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अजब-गजब मामला खरगोन से: महिला ने एक साथ चार बच्चों को जन्म दिया

खरगोन  अक्सर फिल्मों और कहानियों में एक साथ कई खुशियां दरवाजे पर दस्तक देती हैं, ठीक वैसा ही कुछ यहां देखने को मिला, जब एक साधारण परिवार की जिंदगी एक ही रात में बदल गई. रात का सन्नाटा था, अस्पताल के बाहर परिजन बेचैनी से इंतजार कर रहे थे. हर बीतता पल चिंता बढ़ा रहा था, लेकिन अंदर डॉक्टरों की टीम एक मुश्किल जंग लड़ रही थी. फिर अचानक खुशखबरी आई एक नहीं, दो नहीं, बल्कि चार बच्चों की किलकारी एक साथ गूंजी है।  मध्य प्रदेश के खरगोन जिले से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां एक महिला ने एक साथ चार बच्चों को जन्म देकर सबको चौंका दिया. खास बात यह है कि इन चारों नवजातों में दो बेटे और दो बेटियां शामिल हैं।  बच्चों की हो रही विशेष निगरानी जानकारी के मुताबिक, बड़वाह तहसील के मेहपुरा गांव की रहने वाली पूजा को प्रसव पीड़ा होने पर जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था. रात डॉक्टरों की टीम की निगरानी में डिलीवरी कराई गई, जिसमें महिला ने चार बच्चों को जन्म दिया. डॉक्टरों के अनुसार, यह डिलीवरी काफी जटिल थी, लेकिन मेडिकल टीम की सतर्कता से सभी बच्चों का सुरक्षित जन्म हो सका. चारों नवजातों का वजन करीब 700 ग्राम से 1 किलोग्राम के बीच बताया जा रहा है, जिसके चलते उन्हें विशेष निगरानी में रखा गया है. डॉक्टरों का कहना है कि इतनी कम वजन में जन्म लेना जोखिम भरा होता है, इसलिए बच्चों को लगातार ऑब्जर्वेशन में रखा गया है।  फिलहाल मां और चारों बच्चे अस्पताल में डॉक्टरों की निगरानी में हैं और उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है. इस अनोखी घटना की चर्चा पूरे इलाके में हो रही है, लोग इसे किसी चमत्कार से कम नहीं मान रहे हैं.

आशिमा मॉल से बावड़ियाकलां रेलवे ओवरब्रिज के लिए भू-अर्जन का कार्य एक माह में पूर्ण कर निर्माण करें शुरू

भोपाल  पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कृष्णा गौर ने मंगलवार को मंत्रालय में आयोजित बैठक में विभिन्न विकास कार्यों की प्रगति समीक्षा की। उन्होंने आशिमा मॉल से बावड़ियाकलां चौराहे तक बनने वाले रेलवे ओवरब्रिज के निर्माण कार्य में हो रही देरी पर नाराजगी व्यक्त की। राज्यमंत्री गौर ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि यह ओवरब्रिज क्षेत्र की यातायात व्यवस्था को सुगम बनाने और नागरिकों को जाम की समस्या से निजात दिलाने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि आम जनता की सुविधा से जुड़े कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को एक माह में जमीन अधिग्रहण और भू-अर्जन की कार्यवाही पूर्ण कर निर्माण कार्य प्रारंभ करने तथा कार्य की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। राज्यमंत्री गौर ने पिपलानी से खजूरी कलां तक बनने वाली सड़क के निर्माण कार्य की समीक्षा करते हुए ट्रांसफॉर्मर और स्ट्रीट लाइट्स की पर्याप्त व्यवस्था जल्द से जल्द सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शीघ्र अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई कर निर्माण कार्य शुरू किया जाए। बैठक में अधिकारियों ने अवगत कराया कि उक्त स्थान पर नाली निर्माण और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं की जा चुकी हैं। राज्यमंत्री गौर ने ग्लोबल स्किल पार्क के पास पुलिया एवं मार्ग निर्माण के संबंध में अधिकारियों को 15 मई तक अतिक्रमण हटाकर अलाइनमेंट और अन्य आवश्यक कार्यों को पूर्ण करने के लिए निर्देशित किया। इसके साथ ही उन्होंने सोनागिरी सतनामी नगर से अयोध्या बायपास मार्ग और पुलिस थाना बागसेवनिया से एचडीएफसी बैंक तक मार्ग निर्माण की प्रगति की भी समीक्षा की और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। राज्यमंत्री गौर ने कहा कि सभी विकास कार्यों में गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा जाए और पारदर्शिता के साथ समयबद्ध तरीके से कार्य पूर्ण किए जाएं। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल योजनाएं बनाना नहीं है, बल्कि उन्हें धरातल पर उतारकर जनता को उनका वास्तविक लाभ पहुंचाना है। राज्यमंत्री गौर ने अधिकारियों को नियमित रूप से फील्ड विजिट कर कार्यों की प्रगति की समीक्षा करने और समस्याओं के त्वरित समाधान की व्यवस्था सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए।  

DAVV का मेडिकल कॉलेज झाबुआ में: कुलगुरु ने दी जानकारी, इंजीनियरिंग कॉलेज में शुरुआत की तैयारी

