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अब पुल की लंबाई तय करेगी टोल टैक्स: बिहार सरकार ला रही नया फॉर्मूला

पटना  बिहार में अब राज्य के बड़े पुलों और चुनिंदा मुख्य सड़कों पर सफर करने के लिए आपकी जेब थोड़ी ज्यादा ढीली होने वाली है। राज्य सरकार पहली बार अपनी टोल टैक्स नीति लेकर आ रही है। पथ निर्माण विभाग इस नई नीति को अंतिम रूप देने में जोर-शोर से जुटा हुआ है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस नई नीति के तहत पुलों पर टोल टैक्स की राशि उनकी लंबाई के आधार पर तय की जाएगी। विभाग के विशेषज्ञ नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया की गाइडलाइंस के आधार पर इसके निर्धारण में जुटे हैं, ताकि सड़कों और पुलों का बेहतर रखरखाव किया जा सके। 10 गुना बढ़ाकर लिया जाएगा टोल इस नई टोल नीति में टैक्स तय करने का जो फॉर्मूला तैयार किया जा रहा है, वह बेहद खास है। विभाग के प्रस्ताव के अनुसार, पुल के मुख्य हिस्से की जो वास्तविक लंबाई होगी, उसे 10 से गुणा करके टैक्स की राशि तय की जाएगी। आसान भाषा में समझें तो, अगर किसी पुल का मुख्य हिस्सा 5 किलोमीटर लंबा है, तो उस पर 10 गुना बढ़ाकर यानी 50 किलोमीटर के हिसाब से टोल टैक्स वसूला जाएगा। वहीं, एप्रोच रोड की लंबाई पर प्रति किलोमीटर 60 से 65 पैसे का टैक्स लगेगा। अंत में पुल और एप्रोच रोड दोनों की राशि जोड़कर फाइनल टोल तय होगा। कॉमर्शियल वाहनों के लिए अलग दरें निजी चारपहिया वाहनों के लिए जहां प्रति किलोमीटर 60-65 पैसे का प्रस्ताव है, वहीं कॉमर्शियल और भारी वाहनों के लिए टोल टैक्स की दरें अलग-अलग निर्धारित की जाएंगी। हालांकि, पथ निर्माण विभाग ने स्पष्ट किया है कि इस फॉर्मूले पर अभी अंतिम निर्णय होना बाकी है। आपको बता दें कि राज्य में अब तक अपनी कोई टोल टैक्स नीति नहीं थी, इसलिए यातायात सुविधाओं को बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है। इस नई नीति में आम जनता की सहूलियत का भी ध्यान रखा गया है। नए मानक लागू होने के बाद, टोल प्लाजा के आसपास रहने वाले स्थानीय लोगों को टैक्स से छूट दी जाएगी। वहीं, जो लोग नौकरी या अपने व्यवसाय के सिलसिले में रोज उस मार्ग से सफर करते हैं, उनके लिए मंथली पास का विशेष प्रावधान किया जाएगा।

प्री-मानसून का असर तेज: बिहार के कई जिलों में 60 किमी/घंटा की रफ्तार से हवाओं की चेतावनी

