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मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इंदौर में किया सड़क निर्माण कार्य का किया भूमि-पूजन

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शुक्रवार को इंदौर में आयोजित लोकार्पण व भूमि-पूजन कार्यक्रम में कहा है कि राज्य सरकार ने प्रदेश के सर्वांगीण विकास का संकल्प लिया है और उसी दिशा में निरंतर कार्य कर रही है।  उन्होंने कहा कि  नगर निगम इंदौर ने विकास और जनकल्याण के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना तथा स्वच्छता अभियान में इंदौर ने देशभर में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के 12 वर्षों के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि इस अवधि में देश ने विकास के अनेक नए आयाम स्थापित किए हैं। उन्होंने कहा कि के प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में देश और प्रदेश दोनों विकास की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। आज देश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं और चिकित्सा शिक्षा को नई मजबूती मिली है। प्रदेश के सभी 55 जिलों में विकास के विभिन्न मानकों पर निरंतर कार्य कर रही है। शिक्षा, स्वास्थ्य, अधोसंरचना, रोजगार और जनकल्याण के क्षेत्रों में योजनाबद्ध तरीके से विकास कार्यों को आगे बढ़ाया जा रहा है, ताकि प्रदेश के प्रत्येक नागरिक को विकास का लाभ मिल सके। मुख्यमंत्री अधोसंरचना योजनांतर्गत जोन 8 में सड़क का भूमि-पूजन मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इन्दौर के जोन क्रमांक 8 के वार्ड क्रमांक 37 में तुलसी नगर पुलिया से निपानिया तक प्रस्तावित सड़क विकास कार्य और प्राइमरी तथा आंतरिक सीवर लाइन निर्माण कार्य का आज रिमोट से भूमि-पूजन कर शुभारंभ किया। इसमें सड़क निर्माण कार्य की लागत 13.26 करोड़ और प्राइमरी तथा आंतरिक सीवर लाइन निर्माण कार्य की लागत 2.64 करोड़ रुपए है। यह सड़क लगभग 1.30 किलोमीटर लंबी एवं इन्दौर विकास योजना-2021 के अनुसार 30 मीटर चौड़ाई में निर्मित होगी। परियोजना अंतर्गत सीमेंट कंक्रीट सड़क निर्माण, सीवर चैम्बरों का सुदृढ़ीकरण, फुटपाथ निर्माण तथा विद्युत लाइन शिफ्टिंग सहित विभिन्न अधोसंरचनात्मक कार्य किए जाएंगे। सड़क के निर्माण से तुलसी नगर, निपानिया, अंकुर आंगन, राजाराम ऐवेन्यु तथा महालक्ष्मी नगर सहित आसपास के क्षेत्रों के रहवासियों को आवागमन में सुविधा होगी। साथ ही क्षेत्र में यातायात व्यवस्था अधिक सुगम होगी और नागरिकों को बेहतर एवं नई कनेक्टिविटी उपलब्ध हो सकेगी। भूमि-पूजन समारोह की शुरुआत वंदे मातरम् के गायन से हुई। इसके बाद मुख्यमंत्री डॉ. यादव एवं समस्त जन द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर पूजा-अर्चना की गई। महापौर इंदौर  पुष्यमित्र भार्गव ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव का पुष्प-गुच्छ और तुलसी का पौधा भेंट कर स्वागत किया। विकास कार्यों की घोषणा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भूमि-पूजन समारोह में कनाड़िया रोड से खजराना रोड तक लगभग 1400 मीटर लिंक रोड  बनाने की घोषणा की। उन्होंने पूर्वी रिंग रोड से रोबोट चौराहे तक 6 लेन फ्लाई-ओवर बनाने की घोषणा की। इसकी अनुमानित लागत लगभग 50 करोड़ रुपए होगी। उन्होंने कहा कि अवैध कालोनियों को वैध करने के लिए भी ठोस कार्य करने के प्रयास करेंगे। हितलाभ का किया गया वितरण मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना अंतर्गत 2 हितग्राहियों को हितलाभ वितरण किया गया जिसमें  राहुल मरमट और  जगदीश उपाध्याय को 50-50 हजार के प्रतीकात्मक चेक मंच से प्रदान किये गये। इस अवसर पर नगरीय विकास एवं आवास मंत्री  कैलाश विजवर्गीय, जल संसाधन मंत्री  तुलसीराम सिलावट,  क्षेत्रीय सांसद  शंकर लालवानी,  क्षेत्रीय विधायक  महेन्द्र हार्डिया,  मधु वर्मा,  रमेश मेंदोला,  सुमित मिश्रा तथा संभागायुक्त डॉ. सुदाम खाड़े, पुलिस आयुक्त  संतोष कुमार सिंह, कलेक्टर  शिवम वर्मा सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं प्रशासनिक अमला उपस्थित रहे।

40 से अधिक राष्ट्रीय उद्योगों, रक्षा प्रतिष्ठानों, अनुसंधान एवं शिक्षण संस्थानों ने साझा किए सुझाव

