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रीवा में जल प्रदाय एवं सीवरेज परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा

भोपाल  उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय में रीवा शहर में संचालित जल प्रदाय योजना एवं सीवरेज परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने कार्यों की वर्तमान स्थिति, गुणवत्ता, समय-सीमा और वित्तीय विषयों पर विस्तार से चर्चा कर अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सभी कार्य तय समय-सीमा में पूरे किए जाएँ, जिससे नागरिकों को समय पर बेहतर सुविधाएँ मिल सकें।बैठक में अपर मुख्य सचिव नगरीय विकास एवं आवास  संजय दुबे, आयुक्त  संकेत भोंडवे तथा नगर निगम रीवा के आयुक्त  अक्षत जैन सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने जल प्रदाय व्यवस्था के अधूरे कार्यों को शीघ्र पूरा करने पर जोर दिया। उन्होंने विशेष रूप से ओवरहेड वाटर टैंक के निर्माण और जल वितरण नेटवर्क के विस्तार को आगामी वर्षा ऋतु से पहले पूर्ण करने के निर्देश दिए। साथ ही उन्होंने कहा कि कार्यों की निरंतर निगरानी सुनिश्चित की जाए, जिससे समयबद्ध क्रियान्वयन में किसी प्रकार की बाधा न आए। उन्होंने यह भी कहा कि निर्माण कार्यों के दौरान आमजन की दिनचर्या प्रभावित न हो, इसके लिए कार्यों को सुव्यवस्थित एवं चरणबद्ध तरीके से किया जाए। नागरिकों की सुविधा और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर भी उन्होंने बल दिया। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने सीवरेज कार्यों की समीक्षा करते हुए शेष पाइपलाइन बिछाने और हाउस सर्विस कनेक्शनों को प्राथमिकता के साथ जल्द पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि स्वच्छता और जनस्वास्थ्य के दृष्टिकोण से सीवरेज नेटवर्क का समय पर पूरा होना अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके साथ ही उन्होंने एसटीपी निर्माण कार्य को भी शीघ्र गति से पूरा करने के निर्देश दिए।  

विद्यालयों में परिपूर्ण जीवन शिक्षा की ओर कदम – आनंद सभा कार्यशालाए

भोपाल  राज्य आनंद संस्थान द्वारा प्रदेश में शिक्षा को मानवीय एवं मूल्य-आधारित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के अंतर्गत प्रदेश के शासकीय स्कूली शिक्षकों के लिये 6 दिवसीय आवासीय कार्यशालाओं की श्रृंखला आयोजित की जा रही है, जिसका शुभारंभ वाल्मी, ईटीसी सेंटर नीलबड़ और राज्य आनंद संस्थान में मुख्य कार्यपालन अधिकारी  आशीष कुमार ने किया। इस व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत कुल 18 कार्यशालाएँ आयोजित होंगी, जिनमें प्रदेश के सभी जिलों से लगभग 2160 शिक्षक सहभागिता करेंगे। राज्य आनंद संस्थान के मुख्य कार्यकारी अधिकारी  आशीष कुमार ने कहा कि आनंद सभा के अंतर्गत हमारा लक्ष्य है कि विद्यालयों में आनंद सभा के माध्यम से विद्यार्थियों को जीवन के गहरे मूल्यों से जोड़ा जाए। यह पहल शिक्षा व्यवस्था में एक सांस्कृतिक परिवर्तन का प्रयास है। जब शिक्षक स्वयं इन मूल्यों को आत्मसात करेंगे, तभी वे विद्यार्थियों तक इन्हें प्रभावी ढंग से पहुँचा पाएंगे। आनंद सभा मूल्य आधारित शिक्षा की दिशा में एक महत्वाकांक्षी सतत प्रयास है। राज्य आनंद संस्थान के निदेशक  सत्यप्रकाश आर्य ने कहा कि आनंद सभा विद्यालयों में विद्यार्थियों के समग्र विकास और आंतरिक आनंद का एक सशक्त माध्यम है। यह केवल शिक्षा का विस्तार नहीं, बल्कि जीवन मूल्यों की ओर एक यात्रा है। कार्यशालाओं के माध्यम से हम शिक्षकों को तैयार कर रहे हैं, जिससे वे विद्यार्थियों को आत्मविश्वास, सहयोग और जिम्मेदारी की भावना से जोड़ सकें। आनंद सभा विद्यार्थियों को केवल सफल नागरिक ही नहीं, बल्कि संवेदनशील और जिम्मेदार इंसान बनाने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है। यह पहल शिक्षा प्रणाली को केवल विषयगत ज्ञान तक सीमित न रखते हुए उसे जीवन-कौशल, आंतरिक आनंद एवं समग्र व्यक्तित्व विकास से जोड़ने का प्रयास है। विद्यालयीन शिक्षा विद्यार्थी के भावी जीवन को दक्षता से जीने का आधार बनाती है। इन कार्यशालाओं में प्रदेश के सभी जिलों से चयनित शिक्षक भाग ले रहे हैं। यह प्रशिक्षण उन्हें विद्यालयों में आनंद सभा के संचालन के लिये तैयार करेगा। कुल 18 कार्यशालाएँ आयोजित की जा रही हैं। प्रत्येक कार्यशाला 6 दिन की आवासीय अवधि में होगी। इसमें प्रदेश के सभी जिलों से लगभग 2160 शिक्षक भाग लेंगे। प्रशिक्षण में संवाद सत्र, समूह चर्चा, समझ-सुविधा-संबंध की चर्चा, अभ्यास पुस्तिका की गतिविधियाँ और विद्यार्थियों के साथ सकारात्मक संवाद की तकनीकें शामिल होंगी। आनंद सभा का महत्व विद्यालयीन शिक्षा विद्यार्थियों को दक्षता से जीवन जीने का आधार प्रदान करती है। लेकिन शिक्षा का उद्देश्य केवल सफलता तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों को परिपूर्ण जीवन जीने के योग्य बनाना भी है। इसी दृष्टि से राज्य आनंद संस्थान ने आनंद सभा की परिकल्पना की है। आनंद सभा में विद्यार्थी किसी विषय की पढ़ाई नहीं करते, बल्कि जीवन कौशल और मानवीय मूल्यों को अनुभवात्मक गतिविधियों के माध्यम से समझते हैं। इसमें संवाद, सहयोग, क्षमा, कृतज्ञता, संकल्प शक्ति, समाज और प्रकृति के प्रति उत्तरदायित्व जैसी गतिविधियाँ शामिल होती हैं। इसका उद्देश्य है कि विद्यार्थी केवल सफल ही नहीं, बल्कि मानसिक और भावनात्मक रूप से सशक्त होकर परिपूर्ण जीवन जी सकें। साथ ही जीवन के विभिन्न आयामों स्वयं, परिवार, समाज एवं प्रकृति के साथ हमारे संबंधों और जिम्मेदारियों को समझने का अवसर मिलता है। कार्यशाला के सत्रों में सार्वभौमिक मानवीय मूल्यों पर विशेष बल दिया जाता है। स्वयं और शरीर के अंतर को समझना, संबंधों में संवेदनशीलता विकसित करना, क्षमा मांगने और क्षमा करने का महत्व, कृतज्ञता का भाव, दूसरों की सहायता करने की प्रवृत्ति, तथा संकल्प शक्ति का सकारात्मक उपयोग जैसे विषयों को अनुभवात्मक गतिविधियों के माध्यम से सिखाया जाता है। इन गतिविधियों का उद्देश्य केवल सैद्धांतिक ज्ञान देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के भीतर आंतरिक परिवर्तन की प्रक्रिया को प्रारंभ करना है। जब विद्यार्थी इन मूल्यों को अनुभव के स्तर पर समझने लगते हैं, तो उनका व्यवहार, दृष्टिकोण और जीवनशैली सकारात्मक रूप से परिवर्तित होने लगती है।  

