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अनुसूचित जाति वर्ग के विकास पर मंत्री चौहान का जोर, अधिकारियों को संवेदनशीलता से काम करने के निर्देश

अनुसूचित जाति वर्ग के सर्वांगीण विकास के लिए पूरी प्रतिबद्धता और संवेदनशीलता से कार्य करें अधिकारी : मंत्री चौहान राज्य सहकारी अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम के 16 नवनियुक्त अधिकारियों को वितरित किए नियुक्ति पत्र भोपाल अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री नागर सिंह चौहान ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य सरकार अनुसूचित जाति वर्ग के सामाजिक एवं आर्थिक सशक्तीकरण के लिए निरंतर प्रयासरत है। नवनियुक्त अधिकारी शासन की जनहितैषी योजनाओं का लाभ अंतिम छोर के पात्र हितग्राहियों तक पहुँचाने के लिए पूरी निष्ठा से कार्य करें। उन्हें शिक्षा, कौशल उन्नयन, रोजगार एवं स्वरोजगार से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने में सक्रिय भूमिका निभाएँ, जिससे कोई भी पात्र व्यक्ति योजनाओं के लाभ से वंचित न रहे। मंत्री चौहान, मध्यप्रदेश राज्य सहकारी अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम के राजीव गांधी सभागार में नियुक्ति पत्र वितरण समारोह को संबोधित कर रहे थे। मंत्री चौहान ने चयनित अधिकारियों को नियुक्ति पत्र प्रदान कर शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि शासकीय सेवा केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि जनसेवा का पुनीत दायित्व है। सभी अधिकारी अपने पदीय कर्तव्यों का निर्वहन पूरी ईमानदारी, पारदर्शिता और संवेदनशीलता के साथ करें। निगम के अध्यक्ष सावन सोनकर ने नवनियुक्त अधिकारियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि सेवा-भाव और उत्तरदायित्व के साथ सभी दायित्वों का संपादन करें। योजनाओं की वास्तविक सार्थकता तभी है, जब उनका सीधा लाभ लक्षित वर्ग तक समय-सीमा में पहुँचे। अनुसूचित जाति कल्याण आयुक्त सत्येन्द्र सिंह ने विभागीय प्राथमिकताओं को रेखांकित करते हुए कहा कि अधिकारी मैदानी स्तर पर योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, हितग्राहियों की समस्याओं के समयबद्ध निराकरण और कार्यप्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करें। उन्होंने नवनियुक्त अधिकारियों से विभागीय लक्ष्यों की प्राप्ति में सक्रिय योगदान देने का आह्वान भी किया। मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मंडल, भोपाल द्वारा आयोजित संयुक्त भर्ती परीक्षा के माध्यम से मध्यप्रदेश राज्य सहकारी अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम में 8 सहायक कार्यपालन अधिकारी और 8 क्षेत्राधिकारी सहित कुल 16 अभ्यर्थियों का चयन हुआ है, जिन्हें विधिवत नियुक्ति पत्र सौंपे गए।इस अवसर पर अनुसूचित जाति कल्याण विभाग के अधिकारी, एवं चयनित अभ्यर्थियों के अभिभावक उपस्थित रहे।  

सरकार का बड़ा फैसला: पैराक्वेट डाइक्लोराइड के इस्तेमाल पर रोक, कंपनियों को बचा स्टॉक नष्ट करने के निर्देश

राज्य शासन ने पैराक्वेट डाइक्लोराइड के उपयोग पर लगाया प्रतिबन्ध मानव और पशुओं के लिए है ख़तरनाक निर्माता कम्पनियों के पास बचा स्टॉक तत्काल नष्ट करने के निर्देश भोपाल  राज्य शासन ने पैराक्वेट डाइक्लोराइड नामक कीटनाशक के उपयोग पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है। यह कीटनाशक मानव और पशुओं के लिए बेहद हानिकारक है। भारत सरकार ने इस संबंध में पहले ही अधिसूचना  जारी कर दी है। किसान कल्याण और कृषि  विकास विभाग ने इस खतरनाक कीटनाशक का निर्माण करने वाली कंपनियों द्वारा विक्रय और भण्डारण पर तत्काल रोक लगाने की कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।  जिन निर्माताओं के पास पैराक्वेट डायक्लोराइड के पंजीकरण  प्रमाण पत्र है उन्हें तत्काल केन्द्रीय कीटनाशी बोर्ड और पंजीकरण समिति को वापस करने के निर्देश दिए हैं। इस कीटनाशक के बचे स्टाक को वापस बुलाकर नियम, प्रक्रिया अनुसार नष्ट करने की कार्रवाई करने के लिए भी निर्देश दिए हैं। उल्लेखनीय है कि भारत सरकार ने कीटनाशक अधिनियम 1968 के तहत पैराक्वेट डाइक्लोराइड के नए रजिस्ट्रेशन और पहले से जारी सभी रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट्स को रद्द कर इस पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। दुनिया के लगभग 70 देशों में इसका उपयोग पहले से प्रतिबंधित है। कैसे काम करता है? यह पौधों के हरे हिस्सों के संपर्क में आते ही उन्हें तेजी से जलाकर नष्ट कर देता था। इसे 'ग्रामोक्सोन' (Gramoxone) जैसे ट्रेड नाम से भी जाना जाता है। यह इंसानों और जानवरों के लिए अत्यधिक विषैला है। इसके शरीर में जाने या संपर्क में आने से फेफड़े और गुर्दे (किडनी) गंभीर रूप से खराब हो जाते हैं। इसका कोई विशिष्ट एंटीडोट (विषारोधी इलाज) उपलब्ध नहीं है। किसान मूंग की फसल में पैराक्वेट डाइक्लोराइड का उपयोग फसल की कटाई से ठीक पहले पत्तियों को सुखाने और फसल को जल्दी पकाने के लिए करते हैं। इसका छिड़काव करने से मूंग के हरे पौधे और पत्तियां 24 से 72 घंटों के भीतर पूरी तरह सूख जाती हैं। पत्तियां सूख जाने से फसल को काटना और थ्रेसिंग करना आसान हो जाता है, जिससे मजदूरों का खर्च और समय बचता है। भारत सरकार के नियमों के अनुसार इसका  उपयोग मूंग की फसल पर करने की अनुमति नहीं थी, लेकिन इसके बावजूद किसान अवैध रूप से इसका शॉर्टकट के रूप में इस्तेमाल करते रहे हैं। स्वास्थ्य के लिए खतरनाक  यह एक अत्यंत विषैला  केमिकल है। इसके संपर्क में आने या इसके अवशेषों वाली मूंग के सेवन से कैंसर, लिवर, किडनी और मस्तिष्क से जुड़ी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। यदि यह शरीर में चला जाए या गलती से पिया जाए, तो इसका कोई इलाज या एंटीडोट नहीं है, जिससे यह जानलेवा साबित होता है।          