झाबुआ  देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (DAVV) झाबुआ में अपना मेडिकल कॉलेज स्थापित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। विश्वविद्यालय को इसके लिए आवश्यक भूमि आवंटित हो चुकी है, और अब प्रारंभिक कक्षाओं के संचालन हेतु एक अस्थायी व्यवस्था पर विचार किया जा रहा है। कुलगुरु डॉ. राकेश सिंघई के नेतृत्व में यह महत्वाकांक्षी परियोजना 350 से 400 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत के साथ साकार होगी। विश्वविद्यालय प्रबंधन को आशा है कि इस माह के अंत तक इस संबंध में महत्वपूर्ण निर्णय आ सकता है। दरअसल विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद ने झाबुआ में मेडिकल कॉलेज खोलने का ऐतिहासिक फैसला लिया था। इस निर्णय के तहत, मध्यप्रदेश शासन ने उच्च शिक्षा विभाग के माध्यम से देवी अहिल्या विश्वविद्यालय को मेडिकल कॉलेज के निर्माण के लिए 70 एकड़ भूमि आवंटित कर दी है। यह आवंटन विश्वविद्यालय को अपने स्वयं के चिकित्सा शिक्षा संस्थान की स्थापना की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। झाबुआ जिला अस्पताल को भी विश्वविद्यालय को सौंपने पर विचार किया जा रहा परियोजना के एक अहम पहलू के रूप में, झाबुआ जिला अस्पताल को भी विश्वविद्यालय को सौंपने पर विचार किया जा रहा है। मध्यप्रदेश शासन इस संबंध में निर्णय ले रहा है कि जिला अस्पताल को विश्वविद्यालय को सौंप दिया जाए, ताकि यह नए मेडिकल कॉलेज के लिए एक शैक्षणिक अस्पताल के रूप में कार्य कर सके। वर्तमान में, झाबुआ जिला अस्पताल में लगभग 250 बिस्तर उपलब्ध हैं। राष्ट्रीय मेडिकल काउंसिल (NMC) के मानदंडों के अनुसार, 100 सीटों वाले मेडिकल कॉलेज के लिए 300 बिस्तरों वाले अस्पताल की आवश्यकता होती है। विश्वविद्यालय का मानना है कि जिला अस्पताल के अधिग्रहण से यह आवश्यकता पूरी हो जाएगी, जिससे छात्रों को पर्याप्त नैदानिक अनुभव मिल सकेगा। यूनिवर्सिटी का खुद का मेडिकल कॉलेज होगा कुलगुरु प्रोफेसर राकेश सिंघई ने बताया कि यूनिवर्सिटी की कार्यपरिषद में मेडिकल कॉलेज खोलने का फैसला लिया गया था। इसमें तय किया गया था कि झाबुआ में मेडिकल कॉलेज स्थापित किया जाएगा। इसके लिए मध्यप्रदेश शासन ने हायर एजुकेशन विभाग के माध्यम से यूनिवर्सिटी को जमीन भी आवंटित कर दी है। झाबुआ डिस्टिक हॉस्पिटल है, उस हॉस्पिटल को, मध्यप्रदेश शासन ये निर्णय ले रहा है कि वह यूनिवर्सिटी को सौंप दिया जाएगा। जिससे हमारा जो शैक्षणिक अस्पताल है उसके रूप में वह जिला हॉस्पिटल काम कर सकेगा। इंजीनियरिंग कॉलेज में मेडिकल कॉलेज चलाने की मांगी अनुमति कुलगुरु प्रोफेसर राकेश सिंघई ने बताया कि यह भी कोशिश की जा रही है कि वहां पर राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय का इंजीनियरिंग कॉलेज है। यदि शासन उचित समझता है तो, यूनिवर्सिटी ने मांग की है कि जब तक नए परिसर में हमारा मेडिकल कॉलेज स्थापित नहीं हो जाता तब तक इंजीनियरिंग कॉलेज में मेडिकल कॉलेज चलाने की अनुमति दे दी जाए। इसके लिए नेशनल मेडिकल कांउसिल में यूनिवर्सिटी ने आवेदन भी कर दिया है। उम्मीद है इस महीने तक निर्णय आ सकता है उन्होंने बताया कि 100 सीट के लिए 300 बैड का हॉस्पिटल होना जरूरी है। वहां हमें बताया है कि वहां 250 बैड का हॉस्पिटल है। कुल मिलाकर हमें 300 बैड का हॉस्पिटल मिल जाएगा। कुलगुरु ने कहा कि अस्पताल तो हमें मिल रहा है, इसलिए उसकी लागत नहीं है, लेकिन कॉलेज बनाने के लिए कम से कम 350 से 400 करोड़ रुपए की लागत इनिशयली आएगी। उम्मीद है कि इस महीने तक इसका कुछ निर्णय हो सकता है। आवेदन भी प्रस्तुत कर दिया गया कुलगुरु प्रोफेसर राकेश सिंघई ने बताया कि विश्वविद्यालय ने एक अभिनव प्रस्ताव भी रखा है। जब तक झाबुआ में मेडिकल कॉलेज का नया परिसर तैयार नहीं हो जाता, तब तक राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (RGPV) के इंजीनियरिंग कॉलेज में मेडिकल कॉलेज चलाने की अनुमति मांगी गई है। विश्वविद्यालय ने नेशनल मेडिकल काउंसिल (NMC) में इस अस्थायी व्यवस्था के लिए आवेदन भी प्रस्तुत कर दिया है। यह कदम यह सुनिश्चित करेगा कि कॉलेज की स्थापना प्रक्रिया में कोई देरी न हो और शैक्षणिक सत्र समय पर शुरू हो सके। 350 से 400 करोड़ रुपए का निवेश आवश्यक होगा इस परियोजना की कुल लागत का अनुमान लगाया गया है। कुलगुरु ने स्पष्ट किया कि अस्पताल के अधिग्रहण से उसकी लागत अलग होगी, क्योंकि यह शासन द्वारा सौंपा जा रहा है। हालांकि, मेडिकल कॉलेज के भवन और अन्य आवश्यक बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए प्रारंभिक तौर पर 350 से 400 करोड़ रुपए का निवेश आवश्यक होगा। यह राशि कॉलेज के आधुनिक कक्षाओं, प्रयोगशालाओं, पुस्तकालय और प्रशासनिक खंड के निर्माण पर खर्च की जाएगी।  

