samacharsecretary.com

जलाशयों में सर्वे के बाद मछुआरों को आधुनिक मत्स्य शिकार तकनीक देने की तैयारी

रांची  मत्स्य शिकार (मछली पकड़ने) की आधुनिक और सही तकनीक से राज्य में मत्स्य उत्पादन बढ़ेगा। यहां मत्स्य उत्पादन की पर्याप्त संभावनाएं हैं, लेकिन इसके लिए जरूरी है कि इससे जुड़े लोगों तथा मछुआरों को मछली पकड़ने की सही तकनीक का प्रशिक्षण मिले इस उद्देश्य से राज्य में मत्स्य उत्पादन की वर्तमान स्थिति, मछुआरों द्वारा उपयोग की जा रही पारंपरिक मछली पकड़ने की तकनीक तथा भविष्य में उन्नत मत्स्य प्रौद्योगिकी के उपयोग की संभावनाओं के आकलन के लिए राज्य के जलाशयों में तीन दिनों तक क्षेत्रीय सर्वेक्षण किया गया। यह सर्वेक्षण केंद्रीय मात्स्यिकी प्रौद्योगिकी संस्थान, मुंबई के वैज्ञानिक डॉ. श्रवण कुमार शर्मा के नेतृत्व में टीम ने किया। सर्वेक्षण के लिए गेतलसूद, तेनुघाट, कांके, हटिया, मैथन एवं पंचेत जलाशयों का भ्रमण किया गया। भ्रमण के दौरान जलाशयों में उपलब्ध मत्स्य संसाधनों, मछली पकड़ने की वर्तमान पद्धति, उपयोग किए जा रहे मत्स्य जालों, नावों, मत्स्य शिकार की चुनौतियों तथा स्थानीय मछुआरों की प्रशिक्षण संबंधी आवश्यकताओं का अध्ययन किया गया। विभिन्न स्थलों पर मछुआरों, मत्स्य सहकारी समितियों तथा स्थानीय हितधारकों से चर्चा कर जलाशय आधारित मात्स्यिकी की व्यावहारिक समस्याओं और संभावित तकनीकी समाधानों की जानकारी प्राप्त की गई। सर्वेक्षण में यह पाया गया कि झारखंड के जलाशयों में मत्स्य उत्पादन की पर्याप्त संभावनाएं उपलब्ध हैं, लेकिन उन्नत एवं वैज्ञानिक मत्स्य शिकार तकनीक, उपयुक्त मत्स्य जालों, सुरक्षित एवं ऊर्जा दक्ष नावों तथा आधुनिक प्रशिक्षण की आवश्यकता है। जलाशयों की भौगोलिक स्थिति, जल की गहराई और स्थानीय परिस्थितियों को देखते हुए क्षेत्र विशेष के अनुरूप मत्स्य शिकार तकनीकों को अपनाने की आवश्यकता महसूस की गई। इस सर्वेक्षण के आधार पर मछुआरों के लिए उन्नत एवं आधुनिक मत्स्य प्रौद्योगिकी प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रारंभ करने की योजना बनाई जाएगी। प्रशिक्षण में वैज्ञानिक तरीके से मछली पकड़ने की तकनीक, बेहतर एवं चयनात्मक मत्स्य जालों के उपयोग, जलाशय मात्स्यिकी के लिए उपयुक्त नावों का संचालन तथा पर्यावरण अनुकूल विद्युत एवं सौर ऊर्जा आधारित मछली पकड़ने वाली नावों की जानकारी, मछली पकड़ने के दौरान सुरक्षा उपाय तथा मत्स्य संसाधनों के उपयोग पर विशेष जोर दिया जाएगा भविष्य में झारखंड के चयनित जलाशयों में उन्नत मत्स्य जालों, आधुनिक मत्स्य शिकार तकनीकों तथा विद्युत एवं सौर ऊर्जा आधारित मछली पकड़ने वाली नावों के प्रदर्शन एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किए जाने का प्रस्ताव है। वैज्ञानिक तरीकों से मत्स्य उत्पादन मछुआरों की समृद्धि में सहायक : निदेशक मस्त्य निदेशक अमरेंद्र कुमार ने बताया कि झारखंड के जलाशयों में वैज्ञानिक तरीकों, उपयुक्त प्रशिक्षण और उन्नत मत्स्य उपकरणों के माध्यम से मत्स्य उत्पादन एवं मछुआरों की आजीविका में उल्लेखनीय सुधार किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए केन्द्रीय मात्स्यिकी प्रौद्योगिकी संस्थान द्वारा बेहतर मत्स्य प्रौद्योगिकी के प्रसार और प्रशिक्षण कार्यक्रमों को आगे बढ़ाया जाएगा।

