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भारी ट्रैफिक जाम: जालंधर-पठानकोट रोड पर वाहनों की लंबी लाइनें

जालंधर. जालंधर से लुधियाना जाने वाले वाहन चालकों के लिए अहम सूचना है। जालंधर–लुधियाना हाईवे पर ईस्टवुड से फगवाड़ा की ओर भारी ट्रैफिक देखने को मिल रहा है, जिसके चलते वाहनों की रफ्तार काफी धीमी हो गई है। मिली जानकारी के अनुसार, इस रूट पर ट्रैफिक का दबाव अधिक होने के कारण जगह-जगह लंबा जाम लग रहा है। खासतौर पर ईस्टवुड चौक से लेकर फगवाड़ा की ओर जाने वाले मार्ग पर वाहन रेंग-रेंग कर चल रहे हैं। हालांकि, ट्रैफिक जाम की वजह फिलहाल स्पष्ट नहीं हो पाई है। प्रशासन और ट्रैफिक पुलिस स्थिति को संभालने में जुटी हुई है। वाहन चालकों को सलाह दी गई है कि वे जालंधर से लुधियाना की ओर निकलते समय सावधानी बरतें, संभव हो तो वैकल्पिक मार्ग का उपयोग करें और जल्दबाजी से बचें। इसके पहले जालंधर-पठानकोट रोड पर भारी जाम लगा था। बताया जा रहा है कि किशनगढ़ थाने के अधीन आते गांव कुराड़ी में एक व्यक्ति छप्पर में गिर गया था। इस संबंध में परिवार द्वारा पुलिस को जानकारी दी गई पर पुलिस छानबीन पर ऐसे ही वापिस लौट गई। इसके बाद जब उन्होंने खुद जे.सी.बी. मंगवा छप्पर की छानबीन की तो युवक का शव मिला था। इसके बाद गुस्से में आए परिजनों द्वारा युवक का शव रख कर प्रदर्शन किया। सड़क जाम होने के कारण वाहनों की लंबी कतारें लगी और लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। बता दें कि इससे पहले भी इस छप्पर में 2 लोग गिर चुके हैं। 

बारिश के बाद डेंगू फैलाव, लुधियाना में अब तक 100 से ज्यादा संक्रमित

लुधियाना. महानगर में समय से पहले डेंगू का खतरा बना हुआ है जो बारिश से और बढ़ गया है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार मौसम में बदलाव के साथ-साथ ही मच्छरों का प्रकोप साफ देखने में नजर आ रहा था। शहर के हर हिस्से में मच्छरों की संख्या काफी तेजी से बढ़ रही थी अब इसमें और वृद्धि हो सकती है क्योंकि हर बारिश के बाद मच्छरों की संख्या बढ़ती है। अस्पतालों की रिपोर्ट की मानें तो डेंगू के मरीजों की संख्या 100 से पर हो चुकी है जबकि स्वास्थ्य विभाग 83 मरीजों को क्रॉस चैकिंग के नाम पर नैगेटिव करार दे चुका है और एक मरीज को अब तक पॉजिटिव बताया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार हर अस्पताल अपने मानकों के हिसाब से डेंगू का टैस्ट करता है और फिर उसका उपचार जिससे मरीज ठीक होकर घर चला जाता है परंतु विलंब से भेजी गई सैंपल की रिपोर्ट्स जो स्वास्थ्य विभाग को क्रॉस चैकिंग के लिए भेजी जाती है। समय बीतने के साथ और लैब स्पैसिफिक सैंपल न होने के कारण बहुत बार मरीजों की रिपोर्ट फॉल्स नैगेटिव आ जाती है। उन्होंने बताया कि मरीज के ब्लड सैंपल्स को निर्धारित तापमान पर रखना आवश्यक है अगर ऐसा न किया जाए तो टैस्ट के नतीजे बदल सकते हैं । अब देखने वाली बात यह है कि क्या स्वास्थ्य विभाग सैंपल के रखरखाव में निर्धारित मापदंडों को पूरा करता है या नहीं। डेंगू की रोकथाम के लिए तैयारी पूरी नहीं स्वास्थ्य विभाग ने अब तक 83 मरीजों की क्रॉस चैकिंग के नाम पर रिपोर्ट तैयार की है, परंतु हर अस्पताल से स्वास्थ्य विभाग को रिपोर्ट्स नहीं भेजी जा रही जिसके लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से अस्पतालों को कोई पत्र जारी नहीं किया गया है और न ही अस्पतालों के प्रतिनिधियों से कोई मीटिंग की गई है कि व हर संदिग्ध और पॉजिटिव डेंगू के मरीजों की रिपोर्ट उसी दिन स्वास्थ्य विभाग को भेज दें। अभी तक स्वास्थ्य विभाग द्वारा स्प्रे करने के लिए दवाइयां का स्टॉक मंगवाया गया है या नहीं फोकल सप्रे और डेंगू के लारवा की जांच के लिए टीमे गठित की गई है या नहीं यहां तक की डेंगू के मच्छर का लारवा खाने वाली गैंबुजिया मछली के लिए बनाए गए छोटे से तालाब में मछलियां रखी जा रही है या नहीं क्योंकि वहां पर मछलियों की जगह कबाड़ पड़ा हुआ दिखाई देता है। नगर निगम से तालमेल नहीं मच्छरों से बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा इस वर्ष नगर निगम से कोई तालमेल नहीं किया गया है ताकि होगी का शैड्यूल बनाने के लिए कोई परस्पर सहमति बनाई जा सके। विशेषज्ञों का कहना की भले ही अभी मरीज की संख्या इतनी नहीं है परंतु लापरवाही के कारण मरीजों की संख्या एकाएक बढ़ सकती है। विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि बेमौसमी बारिश से डेंगू का प्रकोप समय से पहले शुरू हो सकता है।

