samacharsecretary.com

पटना में गैस संकट का असर, लिट्टी-चाय से लेकर समोसा तक हुआ महंगा

 पटना व्यावसायिक एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमत में 994 रुपये की भारी बढ़ोतरी का असर अब राजधानी के बाजार में साफ दिखने लगा है। होटल-रेस्टोरेंट से लेकर चाय-नाश्ते की दुकानों और स्ट्रीट फूड तक, हर जगह लागत बढ़ने का दबाव महसूस किया जा रहा है। स्थिति यह है कि लिट्टी, चाय एवं समोसा के कीमत भी बढ़े है। गैस आपूर्ति में कमी और कीमतों में उछाल ने कारोबारियों को वैकल्पिक ईंधन कोयला और लकड़ी की ओर धकेल दिया है, इससे खान-पान की कीमतों में बढ़ोतरी होने लगे है। स्ट्रीट फूड की कीमतों में पांच से 10 रुपये तक बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है। 40-45 रुपये मिलने वाला एग राल 50-60 रुपये, 12 रुपये का समोसा 15-18 रुपये मिलने लगा है। 10 रुपये ग्लास वाली चाय की कीमत 12 से 15 रुपये तक पहुंच गई है। बाजार में मार्च के पहले सप्ताह से ही व्यावसायिक सिलेंडर की आपूर्ति प्रभावित है। पहले जहां शहर में हर दिन करीब पांच हजार सिलेंडर आपूर्ति दिए जाते थे, यह आंकड़ा तीन हजार के पास पहुंची है। अभी लग्न या कार्यक्रम को लेकर कार्ड के साथ आवेदन देने पड़ रहे है। कमर्शियल सिलिंडर की आपूर्ति में करीब 30 प्रतिशत की कमी के चलते होटल-रेस्टोरेंट को लकड़ी-कोयले की भट्टी या इंडक्शन जैसे विकल्प अपनाने पड़ रहे हैं। लेकिन यह विकल्प भी सस्ता नहीं पड़ रहा। कोयला का दाम 20 रुपये बढ़ा कोयले की कीमतों में अचानक उछाल आया है। पहले 18 से 20 रुपये किलो मिलने वाला कोयला अब 30 से 40 रुपये किलो बिक रहा है, जबकि अच्छी गुणवत्ता वाले कोयले के दाम इससे भी ज्यादा हैं। लकड़ी के कोयले की कीमत 40 से 50 रुपये किलो तक पहुंच चुकी है। राजीवनगर के दुकानदार संजय ने बताया कि अब कोयला का आर्डर भी पहले देना पड़ रहा है। इसके बाद थोक व्यापारियों की ओर से आपूर्ति किया जाता है। कैटरिंग कारोबारी जैनेंद्र सिंह बताते है कि पहले कोयला वाला चूल्हा का उपयोग शाही या अन्य कार्यक्रम में नहीं होते थे, लेकिन इसकी उपयोगिता अब बढ़ी है। इसके दाम भी बढ़ने से आयोजन का बजट भी बढ़ने लगा है। एक सप्ताह में कीमतों को तेजी से दिखेगी वृद्धि बिहार राज्य व्यावसायिक संघ के अध्यक्ष अजय गुप्ता ने बताया कि कमर्शियल गैस में करीब 30 प्रतिशत की बढ़ोतरी बीते वर्षों की सबसे बड़ी बढ़ोतरी है। इसका सीधा असर खान-पान की वस्तुओं पर पड़ेगा। आने वाले एक सप्ताह में खाद्य सामग्री की कीमतों में और तेजी देखने को मिलेगा। खाने-पीने की चीजों की कीमतें कम से कम 10 से 12 प्रतिशत तक बढ़ सकती हैं। यह इजाफा खासकर मिठाइयों, रेस्टोरेंट के मेन्यू, हास्टल मेस और स्ट्रीट फूड हर जगह कीमतों में इजाफा दिख सकता है। हालांकि कई कारोबारियों ने फिलहाल कीमतें स्थिर रखी हैं, लेकिन वे भी मानते हैं कि लंबे समय तक ऐसा संभव नहीं होगा। इसका असर सभी सेक्टर पर देखने को मिलेगा।