खजुराहो के जवारी मंदिर से जुड़ी बड़ी खबर, सदियों पुरानी विष्णु प्रतिमा का गायब सिर मिला

खजुराहो मध्य प्रदेश के खजुराहों स्थित जवारी मंदिर में स्थापित 11वीं सदी की भगवान विष्णु की खंडित प्रतिमा का गायब सिर ASI को मिल गया है। इस मूर्ति की मरम्मत को लेकर मामला हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा था। अब ASI एक्सपर्ट्स से जांच करवाने के बाद इसे वापस मूर्ति पर लगाने की योजना बना रहा है। काम पूरा करने के लिए तीन साल की डेडलाइन ASI के डायरेक्टर जनरल यदुबीर सिंह रावत ने टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए एक इंटरव्यू में बताया कि रिसर्च में देरी रोकने के लिए आर्कियोलॉजिकल खुदाई के काम को तीन साल में पूरा करने की डेडलाइन तय की गई है। साथ ही ज्यादातर संरक्षण प्रोजेक्ट्स के लिए मंजूरी मिलने का समय घटाकर 15-20 दिन कर दिया गया है। उन्होंने उज्जैन के वैश्य टेकरी में शुरुआती खुदाई की योजना के बारे में भी बताया, जहां एक बौद्ध स्तूप हो सकता है जो सांची के स्तूप से भी बड़ा हो सकता है। हालांकि इसके असली आकार और महत्व का अभी पता लगाया जाना बाकी है। सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा था मामला खजुराहो के जवारी मंदिर में सिर कटी विष्णु की मूर्ति को लेकर विवाद पिछले साल सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था, जब वकील राकेश दलाल ने सात फीट ऊंची मूर्ति की मरम्मत, उसे बदलने या फिर से बनाने की मांग की थी। याचिका खारिज करते हुए तत्कालीन CJI बी.आर.गवई ने कहा था, 'जाओ और देवता से ही कुछ करने को कहो।' हालांकि बाद में गवई ने कहा कि वह सभी धर्मों का सम्मान करते हैं और उनके बयान का गलत मतलब निकाला गया था, लेकिन एक वकील ने कोर्टरूम के अंदर उन पर जूता फेंकने की कोशिश की थी। ASI के स्टोर में मिला गायब सिर रावत ने बताया कि मूर्ति का गायब सिर ASI के स्टोर में मिला है। उन्होंने कहा, 'ब्रिक्स समिट के लिए भोपाल दौरे के दौरान मुझे पता चला कि मूर्ति का सिर मिल गया है उसे हमारे स्टोर में रखा गया था।' उन्होंने आगे कहा,'इंचार्ज ने मुझे बताया कि शायद किसी ने इसे चुराने के लिए सिर तोड़ने की कोशिश की थी, लेकिन कामयाब नहीं हो पाया। हम एक्सपर्ट्स से इसकी जांच करवा रहे हैं और जल्द ही इसे वापस मूर्ति पर लगा देंगे।'