पंजाब में शराब ठेकेदारों को राहत, लाइसेंस फीस में 15% तक की कटौती

जालंधर/चंडीगढ़   पंजाब में आबकारी विभाग द्वारा ग्रुपों की नीलामी प्रक्रिया के बावजूद अभी भी 10 एक्साइज (आबकारी) ग्रुप अलॉट होने से रह गए हैं। महंगे रेट और कम मुनाफे के कारण ठेकेदार इन ग्रुपों को खरीदने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं। इस स्थिति को देखते हुए आबकारी विभाग ने ठेकेदारों को आकर्षित करने के लिए लाइसेंस फीस में कुल 15 प्रतिशत तक की कटौती कर दी है, ताकि लंबित ग्रुपों को जल्द से जल्द अलॉट किया जा सके। आवेदन करने की सीमा तय ठेकेदारों ने बताया कि विभाग ने अब 4 अप्रैल को दोपहर 4 बजे तक ई-टैंडर के माध्यम से आवेदन करने की अंतिम समय सीमा तय की है। इसके तहत न्यू चंडीगढ़, भारतगढ़ (रोपड़), अमृतसर सिटी सैंटर, टांडा (होशियारपुर-2), दसूया (होशियारपुर-2), बी.एम.सी. चौक (जालंधर ईस्ट), फगवाड़ा-2, बस स्टैंड (पठानकोट) और फिरोजपुर कैंट सहित कई प्रमुख क्षेत्र अभी भी लंबित ग्रुपों में शामिल हैं, जिन्हें विभाग जल्द अलॉट करना चाहता है। ठेकेदारों का कहना है कि मौजूदा वित्तीय वर्ष में उन्हें भारी नुकसान का सामना करना पड़ा है, जिसके चलते वे नए ग्रुप लेने से हिचकिचा रहे हैं।  उनका यह भी मानना है कि यदि अंग्रेजी शराब की बिक्री और वितरण पर सरकार का नियंत्रण बढ़ाया जाए, तो बाजार में चल रही अस्वस्थ प्रतिस्पर्धा को खत्म किया जा सकता है और कारोबार में स्थिरता लाई जा सकती है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि नीतियों में और सुधार किए जाएं, ताकि ठेकेदारों का भरोसा बहाल हो सके और आबकारी विभाग को भी राजस्व का नुकसान न उठाना पड़े।  …तो  राज्य के राजस्व पर पड़ सकता है नकारात्मक प्रभाव  फिलहाल विभाग द्वारा दी गई रियायतों के बावजूद यह देखना बाकी है कि 4 अप्रैल तक इन लंबित ग्रुपों के लिए कितने आवेदन आते हैं और स्थिति कितनी सुधरती है। इसके अलावा आबकारी विभाग के अधिकारियों का मानना है कि लाइसैंस फीस में की गई 15 प्रतिशत की कटौती से ठेकेदारों को कुछ राहत मिलेगी और ई-टैंडर प्रक्रिया में भागीदारी बढ़ने की उम्मीद है। विभाग लगातार स्थिति की समीक्षा कर रहा है और जरूरत पड़ने पर आगे और राहत देने पर भी विचार किया जा सकता है, ताकि सभी ग्रुप समय पर अलॉट हो सकें और सरकार के राजस्व लक्ष्य पूरे किए जा सकें।  विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो इससे राज्य के राजस्व पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे में सरकार के लिए जरूरी हो जाता है कि वह बाजार की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए संतुलित नीति बनाए।  

