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झारखंड सरकार ने जारी की 30 नई क्लाइमेट-फ्रेंडली फसलें

 रांची  झारखंड सरकार ने राज्य के किसानों को बड़ी सौगात देते हुए 30 नई फसल किस्मों को जारी करने के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान कर दी है। विभिन्न कृषि शोध संस्थानों द्वारा लगभग एक दशक (10 साल) तक लगातार किए गए कड़े अनुसंधान और वैज्ञानिक परीक्षणों के बाद इन किस्मों को विकसित किया गया है। ये सभी फसलें उच्च उत्पादकता देने वाली, शीघ्र पकने वाली, रोग-कीट प्रतिरोधी, तनाव सहनशील और पूरी तरह से जलवायु अनुकूल (क्लाइमेट फ्रेंडली) हैं। झारखंड सरकार के कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग के सचिव अबूबकर सिद्दीकी पी. की अध्यक्षता में राज्य सचिवालय में आयोजित राज्य वेरायटी रिलीज कमेटी (एसवीआरसी) की बैठक में इस प्रस्ताव पर अंतिम मुहर लगाई गई। इस उच्च स्तरीय बैठक में विभाग के विशेष सचिव गोपाल तिवारी, बिरसा एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी (बीएयू) के कुलपति डाॅ. एससी दुबे, अनुसंधान निदेशक डाॅ. पीके सिंह, विभिन्न संस्थानों के निदेशक और प्रगतिशील किसान नकुल महतो व मीनू महतो सहित कई विज्ञानी उपस्थित थे। किस संस्थान की कितनी किस्मों को मिली स्वीकृति? इस बैठक में राज्य के अलग-अलग प्रतिष्ठित कृषि अनुसंधान संस्थानों द्वारा तैयार की गई फसलों को हरी झंडी दिखाई गई: बिरसा एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी (बीएयू): वैज्ञानिकों द्वारा विकसित सबसे अधिक 10 किस्में शामिल हैं। इनमें सोयाबीन और गेहूं की दो-दो तथा मक्का, फलारू (एरियल याम), अरहर, चारा जई, चारा घास और सरसों की एक-एक किस्म है। पलांडू केंद्र (ICAR-RCER): फार्मिंग सिस्टम रिसर्च सेंटर फॉर हिल एंड प्लेटो रीजन, पलांडू द्वारा विकसित 8 बागवानी और सब्जी किस्मों को मंजूरी मिली। आईआईएबी रांची: भारतीय कृषि जैव प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईएबी) की 4 आधुनिक धान किस्मों को विमोचन की स्वीकृति मिली। आईएआरआई हजारीबाग: भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आइएआरआइ) हजारीबाग की 1 अरहर और 3 मक्का किस्मों के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इसके साथ ही क्षेत्र विस्तार के लिए 2 अन्य फसलों को भी स्वीकृति मिली। केंद्रीय वर्षा आधारित ऊपराऊं धान अनुसंधान केंद्र हजारीबाग: इस संस्थान द्वारा विकसित 2 विशेष धान किस्मों को भी हरी झंडी दिखाई गई। जारी की गई प्रमुख फसलों की पूरी सूची मंजूरी पाने वाली प्रमुख किस्मों के नाम इस प्रकार हैं: धान: सीआर धान 110, सीआर धान 215, स्वर्ण मोहन धान, आईआईएबी धान 1, आईआईएबी धान 2, आईआईएबी धान 3 और आईआईएबी धान 4। मक्का: बिरसा मक्का हाइब्रिड 1, भद्रिका मेज हाइब्रिड 1, भद्रिका मेज हाइब्रिड 2, भद्रिका क्वालिटी मेज हाइब्रिड 1 और शालीमार मेज हाइब्रिड 5। गेहूं व सरसों: बिरसा गेहूं 5, बिरसा गेहूं 6 और बिरसा भारत सरसों 1। दालें: बिरसा अरहर 3, वंशिका (अरहर) और पूसा अवंतिका (मसूर)। सब्जियां व अन्य: स्वर्ण रत्न (टमाटर), स्वर्ण प्रफुल्य (मिर्च), स्वर्ण अतुल्य (शिमला मिर्च), स्वर्ण यामिनी (करेला), स्वर्ण सुगंधा (सब्जी सोयाबीन), स्वर्ण सुपर्णा (चौलाई साग), स्वर्ण निधि (सेम) और बिरसा कोंकण फलारू 1 (हवाई रतालू)। चारा फसलें: बिरसा सोयाबीन 5, बिरसा सोयाबीन 6, बिरसा ओट 1 (चारा जई) और बिरसा दीनानाथ 1 (घास)। बिरसा कृषि विश्वविद्यालय (BAU) की 10 खास किस्में और उनकी खासियत बीएयू के विज्ञानियों द्वारा तैयार की गई ये 10 किस्में झारखंड की मिट्टी और मौसम के लिहाज से गेम-चेंजर साबित हो सकती हैं: 1. बिरसा मक्का हाइब्रिड 1 (डेवलपर: डाॅ. मणिगोपा चक्रवर्ती) इस किस्म की उत्पादन क्षमता 70 से 73 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। इसमें 10 प्रतिशत प्रोटीन पाया जाता है। यह फसल खरीफ के मौसम में 93 दिनों में और रबी में 127 दिनों में पककर तैयार हो जाती है। यह तनाव सहनशील है और इससे 376 क्विंटल हरा चारा व 103 क्विंटल सूखा चारा भी प्राप्त होता है। 2. बिरसा कोंकन फलारू (डेवलपर: डाॅ. शुभ्रांशु सेनगुप्ता) यह झारखंड की पहली हवाई रतालू किस्म है जो 150 से 165 दिनों में तैयार होती है। इसकी बुलबिल उपज क्षमता 10 टन प्रति हेक्टेयर तक है। 3. बिरसा सोयाबीन 5 (डेवलपर: डाॅ. नूतन वर्मा) इस किस्म में 41.5 प्रतिशत प्रोटीन और 17 प्रतिशत तेल की मात्रा होती है। यह 115 से 118 दिनों में तैयार होती है और इसकी उपज क्षमता 30 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है, जो मानक किस्मों से 28 प्रतिशत अधिक है। 4. बिरसा सोयाबीन 6 (डेवलपर: डाॅ. नूतन वर्मा) यह किस्म मात्र 105 से 108 दिनों में पककर तैयार हो जाती है। इसकी उत्पादन क्षमता 27 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। इसमें 39 प्रतिशत प्रोटीन और 20 प्रतिशत तेल की मात्रा पाई जाती है। 5. बिरसा अरहर 3 (डेवलपर: डाॅ. नीरज कुमार) यह मध्यम अवधि (178 से 180 दिन) में तैयार होने वाली अरहर की बेहतरीन किस्म है। इसकी उपज क्षमता 21 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है, जो पुरानी मानक किस्मों की तुलना में 20 प्रतिशत ज्यादा उत्पादन देती है। 6. बिरसा ओट 1 (डेवलपर: डाॅ. योगेंद्र प्रसाद) पशुपालकों के लिए विकसित यह चारा किस्म प्रति हेक्टेयर 420 क्विंटल हरा चारा और करीब 25.7 क्विंटल दाना उत्पादन देती है। बहु-कट (मल्टी-कट) प्रणाली के लिए उपयुक्त इस चारे में 10.8 प्रतिशत क्रूड प्रोटीन होता है। 7. बिरसा दीनानाथ 1 (डेवलपर: डाॅ. योगेंद्र प्रसाद) यह एकल कट प्रणाली के लिए उपयुक्त चारा घास है, जिसकी उपज क्षमता 468 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। इसमें 8.4 प्रतिशत क्रूड प्रोटीन पाया जाता है। 8. बिरसा गेहूं 5 (डेवलपर: डाॅ. सूर्य प्रकाश) इस गेहूं की उत्पादन क्षमता 53 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है और यह 106 से 109 दिनों में पक जाती. है। कुपोषण से लड़ने के लिए इसमें आयरन (42.5 पीपीएम) और जिंक (39.6 पीपीएम) की मात्रा काफी अधिक रखी गई है। 9. बिरसा गेहूं 6 (डेवलपर: डाॅ. सूर्य प्रकाश) समय पर बुआई और सिंचित क्षेत्रों के लिए यह बेहद शानदार किस्म है, जिसकी उपज क्षमता लगभग 69 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। यह 120 दिनों में पकती है। इसमें 11.3 प्रतिशत प्रोटीन के साथ-साथ आयरन (42.5 पीपीएम) और जिंक (39.8 पीपीएम) प्रचुर मात्रा में मौजूद है। 10. बिरसा भारत सरसों 1 (डेवलपर: डाॅ. अरुण कुमार) कम पानी या वर्षा आधारित मध्यम भूमि के लिए यह किस्म सर्वोत्तम है। यह 108 से 111 दिनों में तैयार होती है और इसमें 40.1 प्रतिशत तेल की मात्रा होती है। इसकी संभावित पैदावार 26.5 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक है।  

