samacharsecretary.com

पश्चिमी सिंहभूम में मागे पर्व की धूम, आदिवासी समुदाय ने पारंपरिक वेशभूषा में की सुख-समृद्धि की कामना

 वेस्ट सिंघभूम   झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम के नोवामुंडी प्रखंड अंतर्गत गुवा क्षेत्र के नुईया गांव में आदिवासी समुदाय के लोगों ने पूरे हर्षोल्लास और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मागे पर्व मनाया. मागे पर्व पर लोग ढोल-नगाड़ों की थाप पर नाचे. इस मौके पर पूरे गांव में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला. इन जगहों से लोग हुए शामिल मागे पर्व के मौके पर जगन्नाथपुर, चाईबासा और दुरदरा सहित आसपास के क्षेत्रों से भी मेहमान पहुंचे और इस पारंपरिक पर्व में शामिल होकर खुशी साझा की. दूर-दराज से आए लोगों की मौजूदगी ने उत्सव की रौनक को और बढ़ा दिया. पारंपरिक वेशभूषा और सांस्कृतिक झलक इस दौरान बच्चे, बुजुर्ग, युवक और महिलाएं सभी पारंपरिक वेशभूषा में नजर आए. लोगों ने ढोल-नगाड़ों की थाप पर जमकर नृत्य किया. इस मौके पर पूरे गांव में उत्साह और उमंग का वातावरण बना रहा. पुजारी ने की पूजा-अर्चना गांव के पुजारी ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार पूजा-अर्चना कर गांव की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना की. इस पर्व के माध्यम से आदिवासी समुदाय ने अपनी समृद्ध संस्कृति और परंपराओं को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया. मागे पर्व का यह आयोजन आपसी भाईचारे, एकता और सांस्कृतिक विरासत को संजोए रखने का संदेश देता है.

स्वदेशी तकनीक का कमाल, एनएमएल के वैज्ञानिकों ने तैयार किया सोने का विशेष गोलाकार पाउडर

