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मानसा थर्मल प्लांट पर ड्रोन का खतरा: देर रात दिखी संदिग्ध गतिविधि, पुलिस-सेना हाई अलर्ट पर

मानसा/पंचकूला. उत्तर भारत के सबसे बड़े तलवंडी साबो पावर लिमिटेड (टीएसपीएल) के ऊपर तीन से चार शक्की ड्रोन की गतिविधि देखने के बाद पुलिस की ओर से सुरक्षा के कड़े प्रबंध कर दिए गए हैं, इन ड्रोन की सूचना पुलिस ने भारतीय फौज को देने के बाद बठिंडा स्थित अधिकारियों की ओर से थर्मल प्लांट का निरीक्षण किया गया बताया जा रहा है कि तीन से चार थर्मल प्लांट की चारद्वारी नंबर 194 के नजदीक इन ड्रोन को काफी समय थर्मल के ऊपर उड़ते देखा गया इस दौरान यूनिट का सर्वेक्षण करने के बाद गेट नंबर 2 के द्वारा प्लांट से बाहर चले गए। मामले की गंभीरता को देखते प्लांट प्रबंधन के सुरक्षा प्रबंधन की ओर से इस मामले की जानकारी पुलिस चौकी बहनीवाल इंचार्ज को दी गई, पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते इसकी जांच शुरू कर दी गई है, उन्होंने बताया कि थर्मल की ओर से रात के समय कुछ ड्रोन उड़ने की सूचना दी गई है जिसकी पुलिस जांच कर रही है। वहीं पंचकूला के अंतर्गत पीडब्ल्यूडी कॉलोनी के पास 4/5 अप्रैल देर रात एक सड़क हादसा घटित हुआ। त्रिलोकपुर की ओर से आ रहे एक अनियंत्रित ट्रक ने मोटरसाइकिल सवार दो चचेरे भाइयों को इतनी जोरदार टक्कर मारी कि दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। पुलिस ने उसी दिन आरोपित ट्रक चालक को गिरफ्तार कर वाहन को कब्जे में ले लिया है। पंचकूला वासी मृतक के भाई निशांत ने पुलिस को दिए बयान में बताया कि शनिवार रात वह अपने छोटे भाई अरुण (18) और चाचा के लड़के दीक्षित के साथ अपनी मौसी के लड़के से मिलने गांव बडोना कलां गए थे। रात करीब 12.15 बजे जब वे वापस अपने गांव लौट रहे थे, तो रायपुररानी में पीर बाबा की मजार के पास यह हादसा हुआ। निशांत अपनी बाइक पर पीछे चल रहा था, जबकि अरुण अपनी मोटरसाइकिल चला रहा था और दीक्षित उसके पीछे बैठा था। निशांत ने बताया कि त्रिलोकपुर की ओर से आ रहे ट्रक के चालक ने वाहन को बेहद तेज रफ्तार और लापरवाही से चलाते हुए गलत दिशा में लाकर अरुण की मोटरसाइकिल को सीधी टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि दोनों भाई सड़क पर गिर गए और ट्रक का पिछला टायर उनके ऊपर से गुजर गया। चश्मदीदों और राहगीरों ने तुरंत ट्रक को रुकवाया और पुलिस को सूचना दी, लेकिन तब तक अरुण और दीक्षित की मौत हो चुकी थी। डीसीपी पंचकूला सृष्टि गुप्ता ने बताया कि यह सड़क हादसा बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। सूचना मिलते ही रायपुररानी थाना से मुख्य सिपाही राजीव कुमार और उनकी टीम मौके पर पहुंची। पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर नागरिक अस्पताल की मोर्चरी में पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया था। शिकायतकर्ता निशांत के बयान के आधार पर आरोपित ट्रक चालक अभिषेक ठाकुर, निवासी जिला चम्बा (हिमाचल प्रदेश) के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 106(1), 281 और 324(4) के तहत मामला दर्ज किया गया। मौके से दुर्घटनाग्रस्त मोटरसाइकिल और ट्रक को जब्त किआ गया। हमारी टीम द्वारा उसी दिन आरोपी चालक को गिरफ्तार कर लिया गया था।

