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एनटीपीसी क्षेत्र में रातभर चला अवैध खनन, 15 फीट गहरे गड्ढे मिले

पटना पटना जिले के बाढ़ अनुमंडल स्थित एनटीपीसी थाना क्षेत्र के ढीबर गांव के पास गंगा किनारे अवैध मिट्टी खनन का बड़ा मामला सामने आया है। आरोप है कि यहां लगातार तीन रातों तक अवैध मिट्टी कटाई होती रही, लेकिन पुलिस मूकदर्शक बनी रही। जिस जगह मिट्टी की कटाई की जा रही है, वहीं से एनटीपीसी प्लांट के लिए पानी की सप्लाई भी होती है। इस पूरे मामले के सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है और पुलिस की गश्ती व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। रातभर चलता रहा अवैध खनन स्थानीय लोगों के अनुसार, ढीबर गांव के दियारा इलाके में लगातार रातभर गंगा बालू और मिट्टी की कटाई की जा रही थी। लोगों का आरोप है कि एनटीपीसी थाना की मिलीभगत से यह अवैध खनन हो रहा है, जिससे खनन माफियाओं का मनोबल बढ़ा हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि पुलिस को सबकुछ पता होने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई। एसडीपीओ की छापेमारी, लेकिन माफिया फरार मामले की जानकारी मिलते ही एसडीपीओ रामकृष्णा ने देर रात मौके पर छापेमारी की। हालांकि, छापेमारी की भनक लगते ही सभी खनन माफिया मौके से फरार हो गए। छापेमारी के दौरान खेतों में करीब 15 फीट तक गहरे गड्ढे पाए गए। इसके बाद एसडीपीओ ने तुरंत खनन विभाग को इसकी जानकारी दी। पहले भी हो चुके हैं हादसे स्थानीय लोगों ने बताया कि इससे पहले बारिश के दौरान खेतों में बने गहरे गड्ढों में पानी भर जाने से कई लोगों की डूबकर मौत हो चुकी है। अब एनटीपीसी डैम के पास खुदाई होने से ग्रामीण किसी बड़े हादसे की आशंका से डरे हुए हैं। किसान रातभर कर रहे खेतों की रखवाली अवैध मिट्टी कटाई से परेशान किसान अब रातभर जागकर अपने खेतों की निगरानी कर रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि एनटीपीसी थाना से महज कुछ सौ मीटर की दूरी पर यह अवैध खनन चल रहा था, लेकिन इसके बावजूद पुलिस की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। रोज लाखों की कमाई का आरोप एक स्थानीय व्यक्ति ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि जिस जमीन से मिट्टी काटी जा रही है, उसे एनटीपीसी ने अधिग्रहित कर रखा है। हालांकि, मुआवजा नहीं मिलने के कारण किसान अभी भी उस जमीन पर खेती कर रहे हैं।  उसने बताया कि खनन माफिया एक ट्रिप मिट्टी 800 रुपये में बेचते हैं। इसमें 300 रुपये ट्रैक्टर मालिक को दिए जाते हैं, जबकि 500 रुपये माफिया के पास बचते हैं। बताया गया कि करीब 20 ट्रैक्टर लगाए गए हैं और हर ट्रैक्टर लगभग 20 ट्रिप मिट्टी की ढुलाई करता है। इस हिसाब से प्रतिदिन करीब 400 ट्रिप मिट्टी बेची जा रही है और माफिया रोज लगभग दो लाख रुपये की कमाई कर रहे हैं। स्थानीय व्यक्ति ने यह भी आरोप लगाया कि छह दिनों तक लगातार मिट्टी कटाई हुई और माफियाओं ने लगभग “50 प्रतिशत पर थाना मैनेज” कर रखा था। एसडीपीओ ने दी सख्त कार्रवाई की चेतावनी एसडीपीओ रामकृष्णा ने बताया कि ढीबर दियारा में मिट्टी कटाई की सूचना मिलने पर त्वरित कार्रवाई करते हुए छापेमारी की गई थी। मौके पर कोई व्यक्ति नहीं मिला, लेकिन मिट्टी कटाई के स्पष्ट निशान पाए गए हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह की अवैध कटाई से पर्यावरण समेत कई गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं। अब पुलिस खुद इस पूरे इलाके की निगरानी करेगी। एसडीपीओ ने लोगों से अपील की कि यदि कहीं भी अवैध मिट्टी कटाई हो रही हो तो तुरंत सूचना दें। सूचना देने वाले की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। उन्होंने खनन माफियाओं को चेतावनी देते हुए कहा कि नियम और कानून के तहत ही कोई काम किया जाए। अगर कोई अवैध गतिविधि पाई गई तो संबंधित लोगों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।  