कोविड राहत खत्म, एफआरबीएम एक्ट के तहत झारखंड की ऋण सीमा अब और कड़ी

रांची  केंद्र सरकार ने राज्यों को दी जानेवाली ऋण राशि में अब गैर बजटीय उधारी को भी जोड़ने का निर्णय लिया है। इसकी सूचना राज्यों को दे भी दी गई है। इस प्रकार नई व्यवस्था में राज्यों के लिए ऋण लेना पहले से कठिन हो जाएगा। झारखंड सरकार के लिए मुसीबत की बात यह है कि इसमें गैर बजटीय उधारी को भी शामिल करने की बात कही गई है। ऐसा हुआ तो राज्यों को एफआरबीएम (फिस्कल रेस्पांसिबिलिटि एंड बजट मैनेजमेंट ) एक्ट के तहत मिलनेवाली ऋण राशि पहले से कम हो जाएगी। कोविड काल में राज्यों को एक जीएसडीपी के हिसाब से चार प्रतिशत तक ऋण लेने की छूट दी गई थी और इसके ऊपर एक प्रतिशत ऋण बिना किसी शर्त के लिया जा सकता था। अब राज्यों को कोविड के कारण मिलनेवाली सुविधाओं को समाप्त कर दिया गया है। साथ ही गैर बजटीय उधारी को शामिल किए जाने से ऋण लेने की सीमा निर्धारित हो जाएगी। झारखंड सरकार पर कुल बकाया कर्ज की राशि 1.10 लाख करोड़ रुपये के ऊपर पहुंच चुकी है। देश के कई राज्यों पर इससे भी अधिक कर्ज है। कर्ज लेने की इस प्रवृत्ति पर रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार ने वित्तीय वर्ष 2003 में एफआरबीएम एक्ट को पास कराया था। यह कानून राज्यों को एक निर्धारित सीमा में ऋण लेने को बाध्य करता है। अभी यह सीमा बजट के हिसाब से तीन प्रतिशत पर सीमित है। इसे कोविड काल में दो प्रतिशत तक बढ़ाने की छूट केंद्र सरकार से मिली थी। इसमें एक प्रतिशत सशर्त छूट थी तो एक प्रतिशत पर कोई शर्त नहीं थोपा गया था। अब राज्यों को मिलनेवाली गैर बजटीय उधारी को भी सम्मिलित करने के केंद्र के निर्देश के आलोक में वित्त विभाग ने कैबिनेट से प्रस्ताव भी पारित करा लिया है। ऐसे में राज्य सरकार के लिए उधारी की सीमा और भी नियंत्रित हो जाएगी। आम तौर पर राज्य सरकार को विभिन्न एजेंसियों से विकास योजनाओं के लिए ऋण की राशि मिलती रहती है। नई व्यवस्था में इसको भी राज्य के ऊपर कुल ऋण में जोड़कर देखा जाएगा। झारखंड पर पहले से ही 1.11 लाख करोड़ रुपये से अधिक का है कर्ज झारखंड सरकार पूर्व में ही विभिन्न एजेंसियों से 1.11 लाख करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज उठा चुकी है।अलग-अलग वर्षों में विकास कार्यों को पूरा करने के लिए उधारी ली गई है। कल्याणकारी योजनाओं और विकास कार्यों को पूरा करने के लिए अभी भी राज्य सरकार बाजार से भी कर्ज उठाती है। चालू वित्तीय वर्ष में भी राज्य सरकार विभिन्न माध्यमों से 13 हजार करोड़ रुपये से अधिक का ऋण लेने का प्रस्ताव पारित कर चुकी है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ हुई राज्यों की प्री-बजट बैठक के दौरान मैंने यह मामला उठाया था। एफआरबीएम की सीमा तीन प्रतिशत से बढ़ाकर पांच प्रतिशत तक करने की मांग की थी। तीन प्रतिशत के दायरे में ही झारखंड को और भी ऋण मिल सकता है। निर्धारित अनुपात को देखें तो राज्य सरकार अभी आठ हजार करोड़ रुपये और ऋण ले सकती है। अच्छी बात यह है कि हमें इसकी आवश्यकता नहीं पड़ रही है। गैर बजटीय ऋण को जोड़कर हमारे अधिकारों को रोका नहीं जा सकता है। -राधाकृष्ण किशोर, वित्त मंत्री, झारखंड।  

