samacharsecretary.com

शिवपुरी के अजय रघुवंशी की मेहनत रंग लाई, दिव्यांग होते हुए भी बने करोड़ों दिलों के हीरो

शिवपुरी   कहते भी हैं कि अगर कुछ पाने की दृढ़ इच्छाशक्ति है और पूरी लगन, मेहनत के साथ कोशिश की जाए तो परिणाम सकारात्मक मिलते हैं. यही कर दिखाया है शिवपुरी जिले के छोटे से गांव के एक युवा ने. दिव्यांग क्रिकेटर अजय रघुवंशी को बेंगलुरु वॉरियर्स ने 11 लाख 40 हजार में खरीदा है. अजय अब दुबई में होने वाली दिल्ली प्रीमियर लीग में अपना दमखम दिखाएंगे. शानदार प्रदर्शन करने पर मिला इनाम शिवपुरी जिले के कोलारस विकासखंड अंतर्गत ग्राम लुकवासा के दिव्यांग क्रिकेटर अजय रघुवंशी ने राष्ट्रीय पटल पर शिवपुरी का नाम रोशन कर दिया.  को मुंबई में दिव्यांग क्रिकेटरों की नीलामी हुई. दिल्ली प्रीमियर लीग के लिए अजय रघुवंशी को बेंगलुरु वॉरियर्स ने अपने पाले में कर लिया. अब अजय दुबई में 5 अक्टूबर से आयोजित होने वाली इस प्रतियोगिता में अपना हुनर दिखाएगा. खास बात यह है प्रतियोगिता के लिए मध्य प्रदेश सिर्फ दो खिलाड़ियों को खरीदा गया है, जिसमें एक अजय हैं. अजय रघुवंशी के अलावा एक खिलाड़ी सागर जिले का है, जो दिल्ली की टीम के लिए खेलेगा. ऐसे में मिली अजय के सपनों को उड़ान मां की कोख से ही एक हाथ के बिना जन्मे अजय रघुवंशी जब गांव में लड़कों को क्रिकेट खेलते हुए देखते थे तो वह भी इस खेल में हाथ आजमाने का सपना देखने लगे. लेकिन एक हाथ न होने के कारण नहीं खेल पाते थे. बेटे को दुखी देख पिता चंद्रभान रघुवंशी ने उनका हौसला बढ़ाया. धीरे-धीरे उसे गांव के लड़कों के साथ प्रैक्टिस करवाई. करीब 12 साल की उम्र में दिव्यांग अजय गांव की टीम का हिस्सा बन गया. आसपास के जिलों में होने वाली प्रतियोगिताओं में जब गांव की टीम खेलने जाती तो वह उस टीम में शामिल रहता. उदयपुर और कानपुर में दिखाया जलवा इसी क्रम में दिसंबर 2024 में भोपाल में दिव्यांग क्रिकेटरों की ट्रायल रखी गई. ट्रायल में अजय रघुवंशी शामिल हुए. टैलेंट के बूते उनका चयन हुआ. चयन के बाद पहले उदयपुर और फिर कानपुर में आयोजित दिव्यांग टूर्नामेंट में अजय ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 8 मैचों में 21 विकेट लिए और 132 रन बनाए. इसी प्रदर्शन के बूते अजय का नाम दिल्ली प्रीमियर लीग के लिए खिलाड़ियों में शामिल किया गया. अजय ने किया उम्मीदों पर खरा उतरने का दावा अजय रघुवंशी ने बताया "वह मानता है कि अब उसके लिए काम्पटीशन टफ हो गया है, क्योंकि अब उसे खुद को पूरे भारत के सामने साबित करना है. इसके अलावा अब वह भी इंडिया की टीम के लिए खेलने की इच्छा रखता है. ऐसे में खुद को और खुद के खेल को बेहतर बनाने के लिए वह दिन-रात प्रयास कर रहे हैं. उसे उम्मीद है कि वह डीपीएल में भी शानदार प्रदर्शन करेगा." 