 पटना बिहार में प्री मानसून के तहत अधिकांश जिलों में समय से पहले आंधी, बारिश और ठनका की गतिविधियों से बड़ी संख्या में लोगों की मौत हो चुकी है और किसानों को काफी नुकसान हो चुका है। आज शुक्रवार को उत्तर और पूर्वी बिहार के 19 जिलों में तेज आंधी के साथ बारिश और वज्रपात की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग ने मुजफ्फरपुर, पूर्णिया समेत 19 जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। पटना समेत दक्षिण बिहार के जिलों में आज लोगों को तेज धूप और गर्मी सताएगी। नमी का स्तर आज 44 % है, वहीं वायुमंडलीय दबाव 1003 के स्तर पर आंका गया है। मौसम विभाग की ओर से जारी की गई पूर्वानुमान रिपोर्ट में कई जिलों में मौसम खराब रह सकता है। इन जिलों में तेज हवा(50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटा) की दर से आंधी के साथ बारिश और ठनका गिरने की सभावना व्यक्त की गई है। आज, मुजफ्फरपुर, वैशाली, सीतामढ़ी, शिवहर, मधुबनी, दरभंगा, समस्तीपुर, सुपौल, सहरसा, मधेपुरा, अररिया, किशनगंज, पूर्णिया, मुंगेर, कटिहार, भागलपुर, बांका, जमुई, खगड़िया जैसे जिलों में मौसम का रौद्र रूप देखने को मिलेगा। मौसम विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि वेदर फोरकास्ट रिपोर्ट पर ध्यान रखते हुए खेती बारी के लिए सरेह में जाएं। लोगों को घर से बाहर रहने पर सचेत रहने की चेतावनी दी गई है। दक्षिण बिहार में तेज धूप के साथ उमस मौसम विभाग की ओर से बताया गया है कि दक्षिण बिहार और मध्य बिहार के जिलों में अभी गर्मी से राहत के आसार नहीं दिख रहे हैं। राजधानी पटना, गया, नालंदा, नवादा, बक्सर और भोजपुर समेत अन्य जिलों में तेज धूप और उमस का असर दिखेगा। हवा में नमी का स्तर अधिक होने के कारण वास्तविक तापमान से अधिक गर्मी सताएगी। यहां अधिकतम तापमान 37 से 38 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने का अनुमान लगाया गया है। कल भी बारिश का अलर्ट पटना मौसम विज्ञान केंद्र की ओर से 16 मई के लिए भी फोरकास्ट जारी किया गया है। बताया गया है कि राज्य के पूर्णिया,किशनगंज, सहरसा, मधेपुरा अररिया, सुपौल और कटिहार में आंधी-बारिश और बिजली का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।बताया गया है कि इन जिलों के अनेक भागों में बारिश हो सकती है। इसके अलावे 20 मई को भी पूर्णिया,कटिहार, जमुई, मुंगेर, बांका, खगड़िया, अररिया, सुपौल, किशनगंज, सहरसा, मधेपुरा, और भागलपुर में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इस दिन इन जिलों के विभिन्न इलाकों में कुछ स्थानों पर बारिश हो सकती है।

काफिला छोटा करने के बाद CM का नया संदेश, पैदल पहुंचे सचिवालय

पटना  देश में पेट्रोलियम संकट और ईंधन बचत की बढ़ती जरूरत के बीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शुक्रवार को एक बड़ा संदेश दिया।मुख्यमंत्री एक अणे मार्ग स्थित सरकारी आवास से पैदल ही सचिवालय पहुंचे। उन्होंने शुक्रवार को ‘नो व्हीकल डे’ के रूप में मनाने का फैसला लेते हुए सरकारी वाहन का उपयोग नहीं किया। तेज धूप के बावजूद उनके साथ सचिव व अन्‍य अधिकारी भी पैदल ही निकले। रास्‍ते में मुख्‍यमंत्री ने लोगों का अभ‍िवादन भी स्‍वीकार किया। मुख्यमंत्री के इस कदम को ऊर्जा संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा की दिशा में एक प्रतीकात्मक लेकिन महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।इससे पहले भी उन्होंने अपने काफिले में वाहनों की संख्या कम कर दी थी और इलेक्ट्रिक कार का इस्तेमाल शुरू किया था। पहले ही कर चुके हैं अपील मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कुछ दिन पहले ही लोगों से सप्ताह में एक दिन ‘नो व्हीकल डे’ मनाने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि यदि लोग छोटी-छोटी आदतों में बदलाव करें तो बड़े स्तर पर ईंधन की बचत की जा सकती है।अब मुख्यमंत्री खुद उसी अपील पर अमल करते नजर आए। उनके पैदल सचिवालय पहुंचने की चर्चा राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में होती रही। मंत्रियों पर भी दिख रहा असर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईंधन बचत और ऊर्जा संरक्षण संबंधी अपील का असर अब बिहार सरकार में भी दिखाई देने लगा है। कई मंत्रियों ने अपने काफिलों में वाहनों की संख्या घटा दी है।कुछ मंत्री ट्रेन और सार्वजनिक परिवहन का उपयोग कर रहे हैं, जबकि कई जनप्रतिनिधि इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने की दिशा में कदम उठा रहे हैं। सरकार इसे जनभागीदारी के जरिए ऊर्जा संकट से निपटने की कोशिश के रूप में देख रही है।