पटना: कम पूंजी वाले उद्योगों के लिए नई नीति से वित्तीय मदद का रास्ता साफ

पटना बिहार में कम पूंजी से उद्योग लगाने वालों के लिए खुशखबरी है। राज्य में सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों के दिन बहुरने वाले हैं। इन्हें प्रोत्साहित करने के लिए राज्य सरकार नई एमएसएमई नीति ला रही है। नई नीति आने के बाद कम पूंजी वाली छोटी इकाइयों को वित्तीय मदद मिलने का रास्ता साफ हो जाएगा। तकनीकी मदद मिलने से इन इकाइयों के उत्पाद निर्यात हो सकेंगे। इससे राज्य में रोजगार को भी बढ़ावा मिलेगा। राज्य में करीब आठ लाख सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम औद्योगिक इकाइयां हैं। मुख्यमंत्री उद्यमी योजना के तहत भी हर वर्ष नौ हजार से अधिक लघु उद्यमी तैयार किए जा रहे हैं। राज्य में कृषि आधारित, खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र, वस्त्र, हस्तकरघा, डेयरी आदि क्षेत्र की इकाइयां ज्यादा हैं। इनमें वस्त्र एवं चर्म उद्योग और खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों के लिए नीति बनी हुई है। अन्य इकाइयों के प्रोत्साहन के लिए कोई खास नीति नहीं है। इस कारण इन्हें सरकार से वित्तीय मदद लेने में पापड़ बेलने पड़ते हैं। पूंजी के अभाव में कई इकाइयां प्रतिस्पर्धी बाजार का सामना नहीं कर पाती हैं। तकनीकी रूप से उन्नत नहीं होने के चलते इनके उत्पाद निर्यात के मानक पर खरा नहीं उतर पाते हैं। इन्हीं समस्याओं के समाधान के लिए उद्योग विभाग ने एमएसएमई नीति बनाने का निर्णय लिया है। इस पर काम शुरू कर दिया गया है। उद्योग विभाग का मकसद केंद्र सरकार की नीति के लिए दिए जा रहे प्रोत्साहन का भी लाभ उठाना है। केंद्रीय नीति के तहत पूंजीगत अनुदान और रियायती दरों पर लोन दिये जा रहे हैं। इसके बाद दिल्ली, मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों ने अपनी एमएसएमई नीति बना ली है। इसके चलते इन राज्यों की एमएसएमई इकाइयों को केंद्रीय सहायता और बैंक लोन आसानी से मिल जाता है। इन इकाइयों को मिलेगी मदद ● खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां (आटा, बेसन, सत्तू, मसाला मिल, बेकरी) ● पशु आहाद, मुर्गी दाना आदि कृषि आधारित उत्पाद, हस्तशिल्प क्षेत्र ● वस्त्र क्षेत्र (कपड़े और रेडिमेड परिधान), हस्तकरघा (पावरलूम) क्षेत्र ● चप्पल-जूते निर्माण, खिलौने, फर्नीचर के अलावा सेवा क्षेत्र की इकाइयां विशेषताएं ● असंगठित रोजगार कर रहे हस्तकरघा, सेवा क्षेत्र लोगों को फायदा ● उत्पादों को वैश्वि बाजार लायक तैयार करने के लिए सहायता मिलेगी ● केंद्रीय नीति के तहत पूंजीगत अनुदान और रियायती दरों पर लोन दिये जा रह हैं ● पूंजीगत अनुदान, तकनीकी मदद मिलेगी ● ऊर्जा और अन्य राजस्व शुल्क में राहत ● उत्पाद को बाजार, निर्यात की सुविधा ● वैश्विक बाजार तक उत्पाद पहुंच सकेगा ● एकीकृत क्लस्टर में इकाइयों को जगह

