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दो पालियों में होगी प्रतियोगिता परीक्षा, जिले में बनाए गए 13 सेंटर

लातेहार झारखंड संयुक्त असैनिक सेवा (सीधी भर्ती) प्रारंभिक प्रतियोगिता परीक्षा 2026 को लेकर जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में है. यह परीक्षा 19 अप्रैल को दो पालियों में आयोजित की जाएगी. पहली पाली सुबह 10 बजे से 12 बजे तक और दूसरी पाली दोपहर 3 बजे से शाम 5 बजे तक निर्धारित की गई है. प्रशासन का लक्ष्य परीक्षा को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से संपन्न कराना है. जिले में बनाए गए 13 परीक्षा केंद्र परीक्षा के सफल आयोजन के लिए जिले में कुल 13 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं. इन केंद्रों पर परीक्षार्थियों की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए विशेष इंतजाम किए गए हैं. प्रशासन ने सभी केंद्रों पर आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं ताकि किसी भी प्रकार की समस्या उत्पन्न न हो. उपायुक्त उत्कर्ष गुप्ता ने किया निरीक्षण मंगलवार को उपायुक्त उत्कर्ष गुप्ता ने जिला मुख्यालय के कई परीक्षा केंद्रों का निरीक्षण किया. उन्होंने सरस्वती शिशु विद्या मंदिर और गांधी इंटर कॉलेज केंद्रों का दौरा कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया. निरीक्षण के दौरान उन्होंने अधिकारियों से तैयारियों की विस्तृत जानकारी ली और आवश्यक निर्देश दिए. मूलभूत सुविधाओं पर दिया गया विशेष ध्यान निरीक्षण के दौरान उपायुक्त ने केंद्रों पर बैठने की व्यवस्था, स्वच्छता, पेयजल, शौचालय और सुरक्षा जैसे पहलुओं की बारीकी से जांच की. उन्होंने संबंधित पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि परीक्षार्थियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो और सभी सुविधाएं बेहतर ढंग से उपलब्ध कराई जाएं. कदाचारमुक्त और शांतिपूर्ण परीक्षा पर जोर उपायुक्त ने स्पष्ट रूप से कहा कि परीक्षा को कदाचारमुक्त और शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न कराना जिला प्रशासन की प्राथमिकता है. इसके लिए सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत रखने और सभी जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं. अधिकारियों को समन्वय के साथ काम करने का निर्देश उन्होंने सभी केंद्राधीक्षकों और संबंधित कर्मियों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने और समयबद्ध तैयारी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया. साथ ही परीक्षा के दौरान विधि-व्यवस्था बनाए रखने के लिए भी आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए. परीक्षार्थियों से समय पर पहुंचने की अपील जिला प्रशासन ने परीक्षार्थियों से अपील की है कि वे निर्धारित समय से पहले अपने परीक्षा केंद्र पर पहुंचें और सभी दिशा-निर्देशों का पालन करें. इससे परीक्षा प्रक्रिया सुचारू रूप से संपन्न हो सकेगी. निरीक्षण के दौरान कई अधिकारी रहे मौजूद इस दौरान डीआरडीए निदेशक प्रभात रंजन चौधरी, अनुमंडल पदाधिकारी अजय कुमार रजक, जिला शिक्षा पदाधिकारी प्रिंस कुमार, जिला शिक्षा अधीक्षक गौतम साहू, डीटीओ उमेश मंडल, बीडीओ मनोज कुमार तिवारी सहित कई अधिकारी मौजूद रहे. सभी ने मिलकर परीक्षा की तैयारियों को अंतिम रूप देने पर जोर दिया.

वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में नया इको-टूरिज्म स्पॉट, अप्रैल अंत में उद्घाटन संभव

बगहा बगहा वन क्षेत्र में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा विकसित किया जा रहा ‘गेटवे ऑफ वीटीआर’ अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है. वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (वीटीआर) के मदनपुर रेंज में बन रहा यह नया इको-टूरिज्म स्पॉट जल्द ही पर्यटकों के लिए खोला जा सकता है. करीब 0.548 एकड़ क्षेत्र में फैले इस प्रोजेक्ट का निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है, जबकि गेटवे का अंतिम काम तेजी से चल रहा है. इस पूरे प्रोजेक्ट पर लगभग 3.13 करोड़ रुपये की लागत आई है. इसमें मुख्य प्रवेश द्वार के साथ हरियाली, बैठने की सुविधा और आकर्षक डिजाइन शामिल हैं. पर्यटकों के लिए नया आकर्षण केंद्र बनेगा यह इको-पर्यटन स्थल खासतौर पर उन सैलानियों के लिए तैयार किया जा रहा है जो प्राकृतिक वातावरण में सुकून के पल बिताना चाहते हैं. यहां आने वाले पर्यटक न केवल सुंदर नजारे देख सकेंगे, बल्कि आरामदायक माहौल में समय भी बिता पाएंगे. अप्रैल के अंत में उद्घाटन की तैयारी बगहा वन क्षेत्र पदाधिकारी श्रीमान मालाकार के अनुसार, पार्क का अधिकांश कार्य पूरा हो चुका है और गेटवे अंतिम चरण में है. यदि सब कुछ प्लान के अनुसार रहा तो अप्रैल के अंतिम सप्ताह में वरीय अधिकारियों द्वारा इसका उद्घाटन किया जा सकता है. जल्द तय होगा प्रवेश शुल्क (Entry Fees) फिलहाल पार्क में प्रवेश शुल्क तय नहीं किया गया है. इसके लिए प्रस्ताव वरीय अधिकारियों को भेजा गया है. उम्मीद है कि जल्द ही शुल्क निर्धारित कर दिया जाएगा, ताकि आम पर्यटक भी आसानी से यहां पहुंच सकें. पर्यटकों के लिए सुविधाओं का खास इंतजाम इस स्थल पर पर्यटकों के लिए बैठने की व्यवस्था, नाश्ते की सुविधा और बच्चों के मनोरंजन के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं. पूरे परिसर में सुरक्षा के लिए CCTV कैमरे लगाए गए हैं और जंगली जानवरों से सुरक्षा हेतु घेराबंदी भी की गई है. साथ ही आकर्षक लाइटिंग इसे और भी सुंदर बनाएगी. पर्यटन और रोजगार को मिलेगी नई रफ्तार ‘गेटवे ऑफ वीटीआर’ के शुरू होने से वाल्मीकिनगर क्षेत्र में पर्यटन को नई पहचान मिलने की उम्मीद है. इससे न सिर्फ पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे.

