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चार राज्यों से 4 संदिग्ध गिरफ्तार, पाकिस्तानी कनेक्शन की जांच तेज; डिजिटल सबूत खंगाल रही एजेंसियां

भोपाल  मध्य प्रदेश आतंकवाद निरोधी दस्ता (एटीएस) की जांच में देश विरोधी गतिविधियों के आरोपितों से जुड़े नए और चिंताजनक तथ्य सामने आए हैं। पूछताछ में खुलासा हुआ है कि इंटरनेट मीडिया और वाट्सएप के जरिए संपर्क में रहने वाला पाकिस्तानी हैंडलर आरोपित युवकों को नियमित रूप से जिम जाने, शारीरिक रूप से फिट रहने और पासपोर्ट बनवाने का निर्देश दे रहा था। जांच एजेंसियों को आशंका है कि उन्हें भविष्य में प्रशिक्षण के लिए पाकिस्तान भेजने की तैयारी की जा रही थी। एटीएस सूत्रों के अनुसार पाकिस्तानी हैंडलर युवकों को कथित तौर पर “लड़ाके” बनने के लिए शारीरिक रूप से तैयार रहने की सलाह देता था। इसी क्रम में पासपोर्ट बनवाने पर भी विशेष जोर दिया गया था। अब तक गिरफ्तार आरोपितों में केवल भोपाल निवासी फराज के पास पासपोर्ट मिलने की पुष्टि हुई है। चार राज्यों से चार आरोपित गिरफ्तार इस मामले में एटीएस अब तक चार आरोपितों को गिरफ्तार कर चुकी है। इनमें भोपाल से फराज, उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से नईम अब्दुल्ला, राजस्थान के अलवर से शाकिर मेव और बिहार के मधुबनी से इजहार उल हक को पकड़ा गया है। सबसे पहले गिरफ्तार किए गए फराज को न्यायिक हिरासत में जेल भेजा जा चुका है। आतंकी संगठनों से संबंधों की जांच जारी एटीएस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपितों के संबंध किसी आतंकी संगठन से थे या नहीं। हालांकि प्रारंभिक पूछताछ में सभी आरोपित किसी बड़े संगठन से जुड़े होने से इन्कार करते रहे हैं। इसके बावजूद जांच एजेंसियां इस दावे की गहन पड़ताल कर रही हैं। डिजिटल सबूतों की होगी फोरेंसिक जांच जांच का फोकस अब आरोपितों से जब्त किए गए मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य डिजिटल उपकरणों पर है। एटीएस इन डिवाइसों से डेटा रिकवर कर उनके ऑनलाइन नेटवर्क, सोशल मीडिया संपर्कों और चैटिंग रिकॉर्ड की पड़ताल कर रही है। इसके साथ ही उन लोगों की पहचान भी की जा रही है, जो इन आरोपितों के संपर्क में थे। सूत्रों का मानना है कि डिजिटल जांच के बाद इस मामले में और लोगों की संलिप्तता सामने आ सकती है, जिससे गिरफ्तार आरोपितों की संख्या बढ़ने की संभावना से भी इन्कार नहीं किया जा सकता। फंडिंग के सबूत अभी नहीं मिले जांच एजेंसियों के मुताबिक अब तक किसी संस्था, संगठन या व्यक्ति द्वारा देश विरोधी गतिविधियों के लिए वित्तीय सहायता दिए जाने के स्पष्ट प्रमाण नहीं मिले हैं। हालांकि आरोपितों के बैंक खातों और लेन-देन की विस्तृत जांच की जा रही है, ताकि किसी संभावित फंडिंग नेटवर्क का पता लगाया जा सके।  

रतलाम के डायल-112 हीरो परित्यक्त अवस्था में मिली नवजात बच्ची को सुरक्षित संरक्षण देकर पहुँचाया अस्पताल

