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RCB vs PBKS: कोहली के फॉर्म पर नजर, धर्मशाला में होगी कांटे की टक्कर

धर्मशाला इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) 2026 के 61वें मुकाबले में पंजाब किंग्स (PBKS) का सामना रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) से होगा। RCB ने अब तक 12 मुकाबले खेले हैं। 8 मैच में उसे जीत और 4 मुकाबलों में हार मिली है। PBKS ने 6 मैच में जीत दर्ज की है और 5 मुकाबलों में उसे हार का सामना करना पड़ा है। प्लेऑफ के नजरिए से यह मुकाबला बेहद महत्वपूर्ण है। आइए मुकाबले से जुड़ी जरूरी बातों पर नजर डालते हैं। दोनों टीमों के बीच रहती है कांटे की टक्कर IPL के इतिहास में दोनों टीमों के बीच अब तक 37 मुकाबले खेले गए हैं। इस दौरान RCB ने 19 मैच जीते हैं, जबकि PBKS को 18 मुकाबलों में सफलता मिली है। इस सीजन दोनों टीमें पहली बार आमने-सामने होंगी। वहीं, IPL 2025 में दोनों टीमों के बीच कुल 4 मुकाबले खेले गए थे। इनमें से 3 मैच RCB ने अपने नाम किए थे, जबकि एक मुकाबले में PBKS को जीत मिली थी। इस संजोजन के साथ नजर आ सकती है RCB RCB को पिछले मैच में कोलकाता नाइट राइडर्स (KKR) के खिलाफ 6 विकेट से जीत मिली थी। ऐसे में वह अपनी प्लेइंग इलेवन में कोई बड़ा बदलाव नहीं करना चाहेंगे। विराट कोहली ने उस मैच में शतकीय पारी (105*) खेली थी। ऐसे में उनसे एक और बड़ी पारी की उम्मीद होगी। संभावित एकादश: जैकब बेथेल, विराट कोहली, रजत पाटीदार (कप्तान), जितेश शर्मा (विकेटकीपर), टिम डेविड, वेंकटेश अय्यर, क्रुणाल पांड्या, भुवनेश्वर कुमार, राशिख सलाम डार, जैकब डफी और जोश हेजलवुड। इस प्लेइंग इलेवन के साथ नजर आ सकती है PBKS PBKS को अपने पिछले मैच में मुंबई इंडियंस (MI) के खिलाफ 6 विकेट से हार मिली थी। ऐसे में वह ये मुकाबला हर हाल में अपने नाम करना चाहेंगे। कप्तान श्रेयस अय्यर अपना खोया हुआ लय हासिल कर टीम के लिए एक कप्तानी पारी खेलना चाहेंगे। प्रियांश आर्य से भी काफी उम्मीदें होंगी। संभावित एकादश: प्रियांश आर्य, प्रभसिमरन सिंह (विकेटकीपर), कूपर कॉनॉली, श्रेयस अय्यर (कप्तान), सूर्यांश शेडगे, शशांक सिंह, अजमतुल्लाह उमरजई, मार्को यानसन, लॉकी फर्ग्यूसन, अर्शदीप सिंह और युजवेंद्र चहल। ये हो सकते हैं इम्पैक्ट सब्स प्लेयर PBKS: हरप्रीत बरार, जेवियर बार्टलेट, विष्णु विनोद, विजयकुमार वैशाख और मुशीर खान। RCB: देवदत्त पडिक्कल, जॉर्डन कॉक्स, मंगेश यादव, रोमारियो शेफर्ड और स्वप्निल सिंह कैसा होगा धर्मशाला की पिच का मिजाज? धर्मशाला क्रिकेट स्टेडियम की पिच हरियाणा के भिवानी से मंगवाई गई काली मिट्‌टी से तैयार की गई है। इस मिट्‌टी में बालू की मात्रा न के बराबर होती है। इसके चलते पिचों पर गति और उछाल दोनों मिलता है। यहां आमतौर पर शुरुआत में तेज गेंदबाजों को मदद मिलती है, लेकिन समय निकलने के साथ स्पिनर्स भी जलवा दिखा सकते हैं। इसी तरह तेजी और अच्छा उछाल होने से टिकने के बाद बल्लेबाज आसानी से बड़े शॉट्स खेल सकते हैं। ऐसा रहेगा धर्मशाला का मौसम एक्यूवेदर के अनुसार, 17 मई को धर्मशाला का मौसम पूरी तरह साफ नहीं रहेगा। यहां अधिकतम तापमान 21 डिग्री और न्यूनतम तापमान के 15 डिग्री रहने का अनुमान है। बारिश होने की भी संभावना है और पूरे दिन बादल छाए रहेंगे। इन खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर रहेगी नजरें PBKS के लिए प्रभसिमरन ने पिछले 10 मैचों में 179.5 की स्ट्राइक रेट से 359 रन बनाए हैं। श्रेयस के बल्ले से पिछले 10 मैचों में 328 रन निकले हैं। RCB के लिए कोहली ने पिछले 10 मैच में 163.98 की स्ट्राइक रेट से 387 रन बनाए हैं। गेंदबाजों में अर्शदीप ने पिछले 10 मैच में 9.55 की इकॉनमी से 13 विकेट लिए हैं। RCB से भुवनेश्वर ने पिछले 10 मैचों में 7.26 की इकॉनमी से 18 विकेट चटकाए हैं। कब और कहां देखें मुकाबला? PBKS और RCB के बीच यह मुकाबला धर्मशाला के हिमाचल प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन स्टेडियम में दोपहर 3:30 बजे से खेला जाएगा। भारत में स्टार स्पोर्ट्स नेटवर्क और जियोहॉटस्टार ऐप पर इस मैच का सीधा प्रसारण देखा जा सकता है।  

