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Punjab Nikay Chunav Result: नगर निकाय चुनाव में AAP आगे, कांग्रेस और अकाली दल की बढ़ी चिंता

चंडीगढ़  पंजाब निकाय चुनाव 2026 के लिए डाले गए वोटों की गिनती जारी है। अभी तक के रुझानों में आम आदमी पार्टी सभी दलों पर भारी पड़ती दिख रही है। हालांकि अभी रुझान हैं। स्पष्ट परिणाम दोपहर 12 बजे तक आने की संभावना है। बता दें कि 26 मई को राज्य के 8 नगर निगम, 75 नगर काउंसिल और 21 नगर पंचायतों समेत कुल 104 निकायों के लिए मतदान हुआ था। चुनाव में बड़ी संख्या में मतदाताओं ने हिस्सा लेकर उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला ईवीएम में बंद कर दिया था। मतगणना के लिए राज्यभर में कुल 115 काउंटिंग सेंटर बनाए गए हैं। सभी केंद्रों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। काउंटिंग सेंटरों के बाहर पुलिस बल तैनात है। पंजाब निकाय चुनाव के नतीजे राज्य निर्वाचन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट और जिला प्रशासन की वेबसाइटों पर देखे जा सकेंगे। इसके अलावा विभिन्न समाचार वेबसाइटों और टीवी चैनलों पर भी लाइव अपडेट उपलब्ध रहेंगे। इन चुनावों को वर्ष 2027 में होने वाले पंजाब विधानसभा चुनाव का सेमीफाइनल माना जा रहा है। ऐसे में सभी प्रमुख राजनीतिक दलों की नजर आज आने वाले नतीजों पर टिकी हुई है। अभी तक के रुझान | राजनीतिक पार्टी | सीटों की संख्या | | आम आदमी पार्टी (आप) | 150 | | शिरोमणि अकाली दल | 38 | | कांग्रेस | 39 | | निर्दलीय | 36 | | भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) | 4 | लुधियाना निकाय चुनावों में ‘आप’ आगे लुधियाना जिले में नगर निकाय चुनावों की मतगणना के दौरान आम आदमी पार्टी (आप) कई क्षेत्रों में बढ़त बनाए हुए है। दोराहा में सभी 15 वार्डों पर चुनाव हुआ, लेकिन अभी किसी पार्टी को विजेता घोषित नहीं किया गया है। जगराओं के सभी 23 वार्डों में मुकाबला हुआ, जहां ‘आप’ तीन वार्डों में आगे चल रही है, जबकि कांग्रेस एक और निर्दलीय उम्मीदवार एक वार्ड में बढ़त बनाए हुए हैं। खन्ना में कुल 33 वार्ड हैं। इनमें एक सीट निर्विरोध रही, जहां ‘आप’ को विजेता घोषित किया गया। बाकी 32 वार्डों में ‘आप’ 10 सीटों पर और कांग्रेस तीन सीटों पर आगे है। पायल में सभी 11 वार्डों पर चुनाव हुआ। यहां ‘आप’ एक वार्ड, कांग्रेस दो वार्ड, निर्दलीय एक वार्ड और शिरोमणि अकाली दल (SAD) एक वार्ड में बढ़त बनाए हुए हैं। रायकोट के 15 वार्डों में भी मुकाबला हुआ, जहां ‘आप’ एक वार्ड और कांग्रेस चार वार्डों में आगे चल रही है। समराला में 15 वार्डों में से तीन सीटें निर्विरोध रहीं, जहां ‘आप’ को विजेता घोषित किया गया। बाकी 12 वार्डों में ‘आप’ तीन, भाजपा एक, कांग्रेस एक और शिरोमणि अकाली दल पांच वार्डों में आगे है। जिला स्तर पर कुल 112 वार्डों में से चार निर्विरोध रहे, जबकि 108 वार्डों पर मुकाबला हुआ। इनमें ‘आप’ 18 वार्डों में बढ़त बनाए हुए है। भाजपा एक, कांग्रेस 11, निर्दलीय दो और शिरोमणि अकाली दल छह वार्डों में आगे चल रहे हैं।  