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उपभोक्ताओं को पहले करना होगा भुगतान, अगस्त से MP में प्रीपेड बिजली प्रणाली शुरू

भोपाल  मध्य प्रदेश के कई शहरों में स्मार्ट मीटर से बिजली उपभोक्ताओं को काफी परेशानी हुई। कई स्थानीय रहवासियों ने जिला कलेक्ट्रेट में इसकी शिकायत की थी।  आने वाली 1 अगस्त 2025 से  राज्य में प्रीपेड बिजली प्रणाली लागू हो जाएगी। विद्युत वितरण कंपनी ने इसकी रूपरेखा तैयार कर ली है। जिसे प्रदेश के अलग-अलग जिलों में लागू किया जाएगा।  बिजली कंपनी के अनुसार, पहले चरण में सरकारी दफ्तर, उसके बाद इसे आम उपभोक्ताओं के लिए प्रीपेड बिजली प्रणाली मोड पर स्थानांतरित किया जाएगा। बता दें सरकारी और आम उपभोक्ताओं को दी जाने वाली ये व्यवस्था अलग-अलग होंगी। मध्य प्रदेश विद्युत वितरण क्षेत्र कंपनी  ने रिपोर्ट में बताया कि अगस्त माह से क्षेत्र में आने वाले मालवा निमाड़ के 10 हजार सरकारी ऑफिसों को प्रीपेड बिजली आवंटन किया जाएगा।  पहले रिचार्ज, फिर उपयोग आम उपभोक्ताओं के लिए प्रीपेड बिजली व्यवस्था का ढांचा सरकारी कार्यालयों से अलग होगा। उन्हें हर दो महीने में बिजली बिल जमा नहीं करना पड़ेगा। इसके बजाय, मोबाइल या वाई-फाई की तरह पहले रिचार्ज करना अनिवार्य होगा, तभी बिजली का उपयोग संभव होगा। उपभोग के अनुसार उनका बैलेंस धीरे-धीरे घटता जाएगा। उपभोक्ताओं को अपना बैलेंस देखने की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। सरकारी विभागों के लिए दो महीने का एडवांस पेमेंट अनिवार्य नई व्यवस्था के तहत सरकारी बिजली कनेक्शनों के लिए संबंधित अधिकारी की स्वीकृति के बाद विभागीय कोषाधिकारी को दो माह का अग्रिम भुगतान करना अनिवार्य होगा। इसके लिए संबंधित जोन, वितरण केंद्र प्रभारी और कार्यपालन यंत्री 30 जुलाई तक अधीक्षण यंत्री के माध्यम से विभागीय कोषाधिकारी को आवश्यक जानकारी भेजेंगे। इसके पश्चात कोषाधिकारी द्वारा निर्धारित दो माह की अग्रिम राशि बिजली कंपनी के खाते में स्थानांतरित की जाएगी। इन कनेक्शनों के माध्यम से बिजली कंपनी को शुरुआत में दो माह का अग्रिम भुगतान प्राप्त होगा। इसके बाद प्रत्येक माह वास्तविक खपत के अनुसार बिल राशि वसूली जाएगी। उल्लेखनीय है कि प्रीपेड प्रणाली में उपभोक्ताओं को प्रति यूनिट 25 पैसे की विशेष छूट भी प्रदान की जाती है। बिजली के मीटर में नहीं होगा कोई बदलाव प्रीपेड बिजली प्रणाली लागू करने के लिए मीटर को बदला नहीं जाएगा, बल्कि कंपनी द्वारा लगाए जा रहे स्मार्ट मीटरों में ही यह सुविधा सक्रिय की जाएगी। सूत्रों के अनुसार, आम उपभोक्ताओं को प्रीपेड मीटर अपनाने पर प्रति यूनिट 25 पैसे की टैरिफ छूट मिलेगी। इसके साथ ही, सरकार पूर्ववत सब्सिडी भी जारी रखेगी। वर्तमान में उपभोक्ताओं को वार्षिक खपत के आधार पर औसतन 45 दिनों के बिल के बराबर राशि सुरक्षा निधि के रूप में जमा करनी होती है। अस्पतालों और थानों में बाद में लागू होगी नई बिजली व्यवस्था ऊर्जा विभाग के निर्देशानुसार, बिजली कंपनियां फिलहाल अस्पताल, थाने और जल प्रदाय इकाइयों जैसे शासन के आवश्यक विभागों को प्रीपेड बिजली प्रणाली में शामिल नहीं कर रही हैं। जानकारी के अनुसार, इन विभागों को व्यवस्था लागू होने के एक या दो महीने बाद प्रीपेड मोड में जोड़ा जाएगा। इसके पश्चात अन्य शासकीय कनेक्शनों को चरणबद्ध रूप से जोड़ा जाएगा। वहीं, निजी उपभोक्ताओं को इस प्रणाली में शामिल करने पर निर्णय बाद में