samacharsecretary.com

झारखंड के 25वें स्थापना दिवस पर प्रधानमंत्री ने दी बधाई

रांची मोदी ने जनजातीय अधिकार नेता एवं स्वतंत्रता सेनानी बिरसा मुंडा की विरासत को याद करते हुए कहा, ‘‘जनजातीय संस्कृति से समृद्ध गौरवशाली प्रदेश झारखंड के सभी निवासियों को राज्य के स्थापना दिवस की बहुत-बहुत शुभकामनाएं। भगवान बिरसा मुंडा जी की इस धरती का इतिहास साहस, संघर्ष और स्वाभिमान की गाथाओं से भरा हुआ है।'' प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा, ‘‘आज इस विशेष अवसर पर मैं राज्य के अपने सभी परिवारजनों के साथ ही यहां की प्रगति और समृद्धि की कामना करता हूं।'' झारखंड 2000 में बिहार से अलग करके बनाया गया था। 15 नवंबर को राज्य का स्थापना दिवस होने के साथ ही आदिवासी नेता बिरसा मुंडा की जयंती भी है। 

नीतीश कुमार के संभावित इस्तीफे की अटकलें: नया शपथ ग्रहण कब होगा?

पटना बिहार विधानसभा चुनाव में सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने तीन चौथाई से भी बड़े बहुमत के साथ राज्य के चुनावी इतिहास में अभूतपूर्व तथा अप्रत्याशित जीत दर्ज की है और विपक्षी महागठबंधन का सूपड़ा साफ हो गया है। कुल 243 सदस्यीय विधान सभा के चुनाव की शुक्रवार को हुई मतगणना में अब तक प्राप्त नतीजों और रुझानों में राजग को 202 और महागठबंधन को 35 सीटें मिली हैं जबकि छह सीटों पर अन्य उम्मीदवार विजय हुए हैं। वहीं अब बिहार के सियासी गलियारों में नई सरकार का गठन कब होगा, इस विषय पर चर्चा चल रही है। नीतीश कुमार 10वीं बार लेंगे CM पद की शपथ? बता दें कि वर्तमान विधानसभा का कार्यकाल 22 नवंबर तक है। अटकलें लगाई जा रही हैं कि सीएम नीतीश कुमार आज राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खां मुलाकात कर मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा सौंप सकते है। साथ ही शपथ ग्रहण समारोह को लेकर भी चर्चा कर सकते है। उम्मीद है कि अगले हफ्ते तक 18वीं विधानसभा का गठन हो सकता है। NDA ने बिहार विधानसभा की 243 सीटों में से 202 सीटों पर कब्जा करते हुए प्रचंड जीत हासिल की। इसी रिकार्ड तोड़ जीत के साथ नीतीश कुमार 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने को तैयार हैं। हालांकि, अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। गौरतलब हो कि बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने सबसे अधिक वोट प्रतिशत हासिल किया है। Election Commission Data के अनुसार RJD को 23% वोट शेयर मिला, जबकि BJP को 20.08% और JDU को 19.25% वोट मिले। इसके बावजूद दोनों एनडीए दलों ने आरजेडी से कहीं ज्यादा सीटें जीत लीं। RJD का वोट प्रतिशत ज्यादा होना उसकी सत्ता तक की दूरी को कम नहीं कर सका क्योंकि— उसने सबसे ज्यादा सीटों पर उम्मीदवार उतारे। कई सीटों पर बड़ा मार्जिन मिला पर सीटें नहीं बढ़ीं। महागठबंधन का कुल वोट शेयर NDA के मुकाबले काफी कम था। BJP-JDU का रणनीतिक सीट प्रबंधन ज्यादा कारगर रहा। यही वजह है कि RJD Highest Vote Share Winner होने के बावजूद Seat Tally में कमजोर साबित हुई।