बिजली व्यवस्था होगी और मजबूत! रांची में बने दो नए सब स्टेशन, हजारों उपभोक्ताओं को राहत

रांची. राजधानी रांची में बिजली व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में बड़ी पहल की जा रही है। शहरवासियों को जल्द ही दो नए बिजली सब स्टेशन की सौगात मिलने वाली है। कोकर और जामचुआं में बन रहे नए सब स्टेशन लगभग तैयार हो चुके हैं और इनके चालू होने के बाद शहर के हजारों उपभोक्ताओं को बिजली संबंधी परेशानियों से राहत मिलेगी। बिजली विभाग के अनुसार कोकर सब स्टेशन से 10 एमवीए क्षमता के साथ बिजली आपूर्ति की जाएगी। इसका सीधा लाभ कोकर, लालपुर, बरियातू, खोरहाटोली, इंडस्ट्रियल एरिया, सुभाष चौक, भाभा नगर, तिरिल, पीस रोड और लालपुर चौक समेत आसपास के घनी आबादी वाले क्षेत्रों को मिलेगा। विभाग का दावा है कि करीब 30 हजार से अधिक लोगों को बेहतर और स्थिर बिजली आपूर्ति सुनिश्चित हो सकेगी। ट्रिपिंग और लो-वोल्टेज से मिलेगी राहत नए सब स्टेशन के चालू होने से लंबे समय से बनी लो-वोल्टेज, बार-बार ट्रिपिंग और एक फेज में कम बिजली पहुंचने जैसी समस्याओं का समाधान होने की उम्मीद है। गर्मी के मौसम में बढ़ते लोड के कारण जिन इलाकों में बार-बार बिजली बाधित होती थी, वहां अब स्थिति बेहतर होगी। ग्रामीण इलाकों और उद्योगों को भी फायदा वहीं जामचुआं सब स्टेशन से भी 10 एमवीए बिजली आपूर्ति की जाएगी। इससे आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों को पर्याप्त बिजली मिल सकेगी। इसके अलावा रामपुर और जामचुआं क्षेत्र के छोटे उद्योगों को भी बेहतर बिजली सुविधा मिलने से उत्पादन क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी। स्मार्ट सिटी ग्रिड से मिली अतिरिक्त ताकत इधर शहर की बढ़ती बिजली मांग को देखते हुए स्मार्ट सिटी परिसर में बने स्मार्ट ग्रिड को भी झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड द्वारा चालू कर दिया गया है। इस स्मार्ट ग्रिड से शहर को 35 मेगावाट अतिरिक्त बिजली मिलने लगी है। विभाग का कहना है कि भीषण गर्मी के दौरान बढ़ते लोड को संभालने में यह ग्रिड काफी सहायक साबित हो रहा है और इससे राजधानी में बिजली आपूर्ति व्यवस्था और मजबूत हुई है।