हेमंत सोरेन सरकार का बड़ा फैसला, उपायुक्तों को मिली लीज साइनिंग की शक्ति

रांची  झारखंड में जिन 35 बालू घाटों से बालू का उठाव सिर्फ उपायुक्त के हस्ताक्षर के लिए रुका हुआ था, उसका मार्ग प्रशस्त हो गया है। राज्य सरकार ने इससे संबंधित संशोधित नियमावली को स्वीकृति दे दी है। नई व्यवस्था में बालू लीज की निगरानी का सारा जिम्मा उपायुक्तों के पास होगा। जिले के उपायुक्त ही लीज डीड पर हस्ताक्षर करेंगे। उपायुक्त के हस्ताक्षर नहीं होने के कारण वर्तमान में 35 बालू घाटों से बालू का उठाव बंद था। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश के बाद शनिवार से बालू घाटों से बालू का उठाव शुरू हो जाएगा। झारखंड बालू खनन नियमावली 2026 के नियम 14 के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए खान एवं भूतत्व विभाग ने संबंधित जिले के उपायुक्त को नियमावली के अंतर्गत खनन पट्टे को निष्पादित करने की शक्तियां प्रदान कर दी हैं। इसके साथ ही अब राज्य के 35 घाटों से बालू का उठाव शुरू हो जाएगा। माना जा रहा है कि इससे राज्य में बालू की कालाबाजारी पर रोक लगाने में सफलता मिलेगी। एक महीने में उठेगा पांच करोड़ सीएफटी बालू झारखंड में कुल 444 बालू घाट जिनमें से 290 बालू घाटों की नीलामी हो चुकी है। इन 290 बालूघाटों में से 35 घाटों के लिए सभी आवश्यक स्वीकृतियां प्राप्त हो चुकी हैं और खनन पट्टों के साथ संचालन के लिए तैयार है। ऐसा होने के बाद 35 घाटों से बालू का उठाव वैध तरीके से होने लगेगा। खनन विभाग के अनुसार कि इन 35 बालू घाटों से हर दिन करीब दस लाख सीएफटी बालू का उठाव की उम्मीद है। इससे हर महीने करीब पांच करोड़ सीएफटी बालू का उठाव हो सकेगा। सुचारू रूप से एक महीने में इतने बालू का उठाव हो जाने से एनजीटी की रोक लगने के बावजूद बालू की कमी नहीं हो सकेगी। इससे पहले बालू घाटों कि नीलामी और उठाव पर कोर्ट की तरफ से पांच महीने तक रोक लगी रही।

