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बिहार में प्रदूषण का कहर: इस शहर का AQI 400 पार, लोग बेहाल

मुजफ्फरपुर मुजफ्फरपुर शहर में प्रदूषण ने सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। फरवरी महीने में शहर की हवा सबसे ज्यादा खराब दर्ज की गई है। प्रदूषण का स्तर अति खराब श्रेणी में पहुंच गया है और शहर का AQI 439 से अधिक दर्ज किया गया, जो इस महीने का सबसे बड़ा रिकॉर्ड माना जा रहा है। प्रदूषण से लोगों को कोई राहत नहीं मिल रही है और शहर की हवा एक बार फिर बेहद दमघोंटू हो गई है, जिससे आम लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं और बीमारियों का खतरा भी बढ़ता जा रहा है। स्थिति को देखते हुए नगर निगम प्रशासन अब इसकी रोकथाम में जुट गया है। दूसरी बार इस साल दर्ज हुआ इतना खराब AQI बिहार के मुजफ्फरपुर शहर में प्रदूषण का स्तर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। बताया जा रहा है कि इस साल दूसरी बार शहर का AQI सबसे ज्यादा दर्ज किया गया है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के ताजा आंकड़ों ने एक बार फिर नगर निगम प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। ये आंकड़े केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट पर आधारित हैं। इनके अनुसार मुजफ्फरपुर जिले में प्रदूषण का स्तर 439 दर्ज किया गया है। शहर के अलग-अलग इलाकों में भी स्थिति बेहद खराब रही। मिठनपुरा में AQI 416, ब्रह्मपुरा-दाउदपुर में AQI 406, बुद्ध कॉलोनी में AQI 409 और अरारदह में AQI 413 दर्ज किया गया है। सांस की बीमारियों का खतरा बढ़ा ठंड से कुछ राहत मिलने के बाद प्रदूषण की यह मार लोगों के लिए एक नई परेशानी बन गई है। इसके चलते सांस से जुड़ी बीमारियों के बढ़ने की आशंका भी काफी बढ़ गई है। शहर के कई इलाकों में धूल, मिट्टी और अन्य कणों की वजह से हालात और बिगड़ गए हैं और मरीजों की संख्या भी बढ़ रही है। नगर निगम की कोशिशें बेअसर प्रदूषण पर काबू पाने में नगर निगम प्रशासन फिलहाल बेबस नजर आ रहा है। नगर निगम की ओर से शहर के अंदर स्प्रिंकल वैन से पानी का छिड़काव किया जा रहा है, लेकिन यह उपाय अब बेअसर साबित हो रहा है। प्रदूषण के इस खतरनाक आंकड़े के सामने आने के बाद नगर निगम प्रशासन अलर्ट मोड में आ गया है और एक बार फिर इसे रोकने के लिए ठोस योजना के साथ कार्रवाई करने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए नगर निगम की टीम बड़ी तैयारी में जुट गई है।  

धनबाद मेडिकल कॉलेज अस्पताल में आग से अफरा-तफरी, मरीजों ने छोड़ा अस्पताल

धनबाद धनबाद मेडिकल कॉलेज अस्पताल (डीएमसीएच) में शनिवार शाम उस समय हड़कंप मच गया, जब स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग के कार्यालय में अचानक आग लग गई। आग से कार्यालय में रखा जरूरी कागजात जल गए, हालांकि राहत की बात यह रही कि इस घटना में कोई हताहत नहीं हुआ। आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट बताया जा रहा धनबाद मेडिकल कॉलेज अस्पताल के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग के कार्यालय में शनिवार की शाम अचानक आग लग गई। कार्यालय से धुआं उठता देख सुरक्षा कर्मियों और अस्पताल कर्मचारियों में अफरातफरी मच गई। घटना के समय कार्यालय बंद था और बाहर ताला लगा हुआ था। धुआं निकलता देख तुरंत शोर मचाया गया और ताला तोड़कर दरवाजा खोला गया। अंदर घना धुआं फैला हुआ था। स्थिति की गंभीरता को समझते हुए सुरक्षा कर्मियों और कर्मचारियों ने सबसे पहले बिजली का कनेक्शन काटा। इसके बाद कार्यालय में प्रवेश कर आग पर काबू पाया गया। समय रहते आग बुझा ली गई, लेकिन तब तक विभाग की कई महत्वपूर्ण फाइलें जलकर नष्ट हो चुकी थीं। प्रारंभिक तौर पर आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट बताया जा रहा है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। धुएं के कारण अफरातफरी का माहौल घटना की जानकारी मिलते ही अस्पताल अधीक्षक डॉ. डी.के. गिंदोरिया, स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. राजलक्ष्मी तुबिद, वरीय अस्पताल प्रबंधक डॉ. सुमन समेत अन्य अधिकारी और कर्मचारी मौके पर पहुंचे और हालात का जायजा लिया। अधीक्षक ने बताया कि पूरे मामले की जांच कराई जा रही है और आग से हुए नुकसान का आकलन किया जा रहा है। साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए बिजली सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जाएगी। आग का धुआं पास के वार्डों तक पहुंच गया, जिससे वहां भर्ती मरीजों और उनके परिजनों में दहशत फैल गई। धुएं के कारण कुछ देर के लिए अफरातफरी का माहौल बन गया और कई लोग अपने मरीजों को लेकर बाहर निकल आए। हालांकि अस्पताल प्रबंधन और कर्मचारियों की तत्परता से जल्द ही स्थिति पर नियंत्रण पा लिया गया और हालात सामान्य होने के बाद मरीजों को दोबारा वार्डों में भेज दिया गया।  