बिहार में ‘नीरा’ को बढ़ावा, समस्तीपुर में 157 बिक्री केंद्रों से मिलेगी प्राकृतिक ड्रिंक

 समस्तीपुर  जिले में नीरा उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए जिले में एक व्यापक योजना बनायी गई है। इसके तहत कुल 5300 ताड़ पेड़ों की पहचान की गई है।मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग और जीविका के संयुक्त प्रयास से इस सीजन में लगभग 17 लाख लीटर नीरा के उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसे जिले में 157 विक्रय केंद्रों के माध्यम से बेचा जाना है। इस पहल का उद्देश्य न केवल नीरा उत्पादन को प्रोत्साहित करना है, बल्कि टैपर्स और ताड़ पेड़ मालिकों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना भी है। फिलहाल जिले में 25 स्थानों पर इसे खोल दिया गया है। पिछले वर्ष 11 लाख 22 हजार 122 लीटर नीरा का उत्पादन किया गया था। जानकारी के अनुसार, अप्रैल से जुलाई तक के ताड़ी उत्पादन सत्र के दौरान जिले के 561 टैपर्स को प्रति लीटर आठ रुपये की दर से प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। यह राशि सीधे लाभुकों के बैंक खाते में डीबीटी के माध्यम से भेजी जाएगी। टैपर्स का सत्यापन जीविका के माध्यम से किया जाएगा, जिसके बाद विभाग द्वारा उन्हें आवश्यक लाइसेंस प्रदान किया जाएगा। पिछले वर्ष 780 टैपर्स को जीविका द्वारा प्रशिक्षण दिया गया था। इसके माध्यम से 60 रुपये प्रति लीटर की दर पर नीरा को बेचा गया था। 157 नीरा बिक्री केंद्र किए जाएंगे स्थापित वहीं, चालू वित्तीय वर्ष में जिले में 157 नीरा बिक्री केंद्र स्थापित किए जाएंगे, जिन्हें जीविका समूहों के माध्यम से संचालित किया जाएगा। इससे ग्रामीण स्तर पर रोजगार के अवसरों में भी वृद्धि होगी। 60 रुपये लीटर या 10 रुपये ग्लास की दर से नीरा की बिक्री होगी। नीरा उत्पादन को और अधिक बढ़ावा देने के लिए ताड़ पेड़ मालिकों को भी प्रोत्साहन राशि देने की व्यवस्था की गई है। विभागीय जानकारी के अनुसार, प्रति लीटर नीरा पर उन्हें तीन रुपये की दर से अधिकतम दस पेड़ों तक लाभ दिया जाएगा। इस आधार पर एक पेड़ के लिए 585 रुपये तथा दस पेड़ों के लिए अधिकतम 5850 रुपये तक की राशि दी जाएगी। इसके अतिरिक्त, यदि कोई टैपर एक साथ दस पेड़ों की टैपिंग करता है, तो उसे 15,600 रुपये की प्रोत्साहन राशि जीविका समूह द्वारा प्रदान की जाएगी। जिन टैपर्स के पास दस से कम पेड़ हैं, उन्हें भी उसी अनुपात में प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। साथ ही, चिह्नित पेड़ों की मार्किंग के लिए प्रति पेड़ 30 रुपये अलग से दिए जाएंगे।     यह योजना जिले में ताड़ी से जुड़े परंपरागत रोजगार को संरक्षित करने के साथ-साथ आर्थिक मजबूती देने की दिशा में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। नीरा उत्पादन से न सिर्फ स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, और लोगों को स्वास्थ्यवर्द्धक पेय होने के कारण आम लोगों के बीच भी लोकप्रिय है। आलोक कुमार, फार्म प्रबंधक, जीविका समस्तीपुर