रामदास में ‘आप’ की एकतरफा जीत, भुच्चो मंडी और कोठा गुरु के नतीजे घोषित पंजाब में नगर परिषद चुनावों के नतीजे लगातार सामने आ रहे हैं, जिनमें आम आदमी पार्टी (आप) ने शानदार प्रदर्शन किया है। अजनाला हलके के कस्बा रामदास नगर परिषद की कुल 11 वार्डों में से 10 पर ‘आप’ उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की, जबकि वार्ड नंबर 8 से शिरोमणि अकाली दल के उम्मीदवार विजयी रहे। इस चुनाव में कांग्रेस और भाजपा अपना खाता खोलने में नाकाम रहीं। भुच्चो मंडी के नतीजों के अनुसार, वार्ड नंबर 1 से ‘आप’ के प्रिंसी गोलण, वार्ड नंबर 2 से शिरोमणि अकाली दल के नरदीप गर्ग और वार्ड नंबर 3 से निर्दलीय उम्मीदवार अंजली गर्ग विजयी रहीं। कोठा गुरु में वार्ड नंबर 1 से सुखजीत कौर (आप), वार्ड नंबर 2 से बूटा सिंह (आप) और वार्ड नंबर 3 से बलविंदर कौर (शिरोमणि अकाली दल) ने जीत हासिल की। इसके अलावा धूरी के अन्य वार्डों में वार्ड नंबर 13 से ‘आप’ की आशा लद्दड़ और वार्ड नंबर 7 से भी ‘आप’ उम्मीदवार विजयी रहे हैं।  बटाला, लहरा मुहब्बत, कोट ईसे खां और फाजिल्का के नए पार्षदों का ऐलान पंजाब में हुए नगर निगम और नगर परिषद चुनावों के नतीजों का सिलसिला जारी है। ताजा जानकारी के अनुसार: बटाला: नगर निगम के वार्ड नंबर 5 से आम आदमी पार्टी के भूपिंदर सिंह बाजवा विजयी रहे हैं। लहरा मुहब्बत: यहां हुई मतगणना में वार्ड नंबर 1 से जसवीर कौर (निर्दलीय), वार्ड 2 से गुरतेज सिंह (शिरोमणि अकाली दल), वार्ड 3 से राजप्रीत कौर (निर्दलीय), वार्ड 4 से मोहन लाल (निर्दलीय), वार्ड 5 से गुरमीत कौर (शिरोमणि अकाली दल) और वार्ड 6 से मेवा सिंह (शिरोमणि अकाली दल) विजयी रहे। कोट ईसे खां: वार्ड नंबर 6 से निर्दलीय उम्मीदवार अरुण सीकरी ने जीत हासिल की है। उन्होंने आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार बिट्टू मल्होत्रा को 116 वोटों के अंतर से हराया। फाजिल्का: नगर परिषद के घोषित 6 वार्डों के नतीजों में कांग्रेस ने 4 सीटों पर जीत दर्ज की है, जबकि आम आदमी पार्टी और भाजपा को 1-1 सीट मिली है।  पंजाब नगर परिषद चुनाव: रामदास, भुच्चो मंडी और कोठा गुरु में AAP की भारी जीत पंजाब में नगर परिषद चुनाव की मतगणना जारी है, जिसमें आम आदमी पार्टी ने शानदार प्रदर्शन किया है। अजनाला कस्बे के रामदास नगर परिषद के कुल 11 वार्डों में से 10 वार्डों पर आम आदमी पार्टी के उम्मीदवारों ने जीत हासिल की है, जबकि वार्ड नंबर 8 से शिरोमणि अकाली दल के उम्मीदवार विजयी रहे। भुचो मंडी के नतीजों के अनुसार, वार्ड नंबर 1 से 'आप' के प्रिंस गोलन, वार्ड नंबर 2 से शिरोमणि अकाली दल के नरदीप गर्ग और वार्ड नंबर 3 से निर्दलीय उम्मीदवार अंजली गर्ग विजयी हुए हैं। कोठा गुरु के विजेताओं में वार्ड नंबर 1 से सुखजीत कौर ('आप'), वार्ड 2 से बूटा सिंह ('आप') और वार्ड 3 से बलविंदर कौर (शिरोमणि अकाली दल) शामिल हैं। इसके अलावा, धुरी के अन्य वार्डों में, वार्ड 13 से 'आप' की आशा लद्दर और वार्ड नंबर 7 से 'आप' के उम्मीदवार विजयी हुए हैं।  मलेरकोटला में कड़ी सुरक्षा के बीच मतगणना मलेरकोटला की तीन नगर निकायों के 61 वार्डों की मतगणना कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच शुरू हो गई है। प्रशासन ने दावा किया है … Read more

