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बिजली उत्पादन में बढ़ेगी दक्षता, मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी ने विकसित किया मॉनिटरिंग मॉडल

मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी ने विद्युत गृहों के निर्बाध संचालन के लिए बनाया तकनीकी निगरानी मॉडल मुख्यालय एवं विद्युत गृहों के विशेषज्ञ अभियंताओं की संयुक्त समन्वय टीम गठित भोपाल  मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी ने अपने ताप एवं जल विद्युत गृहों की वार्षिक रखरखाव (Annual Overhaul ) एवं पूंजीगत ओवरहॉल (Capital Overhaul ) गतिविधियों के उपरांत इकाइयों के अधिक सुरक्षित, दक्ष एवं निर्बाध संचालन को सुनिश्चित करने के लिए तकनीकी निगरानी व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है। कंपनी के प्रबंध संचालक मनजीत सिंह ने कहा कि कंपनी का विश्वास है कि मशीनों की तरह कार्य प्रणालियों का भी समय-समय पर मूल्यांकन एवं पुनर्विचार आवश्यक होता है। इससे न सिर्फ बेहतर समाधान उभर कर आते हैं बल्कि कंपनी भी नवाचार के साथ निरंतर विकसित होकर आगे बढ़ने के लिए तत्पर होती है। उन्होंने कहा कि यह पहल तकनीकी विशेषज्ञता, सहभागिता एवं नवाचार को बढ़ावा देते हुए विद्युत उत्पादन की विश्वसनीयता को नई मजबूती प्रदान करेगी। 4 ताप व 10 जल विद्युत गृह से होता है 5492 मेगावाट बिजली उत्पादन वर्तमान में मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी के चार ताप विद्युत गृह अमरकंटक ताप विद्युत गृह चचाई, सतपुड़ा ताप विद्युत गृह सारनी, संजय गांधी ताप विद्युत गृह बिरसिंगपुर व सिंगाजी ताप विद्युत गृह दोंगलिया द्वारा कुल 4570 मेगावाट ताप विद्युत उत्पादन किया जा रहा है। पावर जनरेटिंग कंपनी के 10 जल विद्युत गृहों गांधीसागर, पेंच जल विद्युत गृह तोतलाडोह, रानी अबंतीबाई सागर जल विद्युत गृह बरगी, बाण सागर जल विद्युत गृह के टोंस, सिलपरा, देवलोंद, झिन्ना जल विद्युत गृह, बिरसिंगपुर जल विद्युत गृह, राजघाट जाल विद्युत गृह एवं मड़ीखेड़ा जल विद्युत गृह द्वारा कुल 915 मेगावाट जल विद्युत उत्पादन किया जा रहा है। रतागुरडिया ग्राउंड माउंटेड सोलर प्रोजेक्ट से कुल सात मेगावाट सोलर बिजली का उत्पादन होता है। मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी की कुल स्थापित विद्युत उत्पादन क्षमता 5492 मेगावाट है। कैसे होगी निगरानी इस तकनीकी निगरानी व्यवस्था में पॉवर जनरेटिंग कंपनी द्वारा मुख्यालय एवं संबंधित विद्युत गृहों के अनुभवी व युवा अभियंताओं को सम्मिलित करते हुए यूनिटवार समन्वय टीम गठित की हैं। यह टीम ओवरहॉल कार्यों की योजना, निरीक्षण, मूल्यांकन एवं अनुपालन की सतत निगरानी करेंगे, जिससे किसी भी संभावित तकनीकी कमी अथवा परिचालन बाधा की संभावना को न्यूनतम किया जा सकेगा। इन टीमों के गठन में विशेष रूप से यह सुनिश्चित किया गया है कि किसी भी समूह में शामिल अभ‍ियंता अपने स्वयं के विद्युत उत्पादन इकाई के ओवरहॉल कार्यों से संबद्ध न हों। इससे निरीक्षण प्रक्रिया में निष्पक्षता, व्यापक तकनीकी मूल्यांकन एवं बेहतर सुझावों का समावेश सुनिश्चित होगा। क्या होती है वार्षिक एवं पूंजीगत ओवरहॉल प्रक्रिया विद्युत उत्पादन इकाइयों में वार्षिक एवं पूंजीगत ओवरहॉल एक निर्धारित एवं व्यापक रखरखाव प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य उपकरणों की कार्यक्षमता बनाए रखना, संभावित खराबियों को रोकना तथा संयंत्रों की विश्वसनीयता को बढ़ाना है। वार्षिक ओवरहॉल सामान्यतः प्रत्येक एक से दो वर्षों के अंतराल में किया जाता है, जिसमें महत्वपूर्ण उपकरणों का निरीक्षण, आवश्यक मरम्मत एवं क्षतिग्रस्त पुर्जों का प्रतिस्थापन किया जाता है। वहीं पूंजीगत ओवरहॉल एक विस्तृत तकनीकी प्रक्रिया है, जिसे सामान्यतः चार से छह वर्षों के अंतराल में किया जाता है, जिसमें प्रमुख मशीनों को खोलकर उनकी व्यापक मरम्मत, उन्नयन तथा तकनीकी सुधार किए जाते हैं, जिससे संयंत्रों की आयु एवं दक्षता में वृद्धि होती है। निरंतर निगरानी और विश्लेषण करेगी टीम गठित समन्वय टीम ओवरहॉल अवधि के दौरान संबंधित विद्युत गृहों का नियमित भ्रमण करेगी तथा यह सुनिश्चित करेगी कि पिछली ओवरहॉल अवधि के बाद आई विभिन्न तकनीकी ट्रिपिंग के मूल कारणों का उचित विश्लेषण कर आवश्यक सुधारात्मक उपाय अपनाए गए हैं। इसके अतिरिक्त तकनीकी कार्यों की गतिविधियों की गुणवत्ता की भी समीक्षा की जाएगी। यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि सभी ओवरहॉल गतिविधियों का दैनिक प्रगति प्रतिवेदन तैयार किया जाए एवं विद्युत गृह में गठित गुणवत्ता नियंत्रण दल द्वारा उसका सत्यापन किया जाए।  

