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अनाथ दुल्हन का टूटा सपना, शादी के मंडप से लौट गई बारात

 खुरई  खुरई में बेगमगंज से आई बारात दहेज की मांग पूरी नहीं होने के कारण वापस लौट गई। वरमाला के बाद तीन बहनों में सबसे बड़ी निशा रात भर फेरों का इंतजार करती रही, लेकिन वर पक्ष मारपीट कर भाग गया था। अब निशा बंसल इंसाफ चाहती है, उसे उस लड़के से शादी नहीं करनी है। वरमाला के बाद डीजे की धुन के बीच शुरू हुआ विवाद पूरा मामला सागर जिले की खुरई तहसील का है। जहां लंबी तैयारियों के बाद शहरी थाना क्षेत्र के पॉलिटेक्निक कॉलेज रोड स्थित भगवान दास चंदेल वार्ड में एक परिवार में शादी की शहनाई सुनाई दे रही थी। वरमाला की रस्म पूरी होने के बाद शादी की अन्य तैयारियां चल रही थीं। डीजे पर लोग नाच रहे थे और विवाह की मुख्य रस्म शुरू होने वाली थी। इसी दौरान विवाद की स्थिति निर्मित हो गई, विवाद में दूल्हा तक पगड़ी उतारकर झगड़े में शामिल हो गया। आरोप है कि दहेज की मांग को लेकर दोनों पक्षों में विवाद शुरू हुआ था। वर पक्ष ने वधू पक्ष के साथ मारपीट भी की। इसके बाद वर पक्ष बिना शादी पूरी किए ही बारात लेकर वापस लौट गया। रात भर फोन लगाते रहे परिजन, सुबह थाने पहुंचा मामला हातों में मेहंदी लगाए दुल्हन पूरी रात इंतजार करती रही कि उसके फेरे होंगे, शादी होगी और विदाई के बाद वह ससुराल जाएगी। सारी तैयारियां धरी की धरी रह गईं और दहेज के लोभियों ने धन को प्राथमिकता दी और बारात लेकर लौट गए। दुल्हन के स्वजनों ने पूरी रात फोन के जरिए दूल्हे और उसके परिवार से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन किसी ने भी फोन नहीं उठाया। परिजनों का आरोप है कि दहेज के कारण ही बारात लौटकर चली गई। इस मामले में लड़की पक्ष ने शनिवार को खुरई शहरी थाने पहुंचकर कार्रवाई की मांग की है। बिन मां-बाप की बेटी अब मांग रही है इंसाफ रायसेन जिले के बेगमगंज ग्राम गोपालपुरा से दूल्हा बना सुरेंद्र बंसल दहेज के चक्कर में विवाद करने लगा और मारपीट करना शुरू कर दी। दुल्हन निशा बंसल का कहना है कि उसके माता-पिता नहीं हैं। वह तीन बहनों में सबसे बड़ी है। दादी और चाचा हम तीनों बहनों का पालन-पोषण कर रहे हैं। शादी पक्की होने के बाद अभी तक मेरी लड़के से बात नहीं हुई है। लड़के पक्ष वालों ने दहेज की मांग को लेकर जमकर विवाद किया। यहां तक कि मारपीट भी की। अब वह उस लड़के से शादी नहीं करना चाहती है, अब केवल इंसाफ चाहिए। दो लाख रुपये नकद और बाइक की अड़ी लड़की के चाचा नारायण बंसल ने कहा कि लड़के पक्ष के लोग दो लाख रुपये नकद और एक बाइक की मांग कर रहे थे। हम लोगों ने कहा कि लड़की के माता-पिता नहीं हैं, फिर भी हम लोगों ने उचित दहेज दिया है। इसके बाद भी वे मानने  दूल्हे, पिता और भाई पर दर्ज हो रहा है दहेज एक्ट का मामला खुरई शहरी थाना प्रभारी योगेंद्र सिंह दांगी ने बताया कि लड़की पक्ष की रिपोर्ट पर दूल्हा, दूल्हे के पिता और दूल्हे के भाई पर दहेज एक्ट के तहत मामला दर्ज किया जा रहा है।  

केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री सेठ एवं मंत्री सारंग के साथ हजारों युवाओं ने किया योग

भोपाल अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की पूर्व सुबह पर राजधानी भोपाल में आयोजित योग कार्यक्रमों में उत्साह और जनभागीदारी का अद्भुत संगम देखने को मिला। टीटी नगर स्टेडियम में आयोजित योग कार्यक्रम में केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ एवं सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास सारंग ने सहभागिता कर योगाभ्यास किया। इस अवसर पर दोनों नेताओं ने योग को स्वस्थ, संतुलित और सकारात्मक जीवन का आधार बताते हुए नागरिकों, विशेषकर युवाओं से नियमित योग अपनाने का आह्वान किया। मंत्री सारंग बड़ा तालाब स्थित बोट क्लब में आयोजित योग अभ्यास कार्यक्रम में शामिल हुए। प्राकृतिक वातावरण में आयोजित इस योगाभ्यास में भोपाल के हजारों युवा, खिलाड़ी, खेल प्रेमी एवं नागरिक बड़ी संख्या में शामिल हुए और सामूहिक योगाभ्यास कर स्वस्थ जीवन का संकल्प लिया। मंत्री सारंग ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रयासों से योग को वैश्विक पहचान मिली है और आज पूरी दुनिया भारतीय योग परंपरा को अपना रही है। इस योग दिवस पर 21 जून को विश्व के 192 देश सामूहिक योग करेंगे, उन्होंने कहा कि योग केवल व्यायाम नहीं, बल्कि स्वस्थ शरीर, शांत मन और सशक्त जीवन का माध्यम है। युवाओं की उत्साहपूर्ण सहभागिता ने यह संदेश दिया कि नई पीढ़ी फिटनेस, स्वास्थ्य और योग के प्रति जागरूक है तथा विकसित भारत के निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्ध है। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के एक दिन पूर्व आयोजित इन कार्यक्रमों ने पूरे शहर को योगमय वातावरण से सराबोर कर दिया।  