बेटे को जीत नहीं दिला सके राधाचरण, MLC चुनाव में JDU को मिली करारी हार

पटना  बिहार में एनडीए की नई सरकार के गठन के बाद हुए पहले उपचुनाव में पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड को बड़ा झटका लगा है। भोजपुर बक्सर स्थानीय प्राधिकार विधान परिषद सीट पर लालू एवं तेजस्वी यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के प्रत्याशी सोनू राय जीतकर एमएलसी बन गए हैं। उन्होंने एनडीए समर्थित जेडीयू कैंडिडेट कन्हैया प्रसाद को 350 से अधिक वोटों से हरा दिया। यह सीट पहले जेडीयू के पास थी, कन्हैया के पिता राधाचरण साह यहीं से एमएलसी थे। उनके विधायक बनने के बाद यह सीट खाली हुई थी, जिस पर उपचुनाव हुए। उपचुनाव में यह सीट आरजेडी ने जेडीयू से छीन ली है। भोजपुर बक्सर एमएलसी उपचुनाव में मुकाबला काफी रोचक रहा। जेडीयू के बागी मनोज उपाध्याय के मैदान में उतरने से एनडीए को नुकसान हुआ। सोनू कुमार राय को 2507 वोट मिले। जीत के लिए 2668 वोटों की जरूरत थी, लेकिन द्वितीय वरीयता के मतों की गिनती खत्म होने के बाद बढ़त के आधार पर सोनू कुमार राय चुनाव जीत गए। बागी ने बिगाड़ा राधाचरण के बेटे का खेल जेडीयू के बागी उम्मीदवार मनोज उपाध्याय को उपचुनाव में 636 मत मिले। माना जा रहा है कि सामाजिक आधार पर यह वोट एनडीए का था। मनोज के बागी होकर चुनाव लड़ने से जेडीयू विधायक राधाचरण साह के बेटे कन्हैया प्रसाद को हार का सामना करना पड़ा। अन्य तीन उम्मीदवारों में प्रथम वरीयता के वोटों में सारण जिले के मढ़ौरा प्रखंड के निवासी लालू प्रसाद यादव को 30, निर्दलीय कन्हैया प्रसाद को 25 और निरंजन कुमार को 12 मत मिले थे। पहली वरीयता के मतों में आरजेडी को 340 वोट की बढ़त पहली वरीयता के मतों की गिनती में ही आरजेडी उम्मीदवार सोनू राय ने बढ़त हासिल कर ली थी। कुल पड़े 5956 मतों में से 621 मत रद्द कर दिए गए। 5335 वोट वैध करार दिए गए। इनमें से आरजेडी के सोनू राय को सर्वाधिक 2486 और जेडीयू कैंडिडेट कन्हैया प्रसाद को 2146 मत मिले। इस तरह 340 मतों से आरजेडी उम्मीदवार को निर्णायक बढ़त मिल गई। सोनू के पिता भी रह चुके हैं एमएलसी इस सीट से सोनू राय के पिता लालदास राय भी एमएलसी रह चुके हैं। उन्होंने भोजपुर-बक्सर निर्वाचन प्राधिकार क्षेत्र से 2003 में पहली बार आरजेडी के टिकट पर चुनाव जीता था। इस बार तेजस्वी यादव की पार्टी ने लालदास के बेटे सोनू राय को मैदान में उतारा और वह चुनाव जीतकर विधान परिषद पहुंच गए। RJD कार्यालय में जश्न का माहौल भोजपुर बक्सर एमएलसी उपचुनाव में आरजेडी प्रत्याशी सोनू कुमार की जीत पर गुरुवार को पटना स्थित प्रदेश पार्टी कार्यालय में जश्न का माहौल देखने को मिला। आरजेडी नेताओं ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर खुशियां मनाईं। आरजेडी नेताओं ने कहा कि लोगों ने प्रतिपक्ष के नेता तेजस्वी यादव पर भरोसा किया है। बधाई देने वालों में प्रदेश अध्यक्ष मंगनी लाल मंडल, पूर्व केंद्रीय मंत्री मो. अली अशरफ अंसारी, शक्ति सिंह यादव, चितरंजन गगन और एजाज अहमद आदि शामिल हैं।