गैर-हाजिर अध्यापकों पर नोटिस जारी, पंजाब सरकार की सख्त कार्रवाई की तैयारी

लुधियाना. नगर निगम के संयुक्त कमिश्नर-कम-सिटी सैंसस ऑफिसर ने जनगणना (सैंसस) के काम में लापरवाही बरतने के आरोप में 3 अध्यापकों को 'कारण बताओ नोटिस' जारी किया है। ये कर्मचारी 2 अप्रैल को रखी गई अनिवार्य फील्ड ट्रेनिंग से बिना किसी सूचना के गायब पाए गए थे। सैंसस ऑफिसर कार्यालय द्वारा जारी पत्र के अनुसार जनगणना 2027 के पहले चरण (हाऊस-लिस्टिंग और हाऊसिंग सैंसस) के लिए इन कर्मचारियों की ड्यूटी बतौर 'फील्ड ट्रेनर' लगाई गई थी। इन्हें 2, 3 और 4 अप्रैल को माता रानी चौक के पास स्थित नगर निगम जोन-ए के मीटिंग हॉल में ट्रेनिंग के लिए उपस्थित होना था। ड्यूटी से गैर-हाजिर रहने पर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए इनके खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रस्ताव रखा है। जिला शिक्षा अधिकारी (स) ने संबंधित स्कूलों को ये नोटिस तुरंत डिलीवर करने के निर्देश जारी कर दिए हैं। स्टाफ की कमी और मल्टी-टास्किंग का बोझ इस कार्रवाई ने सरकारी स्कूलों की उस कड़वी सच्चाई को उजागर कर दिया है जिससे विभाग आंखें मूंद कर बैठा है। जिले ही नहीं बल्कि पंजाब भर के सरकारी स्कूल पिछले लंबे समय से अध्यापकों की भारी कमी से जूझ रहे हैं। स्कूलों में पहले से ही स्टाफ कम है और जो अध्यापक तैनात हैं, उन पर काम का बोझ अपनी क्षमता से कई गुना ज्यादा है। एक तरफ जहां स्कूलों में नया सैशन शुरू हो चुका है और नए दाखिले की प्रक्रिया जोरों पर है, वहीं दूसरी ओर अध्यापकों को गैर-अकादमिक कामों में उलझाया जा रहा है। तिहरे दबाव के बीच काम कर रहे अध्यापक वर्तमान में अध्यापक दोहरे नहीं बल्कि तिहरे दबाव के बीच काम कर रहे हैं। बड़ी संख्या में अध्यापक बोर्ड परीक्षाओं की मार्किंग ड्यूटी पर लगे हुए हैं। दूसरी तरफ, विभाग द्वारा 'मिशन समर्थ' के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए अध्यापकों पर अलग से दबाव बनाया जा रहा है। अधिकारियों द्वारा रोजाना रिपोर्ट मांगी जाती है जिससे अध्यापकों का पूरा ध्यान केवल डेटा जुटाने में ही निकल जाता है। ऐसे में जनगणना जैसे कार्यों के लिए स्कूलों से अध्यापकों को खींचना शिक्षा व्यवस्था के लिए घातक साबित हो रहा है। 

डिफाल्टरों के लिए राहत पैकेज: पंजाब में इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट ने ब्याज-पेनल्टी में छूट की घोषणा