सस्ते फर्नीचर का लालच देकर ठगी का प्रयास, कलेक्टर के नाम से बनाई गई फर्जी प्रोफाइल

 शिवपुरी साइबर ठगों ने मध्य प्रदेश में शिवपुरी जिले के कलेक्टर अर्पित वर्मा के नाम की फर्जी फेसबुक आईडी बनाकर ठगी का प्रयास किया। कलेक्टर की पहचान का उपयोग कर लोगों से संपर्क किया और उन्हें सस्ते दामों पर फर्नीचर व इलेक्ट्रॉनिक सामान बेचने का झांसा देकर रकम की मांग की गई। मामला संज्ञान में आने पर शिकायत दर्ज कराई गई है। क्या है पूरा मामला शिवपुरी जिले के लालगढ़ गांव निवासी प्रमोद रावत को "अर्पित वर्मा IAS" नाम की एक फेसबुक आईडी से मैसेंजर पर संदेश भेजा गया। संदेश में बताया गया कि कलेक्टर का एक मित्र संतोष कुमार सीआरपीएफ कैंप में अधिकारी है। उसका तबादला हो गया है और वह महज तीन महीने पुराना अपना घरेलू सामान बेहद कम कीमत पर बेच रहा है। इसके लिए वह जल्द ही उनसे संपर्क करेगा। कुछ समय बाद प्रमोद रावत को व्हाट्सएप पर संदेश मिला। उसमें बेड, लैपटॉप, रेफ्रिजरेटर, सोफा सहित अन्य घरेलू सामानों की तस्वीरें भेजी गईं। फर्नीचर और इस सारे सामान की कीमत मात्र 90 हजार रुपये बताई गई। इसे खरीदने के लिए अग्रिम राशि के भुगतान की मांग की गई। अन्य लोगों को भी इसी तरह के संदेश भेजे गए हैं जिला जनसंपर्क अधिकारी प्रियंका शर्मा ने बताया कि मामले की शिकायत साइबर सेल शाखा में दर्ज करा दी गई है। पुलिस विधिक कार्रवाई के लिए फर्जी आईडी संचालित करने वालों की पहचान कर रही है।

परीक्षा केंद्र पर लगे CCTV कैमरे चोरी, महू पुलिस ने दो आरोपियों को किया गिरफ्तार

महू  नीट परीक्षा का पेपर लीक होने के बाद रविवार को फिर से नीट की पुनर्परीक्षा आयोजित की जा रही है। परीक्षा के पूर्व महू के शासकीय भेरूलाल पाटीदार स्नातकोत्तर महाविद्यालय स्थित बनाए गए परीक्षा केंद्र से दो सीसीटीवी कैमरे चोरी होने की घटना हुई है। इस मामले में प्रकरण दर्ज कर दोनों आरोपितों को गिरफ्तार कर कैमरे बरामद कर लिए हैं। घटना ने परीक्षा केंद्रों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं, हालांकि प्रशासन ने परीक्षा के लिए कड़े सुरक्षा इंतजाम किए जाने का दावा किया है। कैमरे चोरी की घटना हुई कैद जानकारी के अनुसार डिग्री कॉलेज में दो परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। इसमें वाणिज्य संकाय भवन में बनाए केंद्र में 240 और प्रशासनिक भवन में बनाए गए केंद्र में 480 इस तरह कुल 720 अभ्यर्थी परीक्षा देंगे। सुरक्षा के लिए दोनों केंद्रों पर 18-18 कैमरे लगाए गए हैं।  