सेफ्टी पहले: भोपाल में स्कूल बच्चों के लिए ई-रिक्शा पर लगेगा बैन, बच्चों की सेफ्टी के सही नहीं

भोपाल  शहर की ट्रैफिक व्यवस्था को सुधारने के लिए शुक्रवार को कंट्रोल रूम में एक मीटिंग हुई। सांसद आलोक शर्मा ने जिला प्रशासन, पुलिस, नगर निगम और पीडब्ल्यूडी विभाग के अधिकारियों के साथ मिलकर कई महत्वपूर्ण फैसले लिए। मीटिंग में लेफ्ट-टर्न को सुधारने, ई-रिक्शा पर नियंत्रण रखने, ट्रांसफार्मर हटाने और पार्किंग व्यवस्था को ठीक करने जैसे मुद्दों पर बात हुई। पीडब्ल्यूडी अधिकारियों को उनके अधूरे प्लान के लिए फटकार लगाई गई और उन्हें एक हफ्ते में ट्रैफिक एक्सपर्ट्स के साथ मिलकर लेफ्ट टर्न सुधार का प्लान पेश करने का निर्देश दिया गया। शहर के 42 चौराहों पर लेफ्ट टर्न की समस्या को दूर करने के लिए 3 करोड़ रुपए का बजट रखा गया है। ई-रिक्शा पर रोक ई-रिक्शा के गलत इस्तेमाल को लेकर चिंता जताई गई और कलेक्टर ने कहा कि बच्चों को ई-रिक्शा में स्कूल भेजना सुरक्षित नहीं है। इसलिए स्कूलों में ई-रिक्शा को प्रतिबंधित करने का फैसला लिया गया, क्योंकि यह बच्चों की सुरक्षा के लिए जरूरी था। मीटिंग में सड़कों से अतिक्रमण हटाने और कंडम वाहनों को हटाने पर भी बात हुई। सांसद शर्मा ने ट्रांसफार्मर और खंभों को हटाने की बात कही और पार्किंग व्यवस्था को आम लोगों के लिए आसान बनाने के निर्देश दिए। पीडब्ल्यूडी अधिकारियों को फटकार सांसद आलोक शर्मा ने पीडब्ल्यूडी अधिकारियों को फटकार भी लगाई। दरअसल, पीडब्ल्यूडी अधिकारी बिना किसी वर्किंग प्लान के मीटिंग में पहुंच गए थे। इस पर सांसद ने नाराजगी जताई। मीटिंग में संबंधित विभागों को कुछ निर्देश दिए गए। उन्हें मैनिट के ट्रैफिक विशेषज्ञों की मदद से सभी 42 चौराहों की समीक्षा रिपोर्ट और एस्टीमेट तैयार करने को कहा गया। इससे जल्द से जल्द काम शुरू किया जा सके। ऐसा करने से ट्रैफिक जाम में कमी आएगी और लोगों का आना-जाना आसान हो जाएगा। साथ ही, चौराहों की सुरक्षा और दृश्यता भी बेहतर हो जाएगी।  

नेहा किन्नर केस में चौंकाने वाला खुलासा! फर्जी दस्तावेजों से 25 साल से रह रही थी भोपाल में

