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बिहार म्यूजियम की लोकप्रियता बढ़ी, 10 साल में पहली बार टूटा विज़िटर्स का रिकॉर्ड

पटना राजधानी पटना में स्थित बिहार म्यूजियम ने इस साल पर्यटकों की संख्या के मामले में एक नया रिकॉर्ड कायम किया है। म्यूजियम के उद्घाटन के बाद बीते 10 सालों में यह पहला मौका है, जब महज एक साल के भीतर 5 लाख से अधिक पर्यटकों ने यहां का भ्रमण किया है। इस उपलब्धि ने यह साबित कर दिया है कि अपनी आधुनिक सुविधाओं और बेहतरीन प्रदर्शनी के कारण यह म्यूजियम लोगों की पसंद बनता जा रहा है। पर्यटकों की इस बढ़ती संख्या से राज्य में पर्यटन को भी सकारात्मक बढ़ावा मिल रहा है। कुल आंकड़ा 7 लाख के करीब पहुंचा आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक साल में 5 लाख से अधिक आम लोगों ने टिकट लेकर बिहार म्यूजियम का दौरा किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, अगर इस 5 लाख की संख्या में वीआईपी (VIP) मेहमानों के विशेष दौरे और म्यूजियम परिसर में आयोजित होने वाले विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल होने वाले लोगों की भीड़ को भी शामिल कर लिया जाए, तो कुल पर्यटकों का यह आंकड़ा 5 लाख से 7 लाख के बीच पहुंच जाता है। यह पर्यटकों की संख्या पिछले सभी सालों के मुकाबले सबसे अधिक है। प्राचीन कलाकृतियां बनीं मुख्य आकर्षण बिहार राज्य हमेशा से ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से काफी समृद्ध रहा है। देश के अन्य राज्यों और विदेश से आने वाले पर्यटक यहां की प्राचीन संस्कृति, सभ्यता और इतिहास को करीब से समझने की इच्छा रखते हैं। बिहार म्यूजियम में बौद्ध धर्म, जैन धर्म, हिंदू धर्म और सिख धर्म से जुड़ी कई प्राचीन और दुर्लभ कलाकृतियां बड़े पैमाने पर मौजूद हैं। आधुनिक तरीके से सुरक्षित रखी गई इन ऐतिहासिक धरोहरों को देखने और अपने इतिहास को जानने के लिए ही पर्यटक इतनी बड़ी संख्या में पटना आ रहे हैं। अपर निदेशक ने बताया बड़ी उपलब्धि इस नई उपलब्धि पर बिहार म्यूजियम के अपर निदेशक अशोक कुमार सिन्हा ने खुशी जाहिर की है। उन्होंने बताया कि यह बिहार म्यूजियम के लिए एक बहुत बड़ी उपलब्धि है कि 10 सालों में पहली बार 5 लाख का आंकड़ा पार हुआ है। उन्होंने कहा कि बिहार ऐतिहासिक दृष्टिकोण से हमेशा से समृद्ध रहा है और यहां मौजूद प्राचीन कलाकृतियों को देखने के लिए बड़ी संख्या में देश-विदेश से पर्यटक आ रहे हैं। इसी का नतीजा है कि इस साल पर्यटकों का आंकड़ा 5 लाख के पार हो गया है। आधुनिक सुविधाओं ने आम लोगों की दिलचस्पी को काफी बढ़ा दिया है।

बिहार कैबिनेट विस्तार पर मंथन: सम्राट चौधरी की अमित शाह से अहम बैठक आज

पटना मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी शनिवार देर शाम दिल्ली के लिए रवाना हो गए। उनके इस दौरे को लेकर बिहार की सियासत में हलचल तेज हो गई है और मंत्रिमंडल विस्तार की अटकलें जोर पकड़ने लगी हैं। दिल्ली में अमित शाह से होगी मुलाकात दिल्ली पहुंचकर मुख्यमंत्री अमित शाह से मुलाकात करेंगे। माना जा रहा है कि इस बैठक में बिहार कैबिनेट विस्तार को लेकर अहम चर्चा हो सकती है। रवाना होने से पहले नीतीश से मुलाकात दिल्ली जाने से पहले सम्राट चौधरी ने पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से उनके सात सर्कुलर रोड स्थित आवास पर मुलाकात की। दोनों के बीच करीब आधे घंटे तक बातचीत हुई। कैबिनेट विस्तार पर बनी सहमति के संकेत सूत्रों के मुताबिक, जदयू कोटे के मंत्रियों के नाम पर इस मुलाकात में सहमति बन चुकी है। अब भाजपा कोटे के नामों पर दिल्ली में अंतिम चर्चा होने की संभावना है। दो-तीन दिनों में हो सकता है विस्तार राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि मुख्यमंत्री के पटना लौटने के बाद दो से तीन दिनों के भीतर मंत्रिमंडल विस्तार किया जा सकता है। इसको लेकर तैयारियां लगभग पूरी मानी जा रही हैं। जदयू और भाजपा से नए चेहरे संभव बताया जा रहा है कि जदयू कोटे से तीन नए मंत्री शामिल हो सकते हैं, जबकि कई पुराने चेहरों की वापसी भी संभव है। भाजपा की ओर से भी कुछ नए नामों को मौका मिलने की चर्चा है। सहयोगी दलों की भूमिका भी अहम एनडीए के अन्य घटक दलों को भी मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व मिलेगा। उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी के कोटे से मंत्री के नाम पर भी जल्द फैसला हो सकता है। राजनीतिक पारा चढ़ा, सबकी नजर फैसले पर मुख्यमंत्री के दिल्ली दौरे के बाद बिहार की राजनीति में सरगर्मी बढ़ गई है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि नई कैबिनेट में किन चेहरों को जगह मिलती है।