मध्यप्रदेश प्राकृतिक खेती अपनाने वाले राज्यों में है सबसे अव्वल : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि प्रकृति हमारी माता है और हम सब इसकी संतान। अपनी धरती माता को हमें रासायनिक उर्वरकों और हानिकारक कीटनाशकों से बचाना है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती का पहला लक्ष्य मिट्टी में जैविक गतिविधियों को बढ़ाना है। यह खेती मिट्टी में केंचुए और सूक्ष्म जीव पोषक तत्वों की उपलब्धता बढ़ाती है। इससे भूमि की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है। स्वस्थ मिट्टी ही समृद्ध कृषि की आधारशिला है। उन्होंने कहा कि किसान भाई अधिक से अधिक प्राकृतिक और जैविक खेती अपनाएं। इससे हमारी धरती माता की सेहत भी बनी रहेगी और इससे उपजे अनाज के पोषण से हम सब भी स्वस्थ रहेंगे। प्रधानमंत्री मोदी शनिवार को पश्चिम बंगाल से पीएम किसान सम्मान निधि के अंतरण समारोह को संबोधित कर रहे थे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा पश्चिम बंगाल के हुगली स्थित तारकेश्वर से देश के 9.40 करोड़ से अधिक किसानों को पीएम किसान सम्मान निधि की 23वीं किश्त के रूप में कुल 18 हज़ार 880 करोड़ रुपए पात्र किसानों के खातों में अंतरित किए। कार्यक्रम से प्रदेश के 81 लाख से अधिक किसानों को पीएम किसान सम्मान निधि के रूप में 1640 करोड़ रूपए प्राप्त हुए हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने पीएम किसान सम्मान निधि के सभी लाभार्थियों से अपील करते हुए कहा कि हमें धरती माता को बचाना है। हमें अपने बच्चों को बंजर जमीन नहीं देनी है। भारत सरकार खेत बचाओ अभियान चला रही है। हमें प्राकृतिक खेती अपनाकर रासायनिक खाद और कीटनाशकों का उपयोग कम से कम करना है। देशभर के किसान खेत बचाओ अभियान से जुड़ें, दूसरों को भी प्रेरित करें और खेतों की मिट्टी की जांच करवाएं। हम सभी मिलकर धरती मां की रक्षा करें। हम केमिकल से धरती मां को नहीं मार सकते हैं। हमें उसे बचाना ही होगा। केंद्र सरकार ने विकसित भारत @2047 का संकल्प लिया है, इसमें देशवासियों का सहयोग बेहद जरूरी है। प्रधानमंत्री मोदी ने देश के किसानों से कहा कि जिस तरह प्राकृतिक खेती से मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है, उसी तरह योग करने से हमारा तन-मन स्वस्थ रहता है। प्रधानमंत्री ने सभी को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस (21 जून) की अग्रिम बधाई देते हुए कहा कि सभी देशवासी योग करें, क्योंकि योग ही स्वस्थ जीवन की कुंजी है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की शुरूआत फरवरी 2019 में हुई थी। इसके तहत हर साल छह हजार रूपये, दो-दो हजार की तीन समान किश्तों में किसान भाईयों को दिए जाते हैं। अब तक प्रदेश के किसान भाईयों को 22 किश्तों में 33 हजार 800 करोड़ रूपये मिल चुके हैं। शनिवार को 23वीं किश्त का अंतरण किया गया। पश्चिम बंगाल में हुए इस कार्यक्रम का देशभर में सीधा प्रसारण किया गया। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में साकार होते देख रहे है रामराज्य की संकल्पना मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शनिवार को बरखेड़ीकला स्थित राज्य कृषि विस्तार एवं प्रशिक्षण संस्थान (सिपेट) में 'प्राकृतिक खेती कार्यशाला सह कृषक संगोष्ठी' में पहुंचकर प्रधानमंत्री मोदी के संपूर्ण संबोधन का श्रवण किया। मुख्यमंत्री ने संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में हम रामराज्य की संकल्पना को साकार होते देख रहे हैं। प्रधानमंत्री ने गांव, गरीब, अन्नदाता किसान, युवा और नारी सहित सभी वर्गों के कल्याण से विश्व में भारत की अलग ही पहचान बनाई है। प्रधानमंत्री मोदी ने मध्यप्रदेश को दो-दो नदी जोड़ो परियोजनाओं की सौगात दी है। इससे प्रदेश के किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिलेगा और उनके सूखे खेतों में फसलें लहलहाएंगी। आज देश के हर गांव-कस्बे तक बिजली, पानी, सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं का जाल बिछ रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने ही देश के किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि देने की योजना प्रारंभ की है। यह हमारे अन्नदाता के अथक परिश्रम का सम्मान है। मध्यप्रदेश सरकार भी किसानों की आय बढ़ाने के लिए कृषक कल्याण वर्ष मना रही है। हम किसानों के कल्याण के लिए हर जरूरी कदम उठा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने पीएम किसान सम्मान निधि पाने वाले प्रदेश के सभी किसानों को बधाई दी और प्राकृतिक खेती अपनाने की अपील की। इस अवसर पर विधायक रामेश्वर शर्मा, जनप्रतिनिधि रविन्द्र यति, अपर मुख्य सचिव एवं कृषि उत्पादन आयुक्त अशोक  बर्णवाल, आयुक्तमती अनुभावास्तव, कलेक्टर भोपाल प्रियंक मिश्रा सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में किसान बंधु उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि फसलों में कीटनाशक और रासायनिक खाद का उपयोग नुकसानदेह है। इससे कैंसर जैसी कई घातक बीमारियां जन्म लेती हैं। सरकार ने किसानों को पुन: प्राकृतिक खेती से जोड़ने के लिए पहल की है, इसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। आज हमारा मध्यप्रदेश देश में सर्वाधिक प्राकृतिक खेती करने वाला राज्यों में अव्वल स्थान पर है। प्राकृतिक खेती की उपज को उचित दाम दिलवाने के लिए राज्य सरकार संकल्पित है। हमारी प्राकृतिक खेती से दुनिया लाभान्वित हों, इसी भाव से कार्य करते हुए प्रदेश में तेजी से गोशालाओं का विस्तार किया जा रहा है। हमारी गौमाता प्राकृतिक खेती में सबसे अधिक मददगार प्राणी है। किसान गोबर और गौमूत्र से खाद बनाकर खेतों में डालें, इसी उद्देश्य से गौपालक किसानों को हमारी सरकार हर महीने 1100 रुपए प्रति गाय की दर से आर्थिक सहायता दे रही है। गौ-आधारित कृषि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसानों को उपज का सही दाम मिले, इसके लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। पहले सोयाबीन पर भावांतर योजना के माध्यम लाभ दिया, उसके बाद न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर 40 रुपए प्रति क्विंटल बोनस देकर किसानों से गेहूं उपार्जित किया। राज्य सरकार ने किसानों से गेहूं का एक-एक दाना खरीदकर उन्हें प्रति क्विंटल 2625 रुपए भुगतान किया है। हमारी सरकार प्राकृतिक खेती के जरिए किसानों की आय बढ़ाने के लिए प्रयास कर रही है। इससे धरती माता की उर्वरा शक्ति भी बढ़ेगी और विदेशी रासायनिक खाद पर निर्भरता भी घटेगी। प्रदेश के नागरिकों को प्राकृतिक तरीके से उगाए देसी ज्वार, बाजरा और गेहूं-चना का स्वाद मिलेगा। किसानों को दूध उत्पादन से भी जोड़ा जा रहा है। इसका दोहरा लाभ आय बढ़ाने के साथ-साथ प्राकृतिक खाद निर्माण में भी मिलेगा। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती में मिट्टी की जल धारण क्षमता बढ़ती है। कम सिंचाई में भी फसल अच्छी होती है। प्राकृतिक खेती … Read more

