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21 जून को NEET री-एग्जाम, परीक्षा केंद्रों पर हाईटेक सुरक्षा; गेट पर लगेगी बड़ी घड़ी

भोपाल नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET-UG) 21 जून को है। परीक्षा में किसी भी तरह की गड़बड़ी को रोकने के लिए प्रदेश के सभी केंद्रों पर CCTV कैमरे और जैमर लगाए जा रहे हैं। इसके साथ ही स्टूडेंट्स को समय का सही अंदाजा रहे, इसके लिए हर सेंटर के बाहर एक बड़ी घड़ी लगाई जाएगी। भोपाल में कुल 13 हजार 774 स्टूडेंट्स परीक्षा देंगे। इसे लेकर जिला प्रशासन, पुलिस के साथ रेलवे भी तैयारी कर रहा है। 32 केंद्र प्रभारियों के साथ कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने गुरुवार को वन-टू-वन मीटिंग की। इसमें बताया गया कि कई बार दो से तीन सेंटरों के नाम एक जैसे होते हैं, जिससे परीक्षार्थी कन्फ्यूज हो जाते हैं। इसलिए उन्हें केंद्र का नाम और स्थान क्लियर रखें। हमीदिया रोड पर जो सेंटर हैं, उसके रास्ते में लोग गाड़ियां खड़ी कर देते हैं। इस वजह से स्टूडेंट्स को देरी हो सकती है। इसलिए पुलिस गाड़ियों को तुरंत हटा दें। पुराने शहर में मेट्रो का काम चल रहा है। बैरिकेडिंग में सेंटर का नाम छिप सकता है। इसलिए सेंटर की ओर रास्ता दिखाने वाले बोर्ड लगेंगे। भोपाल में 13 हजार 774 छात्र देंगे परीक्षा भोपाल में 13 हजार 774, छिंदवाड़ा 4303, गुना में 1839, विदिशा में 1709, नर्मदापुरम में 1283 और अशोकनगर में 865 परीक्षार्थियों के आने की संभावना है। देखिए ट्रेन का शेड्यूल रेलवे इंदौर, भोपाल और रतलाम के बीच एक ट्रिप स्पेशल ट्रेन चलाएगा। यह स्पेशल ट्रेन इंदौर एवं मध्य प्रदेश के विभिन्न शहरों से भोपाल आने वाले परीक्षार्थियों को परीक्षा केंद्र तक पहुंचने में सुविधा प्रदान करेगी। गाड़ी संख्या 09354 इंदौर-भोपाल स्पेशल ट्रेन का संचालन 20 जून को किया जाएगा। ट्रेन इंदौर स्टेशन से सुबह 11.25 बजे प्रस्थान कर फतेहाबाद में दोपहर 12 बजे, बड़नगर में दोपहर 12.42 बजे, रतलाम में 1.30 बजे, नागदा में दोपहर 2.23 बजे, उज्जैन में दोपहर 3.25 बजे, मक्सी में शाम 4.30 बजे, शुजालपुर में शाम 5.21 बजे, सीहोर में शाम 6 बजे, बैरागढ़ स्टेशन पर शाम 6.18 बजे और शाम 5 बजे भोपाल स्टेशन पर पहुंचेंगी। इसी प्रकार वापसी में गाड़ी संख्या 09353 भोपाल–रतलाम स्पेशल ट्रेन 20 जून 2026 को भोपाल स्टेशन से शाम 7.40 बजे प्रस्थान कर संत हिरदाराम नगर में रात 8.08 बजे, सीहोर में रात 8.34 बजे, शुजालपुर में रात 8.59 बजे, मक्सी में रात 9.59 बजे, उज्जैन में रात 11.05 बजे एवं अगले दिन नागदा रात 12.05 बजे आगमन कर गंतव्य स्टेशन रतलाम रात 12.55 बजे पहुंचेगी। ऐसा रहेगा कोच कम्पोजिशन  ट्रेन में 13 स्लीपर कोच, 2 सामान्य श्रेणी एवं 2 एसएलआर/डी सहित कुल 17 कोच रहेंगे। सीनियर डीसीएम सौरभ कटारिया ने बताया कि नीट परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों की संभावित अतिरिक्त भीड़ को ध्यान में रखते हुए और उनके आवागमन को सुविधाजनक बनाने के उद्देश्य से ये स्पेशल ट्रेनें चलाई जा रही हैं।

सिकल सेल स्क्रीनिंग में मध्यप्रदेश अव्वल, राष्ट्रपति ने प्रदर्शनी का किया अवलोकन; CM ने गिनाईं उपलब्धियां