रांची: नागपुरी गायक डॉ. लक्ष्मीकांत नारायण बड़ाईक को मिला ‘गुरु रत्न सम्मान 2026’

रांची  झारखंड के नागपुरी लोक संगीत जगत के प्रख्यात गायक डॉ. लक्ष्मीकांत नारायण बड़ाईक को वर्ष 2026 के प्रतिष्ठित “गुरु रत्न सम्मान” से सम्मानित किया गया है. यह सम्मान उन्हें 14 अप्रैल को “भारत के गवैयों” संस्था की ओर से प्रदान किया गया. डॉ. बड़ाईक को यह गौरव नागपुरी लोक संगीत के संरक्षण, संवर्धन और इसे वैश्विक मंचों तक पहुंचाने में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए दिया गया है. इस सम्मान समारोह ने झारखंड की सांस्कृतिक पहचान को एक नई मजबूती प्रदान की है. सांसद महुआ माजी ने की कलाकार की सराहना इस भव्य आयोजन में मुख्य अतिथि के रूप में राज्यसभा सांसद महुआ माजी उपस्थित रहीं. उन्होंने डॉ. बड़ाईक को सम्मानित करते हुए कहा कि ऐसे वरिष्ठ कलाकार हमारी संस्कृति और परंपरा के सच्चे संवाहक होते हैं. महुआ माजी ने अपने संबोधन में जोर देकर कहा कि लोक संगीत हमारी पहचान का अटूट हिस्सा है और डॉ. बड़ाईक जैसे व्यक्तित्व इसे युवा पीढ़ी के लिए सहेजकर रखने का महान कार्य कर रहे हैं. उन्होंने लोक कला को राजकीय और राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक प्रोत्साहन देने की बात कही. नागपुरी संगीत को वैश्विक पहचान दिलाने में भूमिका डॉ. लक्ष्मीकांत नारायण बड़ाईक लंबे समय से नागपुरी संगीत की जड़ों को सींचने में सक्रिय हैं. उन्होंने न केवल अपने गायन बल्कि अपनी मौलिक रचनाओं के माध्यम से भी झारखंड की लोक कला को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है. वे लगातार विभिन्न मंचों पर प्रस्तुति देकर लोक संगीत की मिठास को लोगों तक पहुंचा रहे हैं. उनकी विशिष्ट गायकी शैली ने न केवल दर्शकों का मन मोहा है, बल्कि कई युवाओं को अपनी जड़ों से जुड़ने के लिए प्रेरित भी किया है. सुरों की महफिल में उमड़े संगीत प्रेमी सम्मान समारोह के दौरान पूरा वातावरण नागपुरी धुनों से सराबोर रहा. इस अवसर पर कई गणमान्य व्यक्ति, प्रख्यात कलाकार और भारी संख्या में संगीत प्रेमी शामिल हुए. डॉ. बड़ाईक ने मंच से अपने कुछ लोकप्रिय नागपुरी गीतों की सुरीली प्रस्तुति भी दी, जिसे श्रोताओं ने भरपूर सराहा और तालियों की गड़गड़ाहट के साथ उनका स्वागत किया. इस सम्मान से पूरे नागपुरी संगीत जगत में खुशी की लहर दौड़ गई है और इसे राज्य की गौरवशाली विरासत के लिए एक सुखद क्षण माना जा रहा है.  