लुधियाना. सरकार द्वारा इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट के डिफाल्टरों को एक बार फिर राहत दी गई है, जिसके तहत उन्हें बकाया किस्तों व एन.सी.एफ. पर ब्याज-पेनल्टी की छूट मिलेगी। इस संबंध में लोकल बॉडीज विभाग द्वारा नोटिफिकेशन के मुताबिक पिछले साल अप्रैल में वन टाइम सेटलमेंट पॉलिसी जारी की गई थी, जिसमें एक महीने की एक्सटेंशन देने का फैसला किया है। इसकी पुष्टि चेयरमैन तरसेम भिंडर ने की है। उन्होंने बताया कि लोग बकाया किस्तों व एन.सी.एफ. पर ब्याज-पैनल्टी की छूट का लाभ लेने के लिए 30 अप्रैल तक अप्लाई कर सकते हैं। इन लोगों को इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट द्वारा 15 मई तक डिमांड नोटिस जारी किया जाएगा और डिफाल्टरों को एक महीने के भीतर बकाया राशि जमा करवानी होगी। इस तरह लागू की जाएगी वन टाइम सेटलमेंट पॉलिसी – नॉन कंस्ट्रक्शन फीस में 50 फीसदी तक मिलेगी छूट – 15 साल पुराने मामलों में प्रॉपर्टी की रिजर्व प्राइज के 5 फीसदी के हिसाब से तय होगा एन.सी.एफ. – आगे 2 साल के भीतर पूरा करना होगा निर्माण – सीनियर सिटीजन, महिलाओं, सैनिकों व उनके वारिसों को मिलेगी 25 फीसदी की अतिरिक्त छूट – गंभीर बीमारी से पीड़ित अलॉटियों व उनके वारिसों, सरकारी कर्मियों पर भी 2022 की गाइडलाइन के मुताबिक लागू होगा फैसला डेडलाइन खत्म होने पर की जाएगी प्रॉपर्टी जब्त करने की कार्रवाई  सरकार ने साफ कर दिया है कि यह पॉलिसी उस प्रॉपर्टी पर लागू नही होगी, जिसे पहले ही डिफाल्टर कैटेगरी में होने कारण जब्त कर लिया गया है। इसके अलावा जो लोग अब डेडलाइन खत्म होने पर बकाया किश्तें या एन.सी.एफ. जमा करवाने में नाकाम रहते हैं, उनकी प्रॉपर्टी जब्त करने की कार्रवाई की जाएगी। 

‘CM सेहत योजना’ से मरीजों को सहारा: पंजाब में 2300 बीमारियों तक मिल रहा इलाज

चंडीगढ़. मुख्यमंत्री सेहत योजना राज्य में स्वास्थ्य सुरक्षा की मजबूत ढाल बनकर उभर रही है। यह योजना प्रति परिवार 10 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मुहैया करवा रही है, जिससे दिल की बीमारियों, कैंसर और अन्य गंभीर रोगों के इलाज में लोगों को बड़ी राहत मिल रही है। खासतौर पर आपातकालीन स्थितियों में यह योजना समय पर इलाज सुनिश्चित कर आर्थिक बोझ को कम करने में अहम भूमिका निभा रही है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अनुसार योजना के तहत सरकारी और निजी अस्पतालों में 2,300 से अधिक बीमारियों का इलाज कवर किया जा रहा है। अचानक होने वाली गंभीर बीमारियां जैसे हार्ट अटैक, कैंसर और जन्म संबंधी जटिलताएं अक्सर बिना चेतावनी के सामने आती हैं। ऐसे में समय पर इलाज और आर्थिक सुरक्षा दोनों जरूरी हो जाते हैं, जिसे यह योजना पूरा कर रही है। आंकड़ों के मुताबिक, अब तक राज्य में 33 लाख से अधिक परिवार इस योजना से जुड़ चुके हैं। 330 करोड़ रुपये हुए खर्च राज्य स्वास्थ्य एजेंसी के अनुसार 1,98,793 मामलों में मुफ्त इलाज को मंजूरी दी जा चुकी है, जिन पर करीब 330 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। इनमें से 59 करोड़ रुपये से अधिक की राशि अस्पतालों को जारी भी की जा चुकी है। योजना का लाभ बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी वर्गों को मिल रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि गंभीर बीमारियों में देरी जानलेवा साबित हो सकती है। मोहाली जिला अस्पताल की मेडिकल आफिसर डा ईशा अरोड़ा के मुताबिक, अधिकतर मरीज तब अस्पताल पहुंचते हैं जब बीमारी बढ़ चुकी होती है। समय पर जांच और इलाज से बेहतर परिणाम मिल सकते हैं, लेकिन जागरूकता की कमी अभी भी चुनौती बनी हुई है। कैंसर-डायबिटीज और सांस से जुड़ी बीमारी 75 प्रतिशत मौतों के लिए जिम्मेदार विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के आंकड़े भी स्थिति की गंभीरता को दर्शाते हैं। डब्ल्यूएचओ के अनुसार दिल की बीमारी, कैंसर, डायबिटीज और सांस संबंधी रोग दुनिया भर में करीब 75 प्रतिशत मौतों के लिए जिम्मेदार हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी स्थितियों में इलाज में कुछ मिनटों की देरी भी गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है। स्वास्थ्य मंत्री डा. बलबीर सिंह ने कहा कि सरकार का उद्देश्य है कि कोई भी परिवार आर्थिक तंगी के कारण इलाज से वंचित न रहे। उन्होंने बताया कि योजना के तहत अस्पताल नेटवर्क को मजबूत करने और दावों की प्रक्रिया को आसान बनाने पर लगातार काम किया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, इस योजना ने उन परिवारों को बड़ी राहत दी है, जिन्हें पहले इलाज के लिए कर्ज लेना या संपत्ति बेचनी पड़ती थी। भारत में अभी भी करीब 47 प्रतिशत स्वास्थ्य खर्च लोगों को अपनी जेब से करना पड़ता है, ऐसे में यह योजना बड़ी मदद साबित हो रही है। कुल मिलाकर ‘मुख्यमंत्री सेहत योजना’ न केवल इलाज का साधन बन रही है, बल्कि राज्य में स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम भी साबित हो रही है।