भोपाल  रतलाम जिले के थाना औद्योगिक क्षेत्र जावरा में डायल-112 जवानों की संवेदनशीलता एवं त्वरित कार्यवाही से रेलवे ब्रिज के नीचे परित्यक्त अवस्था में मिली एक नवजात बच्ची को सुरक्षित संरक्षण प्रदान करते हुए समय पर अस्पताल पहुँचाया गया। पुलिस की मानवीय पहल से नवजात को तत्काल चिकित्सकीय देखभाल उपलब्ध कराई जा सकी। 18 जून को राज्य स्तरीय पुलिस कंट्रोल रूम डायल-112 भोपाल को सूचना प्राप्त हुई कि थाना औद्योगिक क्षेत्र जावरा अंतर्गत रेलवे ब्रिज के नीचे एक नवजात बच्ची परित्यक्त अवस्था में मिली है, जिसे कोई अज्ञात व्यक्ति छोड़कर चला गया है। तत्काल पुलिस सहायता की आवश्यकता है। सूचना प्राप्त होते ही क्षेत्र में तैनात डायल-112 वाहन को मौके के लिए रवाना किया गया तथा वरिष्ठ अधिकारियों को भी घटना से अवगत कराया गया। डायल-112 स्टाफ आरक्षक  हीरालाल दांगी एवं पायलट  अशोक सेन तत्काल घटनास्थल पर पहुँचे और नवजात बच्ची को सुरक्षित अपने संरक्षण में लिया। इसके उपरांत डायल-112 टीम ने बच्ची को डायल-112 वाहन से शासकीय चिकित्सालय जावरा पहुँचाकर भर्ती कराया। डायल-112 हीरोज श्रृंखला की यह घटना दर्शाती है कि डायल-112 सेवा केवल आपातकालीन सहायता प्रदान करने तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों एवं जरूरतमंद नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए मानवीय संवेदनाओं के साथ हर परिस्थिति में सहायता पहुँचाने का कार्य निरंतर कर रही है।  

मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय समन्वय समिति गठित

भोपाल  राज्य शासन द्वारा सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय एम.ओ.एस.पी.आई एवं राज्य सरकार के मध्य सांख्यिकीय गतिविधियों के प्रभावी समन्वय एवं केंद्रीय क्षेत्रीय अवसंरचना परियोजनाओं की निगरानी के सम्बन्ध में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय समन्वय समिति का गठन किया गया है। समिति में अपर मुख्य सचिव/प्रमुख सचिव/सचिव, योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी, वित्त, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, उप महानिदेशक, भारत सरकार, सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय, राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय, (क्षेत्र संकार्य प्रभाग) तथा सम्बंधित केंद्रीय मंत्रालयों/राज्य के विभागों/केंद्रीय या राज्य पीएसयू के प्रतिनिधि (एजेंडा अनुसार) सदस्य होंगे। आयुक्त, आर्थिक एवं सांख्यिकी संचालनालय, म.प्र को सदस्य-सचिव नामित किया गया है। राज्य स्तरीय समन्वय समिति कार्यक्षेत्र राज्य स्तरीय समन्वय समिति का कार्यक्षेत्र एम.ओ.एस.पी.आई और उसके क्षेत्रीय कार्यालयों तथा राज्य के सांख्यिकी विभाग के बीच नियमित संवाद को सुगम बनाना जिससे प्रमुख राष्ट्रीय सर्वेक्षणों जैसे एन.एस.एस, ए.एस.एल, आर्थिक जनगणना एएसयूएसई, पीएलएफएस, एचसीईएस अलावा अन्य सांख्यिकी गतिविधियों का योजनाबद्ध क्रियान्वयन किया जा सके। आगामी अखिल भारतीय सर्वेक्षणों, सेंपल फ्रेम्, सैंपल मिलान तथा इनमें राज्य की भागीदारी से संबंधित सूचनाओं के आदान-प्रदान को सुगम बनाना, एम.ओ.एस.पी.आई द्वारा जारी मानकों जैसे राष्ट्रीय मेटाडाटा संरचना (एन.एम.डी.एस) 2.0, सांख्यिकी गुणवत्ता मूल्यांकन ढांचा (एस.क्यू.ए.एफ) आदि के राज्य सांख्यिकी प्रणाली में अपनाना तथा समीक्षा एवं निगरानी करना तथा एम.ओ.एस.पी.आई तथा राज्य सरकार के सांख्यिकी विभाग के बीच समन्वय के लिए मंच के रूप में कार्य करने जैसे कार्य किए जाएंगे। सांख्यिकी की गुणवत्ता, समयबद्धता एवं तुलनीयता अंतर्गत राज्य एवं जिला स्तर के सांख्यिकीय उत्पादों जैसे जीएसओपी/जीडीडीपी, औद्योगिक उत्पादन सूबकांक, मूल्य सूचकांक आदि की राष्ट्रीय मानकों, समयबद्धता एवं नीति प्रासंगिकता के अनुरूप समीक्षा की जायेगी। साथ ही राज्य स्तर पर सांख्यिकीय कार्यों में अंतराल ओवरलेप या दोहराव की पहचान कर सुधारात्मक उपाय सुझाना तथा आधुनिक एवं आईटी-सक्षम सांख्यिकीय विधियों को अपनाने को प्रोत्साहित करना एवं उनकी निगरानी जैसे कार्यों का संपादन करेगी। डेटा प्रसार, उपयोगकर्ता सहभागिता एवं नीति प्रासंगिकता अंतर्गत राज्य सांख्यिकीय उत्पादों का समय पर प्रसार सुनिश्चित करना तथा एम.ओ.एस.पी.आई के राष्ट्रीय डेटा प्रसार मानकों अग्रिम रिलीज कैलेंडर एवं मेटाडाटा सहित अनुरूप सुगम बनाना, उपयोगकर्ता आवश्यकताओं, राज्य प्राथमिकताओं एवं उभरते क्षेत्रों पर एम.ओ.एस.पी.आई को फीडबेक प्रदान करना तथा साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण, कार्यक्रमों की निगरानी एवं मूल्यांकन में सांख्यिकी के उपयोग को बढ़ावा देने जैसे कार्यों का संपादन करेगी। क्षमता निर्माण एवं संस्थागत सुदृढ़ीकरण अंतर्गत एम.ओ.एस.पी.आई के अंतर्गत नेशनल स्टैटिस्टिकल सिस्टम ट्रेनिंग के सहयोग से राज्य एवं जिला सांख्यिकी संवर्ग की क्षमता का विकास, संस्थागत सुदृढ़ीकरण के लिए सुझाव जैसे सांख्यिकीय संवर्ग की स्थापना, डीईएस का उन्नयन, सर्वेक्षण एवं आईटी संसाधनों में सुधार तथा राज्यों के बीच सर्वोत्तम प्रथाओं एवं नवाचारों के आदान-प्रदान को प्रोत्साहित करने जैसे कार्यों का संपादन करेगी। संसद सदस्य स्थानीय क्षेत्र विकास योजना एमपीएलएडीएस के अंतर्गत भौतिक एवं वित्तीय प्रगति की निगरानी तथा लंबित मुद्दों का समाधान कार्यों का संपादन भी करेगी।  केंद्रीय क्षेत्र की अवसंरचना परियोजनाऐं अंतर्गत 150 करोड़ रूपये से अधिक लागत वाली प्रमुख केंद्रीय क्षेत्र की अवसंरचना परियोजनाओं की प्रगति की निगरानी एवं अंतर विभागीय समन्वय से जुड़े मुद्दों का समाधान तथा राज्य स्तरीय समन्वय समिति द्वारा सांख्यिकी की गुणवत्ता क्षमता निर्माण एवं अन्य गतिविधियों की प्रगति की समीक्षा एवं समन्वय के लिए वर्ष में कम से कम दो बार बैठक का आयोजन किया जाएगा।  

