samacharsecretary.com

10 हजार करोड़ की लागत से इंदौर-उज्जैन मेट्रो, डीएमआरसी का प्रेजेंटेशन, कैबिनेट में जाएगा प्रस्ताव

इंदौर/उज्जैन  इंदौर और उज्जैन के लोगों के लिए खुशखबरी है, क्योंकि दोनों शहरों के बीच मेट्रो चलाने का जो सपना देखा गया था, वह अब हकीकत में बदलने को तैयार है. इंदौर से उज्जैन के बीच मेट्रो दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन की टीम ने डीपीआर ने प्रस्ताव पेश कर दिया है, जिसमें बताया गया है कि दोनों शहरों के बीच 10 हजार करोड़ की लागत से मेट्रो का काम पूरा किया जाएगा, जिसमें 45 किलोमीटर का ट्रैक बिछाया जाएगा और दोनों शहरों के बीच करीब 11 मेट्रो स्टेशन बनेंगे, जिसमें 4.5 किलोमीटर का ट्रैक उज्जैन शहर में रहेगा जिसे अंडरग्राउंड रखने की बात डीपीआर में कही गई है. वहीं यह भी बताया गया है कि मेट्रो इंदौर के लवकुश चौराहे से शुरू होगी और उज्जैन के रेलवे स्टेशन तक चलाई जाएगी. इंदौर से उज्जैन के बीच मेट्रो चलने से दोनों शहरों को बड़ा फायदा होगा.  सिंहस्थ से पहले चलाने की तैयारी  दरअसल, इंदौर-उज्जैन मेट्रो साल 2028 में होने वाले सिंहस्थ महाकुंभ से पहले चलाने की कोशिश की जाएगी, क्योंकि सीएम मोहन यादव ने पिछले दिनों सिंहस्थ तक दोनों शहरों के बीच मेट्रो चलाने की मंशा जाहिर की थी. बताया जा रहा है कि इसी प्लान पर काम करते हुए मेट्रो रेल कॉरपोरेशन की तरफ से डीपीआर बनाया गया है. क्योंकि करीब 1 साल पहले दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन की टीम ने इंदौर से उज्जैन के बीच मेट्रो चलाने के लिए सर्वे किया था, जिसमें सिंहस्थ महाकुंभ से पहले ही मेट्रो चलाने का डीपीआर पेश किया गया है. बताया जा रहा है कि इस दौरान टीम ने इंदौर और उज्जैन जिला प्रशासन के अधिकारियों से भी विस्तार से बातचीत की है और उसी के बाद दो सप्ताह तक लगातार काम के बाद मेट्रो का डीपीआर पेश किया गया है.  बताया जा रहा है कि अब डीपीआर का प्रस्तुतिकरण जनप्रतिनिधियों और सरकार के पास भी किया जा रहा है. सरकार 2028 सिंहस्थ से पहले ही इंदौर से उज्जैन के बीच मेट्रो ट्रैक तैयार करवाने की प्लानिंग पर काम कर रही है. इसके लिए अब जल्द ही एक टीम मोहन सरकार को भी इंदौर-उज्जैन मेट्रो का प्रजेटेंशन देगी और उसी के आधार पर आगे का काम किया जाएगा.  दिल्ली मेट्रो ने दोनों शहरों की फिजिबिलिटी स्टडी रिपोर्ट तैयार की थी, जिसमें इसे मेट्रो के लिए अच्छा बताया था। इसके बाद डीपीआर तैयार की गई। इस प्रोजेक्ट में करीब 10 हजार करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। वहीं, लगभग 45 किमी के ट्रैक में 11 स्टेशन बनेंगे। 4.5 किमी का ट्रैक उज्जैन शहर में अंडर ग्राउंड रखने का प्रस्ताव है। मेट्रो लवकुश नगर से शुरू होकर उज्जैन रेलवे स्टेशन तक जाएगी। सिंहस्थ तक ट्रैक पूरा होने की संभावना नहीं नई प्लानिंग में इंदौर-उज्जैन के बीच करीब 50-51 किमी का कॉरिडोर बनेगा। अफसरों का कहना है कि जल्द डीपीआर तैयार होती है तो भी एक साल में काम शुरू नहीं हो पाएगा। सिंहस्थ तक ट्रैक पूरा होने की संभावना नहीं है। प्लानिंग का प्रेजेंटेशन सीएम के सामने होने के बाद डीपीआर फाइनल होगी। सीएम से प्रेजेंटेशन के लिए समय मांगा है। 10 हजार करोड़ खर्च का अनुमान अफसरों के मुताबिक, स्टेशन पहले लवकुश चौराहा, अरबिंदो हॉस्पिटल, बारोली, धरमपुरी, तराना, सांवेर, पंथ पीपलई, निनौरा, इंजीनियरिंग कॉलेज उज्जैन, नानाखेड़ा व महाकाल पर प्रस्तावित थे। 47-48 किमी में 10 हजार करोड़ खर्च अनुमानित है। इस बीच सीएम ने उज्जैन में आगर रोड पर भी एलिवेटेड कॉरिडोर बनाने की बात कही। पौन घंटे में सफर पूरा होगा मेट्रो चलने से इंदौर-उज्जैन के बीच सफर में समय कम लगेगा और महाकाल मंदिर तक पहुंचने में दर्शनार्थियों को आसानी होगी। उज्जैन पहुंचने का समय लगभग आधा रह जाएगा। अभी बस से करीब 2 घंटे तो कार से करीब डेढ़ घंटा लगता है। दोपहिया से लगभग दो घंटे लगते हैं। मेट्रो 45 से 50 मिनट में लवकुश चौराहा से उज्जैन पहुंचेगी। यह 11 स्टेशन बनेंगे डीपीआर में भौंरासला, बारोली, धरमपुरी, तराना, सांवेर, पंथ पिपलई, निनोरा, त्रिवेणी घाट, नानाखेड़ा, उज्जैन आईएसबीटी, उज्जैन रेलवे स्टेशन पर मेट्रो स्टेशन बनेंगे। उज्जैन में मेट्रो को कहां से अंडरग्राउंड किया जाना है, इस पर निर्णय होना है। इंदौर में मेट्रो पहले से है, दूसरे डिपो की जरूरत नहीं इंदौर-उज्जैन के बीच प्रस्तावित मेट्रो के लिए दिल्ली मेट्रो ने फिजिबिलिटी स्टडी की। इसके बाद डीपीआर का ड्रॉफ्ट बनाया गया। इसमें लागत, स्टेशनों की संख्या तय की गई है। इस प्रोजेक्ट में स्टेशनों की संख्या कम रहेगी। इंदौर-उज्जैन के बीच सड़क मार्ग की दूरी करीब 55Km है। इसके आसपास से ही मेट्रो गुजर सकती है। यह रोड पहले से ही सिक्स लेन किया जा रहा है। वहीं, यहां पर ज्यादा भू-अर्जन भी नहीं करना पड़ेगा। इंदौर-उज्जैन के बीच 11 स्टेशन  डीपीआर के मुताबिक दोनों शहरों के बीच चलने वाली मेट्रो में इंदौर शहर के लिए भौंरासला, बारोली, धरमपुरी, तराना, सांवेर तक स्टेशन बनेंगे, इसके बाद उज्जैन के लिए पंथ पिपलई, निनोरा, त्रिवेणी घाट, नानाखेड़ा, उज्जैन आईएसबीटी, उज्जैन रेलवे स्टेशन तक मेट्रो के स्टेशन बनाए जाएंगे. हालांकि उज्जैन में कुछ स्टेशन अंडरग्राउंड बनाने का प्रस्ताव पेश किया गया है, लेकिन यह स्टेशन कहां बनेंगे यह तय नहीं हुआ है. इंदौर से उज्जैन के बीच मेट्रो का सफर पौन घंटे में पूरा हो जाएगा. दोनों शहरों के बीच मेट्रो चलाने से सबसे ज्यादा आसान बाबा महाकाल के दर्शन होंगे, क्योंकि इससे इंदौर से उज्जैन का सफर आज के हिसाब से आधा रह जाएगा. अभी कार से 2 से ढाई घंटे का समय लग जाता है. लेकिन मेट्रो से आप 45 मिनट में ही उज्जैन पहुंच जाएंगे.   सांवेर के पास रेवती में मांगी जमीन इंदौर में पहले से मेट्रो का संचालन हो रहा है, इसलिए दूसरे डिपो की जरूरत नहीं होगी। इंदौर के लवकुश चौराहे से उज्जैन तक मेट्रो पहुंचेगी। उज्जैन में डिपो के लिए जमीन तलाश की गई। कुल 49.7 एकड़ सरकारी जमीन उज्जैन के आसपास नहीं मिली। इस वजह से सांवेर के पास रेवती में जमीन मांगी गई। देश में कई शहरों में मेट्रो और रैपिड रेल चल रही हैं। दिल्ली मेट्रो सबसे बड़ी प्रणाली है और इसके अलावा रैपिड रेल दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ कॉरिडोर पर भी चल रही है। रैपिड रेल गुरुग्राम में भी उपलब्ध है। इसमें सीटिंग व्यवस्था ज्यादा रहेगी, क्योंकि यात्रियों को लंबी दूरी की यात्रा करना … Read more