JPSC परीक्षाओं में गड़बड़ी से हड़कंप, जिम्मेदारी तय करने के निर्देश

 रांची  राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने झारखंड लोक सेवा आयोग द्वारा हाल में आयोजित परीक्षाओं में व्यापक त्रुटियों को गंभीरता से लिया है। उन्होंने सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा तथा सहायक वन संरक्षक नियुक्ति मुख्य परीक्षा के प्रश्नपत्रों में व्यापक त्रुटियों पर चिंता प्रकट करते हुए इसकी जांच का आदेश आयोग को दिया है। साथ ही उक्त प्रकरणों की समुचित जांच कर जिम्मेदारी निर्धारित करने तथा दोषी व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा है। राज्यपाल के निर्देश पर इस संबंध में लोक भवन द्वारा आयोग के अध्यक्ष को पत्र लिखा गया है, जिसमें उक्त परीक्षाओं में हुई त्रुटियों की ओर ध्यान आकृष्ट कराया गया है। पत्र में उल्लेख किया गया है कि सहायक वन संरक्षक की मुख्य परीक्षा तथा सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के प्रश्न-पत्रों में त्रुटियों एवं प्रारंभिक रूप से जारी उत्तर-कुंजी में गलत उत्तरों के संबंध में विभिन्न माध्यमों से तथ्य प्रकाश में आए हैं। इस प्रकार की त्रुटियां न केवल अभ्यर्थियों में भ्रम की स्थिति उत्पन्न करती हैं, बल्कि परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता एवं विश्वसनीयता पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालती हैं। ऐसे मामले आयोग की साख पर भी प्रश्नचिन्ह खड़ा करते हैं, जो कि अत्यंत ही चिंताजनक है। न हो ऐसी त्रुटियों की पुनरावृत्ति राज्यपाल ने निदेशित किया है कि उक्त प्रकरणों की समुचित जांच कर जिम्मेदारी निर्धारित की जाए तथा दोषी व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही, भविष्य में ऐसी त्रुटियों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए परीक्षा प्रक्रिया में आवश्यक सुधारात्मक एवं सतर्कतापूर्ण उपाय अपनाए जाने पर भी बल दिया है। राज्यपाल ने अपेक्षा व्यक्त की है कि आयोग पारदर्शिता, शुचिता एवं उच्च मानकों को बनाए रखते हुए परीक्षाओं का संचालन सुनिश्चित करे, जिससे अभ्यर्थियों का विश्वास सुदृढ़ हो सके। क्या है मामला पिछले माह संपन्न सहायक वन संरक्षक मुख्य परीक्षा के सामान्य अध्ययन के प्रश्नपत्र में शाब्दिक और भाषाई अशुद्धियों की भरमार थी। गलतियां ऐसी थीं, जैसे ऐसा लग रहा था कि प्रश्न तैयार करनेवालों ने आंखें मूंदकर प्रश्नों को तैयार किया हो। प्रश्न तैयार करने में ऐसी-ऐसी अशुद्धियां हुईं, जितनी तीसरी और चौथी कक्षा के छात्र भी नहीं करते। महापुरुषों के नाम भी गलत लिखे गए थे। इसी तरह, 19 अप्रैल को संपन्न सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के प्रश्नपत्रों में कई शाब्दिक त्रुटियां तो थी हीं, उपस्थिति पत्रक में भी त्रुटि थी। इस परीक्षा के प्रश्नपत्र के बुकलेट नंबर और ओएमआर शीट के नंबर सात अंक में दिए गए थे। दूसरी तरफ उपस्थिति पत्रक में इन नंबरों को दर्ज करने के लिए छह ही बाक्स बने थे। परीक्षा में अभ्यर्थियों ने स्वयं एक अतिरिक्त बाक्स बनाकर उन नंबरों को दर्ज किया। वहीं, झारखंड पात्रता परीक्षा में रांची के जिला स्कूल स्थित केंद्र पर उड़िया विषय के प्रश्नपत्र पठनीय ही नहीं थे। इसी तरह, तथा बोकारो के सरदार पटेल उच्च विद्यालय स्थित केंद्र पर शिक्षा विषय के प्रश्नपत्र पर्याप्त संख्या में नहीं पहुंचे। इस कारण आयोग को दोनों विषयों की परीक्षा रद करनी पड़ी।

