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गूगल सर्च पर फर्जी नंबर से साइबर फ्रॉड, इलाज में देरी से गई जान

जमशेदपुर लौहनगरी में साइबर अपराधियों की संवेदनहीनता का एक खौफनाक चेहरा सामने आया है। ठगों ने न केवल एक परिवार की गाढ़ी कमाई लूटी, बल्कि उनकी मदद की उम्मीद तोड़कर एक मरीज की जान भी जोखिम में डाल दी। मानगो निवासी आरएन चौहान से ठगों ने एयर एंबुलेंस उपलब्ध कराने के नाम पर 8 लाख रुपये की ठगी कर ली। समय पर एंबुलेंस न मिलने के कारण मरीज को हैदराबाद नहीं ले जाया जा सका, जिससे उनकी मृत्यु हो गई। इलाज की जल्दबाजी का उठाया फायदा शिकायतकर्ता आरएन चौहान के अनुसार, उनके रिश्तेदार मोहन सिंह की स्थिति गंभीर थी और वे जमशेदपुर के TMH (टाटा मुख्य अस्पताल) के CCU में भर्ती थे। चिकित्सकों ने उनकी नाजुक स्थिति को देखते हुए बेहतर इलाज के लिए हैदराबाद रेफर करने की सलाह दी थी। परिजनों ने आनन-फानन में इंटरनेट पर एयर एंबुलेंस सेवा की तलाश शुरू की। सर्च इंजन (Google) पर मिले एक नंबर पर संपर्क करने पर अपराधियों ने खुद को एक प्रतिष्ठित एयर एंबुलेंस कंपनी का प्रतिनिधि बताया। सौदा 8 लाख रुपये में तय हुआ, जिसे परिजनों ने तुरंत ऑनलाइन ट्रांसफर कर दिया। पैसे मिलते ही शुरू हुई बहानेबाजी रकम ट्रांसफर होने के बाद, कथित कंपनी ने एंबुलेंस भेजने के नाम पर टालमटोल शुरू कर दी। कभी तकनीकी खराबी तो कभी क्लीयरेंस का बहाना बनाया गया। परिजन परेशान होते रहे जब तक परिजनों को ठगी का अहसास हुआ और वे वैकल्पिक व्यवस्था करते, तब तक काफी देर हो चुकी थी। पर्याप्त चिकित्सा संसाधनों के अभाव और समय पर शिफ्टिंग न होने के कारण मरीज मोहन सिंह ने दम तोड़ दिया। ऐसे करते हैं बदमाशी 1. खोज नहीं सावधानी जरूरी: साइबर अपराधी अक्सर गूगल एड्स का सहारा लेकर फर्जी वेबसाइट्स और नंबरों को टॉप सर्च में लाते हैं। लोग मुसीबत के वक्त पहले या दूसरे नंबर पर भरोसा कर लेते हैं। इसे Search Engine Result Page (SERP) Poisoning कहा जाता है। 2. एयर एंबुलेंस का औसत खर्च: आमतौर पर भारत में एयर एंबुलेंस का खर्च दूरी और सुविधाओं के आधार पर 5 लाख से 15 लाख रुपये तक होता है। अपराधी इसी रेंज का फायदा उठाकर लोगों को असली होने का भरोसा दिलाते हैं। 3. आधिकारिक स्रोत: किसी भी आपातकालीन हवाई सेवा के लिए केवल DGCA (नागरिक उड्डयन महानिदेशालय) द्वारा प्रमाणित ऑपरेटरों या बड़े निजी अस्पतालों के आधिकारिक पैनल पर ही भरोसा करना चाहिए। बचाव के लिए क्या करें?     सत्यापन: केवल वेबसाइट पर दिए नंबर पर भरोसा न करें। कंपनी का भौतिक पता और रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट मांगें।     अस्पताल की मदद लें: TMH जैसे बड़े अस्पतालों का अपना पैनल होता है या वे विश्वसनीय सेवाएं सुझाते हैं। बाहरी अज्ञात स्रोत के बजाय अस्पताल प्रशासन से संपर्क करें     पेमेंट गेटवे: सीधे बैंक ट्रांसफर या UPI के बजाय आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से भुगतान की कोशिश करें, हालांकि आपात स्थिति में यह कठिन होता है।     शिकायत: ऐसी किसी भी ठगी होने पर तुरंत 1930 पर कॉल करें या www.cybercrime.gov.in पर रिपोर्ट दर्ज करें।  