रांची में राज्यस्तरीय कार्यशाला: पेसा नियमावली 2025 को लेकर अधिकारियों को दिए गए निर्देश

रांची  पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) झारखंड नियमावली, 2025 को लेकर राज्यस्तरीय कार्यशाला को संबोधित करते हुए मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा है कि ग्राम सभा को अधिकार दिलाना सरकार की प्राथमिकता है। उन्हाेंने पेसा कानून के प्रभावी क्रियान्वयन पर कार्यशाला के दौरान इसकी बाधाओं को दूर करने पर जोर दिया। मंत्री ने कहा कि राज्य में 25 साल बाद पेसा कानून लागू हुआ है और अब बारी गांव-गांव तक बेहतर क्रियान्वयन की है। बैठक में जिलों के उप विकास आयुक्त, समाहर्ता, बीडीओ – सीओ सहित पदाधिकारी शामिल हुए। धुर्वा स्थित प्रोजेक्ट भवन के एनेक्सी सभागार में आयोजित कार्यशाला को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा कि अब पारंपरिक ग्राम सभा को उनका अधिकार दिलाना सरकार की प्राथमिकता है। इसके लिए गांव-गांव तक पेसा नियमावली के बेहतर एवं मजबूत क्रियान्वयन की आवश्यकता है। पेसा कानून के दायरे में आने वाले जिलों के अधिकारियों को अपनी जिम्मेवारी का निर्वहन करना होगा। उन्होंने कहा कि इस कानून को धरातल पर उतारने के लिए जमीनी स्तर पर प्रभावी कार्य करना आवश्यक है। दीपिका ने बताया कि देश के दस राज्यों में पेसा कानून लागू होना था, जिनमें झारखंड का कानून सबसे बेहतर और प्रभावी माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि कानून को लेकर कुछ स्थानों पर भ्रम फैलाने की कोशिश हो रही है, ऐसे में सभी संबंधित लोगों को इसके प्रविधानों का गहन अध्ययन करना चाहिए। गांव के लोगों के हर सवाल और परेशानियों का जवाब पेसा नियमावली के पन्नों में दर्ज है। उन्होंने निर्देश दिया कि पारंपरिक व्यवस्था के तहत तीन महीने के भीतर ग्राम प्रधानों की नियुक्ति सुनिश्चित की जाए, ताकि आगे की व्यवस्थाएं सुचारू रूप से लागू की जा सकें। स्थानीय लोगों तक जानकारी प्रभावी ढंग से पहुंचे : सचिव कार्यशाला को संबोधित करते हुए पंचायती राज विभाग के सचिव मनोज कुमार ने कहा कि नियमावली लागू होने के बाद से ही इसे जमीनी स्तर तक पहुंचाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि स्थानीय लोगों तक इसकी जानकारी प्रभावी ढंग से पहुंचे इसके लिए नियमावली का क्षेत्रीय भाषाओं में अनुवाद कराया गया है। कानून के विभिन्न प्रविधानों को राज्यभर में प्रभावी बनाने के उद्देश्य से 125 मास्टर ट्रेनरों को तैयार किया गया है, जो विभिन्न क्षेत्रों में प्रशिक्षण देकर जागरूकता बढ़ा रहे हैं। निदेशक की अध्यक्षता में एक विशेष कमेटी गठित की गई है, जो कानून के लागू होने में आने वाली बाधाओं का अध्ययन कर रही है। मनोज कुमार ने कहा कि पारंपरिक न्याय व्यवस्था का भी गहन अध्ययन किया जा रहा है, ताकि स्थानीय संदर्भों को ध्यान में रखते हुए नियमावली को और अधिक प्रभावी बनाया जा सके। कार्यशाला में पंचायती राज निदेशालय की निदेशक बी. राजेश्वरी ने बताया कि इस कानून को लागू करने से पहले कई आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी की गईं, लेकिन इसके क्रियान्वयन के दौरान विभिन्न प्रकार की चुनौतियां भी सामने आई हैं। इन बाधाओं को दूर करने के लिए निरंतर सुधार की प्रक्रिया जारी है।  