ओंकारेश्वर ओंकारेश्वर में विश्व सिकल सेल दिवस के अवसर पर आयोजित विशेष कार्यक्रम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू पहुंची। सिकल सेल से संबंधित प्रदर्शनी का अवलोकन किया। 1.25 करोड़ लोगों के स्क्रीनिंग की लक्ष्य समय से पहले पूरा हुआ।  राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू ने कहा आज सिकल सेल दिवस पर लोगों के स्वास्थय के बारे में जागरुक करना है। सिकल सेल एनिमिया में मध्यप्रदेश सरकार ने बहुआयामी उपलब्धि हासिल किया है। इसके लिए मैं राज्य सरकार की सराहना करती हूं। ये संतोष की बात है कि 2023 में राष्ट्र मिशन में उन्होंने जो लक्ष्य देश के सामने रखे थे। उसमें स्क्रीनिंग का लक्ष्य समय से पहले पूरा हुआ है। जितना मुझे अवगत कराया गया है उसमें सवा करोड़ से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग पूरी हो गई है। लोगों को कॉउंसलिंग कार्ड भी दिया गया इनमें ज्यादातर को लोगों को जेनेटिक कॉउंसलिंग कार्ड भी दिया गया है। सिकल सेल से जुड़े चुनौती को भारत सरकार ने बहुत ही गंभीरता से लिया है। पिछले कुछ वर्षों से समग्र रुप से जो प्रयास किए है, वो अत्यंत सराहनीय है। लगभग तीन वर्ष पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मध्यप्रदेश के शहडोल से एनिमिया सिकल सेल मिशन को लॉंच किया था। इस पहल के पीछे न केवल सरकार का दृढ़ संकल्प था। बल्कि इस चुनौती से जुड़े हर आयाम का समुचित निष्कर्ष देने का दूरदर्शी सोच भी थी। मुझे बताया गया कि केंद्रीय स्वास्थय मंत्रालय और केंद्रीय जनजातीय मंत्रालय के संयुक्त मॉडल के रुप में देश में पहली बार ऐसा मिशन पूरा किया गया। केवल स्वास्थय से जुड़ी समस्याओं के रुप में नहीं देखा जाता है। इसे जनजातीय स्वास्थय का मुद्दा, अनुवांशिका से जुड़े जागरुकता और प्रीवेंटिव हेल्थ कैयर की चुनौती से सामाजिक आचरण में बदलाव के रुप में भी देखा गया है। मुझे बताया गया है कि इस मिशन की पृष्टभूमि में स्तरों पर किए गए वैज्ञानिक और सामाजिक अध्ययन रहे हैं। आईसीएमआर, ट्राइबल हेल्थ रिसर्च इंस्टीट्यूट, AIIMS, NAHM, WHO और विभिन्न राज्यों सरकारों ने इस विषय पर विभिन्न आयामों पर काम किया है। मैं यह जानकार खुश हूं, आज मैं कुछ स्टॉल को देख रही थी। केवल एलोपेथ नहीं, आयुर्वेद भी इसमें रिसर्च करके निकाले है। 2027 तक लक्षित लोगों की स्क्रीनिंग करना लक्ष्य आज विश्व सिकल सेल दिवस के अवसर पर ओंकारेश्वर में माननीय राष्ट्रपति महोदया की उपस्थिति में जनजागरूकता का यह महत्वपूर्ण आयोजन हो रहा है। हमें प्रसन्नता है कि मध्य प्रदेश ने सिकल सेल स्क्रीनिंग के क्षेत्र में कम समय में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। हमारा लक्ष्य वर्ष 2027 से पहले सभी लक्षित लोगों की स्क्रीनिंग पूरी करना है, ताकि इसके बाद उपचार और प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जा सके। सिकल सेल एनीमिया से प्रभावित जनजातीय समाज सदैव इस अभियान को याद रखेगा। सरकार इस बीमारी के उन्मूलन के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। सीएम बोले- 2027 तक 1.60 करोड़ स्क्रीनिंग का लक्ष्य मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि ओंकार महाराज और मां नर्मदा की पावन भूमि पर आज विश्व सिकल सेल दिवस कार्यक्रम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के नेतृत्व में मनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे और राज्यपाल मंगूभाई पटेल शासन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे थे, तभी इस अभियान की नींव रखी गई थी। वर्ष 2023 में शहडोल से सिकल सेल उन्मूलन अभियान 2.0 की शुरुआत हुई। पिछले तीन वर्षों में मध्य प्रदेश में 1 करोड़ 32 लाख लोगों की सिकल सेल जांच (स्क्रीनिंग) की जा चुकी है। वर्ष 2027 से पहले 1 करोड़ 60 लाख स्क्रीनिंग का लक्ष्य पूरा किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने राज्यपाल मंगूभाई पटेल का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने इस अभियान की लगातार निगरानी की और हर दो महीने में समीक्षा बैठक लेकर इसे सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इलाज प्रक्रियाओं की जानकारी दी गई कार्यक्रम में सिकल सेल मरीजों, नियमित रक्तदाताओं और समाज में जागरूकता फैलाने वाले लोगों को सम्मानित किया गया। ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर डॉ. आनंद ओनकर ने बताया कि खालवा, छैगांव माखन, पुनासा और पंधाना विकासखंडों से ऐसे सरपंचों का चयन किया गया है, जिन्होंने अपने गांवों में सिकल सेल स्क्रीनिंग और जागरूकता अभियान को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आयोजन स्थल पर लगाई गई प्रदर्शनी के माध्यम से सिकल सेल एनीमिया की पहचान, स्क्रीनिंग और इलाज प्रक्रियाओं की विस्तृत जानकारी दी गई। इसमें मरीजों को उपलब्ध सरकारी सुविधाओं और बीमारी से बचाव के तरीकों पर भी प्रकाश डाला जाएगा। विशेषज्ञ चिकित्सक स्वास्थ्य परीक्षण और परामर्श भी प्रदान की गई। डॉक्टर बोले-सिकल सेल एनीमिया आनुवंशिक बीमारी डॉक्टर ओनकर ने बताया कि सिकल सेल एनीमिया एक आनुवंशिक बीमारी है, जिसकी पीढ़ी दर पीढ़ी बढ़ोतरी को विवाह पूर्व जांच से रोका जा सकता है। विवाह से पहले युवक-युवती दोनों की जांच कर उन्हें संभावित जोखिमों की जानकारी दी जाती है। जांच रिपोर्ट और सिकल सेल कार्ड के आधार पर संतान में बीमारी की संभावना बताई जाती है, जिसके बाद नवयुगल स्वयं निर्णय लेते हैं। कलेक्टर ऋषभ गुप्ता के निर्देशन में खंडवा जिले में बड़े पैमाने पर सिकल सेल स्क्रीनिंग अभियान चलाया गया है। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि जनजागरूकता, समय पर जांच और उचित परामर्श से इस बीमारी पर प्रभावी नियंत्रण संभव है। विश्व सिकल सेल दिवस का यह आयोजन इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

