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सहरसा में हवाई सेवा की बड़ी सौगात, एयरपोर्ट अपग्रेडेशन का काम तेज

सहरसा अब सहरसा के लोगों का हवाई सेवा सफर का सपना अगले साल हवाई अड्डा अपग्रेडेशन के बाद पूरा हो जाएगा । अगले साल से यहां छोटे और मध्यम आकार के विमान सुरक्षित रूप से उड़ान भर सकेंगे और उतर सकेंगे। इससे क्षेत्रीय हवाई सेवाओं के विस्तार की संभावनाएं बढ़ेंगी । सहरसा को बिहार व देश के अन्य हिस्सों से जोड़ने में मदद मिलेगी। हवाई सेवा शुरू होने से क्षेत्रीय व्यापार, पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति मिलने की उम्मीद है। बेहतर हवाई सम्पर्क से पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी। स्थानीय स्तर पर रोजगार और व्यापार के अवसर बढेगें। पिछले साल हुआ था सर्वेक्षण :पिछले साल सितंबर महीने में ओएलएस सर्वेक्षण हुआ था। पांच दिनों तक हुए सर्वेक्षण के दौरान सहरसा हवाई अड्डा आसपास के करीब 15 किलोमीटर दूरी तक तीन सदस्यीय टीम के द्वारा सर्वेक्षण किया गया। वैसे ऊंचे भवन, मोबाइल टावर, हाइ टेंशन तारों का मुआयना किया गया जो हवाई जहाज लैंडिंग और उड़ान भरने के दौरान परेशानी का कारण बन सकते हैं। तीन सदस्यीय टीम द्वारा हवाई अड्डा से सटे राय टोला से लेकर बैजनाथपुर व आसपास के कई इलाकों का सर्वेक्षण किया । जनवरी 2025 में सहरसा में प्रगति यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा सहरसा हवाई अड्डे को लेकर घोषणा की गई थी। एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया द्वारा जारी टेंडर के अनुसार निर्माण कार्य को 450 दिन (15 महीने) के भीतर पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस अवधि में एयरपोर्ट परिसर में आवश्यक संरचनाओं का निर्माण कर इसे हवाई सेवा संचालन के लिए तैयार किया जाएगा। निर्धारित समयसीमा के भीतर परियोजना को पूरा कर क्षेत्र के लोगों को जल्द से जल्द हवाई सेवा का लाभ मिलेगा। 1580 स्क्वायर मीटर में दो मंजिला टर्मिनल भवन बनेगा। 165 स्क्वायर मीटर में एटीसी टावर और 451 स्क्वायर मीटर में फायर स्टेशन बनेगा। 1000 मीटर ×30 मीटर का रनवे होगा । एयरपोर्ट परिसर में कई महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे विकसित किए जाएंगे।प्री-फैब्रिकेटेड स्टील स्ट्रक्चर वाला टर्मिनल भवन, प्री-इंजीनियर्ड एयर ट्रैफिक कंट्रोल (एटीसी) टावर, प्री-इंजीनियर्ड फायर स्टेशन और अन्य महत्वपूर्ण आवश्यक सुविधाओं का निर्माण किया जाएगा। आधुनिक संरचनाओं के निर्माण से हवाई अड्डा के संचालन क्षमता और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत किया जाएगा। समृद्धि यात्रा में किया था घोषणा सवा माह पहले समृद्धि यात्रा पर तत्कालीन सीएम नीतीश कुमार के साथ तत्कालीन डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी भी सहरसा पहुंचे थे। सहरसा स्टेडियम की सभा में सम्राट चौधरी ने घोषणा की थी कि सहरसा हवाई अड्डे के विकास कार्य को एक माह के अंदर टेंडर निकलेगा।उस वादे को मुख्यमंत्री बनने के बाद सम्राट चौधरी ने पूरा किया है।हवाई अड्डा शुरु होने से सहरसा के अलावा मधेपुरा व आसपास के लाखों आबादी को सुविधा होगी। सुपौल के वीरपुर में भी हवाई सफर को लेकर घोषणा की गई है। 22 अप्रैल को निविदा की गयी है जारी भारतीय हवाई अड्डा प्राधिकरण (एएआई) ने सहरसा हवाई अड्डे के विकास एवं उन्नयन के लिए ईपीसी मोड पर ई-निविदा जारी किया है। यह निविदा हवाई अड्डे को कोड-2बी श्रेणी के विमानों के संचालन के अनुरूप विकसित करने के लिए जारी किया गया है। परियोजना के तहत सहरसा हवाई अड्डा को कोड-2बी श्रेणी के विमानों के संचालन के अनुरूप विकसित किया जाएगा। 16 जून को टेंडर खुलेगा। जिसके बाद जिस कंपनी को यह काम मिलेगा वह कार्य शुरू करेगी। 15 महीने में होगा अपग्रेडेशन हवाई अड्डा अपग्रेडेशन परियोजना की अनुमानित लागत 38.14 करोड़ रुपये और निर्माण कार्य की अवधि 15 महीने तय की गई है। इस परियोजना के तहत एयरपोर्ट के बुनियादी ढांचे को आधुनिक मानकों के अनुरूप विकसित किया जाएगा।