खेलगांव में बनकर तैयार स्केटिंग स्टेडियम, अब सड़क पर नहीं करना होगा अभ्यास

रांची  झारखंड के स्केटिंग के खिलाड़ियों के लिए अच्छी खबर है। खेलगांव के वेलोड्राम स्टेडियम के बगल में ईस्ट जोन का पहला स्केटिंग रिंक (स्टेडियम) लगभग बन कर तैयार हो चुका है। इसमें बस रेलिंग लगाने और पेंट करने का काम बचा हुआ है। वर्तमान में स्केटिंग के खिलाड़ियों को या तो सड़क पर अभ्यास करना पड़ता था या फिर किसी स्कूल के कैंपस का सहारा लेना पड़ता था। वहीं इस स्केटिंग रिंक में खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएं मिलेंगी। इसके पहले फेज का काम पूरा हो चुका है। दूसरे फेज में इस स्केटिंग रिंक में रोलर हॉकी स्केट बोर्ड, पेवेलियन और गैलरी की सुविधा उपलब्ध करायी जायेगी। खेलगांव में तैयार हो रहा है 4.15 करोड़ की लागत से स्केटिंग रिंक खेलगांव में चार करोड़ 15 लाख की लागत से इस स्केटिंग रिंक का निर्माण किया जा रहा है। पूरा स्टेडियम लगभग 12660.43 स्क्वायर फीट के क्षेत्र में तैयार किया गया है। जिसमें स्केटिंग रिंक, फ्री स्टाइल ग्राउंड सहित अंतरराष्ट्रीय स्तर की कई सुविधाएं होंगी। 2022 से इस रिंक को बनाने का काम शुरू किया गया है। लेकिन अभी तक केवल एक फेज का काम ही पूरा हो पाया है। जिसके तहत केवल स्केटिंग रिंक ही तैयार किया गया है। आने वाले समय में कई और सुविधाओं से इस पूरे स्टेडियम को लैस किया जायेगा। जिसके बाद इस स्टेडियम में एक साथ तीन इवेंट हो सकेंगे। संत जेवियर स्कूल में अभ्यास करते हैं खिलाड़ी वर्तमान में रांची जिला और आसपास के स्केटिंग के खिलाड़ी अभ्यास के लिए डोरंडा स्थित संत जेवियर स्कूल में जाते हैं।अंतरराष्ट्रीय स्तर के कोच राजेश राम का कहना है कि इस अंतरराष्ट्रीय स्तर के स्टेडियम के शुरू होने के बाद खिलाड़ियों को राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में अपनी प्रतिभा दिखाने में समस्या नहीं होगी। क्योंकि स्कूल में अभ्यास करने के बाद जब ये खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता के लिए किसी स्टेडियम में शामिल होते हैं तो उनको समस्याओं का सामना करना पड़ता है।जिसमें स्टेडियम का फर्श से लेकर स्पीड तक शामिल है। पांच खिलाड़ियों से हुई थी स्केटिंग की शुरुआत, अभी हैं 450 खिलाड़ी झारखंड की राजधानी रांची में स्केटिंग खेल की शुरुआत 2007 में संत जेवियर स्कूल से हुई थी। उस समय इस इवेंट में मात्र पांच ही खिलाड़ी थे। स्केटिंग कोच सुमित कुमार की मेहनत से लगभग 25 वर्ष में राज्य में कुल 450 रजिस्टर्ड खिलाड़ी हो चुके हैं। वहीं इन खिलाड़ियों में कुल 67 ऐसे खिलाड़ी हैं जिन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर पदक भी जीता है। इसमें राजेश राम, सुमंत, सोमनाथ मिंज, सुषमा टोप्पो, रवि रंजन और एलेक्स लकड़ा जैसे खिलाड़ी शामिल हैं। स्केटिंग रिंग नहीं होने के कारण इन खिलाड़ियों को बेहतर अभ्यास के लिए दूसरे राज्य भी जाना पड़ता है। जून में मिली है राष्ट्रीय स्तर प्रतियोगिता की मेजबानी, 2000 खिलाड़ी होंगे शामिल रोलर स्केटिंग एसोसिएशन ऑफ झारखंड को आगामी जून में राष्ट्रीय स्तर की रोलर स्केटिंग प्रतियोगिता की मेजबानी मिली है। इसमें पूरे देश से लगभग 2000 खिलाड़ी शामिल होंगे। एसोसिएशन के सचिव सुमित कुमार ने बताया कि इस आयोजन में देश भर के खिलाड़ी शामिल होंगे। अगर समय पर स्टेडियम में रेलिंग और पेंट हो जाता है तो यही पर आयोजन करवाया जायेगा।खेल विभाग को इसकी पूरी जानकारी प्रदान कर दी गयी है। जिसके बाद काम तेजी से हो रहा है। रोलर स्केटिंग एसोसिएशन ऑफ झारखंड के सचिव सुमित कुमार कहते हैं- खेलगांव में तैयार हो रहा स्केटिंग रिंक यहां के स्केटिंग के खिलाड़ियों के लिए लाइफलाइन साबित होगा। वर्तमान में खिलाड़ी या तो स्कूल में स्केटिंग का प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं या फिर रिंग रोड़ और मोरहाबादी की सड़कों पर। ये दोनों जगह खिलाड़ियों के अभ्यास के लिए सही नहीं है। लेकिन उनके बाद कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा है। स्टेडियम पूरी तरह तैयार हो जाने पर खिलाड़ियों को कहीं और जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। क्या कहते हैं राष्ट्रीय स्तर के मेडलिस्ट खिलाड़ी     स्कूल के ग्राउंड में अभ्यास करने में परेशानी होती है। ये ग्राउंड काफी छोटा है और जब हम राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोेगिता में जाते हैं तो इसका असर हमारी परफारमेंस पर पड़ता है। यदि हमें स्केटिंग रिंक मिल जायेगा तो हम राष्ट्रीय स्तर में बेहतर करने के साथ रिकार्ड भी बन सकते हैं।     -आदित्य रंजन, ईस्ट जोन में स्वर्ण     वर्तमान में हमें अभ्यास के लिए एक ही जगह मिलती है। वो है सेंट जेवियर स्कूल में एक जगह। ये काफी छोटी जगह है और यहां अभ्यास करने में परेशानी होती है। वहीं स्केटिंग रिंग के शुरू हो जाने पर हम प्रतिदिन बेहतर अभ्यास कर पायेंगे और झारखंड और देश के लिए मेडल भी जीत सकेंगे।     -अबीर गुप्ता, स्टेट चैंपियन व ईस्ट जोन में रजत     हमारे अभ्यास की शुरुआत इसी ग्राउंड से हुई है और यहीं से सीखकर हमने मेडल भी जीता है। लेकिन बेहतर अभ्यास के लिए रिंक होना जरूरी है। इससे हमारा स्पीड बेहतर होगा और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में हम बेहतर रिजल्ट दे सकेंगे।     -आरव प्रभात, ईस्ट जोन में स्वर्ण     एक बेहतर स्टेडियम की जरूरत तो शुरुआती दौर से होता है। लेकिन हमारे पास कोई विकल्प नहीं है इसलिए यहां पर अभ्यास करना पड़ता है। हम कभी-कभी स्मार्ट सिटी की सड़कों पर भी अभ्यास करते हैं लेकिन वहां खतरा अधिक है। स्टेडियम मिल जाने से हमें कहीं और भटकना नहीं पड़ेगा।     -हरीश कुमार, ईस्ट जोन में स्वर्ण  

Recruitment Scam: झारखंड पुलिस भर्ती में फर्जीवाड़ा, हर कैंडिडेट से 15 लाख की वसूली

