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इंदौर में MOS टैक्स लागू, खुले हवा पर भी टैक्स; जनता पर 4000 तक का वित्तीय बोझ

इंदौर मकान बनाते समय व्यक्ति भूखंड के कुछ हिस्से को इसलिए खाली छोड़ता है ताकि उस रास्ते घर में हवा-पानी आ सके, लेकिन अब नगर निगम ने इसी खाली रास्ते (मार्जिनल ओपन स्पेस) (एमओएस) पर कर लगाने की तैयारी कर ली है। अगर ऐसा हुआ तो संपत्तिधारकों पर 500 रुपये से लेकर चार हजार रुपये प्रतिवर्ष का अतिरिक्त बोझ बढ़ जाएगा। इधर कांग्रेस ने इस प्रस्तावित कर का विरोध शुरू कर दिया है। मंगलवार को कांग्रेस पार्षदों ने निगमायुक्त क्षितिज सिंघल के कार्यालय का घेराव किया। उन्होंने मांग की कि एमओएस कर को रोका ए। ऐसा नहीं किया गया तो कांग्रेस आमजन के समर्थन में सड़क पर उतरेगी। कांग्रेस ने प्रदर्शन करते हुए निगमायुक्त को ज्ञापन सौंपा और कर को वापस लेने की मांग की। कांग्रेस ने निगमायुक्त को सौंपा ज्ञापन नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष और इंदौर शहर कांग्रेस के अध्यक्ष चिंटू चौकसे के नेतृत्व में कांग्रेस पार्षदों और पार्टी के अन्य नेताओं के साथ निगमायुक्त कार्यालय पहुंचे और ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के जरिए कांग्रेस ने मांग रखी कि, मकानों में छोड़े गए खुले स्थान (एमओएस) पर टैक्स लगाने का फैसला सरासर गलत है। इसे वापस लिया जाना चाहिए। निगम इस टैक्स की वसूली को नहीं रोकेगा तो कांग्रेस आमजन के साथ सड़कों पर उतरकर इसका विरोध करेगी। गांधीवादी तरीके से विरोध की तैयारी उन्होंने कहा कि, निगम के सहायक राजस्व अधिकारी जहां भी इस खुले स्थान के टैक्स को वसूलने के लिए जाएंगे, कांग्रेसी वहां पहुंचकर उनका विरोध करेंगे। हमारा विरोध पूरी तरह से गांधीवादी और शांतिपूर्ण रहेगा। नगर निगम के माध्यम से हर मकान के खुले स्थान पर संपत्ति कर लगाना मनमानी है। ऐसी मनमानी का कांग्रेस हर स्तर पर विरोध करेगी। ज्ञापन देने वालों में पार्षद दीपू यादव, सीमा सोलंकी, सेफू वर्मा , सोनीला मिमरोट, राजू भदोरिया, अमित पटेल, सुदामा चौधरी, राजेश चौकसे आदि शामिल थे। वर्ष 2020 में मिली थी अनुमति राज्य शासन ने वर्ष 2020 में स्थानीय निकायों को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से एमओएस टैक्स की अनुमति दी थी। हालांकि पिछले पांच वर्ष से इसे लागू नहीं किया जा सका।  

इंदौर मेट्रो की रफ्तार पर सीएमआरएस ने 80 की स्पीड से की जांच, ब्रेक स्पीड टेस्ट चार बार किया