झारखंड में राज्यसभा सीटों को लेकर बढ़ी सियासी हलचल, दलों ने तेज की रणनीति

 रांची चुनाव आयोग ने 18 जून को राज्यसभा की 24 सीटों के लिए चुनाव कराने की घोषणा की है. राज्यसभा चुनाव आंध्र प्रदेश, गुजरात और कर्नाटक की चार-चार सीटों, मध्य प्रदेश और राजस्थान की तीन-तीन सीटों तथा झारखंड की दो सीटों पर कराया जाएगा. इसके अलावा मणिपुर, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश और मिजोरम की एक-एक सीट पर भी चुनाव होंगे. झारखंड में दो राज्यसभा सीटों पर बढ़ी सियासी हलचल झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों को लेकर राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है. इनमें एक सीट भाजपा सांसद दीपक प्रकाश के कार्यकाल समाप्त होने के कारण खाली हो रही है, जबकि दूसरी सीट झामुमो संस्थापक और पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन के निधन के बाद रिक्त है. घोषणा के बाद दलों में रणनीति तेज चुनाव आयोग की घोषणा के बाद सभी राजनीतिक दलों ने अपनी रणनीति बनानी शुरू कर दी है. संभावित उम्मीदवारों के नामों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं और आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति और गर्माने की संभावना है. राज्यसभा चुनाव कार्यक्रम: 1 जून से शुरू होगी प्रक्रिया, 18 जून को मतदान चुनाव कार्यक्रम के मुताबिक 1 जून को अधिसूचना जारी होगी, जबकि नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 8 जून तय की गई है. 9 जून को नामांकन पत्रों की जांच होगी और 11 जून तक उम्मीदवार नाम वापस ले सकेंगे. मतदान 18 जून को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक होगा, जबकि उसी दिन शाम 5 बजे से मतगणना शुरू होगी. चुनाव प्रक्रिया 20 जून तक पूरी कर ली जाएगी.

दीपक हत्याकांड के आरोपी का हाफ एनकाउंटर: जहानाबाद पुलिस कार्रवाई में रावण घायल

 जहानाबाद बिहार के जहानाबाद में पुलिस ने कुख्यात किलर विक्कू सिंह उर्फ रावण का ऑपरेशन लंगड़ा के तहत हाफ एनकाउंटर कर दिया। दीपक हत्याकांड के मुख्य अभियुक्त रावण के पैर में गोली लगी है। जिले के घोसी थाना क्षेत्र के धुरियारी नहर के समीप एसटीएफ और रावण के बीच मुठभेड़ हो गई। आरोपी ने झाड़ी में छिपाए गए हथियार से पुलिस पर गोली चला दी जो थानाध्यक्ष की गाड़ी में जा लगी। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने आत्मरक्षा के लिए आरोपी के पैर में गोली मार दी। जहानाबाद सदर अस्पताल में कड़ी सुरक्षा के बीच उसका इलाज कराया जा रहा है। बीते पांच दिनों में बिहार पुलिस ने छह बदमाशों को लंगरा बना दिया है। एसपी अपराजिता लोहानी एनकाउंटर की पुष्टि करते हुए बताया कि ​जहानाबाद पुलिस ने भेलवार थाना इलाके में दीपक सिंह हत्याकांड में त्वरित कार्रवाई करते हुए नामजद आरोपी विक्कू सिंह उर्फ रावण को गिरफ्तार कर रिया था। गिरफ्तार विक्कू सिंह को लेकर पुलिस इस कांड में प्रयोग में लाये गये हथियार की बरामद के लिए घोसी थाना क्षेत्र के धुरियारी गांव के निकट नहर किनारे पहुंची थी। इसी दौरान अपराधी ने पुलिस पर फायरिंग कर दी जिसमें थानाध्यक्ष बाल बाल बच गए। विक्कू सिंह की गोली घोसी थाना प्रभारी की गाड़ी में लग गई। उसके बाद उसने वहां से भागने की कोशिश की। जवाबी कार्रवाई करते हुए पुलिस ने भी गोली चलाई। पुलिस की गोली विक्कू सिंह के बायें पैर में लगी और वह वहीं गिर गया। बिहार में पांच दिनों में पुलिस मुठभेड़ की छह घटनाओं ने अपराधियों में खौफ कायम किया है। मुठभेड़ की इन घटनाओं में पुलिस की गोली से पांच अपराधी लंगड़े हुए। खास बात है कि सभी अपराधी अलग-अलग मामलों में हत्या छिनतई और लूटकांड के आरोपित हैं। पांच दिनों की कार्रवाई 19 मई ,पटना -नीतीश कुमार : गोपालपुर में कैश वैन रोक कर 27 लाख रुपये की लूट में शामिल। लूट की राशि से आरोपित और सहयोगियों ने चार आईफोन खरीदे। 2022 में बाकरगंज में सोना लूट और 2023 में पत्रकार नगर में एक पुलिस के जवान पर गोली चलाने का आरोप।  18 मई : पटना : संदीप उर्फ बादल : अगमकुआं इलाके में शिक्षक से मोबाइल स्नैचिंग और फायरिंग। पुलिस की जवाबी फायरिंग में पैर में गोली लगने से घायल हुआ। पूर्व में भी लूट की कई घटनाओं में शामिल होने का आरोप।  18 मई : सीवान : अंकित सिंह : ज्वेलर्स दुकान में लूट का आरोपित। सघन वाहन जांच अभियान के दौरान भागने की कोशिश में पुलिस मुठभेड़ में घायल। पुलिस के मुताबिक रसूलपुर, मांझी, रघुनाथपुर व जीरादेई थाना में लगभग आधा दर्जन सीएसपी एवं ज्वेलरी लूटकांड से संबंधित आपराधिक मामला दर्ज।  20 मई : समस्तीपुर : प्रिंस कुमार : सरायरंजन सहित लूट की कई घटनाओं में शामिल होने का आरोप। छिपाये गये हथियार की निशानदेही के दौरान पुलिस पर फायरिंग के दौरान जवाबी कार्रवाई में पुलिस की गोली से घायल। 21 मई : किशनगंज : पवन कुमार उर्फ चिंटू : अंतरराज्यीय लूट, छिनतई, चोरी जैसे आपराधिक गिरोह का सरगना। बाइक से भागने के दौरान पुलिस मुठभेड़ में घायल। पटना, अररिया, मधुबनी आदि जिलों में लूट सहित अन्य आपराधिक घटनाओं का लगभग एक दर्जन कांडों में संलिप्तता का आपराधिक इतिहास।  22 मई : जहानाबाद में कुख्यात विक्कू सिंह उर्फ रावण का हाफ एनकाउंटर। रावण दीपक सिंह हत्याकांड का मुख्य आरोपी था। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया था। हथियार बरामदगी की कार्रवाई के दौरान उसने पुलिस पर गोली चला दी। आत्म रक्षा में पुलिस ने भी फायरिंग कर उसके बाएं पैर में गोली मार दी।