भोपाल  रक्षा उत्पादन विभाग, रक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के उप महानिदेशक (स्वदेशीकरण)  सुशील कुमार सतपुते ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत का लक्ष्य तभी साकार होगा, जब उद्योग, एमएसएमई, स्टार्टअप, अनुसंधान संस्थान और शिक्षण संस्थाएं एक साझा मंच पर आकर नवाचार आधारित रक्षा विनिर्माण को आगे बढ़ाएंगी। उन्होंने कहा कि राज्यों में मजबूत औद्योगिक एवं नवाचार आधारित इको सिस्टम विकसित करना समय की आवश्यकता है और केंद्र व राज्यों के समन्वित प्रयासों से ही देश रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भर बन सकेगा। रक्षा उत्पादन विभाग, रक्षा मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा 20-21 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में आयोजित होने वाले राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन "आत्मनिर्भरता इन डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग : प्रमोटिंग स्टेट-लेवल इकोसिस्टम्स" की तैयारियों के तहत मध्यप्रदेश शासन द्वारा एमपीआईडीसी मुख्यालय, भोपाल में तीसरे चरण के अंतर्गत राज्य स्तरीय फ्लैगशिप परामर्श कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में रक्षा विनिर्माण में आत्मनिर्भरता, स्वदेशीकरण, एमएसएमई, स्टार्टअप, नवाचार तथा उद्योग-अकादमिक सहयोग को मजबूत बनाने पर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। कार्यशाला में देशभर के 40 से अधिक प्रमुख उद्योगों, रक्षा प्रतिष्ठानों, अनुसंधान संस्थानों, शिक्षण संस्थाओं और नीति विशेषज्ञों ने प्रत्यक्ष एवं वर्चुअल माध्यम से भागीदारी कर अपने सुझाव साझा किए। मध्यप्रदेश इस राष्ट्रीय पहल में 'इंडिजेनाइजेशन, एमएसएमई, स्टार्टअप एवं इनोवेशन इकोसिस्टम' विषय पर सह-नेतृत्व (को-लीड) राज्य की भूमिका निभा रहा है। औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन प्रमुख सचिव  राघवेन्द्र कुमार सिंह ने कहा कि मध्यप्रदेश रक्षा विनिर्माण के क्षेत्र में तेजी से अपनी मजबूत पहचान बना रहा है। राज्य की उद्योग अनुकूल नीतियां, विकसित औद्योगिक आधारभूत संरचना, उपलब्ध संसाधन तथा कुशल मानव संसाधन इसे देश के प्रमुख रक्षा उत्पादन केंद्र के रूप में स्थापित करने की क्षमता रखते हैं। उन्होंने कहा कि यह कार्यशाला राज्य की भावी रणनीति तय करने के साथ उद्योग, अनुसंधान संस्थानों और शासन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है। कार्यक्रम के प्रारंभ में प्रस्तावित राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन की रूपरेखा, राज्यों की भूमिका तथा मध्यप्रदेश की सह-नेतृत्व जिम्मेदारी पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया गया। इस दौरान बताया गया कि रक्षा उत्पादन विभाग ने राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन के लिए सात प्रमुख रणनीतिक विषय निर्धारित किए हैं, जिन पर राज्यों से सुझाव आमंत्रित किए गए हैं। एमपीआईडीसी द्वारा डिफेंस एवं एयरोस्पेस रणनीति वर्ष 2026-30 प्रस्तुत की गई। इसमें राज्य की वर्तमान औद्योगिक स्थिति, छह रणनीतिक स्तंभों तथा 24 प्रमुख पहलों के माध्यम से रक्षा एवं एयरोस्पेस क्षेत्र में निवेश, नवाचार और विनिर्माण को बढ़ावा देने की कार्ययोजना साझा की गई। प्रस्तुतीकरण में जबलपुर की सैन्य वाहन निर्माण क्षमता, इटारसी के आयुध उत्पादन, ग्वालियर के बायो-केमिकल अनुसंधान तथा कटनी की धातुकर्म विशेषज्ञता को मध्यप्रदेश की प्रमुख औद्योगिक शक्ति के रूप में रेखांकित किया गया। कार्यशाला का सबसे महत्वपूर्ण चरण हितधारकों के साथ सातों रणनीतिक विषयों पर विस्तृत चर्चा रहा। उद्योग, एमएसएमई, स्टार्टअप, रक्षा प्रतिष्ठानों, शिक्षण एवं अनुसंधान संस्थानों ने अपने अनुभव और सुझाव साझा किए। विशेष रूप से स्वदेशीकरण, एमएसएमई, स्टार्टअप और नवाचार आधारित इकोसिस्टम को मजबूत बनाने पर उपयोगी सुझाव सामने आए। कार्यशाला में बीईएमएल, आईआरईएल, आयुध निर्माणी इटारसी, सेंट्रल प्रूफ एस्टैब्लिशमेंट इटारसी, एमपीएमएसएमई, ग्लोबल स्किल पार्क, आईआईएसईआर भोपाल तथा एमपीएसईडीसी सहित अनेक संस्थानों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। वहीं डीआरडीओ, आईआईटी दिल्ली, बीएचयू, धारवाड़, इंदौर, जम्मू, कानपुर, भिलाई, गांधीनगर एवं मद्रास, आईआईएससी बेंगलुरु, नासकॉम, सोसाइटी ऑफ इंडियन डिफेंस मैन्युफैक्चरर्स (SIDM), ड्रोन फेडरेशन ऑफ इंडिया, भारत डायनामिक्स लिमिटेड, गोवा शिपयार्ड लिमिटेड, मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड, एडवांस्ड वेपन्स एंड इक्विपमेंट इंडिया लिमिटेड, इंडियन ऑर्डनेंस लिमिटेड, गोल्डन पर्ल डिफेंस सिस्टम्स प्रा. लि. तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने वर्चुअल माध्यम से सहभागिता की। इन संस्थानों की भागीदारी से कार्यशाला को राष्ट्रीय दृष्टिकोण और तकनीकी विशेषज्ञता मिली। एमपीआईडीसी के प्रबंध संचालक ने कार्यशाला के निष्कर्ष प्रस्तुत करते हुए बताया कि प्राप्त सुझावों के आधार पर 30 जून 2026 तक राज्य की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर रक्षा उत्पादन विभाग को भेजी जाएगी। यह रिपोर्ट राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन में मध्यप्रदेश की रणनीति और सुझावों का आधार बनेगी।  

42 हजार से अधिक हितग्राहियों को 2 हजार 500 करोड़ रुपये से अधिक की आवास स्वीकृतियां, 38 हजार परिवारों का होगा गृह-प्रवेश