एलपीजी संकट के बीच मोगा के किसान का समाधान: बायोगैस से जल रहा चूल्हा, 20,000 में बचाए लाखों रुपये

मोगा  देश भर में एलपीजी संकट के बीच लोग सिलिंडर के लिए लंबी-लंबी कतारों में घंटों खड़े रहने को मजबूर हैं। वहीं मोगा के गांव राजेआना के किसान निर्मल सिंह मौज में हैं। दरअसल, निर्मल सिंह ने साल 2011 में मात्र 20 हजार रुपये की लागत से अपने घर में बायोगैस प्लांट लगाया था। इस प्लांट से निकलने वाली गैस से ही उनके घर का खाना तैयार होता है। आज जब एलपीजी के लिए लोग परेशान हैं, वहीं निर्मल सिंह को उनके इस बायोगैस प्लांट ने बड़ी राहत दी है। उन्हें न तो लंबी लाइनों में लगना पड़ रहा है और न ही महंगे दामों पर गैस सिलिंडर खरीदना पड़ रहा है। किसान के लिए बायोगैस एक वरदान साबित हुआ। 25 गज में 20 हजार की कीमत से लगाया प्लांट निर्मल सिंह ने बताया कि उन्होंने घर में दूध के लिए पशु पाले हुए हैं, जिनसे निकलने वाले गोबर का सही उपयोग करने के उद्देश्य से उन्होंने अपने घर पर बायोगैस प्लांट लगाया। यह प्लांट लगभग 25 गज क्षेत्र में करीब 20 हजार रुपये की लागत से तैयार किया गया था। उन्होंने कहा कि शुरुआत में उन्हें इस बायोगैस प्लांट का खास फायदा समझ नहीं आया, लेकिन आज जब देश में LPG को लेकर संकट है तब उन्हें इस बायोगैस का असली महत्व समझ आया।  निर्मल सिंह ने कहा कि उनके घर में तो जैसे अपनी ही गैस एजेंसी खुली हुई है, इसलिए उन्हें कभी लाइन में लगने की जरूरत नहीं पड़ी। पिछले 15 साल में उन्होंने करीब 1.5 लाख रुपये की बचत की है, वह भी बिना किसी अतिरिक्त खर्च के। उन्होंने बताया कि इस प्लांट को चलाने में कोई खास मेहनत नहीं लगती। रोजाना केवल दो टोकरी गोबर को पानी के साथ मिलाकर प्लांट में डालना होता है। सुबह यह प्रक्रिया करने के बाद शाम तक गैस तैयार हो जाती है। इस गैस से उनके 5 सदस्यों वाले परिवार का खाना आराम से बन जाता है।  पूरी तरह सुरक्षित है बायोगैस निर्मल सिंह ने बताया कि बायोगैस पूरी तरह सुरक्षित है और इसमें गैस लीकेज से आग लगने का कोई खतरा नहीं होता। उन्होंने कहा कि पंजाब में ज्यादातर किसानों के पास पशु होते हैं, इसलिए सभी किसानों को इस तकनीक का लाभ उठाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बायोगैस अपनाने वाले किसानों पर एलपीजी संकट का कोई असर नहीं पड़ेगा। कम खर्च, कम मेहनत और अधिक लाभ, यही बायोगैस की सबसे बड़ी खासियत है। आधुनिक दौर में यह पुरानी तकनीक किसानों के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकती है। 

मावां-धीयां सत्कार योजना: अप्रैल से महिलाएं उठाएंगी लाभ, सरकार ने जारी की अधिसूचना, पंजीकरण निशुल्क