 भोपाल  बीते करीब ढाई दशक से भारत में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिक नेहा किन्नर (पूर्व में अब्दुल कलाम) को लेकर नए खुलासे हो रहे हैं। अब्दुल कलाम भारत में कोई वीजा लेकर नहीं बल्कि बांग्लादेशी घुसपैठियों की टोली में अवैध रूप से सीमा पार करके आया था। माता-पिता के साथ कई दोस्त-रिश्तेदार भी उस टोली में एक साथ भारत में घुसे थे। पहले वे महाराष्ट्र समेत दूसरे राज्यों में अवैध रूप से रहे, फिर भोपाल आकर फर्जी रूप से अपने दस्तावेज तैयार करवाए और यहीं बस गए। भोपाल में कलाम नेहा किन्नर के नाम से रह रहा था। बांग्लादेश से उसके साथ आकर भोपाल में बसे पांच घुसपैठिए करीब चार साल से चोरी-लूट के मामले में जेल में बंद हैं। 17 साल की उम्र में सीमा पार कर आया था वहीं नेहा किन्नर के एमपी नगर थाने में दर्ज मारपीट के मामले में जल्द ही फैसला आएगा, जिसके बाद उसे बांग्लादेश वापस भेज दिया जाएगा। बता दें तलैया पुलिस ने एक सप्ताह पहले बुधवारा क्षेत्र में रहने वाली नेहा किन्नर को हिरासत में लिया था। पूछताछ में उसने बताया कि वह 17 वर्ष की उम्र में सीमा पार कर अवैध रूप से भारत में रह रहा था। पुलिस आयुक्त हरिनारायणचारी मिश्र ने बताया कि नेहा किन्नर का एक मामला न्यायालय में विचाराधीन है। उस पर सुनवाई जारी है। वहीं, उसे आश्रय देने वालों को लेकर भी जांच की जा रही है।

टेबल वर्क नहीं, अब सेवा और शिक्षा पर फोकस: आयुष विभाग ने बदली डॉक्टरों की जिम्मेदारी

भोपाल  मध्य प्रदेश सरकार ने मेडिकल कॉलेजों में कार्यरत प्रोफेसर और डॉक्टरों को लेकर बड़ा फैसला किया है। अब ऐसे डॉक्टर जो केवल ऑफिस बैठकर प्रशासनिक काम करते हैं, उन्हें दोबारा पढ़ाई और इलाज से जुड़ी सेवाओं में लगाया जाएगा। सरकार का मानना है कि डॉक्टरों और प्रोफेसरों को मरीजों और छात्रों से दूर बैठाकर बाबूगिरी करवाना मेडिकल सेवाओं और शिक्षा दोनों के लिए नुकसानदायक है। आयुष विभाग इसको लेकर प्रावधान करने जा रहा है। इसमें जिन डॉक्टरों के पास 20 साल से कम का शिक्षण अनुभव है, उन्हें अब 65 की बजाय 62 साल की उम्र में ही सेवा से मुक्त कर दिया जाएगा। यह नियम आयुर्वेद कॉलेजों पर भी लागू होगा। क्लास रूम और क्लिनिक में मौजूदगी अनिवार्य साथ ही मेडिकल कॉलेजों में कार्यरत प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और सहायक प्राध्यापक अब नियमित रूप से क्लास लें, ओपीडी में बैठें और छात्रों को मार्गदर्शन दें। इसको लेकर ही नियमों को सख्त करने की तैयारी है। प्रशासनिक जिम्मेदारियों के बहाने शिक्षण और मरीजों से दूरी बनाने के बहाने खत्म किए जाएंगे।  बदलेगी डॉक्टरों की कार्यप्रणाली बता दें लंबे समय से कई डॉक्टर ऑफिस वर्क में लगे हुए हैं और उन्होंने क्लास या मरीजों को देखना लगभग बंद कर दिया था। सरकार अब ऐसे डॉक्टरों की सूची तैयार कर रही है जिन्हें मूल कार्य (टीचिंग और ट्रीटमेंट) में वापस भेजा जाएगा। यह पहल विभागीय जवाबदेही और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने के उद्देश्य से की जा रही है। 