इंदौर  सुपर कॉरिडोर से लेकर रेडिसन तक  80 की स्पीड से मेट्रो दौड़ी। चार बार मेट्रो को दौड़ाकर ब्रेक स्पीड टेस्ट किया गया। इसमें मेट्रो को 80 की स्पीड पर पहुंचाने के बाद रोक कर जांच की गई। दरअसल यह प्रक्रिया कमिश्नर ऑफ मेट्रो रेलवे सेफ्टी (सीएमआरएस) नीलाभ्र सेनगुप्ता के निरीक्षण की प्रक्रिया का हिस्सा थी। इसके साथ ही सीएमआरएस का निरीक्षण पूरा हो गया। निरीक्षण रिपोर्ट के बाद सीएमआरएस एनओसी जारी करेंगे। ऐसे में संभावना है कि मार्च के आखरी तक शहर में मेट्रो का कमर्शियल रन शुरू हो जाएगा। यह प्रक्रिया कमिश्नर ऑफ मेट्रो रेलवे सेफ्टी (सीएमआरएस) नीलाभ्र सेनगुप्ता के निरीक्षण की प्रक्रिया का हिस्सा थी। इसके साथ ही सीएमआरएस का निरीक्षण पूरा हो गया। निरीक्षण रिपोर्ट के बाद सीएमआरएस एनओसी जारी करेंगे। ऐसे में संभावना है कि मार्च के आखरी तक शहर में मेट्रो का कमर्शियल रन शुरू हो जाएगा। सीएमआरएस नीलाभ्र सेनगुप्ता अपने छह सदस्यों के दल के साथ मेट्रो के ग्यारह किमी लंबे रूट का निरीक्षण करने पहुंचे थे। निरीक्षण के तीसरे दिन  मेघदूत, विजयनगर और रेडिसन चौराहे पर बने मेट्रो स्टेशन का निरीक्षण किया। प्रत्येक स्टेशन पर एक-एक घंटे रुके। इस दौरान निकासी गेट, लिफ्ट, एस्कलेटर, पार्किंग एरिया, स्टेशन रूम, दिव्यांगों के लिए मौजूद सुविधाओं का निरीक्षण किया। इसके साथ ही मेट्रो डिपो में कंट्रोल कमांड सेंटर, सिग्नल सेंटर, डिपो में स्टेब्लिंग यार्ड की रेल लाइन का निरीक्षण किया। सीएमआरएस ने एमआर-10 पर बने इलेक्ट्रिक सब स्टेशन का निरीक्षण भी किया। सभी ग्यारह स्टेशन का निरीक्षण पूरा हो चुका है। 80 की स्पीड में चेक हुए ब्रेक शाम से रात तक दौड़ाई मेट्रो सुपर कॉरिडोर के स्टेशन नंबर-2 से रेडिसन चौराहा तक वायडक्ट पर मेट्रो को 80 किमी प्रतिघंटा की गति से दौड़ाई। स्टेशन निरीक्षण के बाद शाम से रात तक चार बार मेट्रो को दौड़ाया गया और स्पीड ब्रेक टेस्ट किया गया। 17 किमी पर संचालन जल्द होगा शुरू सीएमआरएस द्वारा मेट्रो का चार दिनी निरीक्षण प्रस्तावित था, लेकिन यह कार्य तीन दिन में पूरा कर लिया गया। बुधवार को सीएमआरएस दिल्ली रवाना हो जाएंगे। निरीक्षण के आधार पर सुझावों के साथ निरीक्षण रिपोर्ट सौंपेंगे। इसके बाद मेट्रो प्रबंधन उनके बताए गए सुझावों को पूरा करके रिपोर्ट भेजेगा। इसके बाद सीएमआरएस द्वारा मेट्रो के 11.5 किलोमीटर हिस्से पर कमर्शियल रन शुरू करने की एनओसी जारी की जाएगी। यह संभावना जताई जा रही है कि 26 मार्च के बाद मेट्रो का संचालन रेडिसन चौराहे तक हो सकेगा। इंदौर के प्रायोरिटी कॉरिडोर पर गांधी नगर स्टेशन से स्टेशन नंबर-2 तक करीब छह किमी में पहले ही संचालन किया जा रहा है। अब स्टेशन नंबर-2 से रेडिसन चौराहा तक 11 किमी हिस्से में मेट्रो का निरीक्षण पूरा हो चुका है। एनओसी जारी होते ही 17 किमी लंबे रूट पर मेट्रो का संचालन होने लगेगा। स्टेशनों पर यात्री सुविधाओं का जायजा सीएमआरएस नीलाभ्र सेनगुप्ता अपने छह सदस्यों के दल के साथ मेट्रो के ग्यारह किमी लंबे रूट का निरीक्षण करने पहुंचे थे। निरीक्षण के तीसरे दिन मंगलवार को मेघदूत, विजयनगर और रेडिसन चौराहे पर बने मेट्रो स्टेशन का निरीक्षण किया। प्रत्येक स्टेशन पर एक-एक घंटे रुके। इस दौरान निकासी गेट, लिफ्ट, एस्कलेटर, पार्किंग एरिया, स्टेशन रूम, दिव्यांगों के लिए मौजूद सुविधाओं का निरीक्षण किया। इसके साथ ही मेट्रो डिपो में कंट्रोल कमांड सेंटर, सिग्नल सेंटर, डिपो में स्टेब्लिंग यार्ड की रेल लाइन का निरीक्षण किया। सीएमआरएस ने एमआर-10 पर बने इलेक्ट्रिक सब स्टेशन का निरीक्षण भी किया। सभी ग्यारह स्टेशन का निरीक्षण पूरा हो चुका है। रात के अंधेरे में मेट्रो का ट्रायल बना आकर्षण शाम से रात तक दौड़ाई मेट्रो सुपर कॉरिडोर के स्टेशन नंबर-2 से रेडिसन चौराहा तक वायडक्ट पर मेट्रो को 80 किमी प्रतिघंटा की गति से दौड़ाई। स्टेशन निरीक्षण के बाद शाम से रात तक चार बार मेट्रो को दौड़ाया गया और स्पीड ब्रेक टेस्ट किया गया। रात्रि में मेट्रो को वायडक्ट पर चलता देखकर विजय नगर और एमआर-10 क्षेत्र में रहने और गुजरने वाले रुककर देखने लगे। एनओसी मिलते ही शुरू होगा 17 किमी पर संचालन सीएमआरएस द्वारा मेट्रो का चार दिनी निरीक्षण प्रस्तावित था, लेकिन यह कार्य तीन दिन में पूरा कर लिया गया। बुधवार को सीएमआरएस दिल्ली रवाना हो जाएंगे। निरीक्षण के आधार पर सुझावों के साथ निरीक्षण रिपोर्ट सौंपेंगे। इसके बाद मेट्रो प्रबंधन उनके बताए गए सुझावों को पूरा करके रिपोर्ट भेजेगा। इसके बाद सीएमआरएस द्वारा मेट्रो के 11.5 किलोमीटर हिस्से पर कमर्शियल रन शुरू करने की एनओसी जारी की जाएगी। यह संभावना जताई जा रही है कि 26 मार्च के बाद मेट्रो का संचालन रेडिसन चौराहे तक हो सकेगा। इंदौर के प्रायोरिटी कॉरिडोर पर गांधी नगर स्टेशन से स्टेशन नंबर-2 तक करीब छह किमी में पहले ही संचालन किया जा रहा है। अब स्टेशन नंबर-2 से रेडिसन चौराहा तक 11 किमी हिस्से में मेट्रो का निरीक्षण पूरा हो चुका है। एनओसी जारी होते ही 17 किमी लंबे रूट पर मेट्रो का संचालन होने लगेगा।  