कामकाजी महिलाओं को बड़ी राहत: बिहार में आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को मिलेगी पीरियड लीव

 पटना बिहार की सम्राट सरकार ने राज्य की कामकाजी महिलाओं के हित में एक बेहद संवेदनशील और ऐतिहासिक फैसला लिया है। एनडीए सरकार की इस नई पहल के बाद अब राज्य की संविदा और आउटसोर्सिंग महिला कर्मचारियों को एक बहुत बड़ी राहत मिलने जा रही है। सरकार ने इन महिलाओं के लिए एक विशेष नीति को मंजूरी दी है, जिसके तहत इन्हें हर महीने 'स्पेशल लीव' की सौगात दी जाएगी। सरकार के इस बड़े कदम से राज्य की लगभग डेढ़ लाख से अधिक महिला कर्मियों को सीधा फायदा पहुंचने की उम्मीद है। हर महीने मिलेगी 2 दिनों की स्पेशल लीव, बिहार बना देश का पहला राज्य इस नई नीति के लागू होने के बाद अब बिहार की तमाम संविदा, बेलट्रॉन और आउटसोर्सिंग महिला कर्मचारियों को हर महीने 2 दिनों की स्पेशल लीव दी जाएगी। गौरतलब है कि नियमित सरकारी महिला कर्मचारियों की तरह ही इन संविदा कर्मियों को भी लंबे समय से इस सुविधा की दरकार थी। अब बिहार पूरे देश में ऐसा पहला और इकलौता राज्य बन गया है, जिसने संविदा और आउटसोर्सिंग स्तर पर काम करने वाली महिलाओं को प्रति माह 2 दिनों की विशेष छुट्टी देने की घोषणा की है। पीरियड लीव का पुराना इतिहास और अन्य राज्यों की स्थिति क्या है? बिहार में महिला कर्मचारियों को मिलने वाली यह विशेष छुट्टी असल में 'पीरियड लीव' के तौर पर जानी जाती है। इस व्यवस्था की सबसे पहली शुरुआत 34 साल पहले साल 1992 में लालू प्रसाद यादव के मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान की गई थी, जब नियमित महिला कर्मियों के लिए 2 दिनों की विशेष छुट्टी का प्रावधान लागू हुआ था। हाल ही में कर्नाटक सरकार ने भी अपने राज्य में सरकारी और प्राइवेट सेक्टर्स की महिलाओं के लिए पीरियड लीव की नीति घोषित की है, लेकिन वहां केवल एक ही दिन की छुट्टी का प्रावधान है। वहीं बिहार अब संविदा और आउटसोर्सिंग महिलाओं के लिए भी पूरे 2 दिनों की छुट्टी लागू कर देश में सबसे आगे निकल गया है। ड्यूटी टाइमिंग के विवाद के बीच महिला कर्मियों के लिए बड़ी राहत बता दें कि यह फैसला ऐसे समय में आया है जब हाल ही में मुख्य सचिव के एक पत्र को लेकर काफी घमासान मचा हुआ था। दरअसल, नए आदेश के मुताबिक नियमित महिला कर्मचारियों की ड्यूटी शाम 5 बजे तक तय है, जबकि संविदा और आउटसोर्सिंग महिला कर्मियों को शाम 6 बजे तक यानी एक घंटा अतिरिक्त ड्यूटी करनी पड़ रही है। इस टाइमिंग को लेकर भले ही अभी थोड़ा कन्फ्यूजन बना हुआ है, लेकिन इसी बीच बीजेपी के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से ट्वीट कर इस 2 दिनों की 'स्पेशल लीव' की घोषणा ने महिलाओं के चेहरे पर बड़ी खुशी ला दी है। महिला संगठनों का कहना है कि यह नई व्यवस्था कामकाजी महिलाओं के स्वास्थ्य और सम्मान के लिए एक संजीवनी की तरह काम करेगी।