वन पर्यटन को बढ़ावा देने पर जोर, सीएम डॉ. यादव बोले—पर्यटकों के लिए बढ़ाई जाएं सुविधाएं; आंध्रप्रदेश से होगा वन्यजीव आदान-प्रदान

वन पर्यटन का करें विस्तार, पर्यटकों के लिये बढ़ाएं सुविधाएं : मुख्यमंत्री डॉ. यादव आंध्रप्रदेश को देंगे बाघ और गौर, बदले में उनसे लेंगे वाइल्ड डॉग्स राजस्थान से सोन चिरैया प्राप्त कर घाटीगांव और गांधी सागर में छोड़ेंगे गांधीसागर में छोड़े जाएंगे नर-मादा 2 चीते संगठित वन अपराधों की रोकथाम के लिए बनेगा राज्य स्तरीय टास्क फोर्स वन एवं वन्य जीवों की सुरक्षा के लिए होगी कमाण्ड एवं कन्ट्रोल रूम की स्थापना इस साल हुआ 17.76 लाख मानक बोरा तेंदूपत्ता संग्रहण, संग्राहकों को मिलेगा 710.71 करोड़ का बोनस प्रदेश के 5 नेशनल पार्क के समीप बनेंगे रेस्क्यू सेंटर वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व को चीतों के तीसरे घर के रूप में कर रहे विकसित मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने की वन विभाग के कार्यों एवं गतिविधियों की समीक्षा भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश की पहचान उसकी प्राकृतिक धरोहर, जैव विविधता और समृद्ध वन क्षेत्रों से है, इसलिए इनके संरक्षण के लिए सभी स्तरों पर प्रभावी और दीर्घकालिक पहल सुनिश्चित की जानी चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि जैविक एवं वानस्पतिक विविधताओं का संरक्षण केवल पर्यावरणीय आवश्यकता नहीं, यह हमारी भावी पीढ़ियों के प्रति जिम्मेदारी और संकल्प है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वन विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वन क्षेत्रों के विस्तार, पौधरोपण, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण तथा स्थानीय समुदायों की उनके रीति-रिवाजों के साथ सहभागिता को प्राथमिकता दी जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि वन विभाग वन्य पर्यटन का तेजी से विस्तार करे। इस क्षेत्र में असीम संभावनाएं हैं। वन पर्यटन बढ़ाने के लिए पर्यटकों के लिए सुविधाएं भी बढ़ाई जाएं। उन्हें होम-स्टे जैसे आकर्षणों के बारे में भी बताया जाए। सफारी गाड़ियों की संख्या बढ़ाने पर भी विचार किया जाए। इससे पर्यटक तेजी से जुड़ेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरुवार को मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन में वन विभाग के कार्यों एवं गतिविधियों की समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रदेश की समृद्ध वन सम्पदा के संरक्षण, संवर्धन और वन्य जीवों की सुरक्षा के लिए विशेष प्रयास करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वन्य जीव संरक्षण को भी अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि प्रदेश के अभयारण्यों और राष्ट्रीय उद्यानों में वन्य जीवों के संरक्षण के लिए आधुनिक प्रबंधन व्यवस्था अपनाई जाए। साथ ही नए वन्य प्राणियों को उनके प्राकृतिक आवास में मुक्त कर प्रदेश की वन सम्पदा को और भी समृद्ध बनाया जाये। वन एवं पर्यावरण राज्य मंत्री दिलीप अहिरवार ने बैठक में वर्चुअली सहभागिता की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जंगल की सीमा में जनजातीय बंधुओं के देवस्थानों को समुचित तरीके से उनके रीति-रिवाजों के अनुसार ही विकसित करें। बताया गया कि इस साल 300 देवस्थान विकसित किए जाएंगे। इससे पहले 1421 देवस्थान विकसित किए जा चुके हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आंध्रप्रदेश सरकार की ओर से मध्यप्रदेश से बाघ और गौर देने का अनुरोध किया है। उन्हें बाघ और गौर देने के लिए कार्यवाही की जाए, बदले में आंध्रप्रदेश से वाइल्ड डॉग्स या अन्य वन्य प्राणी लेने के प्रयास किए जाएं। इसी प्रकार राजस्थान सरकार द्वारा सोन चिरैया देने पर सहमति व्यक्त की गई है। उनसे सोन चिरैया प्राप्त कर ली जाएं। मुख्यमंत्री ने विभाग द्वारा राज्य टाइगर स्ट्राइक फोर्स की तर्ज पर वनों के संगठित अपराधों के सख्ती से नियंत्रण के लिए 'राज्य स्तरीय टास्क फोर्स' का गठन करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी। इसी प्रकार वन एवं वन्य जीवों की सुरक्षा के लिए वन मुख्यालय स्तर पर 'कमॉण्ड एवं कन्ट्रोल रूम' की स्थापना के प्रस्ताव का भी अनुमोदन दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने खनिज के परिवहन के लिए वन विभाग को 'परिवहन अनुज्ञा शुल्क' में वृद्धि करने के प्रस्ताव को भी अनुमति दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मानव और वन्य जीव संघर्ष को राज्य आपदा घोषित करने के प्रयास किए जाएंगे, ताकि ऐसे संघर्ष में प्रशासन, पुलिस, वन विभाग और आपदा मोचन बल मिलकर ऐसी आपदा का समुचित प्रबंधन कर सकेंगे। बैठक में प्रमुख सचिव वन संदीप यादव ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को बताया कि राजस्थान से सोन चिरैया प्राप्त कर उन्हें घाटीगांव और गांधीसागर के जंगलों में छोड़ा जाएगा। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश में वर्तमान में कुल 52 चीते मौजूद हैं, इनमें से 32 चीते कूनो राष्ट्रीय उद्यान में जन्में हैं। सागर जिले के वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व को प्रदेश में चीतों के तीसरे घर के रूप में विकसित किया जा रहा है। मंदसौर जिले के गांधीसागर अभ्यारण में नर-मादा (दो) चीते जुलाई 2026 में छोड़ने की तैयारी की जा रही है। उन्होंने बताया कि बाघ, चीता, तेंदुआ, भेड़िया, घड़ियाल और गिद्धों की संख्या और इनके संरक्षण के मामले में मध्यप्रदेश देश में पहले स्थान पर है। प्रमुख सचिव यादव ने बताया कि प्रदेश में 5 स्थानों यथा कान्हा, बांधवगढ़, पेंच एवं पन्ना नेशनल पार्क के समीप वाइल्ड लाइफ रेस्क्यू सेंटर बनाए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि जंगली हाथियों का प्रबंधन सीखने के लिए वन विभाग की एक टीम पश्चिम बंगाल गई है। केंद्र सरकार द्वारा प्रदेश की सीमा में मौजूद 6 हार्थियों रेडियो कॉलर लगाने की अनुमति दे दी गई है। प्रदेश में हाथियों के अनुरक्षण के लिए सहायक महावत के पद बढ़ाए जाएंगे। वन राजस्व भूमि सीमा विवाद के निराकरण के लिए वन व्यवस्थापन अधिकारी के पद को और अधिकार सम्पन्न बनाया जाएगा। प्रमुख सचिव यादव ने बताया कि प्रदेश के अनूपपुर एवं डिण्डौरी जिलों के जंगलों में साल बोरर आपदा देखने को मिली है। यह बीमारी 30 साल में एक बार देखने मे आती है। पिछली बार 1997 में यह बीमारी आई थी। इस आपदा के विमोचन के लिए अतिरिक्त बजट से बीमारीग्रस्त वृक्षों का विदोहन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि तेंदूपत्ता संग्रहण वर्ष 2026 में कुल 17.76 लाख मानक बोरा तेंदूपत्ता संग्रहण हुआ है। तेंदुपत्ता संग्राहकों को इस साल कुल 710.71 करोड़ रुपए की तेंदूपत्ता बोनस राशि वितरित की जाएगी। प्रमुख सचिव यादव ने बताया कि प्रदेश के 700 वन ग्रामों को राजस्व ग्राम में बदलने के लिए कार्यवाही की जा रही है। बैठक में मुख्यमंत्री के सचिव कौशलेंद्र विक्रम सिंह, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख शुभरंजन सेन सहित वरिष्ठ वन अधिकारी भी उपस्थित थे।  