ग्वालियर शहर का मास्टर प्लान तैयार, 3 दिशा में बढ़ेगी सीमा, 600 करोड़ की लागत अनुमानित

ग्वालियर  ग्वालियर विकास प्राधिकरण (जीडीए ) ने नए वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए अपने विकास का रोडमैप तैयार कर लिया है। मंगलवार को संभागीय आयुक्त मनोज खत्री की अध्यक्षता में आयोजित संचालक मण्डल की बैठक में 241 करोड़ का बजट पेश किया गया। बजट का फोकस शहर के बाहरी इलाकों को मास्टर प्लान- 2035 के अनुसार मुख्य शहर से जोडऩे और नई आवासीय योजनाओं को विकसित करने पर है। खास बात यह है कि प्राधिकरण ने रुद्रपुरा और बड़ागांव के रूप में दो नई बड़ी योजनाओं को हरी झंडी दे दी है, जिससे आने वाले समय में शहर का दायरा और बढ़ेगा। वहीं पूर्व में स्वीकृत 363 करोड़ से एयरपोर्ट कॉरिडोर को हरी झंडी मिलने से इस तरफ के 15 गांवों में नए आवासीय शहर बस सकेंगे। झांसी बायपास और मुरैना रोड की ओर शहर का दबाव शिफ्ट होगा। शहर का विस्तार, तीन दिशाओं में खुलेंगे विकास के द्वार ग्वालियर अब अपनी पुरानी सीमाओं को तोड़कर बाहर की ओर बढ़ रहा है। जीडीए ने नए आवासीय क्षेत्रों के लिए तीन प्रमुख रूट्स को चिन्हित किए हैं, जहाँ आने वाले समय में टाउनशिप और सरकारी आवासीय योजनाएं नजर आएंगी:     मुरैना रोड (उत्तर दिशा): इस रूट पर पुरानी छावनी, खिरियाभाग, बदनापुरा व अन्य क्षेत्रों को नए आवासीय हब के रूप में विकसित किया जाएगा। यहां औद्योगिक और आवासीय विकास का संगम दिखेगा। 2. झांसी बायपास (दक्षिण दिशा): शहर का सबसे प्रीमियम विस्तार इसी ओर हो रहा है। वीरपुरा, खरियामोदी, रमौआ, गणेशपुरा और बन्हारपुरा क्षेत्रों में मास्टर प्लान के तहत नई कॉलोनियां विकसित होंगी।     डबरा रोड (दक्षिणपूर्व दिशा): तुरारी, बागौर और भाटखेड़ी क्षेत्रों को नए रिहायशी जोन के रूप में मंजूरी मिली है। यहाँ की कनेक्टिविटी मास्टर प्लान की प्रस्तावित सड़कों से सीधे बायपास से होगी। एक साल बाद बैठक, दो नई नगर विकास योजनाओं को स्वीकृति     टीडीएस-07 (रुद्रपुरा): एयरपोर्ट से साडा लिंक रोड के पास 165.40 हेक्टेयर में विकसित होने वाली इस योजना पर 238 करोड़ खर्च होंगे, जबकि इससे 366 करोड़ के मुनाफे का अनुमान है।     टीडीएस-08 (बड़ागांव): मुरैना-झांसी बायपास को जोडऩे वाली इस योजना में 164.33 हेक्टेयर जमीन विकसित होगी। 181 करोड़ की लागत के मुकाबले 374 करोड़ के लाभ की उम्मीद है। दोनों योजनाओं के लिए प्लानिंग और बिल्डिंग टीमें तैनात कर दी गई हैं। मेला प्राधिकरण और अनुकंपा नियुक्ति व्यापार मेला: ग्वालियर व्यापार मेला प्राधिकरण के प्रस्तावों को मंजूरी दी गई, जिससे शहर की व्यापारिक गतिविधियां बढ़ेंगी। हेल्थ सेक्टर: शताब्दीपुरम फेज-2 और यातायात नगर योजना में हेल्थ सेंटर और हेल्थ ब्लॉक के निर्माण को हरी झंडी मिली। इन सड़कों से सुधरेगी शहर की 'रफ्तार' मास्टर प्लान-2035 के तहत प्रस्तावित कई महत्वपूर्ण सड़कों के निर्माण को बजट में जगह मिली है : भाटखेड़ी-रमौआ मार्ग: ग्राम भाटखेड़ी से ग्राम रमौआ तक विकास कार्य। ललियापुरा अंडरपास: झांसी रोड से ब्लू लोटस कॉलोनी तक नई सड़क का निर्माण। झांसी बायपास कनेक्टिविटी: सिरोल तिराहे से झांसी बायपास तक 30 मीटर चौड़ी सड़क का निर्माण। एयरपोर्ट-साड़ा कोरिडोर: टीडीएस-04 योजना के तहत इस लिंक कोरिडोर के विकास कार्यों के लिए 363.66 करोड़ की प्रशासकीय स्वीकृति दी गई है। ये पहले से स्वीकृत है। एयरपोर्ट-साडा लिंक कॉरिडोर को मंजूरी के लाभ ट्रैफिक व्यवस्था और पर्यटन को नई गति देने के लिए नगर विकास योजना टीडीएस-04 (एयरपोर्ट साडा लिंक कॉरिडोर) भविष्य के लिए बेहतर योजना है। फायदा: यह कॉरिडोर शहर के मुख्य हिस्सों को सीधे एयरपोर्ट से जोड़ेगा, जिससे वीआइपी मूवमेंट और आम यात्रियों के समय की भारी बचत होगी। सड़कों का जाल: मास्टर ह्रश्वलान 2035 के तहत सिरोल तिराहे से झांसी बायपास और भाटखेड़ी से रामिया तक 30 मीटर चौड़ी सड़कों के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है। भविष्य की जरूरतों को देखते हुए कुछ स्थानों पर 60 मीटर चौड़ी सड़कों के निर्माण पर भी मुहर लगी है, जो लिंक रोड की तर्ज पर शहर के बाहरी ट्रैफिक को नियंत्रित करेंगी। शताब्दीपुरम फेज-4: अब जमीन के बदले प्लॉट नहीं जीडीए की योजनाओं में अब तक 'आपसी सहमति' से जमीन के बदले भूखंड देने की जो परंपरा चली आ रही थी, उस पर अब पूरी तरह रोक लगा दी गई है। विशेष रूप से शताब्दीपुरम योजना फेज-4 के तहत अब तक किसानों या जमीन मालिकों को उनकी जमीन के बदले विकसित भूखंड दे दिए जाते थे। मंगलवार को हुई बैठक में स्पष्ट किया गया कि अब ऐसी किसी भी फाइल पर स्थानीय स्तर पर निर्णय नहीं होगा। अब जमीन के बदले मुआवजे या भूखंड के सभी प्रस्ताव 'राज्य शासन' को भेजे जाएंगे।   

