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झारखंड में स्वास्थ्य क्षेत्र को बड़ा बढ़ावा: RIMS-2 एशिया का सबसे बड़ा अस्पताल, 8 मेडिकल कॉलेज खुलेंगे

रांची. झारखंड विधानसभा में बुधवार को स्वास्थ्य, खाद्य आपूर्ति एवं आपदा प्रबंधन विभाग का के बजट पर कटौती प्रस्ताव को खारिज करते हुए मंत्री इरफान अंसारी ने कहा कि हम राज्य के हर नागरिक को सुलभ, सस्ती और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना चाहते हैं। अंसारी ने शिबू सोरेन को नमन करते हुए अपने संबोधन की शुरुआत की और विपक्ष पर पलटवार करते हुए कहा कि आपने 25 वर्षों में नौ मेडिकल कॉलेज खोले और हेमंत सरकार एक साल में आठ मेडिकल कॉलेज खाेलने जा रही है। रिम्स-2 को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी की ओर से उठाए गए सवालों के जवाब में इरफान ने कहा कि हर हाल में इस वर्ष निर्माण कार्य शुरू होगा। उन्होंने राज्य में स्वास्थ्य सुविधाओं को बढ़ाने के लिए किए जा रहे प्रयासों से सदन का अवगत कराया। अंसारी ने कहा कि सरकार की कोशिश है कि कोई गरीब भूखा न सोए और संकट की घड़ी में सरकार हर नागरिक के साथ मजबूती से खड़ी रहे। राज्य में स्वास्थ्य विभाग के लिए 7,990 करोड़ रुपये का बजट है तो खाद्य आपूर्ति विभाग के लिए 2,887 करोड़ एवं आपदा प्रबंधन विभाग के लिए 1,859 करोड़ का बजट। गोड्डा, साहिबगंज में भी मेडिकल कॉलेज बनाएंगे अंसारी ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने के लिए सरकार बड़े स्तर पर बुनियादी ढांचे का विस्तार कर रही है। इसी क्रम में राज्य में 8 नए मेडिकल कॉलेज स्थापित किए जाएंगे। पहले चरण में जामताड़ा, गिरिडीह, धनबाद, खूंटी और सरायकेला-खरसावां में मेडिकल कॉलेज स्थापित किए जाएंगे, जबकि दूसरे चरण में गोड्डा, साहिबगंज और लातेहार में मेडिकल कॉलेज की स्थापना की जाएगी। इससे राज्य के युवाओं को चिकित्सा शिक्षा के बेहतर अवसर मिलेंगे और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता भी मजबूत होगी। इस दौरान उन्होंने कहा कि रिम्स-2 का इस साल से ही निर्माण कार्य शुरू होगा। इसके तहत पहले चरण में 1400 बेड और दूसरे चरण में 2600 बेड का अस्पताल परिसर बनकर तैयार होगा। उन्होंने विपक्ष से आग्रह किया कि स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र को राजनीति से दूर रखें। यहां अंडर ग्रेजुएट के पांच सौ से अधिक और पोस्ट ग्रेजुएट के एक हजार सीट होंगे। 25 हाई टेक ट्रामा सेंटर, 750 अबुआ मेडिकल स्टोर इस दौरान उन्होंने सभी मेडिकल कॉलेज में एमआरआइ, 25 हाई टेक ट्रामा सेंटर, 750 अबुआ मेडिकल स्टोर आदि खोलने की घोषणा की। बताया कि राज्य में पहली बार रांची के सदर अस्पताल में बोन मैरो ट्रांसप्लांट की सुविधा बहाल हाेने जा रही है। इसके साथ ही सभी जिलों में एनीमिया की जांच की सुविधा होगी और सरकार का लक्ष्य है कि वर्ष 2029 तक झारखंड एनीमिया मुक्त राज्य बने। उन्होंने बताया कि राज्य में आइएएस और आइपीएस को मिलनेवाली स्वास्थ्य सुविधाएं मंत्री, विधायक और पूर्व मंत्रियों को भी दी जाएगी। सभी गर्भवती महिलाओं का मुफ्त में अल्ट्रासाउंड कराया जाएगा। इसके बाद उन्होंने धान खरीद को लेकर अपने वक्तव्य में कहा कि राज्य में पहली बार वन टाइम धान खरीद की प्रक्रिया शुरू की गई है। हमने 80 प्रतिशत लक्ष्य पूरा कर लिया है। जल्द ही 100 प्रतिशत धान खरीद होगी। इसी तरह धोती साड़ी वितरण योजना की मदद से गरीबों को वस्त्र मुहैया कराया जा रहा है।