मध्यप्रदेश में फिर बदलेगा मौसम, 20 जिलों में तीन दिन आंधी और बारिश के आसार

भोपाल  मध्यप्रदेश में मानसून की विदाई के बाद एक बार फिर मौसम बदलने के आसार हैं। मौसम विभाग के अनुसार, उत्तरी हिस्से में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ  और नए चक्रवाती तंत्र के प्रभाव से 15 से 17 अक्टूबर तक प्रदेश के करीब 20 जिलों में आंधी और बारिश हो सकती है। इस दौरान तेज हवाओं के साथ गरज-चमक और हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, शुरुआत में ग्वालियर-चंबल और सागर संभाग में मौसम का असर दिखाई दे सकता है। इसके बाद 17 अक्टूबर को रीवा, शहडोल और जबलपुर संभाग के जिलों में भी बारिश की गतिविधियां बढ़ने की संभावना है। हालांकि, भोपाल, इंदौर और उज्जैन संभाग के लिए इस पूर्वानुमान के तहत कोई अलर्ट जारी नहीं किया गया है। पश्चिमी विक्षोभ और चक्रवाती सिस्टम से बदलेगा मौसम मौसम में बदलाव की मुख्य वजह उत्तरी भारत में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ और चक्रवाती तंत्र को माना जा रहा है। इन मौसमी प्रणालियों के प्रभाव से मध्यप्रदेश के कई हिस्सों में बादल छाने, तेज हवाएं चलने और गरज-चमक के साथ बारिश होने की संभावना है।मानसून की विदाई के बाद अक्टूबर में होने वाली इस बारिश से तापमान और स्थानीय मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है। मौसम की गतिविधियों का असर अलग-अलग जिलों में अलग समय पर दिखाई देने की संभावना है। तीन दिन में इन इलाकों में बदलेगा मौसम 15 और 16 अक्टूबर को ग्वालियर-चंबल तथा सागर संभाग के कुछ जिलों में बारिश की संभावना है। 17 अक्टूबर को इसका दायरा बढ़कर जबलपुर, रीवा और शहडोल संभाग तक पहुंच सकता है। ग्वालियर, भिंड, दतिया, शिवपुरी, अशोकनगर, निवाड़ी, छतरपुर, टीकमगढ़, पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, मैहर, सिंगरौली, शहडोल, अनूपपुर, डिंडोरी, मंडला और बालाघाट में आंधी-बारिश की संभावना जताई गई है। अक्टूबर में एक साथ दिखेंगे तीन मौसम मौसम विशेषज्ञ अरुण शर्मा के मुताबिक, पिछले दस वर्षों के आंकड़ों में अक्टूबर के दौरान गर्मी, बारिश और ठंड तीनों का असर देखने को मिला है। इस बार भी मौसम का यही मिला-जुला रूप सामने आ रहा है। महीने की शुरुआत में आसमान साफ होने से दिन में धूप और गर्मी बढ़ी, जबकि रात के तापमान में गिरावट से ठंडक महसूस होने लगी। अब सक्रिय मौसम प्रणालियों के कारण कुछ जिलों में फिर बारिश हो सकती है। प्रदेश से दक्षिण-पश्चिम मानसून तीन अक्टूबर को विदा हो गया था। इस बार करीब 100 दिन तक मानसून सक्रिय रहा। विदाई के बाद भी पूर्वी मध्यप्रदेश में पिछले सप्ताह कई जगह आंधी और बारिश का असर देखा गया था। हालांकि, रविवार, सोमवार और मंगलवार को प्रदेश में कहीं आंधी-बारिश दर्ज नहीं की गई। चार महीने में सामान्य से 1.5 इंच कम बरसा पानी इस साल जून से सितंबर तक प्रदेश में कुल 908.4 मिलीमीटर यानी करीब 35.8 इंच बारिश हुई। सामान्य आंकड़ा 949.5 मिलीमीटर यानी 37.3 इंच है। इस तरह प्रदेश में औसत से करीब चार प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई। बारिश के आंकड़ों में पूर्वी और पश्चिमी मध्यप्रदेश के बीच अंतर भी साफ दिखाई देता है। पूर्वी हिस्से में सामान्य से चार प्रतिशत अधिक बारिश हुई, जबकि पश्चिमी मध्यप्रदेश में 12 प्रतिशत की कमी रही। पश्चिमी क्षेत्र के कई जिलों में बारिश का घाटा ज्यादा होने से खेती पर असर पड़ने की आशंका है।आंकड़ों के मुताबिक, आलीराजपुर, अशोकनगर, बड़वानी, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से कम बारिश हुई। इन जिलों में कमी नौ से 51 प्रतिशत तक रही। दूसरी ओर, भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, कटनी, मंडला, डिंडोरी, ग्वालियर, गुना, दतिया, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, मैहर, आगर-मालवा, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल, उमरिया और अनूपपुर में बारिश का सामान्य कोटा पूरा हो गया। जून की कमी पूरे सीजन पर पड़ी भारी मौसम विभाग के अनुसार, जून में सामान्य से 14 प्रतिशत कम बारिश हुई थी। जुलाई की शुरुआत में अच्छी बारिश से स्थिति सुधरी, लेकिन बाद में मानसून के दो बार कमजोर पड़ने से कई दिनों तक बारिश नहीं हुई। सीजन के अंतिम सप्ताह में सक्रिय हुए मजबूत सिस्टम के बावजूद जून की कमी पूरी तरह दूर नहीं हो सकी। जुलाई, अगस्त और सितंबर में बारिश से आंकड़ों को सहारा मिला, लेकिन पूरे सीजन का कुल आंकड़ा सामान्य से नीचे ही रहा। यही वजह है कि प्रदेश में मानसून की विदाई के समय करीब चार प्रतिशत बारिश की कमी दर्ज की गई।  17 अक्टूबर को 20 जिलों में आंधी-बारिश की संभावना 17 अक्टूबर को प्रदेश के कई जिलों में मौसम का असर बढ़ने का अनुमान है। संभावित बारिश और आंधी से प्रभावित होने वाले जिलों की सूची इस प्रकार है ग्वालियर-चंबल क्षेत्र: ग्वालियर, भिंड, दतिया, शिवपुरी और अशोकनगर। सागर क्षेत्र: निवाड़ी, छतरपुर और टीकमगढ़। बुंदेलखंड एवं विंध्य क्षेत्र: पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, मैहर और सिंगरौली। महाकौशल एवं शहडोल क्षेत्र: शहडोल, अनूपपुर, डिंडौरी, मंडला और बालाघाट। इन जिलों में तेज हवाओं, गरज-चमक और बारिश की संभावना है। हालांकि, सभी जिलों में एक जैसी स्थिति रहे, यह जरूरी नहीं है। भोपाल, इंदौर और उज्जैन में कैसा रहेगा मौसम? मौसम विभाग के बताए गए पूर्वानुमान के अनुसार, भोपाल, इंदौर और उज्जैन संभाग में फिलहाल इस बारिश को लेकर अलर्ट जारी नहीं किया गया है। इसका अर्थ यह नहीं है कि इन क्षेत्रों में मौसम में कोई बदलाव नहीं होगा, बल्कि फिलहाल इन संभागों को संभावित बारिश वाले क्षेत्रों में शामिल नहीं किया गया है। किसानों और आम लोगों को क्या सावधानी रखनी चाहिए? आंधी और गरज-चमक की स्थिति में कुछ जरूरी सावधानियां बरतना बेहतर रहेगा। तेज हवाएं चलने पर पेड़ों, बिजली के खंभों और कमजोर संरचनाओं से दूर रहें। बिजली चमकने के दौरान खुले मैदान और जलाशयों के पास खड़े होने से बचें। किसान फसलों की कटाई, उपज के भंडारण और खुले में रखे अनाज को सुरक्षित रखने की व्यवस्था करें।