कोडिंग की दुनिया में बिहार का परचम, सूर्य शेखर ने अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता 2026 में रचा इतिहास

पटना बिहार की मिट्टी ने एक बार फिर अपनी मेधा का लोहा पूरी दुनिया में मनवाया है। पूर्णिया जिले के निवासी सूर्य शेखर ने अहमदाबाद में आयोजित अंतरराष्ट्रीय कोडिंग प्रतियोगिता 2026 में पहला स्थान हासिल कर न केवल अपने जिले, बल्कि पूरे भारत का नाम वैश्विक मंच पर रोशन किया है। इस ऐतिहासिक जीत के साथ ही सूर्य शेखर अब दुनिया के उभरते हुए सर्वश्रेष्ठ सॉफ्टवेयर डेवलपर्स की श्रेणी में शामिल हो गए हैं। यह विश्वस्तरीय प्रतियोगिता दुनिया की प्रतिष्ठित टेक कंपनियों के सहयोग से और प्रसिद्ध वेब फ्रेमवर्क लारावेल (Laravel) की देखरेख में आयोजित की गई थी। इस प्रतियोगिता में अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी और जापान समेत 20 से अधिक विकसित देशों के करीब 1200 चुनिंदा प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया था। कड़े राउंड, जटिल चुनौतियां और सूर्य की शानदार जीत प्रतियोगिता के दौरान कोडिंग के जटिलतम लॉजिक्स को सुलझाने, तकनीकी दक्षता दिखाने और आधुनिक सॉफ्टवेयर चुनौतियों का समाधान करने जैसे कई कड़े राउंड आयोजित किए गए थे। सूर्य शेखर ने अपनी तार्किक क्षमता और बेहतरीन कोडिंग स्किल्स के दम पर सभी वैश्विक प्रतिद्वंद्वियों को पीछे छोड़ते हुए सर्वोच्च स्थान हासिल किया। टेलर ओटवेल ने किया सम्मानित, मिला MacBook M4 सूर्य की इस असाधारण सफलता पर लारावेल फ्रेमवर्क के संस्थापक और दुनिया के दिग्गज प्रोग्रामर टेलर ओटवेल (Taylor Otwell) ने उन्हें विशेष रूप से सम्मानित किया। सम्मान के तौर पर सूर्य को नवीनतम MacBook M4 प्रदान किया गया। सूर्य शेखर ने बताया कि टेलर ओटवेल जैसे तकनीकी विजनरी से मिलना और उनसे भविष्य की तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और वेब डेवलपमेंट पर चर्चा करना उनके जीवन का सबसे सुखद अनुभव रहा। माता-पिता और बड़े भाई को दिया सफलता का श्रेय अपनी इस बड़ी उपलब्धि पर सूर्य शेखर भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि उनकी इस सफलता के पीछे उनके माता-पिता और बड़े भाई राजशेखर का मार्गदर्शन है। उल्लेखनीय है कि राजशेखर खुद एक अनुभवी सॉफ्टवेयर डेवलपर हैं, जिन्होंने सूर्य को तकनीक की बारीकियों से रूबरू कराया। सूर्य ने कहा, “यह जीत मेरे करियर का एक बड़ा पड़ाव है। मुझे उम्मीद है कि इससे छोटे शहरों के दूसरे छात्रों को भी बड़े वैश्विक लक्ष्यों की ओर बढ़ने की प्रेरणा मिलेगी।” बिहार में जश्न का माहौल, युवाओं के लिए बनी मिसाल सूर्य शेखर की इस अंतरराष्ट्रीय सफलता की खबर मिलते ही पूर्णिया समेत पूरे बिहार में जश्न का माहौल है। सोशल मीडिया पर उन्हें लगातार बधाइयाँ दी जा रही हैं। शिक्षाविदों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने इस उपलब्धि को बिहार के युवाओं के लिए एक मील का पत्थर बताया है। यह सफलता इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि यदि युवाओं को सही मार्गदर्शन और उचित अवसर मिलें, तो वे वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भी किसी से पीछे नहीं हैं।  