Census 2027: रांची नगर निगम की पहल, 16 भाषाओं में ऑनलाइन जनगणना सुविधा

रांची  जनगणना 2027 के तहत स्व-गणना (स्वयं विवरण भरने) विषय पर बुधवार को रांची नगर निगम में एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता आयोजित की गई। इस बैठक की अध्यक्षता रौशनी खलखो ने की, जबकि उप महापौर नीरज कुमार, नगर आयुक्त सुशांत गौरव एवं अपर नगर आयुक्त संजय कुमार उपस्थित रहे। इस अवसर पर बताया गया कि इस बार जनगणना प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल और जनभागीदारी आधारित होगी। नागरिक अब अपने मोबाइल फोन के माध्यम से स्वयं अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे, जिससे प्रक्रिया अधिक सरल, पारदर्शी और प्रभावी बनेगी। स्व-गणना (स्वयं विवरण भरना) के तहत लोगों को स्व-गणना जनगणना की एक ऐसी व्यवस्था है, जिसमें निवासी अपने परिवार से संबंधित जानकारी स्वयं आनलाइन भरकर जमा करते हैं। वही नागरिक 1 मई से 15 मई तक अपने मोबाइल के https://se.census.gov.in/⁠ के माध्यम से स्व-गणना कर सकेंगे। 16 मई से 14 जून तक मकान सूचीकरण इसके बाद यह सुविधा बंद कर दी जाएगी। इस चरण में सबसे पहले मकान सूचीकरण (घर-घर का विवरण) किया जाएगा, जिसके बाद जनसंख्या गणना शुरू होगी। इसके अतिरिक्त 16 मई से 14 जून तक मकान सूचीकरण का कार्य किया जाएगा। नागरिक आधिकारिक वेबसाइट के माध्यम से अपनी जानकारी दर्ज कर सकते हैं। महापौर रौशनी खलखो ने नागरिकों से निर्धारित अवधि में स्व-गणना पूरा करने की अपील करते हुए कहा कि यह हर नागरिक की जिम्मेदारी है कि वह इस राष्ट्रीय कार्य में सक्रिय भागीदारी निभाए, ताकि भविष्य की योजनाओं के लिए सटीक आंकड़े उपलब्ध हो सकें। लोगों को डेटा रहेगा सुरक्षित को लेकर नगर आयुक्त सुशांत गौरव ने बताया कि यह डिजिटल जनगणना रांची नगर निगम के लिए एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। मकान गणना के दौरान कुल 34 प्रश्न पूछे जाएंगे और नागरिकों को 16 भाषाओं में फार्म भरने की सुविधा मिलेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी स्थिति में ओटीपी (एक बार उपयोग होने वाला पासवर्ड) या संवेदनशील व्यक्तिगत जानकारी नहीं मांगी जाएगी तथा सभी जानकारी पूरी तरह सुरक्षित और गोपनीय रहेगी। टोल फ्री नंबर 1855 जारी किया गया जनगणना प्रक्रिया को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए 1 जनवरी 2026 से 31 मार्च 2027 तक सभी प्रशासनिक इकाइयों की सीमाएं स्थिर रहेंगी। इस दौरान कोई नया वार्ड या नगर निकाय नहीं बनाया जाएगा। नागरिकों से अपील की गई है कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें। कोई भी अधिकारी आपसे ओटीपी या दस्तावेज की मांग नहीं करेगा। केवल फार्म में पूछी गई जानकारी ही भरनी होगी। अधिक जानकारी के लिए टोल फ्री नंबर 1855 जारी किया गया है। इस अवसर पर जनप्रतिनिधि, रांची विश्वविद्यालय के प्रतिनिधि, जनगणना संचालन निदेशालय के संयुक्त निदेशक सत्येंद्र कुमार गुप्ता, नगर निगम के अधिकारी एवं मीडिया प्रतिनिधि मौजूद थे।

एफएमसीजी उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी, आम लोगों की जेब पर बढ़ा बोझ