फर्जी लिंक से हो रही ठगी, टाटा पावर ने ग्राहकों को किया सतर्क

जमशेदपुर देश भर में बिजली उपभोक्ताओं को निशाना बनाकर किए जा रहे ‘वॉट्सऐप स्कैम’ को लेकर टाटा पावर ने अपने ग्राहकों के लिए सुरक्षा अलर्ट जारी किया है. कंपनी ने ग्राहकों को आगाह किया है कि वे किसी भी संदिग्ध मैसेज या लिंक पर भरोसा न करें, क्योंकि यह आपकी जमा-पूंजी और निजी डेटा के लिए बड़ा खतरा हो सकता है. कंपनी प्रबंधन का कहना है कि ​हाल के दिनों में देखा गया है कि जालसाज ग्राहकों को वॉट्सऐप पर फर्जी मैसेज भेज रहे हैं. इन संदेशों में बिजली कटने का डर दिखाकर या केवाईसी अपडेट करने के बहाने संदिग्ध लिंक भेजे जा रहे हैं. जैसे ही कोई यूजर इन लिंक्स पर क्लिक करता है. उसका फोन हैक होने या बैंक खाते से पैसे चोरी होने का खतरा बढ़ जाता है. ​ टाटा पावर की ग्राहकों को  सलाह ​कंपनी ने स्पष्ट किया है कि टाटा पावर कभी भी वॉट्सऐप, एसएमएस, कॉल या ईमेल के जरिए आपसे ओटीपी, बैंक विवरण या पासवर्ड नहीं मांगता है. किसी भी अज्ञात या संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें. ये लिंक आपके फोन और व्यक्तिगत डेटा से समझौता कर सकते हैं. ऐसे किसी भी संदेश के जवाब में अपनी व्यक्तिगत या वित्तीय जानकारी साझा न करें. ​केवल आधिकारिक ऐप का उपयोग करें. ऐप हमेशा गूगल प्ले स्टोर या एप्पल ऐप स्टोर से ही डाउनलोड करें. किसी अन्य सोर्स से भेजे गये ऐप डाउनलोड लिंक पर क्लिक न करें. सुरक्षा के लिए ग्राहक इन बातों का कड़ाई से पालन करें. ​ संदिग्ध गतिविधि होने पर क्या करें? ​टाटा पावर ने अपील की है कि यदि आपको कोई संदिग्ध मैसेज प्राप्त होता है या आपके साथ कोई अनधिकृत लेनदेन होता है. तो तुरंत ​हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें. ​साइबर पोर्टल नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल (www.cybercrime.gov.in) पर अपनी शिकायत दर्ज करें. सिर्फ टाटा पावर के आधिकारिक संचार माध्यमों से ही संपर्क करें. सतर्क रहें, सुरक्षित रहें. आपकी जागरूकता ही साइबर अपराधियों के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार है.