पुलिस विभाग में खुशखबरी: 54 सब-इंस्पेक्टर्स को मिला प्रमोशन

रांची  झारखंड पुलिस के 54 सब इंस्पेक्टरों को इंस्पेक्टर पद पर प्रोन्नति दी गई है। यह प्रोन्नति पुलिस महानिदेशक (DGP) द्वारा जारी आदेश के तहत दी गई है। इस आदेश में साफ कहा गया है कि प्रोन्नति केवल उन्हीं सब इंस्पेक्टर्स को मिलेगी जिनके खिलाफ न्यायालय में कोई मामला विचाराधीन नहीं है। अगर किसी नवप्रोन्नत इंस्पेक्टर के खिलाफ कोई आपराधिक मामला चल रहा हो, विभागीय कार्यवाही लंबित हो या पिछले तीन वर्षों के अंदर उन्हें कोई बड़ा दंड मिला हो, तो उनकी प्रोन्नति रोक दी जाएगी। ऐसे मामलों की जानकारी संबंधित नियंत्री पदाधिकारी डीआईजी को देंगे ताकि उचित कारर्वाई की जा सके।       इन 54 आईआरबी सब इंस्पेक्टर (स) को इंस्पेक्टर(स) रैंक में मिली प्रोन्नति उनमें से विजय पासवान, जूनू हेंब्रम, बांडा उरांव, विद्यासागर पाल, महावीर सिंह, ध्रुव कुमार मिश्रा, रस्सीलाल मुर्मू, मनोज कुमार, सहदेव सोरेन, गोबिंद मरांडी, योगानंद झा, जगदेव मोची, बालेश्वर उरांव, वेंकट रमन, गणेश मुर्मू, सुशील बेसरा, महावीर किस्कू, राजदेव भैया, राजेश कुमार सिंह, फलेश्वर महतो, गोपाल शरण, सनातन हेंब्रम, राघवेंद्र कुमार, अमोद कुमार, प्रभाष कर्मकार, सदानंद झा, श्रीकांत दुबे, मनोज हरिजन, निरंजन चौधरी, सुरेंद्र सिंह, राजेश यादव, अजय कुमार, अक्षय झा, विभूति हांसदा, सुशील मरांडी, डेविड विल्सन लकड़ा, सुनीराम मरांडी, नुनूराम महरा, दामोदर सिंह, जोहन मरांडी, जयमंगल मुर्मू, कमलेश्वर राम, हेंगल बास्की, हरेन हेंब्रम, प्रकाश बैठा, लडडू गोपाल मरांडी, बलेकिशोर टुडू, सुखानी जमुदा, गौर चन्द कोल, रोहित रंजन और मधुसूदन प्रसाद शामिल है।  

बीजेपी के धमाकेदार प्रदर्शन पर कांग्रेस हैरान: ‘हमारा 1984 भी फीका पड़ गया’