नेशनल हाईवे बना मौत का रास्ता: कोहरे में ट्रक से टकराई बस, बड़ा सड़क हादसा

मधुबनी बिहार के मधुबनी जिले में घने कोहरे की वजह से सुबह करीब तीन बजे एनएच- 27 पर फुलपरास प्रखंड के पूरवारी टोल प्लाजा के पास वैशाली ट्रेवल्स की एक यात्री बस आगे चल रहे ट्रक से टकरा गई। हादसा इतना जबरदस्त था कि बस में सवार दर्जनों यात्री घायल हो गए। मौके पर मची अफरा-तफरी प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, घना कोहरा होने के कारण द्दश्यता बेहद कम थी, जिससे चालक ट्रक को समय रहते नहीं देख सका और यह दुर्घटना हो गई। टक्कर के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों ने तत्परता दिखाते हुए घायलों को बस से बाहर निकाला और अनुमंडल अस्पताल फुलपरास पहुंचाया। तीन यात्रियों की हालत गंभीर अस्पताल सूत्रों के मुताबिक घायलों में तीन यात्रियों की हालत गंभीर बनी हुई है। प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सकों ने गंभीर रूप से घायल यात्रियों को बेहतर इलाज के लिये दरभंगा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (डीएमसीएच) रेफर कर दिया है।

दरभंगा तनाव की गिरफ्त में: पुलिस पर हमला, जवाबी लाठीचार्ज; क्या थी विवाद की वजह?

दरभंगा बिहार के दरभंगा जिले में एक दिल दहला देने वाली घटना के बाद माहौल पूरी तरह तनावपूर्ण हो गया। विश्वविद्यालय थाना क्षेत्र के पटवा पोखरा के पास 8 साल की नाबालिग बच्ची से दुष्कर्म के बाद उसकी हत्या कर दी गई। घटना से गुस्साए लोगों ने सड़क जाम कर दिया और आरोपी को तुरंत फांसी देने की मांग करने लगे। इसी दौरान प्रदर्शन कर रहे लोगों ने पुलिस पर पथराव कर दिया, जिसके बाद पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। पुलिस ने लोगों को दौड़ा-दौड़ाकर खदेड़ा। इस दौरान कई महिलाएं भी सड़क पर उतरकर पुलिस के खिलाफ हंगामा करती नजर आईं।  गुस्साए लोगों ने आरोपी की दुकान और उसके टेम्पो में आग लगा दी, जिससे स्थिति और भी बिगड़ गई। हालात काफी बेकाबू होते नजर आ रहे हैं। पुलिस और प्रशासन की टीमें मौके पर मौजूद हैं और लगातार उपद्रव कर रहे लोगों को शांत कराने में जुटी हुई हैं, ताकि स्थिति को काबू में किया जा सके और कानून-व्यवस्था बहाल रहे। एसएसपी पहुंचे मौके पर, शव पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया घटना की सूचना मिलते ही एसएसपी जगुनाथ रेड्डी देर रात मौके पर पहुंचे और हालात को संभाला। बच्ची के शव को पोस्टमार्टम के लिए डीएमसीएच भेज दिया गया है। वहीं एफएसएल की टीम भी मौके पर पहुंचकर जांच में जुट गई है और जरूरी सैंपल जुटाए जा रहे हैं। खेलते समय गायब हुई थी बच्ची, रात में मिला शव बताया जा रहा है कि बच्ची शाम के समय घर से बाहर तालाब किनारे दूसरी बच्चियों के साथ खेलने गई थी। काफी देर तक घर नहीं लौटने पर परिजन उसकी तलाश करने लगे, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। देर रात इलाके में कुत्तों के ज्यादा भौंकने की आवाज सुनकर बच्ची के मामा वहां पहुंचे तो देखा कि बच्ची खून से लथपथ हालत में पड़ी हुई थी। शोर मचाने पर आसपास के लोग जुटे और देखा गया कि पास की दीवार पर भी काफी खून पड़ा हुआ था। बच्चों की गवाही और CCTV से पकड़ा गया आरोपी घटना की सूचना विश्वविद्यालय थाना पुलिस को दी गई। मौके पर पहुंची पुलिस ने जांच शुरू की और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। साथ खेल रही बच्चियों ने बताया कि विकास महतो बच्ची को जबरदस्ती खींचकर अंधेरे की ओर ले गया था। बच्चों की पहचान और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पुलिस ने आरोपी विकास महतो को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बच्ची के खून से सने कपड़े भी जब्त कर लिए हैं। इस घटना के बाद पूरे इलाके में भारी आक्रोश है। लोग आरोपी को तुरंत फांसी देने की मांग कर रहे हैं। पुलिस मौके पर तैनात है और हालात पर नजर रखे हुए है। प्रशासन का कहना है कि मामले की हर एंगल से जांच की जा रही है और आरोपी को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने की कार्रवाई की जाएगी।