प्रदेश के 10 लाख दिव्यांगजनों के लिए नई नीति: मोहन यादव सरकार का ऐतिहासिक कदम, एक प्लेटफार्म पर काम

भोपाल मोहन यादव सरकार प्रदेश के दस लाख दिव्यांगजनों के लिए पहली बार नीति बनाएगी। इस नीति के लागू होने के बाद सारे विभाग दिव्यांगजनों को लेकर एक प्लेटफार्म पर काम कर सकेंगे। यहां अलग-अलग विभागों के द्वारा अलग-अलग स्कीम के जरिए दिव्यांगजन को लाभ दिया जाता है।  आयुक्त दिव्यांगजन डॉ अजय खेमरिया ने इस नीति को बनाए जाने को लेकर  चर्चा की। उन्होंने बताया कि प्रदेश में पहली बार दिव्यांगजनों के लिए कोई नीति बनाने का काम राज्य सरकार करने जा रही है। अभी अलग-अलग विभाग अलग-अलग स्कीम चलाते हैं। अभी कोई नीति नहीं होने से दिव्यांगजन के लिए समान काम नहीं हो पाता है। अभी दिव्यांगजनों के समग्र विकास के लिए जो काम हो रहे हैं, उसमें एकरूपता की कमी है, इसलिए दिव्यांगजन के लिए नीति बनाने की जरूरत है।खेमरिया ने कहा कि जिस तरह से एमपी के बच्चों के लिए बाल नीति है, महिला नीति है, उसी तरह की दिव्यांगजन नीति भी होना चाहिए। एक्सपर्ट्स, दिव्यांगजनों से करेंगे बात डॉ खेमरिया ने बताया कि नीति तैयार करने के लिए स्टेक होल्डर्स, एक्सपर्ट, हितग्राही से बात करेंगे। साथ ही विदेशों में जाकर वहां की स्थिति देखकर आने वाले, विश्वविद्यालयों में शोध करने वालों से बातचीत कर नीति बनाएंगे। एमपी के बाहर के विषय विशेषज्ञों से भी बात की जाएगी। ग्रामीण, शहरी क्षेत्रों के साथ आदिवासी बेल्ट के लोगों से भी बात करेंगे। अलीराजपुर, झाबुआ, बड़वानी जैसे इलाकों में सरकार की योजनाओं की डिलीवरी में किस तरह की दिक्कत होती है, इसकी भी जानकारी ली जाएगी। वहां के दिव्यांग जन से बात की जाएगी। अलग-अलग विभाग के अलग-अलग नार्म्स दिव्यांगजन आयुक्त खेमरिया ने कहा कि अभी दिव्यांगों के लिए सामाजिक न्याय, एमएसएमई, एनआरएलएम, महिला बाल विकास विभाग समेत अन्य विभागों के अलग-अलग काम हैं। अगले छह माह में इसका ड्राफ्ट बना लिया जाएगा और कैबिनेट से मंजूरी दिलाकर 2026 में ही इसे लागू कराया जाएगा। फरवरी में सीएम को लिखा था पत्र डॉ खेमरिया ने कहा कि नीति बनाने को लेकर फरवरी 2026 में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव से पत्र लिखा था जिसके लिए मुख्यमंत्री ने अब अधिकृत कर दिया है। इसके अलावा सामाजिक न्याय और दिव्यांगजन विभाग के मंत्री नारायण सिंह कुशवाह को भी पत्र लिखा गया था। इसलिए अब दिव्यांग जन बनाने के लिए सुझाव लेने और प्रस्ताव मंगाने का काम किया जाएगा। इसके लिए ऐसे लोगों से भी संपर्क किया जाएगा जो दिव्यांगजन के लिए काम करते हैं। जो दिव्यांग हैं, उनसे भी सुझाव लिए जाएंगे ताकि उनके जीवन स्तर में सुधार के लिए नीति में वास्तविक प्रयास किए जा सकें। इसके पहले कोई नीति नहीं है। अलग-अलग विभागों ने अपने हिसाब से दिव्यांगजन के लिए अलग रोस्टर, प्रावधान तय कर रखें हैं लेकिन विभागों की दिव्यांगजन को लेकर कोई नीति नहीं है। अब मुख्यमंत्री की अनुमति के बाद इसके लिए नई नीति बनाकर उसे सभी विभागों में लागू कराया जाएगा। नीति के लिए इनसे भी चर्चा करने के निर्देश डॉ अजय खेमरिया को 13 अप्रैल 2026 को सामाजिक न्याय और दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग की ओर से एमपी में दिव्यांगजन अधिनियम 2016 राज्य निधि, निराश्रित निधि, के साथ योजनाओं, पुनर्वास और कल्याण से संबंधित सभी पहलुओं को शामिल करते हुए दिव्यांगजन नीति का प्रस्ताव तैयार करने के लिए कहा गया है। शासन की ओर से कहा गया है कि विभिन्न विभागों, शासकीय और अर्द्धशासकीय संस्थाओं, एक्सपर्ट्स, संबंधित सिविल सोसायटी के सदस्यों, प्रख्यात खिलाड़ियों और सांस्कृतिक प्रतिभाओं से चर्चा कर नीति के मसौदे के निर्माण और उसे अंतिम रूप देने का काम किया जाए। तेलंगाना, त्रिपुरा समेत अन्य राज्यों की नीति का करेंगे अध्ययन     इस नई नीति को अंतिम रूप देने से पहले तेलंगाना और त्रिपुरा समेत अन्य राज्यों की व्यवस्थाओं का अध्ययन किया जाएगा।     अभी शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक न्याय विभाग अपनी-अपनी योजनाओं में दिव्यांगजनों के लिए अलग-अलग कार्यक्रम संचालित कर रहे हैं।     प्रदेश में 2011 की जनगणना और यूनिक डिसेबिलिटी आईडी (UDID) के आधार पर करीब 10 लाख दिव्यांगजन दर्ज हैं।     आगामी जनगणना में दिव्यांगों की संख्या में बड़ा इजाफा हो सकता है, क्योंकि पहले जहां सात श्रेणियों के आधार पर आंकड़े जुटाए गए थे, वहीं अब 21 प्रकार की दिव्यांगताओं को शामिल किया जाएगा।     नीति में यह भी प्रस्ताव रहेगा कि 18 वर्ष से अधिक आयु के मानसिक रूप से दिव्यांग व्यक्तियों के लिए संभाग स्तर पर 100 बिस्तरों वाले विशेष आश्रय गृह स्थापित किए जाएं।  