 जमशेदपुर झारखंड के लौहनगरी जमशेदपुर के नाम एक और ऐतिहासिक उपलब्धि जुड़ गई है. सीएसआईआर-राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला (एनएमएल ) ने देश में पहली बार 22 कैरेट सोने का गोलाकार पाउडर तैयार करने में सफलता पाई है. यह पाउडर विशेष रूप से एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग ( थ्री डी प्रिंटिंग) के लिए विकसित किया गया है. उक्त बातें सीएसआईआर-एनएमएल के वैज्ञानिक डॉ. के. गोपाला ने शनिवार को साझा की. वे बिष्टुपुर स्थित एसएनटीआई ऑडिटोरियम में इंजीनियर्स संस्था (भारत) जमशेदपुर लोकल सेंटर द्वारा आयोजित एक दिवसीय संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे. तकनीकी सत्र को संबोधित करते हुए डॉ. के. गोपाला ने कहा कि एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग की सफलता पूरी तरह से कच्चे माल यानी मेटल पाउडर की गुणवत्ता पर टिकी होती है. एनएमएल की ‘विशेष गैस एटोमाइजर सुविधा’ का उपयोग कर तैयार किया गया 22 कैरेट सोने का यह पाउडर स्वदेशी तकनीक का बेहतरीन उदाहरण है. इससे भविष्य में आभूषण निर्माण और अन्य जटिल तकनीकी क्षेत्रों में थ्री डी प्रिंटिंग के प्रयोग को एक नयी दिशा मिलेगी. इससे पूर्व कच्चे माल के संश्लेषण से उन्नत उत्पाद विकास एवं विशेषता निर्धारण विषय पर आयोजित संगोष्ठी का उद्घाटन मुख्य अतिथि मनोस डे (ऑफिस हेड, टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स) और विशिष्ट अतिथि विनीत कुमार साह (चीफ लॉन्ग प्रोडक्ट्स, टाटा स्टील एवं चेयरमैन, आईईआई) ने दीप प्रज्ज्वलित कर संयुक्त रूप से किया. कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि कैसे प्रयोगशाला के नवाचारों को सीधे उद्योगों से जोड़कर भारत को आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है. लैब के रिसर्च का उपयोग फैक्ट्रियों में हो: मनोस डे मुख्य अतिथि मनोस डे ने अपने संबोधन में कच्चे माल के विकास और उन्नत उत्पाद निर्माण के बीच समन्वय को जरूरी बताया. उन्होंने कहा कि लैब में होने वाले शोध तभी सार्थक हैं. जब वे कारखानों तक पहुंचे. उन्होंने इंजीनियरिंग क्षेत्र में लागत और ऊर्जा की बचत पर विशेष जोर देते हुए युवाओं को नयी तकनीक अपनाने के लिए प्रेरित किया. जटिल डिजाइनों के लिए थ्री डी प्रिंटिंग अनिवार्य: विनीत कुमार साह संस्थान के चेयरमैन विनीत कुमार साह ने स्वागत भाषण में कहा कि वर्तमान समय में सटीक फिनिशिंग और जटिल ढांचों के निर्माण के लिए एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग की मांग बढ़ी है. इस तकनीक के माध्यम से ऐसी ग्रेडेड सामग्री तैयार की जा सकती है. जो पारंपरिक निर्माण विधियों से संभव नहीं थी. स्टील की आंतरिक संरचना पर शोध: डॉ. मोनालिसा मंडल एनआईटी जमशेदपुर की डॉ. मोनालिसा मंडल ने एसएस 420 मार्टेंसिटिक स्टील पर अपना शोध प्रस्तुत किया. उन्होंने बताया कि डीएमएलएस तकनीक से उत्पाद बनाते समय