लंबी रेंज वाली EV की धूम, पटना में खरीदने वालों की लगी कतार

पटना. बढ़ते ईंधन संकट, पेट्रोल-डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से डीजल-पेट्रोल की बचत तथा इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने की अपील का असर अब राजधानी पटना के बाजार में साफ दिखाई देने लगा है। शहर में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) के प्रति लोगों की जागरूकता तेजी से बढ़ी है। स्थिति यह है कि अब हर दिन बाजार से औसतन 40 से 50 चारपहिया और 60 से 70 दोपहिया इलेक्ट्रिक वाहन निकल रहे हैं। खासकर युवा, नौकरीपेशा लोग और महिलाएं इलेक्ट्रिक वाहनों में अधिक रुचि दिखा रहे हैं। स्थिति यह है कि मांग के अनुसार कंपनियों में 80-100 वाहनों की वेटिंग है। डीलरों का कहना है कि पेट्रोल की कीमतों में लगातार वृद्धि, कम मेंटेनेंस खर्च, पर्यावरण संरक्षण के प्रति बढ़ती जागरूकता और सरकारी प्रोत्साहन योजनाओं ने ईवी बाजार को नई रफ्तार दी है। कई कंपनियां आसान फाइनेंस, एक्सचेंज ऑफर और मुफ्त चार्जिंग जैसी सुविधाएं भी दे रही हैं, इससे ग्राहकों का आकर्षण और बढ़ गया है। पटना में तेजी से बढ़ी ईवी की मांग 80 से 100 वाहनों की प्रतीक्षा सूची चल रही है अभी विभिन्न कंपनियों के शोरूम में 40 से 50 चारपहिया वाहन की रोज हो रही बिक्री ईंधन की कीमत बढ़ने का प्रभाव बिहार की राजधानी में हर दिन बिक रहे 60 से 70 दोपहिया इलेक्ट्रिक वाहन मांग के अनुरूप नहीं हो रही आपूर्ति, जल्द चार्ज होने वाले वाहन पहली पसंद 400 से 600 किलोमीटर रेंज वाली कारें बनी पसंद लीडर महिंद्रा के संदीप सरस ने बताया कि कंपनी की इलेक्ट्रिक कारों की कीमत 16 लाख से 32 लाख रुपये तक है। कुछ मॉडल एक बार चार्ज होने पर करीब 600 किलोमीटर तक चल रहे हैं। उन्होंने बताया कि हाई स्पीड चार्जर से वाहन 40 से 80 मिनट में पूरी तरह चार्ज हो जाते हैं। वर्तमान में प्रतिदिन 10 से 15 लोग गंभीरता से इनके बारे में जानकारी ले रहे हैं। जबकि दर्जनों बुकिंग लंबित हैं। मारूति सुजुकी की इलेक्ट्रिक कारों को लेकर भी ग्राहकों में उत्साह बढ़ा है। अलंकार मोटर्स के अशोक प्रियदर्शी ने बताया कि 61 किलोवाट बैट्री वाली कार लगभग 540 किलोमीटर तक का बैकअप दे रही है, जबकि 49 किलोवाट बैट्री वाली कार लगभग 450 किलोमीटर तक चल रही है। दोपहिया ईवी की बिक्री में आया जबरदस्त उछाल सिर्फ कार ही नहीं, इलेक्ट्रिक स्कूटर की बिक्री में भी तेज वृद्धि दर्ज की जा रही है। टीवीएस मोटर्स से जुड़े अमरजीत सिंह ने बताया कि पहले जहां प्रतिदिन मुश्किल से एक-दो इलेक्ट्रिक स्कूटर बिकते थे, वहीं अब हर दिन दर्जनों वाहन बिक रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि पर्याप्त स्टाक मिल जाए तो दो से तीन दिनों में सभी वाहन बिक जाते हैं। डीलरों का कहना है कि लोगों को अब यह समझ में आने लगा है कि इलेक्ट्रिक वाहन लंबे समय में किफायती साबित हो रहे हैं।

हेमंत सरकार की सौगातें: अबुआ दवाखाना योजना से लेकर जैविक खेती तक कई प्रस्तावों को मंजूरी