MP में 2000 से पहले नियुक्त शिक्षाकर्मियों को TET से राहत की उम्मीद, हाईकोर्ट ने सरकार से विचार करने को कहा

जबलपुर   मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने साल 2001 से पूर्व नियुक्ति शिक्षा कर्मियों को टीईटी से राहत प्रदान करने के संबंध में सुनवाई की. इस सुनवाई के बाद मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर बैंच ने सरकार को 60 दिनों की समय सीमा में निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं. हाईकोर्ट जस्टिस विवेक सिंह की एकलपीठ ने पूर्व में सर्वोच्च न्यायालय व अन्य उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश के अनुसार याचिकाकर्ता के अभ्यावेदन का निराकरण करने का आदेश जारी करते हुए याचिका का निराकरण कर दिया. इस फैसले से पुराने सरकारी शिक्षकों को बड़ी राहत मिल सकती है।  क्या है पूरा मामला? याचिकाकर्ता अनिल कुमार तोमर व अन्य की ओर से सरकारी शिक्षकों के संबंध में ये याचिका मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में दायर की गई थी. इस याचिका में कहा गया था कि उनकी नियुक्ति वर्ष 1997 से 1999 के बीच शिक्षाकर्मी वर्ग-दो और तीन के पदों पर हुई थी. सरकार के द्वारा पदोन्नति की प्रक्रिया में टीईटी उत्तीर्ण करने को अनिवार्यता कर दिया गया है. ऐसे में याचिका में सर्वोच्च न्यायालय व अन्य उच्च न्यायालयों के आदेश का हवाला देते हुए कहा गया था कि 3 सितम्बर 2001 से पूर्व नियुक्ति शिक्षा कर्मियों को पदोन्नति प्रक्रिया में टीईटी से छूट प्रदान की गई है. अन्य राज्यों में ऐस फैसला हुआ है, और ऐसी ही छूट मध्य प्रदेश के शिक्षकों को भी मिलनी चाहिए।  60 दिन के अंदर मोहन सरकार को लेना होगा फैसला याचिका में बताया गया कि देश के अन्य प्रदेशों की तरह मध्य प्रदेश में भी साल 2001 से पूर्व नियुक्ति शिाक्षाकर्मियों को टीईटी से छूट प्रदान की जाने की मांग करते हुए अभ्यावेदन दिया गया था. सक्षम प्राधिकरण के द्वारा अभ्यावेदन पर कोई निर्णय नहीं लिए जाने के कारण उक्त याचिका दायर की गई है. एकलपीठ ने याचिका की सुनवाई करते हुए पूर्व में पारित आदेश के अनुसार याचिकाकर्ताओं के अभ्यावेदन का निराकरण 60 दिनों की अवधि में करने के आदेश जारी किए हैं। 

ग्वालियर राजपरिवार संपत्ति विवाद में अहम सुनवाई आज, अंतरिम आवेदन पर फैसला या साक्ष्यों के आधार पर चलेगा केस