आय से अधिक संपत्ति मामले में हड़कंप, ग्रामीण कार्य विभाग के इंजीनियर पर शिकंजा

पटना बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार की सख्त मुहिम के तहत शनिवार सुबह जमुई जिले में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब आर्थिक अपराध इकाई (EOU) की टीम ने ग्रामीण कार्य प्रमंडल, झाझा में पदस्थापित कार्यपालक अभियंता गोपाल कुमार के चार ठिकानों पर एक साथ ताबड़तोड़ छापेमारी शुरू कर दी। सुबह-सुबह हुई इस कार्रवाई से विभागीय महकमे में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। चार ठिकानों पर एक साथ छापेमारी EOU की अलग-अलग टीमों ने जमुई शहर के केकेएम कॉलेज के समीप स्थित किराये के मकान, झाझा स्थित कार्यालय समेत चार स्थानों को एक साथ घेर लिया। पुलिस उपाधीक्षक स्तर के अधिकारियों के नेतृत्व में चल रही इस कार्रवाई में दस्तावेजों, बैंक खातों, निवेश और संपत्ति से जुड़े कागजातों की बारीकी से जांच की जा रही है। अधिकारियों ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और वित्तीय रिकॉर्ड अपने कब्जे में लिए हैं। आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज सूत्रों के अनुसार कार्यपालक अभियंता गोपाल कुमार के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। प्रारंभिक जांच में करीब 2 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति का खुलासा हुआ है। जांच एजेंसियों का दावा है कि यह संपत्ति उनकी वैध आय से लगभग 81.5 प्रतिशत अधिक है, जिसने पूरे मामले को बेहद गंभीर बना दिया है। कोर्ट से वारंट मिलने के बाद कार्रवाई बताया जा रहा है कि विशेष न्यायालय निगरानी, पटना से तलाशी वारंट मिलने के बाद EOU ने सुनियोजित तरीके से यह कार्रवाई शुरू की। तलाशी अभियान के दौरान बैंक लॉकर, जमीन खरीद-बिक्री के दस्तावेज, बीमा निवेश और अन्य वित्तीय लेन-देन की भी पड़ताल की जा रही है। कई बड़े खुलासों की संभावना आर्थिक अपराध इकाई के अधिकारियों का कहना है कि प्रारंभिक जांच में गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के संकेत मिलने के बाद तत्काल कानूनी कार्रवाई की गई। फिलहाल सभी ठिकानों पर तलाशी जारी है और कार्रवाई पूरी होने के बाद कई बड़े खुलासों की संभावना जताई जा रही है। इस हाईप्रोफाइल छापेमारी के बाद ग्रामीण कार्य विभाग समेत प्रशासनिक गलियारों में दिनभर चर्चाओं का बाजार गर्म रहा।  

पेट्रोल-डीजल महंगा होने के बाद सार्वजनिक वाहनों ने बढ़ाया किराया, यात्रियों में नाराजगी

 पटना पेट्रोल-डीजल और सीएनजी की कीमतों में वृद्धि के बाद अब सार्वजनिक वाहन चालक मनमाने ढंग से किराया वसूल रहे हैं। इससे यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पटना जंक्शन से बेली रोड से सगुना मोड़ या अन्य जगह जाने के लिए किराये में 15 से 20 रुपये तक अधिक वसूला जा रहा है। शनिवार सुबह आशियाना मोड़ निवासी पप्पू कुमार ने बताया कि वह पटना जंक्शन से आशियाना मोड़ तक आए तो उनसे 50 रुपया किराया वसूल लिया गया। यह 20 रुपया अधिक है। पूछने पर ऑटो चालक ने कहा कि पेट्रो उत्पादों की कीमतों में वृद्ध के कारण ऐसा हो रहा है। इसी तरह की शिकायत गोला रोड निवासी आशुतोष कुमार ने भी की। उन्होंने कहा कि उनसे 15 रुपया किराया अधिक लिया गया। यात्रियों ने कहा कि प्रशासन से अपील है कि वह इस मामले को गंभीरता से ले। पटना जिला प्रशासन ने क्या कहा? इधर, इस मामले में पटना जिला प्रशासन की ओर कहा गया कि विभिन्न माध्यमों से सूचना मिल रही है कि टेम्पू, ऑटो और अन्य सार्वजनिक वाहनों का किराया मनमाने तरीके से बढ़ाया जा रहा है। प्रशासन ने इस पर सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि प्रमंडल-स्तरीय भाड़ा निर्धारण समिति की अनुमति के बिना यात्री किराया बढ़ाना पूरी तरह अवैध है। Bihar News: निशांत को वैशाली, विजय सिन्हा को गयाजी की कमान; जानिए कौन-किस जिले के प्रभारी मंत्री बने अधिक किराया वसूलने पर कार्रवाई प्रशासन के अनुसार, टेम्पू, ऑटो एवं नगर सेवा बसों के भाड़े में किसी भी प्रकार की वृद्धि सक्षम प्राधिकार की स्वीकृति के बिना नहीं की जा सकती। यदि कोई वाहन चालक या संचालक निर्धारित नियमों का उल्लंघन करते हुए अधिक किराया वसूलता पाया गया, तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। जिला प्रशासन ने आम लोगों से अपील की है कि वे निर्धारित किराया ही दें और अधिक वसूली की शिकायत संबंधित अधिकारियों को तुरंत उपलब्ध कराएं