पंजाब पुलिस में बड़ा फेरबदल: कई IPS अधिकारी बदले, चौहान और सिन्हा को नई पोस्टिंग

चंडीगढ़. चंडीगढ़. पंजाब सरकार ने सोमवार, 6 अप्रैल को राज्य में चार उपायुक्तों सहित 12 आईएएस अधिकारियों का तबादला कर दिया. एक आधिकारिक आदेश के अनुसार, आईएएस अधिकारी हिमांशु अग्रवाल को पटियाला का उपायुक्त (डीसी) नियुक्त किया गया है, जो आईएएस अधिकारी वरजीत वालिया का स्थान लेंगे, जिन्हें जालंधर का उपायुक्त बनाया गया है. आदेश के अनुसार, अमित कुमार पंचाल को मुक्तसर का डीसी और आकाश बंसल को कपूरथला का डीसी नियुक्त किया गया है. वरिष्ठ आईएएस अधिकारी विकास प्रताप को तकनीकी शिक्षा और उद्योग प्रशिक्षण के अतिरिक्त मुख्य सचिव के रूप में तैनात किया गया है, जबकि सुमेर सिंह गुर्जर को रक्षा सेवा कल्याण के प्रधान सचिव का प्रभार दिया गया है. कृषि आयुक्त, आईएएस अधिकारी बबीता को फिरोजपुर मंडल के आयुक्त का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है. जसप्रीत सिंह को उद्योग एवं वाणिज्य निदेशक के पद पर तैनात किया गया है, जबकि अभिजीत कपलिश को खान एवं भूविज्ञान निदेशक का प्रभार सौंपा गया है. जसबीर सिंह को सामान्य प्रशासन एवं समन्वय विभाग में अतिरिक्त सचिव के पद पर तैनात किया गया है. DGP के चयन के लिए 14 सीनियर अधिकारियों का पैनल इसके अलावा, पंजाब सरकार ने राज्य में नियमित पुलिस महानिदेशक की नियुक्ति के लिए तीन उम्मीदवारों को छांटने के वास्ते भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के 14 वरिष्ठ अधिकारियों का एक पैनल संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) को भेजा है.  फिलहाल आईपीएस अधिकारी गौरव यादव कार्यवाहक पुलिस महानिदेशक हैं. यूपीएससी को भेजी गई सूची में पुलिस महानिदेशक रैंक के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी शामिल हैं. सूत्रों ने बताया कि इस सूची में 1992 बैच के आईपीएस अधिकारी गौरव यादव, विशेष पुलिस महानिदेशक शरद सत्य चौहान (पंजाब सतर्कता प्रमुख), विशेष पुलिस महानिदेशक (मादक पदार्थ रोधी कार्यबल) कुलदीप सिंह और वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी हरप्रीत सिंह सिद्धू (पदस्थापना की प्रतीक्षा में) के नाम शामिल हैं. पिछले महीने मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा था कि उनकी सरकार नियमित डीजीपी के चयन के लिए अधिकारियों का एक पैनल भेजेगी.

हरपाल सिंह चीमा का बयान-टैक्स चोरी पर कड़ी कार्रवाई, करोड़ों की वसूली और भारी जुर्माना