Cyber Fraud Alert: गृह विभाग के नाम पर जारी हुआ फर्जी IPS ट्रांसफर आदेश, आरोपी गिरफ्तार

 पटना बिहार के तीन जिलों के एसपी के तबादले का फर्जी अधिसूचना जारी किए जाने का एक मामला सामने आया है। यह करतूत साइबर फ्रॉड गिरोह की बताई जा रही है। सीतामढ़ी, सारण और बेगूसराय जिला का एसपी के तबादले का फर्जी अधिसूचना का पता चलने पर गृह विभाग ने इसकी शिकायत पटना साइबर पुलिस में की। मामले में एक आरोपी की गिरफ्तारी की गयी है जो बिहार पुलिस में पहले से तैनात है। पुलिस उससे पूछताछ कर रही है ताकि गिरोह में शामिल अन्य गुर्गो की पहचान करके ठोस कार्रवाई की जा सके। साइबर पुलिस ने इस मामले में गुरुवार को केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक आरोपितों की गिरफ्तारी भी कर ली गई है। लेकिन अधिकारी फिलहाल इसकी पुष्टि नहीं कर रहे हैं। साइबर पुलिस इस मामले का शुक्रवार को खुलासा कर सकती है। दरअसल, पिछले दिनों एक शख्स ने सीतामढ़ी, सारण और बेगूसराय जिले के एसपी के तबादले का फर्जी अधिसूचना जारी कर दिया था। गृह मंत्रालय के नाम से जारी फर्जी पत्र सोशल मीडिया पर वायरल था। इसकी जानकारी होने पर गृह विभाग ने मामले को तुरंत संज्ञान में लिया। बाद में गृह मंत्रालय की और से इसकी शिकायत पटना साइबर थाना में की गई। गृह मंत्रालय ने साइबर पुलिस से मामले की जांच कर फर्जी अधिसूचना बनाने और उसे वायरल करने वाले की जल्द से जल्द गिरफ्तारी की मांग की है। बताया जाता है कि जिस शख्स ने फर्जी अधिसूचना जारी किया था वह पुलिस विभाग में तैनात है। गिरफ्तारी के बाद आरोपित से पूछताछ में यह पता चल सकेगा कि ऐसा करने के पीछे उसकी मंशा क्या थी। माना जा रहा है कि उसका साइबर फ्रॉड गिरोह से ताल्लुक है। इस मामले में डीएसपी व साइबर थाना प्रभारी नीतीश चंद्र धारिया ने बताया कि साइबर पुलिस मामले की छानबीन कर रही है। जल्द ही पूरे रैकेट का उद्भेदन कर लिया जाएगा। दरअसल, इस मामले का खुलासा गृह विभाग के दिवंगत पुलिस वालों के परिजनों को बीमा चेक वितरण कार्यक्रम के दौरान हुआ। विभाग के अपर मुख्य सचिव अरविंद कुमार चौधरी ने बताया कि बीती रात तीन आईपीएस के तबादले की अधिसूचना सोशल मीडिया पर वायरल होने लगा। पुलिस ने तत्परता से कार्रवाई करते हुए एक शातिर को गिरफ्तार कर लिया है जो कहीं पुलिस कार्यालय में काम कर रहा था। उन्होंने दावा किया कि क्राइम होने पर पुलिस काफी कम समय में कांड का उद्भेदन और बदमाशों की गिरफ्तारी कर रही है।