सरकारी जमीन को लेकर श्योपुर में हिंसा: दो गुटों में भिड़ंत, कुल्हाड़ी से वार में 24 जख्मी

श्योपुर/वीरपुर. सोमवार-मंगलवार की दरमियानी रात वीरपुर थाना क्षेत्र के नेहलापुरा गांव में सरकारी जमीन पर कब्जे को लेकर दो गुटों के बीच खूनी संघर्ष हो गया। रावत और जाटव समाज के लोगों के बीच शुरू हुआ विवाद देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गया। घटना के दौरान दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर जमकर लाठी-डंडे और कुल्हाड़ी से हमला किया। इतना ही नहीं, पथराव भी हुआ जिससे हालात और बिगड़ गए। इस हिंसा में कुल 24 लोग घायल हो गए, जिनमें महिला और पुरुष दोनों शामिल हैं। कुछ घायलों की हालत गंभीर बताई जा रही है, जिन्हें जिला अस्पताल रेफर किया गया है। लंबे समय से चल रहा था विवाद जानकारी के अनुसार, नेहलापुरा गांव में सरकारी जमीन पर कब्जे को लेकर दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था। इसी विवाद ने सोमवार रात उग्र रूप ले लिया और दोनों गुट आमने-सामने आ गए। प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी जमीनों से अतिक्रमण हटाना प्रशासन की जिम्मेदारी है, लेकिन संबंधित अधिकारी समय रहते कार्रवाई नहीं करते। हल्का पटवारी से लेकर तहसील स्तर तक ढिलाई के कारण इलाके में सरकारी जमीनों पर कब्जे बढ़ते जा रहे हैं। वीरपुर क्षेत्र में कई कीमती जमीनें दबंगों के कब्जे में होने के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। पुलिस जांच में जुटी मामले में वीरपुर पुलिस कार्रवाई कर रही है और पूरे घटनाक्रम की जांच जारी है। अधिकारियों का कहना है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे। इस संबंध में महाराज सिंह बघेल ने बताया कि जमीनी विवाद को लेकर दो गुटों में संघर्ष हुआ है। इसमें कई लोग घायल हुए हैं, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस मामले में आगे की कार्रवाई कर रही है।