चंडीगढ़  पंजाब सरकार ने मुख्यमंत्री मावां-धीयां सत्कार योजना की अधिसूचना जारी कर दी है। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के दिन बजट पेश करते समय वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने इस महत्वाकांक्षी योजना की घोषणा की थी। अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि योजना का लाभ महिलाओं को 2 अप्रैल से प्रभावी माना जाएगा। पंजीकरण सेवा केंद्रों पर निःशुल्क होगा।  मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि यह आप सरकार की गारंटी थी, जिसे पूरा कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि 18 वर्ष से अधिक आयु की सभी महिलाओं (सरकारी कर्मचारियों, पूर्व विधायकों, सांसदों तथा पेंशनभोगियों को छोड़कर) को इस योजना का लाभ मिलेगा। योजना के तहत सामान्य वर्ग की महिलाओं को 1,100 रुपये प्रति माह और अनुसूचित जाति (एससी) वर्ग की महिलाओं को 1,500 रुपये प्रति माह की वित्तीय सहायता दी जाएगी। सीएम मान ने कहा कि यह एक प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) योजना है, इसलिए राशि सीधे महिलाओं के बैंक खातों में भेजी जाएगी। उन्होंने अपील की कि जिन महिलाओं के बैंक खाते नहीं हैं, वे जल्द से जल्द खाता खुलवाएं। सीएम ने दावा किया कि प्रदेश की करीब 97 प्रतिशत महिलाएं (लगभग 1.10 करोड़) इस योजना के दायरे में आएंगी। क्या है यह योजना? पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर 'मुख्यमंत्री मावां धीयां सत्कार योजना' (मुख्यमंत्री मां-बेटी सत्कार योजना) की घोषणा की थी। इसके तहत 18 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं को प्रतिमाह 1,000 रुपये, जबकि अनुसूचित जाति की महिलाओं को 1,500 रुपये मिलेंगे। इस महत्वकांक्षी योजना के लिए 9,300 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इस योजना का उद्देश्य महिलाओं को वित्तीय रूप से सशक्त बनाना है। किन्हें नहीं मिलेगा इसका लाभ? बता दें कि 'मुख्यमंत्री मावां धीयां सत्कार योजना' (मुख्यमंत्री मां-बेटी सत्कार योजना) में केवल वर्तमान या पूर्व सरकारी कर्मचारी, पूर्व और वर्तमान सांसद/विधायक और आयकर दाताओं को इससे बाहर रखा गया है। इसके अलावा, 18 वर्ष से अधिक आयु की सभी महिलाओं इस योजना का लाभ ले सकती हैं। पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने दावा किया है कि पंजाब की लगभग 97 प्रतिशत वयस्क महिलाएं इसके दायरे में आएंगी। कैसे करें आवेदन? इस योजना के लिए 13 अप्रैल से रजिस्ट्रेशन शुरू होगा। पंजाब सरकार ने इस योजना के लिए आवेदन प्रक्रिया को काफी सरल और पारदर्शी बनाने का लक्ष्य रखा है। इस योजना के लिए किन-किन माध्यमों से आवेदन कर सकते हैं। आइए जानते हैं। कौन-कौन से डॉक्यूमेंट की पड़ेगी जरूरत? 