साहिबगंज फायरिंग केस में दो गिरफ्तार, तीन देसी कट्टा और जिंदा कारतूस बरामद

 साहिबगंज झारखंड के साहिबगंज जिले के जिरवाबाड़ी थाना क्षेत्र के अंबाडिया पंचायत के पोलमा गांव में युवक को गोली मारने के मामले का पुलिस ने खुलासा कर दिया है. पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए इस घटना में शामिल दो आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है. मामला सुलझने के बाद डीएसपी हेडक्वार्टर विजय कुमार कुशवाहा ने थाना में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर घटना और गिरफ्तारी की पूरी जानकारी दी. कैसे हुई घटना ? डीएसपी ने बताया कि 27 अप्रैल की रात करीब 7:30 बजे अनिल बेसरा (26 वर्ष), पिता स्व. नाबू बेसरा, पोलमा गांव निवासी, किसी काम से लौट रहा था. इसी दौरान पहले से घात लगाए तीन-चार अपराधियों ने पीछे से उस पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी. इस हमले में उसकी पीठ में दो गोली लगी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया. वारदात के बाद अपराधी उसका सामान और मोबाइल लेकर फरार हो गए. इलाज जारी, हालत गंभीर घटना के बाद स्थानीय लोगों ने तुरंत घायल अनिल को सदर अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों की देखरेख में उसका इलाज चल रहा है. फिलहाल उसकी हालत गंभीर बनी हुई है. एसआईटी का गठन और त्वरित कार्रवाई मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर एक विशेष जांच टीम (SIT) बनाई गई. इस टीम में पुलिस निरीक्षक सह नगर थाना प्रभारी अमित कुमार गुप्ता, जिरवाबाड़ी थाना प्रभारी शशि सिंह, सब-इंस्पेक्टर पंकज वर्मा और अन्य पुलिस अधिकारी शामिल थे. टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए छापेमारी शुरू कर दी. दो आरोपी गिरफ्तार, हथियार बरामद छापेमारी के दौरान पुलिस ने इस मामले में शामिल किशुन हांसदा (55 वर्ष) और भीम हांसदा (लगभग 30 वर्ष), दोनों पोलमा गांव के निवासी को गिरफ्तार कर लिया. उनकी निशानदेही पर पुलिस ने तीन देसी कट्टा, नौ जिंदा गोली और दो खोखा भी बरामद किए हैं. जमीनी विवाद में रिश्तेदारों ने ही रची साजिश पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया कि यह हमला जमीनी विवाद को लेकर किया गया था. चौंकाने वाली बात यह है कि आरोपी कोई बाहरी नहीं, बल्कि पीड़ित के अपने ही रिश्तेदार निकले. पुलिस अब इस पारिवारिक रंजिश के पूरे पहलू को खंगाल रही है. हथियार सप्लाई और मास्टरमाइंड की जांच जारी डीएसपी विजय कुमार कुशवाहा ने बताया कि पुलिस यह भी जांच कर रही है कि आरोपियों को हथियार कहां से मिला और इसके पीछे कौन लोग शामिल हैं. साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस घटना में कोई और साजिशकर्ता या मास्टरमाइंड तो नहीं है. अन्य आरोपियों की तलाश में छापेमारी तेज पुलिस ने दोनों गिरफ्तार आरोपियों को जेल भेज दिया है. बाकी फरार आरोपियों की तलाश में लगातार छापेमारी जारी है. डीएसपी ने कहा कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है और किसी भी दोषी को छोड़ा नहीं जाएगा. जल्द ही पूरे मामले का खुलासा कर दिया जाएगा.