Heatwave Alert: पटना समेत कई जिलों में स्कूलों पर पाबंदी, डीएम का बड़ा आदेश

पटना बिहार की राजधानी पटना में भीषण गर्मी और हीटवेव को देखते हुए 5वीं तक के स्कूल बंद कर दिए गए हैं। डीएम त्यागाराजन ने कक्षा 6 से 8 का समय भी बदल दिया है। छठी से आठवीं तक के छात्र-छात्राओं की छुट्टी सुबह 10.30 बजे तक हर हालत में कर दी जाएगी। डीएम ने जिले के सभी निजी एवं सरकारी स्कूल, आंगनबाड़ी केंद्रों और प्री स्कूलों के लिए यह आदेश जारी किया। यह आदेश शुक्रवार 22 मई से मंगलवार 26 मई तक लागू रहेगा। बिहार के अन्य जिलों में भी स्कूलों में पाबंदी लगाई गई है। डीएम त्यागराजन ने गुरुवार को जारी आदेश में कहा कि दोपहर के समय पड़ रही भीषण गर्मी के कारण बच्चों के स्वास्थ्य और जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है। इस कारण 5वीं तक की कक्षाओं की शैक्षणिक गतिविधियों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया गया है पटना में 40 डिग्री के ऊपर पहुंचा तापमान पटना में गुरुवार को तापमान 40 डिग्री सेल्यिसय के पार चला गया। दोपहर के समय तपिश और लू की स्थिति देखने को मिली। इस कारण डीएम ने तुरंत आदेश जारी कर स्कूलों पर पाबंदी लगा दी। छोटे बच्चों के स्कूल बंद होने और छठी से आठवीं तक की कक्षाओं का समय बदले जाने से अभिभावकों को राहत मिली है। अभी और बढ़ेगी गर्मी मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार बिहार में अभी गर्मी और बढ़ेगी। अगले 3-4 दिनों तक पटना का मौसम शुष्क रहने के आसार हैं। तीखी धूप और लू चलने से तापमान में और बढ़ोतरी हो सकती है। पटना जिला प्रशासन ने भीषण गर्मी को देखते हुए लोगों को सावधानी बरतने की अपील की है। लू से बचाव के लिए दोपहर के समय अनावश्यक घर से बाहर ना निकलें। नंगे पैर धूप में ना रहें। छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों को विशेष सतर्कता बरतने को कहा गया है। भीषण गर्मी में शरीर को हायड्रेट रखने के लिए लगातार पानी, जूस, नारियल पानी, नींबू, तरबूज आदि का सेवन करें। छपरा, सासाराम, कैमूर, गयाजी में भी स्कूल बंद बता दें कि भीषण गर्मी का असर दक्षिण बिहार के जिलों में अत्यधिक पड़ रहा है। इसके चलते अन्य जिलों में भी स्कूलों पर पाबंदी लगाई गई है। छपरा और कैमूर में 5वीं तक के स्कूल पहले ही बंद किए जा चुके हैं। इसी तरह, सासाराम में 5वीं तक के स्कूल 31 मई तक बंद कर दिए गए हैं। गयाजी में भी छोटे बच्चों के स्कूल 25 मई तक बंद हुए हैं।