ग्वालियर प्रदेश के एजुकेशन हब के रूप में नई पहचान गढ़ने की ओर अग्रसर है

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि ऐतिहासिक नगरी ग्वालियर प्राचीन काल से ही वीरता, विद्वता और कला का शिखर रही है। ऋषि गालव विश्वविद्यालय की स्थापना के साथ ही ग्वालियर प्रदेश के एजुकेशन हब के रूप में नई पहचान गढ़ने की ओर अग्रसर है। एक विश्वविद्यालय शिक्षा का केन्द्र होने के साथ ही राष्ट्र निर्माण का भी स्थल होता है। ऋषि गालव के नाम पर बनने वाला यह संस्थान हमारी आने वाली पीढ़ियों को संस्कार, संस्कृति और कौशल से सुसज्जित कर राष्ट्र निर्माण का अग्रदूत बनाएगा। मध्य भारत शिक्षा समिति के संस्थापक श्रद्धेय सदाशिव गणेश गोखले का त्याग पूजनीय है, उन्होंने 85 वर्ष पहले 21 जुलाई 1941 को इस समिति नींव रख पराधीनता के कठिन काल में शिक्षा की अलख जगाने का संकल्प लिया। एक स्कूल से शुरू हुआ यह सफर चार महाविद्यालयों, पांच विद्यालयों और एक खेल अकादमी तक पहुंचा। वर्तमान में विभिन्न संस्थाओं में 5 हजार से अधिक विद्यार्थी पढ़ रहे हैं। ऋषि गालव विश्वविद्यालय में भारतीय ज्ञान परम्परा के साथ आधुनिक विज्ञान और टेक्नोलॉजी की शिक्षा भी छात्रों को मिलेगी। इसका लक्ष्य ऐसा नागरिक तैयार करना है, जो ज्ञानवान, चरित्रवान, नवाचारी और समाज के लिए उत्तरदायी हों। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ऋषि गालव विश्वविद्यालय के भूमिपूजन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। नई शिक्षा नीति के तहत विद्यार्थियों में योग्यता, दक्षता और चरित्र निर्माण पर दिया जा रहा है विशेष ध्यान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भगवान कृष्ण, कंस वध के बाद शिक्षा ग्रहण करने उज्जैन पधारे और इस दौरान उन्होंने सुदामा से मित्रता की अद्भुत मिसाल प्रस्तुत की। यह इस बात का संकेत है कि गरीब-अमीर के बीच कोई परदा नहीं होना चाहिए। इसी समय हमें द्रोणाचार्य और द्रुपद के संदर्भ से शिक्षा के दुरूपयोग का उदाहरण भी प्राप्त होता है, परंतु नालंदा, तक्षशिला विश्वविद्यालयों के माध्यम से मानवता के मूल्यों के प्रसार का उदाहरण भी भारतीय ज्ञान परम्परा में विद्यमान है। इसी भाव का अनुसरण करते हुए प्रदेश में सांदीपनि विद्यालयों के माध्यम से नई शिक्षा नीति के तहत विद्यार्थियों में योग्यता, दक्षता और चरित्र निर्माण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने पश्चिम बंगाल का संदर्भ देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में देश की सीमाओं तक राष्ट्रवादी विचारों का विस्तार लगातार जारी है। काले कोट के स्थान पर साफे के साथ भारतीय वेशभूषा में दीक्षांत समारोह की परम्परा की गई आरंभ मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ऋषि गालव विश्वविद्यालय सरकार और समाज के साझा प्रयासों का एक सजीव उदाहरण बनेगा। राष्ट्रवादी विचारों को समर्पित इस विश्वविद्यालय की पूर्ण गौरव और गरिमा के साथ स्थापना में राज्य सरकार हरसंभव सहयोग प्रदान करेगी। शिक्षा जीवन की सबसे बड़ी पूंजी इै, इसे आधार मानकर उच्च शिक्षा के क्षेत्र में कई नवाचार किए हैं। इस क्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति को कुलगुरू का सम्मानजनक और श्रद्धापूर्ण संबोधन प्रदान किया गया है। संपूर्ण प्रदेश में गुरू पूर्णिमा का आयोजन भी इसी क्रम का नवाचार है। काले कोट के स्थान पर साफे के साथ भारतीय वेशभूषा में दीक्षांत समारोह की