यात्रियों के लिए राहत! इंदौर में ई-रिक्शा का न्यूनतम किराया ₹10 फिक्स

इंदौर इंदौर में आठ हजार से ज्यादा ई रिक्शा सड़कों पर चल रहे है और रिक्शा चालक मनमाना किराया ले रहे है। इस पर लगाम लगाने की तैयारी अब हो रही है। संभागायुक्त दीपक सिंह ने ई रिक्शा के किराए को लेकर आदेश जारी किए है। ई रिक्शा चालक दो किलोमीटर तक प्रति यात्री दस रुपये तक किराया ले सकेंगे। दो किलोमीटर के बाद प्रति किलोमीटर के लिए पांच रुपये देना होंगे। यह दरें शुक्रवार से लागू की गई है। इससे ज्यादा किराया अब रिक्शा चालक नहीं ले सकते है।  क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी प्रदीप शर्मा ने कहा कि ई रिक्शा चालकों द्वारा मनमाना किराया लेने की शिकायतें प्राप्त हो रही थी। अब हमने किराया तय किया है। उससे अधिक किराया लेने पर रिक्शा चालकों के खिलाफ एक्शन लिया जाएगा। उन्होंने किया कि इंदौर में ई रिक्शा चार या उससे अधिक बैठक क्षमता वाले संचालित हो रहे है। रुट भी तय नहीं,ट्रैफिक मे भी बाधक  प्रशासन ने ई रिक्शा के रुट तय करने की कवायद भी की थी, लेकिन अभी तक रुट नहीं बनाए गए। इंदौर में कई रुटों पर ई रिक्शा संचालित हो रहे। उनके स्टैंड भी नहीं है। इस कारण वे कही भी खड़े हो जाते है। चौराहों पर लेफ्ट टर्न पर भी कई बार ई रिक्शा खड़े नजर आते है। इंदौर में चार किलोमीटर के 80 से 100 रुपये तक ई रिक्शा चालक किराया वसूलते है। मनमाने किराए को लेकर कई बार यात्रियों के साथ बदसलूकी भी की जाती है। कई ई रिक्शा अटाला बेचने, सब्जी बेचने के उपयोग में भी आ रहे है।    

सागर के खुरई में हरियाली की लहर, एक दिन में 61,700 से ज्यादा पौधे लगाए गए

सागर  खुरई विधानसभा क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण को समर्पित 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान के तहत एक भव्य पौधारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें एक ही दिन में 61,700 से अधिक पौधे रोपे गए। इस वृहद अभियान में नगर निकायों और ग्राम पंचायतों की सक्रिय भागीदारी रही, और खुरई मॉडल स्कूल ग्राउंड में मुख्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि समर्थ दादा गुरु महाराज थे, जबकि अध्यक्षता पूर्व गृहमंत्री व खुरई विधायक भूपेंद्र सिंह ने की। इस अवसर पर अकेले खुरई में 10,000 से अधिक पौधे रोपे गए। कार्यक्रम में विभिन्न ग्राम पंचायतों और नगरीय निकायों में भी समारोहपूर्वक पौधारोपण किया गया। अपने संबोधन में समर्थ दादा गुरु महाराज ने कहा, "खुरई में आज सहस्रकोटि यज्ञ की तरह यह अभियान जीवंत हुआ है। श्रावण मास शिव-शक्ति की आराधना का समय है और इस पवित्र अवसर पर 51,000 से अधिक देव वृक्षों की स्थापना एक ऐतिहासिक कदम है। वृक्ष ही ऐसे जीव हैं जो माटी, वायु और जल तीनों का संरक्षण कर सकते हैं।" भूपेंद्र सिंह ने घोषणा की कि यह अभियान अब हर साल चलेगा और खुरई में प्रतिवर्ष 50,000 पौधे लगाए जाएंगे। उन्होंने कहा, "खुरई पहले ही स्वच्छता, स्वास्थ्य और विकास के मामलों में अग्रणी है, अब हम इसे पर्यावरण संरक्षण का भी मॉडल बनाएंगे।" इस आयोजन ने खुरई को हरित भविष्य की दिशा में एक नई पहचान दी है और स्थानीय लोगों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता और जिम्मेदारी का भाव भी पैदा किया है।  

राजधानी भोपाल में नाम बदलने की शुरुआत, ‘राम बाग’ बना अशोका गार्डन, अन्य क्षेत्रों की सूची तैयार