बिहार सरकार में जिम्मेदारियों का पुनर्वितरण, कैबिनेट में दिखेगा बड़ा बदलाव

 पटना बिहार सरकार ने मंत्रिमंडल की बैठकों (Bihar Cabinet) की कार्यशैली में बड़ा बदलाव किया गया है। अब राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में विभागीय एजेंडा संबंधित मंत्री स्वयं प्रस्तुत करेंगे। इसकी शुरुआत प्रायोगिक तौर पर 13 मई को हुई कैबिनेट बैठक से कर दी गई। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी (Bihar CM Samrat Choudhary) की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में सभी विभागों के मंत्रियों ने अपने-अपने विभागों के प्रस्ताव और एजेंडे खुद रखे। सीएम सम्राट की पहल, मंत्रियों को मिली जिम्मेदारी अब तक कैबिनेट बैठकों में विभाग के अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव या सचिव एजेंडा प्रस्तुत करते थे और उसी पर चर्चा होती थी, लेकिन मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की पहल पर व्यवस्था में बदलाव करते हुए मंत्रियों को सीधे तौर पर अपनी योजनाओं और प्रस्तावों को रखने की जिम्मेदारी दी गई है। सरकार का मानना है कि इससे मंत्रियों की जवाबदेही बढ़ेगी और विभागीय योजनाओं को लेकर उनकी भूमिका अधिक प्रभावी होगी। बीते बुधवार को हुई बैठक में कुल 18 एजेंडे पेश किए गए। इनमें वाणिज्य कर, वित्त, गृह, उद्योग, उच्च शिक्षा, शिक्षा, सूचना एवं प्रौद्योगिकी, राजस्व एवं भूमि सुधार तथा परिवहन विभाग से जुड़े प्रस्ताव शामिल थे। बैठक के दौरान कई मंत्रियों ने अपने विभाग की योजनाओं और प्रस्तावों को विस्तार से रखा तथा विभिन्न मुद्दों पर प्रभावशाली तरीके से अपनी बात रखी। प्रशासनिक स्तर पर जरूरी बदलाव सरकार के इस नए प्रयोग को प्रशासनिक स्तर पर महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में इससे मंत्रिमंडल की बैठकों में मंत्रियों की सक्रिय भागीदारी और निर्णय प्रक्रिया में उनकी सीधी भूमिका और मजबूत होगी।  

रांची की बेटी का देशभर में डंका! भव्या रंजन ने 99.8% लाकर किया टॉप

रांची रांची की छात्रा भव्य रंजन ने CBSE 12वीं परीक्षा में शानदार प्रदर्शन करते हुए 99.8 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं. रांची के ऑक्सफोर्ड पब्लिक स्कूल की छात्रा भव्या अब तक सामने आए परिणामों के अनुसार नेशनल टॉपर्स की सूची में शामिल मानी जा रही हैं. ऑक्सफोर्ड पब्लिक स्कूल  की छात्रा आर्ट्स स्ट्रीम की नेशनल टॉपर के रूप में सामने आई हैं. उनकी इस सफलता से स्कूल, परिवार और शहर में खुशी की लहर है. भव्या ने इंग्लिश, हिस्ट्री, पॉलिटिकल साइंस और पेंटिंग में 100 में 100 नंबर हासिल किए हैं।  भव्या की सफलता ने एक बार फिर से साबित कर दिया है कि मेहनत, अनुशासन और सही मार्गदर्शन के दम कोई भी मुकाम हासिल कर सकता है।  अपनी उपलब्धि पर क्या बोलीं भव्या?  अपनी उपलब्धि के बारे में बताते हुए छात्रा ने कहा कि वह पढ़ाई को घंटों में नहीं बांटती थीं बल्कि प्रोडक्टिव स्टडी पर फोकस करती थीं. उन्होंने कहा कि रोजाना पढ़ाई, सही प्लानिंग और खुद पर भरोसा उनका सफलता बनीं. उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता, शिक्षकों और दोस्तों को दिया।  स्कूल से हमेशा मिला सहयोग बात करते हुए भव्या ने बताया कि स्कूल के शिक्षकों ने उनका हर कदम पर साथ दिया. परीक्षा के समय किसी भी तरह की परेशानी में उनके शिक्षकों ने दूर करने में मदद की. भव्या ने इस बात पर भी ध्यान दिया कि केवल पढ़ाई करना ही जरूरी नहीं है बल्कि मानसिक संतुलन बनाए रखना भी जरूरी है।    भविष्य की योजना  बता दें कि भव्या की मां टीचर हैं जबकि उनके पिता बिजनेसमैन हैं. परिवार के अनुसार भव्या रोजाना 10 से 12 घंटे नियमित पढ़ाई करती थीं. भव्या का अगला लक्ष्य  UPSC परीक्षा पास कर सिविल सर्विसेज में जाना चाहती हैं और देश की सेवा करना चाहती हैं।  क्या बोले स्कूल के डयरेक्टर?  स्कूल के अकादमिक डयरेक्टर सिम्मी मेहता ने कहा कि भव्या जैसी छात्रा देश के उज्ज्वल भविष्य की पहचान हैं और उनकी सफलता अन्य छात्रों के लिए प्रेरणा है। 