Chandigarh में बड़ा बदलाव! अब ग्रुप हाउसिंग सोसायटी बनाकर बेचे जाएंगे फ्लैट

चंडीगढ़ चंडीगढ़ में अब लोग प्लॉट खरीदकर फेवरेट डिजाइन की कोठी नहीं बनवा सकेंगे। चंडीगढ़ प्रशासन अब शहर में प्लॉटेड डेवलपमेंट नहीं करेगा, यानी लोगों को प्लॉट नहीं बेचे जाएंगे। इसकी जगह अब केवल ग्रुप हाउसिंग यानी फ्लैट्स बनाने की परमिशन दी जाएगी। चंडीगढ़ प्रशासन ने संशोधित मास्टर प्लान में इसे शामिल करने का सुझाव दिया गया है। इससे सिटी की अब हॉरिजॉन्टल की जगह वर्टिकल ग्रोथ होगी। इतना ही नहीं, फेज-II के सेक्टरों में जो भी खाली प्लॉट क्लस्टर बचे हैं, उन्हें अब व्यक्तिगत प्लॉट के बजाय ग्रुप हाउसिंग के लिए फिर से प्लान किया जाएगा। इतना जरूर है कि 1 से 30 सेक्टर को छोड़कर ही मल्टीस्टोरी बिल्डिंग बन पाएंगी। ऐसा इसलिए क्योंकि यह एरिया हेरिटेज में शामिल है। इसके अलावा अब मिक्स्ड लैंड जमीन का एरिया भी बढ़ाया जाएगा। वहीं, पार्किंग की दिक्कत का भी हल निकालने की तैयारी है। कुल मिक्स्ड लैंड यूज क्षेत्र 252 एकड़ (0.89%) से बढ़कर 428 एकड़ (1.5%) हो गया है। जानिए, प्रशासन ने ये फैसला क्यों लिया चंडीगढ़ देश की आजादी के बाद बसा पहला प्लांड सिटी है। इसकी नींव 1952 में रखी गई थी। इसके बाद, 1 नवंबर 1966 को पंजाब के पुनर्गठन के समय इसे एक केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया और यह पंजाब व हरियाणा दोनों राज्यों की संयुक्त राजधानी बना। वर्ष 1976 में चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड गठित किया गया। लेकिन अब यह लगभग पूरी तरह बस गया है। साथ ही जमीन की कमी दिख रही है। इसी चीज को मद्देनजर रखते हुए संशोधित मास्टर प्लान में यह चीज शामिल की गई। फेज-II में सेक्टर-43 (सब-सिटी सेंटर) वाला एरिया आता है। यहां लगभग 78 एकड़ खाली क्षेत्र है, जिसे विकास मार्ग के साथ एकीकृत करते हुए मिश्रित भूमि उपयोग के तहत लाया गया है। फेज-II के विभिन्न सेक्टरों में कई खाली पॉकेट्स और बिना बिके खाली प्लॉटों के क्लस्टर होने का उल्लेख है। हालांकि इनका कोई एक विशिष्ट कुल क्षेत्रफल नहीं दिया गया है, लेकिन इन्हें अब व्यक्तिगत प्लॉट के बजाय ग्रुप हाउसिंग के लिए फिर से प्लान करने का निर्देश है। जानिए, इस फैसले के बाद किस तरह की इमारतें बनेंगी फेज-III के सेक्टरों में लगभग 146 एकड़ जमीन खाली पड़ी है, जिसे अब 4 से 6 मंजिला फ्लैटों वाले हाई-डेंसिटी हाउसिंग के लिए इस्तेमाल करने का प्रस्ताव है। फेज-III और बाहरी इलाके में व्यक्तिगत प्लॉटों का आवंटन पूरी तरह बंद (डिसकंटीन्यू) कर दिया गया है। यहां अब घनी आबादी वाले 4 से 6 मंजिला फ्लैट्स बनाए जाएंगे, ताकि ज्यादा लोगों को घर मिल सके। चंडीगढ़ प्रशासन ने के विभिन्न सेक्टरों में लगभग 215 एकड़ जमीन हाउसिंग बोर्ड दी है, जिसे अभी विकसित किया जाना बाकी है। गांव मलोया के पास 178 एकड़ जमीन आवासीय उपयोग के लिए प्रस्तावित है, जहां हाई-राइज इमारतें बनाने की योजना है। इंडस्ट्रियल एरिया में जोनिंग एरिया इंडस्ट्रियल एरिया फेज-I और फेज-II में जमीन के बेहतर उपयोग के लिए FAR (फ्लोर एरिया रेश्यो) बढ़ाकर 2.0 कर दिया गया है। साथ ही, ग्राउंड कवरेज 60% तय की गई है। 2 कनाल तक के प्लॉटों के लिए अधिकतम ऊंचाई 68 फीट 3 इंच निर्धारित की गई है। 2 कनाल (5 से 15 मरला) तक के प्लॉट मालिक अब ‘आर्किटेक्चरल कंट्रोल’ या ‘जोनिंग फ्रेमवर्क’ में से किसी एक विकल्प को चुन सकेंगे। हालांकि, यदि वे बढ़े हुए एफएआर 2.0 का लाभ लेना चाहते हैं, तो उन्हें जोनिंग फ्रेमवर्क अपनाना अनिवार्य होगा। अब औद्योगिक प्लॉटों के भीतर ही श्रमिकों, लेबर और सुरक्षा गार्डों के रहने के लिए हॉस्टल या डॉरमेट्री बनाने की अनुमति दी गई है। 1 एकड़ तक के प्लॉटों में यह सुविधा कुल स्वीकृत FAR का 5% तक और 1 एकड़ से बड़े प्लॉटों में 2.5% तक सीमित होगी। इन कमरों का उपयोग केवल मजदूरों के रहने के लिए किया जा सकेगा। इन्हें किराये या अन्य व्यावसायिक उपयोग के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा। पार्किंग के संकट से बचाएगा यह फार्मूला लोगों को पार्किंग के संकट से बचाने के लिए अब स्टिल्ट पार्किंग बनाई जाएगी। फेज-II के सेक्टरों के लिए स्टिल्ट पार्किंग को इमारत की निर्धारित ऊंचाई से छूट दी गई है, ताकि परिसर के भीतर ही पार्किंग की सुविधा मिल सके। फेज-III और पेरिफेरी में इसे कुल ऊंचाई में गिना जाएगा। इंटिग्रेटेड रेजिडेंशियल हाउसिंग में कुल पार्किंग स्थान घरों के संचित फर्श क्षेत्रफल के कम से कम 30% के बराबर होना चाहिए। स्टिल्ट के नीचे पार्किंग के लिए 7 फीट 6 इंच की स्पष्ट ऊंचाई होनी चाहिए। इस क्षेत्र का उपयोग घरों की संख्या बढ़ाने या उप-विभाजन के लिए नहीं किया जा सकेगा। इसके अलावा कॉमर्शियल, इंडस्ट्रियल व अन्य एरिया के लिए भी प्लानिंग की गई है। इंडस्ट्रियल एरिया फेज-III के लगभग 60 एकड़ अविकसित क्षेत्र को अब ‘मिक्स्ड लैंड यूज’ के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके तहत आवासीय, व्यावसायिक, संस्थागत और सांस्कृतिक गतिविधियों को शामिल किया जाएगा, ताकि क्षेत्र का समग्र विकास सुनिश्चित हो सके।