कपिला गौशाला पहुंचकर मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री ने गौसेवा का दिया संदेश

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एवं केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य, बिजली मंत्री मनोहर लाल ने शनिवार को उज्जैन के ग्राम रत्नाखेड़ी स्थित कपिला गौशाला पहुंचकर गौ-माता की पूजा कर पशु आहार खिलाकर आशीर्वाद प्राप्त किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य शासन द्वारा स्थानीय निकायों के माध्यम से गौशाला संचालन का मॉडल विकसित किया गया है। इसके तहत नगरीय एवं ग्रामीण निकायों को गौशाला संचालन के लिए आवश्यक सहयोग एवं सहायता उपलब्ध कराई जाती है। साथ ही बड़े स्तर पर सामुदायिक गौशाला संचालित करने के इच्छुक संस्थानों एवं व्यक्तियों को भी शासन द्वारा प्रोत्साहन एवं सहयोग प्रदान किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में प्रदेश की गौशालाओं में लगभग 4 लाख गोवंश सुरक्षित रूप से संरक्षित किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अच्युतानंद जी महाराज के सहयोग से गौ सेवा एवं गौ संरक्षण के प्रति जनभागीदारी लगातार बढ़ रही है। इंदौर, उज्जैन, भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर सहित विभिन्न नगरों में लोग अपने जन्मदिन एवं अन्य विशेष अवसरों पर गौशालाओं में जाकर गौ सेवा करते हैं, जिससे गौ सेवा के प्रति सामाजिक जागरूकता बढ़ी है। कपिला गौशाला, रत्नाखेड़ी में लगभग 2000 गौवंश को रखने की क्षमता विकसित की जा रही है। परियोजना के अंतर्गत चार शेड्स (24-60m) प्रत्येक में अनुमानित 500 गोवंश के रहने की व्यवस्था होगी। इसके अतिरिक्त गोवंश औषधालय, भूसा भंडारण शेड, गौ सेवा शाला, बायोगैस संयंत्र, प्रशासनिक भवन, प्रयोगशाला, डेयरी, गोवंश अंतिम संस्कार क्षेत्र, आगंतुकों के लिए पार्किंग एवं उद्यान क्षेत्र, वॉच टावर तथा वृक्षारोपण क्षेत्र का निर्माण भी किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव एवं केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने गौशाला का निरीक्षण व्यवस्थाओं का जायजा लिया। गौ शाला के रख-रखाव के लिए नगर निगम द्वारा किये जा रहे कार्यों एवं गौशाला में गौ वंश के लिए की गई  व्यवस्थाओं के लिए नगर निगम की प्रशंसा की।उन्होंने कहा कि नगर निगम द्वारा इस क्षेत्र का कायाकल्प कर इसे गौ संरक्षण एवं संवर्धन के एक आदर्श केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। इस अवसर पर नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, महापौर मुकेश टटवाल, नगर निगम सभापतिमती कलावती यादव, सांसद अनिल फिरोजिया, राज्यसभा सांसद बाल योगी उमेश नाथ जी महाराज, विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा, संभागायुक्त आशीष सिंह, एडीजी राकेश गुप्ता, कलेक्टर रौशन कुमार सिंह, पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा, नगर निगम आयुक्त अभिलाष मिश्रा, एडीएम अत्येंद्र सिंह गुर्जर सहित प्रशासनिक अधिकारी एवं ग्रामीण जन उपस्थित थे।  

