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बिहार बाढ़: 190 सामुदायिक रसोई में 2.51 लाख लोगों को मिल रहा भोजन, 1429 नावें तैनात

पटना राज्य में बाढ़ की वजह से 22 लाख से ज्यादा आबादी प्रभावित है। इस स्थिति से निपटने के लिए राहत और बचाव कार्यों का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है। नदियों के जलस्तर में हुई वृद्धि और बाढ़ की चुनौती से निपटने की दिशा में आपदा प्रबंधन विभाग पूरी तत्परता से जुटा हुआ है। व्यापक राहत अभियानों के तहत बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में 190 सामुदायिक रसोई केंद्रों का सफल संचालन किया जा रहा है। इनके माध्यम से अब तक लगभग 2.51 लाख लोगों को भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। सरकार का स्पष्ट लक्ष्य है कि इस आपदा की घड़ी में राज्य का कोई भी प्रभावित नागरिक भूखा न रहे और हर पीड़ित तक त्वरित सहायता पहुंचे। 12 जिलों में लोगों का जनजीवन अस्त-व्यस्त 12 जिलों पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय एवं अरवल के 70 प्रखंडों की 368 ग्राम पंचायतों में लगभग 22.42 लाख आबादी बाढ़ से प्रभावित हुई है। पांच सितंबर को संचालित 80 सामुदायिक रसोइयों की संख्या को बढ़ाकर रविवार को 190 कर दिया गया है। इसके अतिरिक्त तीन राहत शिविरों का भी संचालन किया जा रहा है। यहां 1631 बाढ़ शरणार्थियों के लिए आवासन, भोजन एवं अन्य बुनियादी सुविधाएं दी गई हैं। विभाग की ओर से अब तक प्रभावित परिवारों के बीच लगभग 65,700 पालीथीन शीट तथा 12,712 ड्राई राशन पैकेट बांटे जा चुके हैं। इसी तरह ड्राई राशन पैकेट का वितरण भी 11,700 से बढ़कर 12,712 हो गया है। 1429 नावों का हो रहा परिचालन   प्रभावित क्षेत्रों में लोगों के सुरक्षित आवागमन के लिए 1,429 नावों का परिचालन कराया जा रहा है, जबकि प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल के लिए चलाए जा रहे चिकित्सा शिविरों की संख्या 118 से बढ़ाकर 171 कर दी गई है। राहत अभियानों को मजबूती देने के लिए एनडीआरएफ की 10 टीमों और एसडीआरएफ की 27 टीमों को विभिन्न जिलों में तैनात किया गया है। नदियों के जलस्तर की बात करें तो केंद्रीय जल आयोग के अनुसार गंडक, कोसी, बूढ़ी गंडक, गंगा, पुनपुन, बागमती और घाघरा नदियां विभिन्न स्थलों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। गंडक (वाल्मीकिनगर) और सोन (इंद्रपुरी) बराजों पर जलस्राव की प्रवृत्ति फिलहाल स्थिर बनी हुई है। बिहार मौसम सेवा केंद्र के अनुसार अगले दो दिनों में राज्य के अनेक स्थानों पर हल्की से मध्यम तथा कुछ स्थानों पर भारी वर्षा की संभावना जताई गई है।  

हिंदपीढ़ी के 34 मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश? फॉर्म-7 को लेकर SDM से शिकायत

रांची  विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाने को लेकर रांची में विवाद खड़ा हो गया है। हिंदपीढ़ी क्षेत्र के मतदाताओं ने आरोप लगाया है कि उनके नाम मतदाता सूची से हटाने की साजिश के तहत फार्म-7 के माध्यम से आवेदन दिया गया है। शिकायत के अनुसार, रांची विधानसभा क्षेत्र के भाग संख्या 226 में रहने वाले 34 मतदाताओं को फार्म-7 में अनुपस्थित या अस्थायी रूप से स्थानांतरित बताया गया है, जबकि संबंधित मतदाताओं का दावा है कि वे पिछले कई वर्षों से अपने स्थायी पते पर रह रहे हैं। मामले को लेकर मतदाताओं की ओर से रांची के एसडीएम को लिखित शिकायत दी गई है। शिकायतकर्ताओं ने पूरे मामले की जांच कर दोषी के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है। उन्हें जांच का आश्वासन दिया गया है। स्थायी पते पर रह रहे, फिर कैसे बताया अनुपस्थित शिकायतकर्ताओं का कहना है कि SIR के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए फार्म-7 का इस्तेमाल किया गया। आरोप है कि बीएलए-2 मो. यासीन अली के माध्यम से 34 लोगों के नाम हटाने के लिए आवेदन दिया गया। फॉर्म-7 में इन मतदाताओं को अनुपस्थित अथवा अस्थायी रूप से स्थानांतरित बताया गया है। मतदाताओं का कहना है कि संबंधित सभी लोग हिंदपीढ़ी में अपने स्थायी पते पर रह रहे हैं। ऐसे में उन्हें अनुपस्थित या स्थानांतरित बताकर नाम हटाने की प्रक्रिया शुरू किए जाने पर सवाल उठ रहे हैं। शिकायतकर्ताओं ने कहा कि यदि वे उसी पते पर रह रहे हैं और नियमित रूप से क्षेत्र में मौजूद हैं, तो उनके नाम हटाने के लिए इस तरह का आवेदन किस आधार पर दिया गया, इसकी जांच होनी चाहिए। नियम के तहत कार्रवाई की मांग शिकायत में फार्म-7 से संबंधित प्रावधानों का हवाला देते हुए नियम 13(2) और 26 के तहत कार्रवाई की मांग की गई है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि मतदाता सूची में किसी व्यक्ति का नाम हटाना गंभीर मामला है। यदि गलत सूचना देकर या किसी साजिश के तहत नाम हटाने का प्रयास किया गया है तो इसकी जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। हम यहीं रह रहे हैं, फिर नाम क्यों हटाया… शिकायतकर्ताओं का कहना है कि मतदाता सूची में नाम हटाने की प्रक्रिया से लोगों में चिंता है। उनका सवाल है कि जब वे जिंदा हैं और वर्षों से इसी पते पर रह रहे हैं, तो हमें अनुपस्थित या स्थानांतरित बताकर मतदाता सूची से नाम हटाने का प्रयास क्यों किया जा रहा है। प्रशासन की ओर से मामले की जांच कराने का आश्वासन दिया गया है। अब जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि फार्म-7 में दी गई जानकारी किस आधार पर दर्ज की गई और इसके पीछे कोई गलती है या जानबूझकर नाम हटाने का प्रयास।