विकास आयुक्त मती अमृत राज के प्रयासों से मिली वैश्विक पहचान

भोपाल मध्यप्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक और हस्तशिल्प विरासत 'बाग प्रिंट' ने फ्रांस की राजधानी पेरिस में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनी में सफलता के नए आयाम स्थापित किए हैं। प्रदेश की पारंपरिक कलाओं को वैश्विक बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में यह एक प्रभावी कदम है। इस अंतर्राष्ट्रीय उपलब्धि में विकास आयुक्त (हस्तशिल्प) मती अमृत राज के दूरदर्शी नेतृत्व और विशेष प्रयासों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उनके मार्गदर्शन में हस्तशिल्पियों को वैश्विक मंच प्रदान करने के उद्देश्य से एक सुदृढ़ कार्ययोजना तैयार की गई है, जिससे मध्य प्रदेश की कला को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल रही है। मती अमृत राज के प्रयासों से ही स्थानीय शिल्पकारों को आधुनिक वैश्विक मांग के अनुरूप तकनीकी सहयोग और विपणन के अवसर प्राप्त हो रहे हैं, जिससे बाग प्रिंट जैसी दुर्लभ कला का पुनरुद्धार हुआ है। नेशनल अवार्डी शिल्पकार मोहम्मद बिलाल खत्री पेरिस में आयोजित यूरोप के सबसे प्रतिष्ठित मेले 'फ़ोयर डे पेरिस' में बिलाल खत्री बाग प्रिंट का लाइव डेमोंस्ट्रेशन दे रहे हैं। भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय द्वारा इन्हें चयनित किया गया है। उनके द्वारा प्राकृतिक रंगों और लकड़ी के ठप्पों के माध्यम से कपड़े पर उकेरी जा रही कलाकृतियां अंतरराष्ट्रीय दर्शकों और विशेषज्ञों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। मेले के दौरान भारतीय दूतावास की थर्ड सेक्रेटरी सु वर्धा खान और प्रथम सचिव  माधव आर. सल्फुले ने भारतीय पवेलियन का अवलोकन किया। उन्होंने बिलाल खत्री के कौशल की सराहना करते हुए स्वयं ब्लॉक प्रिंटिंग का अनुभव लिया। उन्होंने इसे भारतीय संस्कृति का अनमोल हिस्सा बताते हुए मध्यप्रदेश के शिल्पकारों के समर्पण की प्रशंसा की।  

सरकारी जमीन को लेकर दो गुटों में हिंसा, श्योपुर में 24 घायल, 8 की हालत गंभीर

 श्योपुर /वीरपुर  सोमवार-मंगलवार की दरमियानी रात वीरपुर थाना क्षेत्र के नेहलापुरा गांव में सरकारी जमीन पर कब्जे को लेकर दो गुटों के बीच खूनी संघर्ष हो गया। रावत और जाटव समाज के लोगों के बीच शुरू हुआ विवाद देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गया। लाठी-डंडे और कुल्हाड़ी से हमला घटना के दौरान दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर जमकर लाठी-डंडे और कुल्हाड़ी से हमला किया। इतना ही नहीं, पथराव भी हुआ जिससे हालात और बिगड़ गए। इस हिंसा में कुल 24 लोग घायल हो गए, जिनमें महिला और पुरुष दोनों शामिल हैं। कुछ घायलों की हालत गंभीर बताई जा रही है, जिन्हें जिला अस्पताल रेफर किया गया है। लंबे समय से चल रहा था विवाद जानकारी के अनुसार, नेहलापुरा गांव में सरकारी जमीन पर कब्जे को लेकर दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था। इसी विवाद ने सोमवार रात उग्र रूप ले लिया और दोनों गुट आमने-सामने आ गए। प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी जमीनों से अतिक्रमण हटाना प्रशासन की जिम्मेदारी है, लेकिन संबंधित अधिकारी समय रहते कार्रवाई नहीं करते। हल्का पटवारी से लेकर तहसील स्तर तक ढिलाई के कारण इलाके में सरकारी जमीनों पर कब्जे बढ़ते जा रहे हैं। वीरपुर क्षेत्र में कई कीमती जमीनें दबंगों के कब्जे में होने के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। पुलिस जांच में जुटी मामले में वीरपुर पुलिस कार्रवाई कर रही है और पूरे घटनाक्रम की जांच जारी है। अधिकारियों का कहना है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे। अधिकारी का बयान इस संबंध में महाराज सिंह बघेल ने बताया कि जमीनी विवाद को लेकर दो गुटों में संघर्ष हुआ है। इसमें कई लोग घायल हुए हैं, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस मामले में आगे की कार्रवाई कर रही है।  