आलोक शर्मा ने कहा: इंदौर से भोपाल के न्यायिक क्षेत्र को जोड़ना होगा जनता के हित में

भोपाल का न्यायिक क्षेत्राधिकार इंदौर से जोड़ने पर जनता का समय और धन की बर्बादी रूकेगी-आलोक शर्मा  आलोक शर्मा ने कहा: इंदौर से भोपाल के न्यायिक क्षेत्र को जोड़ना होगा जनता के हित में सांसद आलोक शर्मा केन्‍द्रीय कानून मंत्री से भोपाल में हाईकोर्ट बेंच स्‍थापित करने या इंदौर से जोडने को लेकर मिले  भोपाल सांसद आलोक शर्मा ने शुक्रवार को नई दिल्ली में केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुनराम मेघवाल से मुलाकात कर भोपाल में हाईकोर्ट बेंच स्थापित करने की मांग की है। सांसद शर्मा ने केंद्रीय कानून मंत्री को सौंपे पत्र में भोपाल जिले की जनता को अपने न्यायिक प्रकरणों के लिए जबलपुर हाईकोर्ट जाने में आने वाली व्यवहारिक कठिनाइयों का जिक्र किया है। सांसद शर्मा ने केंद्रीय मंत्री मेघवाल से आग्रह किया कि यदि हाइकोर्ट बेंच भोपाल लाने में कोई अड़चन है तो भोपाल जिले का न्यायिक क्षेत्राधिकार इंदौर से जोड़ दिया जाए, जिससे जनता को समय और अत्यधिक धन खर्च से राहत मिलेगी। केंद्रीय कानून मंत्री से चर्चा के दौरान सांसद आलोक शर्मा ने बताया कि भोपाल में हाईकोर्ट की बेंच स्थापित करने को लेकर लंबे समय से प्रयास किये जा रहे हैं। लेकिन जनता को सस्ता और सुलभ न्याय मिलने के संकल्प को पूरा करने के लिए कोई ठोस प्रयास अब तक नहीं हो सके। जबकि देश में अधिकांश प्रदेशों की राजधानियों में हाइकोर्ट की मुख्य पीठ या बेंच स्थापित है। इंदौर खंडपीठ से जोड़ने का दिया सुझाव सांसद आलोक शर्मा ने केंद्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल को सुझाव दिया है कि यदि भोपाल में हाइकोर्ट की बेंच स्थापित करने में कोई अड़चन है तो भोपाल जिले का न्यायिक क्षेत्राधिकार (ज्यूरिडिक्शन) इंदौर से जोड़ दिया जाए। इंदौर की दूरी जबलपुर से कम है। जनता व सरकार के अधिकारी न्यायिक मामलों की सुनवाई के लिए सुबह जाकर शाम तक घर वापिस आ सकते हैं। ऐसे में जनता का समय और पैसे की बर्बादी तो रुकेगी ही साथ ही सरकारी खजाने पर पड़ने वाला अत्यधिक भार भी कम हो जाएगा। सरकारी कर्मचारियों को अपनी पदोन्नति व अन्य प्रकरणों की सुनवाई के लिए जबलपुर जाना-आना करना मुश्किलें पैदा करता है। वकीलों की है पुरानी मांग भोपाल में हाईकोर्ट बेंच लाने के लिए वकील और बार एसोशिएशन भी लंबे समय से प्रयासरत हैं। वर्तमान में भोपाल का न्यायिक क्षेत्र जबलपुर है। भोपाल से जबलपुर जाने आने में लंबा समय और पैसे की बर्वादी होती है। यदि भोपाल का न्यायिक क्षेत्राधिकार इंदौर जोड़ दिया जाए तो भी जनता को काफी राहत मिल जाएगी। वकीलों को भी मामलों में पैरवी के लिए जबलपुर जाने आने में अपना अधिक समय खर्च करना पड़ता है। सांसद शर्मा ने आम जनता, वकील और सरकारी अधिकारियों की व्यवहारिक परेशानियों को तो अपने पत्र में लिखा ही है साथ ही इससे सरकारी खर्चों को रोकने का सुझाव भी दिया है।  जनता का समय और पैसा बचेगा सांसद आलोक शर्मा ने कहा कि भोपाल जिले का न्यायिक क्षेत्र इंदौर खंडपीठ से जुड़ने पर जनता का समय और पैसा दोनों बचेंगे। साथ ही सरकार के जनता को सस्ता और सुलभ न्याय दिलाने के संकल्प की भी पूर्ति होगी।