नई दिल्ली बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों ने राजनीतिक हलकों में हड़कंप मचा दिया है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने अप्रत्याशित प्रदर्शन करते हुए 243 में से 202 सीटें अपने नाम की हैं। इसने राष्ट्रीय जनता दल (राजद) नेतृत्व वाले इंडिया गठबंधन को करारी हार दी। इस बीच, कांग्रेस पार्टी ने चुनाव प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए परिणामों की जांच की मांग की है। पार्टी के वरिष्ठ नेता अजय माकन ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से मुलाकात के बाद मीडिया से बातचीत में यह बयान दिया। कांग्रेस के 61 प्रत्याशियों में सिर्फ छह ही एनडीए की लहर में अपनी जीत बचा पाए। अजय माकन ने कहा कि 'शुरुआत से ही पूरी चुनाव प्रक्रिया पर सवालिया निशान लगा हुआ था। जब ऐसा है, तो परिणाम भी इस तरह अप्रत्याशित आएंगे। कभी ऐसा स्ट्राइक रेट नहीं रहा। 1984 में भी कांग्रेस का स्ट्राइक रेट ऐसा नहीं था, जैसा इन चुनावों में बीजेपी का है। बीजेपी का 90 परसेंट से भी ऊपर का स्ट्राइक रेट.. किसी को भी उम्मीद नहीं थी और इसमें दाल में काला नजर आता है। हमने अपने गठबंधन सहयोगियों से बात की है। सभी का मानना है कि ये अप्रत्याशित परिणाम हैं और इनकी जांच होनी चाहिए, डेटा का विश्लेषण होना चाहिए। बिहार भर से हमारे कार्यकर्ताओं के फोन आ रहे हैं कि अनियमितताएं हुई हैं और इसकी जांच होनी चाहिए। हमारे लोग डेटा इकट्ठा कर रहे हैं, हम फॉर्म 17 सी, मतदाता सूची देखेंगे और फिर तथ्यों और डेटा के साथ आपके सामने आएंगे।' कांग्रेस नेता की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब एनडीए की इस ऐतिहासिक जीत को ‘ब्रैंड मोदी नीतीश’ के रूप में देखा जा रहा है। इसके उलट, विपक्षी ‘इंडिया’ गठबंधन 34 सीट पर सिमट गया। बैठक के बाद खरगे के आवास से निकलते हुए कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने कहा कि बिहार से जो नतीजे आए हैं, वे हम सभी के लिए अविश्वसनीय हैं… हमारे गठबंधन दल इस पर विश्वास नहीं कर रहे हैं… हम आंकड़े इकट्ठा कर रहे हैं और गहन विश्लेषण कर रहे हैं, और 1-2 हफ्ते के भीतर हम ठोस सबूत पेश करेंगे… चुनाव आयोग पूरी तरह से एकतरफा है… यह प्रक्रिया संदिग्ध है…" बिहार के चुनाव नतीजों पर राहुल, खरगे ने किया मंथन कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शनिवार को पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के साथ बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों पर चर्चा की। बिहार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और महगठबंधन को करारी हार का सामना करना पड़ा है। कांग्रेस सिर्फ छह सीट पर सिमट गई है। सूत्रों ने बताया कि इस दौरान कांग्रेस के संगठन महासचिव के सी वेणुगोपाल, पार्टी कोषाध्यक्ष अजय माकन और पार्टी के बिहार प्रभारी कृष्णा अल्लावरू भी मौजूद थे। सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस नेताओं ने बिहार में कांग्रेस के खराब प्रदर्शन पर चर्चा की। पार्टी ने बिहार में 61 सीट पर चुनाव लड़ा था और केवल छह सीट ही जीत पाई। वर्ष 2010 के बाद बिहार में पार्टी का यह दूसरा सबसे खराब प्रदर्शन था। उसने 2010 में केवल चार सीट जीती थीं। स के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने शुक्रवार को बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे को चौंकाने वाला करार दिया था और कहा था कि विपक्षी गठबंधन एक ऐसे चुनाव में जीत हासिल नहीं कर सका, जो शुरू से ही निष्पक्ष नहीं था। उन्होंने यह भी कहा था कि कांग्रेस पार्टी और 'इंडिया' गठबंधन इस परिणाम की गहराई से समीक्षा करेंगे।