जमीन-प्रॉपर्टी विवादों पर अहम निर्णय, हाईकोर्ट बोला- सिर्फ नामांतरण या टैक्स भुगतान से मालिकाना हक साबित नहीं होता

 ग्वालियर जमीन खरीदने से पहले केवल रजिस्ट्री, नामांतरण और प्रॉपर्टी टैक्स के दस्तावेज देखकर संतुष्ट हो जाना भारी पड़ सकता है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने स्पष्ट किया है कि यदि जमीन बेचने वाले के पास वैध मालिकाना हक नहीं था, तो उसके द्वारा किया गया पूरा सौदा अवैध माना जाएगा। अदालत ने यह भी कहा कि नगर पालिका में नाम दर्ज होने या टैक्स जमा करने मात्र से किसी व्यक्ति का स्वामित्व सिद्ध नहीं होता। यह टिप्पणी अशोकनगर के लंबरदार मोहल्ले स्थित धनुषधारी बांके देव मंदिर की करीब 98 बीघा भूमि से जुड़े विवाद की सुनवाई के दौरान की गई। राजस्व अभिलेखों में यह जमीन मंदिर के नाम दर्ज है, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 50 करोड़ रुपये बताई गई है। आरोप है कि मंदिर के पुजारी मोहनदास के पुत्र कमलदास ने स्वयं को जमीन का मालिक बताकर इसके प्लॉट काटकर कई लोगों को बेच दिए। खरीदारों ने रजिस्ट्री कराई, नगर पालिका में नामांतरण कराया, मकान बनाए और वर्षों तक प्रॉपर्टी टैक्स भी जमा किया। खंडपीठ ने खरीदारों की याचिकाएं खारिज करते हुए कहा कि मंदिर का पुजारी या महंत संपत्ति का मालिक नहीं, बल्कि केवल उसका प्रबंधक होता है। इसलिए उसके पास संपत्ति बेचने का अधिकार नहीं है। अदालत ने स्पष्ट किया कि जिस व्यक्ति के पास वैध स्वामित्व नहीं है, वह जमीन का हस्तांतरण नहीं कर सकता। ऐसे में खरीदारों को भी मालिकाना अधिकार नहीं मिलेगा और उन्हें अतिक्रमणकारी माना जाएगा। कोर्ट ने दोहराया कि रजिस्ट्री, नामांतरण और प्रॉपर्टी टैक्स जैसे दस्तावेज स्वामित्व का अंतिम प्रमाण नहीं हैं, बल्कि मूल मालिकाना हक की जांच सबसे महत्वपूर्ण है।  

कर्मवीर सम्मान–2026 से नवाजे जाएंगे संतोष चौबे, साहित्य और शिक्षा जगत में योगदान का सम्मान