नौकरी बनाम रोजगार: बिहार में सरकार और विपक्ष के बीच बढ़ी राजनीतिक टकराहट

पटना  बंपर जीत के नायक और नीतीश कुमार की पसंद बने राज्य के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने रोजगार पर अटैक शुरू कर दिया हे । इसका संकेत उन्होंने पहले ही कैबिनेट में नौकरी देने की घोषणा कर अपनी तेवर साफ कर दिया है। सम्राट चौधरी ने नौकरियों की बौछार के साथ-साथ रोजगार की वृद्धि के लिए चुनौती भी स्वीकार करते फर्स्ट कैबिनेट से ही सम्राट चौधरी ने न केवल राज्य सरकार के फोरम पर बल्कि निजी फोरम पर उद्योग का दरवाजा खोलने की उम्मीद दिखा दी है। मगर, सम्राट चौधरी के रोजगार से जुड़े फैसले पर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने तंज कसा है। नौकरियों का खोला पिटारा वो कहते हैं कि पूत के पांव पालने में ही झलकने लगते हैं। नौकरियों को लेकर बहुत कुछ ऐसा ही पहले कैबिनेट की बैठक से ही दिखने लगा। नीतीश नीत सरकार के स्लोगन के साथ मुख्यमंत्री बने सम्राट चौधरी ने अपना इरादा साफ कर लिया कि वे हर हाल में एक करोड़ जनता को रोजगार देंगे। घोषणाओं में नौकरी/रोजगार     बिहार पुलिस में दारोगा (एसआई) के 20,937 पदों पर बहाली और प्रोन्नति का रास्ता साफ। इनमें से 50 फीसदी पद पदोन्नति और 50 फीसदी सीधी नियुक्ति से भरे जाएंगे।     भागलपुर, मुजफ्फरपुर, बिहारशरीफ (नालंदा) और गया जैसे शहरों में ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने के लिए यातायात पुलिस के 485 नए पद सृजित किए गए हैं। साथ ही पहले से सृजित 1,606 पदों को भी शामिल किया गया है।     बिहार के 208 प्रखंडों में खुलने वाले डिग्री कॉलेजों के लिए प्रति कॉलेज 44 पदों के हिसाब से कुल 9,152 पदों के सृजन को मंजूरी दी गई है।     पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अंतर्गत अभियंत्रण संभाग का गठन और इसके लिए 63 नए पदों के सृजन की स्वीकृति दी गई है। रोजगार बढ़ाने पर जोर बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने नौकरी से ज्यादा महत्व रोजगार को दिया। इस लिहाजन उद्योगपतियों के साथ बैठक करने के बाद सम्राट चौधरी के निशाने पर फूड प्रोसेसिंग यूनिट है। बिहार सरकार (सम्राट चौधरी) ने राज्य में औद्योगीकरण और रोजगार को बढ़ावा देने के लिए बड़े पैमाने पर प्रोत्साहन और नौकरियों के अवसर की घोषणा की है। इनका मानना है कि मक्का, केला, मखाना की प्रोसेसिंग यूनिट बिठा कर रोजगार देने की दिशा में बिहार आगे बढ़ सकता है। राज्य की नई 'न्यू एज इंडस्ट्री' रणनीति के तहत 2 लाख से अधिक रोजगार सृजित करने की योजना है। तेजस्वी यादव को क्यों लगी मिर्ची? इन सबके बीच आरजेडी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने एनडीए सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि बिहार का नाम बदलकर 'श्रमिक प्रदेश' कर दिया जाना चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नाम लिए बिना ही कहा कि नाम बदलने के विशेषज्ञ भाजपाइयों, खासकर बिहार के 'नए-नवेले मुख्यमंत्री' को नाम बदलकर 'श्रमिक प्रदेश' कर देना चाहिए। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने बयान जारी कर आरोप लगाया कि बिहार पिछले 21 वर्षों में औद्योगिक उत्पादन में बेहद पीछे लेकिन लेबर सप्लाई में अव्वल रहा है। उन्होंने कहा कि राजग सरकार पलायन रोकने की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठा रही है, जिससे बिहार के मजदूर मजबूर होकर घर से दूर रहने को विवश हैं। दरअसल, अलग-अलग डिपार्टमेंट में हाल के दिनों में कई वैकेंसी आई है। नौकरी को लेकर सम्राट चौधरी अपनी हर सभा में बयान दे रहे हैं। बिहार में लगभग 2.97 करोड़ परिवार हैं। तेजस्वी ने चुनावी वादे में हर घर में नौकरी की बात कही थी। रोजगार वाला मुद्दा हाईजैक होते देख तेजस्वी ने कहा कि बिहार का नाम बदलकर श्रमिक प्रदेश कर देना चाहिए।

बिहार में जनगणना प्रक्रिया तेज, 33 सवालों के साथ घर-घर सर्वे; डेटा रहेगा पूरी तरह सुरक्षित