रांची, धनबाद समेत चार जिलों में बिजली गिरने से कहर, एक बच्ची समेत 5 की जान गई

रांची झारखंड के चार जिलों में पिछले 24 घंटों में बिजली गिरने से एक लड़की और दो महिलाओं सहित पांच लोगों की मौत हो गई। अधिकारियों ने बताया कि शुक्रवार को गढ़वा जिले से दो मौतें और रांची, धनबाद और बोकारो से एक-एक मौत की सूचना मिली। अधिकारी ने बताया कि शुक्रवार को रांची के इटकी पुलिस स्टेशन क्षेत्र के कुल्ली गांव में अपने माता-पिता के साथ पेड़ से आम तोड़ रही 12 वर्षीय लड़की अश्रिता की बिजली गिरने से मौत हो गई। उन्होंने बताया कि उसके माता-पिता घायल हो गए और उन्हें स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया है। वहीं गढ़वा में कंडी पुलिस स्टेशन क्षेत्र के गराखुर्द गांव में बिजली गिरने से 45 वर्षीय महिला की मौत हो गई, जबकि बानाजंघा गांव में 32 वर्षीय एक व्यक्ति की मौत हो गई। उन्होंने बताया कि धनबाद के राजगंज पुलिस थाना क्षेत्र के चुंगी गांव में 44 वर्षीय महिला की मौत हो गई, जबकि बोकारो के पिंडराजोरा पुलिस थाना क्षेत्र के बाबूडीह गांव में बिजली गिरने से 21 वर्षीय युवक की जान चली गई। शुक्रवार को झारखंड के अधिकांश हिस्सों में भारी बारिश और बिजली गिरने से शनिवार सुबह तक अधिकतम तापमान में गिरावट आई। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने रांची, रामगढ़, बोकारो, कोडरमा, गिरिडीह, धनबाद और गोड्डा सहित 13 जिलों के लिए रविवार सुबह 8:30 बजे तक गरज के साथ बारिश की ऑरेंज अलर्ट जारी की है। रांची मौसम विज्ञान केंद्र के उप निदेशक अभिषेक आनंद ने बताया कि मौसम में यह बदलाव दो निम्न दबाव प्रणालियों के कारण हुआ है। उन्होंने कहा कि झारखंड में अधिकतम तापमान में 7 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट आई है। अगले चार दिनों में तापमान में 3 से 5 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि होने की संभावना है। शुक्रवार को डाल्टनगंज में अधिकतम तापमान 34.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य तापमान से 6.2 डिग्री कम था। वहीं, चाईबासा में 33.4 डिग्री सेल्सियस और रांची में 27.8 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया।

हवाई अड्डों की सुरक्षा बढ़ी, बिहार के 20 शहरों में निर्माण कार्यों पर नए नियम लागू

मुजफ्फरपुर. बिहार में हवाई कनेक्टिविटी को मजबूत करने और विमानों के सुरक्षित परिचालन को लेकर नीतीश सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। मुजफ्फरपुर के पताही समेत राज्य के कुल 20 शहरों में बनने वाले और वर्तमान में चालू एयरपोर्ट के आसपास अब किसी भी तरह के अनियंत्रित निर्माण पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। अब इन चिन्हित हवाई अड्डों के आसपास बिना सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के कोई भी ऊंची इमारत या संरचना नहीं बनाई जा सकेगी। सिविल विमानन विभाग के सचिव डॉ. निलेश रामचंद्र देवरे ने मुजफ्फरपुर समेत राज्य के सभी संबंधित जिलाधिकारियों (DM) को इस बाबत एक आधिकारिक पत्र भेजा है। पत्र में साफ कहा गया है कि विमानों के सुरक्षित टेक-ऑफ और लैंडिंग, हवाई अड्डे की सुरक्षा, रनवे के विस्तार और आधुनिक नेविगेशनल सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए हवाई पट्टियों के आसपास के क्षेत्रों पर पैनी नजर रखी जाए। किसी भी नए निर्माण को मंजूरी देने से पहले विमानन सुरक्षा मानकों और भविष्य की जरूरतों का आकलन करना अनिवार्य होगा। पताही से उड़ान की उम्मीदें हुईं तेज हाल ही में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मुजफ्फरपुर के पताही हवाई अड्डे पर रनवे और टर्मिनल के निर्माण कार्य को जल्द से जल्द शुरू करने के निर्देश दिए थे। इस निर्देश के बाद से स्थानीय लोगों में मुजफ्फरपुर से हवाई सफर शुरू होने की उम्मीदें काफी बढ़ गई हैं। सरकार की इस नई बंदिश को भी इसी तैयारी का एक अहम हिस्सा माना जा रहा है ताकि भविष्य में बड़े विमानों की आवाजाही में कोई तकनीकी या सुरक्षा संबंधी अड़चन न आए। इन शहरों में एयरपोर्ट विस्तार का काम वर्तमान में बिहार के पटना, गयाजी, दरभंगा और पूर्णिया से विमान सेवाएं सुचारू रूप से संचालित हो रही हैं। इसके अलावा मुजफ्फरपुर के पताही सहित राज्य के 20 अन्य शहरों में एयरपोर्ट और हवाई पट्टियों के विस्तार का काम तेजी से चल रहा है। विभाग के मुताबिक, इन सभी जगहों से भविष्य में कमर्शियल और घरेलू विमानों की उड़ानें संभावित हैं। टावर और ऊंची इमारतों की निगरानी विमानन सचिव ने जिलाधिकारियों को निर्देश दिया है कि हवाई मार्ग और रनवे के आसपास विमान परिचालन में बाधा बनने वाले ऊंचे भवनों, मोबाइल टावर या अन्य किसी भी तरह के ऊंचे निर्माण की लगातार निगरानी की जाए। अगर कोई अवैध या बिना अनुमति के ऐसी संरचना खड़ी करता है, तो उस पर तत्काल प्रभावी कार्रवाई की जाएगी।