B2B मैचमेकिंग और बैठकों के जरिए भोपाल में निवेश एवं नवाचार को बढ़ावा

जर्मन प्रतिनिधिमंडल का चौथा दिवस भोपाल ग्लोबल स्थानीय नवाचार एक्सचेंज 2025 के तहत जर्मनी से आए प्रतिनिधिमंडल का चौथा दिन भोपाल में उच्च स्तरीय सरकारी बैठकों, उद्योग प्रतिनिधियों के साथ राउंडटेबल और स्थानीय नवाचार उद्यम के साथ B2B मैचमेकिंग सत्र को समर्पित रहा। प्रतिनिधिमंडल का दौरा MPIDC के नेतृत्व में GIIC एवं IM Global के सहयोग से हो रहा है। चौथे दिन की शुरुआत मंत्रालय में प्रमुख सचिव, उद्योग नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग, मध्यप्रदेश शासन श्री राघवेन्द्र कुमार सिंह से भेंट की। श्री सिंह ने कहा कि "मध्यप्रदेश सरकार उद्योगों और टेक्नोलॉजी कंपनियों के लिए पारदर्शी और सुगम वातावरण उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। राज्य में तेजी से विकसित होता औद्योगिक ढांचा, आईटी एवं डेटा सेंटर सुविधाएँ और युवा उद्यमियों की ऊर्जा, जर्मन कंपनियों के लिए व्यावसायिक सहयोग और साझेदारी की अपार संभावनाएँ प्रस्तुत करती हैं। विशेषकर एआई और डाप टेक जैसे उभरते क्षेत्रों में मध्यप्रदेश उद्योग, कृषि, स्वास्थ्य और ऊर्जा जैसे सेक्टर्स में जर्मन विशेषज्ञता व समाधानों को लागू करने की दिशा में व्यापक अवसर प्रदान करता है। श्री सिंह ने प्रतिनिधिमंडल को मध्यप्रदेश में निवेश कर टेक्नोलॉजी सेंटर्स विकसित करने का आमंत्रण भी दिया। उन्होंने कहा कि जर्मन कंपनियाँ प्रदेश के इनक्यूबेशन सेंटर्स के साथ मिलकर काम कर सकती हैं। यह सहयोग निवेश तक सीमित न होकर साझा व्यवसायिक परियोजनाओं, तकनीकी साझेदारी, कौशल विकास और अनुसंधान के क्षेत्र में भी दूरगामी परिणाम ला सकता है। दोपहर में MPIDC कॉन्फ्रेंस हॉल में श्री आकाश श्रीवास्तव, कार्यकारी निदेशक, MPIDC की उपस्थिति में उद्योग जगत के प्रमुख प्रतिनिधियों के साथ राउंडटेबल आयोजित हुआ। बैठक में Technotask, Xtra Net Technologies, Xebia, BHEL, LNCT, Mansarovar, Oriental, Netlink एवं अन्य कंपनियों ने भाग लिया। समानांतर रूप से प्रतिनिधिमंडल ने MPSEDC का दौरा कर SWAN एवं डेटा सेंटर सुविधा का अवलोकन किया। बैठक में प्रतिभागियों ने AI, DeepTech, Data Centres, IoT, ERP, Digital Transformation, Drone Technology और Healthcare Solutions जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया। Xebia ने ग्लोबल इनोवेशन हब व लो-कोड प्लेटफॉर्म की अवधारणा रखी, जबकि BHEL ने पावर जनरेशन व डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन की जानकारी दी। शिक्षण संस्थानों ने कौशल विकास, प्रशिक्षण और रिसर्च सहयोग पर बल दिया। इसके बाद प्रतिनिधिमंडल ने Jehan Numa Palace Hotel में IM Global के संस्थापक श्री चंद्रकांत तिवारी द्वारा आयोजित ब्रीफिंग सत्र में सहभागिता की, जिसमें India Digital Transformation तथा MP Innovation & Startups System पर विस्तारपूर्वक चर्चा हुई। प्रतिनिधियों ने माना कि भारत–यूरोप बाजार में ई-कॉमर्स, इंफ्रास्ट्रक्चर, मोबिलिटी और हेल्थकेयर सेक्टर्स में सहयोग के व्यापक अवसर हैं। उन्होंने अगले दस वर्षों के रोडमैप, को-क्रिएशन, गो-टू-मार्केट रणनीति और वन-टू-वन मीटिंग्स के माध्यम से साझेदारी को और मजबूत करने पर जोर दिया। दिन का समापन जहाननुमा पैलेस होटल में औपचारिक डिनर के साथ हुआ। इस अवसर पर जर्मन प्रतिनिधिमंडल और स्थानीय उद्योगपतियों के बीच अनौपचारिक विचार-विमर्श हुआ। डिनर के दौरान IM Global द्वारा एक Soft Launch भी किया गया, जिसके तहत कंपनी ने भारतीय बाजार में अपनी सेवाओं के विस्तार और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की संभावनाओं को रेखांकित किया। प्रतिनिधिमंडल ने इसे नवाचार एवं साझेदारी को प्रोत्साहित करने वाला कदम बताया। इसी अवसर पर, B2B Matchmaking सत्र भी आयोजित हुआ, जिसमें BrandSmashers Tech, AlgoMath, Technomancy, RotenX, Nexora Cogniware, Spark VR, Adverto, Unibazar Technologies, Codersbay Technologies, Panthar Info Hub, AmbiSpine Technologies, Next Phase, Sihari Labs, Primus सहित 14 से अधिक स्थानीय स्टार्टअप्स ने जर्मन कंपनियों के साथ प्रत्यक्ष संवाद कर सहयोग की संभावनाओं पर विचार किया। चौथे दिन के संवादों में स्पष्ट हुआ कि मध्यप्रदेश और जर्मनी के बीच तकनीक, नवाचार और निवेश के क्षेत्र में दीर्घकालिक एवं स्थायी साझेदारी के प्रबल अवसर मौजूद हैं।  