यदि मानकों को सही ढंग से नियंत्रित किया जाए, तो उत्पादों की मजबूती और उनकी सूक्ष्म संरचना को काफी बेहतर बनाया जा सकता है. बढ़ेगा जंग के प्रति प्रतिरोध: कौशल किशोर टाटा स्टील आरएंडडी के प्रिंसिपल रिसर्चर कौशल किशोर ने वायर आर्क एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग पर व्याख्यान दिया. उन्होंने 316 एल स्टेनलेस स्टील की सूक्ष्म संरचना में होने वाले बदलावों और उसके जंग प्रतिरोध पर पड़ने वाले प्रभावों की विस्तृत जानकारी दी. उच्च तापमान तकनीक और सिरेमिक उत्पाद: डॉ. राम कृष्ण एनआईटी जमशेदपुर के डॉ. राम कृष्ण ने उच्च तापमान वाले वातावरण के लिए आधुनिक तकनीकों के उपयोग पर चर्चा की. उन्होंने भविष्य की जरूरतों को देखते हुए सिरेमिक उत्पादों के विकास और उनके विशेषता निर्धारण की प्रक्रिया को समझाया. कार्यक्रम का संचालन जुस्को की सुकन्या दास ने किया. जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. एस डी. भट्टाचार्जी ने किया. पूरे कार्यक्रम के सफल समन्वय में कृष्णेंदु शॉ की अहम भूमिका रही. संगोष्ठी के अंत में प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए. विशेषज्ञों ने माना कि इस तरह के आयोजनों से इंजीनियरों, शोधकर्ताओं और नीति-निर्माताओं के बीच एक प्रभावी साझा मंच तैयार होता है.

स्कूली बच्चों को लू से बचाने के लिए बड़ा फैसला, सुबह 6:30 बजे से खुलेंगे बिहार के स्कूल, मिड-डे मील के नियमों में भी बदलाव

 पटना बिहार में बढ़ती गर्मी और लू को देखते हुए शिक्षा विभाग ने बड़ा फैसला लिया है. अब राज्य के सभी सरकारी स्कूलों का समय बदल दिया गया है ताकि बच्चों को तेज धूप और गर्मी से बचाया जा सके. यह नई व्यवस्था 6 अप्रैल से लागू होकर 31 मई तक चलेगी. गर्मी की छुट्टियों से पहले तक स्कूल मॉर्निंग शिफ्ट में ही चलेंगे. नए टाइम टेबल के बारे में जानिए नए टाइम टेबल के अनुसार अब स्कूल सुबह 6:30 बजे खुलेंगे और दोपहर 12:30 बजे तक पढ़ाई होगी. दिन की शुरुआत प्रार्थना और अन्य गतिविधियों से होगी, जिसके बाद रेगुलर क्लासेज चलेंगी. सातवीं घंटी के बाद 12:20 बजे छात्रों की छुट्टी कर दी जाएगी. इसके बाद 10 मिनट तक शिक्षकों की बैठक होगी. इसमें दिनभर की समीक्षा और आगे की योजना बनाई जाएगी. क्या- क्या बदलाव हुआ गर्मी को ध्यान में रखते हुए मध्याह्न भोजन यानी मिड-डे मील की व्यवस्था में भी बदलाव किया गया है. जिन स्कूलों में बच्चों की संख्या ज्यादा है और सभी को एक साथ खाना खिलाना मुश्किल है, वहां दो हिस्सों में भोजन कराने की छूट दी गई है. कुछ बच्चे ब्रेक में खाना खाएंगे, जबकि बाकी बच्चे तीसरी या चौथी क्लास के दौरान भोजन कर सकेंगे. इस दौरान पढ़ाई का काम भी जारी रहेगा. जहां स्कूल दो शिफ्ट में चलते हैं, वहां स्थानीय हालात के हिसाब से समय तय करने का अधिकार जिला शिक्षा पदाधिकारी को दिया गया है. डीएम को भी जरूरत पड़ने पर स्कूल के समय में बदलाव करने की छूट दी गई है.