भुचुंगडीह पंचायत में लाभुकों की भारी भीड़, 550 का आज होगा सत्यापन

रामगढ़  मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना के लाभुकों का भौतिक सत्यापन करने के लिए शनिवार को चितरपुर प्रखंड के भुचुंगडीह पंचायत सचिवालय में विशेष शिविर आयोजित किया जा रहा है। यह कार्य अगले दो दिन यानी 01 जून तक चलेगी। यह जानकारी पंचायत के सचिव बिनोद कुमार ने दी। उन्होंने बताया कि सत्यापन कराने के लिए पंचायत भवन में महिलाओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। सत्यापन प्रक्रिया पूरी कराने के लिए सुबह से ही महिलाएं कतारबद्ध होकर अपनी बारी का इंतजार करती नजर आ रही है। वहीं अधिक भीड़ होने के कारण पंचायत भवन में काफी चहल-पहल देखने को मिल रही है। कई महिलाओं ने समय पर सत्यापन कार्य पूरा कराने की मांग की, ताकि उन्हें योजना का लाभ मिल सके। सत्यापन कार्य करने में पंचायत सचिव के अलावे पंचायत सहायक व वीएलई जुटे हुए है। पंचायत के लगभग 550 लाभुकों का कल होगा सत्यापन भुचुंगडीह पंचायत में लगभग 6 हजार की संख्या है। इसमे कुल 765 लाभुकों का सेंसन मुख्यमंत्री मंईया सम्मान योजना में हुआ है। जिसमे करीब 200 लाभुकों का सत्यापन पिछले दिनों हो चुकी है। बाकी शनिवार को लगभग 550 लाभुकों का सत्यापन होना है। बताया गया कि सत्यापन कराने के समय लाभुकों को अपने साथ पहचान व पते के प्रमाण के लिए आधार कार्ड, पारिवारिक विवरण व पात्रता जांच के लिए राशन कार्ड, मतदाता पहचान पत्र, बैंक पासबुक, स्वघोषणा पत्र की मूल व छायाप्रति लाना जरूरी है।