रांची. उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा से संबद्ध फर्जी पेपर लीक मामले में झारखंड की रांची पुलिस ने गिरफ्तार 166 अभ्यर्थियों समेत गिरोह के सदस्यों को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में बिरसा मुंडा सेंट्रल जेल भेज दिया है। अब तक की पुलिस जांच में सामने आया है कि इस संगठित फर्जीवाड़े में झारखंड के 138 और बिहार के 21 अभ्यर्थी शामिल थे। इनमें सर्वाधिक संख्या झारखंड के ही गिरिडीह जिले के युवकों की बताई जा रही है। सभी अभ्यर्थियों को रांची के तमाड़ प्रखंड स्थित एक अर्द्धनिर्मित नर्सिंग होम में ठहराया गया था, जहां छापेमारी कर पुलिस ने उन्हें रविवार को गिरफ्तार किया था। एक कैंडिडेट से 15 लाख रुपये तक की वसूली रांची पुलिस के अनुसार, इस पूरे खेल का मास्टरमाइंड नर्सिंग होम का निर्माण करा रहा जमशेदपुर निवासी ठेकेदार गौरव सिंह है। उसने अभ्यर्थियों के रहने, खाने सहित सभी सुविधाएं उपलब्ध कराईं और इसके एवज में उनसे प्रति अभ्यर्थी 10 से 15 लाख रुपये की वसूली की गई। इस पूरे प्रकरण में पटना निवासी चुनचुन की भूमिका भी महत्वपूर्ण पाई गई है, जो अभ्यर्थियों को प्रश्नपत्र और उसके उत्तर उपलब्ध कराता था। वह दावा करता था कि परीक्षा लेने वाली एजेंसी से ही पेपर लीक हुआ है। गिरोह में विनोद कुमार, अरविंद चौधरी, विक्की साहू, गुलाब यादव, फिरोज, छोटू, अभिषेक यादव, आदित्य सिंह और अलफाज समेत कई शामिल थे, जो अभ्यर्थियों को लाने, ठहराने और पैसे वसूलने का काम करते थे। जांच में जुटी पुलिस  पुलिस ने क्रिस्टोफर नामक व्यक्ति को गिरोह का प्रमुख सदस्य बताया है, जो पैसों के लेन-देन और पूरी व्यवस्था संभालता था। जांच में यह भी खुलासा हुआ कि अभ्यर्थियों को पहले रांची के नामकुम स्थित दुर्गा सोरेन चौक पर बुलाया गया, जहां से उन्हें अलग-अलग वाहनों में तमाड़ पहुंचाया गया। इधर, सभी आरोपितों को सोमवार को चार वाहनों से कोर्ट ले जाया गया। एसएसपी राकेश रंजन ने बताया कि जांच और तेज की जाएगी। गिरोह के अन्य सदस्यों की गिरफ्तारी के लिए झारखंड और बिहार के विभिन्न जिलों में छापेमारी जारी है। साथ ही ठेकेदार गौरव सिंह की तलाश में जमशेदपुर में भी कार्रवाई की जा रही है।

नीतीश कुमार के राजनीतिक सफर की झलक, 21 साल में 10 बार बने सीएम, 6 बार इस्तीफा दिया