सोलर सेक्टर में रोजगार का बड़ा मौका, बिहार के 11 हजार युवाओं को मिली खास ट्रेनिंग

पटना बिहार और केंद्र सरकार की ओर से गैर परम्परागत ऊर्जा को बढ़ावा दिए जाने की नीति को देखते हुए राज्य के बेरोजगारों को सोलर प्लेट के रखरखाव का विशेष प्रशिक्षण दिया जाने लगा है। युवा रोजगार एवं कौशल विकास विभाग की ओर से अब तक 11 हजार से अधिक लोगों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इसमें से अधिकतर को काम मिल गया है और वे देश-प्रदेश के विभिन्न कंपनियों में 20-25 हजार तक मासिक की आमदनी कर रहे हैं। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत लोगों की छतों पर सोलर प्लेट लगाए जा रहे हैं। बिहार में एक-दो साल के भीतर लाखों लोगों के घरों की छतों पर सोलर प्लेट लगाने का लक्ष्य है। इन सोलर प्लेट के रखरखाव की जिम्मेवारी संबंधित एजेंसियों की पांच साल तक होगी। लेकिन एजेंसियों को इसके रखरखाव के लिए प्रशिक्षित मैनपावर की आवश्यकता होगी। इसी के मद्देनजर विभाग ने कुशल कार्यबल तैयार करने की रणनीति पर काम शुरू कर दिया। 104 प्रशिक्षण केंद्र बनाए गए युवाओं की ट्रेनिंग के लिए राज्य के औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) के 87 प्रशिक्षकों का चयन किया गया। कुल 104 प्रशिक्षण केंद्र बनाए गए हैं। इन केंद्रों में सोलर प्लेट के रखरखाव का बुनियादी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। यहां से निकले युवाओं को आसानी से काम मिल रहा है। ऑन जॉब ट्रेनिंग के तहत ट्रेनिंग के साथ कमाई पिछले वर्ष यह प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया गया था। विभाग का लक्ष्य था कि कम से कम 10 हजार लोगों को प्रशिक्षित किया जाए। लेकिन लक्ष्य से कहीं अधिक 11 हजार से अधिक लोगों को सोलर प्लेट के रखरखाव का प्रशिक्षण दिया गया है। वहीं जो पहले से जो इस क्षेत्र में काम कर रहे थे यानी ऑन जॉब ट्रेनिंग के तहत भी 10 हजार से अधिक लोगों को प्रशिक्षण दिया गया है। इसके अलावा विभाग असंगठित क्षेत्र के कामगारों को प्रशिक्षण के बाद प्रमाण पत्र भी दे रहा है। प्रमाणीकरण के लिए ब्रिज कोर्स रिकोग्निशन ऑफ प्रायर लर्निंग (आरपीएल) के तहत असंगठित क्षेत्र में उपलब्ध कौशल के प्रमाणीकरण के लिए ब्रिज कोर्स चला रहा है। इसके तहत 12 घंटे का उन्मुखीकरण एवं तत्पश्चात अधिकतम 68 घंटे का प्रशिक्षण ब्रिज कोर्स के तहत दिया जा रहा है। 15 से 59 वर्ष के लोगों को यह प्रशिक्षण दिया जा रहा है। 46 हजार से अधिक लोगों ने नामांकन लिया जिसमें से 98 फीसदी लोगों को प्रशिक्षित कर दिया गया। जबकि 28 हजार से अधिक लोगों को प्रमाण पत्र भी दे दिया गया है।

Major relief for villagers in Bihar: The decision to levy holding tax on pucca and semi-pucca houses will be reversed.