शिक्षक तबादला प्रक्रिया शुरू, लेकिन नई ट्रांसफर नीति से नाराजगी; शुक्रवार से आवेदन आमंत्रित

भोपाल  मध्य प्रदेश के स्कूल शिक्षा विभाग में मनचाहे स्थान पर तबादले का इंतजार कर रहे शिक्षकों के लिए स्वैच्छिक स्थानांतरण प्रक्रिया शुक्रवार से शुरू होगी। विभाग ने आवेदन की तिथि एक दिन बढ़ाते हुए अब 19 जून से आनलाइन आवेदन स्वीकार करने का निर्णय लिया है। शिक्षक 23 जून तक पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर सकेंगे। 28 से 30 जून तक आदेश जारी होंगे। पहले आवेदन प्रक्रिया गुरुवार से शुरू होनी थी, लेकिन रिक्त पदों की सूची समय पर पोर्टल पर अपडेट नहीं होने के कारण तिथि आगे बढ़ाई गई। हालांकि, स्थानांतरण नीति में शामिल नई शर्तों और नियमों को लेकर प्रदेशभर के शिक्षकों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि नियम इतने कड़े बनाए गए हैं कि अधिकांश शिक्षक स्वैच्छिक तबादले की प्रक्रिया का लाभ ही नहीं उठा पाएंगे। साथ ही, आवेदन के लिए केवल कुछ दिनों का समय दिए जाने पर भी आपत्ति जताई जा रही है। 90 प्रतिशत ई-अटेंडेंस की शर्त सबसे बड़ी बाधा शासकीय शिक्षक संगठन मध्य प्रदेश के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उपेन्द्र कौशल ने दावा किया है कि वर्तमान नियमों के कारण प्रदेश के करीब 95 प्रतिशत शिक्षक आवेदन करने से वंचित रह सकते हैं। उन्होंने बताया कि विभाग ने तबादले के लिए 90 प्रतिशत ई-अटेंडेंस अनिवार्य कर दी है, जो कई शिक्षकों के लिए मुश्किल साबित हो रही है। शिक्षकों का कहना है कि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में नेटवर्क की समस्या के कारण कई बार आनलाइन उपस्थिति दर्ज नहीं हो पाती। ऐसे में तकनीकी कारणों का खामियाजा अब उन्हें तबादला प्रक्रिया से बाहर होकर भुगतना पड़ रहा है। जनगणना ड्यूटी में लगे शिक्षकों को नहीं मिलेगा लाभ नए नियमों के तहत जनगणना कार्य में लगे शिक्षकों को भी स्वैच्छिक स्थानांतरण की पात्रता से बाहर रखा गया है। प्रदेश में करीब 80 हजार शिक्षक वर्तमान में जनगणना कार्य में संलग्न हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि ऐसे शिक्षकों के तबादले नहीं किए जाएंगे। यहां तक कि जिनके प्रशासनिक तबादला आदेश पहले जारी हो चुके हैं, उन्हें भी ड्यूटी अवधि में स्वतः निरस्त माना जाएगा। नियमों में राहत की मांग शिक्षक संगठनों ने सरकार और स्कूल शिक्षा विभाग से ई-अटेंडेंस, जनगणना ड्यूटी तथा न्यूनतम सेवा अवधि जैसी शर्तों में व्यावहारिक ढंग से छूट देने की मांग की है। उनका कहना है कि पारिवारिक, स्वास्थ्य और अन्य व्यक्तिगत कारणों से वर्षों से तबादले की प्रतीक्षा कर रहे हजारों शिक्षकों को इन नियमों से राहत मिलने के बजाय निराशा हाथ लग रही है।  

रेल संचालन पर चोरों का वार, केबल चोरी से मचा हड़कंप; सतना में दो महिलाएं गिरफ्तार