रांची जेल में प्रशांत बोस की मौत, अंतिम संस्कार को लेकर प्रशासन और परिजनों के बीच उलझा मामला

रांची एक करोड़ रुपये के इनामी रहे प्रतिबंधित संगठन भाकपा माओवादी के पोलित ब्यूरो सदस्य प्रशांत बोस (82 वर्ष) की मौत बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा में तीन अप्रैल को हो गयी थी. इसके बाद प्रशांत बोस का शव रिम्स के मोर्चरी में पड़ा रहा. बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा में बंद उसकी पत्नी और माओवादी पोलित ब्यूरो सदस्य शीला मरांडी ने जेल प्रशासन के माध्यम से जिला प्रशासन को पत्र लिखकर कहा कि उसके पति का कोई अन्य परिजन नहीं है. इसलिए जिला प्रशासन ही अंतिम संस्कार की व्यवस्था करे. हालांकि शनिवार रात तक जिला प्रशासन के स्तर पर इस मामले में कोई निर्णय नहीं लिया जा सका था. जेल प्रशासन ने खड़े किए हाथ इससे पहले शनिवार को कोलकाता से प्रशांत बोस के कुछ परिजन बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा पहुंचे. परिजनों ने जेल प्रशासन के अधिकारियों को एक पत्र दिखाया, जो प्रशांत बोस के बड़े भाई का था. उस पत्र में लिखा था कि उनकी उम्र 84 वर्ष है और वे स्वयं आकर अपने भाई का शव ले जाने में असमर्थ हैं. इसलिए उन्होंने अन्य परिजनों को भेजा है. उनके भाई प्रशांत बोस का शव उन्हें सौंप दिया जाये ताकि वे अपने रीति-रिवाज से अंतिम संस्कार कर सकें. जेल प्रशासन ने उन्हें जिला प्रशासन के पास यह कहते हुए भेज दिया कि इस पर निर्णय लेना जेल प्रशासन के अधिकार क्षेत्र में नहीं है. इसके बाद परिजनों ने जिला प्रशासन के अधिकारियों से मिलकर शव सौंपने की मांग की. बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा के अधीक्षक कुमार चंद्रशेखर ने बताया कि जेल में बंद उनकी पत्नी शीला मरांडी ने पत्र लिखकर कहा है कि प्रशासन स्वयं प्रशांत बोस का अंतिम संस्कार कर दे, क्योंकि उनका कोई परिजन नहीं है. दूसरी ओर, कोलकाता से उनके बड़े भाई का पत्र लेकर कुछ लोग आये थे, जिन्हें जिला प्रशासन से संपर्क करने के लिए कहा गया था. अब क्या होगा प्रशांत बोस की मृत्यु की सूचना एनएचआरसी और रांची के न्यायिक आयुक्त को भेज दी गयी है. न्यायिक आयुक्त स्तर पर मामले की जांच न्यायिक मजिस्ट्रेट से करायी जा सकती है. जिला प्रशासन जिस व्यक्ति को भी प्रशांत बोस का शव सौंपेगा, उसकी प्राप्ति रसीद जेल प्रशासन को देनी होगी, ताकि इसकी सूचना एनएचआरसी को दी जा सके. क्या है एनएचआरसी का दिशा-निर्देश एनएचआरसी के दिशानिर्देश के अनुसार मृत बंदी का अंतिम संस्कार 24 घंटे के भीतर कर दिया जाना चाहिए. परिजन द्वारा दावा किये जाने की स्थिति में प्रशासन अधिकतम 72 घंटे तक शव को मोर्चरी में रख सकता है. बंदी की मृत्यु पर अंतिम संस्कार के लिए कितनी राशि दी जायेगी, इसका स्पष्ट उल्लेख जेल मैनुअल में नहीं है. क्या कहना है डीसी का रांची के डीसी मंजूनाथ भजंत्री ने कहा कि प्रशांत बोस की मृत्यु शुक्रवार की सुबह हुई है. अंतिम संस्कार के लिए जिला प्रशासन से अनुरोध किया गया है. हम प्राप्त पत्र का परीक्षण कर रहे हैं और संबंधित पक्षों से मंतव्य भी लिया जा रहा है.