पटना बिहार के लोगों को सम्राट चौधरी सरकार बड़ी राहत देने जा रही है। बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में अब सिर्फ व्यावसायिक कर ही लगेगा। गांवों और कस्बों में कच्चा मकान को छोड़ पक्का और अर्धपक्का मकान से होल्डिंग टैक्स (मकान कर) वसूलने के फैसले को सरकार वापस लेने जा रही है। इससे ग्रामीण इलाकों के लगभग 8 करोड़ से अधिक लोगों को राहत मिलेगी। पंचायती राज विभाग ग्रामीणों से शुल्क वसूली के प्रावधानों में संशोधन कर रहा है। संशोधन के बाद यह नया प्रावधान लागू होगा। ग्रामीण क्षेत्रों में दो दर्जन से अधिक तरह के टैक्स लेने के प्रस्ताव पर 15 जुलाई को राज्य कैबिनेट की मुहर लगी थी। लेकिन अभी तक गजट प्रकाशित नहीं किया गया है। पंचायती राज विभाग ने इसकी अधिसूचना भी जारी नहीं की है। आवासीय मकानों से शुल्क वसूली संबंधी संशोधन से गांवों के किसान, मजदूर और गरीबों को राहत मिलेगी। सरकार के फैसले से लोगों में चौतरफा नाराजगी थी। विपक्ष भी इस मुद्दे को भुनाने की कोशिश कर रहा था। इसलिए राज्य सरकार त्रि-स्तरीय पंचायती राज संस्थानों से जुड़े ग्रामीण इलाकों में नया कर वसूली के प्रावधानों को संशोधन के बाद ही लागू करने की तैयारी कर रही है। पीएम आवास योजना के तहत बने गरीबों के घरों के लिए सालाना होल्डिंग टैक्स सबंधित विभाग (ग्रामीण विकास विभाग) से लेना था, पर इस प्रावधान को भी हटाने की तैयारी है। पंचायत क्षेत्रों में व्यावसायिक मकान निर्माण कार्य के लिए आवश्यकतानुसार पंचायतों को कर वसूलने का हक होगा। पंचायतों का राजस्व बढ़ेगा व्यावसायिक, औद्योगिक व संस्थागत उपयोग वाले भवन पर 100 रुपये से 5 हजार रुपये तक सालाना कर लगना है। पेशा शुल्क भी लगेगा। व्यावसायी द्वारा स्थापित चावल मिल जिसकी क्षमता 2 टन प्रति घंटा से अधिक है, उस पर कर का प्रावधान है। सिनेमा हॉल, विवाह भवन, होटल, पेट्रोल पंप और रसोई गैस एजेंसी पर सालाना 5 हजार रुपये शुल्क वसूलने का प्रावधान किया गया था। हालांकि संशोधन के बाद इस शुल्क में भी कमी की जा सकती है। मेले में बिक्री होने पर पशु के लिए भी शुल्क लगेगा। सरकार ने क्यों लिया था फैसला पंचायतों की आय बढ़ा कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में मकानों से कर वसूलने का निर्णय लिया गया था। 16 वीं केंद्रीय वित्त आयोग ने देश भर की पंचायतों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कर लगाने की अनुशंसा की है। वित्त आयोग की अनुशंसा है कि ग्रामीण इलाकों में प्रत्येक घरों से सालाना औसतन 1200 रुपये वसूल कर पंचायत अपनी आय बढ़ाने का प्रयास करे। पहले यह कर की दर तय थी आवास के प्रकार कर की दर(प्रतिवर्ष) पक्का मकान 100 रुपए अर्द्ध पक्का मकान 50 रुपये कच्चा मकान कर नहीं पीएम आवास के मकान 25 रुपये (ग्रमाीण विभाग देगा) सफाई शुल्क 30 रुपये (प्रति घर मासिक) पेट्रोल पंप 5 हजार रुपये रसोई गैस एजेंसी 5 हजार रुपये ईंट चिमनी 5 हजार रुपये सिनेमा हॉल 5 हजार रुपये जलापूर्ति शुल्क 30 रुपये (प्रतिमाह)

मधुपुर-गिरिडीह रेल मार्ग पर नया स्टेशन तैयार, 75% काम पूरा; लोको रिवर्सल से मिलेगी मुक्ति