सम्राट चौधरी के घर बड़ी बैठक से सियासी हलचल, कुशवाहा और चौधरी आवास पर भी नजरें

पटना राज्यसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन और महागठबंधन हर हाल में जीत दर्ज करना चाहती है। दो दिन पहले नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने महागठबंधन के सभी दलों की बैठक बुलाई थी। एक दिन पहले AIMIM के बिहार प्रमुख अख्तरूल ईमान ने उनसे मुलाकात की। राज्यसभा चुनाव में अपने पांचों विधायकों के समर्थन की बात की। इधर, एनडीए के विधायकों की भी बैठक बुलाई गई है। यह बैठक तीन चरणों में होगी। पहली बैठक आज डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी के आवास पर होगी। इसके बाद 14 मार्च को राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अध्यक्ष और राज्यसभा उम्मीदवार उपेंद्र कुशवाहा के आवास पर और 15 मार्च को संसदीय कार्य मंत्री व जदयू के वरिष्ठ नेता विजय चौधरी के आवास पर बैठक बुलाई गई है। तीनों दिन भोज की व्यवस्था की गई है। रात्रि भोज का भी इंतजाम किया गया है डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने गुरुवार यानी आज शाम को एनडीए के विधायकों को बुलाया है। रात्रि भोज का भी इंतजाम किया गया है। इस बैठक में विधायकों को एकजुट किया जाएगा। साथ ही मतदान प्रक्रिया की बारिकियों की जानकारी दी जाएगी। ऐसा पहली बार हो रहा है जब सम्राट चौधरी ने इतनी बड़ी बैठक बुलाई है। राजनीतिक पंडितों की मानें तो यह सब राज्यसभा की पांचवी सीट जीतने के लिए किया जा रहा है। राज्यसभा की पांच सीट पर छह उम्मीदवार खड़े हो गए हैं। विधायकों की संख्या को देखते हुए भाजपा और जदयू के खाते में दो-दो सीटें तो आ जाएंगे लेकिन पांचवीं सीट के लिए एनडीए और महागठबंधन को संघर्ष करना पड़ रहा है। एनडीए को पांचवी सीट जीतने के लिए तीन और महागठबंधन को छह विधायकों की जरूरत है। AIMIM और IIP के बयान के बाद बढ़ी एनडीए में टेंशन एक दिन पहले AIMIM के प्रमुख अख्तरूल ईमान ने तेजस्वी यादव से मुलाकात की थी। उन्होंने पत्रकारों से बातची के दौरान कहा कि हमलोगों की बीच पॉजिटिव बात हुई है। लेकिन, अंतिम फैसला हमारे मुखिया असदुद्दीन ओवैसी को लेंगे। उन्होंने कहा कि 15 मार्च को मेरे आवास पर इफ्तार पार्टी है। इसमें तेजस्वी यादव भी आएंगे। इसके बाद राजद के विधायकों ने दावा किया कि हमलोगों के पास पूर्ण बहुमत आ गया है। हमारे उम्मीदवार एडी सिंह जीत रहे हैं। वहीं तेजस्वी यादव ने कहा कि हमें अपने उम्मीदवार के जीतने पर पूरा भरोसा है।  वहीं आईआईपी पार्टी के प्रमुख इंद्रजीत प्रसाद गुप्ता ने कहा दावा है कि महागठबंधन के संपर्क में एनडीए के कुछ विधायक हैं। हमलोगों के बाद 41 नहीं 45 विधायकों का समर्थन है। इसलिए पांचवी सीट पर हमलोगों की जीत आसानी से हो जाएगी। जानिए एनडीए की ओर किस नेता ने क्या कहा? एनडीए के ओर से राज्यसभा उम्मीदवार उपेंद्र कुशवाहा दावा कर चुके हैं कि राज्यसभा की सभी पांचों सीटें एनडीए जीत रही है। विपक्ष के कई विधायक हमारे संपर्क में हैं। चुनाव के बाद सारी बातें स्पष्ट हो जाएंगी। हमलोग जीत रहे हैं। वहीं बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने कहा कि पांचों सीटों पर एनडीए की शानदार जीत तय है। कहीं कोई संशय नहीं है। विपक्ष के कुछ विधायक भी हमारे संपर्क में हैं। हर हाल में एनडीए की ही जीत होगी। कौन कौन हैं राज्यसभा उम्मीदवार…     जदयू- नीतीश कुमार, रामनाथ ठाकुर     भाजपा- नितिन नवीन, शिवेश राम     रालोमो- उपेंद्र कुशवाहा     राजद- अमरेंद्र धारी सिंह (एडी सिंह)

Revenue Offices में दलालों पर शिकंजा: बिहार सरकार ने जारी किया टोल-फ्री नंबर, होगी FIR