रांची झारखंड के कर्मचारियों को एक बड़ी सौगात देते हुए राज्य सरकार ने उनके महंगाई भत्ते में दो प्रतिशत की वृद्धि कर दी है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई झारखंड कैबिनेट बैठक में यह फैसला लिया गया। इस बैठक में कुल 39 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। जिनमें 'अबुआ दवाखाना' योजना की शुरुआत, नशे के कारोबार पर रोक लगाने के लिए नई पुरस्कार नीति तथा दिव्यांग और वरिष्ठ कलाकारों को मासिक आर्थिक सहायता देने जैसे कई अहम फैसले लिए गए। बैठक में कैबिनेट ने सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को सातवें वेतनमान का लाभ देते हुए डीए को 58 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत कर दिया। वहीं छठे वेतनमान में डीए को 257 प्रतिशत से बढ़ाकर 262 प्रतिशत और पांचवें वेतनमान में 474 प्रतिशत से बढ़ाकर 483 प्रतिशत कर दिया। इस फैसले से राज्य के हजारों कर्मचारी और पेंशनभोगी लाभान्वित होंगे। 'अबुआ दवाखाना' योजना को दी मंजूरी इसके अलावा राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के उद्देश्य से हेमंत सरकार ने 'अबुआ दवाखाना' योजना को भी मंजूरी दे दी। इस योजना के तहत अलग-अलग स्थानों पर नए दवाखाने खोले जाएंगे, जहां लोगों को एलोपैथी के साथ आयुर्वेद, होम्योपैथी, यूनानी और सिद्धा पद्धति से इलाज की सुविधा मिलेगी। इसके साथ ही आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की अवधि बढ़ाने का भी निर्णय लिया गया। नशीले पदार्थों की जानकारी देने पर मिलेगा इनाम कैबिनेट ने मादक पदार्थों की तस्करी और अवैध कारोबार पर रोक लगाने के लिए NDPS एक्ट के तहत नई पुरस्कार नीति लागू करने का भी फैसला किया। इसके तहत इस बारे में सूचना देने वालों को तीन हजार रुपए से लेकर दो लाख रुपए से अधिक तक का इनाम दिया जा सकेगा। बुजुर्ग व दिव्यांग कलाकारों को मासिक सहायता राशि बैठक में 60 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्ग, गंभीर रूप से बीमार और दिव्यांग कलाकारों को हर महीने चार हजार रुपए सहायता राशि देने का भी निर्णय लिया गया। योजना का लाभ उन कलाकारों को मिलेगा जिनकी मासिक आय आठ हजार रुपए से कम है। इसके अलावा बैठक में राज्य सरकार ने 1.05 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में जैविक खेती को बढ़ावा देने की योजना को भी मंजूरी दे दी। यह योजना वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक तीन चरणों में लागू होगी, जिस पर करीब 370 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। रेल लिंक लाइन निर्माण के लिए जमीन हस्तांतरण को मंजूरी इसके अलावा एक अन्य निर्णय के तहत कैबिनेट ने दुमका एयरपोर्ट से नियमित उड़ान सेवा शुरू करने के लिए भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के साथ समझौते को भी मंजूरी दे दी। साथ ही अन्य निर्णयों में खूंटी जिले में लोधमा-फिसका रेल लिंक लाइन निर्माण के लिए जमीन हस्तांतरण, मेडिकल कॉलेजों में जूनियर रेजिडेंट डॉक्टरों और इंटर्न्स की स्टाइपेंड राशि में संशोधन तथा मुख्यमंत्री पशुधन विकास योजना के तहत व्यवसायिक बकरी पालन योजना के लिए चार करोड़ रुपए की स्वीकृति भी दी गई। शराब के रिटेलर्स को दी इस बात की राहत एक अन्य फैसले में बिजनेस में ईज ऑफ डूइंग को बढ़ावा देने के लिए कैबिनेट ने पेट्रोल, डीजल और शराब के खुदरा विक्रेताओं को त्रैमासिक रिटर्न और मासिक एब्सट्रैक्ट दाखिल करने की बाध्यता से भी राहत देने का फैसला किया है। सरकार का कहना है कि इससे कारोबारियों को कागजी प्रक्रियाओं से राहत मिलेगी। बैठक में कई प्रशासनिक और विकास योजनाओं को भी मंजूरी दी गई। बगोदर-सरिया और चक्रधरपुर अनुमंडल न्यायालयों में नए पद सृजित किए जाएंगे। ITI संस्थानों के अपग्रेडेशन और पंचायतों को वित्तीय मदद देने के प्रस्ताव पर भी मुहर लगाई गई।

ग्रामीण महिलाओं ने बदली गांव की तस्वीर, जीविका दीदियां बन रहीं आत्मनिर्भरता की मिसाल

बगहा/पश्चिम चंपारण. मुख्यमंत्री रहते हुए नीतीश कुमार ने जीविका दीदियों को सशक्त बनाने के लिए एक से बढ़कर एक योजनाएं शुरू कीं। उनको आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में की गई पहल का प्रभाव अब जमीन पर दिखने लगा है। बगहा-दो प्रखंड में जीविका समूह से जुड़ीं महिलाएं सिर्फ पोशाक नहीं सिल रहीं, बल्कि अपने श्रम और हुनर से आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख रही हैं। 30 हजार सेट पोशाक तैयार करने का लक्ष्य आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों के लिए पोशाक तैयार करने का जिम्मा मिलने के बाद यहां की महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त होने के साथ सामाजिक बदलाव की वाहक भी बन रही हैं। बगहा दो प्रखंड के 370 आंगनबाड़ी केंद्रों के करीब 15 हजार बच्चों के लिए 30 हजार सेट पोशाक तैयार करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस कार्य में जीविका समूह की करीब 150 महिलाएं सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। बच्चों की जरूरत और निर्धारित मानकों के अनुसार चार, पांच और छह वर्ष आयु वर्ग के लिए पोशाक तैयार की जा रही है। लड़कों के लिए हाफ शर्ट और फुल पैंट, जबकि लड़कियों के लिए दो शर्ट और स्कर्ट तैयार किए जा रहे हैं। सिलाई और फिनिशिंग से रोजगार इस पूरी प्रक्रिया को व्यवस्थित बनाने के लिए विभाग की ओर से कपड़ों की कटिंग कर जीविका कार्यालय को उपलब्ध कराया जा रहा है, जबकि सिलाई और फिनिशिंग का कार्य महिलाएं कर रही हैं। प्रत्येक तैयार सेट पर 55 रुपये का भुगतान किया जा रहा है, जो ग्रामीण महिलाओं के लिए आय का स्थायी स्रोत बन रहा है। अब तक 13,274 सेट पोशाक तैयार की जा चुकी है। महिला सशक्तीकरण के केंद्र बने गांव दुधौरा, सेमरा, हरनाटांड़ और वाल्मीकिनगर स्थित चार सिलाई केंद्र आज महिला सशक्तीकरण के केंद्र बन चुके हैं। यहां मशीनों की आवाज केवल उत्पादन का संकेत नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता की दिशा में बढ़ते कदमों की पहचान बन गई है। जीविका दीदी सावित्री देवी का कहना है कि पहले उनकी भूमिका केवल घरेलू कार्यों तक सीमित थी, लेकिन प्रशिक्षण और रोजगार से जुड़ने के बाद उनमें आत्मविश्वास बढ़ा है। अब वे परिवार की आय बढ़ाने के साथ बच्चों की शिक्षा और घरेलू जरूरतों में आर्थिक सहयोग भी कर रही हैं। हरनाटांड़ सिलाई केंद्र की जीविका दीदी कलावती देवी इस बदलाव की प्रेरक बनकर उभरी हैं। वे महिलाओं को सिलाई का प्रशिक्षण देकर उन्हें स्वरोजगार से जोड़ रही हैं। उनके प्रयासों से कई महिलाएं कौशल सीखकर आज नियमित आय अर्जित कर रही हैं। अन्य सरकारी योजनाओं से भी जोड़ा जाएगा – बगहा-दो प्रखंड की यह पहल ग्रामीण विकास की नई दिशा दिखा रही है। जीविका समूहों को केवल स्वरोजगार तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि भविष्य में अन्य सरकारी योजनाओं से भी जोड़ा जाएगा। यदि अवसर, प्रशिक्षण और जिम्मेदारी मिले तो ग्रामीण महिलाएं रोजगार सृजन और सामाजिक बदलाव की सबसे मजबूत धुरी बन सकती हैं। – हिमांशु कुमार सैनी, बीपीएम( ब्लॉक प्रोजेक्ट मैनेजर), बगहा दो प्रखंड