मधुपुर (देवघर)  मधुपुर-गिरिडीह रेल मार्ग पर नवाब मोड के पास बन रहा नया रेलवे स्टेशन (नया मधुपुर स्टेशन) और बाईपास रेल परियोजना का निर्माण कार्य 2027 तक पूरा होने की संभावना है। इस पूरे लिंकिंग और बाईपास प्रोजेक्ट की कुल अनुमानित लागत लगभग 140 करोड़ से 281 करोड़ के बीच आंकी गई है। इस नई रेल परियोजना में वर्तमान परिस्थिति में काम जोर शोर से चल रहा है। अनुमान है कि इस साल के अंत में या फिर नए साल में इलाके के लोगो एक नया स्टेशन मिलेगा। इस स्टेशन का नाम क्या होगा तय नहीं है। क्योंकि अभी नामकरण नहीं किया गया है। लेकिन इलाके में चर्चा है नई मधुपुर स्टेशन के नाम से यह जाना जाएगा। फिर कोई महापुरुष के नाम से यह स्टेशन का नाम हो सकता है रेलवे ने भी नहीं फिलहाल इस पर कोई अधिसूचना जारी नहीं किया है। बताया जाता है कि मधुपुर गिरिडीह नेशनल हाईवे-114 के किनारे नवाबमोड़ गांव के निकट इस आदर्श स्टेशन का निर्माण कार्य अंतिम चरण में है और रेल पटरियां बिछाने का काम तेजी से चल रहा है। रेलवे के अनुसार इसे 2027 के मध्य तक पूरी तरह से तैयार कर लिया जाएगा। बताया जाता है कि मधुपुर बाईपास रेल लाइन खंड की लागत 140.01 करोड़ है, जबकि पूरे लिंकिंग प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत लगभग 281 करोड़ है। नई रेल परियोजना के बन से होने वाले होगा काफी लाभ इस नए रेल परियोजना के बन जाने इलाके के लिए को काफी लाभ होगा। यहां के पटवाबाद, नवाब मोड़ के पास नया स्टेशन और बाईपास लाइन बनने से क्षेत्र के लोगों के लिए काफी फायदेमंद साबित होगा। बताया जाता है कि इससे लोको रिवर्सल (इंजन बदलने) के झंझट से मुक्ति मिलेगी और समय की बचत होगी। वर्तमान में ट्रेनों के इंजन का रिवर्सल मधुपुर स्टेशन पर हो रहा है। जिसके कारण 20 मिनट ट्रेनों का ठहराव मधुपुर में हो हो जाता है । इससे निजात मिलेगा क्योंकि गिरिडीह-कोडरमा जाने के लिए मधुपुर में इंजन बदलना (लोको रिवर्सल) पड़ता है। इस बाईपास लाइन और नए स्टेशन के चालू होने से ट्रेनें सीधे निकल जाएंगी, जिससे यात्रियों का करीब 30 मिनट से अधिक का समय बचेगा। सीधी ट्रेन कनेक्टिविटी इस रूट के पूरी तरह चालू होने से मधुपुर, न्यू गिरिडीह और कोडरमा के बीच सीधी और लंबी दूरी की ट्रेनों का परिचालन बेहद आसान हो जाएगा। आधुनिक यात्री सुविधाएं (एक आदर्श स्टेशन) नवाब मोड़ स्टेशन पर अप और डाउन दोनों तरफ आधुनिक प्लेटफार्म, यात्रियों के लिए फुटओवर ब्रिज, हाई-टेक टिकट काउंटर भवन, यात्री शेड और पेयजल आपूर्ति के लिए नए वाटर कनेक्शन की व्यवस्था की जा रही है। आर्थिक और व्यापारिक विकास नया स्टेशन बनने से नवाब मोड और आसपास के ग्रामीण इलाकों में लोगों की आवाजाही बढ़ेगी। इससे इलाके में आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी। जिससे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और व्यवसाय के नए अवसर पैदा होंगे। लोगों को छोटा मोटा रोजगार मिल जाएगा। स्टेशन के आसपास लोग छोटा-मोटा दुकान लगाकर कमाई कर सकेंगे। इससे आसपास के क्षेत्र का आर्थिक विकास तेजी से होगा। ये काम हो चुका है पूरा यहां पर अप व डाउन प्लेटफार्म बनाने का काम लगभग पूरा हो चुका है। दो प्लेटफार्म पर यात्री शेड अप व डाउन पर यात्री शेड पूरा हो चुका है। पैदल उपरी पुल बन चुका है। प्लेटफार्म पर लाइट की व्यवस्था के पोल लगाने का काम लगभग पूरा हो चुका हे। प्लेटफार्म पर अप व डाउन लाइन पर लाइट बिछाने का काम चल रहा है। स्टेशन परिसर पर प्रशासनिक भवन बनाने का काम लगभग पूरा हो चुका है। बुकिंग काउंटर बनकर तैयार हो चुका है। शौचालय का भवन बन चुका है। स्टेशन में टाइल्स मार्बल लगाने का काम पूरा हो चुका है। नए स्टेशन का लगभग 75 प्रतिशत काम हाे चुका है। ये काम है बाकी स्टेशन पर कंबाइंड भवन बनकर तैयार है । एक ही भवन के अंदर बुकिंग काउंटर, केबिन,यात्री प्रतीक्षालय, स्टेशन मास्टर कार्यालय आदि संचालित किया जाएगा। इसी भवन में पैनल, रिले सिस्टम सिग्नल आदि इलेक्ट्रिक विछाने का काम चल रहा है। ओवरहेड बिजली का हाई टेंशन तार लगाने का काम चल रहा है। पोल गाड़ने का काम चल रहा है। इसके बाद तार लगाने का काम किया जाएगा। शौचालय में पानी की व्यवस्था के लिए जलमीनार बनाया जा रहा है। वहीं, शौचालय के अंदर की व्यवस्था अभी किया जाना है। स्टेशन से पहले ग्रामीणों की आवाजाही के अंडरपास रास्ते का काम चल रहा है। इस लाइन पर पुल पुलिया का निर्माण कार्य चल रहा है। काम में अड़चन नए स्टेशन के पूरा होने में कुछ अड़चन भी है। अप प्लेटफार्म के सिग्नल स्टाटर के पास पूर्वी छोर पर करीब एक दर्जन घरों का अधिग्रहण का काम पूरा नहीं हो पाया है। इस कारण इस परियोजना में विलंब हो रहा है। अधिग्रहण का काम पूरा होने के बाद ही यहां पटरी बिछाने का काम किया जाएगा। इस कारण से वर्तमान में काम डिले हो रहा है।