धनबाद और जमशेदपुर मेडिकल कॉलेजों को बड़ा तोहफा, सीट बढ़ाने की योजना को मिली स्वीकृति

रांची  राज्य के दो मेडिकल कालेजों में एमबीबीएस के साथ-साथ पीजी की सीटें बढ़ेंगी। इनमें एसएनएमएमसीएच (शहीद निर्मल महतो मेडिकल कालेज), धनबाद एवं एमजीएम, जमशेदपुर सम्मिलित हैं। इसे लेकर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने 889.50 करोड़ की योजना की मंजूरी प्रदान की है। इनमें 526.50 करोड़ रुपये केंद्र से मिलेंगे, जबकि शेष राशि का वहन राज्य सरकार को करना होगा। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय का इस आशय का पत्र राज्य सरकार को मिल गया है। साथ ही केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने एमओयू का प्रारुप भेज दिया है, जिसपर राज्य सरकार के स्वास्थ्य विभाग को हस्ताक्षर करना है। केंद्र से स्वीकृत योजना के तहत एसएनएमएमसीएच, धनबाद की सीटें 100 से बढ़ाकर 250 की जाएंगी, जिसपर 225 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसी तरह, एमजीएम, जमशेदपुर की सीटें 150 से बढ़ाकर 250 की जाएंगी, जिसपर 150 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसी तरह, एसएनएमएमसीएच, धनबाद में पीजी की वर्तमान सीटें 19 हैं। यहां विभिन्न विभागों में 186 सीटें बढ़ाई जानी हैं। एमजीएम, जमशेदपुर में पीजी की वर्तमान सीटें 49 हैं। यहां 149 सीटें बढ़ाई जानी हैं। दोनों कालेजों में पीजी की सीटें बढ़ाने के लिए क्रमश: 279 करोड़ रुपये तथा 235.5 करोड़ रुपये की योजना स्वीकृत हुई है। इनमें क्रमश: 167.40 करोड़ तथा 134.10 करोड़ रुपये केंद्र सरकार देगी। इधर, स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने कहा है कि यह निर्णय न केवल राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करेगा, बल्कि आनेवाले वर्षों में चिकित्सकों की कमी भी दूर होगी। झारखंड के मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस व पीजी की सीटें काफी कम थीं सीटों में वृद्धि का सबसे बड़ा लाभ ग्रामीण और पिछड़े इलाकों को मिलेगा, क्योंकि वहां चिकित्सक उपलब्ध हो सकेंगे। स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव ने अजय कुमार सिंह ने केंद्र की मंजूरी को बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि अन्य मेडिकल कलेजों में भी जल्द सीटें बढ़ाने की दिशा में कार्य किया जाएगा। भविष्य में सुपर स्पेशियलिटी सीटों में भी वृद्धि की जाएगी। उन्होंने कहा कि इससे एक ओर जहां झारखंड के छात्रों को चिकित्सा शिक्षा में अधिक अवसर मिलेगा, वहीं दूसरी ओर राज्य में चिकित्सकों की संख्या भी बढ़ेगी। अब इस प्रस्ताव को आगे कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।