भोपाल  राजधानी शहर के प्रमुख जगहों के नाम बदलकर शहर सरकार 'शुद्धिकरण अभियान' चला रही है। दावा किया जा रहा है कि, अब गुलामी और विदेशी आंक्राताओं के नाम से नहीं, बल्कि भोपाल की पहचान भारतीय संस्कृति के नामों से होगी। इसी के चलते नगर निगम द्वारा हमीदिया कॉलेज, हमीदिया अस्पताल, हबीबगंज के साथ-साथ शहर के कई प्रमुख इलाकों के नाम बदलने के लिए शासन से मांग की है। इसी के तहत मेयर इन काउंसिल (MIC) ने शहर के बड़े और प्रमुख इलाके में शामिल अशोका गार्डन का नाम बदल भी दिया है। इस इलाको को अब 'राम बाग' नाम से जाना जाएगा। मीडिया से बातचीत के दौरान नगर निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी ने कहा कि, गुलामी और विदेशी आक्रांताओं के नामों को बदलना जरूरी है। भारतीय संस्कृति के नामों से भोपाल को राजा भोजपाल की पहचान मिले। कई सड़कों और संस्थानों के नाम बदलने के लिए शासन को पत्र लिखा गया है। शहर सरकार की शक्तियों का उपयोग कर अशोका गार्डन का नाम बदलकर राम बाग का प्रस्ताव पारित हुआ है। निगम अद्यक्ष ने कहा कि, भोपाल का नवाब रहा हमीदुल्लाह खान के नाम की सड़कों के नाम बदले। भोपाल का हमीदुल्लाह खान पाकिस्तान में विलय चाहता था। इसलिए ये शुद्धिकरण का अभियान है। विपक्ष के मति में भ्रम और अशुद्धि है।

ग्वालियर से RSS का मिशन समरसता, 150 दलित छात्रों को मिलेगा विशेष प्रशिक्षण

ग्वालियर  अनुसूचित जाति (SC) वर्ग के छात्रों के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का प्रकल्प विचार प्रवाह एक बड़ी पहल करने जा रहा है। ग्वालियर अंचल में लंबे समय से सामाजिक समरसता और शैक्षणिक जागरूकता को लेकर कार्य कर रहा यह संगठन अब 19 जुलाई से 24 घंटे का आवासीय प्रशिक्षण शिविर आयोजित करेगा। यह शिविर शहर के श्याम वाटिका परिसर में होगा जिसमें अजा वर्ग के 150 छात्रों को शामिल किया जाएगा। इस प्रशिक्षण शिविर में देशभर के विषय विशेषज्ञ छात्रों को तथ्यात्मक इतिहास, विदेश में उच्च शिक्षा के लिए स्कॉलरशिप प्राप्त करने की प्रक्रिया और प्रतियोगी परीक्षाओं की प्रभावी तैयारी के गुर सिखाएंगे। इसका मुख्य उद्देश्य छात्रों को समाज में व्याप्त भ्रामक विमर्शों से अवगत कराना और उन्हें सनातन मूल्यों के प्रति जागरूक करना है। शिविर के संयोजक मनीष राजौरिया और संघ की सामाजिक समरसता गतिविधियों के संयोजक सुधीर शर्मा ने बताया कि कुल आठ सत्रों में शिक्षण, सामाजिक और ऐतिहासिक विषयों पर विशेषज्ञ बातचीत करेंगे। इसमें प्रोफेसर, डॉक्टर्स, वकील और इंजीनियर जैसे बुद्धिजीवी भाग लेंगे। विचार प्रवाह पिछले तीन वर्षों से ग्वालियर जिले में सक्रिय है और 500 से अधिक अनुसूचित जाति वर्ग के बुद्धिजीवियों को जोड़ चुका है। संगठन तीन मुख्य कार्यों पर केंद्रित है – सामाजिक समरसता को बढ़ावा देना, अनुसूचित वर्ग से जुड़ी घटनाओं का विश्लेषण करना और उनकी प्रगति के लिए शोध कार्यों को आगे बढ़ाना। ग्वालियर अंचल में जातिगत संगठनों की गतिविधियों में बढ़ोतरी के कारण समाज में राजनीतिक स्वार्थ से प्रेरित विभाजनकारी विमर्श फैलाए जा रहे हैं। ऐसे में विचार प्रवाह का यह प्रयास अजा वर्ग को सनातन विरोधी विचारधाराओं से सचेत करने और सामाजिक एकता को पुनः स्थापित करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। यदि ग्वालियर में यह प्रयोग सफल रहता है तो संघ इसे गुना, शिवपुरी, अशोकनगर, भिंड, मुरैना और श्योपुर जिलों में भी आयोजित करेगा। आगे चलकर यह नवाचार राष्ट्रीय स्तर पर भी लागू किया जा सकता है।