सतना  मुंबई-हावड़ा रेलखंड पर सतना-मैहर के बीच लगरगवां स्टेशन के पास गुरुवार को सिग्नल की 7 मीटर केबल चोरी हो गई। इस घटना के कारण रेल संचालन लगभग तीन घंटे तक प्रभावित रहा, जिससे अप और डाउन लाइन की 19 ट्रेनें देरी से चलीं।  सिग्नल विभाग के कर्मचारियों ने केबल काट कर ले जा रही महिलाओं को देखा और तत्काल आरपीएफ को सूचित किया। मौके पर पहुंची आरपीएफ टीम ने पीछा कर दोनों आरोपियों को चोरी की गई केबल के साथ पकड़ लिया। बाद में इंजीनियरों ने क्षतिग्रस्त केबल को जोड़कर रेल संचालन को सामान्य किया। 19 ट्रेनें देरी से चलीं इस घटना से प्रभावित होने वाली ट्रेनों में अप लाइन की अयोध्या-एलटीटी, गोरखपुर-एलटीटी, दानापुर-एसएमवीटी, दरभंगा-अहमदाबाद, वाराणसी-एकता नगर और सतना-कटनी मेमू शामिल थीं। वहीं, डाउन लाइन में डॉ. अंबेडकर नगर-रीवा, एलटीटी-दानापुर स्पेशल, जबलपुर-रीवा शटल सहित पांच से अधिक मालगाड़ियां भी प्रभावित हुईं। आरपीएफ पोस्ट प्रभारी बीरेन्द्र यादव ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों की पहचान कल्ली उर्फ सुखमंती (55) निवासी उतैली और चिद्दी उर्फ चिंतामणि निवासी संग्राम कॉलोनी, थाना कोलगवां के रूप में हुई है। दोनों के खिलाफ रेल संपत्ति (अवैध कब्जा) अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है।  

सिंहस्थ तैयारियों पर खास फोकस, उज्जैन में CM मोहन यादव और मनोहर लाल खट्टर लेंगे बड़ी बैठकें

उज्जैन   मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर 19 जून को उज्जैन दौरे पर रहेंगे. इस दौरान केंद्रीय ऊर्जा एवं आवास-शहरी कार्य मंत्री खट्टर दो महत्त्वपूर्ण राज्य स्तरीय समीक्षा बैठकों में शामिल होंगे. प्रशासनिक संकुल भवन के सभा कक्ष में आयोजित इन बैठकों में कई विभागों की समीक्षा हो सकती है।  शाम को शुरू होंगी दो महत्वपूर्ण बैठकें उज्जैन में सीएम व केंद्रीय मंत्री की उपस्थिति में पहली बैठक शाम 6 बजे होगी. इस बैठक में स्वच्छ भारत मिशन की राज्य स्तरीय समीक्षा होगी. वहीं, इसके बाद आयोजित दूसरी बैठक में पुनर्गठित वितरण क्षेत्र योजना (RDSS) के अंतर्गत प्रदेश में चल रहे कार्यो और विद्युत वितरण व्यवस्था की प्रगति की समीक्षा की जाएगी. इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सिंहस्थ 2028 से जुड़े और अन्य विकास कार्यो की भी समीक्षा कर सकते हैं।  प्रशासनिक संकुल भवन के सभा कक्ष में होंगी बैठकें मुख्यमंत्री वीर भारत संघ्राहलय, कान्हा डक्ट परियोजना और केंद्र सरकार की सहायता राशि से चलने वाली अन्य योजनाओं की भी समीक्षा कर सकते हैं।  तैयार होगा उज्जैन व अन्य शहरों के विकास का रोडमैप दरअसल, उज्जैन में होने वाली समीक्षा बैठकें केवल विभागीय समीक्षा तक समिति नहीं रहेगी बल्कि प्रदेश में स्वच्छता, बिजली सुधार और धार्मिक पर्यटन विकास के रोडमैप को नई दिशा देने वाली साबित हो सकती है. मुख्यमंत्री व केंद्रीय मंत्री ल मनोहरलाल खट्टर के दौरे को लेकर प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां पूरी हो गई हैं, जिससे समीक्षा बैठकों की व्यवस्थाओं में कोई कमी न हो. हालांकि, इन बैठकों के बाद क्या महत्वपूर्ण निणर्य होने है ये देर शाम आधिकारिक बयानों के बाद ही सामने आ पाएगा।  समीक्षा बैठक में इन मुद्दों पर जोर दे सकते हैं सीएम व केंद्रीय मंत्री मध्यप्रदेश की वर्तमान परिस्थितियों और सरकार की प्राथमिकताओं के अनुसार माना जा रहा है पहली बैठक में निम्लिखित मुद्दों पर सरकार का फोकस हो सकता है।      नगरीय निकायों में कचरा संग्रहण और निस्तारण व्यवस्था को और मजबूत करना.     शहरों की स्वच्छता रैंकिंग सुधारने के लिए विशेष अभियान.     कचरे से खाद और ऊर्जा उत्पादन परियोजना को बढ़ावा.     खुले में कचरा फेंकने और प्लास्टिक उपयोग पर सख्ती बढ़ाना.     सिंहस्थ के कार्यों के साथ-साथ उज्जैन सहित धार्मिक और पर्यटन शहरों में विशेष सफाई मॉडल लागू करना.     नगर निगमों की रैंकिंग के आधार पर जवाबदेही तय करना.     बिजली वितरण कम्पनियों के तकनीकी और वाणिज्यिक नुकसान कम करना.     स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया में तेजी लाना.     ग्रामीण क्षेत्रों में ट्रांसफार्मर और बिजली लाइनों का उन्नयन.     किसान और घरेलू उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण व निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने पर जोर.     बिजली चोरी रोकने का विशेष अभियान.

