ली  दिल्ली-NCR में रहने वाले लोगों को अक्सर भारी ट्रैफिक जाम का सामना करना पड़ता है. इस प्रॉब्लम को सॉल्व करने के लिए Air Tax का प्रस्ताव सामने आया है. इसके बाद सेंट्रल दिल्ली से गुरुग्राम का सफर सिर्फ 12 मिनट में पूरा होगा.  एयर टैक्सी कॉरिडोर योजना की दिल्ली -NCR में लगने वाले समय को घटाकर मिनटों में कर सकती है. भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, एयर टैक्सी कॉरिडोर की यह पहल दिल्ली-NCR में ट्रैफिक जाम और बुनियादी ढांचे की पुरानी समस्या का सॉल्यूशन बन सकती है.  दिल्ली वालों को गुरुग्राम और नोएडा की कनेक्टिविटी  CII ने गुरुग्राम-कनॉट प्लेस-नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को जोड़ने वाले एक पायलट एडवांस्ड एयर मोबिलिटी कॉरिडोर प्रपोजल पेश किया है.  रिपोर्ट के मुताबिक, इलेक्ट्रिक वर्टिकल टेक-ऑफ एंड लैंडिंग (eVTOL) फ्लाइट और अन्य  टेक्नोलॉजी पर काम को शामिल करके दिल्ली-NCR में एविएशन इकोसिस्टम को सुरक्षित तरीके से शामिल किया जा सकता है. हालांकि अभी यह प्रपोजल है और इसको कोई आधिकारिक मंजूरी नहीं मिली है.  सफल होने के बाद और भी शहरों में हो सकेगा शुरू दिल्ली-NCR में यह मॉडल सफल होता है तो आगे चलकर इस मॉडल को देश के अन्य बड़े शहरों में शामिल किया जा सकेगा. इसमें मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई और हैदराबाद जैसे नाम शामिल होंगे.  एयर एम्बुलेंस और पब्लिक ट्रांसपोर्ट को फायदा  दिल्ली-NCR में एयर टैक्सी का एम्बुलेंस में भी किया जा सकता है. इसके लिए अस्पतालों पर वर्टीपोर्ट्स तैयार किए जाएंगे. इसकी मदद एम्स समेत दूसरे बड़े अस्पतालों के बीच मरीज को रेफर करना आसान हो जाएगा.  ट्रैवल टाइम में होगी बारी कटौती  एयर टैक्सी की मदद से ट्रैवल टाइम में भारी कटौती आएगी. रिपोर्ट के मुताबिक, सेंट्रल दिल्ली से गुरुग्राम तक का सफर 12 मिनट से कम समय में होगा. सड़क से सफर में 1  घंटे से करीब डेढ़ घंटा लगता है.  कनॉट प्लेस से नोएडा इंटरनेशनल नेशनल एयरपोर्ट का सफर 20 मिनट से कम समय में होगा. सड़क से इस सफर में करीब 2 से 3 घंटे का समय लगता है. आगे क्या होंगे चुनौतियां?  देश की राजधानी होने की वजह से दिल्ली में कुछ हिस्से हाई सेंसटिव जोन हैं. दिल्ली कैंट, लुटियंस दिल्ली और IGI एयरपोर्ट के ऊपर से एयर टैक्सी को उड़ने की परमिशन नहीं दी जा सकती है. इसके लिए DGCA को नए स्टैंडर्ड और रूट्स तैयार करने होंगे. फायर सेफ्टी, इमरजेंसी इवैक्यूएशन और स्टॉप फ्री क्लीयरेंस जरूरी होगी. 