जांच से पहले कार्रवाई! जबलपुर में हादसे वाला क्रूज तोड़ने पर उठे गंभीर सवाल

जबलपुर. बरगी बांध हादसे की जांच अभी जारी है, लेकिन हादसे में शामिल क्रूज को तोड़े जाने से नया विवाद खड़ा हो गया है। लापता पर्यटकों की की तलाश के बीच दुबे क्रूज को तट पर लाने के बाद शनिवार को टुकड़े-टुकड़े कर दिया गया था. लोगों और मृतकों के स्वजन में गुस्सा बढ़ गया। उनका कहना है कि इस कदम से महत्वपूर्ण सबूत नष्ट हो सकते हैं, जिससे हादसे की असली वजह सामने आना मुश्किल हो जाएगा। एसपी बोले- फंसे शवों की तलाश के लिए तोड़ा था क्रूज अधिकारियों के बयान अलग-अलग सामने आए हैं। पुलिस अधीक्षक ने कहा कि क्रूज को अंदर फंसे शवों की तलाश के लिए तोड़ा गया, जबकि पर्यटन मंत्री ने इसे निकालने के दौरान हुई क्षति बताया। इससे पूरे मामले में पारदर्शिता पर सवाल उठे हैं। हवा और लहरों से टकराकर डूबने से सुरक्षा पर उठे सवाल बरगी बांध में डूबा कू्ज फाइबर रीइन्फोर्स्ड प्लास्टिक (एफआरपी) का था। क्रूज का दो वर्ष जुलाई, 2024 में पूर्ण रखरखाव किया गया था। इस क्रूज को वर्तमान में देश में प्रचलित क्रूजों में सबसे सुरक्षित माना जाता है। इसके बावजूद तेज हवा और पानी की लहरों के भार को वह सहन नहीं कर सका। संदिग्ध और जल्दबाजी भरा कदम बताया हादसे में बचे वकील रोशन आनंद समेत अन्य पर्यटकों ने भी क्रूज को समय से पहले तोड़े जाने को संदिग्ध और जल्दबाजी भरा कदम बताया। बढ़ते विरोध के बीच राज्य सरकार ने उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। इस दौरान क्रूज में 40 से अधिक व्यक्ति सवार थे चंद मिनटों के अंदर डूब गया। जबलपुर के पास बरगी बांध में हुई इस घटना ने क्रूज की सुरक्षा को लेकर नए सवाल खड़ कर दिए है। गुरुवार को घटना के समय क्रूज बरगी बांध में दूसरी बार राइड पर था। इस दौरान क्रूज में 40 से अधिक व्यक्ति सवार थे। तभी लहरों के बीच वह डूब गया था। 19 वर्ष से लगातार चल रहा था क्रूज का संचालन बरगी बांध से होता है। लेकिन क्रूज क्रय करने की प्रक्रिया और संचालन को लेकर व्यवस्था पर्यटन विभाग मुख्यालय अपने स्तर पर करता है। जिस क्रूज में हादसा हुआ इसे मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग ने लिया था, 19 वर्ष से लगातार चल रहा था। निर्माता कंपनी के सौ से ज्यादा क्रूज क्रूज की 80 यात्री क्षमता थी। लोअर डेक एयर कंडीशनर था, जिसमें 30 यात्री सवार हो सकते थे। अपर डेक (खुला) की क्षमता 50 यात्रियों की थी। एमपीटी के कमांडर राजेंद्र निगम ने बताया कि यह क्रूज हैदराबाद बोट क्लब से खरीदा गया था। कंपनी के सौ से ज्यादा क्रूज उपलब्ध करा चुकी संबंधित कंपनी के सौ से ज्यादा क्रूज उपलब्ध करा चुकी है। यह क्रूज कैटामारन हाल तकनीक से बना था, जिसमें दो बोट को जोड़कर एक बड़ी बोट बनाई जाती है। यह क्रूज की वर्तमान में देश में प्रचलित आधुनिक तकनीक में से एक बताई जा रही है। जंग लगने का जोखिम नहीं हाेता दो बोट को जोड़कर बनाए जाने वाले शिप का संतुलन पानी में बेहतर होता है। इसे अपेक्षाकृत सुरक्षित माना जाता है। फाइबर रिनइनफोर्स प्लास्टिक सामग्री के उपयेाग के कारण इसमें जंग लगने का जोखिम नहीं हाेता है। हवा से पलटा, लहर से क्षतिग्रस्त हुआ, पानी भरा और डूबा प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार जब क्रूज राइड पर निकला था तो मौसम सामान्य था। जब वह सफर पर आधी दूरी में पहुंचा तभी हवा तेज हो गई। क्रू केप्टन ने क्रूज को मोड़कर वापस लाना चाहा, लेकिन तभी तेज हवा और बांध के पानी में उठती लहरों से क्रूज डगमगाने लगा। लहरे लगातार क्रूज को ढकेल रही थी तेज लहरों के कारण क्रूज का एक भाग क्षतिग्रस्त हुआ। जहाज को आगे बढ़ाने और उसे घुमाने वाले प्रापेलर्स को नियंत्रित करना मुश्किल हो गया। आशंका है कि पानी की एक लहर ने क्रूज को नीचे की ओर खींचा और दूसरी लहर से उसे उफर उठाया। इसी दौरान वह पलटा और डूब गया। अंदर पानी फेंकने के लिए मशीन थी क्रूज में अंदर पानी फेंकने के लिए मशीन थी, लेकिन घटनाक्रम तेजी से घटा। क्रूज में मौसम की जानकारी देने का कोई सिस्टम नहीं था। संचालन से संबंधित जिम्मेदार मौसम विभाग की जारी होने वाली रिपोर्ट और स्थानीय मौसम की स्थितियों को देखकर क्रूज के संचालन का निर्णय करते थे।