पटना. बिहार में जमीन की रसीद कटाने, दाखिल-खारिज या परिमार्जन के नाम पर दलालों और मुंशियों के आगे-पीछे घूमने के दिन अब लद गए हैं. राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘रूल ऑफ लॉ’ का ऐसा शिकंजा कसा है, जिससे बिचौलियों के सिंडिकेट में हड़कंप मच गया है. अब दफ्तरों के बाहर मंडराने वाले दलालों पर सिर्फ जुर्माना नहीं लगेगा, बल्कि भारतीय न्याय संहिता (BNS) की सख्त धाराओं के तहत सीधे एफआईआर दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया जाएगा. बिचौलिया दिखा तो नपेंगे अंचलाधिकारी और कर्मचारी नई व्यवस्था के तहत, यदि किसी अंचल कार्यालय या राजस्व दफ्तर के परिसर में दलाल सक्रिय पाए जाते हैं, तो सिर्फ बाहरी व्यक्ति ही नहीं, बल्कि वहां के अंचलाधिकारी (CO) और संबंधित कर्मचारियों को भी जवाब-तलब किया जाएगा. विभाग का मानना है कि दलालों की हिम्मत तभी बढ़ती है जब उन्हें भीतर से मौन समर्थन मिलता है. अब जवाबदेही तय होने से सरकारी बाबू दलालों को संरक्षण देने से कतराएंगे, जिससे भ्रष्टाचार की जड़ों पर सीधा चोट होगी. फर्जीवाड़े का अंत दाखिल-खारिज और एलपीसी (LPC) जैसे कामों के लिए अक्सर आम लोग जल्दी के चक्कर में मुंशियों के झांसे में आ जाते हैं. कई बार पैसे देने के बाद भी फर्जी कागजात थमा दिए जाते हैं या काम ही नहीं होता. इसी ठगी और भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए सरकार ने डिजिटल और कानूनी दोनों मोर्चों पर घेराबंदी की है. विभाग ने साफ लहजे में अपील की है कि किसी भी राजस्व सेवा के लिए किसी तीसरे व्यक्ति की जरूरत नहीं है. जनता की मेहनत की कमाई डकारने वाले इन दलालों को अब सीधे न्यायिक और आपराधिक कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा. जारी हुआ टोल फ्री नंबर सरकार ने जनता को सबसे बड़ा हथियार देते हुए एक विशेष हेल्पलाइन नंबर जारी किया है. अब आपको किसी दलाल से बहस करने की जरूरत नहीं है, बस अपने फोन से 18003456215 डायल करें. यह टोल फ्री नंबर सीधे उच्चाधिकारियों से जुड़ता है, जहां आप दलाली, काम में देरी या रिश्वत मांगे जाने की शिकायत दर्ज करा सकते हैं. इसके अलावा बिहार सरकार के जन शिकायत पोर्टल पर भी लिखित शिकायत की सुविधा दी गई है. यह कदम आम नागरिकों को बिना किसी खौफ के सरकारी सेवाएं प्राप्त करने का साहस देगा.

Human Trafficking पर सख्ती: बिहार पुलिस अप्रैल में चलाएगी ‘ऑपरेशन नया सवेरा 2.0’

पटना. मानव तस्करी, अनैतिक देह व्यापार और बाल श्रम जैसे गंभीर अपराधों के खिलाफ बिहार पुलिस ने सख्त रुख अपनाया है। इसी कड़ी में पुलिस मुख्यालय स्थित सरदार पटेल भवन के सभागार में कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में डीजीपी विनय कुमार ने पुलिस अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि इन मामलों में संवेदनशीलता और त्वरित कार्रवाई बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि अगर कोई बच्चा गायब हो जाता है और तीन महीने तक बरामद नहीं होता, तो मामला काफी जटिल हो जाता है। ऐसे मामलों को प्राथमिकता के आधार पर सुलझाने की जरूरत है। डीजीपी ने पुलिसकर्मियों से कहा कि गुमशुदगी के मामलों को केवल औपचारिकता न समझें, बल्कि उसे अपनी जिम्मेदारी मानते हुए कार्रवाई करें। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर आपका खुद का बच्चा गुम हो जाए तो कैसा महसूस होगा, उसी संवेदनशीलता के साथ हर मामले को देखें। उन्होंने कहा कि समय पर कार्रवाई से बच्चों को जल्द खोजने की संभावना बढ़ जाती है। गुमशुदा बच्चों की तलाश में तेजी लाने और मामलों के त्वरित निपटारे के लिए पुलिसकर्मियों को सतर्क और सक्रिय रहने की जरूरत है। 2025 में 506 केस, 1487 पीड़ितों को कराया गया मुक्त डीजीपी ने बताया कि वर्ष 2025 में मानव तस्करी, अनैतिक देह व्यापार और बाल श्रम से जुड़े कुल 506 मामले दर्ज किए गए। इन मामलों में कार्रवाई करते हुए पुलिस ने 1487 पीड़ितों को शोषण से मुक्त कराया। साथ ही 437 मानव तस्करों को गिरफ्तार भी किया गया है। उन्होंने कहा कि इन अपराधों से निपटने के लिए पुलिस विभाग लगातार प्रयास कर रहा है। इसके लिए विशेष इकाइयों का गठन और मानक कार्य प्रणाली भी तय की गई है। सभी जिलों और हवाई अड्डों पर बनी विशेष इकाई राज्य में मानव तस्करी पर प्रभावी रोक लगाने के लिए सभी जिलों में जिलास्तरीय मानव व्यापार निरोध इकाई (डीएल-एएचटीयू) का गठन किया गया है। इसके अलावा पुलिस और रेलवे जिलों समेत कुल 44 जिलों में यह इकाई कार्यरत है। पटना, गया और दरभंगा हवाई अड्डों पर भी एएचटीयू का गठन किया गया है, जबकि पूर्णिया हवाई अड्डे पर इसकी स्थापना की प्रक्रिया चल रही है। डीजीपी ने बताया कि इन इकाइयों के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश और जिम्मेदारियां तय की गई हैं। एसओपी और मार्गदर्शिका के पालन पर जोर मानव तस्करी से जुड़े मामलों में पुलिस को मार्गदर्शन देने के लिए दो मानक कार्य प्रणाली (एसओपी) तैयार की गई हैं। इसके साथ ही मानव व्यापार निरोध इकाई के प्रभारी निरीक्षकों के कर्तव्यों और जिम्मेदारियों का भी निर्धारण किया गया है। गुमशुदा बच्चों के मामलों की जांच और उद्भेदन के लिए भी विशेष मार्गदर्शिका जारी की गई है। डीजीपी ने कहा कि इन दिशानिर्देशों का पालन करते हुए मामलों का जल्द से जल्द निपटारा सुनिश्चित करना चाहिए। 1 से 20 अप्रैल तक चलेगा ‘ऑपरेशन नया सवेरा 2.0’ कार्यशाला के दौरान डीजीपी ने घोषणा की कि मानव तस्करी के खिलाफ 1 से 20 अप्रैल तक ‘ऑपरेशन नया सवेरा 2.0’ अभियान चलाया जाएगा। इस अभियान के तहत पुलिस और अन्य एजेंसियां मिलकर कार्रवाई करेंगी। कार्यशाला में मुख्य वक्ता के रूप में एनडीआरएफ के सेवानिवृत्त महानिदेशक डॉ. पी.एम. नायर ने मानव तस्करी और बंधुआ मजदूरी के विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत जानकारी दी। इस मौके पर एडीजी (कमजोर वर्ग) डॉ. अमित कुमार जैन सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

