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12 घंटे की जटिल सर्जरी के बाद दोनों हाथ प्रत्यारोपण सफल

नई दिल्ली दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल में एक ऐसी सर्जरी हुई है, जिसने एक महिला की जिंदगी बदल दी. दो बच्चों की मां जिसने एक हादसे में अपने दोनों हाथ खो दिए थे, अब फिर से सामान्य जीवन की ओर लौटने की उम्मीद कर रही है. अस्पताल के डॉक्टरों ने उसका सफलतापूर्वक दोनों हाथों का ट्रांसप्लांट किया है. जानकारी के मुताबिक, महिला के दोनों हाथ चारा काटने वाली मशीन में कट गए थे. इस हादसे के बाद वह अपने रोजमर्रा के छोटे-छोटे काम भी खुद नहीं कर पाती थी. खाना खाना, कपड़े पहनना, बच्चों की देखभाल करना, हर काम के लिए उसे दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता था. ऐसे में हाथों का ट्रांसप्लांट उसके लिए नई जिंदगी जैसा साबित हुआ. ब्रेन-डेड व्यक्ति था डोनर यह सर्जरी तब संभव हो सकी जब एक ब्रेन-डेड व्यक्ति के परिवार ने उसके हाथ दान करने की सहमति दी. उनके इस फैसले ने एक जरूरतमंद महिला को फिर से जीने का मौका दिया. अस्पताल ने इस परिवार के प्रति आभार जताया और इसे इंसानियत की मिसाल बताया. 12 घंटे तक चली सर्जरी डॉक्टरों के अनुसार, यह सर्जरी करीब 12 घंटे तक चली. इसमें डोनर के दोनों हाथ महिला के शरीर से जोड़े गए. दाहिना हाथ कोहनी के ऊपर से और बायां हाथ कलाई के पास से जोड़ा गया. डॉक्टरों ने हड्डियां, नसें, मांसपेशियां, खून की नलियां और टेंडन बहुत सावधानी से जोड़े, ताकि हाथों में फिर से ब्लड सर्कुलेशन और हरकत आ सके. अस्पताल के विशेषज्ञों ने बताया कि यह बेहद कठिन और संवेदनशील प्रक्रिया होती है, जिसमें हर मिनट की अहमियत होती है. अगर समय पर सही तरीके से काम न हो, तो ट्रांसप्लांट किए गए अंग को बचाना मुश्किल हो सकता है. डॉक्टरों का कहना है कि सर्जरी सफल होने के बाद भी असली सफर अब शुरू हुआ है. महिला को लंबे समय तक दवाएं लेनी होंगी ताकि शरीर नए हाथों को स्वीकार कर सके. इसके साथ ही उसे नियमित फिजियोथेरेपी और अभ्यास की जरूरत होगी, जिससे वह धीरे-धीरे हाथों का इस्तेमाल सीख सके. यह अस्पताल में किया गया दूसरा ऐसा ट्रांसप्लांट है. इस पूरी प्रक्रिया में प्लास्टिक सर्जरी, हड्डी रोग, एनेस्थीसिया, न्यूरोलॉजी, फिजियोथेरेपी और कई अन्य विभागों के डॉक्टर शामिल थे.