Heatwave Alert: रांची समेत कई जिलों में तेज गर्मी, 26 मई तक येलो अलर्ट जारी

 रांची झारखंड में भीषण गर्मी का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है. आसमान से बरस रही आग में राजधानी रांची समेत झारखंड के कई जिले तप रहे हैं. गर्मी से लोग परेशान हैं. गुरुवार को रांची का अधिकतम तापमान 38.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. इसमें पिछले 24 घंटे में 0.4 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि हुई. वहीं, जमशेदपुर का अधिकतम तापमान 43.1 डिग्री सेल्सियस, बोकारो का 41.1 डिग्री सेल्सियस और चाईबासा का 41.8 डिग्री सेल्सियस रहा. इन जिलों में शुक्रवार को भी तेज गर्मी का असर शुक्रवार को रांची सहित गुमला, सिमडेगा, पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम, रामगढ़, गिरिडीह, बोकारो, धनबाद, सरायकेला, देवघर, जामताड़ा, दुमका, गोड्डा, साहिबगंज और पाकुड़ में दोपहर तक तेज धूप रहेगी और तापमान बढ़ेगा. हालांकि, दोपहर बाद तेज हवा के साथ कहीं-कहीं बारिश हो सकती है. अन्य जिलों में स्थिति सामान्य होगी. रांची में 26 मई तक येलो अलर्ट जारी रांची में मौसम का मिजाज अगले कुछ दिनों तक बदलता रहेगा. रांची में 26 मई तक दोपहर बाद बादल छाने और बारिश की संभावना को देखते हुए येलो अलर्ट जारी किया गया है. मेदिनीनगर में पारा 45 डिग्री के पार मेदिनीनगर का अधिकतम तापमान गुरुवार को 45.2 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया. इससे पहले छह मई 1978 को मेदिनीनगर का अधिकतम तापमान 47.8 डिग्री सेल्सियस और मई 2024 को अधिकतम तापमान 47.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था. मौसम विभाग के अनुसार, 22 और 23 मई को गढ़वा, पलामू, चतरा में लू चलने की संभावना है. स्वास्थ्य मंत्री ने लोगों से की अपील झारखंड में लगातार बढ़ते तापमान, भीषण गर्मी और लू (हीट स्ट्रोक) की गंभीर स्थिति को देखते हुए राज्य के स्वास्थ्य, खाद्य आपूर्ति एवं आपदा प्रबंधन मंत्री डॉ इरफान अंसारी ने राज्य की जनता से विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है. उन्होंने दिन के वक्त आम जनता से जरूरत पड़ने पर ही घर से निकलने की सलाह दी है. वहीं, राज्य के सभी सरकारी अस्पतालों, सदर अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को हाई अलर्ट पर रखा गया है. अस्पतालों में गर्मी से बचने के लिए विशेष इंतजाम करने को कहा है. इनमें ORS काउंटर, जरूरी दवाइयां, आइवी फ्लूइड्स, आपातकालीन बेड, कूलिंग सुविधा और चिकित्सकीय टीमों को अलर्ट मोड में रखा गया है. इसके अलावा अस्पतालों में वाटर कूलर, निर्बाध बिजली बहाल रखने सहित इस जैसी आपदा से निबटने की हर संभव उपाय करने को कहा है.

रांची उपायुक्त सख्त, आंगनबाड़ी निर्माण कार्य में ढिलाई बरतने वाले अधिकारियों को नोटिस जारी