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एवं केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्री  मनोहर लाल शनिवार, 20 जून को इंदौर जिले के सांवेर में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के अंतर्गत 42 हजार से अधिक पात्र हितग्राहियों को 2 हजार 500 करोड़ रुपये से अधिक की आवास स्वीकृतियां तथा 38 हजार से अधिक परिवारों को उनके नवीन पक्के आवासों में गृह-प्रवेश कराया जाएगा। साथ ही 2 हजार 935 करोड़ रुपये लागत की 48.10 किलोमीटर लंबी महत्वाकांक्षी इंदौर-उज्जैन ग्रीनफील्ड फोर-लेन परियोजना का भूमि-पूजन भी करेंगे। यह कार्यक्रम प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के वर्ष 2047 तक विकसित भारत के संकल्प तथा सभी पात्र परिवारों को सम्मानजनक आवास उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार प्रत्येक पात्र परिवार को पक्का आवास उपलब्ध कराने की दिशा में तेजी से कार्य कर रही है। साथ ही आधुनिक सड़क एवं परिवहन अधोसंरचना के निर्माण के माध्यम से प्रदेश के समग्र विकास को नई गति दे रही है। मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम द्वारा विकसित की जा रही यह परियोजना मालवा अंचल की कनेक्टिविटी, आर्थिक गतिविधियों और पर्यटन विकास को नई दिशा प्रदान करेगी। लगभग 48.10 किलोमीटर लंबा यह हाई-स्पीड ग्रीनफील्ड कॉरिडोर इंदौर और उज्जैन के बीच यात्रा को अधिक तेज, सुरक्षित और सुगम बनाएगा। परियोजना को हाइब्रिड एन्यूटी मॉडल (40:60) पर विकसित किया जा रहा है। इसके पूर्ण होने पर इंदौर, उज्जैन और आसपास के क्षेत्रों में औद्योगिक निवेश, व्यापार, लॉजिस्टिक्स, कृषि विपणन और धार्मिक पर्यटन को उल्लेखनीय बढ़ावा मिलेगा। महाकाल की नगरी उज्जैन आने वाले देश-विदेश के श्रद्धालुओं को भी ग्रीनफील्ड कॉरिडोर के बनने से बेहतर और सुगम आवागमन सुविधा प्राप्त होगी। स्थानीय निवासियों एवं किसानों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए परियोजना में 18 अंडर-पास तथा 19 जंक्शन इम्प्रूवमेंट कार्यों का प्रावधान किया गया है। इसके अतिरिक्त वेस्टर्न रिंग रोड तथा उज्जैन-बदनावर मार्ग के साथ ग्रेड सेपरेटेड जंक्शन विकसित किए जाएंगे। प्रत्येक टोल प्लाजा पर एम्बुलेंस, क्रेन और पेट्रोलिंग वाहनों की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाएगी, जिससे आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित सहायता उपलब्ध हो सके।    