आयुष मंत्री परमार ने बैतूल जिला आयुष विंग का किया निरीक्षण, दिए आवश्यक निर्देश

भोपाल उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष विभाग मंत्री  इन्दर सिंह परमार ने बुधवार को बैतूल में जिला चिकित्सालय जिला आयुष विंग का औचक निरीक्षण कर वहां की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। मंत्री  परमार ने पंचकर्म, शिरोधारा सहित विभिन्न आयुष चिकित्सा पद्धतियों का अवलोकन किया। आयुष मंत्री  परमार ने सिकल सेल यूनिट के साथ आयुर्वेद एवं होम्योपैथी दवाओं के वितरण व्यवस्था की भी समीक्षा की और संबंधित अधिकारियों को दवाओं का वितरण सुचारू रूप से सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मंत्री  परमार ने कहा कि आयुष औषधियों का पर्याप्त स्टॉक बनाए रखा जाए तथा आवश्यकता अनुसार समय पर मांग प्रस्तावित की जाए। निरीक्षण के दौरान मंत्री  परमार ने आयुष विंग में साफ-सफाई एवं सुव्यवस्थित संचालन पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। मंत्री  परमार ने कहा कि जिले में आयुष चिकित्सा पद्धतियों को दृढ़ता से स्थापित करते हुए, उनका प्रभावी एवं सफल क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए। इस अवसर पर मुलताई विधायक  चंद्रशेखर देशमुख, घोड़ाडोंगरी विधायक मती गंगाबाई उईके तथा जिला आयुष अधिकारी  योगेश चौकीकर सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।  

मुख्य सचिव जैन से आईज़ीआई वेंचर्स के संस्थापक ने की भेंट

भोपाल  मुख्य सचिव  अनुराग जैन से बुधवार को मंत्रालय में आईज़ीआई वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के संस्थापक  इशान हैडन ने भेंट की। इस अवसर पर राज्य में ड्रोन इको-सिस्टम को और मजबूत करने, संभावित नई साझेदारियों को विकसित करने तथा इस क्षेत्र में तेज़ी से प्रगति करने पर विस्तृत चर्चा हुई। इस पहल से “मेक इन इंडिया” और आत्मनिर्भर भारत के विज़न को सशक्त करते हुए मध्यप्रदेश में उन्नत ड्रोन तकनीक के विकास, स्थानीय रोजगार सृजन और इंडस्ट्री इको-सिस्टम को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका होगी। आईज़ीआई कंपनी भारत में नैनो और माइक्रो श्रेणी के ड्रोन सेगमेंट में मध्यप्रदेश सरकार की ड्रोन नीति के तहत राज्य में अपने मैन्युफैक्चरिंग ऑपरेशंस की शुरुआत कर रही है। आईज़ीआई मध्यप्रदेश में इस स्तर पर ड्रोन निर्माण शुरू करने वाली शुरुआती कंपनी है। ये उन्नत ड्रोन सर्विलांस, टेक्नीकल मिशन, इंफ्रा-स्ट्रक्चर निरीक्षण, सर्वेक्षण तथा विभिन्न औद्योगिक और सुरक्षा उपयोगों के लिए डिजाइन किए गए हैं। ये ड्रोन जीपीएस-डिनाइड (जीपीएसडिनाइड) परिस्थितियों में भी प्रभावी रूप से संचालन करने में सक्षम होंगे, जिससे इनका उपयोग रक्षा और संवेदनशील क्षेत्रों में और अधिक महत्वपूर्ण होगा।  