परम्परा आरंभ की गई। पहले कई-कई वर्षों तक दीक्षांत समारोह आयोजित नहीं होते थे, अब हर साल हर विश्वविद्यालय में दीक्षांत समारोह किए जा रहे हैं। तात्या टोपे, क्रांतिसूर्य टंट्या भील और रानी अवंतीबाई लोधी के नाम पर आरंभ किए गए विश्वविद्यालय मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि गुना में तात्या टोपे विश्वविद्यालय और खरगोन में क्रांतिसूर्य टंट्या भील विश्वविद्यालय स्थापित किया गया। सागर में केन्द्रीय विश्वविद्यालय पहले से ही था, इसके साथ ही राज्य सरकार द्वारा रानी अवंतीबाई लोधी विश्वविद्यालय आरंभ किया गया। प्रदेश के सभी 55 जिलों में पीएम कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना कर इन्हें नई शिक्षा नीति के अनुरूप बहुसंकाय कॉलेजों के रूप में विकसित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मध्य भारत शिक्षा समिति को ऋषि गालव की गौरवशाली परम्परा को विश्वविद्यालय के रूप में पुनर्जीवित करने के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय अगले साल गुरूपूर्णिमा तक आरंभ करने का संकल्प पूर्ण हो यही कामना है। मनुष्य के साथ परिवेष का विकास ही वास्तविक विकास है-  सुरेश सोनी मुख्य वक्ता एवं राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारिणी समिति के सदस्य  सुरेश सोनी ने कहा कि सड़क, भवन व अन्य अधोसंरचनाओं का निर्माण एवं आविष्कार केवल परिवेश का विकास है। वास्तविक विकास वह होता है जिसमें मनुष्य के साथ परिवेश का भी विकास हो। मनुष्य अधिक संवेदनशील, विचारवान व व्यापक दृष्टिकोण वाले हों। इसी पुनीत उद्देश्य को लेकर मध्यभारत शिक्षा समिति द्वारा ऋषि गालव विश्वविद्यालय की स्थापना की जा रही है। विश्वविद्यालय द्वारा रोजगारपरक शिक्षा के साथ-साथ मनुष्य के चरित्र निर्माण पर भी जोर दिया जायेगा। साथ ही भरोसा जताया कि यहाँ पढ़कर निकले विद्यार्थी नालंदा व तक्षशिला विश्वविद्यालय की तरह विश्वभर में भारतीय ज्ञान का परचम लहरायेंगे। उन्होंने कहा कि खुशी की बात है सरकार द्वारा नई शिक्षा नीति भी इसी भावना के साथ बनाई गई है कि ज्ञान, चरित्र व संस्कार के साथ युवा अपने पैरों पर खड़े हों। साथ ही दूसरों को भी रोजगार व नौकरी देने वाले बनें।  सोनी ने उपकरण एवं गैजेट्स इत्यादि पर अत्यधिक निर्भरता पर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि चेतन व अचेतन के समन्वय से हम आगे बढ़ेंगे तो अच्छा परिवार, अच्छा समाज व अच्छा देश तैयार कर सकेंगे। साथ ही पर्यावरण जैसी समस्याओं के समाधान का मार्ग भी हम निकाल सकेंगे। उन्होंने कहा हमारी दृष्टि ऐसी होना चाहिए जो आधुनिकता व मूल परंपरा के साथ समन्वय बनाकर विकास का मार्ग प्रशस्त करती हो।  सोनी ने कहा कि एआई का उपयोग तो करें पर अपने बौद्धिक कौशल को कम न होने दें। केवल सैन्य शक्ति की बदौलत देश महान नहीं बनते :  अशोक पाण्डे कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ मध्यभारत प्रांत के संघचालक  अशोक पाण्डे ने कहा कोई भी देश केवल सैन्य शक्ति की बदौलत महान नहीं बन सकता। महान बनने के लिए शिक्षा व संस्कारों की जरूरत होती है। ऋषि गालव विश्वविद्यालय की स्थापना इसी भाव के साथ की जा रही है। शिक्षा का मुख्य उद्देश्य श्रेष्ठतम जीवन मूल्यों की स्थापना है : उच्च शिक्षा मंत्री  परमार उच्च शिक्षा मंत्री  इन्दर सिंह परमार ने कहा कि श्रेष्ठतम जीवन मूल्यों को स्थापित करना शिक्षा का मुख्य उद्देश्य होता है। … Read more