रांची. उपायुक्त रांची ने समाहरणालय स्थित सभागार में समाज कल्याण, सामाजिक सुरक्षा एवं स्वास्थ्य विभाग से संबंधित योजनाओं की विस्तृत समीक्षा बैठक बुधवार को की। उन्होंने कांके, ओरमांझी एवं रातू अंचल द्वारा आंगनबाड़ी भवन निर्माण के लिए भूमि विवरण उपलब्ध नहीं कराने पर संबंधित अंचल अधिकारियों को शोकाज किया। उन्होंने स्वास्थ्य एवं समाज कल्याण विभाग के संयुक्त समन्वय पर बल दिया। आंगनबाड़ी केंद्रों के भवन निर्माण कार्य की समीक्षा के क्रम में उपायुक्त मंजूनाथ भजन्त्री ने मनरेगा अभिसरण से निर्माणाधीन आंगनबाड़ी केंद्रों को प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र पूर्ण कराने के निर्देश दिये। साथ ही महिला पर्यवेक्षिकाओं को भवन निर्माण हेतु भूमि चिन्हित करने का निर्देश दिया गया। कांके, ओरमांझी एवं रातू अंचल द्वारा आंगनबाड़ी भवन निर्माण हेतु भूमि विवरण उपलब्ध नहीं कराने पर नाराजगी व्यक्त करते हुए संबंधित अंचल अधिकारियों से कारण पृच्छा करने का निर्देश दिया गया। संस्थागत प्रसव एवं टीकाकरण कार्यक्रम पर विशेष जोर जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त मंजूनाथ भजन्त्री ने संस्थागत प्रसव की समीक्षा करते हुए उपायुक्त ने ड्यू-लिस्ट के अनुसार शत-प्रतिशत उपलब्धि सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक गर्भवती महिला तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचनी चाहिए तथा सुरक्षित मातृत्व को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने वीएचएसएनडी के माध्यम से टीकाकरण कार्यक्रम को प्रभावी रूप से संचालित करने तथा प्रत्येक योग्य लाभार्थी तक सेवाएं पहुंचाने पर विशेष बल दिया। पोषण ट्रैकर ऐप एवं अपार आईडी निर्माण में तेजी लाने का निर्देश उपायुक्त ने सभी बाल विकास परियोजना पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि पोषण ट्रैकर ऐप में शत-प्रतिशत डाटा एंट्री सुनिश्चित की जाए ताकि योजनाओं की मॉनिटरिंग प्रभावी एवं पारदर्शी तरीके से हो सके। साथ ही सभी आंगनबाड़ी केंद्रों के बच्चों का अपार आईडी निर्माण कार्य अविलंब पूर्ण करने का निर्देश भी दिया गया। एमटीसी केंद्रों की मानिटरिंग एवं सफलता की कहानियों के संकलन पर जोर मंजूनाथ भजन्त्री द्वारा एमटीसी में इलाजरत बच्चों की सक्सेस स्टोरी तैयार करने एवं सभी एमटीसी केंद्रों का व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर नियमित अनुश्रवण करने का निर्देश दिया गया। रेनवाटर हार्वेस्टिंग एवं मूलभूत सुविधाओं को लेकर निर्देश उपायुक्त ने आंगनबाड़ी केंद्रों में रेनवाटर हार्वेस्टिंग निर्माण के लंबित कार्यों को अविलंब पूर्ण कराने हेतु कार्यकारी एजेंसी पेयजल एवं स्वच्छता प्रमंडल को निर्देशित किया। इसके अतिरिक्त सभी आंगनबाड़ी सेविका एवं सहायिकाओं के पास क्रियाशील शौचालय होने संबंधी प्रमाण-पत्र प्राप्त करने का निर्देश भी संबंधित पदाधिकारियों को दिया गया। बैठक में उपायुक्त मंजूनाथ भजन्त्री ने आंगनबाड़ी सेविका एवं सहायिकाओं के रिक्त पदों पर विभागीय नियमों के अनुरूप शीघ्र नियुक्ति प्रक्रिया पूर्ण करने का निर्देश दिया गया।

रांची में वन मेला, स्थानीय उत्पाद और आदिवासी अर्थव्यवस्था को बढ़ावा

रांची  झारखंड की जैव विविधता को पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण स्थान मिला हुआ है। देश और दुनिया को इसके संरक्षण प्रयास और इसमें हुई वृद्धि से परिचित कराने के लिए वन एवं पर्यावरण विभाग अक्टूबर में राष्ट्रीय स्तर पर मेला का आयोजन कर रहा है। दुनिया भर के पर्यावरणविद, आदिवासी अर्थव्यवस्था पर काम करने वाले लोगों को झारखंड की वन संपदा और इससे जुड़े आजीविका के प्रयासों से परिचित कराया जाएगा। मेले में लगने वाले स्टाल में राज्य के वनवासी क्षेत्र में रहने वाले युवा और उद्यमी अपने उत्पादों का प्रदर्शन और बिक्री करेंगे। वन मेला में वेलनेस उत्पादों में हुए नवाचार को भी दिखाया जाएगा। राज्य में वनोत्पाद से होने वाला कारोबार करीब 1500 करोड़ रुपए का है। राष्ट्रीय वन मेला के जरिए इसके अंतर्राष्ट्रीय चेन को विकसित कर करीब 3000 करोड़ के कारोबार का लक्ष्य बनाया जाएगा एक ही जगह तुलसी-आंवला से लेकर महुआ और करंज तक के उत्पाद होंगे वन मेला में लघु वन उपज और इसके औषधीय महत्व को दिखाने वाले स्टाल होंगे। एक ही जगह लोगों को सौंदर्य प्रसाधन से लेकर स्वास्थ्य में उपयोगी शहद भी मिलेगा। मेले में आने वाले विशेषज्ञों का अलग से सत्र भी होगा, जिसमें युवाओं को उत्पाद बनाने और इसकी मार्केटिंग की ट्रेनिंग दी जाएगी। इसके अलावा हरित उद्योग को बढ़ावा देने और इसमें युवा के साथ महिलाओं की खास भागीदारी की योजना पर मेले में प्रदर्शनी लगाई जाएगी। वन विभाग के अधिकारियों ने बताया के मेले का मुख्य उद्देश्य ही ग्रामीणों और वनवासियों को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराना और उनकी आमदनी बढ़ाना है। बाहर के उद्यमी और स्टार्टअप को प्रोत्साहन राष्ट्रीय वन मेले में स्टार्टअप को प्रोत्साहन देने वाले बैंक, वित्तीय संस्थाओं को भी आमंत्रित किया गया है। इसमें वनोत्पाद पर काम करने वाले राज्य से बाहर के उद्यमियों को भी बुलाया गया है। राज्य में वनोत्पाद के क्षेत्र में रोजगार सृजन और अर्थव्यवस्था के नए स्रोत बनाने के लिए मेले में राज्य सरकार की तैयारियां भी दिखाई जाएंगी।  