गैस सिलिंडर नहीं मिला तो भड़के लोग, लंबा इंतजार करने के बाद डीएम आवास पर किया हंगामा

मुज्जफरपुर मुजफ्फरपुर में घरेलू गैस नहीं मिलने से नाराज उपभोक्ताओं का गुस्सा फूट पड़ा। गुरुवार को कई उपभोक्ता खाली गैस सिलिंडर लेकर जिलाधिकारी सुब्रत सेन के आवास और समाहरणालय परिसर पहुंच गए। इस दौरान लोगों ने गैस एजेंसी के वितरक पर मनमानी और कालाबाजारी करने का आरोप लगाते हुए जमकर नाराजगी जताई। उपभोक्ताओं का कहना है कि जिला प्रशासन लगातार यह कह रहा है कि जिले में गैस की कोई कमी नहीं है, लेकिन एजेंसियों की मनमानी के कारण लोगों को समय पर सिलिंडर नहीं मिल पा रहा है। उनका आरोप है कि तीन-चार दिन पहले नंबर लगाने के बावजूद उन्हें गैस नहीं दी जा रही है और बार-बार एजेंसी से लौटा दिया जा रहा है। गुरुवार की सुबह से ही कई उपभोक्ता एजेंसी पर लाइन में लगे हुए थे। घंटों इंतजार के बाद भी जब सिलिंडर नहीं मिला तो लोगों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने एजेंसी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। आक्रोशित उपभोक्ताओं ने आरोप लगाया कि एजेंसी द्वारा गैस सिलिंडर ब्लैक में बेचे जा रहे हैं और वास्तविक उपभोक्ताओं को परेशान किया जा रहा है। जब एजेंसी स्तर पर समस्या का समाधान नहीं हुआ तो उपभोक्ता अपनी शिकायत लेकर जिला समाहरणालय पहुंच गए, ताकि वरीय अधिकारियों को स्थिति से अवगत कराया जा सके। स्थानीय उपभोक्ताओं का कहना है कि शहर की ईडन गैस सिलिंडर एजेंसी के वितरक द्वारा लगातार उपभोक्ताओं को परेशान किया जा रहा है। कई दिनों पहले नंबर लगने के बावजूद जब वे गैस लेने पहुंचते हैं तो उन्हें वापस लौटा दिया जाता है। उपभोक्ताओं का कहना है कि यदि यही स्थिति रही तो उनके घरों में चूल्हा कैसे जलेगा। उपभोक्ता राजकुमार ने बताया कि वे कई दिनों से घरेलू गैस के लिए भटक रहे हैं। उनका आरोप है कि एजेंसी वाले सिलेंडर ब्लैक में बेच रहे हैं और उपभोक्ताओं को गैस नहीं दी जा रही है। इसी शिकायत को लेकर वे डीएम के पास पहुंचे हैं। वहीं, पूरे मामले पर एडीएम पूर्वी तुषार कुमार ने कहा कि जिले में गैस का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए टोल-फ्री नंबर भी जारी किया गया है, ताकि किसी भी प्रकार की परेशानी होने पर शिकायत दर्ज कराई जा सके। उन्होंने कहा कि कालाबाजारी पर प्रशासन की नजर है और शिकायत मिलने पर कार्रवाई की जाएगी। गैस वितरण ओटीपी और फर्स्ट-कम-फर्स्ट-सर्व के आधार पर किया जा रहा है तथा किसी भी उपभोक्ता को लौटने नहीं दिया जाएगा।