रांची समेत कई जिलों में उपभोक्ता फोरम खाली, ऑनलाइन सुनवाई बनी सहारा

 रांची  झारखंड में अपने अधिकारों के लिए लड़ रहे उपभोक्ताओं को न्याय मिलने में लंबी प्रतीक्षा करनी पड़ रही है। वर्तमान में झारखंड उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में करीब छह हजार मामले लंबित हैं। विडंबना यह है कि पूरे राज्य के मामलों के निष्पादन का जिम्मा केवल अध्यक्ष बसंत कुमार गोस्वामी के कंधों पर है। रांची, देवघर, बोकारो और धनबाद जैसे महत्वपूर्ण जिलों के फोरम में सदस्यों के पद लंबे समय से खाली पड़े हैं। क्यों अटकी हैं नियुक्तियां? जानकारी के अनुसार, रांची फोरम में जनवरी 2025 से ही एक भी अधिकारी मौजूद नहीं है। हालांकि इन पदों पर नियुक्ति राज्य सरकार को करनी है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को नया कानून बनाने का निर्देश दिया है। ऑनलाइन सुनवाई बना सहारा कोर्ट के आदेशानुसार, नए नियमों के गठन के बाद ही नियुक्तियां संभव हो पाएंगी, जिसके कारण वर्तमान में सरकार के हाथ बंधे हुए हैं। पदों के अभाव और बढ़ते बोझ के बीच अध्यक्ष बसंत कुमार गोस्वामी ऑनलाइन माध्यम से मामलों का निपटारा कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि आयोग के पास सबसे अधिक मामले गाड़ी इंश्योरेंस, लाइफ इंश्योरेंस और बैंक लोन से जुड़े आते हैं। उपभोक्ताओं को त्वरित न्याय देने के लिए ऑनलाइन सुनवाई को प्राथमिकता दी जा रही है। घर बैठे ऐसे दर्ज करें शिकायत उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए आयोग ने हर जिले को ऑनलाइन प्रणाली से जोड़ दिया है। अब शिकायतकर्ता को कार्यालय के चक्कर काटने की आवश्यकता नहीं है। शिकायत दर्ज करने के लिए तीन प्रमुख विकल्प उपलब्ध हैं:         CP Grams (सीओपी ग्राम): सबसे पहले यहां शिकायत दर्ज करनी चाहिए।         हेल्पलाइन नंबर 1915: यदि पहले स्तर पर समाधान न मिले तो इस नंबर पर संपर्क करें।         ई-जागृति पोर्टल: उपभोक्ता सीधे इस पोर्टल के माध्यम से भी अपनी कानूनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। हालिया सफलताएं: उपभोक्ताओं को मिला हक संसाधनों की कमी के बावजूद आयोग ने इस वर्ष कई महत्वपूर्ण फैसले सुनाए हैं:         हजरत अली मामला: दुर्घटना के एक मामले में बीमा कंपनी की आनाकानी के बाद आयोग ने पीड़ित को 2 लाख 96 हजार रुपये का भुगतान सुनिश्चित कराया।         महावीर महतो केस: उपभोक्ता को 9 लाख रुपये का हर्जाना दिलवाया गया।         मोहन कुमार केस: ऑटो चोरी होने के बाद बीमा राशि नहीं मिल रही थी, आयोग ने सुनवाई कर 3 लाख रुपये से अधिक की राशि दिलवाई।     सीमित साधनों में काम करना पड़ रहा है। रांची जिला उपभोक्ता फोरम में कोई अधिकारी नहीं है। हमारे यहां भी सदस्य नहीं है। अकेले ही काम करना पड़ रहा है। इसलिए, हमने आनलाइन सेवा शुरू की और लोग इसका लाभ उठा रहे हैं -बसंत कुमार गोस्वामी, अध्यक्ष, झारखंड उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग  

रांची प्रशासन का बड़ा फैसला, बोटिंग के दौरान लाइफ जैकेट अनिवार्य और सुरक्षा जांच सख्त