बिहार में बाढ़ का कहर, 11 जिलों की 330 पंचायतें प्रभावित; NDRF-SDRF की 37 टीमें तैनात

पटना  बिहार में नदियों के बढ़ते जलस्तर और संभावित बाढ़ की स्थिति के बीच राज्य सरकार और आपदा प्रबंधन विभाग पूरी मुस्तैदी के साथ राहत कार्य में जुटा हुआ है। प्रभावित आबादी को तत्काल सहायता पहुंचाने के उद्देश्य से राज्यभर में कई त्वरित कदम उठाए जा रहे हैं। विभाग के अनुसार, बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में कुल 110 सामुदायिक रसोई केंद्रों का संचालन किया जा रहा है। इसके माध्यम से अब तक लगभग 1.98 लाख लोगों को गर्म और पौष्टिक भोजन कराया जा चुका है। इसके साथ ही, विस्थापित लोगों के लिए 01 राहत शिविर भी शुरू किया गया है, जहां 326 बाढ़ शरणार्थियों के रहने, भोजन और चिकित्सा देखभाल की पुख्ता व्यवस्था की गई है। आपदा प्रबंधन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए जमीनी स्तर पर राहत सामग्री का वितरण तीव्र गति से किया जा रहा है। ऐसे परिवारों को तात्कालिक आश्रय और खान-पान की सुविधा देने के लिए अब तक लगभग 55,500 पॉलीथीन शीट और 10,400 ड्राई राशन पैकेट बांटे जा चुके हैं। जलभराव वाले इलाकों में आवागमन को सुगम बनाने और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए राज्य भर में कुल 1,345 नावों को परिचालित किया गया है। मौजूदा समय में राज्य के 11 जिलों पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार और अरवल के 66 प्रखंडों की 330 ग्राम पंचायतों की लगभग 19.57 लाख आबादी जलभराव से प्रभावित है, जहां प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है। NDRF और SDRF की टीम तैयार साथ ही किसी भी आपात स्थिति से निपटने और त्वरित राहत-बचाव कार्य के लिए राज्य में एनडीआरएफ (एनडीआरएफ) की 10 टीमें और एसडीआरएफ (एसडीआरएफ) की 27 टीमें विभिन्न प्रभावित जिलों में तैनात की गई हैं। नदियों के जलस्तर पर भी लगातार पैनी नजर रखी जा रही है। 6 सितंबर 2026 की स्थिति के अनुसार, वाल्मीकिनगर बराझ पर गंडक नदी का जलस्राव 1,29,000 क्यूसेक दर्ज किया गया और इसकी प्रवृत्ति स्थिर बनी हुई है। वहीं, वीरपुर बराझ पर कोसी नदी का जलस्राव 1,73,255 क्यूसेक है। सोन नदी के इन्द्रपुरी बराझ पर जलस्राव 2,27,717 क्यूसेक दर्ज हुआ है, जिसमें घटने की प्रवृत्ति देखी जा रही है। गंगा, गंडक, कोसी, बूढ़ी गंडक, पुनपुन और बागमती जैसी नदियां कुछ स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, लेकिन प्रशासन द्वारा स्थिति पर लगातार सतर्कता बरती जा रही है। वर्षापात के आंकड़ों के अनुसार, 01 जून से 06 सितंबर के दौरान राज्य में औसतन 590.6 मिमी वर्षा दर्ज की गई है। बिहार मौसम सेवा केन्द्र के अनुसार अगले दो दिनों में राज्य के अनेक स्थानों पर हल्की से मध्यम और कुछ स्थानों पर भारी वर्षा की संभावना जताई गई है। इसके मद्देनजर आपदा प्रबंधन विभाग और स्थानीय प्रशासन पूरी स्थिति पर सतत निगरानी बनाए हुए हैं और हर प्रभावित नागरिक तक त्वरित राहत पहुंचाने के लिए युद्धस्तर पर कार्य किए जा रहे हैं।