ग्वालियर सिंधिया राज परिवार की 41 हजार करोड़ रुपए की संपत्ति के बंटवारे को लेकर आपसी सहमति से तैयार हुआ समझौता प्रस्ताव (राजीनामा) एक बार फिर कानूनी अड़चनों में फंस गया है।अतिरिक्त सत्र न्यायालय (ADJ) में बुधवार (14 अक्टूबर 2026) को अंतरिम आवेदन व आपत्ति आवेदन पर बहस होनी है। सात दिन पहले भी आवेदनों पर बहस हुई थी। बुधवार को सुनवाई के बाद कोर्ट तय करेगी कि आगे की सुनवाई की दिशा क्या रहेगी। मतलब आज साफ हो जाएगा कि अंतरिम आवेदनों पर आगे की सुनवाई की जाएगी या फिर प्रतिमा देवी की आपत्ति को स्वीकार कर साक्ष्य पर यह सुनवाई को आगे बढ़ाया जाएगा। बुधवार शाम तक सिंधिया राजघराने की पूरे देश में फैली संपत्ति को लेकर बड़ा फैसला आ सकता है। एक दूसरे पर लगा चुके हैं धोखाधड़ी का आरोप इस बहुचर्चित संपत्ति विवाद के समझौते पर सात दिन पहले हुई सुनवाई में ज्योतिरादित्य सिंधिया की बड़ी बुआ दिवंगत पद्मावती राजे की बेटी प्रतिमा देवी राना के समझौता आपत्ति आवेदन पर बहस हुई थी। प्रतिमा देवी की ओर से कहा गया है कि उनसे धोखाधड़ी कर समझौता प्रस्ताव पर हस्ताक्षर कराए गए हैं। मतलब साफ तौर पर प्रतिमा देवी ने ज्योतिरादित्य सिंधिया, वंसुधरा राजे, यशोधरा राजे व ऊषा राजे पर धोखाधड़ी से हस्ताक्षर कराने का आरोप लगाया था। प्रतिमा देवी द्वारा दर्ज कराई गई आपत्ति का जवाब प्रतिमा राजे की तीनों मौसियों (राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे, एमपी की पूर्व मंत्री यशोधरा राजे और उषा राजे) ने न्यायालय में दिया है। उनका कहना है कि स​हमति से हस्ताक्षर हुए हैं। हस्ताक्षर के बाद सभी वहां रुके फिर फैमिली डिनर हुआ और आखिर में फोटोग्राफ्स भी लिए गए।साथ ही इस धोखाधड़ी के आरोप पर ज्योतिरादित्य सिंधिया की ओर से पक्ष आया था कि हस्ताक्षर सहमति से ही हुए हैं। इसमें कोई भी गड़बड़ी नहीं की गई है। पहले घोषित हुई थीं 'एक्स पार्टी', अब पूरा समझौता इन पर ही टिका वसुंधरा राजे, उषा राजे और यशोधरा राजे ने केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया से पैतृक संपत्ति में अपना हिस्सा पाने के लिए सिविल सूट दायर किया था। लंबे कानूनी विवाद के बाद हाल ही में दोनों पक्षों ने आपसी सहमति से एक राजीनामा तैयार कर कोर्ट में पेश किया था। मूल दावे में दिवंगत बड़ी बुआ पद्मावती राजे की दोनों बेटियों कनिका देवी सिंह और प्रतिमा देवी राना को पक्षकार तो बनाया गया था, लेकिन पूर्व में सुनवाई के दौरान उपस्थित न होने के कारण अदालत ने उन्हें 'एक्स पार्टी' (एकपक्षीय) घोषित कर दिया था। पर अब प्रतिमा देवी ने कोर्ट में आवेदन देकर प्रक्रिया में दोबारा शामिल होने और समझौते में अपना हक पाने की गुहार लगाई है। साथ ही वर्तमान समझौते प्रस्ताव पर आपत्ति जताई है। पद्मावती राजे भी संपत्ति में बराबर की हिस्सेदार थीं, इसलिए उनकी बेटियों को छोड़े जाने से यह राजीनामा कानूनी रूप से पेचीदा हो गया है। सिंधिया राजघराने की ₹41 हजार करोड़ की संपत्ति का विवाद ग्वालियर के सिंधिया राजघराने की ₹41 हजार करोड़ से अधिक की अचल संपत्तियों के बंटवारे को लेकर ग्वालियर जिला कोर्ट में चल रही कानूनी जंग अब बेहद दिलचस्प और उलझते मोड़ पर पहुंच गई है। इस ऐतिहासिक केस के पटाक्षेप के लिए 78 साल पुराना विलय पत्र यानी ‘द कोवेनेंट’ सबसे अहम दस्तावेज बनकर सामने आया है। दिल्ली के नोटरी द्वारा सर्टिफाइड ट्रू कॉपी के रूप में प्रमाणित यह दस्तावेज कोर्ट के सामने आ चुका है, जिसमें मध्य भारत की रियासतों के विलय, निजी संपत्तियों और राजाओं को मिलने वाले टैक्स फ्री ‘प्रिवी पर्स’ (वार्षिक भत्ते) का पाई-पाई का ब्योरा दर्ज है।

सीएम मोहन यादव से कुलगुरु की मुलाकात, जीवाजी विश्वविद्यालय की विकास योजनाओं पर हुई चर्चा

 ग्वालियर ग्वालियर में स्थित जीवाजी विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. दिवाकर सिंह राजपूत ने मंगलवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात की। इस दौरान विश्वविद्यालय के सुचारू संचालन, विकास योजनाओं, अकादमिक गतिविधियों और शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार समेत विभिन्न अहम विषयों पर दोनों के बीच चर्चा की गई। मुलाकात के दौरान विश्वविद्यालय के मौजूदा कार्यों के साथ – साथ भविष्य की विकास योजनाओं और संस्थागत प्रगति से जुड़े मुद्दों पर भी विचार-विमर्श हुआ। कुलगुरु प्रो. दिवाकर सिंह राजपूत ने मुख्यमंत्री से विश्वविद्यालय के संचालन और विकास की भावी योजनाओं के संबंध में मार्गदर्शन प्राप्त किया। चर्चा का प्रमुख केंद्र विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियों को बेहतर बनाना, शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करना और प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने जैसे विषय रहे। इन मुद्दों पर हुई चर्चा मुलाकात के दौरान विश्वविद्यालय में संचालित अकादमिक कार्यों के साथ – साथ संस्थागत विकास की संभावनाओं पर भी विचार साझा किए गए। उच्च शिक्षा के क्षेत्र में विश्वविद्यालय की भूमिका को मजबूत बनाने और शैक्षणिक गतिविधियों को अधिक प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई। ग्वालियर समेत बड़े इलाके में उच्च शिक्षा का एक प्रमुख संस्थान आपको बता दें कि, जीवाजी विश्वविद्यालय ग्वालियर समेत आसपास के इलाकों में उच्च शिक्षा का एक प्रमुख संस्थान है। ऐसे में विश्वविद्यालय के शैक्षणिक और प्रशासनिक कामकाज को बेहतर बनाने के लिए विकास योजनाओं का प्रभावी संचालन महत्वपूर्ण माना जाता है। विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार और संस्थागत विकास के प्रयास विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने की दिशा में अहम भूमिका निभा सकते हैं। शैक्षणिक और प्रशासनिक कार्यों को बेहतर पर चर्चा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ हुई इस मुलाकात को विश्वविद्यालय के संचालन और भावी विकास से जुड़े विषयों पर संवाद के रूप में देखा जा रहा है। मुलाकात के दौरान शैक्षणिक और प्रशासनिक कार्यों को बेहतर बनाने और विश्वविद्यालय की विकास संभावनाओं पर चर्चा की गई।हालांकि, मुलाकात के बाद किसी नई योजना, वित्तीय स्वीकृति या विशेष घोषणा की जानकारी सामने नहीं आई है।