किसानों को मिलेगा प्रोत्साहन: दलहन बीज पर ₹4500 तक सहायता, क्लस्टर मॉडल से खेती का विस्तार

रांची दलहन आत्मनिर्भरता मिशन (अरहर, उड़द और मसूर) को लेकर कृषि विभाग ने कार्य शुरू कर दिया है। पांच साल तक चलने वाले इस मिशन का उद्देश्य दलहन उत्पादन, उत्पादकता और किसानों की आय को बढ़ाना है। राज्य के कई जिलों को इस योजना में शामिल किया गया है। पल्स मिशन के तहत क्लस्टर-आधारित कार्य किया जाएगा, जिसमें कम से कम 10 हेक्टेयर के क्लस्टर बनाए जाएंगे। झारखंड के चिह्नित जिलों में अरहर, उड़द, मसूर, चना और अन्य दलहनों के उत्पादन पर जोर दिया जाएगा। सरकार की ओर से दलहन बीज उत्पादक किसानों को प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। अरहर के लिए 4.5 हजार प्रति क्विंटल, उड़द और मसूर के लिए तीन हजार प्रति क्विंटल प्रोत्साहन राशि दी जानी है। यहां से मिले प्रमाणित बीजों को किसानों को दिया जाएगा, ताकि उत्पादन क्षेत्र को बढ़ाया जा सके। राज्य में लगभग 12 लाख हेक्टेयर तक दलहन की खेती किए जाने की संभावना है। झारखंड के इन जिलों में होगा मिशन का क्रियान्वयन झारखंड में 22 जिलों को दलहन उत्पादन के लिए चिह्नित किया गया है।  अरहर: बोकारो, चतरा, देवघर, धनबाद, गिरिडीह, गुमला, हजारीबाग, जामताड़ा, रांची, साहिबगंज, पलामू, गढ़वा। उड़द : गोड्डा, लोहरदगा, बोकारो, चतरा, देवघर, धनबाद, दुमका, रांची, पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम, सरायकेला, लातेहार। मसूर: बोकारो, देवघर, दुमका, गढ़वा, गोड्डा, गुमला, कोडरमा, सिमडेगा, साहिबगंज, रांची। चना : सरायकेला-खरसावां, सिमडेगा, चतरा, गुमला, लातेहार, लोहरदगा। अन्य दलहन: रांची, लातेहार, गुमला, खूंटी, रामगढ़, देवघर, कोडरमा, गिरिडीह। आठ लाख टन होता है दलहन का उत्पादन राज्य में अभी आठ लाख टन दलहन का उत्पादन होता है, जिसमें दो लाख टन अरहर और दो लाख टन चना का उत्पादन होता है। चार लाख टन में उरद, मूंग, मटर सहित अन्य दलहन का उत्पादन होता है। राज्य में दलहन की उत्पादकता विश्व में सबसे ज्यादा है। यहां 1069 किलो प्रति हेक्टेयर उत्पादन होता है। जबकि राष्ट्रीय औसत 881 किलो प्रति हेक्टेयर उत्पादन है। अगले चार वर्षों तक अरहर, उड़द और मसूर की प्रतिशत खरीद सरकार करेगी। 5.7 लाख हेक्टेयर परती खेत में होगा उत्पादन झारखंड में 5.75 लाख हेक्टेयर परती भूमि का उपयोग दलहन उत्पादन के लिए किया जाएगा। रबी सीजन में उड़द, मसूर और चना आसानी से उगाए जा सकते हैं। अरहर की खेती को बढ़ावा देने के लिए राज्य के 12 से अधिक जिलों को कवर किया गया है। राज्य में धान की खेती के बाद किसान अपने खेत को परती छोड़ देते हैं, लेकिन इस मिशन के तहत उन खेतों में दलहन की फसल लगाने के लिए किसानों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। दलहन के खेती के लिए किसानों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस में छोटे एवं सीमांत किसानों को प्राथमिकता दी जाएगी। एक किसान अधिकतम पांच हेक्टेयर तक ही प्रोत्साहन राशि की सहायता ले सकता है जो किसानों के बैंक खाते में भेजे जाएंगे। राज्य में खेती की स्थिति राज्य लगभग 25 लाख हेक्टेयर भूमि पर खेती की जाती है।     धान : लगभग 16–18 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खेती     दलहन : लगभग आठ लाख हेक्टेयर (दोनों सीजन में)     तिलहन : लगभग 1.5–2 लाख हेक्टेयर     श्रीअन्न : लगभग एक लाख हेक्टेयर से कम क्षेत्र में खेती होती है, जिसमें रागी, कोदो, बाजरा आदि शामिल हैं। झारखंड देश में दलहन के उत्पादन में सातवां स्थान रखता है। यहां पर दलहन की उत्पादकता सबसे ज्यादा है। अच्छे और प्रमाणित बीज से राज्य में दलहन के उत्पादन को बढ़ाया जा सकता है। -प्रदीप कुमार हजारी, पूर्व विशेष सचिव सह पूर्व सलाहकार, कृषि विभाग  