 रांची  मध्यप्रदेश के जबलपुर में हुए क्रूज हादसे (jabalpur cruise accident) के बाद झारखंड में प्रशासन सतर्क हो गया है। रांची जिले के सभी डैम एवं जलाशयों में बोटिंग के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए जिला दंडाधिकारी सह उपायुक्त मंजूनाथ भजन्त्री की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक का मुख्य उद्देश्य बोटिंग गतिविधियों के दौरान होने वाली संभावित दुर्घटनाओं को रोकना और पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना था। बैठक में जिला स्तर पर वाटर ट्रांसपोर्ट एक्शन ग्रुप गठित करने का निर्देश दिया गया, ताकि किसी भी आपात स्थिति में त्वरित और प्रभावी प्रतिक्रिया दी जा सके। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया गया कि सुरक्षा मानकों से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। बैठक में कई अहम निर्णय लिए गए। सभी पर्यटकों और यात्रियों के लिए लाइफ जैकेट पहनना अनिवार्य किया गया है। बिना लाइफ जैकेट के बोटिंग कराने पर संबंधित संचालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा, मौसम की स्थिति पर विशेष नजर रखने और खराब मौसम में बोटिंग पूरी तरह बंद रखने के निर्देश दिए गए हैं। सभी नौकाओं के लिए वैध फिटनेस प्रमाण-पत्र अनिवार्य किया गया है। बिना फिटनेस सर्टिफिकेट वाली नावों को संचालन की अनुमति नहीं मिलेगी। साथ ही, सभी बोटिंग स्थलों पर हेल्पलाइन नंबर के साथ सूचना पट्ट लगाने के निर्देश भी दिए गए हैं। प्रशासन ने बोटिंग स्थलों पर नशापान पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया है। नियमों का उल्लंघन करने वाले संचालकों पर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा, बोट को निर्धारित गति सीमा में चलाने और किसी भी प्रकार की स्टंटबाजी या जोखिम भरे संचालन पर सख्त रोक लगाई गई है। मानकों का होगा कड़ाई से पालन जिला दंडाधिकारी भजन्त्री ने कहा कि पर्यटकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ-साथ सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाएगा। प्रशासन ने खासकर बच्चों के साथ यात्रा करने वाले परिवारों से अपील की है कि वे बोटिंग के दौरान बच्चों को सही तरीके से लाइफ जैकेट पहनाएं और उसकी बेल्ट अच्छी तरह कसकर बांधें। बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी अभिभावकों की होगी। बैठक में पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) गौरव गोस्वामी, अनुमंडल पदाधिकारी कुमार रजत, जिला परिवहन पदाधिकारी अखिलेश कुमार, जिला शिक्षा अधीक्षक बादल राज, जिला खेल पदाधिकारी शिवेंद्र सिंह सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे। जिला प्रशासन ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि बैठक में लिए गए निर्णयों का सख्ती से पालन सुनिश्चित कराया जाए, ताकि बोटिंग गतिविधियां सुरक्षित और व्यवस्थित ढंग से संचालित हो सकें।