अल नीनो के असर की आशंका के बीच सरायकेला में खेती की तैयारी तेज

सरायकेला सरायकेला खरसावां जिला में रोहिणी नक्षत्र के साथ ही खेती काम शुरू हो गया है. रोहिणी के दिन किसानों ने पूजा अर्चना करते हुए खेतों की जुताई शरू कर दिया है और धान की बुआई भी शुरू कर दिया है. जिला के अधिकांश किसान छींटा विधि से ही खरीफ धान की खेती करते हैं. माना जाता है कि इस समय खेती करने से धान के पौधे रोग मुक्त रहते हैं साथ ही फसल भी अच्छी होती है. जिला में एक लाख हेक्टेयर में धान खेती करने का है लक्ष्य जिला में इस बार एक लाख हेक्टयर में धान की खेती करने का लक्ष्य रखा गया है इसके अलावे मूंग, उड़द, मूंगफली सहित तिलहन अन्य खरीफ खेती के लिए लक्ष्य रखा गया है. विगत वर्ष खरीफ खेती का 92 प्रतिशत उपलब्धि हासिल हुई थी. कृषि विभाग ने बीज के लिए भेजा है प्रस्ताव जिला के किसानों को समय पर बीज उपलब्ध कराने के लिए कृषि विभाग द्वारा बीज उपलब्ध कराने के लिए प्रस्ताव तैयार कर निदेशालय को भेजा है. बीज विनिमय वितरण और उत्पादन योजना के तहत अलग-अलग प्रकार के 700 क्विंटल धान बीज उपलब्ध कराने को कहा गया है जबकि बिरसा फसल विस्तार योजना के तहत उड़द, मूंगफली, मडुवा, अरहर, कुल्थी बीज उपलब्ध कराने के प्रस्ताव भेजा गया है. धान के इन बीजों का कृषि विभाग ने किया है डिमांड एमटीयु1010 प्रभेद: 150 क्विंटल एमटीयु 7029: 300 क्विंटल आईआर64:100 क्विंटल आईआर 64 ड़ीआरटी: 50 क्विंटल डीआरआरएच टु :100 क्विंटल बाजार में सजने लगी पारंपरिक हल खेती काम शुरू होते ही कृषि उपकरणों की बिक्री शुरू हो गई है. खासकर बैलों से चलाया जाना वाला हल बाजार में 450 से 500 रुपये में बिक रही है. सरायकेला के साप्ताहिक बाजार में पारंपरिक हल को बिक्री लाया गया था. हालांकि अब हल बैल के जगह ट्रैक्टर सहित अन्य कृषि उपकरणों ने ले लिया है बावजूद भी जिला के कई किसान हल से ही अपने खेतों की जुताई करते हैं. इस बार हो सकता है अलनिनो का असर मौसम विभाग द्वारा इस वर्ष अलनिनो का असर होने की संभावना व्यक्त किए जाने पर कृषि विभाग द्वारा तैयारी शुरू कर दिया गया है. विभाग द्वारा धान के साथ साथ मडुवा, मोटा अनाज सहित दलहन और तिलहन की खेती के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है. इस संबंध में जिला कृषि पदाधिकारी रौशन नीलकमल ने बताया कि अलनिनो का अंदेशा पर विभाग द्वारा प्लान निदेशालय स्तर से तैयार किया गया है जिससे किसी भी परिस्थिति का सामना किया जा सके.

झारखंड के मोहनाद गांव में तनाव, तीन राउंड फायरिंग के बाद तीन हिरासत में

 टुंडी झारखंड के टुंडी की बरवाटांड़ पंचायत अंतर्गत मोहनाद गांव में शुक्रवार की शाम प्रतिबंधित मांस मिलने के बाद भारी बवाल मच गया। सैकड़ों आक्रोशित लोगों ने आरोपियों को उनके घर में ही घेर लिया। मौके पर पहुंची पुलिस को भीड़ से आरोपियों को सुरक्षित निकालकर ले जाने के लिए फायरिंग भी करनी पड़ी। तीन राउंड फायरिंग और लाठीचार्ज के बाद भीड़ छंट गई और पुलिस तीनों आरोपियों को सुरक्षित हिरासत में लेकर थाना चली गई। वहां पर तनाव को देखते हुए एसडीएम लोकेश बारंगे ने निषेधाज्ञा लगा दी है। पूरे गांव में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। हिरासत में लिए गए लोगों में अशरफ अंसारी, उसके पिता और घर के मालिक सरफुद्दीन अंसारी एवं वाहन चालक मनव्वर अंसारी शामिल हैं। घटना के संबंध में बताया जा रहा है कि मोहनाद में एक तालाब के किनारे मांस फेंका हुआ था। खेलने गए बच्चों ने सबसे पहले इसे देखा। इसके बाद गांव के लोगों को इसकी जानकारी हुई। गांव में फैली सनसनी प्रतिबंधित मांस होने की बात पूरे गांव में फैल गई। इसके बाद ग्रामीण उग्र हो गए। दर्जनों लोग सरफुद्दीन अंसारी के घर के बाहर जुट गए। ग्रामीणों का आरोप है कि वहां भी मांस फेंका हुआ था, जिसे बाद में हटा लिया गया। ग्रामीणों का गुस्सा और बढ़ गया। इसी बीच सरफुद्दीन अंसारी का पुत्र अशरफ अंसारी एक मालवाहक से अपने घर की ओर आ रहा था। ग्रामीणों ने वाहन रोका। उसमें एक मवेशी लदा था। यह देख ग्रामीण और उग्र हो गए। इधर अशरफ और वाहन चालक मनव्वर अंसारी किसी तरह भीड़ से बचकर अपने घर में घुस गए। क्या बोली पुलिस इस घटना को लेकर जानकारी देते हुए तुंडी के थाना प्रभारी उमाशंकर ने बताया कि तीन लोगों को इस मामले में हिरासत में लिया गया है। तीनों से पूछताछ की जा रही है। भीड़ से तीनों को सुरक्षित निकालने के लिए तीन राउंड फायरिंग करनी पड़ी है। स्थिति नियंत्रण में है। वहां निषेधाज्ञा लगा दी गई है।