 संतोष चौबे होंगे कर्मवीर सम्मान–2026 से सम्मानित भोपाल माधवराव सप्रे संग्रहालय, भोपाल द्वारा अपने 43वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित सम्मान समारोह में वरिष्ठ कवि–कथाकार, विश्व रंग के निदेशक एवं रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति श्री संतोष चौबे को प्रतिष्ठित 'कर्मवीर सम्मान–2026' से सम्मानित किया जाएगा।  यह सम्मान समारोह 19 जून (शुक्रवार) को सुबह 10.30 बजे सप्रे संग्रहालय, भोपाल में पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री प्रहलाद पटेल के मुख्य आतिथ्य और तुलसी मानस प्रतिष्ठान के कार्याध्यक्ष श्री रघुनंदन शर्मा की अध्यक्षता में आयोजित होगा। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के टैगोर अंतरराष्ट्रीय हिंदी केंद्र के निदेशक तथा वैश्विक हिंदी पत्रकारिता के अध्येता डॉ. जवाहर कर्नावट को भी कर्मवीर सम्मान प्रदान किया जाएगा। साथ ही इतिहास एवं पुरातत्व के अध्येता डॉ. सुभाष अत्रे, संस्कृति मर्मज्ञ श्री श्रीराम तिवारी तथा वरिष्ठ पत्रकार श्री नुरूल हसन 'नूर' भी सम्मानित होंगे।  इस अवसर पर मध्यप्रदेश अभिलेखागार के पूर्व संचालक श्री शंभुदयाल गुरू द्वारा प्रदत्त साहित्य से इतिहास प्रभाग का शुभारंभ भी होगा।

इंदौरवासियों के लिए खुशखबरी! यशवंत सागर तालाब से बढ़ेगी जलापूर्ति, टंकियां भरने में नहीं होगी दिक्कत

इंदौर इंदौर के बड़े हिस्से की प्यास बुझाने वाले यशवंत सागर की जल-संग्रहण क्षमता नगर निगम बढ़ाने जा रहा है। देवधरम फिल्टर स्टेशन पर ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता भी बढ़ाई जाएगी। इसके लिए जल्द ही काम शुरू होने वाला है। इसके बाद हर दिन यशवंत सागर से अधिक पानी लिया जा सकेगा और दस टंकियां भरी जा सकेंगी। अभी छह टंकियों से पानी की सप्लाई होती है।  इस साल शहर में जलसंकट ने शहरवासियों को परेशान किया और निगम अफसरों को भी चिंता में डाल दिया। अगले साल फिर जलसंकट न हो, इसके लिए यशवंत सागर से अधिक पानी लेने की योजना बनाई गई है। पंद्रह साल पहले नगर निगम ने यशवंत सागर तालाब/बांध की ऊंचाई बढ़ाई थी। उसके बाद से तालाब में जून तक पानी रहता है। फिलहाल तालाब से 54 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रतिदिन) पानी लेकर छह टंकियां भरी जाती हैं और सुपर कॉरिडोर क्षेत्र के कुछ संस्थानों को भी पानी दिया जाता है। ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता बढ़ने के बाद अधिक मात्रा में जल उपलब्ध हो सकेगा। इससे शहर के पश्चिमी हिस्से को गर्मी के दिनों में फायदा होगा और दस टंकियां भरी जा सकेंगी। जलकार्य समिति प्रभारी अभिषेक शर्मा ‘बबलू’ ने बताया कि इस प्रोजेक्ट पर जल्द काम शुरू किया जाएगा, ताकि जून तक तालाब में बचे पानी का उपयोग सप्लाई के लिए किया जा सके। घरों तक पानी पहुंचाने में यशवंत सागर के पानी की लागत 12 रुपये प्रति हजार लीटर आती है, जबकि नर्मदा जल की लागत 26 रुपये प्रति हजार लीटर है। लिंबोदी तालाब को किया जा रहा है जिंदा नगर निगम लिंबोदी तालाब को भी पुनर्जीवित कर रहा है। तालाब का गहरीकरण और खुदाई का काम किया जा रहा है। इसके बाद तालाब की पाल को मजबूत किया जाएगा। इस काम के लिए नगर निगम पांच करोड़ रुपये खर्च कर रहा है।

MP को बड़ी सौगात! इंदौर-अबू धाबी फ्लाइट 15 जुलाई से शुरू, एयर इंडिया एक्सप्रेस ने जारी किया शेड्यूल