21 जून को NEET री-एग्जाम, परीक्षा केंद्रों पर हाईटेक सुरक्षा; गेट पर लगेगी बड़ी घड़ी

भोपाल नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET-UG) 21 जून को है। परीक्षा में किसी भी तरह की गड़बड़ी को रोकने के लिए प्रदेश के सभी केंद्रों पर CCTV कैमरे और जैमर लगाए जा रहे हैं। इसके साथ ही स्टूडेंट्स को समय का सही अंदाजा रहे, इसके लिए हर सेंटर के बाहर एक बड़ी घड़ी लगाई जाएगी। भोपाल में कुल 13 हजार 774 स्टूडेंट्स परीक्षा देंगे। इसे लेकर जिला प्रशासन, पुलिस के साथ रेलवे भी तैयारी कर रहा है। 32 केंद्र प्रभारियों के साथ कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने गुरुवार को वन-टू-वन मीटिंग की। इसमें बताया गया कि कई बार दो से तीन सेंटरों के नाम एक जैसे होते हैं, जिससे परीक्षार्थी कन्फ्यूज हो जाते हैं। इसलिए उन्हें केंद्र का नाम और स्थान क्लियर रखें। हमीदिया रोड पर जो सेंटर हैं, उसके रास्ते में लोग गाड़ियां खड़ी कर देते हैं। इस वजह से स्टूडेंट्स को देरी हो सकती है। इसलिए पुलिस गाड़ियों को तुरंत हटा दें। पुराने शहर में मेट्रो का काम चल रहा है। बैरिकेडिंग में सेंटर का नाम छिप सकता है। इसलिए सेंटर की ओर रास्ता दिखाने वाले बोर्ड लगेंगे। भोपाल में 13 हजार 774 छात्र देंगे परीक्षा भोपाल में 13 हजार 774, छिंदवाड़ा 4303, गुना में 1839, विदिशा में 1709, नर्मदापुरम में 1283 और अशोकनगर में 865 परीक्षार्थियों के आने की संभावना है। देखिए ट्रेन का शेड्यूल रेलवे इंदौर, भोपाल और रतलाम के बीच एक ट्रिप स्पेशल ट्रेन चलाएगा। यह स्पेशल ट्रेन इंदौर एवं मध्य प्रदेश के विभिन्न शहरों से भोपाल आने वाले परीक्षार्थियों को परीक्षा केंद्र तक पहुंचने में सुविधा प्रदान करेगी। गाड़ी संख्या 09354 इंदौर-भोपाल स्पेशल ट्रेन का संचालन 20 जून को किया जाएगा। ट्रेन इंदौर स्टेशन से सुबह 11.25 बजे प्रस्थान कर फतेहाबाद में दोपहर 12 बजे, बड़नगर में दोपहर 12.42 बजे, रतलाम में 1.30 बजे, नागदा में दोपहर 2.23 बजे, उज्जैन में दोपहर 3.25 बजे, मक्सी में शाम 4.30 बजे, शुजालपुर में शाम 5.21 बजे, सीहोर में शाम 6 बजे, बैरागढ़ स्टेशन पर शाम 6.18 बजे और शाम 5 बजे भोपाल स्टेशन पर पहुंचेंगी। इसी प्रकार वापसी में गाड़ी संख्या 09353 भोपाल–रतलाम स्पेशल ट्रेन 20 जून 2026 को भोपाल स्टेशन से शाम 7.40 बजे प्रस्थान कर संत हिरदाराम नगर में रात 8.08 बजे, सीहोर में रात 8.34 बजे, शुजालपुर में रात 8.59 बजे, मक्सी में रात 9.59 बजे, उज्जैन में रात 11.05 बजे एवं अगले दिन नागदा रात 12.05 बजे आगमन कर गंतव्य स्टेशन रतलाम रात 12.55 बजे पहुंचेगी। ऐसा रहेगा कोच कम्पोजिशन  ट्रेन में 13 स्लीपर कोच, 2 सामान्य श्रेणी एवं 2 एसएलआर/डी सहित कुल 17 कोच रहेंगे। सीनियर डीसीएम सौरभ कटारिया ने बताया कि नीट परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों की संभावित अतिरिक्त भीड़ को ध्यान में रखते हुए और उनके आवागमन को सुविधाजनक बनाने के उद्देश्य से ये स्पेशल ट्रेनें चलाई जा रही हैं।

सिकल सेल स्क्रीनिंग में मध्यप्रदेश अव्वल, राष्ट्रपति ने प्रदर्शनी का किया अवलोकन; CM ने गिनाईं उपलब्धियां