सड़क हादसे के घायलों की जान बचाने के लिए थाना स्टॉफ को दिया जाए विशेष प्रशिक्षण

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि किसी भी प्रकार की प्राकृतिक आपदा या मानव निर्मित दुर्घटना के समय नुकसान को कम से कम करना और जनजीवन को पुनः पटरी पर लाना महत्वपूर्ण होता है। संकट के समय में धैर्य और साहस बनाए रखना जरूरी होता है। ऐसी घड़ी में होमगार्ड और नागरिक सुरक्षा से जुड़े स्वयंसेवकों की तत्परता और सेवा भावना समाज के लिए सुरक्षा कवच का कार्य करती है। हमारे लिए गर्व का विषय है कि मध्यप्रदेश में 82 हजार से अधिक स्वयंसेवकों की एक विशाल और अनुशासित शक्ति विद्यमान है। बदलते वैश्विक परिदृश्य में सिविल डिफेंस की महत्वपूर्ण भूमिका है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में हमारे देश में कोविड जैसे कठिन काल और आतंकी हमलों के विरूध हुई ठोस कार्रवाइयों से सिविल डिफेंस सिस्टम अधिक समर्थ बना है। हमारे सिविल डिफेंस वॉलेंटियर्स प्राकृतिक आपदाओं जैसे- बाढ़, भूस्खलन, अग्निकांड और राहत-बचाव के कार्यों में निरंतर प्रशिक्षित हो रहे हैं। मध्यप्रदेश में नागरिक सुरक्षा का इतिहास लंबा है। वर्ष 1968 में भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर से आरंभ हुई यह यात्रा आज वट वृक्ष बन चुकी है। आज प्रदेश में मध्यप्रदेश नागरिक सुरक्षा के 82 हजार से अधिक वॉलेंटियर्स हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मध्यप्रदेश नागरिक सुरक्षा स्वयंसेवी समागम- 2026 को होमगार्ड परेड ग्राउंड पर संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर प्रतिभागियों द्वारा प्रस्तुत आपदा में बचाव के तरीकों के डेमोंसट्रेशन का अवलोकन किया। मध्यप्रदेश सिविल डिफेंस के वॉलेंटियर्स ने बाढ़ के दौरान रबर बोट तैयार करने, उपलब्ध संसाधनों से फ्लोटिंग रॉफ्ट तैयार करने, रोप ब्रिज निर्माण, मुश्किल वक्त में सीपीआर देने की प्रक्रिया और हवाई हमलों के दौरान बचाव के तरीकों और रोप रेस्क्यू का प्रदर्शन किया। इंदौर सिविल डिफेंस की बेटियों ने सेल्फ डिफेंस का प्रस्तुतिकरण दिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा वॉलेंटियर्स को नागरिक सुरक्षा जैकिट वितरित किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को डीजी होमगार्ड श्रीमती श्रीवास्तव ने इस अवसर पर स्मृति चिन्ह भेंट किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बेटियों को सिविल डिफेंस का प्रशिक्षण देना आवश्यक है। इस दिशा में की जा रही पहल की उन्होंने सराहना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश के प्रमुख मार्गों के आसपास के थाना स्टॉफ को सड़क हादसे के घायलों की जान बचाने के लिए भी विशेष प्रशिक्षण देने की आवयकता बताई। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने नागरिकों का जीवन सुरक्षित करने के लिए 'राहवीर योजना' और 'पीएमश्री एयर एम्बुलेंस सेवा' जैसी सुविधाओं की शुरुआत की है। मध्यप्रदेश यह पहल करने वाला देश का प्रथम राज्य है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में वन्य जीवों के साथ निडरता का वातावरण बना है। हमारे अभयारण्यों में टाइगर और चीतों की संख्या तेजी से बढ़ी है। वन्य जीव प्रबंधन और नागरिक सुरक्षा के लिए भी प्रशिक्षण देने की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि तकनीक के बदलते दौर में नई कठिनाइयां भी सामने आ रही हैं। उन्होंने बीती रात इंदौर में हुए हादसे का उल्लेख करते हुए कहा कि इलेक्ट्रिक व्हीकल के चार्जर से आग लगने और बाद में डिजिटल डोर लॉक नहीं खुलने से कई नागरिकों की मृत्यु हो गई। होम गार्ड्स एवं सिविल डिफेंस, तेजी से बदलती तकनीक के साथ आ रही ऐसी चुनौतियों का सामना करने के लिए भी स्वयं को सक्षम बनाएं। होमगार्ड्स एवं सिविल डिफेंस की महानिदेशक श्रीमती प्रज्ञा ऋचा श्रीवास्तव ने कहा कि नागरिक सुरक्षा स्वयंसेवी समागम-2026 में 5 जिलों के 780 वॉलेंटियर्स शामिल हुए हैं। इन वॉलेंटियर्स को एक माह का विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। उन्होंने कहा कि यह स्वयंसेवक आपदा प्रबंधन और आंतरिक सुरक्षा के सजग प्रहरी हैं, जो आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश की दिशा में उल्लेखनीय योगदान दे रहे हैं। स्वयंसेवकों को आपदा प्रबंधन, अग्नि सुरक्षा, यातायात सुरक्षा और सिविल डिफेंस की विभिन्न सेवाओं पर प्रशिक्षित किया जाता है। इसमें आपदा के समय जीवन रक्षा, सम्पत्ति क्षति का न्यूनीकरण, उत्पादन बनाए रखना, जनमानस का मनोबल ऊंचा रखना, प्राथमिक उपचार, भीड़ नियंत्रण, राहत वितरण, संचार सहायता और मनोसामाजिक सहायता प्रदान करने का प्रशिक्षण विशेष रूप से दिया जाता है। देश के प्रत्येक नागरिक को सिविल डिफेंस वॉलेंटियर होना आवश्यक है। एसडीआरएफ, होम गार्ड एवं सिविल डिफेंस के डीआईजी श्री मनीष अग्रवाल ने कहा कि सिंहस्थ 2028 की तैयारियों को लेकर भी सिविल डिफेंस वॉलेंटियर्स तैयार हैं। सीनियर डिविजनल ऑफिसर श्री कमलेंद्र परिहार ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की। कार्यक्रम में डिफेंस वालेंटियर्स, डिवीजन वार्डन आदि उपस्थित थे। सभी जिलों के सूचना केंद्रों में उपस्थित स्वयंसेवकों ने डिजिटल माध्यम से कार्यक्रम में भाग लिया।  