दरभंगा शर्मसार: मासूम से दरिंदगी के बाद हत्या, सड़कों पर उतरा लोगों का गुस्सा

दरभंगा बिहार के दरभंगा में एक छह साल की बच्ची के साथ दरिंदगी की गई। विश्वविद्यालय थाना क्षेत्र के बेला में शनिवार की रात छह साल की बच्ची से रेप के बाद उसकी हत्या कर दी गई। इस मामले में पुलिस ने पड़ोस में रहने वाले एक युवक को गिरफ्तार किया है। उसके कपड़े पर खून के धब्बे मिले हैं। उसकी पहचान विकास महतो (22) के रूप में हुई है। पुलिस ने उसे उसके घर से गिरफ्तार किया है। आक्रोशित लोगों ने सड़क जाम कर दिया है। आरोपी को सौंपने की मांग पर अड़े लोग उसे तालिबानी सजा देने की जिद पर अड़े हैं। पुलिस और पब्लिक आमने सामने है। पत्थरबाजी के बाद पुलिस ने भीड़ पर लाठी चार्ज कर दिया। मौके पर प्रशासन और पुलिस के वरीय अधिकारी मौजूद हैं।   घटना के विरोध में स्थानीय लोगों और परिजनों ने मुख्य मार्ग को सुंदरपुर बेला मंदिर के पास जाम कर दिया। प्रदर्शनकारी आरोपित को फांसी की सजा देने की मांग कर रहे थे। सूचना मिलते ही विश्वविद्यालय थाने की पुलिस मौके पर पहुंची। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी जगुनाथ रेड्डी जलारेड्डी भी घटनास्थल पर पहुंचे। जांच के लिए एफएसएल की टीम को भी बुलाया गया है। मौके पर पांच थानों की पुलिस तैनात है। लोगों को समझाने का प्रयास किया जा रहा है। रेप-मर्डर के बाद सड़क पर आगजनी पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए डीएमसीएच भेज दिया है। मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है। एसएसपी ने बताया कि बच्ची का शव बरामद कर लिया गया है और मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि आरोपित के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल आरोपित से पूछताछ की जा रही है। जानकारी के मुताबिक, बच्ची कादिराबाद की रहने वाली थी। वह बेला में अपने ननिहाल आयी थी। वह शनिवार की शाम से ही घर से लापता थी। परिजन लगातार उसकी तलाश कर रहे थे। काफी खोजबीन के बाद भी कोई सुराग नहीं मिला। देर रात गांव के बाहर तालाब के पास कुछ कुत्ते भौंक रहे थे। इसके बाद परिवार के लोगों को शक हुआ। परिजन मौके पर पहुंचे तो तालाब के किनारे दीवार के पास बच्ची खून से लथपथ हालत में पड़ी मिली। तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। बताया जा रहा है कि घटना के समय तीन बच्चियां तालाब किनारे खेल रही थीं। इसी दौरान आरोपित ने तीनों को पकड़ने की कोशिश की। एक बच्ची उसके हाथ लग गई, जबकि दो अन्य बच्चियां वहां से भाग निकलीं। आरोपित बच्ची को अंधेरे की ओर ले गया और जहां उसके साथ दुष्कर्म करने के बाद उसकी हत्या कर दी। पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।  