ओंकारेश्वर ओंकारेश्वर में विश्व सिकल सेल दिवस के अवसर पर आयोजित विशेष कार्यक्रम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू पहुंची। सिकल सेल से संबंधित प्रदर्शनी का अवलोकन किया। 1.25 करोड़ लोगों के स्क्रीनिंग की लक्ष्य समय से पहले पूरा हुआ।  राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू ने कहा आज सिकल सेल दिवस पर लोगों के स्वास्थय के बारे में जागरुक करना है। सिकल सेल एनिमिया में मध्यप्रदेश सरकार ने बहुआयामी उपलब्धि हासिल किया है। इसके लिए मैं राज्य सरकार की सराहना करती हूं। ये संतोष की बात है कि 2023 में राष्ट्र मिशन में उन्होंने जो लक्ष्य देश के सामने रखे थे। उसमें स्क्रीनिंग का लक्ष्य समय से पहले पूरा हुआ है। जितना मुझे अवगत कराया गया है उसमें सवा करोड़ से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग पूरी हो गई है। लोगों को कॉउंसलिंग कार्ड भी दिया गया इनमें ज्यादातर को लोगों को जेनेटिक कॉउंसलिंग कार्ड भी दिया गया है। सिकल सेल से जुड़े चुनौती को भारत सरकार ने बहुत ही गंभीरता से लिया है। पिछले कुछ वर्षों से समग्र रुप से जो प्रयास किए है, वो अत्यंत सराहनीय है। लगभग तीन वर्ष पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मध्यप्रदेश के शहडोल से एनिमिया सिकल सेल मिशन को लॉंच किया था। इस पहल के पीछे न केवल सरकार का दृढ़ संकल्प था। बल्कि इस चुनौती से जुड़े हर आयाम का समुचित निष्कर्ष देने का दूरदर्शी सोच भी थी। मुझे बताया गया कि केंद्रीय स्वास्थय मंत्रालय और केंद्रीय जनजातीय मंत्रालय के संयुक्त मॉडल के रुप में देश में पहली बार ऐसा मिशन पूरा किया गया। केवल स्वास्थय से जुड़ी समस्याओं के रुप में नहीं देखा जाता है। इसे जनजातीय स्वास्थय का मुद्दा, अनुवांशिका से जुड़े जागरुकता और प्रीवेंटिव हेल्थ कैयर की चुनौती से सामाजिक आचरण में बदलाव के रुप में भी देखा गया है। मुझे बताया गया है कि इस मिशन की पृष्टभूमि में स्तरों पर किए गए वैज्ञानिक और सामाजिक अध्ययन रहे हैं। आईसीएमआर, ट्राइबल हेल्थ रिसर्च इंस्टीट्यूट, AIIMS, NAHM, WHO और विभिन्न राज्यों सरकारों ने इस विषय पर विभिन्न आयामों पर काम किया है। मैं यह जानकार खुश हूं, आज मैं कुछ स्टॉल को देख रही थी। केवल एलोपेथ नहीं, आयुर्वेद भी इसमें रिसर्च करके निकाले है। 2027 तक लक्षित लोगों की स्क्रीनिंग करना लक्ष्य आज विश्व सिकल सेल दिवस के अवसर पर ओंकारेश्वर में माननीय राष्ट्रपति महोदया की उपस्थिति में जनजागरूकता का यह महत्वपूर्ण आयोजन हो रहा है। हमें प्रसन्नता है कि मध्य प्रदेश ने सिकल सेल स्क्रीनिंग के क्षेत्र में कम समय में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। हमारा लक्ष्य वर्ष 2027 से पहले सभी लक्षित लोगों की स्क्रीनिंग पूरी करना है, ताकि इसके बाद उपचार और प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जा सके। सिकल सेल एनीमिया से प्रभावित जनजातीय समाज सदैव इस अभियान को याद रखेगा। सरकार इस बीमारी के उन्मूलन के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। सीएम बोले- 2027 तक 1.60 करोड़ स्क्रीनिंग का लक्ष्य मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि ओंकार महाराज और मां नर्मदा की पावन भूमि पर आज विश्व सिकल सेल दिवस कार्यक्रम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के नेतृत्व में मनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे और राज्यपाल मंगूभाई पटेल शासन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे थे, तभी इस अभियान की नींव रखी गई थी। वर्ष 2023 में शहडोल से सिकल सेल उन्मूलन अभियान 2.0 की शुरुआत हुई। पिछले तीन वर्षों में मध्य प्रदेश में 1 करोड़ 32 लाख लोगों की सिकल सेल जांच (स्क्रीनिंग) की जा चुकी है। वर्ष 2027 से पहले 1 करोड़ 60 लाख स्क्रीनिंग का लक्ष्य पूरा किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने राज्यपाल मंगूभाई पटेल का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने इस अभियान की लगातार निगरानी की और हर दो महीने में समीक्षा बैठक लेकर इसे सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इलाज प्रक्रियाओं की जानकारी दी गई कार्यक्रम में सिकल सेल मरीजों, नियमित रक्तदाताओं और समाज में जागरूकता फैलाने वाले लोगों को सम्मानित किया गया। ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर डॉ. आनंद ओनकर ने बताया कि खालवा, छैगांव माखन, पुनासा और पंधाना विकासखंडों से ऐसे सरपंचों का चयन किया गया है, जिन्होंने अपने गांवों में सिकल सेल स्क्रीनिंग और जागरूकता अभियान को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आयोजन स्थल पर लगाई गई प्रदर्शनी के माध्यम से सिकल सेल एनीमिया की पहचान, स्क्रीनिंग और इलाज प्रक्रियाओं की विस्तृत जानकारी दी गई। इसमें मरीजों को उपलब्ध सरकारी सुविधाओं और बीमारी से बचाव के तरीकों पर भी प्रकाश डाला जाएगा। विशेषज्ञ चिकित्सक स्वास्थ्य परीक्षण और परामर्श भी प्रदान की गई। डॉक्टर बोले-सिकल सेल एनीमिया आनुवंशिक बीमारी डॉक्टर ओनकर ने बताया कि सिकल सेल एनीमिया एक आनुवंशिक बीमारी है, जिसकी पीढ़ी दर पीढ़ी बढ़ोतरी को विवाह पूर्व जांच से रोका जा सकता है। विवाह से पहले युवक-युवती दोनों की जांच कर उन्हें संभावित जोखिमों की जानकारी दी जाती है। जांच रिपोर्ट और सिकल सेल कार्ड के आधार पर संतान में बीमारी की संभावना बताई जाती है, जिसके बाद नवयुगल स्वयं निर्णय लेते हैं। कलेक्टर ऋषभ गुप्ता के निर्देशन में खंडवा जिले में बड़े पैमाने पर सिकल सेल स्क्रीनिंग अभियान चलाया गया है। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि जनजागरूकता, समय पर जांच और उचित परामर्श से इस बीमारी पर प्रभावी नियंत्रण संभव है। विश्व सिकल सेल दिवस का यह आयोजन इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