दलहनों में आत्मनिर्भरता मिशन के लिए 2442.04 करोड़ रूपये की स्वीकृति

मंत्रि-परिषद की बैठक लोक कल्याणकारी और विकास कार्यों के लिए 38 हजार 555 करोड़ रूपये की स्वीकृति व्यापारियों के कल्याण के लिए राज्य व्यापारी कल्याण बोर्ड के गठन का निर्णय "दलहनों में आत्मनिर्भरता मिशन" के लिए 2442.04 करोड़ रूपये की स्वीकृति सड़क निर्माण और आवास अनुरक्षण के लिए 32 हजार 405 करोड़ रूपये की स्वीकृति इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफेक्चरिंग क्लस्टर्स और सूचना प्रौ‌द्योगिकी संबंधी कार्यों के लिए 1295.52 करोड़ रूपये की स्वीकृति आंगनवाड़ी केन्द्रों और समेकित बाल संरक्षण मिशन वात्सल्य के लिए 2,412 करोड़ रूपये की स्वीकृति मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई मंत्रि-परिषद की बैठक भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रालय में हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में मध्यप्रदेश के सर्वांगीण विकास और जन-कल्याण के लिए विभिन्न विभागों की 38 हजार 555 करोड़ रुपये की महत्वपूर्ण वित्तीय स्वीकृतियां प्रदान की गई। मंत्रि-परिषद ने प्रदेश के व्यापारियों के कल्याण के लिए राज्य व्यापारी कल्याण बोर्ड के गठन का ऐतिहासिक निर्णय भी लिया है। यह निर्णय प्रदेश के बुनियादी ढांचे, कृषि आत्मनिर्भरता और सामाजिक सुरक्षा को नई ऊंचाई देने के उद्देश्य से लिए गए हैं। बैठक के प्रमुख निर्णयों में 16वें वित्त आयोग की अवधि (2026-2031) के लिए सड़क निर्माण, ग्रामीण मार्गों के उन्नयन और शासकीय आवासों के रखरखाव के लिए सर्वाधिक 32 हजार 405 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। कृषि क्षेत्र को मजबूती देने के लिए "दलहनों में आत्मनिर्भरता मिशन" को मंजूरी दी गई, इसमें आगामी 5 वर्षों में 2,442.04 करोड़ रुपये व्यय कर दलहन उत्पादन को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त महिला एवं बाल विकास के अंतर्गत नवीन आंगनवाड़ी केंद्रों के निर्माण और 'मिशन वात्सल्य' के सुचारू संचालन के लिए 2,412 करोड़ रुपये तथा आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए 1,295 करोड़ 52 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के लिए मंत्रि-परिषद ने 'राज्य व्यापारी कल्याण बोर्ड' के गठन का भी महत्वपूर्ण निर्णय लिया है, जो व्यापारियों की समस्याओं के त्वरित निराकरण और सरकार के साथ सीधे संवाद का सशक्त माध्यम बनेगा। यह पहल प्रदेश की अर्थव्यवस्था को गति देने और समावेशी विकास सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम हैं। "दलहनों में आत्मनिर्भरता मिशन" के लिए 2442.04 करोड़ रूपये की स्वीकृति मंत्रि-परिषद ने मध्यप्रदेश में "दलहनों में आत्मनिर्भरता मिशन" की आगामी 5 वर्षों 01 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक निरंतरता के लिए 2442 करोड़ 04 लाख रूपये की स्वीकृति दी। योजना के क्रियान्वयन के संबंध में आवश्यक नियम/दिशा-निर्देश जारी करने के लिए किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग को अधिकृत किया गया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा दलहन फसलों में आत्मनिर्भर बनने के लिए राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं पोषण मिशन में से दलहन फसल को पृथक कर "दलहनों में आत्मनिर्भरता मिशन" 11 अक्टूबर 2025 को प्रारंभ किया गया। भारत सरकार ने केन्द्र प्रायोजित योजना के रूप में नए मिशन "दलहनों में आत्मनिर्भरता मिशन" को मंजूरी दी है। मिशन का उददेश्य दलहनी फसलों के उत्पादन वृद्धि एवं क्षेत्रफल का विस्तार करना, किसानों के लिए जलवायु-अनुकूल उन्नत बीजों का उत्पादन एवं उपलब्धता बढ़ाना, कटाई के बाद प्रसंस्करण, भंडारण एवं प्रबंधन तकनीकों को प्रोत्साहित करना है। योजना में प्रदेश में "दलहनों में आत्मनिर्भरता मिशन" क्रियान्वयन से प्रजनक बीज, बीज उत्पादन, बीज वितरण, प्रदर्शन और ट्रेनिंग होगी। साथ ही पोस्ट हार्वेस्ट इंफ्रास्ट्रक्चर (प्रसंस्करण एवं पैकेजिंग इकाई) इकाई विकसित होने से कृषक लाभान्वित होगें तथा दलहनी फसलों के क्षेत्रफल में विस्तार को प्रोत्साहन मिलेगा तथा उत्पादन में वृद्धि होगी। सड़क निर्माण और आवास अनुरक्षण के लिए 32 हजार 405 करोड़ रूपये की स्वीकृति मंत्रि-परिषद द्वारा लोक निर्माण विभाग के अंतर्गत सड़क निर्माण और आवास अनुरक्षण के लिए 32,405 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी है। स्वीकृति अनुसार सड़क एवं सेतु के संधारण से संबंधित योजना को 16वें वित्त आयोग की अवधि 1 अप्रैल, 2026 से 31 मार्च, 2031 तक निरंतर संचालन के लिए 6 हजार 150 करोड़ रूपये का अनुमोदन दिया गया है। इसी तरह 'एफ' टाईप एवं उससे नीचे की श्रेणी के शासकीय आवासों के अनुरक्षण के लिए 1 हजार 345 करोड़ रूपये की राशि स्वीकृत की गई है। ग्रामीण सड़कों एवं अन्य जिला मार्गों का निर्माण और उन्नयन के लिए 24 हजार 300 करोड़ रूपये का अनुमोदन सहित सड़क सुरक्षा से संबंधित कार्यों से जुड़ी योजना की 16वें वित्त आयोग की अवधि 1 अप्रैल, 2026 से 31 मार्च, 2031 की निरंतरता के लिए 610 करोड़ रूपये स्वीकृत किये गए। इलेक्ट्रॅानिक्स मैन्युफेक्चरिंग क्लस्टर्स और सूचना प्रौ‌द्योगिकी संबंधी कार्य के लिए 1295 करोड़ 52 लाख रूपये की स्वीकृति मंत्रि-परिषद द्वारा विज्ञान एवं प्रौ‌द्योगिकी विभाग के अंतर्गत इलेक्ट्रॅानिक्स मैन्युफेक्चरिंग क्लस्टर्स और सूचना प्रौ‌द्योगिकी संबंधी कार्य से संबंधित योजनाओं की निरंतरता और संचालन के लिए 1295 करोड़ 52 लाख रूपये की स्वीकृति प्रदान की गई। स्वीकृति अनुसार आरसीबीसी , डीईजीएस और एनआईसी आदि केन्द्रों के आगामी पांच वर्षों 1 मार्च 2026 से 31 मार्च 2031 तक संचालन के लिए 244 करोड़ 20 लाख रूपये की स्वीकृति दी गई है। ई-दक्ष प्रशिक्षण कार्यक्रम अंतर्गत राज्य के सभी शासकीय अधिकारियों और कर्मचारियों को सूचना प्रौद्योगिकी एवं ई-गवर्नेंस संबंधित प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है। मंत्रि-परिषद द्वारा 16वें वित्त आयोग की अवधि के लिए प्रदेश में इलेक्ट्रानिक्स मैन्युफेक्चरिंग क्लस्टर्स की स्थापना (EMC 2.0) के लिए 225 करोड़ 32 लाख रूपये की स्वीकृति दी गयी। इसके अंतर्गत भोपाल के बांदीखेड़ी में 209.47 एकड़ क्षेत्र में क्लस्टर की स्थापना की जायेगी। साथ ही सूचना प्रौ‌द्योगिकी निवेश प्रोत्साहन संबंधी योजना की निरंतरता के लिए 300 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी गई। राज्य में सूचना प्रौद्योगिकी आधारित उद्योगों की स्थापना एवं विकास को बढ़ावा देने के लिए निजी क्षेत्र की सहभागिता सुनिश्चित करना तथा राज्य को आईटी एवं आईटीईएस सेवाओं के लिए आकर्षक गंत्वय के रूप में स्थापित करने के लिए पूंजीगत अनुदान कर संबंधी रियायतें, प्रशिक्षण एवं मानव संसाधन विकास तथा आईटी पार्क/ईएमसी (इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफेक्चरिंग क्लस्टर्स) की स्थापना को बढ़ावा दिये जाने संबंधी कार्य किया जायेगा। इसका संचालन एमपीएसईडीसी के माध्यम से होगा। मंत्रि-परिषद द्वारा प्रदेश में स्टेट वाईड एरिया नेटवर्क की स्थापना (स्वान) और संचालन संबंधी योजना की 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक निरंतरता के लिए 526 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी गई है। इस योजना का उद्देश्य राज्य, जिला और ब्लॉक स्तर पर सभी शासकीय कार्यालयों को आपस में जोड़कर सुगम … Read more