शासन द्वारा लिया जाएगा। रिचार्ज की राशि पर मंथन जारी हालांकि, विद्युत वितरण कंपनियों की ओर से यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि उपभोक्ताओं को कितनी राशि का रिचार्ज कराना होगा और उस पर कितनी यूनिट बिजली प्रदान की जाएगी। वहीं अधिकारियों का कहना है कि सरकारी कार्यालयों का बिजली बिल अक्सर समय पर नहीं भरता है। इस प्रणाली को कुछ चुनिंदा सरकारी ऑफिसों में लागू किया जाएगा। इनमें इंदौर के 1550 सरकारी कार्यालय शामिल है। जिसे दिसंबर तक इस इलाके के सभी 50 हजार सरकारी कार्यालय को इसमें शिफ्ट करने का प्लान है।  नई प्रणाली के अंतर्गत, सरकारी विद्युत कनेक्शनों के लिए इससे संबंधित अधिकारी की सहमति से, विभाग के कोषाधिकारी को 2 महीने का एडवांस बिल जमा करना होगा। संबंधित जोन, वितरण केन्द्र प्रभारी, कार्यपालन यंत्री 30 जुलाई तक अधीक्षण यंत्री के माध्यम से संबंधित कार्यालयों के कोषाधिकारी को इसकी सूचना देंगे। बिजली कंपनी को फिलहाल 2 महीने की एडवांस राशि मिल सकेगी। आगे प्रति महीने में खर्च हुए बिजली खपत के आधार पर बिल का भुगतान देना होगा। स्मार्ट प्रीपेड मीटर से मिलेगी बिजली नई प्रणाली के तहत उपभोक्ताओं को स्मार्ट प्रीपेड मीटर के जरिए बिजली मिलेगी, जिसमें उपभोग के अनुसार बैलेंस कम होगा और रिचार्ज के बिना बिजली आपूर्ति नहीं होगी। उपभोक्ता अपनी बिजली खपत और बैलेंस की जानकारी आसानी से मोबाइल या पोर्टल के माध्यम से प्राप्त कर सकेंगे। बिजली वितरण कंपनियों ने इसकी तैयारियां शुरू कर दी हैं। सरकारी और आम उपभोक्ताओं के लिए प्रीपेड व्यवस्था की प्रक्रिया और नियम अलग-अलग निर्धारित किए जा रहे हैं, जिससे दोनों की आवश्यकताओं के अनुसार सिस्टम को लागू किया जा सके। पहले सरकारी कार्यालयों में लागू होगी व्यवस्था मध्य प्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने प्रीपेड बिजली व्यवस्था लागू करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। अगस्त 2025 से कंपनी के अंतर्गत आने वाले मालवा-निमाड़ क्षेत्र के लगभग 10,000 सरकारी कार्यालयों को प्रीपेड मीटर सिस्टम से जोड़ा जाएगा, जिनमें अकेले इंदौर के 1,550 सरकारी कार्यालय शामिल हैं। योजना के तहत दिसंबर 2025 तक इस क्षेत्र के सभी 50,000 सरकारी दफ्तरों को पूरी तरह से प्रीपेड व्यवस्था में शामिल कर लिया जाएगा। सरकार ने तय किया है कि निर्धारित समयसीमा के भीतर प्रदेश के हर सरकारी कार्यालय में यह नई बिजली व्यवस्था अनिवार्य रूप से लागू की जाए। यह बदलाव न केवल प्रशासनिक खर्चों पर नियंत्रण रखेगा, बल्कि ऊर्जा दक्षता को भी बढ़ावा देगा। आम उपभोक्ताओं को भी किया जाएगा शिफ्ट इस प्रक्रिया के पहले चरण के बाद दिसंबर 2025 के बाद दूसरा चरण शुरू किया जाएगा, जिसमें आम उपभोक्ताओं को प्रीपेड बिजली सिस्टम पर शिफ्ट किया जाएगा। इस चरण में सबसे पहले वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों, औद्योगिक इकाइयों और अधिक लोड वाले कनेक्शनों को जोड़ा जाएगा। इसके बाद घरेलू उपभोक्ताओं को धीरे-धीरे इस आधुनिक प्रणाली में शामिल किया जाएगा। भरना होगा 2 महीने का अग्रिम बिल प्रीपेड बिजली व्यवस्था के तहत सरकारी दफ्तरों को अपनी बिजली खपत का दो महीने का बिल एडवांस में जमा करना होगा। इसके लिए संबंधित अधिकारी की अनुमति से विभाग के कोषाधिकारी (अकाउंट ऑफिसर) यह भुगतान बिजली कंपनी को करेंगे। बिजली वितरण जोन और केंद्र के अधिकारी … Read more