पीएम-कुसुम योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिये दो दिवसीय क्षमता निर्माण कार्यशाला

भोपाल नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री  राकेश शुक्ला ने कहा है कि प्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशा अनुसार पूरी ऊर्जा के साथ कार्य करें। हमें प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी द्वारा वर्ष 2030 के लिये तय किये गये लक्ष्य को हासिल करने में मध्यप्रदेश को अग्रणी बनाना है। मंत्री  शुक्ला ने कहा कि लक्ष्य की प्राप्ति के मार्ग में आने वाली सभी बाधाओं को हम सब मिलकर दूर करेंगे। मंत्री  शुक्ला पीएम-कुसुम योजना (कंपोनेंट ‘अ’ एवं ‘स’) के अंतर्गत सौर ऊर्जा परियोजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन एवं संचालन के लिए दो दिवसीय क्षमता निर्माण कार्यशाला के शुभारंभ अवसर पर संबोधित कर रहे थे। कार्यशाला में अपर मुख्य सचिव  मनु वास्तव, एमडी मध्यप्रदेश ऊर्जा विकास निगम  अमनवीर सिंह बैंस, जीआईजेड के प्रोजेक्ट हेड  बर्नार्ड और सोलर एनर्जी डेवलपर्स मौजूद थे। कार्यशाला में मंत्री  शुक्ला एवं अन्य अतिथियों ने कुसुम योजना अंतर्गत स्थापित किए जाने वाले सौर संयंत्रों के ग्रिड पर लोड संबंधी रिपोर्ट का विमोचन भी किया। मंत्री  शुक्ला ने कहा कि मध्यप्रदेश में सौर ऊर्जा परियोजनाओं का विस्तार तीव्र गति से हो रहा है। राज्य सरकार द्वारा पीएम-कुसुम योजना के अंतर्गत सौर परियोजनाओं को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक नीतिगत समर्थन प्रदान किया जा रहा है, जिससे किसानों एवं उपभोक्ताओं को लाभ मिल रहा है। उन्होंने कहा कि सौर ऊर्जा परियोजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिये पॉवर परचेज एग्रीमेंट की प्रक्रियाओं को सरल एवं पारदर्शी बनाया जा रहा है तथा डेवलपर्स को समयबद्ध स्वीकृतियां प्रदान करने पर विशेष बल दिया जा रहा है। इससे परियोजनाएं निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण हो सकेंगी। मंत्री  शुक्ला ने बताया कि राज्य में वृहद स्तर पर सौर ऊर्जा क्षमता विकसित की जा रही है। इसके लिए तकनीकी मूल्यांकन, ग्रिड समन्वय एवं आवश्यक आधारभूत संरचना के सुदृढ़ीकरण पर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सौर परियोजनाओं में आने वाली तकनीकी एवं संचालन संबंधी चुनौतियों के समाधान के लिए विशेषज्ञ संस्थाओं के सहयोग से कार्य किया जा रहा है। मंत्री  शुक्ला ने कहा कि इस प्रकार की कार्यशालाएं डेवलपर्स, यूटिलिटीज एवं अन्य हितधारकों के लिए उपयोगी मंच प्रदान करती हैं, जहां वे अपने अनुभव साझा कर बेहतर समाधान प्राप्त कर सकते हैं। एसीएस नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा  वास्तव ने कहा कि पीएम-कुसुम योजना में सौर ऊर्जा परियोजनाओं का क्रियान्वयन राज्य में सुनियोजित एवं चरणबद्ध तरीके से किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि बड़े पैमाने पर परियोजनाओं के विकास के साथ-साथ उनके तकनीकी एवं वाणिज्यिक पक्षों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। एमडी ऊर्जा विकास निगम  बैंस ने कार्यशाला के उद्देश्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य डेवलपर्स, यूटिलिटीज एवं अन्य संबंधित हितधारकों की तकनीकी दक्षता को सुदृढ़ करना है, जिससे सौर ऊर्जा परियोजनाओं के गुणवत्तापूर्ण एवं प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित किया जा सके। प्रदेश में “सूर्य मित्र कृषि फीडर योजना” के अंतर्गत 493 उपकेंद्रों के माध्यम से लगभग 4022 मेगावाट सौर ऊर्जा परियोजनाओं की स्थापना प्रस्तावित है। इन परियोजनाओं के सफल क्रियान्वयन के लिये जीआईजेड, पीआरडीसी एवं आई-डेक की टीमें उपकेंद्रों के तकनीकी एवं कंडिशनल आंकलन का कार्य कर रही हैं। कार्यशाला में रिएक्टिव पॉवर मैनेजमेंट, ग्रिड स्टडीज, टाइम सीरीज लोड फ्लो विश्लेषण, सोलर पीवी प्रोजेक्ट डेवलपमेंट, गुणवत्ता प्रबंधन, सोलर मॉड्यूल की कार्यक्षमता एवं प्रदर्शन तथा जोखिम प्रबंधन सहित विभिन्न तकनीकी विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा विस्तृत जानकारी दी जा रही है। विकासकों द्वारा अपने अनुभव भी साझा किये जा रहे हैं। मंगलवार को कार्यशाला का समापन होगा।  