गरबा पंडाल में प्रवेश को लेकर धीरेंद्र शास्त्री का सुझाव, सनातन हिंदू एकता रथयात्रा में दिया बयान

सागर बेटियो! तुम दुर्गा बनना, काली बनना, लेकिन कभी ना बुर्के वाली बनना। नवरात्र का पर्व चल रहा है। गरबा में धर्म विरोधी नाम बदलकर आएंगे, इसलिए गरबा पंडाल में बाहरी लोगों को गोमूत्र पिलाकर एंट्री दी जानी चाहिए। कम से कम उनकी घर वापसी तो हो जाएगी। यह बात बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कही। दरअसल, धीरेंद्र शास्त्री 11 अक्टूबर से सनातन हिंदू एकता रथयात्रा निकल रहे हैं, जो 13 अक्टूबर की रात सागर के गढ़ा कोटा पहुंची। यहां बस स्टैंड में कार्यक्रम के दौरान उन्होंने नवरात्र और गरबा का जिक्र करते हुए लोगों को सतर्क रहने की अपील की। शास्त्री का कहना था कि गरबा में कुछ लोग कालनेमि की तरह रूप बदलकर आते हैं। उन्होंने गढ़ा कोटा और सागर को लव जिहाद मुक्त बनाने की बात भी कही। साथ ही कहा कि वे साधु हैं, नेता नहीं; लोगों को जागरूक कर सकते हैं। गौरतलब है कि शास्त्री ने गरबा पंडाल में गोमूत्र पिलाकर एंट्री देने की बात दमोह में कही थी। जात-पात मिटाने और नशामुक्ति की अपील मंचीय कार्यक्रम के बाद रथयात्रा रहली की ओर रवाना हुई। रहली बायपास पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने यात्रा का स्वागत किया। इसके बाद यात्रा कड़ता गांव और ढाना सहित विभिन्न स्थानों से गुजरी। रास्ते में कई जगह पुष्प वर्षा कर स्वागत किया गया। रथ से शास्त्री ने कहा, “जात-पात की करो विदाई, हम सब हिंदू भाई-भाई।” उन्होंने हिंदुओं से एक-दूसरे के काम आने और लोगों से शराब छोड़कर अपने गांव को नशामुक्त बनाने की अपील की। यात्रा बम्होरी बीका, बम्होरी चौराहा और आरटीओ रोड से होते हुए रात करीब 2:30 बजे बालाजी मंदिर परिसर पहुंची। यहां दिव्य दरबार लगाया गया और यात्रा ने रात्रि विश्राम किया। जेन-जी के प्रदर्शन पर बोले- युवाओं को अपनी बात रखने का अधिकार मीडिया से चर्चा में धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि रथयात्रा के जरिए कम समय में अधिक स्थानों तक पहुंचा जा रहा है। उन्होंने कहा, “तनातनी नहीं, सनातनी रहें और एक रहेंगे, नेक रहेंगे।” दिल्ली में जेन-जी के प्रदर्शन को लेकर उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में युवाओं को अपनी बात रखने का अधिकार है। हालांकि, उन्हें यह भी ध्यान रखना चाहिए कि देश की छवि खराब न हो। आज मकरोनिया से बंडा पहुंचेगी रथयात्रा 14 अक्टूबर को सुबह 8 बजे पूजा-अर्चना, राष्ट्रगान, राष्ट्रगीत और ध्वजारोहण के बाद यात्रा आगे रवाना होने का कार्यक्रम है। यात्रा मोती नगर चौराहे, ओम स्टील, रेलवे ब्रिज और भगवानगंज होते हुए मकरोनिया पहुंचेगी। यहां रजाखेड़ी चौराहे पर स्वागत कार्यक्रम होगा। इसके बाद यात्रा बंडा के लिए रवाना होगी। कर्रापुर में मंचीय कार्यक्रम के बाद रथयात्रा बंडा पहुंचेगी।

मध्यप्रदेश के बस यात्रियों को मिलेगी ऑनलाइन टिकट बुकिंग की सुविधा, टिकट नहीं देने वाले कंडक्टर पर भी होगी कार्रवाई