मिशन में समाज के सभी वर्ग सक्रिय सहभागिता करें : राज्यपाल पटेल

राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन में मध्यप्रदेश ने हासिल की बहुआयामी उपलब्धियां : राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु सिकल सेल उन्मूनल मिशन भावी पीढ़ियों के सुरक्षित और स्वस्थ भविष्य की ऐतिहासिक पहल केन्द्र सरकार और राज्य सरकारों ने मिशन मोड में किया सराहनीय कार्य प्रधानमंत्री मोदी ने शहडोल से लांच किया था राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन आनुवंशिक रोगों की जांच की उपलब्धि में मध्यप्रदेश का योगदान महत्वपूर्ण राष्ट्रपति ने म.प्र. में सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन में हुई सामुदायिक भागीदारी को सराहा मिशन में समाज के सभी वर्ग सक्रिय सहभागिता करें : राज्यपाल पटेल सिकल सेल मुक्त मध्यप्रदेश का हमारा संकल्प जन सहयोग से होगा साकार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव ओंकारेश्वर में विश्व सिकल सेल दिवस का हुआ राज्य स्तरीय कार्यक्रम ओंकारेश्वर राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने कहा है कि अन्तर्राष्ट्रीय सिकल सेल दिवस पर इस विशेष कार्यक्रम का आयोजन स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण चुनौती का सामना करने की दिशा में एक सार्थक प्रयास है। मैं इस आयोजन से जुड़े सभी लोगों की सराहना करती हूं। राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन अंतर्गत मध्यप्रदेश ने जो बहुआयामी उपलब्धियां हासिल की हैं, उसके लिए मैं राज्य सरकार की सराहना करती हूं। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु शुक्रवार को खण्डवा जिले के ओंकारेश्वर में विश्व सिकल सेल दिवस पर आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम को संबोधित कर रही थी। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने दीप प्रज्ज्वलित कर राज्य स्तरीय कार्यक्रम का शुभारंभ किया। राज्यपाल मंगुभाई पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने राष्ट्रपति का स्वागत किया। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने कहा कि यह संतोष की बात है कि वर्ष 2023 में राष्ट्रीय मिशन का शुभारंभ करते समय जो अनेक बड़े लक्ष्य देश के सामने रखे गए थे, उनमें से स्क्रीनिंग का लक्ष्य समय से पहले ही पूरा हो गया। मुझे बताया गया है कि नवजात शिशुओं से लेकर 40 वर्ष की आयु तक के 7 करोड़ लोगों की स्क्रीनिंग का लक्ष्य पूरा हो चुका है। यह कोई छोटी उपलब्धि नहीं है। यह पूरे विश्व में आनुवंशिक रोगों की जाँच-परख की सबसे बड़ी पहलों में से एक है। राष्ट्रपति ने कहा कि इस उपलब्धि में मध्यप्रदेश का महत्वपूर्ण योगदान है। प्रदेश में अब तक सवा करोड़ से भी अधिक लोगों की स्क्रीनिंग हो चुकी है। इनमें से अधिकांश लोगों को जेनेटिक काउंसलिंग कार्ड भी दिये जा चुके हैं। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने कहा कि सिकल सेल से जुड़ी चुनौती को भारत सरकार ने बहुत ही गंभीरता से लिया और पिछले कुछ वर्षों में एक समग्र दृष्टि से सरकार ने जो प्रयास किये हैं, वे अत्यंत सराहनीय हैं। लगभग तीन वर्ष पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मध्यप्रदेश के शहडोल से राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन को लॉन्च किया था। इस पहल के पीछे न केवल सरकार का गंभीर प्रयास का दृढ़ संकल्प था बल्कि इस चुनौती से जुड़े हर आयाम का समुचित response देने की दूरदर्शी सोच भी थी। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने कहा कि मुझे बताया गया है कि केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और केन्द्रीय जनजातीय मंत्रालय के संयुक्त मॉडल के रूप में देश में पहली बार ऐसा मिशन प्रारंभ किया। इसे केवल स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या के रूप में नहीं देखा गया, इसे जनजातीय स्वास्थ्य का मुद्दा, आनुवंशिकता से जुड़ी जागरूकता और प्रिवेंटिव हेल्थ केयर की चुनौती के साथ ही सामाजिक आचरण में बदलाव के मिशन के रूप में देखा गया। इस मिशन की पृष्ठभूमि में अनेक स्तरों पर किये गये वैज्ञानिक और सामाजिक अध्ययन रहे हैं। ICMR, Tribal Health Research Institutes, AIIMS, NHM, WHO और विभिन्न राज्य सरकारों ने इस विषय के विभिन्न आयामों पर अध्ययन किया हैं। इनसे मुख्य रूप से यह आंकलन सामने आया कि:-     भारत में लगभग 2 से 2.5 करोड़ लोग सिकल सेल जीन के वाहक हो सकते हैं।     लाखों लोग सक्रिय रोग से पीड़ित हैं।     सबसे अधिक प्रभाव मध्य भारत की जनजातीय क्षेत्र में है।     अनेक परिवार पीढ़ियों से इस रोग से प्रभावित थे लेकिन उन्हें बीमारी का नाम तक मालूम नहीं था। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने कहा कि अध्ययनों से यह भी पता चला कि भारत के जनजातीय क्षेत्रों में सिकल सेल रोग का प्रसार सामान्य आबादी की तुलना में कई गुना अधिक है। फलस्वरूप, देश में पहली बार सार्वजनिक स्वास्थ्य, जनजातीय कल्याण, Genetic Science और डिजिटल मॉनिटरिंग को एकसाथ जोड़कर यह राष्ट्र व्यापी अभियान प्रारंभ किया गया। देश के 17 राज्यों में चलाये जा रहे इस अभियान के प्रति राज्यों ने भी पूरी तत्परता से भागीदारी की है। राष्ट्रपति ने कहा कि मुझे इस मिशन की परिकल्पना ने प्रभावित किया है। इसलिए मैं इस मिशन के तीन प्रमुख आयामों का उल्लेख करना चाहूंगी:     पहलाः बड़े स्तर पर जागरूकता फैलाना और विवाह पूर्व जेनेटिक काउंसलिंग करना।     दूसराः व्यापक स्क्रीनिंग करके समय रहते रोग की पहचान करना।     तीसराः प्रबंधन की समग्रता को सुनिश्चित करते हुए स्वास्थ्य देखभाल की निरंतरता बनाये रखना। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने कहा कि सार्वजनिक स्वास्थ्य की पहल के लिहाज से देखें तो देश में पहली बार इतनी बड़ी जनसंख्या की आनुवंशिक स्क्रीनिंग, डिजिटल ट्रैकिंग के साथ की जा रही है। मिशन मोड में हुई स्क्रीनिंग का ही परिणाम है कि अभी तक लगभग ढाई लाख लोगों में सिकल सेल संबंधी रोग चिन्हित किये जा चुके हैं और इस रोग के 20 लाख से भी अधिक वाहक यानी carrier भी पहचाने जा चुके हैं। वाहकों की इतनी बड़ी संख्या से जुड़ी चुनौती को समझने की आवश्यकता है। सिकल सेल के वाहक लोगों में इस रोग के लक्षण नहीं होते इसलिए उन्हें इसकी भविष्य की गंभीरता का कोई अंदाज नहीं लग पाता। अधिकांशतः वाहकों को यह नहीं पता होता कि वे अनजाने ही अपनी संतान को ये रोग दे सकते हैं। संतोष की बात है कि केन्द्र सरकार और राज्य सरकारों ने मिशन मोड में पिछले कुछ वर्षों में सिकल सेल से जुड़े रोगियों और वाहकों की पहचान के साथ-साथ उनकी समुचित स्वास्थ्य देखभाल पर सराहनीय कार्य किया है। राष्ट्रपति ने कहा कि मेरे संज्ञान में लाया गया है कि बहुस्तरीय प्रयासों के क्रम में मध्यप्रदेश में सभी प्रभावित लोगों, गर्भवती महिलाओं एवं नवजात शिशुओं के लिए पॉइंट ऑफ केयर टेस्ट आधारित जाँच सुविधा को आयुष्मान आरोग्य मंदिर स्तर तक विस्तारित किया … Read more

भोपाल में विकास कार्यों पर फिर सवाल, करोड़ों का फुटपाथ तैयार; लोगों के लिए पहुंचना बना चुनौती