भारत को विकसित बनाने में विद्यार्थी करें सहभागिता

भोपाल  राज्यपाल  मंगुभाई पटेल ने कहा है कि समाज की सेवा में ही जीवन की सार्थकता है। समाज सेवा द्वारा वंचित वर्ग का व्यक्ति राज्यपाल बन सकता है। चायवाला प्रधानमंत्री बन सकता है। भारतीय संस्कृति के ध्येय 'वसुधैव कुटुम्बकम्' के अनुसार शिक्षित व्यक्ति का परम कर्तव्य वंचितों और गरीबों की खुशहाली और उत्थान के लिए कार्य करना है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा है कि आत्मविश्वासी, नवाचारी और जिम्मेदार नागरिक के रूप में अपनी शिक्षा और प्रतिभा के द्वारा आत्मनिर्भर, समृद्ध, सशक्त और विकसित भारत बनाने में सहभागिता करें। राज्यपाल  पटेल एल.एन.सी.टी. विश्वविद्यालय के पाँचवें दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने सांसद  रवि किशन, सांसद  राजीव शुक्ला, सांसद  देवूसिंग चौहान, फिल्म अभिनेता एवं कास्टिंग डायरेक्टर  मुकेश छाबड़ा, सेज समूह के चेयरमैन  संजीव अग्रवाल को डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी की मानद उपाधि से विभूषित किया। फार्मेसी, विधि, इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट, पत्रकारिता और मेडिकल साइंस के क्षेत्र में पी.एच.डी. उपाधि और स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को उपाधि प्रदान की। अतिथियों द्वारा विश्वविद्यालय की दीक्षांत स्मारिका और  जय नारायण चौकसे की आत्मकथा पुस्तक का लोकार्पण किया। कार्यक्रम के अंत में अतिथियों का स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मान किया गया। राज्यपाल  मंगुभाई पटेल ने कहा कि दीक्षांत शपथ भावी जीवन की मार्गदर्शिका है। प्राप्त उपाधि मन, वचन और कर्म से देश, समाज और मानव जाति की सेवा करने का संकल्प है, जिसका पालन 365 दिन करना दीक्षित विद्यार्थियों का दायित्व है। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी जी द्वारा लागू राष्ट्रीय शिक्षा नीति परिवर्तनकारी कदम है। नीति ने शिक्षण प्रक्रियाओं को अधिक प्रभावी, व्यावहारिक और परिणामोन्मुखी बनाया है। उन्होंने नीति के परिप्रेक्ष्य में तकनीकी संस्थानों की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया है। विश्वविद्यालयों से पारंपरिक शिक्षण पद्धतियों से आगे बढ़कर आधुनिक आयामों को अपनाने की आवश्यकता बताई है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय पाठ्यक्रमों को समयानुकूल बनाएं। शिक्षा को केवल डिग्री तक सीमित नहीं रखा जाए। विद्यार्थियों की सृजनात्मकता एवं नवाचार को राष्ट्र निर्माण की आधारशिला बनाएं। उन्होंने उभरती प्रौद्योगिकियों जैसे ए.आई., डेटा साइंस, साइबर सुरक्षा और हरित तकनीकों को शिक्षा का अभिन्न अंग बनाने पर बल दिया। विद्यार्थियों में सैद्धांतिक ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक, समसामयिक और वैश्विक मानकों के अनुरूप समस्याओं के समाधान की क्षमता विकसित करने की आवश्यकता बताई है। उन्होंने विश्वविद्यालय को विद्यार्थियों को वास्तविक जीवन से जोड़ने के लिए प्रोजेक्ट आधारित शिक्षण, इंटर्नशिप, उद्यमिता और कौशल विकास के अवसर उपलब्ध कराकर “‘जॉब सीकर’ नहीं, बल्कि ‘जॉब प्रोवाइडर’” बनाने के लिए कहा है। विद्यार्थियों का अपनी प्रतिभा और चिंतन से समाज, राष्ट्र और स्वयं के उत्थान में योगदान देने का आह्वान किया गया। राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण, विमुक्त घुमन्तु और अर्द्धघुमन्तु कल्याण मती कृष्णा गौर ने कहा कि समारोह में दीक्षित हर विद्यार्थी शिक्षा, संस्कार, नवाचार, कौशल का पुंज है। राष्ट्र के विकास के लिए उत्तरदायी है। उन्होंने कहा कि युग दृष्टा प्रधानमंत्री ने युवा पीढ़ी की योग्यता और दायित्वबोध को पहचानते हुए विकसित भारत एट 2047 का संकल्प लिया है। संकल्प की सफलता के लिए हर युवा को सकारात्मकता, नवाचार और मानवीय मूल्यों के साथ राष्ट्र के लिए समर्पित होना होगा। उन्होंने कहा कि प्राप्त उपाधि समाज के लिए उत्तरदायित्व का प्रतीक है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपेक्षा की है कि मंचासीन विभूतियों की सकारात्मकता, मानवीयता और विनम्रता को आत्मसात कर राष्ट्र समाज के उत्थान में योगदान दें। सांसद  देवूसिंह चौहान ने उनके आकाशवाणी के अभियंता की सुरक्षित सेवा का त्याग कर राजनैतिक जीवन में प्रवेश की जानकारी दी। विद्यार्थियों से कहा कि निरंतर मेहनत करना ही जीवन में सफलता का आधार है। सफलता निरंतर प्रयास करने वालों को ही चुनती है। सांसद  राजीव शुक्ला ने स्वर्ण पदक विजेताओं को बधाई देते हुए कहा कि जिन्हें पदक नहीं मिले है, वह हताश नहीं हो। हुनर प्राप्त करें। उन्होंने हुनर के साथ वैश्विक प्रतिष्ठा प्राप्त करने वाले व्यक्तियों का उल्लेख कर विद्यार्थियों को प्रेरित किया। अभिनेता अभिनेता एवं सांसद  रवि किशन ने विद्यार्थियों से कहा कि जीवन का लक्ष्य तय करें। उसके लिए निरंतर अथक प्रयास करने पर ही सफलता मिलती है। उन्होंने उनके जीवन के संघर्षों की कथा सुनाते हुए विद्यार्थियों को राष्ट्र सेवा के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम में स्वागत उद्बोधन एल.एन.सी.टी. समूह के चेयरमैन  जय नारायण चौकसे ने और आभार ज्ञापन सचिव  अनुपम चौकसे ने किया।