विधायक आरिफ मसूद पर FIR, हाईकोर्ट के आदेश के बाद बढ़ी कानूनी मुश्किलें

भोपाल कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद की मुश्किलें बढ़ गई हैं। पुलिस ने उनके खिलाफ फ्रॉड मामले में केस दर्ज कर लिया है। आरिफ मसूद भोपाल मध्य से विधायक हैं। उनके खिलाफ आईपीसी की धारा 420, 467, 468 और 471 के तहत केस दर्ज हुआ है। दोषी पाए जाने पर इन धाराओं में उन्हें 10 साल की जेल हो सकती है। कांग्रेस विधायक पर धोखाधड़ी और जालसाजी का आरोप है। कॉलेज की मान्यता के लिए जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल यह पूरा मामला इंदिरा प्रियदर्शिनी कॉलेज की मान्यता से जुड़ा हुआ है। इसकी मान्यता के लिए विधायक ने जाली दस्तावेजों का इस्तेमाल किया है। आरिफ मसूद उस सोसाइटी के सचिव हैं जो कॉलेज चलाती है। एमपी हाईकोर्ट के निर्देश पर विधायक के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों पर भी दर्ज होगा केस इसके साथ ही हाईकोर्ट ने उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों के खिलाफ भी FIR दर्ज करने को कहा है। आरोप है कि इन अधिकारियों ने 20 सालों तक मामले में साथ दिया और कॉलेज को चलने दिया। एसआईटी करेगी जांच एमपी हाई कोर्ट की बेंच में जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस प्रदीप मित्तल शामिल थे। उन्होंने ADGP (टेलीकॉम) संजीव शमी के नेतृत्व में SIT बनाने का भी आदेश दिया है। SIT पुलिस जांच की निगरानी करेगी और 3 महीने के अंदर जांच पूरी करेगी। बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी से है मान्यता मसूद ने बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी, भोपाल के कॉलेज की मान्यता रद्द करने के फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। लेकिन, नतीजा यह हुआ कि उनके खिलाफ ही FIR दर्ज हो गई। कोर्ट ने कॉलेज के 1000 से ज्यादा छात्रों के हित में कॉलेज की मान्यता रद्द करने पर रोक लगा दी है। लेकिन, यह साफ कर दिया है कि अगले शैक्षणिक सत्र से कॉलेज में कोई नया एडमिशन नहीं होगा। 10 साल की हो सकती है जेल गौरतलब है कि मसूद के खिलाफ जो-जो धाराएं लगाई गईं हैं, उनमें उन्हें 10 साल की सजा हो सकती है। धारा-420 में अधिकतम 3 साल, धारा-467,468 और 471 में अधिकतम 10 साल की सजा और धारा-120 बी मूल अपराध के बराबर की सजा है।

वंदे भारत एक्सप्रेस को मिला विस्तार, भोपाल से लखनऊ के बीच होगी शुरुआत

भोपाल  भोपाल से लखनऊ के बीच यात्रा (Bhopal to Lucknow Train) करने वालों के लिए बड़ी राहत मिलने जा रही है। जल्द ही इस रूट पर 20 कोच की अत्याधुनिक वंदे भारत एक्सप्रेस दौड़ने लगेगी। पहले यह ट्रेन 16 कोच के साथ प्रस्तावित थी, लेकिन यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए रेलवे बोर्ड ने भोपाल मंडल की मांग पर अतिरिक्त चार कोच की स्वीकृति दे दी है। इससे अब यात्रियों को अधिक सीटें और आरामदायक यात्रा का लाभ मिलेगा। रेलवे सूत्रों के अनुसार भोपाल-लखनऊ वंदेभारत एक्सप्रेस (Bhopal Lucknow Vande Bharat Express) से जुड़ी आधिकारिक अधिसूचना इसी माह के अंतिम सप्ताह में जारी कर दी जाएगी। इसके बाद ट्रेन के संचालन की समय-सारणी, किराया और ठहराव की जानकारी भी सार्वजनिक होगी। 20 कोच की वंदे भारत एक्सप्रेस में अधिक यात्री सफर कर पाएंगे। पीआरओ नवल अग्रवाल ने बताया कि यह ट्रेन आधुनिक सुविधाओं से लैस होगी और तेज रफ्तार के साथ कम समय में यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाएगी। भोपाल और लखनऊ के मध्य में आने वाले शहरों के यात्रियों को भी इसका लाभ मिलेगा। पिट लाइन पर अटकी है नई ट्रेन नई वंदे भारत का रैक आने में इसलिए देर हो रही है, क्योंकि रानी कमलापति स्टेशन पर पिट लाइन मौजूद नहीं है। अभी दो पिट लाइन हैं, जो मौजूदा रैक के संधारण कार्य के लिए भी पर्याप्त नहीं हैं। ऐसे में यहां एक नई पिटलाइन पर काम चल रहा है। उसका काम पूरा होते ही रैक उपलब्ध हो जाएगा। ट्रेन की मरम्मत करने और साफ-सफाई के लिए पिटलाइन की जरूरत होती है।

स्व-सहायता समूहों के स्टॉल पर मिलेंगे रसायन रहित कृषि उत्पाद

आजीविका फ्रेश मेला भोपाल हाट में 23 एवं 24 अगस्त को स्व-सहायता समूहों के स्टॉल पर मिलेंगे रसायन रहित कृषि उत्पाद पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री पटेल करेंगे मेले का शुभारंभ भोपाल  मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन अंतर्गत स्व-सहायता समूहों का दो दिवसीय ‘आजीविका फ्रेश’ मेला भोपाल हाट में 23 एवं 24 अगस्त को आयोजित किया जा रहा है। मेले का शुभारंभ 23 अगस्त को प्रात: 10.00 बजे पंचायत, ग्रामीण विकास एवं श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल द्वारा किया जायेगा। इस अवसर पर विभाग की राज्यमंत्री श्रीमती राधा सिंह भी उपस्थित रहेंगीं। मेले में विभिन्न जिलों से आ रही स्व-सहायता समूहों की दीदियों द्वारा रसायन रहित एवं जैविक तरीके से उगाये हुये कृषि एवं दुग्ध-उत्पादों सहित अन्य सामग्री का विक्रय सह प्रदर्शन किया जायेगा। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग अंतर्गत मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत गठित स्व-सहायता समूहों के उत्पादों को वृहद बाजारों से जोड़ने के लिये अनेक प्रयास किये जा रहे हैं। इसी क्रम में स्व-सहायता समूहों का दो दिवसीय आजीविका फ्रेश मेला अरेरा हिल्स स्थित भोपाल हाट परिसर में आयोजित किया जा रहा है। मेला प्रात: 11 बजे से रात्रि 09.30 बजे तक चलेगा। मेले में विभिन्न जिलों से आ रही ग्रामीण स्व-सहायता समूहों की दीदियों द्वारा 55 स्टॉल लगाये जायेंगे। समूहों से जुड़े परिवारों को कम लागत में अधिक उपज के लिये कृषि एवं पशुपालन की उन्नत तकनीक अपनाने के लिये कृषि सखियों व पशुपालन सखियों द्वारा सहयोग दिया जा रहा है। विशेष रूप से प्राकृतिक पद्धति से रसायन रहित जैविक उत्पाद तैयार करने के लिये प्रोत्साहित किया जा रहा है। इन प्रयासों के फलस्वरूप रसायन रहित उत्पाद तैयार किये जा रहे हैं, जिन्हें इस मेले में खास तौर से लाया जा रहा है। इनमें मुख्य रूप से अनाज, दलहन, तिलहन, सब्जियां, फल और दुग्ध आधारित उत्पादों में देशी गाय एवं गिर गाय का घी, पनीर और सोयाबीन उत्पा्दों में टोफू, सोया बड़ी एवं मशरूम आधरित उत्पादों में सूखा मशरूम, अचार, पाउडर, कुकीज तथा वन उत्पादों में जंगल का शुद्ध शहद, महुआ उत्पादों में महुआ कुकीज, लड्डू, नमकीन महुआ, लघु वनोपज में आंवला कैंडी, मुरब्बा, मिलेट उत्पादों में कोदो, कुटकी, चावल कुकीज, लड्डू, खीर आदि प्रमुख हैं। क्षेत्रीय कृषि उत्पादों में नरसिंहपुर जिले की तुअर (अरहर) दाल एवं गुड़, बालाघाट जिले का चिनौरी चावल, सिवनी जिले का जीरा शंकर चावल तथा क्षेत्रीय खान-पान में मालवा, निमाड, चंबल-ग्वालियर, विंध्य, बुंदेलखण्ड, बघेलखण्ड आदि क्षेत्रों के प्रसिद्ध खान-पान व्यंजनों तथा हर्बल पेय आदि का आनंद इस मेले में लिया जा सकता है। कला में रूचि रखने वालों के लिये यहां पारंपरिक कलाओं को देखने एवं सीखने का अवसर भी मिलेगा। भोपाल शहर एवं आसपास के क्षेत्र से मेले में आने वाले खरीददारों के मनोरंजन के लिये क्षेत्रीय कलाकारों द्वारा कला प्रदर्शन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी दी जायेंगीं।  