पर्यटन का ‘अनदेखा रत्न’ है झारखंड, आनंद महिंद्रा ने साझा की सारंडा के जंगलों और झरनों की मनमोहक झलक

रांची महिंद्रा ग्रुप के चेयरमैन आनंद महिंद्रा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक दिलचस्प पोस्ट शेयर करते हुए झारखंड की प्राकृतिक खूबसूरती को लेकर अपनी सोच साझा की है. आइए जानते हैं उन्होंने क्या लिखा. पश्चिमी सिंहभूम जिले में स्थित हिल स्टेशन : आनंद महिंद्रा आनंद महिंद्रा ने लिखा कि भारत में छुट्टियों की योजना बनाते समय आमतौर पर गोवा, हिमाचल प्रदेश और राजस्थान जैसे लोकप्रिय स्थानों का ही नाम सामने आता है. उन्होंने यह बताया की उनकी नजर @IndiaAesthetica द्वारा पोस्ट की गई मनमोहक तस्वीरों पर पड़ी. ये तस्वीर झारखंड के पश्चिम सिंहभूम जिले में स्थित मेघातुबुरु हिल स्टेशन की हैं, जिसे ऊंचाई के कारण “बादलों की पहाड़ी” के नाम से जाना जाता है. करीब 4,300 फीट की ऊंचाई पर बसा यह स्थान सरंडा वन के बीच स्थित है, जो 700 पहाड़ियों से घिरा हुआ है. यहां से सूर्यास्त का नजारा, जंगल के झरने और प्राकृतिक दृश्य काफी आकर्षक हैं और यह इलाका अभी भी काफी हद तक अछूता है.      झारखंड में और भी कई खास जगहें उन्होंने अपने पोस्ट में यह भी कहा कि झारखंड में पर्यटन सुविधाएं बहुत सीमित हैं – बहुत कम रिसॉर्ट और ज्यादातर गेस्टहाउस है. आनंद महिंद्रा ने झारखंड के बारे में और जानकारी जुटाई तो पता चला कि यहां नेतरहाट के प्रसिद्ध सूर्योदय, बेतला राष्ट्रीय उद्यान, देवघर का पवित्र ज्योतिर्लिंग, रांची के आसपास के जलप्रपात और प्राचीन सारंडा जंगल मौजूद हैं. फिर भी यह जगह अक्सर नजरअंदाज हो जाती है. झारखंड में समझदार यात्रियों के लिए बहुत कुछ है. बस अब तक इसका खुलकर प्रचार नहीं किया है.

मिशन ‘प्रगति यात्रा’, मुख्यमंत्री आज वाल्मीकि नगर में करेंगे गंडक नहर और लव-कुश पार्क का निरीक्षण, पर्यटन को लगेंगे पंख

 वाल्मीकि नगर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आज यानी रविवार को वाल्मीकि नगर के दौरे पर आ रहे हैं। उनके इस दौरे को लेकर पूरे इलाके में जबरदस्त हलचल है। माना जा रहा है कि सीएम आज उत्तर बिहार के इस अहम पर्यटन केंद्र को करोड़ों रुपये की योजनाओं की सौगात देंगे। इस दौरे का सबसे बड़ा आकर्षण वाल्मीकि नगर हवाई अड्डे के विस्तार का शिलान्यास हो सकता है, जिससे अब बड़े विमानों की उड़ान का रास्ता भी साफ हो जाएगा। हवाई अड्डे के लिए 38.64 करोड़ का प्लान सीएम के इस ड्रीम प्रोजेक्ट के लिए 38.64 करोड़ रुपये की योजना तैयार की गई है। इसके तहत हवाई अड्डे के बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जाएगा। वर्तमान में उपलब्ध जमीन के अलावा करीब 12 एकड़ अतिरिक्त जमीन का अधिग्रहण होना है। जैसे ही जमीन की प्रक्रिया पूरी होगी, निर्माण कार्य में तेजी आएगी। इससे न सिर्फ कनेक्टिविटी बढ़ेगी, बल्कि पर्यटकों के लिए वाल्मीकि नगर पहुंचना और भी आसान हो जाएगा। 2:30 बजे पटना हवाई अड्डे से रवाना होंगे CM तय कार्यक्रम के मुताबिक, मुख्यमंत्री दोपहर करीब 2:30 बजे पटना हवाई अड्डे से रवाना होंगे और सीधे वाल्मीकि नगर पहुंचेंगे। वहां पहुंचकर वे 'मुख्यमंत्री प्रगति यात्रा' के तहत दोन नहर सेवा पथ के बहाली कार्यों का जायजा लेंगे। इसके साथ ही गंडक नहर शाखा के निरीक्षण का भी प्रोग्राम है। इसके अलावा वे लव-कुश पार्क का निरीक्षण करेंगे और वाल्मीकि नगर सभागार में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। सीएम इको टूरिज्म पार्क और गिद्ध संरक्षण केंद्र का उद्घाटन भी करेंगे। क्या बगहा बनेगा नया राजस्व जिला? सीएम के आगमन के साथ ही बगहा को 'राजस्व जिला' बनाने की मांग एक बार फिर तेज हो गई है। प्रशासनिक गलियारों में चर्चा है कि चुनाव से पहले सीएम इस पर कोई बड़ा संकेत दे सकते हैं। फिलहाल, शनिवार को ही डीएम और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने हवाई अड्डे और कन्वेंशन सेंटर का बारीकी से निरीक्षण कर सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं।