उपभोक्ताओं को पहले करना होगा भुगतान, अगस्त से MP में प्रीपेड बिजली प्रणाली शुरू

भोपाल  मध्य प्रदेश के कई शहरों में स्मार्ट मीटर से बिजली उपभोक्ताओं को काफी परेशानी हुई। कई स्थानीय रहवासियों ने जिला कलेक्ट्रेट में इसकी शिकायत की थी।  आने वाली 1 अगस्त 2025 से  राज्य में प्रीपेड बिजली प्रणाली लागू हो जाएगी। विद्युत वितरण कंपनी ने इसकी रूपरेखा तैयार कर ली है। जिसे प्रदेश के अलग-अलग जिलों में लागू किया जाएगा।  बिजली कंपनी के अनुसार, पहले चरण में सरकारी दफ्तर, उसके बाद इसे आम उपभोक्ताओं के लिए प्रीपेड बिजली प्रणाली मोड पर स्थानांतरित किया जाएगा। बता दें सरकारी और आम उपभोक्ताओं को दी जाने वाली ये व्यवस्था अलग-अलग होंगी। मध्य प्रदेश विद्युत वितरण क्षेत्र कंपनी  ने रिपोर्ट में बताया कि अगस्त माह से क्षेत्र में आने वाले मालवा निमाड़ के 10 हजार सरकारी ऑफिसों को प्रीपेड बिजली आवंटन किया जाएगा।  पहले रिचार्ज, फिर उपयोग आम उपभोक्ताओं के लिए प्रीपेड बिजली व्यवस्था का ढांचा सरकारी कार्यालयों से अलग होगा। उन्हें हर दो महीने में बिजली बिल जमा नहीं करना पड़ेगा। इसके बजाय, मोबाइल या वाई-फाई की तरह पहले रिचार्ज करना अनिवार्य होगा, तभी बिजली का उपयोग संभव होगा। उपभोग के अनुसार उनका बैलेंस धीरे-धीरे घटता जाएगा। उपभोक्ताओं को अपना बैलेंस देखने की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। सरकारी विभागों के लिए दो महीने का एडवांस पेमेंट अनिवार्य नई व्यवस्था के तहत सरकारी बिजली कनेक्शनों के लिए संबंधित अधिकारी की स्वीकृति के बाद विभागीय कोषाधिकारी को दो माह का अग्रिम भुगतान करना अनिवार्य होगा। इसके लिए संबंधित जोन, वितरण केंद्र प्रभारी और कार्यपालन यंत्री 30 जुलाई तक अधीक्षण यंत्री के माध्यम से विभागीय कोषाधिकारी को आवश्यक जानकारी भेजेंगे। इसके पश्चात कोषाधिकारी द्वारा निर्धारित दो माह की अग्रिम राशि बिजली कंपनी के खाते में स्थानांतरित की जाएगी। इन कनेक्शनों के माध्यम से बिजली कंपनी को शुरुआत में दो माह का अग्रिम भुगतान प्राप्त होगा। इसके बाद प्रत्येक माह वास्तविक खपत के अनुसार बिल राशि वसूली जाएगी। उल्लेखनीय है कि प्रीपेड प्रणाली में उपभोक्ताओं को प्रति यूनिट 25 पैसे की विशेष छूट भी प्रदान की जाती है। बिजली के मीटर में नहीं होगा कोई बदलाव प्रीपेड बिजली प्रणाली लागू करने के लिए मीटर को बदला नहीं जाएगा, बल्कि कंपनी द्वारा लगाए जा रहे स्मार्ट मीटरों में ही यह सुविधा सक्रिय की जाएगी। सूत्रों के अनुसार, आम उपभोक्ताओं को प्रीपेड मीटर अपनाने पर प्रति यूनिट 25 पैसे की टैरिफ छूट मिलेगी। इसके साथ ही, सरकार पूर्ववत सब्सिडी भी जारी रखेगी। वर्तमान में उपभोक्ताओं को वार्षिक खपत के आधार पर औसतन 45 दिनों के बिल के बराबर राशि सुरक्षा निधि के रूप में जमा करनी होती है। अस्पतालों और थानों में बाद में लागू होगी नई बिजली व्यवस्था ऊर्जा विभाग के निर्देशानुसार, बिजली कंपनियां फिलहाल अस्पताल, थाने और जल प्रदाय इकाइयों जैसे शासन के आवश्यक विभागों को प्रीपेड बिजली प्रणाली में शामिल नहीं कर रही हैं। जानकारी के अनुसार, इन विभागों को व्यवस्था लागू होने के एक या दो महीने बाद प्रीपेड मोड में जोड़ा जाएगा। इसके पश्चात अन्य शासकीय कनेक्शनों को चरणबद्ध रूप से जोड़ा जाएगा। वहीं, निजी उपभोक्ताओं को इस प्रणाली में शामिल करने पर निर्णय बाद में शासन द्वारा लिया जाएगा। रिचार्ज की राशि पर मंथन जारी हालांकि, विद्युत वितरण कंपनियों की ओर से यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि उपभोक्ताओं को कितनी राशि का रिचार्ज कराना होगा और उस पर कितनी यूनिट बिजली प्रदान की जाएगी। वहीं अधिकारियों का कहना है कि सरकारी कार्यालयों का बिजली बिल अक्सर समय पर नहीं भरता है। इस प्रणाली को कुछ चुनिंदा सरकारी ऑफिसों में लागू किया जाएगा। इनमें इंदौर के 1550 सरकारी कार्यालय शामिल है। जिसे दिसंबर तक इस इलाके के सभी 50 हजार सरकारी कार्यालय को इसमें शिफ्ट करने का प्लान है।  नई प्रणाली के अंतर्गत, सरकारी विद्युत कनेक्शनों के लिए इससे संबंधित अधिकारी की सहमति से, विभाग के कोषाधिकारी को 2 महीने का एडवांस बिल जमा करना होगा। संबंधित जोन, वितरण केन्द्र प्रभारी, कार्यपालन यंत्री 30 जुलाई तक अधीक्षण यंत्री के माध्यम से संबंधित कार्यालयों के कोषाधिकारी को इसकी सूचना देंगे। बिजली कंपनी को फिलहाल 2 महीने की एडवांस राशि मिल सकेगी। आगे प्रति महीने में खर्च हुए बिजली खपत के आधार पर बिल का भुगतान देना होगा। स्मार्ट प्रीपेड मीटर से मिलेगी बिजली नई प्रणाली के तहत उपभोक्ताओं को स्मार्ट प्रीपेड मीटर के जरिए बिजली मिलेगी, जिसमें उपभोग के अनुसार बैलेंस कम होगा और रिचार्ज के बिना बिजली आपूर्ति नहीं होगी। उपभोक्ता अपनी बिजली खपत और बैलेंस की जानकारी आसानी से मोबाइल या पोर्टल के माध्यम से प्राप्त कर सकेंगे। बिजली वितरण कंपनियों ने इसकी तैयारियां शुरू कर दी हैं। सरकारी और आम उपभोक्ताओं के लिए प्रीपेड व्यवस्था की प्रक्रिया और नियम अलग-अलग निर्धारित किए जा रहे हैं, जिससे दोनों की आवश्यकताओं के अनुसार सिस्टम को लागू किया जा सके। पहले सरकारी कार्यालयों में लागू होगी व्यवस्था मध्य प्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने प्रीपेड बिजली व्यवस्था लागू करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। अगस्त 2025 से कंपनी के अंतर्गत आने वाले मालवा-निमाड़ क्षेत्र के लगभग 10,000 सरकारी कार्यालयों को प्रीपेड मीटर सिस्टम से जोड़ा जाएगा, जिनमें अकेले इंदौर के 1,550 सरकारी कार्यालय शामिल हैं। योजना के तहत दिसंबर 2025 तक इस क्षेत्र के सभी 50,000 सरकारी दफ्तरों को पूरी तरह से प्रीपेड व्यवस्था में शामिल कर लिया जाएगा। सरकार ने तय किया है कि निर्धारित समयसीमा के भीतर प्रदेश के हर सरकारी कार्यालय में यह नई बिजली व्यवस्था अनिवार्य रूप से लागू की जाए। यह बदलाव न केवल प्रशासनिक खर्चों पर नियंत्रण रखेगा, बल्कि ऊर्जा दक्षता को भी बढ़ावा देगा। आम उपभोक्ताओं को भी किया जाएगा शिफ्ट इस प्रक्रिया के पहले चरण के बाद दिसंबर 2025 के बाद दूसरा चरण शुरू किया जाएगा, जिसमें आम उपभोक्ताओं को प्रीपेड बिजली सिस्टम पर शिफ्ट किया जाएगा। इस चरण में सबसे पहले वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों, औद्योगिक इकाइयों और अधिक लोड वाले कनेक्शनों को जोड़ा जाएगा। इसके बाद घरेलू उपभोक्ताओं को धीरे-धीरे इस आधुनिक प्रणाली में शामिल किया जाएगा। भरना होगा 2 महीने का अग्रिम बिल प्रीपेड बिजली व्यवस्था के तहत सरकारी दफ्तरों को अपनी बिजली खपत का दो महीने का बिल एडवांस में जमा करना होगा। इसके लिए संबंधित अधिकारी की अनुमति से विभाग के कोषाधिकारी (अकाउंट ऑफिसर) यह भुगतान बिजली कंपनी को करेंगे। बिजली वितरण जोन और केंद्र के अधिकारी … Read more