पंजाब में टैक्स चोरी पर सख्ती, 1137 करोड़ वसूली, 1383 करोड़ जुर्माना; चीमा बोले प्रवर्तन में बड़ा बदलाव चंडीगढ़. पंजाब सरकार की टैक्स चोरी के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति को दोहराते हुए, वित्त, योजना, आबकारी और कर मंत्री हरपाल चीमा ने आज यहां घोषणा की कि पंजाब सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में प्रवर्तन के क्षेत्र में रिकॉर्ड परिणाम हासिल किए हैं, जो खुफिया जानकारी आधारित कार्रवाई और राजस्व सुरक्षा की दिशा में एक निर्णायक बदलाव को दर्शाते हैं। कारगुजारी का विवरण देते हुए वित्त मंत्री ने कहा, “स्टेट इंटेलिजेंस एंड प्रिवेंटिव यूनिट्स की लक्षित और खुफिया जानकारी आधारित कार्रवाई के कारण राज्य के कर विभाग ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान 1,383.11 करोड़ रुपये का भारी जुर्माना लगाया। इसमें से 1,137.85 करोड़ रुपये की वसूली पहले ही की जा चुकी है, जो प्रवर्तन की दक्षता और राजस्व संग्रह में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।” इस सफलता की आधारशिला के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा, “निरीक्षण आधारित प्रवर्तन ने मुख्य भूमिका निभाई, जिसमें 1,215.95 करोड़ रुपये का जुर्माना और 972.15 करोड़ रुपये की वास्तविक वसूली शामिल है। इसके अलावा, सड़क चेकिंग अभियानों ने 165.71 करोड़ रुपये का योगदान दिया। यह प्रदर्शन वित्तीय वर्ष 2024-25 की तुलना में कई गुना सुधार को दर्शाता है। वर्ष 2024-25 में निरीक्षण प्रवर्तन के तहत 147.28 करोड़ रुपये का जुर्माना और 41.53 करोड़ रुपये की वसूली हुई थी, जबकि सड़क चेकिंग से 157.14 करोड़ रुपये प्राप्त हुए थे। वर्ष 2025-26 में यह उल्लेखनीय वृद्धि राज्य की जांच, प्रवर्तन और वास्तविक राजस्व संग्रह क्षमता में बड़े बदलाव को उजागर करती है।” एक साल में 8 एफआईआर दर्ज, 15 गिरफ्तारियां हुईं धोखेबाज नेटवर्करों पर सख्ती का उल्लेख करते हुए वित्त मंत्री ने कहा, “कर विभाग ने वर्ष भर में 8 एफआईआर दर्ज कीं और 15 गिरफ्तारियां कीं। दो प्रमुख मामलों में सात व्यक्तियों की संलिप्तता सामने आई और 385 करोड़ रुपये के धोखाधड़ी लेन-देन का पर्दाफाश हुआ। इन लक्षित कार्रवाइयों से बिना वास्तविक आपूर्ति के फर्जी इनवॉइस जारी करने वाली फर्मों द्वारा 69.57 करोड़ रुपये की टैक्स चोरी उजागर हुई।” उन्होंने आगे कहा, “माल की अवैध ढुलाई और फर्जी बिलिंग नेटवर्क के खिलाफ बठिंडा, मंडी गोबिंदगढ़, लुधियाना और चंडीगढ़ में अन्य एफआईआर दर्ज की गईं। एक महत्वपूर्ण कार्रवाई में 9 करोड़ रुपये से अधिक के फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट पास करने के आरोप में लुधियाना के एक संचालक को गिरफ्तार किया गया।” 1,579 संदिग्ध डीलरों की पहचान हुई उन्होंने बताया, “विभाग के आधुनिक खुफिया नेटवर्क ने कई बड़े खुलासे किए, जिनमें लुधियाना में सोने के लेन-देन में 900 करोड़ रुपये की फर्जी बिलिंग, मोहाली, खरड़ और कोटकपूरा में कोयले के अवैध लेन-देन में 226 करोड़ रुपये, और लुधियाना व मंडी गोबिंदगढ़ में सक्रिय 423 करोड़ रुपये के फर्जी बिलिंग नेटवर्क शामिल हैं। इसके अलावा, जांच के दौरान ‘पेट पूजा ऐप’ से जुड़े 200 करोड़ रुपये के घोटाले का भी पर्दाफाश हुआ, जो आधुनिक टैक्स चोरी नेटवर्क की जटिलता और व्यापकता को दर्शाता है।” वेरिफिकेशन अभियानों के बारे में उन्होंने कहा, “केंद्रित जांच के दौरान 1,579 संदिग्ध डीलरों की पहचान की गई। कड़ी जांच के बाद इनमें से 922 इकाइयों का अस्तित्व ही नहीं पाया गया और केंद्र सरकार के साथ समन्वय कर उनकी पंजीकरण रद्द कर दी गई।” आईटीसी नियंत्रण उपायों पर जोर देते हुए उन्होंने कहा, “मजबूत नियंत्रण उपायों के चलते 244.82 करोड़ रुपये को सक्रिय रूप से ब्लॉक किया गया और 206.64 करोड़ रुपये की रिकवरी सुनिश्चित की गई। इन कदमों से अतिरिक्त 19.08 करोड़ रुपये की नकद वसूली के साथ कुल 451.46 करोड़ रुपये राज्य के खजाने में सुरक्षित किए गए।” एक दिन में 141 वाहन किए गए जब्त फील्ड प्रवर्तन में तेजी का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, “मंडी गोबिंदगढ़ और लुधियाना में एक साथ चलाए गए विशेष अभियान के दौरान एक ही दिन में रिकॉर्ड 141 वाहनों को जब्त किया गया। विभाग ने आयरन एंड स्टील, सीमेंट, ऑटो पार्ट्स, तंबाकू और धातु जैसे उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों पर विशेष निगरानी रखते हुए रेलवे स्टेशनों और प्रमुख ट्रांजिट पॉइंट्स पर भी प्रवर्तन मजबूत किया।” संस्थागत और तकनीकी दक्षता को सफलता का श्रेय देते हुए उन्होंने कहा, “स्टेट इंटेलिजेंस एंड प्रिवेंटिव यूनिट, टैक्स इंटेलिजेंस यूनिट और ‘बिल लाओ इनाम पाओ’ योजना की भूमिका महत्वपूर्ण रही। आधुनिक डेटा विश्लेषण, रियल-टाइम ई-वे बिल ट्रैकिंग, सतत खुफिया जानकारी और नए डिजिटल प्रवर्तन पोर्टल्स ने इस सफलता में अहम योगदान दिया है। इन तकनीकी सुधारों ने जमीनी स्तर पर तेज और समन्वित कार्रवाई को संभव बनाया है।” चीमा ने कहा, “वित्तीय वर्ष 2025-26 का प्रदर्शन पंजाब में कर अनुपालन और राजस्व संग्रह को मजबूत करने की दिशा में एक परिवर्तनकारी कदम है। धोखाधड़ी नेटवर्क को समाप्त करने, ईमानदार व्यापारिक प्रथाओं को बढ़ावा देने, करदाताओं के हितों की रक्षा करने और राज्य के राजस्व को सुरक्षित रखने के लिए ऐसी कार्रवाई आगे भी और तेज गति से जारी रहेगी।”