NEET UG 2026 अपडेट: आवेदन में करेक्शन की सुविधा, MBBS सीटों के लिए रिकॉर्ड 22.60 लाख फॉर्म

पटना. नीट यूजी 2026 के लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया समाप्त हो गई है। इस बार देशभर से करीब 22 लाख 60 हजार से अधिक अभ्यर्थियों ने आवेदन किया है। इस परीक्षा के माध्यम से देश के सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस समेत अन्य मेडिकल कोर्स में दाखिला होगा। कुल मिलाकर लगभग 1 लाख 29 हजार एमबीबीएस सीटों पर प्रवेश के लिए परीक्षा आयोजित की जाएगी। बड़ी संख्या में आवेदन आने से इस बार भी प्रतियोगिता काफी कड़ी रहने की उम्मीद है। 824 मेडिकल कॉलेजों में मिलेगा MBBS में दाखिला नीट यूजी के माध्यम से देश के करीब 824 मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस सीटों पर नामांकन होगा। इन कॉलेजों में सरकारी और निजी दोनों संस्थान शामिल हैं। हर साल लाखों छात्र डॉक्टर बनने के लक्ष्य के साथ इस परीक्षा में शामिल होते हैं। रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया खत्म होने के बाद अब छात्रों को आवेदन फॉर्म में सुधार करने का मौका दिया जा रहा है। 12 से 14 मार्च तक खुलेगी करेक्शन विंडो नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) ने आवेदन फॉर्म में सुधार के लिए करेक्शन विंडो खोलने की घोषणा की है। छात्र 12 मार्च से 14 मार्च की रात 11:50 बजे तक अपने फॉर्म में बदलाव कर सकते हैं। इसके बाद किसी भी प्रकार का संशोधन संभव नहीं होगा। अभ्यर्थी आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर रजिस्ट्रेशन नंबर और पासवर्ड के जरिए लॉग इन कर सुधार कर सकेंगे। इन जानकारियों में किया जा सकेगा बदलाव करेक्शन विंडो के दौरान छात्र अपनी व्यक्तिगत जानकारी, शैक्षणिक योग्यता और परीक्षा शहर से जुड़ी जानकारी में बदलाव कर सकते हैं। इसके अलावा माता-पिता का नाम, योग्यता, श्रेणी और परीक्षा केंद्र से संबंधित कुछ अन्य विवरण भी संशोधित किए जा सकेंगे। हालांकि छात्रों को यह ध्यान रखना होगा कि सभी बदलाव सावधानीपूर्वक करें। श्रेणी बदलने पर देना पड़ सकता है शुल्क श्रेणी में बदलाव करने पर कुछ मामलों में अतिरिक्त शुल्क देना पड़ सकता है। यदि कोई छात्र आरक्षित से अनारक्षित श्रेणी में बदलाव करता है तो उसे अतिरिक्त शुल्क नहीं देना होगा। लेकिन अनारक्षित से आरक्षित श्रेणी में बदलाव करने पर फीस का अंतर देना पड़ेगा। इसी तरह ओबीसी या ईडब्ल्यूएस से अन्य श्रेणी में बदलाव पर 100 से 700 रुपये तक का शुल्क लग सकता है। सुधार का मिलेगा केवल एक अवसर एनटीए ने स्पष्ट किया है कि आवेदन फॉर्म में सुधार का मौका केवल एक बार ही दिया जाएगा। इसलिए अभ्यर्थियों को सलाह दी गई है कि वे फॉर्म में बदलाव करते समय सभी जानकारियों की सावधानीपूर्वक जांच करें। निर्धारित समय के बाद किसी भी प्रकार का संशोधन स्वीकार नहीं किया जाएगा। इससे छात्रों को भविष्य में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