 पटना नीतीश कुमार मंगलवार को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे देंगे और गुरुवार को यानी 15 अप्रैल को बीजेपी के नेतृत्व वाली सरकार बन जाएगी. 2025 विधानसभा चुनाव में दो तिहाई से अधिक बहुमत से जीते NDA की सरकार बने अभी 5 महीने ही हुए थे कि एक बार फिर सरकार बनने की कवायद की जा रही है. इसके साथ बिहार में नीतीश कुमार के युग का अंत माना जा रहा है।  भारतीय राजनीति में नीतीश कुमार का सियासी सफर मील की पत्थर की तरह है, दो दशक से बिहार की राजनीति उनके इर्द-गिर्द सिमटी हुई है. पिछले चार साल से हर साल नीतीश कुमार शपथ ले रहे हैं।  साल 2005 में पहली बार नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री बने थे, उसके बाद से चार बार चुनाव हुए हैं, लेकिन नीतीश कुमार ने 10 बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है. ये अपने आपमें एक रिकॉर्ड है, लेकिन साथ ही छह बार मुख्यमंत्री से इस्तीफा देने का काम भी किया है, जो किसी भारतीय राजनेता के लिए अनोखा रिकार्ड है।  चार साल में चार बार नीतीश ने ली शपथ नीतीश कुमार ने 10 अप्रैल को राज्यसभा सांसद के रूप में शपथ ली है, उससे पहले नंवबर 2025 में मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी. इसके अलावा 2024 लोकसभा चुनाव से पहले नीतीश कुमार ने विपक्षी इंडिया गठबंधन से नाता तोड़कर बीजेपी के नेतृत्व वाले एनडीए से हाथ मिला लिया था।  जनवरी 2024 में नीतीश ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी. इससे पहले उन्होंने 2022 में उन्होंने बीजेपी के अगुवाई वाले एनडीए से गठबंधन तोड़कर आरजेडी और कांग्रेस के साथ हाथ मिला लिया था. इस तरह चार साल में चार बार शपथ लेने का रिकार्ड है, जिसमें तीन बार सीएम और एक बार राज्यसभा सांसद के रूप में शपथ लेने का काम किया।   10 बार सीएम बने और 6 बार इस्तीफा नीतीश कुमार साल 2000 में पहली बार बिहार के मुख्यमंत्री बने थे, लेकिन बहुमत साबित न कर पाने के चलते एक सप्ताह के बाद ही इस्तीफा दे दिया था. इसके बाद दोबारा 2005 में बिहार के मुख्यमंत्री बने तो उन्होंने अपनी सियासी जड़े ऐसी जमाई कि दो दशक तक बिहार की सत्ता उनके इर्द-गिर्द सिमटी रही है. इस तरह 10 बार सीएम पद की शपथ और 6 बार इस्तीफा देने  का यह दोहरा रिकॉर्ड नीतीश कुमार के नाम दर्ज है. यह सिर्फ सत्ता में बने रहने का ही नहीं बल्कि ऐसा पैटर्न दिखाता है कि पद छोड़ने के बाद भी उनकी राजनीतिक समीकरण ही सत्ता में बनाए रखा।  नीतीश कुमार पहली बार 3 मार्च, 2000 को मुख्यमंत्री बने थे, लेकिन वह सरकार सिर्फ़ कुछ ही दिनों तक चल पाई. ऐसे में बहुमत साबित करने में नाकाम रहने के बाद, उन्होंने 10 मार्च, 2000 को इस्तीफ़ा दे दिया. हालांकि, इस शुरुआती असफलता से उनके राजनीतिक उभार पर कोई रोक नहीं लगी. 2005 में, वह दोबारा सत्ता में लौटे और तब से लेकर अब तक बिहार की राजनीति में एक केंद्रीय हस्ती बने हुए हैं।  2005 के बाद से सत्ता की धुरी बने नीतीश  साल 2005 के बाद से बिहार की राजनीति के नीतीश कुमार सियासी धुरी बने हुए हैं. 2005  से उनकी राजनीतिक यात्रा एक चक्र की तरह चलती रही है इस्तीफ़ा देना, नए गठबंधन बनाना और फिर सत्ता में लौटना. समय के साथ यह पैटर्न और भी साफ़ होता गया. साल 2010 में नीतीश कुमार तीसरी बार बिहार के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली थी, लेकिन 2013 में बीजेपी के साथ उनके रिश्ते खराब हो गए।  साल 2014 में, लोकसभा चुनावों में अपनी पार्टी के ख़राब प्रदर्शन की नैतिक ज़िम्मेदारी लेते हुए नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा दे दिया, लेकिन फ़रवरी 2015 में, जीतन राम मांझी को हटाकर, उन्होंने चौथी बार फिर से मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली.  साल 2015 में, विधानसभा चुनावों के बाद, RJD के साथ गठबंधन करके उन्होंने पांचवीं बार बिहार के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली।  2017 में, 'महागठबंधन' से रिश्ते तोड़ने के बाद उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा दे दिया,  लेकिन कुछ ही घंटों के भीतर, NDA के साथ मिलकर छठी बार मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ लेते हुए वह दोबारा सत्ता में लौट आए. 2020 के विधानसभा चुनावों के बाद उन्होंने 7वीं बार CM पद की शपथ ली. 2022 में, उन्होंने NDA छोड़कर और विपक्षी पार्टियों के साथ मिलकर सरकार बनाते हुए फिर से इस्तीफ़ा दे दिया, और 8वीं बार CM पद की शपथ ली।  2024 में भी यही सिलसिला फिर दोहराया गया, जब उन्होंने महागठबंधन छोड़ दिया और वापस NDA में चले गए. इस तरह नीतीश कुमार 9वीं बार CM पद की शपथ ली; और आख़िरकार, 2025 के विधानसभा चुनावों के बाद उन्होंने 10वीं बार बिहार के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ लेने का काम किया. इस तरह उन्होंने एक रिकार्ड अपने नाम किया।  नीतीश कुमार के हर इस्तीफा सियासी चाल नीतीश कुमार ने अपने सियासी सफर में इस्तीफा देने का रास्ता सिर्फ  एक राजनीतिक मजबूरी नहीं, बल्कि एक रणनीतिक चाल भी थी. इसने नीतीश कुमार को अपने गठबंधन नए सिरे से बनाने और सत्ता में बने रहने का मौक़ा दिया. इसीलिए उनका रिकॉर्ड सिर्फ़ आंकड़ों के बारे में नहीं, बल्कि राजनीति की एक अनोखी शैली के बारे में है।  नीतीश के राजनीति में एक और अहम बात इस कहानी को एक नया पहलू देती है. नीतीश कुमार ने कभी भी अपनी पार्टी की ताक़त पर अकेले दम पर पूर्ण बहुमत हासिल नहीं किया है. उनकी पार्टी, जनता दल (यूनाइटेड), सरकार बनाने के लिए हमेशा अपने गठबंधन सहयोगियों पर निर्भर रही है. चाहे वह NDA के तहत भारतीय जनता पार्टी के साथ हो, या महागठबंधन में राष्ट्रीय जनता दल और कांग्रेस के साथ, गठबंधन ही उनके शासन की रीढ़ रहे हैं।  नीतीश को अकेले दम बहुमत नहीं मिला नीतीश कुमार भले ही 21 साल तक बिहार की राजनीति के बेताज बादशाह रहे हों, लेकिन एक बार भी अपने दम पर बहुमत का आंकड़ा हासिल नहीं कर सके. 2010 में भी, जब उनकी सरकार को बहुत मज़बूत माना जा रहा था, तब भी जीत गठबंधन की थी, न कि अकेले JD(U) की. 2010 में JD(U) ने 115 सीटें हासिल की थीं. जो पिछले 20 सालों में JD(U) … Read more