वन पर्यटन को बढ़ावा देने पर जोर, सीएम डॉ. यादव बोले—पर्यटकों के लिए बढ़ाई जाएं सुविधाएं; आंध्रप्रदेश से होगा वन्यजीव आदान-प्रदान

वन पर्यटन का करें विस्तार, पर्यटकों के लिये बढ़ाएं सुविधाएं : मुख्यमंत्री डॉ. यादव आंध्रप्रदेश को देंगे बाघ और गौर, बदले में उनसे लेंगे वाइल्ड डॉग्स राजस्थान से सोन चिरैया प्राप्त कर घाटीगांव और गांधी सागर में छोड़ेंगे गांधीसागर में छोड़े जाएंगे नर-मादा 2 चीते संगठित वन अपराधों की रोकथाम के लिए बनेगा राज्य स्तरीय टास्क फोर्स वन एवं वन्य जीवों की सुरक्षा के लिए होगी कमाण्ड एवं कन्ट्रोल रूम की स्थापना इस साल हुआ 17.76 लाख मानक बोरा तेंदूपत्ता संग्रहण, संग्राहकों को मिलेगा 710.71 करोड़ का बोनस प्रदेश के 5 नेशनल पार्क के समीप बनेंगे रेस्क्यू सेंटर वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व को चीतों के तीसरे घर के रूप में कर रहे विकसित मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की वन विभाग के कार्यों एवं गतिविधियों की समीक्षा भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश की पहचान उसकी प्राकृतिक धरोहर, जैव विविधता और समृद्ध वन क्षेत्रों से है, इसलिए इनके संरक्षण के लिए सभी स्तरों पर प्रभावी और दीर्घकालिक पहल सुनिश्चित की जानी चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि जैविक एवं वानस्पतिक विविधताओं का संरक्षण केवल पर्यावरणीय आवश्यकता नहीं, यह हमारी भावी पीढ़ियों के प्रति जिम्मेदारी और संकल्प है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वन विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वन क्षेत्रों के विस्तार, पौधरोपण, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण तथा स्थानीय समुदायों की उनके रीति-रिवाजों के साथ सहभागिता को प्राथमिकता दी जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वन विभाग वन्य पर्यटन का तेजी से विस्तार करे। इस क्षेत्र में असीम संभावनाएं हैं। वन पर्यटन बढ़ाने के लिए पर्यटकों के लिए सुविधाएं भी बढ़ाई जाएं। उन्हें होम-स्टे जैसे आकर्षणों के बारे में भी बताया जाए। सफारी गाड़ियों की संख्या बढ़ाने पर भी विचार किया जाए। इससे पर्यटक तेजी से जुड़ेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरुवार को मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन में वन विभाग के कार्यों एवं गतिविधियों की समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रदेश की समृद्ध वन सम्पदा के संरक्षण, संवर्धन और वन्य जीवों की सुरक्षा के लिए विशेष प्रयास करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वन्य जीव संरक्षण को भी अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि प्रदेश के अभयारण्यों और राष्ट्रीय उद्यानों में वन्य जीवों के संरक्षण के लिए आधुनिक प्रबंधन व्यवस्था अपनाई जाए। साथ ही नए वन्य प्राणियों को उनके प्राकृतिक आवास में मुक्त कर प्रदेश की वन सम्पदा को और भी समृद्ध बनाया जाये। वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री दिलीप अहिरवार ने बैठक में वर्चुअली सहभागिता की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जंगल की सीमा में जनजातीय बंधुओं के देवस्थानों को समुचित तरीके से उनके रीति-रिवाजों के अनुसार ही विकसित करें। बताया गया कि इस साल 300 देवस्थान विकसित किए जाएंगे। इससे पहले 1421 देवस्थान विकसित किए जा चुके हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आंध्रप्रदेश सरकार की ओर से मध्यप्रदेश से बाघ और गौर देने का अनुरोध किया है। उन्हें बाघ और गौर देने के लिए कार्यवाही की जाए, बदले में आंध्रप्रदेश से वाइल्ड डॉग्स या अन्य वन्य प्राणी लेने के प्रयास किए जाएं। इसी प्रकार राजस्थान सरकार द्वारा सोन चिरैया देने पर सहमति व्यक्त की गई है। उनसे सोन चिरैया प्राप्त कर ली जाएं। मुख्यमंत्री ने विभाग द्वारा राज्य टाइगर स्ट्राइक फोर्स की तर्ज पर वनों के संगठित अपराधों के सख्ती से नियंत्रण के लिए 'राज्य स्तरीय टास्क फोर्स' का गठन करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी। इसी प्रकार वन एवं वन्य जीवों की सुरक्षा के लिए वन मुख्यालय स्तर पर 'कमॉण्ड एवं कन्ट्रोल रूम' की स्थापना के प्रस्ताव का भी अनुमोदन दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने खनिज के परिवहन के लिए वन विभाग को 'परिवहन अनुज्ञा शुल्क' में वृद्धि करने के प्रस्ताव को भी अनुमति दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मानव और वन्य जीव संघर्ष को राज्य आपदा घोषित करने के प्रयास किए जाएंगे, ताकि ऐसे संघर्ष में प्रशासन, पुलिस, वन विभाग और आपदा मोचन बल मिलकर ऐसी आपदा का समुचित प्रबंधन कर सकेंगे। बैठक में प्रमुख सचिव वन संदीप यादव ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को बताया कि राजस्थान से सोन चिरैया प्राप्त कर उन्हें घाटीगांव और गांधीसागर के जंगलों में छोड़ा जाएगा। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश में वर्तमान में कुल 52 चीते मौजूद हैं, इनमें से 32 चीते कूनो राष्ट्रीय उद्यान में जन्में हैं। सागर जिले के वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व को प्रदेश में चीतों के तीसरे घर के रूप में विकसित किया जा रहा है। मंदसौर जिले के गांधीसागर अभ्यारण में नर-मादा (दो) चीते जुलाई 2026 में छोड़ने की तैयारी की जा रही है। उन्होंने बताया कि बाघ, चीता, तेंदुआ, भेड़िया, घड़ियाल और गिद्धों की संख्या और इनके संरक्षण के मामले में मध्यप्रदेश देश में पहले स्थान पर है। प्रमुख सचिव यादव ने बताया कि प्रदेश में 5 स्थानों यथा कान्हा, बांधवगढ़, पेंच एवं पन्ना नेशनल पार्क के समीप वाइल्ड लाइफ रेस्क्यू सेंटर बनाए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि जंगली हाथियों का प्रबंधन सीखने के लिए वन विभाग की एक टीम पश्चिम बंगाल गई है। केंद्र सरकार द्वारा प्रदेश की सीमा में मौजूद 6 हार्थियों रेडियो कॉलर लगाने की अनुमति दे दी गई है। प्रदेश में हाथियों के अनुरक्षण के लिए सहायक महावत के पद बढ़ाए जाएंगे। वन राजस्व भूमि सीमा विवाद के निराकरण के लिए वन व्यवस्थापन अधिकारी के पद को और अधिकार सम्पन्न बनाया जाएगा। प्रमुख सचिव यादव ने बताया कि प्रदेश के अनूपपुर एवं डिण्डौरी जिलों के जंगलों में साल बोरर आपदा देखने को मिली है। यह बीमारी 30 साल में एक बार देखने मे आती है। पिछली बार 1997 में यह बीमारी आई थी। इस आपदा के विमोचन के लिए अतिरिक्त बजट से बीमारीग्रस्त वृक्षों का विदोहन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि तेंदूपत्ता संग्रहण वर्ष 2026 में कुल 17.76 लाख मानक बोरा तेंदूपत्ता संग्रहण हुआ है। तेंदुपत्ता संग्राहकों को इस साल कुल 710.71 करोड़ रुपए की तेंदूपत्ता बोनस राशि वितरित की जाएगी। प्रमुख सचिव यादव ने बताया कि प्रदेश के 700 वन ग्रामों को राजस्व ग्राम में बदलने के लिए कार्यवाही की जा रही है। बैठक में मुख्यमंत्री के सचिव कौशलेंद्र विक्रम सिंह, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख शुभरंजन सेन सहित वरिष्ठ वन अधिकारी भी उपस्थित थे।  