इंदौर  अमेरिका-इजरायल और ईरान युद्ध का असर पूरे विश्व में किसी न किसी क्षेत्र में देखने मिला है. चाहे पेट्रोल-डीजल हो, चाहे गैस सिलेंडर हो, महंगाई हो फिर हवाई यातायात हो. इन सब समस्याओं से भारत को भी दो-चार होना पड़ा है. इंदौर में भी लंबे समय से इंदौर-शारजाह इंटरनेशनल फ्लाइट बंद हो गई थी, लेकिन लंबे समय के बाद अच्छी खबर यह है कि इंदौर-शारजाह इंटरनेशनल फ्लाइट की जगह अब इंदौर से अबू धाबी के लिए नई फ्लाइट शुरू होगी. लिहाजा 17 जुलाई से यात्री अबू धाबी के लिए उड़ान भर सकेंगे।  एयर इंडिया ने शुरू की इंदौर-अबूधाबी फ्लाइट इंदौर से दुबई और अन्य अरब देशों की एयर कनेक्टिविटी के चलते अब तक एयर इंडिया एक्सप्रेस की फ्लाइट चल रही थी, जिसे युद्ध के कारण 27 फरवरी से अस्थाई रूप से बंद करना पड़ा था, हालांकि कंपनी ने इसे सुचारु रखने का प्रयास किया, लेकिन संचालन नहीं हो सका. अब शारजाह के स्थान पर एयर इंडिया एक्सप्रेस ने इंदौर से आबू धाबी के लिए नई फ्लाइट शुरू करने का फैसला किया है. जिसका शेड्यूल जारी किया गया है।  हफ्ते में इन 4 दिन चलेगी फ्लाइट एयर इंडिया एक्सप्रेस की यह फ्लाइट सप्ताह में 4 दिन यानि रविवार, सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को चलेगी. बताया जा रहा है कि शारजाह के अलावा अबू धाबी के लिए फ्लाइट का शड्यूल पेंडिंग था, हालांकि बीच ही शारजाह की फ्लाइट बंद होने से कंपनी को अब नई फ्लाइट शुरू करना पड़ा. जिससे कि यात्री इंदौर से अबू धाबी के जरिए दुबई और शारजाह की ओर उड़ान भर सकें।  2019 में दुबई के लिए शुरू हुई थी फ्लाइट, हुई बंद आपको बता दें कि इंदौर से 19 जुलाई 2019 को दुबई के लिए फ्लाइट शुरू हुई थी, लेकिन विभिन्न कारण से यह फ्लाइट बंद करनी पड़ी. इसके बाद इंदौर से शारजाह की फ्लाइट शुरू की गई. जिसे अब युद्ध के कारण नियमित नहीं रखा जा सका, लेकिन अब अबू धाबी के लिए फिर फ्लाइट शुरू होने से दुबई और शारजाह की ओर यात्रा करने वाले यात्रियों को इंदौर से अबू धाबी के लिए सीधी फ्लाइट मिल सकेगी।  ऐसा रहेगा फ्लाइट का शेड्यूल इंदौर से अबू धाबी की फ्लाइट इंदौर एयरपोर्ट से 7:50 पर टेक ऑफ करेगी. जो अबू धाबी और संयुक्त अरब अमीरात के समय के अनुसार रात 9:35 पर अबू धाबी एयरपोर्ट पर लैंड करेगी. इसी प्रकार अबू धाबी से इंदौर के लिए संयुक्त अरब अमीरात के समय के अनुसार रात 10:35 पर टेक ऑफ करेगी. जो रात भारतीय समय के अनुसार रात 3:20 पर इंदौर एयरपोर्ट पर लैंड करेगी।  माना जा रहा है कि इंदौर से अबूधाबी तक 3:15 घंटे का सफल रहेगा. जिसका किराए करीब 16500 रुपए बताया गया है. ट्रैवल एसोसिएशन ऑफ इंडिया के प्रमुख हेमेंद्र सिंह जादौन ने बताया "इस फ्लाइट से यात्रियों को दुबई और शारजाह जाने का नया विकल्प उपलब्ध हो सकेगा. वहीं इस रूट पर पर्यटन गतिविधियां भी पहले की तरह सुचारू रह सकेंगी। 

15 हजार राशन कार्डधारकों की बढ़ी मुश्किलें, जीवित होने का प्रमाण नहीं दिया तो अटक सकता है राशन

 दतिया सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत राशन प्राप्त करने वाले हजारों हितग्राहियों के लिए जून माह बेहद महत्वपूर्ण है। शासन के निर्देश पर जिले में पांच वर्ष पहले कराई गई ई-केवाईसी को दोबारा अपडेट करने का अभियान चलाया जा रहा है। निर्धारित समय सीमा के भीतर बायोमेट्रिक सत्यापन नहीं कराने वाले हितग्राहियों को राशन वितरण में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। खाद्य विभाग के अनुसार जिले में 55 हजार से अधिक ऐसे हितग्राहियों की पहचान की गई है, जिनकी पुरानी ई-केवाईसी अब अमान्य मानी जा रही है। अब तक लगभग 35 हजार हितग्राहियों (MP Ration Beneficiary) का पुन: सत्यापन पूरा हो चुका है, जबकि 15 हजार से अधिक हितग्राही अभी भी प्रक्रिया से बाहर हैं। विभाग ने दतिया के सभी उचित मूल्य दुकान संचालकों को निर्देश दिए हैं कि वे पात्र परिवारों को जागरूक कर जल्द से जल्द ई-केवाईसी पूर्ण कराएं। शिकायतों के बाद उठाया कदम विभागीय अधिकारियों का कहना है कि इस प्रक्रिया (MP Ration Distribution Update)का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जिन लोगों के नाम पर राशन जारी हो रहा है, वे वास्तव में पात्र और जीवित हैं। कई मामलों में मृत्यु, स्थानांतरण अथवा अपात्रता के बावजूद नाम सूची में बने रहने की शिकायतें सामने आती रही हैं। दोबारा बायोमेट्रिक सत्यापन से ऐसी अनियमितताओं पर रोक लगेगी और वास्तविक हितग्राहियों तक लाभ पहुंचेगा। परिवार के प्रत्येक सदस्य को आधार कार्ड के साथ उचित मूल्य दुकान पर पहुंचकर बायोमेट्रिक सत्यापन कराना होगा। पीडीएस मशीन में जिन सदस्यों के नाम पीले अक्षरों में दिखाई दे रहे हैं, उनके लिए ई- केवाईसी कराना अनिवार्य है। किन लोगों को तुरंत करानी होगी ई-केवाईसी  पीडीएस मशीन में जिन हितग्राहियों के नाम पीले अक्षरों में दिखाई दे रहे हैं, उन्हें अनिवार्य रूप से दोबारा ई-केवाईसी करानी होगी। इसके लिए परिवार के प्रत्येक सदस्य का आधार आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन किया जाएगा। रोजगार, शिक्षा या अन्य कारणों से जिले या राज्य से बाहर रहने वाले हितग्राही भी देश की किसी भी उचित मूल्य दुकान पर जाकर यह प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। खाद्य विभाग ने अपील की है कि जून माह के भीतर ई-केवाईसी जरूर करा लें, ताकि राशन वितरण में किसी प्रकार की बाधा न आए और पात्र हितग्राहियों को योजना का लाभ मिलता रहे। फैक्ट फाइल कुल हितग्राही : 5,32,413 अब तक पूर्ण ई-केवाईसी : 4,39,898 शेष हितग्राही : 15,489 पुन: सत्यापन वाले हितग्राही : 55 हजार से अधिक ब्लॉकवार शेष ई-केवाईसी  दतिया : 5,489 सेवढ़ा : 5,419 भांडेर : 4,541 पारदर्शिता और प्रभावी होगी रोजगार, शिक्षा या अन्य कारणों से जिले अथवा राज्य से बाहर रह रहे हितग्राही देश के किसी भी उचित मूल्य दुकान पर जाकर अपनी ई- केवाईसी करा सकते हैं। इसके लिए मूल राशन दुकान पर उपस्थित होना आवश्यक नहीं है। दोबारा सत्यापन से राशन वितरण व्यवस्था अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनेगी। -जिला खाद्यआपूर्ति अधिकारी, दतिया