रांची ईरान-इजरायल और अमेरिका के बीच चल रहे युद्ध का असर अब आम लोगों की जेब पर भी पड़ने लगा है। दरअसल, आम दिनचर्या में शामिल होने वाली वस्तुएं सर्फ, साबुन, टूथपेस्ट, बिस्किट आदि की कीमतों में इजाफा कर दिया गया है। इससे हर किसी के जेब पर हर दिन भार पड़ना शुरू हो गया है। मिली जानकारी के अनुसार, फास्ट मूविंग कंज्यूमर गुड्स (एफएमसीजी) कंपनियों ने वस्तुओं की की मतों में बढ़ोतरी शुरू कर दी है। इसमें साबुन-सर्फ, टूथपेस्ट से लेकर बिस्किट, बैटरी आदि की कीमतों में एक से लेकर 26 रुपये तक की बढ़ोतरी की है। इस बढ़ोतरी की वजह कंपनियां युद्ध के कारण रॉ मैटेरियल की कीमतों में हुई वृद्धि को बता रही हैं। सबसे अधिक बढ़ोतरी 26 रुपये आधा किलो वाले स्टैंडर्ड हॉर्लिक्स के पाउच में की गई है। इनो, बैटरी और कपड़ा धोने वाले साबुन समेत कई उत्पादों में एक रुपये प्रति पीस की वृद्धि की गई है। इसके अलावा अन्य उत्पादों के दामों में वृद्धि की गई है। डीजल महंगा हुआ दूसरा कारण इंडस्ट्रियल डीजल की कीमतों में इजाफा है। डीजल महंगा होने से उत्पादन लागत और परिवहन खर्च बढ़ा है। इसका असर कंपनियों के कुल खर्च पर पड़ा है, जिसे वे कीमत बढ़ाकर संतुलित कर रही हैं। पैकिंग लागत बढ़ी सबसे पहला कारण क्रूड ऑयल की कीमतों में वृद्धि है। कच्चे तेल के महंगे होने से प्लास्टिक, पैकेजिंग और अन्य पैकिंग मैटेरियल की लागत बढ़ गई है, जिसका सीधा असर उत्पादों की एमआरपी पर पड़ा है। कच्चे माल की कीमतों में लगातार वृद्धि कच्चे माल यानी रॉ मैटेरियल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी है। कई उत्पादों में इस्तेमाल होने वाले बेसिक इनपुट महंगे हो गए हैं, जिससे सहायक (सब्सिडियरी) इकाइयों का उत्पादन भी प्रभावित हुआ है। जेसीपीडीए के मुताबिक कीमतों में वृद्धि के 3 कारण झारखंड कंज्यूमर प्रोडक्ट्स डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन (जेसीपीडीए) के अध्यक्ष संजय अखौरी के अनुसार, एफएमसीजी उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी के पीछे तीन प्रमुख वजह हैं। क्रूड ऑयल, डीजल और रॉ मैटेरियल के दाम बढ़े हैं। हज के विमान किराये में 10 हजार रुपए की बढ़ोतरी केंद्रीय हज कमेटी ने आजमीन ए हज के विमान किराए में वृद्धि कर दी है। 15 मई तक हर आजमीन ए हज को 10 हजार रुपए अतिरिक्त विमान किराया देना होगा। केंद्रीय हज कमेटी ने इससे संबंधित आदेश जारी किया है। हज कमेटी के खुर्शीद अनवर ने बताया कि विमान किराया में अचानक वृद्धि की गई है, जिसकी वजह से केंद्रीय हज कमेटी ने सभी हज यात्रियों से आग्रह किया है कि निर्धारित समय तक हर हाल में कमेटी की वेबसाइट या ऐप पर बढ़ी हुई राशि जमा करें, नहीं तो हज यात्रियों को यात्रा में असुविधा हो सकती है। बता दें कि झारखंड के हज यात्रियों की कोलकाता एम्बारकेशन प्वाइंट से 18 अप्रैल से जेद्दा के लिए रवानागी शुरू हुई। 30 अप्रैल को हज यात्रियों का आखिरी काफिला जेद्दा के लिए रवाना होगा।