औद्योगिक क्षेत्रों में मजदूरों को राहत, 1000–1500 रुपये में मिलेगा आवास

नोएडा  उत्तर प्रदेश के औद्योगिक शहरों में काम करने वाले श्रमिकों के लिए सबसे बड़ी समस्या हमेशा सस्ते और सुरक्षित आवास की रही है। बढ़ते किराए, लंबी दूरी और सीमित आय के बीच जीवन यापन करना उनके लिए चुनौती बना हुआ है। अब इसी समस्या को दूर करने के लिए सरकार और प्राधिकरण स्तर पर बड़े फैसले लिए गए हैं। नोएडा में जहां श्रमिकों के लिए चार बड़े हॉस्टल बनाए जाएंगे, वहीं पूरे राज्य में किफायती किराया आवास नीति को औद्योगिक क्षेत्रों में लागू करने की तैयारी है, जिससे मजदूरों को उनके कार्यस्थल के पास ही सस्ती और सुविधाजनक रहने की व्यवस्था मिल सकेगी। नोएडा में बनेंगे 4 श्रमिक हॉस्टल नोएडा प्राधिकरण श्रमिकों के लिए चार आधुनिक हॉस्टल बनाने जा रहा है। इनमें से दो हॉस्टल प्राधिकरण स्वयं बनाएगा, जबकि दो का निर्माण श्रम कल्याण बोर्ड के साथ संयुक्त उद्यम (जॉइंट वेंचर) में किया जाएगा। चारों हॉस्टल एक-एक एकड़ जमीन पर विकसित होंगे और प्रत्येक हॉस्टल में लगभग 1000 श्रमिकों के रहने की क्षमता होगी। इन हॉस्टल्स को औद्योगिक सेक्टरों के पास बनाया जाएगा, जिससे श्रमिकों को कार्यस्थल तक पहुंचने में अतिरिक्त परिवहन खर्च नहीं करना पड़ेगा। औद्योगिक क्षेत्रों में बनेंगे श्रमिक आवास राज्य स्तर पर हुई उच्चस्तरीय बैठक में यह तय किया गया है कि औद्योगिक क्षेत्रों की 30 प्रतिशत भूमि पर श्रमिकों के लिए आवास विकसित किए जाएंगे। इस निर्णय में आवास, औद्योगिक विकास, नगर विकास और नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग शामिल रहे, जिन्होंने श्रमिकों को कार्यस्थल के नजदीक रहने की सुविधा देने पर सहमति जताई। सरकारी एजेंसियों के साथ निजी डेवलपर्स भी होंगे शामिल इस योजना को बड़े स्तर पर लागू करने के लिए सरकारी एजेंसियों के साथ-साथ निजी डेवलपर्स को भी जोड़ा जाएगा। निजी बिल्डरों को अपनी परियोजनाओं में श्रमिकों के लिए किराए के मकान बनाने की अनुमति दी जाएगी। इसके बदले उन्हें भू-उपयोग में छूट, मानचित्र स्वीकृति में तेजी और विकास शुल्क में राहत जैसी सुविधाएं मिलेंगी, जिससे परियोजना को तेजी से जमीन पर उतारा जा सके। 1000 से 1500 रुपये तक होगा किराया इस योजना का सबसे बड़ा आकर्षण इसका किफायती किराया है। सूत्रों के अनुसार, इन श्रमिक आवासों का मासिक किराया लगभग 1000 से 1500 रुपये के बीच रखा जा सकता है। मौजूदा समय में बड़े शहरों में एक कमरे का किराया 4 से 5 हजार रुपये तक पहुंच चुका है, ऐसे में यह योजना कम आय वाले श्रमिकों के लिए बड़ी राहत साबित होगी। कुशल और अकुशल दोनों श्रमिकों को मिलेगा लाभ यह योजना केवल फैक्ट्री मजदूरों तक सीमित नहीं होगी, बल्कि वेंडर, पेंटर, प्लंबर, इलेक्ट्रिशियन और अन्य कुशल व अकुशल श्रमिकों को भी इसका लाभ मिलेगा। आवास का आवंटन इस तरह किया जाएगा कि यदि कोई श्रमिक शहर छोड़ता है तो उसी मकान को दूसरे जरूरतमंद को दे दिया जाएगा, जिससे संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित हो सके। प्रधानमंत्री आवास योजना का विस्तार राज्य सरकार पहले ही प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत किफायती किराया आवास (ARH) नीति को मंजूरी दे चुकी है। अब इस नीति को औद्योगिक विकास विभाग में लागू करने का निर्णय लिया गया है, जिससे इसका दायरा और प्रभाव दोनों बढ़ेंगे। क्यों जरूरी हुआ यह फैसला? हाल के वर्षों में नोएडा और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में काम करने वाले श्रमिकों ने महंगे किराए, बच्चों की फीस और बढ़ती महंगाई को लेकर विरोध जताया था। कोविड-19 महामारी के दौरान भी श्रमिकों के सामने आवास की गंभीर समस्या सामने आई थी, जिसने इस दिशा में ठोस नीति बनाने की आवश्यकता को और स्पष्ट किया।  