29 मई को लुधियाना कोर्ट में कामकाज ठप, बार एसोसिएशन ने किया बहिष्कार का ऐलान

लुधियाना. जिला बार एसोसिएशन लुधियाना ने अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश (ASJ) जसपिंदर सिंह हायर के रिटायरमेंट के अवसर पर 29 मई 2026 को “नो वर्क डे” घोषित किया है। यह निर्णय बार एसोसिएशन की कार्यकारिणी बैठक में प्रधान एडवोकेट विपिन सग्गर की अध्यक्षता में लिया गया। जारी नोटिस के अनुसार, जसपिंदर सिंह हायर 31 मई 2026 को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। उनके सम्मान में जिला बार एसोसिएशन द्वारा 29 मई, शुक्रवार को दोपहर 12:30 बजे बार रूम में विशेष विदाई समारोह आयोजित किया जाएगा। बार एसोसिएशन ने सभी सदस्यों से सामूहिक निर्णय का पालन करने और समारोह में बढ़-चढ़कर भाग लेने की अपील की है। इसके साथ ही न्यायिक अधिकारियों, रेवेन्यू कोर्ट, कंज्यूमर कोर्ट, लोक अदालत, जुवेनाइल कोर्ट और लेबर कोर्ट से अनुरोध किया गया है कि उक्त दिन वकीलों की अनुपस्थिति को देखते हुए किसी भी मामले में प्रतिकूल आदेश जारी न किए जाएं। बार एसोसिएशन के इस फैसले के चलते 29 मई को जिला अदालत परिसर में नियमित न्यायिक कार्य प्रभावित रहने की संभावना है।

प्रेग्नेंसी में तम्बाकू बना जानलेवा, PGI विशेषज्ञों ने दी गंभीर बीमारियों की चेतावनी