 भोपाल मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में पहले 90 डिग्री वाले रेलवे ओवरब्रिज को लेकर देशभर में चर्चा हुई थी. अब राजधानी का एक और निर्माण कार्य सवालों के घेरे में आ गया है. इस बार मामला किसी पुल का नहीं, बल्कि पैदल यात्रियों के लिए बनाए गए फुटपाथ का है।  शहर के वार्ड-32 स्थित पीएंडटी चौराहे पर सौंदर्याकरण के तहत फुटपाथ का निर्माण कराया गया. लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि फुटपाथ के किनारे इतनी ऊंची लोहे की रेलिंग लगा दी गई कि अब वहां पहुंचना ही मुश्किल हो गया है. यानी जिस सुविधा को पैदल यात्रियों के लिए बनाया गया, उसका इस्तेमाल करना ही चुनौती बन गया है।  स्थानीय रहवासियों के मुताबिक, सड़क किनारे करीब तीन फीट ऊंची लोहे की फेंसिंग लगा दी गई है. कई जगहों पर रेलिंग के साथ पहले से बनी दीवार भी मौजूद है. ऐसे में फुटपाथ पूरी तरह घिरा हुआ नजर आता है।  सबसे बड़ी समस्या यह बताई जा रही है कि कई हिस्सों में फुटपाथ पर चढ़ने या एंट्री करने के लिए पर्याप्त रास्ता ही नहीं छोड़ा गया. नतीजा यह कि लोग फुटपाथ का इस्तेमाल करने के बजाय सड़क पर चलने को मजबूर हैं।  रोजाना सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करने वाले यात्रियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. स्थानीय लोगों का कहना है कि बस या अन्य वाहनों से उतरने के बाद फुटपाथ तक पहुंचने का कोई सीधा रास्ता नहीं बचा है।  ऐसे में यात्रियों को सड़क पर चलना पड़ रहा है, जिससे दुर्घटना का खतरा भी बढ़ सकता है. लोगों का सवाल है कि जब फुटपाथ का उद्देश्य ही पैदल यात्रियों को सुरक्षित रास्ता देना है, तो फिर उसके इस्तेमाल में ऐसी बाधाएं क्यों खड़ी की गईं? फुटपाथ बना या पिंजरा? निर्माण पर उठ रहे सवाल लोगों का आरोप है कि सुरक्षा और सौंदर्यीकरण के नाम पर ऐसा डिजाइन तैयार किया गया, जिसमें पैदल यात्रियों की जरूरतों को नजरअंदाज कर दिया गया. उनका कहना है कि योजना बनाते समय जमीनी हकीकत का आकलन नहीं किया गया. लोगों ने यह भी सवाल उठाया है कि यदि फुटपाथ तक पहुंचना ही मुश्किल हो जाए तो फिर उस पर खर्च किए गए सरकारी धन का क्या मतलब रह जाता है।  रहवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि रेलिंग के बीच-बीच में पर्याप्त प्रवेश द्वार या गैप बनाए जाएं, ताकि लोग आसानी से फुटपाथ का उपयोग कर सकें. उनका कहना है कि पैदल यात्रियों की सुविधा को प्राथमिकता देते हुए डिजाइन में आवश्यक बदलाव किए जाने चाहिए. फिलहाल यह निर्माण कार्य स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है।   

MP Weather Update: बारिश से पहले बढ़ी बेचैनी, उमस ने किया बेहाल; मौसम विभाग ने दी अहम चेतावनी

भोपाल  देशभर में भीषण गर्मी से परेशान लोग बड़ी शिद्दत से दक्षिण-पश्चिम मानसून का इंतजार कर रहे हैं। हालांकि, पिछले कुछ दिनों से मानसून की प्रगति में एक 'अस्थायी ठहराव' देखा जा रहा है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार 18 जून 2026 तक मानसून की उत्तरी सीमा हरनाई, सोलापुर, हैदराबाद, रांची और मुजफ्फरपुर पर ही टिकी हुई है। आखिर वातावरण में नमी बढ़ने के बावजूद मानसून की रफ्तार क्यों थम गई है और मध्यप्रदेश में इसका क्या असर होने वाला है, आइए विस्तार से समझते हैं। मध्यप्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून लगातार आगे बढ़ रहा है। मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक प्रदेश के कई जिलों में गरज-चमक, बारिश और 50-60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना जताई है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार मानसून की उत्तरी सीमा प्रदेश के कई हिस्सों को कवर कर चुकी है और आने वाले 4-5 दिनों में इसके और आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल बनी हुई हैं। क्यों थम गई मानसून की रफ्तार? मौसम वैज्ञानिक शैलेंद्र कुमार नायक के मुताबिक, मानसून की गति धीमी होने के पीछे सबसे बड़ा कारण बंगाल की खाड़ी का खामोश होना है। इस समय खाड़ी में कोई मजबूत निम्न दाब क्षेत्र नहीं बन पा रहा है, जो मानसूनी हवाओं को आगे धकेलने के लिए ऊर्जा देता है। इसके अलावा अन्य प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं:     जेट स्ट्रीम का प्रभाव उपोष्ण पश्चिमी जेट का असर अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।     प्रशांत महासागर में समुद्री सतह का तापमान सामान्य से अधिक है और साल के उत्तरार्ध में अल नीनो परिस्थितियां बनने की संभावना है।     वहीं मैडेन-जूलियन ऑसिलेशन भी फिलहाल हिंद महासागर में मानसून को सहारा नहीं दे पा रहा है।     सिस्टम की कमी: मध्य भारत में फिलहाल किसी मजबूत चक्रवाती परिसंचरण (Cyclonic Circulation) का अभाव है। मध्यप्रदेश में प्री-मानसून ने पकड़ी भारी रफ्तार भले ही मानसून की आधिकारिक एंट्री में थोड़ा ठहराव आया हो, लेकिन मध्यप्रदेश में मानसूनी सक्रियता तेजी से बढ़ रही है। प्रदेश में उमस का ग्राफ अचानक बहुत ऊपर चला गया है, जो इस बात का सीधा संकेत है कि मानसून की दस्तक अब ज्यादा दूर नहीं है। शाम के समय दर्ज की गई सापेक्षिक आर्द्रता के आंकड़े बेहद चौंकाने वाले हैं     बैतूल: 90 प्रतिशत     रायसेन: 77 प्रतिशत     पचमढ़ी: 73 प्रतिशत     भोपाल: 64 प्रतिशत खजुराहो-नौगांव में पारा 41 पार, पर तपन हुई कम वातावरण में बादलों और नमी की मौजूदगी के कारण राज्य के अधिकांश हिस्सों में अधिकतम तापमान सामान्य के आसपास या उससे नीचे आ गया है। पूर्वी मध्यप्रदेश में खजुराहो 41.4°C और नौगांव 41.0°C सबसे गर्म दर्ज किए गए, जबकि पश्चिमी हिस्से में दतिया 41.2°C में तेज गर्मी रही। हालांकि, नमी बढ़ने से रातें अब भी गर्म बनी हुई हैं, जहां खजुराहो में न्यूनतम तापमान 28.0°C और सतना में 27.9°C दर्ज किया गया। शैलेन्द्र कुमार नायक, मौसम, जलवायु एवं पर्यावरण विश्लेषक, भोपाल पिछले 24 घंटों में कहां कितनी हुई बारिश? सिवनी: 22.6 मिमी श्योपुर: 20.4 मिमी बैतूल: 16.6 मिमी रीवा: 13.0 मिमी राजगढ़: 13.0 मिमी भोपाल: 14.0 मिमी सतना: 12.0 मिमी सागर: 8.7 मिमी अगले 2 से 3 दिनों के लिए मौसम विभाग का अलर्ट मौसम विश्लेषक शैलेंद्र नायक के अनुसार, इसे 'ब्रेक मानसून' कहना गलत होगा, यह सिर्फ एक छोटा सा विराम है। मध्यप्रदेश में मानसून के स्वागत के लिए माहौल पूरी तरह अनुकूल हो चुका है। अगले 48 से 72 घंटों के भीतर प्रदेश के कई हिस्सों में गरज-चमक के साथ तेज हवाएं चलने और वर्षा की गतिविधियों में भारी बढ़ोतरी होने की संभावना है। जैसे ही बंगाल की खाड़ी या विदर्भ के ऊपर कोई चक्रवाती घेरा मजबूत होगा, मानसून पूरी ताकत से एमपी में दाखिल हो जाएगा। इन जिलों में तेज बारिश और आंधी का अलर्ट मौसम विभाग ने भोपाल, विदिशा, रायसेन, सीहोर, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, बुरहानपुर, खंडवा, खरगोन, बड़वानी, अलीराजपुर, झाबुआ, धार, रतलाम, उज्जैन, देवास, शाजापुर, आगर-मालवा, इंदौर, नीमच, मंदसौर, गुना, अशोकनगर, शिवपुरी, ग्वालियर, दतिया, भिंड, मुरैना, श्योपुरकलां, अनूपपुर, डिंडौरी, कटनी, जबलपुर, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, मंडला, बालाघाट, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी और पन्ना समेत कई जिलों में गरज-चमक और बारिश की चेतावनी जारी की है।     प्रदेश में मानसून की गतिविधियां तेज होने लगी हैं।     भोपाल सहित कई जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना।     कुछ जिलों में 50-60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं।     अगले 2 दिनों में दिन के तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस की गिरावट के आसार।     किसानों और आम नागरिकों को मौसम विभाग ने सतर्क रहने की सलाह दी है।