बिहार,मोतिहारी पुलिस की सख्त कार्रवाई, अपराधियों में मचा हड़कंप

 मोतिहारी बिहार के मोतिहारी में अपराधियों के हौसले पस्त करने के लिए पुलिस ने अब तक का सबसे बड़ा और आक्रामक रुख अख्तियार किया है। जिला पुलिस ने एक साथ 150 से अधिक चिन्हित फरार अपराधियों के खिलाफ 'कुर्की-जब्ती' की बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। मोतिहारी पुलिस ने स्पष्ट संदेश दे दिया है कि या तो अपराधी कानून के सामने सरेंडर करें, वरना उनके सिर से छत का साया छिनना तय है। इस बड़ी कार्रवाई के बाद पूरे जिले के अपराधियों और उनके सिंडिकेट में हड़कंप मचा हुआ है। दरवाजे-खिड़की तक उखाड़ ले गई पुलिस मिली जानकारी के अनुसार, पुलिस की भारी भरकम टीम कोर्ट के आदेश के बाद उन अपराधियों के घरों पर पहुंची, जिन्होंने तय समय सीमा के भीतर आत्मसमर्पण नहीं किया था। पुलिस का गुस्सा और सख्ती इस कदर दिखी कि उन्होंने न केवल घर का सामान जब्त किया, बल्कि खिड़की, दरवाजे और यहाँ तक कि चौखट पर भी हथौड़े चलाकर उन्हें उखाड़ फेंका। कोटवा, तुरकौलिया, रघुनाथपुर और कल्याणपुर समेत करीब 25 थानों की पुलिस ने एक साथ इस अभियान को अंजाम दिया। पुलिस ने कई फरार अपराधियों के घरों पर 'अंतिम नोटिस' भी चस्पा किया है, जिसमें साफ लिखा है कि अगर अब भी सरेंडर नहीं किया, तो पूरे घर को जमींदोज कर दिया जाएगा। इन गंभीर अपराधों में शामिल हैं अपराधी जिन 150 अपराधियों के खिलाफ यह एक्शन लिया जा रहा है, वे कोई मामूली चोर-उच्चके नहीं हैं। इनमें हत्या, रंगदारी, शराब तस्करी, जमीन पर अवैध कब्जा, हथियारों की तस्करी और पोक्सो (POCSO) एक्ट जैसे गंभीर मामलों के आरोपी शामिल हैं। पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर बनी विशेष टीम ने इन अपराधियों की सूची तैयार की थी जो लंबे समय से पुलिस की पकड़ से बाहर थे और समाज के लिए खतरा बने हुए थे। सासाराम में बड़ा हादसा एक तरफ जहाँ पुलिस अपराधियों पर नकेल कस रही है, वहीं दूसरी तरफ बिहार की सड़कों पर रफ्तार का कहर जारी है। सासाराम में तिलक समारोह से लौट रही बस और ट्रक की भीषण टक्कर में रामेश्वर मिश्रा नामक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि चालक और खलासी समेत तीन लोग गंभीर रूप से घायल हैं। वहीं छपरा के दिघवारा में भी एक स्कॉर्पियो ने ऑटो को कुचल दिया, जिसमें झौवां बसंत गांव के तीन लोगों की मौत हो गई।

गुप्त सूचना पर पुलिस की बड़ी कार्रवाई, सोलिया गांव से आरोपी दबोचा गया

 रामगढ़ झारखंड के रामगढ़ जिले के पतरातू थाना क्षेत्र में पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए अवैध हथियार के साथ एक युवक को गिरफ्तार किया है. गिरफ्तार युवक के पास से 9 एमएम का प्रतिबंधित पिस्टल बरामद किया गया है. पुलिस इस मामले की जांच गहराई से कर रही है. सूचना के आधार पर पुलिस की कार्रवाई और छापेमारी प्राप्त जानकारी के अनुसार, 26 अप्रैल की रात लगभग 8 बजे पुलिस अधीक्षक रामगढ़ को सूचना मिली थी कि पतरातू थाना क्षेत्र के ग्राम सोलिया निवासी अनीश अंसारी अवैध हथियार के साथ घूम रहा है. सूचना के सत्यापन के बाद सहायक पुलिस अधीक्षक सह अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी पतरातू राघवेंद्र शर्मा के नेतृत्व में छापामारी दल का गठन किया गया. छापामारी के दौरान पुलिस ने तालाताड़ पंचायत के सोलिया गांव से अनीश अंसारी को हिरासत में लेकर पूछताछ की. हथियार बरामदगी और मामला दर्ज पूछताछ के दौरान उसके बताए गए स्थान पर उसके घर से तुर्की मेड जिगाना कंपनी का 9 एमएम पिस्टल बरामद किया गया. पुलिस के अनुसार आरोपी ने बताया कि उक्त पिस्टल उसे राहुल दुबे गैंग के एक सक्रिय सदस्य द्वारा फायरिंग की घटना के बाद रखने के लिए दिया गया था. इस मामले में पतरातू थाना कांड संख्या 101/2026 के तहत आरोपी के विरुद्ध आर्म्स एक्ट की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर लिया गया है. पुलिस ने बताया कि आरोपी का पूर्व में भी आपराधिक इतिहास रहा है और उसके खिलाफ पहले भी कई धाराओं में मामला दर्ज है.छापामारी दल में पतरातू अंचल पुलिस निरीक्षक सत्येंद्र कुमार सिंह, थाना प्रभारी शिवलाल कुमार गुप्ता, भदानीनगर ओपी प्रभारी अख्तर अली, पुलिस अवर निरीक्षक अफजल अंसारी के साथ अन्य पुलिस बल के जवान शामिल थे.