शासकीय नर्सरियों को बनाया जायेगा आदर्श नर्सरी : मंत्री कुशवाह

भोपाल  उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण मंत्री  नारायण सिंह कुशवाह ने कहा है कि प्रदेश की शासकीय नर्सरियों को आदर्श नर्सरी के रूप में विकसित किया जायेगा। इसके लिये विभाग द्वारा विस्तृत कार्य योजना तैयार की गयी है। वर्तमान में प्रदेश के 55 जिलों में 300 रोपणी/प्रक्षैत्र संचालित किये जा रहे हैं। इनमें उच्च गुणवत्ता की पौध-रोपण सामग्री उपलब्ध करायी जा रही है। मंत्री  कुशवाह ने बैतूल जिले में शासकीय उद्यान कम्पनी गार्डन का निरीक्षण कर इसे आधुनिक बनाने के निर्देश दिये। मंत्री  कुशवाह ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार द्वारा वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। इसमें किसान भाइयों को परम्परागत खेती के साथ उद्यानिकी फसलों फल, फूल, सब्जियों के उत्पादन के लिये प्रेरित किया जा रहा है जिससे कि किसान भाइयों को उत्तम गुणवत्ता के पौध और बीज प्राप्त हो सकें। मंत्री  कुशवाह ने प्रदेश के सभी संभागीय मुख्यालयों के जिले की 10 नर्सरियों को हाईटेक नर्सरी के रूप में विकसित किया गया है। उन्होंने बैतूल की कम्पनी गार्डन शासकीय नर्सरी को और अधिक आकर्षक और फल-फूलों से समृद्ध बनाने के निर्देश अधिकारियों को दिये। मंत्री  कुशवाह नर्सरी का सघन निरीक्षण किया तथा वहाँ उपलब्ध पौधों, फलों और उपकरणों के विषय में अधिकारियों से जानकारी प्राप्त की।  

इलेक्ट्रिक वाहनों में बढ़ती आग की घटनाएं: तीन साल का आंकड़ा चौंकाने वाला, रोज़ 25 हादसे क्यों?