चीफ मिनिस्टर ई-गवर्नेंस फेलो योजना शुरू, छात्रों को मिलेगी फेलोशिप

 रांची  राज्य के विभिन्न विभागों द्वारा संचालित योजनाओं का मूल्यांकन वर्तमान में थर्ड पार्टी के रूप में चयनित निजी एजेंसियों द्वारा ही कराया जाता रहा है। अब राज्य सरकार ने इस कार्य में स्नातकोत्तर छात्र-छात्राओं को भी लगाने का निर्णय लिया है। इसके लिए उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग चीफ मिनिस्टर ई-गवर्नेंस फेलो योजना शुरू करेगा, जिसका प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है। बुधवार को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में झारखंड काउंसिल आन साइंस, टेक्नोलाजी एंड इनोवेशन की सामान्य सभा की हुई बैठक में भी इस प्रस्ताव पर चर्चा हुई। प्रस्तावित चीफ मिनिस्टर ई-गवर्नेंस फेलो योजना के तहत विभिन्न विभागों द्वारा संचालित योजनाओं का मूल्यांकन स्नातकोत्तर छात्रों द्वारा किया जाएगा। इसके लिए बकायदा उन्हें फेलोशिप भी प्रदान की जाएगी। स्नातकोत्तर छात्र न केवल योजनाओं का मूल्यांकन करेंगे, बल्कि योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन में आवश्यक तकनीकी सहयोग भी प्रदान करेंगे। उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग ने चीफ मिनिस्टर रिसर्च फेलोशिप स्कीम के ही एक कंपोनेंट के रूप में इसे शुरू करने का निर्णय लिया है।   किसी क्षेत्र के विकास व प्रोजेक्ट पर काम करेंगे पीएचडी छात्र इस स्कीम के एक अन्य कंपोनेंट के तहत झारखंड के चिह्नित क्षेत्रों के विकास के लिए शोध कार्य करने तथा किसी खास प्रोजेक्ट आधारित शोध के लिए फेलोशिप प्रदान की जाएगी। यह फेलोशिप कार्यक्रम पीएचडी विद्यार्थियों के लिए होगा। झारखंड काउंसिल आन साइंस, टेक्नोलाजी एंड इनोवेशन ऐसे क्षेत्रों तथा प्रोजेक्ट की पहचान करेगा, जिनमें शोध किया जाना है। इसके लिए विशेषज्ञ टीम गठित की जाएगी। क्षेत्रों एवं प्रोजेक्ट की पहचान के बाद विज्ञापन प्रकाशित कर इसके लिए अर्हता प्राप्त विद्यार्थियों से आवेदन मंगाए जाएंगे। विशेषज्ञ टीम उन आवेदनों की स्क्रूटनी कर योग्य अभ्यर्थियों की अनुशंसा काउंसिल को करेगी।

सीएस कार्यालय पर घूसखोरी का गंभीर मामला, स्वास्थ्य विभाग ने जांच के दिए आदेश

पटना  बिहार के सरकारी स्वास्थ्य महकमे पर निजी स्वास्थ्य प्रतिष्ठानों से अवैध वसूली का आरोप लगा है। मुजफ्फरपुर सिविल सर्जन कार्यालय के कर्मियों द्वारा जिले के अल्ट्रासाउंड संचालकों से लाइसेंस रिन्यूअल के नाम पर प्रत्येक माह हर केंद्र से दो हजार रुपये की अवैध वसूली का मामला सामने आया है। शहर के अल्ट्रासाउंड संचालकों ने इसकी लिखित शिकायत स्वास्थ्य विभाग मुख्यालय से की है। इसके बाद विभाग ने इसकी जांच के आदेश दिए हैं। अनुमान के अनुसार सिर्फ मुजफ्फरपुर में ही मंथली वसूली का आंकड़ा 60 लाख से अधिक है। राज्य के अन्य जिलों में ऐसी वसूली की संभावना पर विभाग विचार कर रहा है। जांच कर कार्रवाई का आदेश आने के बाद मुजफ्फरपुर स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मचा है अल्ट्रासाउंड संचालकों ने शिकायत में कहा है कि प्रावधानो के अनुसार अल्ट्रासाउंड केंद्र चलाने के लाइसेंस का रिन्यूअल ऑनलाइन किया जाना है। इसके बावजूद सीएस कार्यालय के संबंधित कर्मचारी संचालकों को ऑफलाइन फॉर्म भरने और उसे विशेष दूत के माध्यम से जमा करने को बाध्य करते हैं। ऑफलाइन आवेदन जमा करने गए व्यक्ति से दो हजार रुपये की वसूली के बाद ही आवेदन जमा किया जाता है। समाजसेवी संस्थाओं से भी शिकायत मिली संचालकों की शिकायत के बाद इस मामले में स्वास्थ्य निदेशक प्रमुख डॉ. रेखा झा ने सिविल सर्जन को जांच कर कार्रवाई करने का आदेश दिया है। निदेशक प्रमुख ने कहा है कि संचालकों के अलवा समाजसेवी संस्थाओं से भी शिकायत मिली है। इसकी जांच के लिए कमेटी का गठन किया जाए और दोषी कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए विभाग को सूचित किया जाए। साथ ही उन्होंने यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि सभी तरह के आवेदन पोर्टल पर ऑनलाइन हों। तीन हजार से अधिक सेंटर से लिए ऑफलाइन आवेदन स्वास्थ्य निदेशक प्रमुख ने निर्देश के साथ जिले के लाइसेंस रिन्यूअल का आंकड़ा भी भेजा है। उन्होंने बताया कि अगस्त 2025 में विभाग को अकेले मुजफ्फरपुर से अल्ट्रासाउंड सेंटरों के लाइसेंस रिन्यूअल के 3401 आवेदन ऑफलाइन प्राप्त हुए। शिकायत में संचालकों ने यह भी आरोप लगाया है कि वसूली करने वाले कर्मियों की शह पर ही अवैध अल्ट्रासाउंड सेंटर चलाए जा रहे हैं। क्या कहते हैं अधिकारी? इस मामले में मुजफ्फरपुर के प्रभारी सीएस डॉ सीके दास ने कहा है कि सिविल सर्जन अवकाश पर हैं। उन्हें इस मामले की पूरी जानकारी नहीं हैं। विभाग से जो आदेश आया है उनका पूरी तरह से अनुपालन कराया जाएगा। शिकायतकर्ताओं से भी जानकारी ली जाएगी। सभी अल्ट्रासाउंड केंद्रों के संचालन पर विभाग की नजर है।