मानसून से पहले एक्शन मोड में बिहार सरकार, तटबंधों पर होगी सख्त पेट्रोलिंग

 पटना बिहार में आगामी मानसून के दौरान संभावित बाढ़ और सुखाड़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए राज्य सरकार पूरी तरह से ऐक्शन मोड में आ गई है। उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने अधिकारियों को दो टूक शब्दों में सख्त चेतावनी दी है। उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि बचाव की तैयारियों में किसी भी स्तर पर कोताही अब बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बेहतर काम करने वाले अधिकारियों की जहां एक तरफ पीठ थपथपाई जाएगी और उन्हें बधाई दी जाएगी, वहीं जानबूझकर लापरवाही और कार्यों में कोताही बरतने वाले अफसरों और कर्मचारियों पर सरकार का डंडा चलेगा और उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। सिंचाई भवन में हुई उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक प्राप्त जानकारी के अनुसार, शुक्रवार को राजधानी पटना के सिंचाई भवन में बाढ़ और सुखाड़ से पूर्व की तैयारियों को लेकर एक बेहद अहम और उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक की अध्यक्षता उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने की। बैठक का मुख्य उद्देश्य राज्य को प्राकृतिक आपदाओं से बचाने के लिए समय रहते पुख्ता इंतजाम सुनिश्चित करना था। डिप्टी सीएम ने सख्त निर्देश देते हुए कहा कि संभावित बाढ़ से बचाव और सुखाड़ से निपटने की सभी आवश्यक तैयारियां निर्धारित समय सीमा से पहले ही हर हाल में पूरी कर ली जाएं। तटबंधों पर होगी पेट्रोलिंग समीक्षा बैठक के दौरान उपमुख्यमंत्री ने राज्य के विभिन्न बाढ़ प्रभावित और संवेदनशील क्षेत्रों में चल रहे कटाव निरोधी कार्यों की प्रगति की गहन समीक्षा की। उन्होंने तटबंधों की मरम्मत, उनके उचित अनुरक्षण और बाढ़ सुरक्षात्मक सामग्री के प्राप्त इंतेजाम करने के कड़े निर्देश दिए। डिप्टी सीएम ने जोर देकर कहा कि बाढ़ की अवधि के दौरान तटबंधों की पूरी लंबाई पर अधिकारियों द्वारा पूरी मुस्तैदी के साथ पेट्रोलिंग की जाए, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति को समय रहते टाला जा सके और जानमाल का नुकसान न हो। सचिव ने बाढ़ प्रबंधन और सिंचाई व्यवस्था से कराया अवगत इस अहम बैठक में जल संसाधन विभाग के वरीय अधिकारी भी मौजूद रहे। इससे पहले विभाग के सचिव डॉ. चंद्रशेखर सिंह ने उपमुख्यमंत्री को बाढ़ प्रबंधन और सिंचाई व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करने के लिए की जा रही सभी तैयारियों से विस्तार से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि संवेदनशील स्थलों की कड़ी निगरानी की जा रही है। सरकार का यह कड़ा रुख इस बात का साफ संकेत है कि इस बार मानसूनी आपदाओं को लेकर प्रशासन किसी भी तरह का कोई रिस्क लेने के मूड में नहीं है।

31 में 28 मंत्री करोड़पति, औसत संपत्ति 6.32 करोड़ रुपये

पटना  बिहार में 7 मई 2026 को हुए मंत्रिमंडल विस्तार के बाद एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) और बिहार इलेक्शन वॉच ने माननीयों को लेकर एक बेहद चौंकाने वाली रिपोर्ट जारी की है। मुख्यमंत्री सहित 35 में से 31 मंत्रियों के शपथ पत्रों का जो विश्लेषण सामने आया है, वह आम जनता के लिए काफी हैरान करने वाला है। रिपोर्ट के अनुसार, बिहार सरकार के 90 फीसदी मंत्री 'करोड़पति' की श्रेणी में आते हैं और इन सभी माननीयों की औसत संपत्ति सवा छह (6.32) करोड़ रुपये बैठती है। केवल धन-दौलत ही नहीं, बल्कि लगभग आधे मंत्रियों पर आपराधिक मामले भी दर्ज हैं। रमा निषाद सबसे अमीर तो संजय कुमार सबसे गरीब मंत्री संपत्ति के मामले में औंराई विधानसभा से निर्वाचित भाजपा विधायक रमा निषाद सबसे आगे हैं। उन्होंने अपनी कुल संपत्ति 31.86 करोड़ रुपये घोषित की है, जो पूरे मंत्रिमंडल में सर्वाधिक है। वहीं, इसके ठीक विपरीत बखरी से लोजपा (रा) के विधायक संजय कुमार मंत्रिमंडल के सबसे 'गरीब' मंत्री हैं। उनकी कुल संपत्ति महज 22.30 लाख रुपये है। इसके अलावा, कर्ज के मामले में शिवहर से श्वेता गुप्ता पर सबसे अधिक 4.05 करोड़ रुपये की देनदारी है। कुल 31 में से 20 मंत्रियों ने अपने ऊपर देनदारी घोषित की है। जदयू के सभी 13 मंत्री करोड़पति, भाजपा के 13 एडीआर की इस रिपोर्ट के मुताबिक, 31 में से 28 सदस्य करोड़पति हैं। पार्टीवार आंकड़ों पर नजर डालें तो जनता दल यूनाइटेड (JDU) के सभी 13 के 13 मंत्री करोड़पति हैं। वहीं, भारतीय जनता पार्टी (BJP) के 15 में से 13 मंत्री, लोजपा (रामविलास) के 2 में से 1 और हम (सेक्युलर) के एकमात्र मंत्री भी करोड़पति क्लब में शामिल हैं। कुल मिलाकर बिहार कैबिनेट में धनकुबेरों का अच्छा-खासा दबदबा है। 48% मंत्रियों पर आपराधिक केस धन के साथ-साथ इस मंत्रिमंडल में दागी चेहरों की भी कमी नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार, 31 में से 15 मंत्रियों ने अपने ऊपर आपराधिक मामले दर्ज होने की जानकारी दी है। चिंताजनक बात यह है कि इनमें से 9 मंत्रियों पर गंभीर आपराधिक मामले चल रहे हैं। शिक्षा की बात करें तो 22 मंत्री स्नातक या उससे अधिक पढ़े-लिखे हैं, जबकि 8 मंत्री 10वीं से 12वीं पास हैं।