नर्सिंग कॉलेजों के विद्यार्थियों का इंतजार खत्म, हाईकोर्ट के आदेश से परीक्षा का रास्ता साफ

 जबलपुर  हाई कोर्ट के प्रशासनिक न्यायाधीश आनंद पाठक व न्यायमूर्ति बीपी शर्मा की युगलपीठ ने प्रदेश के बहुचर्चित नर्सिंग फर्जीवाड़ा मामले में सीबीआई जांच में उपयुक्त (सूटेबल) पाए गए नर्सिंग कॉलेजों के छात्रों को बड़ी राहत देते हुए लंबित परीक्षाओं और परीक्षा परिणामों का रास्ता साफ कर दिया है। मामले में याचिकाकर्ता पक्ष की ओर से अधिवक्ता आलोक वागरेचा और विशाल बघेल उपस्थित रहे, जबकि राज्य शासन की ओर से उप महाधिवक्ता अभिजीत अवस्थी ने पक्ष रखा। हाई कोर्ट ने लाॅ-स्टूडेंट्स एसोसिएशन की जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश नर्सिंग रजिस्ट्रेशन काउंसिल को शैक्षणिक सत्र 2022-23 के जीएनएम प्रथम वर्ष के परीक्षा परिणाम घोषित करने व सत्र 2021-22 के करीब 9,000 विद्यार्थियों के लिए जीएनएम तृतीय वर्ष की परीक्षा आयोजित करने की अनुमति प्रदान की। सुनवाई के दौरान काउंसिल ने लंबित परीक्षाएं व परिणाम जारी करने की अनुमति मांगी, जबकि याचिकाकर्ता ने सीबीआई जांच में अनुपयुक्त पाए गए कॉलेजों के छात्रों को राहत दिए जाने का विरोध किया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाई कोर्ट ने केवल उन संस्थानों को राहत दी जो जांच में मानकों के अनुरूप पाए गए हैं। हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सीबीआई जांच के दायरे में आए 695 कॉलेजों में से 156 सूटेबल कॉलेजों व कमियां दूर कर उपयुक्त घोषित किए गए 89 कॉलेजों के लिए ही परीक्षा प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। शेष संस्थानों से संबंधित परीक्षाओं पर फिलहाल रोक जारी रहेगी।  