शादी डॉट कॉम पर हिंदू पहचान बनाकर पुलवामा का वेटर 10 युवतियों को ठगता रहा

हिसार/कैथल. जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले के रहने वाले 26 साल के मेहराजुद्दीन आजम ने शादी डॉट कॉम पर फर्जी आईडी बनाकर करीब दस युवतियों के साथ फ्रॉड किया। निशांत सहारण के नाम से फर्जी आईडी पर खुद को सेना में मेजर बताया। इस बात का राजफाश उस समय हुआ जब कैथल पुलिस ने तितरम मोड़ पर वाहनों की जांच के दौरान एक कैब को रुकवाया। कैब में बैठे युवक ने खुद को सेना में मेजर बताया। शक होने पर पुलिस ने आई कार्ड मांगा तो नहीं दिखा पाया। आरोपित ने चंडीगढ़ से आर्मी की वर्दी खरीदी थी। जांच में सामने आया कि आरोपित का असली नाम मेहराजुद्दीन आजम है और वह हिसार में एक युवती और उसके परिवार से मिलने जा रहा था। पता चलने पर युवती के परिवार ने आजाद नगर थाना में शिकायत दी। पुलिस जांच के लिए आरोपित आजम को हिसार लेकर आई। यहां अदालत में पेश कर दो दिन के रिमांड पर लिया है। युवक के पकड़े जाने के बाद आर्मी इंटेलीजेंस की टीमें भी सक्रिय हो गई हैं। दो दिन के रिमांड पर आरोपित हिसार के पुलिस प्रवक्ता ने बताया कि आजाद नगर थाना पुलिस ने आरोपित के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज किया है। आरोपित को अदालत में पेश कर दो दिन के रिमांड पर लिया है। आरोपित से पूछताछ जारी है। आर्मी में भर्ती करवाने के नाम पर भी करता था ठगी तीन दिन पहले कैथल पुलिस ने इंचार्ज रवि सैनी के नेतृत्व में तितरम चौक पर नाका लगाया हुआ था। चेकिंग के दौरान पुलिस ने एक ओला कैब गाड़ी को रोका। इसमें सवार युवक ने अपनी पहचान सेना में मेजर के तौर पर बताई और नाम भी निशांत सहारण बताया। उसके बैग से सेना की वर्दी भी मिली। शक होने पर पुलिस ने उससे सख्ती से पूछताछ की तो युवक ने असली नाम आजम बताया। युवक हिसार में एक हिंदू लड़की से मिलने जा रहा था। उससे उसकी शादी की बात चल रही थी। युवती के स्वजन अपनी बेटी से युवक से शादी करवाने की तैयारी भी कर रहे थे। बताया जा रहा है कि वह युवती से लाखों रुपये भी ले चुका था। आरोपित आर्मी में नौकरी लगवाने के नाम पर भी लोगों से ठगी करता था। कैथल पुलिस ने आरोपित को हिसार पुलिस को सौंप दिया था। 120 एकड़ का बताता था जमींदार पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपित जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले के आवनपुर गांव का रहने वाला है। उसने शादी डॉट कॉम पर निशांत सहारण के नाम से आईडी बनाई। सेना की वर्दी पहनकर अपनी फोटो अपलोड की। इसके अलावा खुद को 120 एकड़ का जमींदार बताता था। शादी डॉट कॉम के जरिए उसने हिसार की रहने वाली एक युवती से बातचीत की। कई दिनों तक बात होने के बाद शादी की बातचीत चली। उसी सिलसिले में वह मोहाली से कैब में सवार होकर हिसार आ रहा था। युवती से ले चुका 30 हजार रुपये आजाद नगर थाना में कार्यरत एसआई सुनील कुमार बूरा ने बताया कि जांच में सामने आया कि आरोपित आजम 2021 में कश्मीर से मोहाली के खरड़ एरिया में आया था। दो साल तक उसने यहां पर वेटर का काम किया। फिर वापस अपने गांव लौट गया। 2025 में फिर से खरड़ आया। इस बार उसे काम नहीं मिला तो उसने शादी डॉट कॉम पर फर्जी आईडी बनाकर खुद को सेना का अधिकारी बताया। इसी दौरान उसकी हिसार की रहने वाली एक युवती से बातचीत हुई। उसने युवती से 30 हजार रुपये भी लिए थे। इस संबंध में युवती के परिवार की तरफ से केस दर्ज करवाया गया। युवक को हिसार पुलिस के सुपुर्द किया तितरम मोड़ नाका पर चेकिंग के दौरान एक युवक को पकड़ा था जो स्वयं को सेना में मेजर बता रहा था। युवक ने अपनी झूठी पहचान बताई थी। युवक को हिसार पुलिस को सौंप दिया गया था। आगामी कार्रवाई हिसार पुलिस की तरफ से की जा रही है। – मनप्रीत सिंह सूदन, एसपी कैथल