चंडीगढ़. गुटखा, खैनी और जर्दा जैसे धुआं रहित तंबाकू को लोग अक्सर सिगरेट से कम खतरनाक मानते हैं पर PGI चंडीगढ़ के डॉक्टरों ने इस संबंध में गंभीर चेतावनी दी है। PGI के स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के मुताबिक गर्भावस्था के दौरान तंबाकू का सेवन न सिर्फ मां के लिए बल्कि गर्भ में पल रहे बच्चे के लिए भी बहुत खतरनाक साबित हो सकता है। इससे बच्चे का वजन कम होना, समय से पहले जन्म और यहां तक ​​कि मृत बच्चे के जन्म का खतरा बढ़ जाता है। PGI के मुताबिक भारत में करीब 20 करोड़ लोग धुआं रहित तंबाकू का इस्तेमाल करते हैं। इनमें बड़ी संख्या में महिलाएं भी हैं। डॉक्टरों के मुताबिक गुटखा, खैनी, जर्दा, पान मसाला और नसवार जैसे उत्पाद सीधे शरीर में निकोटीन और जहरीले केमिकल पहुंचाते हैं, जिससे कैंसर, दिल की बीमारी और स्ट्रोक जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। PGI स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के प्रो. सोनू गोयल ने बताया कि लोग अभी भी गुटखा और खैनी को सुरक्षित या 'नेचुरल' मानते हैं, जबकि यह पूरी तरह से गलत सोच है। उन्होंने कहा कि तंबाकू के पत्तों में निकोटीन, नाइट्रोसामाइन और कई ऐसे केमिकल होते हैं जो सीधे कैंसर से जुड़े होते हैं। उन्होंने कहा कि प्रेग्नेंसी के दौरान स्मोकलेस तंबाकू खाने से बच्चे को ऑक्सीजन और जरूरी न्यूट्रिएंट्स की सप्लाई पर असर पड़ता है। इससे बच्चा कमजोर हो सकता है या समय से पहले जन्म का खतरा बढ़ सकता है। कई मामलों में स्टिलबर्थ की संभावना भी बढ़ जाती है। डॉक्टरों के मुताबिक स्मोकलेस तंबाकू भारत में ओरल कैंसर के मामलों का एक बड़ा कारण बन गया है। एक इंटरनेशनल स्टडी के मुताबिक दुनिया में स्मोकलेस तंबाकू और सुपारी से जुड़े ओरल कैंसर के लगभग 70 प्रतिशत मामले भारत में होते हैं। धुआं रहित तंबाकू में करीब 4000 केमिकल पी.जी.आई. के मुताबिक स्मोकलेस तंबाकू सिर्फ मुंह को ही नुकसान नहीं पहुंचाता बल्कि पूरे शरीर पर असर डालता है। इससे ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है, दिल की बीमारी का खतरा बढ़ सकता है और स्ट्रोक की संभावना बढ़ सकती है। डॉक्टरों ने यह भी कहा कि कई लोग वजन बढ़ने के डर से तंबाकू नहीं छोड़ते, लेकिन यह डर काफी हद तक गलत है। रिसर्च के मुताबिक तंबाकू छोड़ने के बाद वजन में थोड़ी बढ़ोतरी होती है, जबकि तंबाकू का इस्तेमाल जारी रखने से कैंसर और दिल की बीमारी का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। PGI के एक्सपर्ट्स ने भी युवाओं और महिलाओं में बढ़ती तंबाकू की लत पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि छोटे पैक में मिलने वाले फ्लेवर्ड पान मसाला और गुटखा प्रोडक्ट्स तेजी से टीनएजर्स और युवाओं को अपनी गिरफ्त में ले रहे हैं। डॉक्टरों के मुताबिक स्मोकलेस तंबाकू में करीब 4000 केमिकल्स पाए जाते हैं, जिनमें से कई सीधे कैंसर का कारण बनते हैं। इनमें आर्सेनिक, लेड, कैडमियम, फॉर्मेल्डिहाइड और रेडियोएक्टिव पोलोनियम-210 जैसे खतरनाक एलिमेंट्स शामिल हैं। PGI ने लोगों से तंबाकू छोड़ने के लिए सरकारी हेल्पलाइन और तंबाकू छोड़ने की सर्विस का इस्तेमाल करने की अपील की है। डॉक्टरों ने कहा कि समय पर तंबाकू छोड़ना कैंसर और दूसरी गंभीर बीमारियों से बचने का सबसे अच्छा तरीका है।

किसानों को साधने की बड़ी कोशिश! भाजपा अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लो ने खेला ‘MSP कार्ड’

चंडीगढ़. भारतीय जनता पार्टी ने 2027 विधानसभा चुनावों से पहले बड़ा सियासी दांव खेलते हुए Kewal Singh Dhillon को पंजाब भाजपा का नया प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया है। पद संभालते ही केवल सिंह ढिल्लों ने दावा किया कि 2027 में पंजाब में भाजपा का कमल खिलेगा और राज्य में पार्टी की सरकार बनेगी। उन्होंने कहा कि वह पंजाब में महाराजा रणजीत सिंह जैसा सुशासन और विकास वाला दौर वापस लाना चाहते हैं। नियुक्ति के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए ढिल्लों ने किसानों को लेकर भी बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि भाजपा पंजाब के किसानों को केंद्र द्वारा सूचीबद्ध सभी फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) सुनिश्चित करेगी। ढिल्लों ने कहा, “अगर Haryana में 21 फसलों पर MSP दी जा सकती है, तो पंजाब में क्यों नहीं?” उन्होंने कहा कि पार्टी किसानों के हितों को प्राथमिकता देगी और खेती से जुड़े मुद्दों पर गंभीरता से काम करेगी। उन्होंने कहा, “पंजाब थका जरूर है, लेकिन टूटा नहीं है। हम पंजाब को फिर से विकास की राह पर लाएंगे और इसे देश का नंबर-1 राज्य बनाएंगे।” ढिल्लों ने विपक्ष पर भी निशाना साधा इस दौरान केवल सिंह ढिल्लों ने विपक्ष पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि उन्हें न तो चुटकुले सुनाने आते हैं और न ही शेरो-शायरी करनी आती है। वह ड्रामेबाजी में नहीं बल्कि मेहनत और जमीनी स्तर पर काम करने में विश्वास रखते हैं। उनका कहना था कि उनका एकमात्र उद्देश्य पंजाब का विकास और राज्य को दोबारा खुशहाल बनाना है। ढिल्लों ने कहा कि आज पंजाब नशे, बेरोजगारी और गैंगस्टरवाद जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रहा है। राज्य की आर्थिक स्थिति भी बेहद खराब है और कर्ज लगातार बढ़ता जा रहा है। उन्होंने कहा कि पंजाब को विकास के रास्ते पर वापस लाने के लिए केवल भाषणों या दिखावे से काम नहीं चलेगा, बल्कि जमीनी स्तर पर मेहनत करनी होगी।