सीमित प्रतियोगिता परीक्षा से होगी पदोन्नति, नई नियमावली 2026 जारी

रांची  झारखंड सरकार ने चतुर्थ वर्गीय कर्मचारियों के लिए बड़ा फैसला लिया है. अब राज्य में कार्यरत हजारों ग्रुप ‘घ’ कर्मियों को ग्रुप ‘ग’ के पदों पर प्रोन्नति का अवसर मिलेगा. इस निर्णय से लंबे समय से पदोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे कर्मचारियों में खुशी की लहर है. यह कदम कर्मचारियों के करियर विकास और प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है. किन पदों पर मिलेगी प्रोन्नति नए प्रावधान के तहत चतुर्थ वर्गीय कर्मियों को निम्न वर्गीय लिपिक (एलडीसी) के पद पर प्रोन्नत किया जाएगा. वहीं, सचिवालय में कार्यरत कर्मचारियों को कनीय सचिवालय सहायक के पद पर पदोन्नति का लाभ मिलेगा. इससे कर्मचारियों को बेहतर जिम्मेदारी और कार्यक्षेत्र मिलेगा. साथ ही, उनके वेतन और पद की गरिमा में भी वृद्धि होगी. सीमित प्रतियोगिता परीक्षा से होगा चयन सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह पदोन्नति सीमित प्रतियोगिता परीक्षा के माध्यम से दी जाएगी. यह परीक्षा पूरी तरह से ऑनलाइन आयोजित होगी, जिससे पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित की जा सके. कुल रिक्त पदों के 15 प्रतिशत हिस्से पर इस परीक्षा के जरिए प्रोन्नति दी जाएगी. इससे योग्य और सक्षम कर्मचारियों को आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा. नई नियमावली 2026 जारी कार्मिक, प्रशासनिक सुधार एवं राजभाषा विभाग ने ‘सीमित प्रतियोगिता ऑनलाइन परीक्षा नियमावली 2026’ जारी कर दी है. इस नियमावली में प्रोन्नति से संबंधित सभी दिशा-निर्देश और पात्रता मानदंड तय किए गए हैं. साथ ही परीक्षा के पैटर्न और प्रक्रिया की भी स्पष्ट जानकारी दी गई है, ताकि उम्मीदवार पहले से तैयारी कर सकें. शैक्षणिक योग्यता क्या होगी प्रोन्नति के लिए अलग-अलग पदों के अनुसार शैक्षणिक योग्यता निर्धारित की गई है. कनीय सचिवालय सहायक बनने के लिए किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से स्नातक की डिग्री अनिवार्य होगी. वहीं, समाहरणालय और अन्य कार्यालयों में कनीय लिपिक के पद के लिए इंटरमीडिएट या 10+2 पास होना जरूरी होगा. इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि पदोन्नति के बाद कर्मचारी जिम्मेदारियों को बेहतर ढंग से निभा सकें. कर्मचारियों को मिलेगा करियर ग्रोथ का अवसर इस फैसले से चतुर्थ वर्गीय कर्मचारियों को अपने करियर में आगे बढ़ने का सुनहरा अवसर मिलेगा. लंबे समय से एक ही पद पर कार्यरत कर्मचारियों के लिए यह निर्णय उत्साहवर्धक साबित होगा. इससे न केवल उनकी कार्यक्षमता बढ़ेगी, बल्कि प्रशासनिक कार्यों में भी सुधार आएगा. पारदर्शिता और दक्षता पर जोर ऑनलाइन परीक्षा और स्पष्ट नियमावली के जरिए सरकार ने पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने पर जोर दिया है. इससे भ्रष्टाचार और पक्षपात की संभावनाएं कम होंगी. साथ ही योग्य कर्मचारियों को उनके प्रदर्शन के आधार पर आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा, जो राज्य की प्रशासनिक दक्षता को और मजबूत करेगा.

गैस संकट से राहत की उम्मीद, एचईसी कॉलोनी में पहुंचे गेल अधिकारी

रांची झारखंड की राजधानी रांची स्थित एचईसी (हेवी इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन) परिसर में जारी एलपीजी संकट के बीच अब राहत की उम्मीद दिखाई देने लगी है. मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध के कारण एलपीजी आपूर्ति पर असर पड़ा है, जिससे एचइसी कॉलोनी के हजारों परिवार प्रभावित हो रहे हैं. इसी बीच पीएनजी (पाइप्ड नेचुरल गैस) कनेक्शन की तैयारी शुरू होने से लोगों में राहत की उम्मीद जगी है. खबर के असर से सक्रिय हुए अधिकारी एचईसी में गैस संकट को लेकर प्रकाशित खबर के बाद प्रशासन और संबंधित एजेंसियां सक्रिय हो गई हैं. “महज एक माह का बचा है गैस” शीर्षक खबर सामने आने के बाद हालात की गंभीरता को समझते हुए तत्काल कदम उठाए जाने लगे. इसके बाद गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (गेल) के अधिकारी एचइसी परिसर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया. पीएनजी कनेक्शन का प्रस्ताव गेल के अधिकारियों ने एचईसी आवासीय परिसर में पीएनजी कनेक्शन उपलब्ध कराने का प्रस्ताव दिया है. इस योजना के तहत पूरे कॉलोनी क्षेत्र में पाइपलाइन बिछाने की बात कही गई है. अधिकारियों ने एचइसी प्रबंधन से इसके लिए आवश्यक अनुमति और एनओसी की मांग की है, ताकि परियोजना पर काम शुरू किया जा सके. 11 हजार से अधिक परिवारों को मिलेगा लाभ एचईसी आवासीय परिसर में 11 हजार से अधिक क्वार्टर हैं, जहां बड़ी संख्या में कर्मचारी और उनके परिवार रहते हैं. वर्तमान में एलपीजी की कमी के कारण उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है. यदि पीएनजी योजना लागू होती है, तो इन सभी परिवारों को नियमित और निर्बाध गैस आपूर्ति मिल सकेगी, जिससे उनकी दैनिक जरूरतें आसान हो जाएंगी. औद्योगिक इकाई को भी मिलेगा फायदा यह योजना केवल घरेलू उपयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि एचइसी की औद्योगिक इकाइयों के लिए भी महत्वपूर्ण है. फाउंड्री फोर्ज प्लांट (एफएफपी) यूनिट में फर्नेस संचालन के लिए एलपीजी का उपयोग किया जाता है. यहां फोर्जिंग और हीट ट्रीटमेंट जैसे महत्वपूर्ण कार्य किए जाते हैं. पीएनजी कनेक्शन मिलने से उत्पादन प्रक्रिया अधिक सुचारू और स्थिर हो सकेगी. प्रबंधन की तैयारी और अनुमति प्रक्रिया एचईसी प्रबंधन ने बताया है कि गेल के प्रस्ताव पर जल्द ही एनओसी जारी करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी. जैसे ही अनुमति मिलती है, पाइपलाइन बिछाने का कार्य शुरू किया जा सकता है. प्रशासन का मानना है कि यह योजना न केवल घरेलू गैस संकट को दूर करेगी, बल्कि औद्योगिक उत्पादन को भी स्थिरता प्रदान करेगी. लोगों में राहत की उम्मीद लगातार गैस संकट से जूझ रहे एचईसी के लोगों के लिए यह प्रस्ताव बड़ी राहत लेकर आया है. कॉलोनी के निवासियों का कहना है कि यदि पीएनजी सुविधा शुरू हो जाती है, तो उन्हें एलपीजी सिलेंडर की कमी और महंगाई से छुटकारा मिल जाएगा. इससे उनकी रोजमर्रा की जिंदगी आसान हो जाएगी. भविष्य में स्थायी समाधान की दिशा विशेषज्ञों का मानना है कि पीएनजी कनेक्शन की यह पहल एचईसी के लिए एक स्थायी समाधान साबित हो सकती है. इससे न केवल वर्तमान गैस संकट समाप्त होगा, बल्कि भविष्य में भी ऊर्जा आपूर्ति अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद बन सकेगी. यह कदम एचइसी के विकास और स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