बेटियां पढ़ें-आगे बढ़ें, संदेश के साथ नीतीश सरकार की साइकिल योजना को नया रूप

पटना  वर्ष 2006 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री बालिका साइकिल योजना शुरू की थी। इसका लक्ष्य यह था कि नौवीं कक्षा के बाद लड़कियां स्कूल नहीं छोड़ें। ड्रापआउट को रोकने को ध्यान में रख इस योजना ने बिहार में लड़कियों के बीच नौवीं से आगे की पढ़ाई में एक बड़ा परिवर्तन लाया। गांव-गांव लड़कियां झुंड में साइकिल पर दिखने लगी। इस योजना के बारे में नीतीश कुमार ने तब लिखा था- यह योजना मेरे दिल के करीब (क्लोज टू माइ हार्ट) है। अब सरकार इस योजना में एक प्रतीकात्मक परिवर्तन करने जा रही है। मुख्यमंत्री साइकिल योजना के तहत साइकिल फैक्ट्री वाले जो साइकिल देंगे उसके हैंडल के आगे मोनोग्राम की शक्ल में एक प्लेट लगा होगा जिस पर लिखा होगा- 'बेटियां पढ़ें-आगे बढ़ें'। इस स्लोगन के साथ ही मुख्यमंत्री की तस्वीर भी लगी होगी। इस बारे में सरकार ने साइकिल बनाने वाली कंपनियों से बात कर ली है। 75 प्रतिशत उपस्थिति के आधार पर मिलती है साइकिल के लिए राशि साइकिल दिए जाने की योजना अब लड़कों के लिए भी है। इस मद में तीन हजार रुपए की राशि डीबीटी के माध्यम से विद्यार्थियों काे दी जाती है। वर्ष 2024-25 और 2025-26 के आंकड़े के अनुसार बिहार में 1.15 करोड़ से अधिक छात्र-छात्राएं साइकिल योजना के लिए पात्र हैं। हर साल आठ से दस लाख छात्राएं इस योजना से जुड़ती हैं। साइकिल योजना का असर मुख्यमंत्री बालिका साइकिल योजना का असर यह हुआ है कि इसके आरंभ होने से पहले 2005 में 1.87 लाख छात्राएं मैट्रिक परीक्षा में शामिल हुई थीं। अब यह संख्या 8.7 लाख हो गयी है। पोशाक योजना पर भी नजर सरकार की नजर मु्ख्यमंत्री बालिका पोशाक योजना पर भी है। इसके तहत कक्षा से 12 वी तक की छात्राओं को स्कूल ड्रेस के लिए राशि दी जाती है। सरकार अब यह रिपोर्ट बनवा रही है कि कहां-कहां छात्राएं ड्रेस में नहीं आ रहीं।  

एक महीने में बिहार सरकार की नई योजनाएं, शहरी विकास से लेकर महिला सुरक्षा तक बदलाव