एग्जाम फ्रॉड पर बड़ी कार्रवाई: NEET सॉल्वर गिरोह पकड़ा, MBBS छात्र सहित 3 अरेस्ट

नालंदा. नीट परीक्षा में सॉल्वर बैठाने वाले एक अंतरजिला गिरोह का नालंदा पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने एमबीबीएस के एक छात्र सहित तीन जालसाजों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई नीट परीक्षा के मद्देनजर चलाए जा रहे विशेष ‘रोको-टोको’ एवं वाहन चेकिंग अभियान के दौरान की गई। राजगीर डीएसपी सुनील कुमार सिंह ने बताया कि 2 मई की रात करीब 1:45 बजे पावापुरी मोड़ के पास वाहन चेकिंग के दौरान दो संदिग्ध गाड़ियां पुलिस को देखकर भागने लगीं। घेराबंदी कर दोनों वाहनों को पकड़ा गया। स्कॉर्पियो चला रहे व्यक्ति की पहचान मुजफ्फरपुर निवासी अवधेश कुमार (31) के रूप में हुई, जो विम्स कॉलेज में एमबीबीएस द्वितीय सत्र का छात्र है। कैश और डिजिटल सबूत बरामद तलाशी के दौरान स्कॉर्पियो के डैशबोर्ड के नीचे से 2 लाख 95 हजार रुपये नकद बरामद किए गए। इसके अलावा तीन मोबाइल फोन और दो लग्जरी गाड़ियां (स्कॉर्पियो व ब्रेजा) भी जब्त की गईं। शुरू में आरोपियों ने पैसों के बारे में संतोषजनक जवाब नहीं दिया, लेकिन मोबाइल जांच में बड़ा खुलासा हुआ। फोन से नीट, एईओ और बीएसएनएल समेत विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के एडमिट कार्ड, अभ्यर्थियों के साथ चैट और लेन-देन के ठोस सबूत मिले। गिरफ्तार आरोपित और मास्टरमाइंड गिरफ्तार आरोपियों में मुजफ्फरपुर के अवधेश कुमार, मोतिहारी के अमन कुमार सिंह और मुजफ्फरपुर के ही पंकज कुमार साह शामिल हैं। पूछताछ में खुलासा हुआ कि गिरोह का मास्टरमाइंड उज्जवल उर्फ राजा बाबू है, जो पावापुरी मेडिकल कॉलेज के 2022 बैच का छात्र है। डीएसपी के अनुसार उज्जवल पर पहले भी सीबीआई के केस दर्ज हैं और उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। बड़ी साजिश नाकाम पुलिस की मुस्तैदी के कारण सॉल्वर परीक्षा केंद्रों तक नहीं पहुंच सके, जिससे एक बड़ी साजिश विफल हो गई। अब पुलिस उन अभ्यर्थियों और अभिभावकों की भी जांच कर रही है, जिनके एडमिट कार्ड और कॉल डिटेल्स आरोपियों के मोबाइल से मिले हैं। जांच तेज, केस दर्ज इस मामले में पावापुरी थाना में कांड दर्ज कर लिया गया है और अनुसंधान तेज कर दिया गया है। पूरी कार्रवाई राजगीर एसडीपीओ सुनील कुमार सिंह के नेतृत्व में गिरियक, राजगीर, पावापुरी और कतरीसराय थानों की संयुक्त टीम ने की। पहले भी जुड़ चुका है नालंदा का नाम गौरतलब है कि नीट-यूजी 2024 पेपर लीक मामले में भी नालंदा के संजीव मुखिया का नाम सामने आ चुका है। वह कई प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक मामलों में आरोपी रहा और जेल भी जा चुका है।

वन विभाग की नई योजना, मानसून से पहले ही शुरू होगा पौधरोपण अभियान

 रांची  झारखंड में वन क्षेत्र के अलावा औषधीय पार्क, सामुदायिक स्थल पर लगाने के लिए तीन लाख पौधे तैयार हैं। वन विभाग आमतौर पर जुलाई से पौधरोपण प्रारंभ करता है, लेकिन अप्रैल के आखिरी सप्ताह से राज्य में बारिश हो रही है। विभाग की नर्सरी में तैयार पौधों को औषधीय पार्क, स्कूल, आवासीय सामुदायिक भूखंड पर लगाया जाएगा। ये पौधे अनुदानित दर पर लोगों को दिए जाएंगे। इसके अलावा वन भूमि पर इस वर्ष दस लाख से अधिक पौधे लगाने की योजना है। कृषि विश्वविद्यालय स्थित वानिकी संकाय के विशेषज्ञ ज्ञानरंजन पांडेय ने बताया कि लोहरदगा से लेकर डाल्टेनगंज तक पिछले दस सालों में लाखों आंवला के पेड़ लगाए गए हैं आयुर्वेद से जुड़ी कंपनियों ने झारखंड में उत्पादित आंवला को उच्च गुणवत्ता वाला माना है। इस वर्ष आंवला और जामुन के पौधे पार्कों और सामुदायिक स्थलों पर लगाए जाएंगे। राज्य में छह औषधीय पार्क बनाकर उनमें वेलनेस उत्पाद में प्रयुक्त होने वाले फलदार पौधे लगाए जाएंगे। पांच साल पहले लगे पौधों की उत्तरजीविता बढ़ी राज्य के वन क्षेत्र में पांच साल पहले जो पौधे लगाए गए थे, उनमें से 80 प्रतिशत अब वृक्ष का स्वरूप ले रहे हैं। केंद्रीय वन उत्पादकता संस्थान ने राज्य में पौधों के संरक्षण की उत्तम श्रेणी की रिपोर्ट दी है। केंद्रीय संस्थान पांच वर्ष में पौधों की वृद्धि, उनके आसपास की हरियाली और सुरक्षा का आकलन कर रिपोर्ट देती है। पिछले दो सालों से हुई बारिश ने भी पौधों की वृद्धि में योगदान दिया है। 130 एकड़ नई भूमि पौधरोपण के लिए चिह्नित वन एवं पर्यावरण विभाग ने 130 एकड़ नई वन भूमि में मानसून के दौरान पौधरोपण की योजना बनाई है। इनमें सामाजिक वानिकी और क्षतिपूर्ति वानिकी योजना के तहत पौधे लगाए जाएंगे। विभाग ने इस वर्ष अतिक्रमण मुक्त की गई भूमि पर भी पौधरोपण की तैयारी की है।  

बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सोरेन से बुलाया विशेष सत्र, झामुमो ने किया पलटवार

 रांची  नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से नारी शक्ति वंदन पर विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की मांग की है। उन्होंने रविवार को प्रदेश कार्यालय में प्रेस वार्ता कर कहा कि इस संबंध में मुख्यमंत्री से मिलने के लिए समय मांगा गया था जो नहीं मिला। मरांडी ने कहा कि पार्टी के महामंत्री अमर कुमार बाउरी द्वारा 30 अप्रैल से ही मुख्यमंत्री से मिलने का समय लेने का प्रयास किया जा रहा था। समय नहीं मिलने पर उनको एक पत्र लिखकर ही सारी बातों से अवगत करा दिया जा रहा है। केंद्र सरकार ने 16, 17, 18 अप्रैल को नारी शक्ति वंदन अधिनियम संसद में लाया था। इससे देश की आधी आबादी के लिए लोकसभा और विधानसभा में 33% सीटें उनके लिए आरक्षित होगी। झारखंड में 14 लोकसभा की सीटें बढ़कर 21 हो जाती। जिसमें सात महिलाओं के लिए रिजर्व होती। इसी प्रकार विधानसभा की सीटें 81 से बढ़कर 121 हो जाती। झारखंड मुक्ति मोर्चा ने इसके विरोध में मतदान किया। इसलिए पार्टी ने तय किया था कि मुख्यमंत्री से मिलकर उनसे पार्टी आग्रह करेगी कि इस मुद्दे पर राज्यपाल की सहमति से एक विशेष सत्र बुलाएं और सदन से पारित कराकर केंद्र को प्रस्ताव भेजें। झामुमो का पलटवार मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात का समय नहीं मिलने के नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी के आरोप पर झारखंड मुक्ति मोर्चा ने पलटवार किया है। महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि मुख्यमंत्री के पास निरर्थक सवालों के लिए समय नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि कोई सकारात्मक एजेंडा हो तो सरकार संवाद के लिए हमेशा तैयार है, लेकिन केवल राजनीतिक आरोपों के आधार पर मुलाकात की अपेक्षा उचित नहीं है। भट्टाचार्य ने नगर निकाय चुनावों का उदाहरण देते हुए कहा कि राज्य सरकार ने 33 प्रतिशत आरक्षण लागू कर ट्रिपल टेस्ट की प्रक्रिया पूरी की है। इसके बावजूद विपक्ष महिलाओं के नाम पर राजनीति कर उन्हें गुमराह कर रहा है।  