रालामंडल को मिला ‘ऑक्सीजन बॉक्स’ का दर्जा, एक किलोमीटर तक नहीं होगा कोई निर्माण

इंदौर  संभागायुक्त दीपक सिंह की अध्यक्षता में रालामंडल अभ्यारण्य क्षेत्र के अंतर्गत आवासीय भूमि उपयोग हेतु तैयार किए गए नियोजन मापदंडों पर विचार करने के लिए ईको सेंसिटिव जोन समिति की बैठक आयोजित की गई। यह बैठक इंदौर विकास प्राधिकरण (आईडीए) के सभाकक्ष में संपन्न हुई। अधिकारियों की मौजूदगी में हुई अहम बैठक बैठक में मुख्य वन संरक्षक पी.एन. मिश्रा, अपर कलेक्टर गौरव बैनल, पीएचई विभाग के मुख्य अभियंता संजय कुमार, नगर एवं ग्राम निवेश के संयुक्त संचालक सुभाषीश बेनर्जी, संयुक्त कलेक्टर सुप्रिया पटेल, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी एस.एन. द्विवेदी, वन विभाग के एसडीओ योहन कटारा और अन्य संबंधित अधिकारी मौजूद रहे। 'ग्रीन कॉरिडोर' के विकास पर जोर संभागायुक्त दीपक सिंह ने रालामंडल अभ्यारण्य के संरक्षण की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि यह क्षेत्र इंदौर जैसे महानगर के लिए 'ऑक्सीजन बॉक्स' के रूप में कार्य कर सकता है। उन्होंने निर्देश दिए कि रालामंडल की पहाड़ियों को जोड़कर ग्रीन कॉरिडोर का विकास किया जाए ताकि वन्यजीवों का आवास संरक्षित रहे और वे स्वतंत्र रूप से विचरण कर सकें। संयुक्त फील्ड विजिट के निर्देश संभागायुक्त दीपक सिंह ने नगर एवं ग्राम निवेश, आईडीए, नगर निगम, वन विभाग, राजस्व विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे संयुक्त रूप से फील्ड विजिट कर प्रस्तावित ग्रीन कॉरिडोर की रूपरेखा तैयार करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईको सेंसिटिव जोन से एक किलोमीटर के दायरे में सघन नगरीय विकास नहीं होना चाहिए। पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के लिए भूमि उपयोग मापदंड बैठक में यह भी बताया गया कि ईको सेंसिटिव जोन के तहत नियोजन मापदंडों में प्रत्येक भूखंड का न्यूनतम क्षेत्रफल 500 वर्गमीटर निर्धारित किया गया है। निर्माण क्षेत्र अधिकतम 15% तक सीमित रहेगा, जबकि भवन की ऊंचाई 12.5 मीटर से अधिक नहीं होगी। साथ ही कम से कम 10% क्षेत्र खुला रखना अनिवार्य होगा। इन नियमों का उद्देश्य क्षेत्र के पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रखना और विकास को पर्यावरण के अनुकूल बनाना है। 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा- बार्सिलोना स्थित मर्काबार्ना का समग्र मॉडल मध्यप्रदेश के लिए उपयोगी हो सकता है