महिला नेतृत्व से विकास को मिल रही नई दिशा

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश में नारी सशक्तिकरण को नई गति मिल रही है। प्रदेश की महिलाएँ नीति-निर्माण से लेकर तकन ीकी नवाचार तक प्रभावी भूमिका निभा रही हैं। डिजिटल नवाचार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और टेक उद्यमिता के क्षेत्र में उनकी सक्रिय भागीदारी विकास प्रक्रिया को नया आयाम दे रही है। टियर-2 और टियर-3 शहरों से निकलकर महिलाएँ तकनीकी क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान बना रही हैं। वे प्रदेश की क्षमता को वैश्विक स्तर पर स्थापित कर प्रदेश की विकास यात्रा में तकनीकी परिवर्तन की अग्रदूत बनकर उभर रही है, जिससे आत्मनिर्भर और नवाचार आधारित प्रदेश के निर्माण को सशक्त आधार मिल रहा है। तकनीकी नेतृत्व बना परिवर्तन की आधारशिला आरती अग्रवाल: डिजिटल समावेशन की अग्रदूत एनेक्स डिजिटल रनर्स प्राइवेट लिमिटेड की सह-संस्थापक और सीओओ मती आरती अग्रवाल ने ग्रामीण भारत में डिजिटल खाई को पाटने का कार्य किया है। उनके नेतृत्व में 40 हजार से अधिक डिजिटल रनर्स का नेटवर्क 11 हजार से अधिक पिनकोड क्षेत्रों में सक्रिय है, जो सर्वेक्षण, डिजिटल ऑनबोर्डिंग और जलवायु से जुड़ी पहलों को जमीनी स्तर पर क्रियान्वित कर रहे हैं। साथ ही, द इंडस एंटरप्रेन्योर्स (टीआईई) वूमेन चैप्टर की सह-अध्यक्ष के रूप में वे महिला उद्यमियों को मार्गदर्शन देकर उन्हें नेतृत्व की भूमिका में आगे बढ़ा रही हैं। इसका लाभ टियर-2 और टियर-3 शहरों की महिलाओं को भी मिल रहा है। अदिति चौरसिया: छोटे शहर से वैश्विक टेक नेतृत्व तक गढ़ी मलहरा से आने वाली सु अदिति चौरसिया ने इंजीनियर्सबाबू और सुपरसोर्सिंग जैसी कंपनियों के माध्यम से तकनीकी क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है। आज उनकी कंपनियाँ 250 से अधिक पेशेवरों को रोजगार दे रही हैं और बोश और ओरेकल जैसी वैश्विक कंपनियों को सेवाएँ दे रही हैं। उन्होंने 5 हजार से अधिक इंजीनियर्स को रोजगार दिलाने और 400 से अधिक टेक उत्पादों के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। बिंदु पाटीदार: एआई नवाचार में वैश्विक पहचान सोर्सबे की सह-संस्थापक और सीटीओ सु बिंदु पाटीदार ने इंदौर से एक वैश्विक एआई टैलेंट प्लेटफॉर्म का विकास किया। यह प्लेटफॉर्म 3 लाख से अधिक विशेषज्ञों और 700 से अधिक क्लाइंट्स, के लिए एआई से जुड़े महत्वपूर्ण कार्य कर रहा है। इनमें गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, अमेज़न और मेटा जैसी कंपनियां भी शामिल हैं। उनकी सफलता से सिद्ध हुआ है कि टियर-2 शहरों से भी वैश्विक स्तर के नवाचार संभव हैं। प्रेरिता बाहेती साबू: रणनीतिक वित्तीय नेतृत्व की मिसाल क्लिनिसप्लाईज की निदेशक सु प्रेरिता बाहेती साबू ने वित्तीय अनुशासन और रणनीतिक प्रबंधन के माध्यम से हेल्थकेयर सप्लाई चेन के क्षेत्र में मजबूत और टिकाऊ व्यवसाय मॉडल विकसित किया है। उनकी विशेषज्ञता ने संगठन को चुनौतियों के बीच भी स्थिरता और विकास बनाए रखने में मदद की है। उनका दृष्टिकोण मध्यप्रदेश में ईज़-ऑफ-डूइंग-बिजिनेस को भी रेखांकित करता है। सपना भम्बानी: वैश्विक संचालन में नेतृत्व की मिसाल टास्कअस में कंट्री लीडर और सीनियर वाइस प्रेसिडेंट के रूप में सु सपना भम्बानी भारत में बड़े पैमाने पर वैश्विक व्यवसाय का नेतृत्व कर रही हैं। उनका नेतृत्व ‘5 पी’ (पीपुल्स, परपज, प्राइड पैशन और परफमिंस पर आधारित है। इससे अच्छे प्रदर्शन के साथ संगठन में सकारात्मक कार्य संस्कृति का निर्माण हुआ है। समावेशी और नवाचार-आधारित भविष्य की ओर मध्यप्रदेश इन सभी प्रेरक कहानियों से स्पष्ट है कि मध्यप्रदेश में महिलाएँ हर प्रकार की चुनौतियों को पार कर बड़े पैमाने पर परिवर्तन ला रही हैं। नीति, अवसर और व्यक्तिगत संकल्प के इस संगम से प्रदेश अधिक समावेशी, नवाचारी और भविष्योन्मुख बन कर विकसित हो रहा है। यहां महिलाएँ नेतृत्व, नवाचार और उद्यमिता के माध्यम से एक सशक्त और आत्मनिर्भर प्रदेश का निर्माण कर रही हैं।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आरोग्य धाम ओपीडी का किया अवलोकन