यात्रियों को बड़ा झटका: बिहार में साधारण, डीलक्स और एसी बसों का किराया बढ़ा

पटना बिहार के लोगों को महंगाई का एक और बड़ा झटका लगने वाला है। 1 जून से बस का सफर महंगा हो जाएगा। सम्राट सरकार ने बस किराया में 10 से 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है। परिवहन विभाग ने शुक्रवार को इसकी अधिसूचना भी जारी कर दी। नया किराया राज्य के विभिन्न रूटों पर चलने वालीं बसों पर लागू होगा। सरकार ने साधारण से लेकर डीलक्स और एसी सभी तरह की बसों के किराये में बढ़ोतरी की है। बिहार में बीते 5 सालों से बस किराया नहीं बढ़ा था। हर पांच साल में किराये के पुनर्निर्धारण का नियम है। डीजल की कीमतें बढ़ने से बस संचालन का खर्च भी बढ़ा है। परिवहन विभाग को 15 प्रतिशत तक किराये में बढ़ोतरी का प्रस्ताव मिला था, जिस पर आपत्ति एवं सुझाव मांगे जाने के बाद लागू कर दिया गया। सरकार ने दूरी के आधार पर नया किराया तय किया है। साधारण बसों में 50 किलोमीटर तक के सफर पर अब प्रति किलोमीटर 1.73 रुपये भाड़ा लगेगा। पहले यह दर 1.50 रुपये थी। 100 किलोमीटर तक की यात्रा पर अब प्रति किमी 1.71 रुपये भाड़ा लगेगा। 200 किमी तक 1.68 रुपये और 300 किलोमीटर से अधिक की दूरी पर यात्रियों को प्रति किमी 1.65 रुपये किराया देना होगा। इसी तरह डीलक्स बस सेवा में 50 किलोमीटर तक का सफर 1.96 रुपये प्रति किलोमीटर के हिसाब से होगा। 100 किलोमीटर तक की यात्रा करने पर 1.94 रुपये प्रति किमी की दर से भाड़ा लगेगा। 200 किमी तक सफर पर 1.90 रुपये और 300 किमी से ऊपर की यात्रा पर 1.87 रुपये प्रति किमी किराया लगेगा। एसी बस में 50 किलोमीटर तक की यात्रा पर नया किराया 2.30 प्रति किमी तय किया गया है। 100 किलोमीटर तक सफर के लिए 2.28 रुपये, 200 किमी तक 2.24 रुपये और 300 किमी से अधिक की लंबी दूरी की यात्रा पर 2.20 रुपये प्रति किमी के हिसाब से भाड़ा देना होगा। इसके अलावा, परिवहन विभाग ने वॉल्वो जैसी प्रीमियम बसों के किराये में भी बढ़ोतरी की है। नगरीय बस सेवा यानी सिटी बस में सफर करने वाले लोगों को भी अपनी जेब ढीली करनी पड़ेगी। नई दरों के अनुसार सरकारी बसों के साथ ही निजी बस संचालक भी किराये में बढ़ोतरी करेंगे। बिहार में बस भाड़े में इजाफे का प्रस्ताव पहले ही आ गया था, इससे किराया में बढ़ोतरी होने की पूरी संभावना जताई जा रही थी। इसके चलते कुछ जगहों पर निजी बस संचालकों ने इसी महीने से किराये में इजाफा कर दिया, जिससे यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा।