शिवराज सरकार की सख्ती: खराब फसलों के बाद HPM कंपनी का लाइसेंस रद्द और बिक्री पर रोक

भोपाल  किसानों की शिकायतों और जांच रिपोर्ट के आधार पर केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के निर्देशों पर राजस्थान की HPM केमिकल्स एंड फर्टिलाइजर्स लिमिटेड कंपनी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की गई है। राजस्थान सरकार ने कंपनी का लाइसेंस रद्द करते हुए उसके सभी कीटनाशक उत्पादों के निर्माण, बिक्री और वितरण पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है। कंपनी के जांच सैंपल फैल होने केबाद उसके खिलाफ एफआईआर की कार्रवाई की गई है।  मध्यप्रदेश में फसलें हुई खराब  HPM केमिकल्स एंड फर्टिलाइजर्स लिमिटेड कंपनी राजस्थान में रजिस्टर्ड थी और देश के कई राज्यों में कीटनाशक सप्लाई करती थी। जांच में सैंपल घटिया पाए जाने के बाद कंपनी पर एफआईआर दर्ज की गई। किसानों की शिकायतों में यह भी सामने आया कि HPM कंपनी के कीटनाशक उपयोग से मध्यप्रदेश के विदिशा, होशंगाबाद, हरदा, सीहोर सहित कई जिलों में सोयाबीन की फसल बर्बाद हो गई थी। शिवराज ने खेत में लिया था जायजा विदिशा जिले के खेत में खराब हुई सोयाबीन फसल का जायजा स्वयं केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लिया था। इसके बाद उन्होंने स्पष्ट किया था कि किसानों के साथ किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषी कंपनी के खिलाफ कठोर कदम उठाए जाएंगे। राजस्थान सरकार की इस कार्रवाई के बाद मध्यप्रदेश के किसानों को बड़ी राहत मिली है। कृषि मंत्रालय ने साफ किया है कि भविष्य में भी किसी भी कंपनी द्वारा मिलावटी या घटिया कीटनाशक और खाद बनाने पर कठोरतम कार्रवाई की जाएगी।  मध्यप्रदेश के कई जिलों में फसल खराब मंत्री ने जानकारी दी कि कंपनी के कीटनाशक से मध्यप्रदेश के कई जिलों में सोयाबीन की फसल खराब हो गई थी। उन्होंने बताया कि विदिशा स्थित खेत में खराब फसल का खुद केन्द्रीय मंत्री शिवराज ने जायजा लिया था। किरोड़ी लाल ने कहा कि कंपनी के सभी कीटनाशक उत्पादों के निर्माण, बिक्री और वितरण पर तत्काल प्रभाव से रोक विदिशा स्थित खेत में खराब फसल का खुद केन्द्रीय मंत्री शिवराज ने लिया था जायजा। कंपनी के सभी कीटनाशक उत्पादों के निर्माण, बिक्री और वितरण पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई गई है। किरोड़ी की हुई थी जेपी नड्डा से मुलाकात इससे पहले मंत्री मीणा ने बुधवार को दिल्ली में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और उर्वरक मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने अमानक खाद, बीज और कृषि दवाइयों से किसानों को होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए कड़े कानूनी प्रावधानों की मांग की। उन्होंने कहा कि वर्तमान नियमों के तहत अमानक उत्पाद बनाने वाली कंपनियों का लाइसेंस रद्द किया जा सकता है, लेकिन किसानों के नुकसान की भरपाई का कोई प्रावधान नहीं है। अमानक उत्पाद न केवल फसलों को नष्ट करते हैं, बल्कि मिट्टी की उर्वरता को भी प्रभावित करते हैं। उन्होंने इस मुद्दे पर पहले भी केंद्रीय कृषि मंत्री को पत्र लिखकर कठोर कानून बनाने की मांग की थी। 29 मई से चल रहा है अभियान बताते चलें कि राजस्थान में 29 मई से नकली और अमानक खाद, बीज और कीटनाशकों के खिलाफ विशेष अभियान चल रहा है। इस अभियान के तहत कई कंपनियों पर कार्रवाई की जा चुकी है। कृषि मंत्री ने आश्वासन दिया कि किसानों को ठगने वाली कंपनियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई जारी रहेगी और दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