CISF समेत केंद्रीय सुरक्षा बलों में बड़ा बदलाव, 6 IPS अधिकारी बने स्पेशल DG

 रांची  केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल में हाल के दिनों में कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक फेरबदल हुए हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय और कैबिनेट की नियुक्ति समिति ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में 1995 बैच के छह भारतीय पुलिस सेवा अधिकारियों को स्पेशल महानिदेशक और संबंधित पदों पर नियुक्त किया है। सीआईएसएफ मुख्यालय ने सेक्टर स्तर पर भी नए अधिकारी तैनात किए हैं। झारखंड कैडर से भी एक अधिकारी सीआईएसएफ में प्रतिनियुक्ति पर गए हैं। ओडिशा कैडर के 1995 बैच के भारतीय पुलिस सेवा अधिकारी पदमाकर एस. रानीप्से (पूर्व में सीआईएसएफ के अपर महानिदेशक) को सीआईएसएफ के स्पेशल महानिदेशक के पद पर इन-सिटू आधार पर नियुक्त किया गया है। उनका कार्यकाल 31 मई 2028 (सेवानिवृत्ति की तिथि) या अगले आदेश तक रहेगा। इस नियुक्ति के लिए उनके पद को अस्थायी रूप से अपग्रेड किया गया है। अन्य पांच अधिकारियों की नियुक्तियां- संदीप खिरवार (हरियाणा कैडर, 1995) को केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल का स्पेशल महानिदेशक (31 मई 2033 तक) पुनीत रस्तोगी (त्रिपुरा कैडर, 1995) को सीमा सुरक्षा बल का स्पेशल महानिदेशक (30 जून 2030 तक) सतीश श्रीरामाजी खंडारे (एजीएमयूटी कैडर, 1995) को सीमा सुरक्षा बल का स्पेशल महानिदेशक (30 जून 2031 तक) राजेश कुमार (एजीएमयूटी कैडर, 1995) को केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल का स्पेशल महानिदेशक (दो वर्ष के लिए इन-सिटू) जग मोहन (बिहार कैडर, 1995) को खुफिया ब्यूरो में स्पेशल निदेशक (30 जून 2031 तक) ये अधिकारी अपने वर्तमान पदों से मुक्त होकर केंद्रीय सुरक्षा संगठनों में कार्यभार ग्रहण करेंगे। इस कदम का उद्देश्य केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना और कार्यप्रणाली को चुस्त-दुरुस्त बनाना है। इससे पहले 1 सितंबर 2026 से सीआईएसएफ में सेक्टर स्तर पर भी बदलाव हुए। हिमांशु पाण्डेय ने सेंट्रल सेक्टर भिलाई के महानिरीक्षक का कार्यभार संभाला। पूर्व महानिरीक्षक निलिमा रानी सिंह 31 अगस्त 2026 को सेवानिवृत्त हो गईं। दिल्ली मुख्यालय में एयरपोर्ट सेक्टर की अपर महानिदेशक विनिता ठाकुर (राजस्थान कैडर, 1996 बैच) को अगले आदेश तक अपर महानिदेशक नॉर्थ सेक्टर का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। पूर्व अपर महानिदेशक सुधीर कुमार भी 31 अगस्त को सेवानिवृत्त हो गए थे। सीआईएसएफ महानिदेशक प्रवीर रंजन ने सेवानिवृत्त अधिकारियों सुधीर कुमार और निलिमा रानी के सम्मान में विदाई समारोह आयोजित कर उन्हें स्मृति चिह्न प्रदान किए और उनके कार्य की सराहना की। झारखंड कैडर से भी सीआईएसएफ में प्रतिनियुक्ति हुई है। जून 2026 में झारखंड कैडर के 2011 बैच के भारतीय पुलिस सेवा अधिकारी चंदन कुमार झा को सीआईएसएफ में उप महानिरीक्षक के पद पर प्रतिनियुक्ति दी गई थी। वे पहले झारखंड पुलिस में अपराध अनुसंधान विभाग के उप महानिरीक्षक थे। झारखंड पुलिस की सिविल लिस्ट में भी उनका वर्तमान पद उप महानिरीक्षक, सीआईएसएफ दर्शाया गया है। ये बदलाव सीआईएसएफ और अन्य केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में नेतृत्व को मजबूत करने तथा सुरक्षा व्यवस्था को और प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

गांधी मैदान से शिफ्ट होगी रामलीला और रावण वध की भव्य परंपरा, मार्च तक तैयार होगा नया मैदान