खनन परिवहन पर सख्ती: बिहार में अब लघु खनिज वाहनों को लेना होगा ट्रांजिट पास

पटना. बिहार में अब अन्य राज्यों से आने वाले बालू, पत्थर, स्टोन चिप्स, मोरम और स्टोन डस्ट जैसे लघु खनिजों से लदे वाहनों के लिए ट्रांजिट पास (टीपी) लेना अनिवार्य होगा। उप मुख्यमंत्री सह खान एवं भूतत्व मंत्री विजय कुमार सिन्हा के निर्देश पर यह व्यवस्था लागू की गई है। इसका उद्देश्य खनिज परिवहन को पारदर्शी बनाना और राज्य के राजस्व में बढ़ोतरी करना है। यह व्यवस्था बिहार खनिज नियमावली, 2019 (संशोधित) के नियम 41 के तहत लागू की गई है। इसके अनुसार राज्य की सीमा में प्रवेश करने वाले सभी खनिज लदे वाहनों को ट्रांजिट पास लेना होगा। जिन वाहनों के चालान में खनिज का वजन अंकित होगा, उन्हें 60 रुपये प्रति मीट्रिक टन की दर से शुल्क देना होगा। वहीं, जिन चालानों में खनिज का आयतन दर्ज होगा, उनके लिए 85 रुपये प्रति घनमीटर की दर से शुल्क निर्धारित किया गया है। खनिज परिवहन पर रखी जाएगी नजर राज्य में अवसंरचना विकास के कारण पड़ोसी राज्यों से बड़ी मात्रा में खनिजों का आयात हो रहा है। नई व्यवस्था के तहत सीमा पर प्रवेश करने वाले वाहनों का डिजिटल अनुश्रवण किया जाएगा, जिससे खनिज की मात्रा और परिवहन पर नजर रखी जा सकेगी। इससे एक ही चालान पर कई बार ढुलाई जैसी अनियमितताओं पर भी रोक लगेगी। साथ ही सीमावर्ती जिलों की जिम्मेदारी बढ़ाई गई है। खनिज लदे वाहनों की निगरानी के लिए राज्य की सीमाओं पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। किसी भी स्तर पर लापरवाही मिलने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। सरकार का मानना है कि इस पहल से अवैध खनन और परिवहन पर अंकुश लगेगा तथा खनिज परिवहन व्यवस्था अधिक पारदर्शी और तकनीक आधारित बनेगी।

टिश्यू कल्चर लैब पर किसानों-उद्यमियों को सरकार देगी 50% अनुदान

पटना. राज्य में बागवानी फसलों को बढ़ावा देने और किसानों को उन्नत तथा रोगमुक्त पौधे उपलब्ध कराने के लिए बिहार सरकार नई पहल कर रही है। कृषि विभाग ने टिश्यू कल्चर लैब स्थापित करने के लिए इच्छुक उद्यमियों और किसानों से आवेदन आमंत्रित किए हैं। चयनित लाभार्थियों को लैब स्थापना की लागत का 50 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाएगा। इस योजना का उद्देश्य आधुनिक तकनीक के माध्यम से पौध उत्पादन बढ़ाना और किसानों की आय में वृद्धि करना है। 15 मार्च तक करना होगा ऑनलाइन आवेदन टिश्यू कल्चर लैब स्थापित करने के इच्छुक आवेदक 15 मार्च तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए कृषि विभाग की आधिकारिक वेबसाइट horticulture.bihar.gov.in पर आवेदन की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। विभाग के अनुसार इस तकनीक से कम समय में बड़ी संख्या में उन्नत और रोगमुक्त पौधे तैयार किए जा सकते हैं। इससे किसानों को गुणवत्तापूर्ण पौधे मिलने के साथ-साथ उनकी खेती की लागत भी कम होगी। लैब स्थापना के लिए भूमि की शर्तें तय लैब स्थापित करने के लिए कम से कम दो एकड़ भूमि होना अनिवार्य है। यह भूमि ऊंची और जलजमाव से मुक्त होनी चाहिए। भूमि आवेदक के नाम पर या न्यूनतम 25 वर्षों की लीज पर होनी चाहिए। इसके साथ ही भूमि का मुख्य सड़क से जुड़ा होना भी जरूरी है ताकि बड़े वाहन आसानी से आ-जा सकें और तैयार उत्पाद को अन्य स्थानों तक पहुंचाया जा सके। लैब निर्माण पर करोड़ों रुपये की सब्सिडी निजी क्षेत्र में टिश्यू कल्चर लैब की प्रति इकाई अधिकतम लागत 4 करोड़ 85 लाख रुपये निर्धारित की गई है। इस पर सरकार 50 प्रतिशत यानी अधिकतम 2 करोड़ 42 लाख 50 हजार रुपये तक अनुदान देगी। आवेदन के साथ मॉडल प्रोजेक्ट रिपोर्ट और बैंक ऋण से संबंधित सहमति पत्र देना अनिवार्य होगा। इससे राज्य में आधुनिक कृषि और बागवानी को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। जानें क्या है टिश्यू कल्चर तकनीक टिश्यू कल्चर एक आधुनिक वैज्ञानिक तकनीक है, जिसमें पौधों के छोटे ऊतक या कोशिकाओं को प्रयोगशाला में विशेष पोषक माध्यम पर विकसित किया जाता है। इस प्रक्रिया से कम समय में बड़ी संख्या में एक जैसे और रोगमुक्त पौधे तैयार किए जा सकते हैं। पारंपरिक बीज या कलम की तुलना में इस तकनीक से तैयार पौधों की गुणवत्ता बेहतर होती है और उत्पादन भी अधिक मिलता है। केले की खेती में मिल चुकी है बड़ी सफलता राज्य में टिश्यू कल्चर तकनीक का उपयोग पहले ही कई फसलों में सफल साबित हो चुका है। खासकर केले की खेती में जी-9, मालभोग और चीनिया किस्मों के रोगमुक्त पौधों ने उत्पादन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। इससे किसानों की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। कृषि विभाग का मानना है कि नई लैब बनने से राज्य में बागवानी क्षेत्र में और तेजी से विकास होगा।