ग्रामीण विकास में बड़ा बदलाव, रेरा की तर्ज पर बनेगा नया प्राधिकरण

पटना बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में भी अब बहुमंजिली इमारत या मकान के निर्माण के पूर्व इसका नक्शा पास कराना अनिवार्य होगा। जल्द ही यह प्रावधान लागू हो सकता है। पंचायती राज विभाग ने इसके लिए नियमावली का प्रारूप तैयार कर लिया है। इस पर विधि विभाग और उच्चस्तरीय कमेटी से मंजूरी ली जाएगी। नियमावली के प्रारूप को राज्य मंत्रिपरिषद से मंजूरी मिलने के बाद विधानमंडल से पारित कराया जाएगा। शहरों से सटे ग्रामीण इलाकों में बड़ी संख्या में अपार्टमेंट निर्माण को देखते हुए यह तैयारी की जा रही है। नियमावली में रेरा (रियल एस्टेट विनिमय और विकास अधिनियम) की तर्ज पर प्राधिकार गठित करने का प्रावधान है, जो ग्रामीण क्षेत्रों में बनने वाली बहुमंजिली इमारत के नक्शे को स्वीकृति देगा। यह बिल्डरों को परियोजना रजिस्टर करने (500 वर्गमीटर से अधिक) पर खरीदार की राशि का 70 फीसदी अलग खाते में रखने और समय पर कब्जा देने के लिए बाध्य करेगा। जमा कराए गए 70 फीसदी कोष का भी इस्तेमाल सिर्फ उसी परियोजना के निर्माण में किया जा सकेगा। खरीदारों को समय पर कब्जा नहीं देने की स्थिति या देरी होने पर उन्हें ब्याज सहित हर्जाना देना पड़ सकता है। प्राधिकार में बिल्डर को प्रोजेक्ट का लेआउट, योजना, सरकारी मंजूरी और काम की प्रगति की जानकारी साझा करनी होगी। इसमें निर्माण का संपूर्ण एरिया (बिल्डप एरिया) और वास्तविक जगह (कॉरपेट एरिया) भी स्पष्ट रहेगा, ताकि बिल्डर धोखे से खरीदारों से ज्यादा कीमत नहीं वसूल सकें। ग्रामीण क्षेत्रों में बहुमंजिला भवन में पांच साल में दोषपूर्ण निर्माण या संरचनात्मक कमी मिलने पर बिल्डर को उसे मुफ्त में ठीक करना होगा। खरीदार संबंधित संस्था के पास बिल्डर के खिलाफ शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

नगर विकास विभाग की नई पहल, 264 निकायों को जोड़ेगा एकीकृत ई-गवर्नेंस सिस्टम

पटना शहरी निकायों के नागरिकों को अपनी समस्या के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। उन्हें निकाय से संबंधित समस्या का समाधान अब एक क्लिक पर मिलेगा। यानी सभी नगरीय सुविधाएं एक प्लेटफार्म पर मिलेंगी। नगर विकास विभाग ने इसकी तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए पोर्टल विकसित किया जा रहा है। इसी पोर्टल पर राज्य के 264 निकायों से संबंधित कार्य होंगे। वर्तमान में होल्डिंग टैक्स को छोड़कर अन्य सभी तरह की सुविधाओं के लिए नागरिकों को निकाय कार्यालय का चक्कर काटना पड़ता है। सभी निकायों की अपनी अलग-अलग व्यवस्था है। नियमों के पालन में एकरूपता नहीं है। इसीलिए नगर विकास विभाग ने राष्ट्रीय शहरी डिजिटल मिशन के तहत ई-गवर्नेंस मॉड्यूल्स विकसित करने का निर्णय लिया है। इसका मकसद शहरी नागरिकों को सभी तरह की सेवाओं की ऑनलाइन सुविधा उपलब्ध कराना है। इसके लिए सॉफ्टवेयर विकसित किया जा रहा है। सॉफ्टवेयर विकसित होने के साथ ही सभी निकाय एक पोर्टल से जुड़ जाएंगे। उसी पोर्टल पर अलग-अलग 15 प्रकार की सेवाओं के विकल्प मौजूद होंगे। आम नागरिक अपनी जरूरत के हिसाब से विकल्प का चयन कर सकता है। संबंधित निकाय के पास उनकी समस्या भेज दी जाएगी। मुख्यालय स्तर से इसकी निगरानी की जाएगी। इससे नागरिकों की समस्या का समाधान भी सुनिश्चित होगा। इसके अलावा विकास से जुड़े कार्यों के दुहराव से भी बचा जा सकेगा।नगर विकास विभाग ने इस पर अगले पांच वर्षों में करीब 120 करोड़ रुपये खर्च करने का निर्णय लिया है। लोगों को 15 प्रकार की सुविधाएं प्राप्त होंगी शहरी नागरिकों को पंद्रह प्रकार की सेवाएं ऑनलाइन मिलेंगी। इसमें प्रोपर्टी टैक्स, जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र, व्यापार लाइसेंस, नक्शा पास कराना, किसी समस्या की शिकायत करना, किसी काम के लिए एनओसी लेना, पेयजल और सीवरेज कनेक्शन, होर्डिंग्स या विज्ञापन, अन्य कर संग्रह, साफ-सफाई और ठोस कचरा प्रबंधन से संबंधित कार्य होंगे। निकायों के लीगल, एसेट मैनेजमेंट, मैटेरियल मैनेजमेंट आदि प्रमुख कार्य शामिल हैं। कर्मचारियों को प्रशिक्षण मिलेगा सॉफ्टवेयर विकसित होने के साथ ही नगर विकास विभाग इस सेवा की शुरुआत कर देगा। इससे पहले नगर निकायों के अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। सरकार ने सात निश्चय-3 के तहत सबका सम्मान, जीवन आसान के तहत ई-गवर्नेंस को लागू कर रही है। इसके संचालन के लिए मुख्यालय स्तर पर विशेषज्ञों की एक टीम होगी।