ट्रैफिक नियम तोड़े तो सीधे कटेगा चालान, जालंधर के 9 चौराहे अब हाईटेक निगरानी में

चंडीगढ़. जालंधर वासियों के लिए बेहद जरूरी खबर सामने आई है। यहां अब ट्रैफिक नियमों का उल्लघर करने वालों की खैर नहीं। बता दें कि 1 जून से जालंधर में 9 और चौराहों पर ई-चालान शुरू हो जाएंगे। इसके बाद ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने पर सीधा चालान कट जाएगा जिसका फोन पर मैसेज आ जाएगा। जिन 9 चौराहों पर अब ये कार्रवाई होगी उनमें मॉडल टाउन चौक, फुटबाल चौक, श्री गुरु रविदास चौक, भगवान वाल्मीकि चौक, चुनमुन चौक, डॉ. बी.आर. अम्बेडकर चौक, गुरु अमरदास चौक, वर्कशॉप चौक और कपूरथला चौक शामिल है।  गौरतलब है कि इससे पहले शहर के 4 मुख्य चौराहों जिनमें बी.एस.एफ. चौक, गुरु नानक मिशन चौक, पी.ए.पी चौक और बी.एस.सी. चौक शामिल है। वहीं पुलिस द्वारा लोगों से अपील की गई है कि वह ट्रैफिक नियमों का सख्ती से पालन करें।

भीषण गर्मी के बीच फतेहगढ़ साहिब में अकेले रह रहे बुजुर्ग की संदिग्ध मौत

फतेहगढ़ साहिब. पंजाब में पड़ रही अत्यधिक भीषण गर्मी के बीच जिला फतेहगढ़ साहिब के अंतर्गत आते गांव बागड़ियां से एक बेहद दुखद समाचार सामने आया है। यहाँ बंद कमरे में अत्यधिक गर्मी और सफोकेशन (घुटन) होने के कारण एक 68 वर्षीय बुजुर्ग की मौत हो गई। मृतक की पहचान अमरीक सिंह के रूप में हुई है, जो घर में बिल्कुल अकेले रहते थे।घटना के संबंध में जानकारी देते हुए थाना मुलेपुर के सहायक थानेदार जगरूप सिंह ने बताया कि बुजुर्ग अमरीक सिंह अपने घर के कमरे का दरवाजा अंदर से बंद करके सोए हुए थे। 4 दिन तक दरवाजा नहीं खोला, तो पड़ोसियों और गांव वालों को किसी अनहोनी का शक हुआ। इसके बाद ग्रामीणों ने इकट्ठा होकर कमरे का कुंडा (दरवाजा) तोड़ा। अंदर जाने पर ग्रामीणों के होश उड़ गए; बुजुर्ग अमरीक सिंह का शव पड़ा हुआ था और उनका पूरा शरीर गर्मी के कारण पसीने से बुरी तरह तर-बतर था। सूचना मिलते ही थाना मुलेपुर की पुलिस टीम तुरंत मौके पर पहुंची और घटनास्थल का मुआयना किया। जगरूप सिंह ने बताया कि शुरुआती जांच और परिस्थितियों को देखने से यही प्रतीत होता है कि कमरे में वेंटिलेशन न होने और अत्यधिक गर्मी व घुटन के कारण बुजुर्ग की जान गई है। हालांकि, मौत के असली और सटीक कारणों का खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो पाएगा। फिलहाल पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर सिविल अस्पताल फतेहगढ़ साहिब में पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और अगली कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।

विधायकों पर बयान देना पड़ा भारी, स्वाति मालीवाल को 10 जून को कोर्ट में पेश होने का आदेश