बिहार में रेल नेटवर्क विस्तार की तैयारी तेज: बिहटा-औरंगाबाद परियोजना को मिली रफ्तार

 अरवल वर्ष 2001 में जहानाबाद से अलग होकर जिला बने अरवल को आज भी अपने रेलवे स्टेशन का इंतजार है। जिला गठन के करीब 25 वर्ष बाद भी अरवल रेल नेटवर्क से नहीं जुड़ सका है। हालांकि अब बहुप्रतीक्षित बिहटा-औरंगाबाद रेल लाइन परियोजना के जरिए जिले को रेल मानचित्र पर लाने की कवायद तेज होती दिख रही है। लालू प्रसाद ने क‍िया था श‍िलान्‍यास  बिहटा से अरवल होते हुए औरंगाबाद तक प्रस्तावित रेल लाइन परियोजना का शिलान्यास वर्ष 2007 में तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने किया था। इसके बाद वर्षों तक परियोजना ठंडे बस्ते में पड़ी रही। रेल आंदोलन के संयोजक मनोज सिंह यादव के नेतृत्व में लगातार आंदोलन और जनदबाव के बाद अब योजना को गति मिलने की उम्मीद जगी है। रेलवे के जीएम हाजीपुर द्वारा 30 सितंबर 2025 को जारी प्रेस नोट में बताया गया कि 3606.42 करोड़ रुपये की लागत से परियोजना को पूर्ण स्वीकृति मिल चुकी है। आंदोलनकारी मनोज सिंह यादव ने बताया कि परियोजना का निर्माण दो चरणों में किया जाएगा। 117.6 किमी होगी रेल लाइन की लंबाई पहले चरण में अनुग्रह नारायण रोड स्टेशन से औरंगाबाद तक 13 किलोमीटर रेल लाइन के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की गई है। वहीं दूसरे चरण में बिहटा से औरंगाबाद तक 117.6 किलोमीटर लंबी रेल लाइन निर्माण के लिए रेलवे ने बिहार सरकार को जमीन अधिग्रहण संबंधी पत्र भेजा है। उन्होंने बताया कि अरवल की तत्कालीन डीएम अभिलाषा शर्मा ने 6 दिसंबर 2025 को भू-अर्जन पदाधिकारी को भूमि अधिग्रहण के लिए सक्षम प्राधिकार नियुक्त किया था। रेलवे अधिकारियों ने जून माह से भूमि अधिग्रहण कार्य शुरू होने का आश्वासन भी दिया है। पटना, अरवल और औरंगाबाद जिले में मिलाकर करीब 6500 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण प्रस्तावित है। 14 स्टेशन और कई हाल्ट होंगे विकसित प्रस्तावित रेल लाइन परियोजना में कुल 14 स्टेशन प्रस्तावित किए गए हैं। इनमें बिहटा, बिक्रम, दुल्हिन बाजार, पालीगंज, बारा, अरवल, खभैनी, मेहंदिया, कलेर, शमशेर नगर, दाउदनगर, ओबरा, भरथौली और अनुग्रह नारायण रोड स्टेशन शामिल हैं। इसके अलावा कई स्थानों पर हाल्ट निर्माण की भी योजना है। चार लोकसभा क्षेत्रों को मिलेगा सीधा लाभ यह रेल परियोजना औरंगाबाद, काराकाट, जहानाबाद और पटना लोकसभा क्षेत्रों के लाखों लोगों के लिए विकास की नई संभावनाएं लेकर आएगी। रेल लाइन बनने से पटना और औरंगाबाद के बीच यात्रा समय में भारी कमी आएगी। वर्तमान में सड़क मार्ग से यह सफर तय करने में चार से पांच घंटे लगते हैं, जबकि रेल परिचालन शुरू होने के बाद यह दूरी महज डेढ़ से दो घंटे में पूरी हो सकेगी। डीएम ने क्या कहा हालांकि, अमृशा बैंस ने कहा कि फिलहाल रेलवे के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है। प्रशासनिक स्तर पर आगे की कार्रवाई तय होने के बाद ही प्रक्रिया को औपचारिक रूप से आगे बढ़ाया जाएगा।  