5 लाख से कम पासपोर्ट सत्यापन श्रेणी में प्रथम स्थान प्राप्त कर रचा कीर्तिमान

भोपाल  नागरिक सेवाओं को सरल, त्वरित और पारदर्शी बनाने की दिशा में मध्यप्रदेश पुलिस के निरंतर प्रयासों को एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिला है। भारत सरकार के विदेश मंत्रालय द्वारा वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान किए गए पासपोर्ट आवेदनों के पुलिस सत्यापन के प्रदर्शन के आधार पर मध्यप्रदेश पुलिस को 5 लाख से कम पासपोर्ट आवेदन श्रेणी में देश में प्रथम स्थान प्रदान किया गया है। विदेश मामलों के माननीय मंत्री डॉ. एस. जयशंकर द्वारा 19 जून 2026 (शुक्रवार) को "सीबी मुथम्मा हॉल", 'सी' विंग, जवाहरलाल नेहरू भवन, विदेश मंत्रालय, नई दिल्ली" में मध्यप्रदेश पुलिस को वर्ष 2025-26 के उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए “Institutional Performance Award for State Police” से सम्मानित किया गया।उपरोक्त कार्यकम में मध्यप्रदेश का प्रतिनिधित्व उप पुलिस महानिरीक्षक कानून व्यवस्था श्री तरूण नायक एवं सहायक पुलिस महानिरीक्षक विशेष शाखा सुरक्षाश्रीमती रश्मि मिश्रा ने किया। इस उपलब्धि के लिए पुलिस महानिदेशकश्री कैलाश मकवाणा ने प्रदेश के सभी जिलों, विशेष शाखा, पासपोर्ट सत्यापन से जुड़े अधिकारियों एवं कर्मचारियों को बधाई देते हुए कहा कि यह सम्मान पूरी मध्यप्रदेश पुलिस के सामूहिक प्रयासों, समर्पण और सेवा भावना का परिणाम है। उन्होंने भविष्य में भी नागरिकों को त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण सेवाएँ प्रदान करने के लिए इसी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करने का आह्वान किया। मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच कुल 3लाख 35हजार 647 पासपोर्ट सत्यापनसमयबद्ध एवं गुणवत्ता पूर्ण तरीके से संपादित किए गए। उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर भारत सरकार के विदेश मंत्रालय द्वारा मध्यप्रदेश को इस श्रेणी में प्रथम पुरस्कार (Citation) प्रदान किया गया है। उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश पुलिस ने पिछले वर्ष भी पहली बार यह प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त किया था और अब लगातार दूसरे वर्ष यह उपलब्धि अर्जित कर प्रदेश पुलिस ने अपनी कार्यकुशलता, जवाबदेही और नागरिक सेवाओं के प्रति प्रतिबद्धता को पुनः सिद्ध किया है। यह उपलब्धि प्रदेश के सभी पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों के समर्पित प्रयासों, समयबद्ध सत्यापन प्रक्रिया तथा तकनीक आधारित कार्यप्रणाली का परिणाम है।  

मध्यप्रदेश में पेड़ों की कटाई पर सख्ती, हर प्रोजेक्ट में 80% पेड़ों का ट्रांसलोकेशन जरूरी; नई नीति लागू

भोपाल मध्य प्रदेश सरकार ने पर्यावरण संरक्षण और बुनियादी ढांचे के विकास के बीच संतुलन बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने मंगलवार को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच के समक्ष 'ट्री ट्रांसलोकेशन पॉलिसी-2026' का ड्राफ्ट पेश किया। इस नीति का मुख्य उद्देश्य विकास परियोजनाओं (जैसे रोड, मेट्रो, फ्लाईओवर) के नाम पर होने वाली अंधाधुंध पेड़ों की कटाई को रोकना और वयस्क पेड़ों को वैज्ञानिक तरीके से सुरक्षित दूसरी जगह शिफ्ट करने को प्राथमिकता देना है। '20-फॉर-1' का कड़ा और नया नियम इस प्रस्तावित नीति की सबसे बड़ी खासियत इसका '20-फॉर-1' वृक्षारोपण फॉर्मूला है। अगर किसी बेहद अपरिहार्य स्थिति में एक पेड़ को काटना पड़ता है, तो संबंधित निर्माण एजेंसी को उसके बदले 20 नए पौधे लगाने होंगे। नियमों के मुताबिक, इनमें से 10 पौधे सीधे तौर पर कटे हुए पेड़ के मुआवजे के रूप में होंगे, जबकि शेष 10 पौधे इसलिए लगाए जाएंगे ताकि ट्रांसप्लांटेशन के दौरान जिन वयस्क पेड़ों की जान नहीं बच पाती, उनके नुकसान की भरपाई की जा सके। ग्वालियर के थाटीपुर मामले से लिया सबक दरअसल, यह पूरी कवायद ग्वालियर के थटीपुर पुनर्विकास योजना के दौरान सामने आई लापरवाही के बाद शुरू हुई है। वहां बड़ी संख्या में शिफ्ट किए गए पेड़ देखरेख के अभाव में मर गए थे, जिस पर हाई कोर्ट ने कड़ा संज्ञान लेते हुए सरकार से एक व्यापक नीति मांगी थी। अब नए नियमों के तहत प्रोजेक्ट डिजाइन में बदलाव करके पहले पेड़ बचाने की कोशिश करनी होगी। पेड़ काटना केवल अंतिम विकल्प होगा। ऑनलाइन डैशबोर्ड से जनता करेगी निगरानी भ्रष्टाचार और कागजी दावों को रोकने के लिए सरकार ने इस बार तकनीक का सहारा लिया है। नीति के अनुसार, सभी ट्रांसप्लांट किए गए पेड़ों और नए रोपे गए पौधों की अनिवार्य रूप से जियो-टैगिंग की जाएगी। इसके लिए एक सार्वजनिक ऑनलाइन डैशबोर्ड बनाया जाएगा। इस डैशबोर्ड पर पेड़ों की सटीक लोकेशन, उनकी तस्वीरें और रखरखाव का पूरा रिकॉर्ड रीयल-टाइम में अपडेट होगा, जिससे आम नागरिक भी इसकी सीधे निगरानी कर सकेंगे।  