अंतिम छोर तक पानी पहुंचने से बदलेगी तस्वीर

भोपाल अनूपपुर जिले का आदिवासी बहुल विकासखंड पुष्पराजगढ़ अब कृषि विकास की नई दिशा की ओर अग्रसर है। ‘‘जल गंगा संवर्धन अभियान’’ के अंतर्गत झिलमिल जलाशय की नहरों के निर्माण, सुदृढ़ीकरण एवं विस्तार कार्य से यहाँ किसानों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आयेगा। वर्षों से इस क्षेत्र के किसान वर्षा आधारित खेती या सीमित जल स्त्रोतों पर निर्भर थे। नहर प्रणाली की जर्जर स्थिति के कारण जल अंतिम छोर तक नहीं पहुँच पाता था, जिससे सिंचाई में बाधा आती थी। अब जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत झिलमिल जलाशय के मुख्य नहर तथा माइनर नहर के निर्माण एवं सुदृढ़ीकरण का कार्य तेजी से प्रगति पर है। करीब 19 करोड़ 60 लाख रुपये की लागत से यह कार्य पूर्ण होने पर 5.04 एमसीएम क्षमता वाले जलाशय का जल अंतिम छोर के खेतों तक पहुँच सकेगा। इससे सिंचाई व्यवस्था में स्थायी सुधार होगा। लगभग 905 हेक्टेयर सिंचाई क्षमता को सुदृढ़ बनाया जा रहा है। करीब 11 किलोमीटर लंबा नहर तंत्र विकसित किया जा रहा है। इस योजना से सीधे तौर पर बीजापुरी, पीपाटोला, कछरा टोला और झिलमिल गाँवों के लगभग एक हजार किसान परिवार लाभान्वित होंगे। उनकी आय में वृद्धि और आजीविका में स्थिरता आयेगी। अनूपपुर कलेक्टर श्री हर्षल पंचोली परियोजना की नियमित निगरानी कर रहे हैं। उन्होंने जल संसाधन विभाग को निर्देश दिए हैं कि कार्य गुणवत्ता के साथ समयबद्ध रूप से पूर्ण किया जाए। स्थानीय किसानों में इस परियोजना को लेकर उत्साह देखा जा रहा है। किसान जगत सिंह, ठाकुर सिंह और कमलेश्वर सिंह सहित कई कृषकों का कहना है कि नहरों के सुधार से अब अंतिम खेत तक पानी पहुँचने की समस्या समाप्त हो जाएगी, जिससे वे दोनों मौसमों में बेहतर खेती कर सकेंगे। पुष्पराजगढ़ में झिलमिल जलाशय से प्रवाहित यह जल न केवल खेतों को सिंचित करेगा, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई ऊर्जा प्रदान करेगा। ‘‘जल गंगा संवर्धन अभियान’’ के तहत यह पहल भविष्य में अन्य क्षेत्रों के लिए भी एक मॉडल साबित हो सकती है।