अब 17 की बजाय नई तारीख से होगी MPPSC मेन्स परीक्षा, 12 जिलों में बनेंगे केंद्र

इंदौर संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की सिविल सेवा मुख्य परीक्षा 2026 और राज्य सेवा मुख्य परीक्षा 2025 की तारीख आपस में टकरा रही है। इसके चलते मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (एमपीपीएससी) ने अपनी परीक्षा प्री-पोन कर दी। महज चौबीस घंटे में परीक्षा की तारीख में बदलाव किया गया है। पहले जहां 17 अगस्त से पेपर होना थे, वे अब 8 अगस्त से आयोजित किए जाएंगे। आयोग ने परीक्षा का नया शेड्यूल पोर्टल पर जारी कर दिया है। यूपीएससी परीक्षा से टकरा रही थी तारीखें जबलपुर हाईकोर्ट ने राज्य सेवा मुख्य परीक्षा को लेकर लगे अंतरिम स्थगन (स्टे) को हटाने के बाद अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली। लंबे इंतजार के बाद आयोग (एमपीपीएससी) ने शुक्रवार को राज्य सेवा मुख्य परीक्षा 2025, 17 से 22 अगस्त के बीच रखी थी, लेकिन शनिवार को अभ्यर्थियों ने 21 अगस्त से यूपीएससी की सिविल सेवा मुख्य परीक्षा होना बताया। इसके बाद आयोग ने आनन-फानन में राज्य सेवा मुख्य परीक्षा 2025 की तारीख में बदलाव कर दिया है, क्योंकि जिन केंद्रों पर पीएससी की परीक्षा होना है, उन्हीं केंद्रों पर यूपीएससी भी करवाई जाएगी। ऐसे में केंद्रों ने भी दोनों परीक्षाएं एक साथ करवाने में असहमति जताई है। आयोग ने नया शेड्यूल जारी करते हुए 8 से 13 अगस्त के बीच छह पेपर रखे हैं। 3 अगस्त से जारी होंगे एडमिट कार्ड राज्य सेवा प्रारंभिक परीक्षा में चयनित अभ्यर्थियों के लिए आवेदन की प्रक्रिया अगले सप्ताह से शुरू होगी। 25 जून से 15 जुलाई के बीच बिना विलंब शुल्क ऑनलाइन आवेदन किए जा सकेंगे। मध्य प्रदेश के मूल निवासियों को 400 रुपये और अन्य राज्यों के चयनित अभ्यर्थियों को 800 रुपये पंजीयन शुल्क देना होगा। 15 जुलाई के बाद ऑनलाइन आवेदन करने पर अभ्यर्थियों से विलंब शुल्क वसूला जाएगा। जबकि एडमिट कार्ड भी 3 अगस्त से अभ्यर्थी डाउनलोड कर सकेंगे। इन 12 जिलों में होंगे परीक्षा केंद्र आयोग ने परीक्षा के लिए 12 जिलों में परीक्षा केंद्र रखे हैं, जिसमें इंदौर, भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर, छिंदवाड़ा, रतलाम, सतना, सागर, शहडोल, बड़वानी, उज्जैन और बालाघाट शामिल हैं।  

किसानों को उचित मूल्य दिलाने वाली योजना का राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान

भोपाल  मध्यप्रदेश शासन की किसान हितैषी एवं नवाचार आधारित भावांतर भुगतान योजना-2025 को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित स्कॉच गोल्ड अवार्ड-2026 से सम्मानित किया गया है। यह पुरस्कार 20 जून 2026 को पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री, अगस्त क्रांति मार्ग, नई दिल्ली में आयोजित समारोह में प्रदान किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कुशल नेतृत्व और किसान कल्याण तथा कृषि विकास मंत्री एदल सिंह कंषाना के मार्गदर्शन में भावांतर योजना-2025 तथा ई-मंडी योजना को एकीकृत डिजिटल ढांचे के अंतर्गत सफलतापूर्वक लागू किया गया है। यह पहल किसानों को मूल्य संरक्षण, त्वरित भुगतान और पारदर्शी कृषि विपणन व्यवस्था उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। भावांतर योजना-2025 के अंतर्गत सोयाबीन की खरीदी पूर्णतः ई-मंडी एप्लीकेशन के माध्यम से की गई। यह देश में पहली बार लागू की गई एक अभिनव व्यवस्था है जिसका उद्देश्य किसानों को बाजार भाव में गिरावट से सुरक्षा प्रदान करना है। योजना में न्यूनतम समर्थन मूल्य और वास्तविक बिक्री दर/मॉडल रेट के बीच के अंतर की राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में अंतरित की जाती है, जिससे किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य सुनिश्चित हो सके। मध्यप्रदेश राज्य कृषि विपणन बोर्ड, भोपाल की ओर से यह सम्मान प्रबंध संचालक कुमार पुरुषोत्तम के निर्देशन में सहायक संचालक योगेश नागले, गोविंद शर्मा एवं निरंजन सिंह द्वारा ग्रहण किया गया। दोनों एप्लीकेशन एन.आई.सी. भोपाल द्वारा विकसित की गई हैं। पुरस्कार समारोह में अध्यक्ष प्रधानमंत्री आर्थिक सलाहकार परिषद प्रो. एस. महेंद्र देव, अपर सचिव विधि एवं न्याय मंत्रालय डॉ. मनोज कुमार, संचालक इंडियन काउंसिल फॉर रिसर्च ऑन इंटरनेशनल इकोनामिक रिलेशंस डॉ. शेखर ऐय्यर, महानिदेशक आरआईएस प्रो. सचिन कुमार शर्मा, तथा अध्यक्ष स्कॉच ग्रुप समीर कोचर सहित कई गणमान्य नागरिक एवं विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे। यह उपलब्धि मध्यप्रदेश की किसान कल्याण और कृषि विपणन सुधारों के प्रति प्रतिबद्धता का राष्ट्रीय स्तर पर प्रमाण है और राज्य की डिजिटल कृषि विपणन व्यवस्था की सफलता को रेखांकित करती है।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल के साथ सिंहस्थ : 2028 के दृष्टिगत नवीन घाट निर्माण कार्य का किया अवलोकन