बिजली उत्पादन में बढ़ेगी दक्षता, मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी ने विकसित किया मॉनिटरिंग मॉडल

मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी ने विद्युत गृहों के निर्बाध संचालन के लिए बनाया तकनीकी निगरानी मॉडल मुख्यालय एवं विद्युत गृहों के विशेषज्ञ अभियंताओं की संयुक्त समन्वय टीम गठित भोपाल  मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी ने अपने ताप एवं जल विद्युत गृहों की वार्षिक रखरखाव (Annual Overhaul ) एवं पूंजीगत ओवरहॉल (Capital Overhaul ) गतिविधियों के उपरांत इकाइयों के अधिक सुरक्षित, दक्ष एवं निर्बाध संचालन को सुनिश्चित करने के लिए तकनीकी निगरानी व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है। कंपनी के प्रबंध संचालक मनजीत सिंह ने कहा कि कंपनी का विश्वास है कि मशीनों की तरह कार्य प्रणालियों का भी समय-समय पर मूल्यांकन एवं पुनर्विचार आवश्यक होता है। इससे न सिर्फ बेहतर समाधान उभर कर आते हैं बल्कि कंपनी भी नवाचार के साथ निरंतर विकसित होकर आगे बढ़ने के लिए तत्पर होती है। उन्होंने कहा कि यह पहल तकनीकी विशेषज्ञता, सहभागिता एवं नवाचार को बढ़ावा देते हुए विद्युत उत्पादन की विश्वसनीयता को नई मजबूती प्रदान करेगी। 4 ताप व 10 जल विद्युत गृह से होता है 5492 मेगावाट बिजली उत्पादन वर्तमान में मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी के चार ताप विद्युत गृह अमरकंटक ताप विद्युत गृह चचाई, सतपुड़ा ताप विद्युत गृह सारनी, संजय गांधी ताप विद्युत गृह बिरसिंगपुर व सिंगाजी ताप विद्युत गृह दोंगलिया द्वारा कुल 4570 मेगावाट ताप विद्युत उत्पादन किया जा रहा है। पावर जनरेटिंग कंपनी के 10 जल विद्युत गृहों गांधीसागर, पेंच जल विद्युत गृह तोतलाडोह, रानी अबंतीबाई सागर जल विद्युत गृह बरगी, बाण सागर जल विद्युत गृह के टोंस, सिलपरा, देवलोंद, झिन्ना जल विद्युत गृह, बिरसिंगपुर जल विद्युत गृह, राजघाट जाल विद्युत गृह एवं मड़ीखेड़ा जल विद्युत गृह द्वारा कुल 915 मेगावाट जल विद्युत उत्पादन किया जा रहा है। रतागुरडिया ग्राउंड माउंटेड सोलर प्रोजेक्ट से कुल सात मेगावाट सोलर बिजली का उत्पादन होता है। मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी की कुल स्थापित विद्युत उत्पादन क्षमता 5492 मेगावाट है। कैसे होगी निगरानी इस तकनीकी निगरानी व्यवस्था में पॉवर जनरेटिंग कंपनी द्वारा मुख्यालय एवं संबंधित विद्युत गृहों के अनुभवी व युवा अभियंताओं को सम्मिलित करते हुए यूनिटवार समन्वय टीम गठित की हैं। यह टीम ओवरहॉल कार्यों की योजना, निरीक्षण, मूल्यांकन एवं अनुपालन की सतत निगरानी करेंगे, जिससे किसी भी संभावित तकनीकी कमी अथवा परिचालन बाधा की संभावना को न्यूनतम किया जा सकेगा। इन टीमों के गठन में विशेष रूप से यह सुनिश्चित किया गया है कि किसी भी समूह में शामिल अभ‍ियंता अपने स्वयं के विद्युत उत्पादन इकाई के ओवरहॉल कार्यों से संबद्ध न हों। इससे निरीक्षण प्रक्रिया में निष्पक्षता, व्यापक तकनीकी मूल्यांकन एवं बेहतर सुझावों का समावेश सुनिश्चित होगा। क्या होती है वार्षिक एवं पूंजीगत ओवरहॉल प्रक्रिया विद्युत उत्पादन इकाइयों में वार्षिक एवं पूंजीगत ओवरहॉल एक निर्धारित एवं व्यापक रखरखाव प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य उपकरणों की कार्यक्षमता बनाए रखना, संभावित खराबियों को रोकना तथा संयंत्रों की विश्वसनीयता को बढ़ाना है। वार्षिक ओवरहॉल सामान्यतः प्रत्येक एक से दो वर्षों के अंतराल में किया जाता है, जिसमें महत्वपूर्ण उपकरणों का निरीक्षण, आवश्यक मरम्मत एवं क्षतिग्रस्त पुर्जों का प्रतिस्थापन किया जाता है। वहीं पूंजीगत ओवरहॉल एक विस्तृत तकनीकी प्रक्रिया है, जिसे सामान्यतः चार से छह वर्षों के अंतराल में किया जाता है, जिसमें प्रमुख मशीनों को खोलकर उनकी व्यापक मरम्मत, उन्नयन तथा तकनीकी सुधार किए जाते हैं, जिससे संयंत्रों की आयु एवं दक्षता में वृद्धि होती है। निरंतर निगरानी और विश्लेषण करेगी टीम गठित समन्वय टीम ओवरहॉल अवधि के दौरान संबंधित विद्युत गृहों का नियमित भ्रमण करेगी तथा यह सुनिश्चित करेगी कि पिछली ओवरहॉल अवधि के बाद आई विभिन्न तकनीकी ट्रिपिंग के मूल कारणों का उचित विश्लेषण कर आवश्यक सुधारात्मक उपाय अपनाए गए हैं। इसके अतिरिक्त तकनीकी कार्यों की गतिविधियों की गुणवत्ता की भी समीक्षा की जाएगी। यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि सभी ओवरहॉल गतिविधियों का दैनिक प्रगति प्रतिवेदन तैयार किया जाए एवं विद्युत गृह में गठित गुणवत्ता नियंत्रण दल द्वारा उसका सत्यापन किया जाए।  