विक्रमशिला सेतु टूटने के बाद राहत की खबर, सात जून से पहले बहाल होगा आवागमन

 भागलपुर भागलपुर के विक्रमशिला सेतु के टूट जाने से परेशान बिहार वासियों के लिए अच्छी खबर है। इस पुल पर आठ जून से दोबारा परिचालन शुरू हो सकता है। इसको लेकर सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) की टीम ने पूरी ताकत झोंक दी है। तीसरे बेली ब्रिज का निर्माण अंतिम चरण में है। जबकि चौथे बेली ब्रिज के निर्माण की प्रक्रिया शुरू हो गई है। बीआरओ के अधीक्षण अभियंता की निगरानी में चौथे ब्रिज के फाउंडेशन की लाइन खींची गई। हालांकि शुक्रवार दोपहर हुई बारिश के कारण काम पूरी तरह बाधित हो गया। शेष काम रात में निपटाए जाएंगे। जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी ने शुक्रवार को विक्रमशिला सेतु पर चल रहे बेली ब्रिज निर्माण एवं आवागमन पुनर्बहाली कार्यों का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने बीआरओ एवं संबंधित अधिकारियों से कार्यों की प्रगति की जानकारी प्राप्त की और जरूरी दिशा-निर्देश दिए। डीएम ने कहा कि सात जून से पूर्व हर हाल में पुल पर यातायात प्रारंभ करना है। पहले पांच जून का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, लेकिन आंधी पानी के कारण बिजली कटने की समस्या से काम में बाधा आई। इससे शुरू करने का लक्ष्य दो दिन आगे बढ़ गया है। पथ निर्माण मंत्री सह बिहपुर विधायक शैलेंद्र कुमार से जानकारी के मुताबिक विक्रमशिला सेतु से करीब 50 किलोमीटर के रिंग रोड को अगुआनी घाट से जोड़ा जाएगा। इसके लिए सर्वे और डीपीआर बनाने का काम शुरू हो गया है। रिंग रोड के बन जाने से इलाके के लोगों को आवगमन का एक वैकल्पिक मार्ग सुलभ हो जाएगा और इलाके के लोगों को कटाव से सुरक्षा मिलेगी। इससे क्षेत्र के विकास को नई दिशा मिलने की संभावना है। मंत्री ने बताया कि यह परियोजना भविष्य में क्षेत्रीय विकास और यातायात व्यवस्था को नई दिशा देगी। इस दौरान मंत्री ने बिहपुर विधानसभा क्षेत्र में लत्तीपुर, नन्हकार, जमींदारी, राघोपुर, काजीकोरैया गंगा तटबंध सहित कालूचक, विष्पुरिया, सिहकुंड और गुवारीडीह समेत कोसी कटाव प्रभावित इलाकों में चल रहे कटावरोधी कार्यों की भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि पहले इन क्षेत्रों में मानसून शुरू होने के बाद कटावरोधी कार्य प्रारंभ होता था, लेकिन इस बार मानसून पूर्व ही कार्य शुरू कराने का निर्देश बाढ़ नियंत्रण विभाग के अधिकारियों को दिया गया है। भागलपुर से उत्तर बिहार को जोड़ने वाला महत्वूपर्ण पुल विक्रमशिला सेतु का कुछ हिस्सा 3 मई की रात टूट गया। प्रशासन ने इस पुल पर रात के 12.30 बजे से आवागमन रोक दिया था वरना बड़ा हादसा हो सकता था। पुल टूटने के बाद भागलपुर समेत आस पास के जिलों में हाहाकारी स्थिति उत्पन्न हो गयी। कई जिलों का संपर्क इस पुल के कारण टूट गया। पटना से दिल्ली तक इस पुल के टूटने की चर्चा हुई। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की पहल पर बॉर्डर रोड ऑर्गनाइजेशन की टीम पहुंची और बेली ब्रीज का निर्माण किया।