बिहार में सम्राट चौधरी होंगे अगले सीएम, बीजेपी ने चुना विधायक दल का नेता, कल शपथ ग्रहण समारोह

पटना बिहार की राजनीति के लिए 14 अप्रैल 2026 का दिन ऐतिहासिक बदलाव का गवाह बना है. करीब दो दशकों तक बिहार की सत्ता के केंद्र रहे नीतीश कुमार के बाद  सम्राट चौधरी के नेतृत्व में नई सरकार बनने का रास्ता साफ हो चुका है. शपथ ग्रहण 15 अप्रैल को होने जा रहा है. राजनीति के जानकारों की नजर में भाजपा के लिए यह एक बड़ी उपलब्धि है, क्योंकि बिहार में लंबे समय बाद वह मुख्यमंत्री की कुर्सी पर काबिज होगी. स्पष्ट है कि इन राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच बिहार की बदलती सियासी तस्वीर में सम्राट चौधरी एक बेहद अहम चेहरा बनकर उभरे हैं।  सम्राट चौधरी होंगे बिहार के अगले मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ही बिहार के अगले मुख्यमंत्री होंगे. उन्हें ​बीजेपी विधायक दल का नेता चुना गया है. पटना में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की मौजूदगी में हुई बीजेपी विधानमंडल की बैठक में विजय सिन्हा, मंगल पांडे और दिलीप जायसवाल ने भाजपा विधायक दल के नेता के रूप में सम्राट चौधरी के नाम का प्रस्ताव रखा. सम्राट चौधरी थोड़ी देर में राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) सैयद अता हसनैन से मुलाकात करेंगे और सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे।  बिहार में अब नई सरकार काम करेगी- नीतीश कुमार उन्होंने आगे कहा, 'इन दिनों काम को और आगे बढ़ाया गया है. अगले पांच वर्षों यानि 2025 से 2030 के लिए 7 निश्चय-3 का गठन किया गया है. इससे और ज्यादा काम होगा जिससे बिहार काफी आगे बढ़ेगा. बिहार के विकास में केन्द्र का भी पूरा सहयोग मिल रहा है. इसके लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का नमन करते हैं. बिहार और तेजी से विकसित होगा और देश के टॉप राज्यों में शामिल हो जाएगा तथा देश की प्रगति में महत्वपूर्ण योगदान देगा. हमने बिहार के लोगों के लिए बहुत काम किया है. इतने दिनों से हमने लगातार लोगों की सेवा की है. हमने तय किया था कि अब मुख्यमंत्री का पद छोड़ देंगे और इसलिए आज मंत्रिमंडल की बैठक के बाद माननीय राज्यपाल से मिलकर उन्हें इस्तीफा सौंप दिया. अब नई सरकार यहां का काम देखेगी. नई सरकार को मेरा पूरा सहयोग एवं मार्गदर्शन रहेगा. आगे भी बहुत अच्छा काम होगा तथा बिहार बहुत आगे बढ़ेगा. सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद करता हूं तथा शुभकामनाएं देता हूं।  हमने बिहार के लोगों के लिए बहुत काम किया- नीतीश कुमार नीतीश कुमार के इस्तीफे के साथ बिहार में एक राजनीतिक युग का अंत हो गया है. उन्होंने राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंप दिया है. सम्राट चौधरी बिहार के अगले मुख्यमंत्री हो सकते हैं. इस्तीफे के बाद नीतीश कुमार ने X पर एक पोस्ट में अपने कार्यकाल की उप​लब्धियों का जिक्र किया. उन्होंने लिखा, 'आप जानते हैं कि 24 नवंबर, 2005 को राज्य में पहली बार एनडीए सरकार बनी थी. तब से राज्य में कानून का राज है और हम लगातार विकास के काम में लगे हुए हैं. सरकार ने शुरू से ही सभी तबकों का विकास किया है चाहे हिंदू हो, मुस्लिम हो, अपर कास्ट हो, पिछड़ा हो, अति पिछड़ा हो, दलित हो, महादलित हो- सभी के लिए काम किया गया है. हर क्षेत्र में काम हुआ है चाहे शिक्षा हो, स्वास्थ्य हो, सड़क हो, बिजली हो, कृषि हो. महिलाओं एवं युवाओं के लिए भी बहुत काम किया गया है।  बता दें कि कभी राजद और जदयू के सिपाही रहे सम्राट आज भाजपा के उस ‘किंग’ की भूमिका में नजर आएंगे, जिन्होंने नीतीश कुमार के साथ सत्ता की साझेदारी में अपनी एक अलग और मजबूत पहचान बनाई है।  विरासत और शुरुआती संघर्ष सम्राट चौधरी को राजनीति विरासत में मिली है. उनके पिता शकुनी चौधरी बिहार के कद्दावर नेताओं में गिने जाते थे. सम्राट चौधरी ने 1990 में सक्रिय राजनीति में कदम रखा और महज 31 साल की उम्र में 1999 में कृषि मंत्री बनकर अपनी धमक दिखाई. परबत्ता विधानसभा क्षेत्र से उनकी जीत ने उन्हें राज्य की राजनीति में स्थापित कर दिया। राजनीतिक करियर की मुख्य उपलब्धियां     19 मई 1999: बिहार सरकार में कृषि मंत्री के पद की शपथ ली.     2000-2010: परबत्ता विधानसभा क्षेत्र से लगातार चुनाव लड़ा और जीता.     2010: बिहार विधानसभा में विपक्षी दल के मुख्य सचेतक बनाए गए.     2 जून 2014: शहरी विकास और आवास विभाग के मंत्री पद की शपथ ली. बदलता राजनीतिक पाला और भाजपा में उदय इसके बाद सम्राट चौधरी ने भाजपा का रास्ता चुना. राजद और जदयू में रहने के बाद सम्राट चौधरी का भाजपा में शामिल होना उनके करियर का ‘टर्निंग पॉइंट’ साबित हुआ. वर्ष 2018 में भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें बिहार प्रदेश का उपाध्यक्ष बनाया. उन्होंने विधान परिषद में भी विरोधी दल के नेता की भूमिका निभाई. 2023 के मार्च महीने में वे भाजपा के बिहार प्रदेश अध्यक्ष बनाए गए, जो इस बात का संकेत था कि आलाकमान उन पर बड़ा दांव खेलने जा रहा है. फिर जनवरी 2024 में उन्हें बिहार का उपमुख्यमंत्री (डिप्टी सीएम) बनाया गया. इसके बाद दुबारा 20 नवंबर 2025 को उन्होंने फिर से डिप्टी सीएम पद की शपथ ली।  मुरैठा (पगड़ी) की प्रतिज्ञा बता दें कि भाजपा में आने के बाद शुरुआती दौर में वह नीतीश कुमार के विरोधी नेता के तौर पर उभरे और उन्होंने संकल्प लिया था कि जब तक नीतीश कुमार को सत्ता से बाहर नहीं करेंगे, वे अपनी पगड़ी नहीं खोलेंगे. हालांकि, बदलते समीकरणों के साथ वे आज नीतीश सरकार में ही डिप्टी सीएम की भूमिका निभाते रहे हैं.सम्राट चौधीरी ने जब नीतीश कुमार को हटाने का संकल्प लिया था और मुरेठा नहीं उतारने का वचन लिया था तो वह काफी चर्चा में रहे थे।  मौजूदा दौर की राजनीति में क्यों हैं खास? बता दें कि सम्राट चौधरी लव-कुश (कुर्मी-कोइरी) समीकरण के ‘कुश’ समुदाय से आते हैं. भाजपा उनके जरिए बिहार के एक बड़े पिछड़ा वर्ग वोट बैंक को अपने पाले में करने की कोशिश कर रही है. वे विपक्ष और सहयोगियों, दोनों के सामने अपनी बात बेबाकी से रखने के लिए जाने जाते हैं।  सत्ता में दोहरा कार्यकाल यहां यह भी बता दें कि पहली बार जनवरी 2024 और फिर 20 नवंबर 2025 को दोबारा डिप्टी सीएम बने थे. भाजपा की राजनीति की दृष्टि से देखिये तो यह दर्शाता है कि भाजपा के भीतर और … Read more