शुरुआत में 17 शहरों के लिए घरेलू उड़ानें, एयरलाइंस कंपनियों ने खाका तैयार किया

नोएडा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से अगले महीने उड़ानें शुरू करने की तैयारी है. एयरलाइंस कंपनियों ने शुरुआत में 17 शहरों के लिए घरेलू उड़ानें शुरू करने की योजना पर काम शुरू कर दिया है. यमुना इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड की एयरपोर्ट साइट पर बोर्ड बैठक हुई. बैठक में एयरपोर्ट से उड़ान शुरू होने में आ रही रुकावटों समेत अन्य प्रस्तावों पर चर्चा की गई. मई के अंत तक एयरपोर्ट से घरेलू और कार्गो विमान सेवा शुरू करने का निर्णय लिया गया. तीन एयरलाइंस कंपनियों के पदाधिकारियों से वार्ता की गई, जिन्होंने शुरुआत में एयरपोर्ट से 17 फ्लाइट्स शुरू करने का प्रस्ताव रखा है. 17 शहरों के लिए मिलेगी कनेक्टिविटी बैठक में पूरा खाका तैयार करने और टिकट बुकिंग सेवा शुरू करने की प्रक्रिया को अंतिम रूप देने के आदेश दिए गए. हालांकि, उड़ान के लिए शहरों का चयन अभी नहीं हो सका है. नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो (BCAS) से उड़ान के लिए अंतिम मंजूरी के प्रस्ताव पर भी यापल और नायल के अधिकारियों के बीच बैठक हुई. सुरक्षा और विदेशी CEO का मसला बकास से अभी एयरपोर्ट सिक्योरिटी प्रोग्राम (ASP) को मंजूरी मिलना बाकी है. इसके बाद ही उड़ान सेवा शुरू की जाएगी. इस दौरान गृह मंत्रालय की आपत्तियों को दूर करने और विदेशी सीईओ से संबंधित मसले को सुलझाने पर भी अधिकारियों के बीच मंथन हुआ. यापल के अधिकारियों ने दावा किया कि इस पर काम शुरू हो गया है और एएसपी के लिए सभी आपत्तियां इसी माह में दूर कर ली जाएंगी, ताकि मई तक उड़ानें शुरू की जा सकें. इंफ्रा पर बड़ा निवेश, 300 करोड़ खर्च होंगे यमुना इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड की बोर्ड बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि एयरपोर्ट पर अगले दो वर्षों में विमानों को खड़ा करने के लिए 25 नए स्टैंड बनेंगे, जिस पर करीब 300 करोड़ रुपये का खर्च आएगा. वर्तमान में 28 स्टैंड बनकर तैयार हैं, जिनमें तीन कार्गो और 25 व्यावसायिक विमानों के लिए हैं. इसके अलावा, एयरपोर्ट पर 10 एयरोब्रिज जोड़े गए हैं, जिससे विमान यात्री एक साथ उड़ान भर सकेंगे. एयरपोर्ट के रनवे को प्रति घंटे लगभग 30 विमानों के टेकऑफ और लैंडिंग की क्षमता के साथ तैयार किया गया है.

लक्ष्मी नगर और शकूर बस्ती में आग का कहर, दमकल विभाग ने किया रेस्क्यू

नई दिल्ली दिल्ली में शुक्रवार रात को आगजनी की दो घटनाएं सामने आईं। इन घटनाओं में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। पहली घटना लक्ष्मी नगर में हुई, जहां ट्रांसफार्मर में लगी भीषण आग ने कई मकानों को चपेट में ले लिया। वहीं, शकूर बस्ती इलाके में भीषण आग लगने से 100 से अधिक झुग्गियां जलकर खाक हो गईं। पूर्वी दिल्ली के लक्ष्मी नगर इलाके में शुक्रवार देर रात को बिजली के एक ट्रांसफार्मर में लगी भीषण आग ने कई आवासीय इमारतों को अपनी चपेट में ले लिया। इस घटना में 14 लोगों को बचाया गया है। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। दिल्ली अग्निशमन सेवा (डीएफएस) के अनुसार, रमेश पार्क स्थित नानक मोटर के पास रात करीब साढ़े 12 बजे आग लगने की सूचना मिली। दमकल की टीम तुरंत मौके पर पहुंची लेकिन आग जल्द और भड़क गई। आग पर काबू पाने के लिए पानी के सात टैंकर और अन्य अग्निशमन वाहनों को तैनात किया गया। अधिकारी ने बताया कि ट्रांसफार्मर से आग आसपास की तीन इमारतों में फैल गई, जिससे 14 फ्लैट प्रभावित हुए। दमकलकर्मियों ने तुरंत बचाव अभियान चलाया और प्रभावित फ्लैट में फंसे सभी 14 लोगों को सुरक्षित निकाल लिया। उन्होंने बताया कि इस घटना में किसी के हताहत होने की कोई खबर नहीं है। देर रात करीब दो बजे आग पर काबू पा लिया गया, जिसके बाद शीतलन अभियान चलाया गया। आग लगने का सटीक कारण अब तक पता नहीं चल पाया है। उधर, उत्तर-पश्चिम दिल्ली के शकूर बस्ती इलाके में भीषण आग लगने से 100 से अधिक झुग्गियां जलकर खाक हो गईं। एक अधिकारी ने शनिवार को यह जानकारी दी। घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। दिल्ली अग्निशमन सेवा (डीएफएस) के अनुसार, आग लगने की सूचना शुक्रवार रात 11 बजकर 14 मिनट पर मिली। उसने बताया कि शुरुआत में दमकल की पांच गाड़ियां मौके पर भेजी गईं और करीब दो एकड़ क्षेत्र में फैली आग पर काबू पाने के लिए बाद में और गाड़ियों को भेजा गया। डीएफएस के एक अधिकारी ने कहा कि झुग्गियों में इस्तेमाल अत्यधिक ज्वलनशील सामग्री के कारण आग तेजी से फैल गई। आग पर देर रात करीब 12 बजकर 40 मिनट पर काबू पा लिया गया। यह सुनिश्चित करने के लिए शीतलन अभियान जारी है कि आग फिर न भड़के। उन्होंने बताया कि आग लगने के कारण का अभी पता नहीं चल पाया है।