पटना सीएम सम्राट चौधरी ने कल शनिवार (5, सितंबर) को पटना के गांधी मैदान में आयोजित श्रीकृष्ण महोत्सव 4.0-2026 ‘कान्हा के रंग, उत्सव के संग’ कार्यक्रम का दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया। कला एवं संस्कृति विभाग, बिहार एवं सात्विका ग्रुप के सौजन्य से दशहरा कमिटी ट्रस्ट, पटना द्वारा कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने बड़ा ऐलान करते हुए अपने संबोधन में कहा कि, अगले वर्ष मार्च तक मरीन ड्राइव के समीप तीन बड़े मैदान तैयार हो जाएंगे। इनमें से एक मैदान का नाम रामलीला मैदान रखा जाएगा। सीएम सम्राट चौधरी ने कहा कि रामलीला एवं रावण वध के कार्यक्रम को गांधी मैदान से वहां स्थानांतरित कर पूरी व्यवस्था के साथ आयोजित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि दशहरा कमेटी ट्रस्ट वर्ष 1955 से गांधी मैदान में रामलीला महोत्सव एवं रावण वध का आयोजन कर रहा है। समिति की ओर से लंबे समय से रामलीला और रावण वध के लिए अलग स्थान उपलब्ध कराने का आग्रह किया जा रहा था। इसको लेकर पटना के जिलाधिकारी को निर्देश दिए गए हैं। मार्च के बाद जैसे ही नए मैदान का हैंडओवर होगा, समिति को वह मैदान उपलब्ध करा दिया जाएगा। इस मौके पर श्रीकृष्ण महोत्सव की शुभकामनाएं देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि, भगवान श्रीकृष्ण ने अन्याय के खिलाफ खड़े होने और सत्य की विजय का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि महाभारत के समय भगवान श्रीकृष्ण ने शांति के लिए हर संभव प्रयास किया और कौरवों से केवल पांच गांव देने की बात कही, लेकिन अन्याय के कारण युद्ध टल नहीं सका। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का स्पष्ट संदेश था कि जो अन्याय करेगा, उसका विनाश निश्चित है। गीता के माध्यम से उन्होंने अर्जुन को कर्तव्य और धर्म का बोध कराया। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज भी भगवान श्रीकृष्ण का संदेश समाज को सत्य और न्याय के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। इस दौरान सीएम सम्राट चौधरी ने बिहार में जारी बाढ़ की स्थिति का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पिछले 10 वर्षों में इस समय गंगा में पानी का स्तर काफी अधिक है। गंगा बेसिन वाले जिलों में अधिकारियों और मंत्रियों को लगाया गया है तथा सरकार पूरी स्थिति पर नजर रख रही है। उन्होंने कहा कि सोन और गंडक नदियों से भी बड़ी मात्रा में पानी आ रहा है। नेपाल की तराई से आने वाले पानी के कारण बिहार के लोगों को हर वर्ष परेशानी का सामना करना पड़ता है। सरकार ने कोसी, गंडक और गंगा बेसिन को व्यवस्थित करने के लिए व्यापक योजना तैयार करने की दिशा में काम शुरू किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्रीय जल आयोग के साथ मिलकर दोनों बेसिनों के किनारे सड़क निर्माण और वाटर ट्रांसपोर्टेशन की व्यवस्था विकसित करने पर भी काम किया जाएगा, ताकि बरसात के दौरान लोगों को होने वाली परेशानी को कम किया जा सके। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प के अनुरूप बिहार को भी समृद्ध और विकसित बनाने के लिए सरकार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की परिकल्पना के अनुरूप बिहार को समृद्ध बनाने की पूरी रूपरेखा तैयार की जा रही है। सीएम सम्राट ने श्रीकृष्ण महोत्सव और दही हांडी प्रतियोगिता के आयोजन के लिए दशहरा कमेटी ट्रस्ट को बधाई दी। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से बिहार की सनातन संस्कृति और भारतीय संस्कृति को जन-जन तक पहुंचाने में मदद मिलती है। वहीं, दशहरा कमिटी ट्रस्ट के सदस्यों ने अंगवस्त्र और मोमेंटो देकर मुख्यमंत्री का अभिनंदन किया। इस मौके पर दही-हांडी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था जहां मुख्यमंत्री ने स्वयं जाकर प्रतियोगिता में शामिल प्रतिभागियों का उत्साह बढ़ाया। कार्यक्रम के दौरान सीएम के अलावा , स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार समेत कई मंत्री और विधायक समेत अधिकारी मौजूद रहे।

बिहार में बाढ़ का कहर तेज, गंगा का पानी HFL के पार; छपरा में बांध टूटा, मुंगेर में डायवर्सन बहा

पटना पटना में गंगा नदी विकराल रूप धारण कर चुकी है। गंगा नदी के जलस्तर में वृद्धि औरहा गांधी घाट पर जलस्तर के उच्चतम बाढ़ स्तर (Highest Flood Level) को पार करने के बाद अब पानी का दबाव डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों में रहेगा। इसका प्रभाव अगले 1 से 3 दिनों तक हाथीदह एवं उसके बाद के डाउनस्ट्रीम गेज स्टेशनों पर देखने को मिल सकता है तथा यह हाथीदाह में पुराने उच्चतम बाढ़ स्तर को पार कर सकता है। इसके मद्देनजर बेगूसराय, लखीसराय, मुंगेर, भागलपुर, कटिहार जिले के गंगा के किनारे वाले क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरतने को कहा गया है। गांधी घाट पर बढ़े हुए जलस्तर की लहर के डाउनस्ट्रीम की ओर बढ़ने को देखते हुए संबंधित पदाधिकारियों एवं क्षेत्रीय अधिकारियों को सतर्क रहने तथा जलस्तर की लगातार निगरानी करने को कहा गया है। साथ ही, नदी के जलस्तर, तटबंधों, संवेदनशील स्थलों एवं निचले इलाकों की नियमित निगरानी सुनिश्चित करें। बिहार में 11 जिलों के 66 प्रखंडों की 330 ग्राम पंचायतों में बाढ़ का पानी फैल गया है। आपदा प्रबंधन विभाग का कहना है कि इससे 19.57 लाख आबादी प्रभावित हुई है। बाढ पीड़ितों के बीच राहत-बचाव कार्य चलाए जा रहे हैं। 110 सामुदायिक रसोई केंद्रों का संचालन किया जा रहा है। 326 बाढ़ शरणार्थी शिविरों में भोजन और चिकित्सा की व्यवस्था की गई है। छपरा में मही नदी का बांध टूटा छपरा में दरियापुर के सेमरहिया-मोहन कोठियां के पास रविवार की सुबह मही नदी का बांध टूट गया। बांध टूटने की वजह से छह से अधिक पंचायत बाढ़ की चपेट में आ गए। बांध की मरम्मत का प्रयास किया जा रहा है। बांध टूटने के बाद स्थिति को देखते हुए अब सीओ कैंप कर रहे हैं। सारण डीएम भी दरियापुर के लिए रवाना हो चुके हैं। बता दें कि इससे पहले शुक्रवार की देर रात दिघवारा में भी मही नदी का बांध टूटा था। इधर, एनएच-19 पर भी बाढ़ के पानी का तेज बहाव हो रहा है। मुंगेर: महाने नदी पर बना डायवर्सन चार दिन में दूसरी बार बहा मुंगेर जिले में टेटिया बंबर प्रखंड के बरसंडा के समीप महाने नदी पर पुल निर्माण के लिए बनाया गया अस्थायी डायवर्सन चार दिनों के अंदर दूसरी बार तेज धारा में बह गया। इससे प्रखंड की आधी से अधिक आबादी का थाना, अस्पताल और बंबर बाजार से एक बार फिर सीधा संपर्क टूट गया है। जानकारी हो कि लगातार बारिश से महाने नदी का जलस्तर बढ़ने के कारण गुरुवार सुबह डायवर्सन बह गया था। विभाग के निर्देश पर संवेदक द्वारा मिट्टी डालकर उसे पैदल और दोपहिया वाहनों के चलने लायक बनाया गया था, लेकिन शनिवार रात हुई तेज बारिश के बाद नदी में आई बाढ़ में एक बार फिर डायवर्सन बह गया है। इससे प्रखंड की आधी से अधिक आबादी का थाना, अस्पताल, बंबर बाजार से सीधा संपर्क भंग हो गया। संपर्क भंग होने से आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा दिक्कत मरीजों और स्कूली बच्चों को हो रही है। लोगों को लंबी दूरी तय कर आवागमन करना पड़ रहा है।