तेजस्वी की RJD को सबसे ज्यादा वोट, लेकिन NDA ने जीतीं ज्यादा सीटें

पटना बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) केवल 25 सीटें जीत सका। राजद ने कांग्रेस के साथ मिलकर महागठबंधन की अगुवाई की और 143 सीटों पर उम्मीदवार खड़े किए थे। सीटों की संख्या के लिहाज से शर्मनाक प्रदर्शन के बावजूद तेजस्वी यादव के लिए एक अच्छा संकेत रहा। आरजेडी ने इन चुनाव में किसी भी दूसरी पार्टी की तुलना में सबसे अधिक वोट शेयर हासिल किए। राजद के खाते में 23 प्रतिशत वोट शेयर आए। पिछले विधानसभा चुनाव के 23.11 प्रतिशत से यह थोड़ा कम रहा, जब पार्टी ने 144 उम्मीदवार उतारे थे। भारतीय जनता पार्टी का वोट शेयर 19.46% से बढ़कर इस बार 20.07% हो गया। बीजेपी ने इस बार 101 सीटों पर चुनाव लड़ा, जबकि पिछले चुनाव में 110 निर्वाचन क्षेत्रों पर उम्मीदवार उतारे थे। वोट शेयर कुल डाले गए वोटों से किसी राजनीतिक पार्टी या उम्मीदवार को मिलने वाले मत का प्रतिशत होता है। वोट शेयर मतदाताओं के बीच पार्टी की लोकप्रियता या समर्थन के बारे में बहुत कुछ बताता है। तेजस्वी यादव की आरजेडी का वोट शेयर सबसे अधिक रहा तो फिर पार्टी ज्यादा सीटें क्यों नहीं जीत पाई? चलिए समझते हैं। कई सीटों पर रही टक्कर राजद का वोट शेयर दर्शाता है कि कई निर्वाचन क्षेत्रों में पार्टी दूसरे या तीसरे स्थान पर रही होगी, जहां उसने काफी वोट तो इकट्ठे किए लेकिन जीत की रेखा पार करने के लिए काफी नहीं था। इससे उसके कुल वोट शेयर में इजाफा होता है, लेकिन सीटों की संख्या में नहीं बढ़ती। इससे यह भी पता चलता है कि भले ही कुल मिलाकर उसे बहुत वोट मिले हों, लेकिन वे वोट उन निर्वाचन क्षेत्रों में जीत दिलाने के लिए काफी नहीं थे। तेजस्वी की पार्टी कई सीटों पर टक्कर देते हुए पीछे रह गई। सहयोगी दलों का खराब प्रदर्शन महागठबंधन में RJD के सहयोगियों का प्रदर्शन भी फ्लॉप रहा। कांग्रेस ने 61 सीटों में से सिर्फ 6 पर जीत दर्ज की। सीपीआई(एमएल)एल ने 2 सीटें और सीपीआई(एम) ने एक सीट पर जीत हासिल की। सीपीआई तो अपना खाता भी नहीं खोल पाई। मुकेश सहनी की वीआईपी का हाल भी ऐसा ही रहा। VIP ने 15 सीटों पर कैंडिडेट खड़े किए थे लेकिन एक पर भी विजय नहीं मिली। ऐसे में महागठबंधन को कुल 35 सीटों से संतोष करना पड़ा। वहीं, एनडीए ने 202 सीटें हासिल कीं, जिसमें भाजपा का योगदान 89 सबसे बड़ा रहा। इसके बाद जदयू को 85, चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) को 19, जीतन राम मांझी की हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (HAM) को 5 और उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा को 4 सीटें मिलीं।  

चुनावी सफलता के बाद अनुशासनात्मक कार्रवाई: भाजपा ने आरके सिंह को किया निलंबित

पटना बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में एनडीए की जीत के अगले दिन भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री आरके सिंह को पार्टी से निलंबित कर दिया है। भाजपा ने उन्हें नोटिस भेजकर पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने पर जवाब भी मांगा गया है। आरा से भाजपा के पूर्व सांसद और नरेंद्र मोदी सरकार में मंत्री रह चुके आरके सिंह बीते लंबे समय से पार्टी में सक्रिय नहीं हैं। उन पर पार्टी विरोधी गतिविधियों के चलते यह कार्रवाई की गई। भाजपा ने शुक्रवार को MLC अशोक अग्रवाल और कटिहार की मेयर उषा अग्रवाल को भी कारण बताओ नोटिस भेजा। बिहार भाजपा की ओर से भेजे गए नोटिस में आरके सिंह से कहा गया कि उनकी गतिविधियां पार्टी के विरोध में है, इसे गंभीरता से लिया गया है। इसलिए उन्हें निलंबित करते हुए कारण पूछा जा रहा है, कि उन्हें पार्टी से निष्कासित क्यों न कर दिया जाए। बता दें कि बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान आरके सिंह ने भाजपा नेताओं पर सवाल उठाए थे। उन्होंने सम्राट चौधरी को तारापुर से वोट नहीं देने की अपील भी की थी। आरके सिंह ने एनडीए द्वारा अनंत सिंह, विभा देवी समेत दागदार नेताओं को टिकट देने पर सवाल उठाए थे। इसके अलावा शाहाबाद क्षेत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत भाजपा की चुनावी रैलियों में आरके सिंह नहीं नजर आए थे। हालांकि, चुनाव के दौरान अपनी ही पार्टी और गठबंधन के नेताओं को घेरने वाले आरके सिंह पर भाजपा ने चुप्पी साधे रखी थी। चुनाव के दौरान उनपर कोई ऐक्शन नहीं लिया गया। जैसे ही इलेक्शन खत्म हुए और रिजल्ट आए, पार्टी ने उन्हें निलंबित कर दिया। फरवरी 2025 में आरके सिंह ने भोजपुर में एक कार्यक्रम के दौरान आरोप लगाया था कि भाजपा के कुछ नेताओं ने पैसा देकर भोजपुरी स्टार पवन सिंह काराकाट लोकसभा से निर्दलीय चुनाव लड़वाया था। उस चुनाव में काराकाट से एनडीए प्रत्याशी उपेंद्र कुशवाहा की हार हुई थी। वहीं, आरा से अपनी हार की वजह भी आरके सिंह ने भाजपा के ही अंदर के नेताओं की साजिश बताई थी।  