राजभवन से लेकर जिलों तक बदली जिम्मेदारी, गोपाल मीणा बने नए सचिव

पटना बिहार सरकार ने रविवार को भारतीय प्रशासनिक सेवा के चार वरिष्ठ अधिकारियों का तबादला कर दिया है। इस फेरबदल में राजभवन से लेकर जिला स्तर तक के अधिकारियों की जिम्मेदारी बदली गई है। सबसे महत्वपूर्ण बदलाव राज्यपाल के सचिवालय में हुआ है, जहाँ प्रधान सचिव के पद पर नई तैनाती की गई है। सामान्य प्रशासन विभाग ने इसकी अधिसूचना जारी कर दी है। राजभवन में चोंग्यू की विदाई बिहार सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के तहत 1997 बैच के आईएएस अधिकारी और राज्यपाल के प्रधान सचिव रॉबर्ट एल. चोंग्यू को राजभवन से स्थानांतरित कर दिया गया है। अब उनको अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के प्रधान सचिव की नई जिम्मेदारी सौंपी गई है। उनकी जगह 2007 बैच के आईएएस अधिकारी गोपाल मीणा को राज्यपाल का नया सचिव नियुक्त किया गया है। गोपाल मीणा इससे पहले राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग में सचिव के पद पर तैनात थे। आईएएस अधिकारी गोपाल मीणा, राजभवन की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ सामान्य प्रशासन विभाग के जांच आयुक्त के अतिरिक्त प्रभार में भी  रहेंगे।  मो. सोहैल बने सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव अल्पसंख्यक कल्याण विभाग में सचिव के पद पर तैनात 2007 बैच के आईएएस अधिकारी मो. सोहैल का भी तबादला कर दिया गया है। उन्हें अब  सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव पद पर तैनात किया गया है। गोपाल मीणा की तरह मो. सोहैल भी जांच आयुक्त के अपने अतिरिक्त प्रभार को पूर्ववत संभालते रहेंगे। यह खबर भी पढ़ें-Bihar: मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद पहली बार JDU दफ्तर में नीतीश, कैबिनेट विस्तार पर डिप्टी सीएम ने क्या कहा? लखीसराय को मिले नए डीएम सरकार ने जिला स्तर पर भी बदलाव करते हुए 2013 बैच के आईएएस अधिकारी शैलेन्द्र कुमार को लखीसराय का नया समाहर्ता एवं जिला पदाधिकारी बनाया गया है। वह अब तक कृषि विभाग में विशेष सचिव के पद पर कार्यरत थे।  

संघर्ष से सफलता तक,झारखंड की दिव्यानी बनीं रांची की पहली महिला फुटबॉल स्टार

रांची झारखंड के रांची जिले की प्रतिभाशाली फुटबॉल खिलाड़ी दिव्यानी लिंडा ने अपने संघर्ष, समर्पण और मेहनत के दम पर एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है. ये रांची की पहली महिला खिलाड़ी बन गई हैं, जिन्हें AFC U-17 Women’s Asian Cup में भारत का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिला है. इस वर्ष झारखंड से एक साथ 4 खिलाड़ियों का चयन हुआ है, जो राज्य के खेल इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है. संघर्ष से सफलता तक का सफर दिव्यानी लिंडा चंद्र पंचायत के चंदरा गांव की निवासी हैं. सीमित संसाधनों, खेल मैदान की कमी और पारिवारिक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने अपने लक्ष्य से कभी समझौता नहीं किया. कठिन परिस्थितियों में भी उनका आत्मविश्वास और मेहनत उन्हें लगातार आगे बढ़ाता रहा, जिसका परिणाम आज पूरे देश के सामने है. स्टार वॉरियर्स से बनी पहचान दिव्यानी Star Warriors Football Club, कांके ब्लॉक में संचालित क्लब की प्रमुख खिलाड़ी हैं. उनकी इस उपलब्धि से न सिर्फ उनका परिवार, बल्कि पूरा कांके क्षेत्र और क्लब गौरवान्वित हुआ है. कोच अनवरूल हक उर्फ बबलू का अहम योगदान दिव्यानी की सफलता के पीछे उनके कोच अनवरूल हक (बबलू) का विशेष योगदान रहा है, जो क्लब के संस्थापक भी हैं. उन्होंने दिव्यानी की प्रतिभा को पहचान कर उसे निखारा और हर कठिन समय में मार्गदर्शन दिया. झारखंड का गौरव दिव्यानी लिंडा झारखंड की दूसरी खिलाड़ी बन चुकी हैं, जिन्हें इतने बड़े एशियाई स्तर के टूर्नामेंट में खेलने का अवसर मिला है. वहीं, रांची की पहली खिलाड़ी बनकर उन्होंने एक नया इतिहास स्थापित किया है. प्रेरणा की मिसाल दिव्यानी की सफलता हर उस युवा खिलाड़ी के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने का साहस रखता है. बधाई और शुभकामनाएं इस उपलब्धि पर स्टार वॉरियर्स फुटबॉल क्लब के संरक्षक जगदीश सिंह (जग्गू), कांके उप प्रमुख अजय कुमार बैठा, कोषाध्यक्ष सह पंचायत समिति सदस्य रेशमी तिर्की और देवेंद्र स्वामी प्रकाश, छोटू टोप्पो, सुरेन्द्र उरांव, डॉ. शहनवाज कुरैशी, समंदर लाल, रामेंद्र कुमार, राणा मिश्रा, नुरुल हक, एकरामुल अंसारी सहित अन्य सदस्यों ने दिव्यानी को बधाई और उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी हैं.