 पटना  सम्राट चौधरी ने एक माह पहले 15 अप्रैल को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। उनके मुख्यमंत्री बने एक महीने पूरे हो चुके हैं। बिहार के विकास पुरुष नीतीश कुमार के 'न्याय के साथ विकास' की संकल्पना के साथ सम्राट ने 'समृद्ध बिहार' बनाने की दिशा में कुछ महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इसमें भ्रष्टाचार और अपराध के खिलाफ जीरो टालरेंस की नीति की झलक स्पष्ट है। 1. सैटेलाइट टाउनशिप बिहार के 10 जिलों में 11 सैटेलाइट टाउनशिप की रूपरेखा खींच दी गयी है। इस टाउनशिप में प्लांड वे में कॉलोनी बसेंगी। इनमें बाजार और रहने के लिए जगह तय होंगे। चौड़ी सड़कें होंगी। हरियाली के लिए सड़क किनारे और पार्क में पेड़ लगाये जाएंगे। यह मुख्यमंत्री सम्राट जी के ड्रीम प्रोजेक्ट्स में एक है। इसमें सासाराम को जोड़ने का प्रस्ताव भी आया है। इससे शहरी दबाव में कमी आयेगी, लोगों को सुविधायुक्त जीवन का लाभ मिल सकेगा। सुनियोजित विकास से सुंदरता दिखेगी। इसके लिए टाउनशिप का नामकरण ऐतिहासिक संदर्भों को ध्यान में रख कर किया गया है। 2. ‘पुलिस दीदी योजना’ से महिला सुरक्षा पर फोकस सम्राट सरकार की 'पुलिस दीदी योजना' बिहार सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसका उद्देश्य महिलाओं व छात्राओं की सुरक्षा बढ़ाना तथा पुलिस और समाज के बीच भरोसा मजबूत करना है। इसके लिए 1500 स्कूटी महिला पुलिस के खरीदने का निर्णय लिया गया है। कॉलेज व स्कूल के सामने पुलिस दीदी की तैनाती होगी, ताकि रोड साइड रोमियो और महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराध पर नकेल कसी जायेगी। 3. सहयोग हेल्पलाइन से पंचायत तक शिकायत समाधान सम्राट सरकार ने सुशासन को मजबूती देने और जनता के हित में सरकार के उत्तरदायित्व को ध्यान में रख कर सहयोग की त्रिवेणी को शुरू करने का निर्णय लिया है। इसके लिए सहयोग हेल्पलाइन : 1100, सहयोग पोर्टल : sahyog.bihar.gov.in और पंचायत स्तर पर सहयोग शिविर लगाने का निर्णय लिया है। यह शिविर माह के पहले और तीसरे मंगलवार को आयोजित होगा। इस शिविर में ब्लॉक, थाना और अंचल की तमाम शिकायतों की सुनवाई होगी। सहयोग पोर्टल पर सरकारी योजना से जुड़ी शिकायत के निबटारे के लिए 30 दिन का लक्ष्य तय किया गया है। अगर 30 में शिकायत का निबटारा नहीं होता है, तो संबंधित अधिकारी या कर्मचारी का निलंबन तक हो सकता है। 4. हर प्रखंड में एक मॉडल स्कूल सम्राट सरकार ने अपने दूसरे कैबिनेट में शिक्षा के क्षेत्र के लिहाज से महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। उन्होंने सभी जिला स्कूलों और प्रत्येक प्रखंड के चयनित एक उच्च माध्यमिक विद्यालय को 'मॉडल स्कूल' के रूप में विकसित करने के लिए ₹800 करोड़ की स्वीकृति दी है। इसके साथ डिग्री कॉलेज रहित 208 प्रखंडों में नये डिग्री कॉलेज की स्थापना के लिए ₹104 करोड़ (₹50 लाख प्रति कॉलेज) स्वीकृत किये गये हैं, जिसके तहत कुल 9152 पदों का सृजन होगा। 5. निजी विद्यालयों की मनमानी पर नकेल सम्राट सरकार द्वारा निजी स्कूलों में पारदर्शिता व जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए भी एक नेक पहल की गयी है। निजी विद्यालयों को फीस की पूरी जानकारी सार्वजनिक करना अनिवार्य होगा। मनमानी फी बढ़ोतरी व अनावश्यक शुल्क पर रोक होगा। छात्रों के परिजनों को किताबें-यूनिफॉर्म कहीं से भी खरीदने की स्वतंत्रता होगी। फीस बकाया होने पर भी छात्रों को परीक्षा/परिणाम से वंचित नहीं किया जायेगा। आदेश का उल्लंघन होने पर कड़ी कार्रवाई तय है। 6. बिहारी संवेदकों को प्राथमिकता 50 करोड़ रुपये तक के राज्याधीन सिविल कार्यों के लिए राज्य स्तरीय ठेकेदारों यानी संवेदकों को प्राथमिकता देने के लिए बिहार लोक निर्माण संहिता में संशोधन किया गया। अब से 50 करोड़ रुपये तक कार्यों के ठेके बिहारियों को मिलेंगे। इससे राज्य के लोगों को काम के अधिक मौके मिलेंगे। 7. ई-निबंधन व्यवस्था लागू जमीन और संपत्ति के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को पूरी तरह पेपरलेस बनाने के लिए ई-निबंधन सिस्टम लागू किया गया है। इससे भ्रष्टाचार कम करने, समय बचाने और पारदर्शिता बढ़ाने की कोशिश हुई। इसके साथ 80 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों को घर पर रजिस्ट्री सुविधा देने का फैसला लिया गया है। इससे बुजुर्गों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। इसके अलावा दर्जनों महत्वपूर्ण निर्णय लेने के साथ मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने हिनीयस क्राइम के मामले में पुलिस को ज़ीरो टालरेंस बरतने का निर्देश दिया है। इस क्रम में एनकाउंटर की घटनाएं भी सामने आई हैं।