ओवैसी की पार्टी का बड़ा दावा: पाँच सीटों के सहारे सरकार बनाने में मदद को तैयार, नीतीश–तेजस्वी से बातचीत के संकेत

पटना बिहार विधानसभा चुनाव में पांच सीटें जीतकर असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) बेहद उत्साहित है। सीमांचल में 5 सीटों को जीतने के बाद ओवैसी की पार्टी बिहार में सरकार बनाने का सपना भी देखने लगी है। इसके लिए उसने नया समीकरण गढ़ते हुए आरजेडी और जेडीयू को अपने साथ आने का ऑफर दिया है। इतना ही नहीं पार्टी ने मुख्यमंत्री पर पर भी दावेदारी पेश की है और बदले में नीतीश कुमार को 2029 में पीएम उम्मीदवार बनाने का वादा किया गया है। एआईएमआईएम बिहार के एक्स हैंडल पर यह पेशकश की गई है। एआईएमआईएम बिहार के आधिकारिक एक्स हैंडल पर लिखा गया कि अभी भी सरकार बनाने का मौका है। पार्टी का कहना है कि जेडीयू, राजद, कांग्रेस, आईएमआईएम, सीपीआईएमएल, सीपीआईएम मिल जाएं तो सरकार बन सकती है। गौरतलब है कि जेडीयू के पास 85 तो आरजेडी के पास 25 सीटें हैं। वहीं कांग्रेस और एआईएमआईएम ने क्रमश: 6 और 5 सीटों पर कब्जा जमाया है। सीपीआई-एमएल और सीपीआई एम ने 3 सीटों पर जीत हासिल की है। इनका योग 124 होता है, जोकि बिहार में बहुमत के जादुई आंकड़े 122 से दो अधिक है। एआईएमआईम ने कल्पना के घोड़े इतने तेज दौड़ाए कि कैबिनेट की तस्वीर तक बना डाली। पार्टी ने कहा कि उसका मुख्यमंत्री होगा जबकि जेडीयू के कोटे से दो डिप्टी सीएम और 20 मंत्री बनाए जा सकते हैं। राजद को 6 मंत्री दिए जा सकते हैं तो कांग्रेस के पास दो मंत्री पद होगा। सीपीआईएमएल और सीपीआईएम से एक-एक मंत्री बनाए जा सकते हैं। इसके अलावा नीतीश कुमार को 2029 में प्रधानमंत्री उम्मीदवार बनाया जाएगा ओवैसी की पार्टी ने कहा, 'हम, हमेशा जोड़ने की राजनीति करते हैं, तोड़ने की नहीं। इसीलिए अभी भी मौका है।'