CAF फायर फाइटिंग व्हीकल 300 मीटर ऊंचाई तक बुझाएगा आग

नोएडा दिल्ली से सटे नोएडा में तेजी से बढ़ रही हाईराइज बिल्डिंग्स में आग लगने की घटनाओं से निपटने के लिए फायर विभाग लगातार नई तकनीकों को अपनाने की दिशा में काम कर रहा है. इसी क्रम में नोएडा में कम्प्रेश्ड एयर फोम (CAF) आधारित हाईराइज फायर फाइटिंग व्हीकल का सफल ट्रायल किया गया. यह ट्रायल दिल्ली NCR की सबसे ऊंची बिल्डिंग सुपरनोवा की 45वीं मंजिल पर किया गया है, जहां इस अत्याधुनिक व्हीकल की क्षमता को परखा गया. ट्रायल के दौरान यह देखा गया कि यह वाहन तकरीबन 300 मीटर की ऊंचाई तक आसानी से पानी और फोम पहुंचाने में सक्षम है, जिससे ऊंची इमारतों में लगी आग पर तेजी से काबू पाया जा सकता है. अधिकारियों के अनुसार, इस तकनीक में पानी और कंप्रेस्ड एयर को मिलाकर एक विशेष प्रकार का फोम तैयार किया जाता है. यह फोम आग बुझाने में अधिक प्रभावी होता है और 100 मंजिल तक की ऊंचाई पर लगी आग को भी नियंत्रित करने की क्षमता रखता है. इस हाईराइज फायर फाइटिंग व्हीकल की एक बड़ी खासियत यह भी है कि इसके जरिए अग्निशमन कर्मियों को इमारत के अंदर जाकर आग बुझाने में काफी सहायता मिलती है, जिससे रिस्क कम होता है और रेस्क्यू ऑपरेशन अधिक सुरक्षित बनता है. ट्रायल के दौरान डीजी फायर सुजीत पांडे भी मौके पर मौजूद रहे और उन्होंने इस तकनीक को हाईराइज इमारतों के लिए बेहद उपयोगी बताया. DG फायर ने कहा कि इस तरह की आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से नोएडा जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहरों में इमरजेंसी सेवाओं को और मजबूत किया जा सकेगा.

पारदर्शी मूल्यांकन में कृष्णा नगर विधायक को मिला सम्मान, 51 हजार रुपये मिलेंगे

नई दिल्ली दिल्ली विधानसभा ने 18 वर्षों के बाद सर्वश्रेष्ठ विधायक का पुरस्कार देने की घोषणा की है। इसके लिए गठित चयन समिति की बैठक विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता की अध्यक्षता में हुई, जिसमें कृष्णा नगर के विधायक डॉ. अनिल गोयल को सर्वश्रेष्ठ विधायक घोषित किया गया। उन्हें स्मृति चिन्ह और 51 हजार रुपये की राशि प्रदान की जाएगी। शीघ्र ही समारोह आयोजित कर उन्हें पुरस्कृत किया जाएगा। डॉ. गोयल पहली बार कृष्णा नगर से विधायक चुने गए हैं। पारदर्शी अंक प्रणाली के आधार पर किया गया चयन 'सर्वश्रेष्ठ विधायक पुरस्कार' का चयन पारदर्शी अंक प्रणाली के आधार पर किया गया है। कुल मूल्यांकन 100 अंकों पर किया गया है, जिसमें 65 अंक विधानसभा के आधिकारिक अभिलेखों के आधार पर और 35 अंक चयन समिति द्वारा गुणात्मक मूल्यांकन के आधार पर हैं। विधायक की सक्रियता के लिए कुल 30 अंक निर्धारित मूल्यांकन का सबसे बड़ा हिस्सा, 50 अंक सदन में विभिन्न मुद्दों पर होने वाली चर्चा में सदस्य के योगदान पर केंद्रित है। विभिन्न समितियों में विधायक की सक्रियता के लिए कुल 30 अंक निर्धारित हैं। 20 अंक अनुशासन, आचरण और आधुनिकीकरण (डिजिटल और कागजरहित कार्यप्रणाली) से संबंधित हैं। विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि यह पहल उन सदस्यों को सम्मानित करने के लिए है जो विधायी कार्यों में उत्कृष्टता प्रदर्शित करते हैं और समिति कार्यों में अथक परिश्रम करते हैं। दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष की अध्यक्षता में हुई चयन समिति की बैठक में पूर्व सांसद राजेंद्र अग्रवाल, लोकसभा के पूर्व महासचिव पीडीटी आचार्य, दिल्ली सरकार के विधि, न्याय एवं विधायी कार्य विभाग के प्रधान सचिव रितेश सिंह और दिल्ली विधानसभा के सचिव रणजीत सिंह शामिल रहे।  