शिक्षक तबादला प्रक्रिया शुरू, लेकिन नई ट्रांसफर नीति से नाराजगी; शुक्रवार से आवेदन आमंत्रित

भोपाल  मध्य प्रदेश के स्कूल शिक्षा विभाग में मनचाहे स्थान पर तबादले का इंतजार कर रहे शिक्षकों के लिए स्वैच्छिक स्थानांतरण प्रक्रिया शुक्रवार से शुरू होगी। विभाग ने आवेदन की तिथि एक दिन बढ़ाते हुए अब 19 जून से आनलाइन आवेदन स्वीकार करने का निर्णय लिया है। शिक्षक 23 जून तक पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर सकेंगे। 28 से 30 जून तक आदेश जारी होंगे। पहले आवेदन प्रक्रिया गुरुवार से शुरू होनी थी, लेकिन रिक्त पदों की सूची समय पर पोर्टल पर अपडेट नहीं होने के कारण तिथि आगे बढ़ाई गई। हालांकि, स्थानांतरण नीति में शामिल नई शर्तों और नियमों को लेकर प्रदेशभर के शिक्षकों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि नियम इतने कड़े बनाए गए हैं कि अधिकांश शिक्षक स्वैच्छिक तबादले की प्रक्रिया का लाभ ही नहीं उठा पाएंगे। साथ ही, आवेदन के लिए केवल कुछ दिनों का समय दिए जाने पर भी आपत्ति जताई जा रही है। 90 प्रतिशत ई-अटेंडेंस की शर्त सबसे बड़ी बाधा शासकीय शिक्षक संगठन मध्य प्रदेश के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उपेन्द्र कौशल ने दावा किया है कि वर्तमान नियमों के कारण प्रदेश के करीब 95 प्रतिशत शिक्षक आवेदन करने से वंचित रह सकते हैं। उन्होंने बताया कि विभाग ने तबादले के लिए 90 प्रतिशत ई-अटेंडेंस अनिवार्य कर दी है, जो कई शिक्षकों के लिए मुश्किल साबित हो रही है। शिक्षकों का कहना है कि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में नेटवर्क की समस्या के कारण कई बार आनलाइन उपस्थिति दर्ज नहीं हो पाती। ऐसे में तकनीकी कारणों का खामियाजा अब उन्हें तबादला प्रक्रिया से बाहर होकर भुगतना पड़ रहा है। जनगणना ड्यूटी में लगे शिक्षकों को नहीं मिलेगा लाभ नए नियमों के तहत जनगणना कार्य में लगे शिक्षकों को भी स्वैच्छिक स्थानांतरण की पात्रता से बाहर रखा गया है। प्रदेश में करीब 80 हजार शिक्षक वर्तमान में जनगणना कार्य में संलग्न हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि ऐसे शिक्षकों के तबादले नहीं किए जाएंगे। यहां तक कि जिनके प्रशासनिक तबादला आदेश पहले जारी हो चुके हैं, उन्हें भी ड्यूटी अवधि में स्वतः निरस्त माना जाएगा। नियमों में राहत की मांग शिक्षक संगठनों ने सरकार और स्कूल शिक्षा विभाग से ई-अटेंडेंस, जनगणना ड्यूटी तथा न्यूनतम सेवा अवधि जैसी शर्तों में व्यावहारिक ढंग से छूट देने की मांग की है। उनका कहना है कि पारिवारिक, स्वास्थ्य और अन्य व्यक्तिगत कारणों से वर्षों से तबादले की प्रतीक्षा कर रहे हजारों शिक्षकों को इन नियमों से राहत मिलने के बजाय निराशा हाथ लग रही है।  