छपरा. अब सारण के गांवों की गलियों से लेकर शहर के मोहल्लों तक हर दरवाजे पर जनगणना की दस्तक सुनाई देगी। एक मई की रात स्वगणना का चरण समाप्त होने के साथ ही शनिवार से जिले में घर-घर सर्वे अभियान शुरू हो गया। अब तक 73 हजार 564 परिवारों ने स्वयं अपनी जानकारी दर्ज करायी है, जबकि बाकी परिवारों तक पहुंचने के लिए हजारों प्रगणक और पर्यवेक्षक मैदान में उतरेंगे। आने वाले एक माह तक जिले में हर घर की तस्वीर सरकारी आंकड़ों में दर्ज होती नजर आएगी। 31 मई तक चलेगा सर्वे अभियान जनगणना 2027 के पहले चरण में मकान सूचीकरण और आवास गणना का कार्य किया जाएगा। इसके तहत प्रगणक घर-घर जाकर परिवारों से जानकारी एकत्र करेंगे। जिन लोगों ने पहले ही स्वगणना पूरी कर ली है, उनसे केवल स्वगणना पहचान संख्या ली जाएगी। वहीं, जिन परिवारों ने अभी तक स्वगणना नहीं की है, उनसे 33 बिंदुओं पर आधारित प्रश्न पूछे जाएंगे। प्रशासन ने इस कार्य को 31 मई तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए जिले में 7467 प्रगणकों और 1269 पर्यवेक्षकों की तैनाती की गई है। साथ ही 1034 कर्मियों को रिजर्व में रखा गया है, ताकि आवश्यकता पड़ने पर उन्हें तुरंत लगाया जा सके। विकास योजनाओं की मजबूत नींव प्रधान जनगणना अधिकारी सह जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव ने लोगों से जनगणना कार्य में सहयोग देने की अपील की है। उन्होंने कहा कि जनगणना केवल जनसंख्या की गिनती नहीं, बल्कि विकास योजनाओं की दिशा तय करने वाली महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, आवास और सामाजिक सुरक्षा जैसी योजनाओं के निर्माण में जनगणना के आंकड़े अहम भूमिका निभाते हैं। ऐसे में नागरिकों को सही और पूर्ण जानकारी उपलब्ध करानी चाहिए, ताकि भविष्य की योजनाएं वास्तविक जरूरतों के अनुसार बनाई जा सकें। स्वगणना आईडी दिखाना होगा जरूरी जिलाधिकारी ने बताया कि जिन लोगों ने ऑनलाइन माध्यम से स्वगणना की है, उन्हें प्रगणकों के घर पहुंचने पर अपनी स्वगणना पहचान संख्या उपलब्ध करानी होगी। इसके माध्यम से जानकारी का सत्यापन और अंतिम प्रस्तुतीकरण किया जाएगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जनगणना के दौरान जुटायी जाने वाली सभी जानकारियां पूरी तरह सुरक्षित और गोपनीय रखी जाएंगी। डिजिटल तकनीक से बदलेगी जनगणना की तस्वीर इस बार जनगणना अभियान को पूरी तरह आधुनिक और तकनीक आधारित बनाने पर जोर दिया जा रहा है। डाटा संग्रहण के लिए मोबाइल एप और डिजिटल तकनीक का व्यापक उपयोग किया जाएगा। प्रशासन का मानना है कि इससे आंकड़ों के संकलन में तेजी आएगी और त्रुटियों की संभावना भी कम होगी। जिलाधिकारी ने सभी जिला स्तरीय अधिकारियों और कर्मचारियों को भी इस अभियान में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। अब जिले में शुरू होने वाला यह घर-घर सर्वे केवल आंकड़ों का संग्रह नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों की विकास योजनाओं का आधार बनने जा रहा है। सारण में जनगणना अभियान एक नजर में – 73 हजार 564 परिवारों ने किया स्वगणना 31 मई तक चलेगा घर-घर सर्वे अभियान 7467 प्रगणक करेंगे डाटा संग्रहण 1269 पर्यवेक्षक करेंगे निगरानी 1034 कर्मी रिजर्व में रखे गए 33 प्रश्न पूछे जाएंगे स्वगणना नहीं करने वाले लोगों से मोबाइल एप व डिजिटल तकनीक से होगा डाटा संग्रहण