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को ग्वालियर प्रवास के दौरान गोले के मंदिर के समीप निर्माणाधीन आरोग्यधाम चिकित्सालय की ओपीडी का अवलोकन किया। उन्होंने चिकित्सालय में मरीजों को उपलब्ध कराई जाने वाली स्वास्थ्य सेवाओं और व्यवस्थाओं के संबंध में अस्पताल प्रबंधन से जानकारी प्राप्त की। साथ ही चिकित्सकों एवं स्वास्थ्य कर्मियों से संवाद कर उपचार व्यवस्था को बेहतर से बेहतर बनाने के लिये कहा। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि आरोग्यधाम चिकित्सालय में मरीजों को कम खर्चे एवं समय पर गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध होगा। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिये प्रदेश सरकार पूरी प्रतिबद्धता से काम कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निरीक्षण के दौरान ओपीडी में पंजीयन, जांच एवं उपचार की प्रक्रिया का अवलोकन भी किया। इस दौरान जिले के प्रभारी मंत्री एवं जल संसाधन मंत्री  तुलसीराम सिलावट, सांसद  भारत सिंह कुशवाह, अपेक्स बैंक के प्रशासक  महेन्द्र यादव, वन विकास निगम के अध्यक्ष  रामनिवास रावत, ग्वालियर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष  मधुसूदन सिंह भदौरिया, स्थानीय जनप्रतिनिधि सहित आरोग्यधाम न्यास के पदाधिकारी एवं चिकित्सक उपस्थित रहे।  

गरुड़ पोर्टल से सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की होगी केंद्रीकृत रीयल-टाइम मॉनिटरिंग

भोपाल  "गरुड़ पोर्टल" से प्रदेश के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की केंद्रीकृत रीयल-टाइम मॉनिटरिंग की जायेगी। इससे कार्यप्रणाली में पारदर्शिता के संचार के साथ संचालन की दक्षता में भी उल्लेखनीय सुधार होगा। इससे सीवेज प्रबंधन की गुणवत्ता को और अधिक बेहतर बनाया जा सकेगा और समय पर निर्णय लेने में सुविधा होगी। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग तथा मध्यप्रदेश अर्बन डेवलपमेंट कंपनी (एमपीयूडीसी) द्वारा राज्य में सीवेज प्रबंधन व्यवस्था को सुदृढ़, आधुनिक एवं पारदर्शी बनाने की दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण पहल की गई है। मध्यप्रदेश में अपनी तरह की यह प्रथम केंद्रीकृत निगरानी प्रणाली है, जो वास्तविक समय में डेटा ट्रैकिंग के साथ-साथ उत्कृष्ट परिचालन निरीक्षण एवं त्वरित निर्णय लेने की प्रक्रिया को अत्यंत सशक्त बनाती है। इस युगांतरकारी व नवाचारपूर्ण पहल से राज्य में पर्यावरण संरक्षण, जल गुणवत्ता के संवर्धन एवं नगरीय स्वच्छता के संकल्प को अभूतपूर्व मजबूती मिलने की पूर्ण अपेक्षा है। आयुक्त  संकेत भोंडवे ने बताया कि विभाग के अंतर्गत संचालित कुल 42 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) में अत्याधुनिक एससीएडीए' (Supervisory Control and Data Acquisition – SCADA) सह 'ओसीईएमएस' (Online Continuous Effluent Monitoring System – OCEMS) प्रणाली को सफलतापूर्वक स्थापित व लागू कर दिया गया है। विदित हो कि पूर्व में इन संयंत्रों से प्राप्त होने वाला डेटा केवल संबंधित एसटीपी परिसर तक ही सीमित रहता था, जिसके कारण संपूर्ण व्यवस्था की समग्र निगरानी में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। किंतु, इस नूतन प्रणाली के क्रियान्वयन से अब बॉयोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड (BOD), केमिकल ऑक्सीजन डिमांड सीओडी (COD), पीएच (pH) एवं टोटल सस्पेंडेड सॉलिड्स (TSS) जैसे सभी प्रमुख जल गुणवत्ता मापदंडों की रीयल-टाइम मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जा रही है। इन सभी तकनीकी पैमानों की निगरानी अब यूएडीडी (UADD) कार्यालय के 'गरुड़ पोर्टल' के माध्यम से केंद्रीकृत रूप में की जा रही है, जिसके फलस्वरूप सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स के प्रदर्शन पर अनवरत एवं प्रभावी दृष्टि रखी जा सकेगी। मध्यप्रदेश में विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत लगभग 52 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) संचालित हैं, जिनमें यह उन्नत एससीएडीए एवं ओसीईएमएस प्रणाली कार्यरत है। विभाग द्वारा यह लक्ष्य निर्धारित किया गया है कि शेष 12 एसटीपी का डेटा भी लगभग 30 अप्रैल 2026 तक गरुड़ पोर्टल पर उपलब्ध हो जाएगा, जिससे राज्य के सभी प्रमुख एसटीपी एक ही डिजिटल पटल पर पूर्णतः एकीकृत हो सकेंगे।  