60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलेंगी तेज हवाएं, कई जिलों में बारिश और आंधी की चेतावनी

भोपाल  मध्य प्रदेश में मानसून की सुस्ती के बीच मौसम के मिजाज ने एक बार फिर करवट ले ली है। शुक्रवार को प्रदेशभर में सूरज के तीखे तेवरों और भारी उमस ने लोगों को बेहाल किया। कई दिनों बाद राज्य के अधिकतम तापमान में 5 डिग्री सेल्सियस तक का उछाल दर्ज किया गया। छतरपुर का खजुराहो 42.4 डिग्री के साथ प्रदेश में सबसे गर्म रहा, वहीं छिंदवाड़ा में पारा सामान्य से 5.3 डिग्री ऊपर चढ़कर 38.2 डिग्री तक पहुंच गया। बीते 24 घंटों के दौरान राजगढ़, दमोह, रीवा और सतना को छोड़कर प्रदेश के बाकी हिस्से सूखे रहे। हालांकि देर शाम को प्रदेश के विभिन्न जिलों में 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलीं और कहीं–कहीं बारिश के साथ बौछारें पड़ीं 23 को छत्तीसगढ़ पहुंचेगा मानसून मौसम विशेषज्ञ अजय शुक्ला ने बताया कि प्रदेशवासियों को झमाझम वर्षा के लिए अभी थोड़ा और इंतजार करना होगा। मानसून के 23 जून तक छत्तीसगढ़ पहुंचने का अनुमान है, जिसके तीन से चार दिन बाद यानी 26-27 जून के आसपास ही इसके मध्य प्रदेश में प्रवेश करने की संभावना है। तब तक प्रदेश में गर्मी और उमस का मिलाजुला असर बना रहेगा। शनिवार के लिए ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी भले ही मानसून दूर हो, लेकिन प्री–मानसून सिस्टम के कारण मौसम विज्ञान केंद्र ने शनिवार के लिए अलर्ट जारी किया है। सीहोर और आगर जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी करते हुए 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज आंधी और बिजली चमकने की चेतावनी दी गई है। वहीं भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर समेत करीब 36 जिलों में येलो अलर्ट रहेगा, जहां 40 से 50 किमी की रफ्तार से झोंकेदार हवाएं चलेंगी और छिटपुट बौछारें पड़ सकती हैं। प्रमुख शहरों का तापमान (डिग्री सेल्सियस में) शहर अधिकतम तापमान (°C) न्यूनतम तापमान (°C) ग्वालियर 40.7 30.1 जबलपुर 38.8 28.5 भोपाल 37.3 24.4 इंदौर 35.1 24.5  

नगरीय निकाय कर्मियों की सेवाकाल में असमय मृत्यु पर आश्रितों को मिलेगा 1.25 लाख रुपये तक का अनुग्रह अनुदान