AAP का बड़ा कदम: दिल्ली में भाजपा को बिना मुकाबले जीत का मौका क्यों दिया?

नई दिल्ली दिल्ली की सत्ता गंवा देने के बाद आम आदमी पार्टी (आप) राजधानी की 'छोटी सरकार' यानि दिल्ली नगर निगम (MCD) से भी दूर हो चुकी है। पिछले एमसीडी चुनाव में बहुमत हासिल करने वाली 'आप' के हालात इन दिनों ऐसे हैं कि लगातार दूसरे साल पार्टी ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को बिना लड़े जीत का मौका दे दिया है। पंजाब, गुजरात से गोवा तक में विधानसभा चुनावों की तैयारी में जुटी अरविंद केजरीवाल की पार्टी ने इस साल भी दिल्ली में मेयर और डिप्टी मेयर का चुनाव के लिए उम्मीदवार नहीं उतारने का फैसला किया है। दोनों पदों के लिए 29 अप्रैल को वोटिंग होगी। आप के पार्षद और विपक्ष के नेता अंकुश नारंग ने कहा, 'हम प्रयास करते तो संख्याबल जुटा सकते थे। कुछ पार्षद मौजूदा व्यवस्था से नाखुश हैं। लेकिन दूसरे दलों की तरह हॉर्स ट्रेडिंग (वोट खरीद-फरोख्त)करने से फायदा नहीं है।' बुधवार को एक पार्टी की बैठक के बाद यह फैसला लिया गया। पार्टी ने तीन में से केवल एक रिक्त स्टैंडिंग कमिटी के लिए नामांकन दाखिल किया है। पार्टी को उम्मीद है कि इस सीट पर वह जीत हासिल कर सकती है। नारंग ने कहा, 'एक बार फिर हमने भाजपा को ना सिर्फ मेयर बल्कि स्टैंडिंग कमिटी का चेयरमैन बनाने का मौका दिया है, क्योंकि पार्टी किसी भी तरह कमिटी में बहुमत हासिल करने की कोशिश करेगी।'आम आदमी पार्टी ने शालीमार बाग से पार्षद जलज चौधरी को कमिटी के लिए उतारा है। नारंग ने कहा कि चौधरी अनुभवी नेता हैं और लंबे समय से इलाके की समस्याओं को उठाते रहे हैं। मेयर-डिप्टी मेयर और स्टैंडिंग कमिटी के लिए 5 पदों पर चुनाव मेयर और डिप्टी मेयर के अलावा स्टैंडिंग कमिटी के तीन सदस्यों के लिए भी 29 अप्रैल को ही वोटिंग होगी। 31 मार्च को भाजपा के 6 और आप के तीन प्रतिनिधि 18 सदस्यीय समिति से रिटायर हो गए थे। छह सीटों के लिए चुनाव संबंधित जोन में होंगे जहां के प्रतिनिधियों का कार्यकाल खत्म हुआ है, जबकि तीन का निर्वाचन सदन में होगा। शेष 9 सदस्यों में भाजपा के पांच और आप के चार सदस्य हैं। बुधवार को भाजपा ने भी एक बैठक करके आगामी चुनाव पर मंथन किया। मेयर पद के लिए भाजपा ने बेगमपुर से पार्षद जय भगवान यादव, महिपालपुर के इंद्रजीत सहरावत और मौजूदा मेयर राजा इकबाल सिंह पर विचार किया। मैदान में उतरेगी कांग्रेस एक तरफ जहां आम आदमी पार्टी ने मैदान छोड़ने का फैसला किया तो कांग्रेस ताल ठोंकने का दमखम दिखा रही है। कांग्रेस ने मेयर और डिप्टी मेयर दोनों पदों के लिए उम्मीदवार उतारने का फैसला किया है। सदन में 250 सीटों में से भाजपा के 123 और आम आदमी पार्टी के 100 पार्षद हैं। 15 पार्षद इंद्रप्रस्थ विकास पार्टी से हैं। यह गुट आप से अलग हुआ था। कांग्रेस के 9 पार्षद हैं जबकि एक फॉर्वर्ड ब्लॉक और एक निर्दलीय है। एक सीट खाली है। क्या है वोटों का समीकरण मेयर और डिप्टी मेयर चुनाव में पार्षदों के अलावा दिल्ली के सांसद और विधायक भी हिस्सा लेते हैं। इस हिसाब से भाजपा के पास 141 वोट हैं जबकि आप के पास 106 का संख्याबल है। कांग्रेस के पास दिल्ली से कोई विधायक या सांसद नहीं है। पिछले साल भी आम आदमी पार्टी ने दोनों पदों के लिए उम्मीदवार नहीं उतारा था। भाजपा को बिना लड़े ही जीत का मौका मिल गया था।