रेखा यादव ने मध्यप्रदेश राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष का कार्यभार ग्रहण किया

भोपाल  मध्यप्रदेश में नारी सशक्तिकरण के संकल्प को नई ऊर्जा देते हुए  रेखा यादव ने सोमवार को मध्यप्रदेश राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष के रूप में विधिवत पदभार ग्रहण किया। उनके साथ ही नवनियुक्त सदस्य  साधना स्थापक ने भी कार्यभार संभाला। पदभार ग्रहण करने के बाद मीडिया से चर्चा करते हुए  यादव ने कहा कि आयोग अब केवल शिकायतों के निवारण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि महिलाओं के वैचारिक और सामाजिक सशक्तिकरण का नया अध्याय लिखेगा।  रेखा यादव ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के विजन की सराहना करते हुए कहा कि उनका संकल्प है कि मध्यप्रदेश की हर नारी आत्मनिर्भर और सुरक्षित महसूस करे। मेरा प्राथमिक दायित्व उनके इसी विजन को साकार करना है। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि शासन की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम पंक्ति में खड़ी महिला तक पहुंचे।" महिला अपराधों पर कड़ा रुख अपनाते हुए  यादव ने कहा कि कानून अपनी जगह है, लेकिन समाज की मानसिकता में बदलाव लाए बिना स्थायी सुधार संभव नहीं है। कानूनों के निर्माण से अपराधों पर पूर्णतः अंकुश नहीं लगाया जा सकता, इसके लिए मानव की सोच और सामाजिक दृष्टिकोण को बदलना नितांत आवश्यक है। उन्होंने कहा  कि जब तक पुरुष प्रधान सोच और महिलाओं के प्रति समाज का नजरिया नहीं बदलेगा, तब तक अपराध की प्रवृत्ति में स्थायी सुधार संभव नहीं है।  यादव ने महिलाओं का आह्वान किया कि वे स्वयं भी जागरूक बनें और अपने अधिकारों को पहचानें, क्योंकि एक जागरूक नारी ही अपने खिलाफ होने वाले अन्याय के विरुद्ध मजबूती से खड़ी हो सकती है। उन्होंने कहा कि अधिकारों की जानकारी ही बचाव की पहली सीढ़ी है। अक्सर जानकारी के अभाव में महिलाएं शोषण सहती रहती हैं। राज्य महिला आयोग अब एक मित्र और मार्गदर्शककी भूमिका निभाएगा। हम हर जिले में महिलाओं तक पहुंचेंगे ताकि वे बिना किसी डर के अपनी बात रख सकें। इस अवसर पर आयोग के सदस्य सचिव श्री सुरेश तोमर सहित वरिष्ठ अधिकारी और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित 

पीएम स्कूल में गड़बड़ियों का खेल? खुद पर जांच, खुद ही नोटिस देने पर उठे सवाल

बड़वानी जिले के एक पीएम  स्कूल में प्रशासनिक प्रक्रियाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। मामला ऐसा है कि जहां जांच भी “खुद” हो रही है और नोटिस भी “खुद” ही जारी किए जा रहे हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने पारदर्शिता और निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। सूत्रों के अनुसार स्कूल में कुछ वित्तीय और प्रशासनिक गड़बड़ियों की शिकायत के बाद जांच की गई, जिसमें अनियमितताएं सामने आईं। लेकिन हैरानी की बात यह है कि जांच प्रक्रिया और उसके बाद की कार्रवाई में वही लोग सक्रिय दिख रहे हैं, जिन पर सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में निष्पक्ष जांच की उम्मीद कमजोर पड़ती नजर आ रही है। मामले में यह भी सामने आया है कि करीब 7.79 लाख रुपये के अटैचमेंट और वित्तीय लेन-देन को लेकर भी संदेह जताया जा रहा है। आरोप है कि पहले चेक के माध्यम से भुगतान दिखाया गया, फिर कैश लेन-देन की बात सामने आई और उसके बाद नोटिस जारी किए गए। इस पूरे क्रम ने संदेह को और गहरा कर दिया है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब जांच में गड़बड़ियां सामने आ चुकी हैं, तो फिर कार्रवाई का जिम्मा उन्हीं लोगों को क्यों दिया जा रहा है? क्या यह “मॉडल स्कूल” की छवि है या “मॉडल गड़बड़ी” का उदाहरण बनता जा रहा है? स्थानीय लोगों और अभिभावकों का कहना है कि यदि समय रहते इस मामले में उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच नहीं कराई गई, तो शिक्षा व्यवस्था की साख पर असर पड़ेगा। अब निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं। सवाल यह भी उठ रहा है कि जब मीडिया में खबरें सामने आ रही हैं और नोटिस जारी हो रहे हैं, तब भी प्रशासन आखिर मौन क्यों है?