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने सिंहस्थ : 2028 में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए शनि मंदिर त्रिवेणी क्षेत्र में 778 करोड़ रुपए राशि की लागत से किए जा रहे 29.15 किमी लंबे नवीन घाट निर्माण कार्य की प्रगति का अवलोकन किया। निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने घाट निर्माण कार्य की प्रगति की समीक्षा कर अधिकारियों को कार्य की गुणवत्ता और समय-सीमा का विशेष ध्यान रखने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सिंहस्थ : 2028 को भव्य, दिव्य और सुव्यवस्थित बनाने के लिए राज्य सरकार लगातार कार्य कर रही है। इससे देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं का सिंहस्थ अनुभव सनातन संस्कृति के वैभव के अनुरूप हो। अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा ने नवीन घाट निर्माण कार्य की विस्तार से जानकारी दी। एसीएस डॉ. राजौरा ने बताया कि 29.15 किमी नवीन घाट का निर्माण 778 करोड़ रुपए राशि से किया जा रहा है। नवीन घाटों पर श्रद्धालुओं के आवागमन के लिए 150 से अधिक स्थान चिन्हित किए गए हैं। नवीन घाट निर्माण कार्य अंतर्गत 18.20 किमी लंबी रिटेनिंग वॉल का निर्माण किया जा चुका है। लगभग 7 किमी नवीन घाट निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है। शेष कार्य तेजी से प्रगतिरत है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव, केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल, नगरीय आवास एवं विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट ने शनि मंदिर त्रिवेणी क्षेत्र में नीम, रुद्राक्ष, पीपल के पौधे रोप कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता हे कि प्रदेश वनों से आच्छादित रहे। कान्ह डायवर्शन क्लोज डक्ट प्रोजेक्ट का किया निरीक्षण, टनल मे उतर कर देखी गुणवत्ता मुख्यमंत्री डॉ. यादव तथा केन्द्रीय मंत्री मनोहर लाल ने कान्ह डायवर्शन क्लोज डक्ट प्रोजेक्ट का भी निरीक्षण किया। परियोजना के टनल भाग में उतरकर निर्माण कार्यों की गुणवत्ता एवं प्रगति का जायजा लिया। उन्होंने चिंतामन जवासिया गांव के समीप स्थित शाफ्ट नंबर-2 पर फेज नंबर-3 के कार्य की विस्तृत जानकारी ली। एसीएस डॉ. राजेश राजौरा द्वारा योजना की जानकारी दी गई। टनल पहुंच एवं रखरखाव संबंधी तकनीकी पहलुओं की जानकारी भी दी गई। परियोजना का मुख्य उद्देश्य कान्ह नदी के दूषित जल को शहर में शिप्रा नदी के प्रमुख घाटों एवं तीर्थ स्थलों में मिलने से रोकना है, जिससे शिप्रा नदी का जल स्वच्छ बना रहे। परियोजना के अंतर्गत ग्राम जमालपुरा, तहसील उज्जैन में कान्ह नदी पर एक बैराज का निर्माण किया जा रहा है, जिससे दूषित जल को क्लोज डक्ट के माध्यम से 30.15 किमी दूर गम्भीर बांध के डाउन स्ट्रीम में छोड़ा जाएगा। परियोजना की लागत 919.94 करोड़ रुपए है। इसकी कुल लंबाई 30.15 किमी (कट एंड कवर डक्ट: 18.15 किमी + टनल: 12.00 किमी) है। टनल भाग में 4 शाफ्टों का निर्माण पहुंच एवं सफाई तथा रखरखाव के लिए किया गया है। डक्ट का डी-आकार का क्रॉस सेक्शन, अधिकतम 40 क्यूसेक दूषित जल की निकासी क्षमता रखता है। परियोजना को आगामी 25 वर्ष तक की जनसंख्या वृद्धि को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया है। निर्माण पूर्ण होने के बाद आगामी 15 वर्ष तक संचालन एवं संधारण का प्रावधान है। वर्तमान में बैराज का निर्माण कार्य प्रगति पर है तथा हेड रेगुलेटर का निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है। कट एंड कवर भाग की कुल 18.15 किमी लंबाई में से 4.50 किमी में प्री-कास्ट सेगमेंट्स का लेइंग कार्य पूर्ण हो चुका है, शेष कार्य प्रगति पर है। 18.15 किमी में से 10.30 किमी लंबाई में लेइंग करने योग्य प्री-कास्ट सेगमेंट्स तैयार किए जा चुके हैं। टनल भाग के निर्माण के लिये चारों शाफ्टों का निर्माण कार्य पूर्ण हो चुका है। टनल की कुल 12 किमी लंबाई में से 8.15 किमी की खुदाई कार्य पूर्ण हो चुका है, शेष कार्य प्रगति पर है। मुख्यमंत्री एवं केन्द्रीय मंत्री ने परियोजना से जुड़े अधिकारियों से विस्तृत चर्चा की और कार्य की गुणवत्ता एवं समयबद्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। अवलोकन एवं भ्रमण के समय महापौर मुकेश टटवाल, नगर निगम सभापतिमती कलावती यादव, सांसद अनिल फिरोजिया, विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा, उज्जैन विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष रवि सोलंकी, अपर मुख्य सचिव संजय दुबे, संभागायुक्त आशीष सिंह, एडीजी राकेश गुप्ता, कलेक्टर रौशन कुमार सिंह, पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा, नगर निगम आयुक्त अभिलाष मिश्रा, एडीएम अत्येंद्र सिंह गुर्जर सहित प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।  