गर्मी की छुट्टियों में भीड़ कम करने के लिए रेलवे का बड़ा फैसला, स्पेशल ट्रेनों का संचालन शुरू

पटना गर्मी की छुट्टियों के दौरान यात्रियों की अतिरिक्त भीड़ के मद्देनजर नई दिल्ली और हावड़ा के बीच दो जोड़ी स्पेशल ट्रेन चलाने का निर्णय लिया गया है। इनका परिचालन पटना के रास्ते किया जाएगा। इससे बिहार से दिल्ली और हावड़ा (कोलकाता) जाने वाले यात्रियों को सुविधा मिलेगी। गर्मी की छुट्टियों में इस रूट की ट्रेनों में अक्सर भीड़ देखी जा रही है, जिसके चलते रेलवे द्वारा स्पेशल ट्रेनें चलाई जा रही हैं। पूर्व मध्य रेलवे मुख्य जनसंपर्क अधिकारी सरस्वती चंद्र ने बुधवार को कहा कि गाड़ी सं. 04048 नई दिल्ली-हावड़ा स्पेशल नई दिल्ली से 28 मई को शाम 6.15 बजे खुलकर अगले दिन 10.30 बजे सुबह डीडीयू, 11.40 बजे बक्सर, 12.25 बजे आरा, दोपहर 01.25 बजे पटना, 02.13 बजे बख्तियारपुर, 03.43 बजे किऊल और 04.55 बजे झाझा सहित अन्य स्टेशनों पर रुकते हुए रात 11.40 बजे हावड़ा पहुंचेगी। वापसी में गाड़ी सं. 04047 हावड़ा-नई दिल्ली स्पेशल 30 मई को रात 1.40 बजे हावड़ा से खुलकर सुबह 8.45 बजे झाझा, 9.33 बजे किऊल, 10.38 बजे बख्तियारपुर, 11.40 बजे पटना, दोपहर 12.24 बजे आरा, 01.10 बजे बक्सर, 03.05 बजे डीडीयू सहित अन्य स्टेशनों पर रुकते हुए अगले दिन सुबह 8.20 बजे नई दिल्ली पहुंचेगी। वहीं, गाड़ी सं. 04050 नई दिल्ली-हावड़ा स्पेशल नई दिल्ली से 30 मई को शाम 6.15 बजे खुलकर अगले दिन सुबह 10.30 बजे डीडीयू, 11.40 बजे बक्सर, 12.25 बजे आरा, दोपहर 1.25 बजे पटना, 2.13 बजे बख्तियारपुर, 3.43 बजे किउल एवं 4.55 बजे झाझा सहित अन्य स्टेशनों पर रुकते हुए रात 11.40 बजे हावड़ा पहुंचेगी। वापसी में गाड़ी सं. 04049 हावड़ा-नई दिल्ली स्पेशल 01 जून को रात 1.40 बजे हावड़ा से खुलकर सुबह 8.45 बजे झाझा, 9.33 बजे किउल, 10.38 बजे बख्तियारपुर, 11.40 बजे पटना, 12.24 बजे आरा, दोपहर 1.10 बजे बक्सर, 3.05 बजे डीडीयू सहित अन्य स्टेशनों पर रुकते हुए अगले दिन सुबह 8.20 बजे नई दिल्ली पहुंचेगी।