पंजाबी म्यूजिक के 90 के दशक के स्टार का निधन, इंडस्ट्री में शोक की लहर

चंडीगढ़. पंजाबी म्यूजिक इंडस्ट्री के लिए एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। एक बार फिर पंजाबी म्यूजिक इंडस्ट्री को बड़ा झटका लगा है। 90 के दशक के मशहूर पंजाबी गायक दीपा दोसांझ का निधन हो गया है। उनके निधन की खबर से देश-विदेश में बसे उनके प्रशंसकों और संगीत जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। गायक सुखशिंदर शिंदा ने किया दुख व्यक्त मशहूर पंजाबी गायक, संगीतकार और रिकॉर्ड निर्माता सुखशिंदर शिंदा ने सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर गायत दीपा दोसांझ के निधन पर दुख व्यक्त किया है। उन्होंने पोस्ट शेयर कर लिखा, ''आज पंजाबी संगीत जगत ने एक सच्चा रत्न खो दिया। आपकी आत्मा को शांति मिले 'दीपा दोसांझ' लीजेंड… बहुत दुख लगा दीपा दोसांझ भाजी बारे सुन के।'' सुपरहिट गीत “ढोला वे ढोला” से बने रातों रात स्टार दीपा दोसांझ ने अपनी अलग पहचान वाली आवाज और खास गायकी शैली से ब्रिटिश एशियन संगीत में भी नया मुकाम हासिल किया था। उनका सुपरहिट गीत “ढोला वे ढोला” आज भी हर पंजाबी शादी और सांस्कृतिक कार्यक्रम की शान माना जाता है। इसी गीत ने उन्हें रातों-रात स्टार बना दिया था। उन्होंने अपने दौर के कई बड़े कलाकारों के साथ भी काम किया। संगीत जगत में शोक की लहर दीपा दोसांझ के निधन से पंजाबी म्यूजिक इंडस्ट्री ने एक ऐसा कलाकार खो दिया है, जिसने विदेशों में भी पंजाबी भाषा और संस्कृति का नाम रोशन किया। कई नामी हस्तियों और संगीतकारों ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए इसे अपूरणीय क्षति बताया है।

पनबस और पीआरटीसी के बेड़े में वृद्धि, मुख्यमंत्री मान ने 100 बसों को किया फ्लैग ऑफ

पटियाला. पंजाब में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सोमवार को पेप्सू रोड ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन की 100 नई बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह कार्यक्रम पटियाला में आयोजित किया गया, जहां बड़ी संख्या में लोग और अधिकारी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने रैली स्थल पर पहुंचने से पहले पीआरटीसी मुख्यालय जाकर इन बसों को रवाना किया। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य राज्य के लोगों को बेहतर, सस्ती और सुलभ परिवहन सुविधा प्रदान करना है। नई बसों के शामिल होने से यात्रियों को अधिक सुविधा मिलेगी और दूरदराज के क्षेत्रों में भी आवाजाही आसान होगी। बिजली आपूर्ति को लेकर भी आश्वासन दिया मुख्यमंत्री ने इस मौके पर बिजली आपूर्ति को लेकर भी आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि राज्य के थर्मल प्लांटों में कोयले का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है और आने वाली गर्मियों में बिजली की आपूर्ति निर्बाध जारी रहेगी। मुख्यमंत्री ने राजनीतिक बयान देते हुए विरोधी दलों के नेताओं पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि भले ही कुछ लोग बड़े स्कूलों में पढ़े हों, लेकिन असली पंजाबी संस्कृति गांवों से ही सीखने को मिलती है। उन्होंने कहा कि वे स्वयं गांव से जुड़े हैं और वहीं से उन्होंने अपनी संस्कृति और मूल्यों को सीखा है। जल्द और बसें भी होंगी शामिल सरकार की योजना के अनुसार पनबस के बेड़े में कुल 606 बसें शामिल की जाएंगी। इनमें 387 नई बसें सीधे तौर पर जोड़ी जाएंगी। इसके अलावा किलोमीटर योजना के तहत 19 वोल्वो बसें, 100 वातानुकूलित बसें और 100 साधारण बसें भी शामिल की जाएंगी। परिवहन मंत्री ने कहा कि पीआरटीसी और पनबस के बेड़े में एक हजार से अधिक नई और किलोमीटर योजना वाली बसों को शामिल कर राज्य की परिवहन व्यवस्था को भविष्य की जरूरतों के अनुसार तैयार किया जा रहा है। सरकार का मानना है कि इस पहल से न केवल यात्रियों को सुविधा मिलेगी, बल्कि राज्य में सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा मिलेगा और निजी वाहनों पर निर्भरता भी कम होगी।

पुलिस थाने के सभी कर्मचारियों का अचानक ट्रांसफर, नशे के खिलाफ कार्रवाई में मिली कमी के कारण