अपराधियों पर नकेल कसने की तैयारी, नीतीश सरकार ने पुलिस के लिए नए हथियारों और गोला-बारूद के प्रस्ताव को दी मंजूरी

पटना बिहार में कानून व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। बिहार पुलिस अब अत्याधुनिक हथियारों और गोला-बारूद से लैस होने जा रही है। गृह विभाग ने पुलिस मुख्यालय के उस प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी है, जिसमें करीब 43.42 करोड़ रुपये की लागत से नए हथियार और ट्रेनिंग के लिए गोला-बारूद खरीदने की बात कही गई है। 9mm की पिस्टल से लैस होंगे जवान इस बड़ी खरीद में सबसे खास है '(9mm) सेमी-ऑटोमैटिक पिस्टल'। गृह विभाग के मुताबिक, पश्चिम बंगाल के ईशापुर स्थित राइफल फैक्ट्री से इन पिस्टलों की सप्लाई होगी। पुलिस इसे दो चरणों में खरीदेगी। पहले चरण में 2,500 पिस्टल और दूसरे चरण में 1,500 पिस्टल ली जाएंगी। सिर्फ इन पिस्टलों की खरीद पर ही करीब 42 करोड़ 28 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान है। ट्रेनिंग के लिए आएंगी 1.20 लाख विशेष गोलियां बिहार पुलिस ने प्रैक्टिस के लिए 1.20 लाख ब्लैंक गोलियां खरीदने का फैसला किया है। इन गोलियों का इस्तेमाल ट्रेनिंग के दौरान किया जाएगा। पुणे की खड़की फैक्ट्री से 60 हजार गोलियां और महाराष्ट्र के जलगांव फैक्ट्री से 60 हजार गोलियां आएंगी। इन विशेष गोलियों पर करीब 1 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। बता दें कि बिहार पुलिस इन हथियारों और गोला-बारूद की खरीद सीधे देश की प्रतिष्ठित फैक्ट्रियों से करेगी। इसके लिए पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र की फैक्ट्रियों को चुना गया है। गृह विभाग की मंजूरी मिलने के बाद अब खरीद की प्रक्रिया में तेजी आएगी।

स्टेट बार काउंसिल मतगणना अपडेट, चीफ रिटर्निंग ऑफिसर जस्टिस अंबुज नाथ ने शिकायतों को बताया निराधार