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि बार्सिलोना स्थित मर्काबार्ना का समग्र मॉडल मध्यप्रदेश के लिए उपयोगी हो सकता है। मध्यप्रदेश में बढ़ते कृषि उत्पादन को देखते हुए बेहतर ‘पोस्ट-हार्वेस्ट मैनेजमेंट’ और निर्यात प्रणाली की आवश्यकता है।स्पेन प्रवास के तीसरे दिन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मर्काबार्ना के भ्रमण के दौरान यह बात कही। यह संस्थान 250 एकड़ में फैला हुआ यूरोप का प्रमुख फूड लॉजिस्टिक्स हब है, जहाँ उत्पादन, भंडारण, प्रोसेसिंग और वितरण की व्यवस्थाएं एकीकृत रूप से संचालित होती हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज मध्यप्रदेश को सिर्फ उत्पादन की नहीं, बल्कि कटाई के बाद मूल्य संवर्धन, प्रसंस्करण, भंडारण, और वैश्विक बाज़ारों तक पहुँच की भी चुनौती है। इस दिशा में मर्काबार्ना का अनुभव एक मॉडल के रूप में सामने आता है, जिससे प्रेरणा लेकर प्रदेश के खाद्य उत्पादकों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार किया जा सकता है। मर्काबार्ना के सीईओ ने मध्यप्रदेश के प्रति रूचि जताई। मर्काबार्ना के सीईओ पाब्लो विल्लानोवा ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव का अभिवादन करते हुए कहा कि भारत और स्पेन के बीच कृषि लॉजिस्टिक्स, फूड प्रोसेसिंग और मार्केट इन्फ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में मजबूत सहयोग की संभावनाएं हैं। उन्होंने मध्यप्रदेश के प्रति विशेष रुचि और भविष्य में द्विपक्षीय ज्ञान साझेदारी पर सहमति जताई। फार्म-टू-फोर्क जैसे मॉडल होंगे लागू मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ‘फार्म-टू-फोर्क’ मॉडल, कोल्ड चेन प्रणाली, गुणवत्ता नियंत्रण, ट्रेसेबिलिटी और खाद्य सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में मर्काबार्ना द्वारा अपनाई गई सर्वोत्तम प्रक्रियाओं की सराहना की। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में विकसित किए जा रहे मेगा फूड पार्क, एग्रीबिजनेस क्लस्टर और ग्रामीण उद्योग केंद्रों में इन नवाचारों को समाहित किया जाएगा। खाद्य अपशिष्ट नियंत्रण और नवाचार के क्षेत्र में भी प्रेरणा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मर्काबार्ना में संचालित फूड बैंक, जीरो वेस्ट मैनेजमेंट प्रणाली और फूड-टेक स्टार्टअप्स के लिए तैयार किए गए इनक्यूबेशन मॉडल का भी अवलोकन किया। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्थाएं मध्यप्रदेश में नवाचार-आधारित कृषि नीति को मजबूती देंगी। निर्यात और वैश्विक पहुंच के लिए ठोस रणनीति मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि प्रदेश में गेहूं, चावल, फल, सब्जियों और प्रोसेस्ड फूड के निर्यात की असीम संभावनाएं हैं। मर्काबार्ना जैसे केंद्रों से प्रेरणा लेकर मध्यप्रदेश में पोस्ट-हार्वेस्ट लॉस को कम करते हुए अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता के अनुरूप उत्पादों का निर्माण किया जाएगा। निवेश और साझेदारी के लिए खुला निमंत्रण मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मर्काबार्ना प्रबंधन को मध्यप्रदेश में निवेश के लिए आमंत्रित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के ‘वसुधैव कुटुंबकम’ के मंत्र को आत्मसात करते हुए मध्यप्रदेश वैश्विक साझेदारियों के लिए तैयार है। राज्य सरकार कृषि क्षेत्र में प्राइवेट सेक्टर की भागीदारी और तकनीकी निवेश को बढ़ावा भी दे रही है। कृषि आधारित औद्योगिक प्रगति का नया चरण मुख्यमंत्री डॉ. यादव की यह यात्रा कृषि आधारित विकास के एक नए चरण की भूमिका तय कर रही है। अब मध्यप्रदेश केवल उत्पादन आधारित राज्य नहीं, बल्कि वैश्विक खाद्य आपूर्ति श्रृंखला में एक मजबूत भागीदार के रूप में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का नेतृत्व कृषि, नवाचार और निर्यात के समन्वय से ‘एडवांटेज एमपी’ के विजन को साकार कर रहा है।  

मंत्री सारंग ने कहा-खेल प्रतिभाओं को अवसर देने के लिये प्रत्येक दिन टैलेंट सर्च के संकल्प के साथ कार्य किया जाए