दिल्ली: IRS अफसर की बेटी और नौकर के बीच बड़ा विवाद, चाबी वाली गलती बनी मुसीबत

नई दिल्ली दिल्ली में बुधवार सुबह एक IRS अधिकारी के घर जिस खौफनाक घटना को अंजाम दिया, उसने राजधानी ही नहीं पूरे देश को चिंता में डाल दिया है। खासकर उन लोगों को जो अपने दैनिक कामकाज के लिए घरेलू सहायकों की मदद लेते हैं। कुछ समय पहले काम से निकाले गए एक नौकर ने ना सिर्फ अधिकारी के घर में लूटपाट की, बल्कि उनकी 22 साल की होनहार बेटी की जान ले ली। आशंका यह भी है कि उसने गला घोंटने से पहले पीड़िता पर यौन हमला भी किया। शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि आईआरएस अधिकारी जिम जाते हुए चाबी को उसी जगह रख गए थे, जहां वह पहले रखते थे। पुराने नौकर को हटाने के बाद उन्होंने इसकी जगह नहीं बदली थी। पुलिस की शुरुआती जांच और आरोपी की गिरफ्तारी के बाद पूछताछ से पता चला कि उसने पीड़िता को काबू करने के लिए पहले उसके सिर पर किसी भारी वस्तु से वार किया और फिर चार्जर केबल से उसका गला घोंट दिया। द्वारका के एक होटल में करीब 12 घंटे बाद गिरफ्तार हुए आरोपी नौकर को आईआरएस अधिकारी ने डेढ़ महीने पहले काम से हटा दिया था। पैसों के लेनदेन में गड़बड़ी करने पर उसे हटाया गया था। जुए और उधार में फंस चुका आरोपी राहुल मीणा खौफनाक घटना को अंजाम देने के बाद घर से 2.5 लाख रुपये कैश और कुछ गहने लेकर फरार हो गया था। जॉइंट सीपी विजय कुमार ने कहा कि आरोपी के खिलाफ रेप, हत्या और लूट जैसे आरोपों में बीएनएस की कई धाराओं में केस दर्ज किया गया है। जानता था सारे भेद जिस समय घटना को अंजाम दिया गया, आईआरएस अधिकारी अपनी पत्नी के साथ सुबह 6 बजे के आसपास ही जिम और वॉकिंग के लिए निकल गए थे। जॉइंट सीपी ने बताया, 'पीड़िता के माता-पिता जिम के लिए निकल गए थे। उन्होंने हर दिन की तरह एक अतिरिक्त चाबी फ्लैट के बाहर रख दी थी। नया नौकर आमतौर पर 6.30 बजे से 7 बजे तक आता था। राहुल को इस बात की जानकारी थी कि चाबी बाहर कहां रखी रहती है।' जानता था कहां रखी होती है जाबी, टाइमिंग की भी जानकारी आरोपी यह भी जानता था कि आईआरएस अधिकारी और उनकी पत्नी किस समय बाहर होते हैं और बेटी घर पर अकेली होती है। एक दिन पहले ही अलवर में महिला से रेप करके रात में ही दिल्ली पहुंचा नौकर सुबह-सुबह दूसरी वारदात को अंजाम देने के लिए अमर कॉलोनी पहुंच गया था। अधिकारी ने कहा, 'अफसर और उनकी पत्नी के घर से निकलने के बाद राहुल वहां पहुंचा। उसने चाबी उठाई और ताला खोलकर घर के अंदर दाखिल हो गया। अंदर पढ़ाई कर रही पीड़िता को धमकाते हुए उसने अलमारी का पासकोड पूछा। इनकार करने पर उसने मारपीट की। पासकोड लेकर अलमारी खोली और कैश-गहने लिए।' इसके बाद उसने लड़की की गला घोंटकर हत्या कर दी। जब बाहर निकलते समय रोका गया था नौकर परिजनों ने बताया कि जब वे करीब 8 बजे वापस आए तो बेटी को खून से लथपथ और अचेत पाया। वे तुरंत उसे लेकर फोर्टिस अस्पताल पहुंचे, जहां मृत घोषित किया गया। वहीं, से पुलिस को घटना की जानकारी दी गई। आरोपी घर के अंदर करीब 40 मिनट तक रहा। सीसीटीवी फुटेज में वह करीब 6.39 बजे घर में दाखिल होता गदिखा। वारदात को अंजाम देने के बाद उसने कपड़े भी बदले। 7 बजकर 22 मिनट पर वह घर से बाहर निकलते दिखा। घर के बाहर गाड़ी साफ करते हुए एक सहायक ने उसे रोका भी और पूछा कि वह कैसे आया है। उसने आरोपी से रुकने और कुछ खाकर जाने को कहा। लेकिन आरोपी ने कहा कि उसे किसी जरूरी काम से तुरंत जाना है और वह चला गया। कैसे हत्यारे तक पहुंची पुलिस पुलिस ने घटना की जानकारी मिलने के बाद कई टीमों का गठन किया। 100 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की जांच के जरिए पुलिस द्वारका के उस होटल तक पहुंची जहां आरोपी छिपा हुआ था। गुरुवार को उसे अदालत में पेश करने के बाद पुलिस रिमांड पर लेगी और आगे की पूछताछ से उसके मकसद का पता लगाएगी। पुलिस के मुताबिक, अफसर ने एक जानकार के कहने पर करीब एक साल पहले काम पर रखा था। लेकिन जब उन्हें उसके जुए की लत का पता चला तो काम से हटा दिया था।