झारखंड में गठबंधन की योजना नाकाम, निकाय चुनाव में बागियों का असर

रांची   झारखंड में नगर निकाय चुनाव भले ही औपचारिक रूप से पार्टी आधार पर नहीं हो रहे हों, लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट नजर आ रही है. भाजपा, झामुमो और कांग्रेस समेत तमाम राजनीतिक पार्टियां नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायतों में अपना राजनीतिक आधार मजबूत करने के लिए खुलकर मैदान में हैं. समर्थित उम्मीदवारों के नाम पर पार्टियों के भीतर ही सियासी गोटी बिछाई जा रही है. इस बार के निकाय चुनाव में पार्टियों के भीतर बगावत ने गठबंधन और रणनीति दोनों को कमजोर कर दिया है. बागियों ने बिगाड़ा सियासी गणित चुनावी फसल काटने की होड़ में कई जगहों पर पार्टी के ही नेता या उनके परिवार के सदस्य अधिकृत उम्मीदवारों के खिलाफ मैदान में उतर गए हैं. इससे पार्टी के प्रति निष्ठा पर सवाल खड़े हो गए हैं. कहीं पति पार्टी लाइन पर खड़ा है, तो पत्नी बागी बनकर उसी पार्टी के उम्मीदवार के खिलाफ चुनाव लड़ रही है. इस स्थिति ने पार्टी नेतृत्व की मुश्किलें कई गुना बढ़ा दी हैं. राज्यभर में गहमा-गहमी, नामांकन तक चला मान-मनौव्वल रांची, धनबाद, देवघर, मेदिनीनगर समेत कई नगर निकायों में नामांकन के आखिरी दिन तक गहमा-गहमी बनी रही. 4 फरवरी को नामांकन की अंतिम तारीख और 6 फरवरी को नाम वापस लेने की अंतिम तिथि तक रूठने-मनाने का दौर चलता रहा. हालांकि कई जगहों पर पार्टी नेतृत्व बागियों को मनाने में नाकाम रहा. 48 निकायों में सजी चुनावी बिसात झारखंड में इस बार नौ नगर निगम, 20 नगर परिषद और 19 नगर पंचायतों में चुनावी मुकाबला है. इतने बड़े स्तर पर हो रहे चुनाव में सत्तारूढ़ झामुमो, कांग्रेस और राजद के बीच कोई स्पष्ट गठबंधन फॉर्मूला तय नहीं हो सका है. इसका सीधा फायदा बागी उम्मीदवारों को मिलता दिख रहा है. धनबाद में भाजपा के लिए सबसे बड़ी चुनौती धनबाद नगर निगम चुनाव भाजपा के लिए सबसे ज्यादा चुनौतीपूर्ण बन गया है. पार्टी ने मेयर पद के लिए संजीव कुमार को समर्थन दिया है, लेकिन भाजपा के कई नेता बागी होकर मैदान में हैं. झरिया के पूर्व विधायक संजीव सिंह भी चुनाव लड़ रहे हैं. इसके अलावा मुकेश पांडेय और भृगुनाथ भगत ने भी नामांकन वापस नहीं लिया. भाजपा किसी भी बागी को मनाने में सफल नहीं हो सकी. वहीं झामुमो की प्रत्याशी डॉ नीलम मिश्रा ने नामांकन वापस ले लिया है. अब पूर्व मेयर चंद्रशेखर अग्रवाल झामुमो समर्थित उम्मीदवार होंगे. देवघर में भाजपा और झामुमो दोनों में अंदरूनी कलह देवघर नगर निगम में भाजपा ने रीता चौरसिया को समर्थित प्रत्याशी बनाया है. पार्टी ने यहां काफी मंथन किया, लेकिन बाबा बनलासे और उमाशंकर सिंह बागी बनकर मैदान में डटे हुए हैं. इससे भाजपा का वोट बैंक बंटने की आशंका है. उधर झामुमो में भी फूट नजर आ रही है. रवि राउत पार्टी समर्थित उम्मीदवार हैं, जबकि झामुमो नेता सूरज झा भी चुनावी मैदान में उतर गए हैं. कांग्रेस ने यहां किसी भी उम्मीदवार को समर्थन नहीं दिया है. कांग्रेस नगर अध्यक्ष रवि केसरी भी मेयर पद के लिए किस्मत आजमा रहे हैं. मेदिनीनगर में बहुकोणीय मुकाबला मेदिनीनगर में चुनावी घमासान अपने चरम पर है. यहां झामुमो ने पूर्वम सिंह, भाजपा ने अरुणा शंकर, कांग्रेस ने नम्रता त्रिपाठी, जेएलकेएम ने आइसा सिंह और लोजपा ने ज्योति गुप्ता को समर्थन दिया है. भाजपा के भीतर भी असंतोष साफ दिख रहा है और पार्टी को कार्यकर्ताओं को एकजुट रखने में काफी मशक्कत करनी पड़ रही है. रांची में त्रिकोणीय मुकाबला राजधानी रांची में नगर निगम चुनाव सबसे ज्यादा रोचक हो गया है. कांग्रेस और झामुमो के बीच सहमति नहीं बन पाई. कांग्रेस ने पूर्व मेयर रमा खलखो को उम्मीदवार बनाया है, जबकि झामुमो ने सुजित विजय आनंद कजूर को समर्थन दिया है. भाजपा ने रोशनी खलखो को पार्टी समर्थित उम्मीदवार घोषित किया है. भाजपा ने रोशनी खलखो के खिलाफ नामांकन करने वाले संजय टोपो, राजेंद्र मुंडा और सुनील कच्छप को मना लिया, लेकिन सुजाता कच्छप नहीं मानीं. झामुमो ने भी पार्टी प्रत्याशी के पक्ष में करीना तिर्की, बिरू तिर्की और रामशरण तिर्की जैसे नेताओं को मनाने में सफलता पाई है. बागी बदल सकते हैं चुनावी समीकरण निकाय चुनाव में बागियों की मजबूत मौजूदगी ने यह साफ कर दिया है कि झारखंड में गठबंधन और पार्टी अनुशासन दोनों कमजोर पड़ते नजर आ रहे हैं. वोटों के बंटवारे से कहीं न कहीं अप्रत्याशित नतीजे सामने आ सकते हैं. यही वजह है कि इस बार के निकाय चुनाव को सभी दल बेहद अहम मान रहे हैं और अंतिम समय तक रणनीति बदलने से भी पीछे नहीं हट रहे हैं.