उत्कृष्ट खिलाड़ियों के लिए खुशखबरी! MP पुलिस में दोबारा शुरू हुई डायरेक्ट भर्ती प्रक्रिया

भोपाल  मध्यप्रदेश सरकार ने उत्कृष्ट खिलाड़ियों के लिए बड़ी सौगात देते हुए पुलिस विभाग में खेल कोटे से सीधी भर्ती प्रक्रिया को पुनः शुरू करने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर गृह विभाग ने ‘मध्यप्रदेश पुलिस (उत्कृष्ट खिलाड़ियों की नियुक्ति) नियम, 2021’ में महत्वपूर्ण संशोधन किए हैं। संशोधित नियमों की अधिसूचना 15 जून 2026 को राजपत्र में प्रकाशित कर दी गई है। नई व्यवस्था के तहत अब प्रतिवर्ष पुलिस विभाग में खेल कोटे से 60 पदों पर सीधी भर्ती की जाएगी। इनमें उप निरीक्षक (एसआई) के 10 और आरक्षक (कांस्टेबल) के 50 पद शामिल हैं। सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि अब ओलम्पिक, एशियाई खेल, राष्ट्रमंडल खेल तथा विश्व कप या विश्व चैम्पियनशिप में भाग लेने वाले खिलाड़ी भी सीधी भर्ती के लिए पात्र होंगे। पहले मुख्य रूप से पदक विजेताओं को ही प्राथमिकता मिलती थी।  संशोधित नियमों के अनुसार उत्कृष्ट खिलाड़ियों को निर्धारित शैक्षणिक योग्यता, ऊंचाई संबंधी शारीरिक मापदंड, लिखित परीक्षा और शारीरिक दक्षता परीक्षा (पीईटी) से भी छूट प्रदान की जाएगी। भर्ती प्रक्रिया पुलिस मुख्यालय की चयन एवं भर्ती शाखा द्वारा हर वर्ष नियमित रूप से आयोजित की जाएगी। उप निरीक्षक पद के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में पदक जीतने वाले अथवा सहभागिता करने वाले खिलाड़ी पात्र होंगे। वहीं आरक्षक पद के लिए राष्ट्रीय खेलों और अधिकृत राष्ट्रीय चैम्पियनशिप में स्वर्ण, रजत या कांस्य पदक प्राप्त करने वाले खिलाड़ी आवेदन कर सकेंगे।  इस निर्णय से खिलाड़ियों को सम्मानजनक रोजगार के अवसर मिलेंगे और वे खेल गतिविधियों में बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित होंगे। खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने इसे खिलाड़ियों के हित में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का महत्वपूर्ण और दूरदर्शी निर्णय बताया है।  

ATS का बड़ा ऑपरेशन: कई राज्यों में फैले आतंकी मॉड्यूल पर शिकंजा, 6 गिरफ्तारी, पाकिस्तान कनेक्शन की जांच तेज