नकल विवाद से गरमाया परीक्षा केंद्र, छात्रों के बवाल के बाद परीक्षा स्थगित

पटना बिहार की राजधानी पटना के साइंस कॉलेज में शनिवार को एमबीबीएस की परीक्षा के दौरान एक बार फिर हंगामा हो गया। नकल करने के इरादे से परीक्षा देने आए छात्रों ने हंगामा कर दिया। वहीं, परीक्षार्थियों ने पेपर लीक का आरोप भी लगाया है। 3 घंटे तक चले हंगामे के बाद परीक्षा रद्द कर दी गई। पटना साइंस कॉलेज में आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय की मेडिकल परीक्षा आयोजित की गई थी। यहां पीएमसीएच, एनएमसीएच और पावापुरी मेडिकल कॉलेज के एमबीबीएस स्टूडेंट्स परीक्षा देने पहुंचे थे। दो दिन पहले गुरुवार को भी परीक्षार्थियों द्वारा नकल किए जाने पर साइंस कॉलेज में हंगामा हुआ था, जिसके बाद कॉलेज प्रशासन ने परीक्षा लेने पर हाथ खड़े कर दिए थे। शनिवार को छात्रों ने आरोप लगाया कि एग्जाम शुरू होने से पहले ही पेपर लीक हो गया। कुछ छात्र मोबाइल फोन पर प्रश्न पत्र वायरल होने का दावा करने लगे। वहीं, दूसरी ओर कॉलेज प्रशासन से जानकारी मिली है कि छात्र परीक्षा में कदाचार करना चाहते थे। एग्जाम सेंटर पर वह बिना जांच के प्रवेश करना चाह रहे थे। जब जांच की जाने लगी तो उन्होंने हंगामा शुरू कर दिया। पटना साइंस कॉलेज में एमबीबीएस स्टूडेंट्स की परीक्षा शनिवार को सुबह 11 बजे से शुरू होनी थी। मगर परीक्षार्थियों के हंगामा के चलते दोपहर 1 बजे तक शुरू नहीं हो पाई। स्टूडेंट्स के आक्रोश के बाद परीक्षा को रद्द कर दिया गया। दो दिन पहले भी हुआ था भारी हंगामा 30 मई को भी पटना साइंस कॉलेज में एमबीबीएस परीक्षा के दौरान भारी हंगामा हुआ था। मेडिकल छात्रों द्वारा नकल करने पर अमादा रहने के बाद साइंस कॉलेज ने परीक्षा लेने से इनकार कर दिया था। एग्जाम शुरू होने के आधे घंटे बाद ही कॉलेज प्रशासन ने आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक को पत्र लिखकर परीक्षा नहीं लेने का फैसला सुना दिया था। परीक्षा केंद्र से सभी ऑर्ब्जवर और परीक्षक हट गए। इतना हंगामा होने के बाद भी मेडिकल छात्र जमकर नकल करते रहे और ढाई बजे तक पेपर देते रहे। साइंस कॉलेज की प्राचार्य प्रो. अलका ने बताया कि ऐसी परीक्षा आजतक मैंने नहीं देखी है। छात्रों को कदाचार करने से रोका गया तो अभद्र व्यवहार करने लगे। वहीं, गुरुवार को हुई नकल और कदाचार को देखते हुए साइंस कॉलेज ने शनिवार को कड़ी जांच के बाद ही परीक्षार्थियों को सेंटर में प्रवेश देने का फैसला लिया। सुबह वापस छात्र इस जांच का विरोध करने लगे और कॉलेज के गेट के बाहर प्रदर्शन किया।