जमीन-प्रॉपर्टी विवादों पर अहम निर्णय, हाईकोर्ट बोला- सिर्फ नामांतरण या टैक्स भुगतान से मालिकाना हक साबित नहीं होता

 ग्वालियर जमीन खरीदने से पहले केवल रजिस्ट्री, नामांतरण और प्रॉपर्टी टैक्स के दस्तावेज देखकर संतुष्ट हो जाना भारी पड़ सकता है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने स्पष्ट किया है कि यदि जमीन बेचने वाले के पास वैध मालिकाना हक नहीं था, तो उसके द्वारा किया गया पूरा सौदा अवैध माना जाएगा। अदालत ने यह भी कहा कि नगर पालिका में नाम दर्ज होने या टैक्स जमा करने मात्र से किसी व्यक्ति का स्वामित्व सिद्ध नहीं होता। यह टिप्पणी अशोकनगर के लंबरदार मोहल्ले स्थित धनुषधारी बांके देव मंदिर की करीब 98 बीघा भूमि से जुड़े विवाद की सुनवाई के दौरान की गई। राजस्व अभिलेखों में यह जमीन मंदिर के नाम दर्ज है, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 50 करोड़ रुपये बताई गई है। आरोप है कि मंदिर के पुजारी मोहनदास के पुत्र कमलदास ने स्वयं को जमीन का मालिक बताकर इसके प्लॉट काटकर कई लोगों को बेच दिए। खरीदारों ने रजिस्ट्री कराई, नगर पालिका में नामांतरण कराया, मकान बनाए और वर्षों तक प्रॉपर्टी टैक्स भी जमा किया। खंडपीठ ने खरीदारों की याचिकाएं खारिज करते हुए कहा कि मंदिर का पुजारी या महंत संपत्ति का मालिक नहीं, बल्कि केवल उसका प्रबंधक होता है। इसलिए उसके पास संपत्ति बेचने का अधिकार नहीं है। अदालत ने स्पष्ट किया कि जिस व्यक्ति के पास वैध स्वामित्व नहीं है, वह जमीन का हस्तांतरण नहीं कर सकता। ऐसे में खरीदारों को भी मालिकाना अधिकार नहीं मिलेगा और उन्हें अतिक्रमणकारी माना जाएगा। कोर्ट ने दोहराया कि रजिस्ट्री, नामांतरण और प्रॉपर्टी टैक्स जैसे दस्तावेज स्वामित्व का अंतिम प्रमाण नहीं हैं, बल्कि मूल मालिकाना हक की जांच सबसे महत्वपूर्ण है।  