MP में 31 अगस्त को रिटायर होंगे मुख्य सचिव अनुराग जैन, नए CS के नामों पर मंथन

भोपाल  मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव अनुराग जैन 31 अगस्त को रिटायर हो रहे हैं। ऐसे में वल्लभ भवन में यह सवाल तैरने लगा है कि अगला मुख्य सचिव कौन होगा। अनुराग जैन को एक्सटेंशन मिलेगा या फिर नए चेहरे को मौकान मिलेगा। इनसे पहले रहे दो मुख्य सचिव को एक्सटेंशन मिल चुका है। वहीं, कुछ सीनियर आईएएस अधिकारियों के नाम भी इस रेस में आगे हैं।वर्तमान मुख्य सचिव अनुराग जैन(Anurag Jain) 31 अगस्त को रिटायर हो रहे हैं। ऐसे में अगले मुख्य सचिव के लिए कई नामों की चर्चा शुरू हो गई है। फिलहाल मध्यप्रदेश के अगले सीएस को लेकर संस्पेंस बरकरार है। बता दें कि, प्रदेश सरकार ने अनुराग जैन के एक्सटेंशन का प्रस्ताव अब तक केंद्र सरकार को नहीं भेजा है। यदि सीएस अनुराग जैन को एक्सटेंशन नहीं मिलता है तो प्रशासनिक मुखिया के इस पद के लिए तीन अफसरों के नाम सबसे आगे है। इनमें 1990 बैच के आईएएस अफसर डॉ. राजेश राजौरा, 1991 बैच के आईएएस अफसर अशोक बर्णवाल और 1990 बैच की आईएएस अफसर अलका उपाध्याय का नाम शामिल है। इन कारणों से मिल सकता है एक्सटेंशन मुख्य सचिव को लेकर दो संभावनाएं हैं। पहली, अनुराग जैन को एक्सटेंशन मिल जाए। दूसरी, उन्हें एक्सटेंशन न मिले। अगर उन्हें एक्सटेंशन मिलता है, तो इसके पीछे तीन प्रमुख कारण हो सकते हैं। पहला, केंद्र में बैठे अफसरों और नीति निर्धारकों से उनके अच्छे संबंध हैं। दूसरा, उन्हें वित्त प्रबंधन का अच्छा जानकार माना जाता है। तीसरा, उन्होंने ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट और नई पॉलिसी बनाने में अहम भूमिका निभाई है। सेवा विस्तार या मप्र को मिलेगा नया सीएस मुख्य सचिव (सीएस) अनुराग जैन का सेवा विस्तार होगा या फिर प्रदेश को नया सीएस मिलेगा, यह लगभग पहले से तय है। केवल खुलासा होना बाकी है। 13 दिन बाद यानी 31 अगस्त को या उसके एक-दो दिन पहले होगा। ऐसा इसलिए क्योंकि सीएस जैन का इस दिन कार्यकाल समाप्त हो रहा है। यदि सेवा विस्तार मिलता है या प्रदेश को नए सीएस देने की बारी आई दोनों ही परिस्थितियों में दोपहर से शाम तक आदेश उसी दिन आ सकते हैं। ये लोग हैं प्रबल दावेदार वहीं, अगर अनुराग जैन को एक्सटेंशन नहीं मिलता है, तो वरिष्ठता के हिसाब से अपर मुख्य सचिव जल संसाधन डॉ. राजेश राजौरा इस पद के प्रबल दावेदार होंगे। लेकिन अपर मुख्य सचिव वन व पर्यावरण अशोक बर्णवाल और केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर दिल्ली में पदस्थ अलका उपाध्याय भी इस रेस में शामिल हैं। राजेश राजौरा हैं सबसे वरिष्ठ इसके साथ ही अनुराग जैन के रिटायर होने के बाद डॉ. राजेश राजौरा सबसे वरिष्ठ आईएएस अफसर होंगे। डॉ. राजौरा मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव रह चुके हैं। वह मुख्यमंत्री के गृह क्षेत्र उज्जैन संभाग के प्रभारी भी हैं।अशोक बर्णवाल भले ही डॉ. राजौरा से एक बैच जूनियर हैं, लेकिन उन्हें मुख्य सचिव बनाए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है। बर्णवाल भी निर्विवादित हैं। उनकी छवि तेजतर्रार अधिकारी की है। महिला आईएएस अफसर भी रेस में अलका उपाध्याय भी मुख्य सचिव पद की दौड़ में हैं। वे 1990 बैच में डॉ. राजौरा के बाद वरिष्ठता में दूसरे नंबर पर हैं। पिछले दो महीने में जिस तरह से उन्होंने मध्य प्रदेश के दौरों को लेकर दिलचस्पी दिखाई है, इससे यह कयास लगाए जा रहे हैं कि वे सीएस पद के लिए सक्रिय हैं। अगर अनुराग जैन को एक्सटेंशन नहीं मिलता है, तो वे विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष बन सकते हैं। हालांकि पिछले कुछ सालों से मध्य प्रदेश में मुख्य सचिव को एक्सटेंशन मिलता रहा है। ऐसे में इस बार भी संभावना है कि अनुराग जैन को एक्सटेंशन मिल सकता है। सेवा विस्तार संभावना के ये भी कारण पूर्व सीएस इकबाल सिंह बैंस हो या फिर वीरा राणा, इन्हें सेवा विस्तार मिलता रहा है। इनसे पहले के सीएस ने न्यूनतम दो-दो वर्ष तक सेवाएं दी हैं। अनुभव, प्रशासनिक पकड़, केंद्र से कई मामलों में समन्वय में जैन किसी से पीछे नहीं है। हालांकि उनके काम का आकलन किन आधारों पर होता है, यह सबसे अहम होगा। 1. दिल्ली की चली तो अनुराग जैन को सेवा विस्तार तय: माना जा रहा है कि यदि केंद्र ने ठान लिया तो मुख्य सचिव अनुराग जैन को सेवा विस्तार मिलना तय है। इसकी वजह उनके पास बेहतर प्रशासनिक अनुभव, केंद्र व पीएमओ में रही अहम जिमेदारियां और उन्हें ठीक ढंग से पूरा करना बताया जा है। 2. प्रदेश की चली तो मिल सकता है नया मुख्य सचिव: सूत्रों की मानें तो यदि मप्र के टॉप लीडर की बात मानी जाती है तो मध्यप्रदेश को नया मुख्य सचिव मिल सकता है। जिसकी वजह उज्जैन में 2028 के सिंहस्थ की तैयारी के अलावा अगला विधानसभा चुनाव समेत कई वजह बताई जा रही है। डॉ. राजेश राजौरा प्रबल दावेदार जानकारी के मुताबिक, अगर सीएस अनुराग जैन को एक्सटेंशन नहीं मिलता है तो 1990 बैच के आईएएस अफसर डॉ. राजेश राजौरा(Dr Rajesh Rajoura) इस पद के प्रबल दावेदार होंगे। डॉ. राजेश राजौरा मुख्यमंत्री के अपर सचिव रह चुके हैं। साथ ही ये सीएम मोहन के गृह क्षेत्र उज्जैन संभाग के प्रभारी भी रह चुके हैं। डॉ. राजौरा कृषि, गृह, उद्योग, उद्यानिकी और परिवहन विभाग संभाल चुके हैं। साथ ही ये झाबुआ में एडिशनल कलेक्टर और धार, बालाघाट उज्जैन और इंदौर में कलेक्टर रह चुके हैं। रेस में अशोक बर्णवाल मध्यप्रदेश के अगले मुख्य सचिव(Next Chief Secretary of MP) के रेस में अशोक बर्णवाल का नाम भी शामिल है। अशोक बर्णवाल(Ashok Barnwal) की छवि एक तेजतर्रार अधिकारी की है। बर्णवाल वन, मुख्यमंत्री कार्यालय, खाद्य प्रसंस्करण विभाग, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता संरक्षण विभाग संभाल चुके हैं। अशोक बर्णवाल गुना, देवास और शहडोल में कलेक्टर भी रहे हैं। बर्णवाल शिवराज सरकार के कार्यकाल में सीएमओ संभाल चुके हैं। दावेदारों की लिस्ट में अलका उपाध्याय ग्रामीण विकास मंत्रालय में अपर सचिव, राष्ट्रीय ग्रामीण अवसंरचना विकास एजेंसी में महानिदेशक, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन में सीईओ और जन क्रिया एवं ग्रामीण प्रौद्योगिकी उन्नति परिषद की महानिदेशक रह चुकी अलका उपाध्याय(Alka Upadhyay) भी मध्यप्रदेश के अगले मुख्य सचिव पद की दावेदारों की लिस्ट में शामिल हैं। अलका उपाध्याय शाजापुर में एडिशनल कलेक्टर का पदभार संभाल चुकी हैं। साथ ही दतिया, शाजापुर और खरगोन जिले की … Read more