बालाघाट के जंगलों में गोलियां गूंजीं! सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच चल रही मुठभेड़

 बालाघाट  बालाघाट से बड़ी खबर सामने आ रही है जहां सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच भीषण मुठभेड़ जारी है। यह मुठभेड़ जिले के घने जंगलों में उस समय शुरू हुई जब सुरक्षा बलों द्वारा एक विशेष सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा था। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, ऑपरेशन के दौरान सुरक्षाबलों की टीम का सामना नक्सलियों से हो गया, जिसके बाद दोनों ओर से फायरिंग शुरू हो गई। घटना की पुष्टि करते हुए सुरक्षा एजेंसियों ने बताया कि मुठभेड़ अभी भी जारी है और मौके पर अतिरिक्त बलों को रवाना किया गया है। फिलहाल, किसी प्रकार के हताहत या गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। प्रशासन ने क्षेत्र में अलर्ट जारी कर दिया है और मुठभेड़ से संबंधित विस्तृत जानकारी का इंतजार किया जा रहा है। बालाघाट जिले लांजी थाना अंतर्गत मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ सीमा से लगे झुलनापाठ के जंगल में शनिवार सुबह माओवादियों और सुरक्षा जवानों के बीच मुठभेड़ हुई है। इसमें कुछ माओवादियों के मारे जाने की सूचना आ रही है। पुलिस अधीक्षक आदित्य मिश्रा ने मुठभेड़ की घटना की पुष्टि की है। उन्होंने मुठभेड़ में माओवादियों के मारे जाने की बात से इनकार किया है, लेकिन ये स्पष्ट किया है कि जंगल में मुठभेड़ हुई है और मौके पर हाकफोर्स और कोबरा बटालियन के जवान तैनात हैं। वहीं, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (बैहर) आदर्शकांत शुक्ला ने बताया कि मुठभेड़ शनिवार सुबह नौ बजे के आसपास शुरू हुई थी। दो-तीन घंटे के बाद मुठभेड़ रुक गई। फिलहाल सुरक्षा जवान इलाके की सर्चिंग कर रहे हैं। मुठभेड़ में माओवादी के मारे जाने की भी जानकारी सामने आ रही है, लेकिन पुलिस का कहना है कि अभी किसी भी माओवादी का शव नहीं मिला है। इसलिए मुठभेड़ में माओवादी मारे गए हैं या नहीं, ये शव मिलने के बाद ही स्पष्ट होगा। 14 जून को मारी गईं थीं चार हार्डकोर महिला माओवादी बता दें कि 36 दिन पहले 14 जून को रूपझर थाना क्षेत्र के कटेझिरिया के जंगल में हाकफोर्स के जवानों ने चार हार्डकोर महिला माओवादियों को मार गिराया था। इसके बाद इस महीने हट्टा थाना क्षेत्र के ठाकुरटोला के नैनसिंह धुर्वे को पुलिस ने माओवादियों को विस्फोटक सामग्री उपलब्ध कराने के आरोप में गिरफ्तार किया था। इस मामले में पुलिस अब तक पांच संदेहियों को भी हिरासत में लेकर पूछताछ कर चुकी है। हाकफोर्स और कोबरा बटालियन के जवान मौके पर तैनात है। आशंका है कि फायरिंग में कुछ माओवादियों जान बचाकर जंगल में भाग गए हैं। अभी कोई शव बरामद नहीं हुआ है, लेकिन यह बताया जा रहा है कि कई माओवादियों को इसमें गोली लगी है। सर्चिंग पर निकले थे जवान जानकारी के मुताबिक हाकफोर्स और कोबरा बटालियन के जवान इलाके में सर्चिंग पर निकले थे। इसी दौरान वहां मौजूद माओवादियों ने गोलियां चलाना शुरू कर दी। बदले में जवानों ने भी डटकर उनका मुकाबला किया, इस दौरान कई माओवादी भागने पर मजबूर हो गए। छत्तीसगढ़ से भागकर आने की आशंका जिस इलाके में यह मुठभेड़ हुई वह छत्तीसगढ़ की सीमा के काफी करीब है, आशंका जताई जा रही है कि माओवादी वहीं से भागकर मध्य प्रदेश के बालाघाट में आए हैं। छत्तीसगढ़ में माओवादियों के खिलाफ सुरक्षाबलों का एक्शन लगातार जारी है। केंद्र सरकार ने अगले साल तक देश को माओवाद से मुक्त करने का निर्णय लिया है। ऐसे में मध्य प्रदेश में भी उनके छिपने के संभावित ठिकानों पर लगातार सर्चिंग की जा रही है।