कोडरमा में 10 बिरहोर बच्चे 6 दिन से लापता

जयनगर/कोडरमा. जयनगर थाना क्षेत्र के गड़ियाई बिरहोर टोला से 1 फरवरी से दस बच्चे लापता हैं। छह दिन बीत जाने के बाद भी बच्चों का पता नहीं चल सका है, जिससे बिरहोर परिवारों में दहशत और चिंता का माहौल है। स्वजन ने बताया कि सभी बच्चे परसाबाद में भोज खाने की बात कहकर घर से निकले थे, लेकिन वापस नहीं लौटे। लापता बच्चों में निशा कुमारी (7), रमेश बिरहोर (5), सजनी बिरहोर (8), बिरजू बिरहोर, मिथुन बिरहोर, शिवानी बिरहोर, कल्पना बिरहोर, रेखा बिरहोर (8), अनीशा बिरहोर (6) व एक अन्य बच्चा शामिल है। बच्चों के नहीं लौटने पर 3 फरवरी को स्वजन स्थानीय मुखिया राजेंद्र यादव के पास पहुंचे। इस पर मुखिया ने संवेदनशीलता दिखाते हुए तत्काल इसकी जानकारी जयनगर थाना प्रभारी और प्रखंड विकास पदाधिकारी को दी। इसके बावजूद शुरुआती स्तर पर पुलिस की ओर से गंभीरता नहीं दिखाई गई। जब 5 फरवरी तक भी उनका कोई सुराग नहीं मिला तो शुक्रवार को बच्चों के स्वजन जयनगर थाना पहुंचे और खोजबीन की गुहार लगाई। इसके बाद मामला वरीय अधिकारियों तक पहुंचा। इस पर एसपी अनुदीप सिंह ने मामले को गंभीरता से लेते हुए विशेष टीम का गठन किया। शुक्रवार को प्रशिक्षु डीएसपी दिवाकर कुमार के नेतृत्व में इंस्पेक्टर सुजीत कुमार, तिलैया थाना प्रभारी विनय कुमार, चंदवारा थाना प्रभारी शशिभूषण कुमार, जयनगर थाना प्रभारी उमानाथ सिंह, महिला थाना प्रभारी हेमा कुमारी, तिलैया डैम ओपी प्रभारी सहित टेक्निकल सेल की टीम गड़ियाई बिरहोर टोला पहुंची और स्वजन से पूछताछ की। प्रशिक्षु डीएसपी ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है और शीघ्र ही बच्चों को खोज निकाला जाएगा। सूचना के बाद भी पुलिस-प्रशासन ने नहीं दिखाई तत्परता स्थानीय मुखिया राजेंद्र यादव ने बताया कि जैसे ही उनकी जानकारी में बच्चों के लापता होने की बात आई, उन्हाेंने तुरंत इसकी सूचना जयनगर थाना प्रभारी और बीडीओ को दी थी, लेकिन दोनों अधिकारियों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। दोनों ने यह कहकर मामला टाल दिया गया कि बिरहोर समुदाय के लोग घुमक्कड़ होते हैं और बच्चे खुद लौट आएंगे। यदि समय रहते प्रशासन सक्रिय होता तो शायद बच्चों का जल्द पता चल सकता था। पदाधिकारियों की संवेदनहीनता ने पुलिस-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