इंदौर मध्य प्रदेश के इंदौर में बुधवार अल-सुबह जबरदस्त हादसा हुआ। यहां बंगाली चौराहे के पास स्थित एक कॉलोनी में मकान के बाहर खड़ी इलेक्ट्रिक कार में चार्जिंग के दौरान आग लग गई। यह आग देखते ही देखते इतनी बड़ी हो गई कि तीन मंजिल का पूरा मकान इसकी चपेट में आ गया। इस हादसे में आठ लोगों की जलकर मौत हो गई। वहीं, तीन लोगों को बचाया गया, जिनकी स्थिति गंभीर है। इस पूरे घटनाक्रम के बाद देश में इलेक्ट्रिक वाहनों की सुरक्षा को लेकर सवाल पूछे जा रहे हैं। दरअसल, यह ईवी से जुड़ा कोई पहला हादसा नहीं है, बल्कि समय-समय पर इलेक्ट्रिक कारों, दोपहिया वाहनों में आग लगने की घटनाएं सामने आती रही हैं। इन घटनाओं में पहले भी जान गई हैं। ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) में आग लगने की घटनाओं का आंकड़ा क्या है? ईवी आमतौर पर इतनी आसानी से आग क्यों पकड़ लेते हैं? इसके अलावा मौसम के बदलाव और तापमान का ईवी की आग से क्या संबंध है? क्या सरकार की तरफ से ईवी हादसों की जांच और आगे हादसे रोकने से जुड़े दिशा-निर्देश भी बनाए गए हैं? आइये जानते हैं… भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों में आग लगने की घटनाओं के क्या आंकड़े? सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) के इलेक्ट्रॉनिक डिटेल एक्सीडेंट रिपोर्ट (eDAR) पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार, पिछले तीन वर्षों यानी 2023 से 2025 में देश भर में इलेक्ट्रिक वाहनों से जुड़ी कुल 23,865 दुर्घटनाएं दर्ज की गई हैं। इन कुल दुर्घटनाओं में से इलेक्ट्रिक वाहनों में आग लगने की महज 26 घटनाएं दर्ज हुई हैं। ' इन आंकड़ों के मुताबिक, भारत में हर दिन ईवी से जुड़ी औसतन करीब 25 दुर्घटनाएं दर्ज होती हैं। वहीं, आग लगने की घटनाओं के औसतन महज तीन केस ही दर्ज हुए हैं। इसके अलावा, कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2026 में भी इलेक्ट्रिक वाहनों में आग लगने की घटनाएं दर्ज हुई हैं। इनमें फरवरी में यूपी के हापुड़ में एक ईवी में आग लगने की घटना सामने आई थी, जिसमें कंपनी ने बैटरी की खराबी से इनकार किया था। इसी तरह जनवरी में गाजियाबाद में एक ईवी में आग लगने की घटना प्रमुख थी। चौंकाने वाली बात यह है कि इस घटना में ईवी में आग चार्जिंग पॉइंट में शॉर्ट सर्किट के बाद लगी थी। इसके अलावा 2025 में दिल्ली के शहादरा में ई-व्हीकल के चार्जिंग पॉइंट में आग लगने से कई ई-रिक्शा जल गए थे। ऐसी ही कुछ घटनाएं लगभग हर वर्ष देखी जाती रही हैं। खास बात यह है कि ईवी में आग की अधिकतर घटनाएं इनके चार्जिंग में लगे होने के दौरान हुईं। इन चार-पहिया वाहनों से लेकर दो-पहिया तक के जलने की घटनाएं शामिल हैं। क्यों इलेक्ट्रिक वाहनों में अचानक लग जाती है आग? मौजूदा समय में इलेक्ट्रिक वाहनों में आधुनिक बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (बीएमएस) होता है, जो कार के फुल चार्ज होने पर ऑटोमैटिक रूप से पावर सप्लाई को काट देता है, इसलिए तकनीकी रूप से इन्हें सुरक्षित माना जाता है। इसके बावजूद अचानक आग लगने की घटनाएं सामने आती हैं। इसकी एक वजह बैटरी की खराब क्वालिटी या चार्जिंग इन्फ्रास्ट्र्क्चर की खराबी हो सकता है। क्या गर्मी से लग सकती है ईवी में आग? अक्सर लोग मानते हैं कि गर्मियों के अधिक तापमान के कारण ईवी में आग लगती है, लेकिन विशेषज्ञ इसे एक गलतफहमी मानते हैं। असल में, 99% बैटरी की आग शॉर्ट सर्किट के कारण होती है। शॉर्ट सर्किट से अनियंत्रित करंट बहता है और बैटरी के सेल का तापमान 100°C से ऊपर चला जाता है। इस स्थिति को 'थर्मल रनअवे' कहते हैं। इस स्थिति में बैटरी अपने आप और ज्यादा गर्म होने लगती है और आग बेकाबू हो जाती है, जिससे धमाके और जहरीली गैसें निकल सकती हैं। क्या बैटरी की खराबी हो सकती है वजह? बैटरी में शॉर्ट सर्किट होने की एक अहम वजह सेल क्वालिटी का खराब होना, बैटरी का कमजोर डिजाइन और खराब बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम हो सकता है, जहां सॉफ्टवेयर सही तरीके से बैटरी सेल्स को मैनेज नहीं कर पाता। विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि कुछ निर्माता उत्पादों के डिजाइन पर पर्याप्त समय नहीं दे रहे हैं। और क्या हो सकती हैं ईवी में आग लगने की वजह? ईवी मालिक अनजाने में कुछ ऐसी गलतियां करते हैं जो बड़े हादसों का कारण बनती हैं। कई बार वे साधारण एक्सटेंशन कॉर्ड का इस्तेमाल करते हैं जो लगातार 15 एम्पियर (15A) या उससे ज्यादा का भारी लोड नहीं झेल पाते और पिघल जाते हैं। इसके अलावा बिना प्रॉपर अर्थिंग वाले सॉकेट का इस्तेमाल करने से शॉर्ट सर्किट का करंट सीधे कार या चार्जर को नुकसान पहुंचा सकता है, जो कि आग का कारण बनता है। जानकारों के मुताबिक, अगर प्लग सॉकेट में ढीला रहता है तो वहां स्पार्किंग होती है, जो धीरे-धीरे प्लग को जला देती है। इसके अलावा वाहन निर्माता कंपनियों की ओर से दिए गए चार्जर की जगह सस्ते और लोकल चार्जर का इस्तेमाल करना भी आग लगने का एक बड़ा कारण है। दुनियाभर में ईवी में आग लगने की एक बड़ी वजह यह भी रही है कि लंबे समय तक चलने के तुरंत बाद बैटरी के सेल गर्म रहते हैं। ऐसे में बिना बैटरी को ठंडा होने का समय दिए उसे तुरंत चार्जिंग पर लगा देना जोखिम भरा हो सकता है और आग की वजह बन सकता है। चार्जिंग पॉइंट की खराबी का ईवी हादसों पर क्या असर? इंदौर की घटना में चार्जिंग पॉइंट में शॉर्ट सर्किट को ईवी में आग लगने का कारण माना जा रहा है। जानकारी के मुताबिक, शॉर्ट सर्किट से पैदा हुई चिंगारी ईवी तक पहुंच गई और इससे इलेक्ट्रिक कार जल उठी। आइबेरिया में अलायंज कमर्शियल के अधिकारी राफेल रिओबो के मुताबिक, किसी ईवी के जीवन में सबसे ज्यादा जोखिम भरा समय उसकी ड्राइविंग नहीं, बल्कि चार्जिंग का समय होता है। एक रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 90 प्रतिशत मामलों में आग कार की बैटरी से नहीं, बल्कि दीवार के सॉकेट, पुरानी वायरिंग या खराब एक्सटेंशन कॉर्ड से शुरू होती है। लगातार कई घंटों तक हाई-वोल्टेज करंट बहने की वजह से घर के कमजोर तार गर्म होकर पिघल जाते हैं, जो शॉर्ट सर्किट का बड़ा … Read more