बिहार सरकार का निर्णय: पटना चिड़ियाघर अब ‘पटना जू’, बदला गया संस्थानों का नाम

पटना बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की सरकार ने पटना चिड़ियाखाना और डेयरी तकनीकी संस्थान से संजय गांधी के नाम को हटाने का फैसला लिया है। सीएम सम्राट की अध्यक्षता में बुधवार की शाम बिहार कैबिनेट की बैठक ने इमरजेंसी लगाने के सूत्रधार कांग्रेस के दिवंगत नेता संजय गांधी का नाम राज्य के दो प्रमुख संस्थानों से डिलीट कर दिया है। पटना के मशहूर संजय गांधी जैविक उद्यान को अब पटना जू के नाम से जाना जाएगा। आम लोग पहले भी इसे पटना का चिड़ियाखाना या पटना जू ही कहते थे, लेकिन कागज पर नाम संजय गांधी से ही शुरू होता था। वन और पर्यावरण विभाग के अंतर्गत जू को संचालित करने वाली समिति का नाम संजय गांधी जैविक उद्यान प्रबंधन एवं विकास समिति से पटना जू प्रबंधन एवं विकास सोसाइटी कर दिया गया है। इसी तरह राज्य के डेयरी, मत्स्य और पशु संसाधन विभाग के तहत चल रहे संजय गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ डेयरी टेक्नोलॉजी का नाम बदलकर बिहार स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ डेयरी टेक्नोलॉजी, पटना करने का भी फैसला कैबिनेट ने लिया है। बिहार पुश चिकित्सा विश्वविद्यालय के तहत चल रहे इस संस्थान में डेयरी टेक्नोलॉजी, डेयरी इंजीनियरिंग, डेयरी केमिस्ट्री, डेयरी माइक्रोबायलॉजी, डेयरी बिजनेस मैनेजमेंट और डेयरी एक्सटेंशन एजुकेशन विभागों में अलग-अलग कोर्स के जरिए छात्र-छात्राओं को पेशेवर शिक्षा दी जाती है। 1973 में चालू हुआ था संजय गांधी जैविक उद्यान संजय गांधी जैविक उद्यान 1973 में आम लोगों के लिए खुला था। 1969 में तत्कालीन राज्यपाल नित्यानंद कानूनगो ने राजभवन की 34 एकड़ जमीन वनस्पति उद्यान के लिए दी थी। 1972 में इसमें सरकार ने लगभग 120 एकड़ जमीन और जोड़कर इसे जैविक उद्यान और बोटैनिकल पार्क का रूप दे दिया। पटना जू में इस समय 110 प्रजातियों के लगभग 800 जीव-जंतु हैं, जिसमें बाघ, शेर, राइनो वगैरह शामिल हैं। वनस्पति उद्यान में लगभग 300 तरह के पेड़-पौधे हैं। बड़े चिड़ियाघर में पटना जू का देश में चौथा स्थान है। 1980 में स्थापित हुआ था संजय गांधी गव्य प्रावैधिकी संस्थान कांग्रेस शासनकाल के दौरान ही संजय गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ डेयरी टेक्नोलॉजी की स्थापना 1980 में हुई थी। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद से मान्यता प्राप्त इस डेयरी संस्थान का पहला बैच पूसा के राजेंद्र कृषि विश्वविद्यालय में 1982 में आया। 1986 में संस्थान को पटना लाया गया और 1999 में यह अपने मौजूदा कैंपस में गया। बीच में कुछ समय संस्थान को बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर से भी जोड़ दिया गया था। 2016 में बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय की स्थापना के बाद संस्थान को इससे जोड़ दिया गया।