जेसीबी से खुदाई के दौरान निकली मूर्ति, ग्रामीणों ने बनाया अस्थायी मंदिर

चाईबासा  पश्चिमी सिंहभूम जिले के मनोहरपुर और आनंदपुर के सीमावर्ती इलाके में स्थित कोयल नदी में पानी के लिए जेसीबी से चार फीट गहरा गड्ढा खोदा जा रहा था. अचानक दोपहर डेढ़ बजे एक तेज आवाज के साथ खुदाई कर रही मशीन का पंजा किसी बेहद कठोर वस्तु से टकराकर ठिठक गया. ड्राइवर ने कोशिश की, लेकिन मशीन आगे बढ़ने को तैयार नहीं थी. पहले लगा कि कोई बड़ा पत्थर या चट्टान है, लेकिन जैसे ही वहां से बालू हटाई गई, वहां मौजूद लोगों की आंखें फटी की फटी रह गईं. अंधेरी गहराइयों से भगवान राधा-कृष्ण की युगल प्रतिमा मुस्कुराती हुई प्रकट हुई. ग्रामीण इसे अद्भुत घटना मान रहे हैं. कोयल नदी के गर्भ से भगवान राधा-कृष्ण की एक अत्यंत सुंदर प्रतिमा बालू के करीब चार फीट नीचे दबी थी. खुदाई में यह सुंदर मूर्ति जैसे ही बाहर निकली, पूरे इलाके में यह खबर आग की तरह फैल गई. देखते ही देखते नदी का तट एक अस्थायी मंदिर के रूप में तब्दील हो गया है. लोग इसे एक मूर्ति की खोज नहीं, बल् एक साक्षात सनातन चमत्कार मान रहे हैं जिसने पल भर में नदी के सूखे तट को भक्ति के सरोवर में बदल दिया है. जेसीबी की खुदाई के दौरान मिली प्रतिमा मिली जानकारी के अनुसार, भीषण गर्मी के कारण कोयल नदी का जलस्तर काफी नीचे चला गया है. ग्रामीणों की प्यास बुझाने और पास के गांव तक पानी पहुंचाने के लिए नदी में जेसीबी मशीन से खुदाई का काम चल रहा था. रविवार की दोपहर करीब डेढ़ बजे, खुदाई के दौरान मशीन अचानक किसी ठोस चीज से टकराकर रुक गई. जब सावधानी से उस जगह की दोबारा खुदाई की गई तो बालू के नीचे से राधा-कृष्ण की युगल प्रतिमा निकली. मूर्ति के निकलते ही वहां मौजूद लोग जयकारे लगाने लगे. झारखंड चमत्कार: खुदाई के दौरान कोयल नदी से निकली भगवान राधा-कृष्ण की प्रतिमा, ग्रामीणों ने बनाया अस्थायी मंदिर. श्रद्धालुओं ने बनाया अस्थायी दरबार मूर्ति मिलने की सूचना मिलते ही मनोहरपुर और आनंदपुर प्रखंड के गांवों से सैकड़ों की संख्या में लोग कोयल नदी के तट पर पहुंचने लगे. लोगों की आस्था इतनी गहरी है कि उन्होंने तुरंत उस स्थान पर भगवा झंडा गाड़ दिया. भीषण गर्मी और चिलचिलाती धूप से भगवान को बचाने के लिए ग्रामीणों ने लकड़ी और पेड़ों की टहनियों से एक अस्थायी छत (शेड) भी बना दी है. अब यहां सुबह से शाम तक पूजा-अर्चना और कीर्तन का दौर चल रहा है. मंदिर स्थापना की तैयारी में ग्रामीण नदी के बीचों-बीच मिली इस प्रतिमा को लेकर स्थानीय ग्रामीणों में भारी उत्साह है. कई ग्रामीणों का मानना है कि यह कोई साधारण घटना नहीं बल्कि ईश्वरीय संकेत है. गांव की प्रबंध समिति और बुजुर्ग अब इस प्रतिमा को विधि-विधान के साथ किसी सुरक्षित स्थान या नवनिर्मित मंदिर में स्थापित करने की योजना बना रहे हैं. फिलहाल, वनशक्ति देवी मंदिर के पास स्थित यह नदी क्षेत्र एक तीर्थ स्थल बन गया है.  