योग : स्वस्थ मानवता, संतुलित प्रकृति और सतत भविष्य का आधार- राजेन्द्र शुक्ल

भोपाल  भारत की प्राचीन सांस्कृतिक परंपरा ने विश्व को सदैव जीवन जीने की दिशा दी है। "वसुधैव कुटुम्बकम्" का भाव केवल एक दर्शन नहीं, बल्कि मानवता के कल्याण का मार्ग है। इसी परंपरा का अमूल्य उपहार है — योग। आज योग केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि सम्पूर्ण विश्व में स्वस्थ, संतुलित और शांतिपूर्ण जीवन का माध्यम बन चुका है। माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में संयुक्त राष्ट्र द्वारा 21 जून को "अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस" के रूप में मान्यता मिलना भारत की सांस्कृतिक शक्ति और आध्यात्मिक विरासत की वैश्विक स्वीकार्यता का प्रतीक है। यह केवल एक दिवस की औपचारिकता नहीं, बल्कि मानवता को बेहतर भविष्य देने का वैश्विक अभियान है। प्रधानमंत्री जी ने योग को जन-जन तक पहुँचाकर उसे आधुनिक जीवनशैली का हिस्सा बनाया है। आज विश्व के करोड़ों लोग योग को स्वास्थ्य, मानसिक संतुलन और आत्मिक शांति के लिए अपना रहे हैं। योग केवल व्यायाम नहीं, बल्कि जीवन का समग्र विज्ञान आज जब दुनिया जलवायु परिवर्तन, असंतुलित जीवनशैली, मानसिक तनाव और बढ़ती बीमारियों जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है, तब योग केवल व्यायाम नहीं, बल्कि जीवन का समग्र विज्ञान बनकर सामने आता है। योग हमें यह सिखाता है कि जीवन केवल उपभोग का नाम नहीं है। भविष्य केवल संसाधनों के दोहन से सुरक्षित नहीं होगा। सतत विकास का अर्थ है — संसाधनों का सजग, संवेदनशील और विवेकपूर्ण उपयोग। प्रकृति का सम्मान और शरीर का सम्मान — दोनों एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। जिस प्रकार प्रकृति के संतुलन को बनाए रखना आवश्यक है, उसी प्रकार अपने शरीर और मन के संतुलन को बनाए रखना भी उतना ही आवश्यक है। योग हमें यही संतुलन सिखाता है। यही कारण है कि प्रधानमंत्री मोदी जी द्वारा दिए गए "Lifestyle for Environment (LiFE)" के मंत्र और योग का दर्शन एक-दूसरे के पूरक हैं। LiFE हमें जिम्मेदार जीवनशैली अपनाने की प्रेरणा देता है और योग उस जीवनशैली को व्यवहार में उतारने की शक्ति देता है।  मानवता का भविष्य उपभोग में नहीं, संयमित और सजग जीवन में निहित आज दुनिया में संसाधनों की प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है, लेकिन मानवता का भविष्य केवल अधिक उपभोग में नहीं, बल्कि संयमित और सजग जीवन में निहित है। योग हमें भीतर से अनुशासित बनाता है। यह हमें सिखाता है कि सुख केवल भौतिक उपलब्धियों से नहीं, बल्कि मानसिक संतुलन और आत्मिक शांति से प्राप्त होता है। प्रधानमंत्री जी द्वारा दिए गए "पंच प्रण" के संकल्पों में विकसित भारत का निर्माण, गुलामी की मानसिकता से मुक्ति, विरासत पर गर्व, एकता और नागरिक कर्तव्य का भाव — इन सभी का आधार स्वस्थ और जागरूक नागरिक ही हो सकते हैं। योग इस दिशा में सबसे प्रभावी माध्यम है। जब व्यक्ति शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ होगा, तभी वह राष्ट्र निर्माण में अपनी सर्वोत्तम भूमिका निभा सकेगा। "फिट इंडिया मूवमेंट" भी इसी सोच का विस्तार है। स्वस्थ भारत ही सक्षम भारत बन सकता है। आज स्वास्थ्य का अर्थ केवल अस्पताल और उपचार नहीं रह गया है। आधुनिक स्वास्थ्य व्यवस्था का केंद्र अब "Preventive Healthcare" यानी रोगों की रोकथाम बन रहा है। यदि हम अपनी जीवनशैली को संतुलित