कर्मवीर सम्मान–2026 से नवाजे जाएंगे संतोष चौबे, साहित्य और शिक्षा जगत में योगदान का सम्मान

 संतोष चौबे होंगे कर्मवीर सम्मान–2026 से सम्मानित भोपाल माधवराव सप्रे संग्रहालय, भोपाल द्वारा अपने 43वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित सम्मान समारोह में वरिष्ठ कवि–कथाकार, विश्व रंग के निदेशक एवं रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति श्री संतोष चौबे को प्रतिष्ठित 'कर्मवीर सम्मान–2026' से सम्मानित किया जाएगा।  यह सम्मान समारोह 19 जून (शुक्रवार) को सुबह 10.30 बजे सप्रे संग्रहालय, भोपाल में पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री प्रहलाद पटेल के मुख्य आतिथ्य और तुलसी मानस प्रतिष्ठान के कार्याध्यक्ष श्री रघुनंदन शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित होगा। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के टैगोर अंतरराष्ट्रीय हिंदी केंद्र के निदेशक तथा वैश्विक हिंदी पत्रकारिता के अध्येता डॉ. जवाहर कर्नावट को भी कर्मवीर सम्मान प्रदान किया जाएगा। साथ ही इतिहास एवं पुरातत्व के अध्येता डॉ. सुभाष अत्रे, संस्कृति मर्मज्ञ श्री श्रीराम तिवारी तथा वरिष्ठ पत्रकार श्री नुरूल हसन 'नूर' भी सम्मानित होंगे।  इस अवसर पर मध्यप्रदेश अभिलेखागार के पूर्व संचालक श्री शंभुदयाल गुरू द्वारा प्रदत्त साहित्य से इतिहास प्रभाग का शुभारंभ भी होगा।

इंदौरवासियों के लिए खुशखबरी! यशवंत सागर तालाब से बढ़ेगी जलापूर्ति, टंकियां भरने में नहीं होगी दिक्कत

इंदौर इंदौर के बड़े हिस्से की प्यास बुझाने वाले यशवंत सागर की जल-संग्रहण क्षमता नगर निगम बढ़ाने जा रहा है। देवधरम फिल्टर स्टेशन पर ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता भी बढ़ाई जाएगी। इसके लिए जल्द ही काम शुरू होने वाला है। इसके बाद हर दिन यशवंत सागर से अधिक पानी लिया जा सकेगा और दस टंकियां भरी जा सकेंगी। अभी छह टंकियों से पानी की सप्लाई होती है।  इस साल शहर में जलसंकट ने शहरवासियों को परेशान किया और निगम अफसरों को भी चिंता में डाल दिया। अगले साल फिर जलसंकट न हो, इसके लिए यशवंत सागर से अधिक पानी लेने की योजना बनाई गई है। पंद्रह साल पहले नगर निगम ने यशवंत सागर तालाब/बांध की ऊंचाई बढ़ाई थी। उसके बाद से तालाब में जून तक पानी रहता है। फिलहाल तालाब से 54 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रतिदिन) पानी लेकर छह टंकियां भरी जाती हैं और सुपर कॉरिडोर क्षेत्र के कुछ संस्थानों को भी पानी दिया जाता है। ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता बढ़ने के बाद अधिक मात्रा में जल उपलब्ध हो सकेगा। इससे शहर के पश्चिमी हिस्से को गर्मी के दिनों में फायदा होगा और दस टंकियां भरी जा सकेंगी। जलकार्य समिति प्रभारी अभिषेक शर्मा ‘बबलू’ ने बताया कि इस प्रोजेक्ट पर जल्द काम शुरू किया जाएगा, ताकि जून तक तालाब में बचे पानी का उपयोग सप्लाई के लिए किया जा सके। घरों तक पानी पहुंचाने में यशवंत सागर के पानी की लागत 12 रुपये प्रति हजार लीटर आती है, जबकि नर्मदा जल की लागत 26 रुपये प्रति हजार लीटर है। लिंबोदी तालाब को किया जा रहा है जिंदा नगर निगम लिंबोदी तालाब को भी पुनर्जीवित कर रहा है। तालाब का गहरीकरण और खुदाई का काम किया जा रहा है। इसके बाद तालाब की पाल को मजबूत किया जाएगा। इस काम के लिए नगर निगम पांच करोड़ रुपये खर्च कर रहा है।