दिल्ली बनेगी EV-फ्रेंडली सिटी: 2026 तक चार्जिंग की टेंशन खत्म करने की सरकार की पूरी योजना तैयार

नई दिल्ली अगर आप दिल्ली में रहते हैं और इलेक्ट्रिक गाड़ी (EV) खरीदने से सिर्फ इसलिए हिचक रहे हैं कि चार्जिंग कहां करेंगे, तो अब आपकी यह चिंता जल्द दूर होने वाली है। दिल्ली सरकार ने प्रदूषण से निपटने और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए 2026 तक का विस्तृत रोडमैप तैयार कर लिया है, जिसमें चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को सबसे बड़ी प्राथमिकता दी गई है। सरकारी योजना के मुताबिक, शहर के हर प्रमुख रिहायशी, व्यावसायिक और सार्वजनिक इलाके में चार्जिंग की सुविधा बढ़ाई जाएगी। इसके तहत मॉल, मार्केट, ऑफिस कॉम्प्लेक्स, पार्किंग एरिया, मेट्रो स्टेशन और हाउसिंग सोसाइटीज़ में चार्जिंग पॉइंट्स लगाने पर जोर रहेगा। एक साल में लगेंगे 7,000 नए चार्जिंग प्वाइंट कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) को सौंपी गई रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली सरकार ने 2026 के अंत तक करीब 7,000 नए पब्लिक EV चार्जिंग प्वाइंट लगाने का लक्ष्य तय किया है। फिलहाल राजधानी में 8,998 पब्लिक चार्जिंग प्वाइंट मौजूद हैं, लेकिन सरकार की योजना के तहत इनकी संख्या बढ़ाकर 16,070 तक पहुंचाई जाएगी, ताकि इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने में आ रही चार्जिंग से जुड़ी बाधा को दूर किया जा सके। अभी भी है 75% की भारी कमी भले ही दिल्ली सरकार EV चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की तैयारी में जुटी हो, लेकिन मौजूदा हालात में मांग और सप्लाई के बीच बड़ा गैप बना हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली में इलेक्ट्रिक वाहनों की जरूरतों को पूरा करने के लिए कुल 36,177 चार्जिंग प्वाइंट्स की आवश्यकता है, जबकि मौजूदा व्यवस्था इस लक्ष्य से काफी पीछे है। आंकड़ों के अनुसार, राजधानी में अभी करीब 75.2 फीसदी यानी लगभग 27,179 चार्जिंग प्वाइंट्स की कमी है। हालांकि राहत की बात यह है कि सरकार और एजेंसियां इस दिशा में तेजी से कदम उठा रही हैं। दिल्ली मेट्रो स्टेशनों पर 66 नए चार्जिंग प्वाइंट्स लगाने का प्रस्ताव है, जबकि आनंद विहार और न्यू अशोक नगर जैसे RRTS स्टेशनों पर 6-6 चार्जिंग प्वाइंट्स स्थापित करने की योजना बनाई गई है। माना जा रहा है कि इन कदमों से सार्वजनिक स्थानों पर EV चार्जिंग की सुविधा बेहतर होगी और लोगों का इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर भरोसा बढ़ेगा। पड़ोसी फेल, दिल्ली पास NCR में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने की बात तो हो रही है, लेकिन चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के मामले में दिल्ली ने बाकी शहरों को काफी पीछे छोड़ दिया है। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, नोएडा, गुड़गांव और फरीदाबाद की हालत बेहद खराब है, जबकि दिल्ली EV चार्जिंग के मामले में ‘किंग’ बनकर उभरी है। रिपोर्ट बताती है कि गुड़गांव और फरीदाबाद में सरकारी जमीन पर एक भी पब्लिक चार्जिंग प्वाइंट मौजूद नहीं है। वहीं नोएडा में सिर्फ 69 पब्लिक चार्जिंग प्वाइंट्स हैं, जबकि यहां कम से कम 150 प्वाइंट्स की जरूरत बताई गई है। स्थिति गाजियाबाद में भी कुछ खास बेहतर नहीं है, जहां 126 चार्जिंग प्वाइंट्स मौजूद हैं, लेकिन वास्तविक जरूरत करीब 450 प्वाइंट्स की है। ‘बैटरी स्वैपिंग‘ पर भी बड़ा जोर अगर आपके पास बैटरी स्वैपेबल इलेक्ट्रिक गाड़ी है, तो यह खबर आपके लिए भी राहत लेकर आई है। दिल्ली में फिलहाल 948 बैटरी स्वैपिंग स्टेशन काम कर रहे हैं, जिन्हें 2026 के अंत तक बढ़ाकर 1,268 करने का लक्ष्य तय किया गया है। इससे खासतौर पर ई-रिक्शा, डिलीवरी व्हीकल और टू-व्हीलर यूज़र्स को बड़ी