प्राचार्य और सहायक स्वास्थ्य पदाधिकारी भर्ती अटकी, दोबारा प्रक्रिया शुरू नहीं

 रांची  झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की कई नियुक्ति प्रक्रियाएं रद तो हुईं, लेकिन दोबारा नियुक्ति प्रक्रिया शुरू ही नहीं हुई। आयोग ने अपरिहार्य कारण बताते हुए प्रतियोगिता परीक्षाएं रद कीं। दोबारा नियुक्ति प्रक्रिया शुरू नहीं होने से प्राचार्यों, सहायक लोक स्वास्थ्य पदाधिकारियों, पालीटेक्निक शिक्षकों जैसे महत्वपूर्ण रिक्त पद भरे नहीं जा सके। अधिसंख्य मामलों में नियमावली में कोई न कोई त्रुटि होने के कारण आवेदन मंगाने के बाद नियुक्ति प्रक्रिया रद हुई। संबंधित विभागों के अनुरोध पर नियुक्ति प्रक्रिया रद की गई, लेकिन फिर से नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करने की आवश्यक कार्रवाई नहीं हो पाई। उदाहरण के रूप में, जेपीएससी ने नगर विकास एवं आवास विभाग में सहायक लोक स्वास्थ्य पदाधिकारी के कुल 56 पदों पर नियुक्ति के लिए अगस्त-2018 में ही आवेदन मंगाए थे। इसके लगभग सात वर्ष बाद आयोग ने 30 दिसंबर 2025 को सूचना प्रकाशित कर अपरिहार्य कारण बताते हुए यह नियुक्ति प्रक्रिया रद कर दी। इसके बाद दाेबारा नियुक्ति प्रक्रिया शुरू ही नहीं हुई। दूसरी तरफ, निकायों में लोक स्वास्थ्य पदाधिकारियों के पद बड़ी संख्या में रिक्त हैं। विज्ञापन के दो वर्ष बाद रद हुई नियुक्ति प्रक्रिया जेपीएससी ने राज्य के 59 राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में प्राचार्य के 39 पदों पर नियुक्ति के लिए 29 मार्च 2023 को ही विज्ञापन प्रकाशित कर आवेदन मंगाए थे। लेकिन दो वर्ष में भी यह नियुक्ति प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। बाद में स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग द्वारा इन पदों पर नियुक्ति के लिए भेजी गई अधियाचना वापस लिए जाने के कारण उक्त विज्ञापन को 12 दिसंबर 2025 को रद कर दिया गया। इसके बाद अभी तक यह नियुक्ति प्रक्रिया दोबारा शुरू नहीं हुई। दूसरी तरफ, विद्यालयों में लंबे समय से पदों की रिक्तियां बरकरार है। दरअसल, विभाग ने अब इन पदों पर नियुक्ति पिछले वर्ष गठित झारखंड माध्यमिक आचार्य नियुक्ति नियमावली-2025 के तहत करने का निर्णय लिया है। इसके तहत अब नए सिरे से नियुक्ति की अधियाचना जेपीएससी को भेजी जानी है। नई नियुक्ति नियमावली में राजकीय प्लस टू उच्च विद्यालयों में प्राचार्य के पद को बदलकर प्रधानाचार्य कर दिया गया है। साथ ही इस पद का ग्रेड पे 7,600 से घटाकर 4,800 कर दिया गया है। इस पद के लिए आवश्यक अर्हता में भी कुछ बदलाव किया गया है। अर्हता के कुछ बिंदुओं पर स्थगित व्याख्याता नियुक्ति जेपीएससी ने उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग की अधियाचना पर राजकीय पालीटेक्निक संस्थानों में व्याख्याताओं की नियमित एवं बैकलाग पदों पर नियुक्ति के लिए इस वर्ष 13 फरवरी को विज्ञापन प्रकाशित कर आवेदन प्रक्रिया शुरू की थी। लेकिन इसमें अर्हता के कुछ बिंदुओं पर झारखंड विधानसभा में सवाल उठने के बाद विभाग के अनुरोध पर आयोग ने नियुक्ति प्रक्रिया 16 मार्च को स्थगित कर दी। लगभग दो माह बीत जाने के बाद भी इसपर कोई अपडेट सूचना आयोग की ओर से प्रकाशित नहीं की गई है। बताया जाता है कि विभाग द्वारा नियुक्ति नियमावली में संशोधन किया जा रहा है। संशोधन के बाद ही दोबारा नियुक्ति प्रक्रिया शुरू होगी।