बठिंडा. जिले में नशे के खिलाफ पुलिस की ढीली कारगुजारी का मुद्दा एक मीटिंग में स्थानीय निवासियों और गांव की पंचायत ने उठाया, जिस पर सख्त एक्शन लेते हुए डी.आई.जी. जोन बठिंडा हरजीत सिंह ने सरकार के निर्देशों पर थाना सदर के अधीन कोटशमीर पुलिस चौकी का पूरा स्टाफ ट्रांसफर कर दिया। इस दौरान डी.आई.जी. हरजीत सिंह वे तत्काल प्रभाव से कोटशमीर पुलिस चौकी के इंचार्ज सहित 11 मुलाजिमों को मानसा जिले में ट्रांसफर करने के आदेश जारी कर दिए और चौकी में नया स्टाफ नियुक्त करने के लिए एस.एस.पी. को कहा गया। बलवंत गार्गी आर्डिटोरियम में हुई मीटिंग में संगठनों के पदाधिकारियों और चेयरमैनों से आगामी चुनाव की तैयारियों संबंधी फीडबैक लिया, जिसमें बठिंडा के गांव गुलाबगढ़ के सरपंच व पंचायत मैंबर्स ने अपने इलाके में बिक रहे नशे व इससे हो रही नौजवानों की मौत का मुद्दा उठाया। सरपंच लक्खा सिंह ने कहा कि गुलाबगढ़ व आसपास के ग्रामीण इलाकों में नशा सरेआम बिक रहा है। नशे के चलते कई नौजवानों की मौत हो चुकी है। हाल ही में गुलाबगढ़ में ही 2 मौतें हुई है। उन्होंने सदर पुलिस स्टेशन और कोटशमीर चौकी में लिखित शिकायत दर्ज करवाई पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद मीटिंग में डी.आई.जी. से बात की गई और उन्होंने इस मामले में तुरंत प्रभाव से पूरी चौकी में तैनात सभी 11 अधिकारियों व कर्मचारियों का तबादला करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नशे को जड़ से समाप्त करने के लिए लगातार अभियान जारी है, इसके बावजूद पुलिस कर्मी व अधिकारी इसे गंभीरता से नहीं ले रहे हैं, जो चिंता का विषय है व इसे किसी भी सूरत में सहन नहीं किया जा सकता।

पावरकॉम की नई योजना: पंजाब के परिवारों को डायरेक्ट बिजली कनेक्शन की सुविधा

जीरकपुर/चंडीगढ़. अधूरी कॉलोनियों में बुनियादी सुविधाओं से वंचित जीवन जी रहे हजारों परिवारों के लिए राहत की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए पावरकॉम ने राज्य स्तर पर सख्त और स्पष्ट आदेश जारी किए हैं। 30 मार्च 2026 को जारी इन आदेशों में पूरे पंजाब के बिजली अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि जिन कॉलोनियों/सोसायटियों में बिल्डरों ने जरूरी नियमों का पालन नहीं किया, उन मामलों की पहचान करके संबंधित लाइसेंसिंग अथॉरिटीज को आधिकारिक नोटिस भेजे जाएं और आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। सबसे जरूरी बात यह है कि अगर किसी कॉलोनी का लाइसेंस सस्पेंड या कैंसल हो जाता है और उसे खाली घोषित कर दिया जाता है, तो वहां रहने वाले लोग तय प्रोसेस पूरा करने के बाद सीधे पावरकॉम से बिजली कनेक्शन ले सकेंगे। यह आदेश पावरकॉम के चीफ इंजीनियर (कमर्शियल) कार्यालय द्वारा जारी कर पूरे राज्य के इंजीनियर-इन-चीफ और चीफ इंजीनियर (डिस्ट्रिब्यूशन सिस्टम) तक भेजे गए हैं, जिससे स्पष्ट है कि यह कदम किसी एक शहर तक सीमित नहीं बल्कि पूरे पंजाब में लागू होगा। इस कार्रवाई का आधार पीएसईआरसी (PSERC) द्वारा हाल ही में किए गए संशोधन हैं, जिनके तहत सप्लाई कोड-2024 के अनुसार अधूरी कॉलोनियों और डिफॉल्ट करने वाले बिल्डरों के मामलों में सख्ती के निर्देश दिए गए हैं। आदेश के अनुसार, यदि कोई बिल्डर या प्रमोटर आवश्यक एनओसी प्राप्त नहीं करता, बैंक गारंटी जमा नहीं करता या कॉलोनी में बिजली से संबंधित बुनियादी ढांचा जैसे ट्रांसफॉर्मर, केबल और वितरण प्रणाली पूरी नहीं करता, तो उसका लाइसेंस सस्पेंड या रद्द किया जा सकता है। पावरकॉम ने आदेश दिए हैं कि ऐसे मामलों को दस्तावेज़ी रूप से चिन्हित कर पुड्डा, गमाडा, पीडीए और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग जैसे विभागों को नोटिस भेजे जाएं। यह प्रक्रिया कॉलोनी को खाली घोषित करने के लिए जरूरी शर्त होगी। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि संबंधित सरकारी प्राधिकरण तीन महीनों के भीतर बिल्डर के खिलाफ कार्रवाई नहीं करता, तो पावरकॉम खुद अदालत का रुख करेगा और आवश्यक आदेश लेकर आगे कार्रवाई करेगा। इससे पहली बार बिजली विभाग सिर्फ सप्लाई एजेंसी से आगे बढ़कर सक्रिय भूमिका निभाता नजर आएगा। सीधे बिजली कनेक्शन दिए जाएंगे – सबसे ज़रूरी बात यह है कि अगर किसी कॉलोनी का लाइसेंस सस्पेंड या कैंसल होता है और उसे खाली घोषित कर दिया जाता है, तो वहां रहने वाले लोग तय प्रोसेस पूरा करने के बाद सीधे पावरकॉम से बिजली कनेक्शन ले सकेंगे, भले ही बिल्डर ने प्रोजेक्ट अधूरा छोड़ दिया हो। हालांकि, इसके लिए कॉलोनी का ऑफिशियली खाली घोषित होना ज़रूरी होगा और इस बारे में नॉर्म्स तैयार किए जा रहे हैं, जिन्हें रेगुलेटरी अप्रूवल के बाद लागू किया जाएगा। अब बिल्डर की लापरवाही की वजह से लोगों को अंधेरे में नहीं रहना पड़ेगा। ऑर्डर में यह भी कहा गया है कि ऐसे प्रोजेक्ट्स में अधूरे बिजली सिस्टम को पूरा करने का अनुमानित खर्च पावरकॉम तैयार करके संबंधित डिपार्टमेंट्स के सामने रखेगा। सर्विस कनेक्शन चार्ज के तौर पर भी कुछ खर्च वसूल यह भी इशारा किया गया है कि इस प्रोसेस में कुछ खर्च ऐसे प्रोजेक्ट्स में रहने वालों से सर्विस कनेक्शन चार्ज के तौर पर भी वसूला जा सकता है, जिससे यह साफ है कि राहत के साथ-साथ लोगों पर कुछ फाइनेंशियल जिम्मेदारी भी आ सकती है। हाल के बिजली संकट और ज़ीरकपुर और आसपास के इलाकों में अधूरी कॉलोनियों के मामले में इस ऑर्डर को काफी अहम माना जा रहा है। हालांकि, यह भी उतना ही साफ है कि डायरेक्ट बिजली कनेक्शन का रास्ता तभी खुलेगा जब नोटिस जारी करने से लेकर लाइसेंस प्रोसेस करने और छोड़ने की घोषणा करने तक का पूरा प्रोसेस कानूनी और एडमिनिस्ट्रेटिव तरीके से पूरा हो जाएगा। इस पूरे ऑर्डर का मैसेज यह है कि अगर बिल्डर अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाता है, तो बिजली सप्लाई की स्थिति स्थिर नहीं रहेगी। तय प्रोसेस के जरिए एडमिनिस्ट्रेटिव मशीनरी को एक्टिवेट करके, आखिरकार निवासियों को बिजली देने का रास्ता तैयार किया जा रहा है, हालांकि सब प्रोसीजरली और नियमों के दायरे में ही लागू किया जाएगा। विभाग को ऐसे आदेश क्यों जारी करने पड़े पंजाब में कई कॉलोनियों/सोसायटियों में बिल्डरों ने बिजली का बुनियादी ढांचा पूरा किए बिना ही लोगों को बसाया, जिससे निवासी आवश्यक सुविधाओं से वंचित रह गए। कई बड़े प्रोजेक्ट्स में बिल्डरों ने सिंगल पॉइंट मीटर लेकर निवासियों से प्रीपेड मीटर के जरिए पैसे वसूले, लेकिन वह राशि पावरकॉम को जमा नहीं करवाई। इसके कारण जब बिल्डरों पर लाखों रुपये बकाया हो गए तो बिजली काट दी गई, और पूरा भुगतान करने के बावजूद निवासी अंधेरे में रहने को मजबूर हो गए। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए सरकार के निर्देशों और नियमों के तहत यह सख्त आदेश जारी किए गए हैं।