झारखंड वेतन घोटाला: सीआईडी ने 1.80 करोड़ फ्रीज किए, कई गिरफ्तारियां जारी

बोकारो झारखंड के बोकारो कोषागार से वेतन की अवैध निकासी मामले में सीआईडी की एसआईटी ने बड़ी कार्रवाई की है। विशेष जांच टीम ने अब तक की तफ्तीश में 10 करोड़ रुपये से अधिक की मनी ट्रेल का पता लगाया है। इसे अब तक का सबसे बड़ा खुलासा माना जा रहा है। सीआईडी द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, जांच दल ने धन के लेन-देन (मनी ट्रेल) का विश्लेषण करने के बाद विभिन्न बैंक खातों में हस्तांतरित 1.80 करोड़ रुपये चिह्नित कर फ्रिज कर दिया है। 18 लाख रुपये के फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) को भी सीज किया गया है। एसआईटी ने गुरुवार को अशोक भंडारी के बोकारो आवास पर छापे मारे। इस दौरान पुलिस को निवेश और अचल संपत्तियों से जुड़े कई दस्तावेज मिले, जिसमें बोकारो के तेलीडीह में 4.08 डिसमिल जमीन व उस पर बना एक तीन मंजिला आलीशान मकान, तेलीडीह में 4.98 डिसमिल की एक अन्य भूमि के दस्तावेज मिले हैं। बोकारो एसपी कार्यालय से आरक्षी गिरफ्तार बोकारो ट्रेजरी से अवैध निकासी की जांच कर रही सीआईडी रांची की टीम ने गुरुवार को एसपी कार्यालय की लेखा शाखा में पदस्थापित आरक्षी काजल मंडल को गिरफ्तार किया। उसे पूछताछ के लिए रांची लाया गया है। काजल पर कौशल पांडेय का सहयोगी होने का आरोप है। काजल की गिरफ्तारी से पूर्व सीआईडी रांची की टीम ने मैनुअल व डिजिटल तरीके से कई रिकार्ड की जांच की। लगातार चार कर्मियों की गिरफ्तारी से पुलिस विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। तीन पहले ही गिरफ्तार इस घोटाले में संलिप्तता के आधार पर पुलिस अधीक्षक कार्यालय बोकारो की लेखा शाखा में तैनात तीन कर्मियों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें लेखापाल कौशल कुमार पांडेय को मास्टरमाइंड मान कर जांच की जा रही है। जबकि होमगार्ड सतीश कुमार व जमादार अशोक भंडारी की गिरफ्तारी कौशल के सहयोगी के तौर पर हुई है। गुमला में भी 28 लाख की गड़बड़ी, रिपोर्ट तलब गुमला जिले में वेतन मद से 28.39 लाख रुपये की कथित अवैध निकासी का मामला सामने आया है। गुमला ट्रेजरी से यह गड़बड़ी महालेखाकार द्वारा आईएफएमएस डाटा की समीक्षा के दौरान सामने आई है। यह अवैध निकासी वर्ष 2017 से वर्ष 2025 के दौरान की गई है। मामले को गंभीरता से लेते हुए गुमला डीसी दिलेश्वर महतो ने संबंधित अधिकारियों से तत्काल जांच रिपोर्ट मांगी है। उपायुक्त की ओर से डीएसई समेत संबंधित विभागीय पदाधिकारियों को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि महालेखाकार के पत्र के आलोक में पूरे मामले की जांच कर विस्तृत रिपोर्ट उपलब्ध कराई जाए, ताकि मुख्यालय को वस्तुस्थिति से अवगत कराया जा सके। जांच के लिए जिन डीडीओ और पदाधिकारियों को चिह्नित किया गया है, उनमें डीएसपी बीरेंद्र टोप्पो, घनश्याम चौबे (जीएमएस पतराटोली) और प्रियाश्री भगत (गवर्नमेंट मिडिल स्कूल मोरहाटोली) शामिल हैं।

झारखंड: जंगल में मिले तीन शव, बिना चोट के निशान से बढ़ी सस्पेंस

हजारीबाग झारखंड के हजारीबाग जिले में रिश्ते के भाई-बहनों का शव बरामद हुआ। सगे भाई-बहनों के मौत के मामले में एक विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया है। उसने बताया कि तीनों के शव चार दिन पहले वन क्षेत्र में मिले थे। शव पर ना कोई चोट का निशान था और ना ही खून बह रहा था। ऐसे में सवाल उठता है कि तीनों भाई-बहनों की मौत कैसे हुई। इसी सवाल का जवाब अब एसआईटी ढूंढने का प्रयास करेगी। अल्पसंख्यक आयोग ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं पुलिस ने क्या बताया इस मामले की जानकारी देते हुए हजारीबाग के पुलिस अधीक्षक अमन कुमार ने बताया कि गुरुवार को पुलिस को मिली पोस्टमार्टम रिपोर्ट में तीनों शवों पर किसी भी प्रकार के बाहरी चोट के निशान नहीं पाए गए। मृतकों की पहचान मोहम्मद आदिल (25) निवासी कटकमदाग, शानिया परवीन (19) निवासी लोहसिंघा और खुशी परवीन (21) निवासी हजारीबाग मुफस्सिल के रूप में हुई है। तीनों के शव 27 अप्रैल को मुफस्सिल पुलिस थानाक्षेत्र के अंतर्गत आने वाले पौटा वन क्षेत्र से बरामद किए गए थे। तीनों के लापता होने की शिकायत 23 अप्रैल को दर्ज कराई गई थी। अब पुलिस जांच के बाद पता चलेगा कि आखिर तीनों भाई-बहनों की मौत कैसे हुई थी। टेस्ट के बाद पता चलेगा सच पुलिस अधीक्षक ने कहा कि मैंने तीनों व्यक्तियों की मौत की जांच के लिए एसडीपीओ (मुख्यालय) अमित कुमार आनंद के नेतृत्व में एक एसआईटी का गठन किया है। उन्होंने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शवों पर बाहरी चोट के कोई निशान नहीं मिले हैं। पुलिस अधीक्षक ने कहा कि अभी कुछ परीक्षण किए जाने बाकी हैं, जिनसे यह निष्कर्ष निकाला जा सकेगा कि मामला हत्या का है या आत्महत्या का। उन्होंने बताया कि पुलिस ने मोहम्मद आदिल के पिता के बयान के आधार पर सात से आठ लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। अल्पसंख्यक आयोग की अध्यक्ष ने लगाए आरोप इस बीच, झारखंड राज्य अल्पसंख्यक आयोग के उपाध्यक्ष ज्योति सिंह मथारू ने आरोप लगाया कि 23 अप्रैल को शिकायत मिलने पर पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया। गुरुवार को उन्होंने तीनों मृतकों के परिवारों से मुलाकात की और उस स्थान का दौरा किया जहां शव मिले थे। मथारू ने संवाददाताओं से कहा कि मामले की शुरुआती चरण की पुलिस जांच संतोषजनक नहीं थी। हमने पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक की और उन्हें मामले में तेजी से कार्रवाई करने और दोषियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार करने का निर्देश दिया।