मंत्रिमंडल विस्तार की सुगबुगाहट, 33 से 36 मंत्री तक बढ़ सकती है संख्या

पटना बिहार को सुंदर बनाना है। समृद्ध और विकसित बनाना है। फैक्ट्री लगानी है। इस दिशा में हरसंभव प्रयास करूंगा। शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन सहित रोजगार को और अधिक बढ़ावा मिल सके, इसके लिए काम किया जायेगा।" मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 26 अप्रैल को अपने विधानसभा क्षेत्र तारापुर में जब यह बातें कहीं तो स्पष्ट हो गया कि वह लंबी पारी खेलना चाहते हैं। 15 अप्रैल को नई सरकार बनने के बाद से अब तक मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के काम करने के तौर तरीके और बयानों से स्पष्ट हो गया है कि वह एक नई टीम चाहते हैं। सम्राट चौधरी के करीबी इसे 'नई विकास टीम' का नाम दे रहे हैं। नई टीम में कई चेहरों का नाम फाइल हो चुका है। कुछ पर मंथन चल रहा है। सूत्र बता रहे हैं कि जल्द ही इस नई टीम की घोषणा भी कर दी जाएगी। एक दिन पहले यानी रविवार को उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने स्पष्ट कहा कि जल्द ही मंत्रिमंडल विस्तार हो जाएगा। तारीख उन्होंने नहीं बताई लेकिन कयास लगाया जा रहा है कि चार मई को चुनाव परिणाम आने के बाद पांच मई तक बिहार में मंत्रिमंडल विस्तार कर लिया जाए। वरिष्ठ पत्रकार प्रवीण बागी ने कहा कि भाजपा नए चेहरों को मौका जरूर देगी। विजय सिन्हा, मंगल पांडेय, रामकृपाल यादव, दिलीप जायसवाल जैसे पुराने दिग्गजों को दुबारा मौका मिल सकता है। युवा और महिलाओं पर सम्राट चौधरी का विशेष फोकस रहेगा। आलाकमान चाहते हैं कि सरकार में सोशल इंजीनियरिंग का खास ख्याल रखा जाए। हर वर्ग को मौका मिले ताकि संतुलन बरकरार रहे। सम्राट चौधरी की नई टीम में क्षेत्रीय और समाजिक समीकरण का समावेश दिख सकता है। जदयू ने अपने दो पुराने चेहरों को उपमुख्यमंत्री बनाकर यह साफ कर दिया है कि नीतीश कुमार अधिक प्रयोग नहीं करना चाहते हैं। निशांत कुमार फिलहाल सरकार में कोई पद नहीं लेंगे। यह लगभग तय है। अन्य पुराने चेहरे जैसे श्रवण कुमार, जमां खान, मदन सहनी, लेशी सिंह को दुबारा मौका मिल सकता है। हालांकि निशांत के करीबी कुछ युवा विधायक भी मंत्री बनने की कतार में खड़े हैं। इनमें कुछ को जदयू मौका दे सकती है। हाल के दिनों में विपक्ष ने जिन मंत्रियों पर सवाल उठाया है, उनपर  एनडीए विचार कर रहा है। विजय सिन्हा का क्या होगा? 2025 में जब नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए की सरकार बनी थी तो सम्राट चौधरी के साथ विजय सिन्हा भी उपमुख्यमंत्री बने थे। उन्हें राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की जिम्मेदारी भी सौंपी गई थी। इस विभाग में भ्रष्टाचार अंकुश लगाने के लिए कुछ ऐसे कदम उठाए, जिसकी चर्चा आज तक हो रही है। जनता ने विजय सिन्हा को एक ईमानदार नेता के रूप में देखा। हालांकि, राजस्व सेवा के अधिकारियों ने उनके काम करने की शैली का विरोध किया और हड़ताल पर चले गए। लेकिन, विजय सिन्हा अपने निर्णय पर अडिग रहे और उन्होंने जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने की बात कही। नई सरकार बनी तो विजय सिन्हा उपमुख्यमंत्री नहीं बने। सोशल मीडिया पर विजय सिन्हा और सम्राट चौधरी के बीच नोंकझोंक के पुराने वीडियो वायरल होने लगे। चर्चा होने लगी कि विजय सिन्हा अब किनारे कर दिए जाएंगे। तेजस्वी यादव ने भी विधानसभा में कहा कि विजय सिन्हा की नजर सम्राट चौधरी की पगड़ी पर है। हालांकि, सम्राट चौधरी ने विजय सिन्हा के काम की तारीफ की। इसके बाद ऐसा लगा कि विजय सिन्हा को दोबारा मंत्रिमंडल में जगह दिया जाएगा। चर्चा है कि नाराज चल रहे विजय सिन्हा की नाराजगी दूर करने के लिए उन्हें दोबारा राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के साथ गृह विभाग की भी जिम्मेदारी मिल सकती है। फिलहाल गृह विभाग सम्राट चौधरी के पास है। हालांकि, आखिरी फैसला दिल्ली दरबार में बैठे आलाकमान को ही लेना है। अब वहीं से सारा कुछ तय होगा।   चिराग, उपेंद्र और मांझी के पार्टी से कितने मंत्री बनेंगे? 2025 के विधानसभा चुनाव के बाद जो सरकार बनी, उसमें 26 मंत्रियों ने शपथ ली थी। उसमें भाजपा से 14 , जदयू से 8, लोजपा (राम) से दो, हम और रालोमो से एक-एक मंत्री शामिल थे। सम्राट चौधरी सरकार में जो खाका तैयार किया गया है उसमें मंत्रियों की संख्या 33 तक जा सकती है। इसमें जदयू के 14 और भाजपा के 15 मंत्री बनाए जा सकते हैं। वहीं चिराग की पार्टी से दो मंत्री बनाए जा सकते हैं जबकि उपेंद्र कुशवाहा और जीतन राम मांझी की पार्टी से पहले जैसे ही एक-एक मंत्री रहने की बात सामने आ रही है। अगर पूरी संख्या, यानी 36 विधायक रहे तो भाजपा के 17, जदयू के 15, लोजपा रामविलास के 2, रालोमो और हम के एक-एक मंत्री तय फॉर्मूले के तहत बनेंगे। विधानसभा अध्यक्ष पद किसके पास जाएगा? विधानसभा अध्यक्ष पद जदयू के कुछ नेता अपने पाले में चाह रहे हैं लेकिन भाजपा ऐसा नहीं होने देना चाहती है। भाजपा सूत्रों की मानें तो प्रेम कुमार अध्यक्ष के तौर पर अपना कार्यकाल पूरा करेंगे, ऐसा आश्वासन उन्हें पहले ही दिया जा चुका है। इस सूरत में भाजपा विधानसभा अध्यक्ष पद के साथ छेड़छाड़ नहीं होने देगी। 