जेलों की खाली जमीन पर पेट्रोल पंप, कैदियों को मिलेगी पारिश्रमिक

पटना बिहार की जेलों के कैदी पेट्रोल पंप चलाएंगे। गृह (कारा) विभाग ने इसे लेकर विस्तृत प्रारूप तैयार किया है। जेल प्रशासन की खाली पड़ी जमीन पर पेट्रोल पंप स्थापित किए जाएंगे। इन पेट्रोल पंपों के संचालन का दायित्व उस जेल में रहने वाले कैदियों को दिया जाएगा। गृह (कारा) विभाग ने प्रस्ताव को वित्त विभाग की मंजूरी के लिए भेजा है। इसके बाद विधि विभाग से भी मंजूरी ली जाएगी। राज्य मंत्रिपरिषद की मंजूरी के बाद यह लागू होगा। राज्य सरकार की मंजूरी के बाद गृह (कारा) विभाग पेट्रोलियम कंपनियों के साथ पेट्रोल पंप संचालन के लिए समझौता (एमओयू) करेगा। कारा विभाग ने हिन्दुस्तान पेट्रोलियम के साथ पहले ही करार करने का निर्णय लिया है। पेट्रोल पंप आवंटन के बाद उसे जेलों की खाली भूमि पर लगाया जाएगा। सुधार प्रक्रिया से जुड़े कैदी संभालेंगे दायित्व जेलों में लंबे समय से सजा भुगतने वाले वैसे कैदी जो सुधार प्रक्रिया में शामिल हैं, उन्हें इसके संचालन का दायित्व दिया जाएगा। जेलों में सजायाफ्ता या विचाराधीन खूंखार एवं गंभीर अपराध के आरोपी कैदियों को संचालन का दायित्व नहीं दिया जाएगा। इन पेट्रोल पंपों पर होने वाली पेट्रोलियम उत्पादों की बिक्री की निगरानी के लिए भी तंत्र विकसित किया जाएगा। 59 जेलों में करीब 60 हजार है कैदी बिहार में आठ केंद्रीय कारागारों समेत कुल 59 जेलों की क्षमता 47,750 है, लेकिन इन जेलों में 61,891 कैदी हैं। इसका मतलब यह हुआ कि जेलों में क्षमता के मुकाबले 30 फीसदी अधिक कैदी हैं। जेलों में उद्यमिता के विकास, योग, ध्यान एवं सुधार के भी कई कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। कैदियों को पारिश्रमिक मिलेगा पेट्रोल पंप के संचालन का दायित्व संभालने वाले कैदियों को पारिश्रमिक का भुगतान किया जाएगा। कैदियों को जेल मैनुअल के अनुसार ही राशि मिलेगी। वर्तमान में, जेलों में विभिन्न प्रकार के उत्पादन कार्यों में जुड़े कैदियों को पारिश्रमिक का भुगतान किया जाता है। जानकारी के अनुसार, बिहार की जेलों में सजायाफ्ता कैदियों को उनके कौशल के आधार पर प्रतिदिन ₹147 से ₹397 रुपए तक का पारिश्रमिक मिलता है। इन्हें 4 श्रेणियों में बांटा गया है, जिसमें अकुशल (4 घंटे कार्य) को ₹147 रुपये, अकुशल को ₹294, अर्द्ध कुशल को ₹309 और कुशल कैदियों को ₹397 रुपये प्रतिदिन का भुगतान किया जाता है।