आधुनिक ‘एलीफेंट केयर सेंटर’ में हाथियों को मिलेगा नया जीवन

जमशेदपुर. दलमा के तराई में स्थित डिमना लेक के बगल में बसे भादूडीह के पास एलीफेंट केयर सेंटर बनाए जाएंगे। डिमना लेक के पास बनने वाला यह एलीफेंट केयर सेंटर 10 हेक्टेयर यानि 26 एकड़ में बनाए जाएंगे। दलमा के डीएफओ सह गज परियोजना के उप निदेशक सबा आलम अंसारी ने बताया कि एक करोड़ की लागत से बनने वाला यह एलीफेंट केयर सेंटर कोल्हान में हाथियों के लिए जीवनदान होगा। वन्यजीव संरक्षण की दिशा में अहम कदम डीएफओ ने बताया कि एलीफेंट केयर सेंटर का निर्माण कार्य अगले सप्ताह से शुरू कर दी जाएगी। उन्होंने बताया कि दलमा की तराई में बनने वाला यह एलीफेंट केयर सेंटर झारखंड में वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक अहम कदम साबित होगा। हाथियों के प्राकृतिक आवास, स्वास्थ्य और मानव-हाथी संघर्ष को कम करने के उद्देश्य से यह केंद्र आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा। डीएफओ के अनुसार, इस सेंटर का मुख्य लक्ष्य घायल, बीमार, बुजुर्ग या अनाथ हाथियों या उनके बच्चे की देखभाल करना और उन्हें दोबारा स्वस्थ कर सुरक्षित वातावरण देना है। हाथियों का अस्पताल या पुनर्वास केंद्र डिमना लेक के पास बनने वाला एलीफेंट केयर सेंटर एक तरह से बीमार हाथियों के लिए अस्पताल और पुनर्वास केंद्र की तरह काम करेगा। यहां विशेषज्ञ वन्यजीव चिकित्सकों की टीम तैनात रहेगी, जो हाथियों की नियमित स्वास्थ्य जांच, उपचार और निगरानी करेगी। सेंटर में प्राथमिक उपचार के साथ-साथ सर्जरी, एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड और पैथोलोजी जैसी आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं भी उपलब्ध रहेंगी। इसके अलावा, हाथियों के मानसिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए खुले और प्राकृतिक बाड़ों का निर्माण किया जाएगा, ताकि वह तनावमुक्त वातावरण में रह सकें। सेंटर में संसाधन की रहेगी पूरी व्यवस्था एलीफेंट केयर सेंटर में हाथियों के लिए चारा, पानी की पर्याप्त आपूर्ति के लिए तालाब, वाटर टैंक और स्नान की विशेष व्यवस्था की जाएगी, क्योंकि हाथियों के लिए नियमित स्नान बेहद जरूरी होता है। इसके साथ ही, दलमा के जंगल से जुड़े प्राकृतिक रास्तों को भी संरक्षित किया जाएगा, ताकि हाथी अपनी स्वाभाविक गतिविधियां जारी रख सकें। डीएफओ सबा आलम अंसारी ने बताया कि एलीफेंट केयर सेंटर में महावत व वनकर्मी भी तैनात रहेंगे। यह लोग हाथियों के व्यवहार, खान-पान और गतिविधियों पर लगातार नजर रखेंगे। साथ ही, ड्रोन, जीपीएस कालर और सीसीटीवी कैमरों जैसी तकनीकों का उपयोग कर हाथियों की मूवमेंट और स्वास्थ्य की निगरानी की जाएगी। इससे मानव-हाथी संघर्ष को समय रहते रोका जा सकेगा। हाथियों का संरक्षण, रोजगार मिलेगा – एलीफेंट केयर सेंटर के बनने से जन-जागरूकता बढ़ेगी, हाथियों पर शोध करने वाले यहां आएंगे। समय-समय पर वन्यजीव संरक्षण से जुड़े प्रशिक्षण कार्यक्रम, शोध कार्य और स्थानीय समुदायों के लिए जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे। इससे न सिर्फ हाथियों का संरक्षण होगा, बल्कि स्थानीय लोगों को रोजगार का अवसर मिलेगा। कुल मिलाकर दलमा में बनने वाला एलीफेंट केयर सेंटर हाथियों के संरक्षण, उनके सुरक्षित भविष्य और पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखने की दिशा में एक कारगर सेंटर साबित होगा। – सबा आलम अंसारी, डीएफओ, दलमा