मध्य प्रदेश : घोषणा के 6 साल बाद भी कर्मचारियों को स्वास्थ्य बीमा योजना का लाभ नहीं

भोपाल  मध्य प्रदेश के 12 लाख कर्मचारी 6 साल बाद भी आयुष्मान कैशलेस स्वास्थ्य योजना का इंतजार कर रहे हैं। यह योजना 2019 में तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलनाथ के शासनकाल में घोषित की गई थी, लेकिन आज तक यह योजना कर्मचारियों तक नहीं पहुंच पाई है। तीन मुख्यमंत्रियों (कमलनाथ, शिवराज सिंह चौहान और मोहन यादव) के पास यह योजना फाइल के रूप में पहुंची, लेकिन कर्मचारियों को केवल आश्वासन ही मिला। मामले पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।  मध्य प्रदेश के 6 लाख से अधिक कर्मचारी अब भी आयुष्मान कैशलेस स्वास्थ्य योजना के लाभ लेने के लिए इंतजार कर रहे हैं। दरअसल 2019 में कमलनाथ सरकार ने इसकी घोषणा की थी। लेकिन अब तक यह जमीनी स्तर पर लागू नहीं किया गया। वर्ष 2019 से लेकर अब तक तीन अलग-अलग मुख्यमंत्री की टेबल तक इसकी फाइलें पहुंची है।      मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर 9 फरवरी 2024 को मुख्य सचिव की अध्यक्षता में 9 सदस्यीय समिति का गठन किया गया था। इस समिति का उद्देश्य शासकीय कर्मचारी, कार्यकर्ता और संविदा कर्मचारियों को आयुष्मान भारत निरामयम प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना में शामिल करने का निर्णय लेना था। यह कमेटी पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल में 4 अक्टूबर को हुई कैबिनेट बैठक के निर्णय के आधार पर गठित की गई थी, जिसमें शासकीय कर्मचारियों को सालाना 5 लाख रुपये तक के स्वास्थ्य सुरक्षा लाभ देने की स्वीकृति दी गई थी। हालांकि, अब तक इस मामले पर कोई निर्णय नहीं लिया गया है। योजना तैयार करने पर काम जारी  कमेटी में शामिल अधिकारियों की सूची में मुख्य सचिव के अलावा अपर मुख्य सचिव लोक स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा, जो पहले एसीएस विभाग प्रमुख थे, अब प्रमुख सचिव हैं, और अपर मुख्य सचिव पंचायत और ग्रामीण विकास, जो पहले एसीएस विभाग प्रमुख थे, अब प्रमुख सचिव के रूप में कार्यरत हैं। इसके अतिरिक्त, प्रमुख सचिव वित्त विभाग, जो पहले प्रमुख सचिव थे, अब अपर मुख्य सचिव के पद पर हैं। कमेटी में प्रमुख सचिव राजस्व विभाग, सचिव लोक स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा विभाग शामिल हैं। इसके अलावा कमेटी में सचिव सामान्य प्रशासन विभाग, प्रबंध संचालक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन और मुख्य कार्यपालन अधिकारी आयुष्मान भारत निरामयम मध्यप्रदेश भी शामिल हैं। कमलनाथ ने बनाई थी कैशलेस इलाज की योजना यह योजना 6 साल पहले 2019 में कांग्रेस सरकार के मुख्यमंत्री कमल नाथ के नेतृत्व में कैबिनेट बैठक में मंजूर की गई थी। उस समय यह योजना 1 अप्रैल से लागू होने वाली थी और प्रदेश के सभी कर्मचारियों को इसका लाभ मिलने वाला था। इसके साथ ही सेवानिवृत्त कर्मचारियों को भी इस योजना में शामिल किया गया था। योजना के तहत साधारण बीमारियों के लिए 5 लाख रुपए और गंभीर बीमारियों के लिए 10 लाख रुपए तक कैशलेस इलाज की सुविधा प्रदान की जानी थी। इस स्वास्थ्य बीमा योजना के दायरे में शासकीय कर्मचारी, संविदा कर्मचारी, शिक्षक संवर्ग और नगर सैनिक के अलावा राज्य की स्वशासी संस्थाओं में कार्यरत कर्मचारी शामिल थे। इसके अलावा यह योजना निगम मंडलों में काम करने वाले कर्मचारियों और अखिल भारतीय सेवा के कर्मचारियों के लिए विकल्प के तौर पर रखा गया है।  योजना से एमपी सरकार पर बढ़ेगा वित्तीय भार इस बीमा योजना के लागू होने से एमपी सरकार पर 756.56 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार होने की संभावना जताई गई है। मुख्यमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के अंतिम दौर में शिवराज सिंह चौहान ने भी प्रदेश के कर्मचारियों को आयुष्मान जैसी योजना के तहत स्वास्थ्य सेवा का लाभ देने की बात की थी। हालांकि, कोई ठोस फैसला नहीं लिया गया, इसके चलते मामले में देरी आई।  तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ के महामंत्री उमाशंकर तिवारी ने कहा कि तीन मुख्यमंत्रियों की घोषणा के बावजूद प्रदेश के कर्मचारियों को अब तक कैशलेस स्वास्थ्य बीमा का लाभ नहीं मिल सका है। उन्होंने कहा कि अधिकारी और कर्मचारी अन्य राज्यों में लागू आयुष्मान स्वास्थ्य बीमा की तरह 5 लाख से 10 लाख रुपये तक के इलाज की सुविधा मिलने की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन अब तक किसी प्रकार का आदेश जारी नहीं किया गया है। कर्मचारी गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए भी इस सुविधा से वंचित हैं। अभी इस व्यवस्था पर हो रहा है काम वर्तमान में कर्मचारियों के इलाज की व्यवस्था कुछ इस प्रकार है। जब कर्मचारी इलाज कराते हैं, तो उन्हें खर्च की हुई राशि का रिम्बर्समेंट कराने के लिए अपने विभाग में आवेदन करना होता है। इसके लिए पहले डॉक्टर, मेडिकल बोर्ड या डायरेक्टर हेल्थ और मेडिकल एजुकेशन से मंजूरी प्राप्त करनी होती है। अगर कर्मचारी अस्तपताल में भर्ती होकर इलाज कराते हैं, तो ऐसे में उन्हें 5 लाख रुपये तक के क्लेम की मंजूरी संभागीय स्तर के सरकारी अस्पताल के डीन की अध्यक्षता में बनी कमेटी की ओर से जाती है। यदि क्लेम 5 लाख से अधिक और 20 लाख रुपये तक होता है, तो इस मामले में संचालक स्वास्थ्य सेवाओं की अध्यक्षता में बनी कमेटी रिम्बर्समेंट को मंजूरी देती है। यदि कर्मचारी भर्ती नहीं होते, तो वे या उनके परिजन बाह्य रोगी के रूप में इलाज कराते हैं। इसका मतलब है कि अस्पताल में दिखाया जाता है और फिर लौट आते हैं। इस स्थिति में एक साल में अधिकतम 20 हजार रुपये का रिम्बर्समेंट होता है। यदि इलाज निरंतर चल रहा हो, तो तीन माह में 8000 रुपये से अधिक का रिम्बर्समेंट नहीं किया जा सकता है। इसके लिए जिला मेडिकल बोर्ड की मंजूरी जरूरी होती है।