सम्राट सरकार का सख्त वार: रिश्वत और जमीन घोटाले में कई CO पर एक्शन

 पटना बिहार की सम्राट चौधरी सरकार ने भ्रष्टाचार और लापरवाही के आरोप अंचलाधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने काम में भ्रष्टाचार, लापरवाही और अनियमितता बरतने वाले 14 अंचलाधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की है। इसके तहत इन पर आरोप पत्र गठित किया गया है। साथ ही इनके वेतन वृद्धि पर भी रोक लगा दी गई है। राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने कहा कि विभाग में भ्रष्टाचार और अनियमित्ता पर जीरो टॉलरेंस की नीति जारी रहेगी। भ्रष्ट पदाधिकारी ठीक हो जाएं अन्यथा आगे भी कार्रवाई के लिए तैयार रहें। रिश्वत लेते गिरफ्तार पत्थरघट के पूर्व सीओ राकेश कुमार पर आरोप पत्र गठित करने का निर्णय लिया गया। पाटलिपुत्र के सीओ अनुज कुमार के एक वेतन वृद्धि पर रोक लगा दी गई है। मधेपुरा के घैलाढ़ सीओ रहे चंदन कुमार पर आरोप पत्र गठित किया गया है। ऑनलाइन जमाबंदी पंजी में बिना साक्ष्य रकबा जोड़ने के आरोप में बैकुंठपुर के सीओ पंकज कुमार पर आरोप पत्र गठित किया गया है। गलत ढंग से जमाबंदी कायम करने पर गुरारू के सीओ रहे संजीव कुमार त्रिवेदी की दो वेतन वृद्धि रोक दी गई है। इसके साथ बालू के अवैध खनन मामले में पालीगंज के सीओ रहे राकेश कुमार की एक वेतन वृद्धि रोक दी गई है। सुपौल की सीओ रहीं बुच्ची कुमारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई चलेगी। गोपालपुर की सीओ रहे राजकिशोर शर्मा का 10 प्रतिशत पेंशन कटौती पांच वर्षों तक होगी। इधर गोपालगंज सदर के सीओ रजत कुमार वर्णवाल ने दाखिल-खारिज में एकरूपता नहीं रखी। इस कारण इन पर आरोप पत्र गठित किया गया है। एकमा के सीओ रहे अमलेश कुमार अनधिकृत रूप से अनुपस्थित रहे। इन पर आरोप पत्र गठित हुआ है। चंडी की सीओ रहीं कुमारी आंचल ने अपील वाद के आदेश पर अमल नहीं किया। इन पर आरोप पत्र गठित हुआ है। विभाग की ओर से लिए गए एरक्शन में बैरिया के सीओ रहे अनिल कुमार ने बीसी को ईबीसी में दिखाया तो इन पर आरोप पत्र गठित किया गया। साहेबपुर कमाल के सीओ रहे सतीश कुमार सिंह ने बाढ़ राहत की राशि में अनियमितता बरती। मुजफ्फरपुर जिले के कांटी की सीओ रहीं रिषिका को सस्पेंड किया गया था। उनके निलंबन को सरकार की स्वीकृति मिल गई है। रिषिका पर सरकारी जमीन एक खास व्यक्ति के नाम से दाखिल खारिज कर देने का आरोप लगा। डीएम के स्तर पर जांच के बाद विभाग ने यह कार्रवाई की।

सम्राट कैबिनेट की नई भूमि नीति मंजूर, किसानों को बाजार दर से कई गुना ज्यादा भुगतान

पटना बिहार के लोगों को जमीन अधिग्रहण में अब और ज्यादा मुआवजा मिलेगा। भूमि अधिग्रहण से संबंधित नई नीति को सम्राट कैबिनेट से मंजूरी मिल गई है। इसके तहत राज्य सरकार अगर आपकी जमीन लेगी तो अब 10 फीसदी अतिरिक्त शुल्क प्रोत्साहन राशि के रूप में देगी। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। इस मीटिंग में कुल 27 प्रस्तावों पर मुहर लगाई गई। बैठक के बाद विभाग के अपर मुख्य सचिव अरविंद कुमार चौधरी ने इस बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सम्राट कैबिनेट ने बिहार रैयती भूमि क्रय नीति, 2026 को मंजूरी दी है। लोकहित की परियोजनाओं के लिए आपसी सहमति के आधार पर भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को सरल बनाने के उद्देश्य से यह नीति लाई गई है। इसके तहत शहरी क्षेत्रों में जमीन अधिग्रहण के दौरान भूमि का मूल्य बाजार मूल्य अथवा सर्किल दर (एमवीआर), जो भी अधिक होगा, उसके दोगुने के आधार पर मुआवजा निर्धारित किया जाएगा। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में यह दाम बाजार मूल्य अथवा सर्किल दर, जो भी अधिक होगी, उसके चार गुना के बराबर होगा। इसके अतिरिक्त 10 प्रतिशत राशि प्रोत्साहन के रूप में दी जाएगी। सरकार द्वारा खरीदी जाने वाली जमीन पर स्टांप और पंजीयन शुल्क भी नहीं लगेगा। 11 नई सेटेलाइट टाउनशिप परियोजना में होगी आसानी बिहार के 11 प्रमुख शहरों के आसपास नई सेटेलाइट टाउनशिप विकसित की जा रही है। चिह्नित क्षेत्रों में जमीन की खरीद-बिक्री पर फिलहाल रोक लगाई गई है। माना जा रहा है कि इन टाउनशिप को विकसित करने के लिए जमीन का अधिग्रहण नई नीति के आधार पर किया जाएगा। पिछले दिनों राज्य सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया था कि किसी भी रैयत (जमीन मालिक) का नुकसान नहीं होने दिया जाएगा। पटना, मुजफ्फरपुर, भागलपुर, पूर्णिया, दरभंगा, छपरा, सोनपुर समेत 11 शहरों में विकसित होने वाली सेटेलाइट टाउनशिप के अधिकतर चिह्नित क्षेत्र ग्रामीण इलाकों में हैं। ऐसे में सम्राट सरकार की नई नीति का फायदा किसानों को मिलेगा। राज्य सरकार की ओर से पूर्व में स्पष्ट किया गया था कि नई टाउनशिप में जमीन मालिकों को भी हिस्सेदारी दी जाएगी। अगर जो रैयत हिस्सेदारी नहीं चाहते, उन्हें बाजार मूल्य से कहीं ज्यादा मुआवजा दिया जाएगा। इसी क्रम में नई नीति लाई गई है। इसके अलावा विभिन्न परियोजनाओं को लागू करने में भी सरकार को आसानी होगी। 10 प्रतिशत प्रोत्साहन राशि के जरिए प्रशासनिक अधिकारी को जमीन मालिकों को तैयार भूमि अधिग्रहण के लिए और सहजता से तैयार कर सकेंगे।