नेपाल लिंक वाले हवाला-साइबर गिरोह का भंडाफोड़, पुलिस ने घोड़ासहन में की छापेमारी

मोतिहारी बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के घोड़ासहन इलाके में पुलिस ने साइबर ठगी और हवाला कारोबार से जुड़े एक संगठित गिरोह का भंडाफोड़ किया है। अधिकारियों ने शुक्रवार को बताया कि इस कार्रवाई में करीब 69 लाख रुपए बरामद किए गए हैं और सीमा पार फैले एक बड़े वित्तीय नेटवर्क का खुलासा हुआ है। साइबर टीम को मिली खुफिया खबर से खुला राज साइबर थाना और चार स्थानीय थानों की संयुक्त टीम ने गुरुवार देर रात घोड़ासहन मेन रोड, बाजार क्षेत्र और वीरता चौक समेत कई स्थानों पर एक साथ छापेमारी की। इस दौरान करीब आधा दर्जन दुकानों की तलाशी ली गई। साइबर सेल के एसडीपीओ अभिनव पराशर ने बताया कि पुलिस को पुख्ता सूचना मिली थी कि साइबर ठगी से कमाया गया पैसा सीमा पार नेपाल में संचालित बैंक खातों के जरिए भेजा जा रहा है। नेपाली बैंकिंग चैनलों में घुमाया जाता था पैसा, 68 लाख कैश मिले सूचना मिलते ही पुलिस ने विशेष अभियान चलाया और एक ऐसे नेटवर्क का पर्दाफाश किया, जो अवैध रकम को नेपाली बैंकिंग चैनलों के जरिए घुमाकर जांच एजेंसियों से बचाने की कोशिश कर रहा था। एसडीपीओ ने बताया, 'छापेमारी के दौरान इस मामले में छह लोगों को गिरफ्तार किया गया है। उनके पास से 69 लाख रुपए, 11 मोबाइल फोन, करेंसी गिनने की मशीन, नेपाल के कई बैंक खातों से जुड़े दस्तावेज और संपर्क के लिए इस्तेमाल किए जा रहे कई व्हाट्सएप नंबर बरामद किए गए।' आम लोगों के बैंक खातों का होता था इस्तेमाल पुलिस का कहना है कि जब्त सामान पूरे साइबर क्राइम नेटवर्क का पता लगाने में अहम भूमिका निभाएगा। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह गिरोह बड़े स्तर पर साइबर ठगी का कारोबार चला रहा था और इसके जरिए 50 करोड़ रुपए से अधिक के लेनदेन की आशंका है। गिरोह पर आरोप है कि वह आम लोगों के बैंक खातों का इस्तेमाल अवैध रकम के लेनदेन के लिए करता था और इसके बदले कमीशन देता था। जुटाई गई जानकारी के आधार पर छापेमारी की गई। इस दौरान 6 लोगों को गिरफ्तार किया गया। उनके पास से 69 लाख रुपए, 11 मोबाइल फोन, करेंसी गिनने की मशीन, नेपाल के कई बैंक खातों से जुड़े दस्तावेज मिले। नेटवर्क की जड़ें इंटरनेशनल पुलिस अधिकारियों के अनुसार, पूर्वी चंपारण से जुड़े इस नेटवर्क की जड़ें काफी गहरी हैं और इसमें राज्य के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी कई लोग शामिल हो सकते हैं। अब पुलिस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है और अन्य आरोपियों की पहचान में जुटी है। आने वाले दिनों में इस मामले में और छापेमारी और तलाशी अभियान जारी रहने की संभावना है।