पथ निर्माण विभाग के टेंडर नियमों में बदलाव, बिहार के संवेदकों को मिलेगा फायदा

पटना बिहार में पथ निर्माण विभाग की सड़क निर्माण योजना में 25 लाख से 50 करोड़ रुपये तक के काम के टेंडर में बिहार के ठेकेदारों को प्राथमिकता देने का राज्य सरकार ने नीतिगत फैसला कर लिया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में बुधवार की शाम बिहार कैबिनेट की बैठक में सरकार ने 25 लाख से ऊपर और 50 करोड़ तक के सिविल कार्य के लिए राज्य स्तरीय संवेदकों को तरजीह देगी। इस फैसले को अमल में लाने के लिए मंत्रिमंडल ने बिहार लोक निर्माण संहिता में जरूरी बदलाव करने को मंजूरी दी है। सरकार के फैसले से स्थानीय ठेकेदारों को मिलने वाले काम की संख्या में बढ़ोतरी होगी। राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता और नेता भी बड़ी संख्या में स्थानीय स्तर पर ठेकेदारी का काम करते हैं। पूर्व सीएम नीतीश कुमार की सरकार के दौरान बिहार सरकार ने 2026-27 का बजट पेश किया था। उस बजट में पथ निर्माण विभाग और ग्रामीण कार्य विभाग के लिए 18716 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था। बजट मांगों पर चर्चा के दौरान विधानसभा में तत्काली पथ निर्माण मंत्री दिलीप जायसवाल ने कहा था कि सरकार 'विकसित बिहार' के विजन को गति देने के लिए निरंतर समर्पित है। जायसवाल ने सदन में कहा था कि ​राज्य में सुगम कनेक्टिविटी के लिए जेपी गंगा पथ के विस्तार सहित 16,465 करोड़ से अधिक की नई योजनाओं की स्वीकृति प्रदान की गई है। बेहतरीन सड़कें और आधुनिक सेतु सशक्त बिहार की पहचान बनेंगे। दिलीप जायसवाल ने बताया था कि राज्य में सड़कों के निर्माण के लिए बजटीय प्रावधान की ज्यादा जरूरत नहीं है। सड़क निर्माण के लिए एडीबी, विश्व बैंक, नाबार्ड सहित विभिन्न वित्तीय संस्थाओं से राशि ली जाती है। एनएच का निर्माण केंद्र सरकार करती है। तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की प्रगति यात्रा का जिक्र करते हुए जायसवाल ने कहा था कि इस दौरान 23,974.97 करोड़ रुपये की लागत वाली 137 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई थी। उसमें 111 योजनाओं का काम ठेकेदारों को आवंटित किया जा चुका है और सभी योजनाओं में कार्य प्रगति पर है। पिछले एक साल में 14,757 करोड़ रुपये की 129 अन्य परियोजनाओं को भी मंजूरी दी गई, जो क्रियान्वयन के विभिन्न चरणों में प्रक्रियाधीन है। सम्राट चौधरी कैबिनेट की आज की बैठक के महत्वपूर्ण फैसले आगे पढ़ें।