AI की एंट्री से बदलेगा राजस्व प्रशासन: बिहार के सभी जिलों में 1 अप्रैल से स्थापित होंगे AI सेल

पटना राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग एक अप्रैल से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित तकनीक का उपयोग करेगा। इस संबध में बुधवार को विभाग के अपर सचिव आजीव वत्सराज ने सभी प्रमंडलीय आयुक्तों और जिलाधिकारियों पत्र लिखा है। पत्र में कहा गया है कि केंद्र सरकार ने इंडिया एआई मिशन की स्थापना की गई है, जिसके माध्यम से निर्णय प्रक्रिया को बेहतर बनाने, लोक सेवाओं का आटोमेशन बढ़ाने तथा कमियों और संभावित धोखाधड़ी की पहचान करने जैसे कार्यों को तकनीक के माध्यम से मजबूत किया जा रहा है। इसी को देखते हुए राजस्व प्रशासन में भी एआई के विधिवत और व्यवस्थित उपयोग की दिशा में पहल की गई है। विभाग के तीन वरिष्ठ भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को फरवरी 2026 में नई दिल्ली में आयोजित वर्ल्ड एआई कांन्फ्रेंस में भाग लेने के लिए भेजा गया था। पत्र के अनुसार, प्रत्येक जिले में अपर समाहर्ता (राजस्व) की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय एआई सेल का गठन किया जाएगा। इसमें जिला के आईटी मैनेजर, एक भूमि सुधार उप समाहर्ता, एक अंचल अधिकारी और एक राजस्व अधिकारी सदस्य के रूप में शामिल होंगे। यह कोषांग जिला स्तर पर एआई के उपयोग से जुड़े निर्णय लेने वाली सर्वोच्च समिति के रूप में कार्य करेगा। यह जिलाधिकारी के नियंत्रण में काम करेगा। पत्येक शनिवार को अपर समाहर्ता (राजस्व) के कार्यालय कक्ष में एआई सेल की बैठक होगी।  