झारखंड का राजस्व संग्रह लक्ष्य से दूर, अगस्त में GST कलेक्शन 938 करोड़ के करीब

 रांची वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए वाणिज्यिक कर विभाग के ताजा आंकड़ों ने स्पष्ट कर दिया है कि राज्य में विभाग के अधिकारियों के प्रयास का असर ताे दिख रहा है, लेकिन इसके बावजूद जीएसटी कलेक्शन लक्ष्य से काफी कम है। रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त 2026 में राजस्व संग्रह में पिछले साल की तुलना में गिरावट दर्ज की गई है। विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त 2026 में कुल सब-टोटल कलेक्शन 1,709.50 करोड़ रुपये रहा, जो अगस्त 2025 के 1,919.11 करोड़ रुपये से 10.92 प्रतिशत कम है। रिपोर्ट के अनुसार, टैक्स संग्रह में सबसे बड़ी गिरावट जीएसटी कैटेगरी में देखी गई। प्रदेश के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने इसकी संभावना पहले ही व्यक्त की थी कि राज्य सरकार के राजस्व संग्रह पर असर पड़ सकता है। अगस्त 2026 में कुल जीएसटी कलेक्शन 937.11 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल इसी महीने के 1,200.77 करोड़ रुपये के मुकाबले 21.96 प्रतिशत कम है। इसमें इंटीग्रेटेड गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स सेटलमेंट में सबसे ज्यादा 58.19 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई, जो 449.10 करोड़ रुपये से घटकर सिर्फ 187.77 करोड़ रुपये रह गई। वैट संग्रह से मिली राहत आंकड़ों को देखें तो राहत की बात यह रही कि वैट में अच्छी बढ़त देखने को मिल रही है। अगस्त 2026 में वैट कलेक्शन 695.90 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल के 602.76 करोड़ रुपये से 15.45 प्रतिशत अधिक है। इसी तरह, कुल नान-जीएसटी कलेक्शन में भी 7.52 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई, जो 772.39 करोड़ रुपये रही। हालांकि प्रोफेशनल टैक्स संग्रह में भारी गिरावट 46.63 प्रतिशत दर्ज की गई। विभाग के लिए आने वाला समय चुनौतीपूर्ण वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए कुल वार्षिक लक्ष्य 24 हजार करोड़ रुपये रखा गया है। अगस्त 2026 तक (अप्रैल से अगस्त तक) विभाग ने 8,172.70 करोड़ रुपये जुटाए हैं, जो लक्ष्य का सिर्फ 34.05 प्रतिशत है। अगर इसी रफ्तार से गिरावट जारी रही, तो विभाग के लिए वार्षिक लक्ष्य को पूरा करना चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है। कुल कलेक्शन में भी पिछले वर्ष की तुलना में 15.14 प्रतिशत की गिरावट देखी गई है। वरीय अधिकारियों को मानना है कि आइजीएसटी सेटलमेंट में आई भारी कमी चिंता का विषय है, जबकि वैट कलेक्शन में बढ़त से राज्य के घरेलू कर राजस्व में कुछ सुधार का संकेत मिलता है। विभाग अब बाकी बचे महीनों में लक्ष्य हासिल करने के लिए रणनीति बनाने में जुट गया है। अप्रैल से अगस्त तक राजस्व संकलन में झारखंड पांच प्रतिशत पीछे है, नवंबर आते-आते हम इसकी भरपाई के लिए पूरा प्रयास करेंगे और अधिकारियों ने आश्वस्त किया है कि इसकी भरपाई करते हुए आगे बढ़ जाएंगे। जिन अधिकारियों का प्रयास बेहतर होगा उन्हें विभाग पुरस्कृत करेगी और जिनका नहीं होगा उन्हें दंडित भी किया जा सकता है। -राधाकृष्ण किशोर, वित्त मंत्री, झारखंड सरकार।