BPSC परीक्षा में सॉल्वर गैंग का जाल, 8 FIR दर्ज

पटना बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) द्वारा आयोजित सहायक शिक्षा विकास पदाधिकारी (AEDO) की परीक्षा में धांधली की परतें अब तेजी से खुलने लगी हैं। आर्थिक अपराध इकाई (EOU) की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, इसमें एक बड़े संगठित गिरोह और 'सॉल्वर गैंग' की भूमिका सामने आ रही है। इस मामले में अब तक बिहार के 5 अलग-अलग जिलों में 8 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं, वहीं पुलिस ने अब तक कुल 38 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। EOU ने मामले की गंभीरता को देखते हुए BPSC से कई अहम जानकारियां मांगी हैं, जिससे आने वाले दिनों में कुछ बड़े नामों पर गाज गिरना तय माना जा रहा है। 5 जिलों में एक जैसा चीटिंग पैटर्न EOU की जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि मुंगेर, नालंदा, बेगूसराय, शेखपुरा और गया जैसे जिलों के परीक्षा केंद्रों पर धांधली का एक जैसा पैटर्न मिला है। कई अभ्यर्थी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेज के साथ रंगे हाथों पकड़े गए। जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि इस धांधली के पीछे एक बड़ा सिंडिकेट काम कर रहा था, जो अभ्यर्थियों को 25 से 30 लाख रुपये में परीक्षा पास कराने का झांसा देता था। SIT का गठन कर अब इस संगठित गिरोह के मास्टरमाइंड की तलाश की जा रही है। ब्लैकलिस्टेड कंपनी पर क्यों मेहरबान था आयोग? जांच का सबसे बड़ा और विवादित पहलू परीक्षा आयोजित कराने वाली निजी एजेंसी 'मेसर्स साई एजु केयर प्राइवेट लिमिटेड, जयपुर' की भूमिका है। रिपोर्ट के अनुसार, जिस कंपनी को परीक्षा के संचालन की जिम्मेदारी दी गई थी, उसे नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने पहले ही ब्लैकलिस्टेड कर रखा है। सवाल उठ रहे हैं कि आखिर एक दागी कंपनी को इतनी महत्वपूर्ण परीक्षा का जिम्मा कैसे दिया गया? इसके अलावा, बायोमेट्रिक हाजिरी लेने वाले कर्मचारियों की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है, जिनसे अब कड़ी पूछताछ की जा रही है। 14 से 21 अप्रैल के बीच हुई थी परीक्षा BPSC ने 14 अप्रैल से 21 अप्रैल के बीच AEDO की परीक्षा आयोजित की थी। परीक्षा के दौरान ही कई केंद्रों से गड़बड़ी की खबरें आने लगी थीं, जिसके बाद EOU ने मोर्चा संभाला। अब EOU ने BPSC से उन सभी अधिकारियों और कर्मचारियों का ब्यौरा मांगा है, जो परीक्षा प्रक्रिया और एजेंसी के चयन में शामिल थे।