समृद्धि माइक्रो फाइनेंस का फर्जीवाड़ा उजागर, सैकड़ों ग्रामीण महिलाएं बनीं शिकार

गया गया जिले में माइक्रोफाइनेंस कंपनी के नाम पर ग्रामीण महिलाओं से ठगी का बड़ा मामला सामने आया है। आसान लोन और घरेलू सामान दिलाने के नाम पर महिलाओं से हजारों रुपये जमा कराए गए, लेकिन बाद में कंपनी का कार्यालय बंद मिलने से पूरा मामला उजागर हुआ। 60 हजार के लोन का दिया था लालच जानकारी के अनुसार, डोभी थाना क्षेत्र में संचालित “समृद्धि माइक्रो फाइनेंस” नामक कंपनी ने ग्रामीण महिलाओं को 60 हजार रुपये का लोन दिलाने का लालच दिया था। इसके बदले उन्हें पहले कूलर, फ्रिज और टीवी जैसे सामान खरीदने के लिए प्रेरित किया गया। इस योजना के झांसे में आकर सैकड़ों महिलाओं ने आवेदन किया। पांच हजार रुपये प्रति व्यक्ति कराए थे जमा कंपनी के प्रतिनिधियों ने महिलाओं से करीब पांच हजार रुपये प्रति व्यक्ति जमा कराए और आश्वासन दिया कि अगले दिन उन्हें सामान और लोन की प्रक्रिया पूरी कर दी जाएगी। भरोसे में आकर बड़ी संख्या में महिलाएं डोभी नगर पंचायत स्थित बुधनी बाजार कार्यालय पहुंचीं। लेकिन बुधवार सुबह जब महिलाएं दोबारा कार्यालय पहुंचीं तो वहां ताला लटका मिला। काफी इंतजार के बाद भी कोई कर्मचारी नहीं आया, जिसके बाद महिलाओं को ठगी का एहसास हुआ। देखते ही देखते मौके पर भीड़ जमा हो गई और महिलाओं में आक्रोश फैल गया। कई महिलाएं रोने लगीं। घटना की सूचना मिलते ही डोभी थाना पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। पुलिस आसपास के लोगों और दुकानदारों से पूछताछ कर रही है तथा कंपनी से जुड़े लोगों की पहचान करने में जुटी है। शुरुआती जांच में यह मामला सुनियोजित ठगी का प्रतीत हो रहा है। पीड़ित महिलाओं ने प्रशासन से दोषियों की जल्द गिरफ्तारी और अपनी जमा राशि की वापसी की मांग की है।  

वैशाली में 12 केसों में अनुसंधानकर्ताओं की गलती, डिफॉल्ट बेल से बाहर आए आरोपी

पटना बिहार में आपराधिक मामलों की जांच में गंभीर लापरवाही का बड़ा मामला सामने आया है। बीते तीन माह के भीतर राज्यभर में संगीन मामलों के 75 आरोपितों को सिर्फ इस वजह से जमानत मिल गई क्योंकि पुलिस तय समय सीमा के भीतर आरोप पत्र (चार्जशीट) न्यायालय में दाखिल नहीं कर सकी। चार्जशीट दाखिल करने में हुई देरी के कारण अदालतों ने इन आरोपितों को डिफॉल्ट बेल दे दी। चार्जशीट में देरी बनी राहत की वजह जांच में सामने आया है कि अधिकांश मामलों में अनुसंधानकर्ताओं ने समय पर केस डायरी और आरोप पत्र कोर्ट में प्रस्तुत नहीं किया। दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 167(2) (अब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 187(2)) के तहत यदि तय समय में चार्जशीट दाखिल नहीं होती है तो अभियुक्त को डिफॉल्ट बेल का अधिकार मिल जाता है। इसी प्रावधान का लाभ उठाकर कई कुख्यात अपराधी जेल से बाहर आ गए। वैशाली के 12 अनुसंधानकर्ता चिन्हित राज्य स्तर पर समीक्षा के दौरान सामने आए 75 मामलों में वैशाली जिले के 12 मामले भी शामिल हैं, जहां अनुसंधानकर्ताओं की लापरवाही के कारण आरोपितों को राहत मिली। इनमें से 11 पुलिस अधिकारी अभी भी वैशाली जिले के विभिन्न थानों में पदस्थापित हैं, जबकि एक अधिकारी का तबादला सीतामढ़ी कर दिया गया है। इस संबंध में संबंधित एसपी को भी जानकारी भेज दी गई है और सभी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई वैशाली में ही चलाई जाएगी। लापरवाह अधिकारियों के जवाब असंतोषजनक मुख्यालय डीएसपी अबू जफर इमाम ने सभी मामलों की जांच कर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा की है। अधिकारियों से स्पष्टीकरण भी मांगा गया, लेकिन अधिकांश ने वर्कलोड का हवाला देते हुए एक जैसा जवाब दिया, जिसे संतोषजनक नहीं माना गया। इसके बाद विभागीय कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया।   एसपी का बयान: 10 पर होगी कार्रवाई वैशाली के एसपी विक्रम सिहाग ने बताया कि मामले में सभी अनुसंधानकर्ताओं से जवाब मांगा गया था। इनमें से 2 अधिकारियों का जवाब संतोषजनक पाया गया, जबकि 10 के जवाब असंतोषजनक रहे। ऐसे में इन 10 अनुसंधानकर्ताओं के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। इस पूरे मामले ने पुलिस जांच प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि आगे से इस तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और समय सीमा के भीतर चार्जशीट दाखिल करने को लेकर सख्ती बरती जाएगी।  