दिल्ली में नया रूल: NO PUC, NO Fuel! पेट्रोल-डीजल और CNG की मिलेगी कमी

 नई दिल्ली  दिल्ली की सड़कों पर गाड़ी चलाते हैं तो अब यह खबर सीधे आपसे जुड़ी है. क्योंकि सरकार ने साफ कर दिया है कि अब पेट्रोल-डीजल लेने से पहले आपकी गाड़ी का ‘हेल्थ रिपोर्ट’ यानी PUC सर्टिफिकेट देखी जाएगी. नहीं है तो सीधा मना. कोई बहाना नहीं, कोई राहत नहीं. प्रदूषण पर लगाम कसने के लिए सरकार अब सीधे आम लोगों की जिम्मेदारी तय कर रही है।  दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण पर अब सरकार ने कड़ा रुख अपना लिया है. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने साफ निर्देश दिए हैं कि अब बिना वैलिड पॉल्यूशन सर्टिफिकेट (PUC) के किसी भी वाहन को पेट्रोल या डीजल नहीं मिलेगा. सरकार का कहना है कि यह कदम एयर क्वॉलिटी सुधारने के लिए बेहद जरूरी है और अब इसमें किसी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।  ‘No PUC, No Fuel’ नियम पर सख्ती बुधवार को मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि ‘No PUC, No Fuel’ नियम को सख्ती से लागू किया जाए. दरअसल, यह नियम पिछले साल दिसंबर में शुरू की गई थी, लेकिन अब भी कई वाहन बिना वैलिड पीयूसी सर्टिफिकेट के सड़कों पर चल रहे हैं. सरकार का मानना है कि ऐसे वाहन प्रदूषण को तेजी से बढ़ा रहे हैं. नए आदेश के मुताबिक अब पेट्रोल पंप और गैस स्टेशनों को साफ निर्देश दिए गए हैं कि वे केवल उन्हीं वाहनों को फ्यूल दें जिनके पास वैलिड PUC सर्टिफिकेट हो. सभी पंपों को इस नियम का सख्ती से पालन करने को कहा गया है ताकि प्रदूषण पर लगाम लगाई जा सके।  पेट्रोल पंपों पर जाम की स्थिति दिल्ली के कई पेट्रोल पंपों पर इस नए नियम की सख्ती का असर साफ तौर पर देखने को मिलने लगा है. पेट्रोल पंप बिना वैलिड पीयूसी के फ्यूल देने से इंकार कर रहे हैं, ऐसे में कई पेट्रोल पंपों पर वाहनों की भारी भीड़ जमा होते देखी गई है. हालांकि सरकार ने इसकी तैयारी कर रखी है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में मामले को तत्काल निपटाया जा सके।  इस नियम को सख्ती से लागू कराने के लिए फूड एंड सप्लाई विभाग, ट्रांसपोर्ट विभाग, नगर निगम और दिल्ली ट्रैफिक पुलिस को जिम्मेदारी दी गई है. अधिकारियों को चेतावनी दी गई है कि किसी भी तरह की लापरवाही या ढिलाई पर सख्त कार्रवाई की जाएगी. मुख्यमंत्री ने साफ कहा है कि इस नियम के पालन में किसी भी तरह की चूक बर्दाश्त नहीं होगी. नियम तोड़ने वालों के खिलाफ वाहन जब्त करने और अधिकतम जुर्माना लगाने जैसे कड़े कदम उठाए जाएंगे. सभी एजेंसियों की जिम्मेदारी तय कर दी गई है ताकि इस नियम का पूरी सख्ती से पालन हो।  