झारखंड बोर्ड 11वीं का रिजल्ट जारी, 3.55 लाख छात्र सफल

रांची झारखंड अकैडमिक काउंसिल (JAC) ने आज कक्षा 11वीं परीक्षा 2026 का रिजल्ट जारी कर दिया है. इस साल कुल 3,58,533 स्टूडेंट्स परीक्षा में शामिल हुए थे, जिनमें 3,55,399 छात्र पास हो गए. जैक बोर्ड 11वी कक्षा का पासिंग प्रतिशत 99.12% रहा. झारखंड के स्टूडेंट्स ने किया शानदार प्रदर्शन झारखंड बोर्ड के अनुसार, इस साल सभी प्रमंडलों और जिलों में स्टूडेंट्स का प्रदर्शन काफी बेहतर रहा. कुल 3,61,683 छात्रों ने रजिस्ट्रेशन कराया था, जिनमें से 3,58,533 परीक्षा में शामिल हुए. कैसे देखें JAC 11वीं रिजल्ट?     सबसे पहले ऑफिशियल वेबसाइट jacresults.com पर जाएं     होम पेज पर “JAC 11th Result 2026” लिंक पर क्लिक करें     अपना रोल नंबर और रोल कोड डालें     सबमिट करते ही रिजल्ट स्क्रीन पर दिख जाएगा     इसे डाउनलोड करें और प्रिंट निकाल लें 3 लाख से ज्यादा स्टूडेंट्स ने किया था अप्लाई परिषद के अनुसार, इस साल सभी प्रमंडलों और जिलों में छात्रों का प्रदर्शन काफी बेहतर रहा. कुल 3,61,683 छात्रों ने रजिस्ट्रेशन कराया था, जिनमें से 3,58,533 परीक्षा में शामिल हुए. JAC अध्यक्ष ने स्कूल, शिक्षक और स्टूडेंट्स को दी बधाई रिजल्ट जारी करते हुए अध्यक्ष डॉ. नटवा हंसदा ने छात्रों, अभिभावकों, शिक्षकों और स्कूल प्रबंधन को बधाई दी. उन्होंने परीक्षा को सफलतापूर्वक आयोजित कराने में जुटे जिला शिक्षा अधिकारियों, प्राचार्यों और कर्मचारियों के प्रयासों की सराहना की. साथ ही जो छात्र सफल नहीं हो सके, उनसे अगली बार बेहतर प्रदर्शन करने की अपील भी की. फरवरी में हुई थी परीक्षा यह परीक्षा 25 से 28 फरवरी 2026 के बीच राज्यभर में आयोजित की गई थी. रिजल्ट की घोषणा रांची स्थित परिषद मुख्यालय में जैक के अध्यक्ष की मौजूदगी में की गई, जहां सचिव, परीक्षा नियंत्रक और वरिष्ठ सूचना अधिकारी भी मौजूद रहे.