'मुख्यमंत्री मावां धीयां सत्कार योजना' के लिए रजिस्ट्रेशन करने से पहले आपके पास पंजाब का निवास प्रमाण पत्र, आधार कार्ड, बैंक पासबुक, मोबाइल नंबर, पासपोर्ट साइज फोटो, आयु प्रमाण पत्र, इनकम सर्टिफिकेट और राशन कार्ड जैसे जरूरी डॉक्यूमेंट की जरूरत पड़ सकती है।   महिलाओं की आर्थिक भलाई पर जोर सरकार ने 'मुख्यमंत्री महिला सशक्तिकरण योजना' को लागू करने के लिए एक नोटिफिकेशन जारी किया है। 2 अप्रैल के नोटिफिकेशन के अनुसार, मौजूदा सोशल सिक्योरिटी पेंशन पाने वाले भी इस स्कीम के तहत उन्हें पहले से मिल रही सोशल सिक्योरिटी पेंशन के अलावा पूरे फाइनेंशियल फायदे पाने के हकदार होंगे। नोटिफिकेशन में कहा गया है कि इस स्कीम का मकसद पूरे राज्य में महिलाओं की फाइनेंशियल सिक्योरिटी और आजादी को मजबूत करना, घरेलू भलाई में सुधार करना, घरेलू फाइनेंशियल फैसले लेने में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना और पूरे पंजाब में जेंडर इक्विटी को बढ़ावा देना है। सभी पात्र महिलाओं की उम्र 18 साल या उससे ज्यादा होनी चाहिए और उनके पास वैलिड आधार और वोटर आईडी कार्ड होने चाहिए, साथ ही वे पंजाब के रजिस्टर्ड रेजिडेंट वोटर होने चाहिए। इन लोगों को नहीं मिलेगा फायदा     पंजाब सरकार, या केंद्र सरकार, या देश के किसी दूसरे राज्य या केंद्र शासित प्रदेश की सरकार की रेगुलर या रिटायर्ड कर्मचारी।     राज्य या केंद्र सरकार के तहत बने किसी भी पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग, स्टैच्युटरी बोर्ड, कॉर्पोरेशन, कमीशन, कमेटी, डायरेक्टरेट, कोऑपरेटिव इंस्टीट्यूशन, या ट्रिब्यूनल से पेंशन पाने और पाने वाली रेगुलर या रिटायर्ड कर्मचारी।     जिन महिलाओं ने पिछले फाइनेंशियल ईयर में इनकम टैक्स दिया है, मौजूदा या पूर्व मंत्री, सांसद या विधायक और मौजूदा मंत्री, सांसद या विधायक के पति/पत्नी को भी बाहर रखा जाएगा। महिला बाल विकास विभाग लागू करेगा स्कीम नोटिफिकेशन में कहा गया है कि फाइनेंशियल फायदे लाभार्थियों को हाई-लेवल इम्प्लीमेंटेशन कमिटी द्वारा समय-समय पर तय किए गए शेड्यूल और फ्रीक्वेंसी के अनुसार जारी किए जाएंगे। फाइनेंशियल मदद डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के जरिए सीधे लाभार्थियों के आधार-लिंक्ड बैंक अकाउंट में ट्रांसफर की जाएगी। इसमें कहा गया है कि पैसे बांटने के तरीके में अगर कोई बदलाव या मॉडिफिकेशन होता है, तो वह मुख्यमंत्री की मंजूरी से किया जा सकता है। स्कीम के लिए रजिस्ट्रेशन सभी तय सेंटर पर फ्री होगा, और किसी भी लाभार्थी से कोई फीस नहीं ली जाएगी। यह स्कीम सोशल सिक्योरिटी और महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा लागू की जाएगी।