भोपाल  खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री विश्वास कैलाश सारंग ने कहा है कि खेल प्रतिभाओं को अवसर देने के लिये प्रत्येक दिन टैलेंट सर्च के संकल्प के साथ कार्य किया जाए, जिससे प्रदेश की लगभग 9 करोड़ जनसंख्या में से कम से कम 50 लाख युवाओं की खेल प्रतिभा को चिन्हित कर उन्हें प्रोत्साहित किया जा सके। श्री सारंग शुक्रवार को समन्वय भवन में आयोजित जिला खेल एवं युवा कल्याण अधिकारियों तथा युवा समन्वयकों की कार्यशाला में संवाद कर रहे थे। कार्यशाला में विभागीय नवाचारों पर विस्तृत चर्चा हुई। मंत्री श्री सारंग ने कहा कि युवा समन्वयक खेल एवं युवा कल्याण विभाग की योजनाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचायें। मंत्री श्री सारंग ने कहा कि युवा समन्वयकों से 3 माह बाद पुनः संवाद होगा। उन्होंने कहा कि जिस ब्लॉक में जनसंख्या कम है वहां खिलाड़ियों की खोज के लिए ब्लॉक का क्लस्टर बनाकर टैलेंट सर्च आयोजित किया जाये। उन्होंने यह भी कहा कि युवा समन्वयक स्कूल गेम्स और अन्य विभागों से भी समन्वय करें। समन्वयक युवाओं से सतत सम्पर्क करें मंत्री श्री सारंग ने निर्देश दिए कि समन्वयक प्रत्येक ब्लॉक में सक्रिय भूमिका निभाते हुए युवाओं के संपर्क में रहें और उन्हें विभागीय गतिविधियों से जोड़ें। उन्होंने कहा कि युवा समन्वयकों की तीन माह बाद कार्यों की पुनः समीक्षा की जाएगी। कम जनसंख्या वाले किन्तु खेल प्रतिभा वाले ब्लॉकों को जोड़कर ब्लॉक क्लस्टर बनाकर टैलेंट सर्च कार्यक्रम चलाने का सुझाव भी उन्होंने दिया। कार्यशाला के दौरान 'खेलो बढ़ो अभियान', 'पार्थ योजना', 'फिट इंडिया क्लब', 'एक जिला-एक खेल', 'खेलो एमपी यूथ गेम्स' के नए स्वरूप, टैलेंट सर्च कार्यक्रम और जिलों में किये गए नवाचारों पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। नशा मुक्ति अभियान में युवाओं की भागीदारी जरूरी मंत्री श्री सारंग ने युवाओं से नशा मुक्ति अभियान को जन आंदोलन का रूप देने का आह्वान करते हुए कहा कि खेलों के माध्यम से समाज में सकारात्मकता और जागरूकता लाई जा सकती है। उन्होंने कहा, "हम केवल अच्छे खिलाड़ी नहीं बल्कि अच्छे नागरिक और समाज के कर्णधार बना रहे हैं।" जिलों से आए सुझावों पर तुरंत निर्णय कार्यशाला में शहडोल के युवा समन्वयकों द्वारा प्रस्तुत सुझावों के आधार पर मंत्री श्री सारंग ने विचारपुर (मिनी ब्राज़ील) में शीघ्र ही फुटबॉल फीडर सेंटर की स्थापना की घोषणा की। धार जिले के सरदारपुर में फुटबॉल को लेकर बढ़ते उत्साह और प्रदेश की अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी ज्योति चौहान की उपलब्धि का उल्लेख करते हुए उन्होंने ब्लॉक स्तर पर खेल एक्सचेंज प्रोग्राम शुरू करने को भी कहा। उन्होंने उत्साहवर्द्धन के लिये विचारपुर और सरदारपुर के बीच भोपाल में फुटबाल प्रतियोगिता आयोजित करने के लिये भी निर्देशित किया। मंत्री श्री सारंग ने नरसिंहपुर में स्थापित प्रदेश के एकमात्र व्हाली-बॉल हॉस्टल को अकादमी में विस्तारित करने की कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए। वहीं सांची क्षेत्र से वॉटर स्पोर्ट्स में प्रतिभाएं उभरने की जानकारी पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्होंने क्षेत्रीय खेलों के विकास पर जोर दिया। नीमच, उज्जैन, शहडोल सहित कई जिलों के प्रयासों की सराहना नीमच में सक्रिय 27 फुटबॉल क्लब, उज्जैन में सिंथेटिक ट्रैक, इंडोर हॉल, लघु मल्लखंभ केंद्र और कबड्डी की संभावनाएं और शहडोल की फुटबॉल परंपरा की विशेष सराहना की गई। मंत्री श्री सारंग ने कहा कि खेल विभाग अन्य खेलों की तरह सबसे ज्यादा खेले जाने वाले क्रिकेट को भी बढ़ावा देगा, जिससे क्रिकेट की भी उत्कृष्ट प्रतिभाएं निखरकर सामने आयें और मध्यप्रदेश का नाम रोशन करें। तकनीकी और समन्वय पर विशेष बल मंत्री श्री सारंग ने कहा कि खेल विभाग की गतिविधियों की मॉनिटरिंग के लिए डिजिटल एप्लीकेशन विकसित किया जाए। साथ ही प्रत्येक माह जिला स्तर पर समन्वय बैठकें आयोजित कर उसकी रिपोर्ट भोपाल मुख्यालय भेजी जाए। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और अन्य विभागों से समन्वय स्थापित कर खेल गतिविधियों को जन-जन से जोड़ा जाए। उन्होंने सभी अधिकारियों एवं समन्वयकों से कहा कि वे रचनात्मक सुझाव मुख्यालय को पत्र के माध्यम से प्रेषित करें, जिससे योजनाओं में निरंतर सुधार हो सके। उत्कृष्ट कार्य करने वालों का सम्मान कार्यशाला में मंत्री श्री सारंग ने सभी से परिचय प्राप्त किया और उत्कृष्ट कार्य करने वाले 6 युवा समन्वयक सुश्री ज्योति तिवारी, सुश्री ज्योति अहिरवार, श्री दिनेश लोधी, श्री विशाल दामके, श्री वसीम राजा और श्री राजेश बम्हुरे को भी सम्मानित किया। कार्यशाला में अपर मुख्य सचिव श्री मनु श्रीवास्तव, संचालक श्री राकेश गुप्ता, संयुक्त संचालक श्री बी.एस. यादव सहित प्रदेश के सभी संभागीय एवं जिला खेल एवं युवा कल्याण अधिकारी तथा युवा समन्वयक उपस्थित रहे। 

गेहूँ का अधिकतम स्टॉक 3 हजार मीट्रिक टन रख सकते हैं व्यापारी : खाद्य मंत्री राजपूत

 भोपाल  खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री श्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया है कि भारत सरकार द्वारा व्यापारियों के लिए 31 मार्च, 2026 तक के लिये गेहूँ के स्टॉक की सीमा निर्धारित कर दी गयी है। व्यापारी/थोक विक्रेता 3 हजार मीट्रिक टन तक और रिटेलर 10 मीट्रिक टन तक गेहूँ का भण्डारण कर सकते हैं। इसी तरह चेन रिटेलर के प्रत्येक आउटलेट के लिये 10 मीट्रिक टन की सीमा इस आधार पर निर्धारित की गई है कि सभी आउटलेट पर अधिकतम मात्रा आउटलेटों की कुल संख्या के 10 गुना मीट्रिक टन से अधिक भण्डारित नहीं होना चाहिये। प्रोसेसर के लिये स्टॉक की मात्रा उसकी मासिक स्थापित क्षमता के 70 प्रतिशत मात्रा को वर्ष 2025-26 के शेष महीनों से गुणा करने पर आने वाली मात्रा से अधिक नहीं होना चाहिये।  