रांची में जल संकट गहराया, धुर्वा-हटिया क्षेत्र में आपूर्ति बाधित

रांची  झारखंड की राजधानी रांची इन दिनों भीषण जल संकट से जूझ रही है. खासकर धुर्वा और आसपास के इलाकों में स्थिति बेहद गंभीर हो गई है. पिछले तीन दिनों से जलापूर्ति व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है, जिससे करीब एक लाख की आबादी बूंद-बूंद पानी के लिए परेशान है. भीषण गर्मी के बीच पानी की कमी ने लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं. हटिया डैम से सप्लाई बाधित शहर के कई प्रमुख इलाकों (धुर्वा, हटिया, डोरंडा, हिनू, बिरसा चौक और एयरपोर्ट क्षेत्र) में हटिया डैम से होने वाली जलापूर्ति बाधित हो गई है. इन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को पिछले 72 घंटों से नियमित पानी नहीं मिल पा रहा है. इससे दैनिक जीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है. जलापूर्ति बाधित होने का असर घरों के साथ-साथ छोटे व्यवसायों और दुकानों पर भी देखने को मिल रहा है. बिजली कटौती बनी मुख्य वजह पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के अनुसार इस संकट की सबसे बड़ी वजह लगातार हो रही बिजली कटौती है. हटिया डैम स्थित वाटर ट्रीटमेंट प्लांट और पंपिंग स्टेशनों को पर्याप्त बिजली नहीं मिल पा रही है. बिजली की कमी के कारण पानी को लिफ्ट करने और पाइपलाइन में पर्याप्त दबाव (प्रेशर) बनाने में समस्या आ रही है. इसी वजह से जलापूर्ति पूरी तरह सुचारू नहीं हो पा रही है. आंशिक सप्लाई से बढ़ी परेशानी पिछले तीन दिनों से इन इलाकों में केवल आंशिक जलापूर्ति ही हो रही है. कई जगहों पर नलों में पानी आता भी है, तो उसका प्रेशर बेहद कम होता है. इससे लोगों को पानी भरने में काफी दिक्कत हो रही है. धुर्वा सेक्टर-2 के निवासी राजीव सिन्हा बताते हैं कि नल से पानी या तो आता नहीं है, और अगर आता है तो इतना कम कि बर्तन भरना भी मुश्किल हो जाता है. बाजार से पानी खरीदने को मजबूर लोग जल संकट के चलते लोग अब बाजार से जार और बोतलबंद पानी खरीदने को मजबूर हो गए हैं. इससे आम लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है. गर्मी के मौसम में पानी की मांग पहले से ज्यादा होती है, लेकिन सप्लाई अनियमित होने के कारण स्थिति और बिगड़ गई है. कई परिवारों को अपनी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए पानी का इंतजाम करना चुनौती बन गया है. विभाग ने जताई परेशानी पेयजल विभाग के अधिकारियों का कहना है कि वे बिजली विभाग के साथ समन्वय बनाकर स्थिति को सुधारने की कोशिश कर रहे हैं. लेकिन जब तक पावर कट की समस्या दूर नहीं होती, तब तक जलापूर्ति को पूरी तरह बहाल करना मुश्किल रहेगा. अधिकारियों के अनुसार, जैसे ही बिजली आपूर्ति सामान्य होगी, जलापूर्ति भी धीरे-धीरे सुचारू हो जाएगी. लोगों में बढ़ती नाराजगी लगातार हो रही पानी की किल्लत से लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है. स्थानीय निवासियों का कहना है कि हर साल गर्मी के मौसम में ऐसी समस्या सामने आती है, लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकाला जाता. लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि जलापूर्ति और बिजली व्यवस्था को बेहतर बनाया जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की परेशानी से बचा जा सके. जल्द समाधान की उम्मीद फिलहाल प्रशासन और संबंधित विभाग स्थिति को सामान्य करने के प्रयास में जुटे हैं. लेकिन जब तक बिजली की समस्या का स्थायी समाधान नहीं होता, तब तक जल संकट से पूरी तरह राहत मिलना मुश्किल नजर आ रहा है. रांची के हजारों लोगों के लिए यह समय काफी चुनौतीपूर्ण है, और सभी को जल्द से जल्द राहत मिलने की उम्मीद है.