Bihar News: तेजस्वी यादव के सामने करारी हार ने खड़ी की बड़ी चुनौती

पटना. बिहार विधानसभा चुनाव में आरजेडी की भारी हार ने पार्टी नेता तेजस्वी यादव के नेतृत्व पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। राघोपुर से तेजस्वी यादव खुद भी कई राउंड की कड़ी टक्कर के बाद जीत दर्ज कर सके, जबकि पार्टी की सीटें घटकर केवल 25 पर सिमट गईं। इस लड़ाई ने तेजस्वी यादव के नेतृत्व क्षमता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आपको बता दूं कि विधानसभा चुनाव से पहले तेजस्वी यादव को अपने परिवार में भी आपसी लड़ाई का सामना करना पड़ा था। 2020 में तेजस्वी ‘परिवर्तन का चेहरा’ बनकर उभरे थे। 10 लाख सरकारी नौकरियों का उनका वादा चुनावी माहौल पर पूरी तरह हावी था और इसका परिणाम यह हुआ कि आरजेडी 75 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी। लेकिन इस बार 'हर परिवार को एक सरकारी नौकरी' का उनका वादा युवाओं ने खोखला माना, खासकर तब जब नौकरी और पेपर लीक जैसे मुद्दों पर सड़क पर उतरे युवाओं के बीच तेजस्वी कई मौकों पर नदारद रहे। परिवार में दरार और शुरुआती झटका लालू यादव ने अपने बड़े बेटे तेज प्रताप यादव को परिवार और पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया था। चुनाव अभियान की शुरुआत में ही परिवार के भीतर विवाद उभर आया और बड़े भाई तेज प्रताप यादव ने अलग पार्टी बना ली। इससे आरजेडी को शुरुआती चरण में ही नुकसान झेलना पड़ा। नीतीश कुमार की एनडीए रणनीति का मुख्य आधार महिलाएं थीं, वहीं आरजेडी इस वर्ग को आकर्षित करने में असफल रही। तेजस्वी की रैलियों में महिलाओं की उपस्थिति लगभग नगण्य रही। इसके विपरीत, नीतीश कुमार की रैलियों में करीब 60% भीड़ महिलाओं की थी। एनडीए ने महिलाओं को चुनाव पूर्व 10,000 नकद सहायता की घोषणा का प्रभावी प्रचार किया। तेजस्वी ने इसका जवाब 30,000 देने की घोषणा से देने की कोशिश की, पर यह देर से और अप्रभावी साबित हुई। अंतिम समय में सामाजिक समीकरण बनाने का प्रयास भी असफल रहा। सीट बंटवारे को लेकर स्थिति आखिरी दिन तक स्पष्ट नहीं हो सकी और 10 सीटों पर INDIA गठबंधन के दल ही एक-दूसरे के खिलाफ लड़ते दिखे। आरजेडी ने वीआईपी (मुकेश सहनी) और आईआईपी (आईपी गुप्ता) को शामिल किया। सहनी को डिप्टी सीएम चेहरा घोषित करने के बावजूद निषाद समुदाय उनसे दूर रहा। वीआईपी एक भी सीट नहीं जीत सकी। कांग्रेस 61 में से केवल 6 सीटों पर जीती। मुस्लिम-यादव (MY) वोटों में भी सेंध दिखी। सीमांचल में AIMIM ने बेहतर प्रदर्शन किया और कई महत्वपूर्ण सीटें हाथ से निकल गईं। 6 अक्टूबर को चुनाव की घोषणा के बाद तेजस्वी ने 7 अक्टूबर को प्रेस कॉन्फ्रेंस की, लेकिन 22 अक्टूबर तक प्रचार से दूर रहे। 22 अक्टूबर तक बनी यह ‘गायब रहने’ की छवि उनके खिलाफ गई। 23 अक्टूबर को INDIA गठबंधन द्वारा उन्हें सीएम फेस घोषित करने के बाद उन्होंने एक दिन में 15 से अधिक रैलियों के जरिए गति पकड़ने की कोशिश की, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार तब तक बहुमूल्य समय हाथ से निकल चुका था। ‘जंगल राज’ नैरेटिव का जवाब देने में असफलता एनडीए ने आरजेडी के खिलाफ 21 साल से चले आ रहे ‘जंगल राज’ के नैरेटिव को और मजबूत किया। तेजस्वी इसे प्रभावी ढंग से काट नहीं सके।