अदालत ने चोरी के आरोप में फंसे जज को जमानत देने से किया मना, कानून की जीत

चंडीगढ़  पंजाब की एक अदालत में हाल ही में एक अनोखा मामला पहुंचा। यहां एक जज पर लगे चोरी के आरोप पर सुनवाई करते समय अदालत भी हैरान रह गई। जज पर अन्य लोगों के साथ मिलकर साथी जज के घर से चोरी के इल्जाम लगे हैं, वह भी तब जब जज की लाश अस्पताल में पड़ी थी। इस मामले पर सुनवाई करते हुए हुए पंजाब के पटियाला की एक अदालत ने बीते बुधवार को कहा है कि कानून से ऊपर कोई नहीं हो सकता और जज की अग्रिम जमानत की याचिका भी खारिज कर दी। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश हरिंदर सिद्धू ने अपने आदेश में कहा कि एक कार्यरत न्यायिक अधिकारी पर लगे आरोप बेहद गंभीर हैं और यह एक पब्लिक सर्वेंट, खासकर न्यायिक अधिकारी से अपेक्षित ईमानदारी पर सवाल उठाते हैं। यह मामला 1 अगस्त 2025 की रात से जुड़ा है, जब जज कंवलजीत सिंह का पटियाला के अमर अस्पताल में निधन हो गया था। आरोप हैं कि सिविल जज (जूनियर डिविजन) बिक्रमदीप सिंह ने मृतक के घर की घरेलू सहायक अमरजोत कौर उर्फ पिंकी, सरकारी अधिकारी गौरव गोयल और एक अन्य अज्ञात व्यक्ति के साथ मिलकर साजिश रची। कैसे हुई चोरी? जानकारी के मुताबिक जब जज का शव अस्पताल में था, तब यह लोग विकास कॉलोनी स्थित जज के घर में घुसे और सोना, जेवर और नकदी निकाल ली। सीसीटीवी फुटेज में आरोपी जज और उनके साथी घर में आते-जाते और बैग और डिब्बे ले जाते दिखे हैं। इसके बाद डॉ. भूपिंदर सिंह विर्क, जो पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला में लॉ प्रोफेसर हैं, की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की गई थी। क्या बोला कोर्ट? कोर्ट ने कहा कि सीसीटीवी फुटेज पहली नजर में आरोपी की मौजूदगी और भूमिका को साबित करती है। कोर्ट ने यह भी कहा कि फुटेज में आरोपियों की बॉडी लैंग्वेज और सामान ले जाने का तरीका साफ दिखाता है कि यह काम गुपचुप तरीके से किया गया। कोर्ट ने बचाव पक्ष की उस दलील को भी खारिज कर दिया जिसमें व्हाट्सऐप चैट और कॉल के जरिए अनुमति मिलने की बात कही गई थी। अदालत ने पाया कि ये बातचीत कथित चोरी के बाद हुई थी। फुटेज रात करीब 9:50 बजे तक की है, जबकि पहला मैसेज 10:17 बजे का बताया गया। कोर्ट ने कहा कि इन संदेशों में सिर्फ शोक जताया गया है, किसी तरह की अनुमति का संकेत नहीं मिलता। कानून से ऊपर कोई नहीं कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि कोई भी व्यक्ति, चाहे उसका पद कुछ भी हो, कानून से ऊपर नहीं है। सुप्रीम कोर्ट के दिल्ली ज्यूडिशियल सर्विस एसोसिएशन बनाम गुजरात राज्य (1991) मामले का हवाला देते हुए अदालत ने कहा कि यह दिशानिर्देश सिर्फ मनमानी गिरफ्तारी से बचाते हैं, पूरी छूट नहीं देते। अदालत ने कहा कि इस मामले में कस्टोडियल इंटरोगेशन जरूरी है, क्योंकि अभी भी काफी सामान बरामद नहीं हुआ है और पूरी साजिश का खुलासा होना बाकी है। कोर्ट ने कहा कि गंभीर मामलों में अग्रिम जमानत जांच में बाधा नहीं बननी चाहिए।

प्रमोटेड छात्रों की जानकारी ई-पंजाब पोर्टल पर फीड करने के लिए स्कूलों को निर्देश

लुधियाना. डायरेक्टर जनरल स्कूल शिक्षा (डी.जी.एस.ई.) सह स्टेट प्रोजेक्ट डायरेक्टर, पंजाब की ओर से ई-पंजाब पोर्टल (एम.आई.एस. 2.0) पर प्रमोट किए गए विद्यार्थियों के डाटा को वैरिफाई करने के संबंध में निर्देश जारी किए गए हैं। विभाग ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए है कि सभी स्कूलों में विद्यार्थियों के रिकॉर्ड की बारीकी से जांच करें। विभाग द्वारा पोर्टल पर विद्यार्थियों का डाटा अगली क्लास में प्रमोट कर दिया गया है। अब सभी स्कूलों को प्रमोट किए गए विद्यार्थियों की क्लास और सैक्शन की जांच करनी होगी और जरूरत के अनुसार सुधार (एडिट) करवाना होगा। यदि किसी विद्यार्थी को गलती से प्रमोट कर दिया गया है, तो उसे उसकी सही क्लास में दर्ज करना होगा। ट्रासफर सर्टीफिकेट और नए दाखिले विभाग द्वारा जारी पत्र में सभी स्कूलों को निर्देश जारी किए गए हैं कि अकादमिक साल 2025-26 की सबसे बड़ी क्लास के विद्यार्थियों को 'स्टूडेंट पर्सनल डिटेल्स' शीट में 'इनएक्टिव' और 'पास आऊट' दिखाया जाए। इन विद्यार्थियों को 'टी.सी. जैनरेशन' स्क्रीन से ट्रांसफर सर्टीफिकेट (टी.सी.) जारी किया जाए। इसके अलावा, साल 2026-27 के लिए सभी छोटी क्लास (लोअर क्लास) के सैक्शन निर्धारित किए जाएं और जरूरत पड़ने पर नए सेक्शन भी बनाए जा सकते हैं। गाइडलाइन्स के अनुसार नए दाखिले नए दाखिले के लिए आने वाले विद्यार्थियों को विभाग की गाइडलाइन्स के अनुसार सही क्लास में दर्ज करने को कहा गया है। विभाग के ध्यान में आया है कि कई स्कूलों के यू-डाइस पोर्टल और ई-पंजाब पोर्टल पर लोअर और हायर क्लास की जानकारी में अंतर (डिस्क्रेपैंसी) है। उदाहरण के तौर पर, कुछ स्कूलों की लोअर क्लास नर्सरी है, जबकि ई-पंजाब पोर्टल पर एल.के.जी. दर्ज है। स्कूल ऐसी विसंगतियों को ध्यान से वैरिफाई करने के बाद ही दर्ज करना होगा। सभी स्कूल प्रमुखों को 6 अप्रैल तक सारा काम मुकम्मल करने को कहा गया है।