भोपाल  मध्य प्रदेश में बस से सफर करने वाले यात्रियों के लिए जल्द ही एक बड़ी सुविधा शुरू होने वाली है। रेलवे के आईआरसीटीसी की तर्ज पर अब मोबाइल एप के जरिए घर बैठे बस टिकट बुक करने की तैयारी की जा रही है।मध्य प्रदेश यात्री परिवहन एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (एमपी-वायपीआईएल) द्वारा मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के तहत यह आधुनिक मोबाइल एप तैयार कराया जा रहा है। इस सेवा की शुरुआत सबसे पहले भोपाल और इंदौर के आईएसबीटी से किए जाने की योजना है। इसके जरिए यात्री घर बैठे बस का रूट, चढ़ने का स्थान और गंतव्य चुनकर टिकट बुक कर सकेंगे। शुरुआत भोपाल और इंदौर के आईएसबीटी से करने की तैयारी है। हालांकि, एप का नाम, डाउनलोड लिंक और बुकिंग शुरू होने की तारीख अभी घोषित नहीं हुई है।योजना में टिकट बुकिंग के साथ बसों की निगरानी, जीपीएस और कैमरे चालू रखने और टिकट नहीं देने वाले कंडक्टर पर कार्रवाई का प्रावधान भी शामिल है। यात्रियों के लिए सबसे अहम सवाल यह है कि टिकट किस एप पर मिलेगा, बुकिंग के समय कितना पैसा देना होगा, बस कहां से मिलेगी और किसी कारण से बस छूट जाने पर उसी टिकट से अगली बस में सफर कर सकेंगे या नहीं। उपलब्ध जानकारी में इन सभी सवालों के अंतिम नियम अभी स्पष्ट नहीं हैं। सरकार जल्द ही एप लॉन्च करने वाली है। किस एप पर मिलेगा टिकट? मध्य प्रदेश यात्री परिवहन एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (एमपी-वायपीआईएल) आईआरसीटीसी की तर्ज पर मोबाइल एप तैयार करा रही है। अभी एप का आधिकारिक नाम, गूगल प्ले स्टोर या एपल एप स्टोर का लिंक और वेबसाइट की जानकारी जारी नहीं हुई है। इसलिए फिलहाल किसी अनधिकृत एप या लिंक से टिकट बुक करने से बचें। आधिकारिक जानकारी परिवहन विभाग या सेवा संचालित करने वाली एजेंसी की घोषणा के बाद ही मिलेगी। क्या टिकट बुक करते समय ही पूरा किराया देना होगा? ऑनलाइन टिकट बुकिंग में भुगतान की व्यवस्था प्रस्तावित है। योजना के मुताबिक, टिकट की राशि सीधे संबंधित बस ऑपरेटर के खाते में जमा होगी। एप के संचालन के लिए टिकट राशि पर 0.1 से 0.2 प्रतिशत तक कन्विनियंस फीस लेने की व्यवस्था पर भी काम हो रहा है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि हर टिकट के लिए पूरा किराया बुकिंग के समय ही देना होगा या कोई दूसरा विकल्प भी मिलेगा। यूपीआई, डेबिट-क्रेडिट कार्ड, नेट बैंकिंग या वॉलेट में से कौन-कौन से भुगतान विकल्प होंगे, इसकी आधिकारिक जानकारी भी सामने नहीं आई है। कन्विनियंस फीस किस पर और किस तरह लागू होगी, यह भी अंतिम नियमों से स्पष्ट होगा। बस छूट गई तो क्या दूसरी बस में टिकट मान्य होगा? यह यात्रियों के लिए सबसे जरूरी सवालों में से एक है। अभी यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि टिकट किसी खास बस और समय के लिए होगा या उसी रूट पर अगली बस में भी मान्य रहेगा। टिकट बदलने, यात्रा की तारीख या समय में बदलाव, कैंसिलेशन और रिफंड के नियम भी घोषित नहीं हुए हैं। इसलिए यात्रियों को यह मानकर नहीं चलना चाहिए कि एक बस छूटने पर उसी टिकट से दूसरी बस में सफर किया जा सकेगा। बुकिंग शुरू होने से पहले इन नियमों की स्पष्ट जानकारी लेना जरूरी होगा। मोबाइल एप और टिकट बुकिंग से जुड़ी मुख्य बातें सुगम परिवहन सेवा: इस नई व्यवस्था के तहत यात्री घर बैठे ही बस का रूट, चढ़ने का स्थान (बोर्डिंग पॉइंट) और अपने गंतव्य का चयन कर ऑनलाइन टिकट बुक कर सकेंगे। हालांकि, अभी एप का आधिकारिक नाम, डाउनलोड लिंक और लॉन्चिंग की तारीख घोषित नहीं की गई है। सुरक्षा और निगरानी: इस योजना के तहत बसों में जीपीएस और कैमरे हर समय चालू रखना अनिवार्य किया गया है, जिससे बसों की लाइव लोकेशन और सुरक्षा पर नजर रखी जा सके। कंडक्टर और यात्रियों पर सख्त कार्रवाई: सुगम परिवहन सेवा के नियमों के तहत यदि कोई कंडक्टर किराया लेने के बावजूद यात्री को टिकट नहीं देता है, तो उस पर केस दर्ज करने और जुर्माने का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा, बिना टिकट यात्रा करते पकड़े जाने पर संबंधित यात्री पर भी कार्रवाई की जाएगी। ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर की सौगात: सड़क हादसों पर अंक लगाने और चालकों को प्रशिक्षित करने के लिए प्रदेश में 38 नए ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर स्थापित किए जा रहे हैं। इनमें भोपाल, ग्वालियर, उज्जैन, छतरपुर और बैतूल में पांच रीजनल ड्राइविंग सेंटर शामिल हैं। यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण सलाह परिवहन विभाग या आधिकारिक एजेंसी द्वारा एप का नाम और लिंक जारी होने तक किसी भी अनधिकृत या फर्जी एप से टिकट बुक करने से बचने की सलाह दी जाती है। बुकिंग, भुगतान के तरीकों, रिफंड और बस छूटने पर टिकट की वैधता से जुड़े स्पष्ट नियम आधिकारिक घोषणा के बाद ही सामने आएंगे। बस कहां से मिलेगी, स्टॉपेज कैसे पता चलेगा? प्रस्तावित एप में निर्धारित बस स्टैंड, अधिकृत स्टॉपेज और गंतव्य के अनुसार टिकट बुक करने की सुविधा होगी। यानी यात्री को अपनी यात्रा के लिए तय चढ़ने और उतरने का स्थान चुनना होगा। पहले चरण में भोपाल और इंदौर के आईएसबीटी से सेवा शुरू करने की तैयारी है। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि यात्री किसी भी अधिकृत स्टॉपेज से बस पकड़ सकेंगे या कुछ रूटों पर केवल आईएसबीटी से ही बोर्डिंग होगी। बस का सटीक प्लेटफॉर्म, स्टॉपेज की लोकेशन और बस की लाइव लोकेशन टिकट बुकिंग एप पर दिखाई जाएगी या नहीं, यह भी अंतिम सुविधाओं की घोषणा के बाद पता चलेगा। टिकट नहीं देने वाले कंडक्टर पर केस, बिना टिकट यात्री पर भी कार्रवाई सुगम परिवहन सेवा में किराया लेने के बाद टिकट नहीं देने वाले कंडक्टर के खिलाफ केस और जुर्माने का प्रावधान प्रस्तावित है। बिना टिकट यात्रा करते पकड़े जाने पर यात्री पर भी जुर्माना और कार्रवाई हो सकती है। जुर्माने की राशि, जांच की प्रक्रिया और कार्रवाई करने वाले अधिकारियों के अधिकार अभी स्पष्ट नहीं हैं। यात्रियों के लिए जरूरी है कि किराया देने के बाद टिकट जरूर लें और यात्रा पूरी होने तक उसे संभालकर रखें। डिजिटल टिकटिंग से टिकट बिक्री और भुगतान का रिकॉर्ड रखने में मदद मिल सकती है। बसों में जीपीएस और कैमरे चालू रखना अनिवार्य योजना में शामिल निजी बसों में जीपीएस और कैमरा सिस्टम चालू … Read more