विक्रमशिला सेतु हादसा: पुल का हिस्सा टूटा, भागलपुर-उत्तर बिहार संपर्क ठप

पटना  बिहार के भागलपुर जिले में विक्रमशिला पुल टूटने के बाद से हड़कंप मच गया है। अब सरकार ने इसपर ऐक्शन लेते हुए फिलहाल इंजीनियर को निलंबित कर दिया है। इसके अलावा बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से भी इस पुल को लेकर मदद मांगी है। रविवार की देर रात उत्तर बिहार को भागलपुर से जोड़ने वाले विक्रमशिला पुल के कुछ हिस्से टूट कर गंगा नदी में समा गए थे। इसकी वजह से भागलपुर का उत्तर बिहार से संपर्क टूट गया है। पुल निर्माण निगम के अध्यक्ष चंद्रशेखर ने बताया कि जैसे ही इस दुर्घटना की जानकारी मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को मिली, उन्होंने केन्द्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से संपर्क करके बोर्डर रोड निगम से भी पुल की मरम्मती में मदद मांगी है। रक्षा मंत्री ने उन्हें हर तरह की मदद का आश्वासन दिया है। पुल निर्माण निगम के अध्यक्ष चंद्रशेखर ने यह भी बताया कि भागलपुर विक्रमशिला पुल टूटने की जांच के लिए विशेषज्ञ की टीम भेजी गई है। साथ ही वहां के कार्यपालक अभियंता को निलंबित किया गया है। उन्होंने पटना स्थित सूचना भवन में सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि इस पुल की एक महीना पहले जांच की गई थी, जिसमें कोई मेजर फाल्ट नहीं पाया गया था। रविवार की रात अचानक पुल टूट गया है। उन्होंने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश पुल निगम के द्वारा यह पुल बनाया गया था। 2001 से इस पुल पर आवागमन चल रहा है। दक्षिण बिहार को उत्तर बिहार से जोड़ने के लिए मुंगेर के श्रीकृष्ण सिंह सेतु और खगड़िया में बने गंगा नदी पर पुल को वैकल्पिक मार्ग के रूप में इस्तेमाल करने की सलाह दी है। स्पैन दुरुस्त करने में तीन महीने लगेंगे बिहार राज्य पुल निर्माण निगम के अध्यक्ष डॉ. चंद्रशेखर सिंह ने सोमवार को सूचना भवन के सभागार में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा कि विक्रमशिला सेतु का जो स्पैन गिरा है, उसे दुरुस्त करने में तीन महीने का समय लग सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि इस साल दिसंबर तक विक्रमशिला सेतु के सामानांतर गंगा नदी पर बन रहे पुल पर वाहनों का परिचालन शुरू कर दिया जाएगा। 4.7 किलोमीटर लंबा है विक्रमशिला पुल आपको बता दें कि बिहार के भागलपुर जिले में गंगा नदी पर बने विक्रमशिला सेतु का एक हिस्सा रविवार देर रात को ध्वस्त हो गया, हालांकि इस घटना में किसी के हताहत या घायल होने की सूचना नहीं है। वरिष्ठ अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी। कुल 4.7 किलोमीटर लंबा विक्रमशिला सेतु जिले में भागलपुर और नवगछिया को जोड़ता है। भागलपुर के जिलाधिकारी नवल किशोर चौधरी ने संवाददाताओं को बताया, "रात करीब 12:50 बजे विक्रमशिला सेतु के पिलर संख्या 133 के पास दो स्लैब के बीच दरार बन गयी। इसके कुछ ही देर बाद एक बड़ा स्लैब नदी में गिर गया।" उन्होंने कहा कि किसी वाहन के स्लैब के साथ गिरने, किसी के हताहत होने या घायल होने की कोई सूचना नहीं है। जिलाधिकारी ने कहा, "जैसे ही अधिकारियों को दो स्लैब के बीच दरार बनने की सूचना मिली, उन्होंने तत्काल कार्रवाई करते हुए वहां से सभी वाहनों और लोगों को हटा दिया।"