Bihar News: बिहार में सरकार गठन करने नीतीश के आवास पर बढ़ी हलचल

पटना. बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में एनडीए की प्रचंड जीते के बाद अब नई सरकार के गठन की कवायद तेज हो गई है। भाजपा, जेडीयू समेत अन्य घटक दलों में विमर्श का दौर शुरू हो गया है। चुनाव नतीजों की घोषणा के अगले दिन गुरुवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के आवास पर हलचल तेज है। जनता दल यूनाइडेट (जेडीयू) के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा और केंद्रीय मंत्री ललन सिंह सुबह ही सीएम आवास पहुंच गए। इसके अलावा केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान भी नीतीश से मिलने पहुंचे। बताया जा रहा है कि नई सरकार के शपथग्रहण, कैबिनेट गठन समेत अन्य मुद्दों पर एनडीए में मंथन चल रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, जेडीयू के वरीय नेता विजय चौधरी, श्याम रजक समेत अन्य नेताओं ने भी पटना के एक अणे मार्ग पहुंचकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात की। नीतीश से मुलाकात के बाद मीडिया से बातचीत में लोजपा-रामविलास के मुखिया चिराग पासवान ने कहा कि वह एनडीए की जीत को लेकर सीएम का आभार जताने आए थे। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए ने ऐतिहासिक जीत हासिल की है। इसलिए उनसे मुलाकात करने लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) का प्रतिनिधि मंडल पहुंचा। चिराग ने कहा कि नीतीश ने एनडीए के सभी घटक दलों की भूमिका को सराहा है। विपक्ष पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि ये लोग (महागठबंधन) लोजपा और जदयू के बीच तकरार की झूठी अफवाह फैला रहे थे। इस चुनाव में दोनों ही दलों ने एकजुटता दिखाते हुए एक-दूसरे के उम्मीदवारों को जिताने में मदद की। नीतीश ही अगले मुख्यमंत्री बनेंगे- जेडीयू नेता जदयू के वरिष्ठ नेता श्याम रजक ने सीएम आवास के बाहर मीडिया से बातचीत में कहा, “पूरा एनडीए एकजुट है। सभी लोग नीतीश कुमार के नेतृत्व में चुनाव लड़े, नीतीश ही हमारे नेता हैं और वी अगले मुख्यमंत्री भी बनेंगे।” एनडीए से किसकी कितनी सीटें-     भाजपा- 89     जदयू- 85     लोजपा आर- 19     हम- 5     रोलोमो- 4

Bihar News: मुजफ्फरपुर में शॉट सर्किट से हादसे में परिवार के पांच लोग जिंदा जले

मुजफ्फरपुर/पटना. बिहार के मुजफ्फरपुर में शॉट सर्किट से लगी आग में एक ही परिवार के पांच लोगों की जिंदा जलकर मौत हो गई वहीं पांच अन्य झुलस गए। जख्मी एसकेएमसीएच में जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं। मरने वालों की संख्या बढ़ सकती है। घटना जिले के मोतीपुर वार्ड 13 की बीती रात की है। जानकारी के मुताबिक स्थानीय गेना साह के घर में आग लगी थी जिसमें पूरा परिवार जल गया। जो घायल हैं उन्हें एसकेएमसीएच में रात में भर्ती कराया गया। मामले की पुष्टि डीएसपी वेस्ट सुचित्रा कुमारी ने की है। जानकारी के मुताबिक मरने वालों में दो बच्चे, उनके माता पिता और एक अन्य शामिल हैं। पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर कैंप कर रही है। बताया गया है कि रात में सभी घर में सोए थे। आग लगी तो किसी को पता नहीं चला। आग बढ़ती चली गई जिसमें सभी लोग घिर गए। जानकारी के मुताबिक मोतीपुर नगर परिषद क्षेत्र के वार्ड 13 में गेना साह के घर में बिजली के शॉट सर्किट से आग लगी। आग इतनी तेजी से फैली कि परिवार के लोगों को बाहर निकलने का मौका नहीं मिला। स्थानीय लोगों से मिली जानकारी के मुताबिक घटना देर रात तब हुई जब परिवार के सभी सदस्य सो रहे थे। उन्हें आग लगने का पता ही नहीं चला। धुआं और लपटें उठते देखकर पड़ोसियों ने शोर मचाया। परिवार को जगाने की कोशिश की गई लेकिन तबतक देर हो चुकी थी। अंदर फंसे सदस्य बाहर नहीं निकल सके। सूचना मिलते ही मोतीपुर पुलिस और फायर ब्रगेड की टीम मौके पर पहुंची। काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया और जले हुए लोगों को अस्पताल भेजा गया। पांच लोग तबतक जलकर मर चुके थे। झुलसे हुए पांच लोगों को एसकेएमसीएच भेजा गया जहां उनकी हालत गंभीर बताई जा रही है। डीएम सुब्रत कुमार सेन ने घायलों का समुचित इलाज करने का निर्देश दिया है।