रांची झारखंड स्टेट बार काउंसिल के पंचवर्षीय चुनाव की मतगणना 20 मार्च से लगातार जारी है. शुक्रवार यानी 3 अप्रैल को लगभग सभी जिला बार संघों में हुए मतदान के प्रथम प्राथमिकता के वोटों की गिनती पूरी कर ली गई है. हालांकि इन वोटों की जांच में दो दिन का समय लगेगा, जिसके बाद द्वितीय वरीयता के वोटों की गिनती शुरू की जाएगी. गड़बड़ी के आरोपों को किया गया खारिज चीफ रिटर्निंग ऑफिसर जस्टिस अंबुज नाथ ने चुनाव में गड़बड़ी के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है. गजेंद्र कुमार, अजय कुमार, नेहा ठाकुर और अनामिका शर्मा द्वारा उठाए गए आरोपों को निराधार बताया गया. उन्होंने कहा कि शिकायतें चुनाव प्रक्रिया को बाधित करने वाली थीं और इस संबंध में आगे की कार्रवाई के लिए मामला स्टेट बार काउंसिल को भेज दिया गया है. जांच में नहीं मिली कोई अनियमितता इस मामले की जांच सहायक रिटर्निंग ऑफिसर व सेवानिवृत्त जिला जज शिवनारायण सिंह को सौंपी गई थी. उन्होंने मतदान केंद्र के रजिस्टर, कुल मतदान और बैलेट पेपर लेने के समय किए गए हस्ताक्षरों का मिलान किया. जांच रिपोर्ट में किसी प्रकार की गड़बड़ी नहीं पाई गई, जिसके आधार पर सभी आरोपों को खारिज कर दिया गया. अजय कुमार के दावे पर भी नहीं मिला प्रमाण अजय कुमार ने एक भी वोट नहीं मिलने का मामला उठाते हुए कहा था कि उनके भतीजे ने उन्हें एक वोट दिया था, लेकिन जब इसकी जांच के लिए भतीजा का नाम मांगा गया, तो उन्हें उपलब्ध नहीं कराया गया.

प्रशासनिक सुधार की ओर बढ़े कदम, कर्मयोगी प्लेटफॉर्म पर ऑनलाइन ट्रेनिंग लेंगे झारखंड के कर्मचारी

 रांची झारखंड सरकार ने राज्य के सरकारी कर्मचारियों के लिए एक अनूठी पहल करते हुए ‘साधना सप्ताह’ की शुरुआत की है. यह कार्यक्रम 2 अप्रैल 2026 से 8 अप्रैल 2026 तक पूरे राज्य में चलाया जा रहा है. कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग की ओर से इस संबंध में सभी विभागों, प्रमंडलीय आयुक्तों और उपायुक्तों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं. इस पहल का उद्देश्य सरकारी कर्मचारियों के कौशल और कार्यक्षमता को बढ़ाना है. क्षमता विकास और निरंतर सीखने पर जोर साधना सप्ताह का मुख्य उद्देश्य सरकारी पदाधिकारियों और कर्मचारियों में निरंतर सीखने की आदत विकसित करना और उनकी कार्यक्षमता को मजबूत करना है. सरकार चाहती है कि कर्मचारी बदलते समय के साथ खुद को अपडेट रखें और आधुनिक तकनीकों व प्रशासनिक चुनौतियों के अनुरूप अपनी क्षमता का विकास करें. इससे शासन व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा. आईजीओटी कर्मयोगी प्लेटफॉर्म पर ऑनलाइन पाठ्यक्रम इस कार्यक्रम के तहत सभी सरकारी कर्मियों को आईजीओटी कर्मयोगी प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध ऑनलाइन पाठ्यक्रमों को पूरा करने का निर्देश दिया गया है. यह प्लेटफॉर्म केंद्र सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसके माध्यम से कर्मचारियों को डिजिटल माध्यम से प्रशिक्षण दिया जाता है. कर्मचारियों को उनके कार्य क्षेत्र से जुड़े विषयों पर प्रशिक्षण लेकर अपनी दक्षता बढ़ाने का अवसर मिल रहा है. पाठ्यक्रमों में आधुनिक विषय शामिल साधना सप्ताह के दौरान जिन विषयों पर पाठ्यक्रम चलाए जा रहे हैं, वे पूरी तरह से आधुनिक और जरूरत आधारित हैं. इनमें इमर्जिंग टेक्नोलॉजी का परिचय, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मूल बातें, गवर्नेंस सस्टेनेबिलिटी, साइबर सुरक्षा, डिजिटल अरेस्ट स्कैम से बचाव, माइक्रोसॉफ्ट वर्ड बिगिनर और कार्यस्थल पर योग जैसे विषय शामिल हैं. इन पाठ्यक्रमों की अवधि अलग-अलग तय की गई है, ताकि कर्मचारी अपनी सुविधा के अनुसार इन्हें पूरा कर सकें. विभागीय स्तर पर समिति का गठन कार्यक्रम के सफल संचालन के लिए प्रत्येक विभाग और कार्यालय में एक समिति गठित करने का निर्देश दिया गया है. यह समिति संयुक्त सचिव या उप सचिव स्तर के अधिकारी की अध्यक्षता में बनेगी, जिसमें 3 से 4 पदाधिकारी शामिल होंगे. समिति की जिम्मेदारी होगी कि वह साधना सप्ताह के दौरान विभिन्न गतिविधियों का आयोजन सुनिश्चित करे. वेबिनार और चर्चा सत्र होंगे आयोजित साधना सप्ताह के दौरान केवल ऑनलाइन पाठ्यक्रम ही नहीं, बल्कि समूह चर्चा, वेबिनार और पैनल चर्चा जैसे कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे. इन सत्रों में समकालीन प्रशासनिक चुनौतियों, नीतियों और बेहतर कार्यप्रणालियों (बेरूट प्रैक्टिसेज) पर विचार-विमर्श किया जाएगा. इससे कर्मचारियों को व्यावहारिक अनुभव और नई सोच विकसित करने का अवसर मिलेगा. विभागाध्यक्षों को दी गई विशेष जिम्मेदारी राज्य सरकार ने सभी विभागाध्यक्षों को निर्देश दिया है कि वे अपने अधीनस्थ कर्मचारियों को समय पर पाठ्यक्रम पूरा करने के लिए प्रेरित करें. साथ ही, यह भी सुनिश्चित करें कि इस कार्यक्रम से संबंधित सभी आवश्यक कार्यवाही समय पर पूरी हो. इससे साधना सप्ताह का उद्देश्य सफलतापूर्वक हासिल किया जा सके. प्रशासनिक सुधार की दिशा में अहम कदम साधना सप्ताह को झारखंड सरकार के प्रशासनिक सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. यदि इस कार्यक्रम का प्रभावी ढंग से क्रियान्वयन होता है, तो इससे सरकारी कर्मचारियों की कार्यशैली में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा. साथ ही, इससे आम जनता को भी बेहतर सेवाएं मिलने की उम्मीद है.