छपरा में आर्केस्ट्रा अड्डों पर छापेमारी में 9 नाबालिग लड़कियां करवाईं मुक्त

छपरा/सारण. सारण जिले में नाबालिग लड़कियों के शोषण के खिलाफ चल रही मुहिम के तहत शनिवार को पुलिस और रेस्क्यू टीम ने  कार्रवाई करते हुए आर्केस्ट्रा संचालकों के अड्डों पर संयुक्त छापेमारी की। इस दौरान गड़खा थाना क्षेत्र समेत अन्य थाना इलाकों से नौ नाबालिग लड़कियों को मुक्त कराया गया। पुलिस ने मौके से आर्केस्ट्रा कर्मी को भी गिरफ्तार किया है, जिसकी पहचान की प्रक्रिया जारी है। वरीय पुलिस अधीक्षक (एसएसपी)विनीत कुमार ने बताया कि मानवाधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो के पत्र एवं जिले में चलाए जा रहे विशेष अभियान के आधार पर यह कार्रवाई की गई।  अड्डे पर विधिवत घेराबंदी कर छापेमारी गड़खा थाना क्षेत्र में स्थित आर्केस्ट्रा अड्डे पर पुलिस ने विधिवत घेराबंदी कर छापेमारी की।  छापेमारी के दौरान वहां मौजूद नाबालिग लड़कियों को जबरन नृत्य करवाने, प्रताड़ित करने और शारीरिक शोषण के आरोपों के बीच बचाया गया। एसएसपी ने बताया कि मुक्त कराई गई सभी लड़कियों का मेडिकल परीक्षण कराया जाएगा। इसके बाद उन्हें बालिका गृह भेजा जाएगा। साथ ही, उनके स्वजनों से संपर्क कर घर भेजने की प्रक्रिया भी पूरी की जाएगी। पुलिस सूत्रों के अनुसार, आर्केस्ट्रा में कार्यरत लड़कियों को अक्सर दबाव बनाकर नृत्य करवाया जाता है और कई मामलों में उनका यौन शोषण भी किया जाता है। 301 नाबालिग लड़कियों को मुक्त कराया एसएसपी ने बताया कि मई 2024 से अब तक सारण जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों में अभियान चलाकर कुल 301 नाबालिग लड़कियों को मुक्त कराया जा चुका है। इनमें पड़ोसी देश नेपाल की लड़कियां भी शामिल रही हैं। इस पूरे अभियान के तहत अब तक 38 कांड दर्ज किए गए हैं और 97 अभियुक्तों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। इस मामले में महिला थाना में प्राथमिकी दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है। महिला थानाध्यक्ष नेहा कुमारी ने बताया कि मुक्त कराई गई लड़कियों की पहचान की जा रही है और यह भी पता लगाया जा रहा है कि वे किस जिले या राज्य की रहने वाली हैं। इस छापेमारी दल में महिला थानाध्यक्ष नेहा कुमारी के साथ मिशन मुक्ति फाउंडेशन, रेस्क्यू फाउंडेशन (दिल्ली), नारायणी सेवा संस्थान (सारण), रेस्क्यू एंड रिलीफ फाउंडेशन (पश्चिम बंगाल) तथा अन्य थानों की पुलिस टीम शामिल थी।