रखें, नियमित योग करें, मानसिक तनाव को नियंत्रित करें और प्रकृति के अनुरूप जीवन जिएँ, तो अनेक बीमारियों से बचा जा सकता है। मध्यप्रदेश में सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को केवल उपचार तक सीमित नहीं रख रही है, बल्कि लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित कर रही है। योग, आयुष, पोषण, मानसिक स्वास्थ्य और जन-जागरूकता को हम स्वास्थ्य नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बना रहे हैं। हमारा प्रयास है कि नागरिक लंबे जीवन के साथ स्वस्थ, सक्रिय और गरिमापूर्ण जीवन जिएँ। आज विश्व के सामने एक बड़ी चुनौती "मानसिक स्वास्थ्य" भी है। आधुनिक जीवन में भौतिक सुविधाएँ बढ़ी हैं, लेकिन मानसिक शांति कम होती जा रही है। चारों ओर तनाव, प्रतिस्पर्धा, असुरक्षा और असंतुलन दिखाई देता है। ऐसे समय में योग हमें भीतर से जोड़ने का माध्यम बनता है। योग केवल शरीर को स्वस्थ और सशक्त बनाने का अभ्यास नहीं है, बल्कि यह मन, बुद्धि और आत्मा के बीच सामंजस्य स्थापित करने की प्रक्रिया है। जब व्यक्ति स्वयं के भीतर स्थिर होता है, तभी वह समाज और प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनता है। योग हमें प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि संतुलित दृष्टि सिखाता है। यह हमें बाहरी अराजकता के बीच भी भीतर की शांति खोजने की क्षमता देता है। यही कारण है कि आज योग की आवश्यकता केवल भारत को नहीं, सम्पूर्ण विश्व को है। जलवायु परिवर्तन के इस दौर में भी योग की प्रासंगिकता और बढ़ जाती है। बढ़ता प्रदूषण, असंतुलित खान-पान, निष्क्रिय जीवनशैली और मानसिक तनाव मानव शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को प्रभावित कर रहे हैं। योग शरीर की प्राकृतिक प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है। यह व्यक्ति को शारीरिक रूप से सक्षम, मानसिक रूप से संतुलित और भावनात्मक रूप से स्थिर बनाता है। स्वस्थ मानव संसाधन ही किसी राष्ट्र की सबसे बड़ी पूंजी होते हैं। केवल आर्थिक संसाधन किसी देश को महान नहीं बनाते। यदि नागरिक स्वस्थ, जागरूक, अनुशासित और सकारात्मक होंगे, तभी राष्ट्र दीर्घकालिक विकास की दिशा में आगे बढ़ सकेगा। इसलिए योग केवल व्यक्तिगत अभ्यास नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का भी माध्यम है। आज आवश्यकता है कि हम योग को एक दिवस तक सीमित न रखें, बल्कि उसे दैनिक जीवन का हिस्सा बनाएँ। बच्चों से लेकर युवाओं और वरिष्ठ नागरिकों तक, हर आयु वर्ग के लिए योग उपयोगी है। विशेष रूप से वृद्धजन स्वास्थ्य और जेरियाट्रिक केयर के संदर्भ में योग की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। स्वस्थ और शांतिपूर्ण वृद्धावस्था केवल चिकित्सा से नहीं, बल्कि संतुलित जीवनशैली से संभव है। योग वरिष्ठ नागरिकों को सक्रिय, आत्मनिर्भर और मानसिक रूप से सकारात्मक बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। भारत ने सदैव विश्व को केवल विचार नहीं, बल्कि जीवन का मार्ग दिया है। योग उसी मार्ग का प्रकाश है। यह शरीर, मन, समाज और प्रकृति — सभी के बीच संतुलन स्थापित करने की प्रक्रिया है। यदि मानवता को स्वस्थ, शांतिपूर्ण और सतत भविष्य की ओर बढ़ना है, तो योग को जीवन का हिस्सा बनाना ही होगा। आइए, हम सब योग को केवल अभ्यास नहीं, बल्कि जीवन दर्शन के रूप में अपनाएँ और स्वस्थ मानवता, संतुलित प्रकृति तथा विकसित भारत के निर्माण में अपनी भूमिका निभाएँ।