चुनाव नतीजों के चार महीने बाद राजनीतिक दलों ने दिया खर्च का ब्यौरा चुनाव आयोग को

पटना बिहार विधानसभा चुनाव 2025 जीतने के लिए बीजेपी ने सभी पार्टियों से ज्यादा खर्च किया है. बीजेपी ने 146.71 करोड़ रुपये खर्च किए हैं तो कांग्रेस ने कुल 35.07 करोड़ रुपये खर्च किए हैं. बीजेपी ने जमा पूंजी का 2 फीसदी खर्च किया तो कांग्रेस ने अपनी कुल जमा पूंजी का 28 फीसदी पैसा खर्च कर दिया है।  बीजेपी ने पिछले बिहार विधानसभा चुनाव की तुलना में इस बार तीन से ज्यादा पैसा चुनाव प्रचार पर खत्म किया है. 2020 में बीजेपी ने करीब 54 करोड़ रुपये खर्च किए थे, लेकिन इस बार 146.71 करोड़ रुपये खर्च किए हैं।   बिहार में बीजेपी का खर्च करना इस बार कामयाब रहा और राज्य में 89 विधायकों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है. वहीं, दूसरी तरफ कांग्रेस ने बीजेपी की तुलना में भले ही पैसा कम खर्च किया हो, लेकिन अपनी जमा पूजी का बहुत बड़ा हिस्सा बिहार में खर्च कर दिया है।  बिहार चुनाव में किस पार्टी ने कितना खर्च किया चुनाव आयोग को राजनीतिक दलों ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव के बाद अपने खर्च की हिसाब देती हैं. इसी मद्देनजर बिहार चुनाव में खर्च किए पैसे का लेखा-जोखा सियासी दलों ने चुनाव आयोग को दिए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक बीजेपी ने बिहार चुनाव खर्च की रिपोर्ट 10 फरवरी को चुनाव आयोग को सौंपी है, जिसमें पार्टी ने बताया है कि उसने 146.71 करोड़ रुपये खर्च किए हैं।  वहीं, बिहार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने कुल 35 करोड़ रुपये खर्च किए हैं तो सीपीआई (एम) ने महज 26.75 लाख रुपये खर्च किए हैं. बहुजन समाज पार्टी ने बिहार चुनाव में सिर्फ 9.01 करोड़ रुपये खर्च किए हैं. आरजेडी और जेडीयू सहित दूसरे दलों के खर्च का लेखा-जोखा अभी चुनाव आयोग को उपलब्ध नहीं कराया गया है, जिसके चलते उन्होंने कितना खर्च किया है, उसका आंकड़ा पता नहीं चल सका।  बीजेपी और कांग्रेस ने कहां कितना पैसा खर्च किया बिहार चुनाव में बीजेपी ने 146 करोड़ रुपये जो खर्च किए हैं, उसमें 117 करोड़ रुपये सियासी माहौल बनाने के लिए प्रचार और स्टार कैंपेनर के ट्रैवेल पर खर्च किए हैं. बीजेपी ने चुनाव प्रचार और विज्ञापन पर 43.53 करोड़ रुपये खर्च किए तो स्टार कैंपेनर्स की यात्रा पर 37.28 करोड़ रुपये खर्च किए और साथ में दूसरे नेताओं के यात्रा पर 4.44 करोड़ रुपये खर्च किए गए।  बीजेपी ने चुनाव प्रचार के विज्ञापन पर खर्च का सबसे बड़ा हिस्सा गूगल इंडिया लिमिटेड पर किया, जिसे पार्टी ने 14.27 करोड़ रुपये दिए. इसके अलावा बीजेपी ने अपने उम्मीदवारों पर 29.71 करोड़ रुपये खर्च किए हैं, जिसमें पार्टी ने उन्हें चुनाव लड़ने के लिए आर्थिक मदद के तौर पर देखा जाता है।  कांग्रेस ने बिहार चुनाव में खर्च किए गए 35 करोड़ रुपये में से 12.83 करोड़ रुपये स्टार कैंपेनर्स की यात्रा पर लगे. इसके अलावा कांग्रेस ने सोशल मीडिया कैंपने के लिए 11.24 करोड़ रुपये खर्च किए। इसके अलावा लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की बिहार में निकाली गई वोटर अधिकार यात्रा पर भी खर्च किए।    बीजेपी ने जमापूंजी का 2% खर्चा तो कांग्रेस ने 28% रिपोर्ट से पता चलता है कि पिछले साल नवंबर में बिहार चुनाव खत्म होने पर बीजेपी का क्लोजिंग बैलेंस 7,088.58 करोड़ रुपये था. इसके मुताबिक चुनाव से पूर्व बीजेपी के पास 7235.26 करोड़ रुपये था, जिसमें से 146.71 करोड़ खर्च किया गया. इसके बाद 7,088.58 करोड़ रुपये बचे थे. इस तरह बीजेपी ने अपनी जमापूंजी का करीब 2 फीसदी पैसा ही बिहार चुनाव में खर्च किया है।  वहीं, कांग्रेस के पास बिहार चुनाव के बाद कुल 89.13 करोड़ रुपये बचे थे. कांग्रेस ने चुनाव में 35.07 करोड़ रुपये खर्च किए हैं. इस लिहाज से कांग्रेस के चुनाव से पहले 124.2 करोड़ रुपये था, जिसमें से 35.07 करोड़ रुपये खर्च करने का मतलब साफ है कि पार्टी ने अपनी जमापूंजी का 28.23 फीसदी पैसा बिहार चुनाव में खर्च किया।  कांग्रेस-बीजेपी का एक विधायक पर कितना खर्च बिहार विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने सबसे ज्यादा 89 विधायक जीतने में सफल रही जबकि कांग्रेस को महज 6 सीटें मिली हैं. बिहार चुनाव में बीजेपी और कांग्रेस के द्वारा खर्च किए गए पैसे को विधायकों की संख्या के लिहाज से देखें तो बीजेपी को एक विधायक 1 करोड़ 64 लाख का पड़ा. कांग्रेस के सिर्फ 6 विधायक जीते हैं, ऐसे में कांग्रेस को एक विधायक 5 करोड़ 83 लाख का पड़ा.  2020 के चुनाव की तुलना में तीन गुना खर्च किया बिहार के पिछले यानी 2020 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने कुल 54.72 करोड़ रुपये खर्च किए थे, जिसमें से लगभग 28.02 करोड़ रुपये बिहार राज्य इकाई द्वारा और 26.69 करोड़ रुपये केंद्रीय मुख्यालय द्वारा खर्च किए गए थे. बीजेपी इस चुनाव में सबसे अधिक खर्च करने वाली पार्टी थी।  वहीं, 2020 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने कुल 12.35 करोड़ रुपये खर्च किए थे, इसमें से बड़ा हिस्सा 11.69 करोड़ रुपये दिल्ली केंद्रीय मुख्यालय से आया था, जबकि राज्य इकाई का खर्च काफी कम दिखाया गया है. इस हिसाब से देखें तो इस बार कांग्रेस और बीजेपी तीन गुना पैसा चुनाव कैंपेन पर खर्च किया है।