रेखा गुप्ता ने कहा कि सरकार प्रदूषण से निपटने के लिए कई स्तरों पर काम कर रही है. इसमें वाहनों से होने वाले उत्सर्जन को नियंत्रित करना सबसे बड़ी प्राथमिकता है. उन्होंने दिल्ली के लोगों से अपील की है कि वे अपने PUC सर्टिफिकेट को समय-समय पर अपडेट रखें और स्वच्छ और स्वस्थ दिल्ली बनाने में सहयोग करें।  क्या बोलीं CM राजधानी में प्रदूषण नियंत्रण के लिए हमारी सरकार ने सख्त निर्णय लेते हुए यह फैसला लिया है कि दिल्ली में अब बिना वैध पीयूसी प्रमाणपत्र वाले वाहनों को ईंधन नहीं मिलेगा. सभी पेट्रोल पंपों और एजेंसियों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं कि नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करें. अब बिना वैध ‘पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल’ प्रमाणपत्र वाले किसी भी वाहन को दिल्ली के फ्यूल स्टेशंस पर पेट्रोल, डीजल, सीएनजी या एलपीजी जैसे ईंधन उपलब्ध नहीं कराए जाएंगे. वायु प्रदूषण की चुनौती से निपटने के लिए कड़े और प्रभावी कदम उठाना समय की आवश्यकता है और हमारी सरकार इस दिशा में लगातार काम कर रही है। 

सीमा सुरक्षा बल की पेंशन अदालत 29 अप्रैल को, सेवानिवृत्त कर्मियों की शिकायतों का होगा समाधान

सीमा सुरक्षा बल की पेंशन अदालत 29 अप्रैल को, सेवानिवृत्त कर्मियों की शिकायतों का होगा समाधान नई दिल्ली   Border Security Force की 25वीं वाहिनी द्वारा सेवानिवृत्त कर्मियों और उनके परिवारों की पेंशन संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए विशेष पेंशन अदालत का आयोजन किया जा रहा है। यह अदालत 29 अप्रैल 2026 को New Delhi स्थित छावला शिविर में आयोजित होगी। यह आयोजन सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक चलेगा। इसमें दिल्ली क्षेत्र, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान से जुड़े सीमा सुरक्षा बल के सेवानिवृत्त कर्मी और उनके परिवार भाग ले सकेंगे। अदालत का उद्देश्य लंबित पेंशन शिकायतों का निस्तारण करना और संबंधित मामलों में सहायता प्रदान करना है। जिन लोगों को पेंशन से जुड़ी किसी प्रकार की परेशानी है, वे निर्धारित तिथि पर आवश्यक दस्तावेजों के साथ उपस्थित होकर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। अधिकारियों द्वारा मौके पर मामलों की जांच कर समाधान का प्रयास किया जाएगा। पेंशन अदालत में आने वाले लोगों को सलाह दी गई है कि वे पहचान पत्र, पेंशन अभिलेख और अन्य आवश्यक कागजात साथ लेकर आएं, ताकि प्रक्रिया में सुविधा हो सके। अधिक जानकारी और सहायता के लिए 011-20895035 पर संपर्क किया जा सकता है। यह आयोजन Border Security Force मुख्यालय के निर्देशानुसार किया जा रहा है।