मोगा राज्यसभा सदस्य स्वाति मालीवाल द्वारा पंजाब के विधायकों को “भेड़-बकरी” कहे जाने संबंधी सोशल मीडिया टिप्पणी के खिलाफ आम आदमी पार्टी महिला विंग की प्रधान और मोगा की विधायक डॉ. अमनदीप कौर अरोड़ा द्वारा मोगा अदालत में दायर मानहानि मामले में अदालत ने बड़ा आदेश दिया है। जानकारी के अनुसार, यह मानहानि याचिका 13 मई को दायर की गई थी।  मामले की पहली सुनवाई 19 मई को हुई थी, जिसके बाद अगली सुनवाई 25 मई को निर्धारित की गई। शिकायतकर्ता पक्ष के वकील ने अदालत से बीएनएसएस की धारा 223(1) के तहत नोटिस जारी करने की मांग की थी। मामले की सुनवाई करते हुए जीएमआईसी अशिमा शर्मा की मोगा अदालत ने स्वाति मालीवाल को 10 जून 2026 के लिए प्री-कॉग्निजेंस नोटिस जारी करने के आदेश दिए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया है कि स्वाति मालीवाल 10 जून को स्वयं या अपने वकील के माध्यम से अदालत में पेश हो सकती हैं। अब इस मामले की अगली सुनवाई 10 जून 2026 को होगी। MLA ने कहा- अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करना गलत विधायक डॉ. अमनदीप कौर अरोड़ा ने कहा कि किसी भी जनप्रतिनिधि के खिलाफ ऐसी अभद्र और अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करना गलत है, क्योंकि इससे लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा को ठेस पहुंचती है। इस बयान से विधायकों की छवि धूमिल हुई है। इससे पहले 19 मई को मोगा अदालत में सुनवाई हुई थी। इस दौरान विधायक डॉ. अमनदीप कौर अरोड़ा अदालत में पेश हुईं और अपने पक्ष से जुड़े तथ्यों को अदालत के सामने रखा। 28 अप्रैल को भाजपा जॉइन की थी 28 अप्रैल को मालीवाल ने दिल्ली में भाजपा पार्टी जॉइन की थी। इसके अलावा राघव चड्ढा, अशोक मित्तल, हरभजन सिंह, संदीप पाठक, विक्रमजीत साहनी और राजेंद्र गुप्ता भी भाजपा में शामिल हुए थे। मालीवाल ने कहा था- केजरीवाल महिला विरोधी हैं स्वाति मालीवाल ने कहा था कि उन्होंने 2006 से केजरीवाल के साथ काम किया, हर आंदोलन में साथ दिया, लेकिन बाद में उनके साथ पार्टी में दुर्व्यवहार हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके घर में उनके साथ मारपीट कराई गई और FIR वापस लेने के लिए दबाव बनाया गया।

हरभजन सिंह की सुरक्षा याचिका पर पंजाब सरकार सख्त, बोली- Y+ सुरक्षा ही पर्याप्त

चंडीगढ़. पूर्व अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर और राज्यसभा सदस्य रहे हरभजन सिंह की सुरक्षा वापस लेने के मामले में पंजाब सरकार ने पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में जवाब दाखिल कर कहा है कि केंद्र सरकार द्वारा उन्हें पहले ही ‘वाई प्लस’ श्रेणी की सुरक्षा उपलब्ध कराई जा चुकी है, इसलिए राज्य से समानांतर सुरक्षा जारी रखने की प्रशासनिक या कानूनी आवश्यकता नहीं बचती। पंजाब पुलिस के एडीजीपी (सिक्योरिटी) मंदीप सिंह द्वारा दायर शार्ट रिप्लाई में कहा गया कि हरभजन सिंह ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर 25 अप्रैल 2026 के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसके तहत उनकी राज्य सुरक्षा वापस ली गई थी। साथ ही उन्होंने सुरक्षा बहाल करने की मांग की है। राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि 30 अप्रैल 2026 को सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने अंतरिम आदेश देते हुए यह सुनिश्चित करने को कहा था कि पंजाब में रहते समय याचिकाकर्ता अथवा उनके परिवार को किसी प्रकार की शारीरिक क्षति न पहुंचे। स्थानीय स्तर पर सुरक्षा प्रबंध जारी रखे इसके बाद स्थानीय स्तर पर सुरक्षा प्रबंध जारी रखे गए। हलफनामे में कहा गया कि हरभजन सिंह पूर्व अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर और राज्यसभा सदस्य रहे हैं, इसलिए प्रारंभिक आकलन के आधार पर उन्हें पहले पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध कराई गई थी। हालांकि 3 मार्च 2026 को जालंधर में सिक्योरिटी रिव्यू कमेटी की बैठक में खतरे का पुनर्मूल्यांकन किया गया, जिसमें किसी विशेष खतरे की पुष्टि नहीं हुई। पंजाब सरकार ने अदालत को बताया कि हरभजन सिंह अधिकतर समय पंजाब से बाहर रहते हैं और राज्य के भीतर उनकी गतिविधियां सीमित पाई गईं। इसी कारण जालंधर पुलिस कमिश्नर को स्थानीय स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए तथा पहले तैनात सुरक्षा कर्मियों को वापस बुला लिया गया। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि 4 मई 2026 को केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से औपचारिक सूचना प्राप्त हुई थी कि हरभजन सिंह को केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के माध्यम से ‘वाई प्लस’ श्रेणी की सुरक्षा प्रदान की गई है। राज्य ने कहा कि यह उच्च स्तरीय सुरक्षा है और इसके बाद राज्य सुरक्षा को जारी रखना संसाधनों की अनावश्यक पुनरावृत्ति होगा। हलफनामे में यह भी कहा गया कि याचिकाकर्ता को कभी असुरक्षित नहीं छोड़ा गया। स्थानीय पुलिस के माध्यम से सुरक्षा व्यवस्था लगातार जारी रही। राज्य ने आरोपों को राजनीतिक प्रतिशोध बताने के दावे को भी खारिज करते हुए कहा कि सुरक्षा में बदलाव पूरी तरह प्रशासनिक आकलन और स्थापित नियमों के अनुसार किया गया। पंजाब सरकार ने हाई कोर्ट के पूर्व निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि सुरक्षा को “स्टेटस सिंबल” नहीं बनाया जा सकता और किसी व्यक्ति को अनिश्चितकाल तक व्यक्तिगत सुरक्षा पाने का मौलिक अधिकार नहीं है। सरकार के अनुसार खतरे के वास्तविक आकलन के आधार पर ही सुरक्षा दी या हटाई जाती है।