सुविधा मिलने की उम्मीद है, क्योंकि बैटरी चार्ज करने के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा और कुछ ही मिनटों में बैटरी बदली जा सकेगी। एक्सपर्ट की चेतावनी इंटरनेशनल काउंसिल ऑन क्लीन ट्रांसपोर्टेशन (ICCT) के अमित भट्ट का कहना है कि EV चार्जिंग को लेकर एक अहम सच्चाई अक्सर नजरअंदाज हो जाती है। उनके मुताबिक 80 से 90 फीसदी चार्जिंग घर या ऑफिस में ही होती है, न कि पब्लिक चार्जिंग स्टेशनों पर। असली समस्या यह है कि कई हाउसिंग सोसाइटियां और RWA लोगों को निजी चार्जर लगाने की अनुमति नहीं देतीं, जिससे EV अपनाने में बड़ी रुकावट पैदा होती है। अमित भट्ट का सुझाव है कि भारत को नॉर्वे की तर्ज पर ‘चार्ज करने का कानूनी अधिकार’ (Right to Charge) लाना चाहिए, ताकि कोई भी व्यक्ति अपनी तय पार्किंग में बिना प्रशासनिक अड़चनों के चार्जर लगा सके। उनका मानना है कि इससे EV अपनाने की रफ्तार पब्लिक चार्जिंग बढ़ाने से भी ज्यादा तेज हो सकती है।

बेटियों के सशक्तिकरण की पहल: दिल्ली में रेखा गुप्ता सरकार का बड़ा ऐलान

दिल्ली दिल्ली की भाजपा सरकार ने लखपति बिटिया योजना का ऐलान किया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अगुआई में मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में इस फैसले पर मुहर लगाई गई। इसके साथ ही 2008 में लॉन्च की गई लाडली योजना को बंद कर दिया गया है। लखपति बिटिया योजना के तहत ग्रेजुएशन करने के बाद बेटियों को एक लाख रुपये की राशि दी जाएगी। इससे पहले महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में भी महिला केंद्रित योजनाएं चलाई जा चुकी हैं जिनमें प्रतिमाह अथवा सालाना आर्थिक सहायता महिलाओं को दी जाती है। अब दिल्ली में भाजपा सरकार ने बेटियों को एकमुश्त रकम देकर लखपति बनाने की पहल की है। कैबिनेट में मुहर के बाद मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि 31 मार्च तक लाडली योजना बंद कर दी जाएगी और इसकी जगह दिल्ली लखपति बिटिया योजना की शुरुआत की जाएगी। उन्होंने कहा हर परिवार से दो बिटिया को इस योजना का लाभ दिया जाएगा। दिल्ली में जन्मी हर बच्ची को इस योजना से जोड़ा जाएगा और ग्रेजुएशन पूरा होने पर मिनिमम एक लाख रुपये दिए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा, 'दिल्ली लखपति बिटिया योजना के तहत हर बच्ची को, जो दिल्ली की निवासी है, जिसका परिवार दिल्ली में रहता होगा, घर में दो बच्चियों को इसका लाभ दिया जाएगा। हर बच्ची पर 20-20 हजार रुपये बढ़ाया जाएगा। पहले 36 हजार था, उसे हमने 56 हजार किया है। 12वीं में जाने पर नहीं, हमने मोटिवेट किया है कि ग्रेजुएशन करने पर मैच्योरिटी मिलती है। मेच्योरिटी पर मिनिमम एक लाख रुपये मिलेंगे।' दिल्ली लखपति बिटिया योजना की क्या-क्या शर्तें मुख्यमंत्री ने योजना की कुछ शर्तों की जानकारी देते हुए बताया कि योजना की लाभार्थी बच्चियों का वैक्सीनेशन होना जरूरी है। मान्यताप्राप्त स्कूल से पढ़ना जरूरी है और यदि 18 साल के उम्र से पहले शादी की जाती है तो लाभ नहीं मिलेगा। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि इसकी अनुमानित लागत 160 करोड़ रुपये आएगी, लेकिन यदि इससे अधिक भी लगे तो सरकार फंड को बढ़ाएगी। लाडली योजना क्यों बंद मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि दिल्ली की बेटियों से जुड़ी लाडली योजना 2008 में शुरू हुई थी। बच्ची को अलग-अलग फेज में पैसे दिए जाते थे। उन्होंने कहा, 'हमारी सरकार ने जब पता किया तो सामने आया कि करोड़ों रुपये बैंक के पास अनक्लेम्ड हैं। लाभार्थी को मिले ही नहीं। 1.86 लाख बेटियों को यह पैसा नहीं मिला। सरकार ने उन्हें खोजा। एक साल में ऐसी तीस हजार बच्चियों को खोजकर 90 करोड़ राशि दी है। अब 41 हजार बच्चियां और मिली हैं जिन्हें लगभग 100 करोड़ का फंड दिया जाएगा।