IAS संकेत भोंडवे को बड़ी जिम्मेदारी: मध्य प्रदेश भवन दिल्ली के आवासीय आयुक्त का अतिरिक्त प्रभार मिला

भोपाल प्रशासनिक अनुभव, दिल्ली में काम करने की पृष्ठभूमि और केंद्र सरकार के साथ समन्वय की जरूरत—इन पहलुओं के बीच मध्य प्रदेश सरकार ने आईएएस अधिकारी संकेत भोंडवे को एक महत्वपूर्ण अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी है। नगरीय प्रशासन एवं विकास आयुक्त भोंडवे अब मध्य प्रदेश भवन, नई दिल्ली में आवासीय आयुक्त का अतिरिक्त प्रभार भी संभालेंगे। भारतीय प्रशासनिक सेवा के 2007 बैच के अधिकारी संकेत भोंडवे दिल्ली में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के निजी सचिव के रूप में काम कर चुके हैं। उनके इस पूर्व अनुभव को नई जिम्मेदारी के लिहाज से प्रासंगिक माना जा रहा है। दिल्ली में समन्वय, भोपाल में योजनाओं पर नजर राज्य सरकार की अनेक विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में केंद्रीय मंत्रालयों के साथ तालमेल की जरूरत होती है। योजनाओं से संबंधित प्रस्तावों, स्वीकृतियों और लंबित मामलों पर समन्वय स्थापित करना इस प्रक्रिया का अहम हिस्सा है। आवासीय आयुक्त के रूप में संकेत भोंडवे की भूमिका इस दिशा में महत्वपूर्ण हो सकती है। सिंहस्थ बनेगा प्रमुख प्राथमिकताओं में से एक? मध्य प्रदेश में सिंहस्थ मेले की तैयारियां नगरीय प्रशासन एवं आवास विभाग के लिए महत्वपूर्ण जिम्मेदारी हैं। संकेत भोंडवे इस विभाग के आयुक्त हैं। ऐसे में दिल्ली में अतिरिक्त प्रभार मिलने से सिंहस्थ से संबंधित मामलों में केंद्र सरकार के साथ संवाद और समन्वय स्थापित करने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं। हालांकि, इस नियुक्ति से योजनाओं को कितनी तेजी मिलेगी, यह संबंधित प्रस्तावों, केंद्रीय स्वीकृतियों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं पर निर्भर करेगा। प्रशासनिक जिम्मेदारियों में बदलाव मध्य प्रदेश भवन में आवासीय आयुक्त की जिम्मेदारी पहले अपर मुख्य सचिव रश्मि अरुण शमी के पास थी। अब उन्हें विशेष आयुक्त समन्वय का दायित्व सौंपा गया है। संकेत भोंडवे के सामने अब प्रदेश में नगरीय प्रशासन से जुड़े कार्यों के साथ दिल्ली में राज्य सरकार के मामलों के समन्वय की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी होगी।