पंजाब में BJP कार्यालय धमाका: अंतरराष्ट्रीय साजिश का पर्दाफाश, 5 आरोपी पकड़े गए

पंजाब पंजाब के चंडीगढ़ सेक्टर-37 स्थित में भाजपा मुख्यालय में हुए ब्लास्ट केस को पुलिस ने सुलझा लिया है। पंजाब पुलिस की काउंटर इंटेलिजेंस शाखा ने चंडीगढ़ पुलिस के साथ संयुक्त अभियान में इस घटना में शामिल पांच लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। हमले में शामिल दो मुख्य हमलावरों की पहचान कर ली गई है। इनके कब्जे से एक हैंड ग्रेनेड, .30 बोर जिगाना पिस्टल और जिंदा कारतूस बरामद किए गए हैं। पंजाब के डीजीपी गौरव यादव ने शनिवार को चंडीगढ़ में बताया कि प्रारंभिक जांच में इस पूरे मॉड्यूल के पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई से जुड़े होने के पुख्ता संकेत मिले हैं। यह नेटवर्क विदेश में बैठे हैंडलर्स के इशारे पर काम कर रहा था, जिनकी लोकेशन पुर्तगाल और जर्मनी में पाई गई है। पुलिस ने बताया कि इसमें कई अलग-अलग मॉड्यूल और उप-मॉड्यूल का इस्तेमाल किया गया था। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान पंजाब के नवांशहर के गांव माजरी निवासी बलविंदर लाल उर्फ शामी, गांव भरापुर का जसवीर सिंह उर्फ जस्सी, गांव सुजावलपुर निवासी चरणजीत सिंह उर्फ चन्नी, शिमला के गांव थाना निवासी रूबल चौहान और धूरी निवासी मंदीप उर्फ अभिजोत शर्मा ( संगरूर) के रूप में हुई है। संगठित नेटवर्क ने अंजाम दिया धमाका डीजीपी गौरव यादव ने बताया कि यह एक संगठित नेटवर्क था, जिसमें अलग-अलग स्तर पर काम करने वाले सब-मॉड्यूल और कटआउट शामिल थे। इनका काम हथियारों की सप्लाई, ट्रांसपोर्ट और हमले को अंजाम देने तक फैला हुआ था। उन्होंने बताया कि हमले में शामिल दो मुख्य आरोपियों की भी पहचान कर ली गई है और उनकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी है। एसएसओसी (स्टेट स्पेशल ऑपरेशन्स सेल) के एआईजी दीपक पारेख ने बताया कि जांच में सामने आया है कि गिरफ्तार आरोपियों ने हथियारों और ग्रेनेड की एक खेप को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। यह खेप कई हाथों से गुजरते हुए आखिरकार हमले को अंजाम देने वाले आरोपितों तक पहुंचाई गई। इस कार्रवाई ने न केवल चंडीगढ़ हमले की गुत्थी सुलझाई है, बल्कि आने वाले समय में होने वाली कई संभावित आतंकी वारदातों को भी समय रहते नाकाम कर दिया है। पंजाब पुलिस ने दोहराया है कि वे राज्य की सुरक्षा और सांप्रदायिक सौहार्द को बिगाड़ने वाली किसी भी विदेशी या स्थानीय ताकत से निपटने के लिए पूरी तरह मुस्तैद है। राजनीतिक पार्टियों के कार्यालयों की सुरक्षा बढ़ाई बुधवार शाम हुए विस्फोट से चंडीगढ़ में अफरा-तफरी मच गई थी। बीजेपी दफ्तर के बाहर हुए धमाके की जिम्मेदारी खालिस्तान आतंकी ने ली थी। इस धमाके की जिम्मेदारी खालिस्तान समर्थक सुखजिंदर सिंह बब्बर ने ली थी। सोशल मीडिया पर पोस्ट डालकर बब्बर ने इस धमाके की जिम्मेदारी ली थी। उसने यह भी धमकी दी है कि पंजाब की धरती खालसा की धरती है, पंजाब में खालिस्तान बनेगा। इस हमले के बाद राजनीतिक पार्टियों के कार्यालयों की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। पंजाब भाजपा मुख्यालय, जहां ये ब्लास्ट हुआ था, वहां सीआरपीएफ तैनात कर दी गई है। वहीं, पंजाब भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष अश्वनी शर्मा की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। अन्य पदाधिकारियों व नेताओं की सुरक्षा भी रिव्यू की जा रही है।  

पंजाब में 8 और 14 अप्रैल को सरकारी छुट्टी, स्कूल-कॉलेज और दफ्तर रहेंगे बंद

चंडीगढ़  पंजाब में इस अप्रैल महीने में बच्चों और सरकारी कर्मचारियों के लिए खुशखबरी है। राज्य सरकार ने 8 अप्रैल, बुधवार को सरकारी छुट्टी घोषित की है। इस दिन पूरे पंजाब के स्कूल, कॉलेज और सरकारी दफ्तर बंद रहेंगे। 14 अप्रैल मंगलवार को भी रहेगी छुट्टी जानकारी के अनुसार, 8 अप्रैल को श्री नाभा दास जी का जन्म दिवस मनाया जाएगा, जिसके चलते पूरे राज्य में सरकारी अवकाश रहेगा। इसे गज़टेड छुट्टियों की सूची में आधिकारिक रूप से शामिल किया गया है। इसके अलावा, 14 अप्रैल, मंगलवार को भी पंजाब में गज़टेड छुट्टी रहेगी। इस दिन राज्य में बैसाखी का त्यौहार और डा. बी. आर. अंबेडकर का जन्मदिन मनाया जाएगा। इस अवसर पर भी पूरे राज्य के स्कूल, कॉलेज और सरकारी कार्यालय बंद रहेंगे। वहीं सरकारी अधिकारियों का कहना है कि इन छुट्टियों से न सिर्फ विद्यार्थियों को आराम मिलेगा, बल्कि कर्मचारियों को भी अपने पारिवारिक और धार्मिक कार्यक्रमों को मनाने का मौका मिलेगा। इस प्रकार पंजाब में अप्रैल महीने में दो महत्वपूर्ण छुट्टियां होने से राज्य में स्कूल-कॉलेज और सरकारी कार्यालयों की गतिविधियां प्रभावित रहेंगी, जबकि लोगों को त्योहार और विशेष अवसरों को मनाने का अवसर मिलेगा।