सिंहस्थ : 2028 के लिए घाट निर्माण, शिप्रा शुद्धिकरण, बैराज निर्माण कार्यों की भी हुई समीक्षा

आने वाले 3 वर्ष में सिंचाई क्षेत्र का विस्तार 100 लाख हेक्टेयर तक करें भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि किसानों की समृद्धि के साथ प्रदेश की अर्थव्यवस्था में सकारात्मक परिवर्तन के लिए सिंचाई क्षेत्र का निरंतर विस्तार आवश्यक है। इसके लिए जल संसाधन विभाग और सभी संबंधित एजेंसियां तेजी से कार्य करें। वर्तमान में शासकीय स्रोतों से प्रदेश में सिंचाई प्रतिशत 52 लाख हेक्टेयर से अधिक हो चुका है। इसे शीघ्र ही दोगुना करने का लक्ष्य ध्यान में रखकर कार्य किया जाए जिससे आने वाले 3 वर्ष में प्रदेश में 100 लाख हेक्टेयर में सिंचाई क्षेत्र का विस्तार हो जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषि के साथ ही उद्योग क्षेत्र में पानी देने, पेयजल प्रबंध और ऊर्जा उत्पादन में जल का उपयोग जल संसाधन विभाग के स्रोतों से हो रहा है। सिंचाई के 100 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में लक्ष्य के अनुसार जल संसाधनों के समुचित उपयोग को पूरी प्राथमिकता दी जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुरूवार को जल संसाधन विभाग की समीक्षा के दौरान विभिन्न परियोजनाओं से बढ़ रहे सिंचाई क्षेत्र की जानकारी भी प्राप्त की। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने किए हैं लाभकारी प्रावधान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अंतर्राज्यीय नदी जोड़ो परियोजनाओं जैसे केन-बेतवा लिंक राष्ट्रीय परियोजना, संशोधित पार्वती-काली-सिंध चंबल लिंक परियोजना को अति उपयोगी बताते हुए कहा कि इन परियोजनाओं के क्रियान्वयन से प्रदेश के लगभग आधे जिलों की तस्वीर बदल जाएगी। राज्य के अंदर भी नदी जोड़ो परियोजनाओं के क्रियान्वयन की दिशा में कार्य प्रारंभ कर लाभ प्राप्त किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नदियों को जोड़ने का स्वप्न भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल ने देखा जिसे प्रधानमंत्री श्री मोदी साकार कर हैं। वर्तमान में भारत सरकार द्वारा ऐसी परियोजनाओं के लिए 90% राशि देने का लाभकारी प्रावधान किया गया है। प्रधानमंत्री श्री मोदी की मंशा के अनुसार राज्यों की ऐसी पहल को प्रोत्साहित किया जा रहा है। नदी जोड़ो परियोजनाओं के कार्य जैसे-जैसे क्रियान्वित होंगे, सिंचित क्षेत्र बढ़ेगा, साथ ही खुशहाली भी बढ़ेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जल संसाधन विभाग की ओर से राज्य के अंदर नदी जोड़ो प्रकल्पों की संभावनाओं का सर्वेक्षण और अध्ययन कर प्रतिवेदन तैयार किया जाए। केन्द्र सरकार को ऐसे प्रस्ताव भेजकर स्वीकृति प्राप्त की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की सिंहस्थ : 2028 के कार्यों की समीक्षा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जल संसाधन विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान शिप्रा शुद्धिकरण, नदी एवं जल निकायों के विकास और घाट निर्माण कार्यों की भी समीक्षा की। बैठक के दौरान बताया गया कि वर्तमान में शिप्रा पर लगभग 30 किलोमीटर लंबाई में घाट निर्माण का कार्य हो रहा है, यह सभी कार्य वर्ष 2027 में पूर्ण करने का लक्ष्य है। घाटों के निर्माण से सिंहस्थ के दौरान एक दिन में लगभग 5 करोड़ श्रद्धालु स्नान का पुण्य प्राप्त कर सकेंगे। शिप्रा नदी पर बैराज निर्माण कार्यों की भी समीक्षा की गई। सिंचाई क्षेत्र में हुई है उल्लेखनीय वृद्धि बैठक में बताया गया कि रबी 2023-24 में प्रदेश में सिंचित रकबा 44.56 लाख हेक्टेयर था जो रबी 2025-26 में बढ़कर 52.06 हो गया है। इस तरह बीते डेढ़ वर्ष में प्रदेश के सिंचाई क्षेत्र में 7.50 लाख हेक्टेयर की वृद्धि हुई है। इसमें जल संसाधन विभाग द्वारा 2.39 और नर्मदा घाटी विकास विभाग 5.11 लाख हेक्टेयर सिंचाई क्षेत्र बढ़ाने में सफलता प्राप्त की गई है। बताया गया कि प्रदेश में आगामी पांच वर्ष में 200 करोड़ से अधिक लागत की 38 सिंचाई परियोजनाएं पूरी हो जाएंगी, जिसके फलस्वरूप 17 लाख 33 हजार 791 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई क्षेत्र का विस्तार होगा। इस वर्ष 2 लाख हेक्टेयर से अधिक सिंचाई क्षेत्र बढ़ेगा, जो मोहनपुरा बांयीतट परियोजना जिला राजगढ़, चंदेरी सूक्ष्म सिंचाई परियोजना जिला अशोकनगर, पंचमनगर सिंचाई परियोजना जिला दमोह एवं सागर, त्योंथर बहाव योजना जिला रीवा और घोघरी मध्यम परियोजना जिला बैतूल के माध्यम से संभव होगा। बैठक में जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट, मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव जल संसाधन एवं नर्मदा घाटी विकास डॉ. राजेश राजौरा सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।