PAI 2.0 रिपोर्ट: रोहतास की तेलकप पंचायत ने राष्ट्रीय स्तर पर बनाई खास पहचान

 पटना पंचायती राज मंत्रालय ने वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिए पंचायत उन्नति सूचकांक (PAI) 2.0 रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट में देश के 33 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की कुल 2,59,867 ग्राम पंचायतों ने भाग लिया। रिपोर्ट के अनुसार, देशभर की 3,635 ग्राम पंचायतें ‘फ्रंट रनर’ (ग्रेड-ए) श्रेणी में शामिल हुई हैं, जबकि 1,18,824 पंचायतों ने ‘उत्कृष्ट’ (ग्रेड-बी) श्रेणी में स्थान प्राप्त किया है। पंचायतों ने खासतौर पर ‘गरीबी मुक्त एवं उन्नत आजीविका’ और ‘स्वस्थ पंचायत’ थीम्स में बेहतर प्रदर्शन किया है। बिहार का प्रदर्शन बिहार के लिए यह रिपोर्ट मिश्रित लेकिन महत्वपूर्ण रही है। राज्य की दो ग्राम पंचायतों ने ग्रेड-ए (फ्रंट रनर) श्रेणी में जगह बनाई है, जबकि 771 पंचायतें ग्रेड-बी में शामिल हुई हैं। शेष पंचायतें ग्रेड-सी और ग्रेड-डी श्रेणी में रही हैं। रोहतास जिले की तेलकप ग्राम पंचायत का प्रदर्शन सबसे उल्लेखनीय रहा है। इस पंचायत ने स्थानीयकृत सतत विकास लक्ष्यों (LSDGs) से जुड़े सभी नौ थीम्स में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। राष्ट्रीय स्तर पर द्वितीय स्थान हासिल करने पर तेलकप पंचायत का चयन ‘नानाजी देशमुख सर्वोत्तम पंचायत सतत विकास पुरस्कार’ (राष्ट्रीय पंचायत पुरस्कार) के लिए किया गया है। पीएआई 2.0 क्या है? पंचायत उन्नति सूचकांक (PAI) 2.0 पंचायतों के समग्र प्रदर्शन का एक विस्तृत ‘रिपोर्ट कार्ड’ है। इसे सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) के स्थानीय संस्करण (LSDGs) के आधार पर तैयार किया जाता है। इस सूचकांक के माध्यम से पंचायतों के विकास, आधारभूत संरचना, सुशासन, सामाजिक सुरक्षा, महिला सशक्तिकरण, स्वच्छता, स्वास्थ्य और आजीविका जैसे प्रमुख क्षेत्रों में प्रदर्शन का मूल्यांकन किया जाता है। राज्य स्तर पर बेहतर प्रदर्शन करने वाली पंचायतें (थीमवार)     थीम 1 (गरीबी मुक्त एवं उन्नत आजीविका): अम्बा उतर, प्रखंड पिपराही, जिला शिवहर     थीम 2 (स्वस्थ पंचायत): कहलावा, प्रखंड नौतन, जिला सिवान     थीम 3 (बाल अनुकूल पंचायत): डुमरी भागरावा, प्रखंड पिपरासी, जिला पश्चिम चंपारण     थीम 4 (पर्याप्त जल युक्त पंचायत): पिपरासी, प्रखंड पिपरासी, जिला पश्चिम चंपारण     थीम 5 (स्वच्छ एवं हरित पंचायत): दुल्लाहपुर, प्रखंड सिमरी, जिला बक्सर     थीम 6 (आत्मनिर्भर आधारभूत संरचना): जजुआर मध्य, प्रखंड कटरा, जिला मुजफ्फरपुर     थीम 7 (सामाजिक रूप से न्यायसंगत एवं सुरक्षित): बहेरा, प्रखंड बांका, जिला बांका     थीम 8 (सुशासन युक्त पंचायत): समोहता, प्रखंड रोहतास, जिला रोहतास     थीम 9 (महिला अनुकूल पंचायत): गौरा-1, प्रखंड तेघरा, जिला बेगूसराय