नक्सलियों की पुरानी ‘जन-अदालत’ वाली जगह का मंत्री ने किया निरीक्षण, बोले- विकास से ही खत्म होगा उग्रवाद

बूढ़ा पहाड़  झारखंड सरकार के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर शुक्रवार को उग्रवादियों का बहुचर्चित शरणस्थली बूढ़ा पहाड़ पहुंच गए. उनका यह दौरा प्रशासनिक और राजनीतिक दृष्टि से काफी अहम माना जा रहा है. वित्त मंत्री दुर्गम रास्तों से होते हुए सड़क मार्ग, पैदल और बाइक के सहारे दोपहर करीब दो बजे बूढ़ा पहाड़ पहुंचे. लंबे समय तक नक्सल गतिविधियों के लिए चर्चित रहे इस इलाके में उनका दौरा सरकार की जमीनी सक्रियता और विकास के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है. वित्त मंत्री ने बूढ़ा पहाड़ का लिया जायजा बूढ़ा पहाड़ पहुंचने के बाद वित्त मंत्री ने सबसे पहले सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया. उन्होंने पिकेट पर तैनात अधिकारियों और जवानों से बातचीत कर उनकी समस्याओं और चुनौतियों को जाना. साथ ही मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के हालिया दौरे के बाद क्षेत्र में आए बदलावों की समीक्षा की. मंत्री ने सुरक्षा बलों की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि उनके प्रयासों से ही क्षेत्र में उग्रवाद पर काफी हद तक नियंत्रण संभव हो पाया है. इसके बाद उन्होंने स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी बीडीओ, सीओ और संबंधित पंचायत के मुखिया बिंको उरांव से मुलाकात की. इस दौरान उन्होंने क्षेत्र में अब तक हुए विकास कार्यों, योजनाओं की प्रगति और ग्रामीणों की जरूरतों के बारे में विस्तृत जानकारी ली. मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि विकास योजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर तेजी से पूरा किया जाय, ताकि आम लोगों को इसका सीधा लाभ मिल सके. नक्सलियों के जन-अदालत वाले स्थान का किया निरीक्षण दौरे के क्रम में वित्त मंत्री ने उस स्थान का भी निरीक्षण किया, जहां कभी नक्सली नेता जन-अदालत लगाया करते थे. यह निरीक्षण क्षेत्र में बदलते हालात और शांति स्थापना की दिशा में उठाए गये कदमों का प्रतीक माना जा रहा है. स्थानीय लोगों से बातचीत के दौरान उन्होंने उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना और भरोसा दिलाया कि सरकार हर संभव सहायता प्रदान करेगी. सड़क, अस्पताल और स्कूल बनवाने का आश्वासन वित्त मंत्री ने कुल्ही से बूढ़ा पहाड़ तक सड़क निर्माण, हेसातु में हाई स्कूल की स्थापना और कुल्ही में अस्पताल की सुविधा उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया. उन्होंने गढ़वा के उपायुक्त को निर्देश दिया कि अगले 10 दिनों के अंदर एक विशेष बैठक आयोजित कर अब तक हुए कार्यों की समीक्षा की जाए और आगे की ठोस कार्ययोजना तैयार की जाए. नियंत्रण में है उग्रवाद उन्होंने स्पष्ट कहा कि उग्रवाद अभी नियंत्रित स्थिति में है, लेकिन पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है.ऐसे में बुढ़ा पहाड़ क्षेत्र से सीआरपीएफ कैंप हटाना जल्दबाजी होगा. जब तक ग्रामीणों को बुनियादी सुविधाएं और सुरक्षा का भरोसा नहीं मिल जाता, तब तक सुरक्षा बलों की तैनाती जरूरी है. कुल मिलाकर, यह दौरा सुरक्षा और विकास के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. विकास के बदौलत उग्रवाद होगा खत्म: वित्त मंत्री वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर शुक्रवार को बूढ़ा पहाड़ पहुंचे. इस दौरान उन्होंने न केवल विकास योजनाओं का जायजा लिया, बल्कि मुख्य धारा से भटके हुए उग्रवादियों को परोक्ष रूप से संदेश भी दिया. उन्होंने कहा कि उग्रवाद अभी खत्म नहीं हुआ है, बल्कि उस पर नियंत्रण किया गया है. विकास के बदौलत ही उग्रवाद को समूल खत्म किया जा सकता है. इसलिए बूढ़ा पहाड़ के लोगों का विकास हो सके, इसके लिए अभी बहुत कुछ करना बाकी है. केंद्र और राज्य की पुलिस ने उग्रवाद पर नियंत्रण करने में कामयाबी हासिल की है. इसके लिए वह बधाई के पात्र हैं. मानवीय है बूढ़ा पहाड़ का दौरा उन्होंने कहा कि बूढ़ा पहाड़ का यह दौरा राजनीतिक नहीं बल्कि मानवीय है. यहां आने पर उन्हें धरातल पहुंचने वाली योजनाओं के बारे में वास्तविक जानकारी मिली है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के बूढ़ा पहाड़ के कुछ समय पहले दौरा करने के बाद ही यहां आने की इच्छा थी. हालांकि, 21 वर्ष पहले वह यहां आ चुके थे. उन्होंने कहा कि यहां केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का तो पहुंचाया गया है, लेकिन इसका पर्याप्त लाभ अभी नहीं मिल सका है. यहां के लोग अभी भी सड़क ,बिजली, शौचालय, हाई स्कूल आदि की आस लगाए बैठे हैं. इसके लिए प्रयास किया जाएगा कि यहां समुचित विकास हो सके. इसके गढ़वा और पलामू डीसी को स्थिति से अवगत कराया जाएगा. मंईयां सम्मान योजना का मिल रहा लाभ उन्होंने कहा कि बहुत जल्द ही पेयजल और स्वच्छता विभाग, आपूर्ति विभाग, भूमि संरक्षण विभाग, कृषि विभाग, पशुपालन विभाग सहित अन्य विभागों के साथ बैठकर बूढ़ा पहाड़ के लिए योजनाओं के पैकेज के लिए समीक्षा करेंगे. यहां एक किलोमीटर तक आरसीसी सड़क बनाया जाना बेहद जरूरी है. यहां विकास की गति को तेज किया जाएगा. जो जानकारी मिली है उसके मुताबिक मंईयां सम्मान योजना का लाभ यहां के लोगों को मिला है, लेकिन ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए उनके क्रय शक्ति को बढ़ाने की दिशा में काम करने की जरूरत है. भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में उग्रवाद कभी स्वीकार्य नहीं उन्होंने कहा कि मैं पलामू के छतरपुर इलाके से रहा हूं. इसलिए मैंने उग्रवाद को करीब से देखा है. मैं बूढ़ा पहाड़ से उग्रवादियों को को संदेश देना चाहता हूं कि जो गलत निर्णय लिया है, उसे भारत जैसे विशाल लोकतांत्रिक देश में कभी भी स्वीकार नहीं किया जा सकता है. उग्रवादी घटनाओं को अंजाम देकर कुछ पैसे की वसूली से आत्मनिर्भर नहीं बना जा सकता है. इसके लिए लोकतांत्रिक व्यवस्था जरूरी है. इसलिए उग्रवादी विचारधारा को खत्म कर भारतीय लोकतंत्र के मुख्य धारा से जुड़ें.