भोपाल  तारीख 11 जून… वक्त तड़के का था और भोपाल का काजी कैंप अभी नींद में था। तभी अचानक एटीएस की एक विशेष टीम चुपचाप इलाके में दाखिल हुई। न कोई सायरन, न कोई हलचल। कुछ ही मिनटों में नन्हें बी की मस्जिद के पास रहने वाले मोहम्मद फराज को हिरासत में ले लिया गया। ऑपरेशन इतना गोपनीय था कि स्थानीय पुलिस तक को इसकी भनक नहीं लगी। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती। ठीक उसी समय, भोपाल से करीब 1000 किलोमीटर दूर उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में भी एटीएस की टीमें एक और संदिग्ध पर शिकंजा कस रही थीं। आखिर ऐसा क्या सुराग मिला था जिसने दो राज्यों में एक साथ यह हाई-प्रोफाइल ऑपरेशन शुरू करवा दिया? इसके पीछे के चेहरे कौन थे और इस पूरे नेटवर्क का मकसद क्या था? आइए जानते हैं इस पूरे मामले की अंदरूनी कहानी।  सबसे पहले समझते हैं कि मामला क्या था?  राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) देशभर में संदिग्ध गतिविधियों, विदेशी एप्लीकेशनों, डार्क वेब नेटवर्क और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सक्रिय समूहों की लगातार निगरानी करती है। इसी दौरान एनआईए को भोपाल के काजीकैंप क्षेत्र निवासी मोहम्मद फराज तथा उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के देवबंद निवासी नईम अब्दुल्ला की गतिविधियां संदिग्ध प्रतीत हुईं।प्रारंभिक जांच के बाद दोनों की निगरानी शुरू की गई और आगे की जांच की जिम्मेदारी मध्यप्रदेश आतंकवाद निरोधक दस्ते (ATS) को सौंपी गई। एटीएस ने 11 जून की तड़के कार्रवाई करते हुए मोहम्मद फराज को भोपाल से हिरासत में लिया। वहीं, उत्तर प्रदेश एटीएस और एसटीएफ की मदद से नईम अब्दुल्ला को देवबंद से गिरफ्तार कर भोपाल लाया गया। दोनों को पूछताछ के लिए रिमांड पर लिया गया। बाद में 16 जून को फराज को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया, जबकि नईम अब्दुल्ला 20 जून तक एटीएस रिमांड पर है। अब जानते हैं इस कथित नेटवर्क का उद्देश्य क्या था? जांच एजेंसियों के अनुसार, आरोपियों पर पाकिस्तान स्थित हैंडलरों से प्राप्त कट्टरपंथी साहित्य और जिहादी विचारधारा का प्रचार-प्रसार करने का आरोप था। उनका उद्देश्य बेरोजगार और आर्थिक रूप से कमजोर युवाओं को प्रभावित कर उन्हें कट्टरपंथ की ओर प्रेरित करना था। जांच में यह भी सामने आया है कि युवाओं का ब्रेनवॉश कर उन्हें देशविरोधी गतिविधियों, सामाजिक अशांति, टारगेट किलिंग और हिंसक घटनाओं के लिए तैयार करने का प्रयास किया जा रहा था। साथ ही शरिया कानून के समर्थन में वैचारिक अभियान चलाने के संकेत भी मिले हैं। अब तक कितनी गिरफ्तारियां हुई हैं? इस मामले में अब तक छह लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। हाल-फिलहाल में बिहार के मधुबनी जिले से इजहार-उल-हक को गिरफ्तार किया गया है। उसे भोपाल लाकर अदालत में पेश किया गया, जहां से 20 जून तक एटीएस रिमांड पर भेजा गया है।  फराज ने क्या-क्या उगला? फराज की पूछताछ में कई चौकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। वह मध्यप्रदेश के बाहर भी अपना स्लीपर सेल खड़ा कर रहा था। इसके लिए उसे नईम और पाकिस्तान के साथ एक खाड़ी देश में बैठे हैंडलर डायरेक्शन दे रहे थे। फराज की पूछताछ के बाद एटीएस ने धार निवासी हाजी अहजर को गिरफ्तार किया है। एमपी एटीएस ने हरियाणा के नूंह से भी एक युवक को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। वह भी फराज के संपर्क में कई महीनों से था और जिहादी नेटवर्क को स्थानीय स्तर पर खड़ा करने का प्रयास कर रहा था। हालांकि नूंह में हिरासत में लिए गए युवक की अधिकृत गिरफ्तारी अभी नहीं की है। विदेशी फंडिंग और डिजिटल उपकरणों की जांच एटीएस ने फराज और उसके नेटवर्क से जुड़े लोगों को हो रही विदेशी फंडिंग की भी बहुत गहनता से जांच कर रही है। इसी जांच में गिरोह का खुलासा हुआ है। वहीं उसके पास से बरामद मोबाइल व अन्य इलेक्ट्रॉनिक्स गैजेट्स की जांच की जा रही है। मध्यप्रदेश में नेटवर्क खड़ा करने, गरीब और बैचलर युवकों का ब्रेनवॉश करने और सोशल मीडिया के जरिए कट्टरपंथी सोच फैलाने का टास्क फराज को मिला था। फराज के संपर्क में अब तक करीब आधा दर्जन युवकों  के होने का पता चला है। पुलिस उन सभी युवकों की सोशल मीडिया प्रोफाइल खंगालने के साथ उनकी हर गतिविधियों पर बारीकी से नजर रखे हुए है। टेलीग्राम-वाट्सएप ग्रुप से युवाओं को जोड़ने की कोशिश कर रहा था। शनिवार से ही उसका परिवार काजीकैंप स्थित मकान में ताला बंद कर फरार हो गया है। वहीं कॉलोनी की जिस क्लीनिक पर फराज काम करता था, उसमें भी शनिवार से ताला लटका हुआ है।  डार्क एप्स और सोशल मीडिया गतिविधियां भी जांच के दायरे में सूत्रों के अनुसार, आरोपी कुछ डार्क एप्स के माध्यम से संदिग्ध समूहों के संपर्क में था। उसके सोशल मीडिया अकाउंट्स की भी जांच की जा रही है। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि उसने गाजा के समर्थन में कुछ आपत्तिजनक टिप्पणियां पोस्ट की थीं। हालांकि, इन सभी आरोपों की जांच अभी जारी है और एजेंसियां आरोपी के डिजिटल नेटवर्क तथा संभावित विदेशी संपर्कों के हर पहलू की गहनता से जांच कर रही हैं।   आगे जांच की दिशा क्या होगी? अब तक पांच राज्यों में इस कथित मॉड्यूल के नेटवर्क से जुड़े तार मिलने का दावा किया गया है। जांच एजेंसियों का मानना है कि आने वाले दिनों में कुछ और संदिग्धों की गिरफ्तारी हो सकती है। फिलहाल नईम अब्दुल्ला, शाकिर और इजहार-उल-हक एटीएस रिमांड पर हैं। जांच एजेंसियां मोहम्मद फराज, नईम अब्दुल्ला, शाकिर मेव और इजहार-उल-हक को इस नेटवर्क की प्रमुख कड़ियों के रूप में देख रही हैं। मामले की विस्तृत जांच जारी है।