पटना में जदयू दफ्तर में शुरू हुआ सप्ताहिक जन सुनवाई कार्यक्रम

पटना बिहार की सम्राट सरकार में जनता दल यूनाइटेड (JDU) कोटे के मंत्रियों का जन सुनवाई कार्यक्रम फिर से शुरू हो गया है। पटना स्थित जदयू दफ्तर में अब 3-3 मंत्री रोजाना जनता दरबार लगाकर लोगों की शिकायतें सुनेंगे। पार्टी के राष्ट्र्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार ने जदयू के सभी मंत्रियों की पार्टी दफ्तर में ड्यूटी लगा दी है और कौन 3 मंत्री किस दिन कितने बजे से जन सुनवाई करेंगे, इसकी टाइमिंग भी फिक्स कर दी गई है। पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के निर्देश पर जदयू प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा की ओर से मंगलवार को कार्यक्रम जारी कर दिया गया। प्रत्येक दिन तीन-तीन मंत्री पार्टी दफ्तर में लोगों की समस्या सुनेंगे। जन सुनवाई कार्यक्रम रोजाना सुबह 11.30 बजे से शुरू होगा। सोमवार और मंगलवार को किसकी ड्यूटी सोमवार को ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार, भवन निर्माण मंत्री लेशी सिंह और ग्रामीण कार्य मंत्री सुनील कुमार आम लोगों की समस्याएं सुनेंगे। मंगलवार को डिप्टी सीएम विजय चौधरी, विज्ञान एवं प्रावैधिकी मंत्री शीला मंडल और ऊर्जा मंत्री बुलो मंडल लोगों की समस्याएं सुनेंगे। निशांत बुधवार को बुधवार को स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार, परिवहन मंत्री दामोदर रावत, आपदा प्रबंधन मंत्री रत्नेश सादा लोगों की समस्या सुनेंगे। गुरुवार को खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री अशोक चौधरी, मदन सहनी और समाज कल्याण मंत्री श्वेता गुप्ता जन समस्या सुनेंगी। इसी तरह शुक्रवार को डिप्टी सीएम बिजेंद्र प्रसाद यादव, योजना एवं विकास मंत्री एवं अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री लोगों की समस्या सुनेंगे। चुनाव के चलते स्थगित हुआ था जनता दरबार बता दें कि जदयू दफ्तर में जन सुनवाई कार्यक्रम लंबे समय से चलता रहा है। नीतीश कुमार जब मुख्यमंत्री थे, तब भी वे जनता दरबार लगाकर लोगों की समस्याएं सुनते थे। पिछले साल विधानसभा चुनाव के चलते जन सुनवाई कार्यक्रम स्थगित हो गया था। अब पार्टी की ओर से फिर से इसे शुरू कर दिया गया है। जदयू अध्यक्ष ने पूरे सप्ताह का कार्यक्रम विधिवत घोषित किया है। ताकि लोगों को किसी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़े यहां देखें पूरी लिस्ट सोमवार, सुबह 11.30 बजे से–     श्रवण कुमार, ग्रामीण विकास मंत्री     लेशी सिंह, भवन निर्माण मंत्री     सुनील कुमार, ग्रामीण कार्य मंत्री मंगलवार, सुबह 11.30 बजे से–     विजय चौधरी, डिप्टी सीएम, जल संसाधन एवं संसदीय कार्य मंत्री     शीला मंडल, विज्ञान एवं प्रावैधिकी मंत्री     शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल, ऊर्जा मंत्री बुधवार, सुबह 11.30 बजे से–     निशांत कुमार, स्वास्थ्य मंत्री     दामोदर रावत, परिवहन मंत्री     रत्नेश सदा, आपदा प्रबंधन मंत्री गुरुवार, सुबह 11.30 बजे से–     अशोक चौधरी, खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री     मदन सहनी, मद्य निषेध उत्पाद एवं निबंधन मंत्री     श्वेता गुप्ता, समाज कल्याण मंत्री शुक्रवार, सुबह 11.30 बजे से–     बिजेंद्र प्रसाद यादव, डिप्टी सीएम, वित्त एवं वाणिज्य कल मंत्री     भगवान सिंह कुशवाहा, योजना विकास मंत्री     जमा खान, अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री