ट्रांसमिशन लाइनों के नीचे बने मकान के मालिकों को नोटिस जारी

भोपाल इंदौर शहर की नई कॉलोनियों सहित कई इलाकों में कई मकान एक्स्ट्रा हाईटेंशन ट्रांसमिशन लाइनों के प्रतिबंधित दायरे में बन गये हैं। यह निर्माण वर्षों पहले स्‍थापित ट्रांसमिशन लाईनों के समीप किए गए जो न केवल गैरकानूनी हैं, बल्कि जानलेवा भी साबित हो सकते हैं। एम.पी. ट्रांसको ने पिछले तीन वर्षों में ऐसे 892निर्माणों के लिये नोटिस जारी किए हैं। एम.पी. ट्रांसको द्वारा अपने स्तर पर इन्हें हटाने के कई प्रयास समय-समय पर किए जाते हैं, साथ ही जिला प्रशासन की मदद से भी अभियान चलाया जाता है। वर्षों पहले स्थापित हुई इन एक्स्ट्रा हाईटेंशन ट्रांसमिशन लाइनों के नीचे बसे रहवासी मकान न केवल विद्युत सुरक्षा नियमों का उल्लंघन हैं, बल्कि यह जनजीवन को गंभीर खतरे में डाल रहे हैं। खतरनाक स्थिति वाले क्षेत्र इंदौर के लिंबोदी, मुसाखेड़ी, खजराना, मुखर्जी नगर, बाणगंगा, नेमावर रोड, सुखलिया, देवास नाका, खंडवा रोड आदि क्षेत्र ऐसे हैं जहां न्यूनतम सुरक्षा दूरी नहीं है और दुर्घटना की आशंका अधिक है। जागरूकता अभियान जारी एम.पी. ट्रांसको  इंदौर की कार्यपालन अभियंता श्रीमती नम्रता जैन ने बताया कि इंदौर के ऐसे सभी क्षेत्र जहां पहले से ही ट्रांसमिशन लाइनें क्रियाशील है, फिर भी विद्युत सुरक्षा मापदंड़ों को नजर अंदाज कर उनके समीप अनाधिकृत निर्माण कर लिये गये है, उन क्षेत्रों में ट्रांसमिशन लाइनों से दुर्घटना एवं जनहानि होने की आंशका के मद्देनजर वहां कंपनी द्वारा सुरक्षा नियमों की जानकारी घर-घर चस्पा की जा रही है।कर्मचारी लाइनों से सुरक्षित दूरी बनाये रखने के लिए अनाउसमेंट भी कर रहे है। जागरूकता एवं जनसुरक्षा के लिये ट्रांसमिशन लाइनों के संपर्क में आने से संभावित खतरों से सचेत भी कराया जा रहा है। क्यों जरूरी है 27 मीटर का कॉरिडोर केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) के अनुसार, 132 केवी या इससे अधिक वोल्टेज की ट्रांसमिशन लाइन के नीचे कम से कम 27 मीटर की सुरक्षित दूरी आवश्यक है, जिससे हवा में झूलते तारों से संपर्क न हो और दुर्घटना टाली जा सके। जनवरी 2025 से अब तक इंदौर में ट्रांसमिशन लाइनों में 33 बार व्यवधान हुआ, जिसमें 16 बार ट्रिपिंग की वजह ट्रांसमिशन जोन में व्यक्ति या वस्तु का प्रवेश पाया गया है। 600 से 950 गुना अधिक रहता है ट्रांसमिशन लाइनों से जान का खतरा आम घरों में उपयोग होने वाली विद्युत आपूर्ति की तीव्रता मात्र 230 वोल्ट होती है। यह स्तर भी इतना अधिक होता है कि यदि कोई व्यक्ति गलती से इसके संपर्क में आ जाए तो गंभीर रूप से घायल हो सकता है या उसकी जान भी जा सकती है। एक्स्ट्रा हाई टेंशन ट्रांसमिशन लाइनें, जिनमें विद्युत तीव्रता 132 केव्‍ही (यानी 132,000 वोल्ट)  एवं 220 केवी (यानी 2,20,000 वोल्ट) होती है — जो कि घरेलू बिजली की तुलना में 600 से 950 गुना अधिक रहती है। यह अंतर दर्शाता है कि अगर मात्र 230 वोल्ट के संपर्क में आने से जान को खतरा हो सकता है, तो 132 या 220 केवी की ट्रांसमिशन लाइनों के पास रहने या निर्माण करने से कितना बड़ा जोखिम हो सकता है। ट्रांसमिशन लाइनों के आसपास निर्धारित प्रतिबंधित क्षेत्र में निर्माण करना न सिर्फ गैरकानूनी है, बल्कि यह जानलेवा जोखिम भी उत्पन्न करता है।

नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाएं रखें : : राज्यमंत्री गौर

भोपाल  पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर ने गोविंदपुरा क्षेत्र के वार्ड 56, 60 और 61 के विकास कार्यों की समीक्षा बैठक में नागरिक सुविधाओं को लेकर अधिकारियों को महत्वपूर्ण निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि साकेत नगर के रहवासियों द्वारा पाले गए दर्जनों कुत्तों के कारण क्षेत्र में फैली गंदगी और विवाद की स्थिति गंभीर है। उन्होंने कहा कि इसके खिलाफ तत्काल दंडात्मक कार्रवाई की जाए। रहवासी क्षेत्रों में इस प्रकार की गतिविधियां आमजन के लिए परेशानी का कारण बनती हैं और समय रहते इन पर रोक आवश्यक है। उन्होंने बताया कि राजधानी के अन्य इलाकों से भी कुत्तों के काटने से जुड़ी दुर्घटनाओं और असुविधा की शिकायतें लगातार मिल रही थीं, जिन्हें गंभीरता से लेते हुए ये निर्देश जारी किए गए हैं। राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती गौर ने मानसून को ध्यान में रखते हुए तीनों वार्डों में नाली, सीवेज, स्ट्रीट लाइट और जल निकासी की व्यवस्थाओं का तत्काल निरीक्षण कर समस्याओं के निराकरण के निर्देश दिए, ताकि जनहानि और असुविधा से बचा जा सके। विकासकार्यों में न हो लापरवाही: राज्यमंत्री श्रीमती गौर राज्यमंत्री श्रीमती गौर ने वार्ड 56 स्थित शंकर नगर हनुमान मंदिर के पास आम रास्ता बंद करने वाले पेट्रोल पंप मालिक पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। मंदिर के पास अतिक्रमण कर संचालित मांस-मदिरा दुकानों पर रोक लगाई जाए। उन्होंने आनंद विहार कॉलोनी में अवैध कालोनियों पर कार्रवाई और पेयजल हेतु सम्पवेल निर्माण करने के लिए भी निर्देशित किया। वार्ड 61 की कॉलोनियों में पेयजल पाइपलाइन, सीवेज, हाईमास्ट लाइट, पार्क विकास कार्यों को समय पर पूरा करने के निर्देश दिए और वार्ड 60 की आजाद नगर, प्रगति नगर, अवंतिका एवेन्यू फेस सहित एक दर्जन कॉलोनियों में आंगनवाड़ी भवन, नाली निर्माण, नाला सफाई, चौड़ीकरण व पाइपलाइन कार्य करने की बात कही। बैठक में पार्षद श्रीमती मधु शिवनानी, श्री बी. शक्ति राव, श्री नीरज सिंह, श्री सुरेंद्र घोटे, श्री प्रताप सिंह बैंस सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।  