हाईकोर्ट सख्त! गुरुनानक देव यूनिवर्सिटी के VC-रजिस्ट्रार दोषी करार, जेल की सजा

चंडीगढ़ पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने गुरुनानक देव यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर और रजिस्ट्रार को अदालत की अवमानना का दोषी ठहराया है। अदालत ने दोनों अधिकारियों को एक-एक महीने के कारावास की सजा सुनाई है। हालांकि, उन्हें तत्काल जेल भेजने के बजाय 7 जुलाई तक राहत प्रदान की गई है। इस अवधि में वे इस फैसले के खिलाफ डिवीजन बेंच में अपील दायर कर सकते हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि निर्धारित समय तक अपील दाखिल नहीं हुई या अपील पर सजा पर रोक नहीं मिली, तो अधिकारियों को सजा भुगतनी होगी। यह मामला विश्वविद्यालय के क्लास-4 और अन्य अस्थायी कर्मचारियों को नियमित किए जाने से जुड़ा है। वर्ष 2024 में हाईकोर्ट ने कर्मचारियों के पक्ष में फैसला सुनाया था। विश्वविद्यालय को नियमितीकरण प्रक्रिया लागू करने का आदेश दिया गया था। अदालत ने माना था कि लंबे समय से सेवाएं दे रहे कर्मचारियों के मामले में विश्वविद्यालय को संवेदनशील रवैया अपनाना चाहिए। विश्वविद्यालय प्रशासन ने उस फैसले के खिलाफ कोई अपील दाखिल नहीं की। इसके बावजूद अदालत के आदेशों को पूरी तरह लागू नहीं किया गया। कर्मचारियों का आरोप था कि विश्वविद्यालय ने जानबूझकर आदेश के पालन में देरी की। कई कर्मचारियों को अब भी नियमित नहीं किया गया है। अदालत ने कई बार मांगी थी रिपोर्ट इसके बाद प्रभावित कर्मचारियों की ओर से हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दायर की गई। सुनवाई के दौरान अदालत ने विश्वविद्यालय प्रशासन से कई बार अनुपालन रिपोर्ट मांगी। लेकिन संतोषजनक कार्रवाई सामने नहीं आई। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने विश्वविद्यालय प्रशासन के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई। अदालत ने कहा कि जब किसी फैसले को चुनौती नहीं दी गई, तब उसका पालन करना संबंधित अधिकारियों की कानूनी जिम्मेदारी बनती है। आदेश लागू न करना न्यायिक व्यवस्था की अवमानना है। आदेश पालन में मानी लापरवाही अदालत ने माना कि वाइस चांसलर और रजिस्ट्रार ने आदेशों के पालन में गंभीर लापरवाही बरती। इसी आधार पर दोनों को अवमानना का दोषी ठहराया गया। उन्हें एक-एक माह के साधारण कारावास की सजा सुनाई गई। यह फैसला न्यायिक आदेशों की गंभीरता को रेखांकित करता है। अधिकारियों को अदालत के निर्देशों का पालन करना अनिवार्य है। सात जुलाई तक दाखिल कर सकेंगे अपील सजा सुनाने के साथ ही हाईकोर्ट ने दोनों अधिकारियों को सीमित राहत भी दी है। अदालत ने कहा कि उन्हें 7 जुलाई तक अपील दाखिल करने की स्वतंत्रता रहेगी। इस अवधि में उनकी सजा पर रोक रहेगी। अब यदि डिवीजन बेंच से राहत नहीं मिलती है, तो विश्वविद्यालय के दोनों शीर्ष अधिकारियों को जेल जाना पड़ सकता है। यह मामला न्यायिक आदेशों के सम्मान का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है।