भोपाल  "मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की प्रगतिशील सोच और लोककल्याणकारी निर्णय लेने की अद्भुत क्षमता से आज प्रदेश के नगरीय निकाय कर्मचारियों और उनके परिवारों को एक बड़ा सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा कवच मिला है।'' नगरीय विकास एवं आवास मंत्री  कैलाश विजयवर्गीय ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव का हृदय से आभार व्यक्त करते हुए बताया कि नगरीय निकायों के सेवकों के हित में ऐतिहासिक निर्णय लिया गया है। मंत्री  विजयवर्गीय ने बताया कि मध्यप्रदेश वेतन पुनरीक्षण नियम, 2017 के दायरे में आने वाले नगर पालिक निगम, नगर पालिका परिषद एवं नगर परिषद के कर्मचारियों की सेवा में रहते हुए मृत्यु होने पर उनके आश्रितों को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। कर्मचारी के बैण्ड वेतन तथा ग्रेड पे के सम्मिलित योग के छह गुना के बराबर की धनराशि अनुग्रह अनुदान के रूप में प्रदान की जाएगी, जिसकी अधिकतम सीमा 1,25,000 रुपये (एक लाख पच्चीस हजार रुपये) होगी। यह कल्याणकारी निर्णय 1 अप्रैल, 2025 और उसके उपरांत घटित होने वाले सभी प्रकरणों पर प्रभावशील होगा। यह निर्णय नगरीय प्रशासन के मैदानी कार्यकर्ता

रतलाम फायरिंग कांड: वारदात को अंजाम देकर फरार हुए बदमाश, पुलिस जांच में जुटी

रतलाम  दीनदयाल नगर थाना क्षेत्र के सैफी नगर में शुक्रवार दोपहर करीब 3 बजे सराफा व्यापारी कमल सोनी के मकान पर अज्ञात बदमाशों ने फायरिंग कर दी। घटना में कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन गोली घर की कांच की खिड़की तोड़ते हुए अंदर दीवार से टकराकर दरवाजे के पास पड़े पैरदान पर जा गिरी। वारदात के बाद क्षेत्र में दहशत फैल गई। घटना सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई है। फुटेज में दो बाइक पर सवार चार बदमाश मुंह पर कपड़ा बांधे हुए दिखाई दे रहे हैं। आगे चल रही बाइक के पीछे बैठे सफेद टी-शर्ट पहने आरोपित ने पिस्टल निकालकर चलती बाइक से मकान की ओर निशाना साधते हुए फायर किया।

प्रदेश के 81 लाख से अधिक किसानों के खातों में अंतरित होंगे 1640 करोड़ रुपये

भोपाल प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी शनिवार 20 जून को पश्चिम बंगाल के हुगली जिले के तारकेश्वर से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) योजना के अंतर्गत देशभर के किसानों को 23वीं किश्त अंतरित करेंगे। इसमें मध्यप्रदेश के 81 लाख से अधिक किसान परिवारों के बैंक खातों में लगभग 1,640 करोड़ रुपये की राशि अंतरित की जाएगी। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना वर्ष 2019 से संचालित है। इसके अंतर्गत पात्र किसान परिवारों को प्रतिवर्ष 6 हजार रुपये की सहायता तीन समान किस्तों में सीधे उनके बैंक खातों में प्रदान की जाती है। योजना की 22 किस्तों के माध्यम से अब तक मध्यप्रदेश के किसान परिवारों को लगभग 33 हजार 800 करोड़ रुपये की राशि वितरित की जा चुकी है। प्रदेश में मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना के माध्यम से भी किसानों को प्रतिवर्ष 6 हजार रुपये की सहायता राशि दी जा रही है। इस तरह प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना और मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना के माध्यम से प्रदेश के पात्र किसान परिवारों को प्रतिवर्ष कुल 12 हजार रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। दोनों योजनाओं में अब तक किसानों को 56 हजार 240 करोड़ रुपये का वितरण किया जा चुका है।