दाखिल-खारिज और रजिस्ट्री घोटालों पर कार्रवाई, सरकार ने उठाया बड़ा कदम

पटना  बिहार में जमीन से जुड़े फर्जीवाड़े, दाखिल-खारिज में गड़बड़ी और अंचल कार्यालयों में फैले भ्रष्टाचार पर अब सरकार सख्त हो गई है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग में पारदर्शिता लाने के लिए बिहार सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने पहली बार आर्थिक अपराध इकाई (EOU) के अधीन एक विशेष सेल का गठन किया है, जो जमीन विवाद, फर्जी दस्तावेज, अवैध रजिस्ट्री और भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की जांच करेगा। इस फैसले के बाद जमीन माफियाओं और बिचौलियों में हड़कंप मचा हुआ है। अब सीधे होगी जांच और कार्रवाई सरकार की ओर से बनाए गए इस विशेष सेल में DSP से लेकर इंस्पेक्टर, SI और ASI स्तर तक के अधिकारियों की तैनाती की गई है। यानी यह टीम सिर्फ शिकायतें सुनने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि मौके पर जांच, छापेमारी और कानूनी कार्रवाई भी करेगी। बताया जा रहा है कि कई जिलों में सरकारी जमीन की खरीद-बिक्री, फर्जी जमाबंदी और गलत तरीके से दाखिल-खारिज कराने की लगातार शिकायतें मिल रही थीं। इन्हीं मामलों को देखते हुए सरकार ने यह सख्त फैसला लिया है। अंचल कार्यालयों में फैली घूसखोरी पर शिकंजा राज्य में लंबे समय से लोगों की शिकायत रही है कि जमीन की रजिस्ट्री, म्यूटेशन, रसीद कटाने और दाखिल-खारिज के लिए कार्यालयों में रिश्वत देनी पड़ती है। कई जगह बिचौलियों का नेटवर्क भी सक्रिय बताया जाता रहा है। अब सरकार का दावा है कि नए सेल की निगरानी से ऐसे मामलों पर लगाम लगेगी। भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों की पहचान कर उनके खिलाफ भी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। यह विशेष सेल आर्थिक अपराध इकाई यानी EOU के अधीन काम करेगा। EOU पहले से ही आर्थिक अपराध और बड़े घोटालों की जांच के लिए जानी जाती है। ऐसे में जमीन से जुड़े मामलों में भी तकनीकी जांच और डिजिटल निगरानी को मजबूत किया जाएगा। सरकार को उम्मीद है कि इससे फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले गिरोह और जमीन कब्जाने वाले नेटवर्क का खुलासा आसान होगा। साथ ही लंबित मामलों के निपटारे में भी तेजी आ सकती है। आम लोगों को मिल सकती है बड़ी राहत सरकार का कहना है कि इस नई व्यवस्था का सबसे ज्यादा फायदा आम लोगों को मिलेगा। खासकर वे लोग जो जमीन के कागजात, दाखिल-खारिज या रजिस्ट्री को लेकर महीनों दफ्तरों के चक्कर लगाते हैं। नई निगरानी व्यवस्था लागू होने के बाद पारदर्शिता बढ़ने और भ्रष्टाचार कम होने की उम्मीद जताई जा रही है। अब देखना होगा कि सरकार का यह बड़ा कदम जमीन माफियाओं और भ्रष्ट नेटवर्क पर कितना असर डाल पाता है।