विकास के साथ कला और संस्कृति का समानांतर उत्थान आवश्यक : उप मुख्यमंत्री शुक्ल

भोपाल उप मुख्यमंत्री श्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि प्रदेश के सर्वांगीण विकास के लिए भौतिक अधोसंरचना के साथ-साथ कला और संस्कृति का संरक्षण एवं संवर्धन भी अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि रीवा स्थित राजकपूर ऑडिटोरियम जैसे मंचों पर स्थानीय एवं राष्ट्रीय कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रस्तुत करने का अवसर मिलना एक सकारात्मक पहल है, जिससे समाज में ऊर्जा और जीवंतता का संचार होता है। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने शान-ए-विन्ध्य सम्मान समारोह में यह बात कही। उप मुख्यमंत्री श्री शुक्ल ने कहा कि हंसाने वाले लोग समाज में विरले होते हैं। श्री एहसान कुरैशी ने अपनी कला से लोगों को गुदगुदाया, यह अत्यंत सराहनीय है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के सांस्कृतिक आयोजनों से न केवल कलाकारों को मंच मिलता है, बल्कि युवाओं में भी रचनात्मक ऊर्जा उत्पन्न होती है। उन्होंने समारोह के आयोजकों को बधाई देते हुए कहा कि शान-ए-विन्ध्य जैसे आयोजन कलाकारों को प्रोत्साहन देने के साथ ही क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को भी समृद्ध करते हैं। उन्होंने इस अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों में विशिष्ट योगदान देने वाले प्रतिभाशाली व्यक्तियों एवं कलाकारों को सम्मानित भी किया। समारोह में देश के सुप्रसिद्ध हास्य कलाकार श्री एहसान कुरैशी सहित अन्य कलाकारों ने अपनी हास्य प्रस्तुतियों से उपस्थितों को आनंदित किया। सांसद श्री जनार्दन मिश्र, नगर निगम अध्यक्ष श्री व्यंकटेश पाण्डेय सहित बड़ी संख्या में शहरवासी उपस्थित थे।  

आस्था की नगरी उज्जैन तैयार, जुलाई के अंतिम 3 दिन होंगे त्योहारों से सराबोर

उज्जैन जुलाई के आखिरी तीन दिन उज्जैन में आस्था का महा सैलाबल देखने को मिलेगा। 27 जुलाई को रविवार होने के कारण छुट्टी का लाभ उठाते हुए देशभर से श्रद्धालुओं की भीड़ उज्जैन(Mahakal Temple Crowd) में उमड़ेगी। । 28 जुलाई को श्रावण मास में भगवान महाकाल की तीसरी सवारी निकलेगी, इसी दिन रात 12 बजे नागचंद्रेश्वर मंदिर के पट भी खुलेंगे। 29 जुलाई को नागपंचमी होने से देशभर से हजारों भक्त भगवान नागचंद्रेश्वर के दर्शन के लिए आएंगे। महाकाल व नागचंद्रेश्वर के लिए अलग कतार नागपंचमी पर दर्शन व्यवस्था का प्लान तैयार किया जा रहा है। भीड़ नियंत्रण के लिए महाकाल( Darshan Arrangements Ujjain) और नागचंद्रेश्वर मंदिर में दर्शन के लिए अलग-अलग कतारें रहेंगी। यह निर्णय इसलिए लिया जा रहा है ताकि भक्तों को कम समय में सुविधा से भगवान के दर्शन हो सकें। एक-दो दिन में नागपंचमी की व्यवस्था संबंधी बैठक में दर्शन व्यवस्था पर अंतिम मुहर लग जाएगी।   दो दिन में 10 लाख से अधिक भक्तों के आने का अनुमान 28 जुलाई को श्रावण का तीसरा सोमवार और 29 जुलाई को नागपंचमी(Nag Panchami Ujjain) होने से प्रशासन को इन दो दिनों में 10 लाख से अधिक भक्तों के भगवान महाकाल और नागचंद्रेश्वर के दर्शन(Nagchandreshwar Darshan) के लिए उज्जैन पहुंचने की संभावना है। श्रद्धालुओं का उज्जैन पहुंचने का सिलसिला 27 जुलाई, रविवार से शुरू हो जाएगा। तीन दिन के लिए शहर की होटलें, यात्रीगृह और होमस्टे में यात्रियों को जगह मिलना मुश्किल रहेगा। महाकालेश्वर मंदिर के सहायक प्रशासक मूलचंद जूनवाल का कहना है कि “नागपंचमी को लेकर तैयारी शुरू हो गई है। व्यवस्था के लिए विभिन्न विभागों को पत्र लिखा गया है। एक-दो दिन में कलेक्टर रौशन कुमार सिंह की अध्यक्षता में बैठक होगी। इसमें दर्शन व्यवस्था सहित अन्य महत्वपूर्ण बिंदुओं पर निर्णय लिए जाएंगे।”