रेल संचालन पर चोरों का वार, केबल चोरी से मचा हड़कंप; सतना में दो महिलाएं गिरफ्तार

सतना  मुंबई-हावड़ा रेलखंड पर सतना-मैहर के बीच लगरगवां स्टेशन के पास गुरुवार को सिग्नल की 7 मीटर केबल चोरी हो गई। इस घटना के कारण रेल संचालन लगभग तीन घंटे तक प्रभावित रहा, जिससे अप और डाउन लाइन की 19 ट्रेनें देरी से चलीं।  सिग्नल विभाग के कर्मचारियों ने केबल काट कर ले जा रही महिलाओं को देखा और तत्काल आरपीएफ को सूचित किया। मौके पर पहुंची आरपीएफ टीम ने पीछा कर दोनों आरोपियों को चोरी की गई केबल के साथ पकड़ लिया। बाद में इंजीनियरों ने क्षतिग्रस्त केबल को जोड़कर रेल संचालन को सामान्य किया। 19 ट्रेनें देरी से चलीं इस घटना से प्रभावित होने वाली ट्रेनों में अप लाइन की अयोध्या-एलटीटी, गोरखपुर-एलटीटी, दानापुर-एसएमवीटी, दरभंगा-अहमदाबाद, वाराणसी-एकता नगर और सतना-कटनी मेमू शामिल थीं। वहीं, डाउन लाइन में डॉ. अंबेडकर नगर-रीवा, एलटीटी-दानापुर स्पेशल, जबलपुर-रीवा शटल सहित पांच से अधिक मालगाड़ियां भी प्रभावित हुईं। आरपीएफ पोस्ट प्रभारी बीरेन्द्र यादव ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों की पहचान कल्ली उर्फ सुखमंती (55) निवासी उतैली और चिद्दी उर्फ चिंतामणि निवासी संग्राम कॉलोनी, थाना कोलगवां के रूप में हुई है। दोनों के खिलाफ रेल संपत्ति (अवैध कब्जा) अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है।  

सिंहस्थ तैयारियों पर खास फोकस, उज्जैन में CM मोहन यादव और मनोहर लाल खट्टर लेंगे बड़ी बैठकें

उज्जैन   मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर 19 जून को उज्जैन दौरे पर रहेंगे. इस दौरान केंद्रीय ऊर्जा एवं आवास-शहरी कार्य मंत्री खट्टर दो महत्त्वपूर्ण राज्य स्तरीय समीक्षा बैठकों में शामिल होंगे. प्रशासनिक संकुल भवन के सभा कक्ष में आयोजित इन बैठकों में कई विभागों की समीक्षा हो सकती है।  शाम को शुरू होंगी दो महत्वपूर्ण बैठकें उज्जैन में सीएम व केंद्रीय मंत्री की उपस्थिति में पहली बैठक शाम 6 बजे होगी. इस बैठक में स्वच्छ भारत मिशन की राज्य स्तरीय समीक्षा होगी. वहीं, इसके बाद आयोजित दूसरी बैठक में पुनर्गठित वितरण क्षेत्र योजना (RDSS) के अंतर्गत प्रदेश में चल रहे कार्यो और विद्युत वितरण व्यवस्था की प्रगति की समीक्षा की जाएगी. इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सिंहस्थ 2028 से जुड़े और अन्य विकास कार्यो की भी समीक्षा कर सकते हैं।  प्रशासनिक संकुल भवन के सभा कक्ष में होंगी बैठकें मुख्यमंत्री वीर भारत संघ्राहलय, कान्हा डक्ट परियोजना और केंद्र सरकार की सहायता राशि से चलने वाली अन्य योजनाओं की भी समीक्षा कर सकते हैं।  तैयार होगा उज्जैन व अन्य शहरों के विकास का रोडमैप दरअसल, उज्जैन में होने वाली समीक्षा बैठकें केवल विभागीय समीक्षा तक समिति नहीं रहेगी बल्कि प्रदेश में स्वच्छता, बिजली सुधार और धार्मिक पर्यटन विकास के रोडमैप को नई दिशा देने वाली साबित हो सकती है. मुख्यमंत्री व केंद्रीय मंत्री ल मनोहरलाल खट्टर के दौरे को लेकर प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां पूरी हो गई हैं, जिससे समीक्षा बैठकों की व्यवस्थाओं में कोई कमी न हो. हालांकि, इन बैठकों के बाद क्या महत्वपूर्ण निणर्य होने है ये देर शाम आधिकारिक बयानों के बाद ही सामने आ पाएगा।  समीक्षा बैठक में इन मुद्दों पर जोर दे सकते हैं सीएम व केंद्रीय मंत्री मध्यप्रदेश की वर्तमान परिस्थितियों और सरकार की प्राथमिकताओं के अनुसार माना जा रहा है पहली बैठक में निम्लिखित मुद्दों पर सरकार का फोकस हो सकता है।      नगरीय निकायों में कचरा संग्रहण और निस्तारण व्यवस्था को और मजबूत करना.     शहरों की स्वच्छता रैंकिंग सुधारने के लिए विशेष अभियान.     कचरे से खाद और ऊर्जा उत्पादन परियोजना को बढ़ावा.     खुले में कचरा फेंकने और प्लास्टिक उपयोग पर सख्ती बढ़ाना.     सिंहस्थ के कार्यों के साथ-साथ उज्जैन सहित धार्मिक और पर्यटन शहरों में विशेष सफाई मॉडल लागू करना.     नगर निगमों की रैंकिंग के आधार पर जवाबदेही तय करना.     बिजली वितरण कम्पनियों के तकनीकी और वाणिज्यिक नुकसान कम करना.     स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया में तेजी लाना.     ग्रामीण क्षेत्रों में ट्रांसफार्मर और बिजली लाइनों का उन्नयन.     किसान और घरेलू उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण व निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने पर जोर.     बिजली चोरी रोकने का विशेष अभियान.