बक्सर से दरभंगा तक फैला फर्जी आधार नेटवर्क, सीएसपी संचालक गिरफ्तार

भोजपुर भोजपुर में फर्जी तरीके से आधार कार्ड बनाने के मामले में हुई कार्रवाई का तार अब दरभंगा से जुड़ गया है। बक्सर पुलिस ने बिरौल थाना के सहयोग से सीएसपी सेंटर चलाकर फर्जी आधार बनाने वाले आरोपी फूलहसन को गिरफ्तार किया है। पुलिस की इस कार्रवाई से एक बड़े साइबर गिरोह का खुलासा हुआ है। लैपटॉप, प्रिंटर और बायोमेट्रिक मशीन बरामद गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने आरोपी के पास से लैपटॉप, प्रिंटर, फिंगरप्रिंट मशीन, स्कैनर सहित कई उपकरण बरामद किए हैं। इसके अलावा जन्मतिथि, नाम और पता बदलने से जुड़े फर्जी दस्तावेज भी मिले हैं। पुलिस के अनुसार फूलहसन पूरे साइबर गिरोह का मास्टरमाइंड है। बक्सर से मिली थी अहम जानकारी इससे पहले बक्सर पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार किया था। पूछताछ में उन्होंने फूलहसन का नाम बताया, जिसके बाद बक्सर पुलिस दरभंगा पहुंची और बिरौल थाना की मदद से उसे गिरफ्तार किया गया। 2024 में भी हो चुकी है गिरफ्तारी बताया जा रहा है कि वर्ष 2024 में बिरौल के तत्कालीन अनुमंडल पदाधिकारी उमेश भारती के समय भी आरोपी के कोठी पुल स्थित सीएसपी सेंटर पर फर्जी आधार कार्ड बनाने और जन्मतिथि में बदलाव की शिकायत मिली थी। उस समय कार्रवाई करते हुए उसे गिरफ्तार किया गया था, लेकिन बाद में पीआर बॉन्ड पर रिहा कर दिया गया था।   अधिकृत आईडी का दुरुपयोग कर बनाते थे फर्जी आधार जांच में सामने आया है कि गिरोह के सदस्य अधिकृत आधार पंजीकरण केंद्र के लॉगिन आईडी, ऑपरेटर आईडी और बायोमेट्रिक पहचान का दुरुपयोग कर फर्जी तरीके से आधार कार्ड बना रहे थे। इसके साथ ही जन्मतिथि, पता, मोबाइल नंबर और बायोमेट्रिक अपडेट भी अवैध रूप से किया जाता था। इस काम के एवज में सीएसपी संचालक गरीब लोगों से 5,000 से लेकर 25,000 रुपये तक वसूलते थे। इस तरह यह गिरोह लंबे समय से लोगों को ठग रहा था। पुलिस की अपील और जांच जारी बिरौल के इंस्पेक्टर अमृत लाल वर्मन ने बताया कि बक्सर पुलिस के साथ मिलकर फूलहसन को गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि आधार से जुड़े किसी भी काम के लिए केवल अधिकृत केंद्रों पर ही जाएं। पुलिस का कहना है कि यह मामला सिर्फ एक गिरफ्तारी नहीं, बल्कि उन परिवारों के भरोसे पर हमला है जो आधार कार्ड को अपने जीवन का अहम हिस्सा मानते हैं। फिलहाल जांच जारी है कि इस गिरोह का असली मास्टरमाइंड कौन है और कहां से इस नेटवर्क को संचालित किया जा रहा है।