अदालत का स्पष्ट संदेश: बीमारी का हवाला देकर ट्रांसफर नहीं टाला जा सकता

ग्वालियर  मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर पीठ ने माध्यमिक शिक्षिका सुनीता यादव की ट्रांसफर रद्द करने संबंधी याचिका खारिज करते हुए सख्त टिप्पणी की है कि स्थानांतरण (ट्रांसफर) सेवा का अभिन्न हिस्सा है और जब तक कोई ट्रांसफर दुर्भावनापूर्ण या मनमाना न हो, अदालत उसमें हस्तक्षेप नहीं कर सकती। क्या है पूरा मामला? शिक्षिका सुनीता यादव का स्थानांतरण 3 अक्टूबर 2024 को इंदरगढ़ के मढीपुरा मिडिल स्कूल से दतिया जिले के रुहेरा हाईस्कूल में किया गया था। उन्होंने इस ट्रांसफर को चुनौती देते हुए कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। प्रारंभ में कोर्ट ने उन्हें प्रतिवेदन देने का अवसर देते हुए जबरन ज्वॉइन न कराने के निर्देश प्रशासन को दिए थे। लेकिन प्रशासन ने उनका प्रतिवेदन 23 अप्रैल 2025 को खारिज कर दिया। इसके बाद शिक्षिका ने दोबारा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने याचिका में दो प्रमुख तर्क दिए- 1. मढीपुरा स्कूल में शिक्षकों की कमी है 2. स्वयं स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही हैं कोर्ट ने क्या कहा? हाईकोर्ट की एकलपीठ ने यह स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता द्वारा दिए गए प्रारंभिक प्रतिवेदन में कहीं भी स्वास्थ्य समस्याओं का उल्लेख नहीं था। साथ ही यह भी पाया गया कि मढीपुरा स्कूल में कुल तीन शिक्षक कार्यरत हैं और उनमें से सुनीता यादव को "सरप्लस" (अतिरिक्त शिक्षक) मानकर ही स्थानांतरण किया गया। ट्रांसफर को बताया सेवा का अभिन्न हिस्सा कोर्ट ने अपने फैसले में दो टूक कहा कि थानांतरण सरकारी सेवा का एक अनिवार्य पहलू है। जब तक कोई स्थानांतरण दुर्भावना से प्रेरित या असंगत न हो, तब तक उसमें न्यायिक हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है। कोर्ट ने याचिका को निराधार बताते हुए खारिज कर दिया। हालांकि, हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि यदि अब याचिकाकर्ता को कोई नई स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हैं, तो वह प्रशासन के समक्ष पुनः आवेदन कर सकती हैं और प्रशासन चाहे तो उन पर विचार कर सकता है।