नरवाई न जलाएं किसान, पैदावार क्षमता बढ़ाने के लिए अपनाएं जैविक एवं प्राकृतिक खेती

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि हरदा जिले ने विकास के हर क्षेत्र में अपनी विशेष पहचान बनाई है। हरदा जिले में शत-प्रतिशत कृषि रकबे में सिंचाई की सुविधा विकसित हो चुकी है। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने जन कल्याण के लिए 4 विशेष श्रेणियां – गरीब, किसान, युवा और नारी कल्याण तय की हैं। राज्य सरकार इन सभी श्रेणियों सहित प्रदेश के औद्योगिक और अधोसंरचनात्मक विकास को भी ध्यान में रखकर काम कर रही है। मध्यप्रदेश सबसे तेज गति से युवाओं को रोजगार दिलाने वाला राज्य है। दूसरी ओर लाड़ली बहनों को हर माह 1500 रुपए की सौगात दी जा रही है। अगर बहनें रोजगार आधारित उद्योग में काम करेंगी तो उन्हें 5000 रुपए अलग से दिलाये जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारतीय संस्कृति में माताओं-बहनों का अपना अलग सम्मान है। बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए सांदीपनि विद्यालय स्थापित कर रही है। हरदा को तीन सांदीपनि विद्यालयों की सौगात मिली है। बच्चों को नि:शुल्क किताबें, साइकिल और दूध के पैकेट बांटे जा रहे हैं। मेधावी विद्यार्थियों को लैपटॉप और स्कूटी देकर प्रोत्साहित किया जा रहा है। हमारी सरकार हर हाथ को काम और हर खेत को पानी उपलब्ध कराने के संकल्प से आगे बढ़ रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बुधवार को हरदा में कृषि आधारित कौशल विकास एवं कस्टम हायरिंग पर केन्द्रित राज्यस्तरीय किसान सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हरदा जिले के लिए करीब 232 करोड़ रुपए के 41 विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमिपूजन किया। इसमें 199 करोड़ रुपए लागत के 36 कार्यों का लोकार्पण एवं 32 करोड़ रुपए लागत के 5 निर्माण कार्यों का भूमि-पूजन शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम स्थल पर आयोजित आधुनिक कृषि यंत्रों की प्रदर्शनी का अवलोकन किया और किसानों से उन्नत कृषि यंत्रों से खेती कर उत्पादन बढ़ाने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रदेश के प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में कृषि यंत्र की दुकाने (कस्टम हायरिंग सेन्टर) खोले जायेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्व-सहायता समूह की बहनों को चेक, किसानों को ड्रिप सिंचाई किट, नरवाई प्रबंधन, खाद्य प्रसंस्करण के लिए हितलाभ वितरित किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हलधर भगवान बलराम प्रदेश के किसान भाइयों के आदर्श हैं। राज्य सरकार ने किसान कल्याण वर्ष मनाने की शुरुआत की है। खेती के साथ, बागवानी और पशुपालन के प्रोत्साहन पर भी जोर दिया जा रहा है। किसानों की आय बढ़ाने के लिए दूध उत्पादन को 9 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत करने का निर्णय लिया गया है। हरदा के किसानों के पास अब केज कल्चर से मत्स्य उत्पादन से लाभ कमाने का भी अवसर है। राज्य सरकार किसानों को गेहूं का उचित दाम दिलवाने के लिए संकल्पित है। इस वर्ष 40 रुपए का बोनस देकर 2625 रुपए प्रति क्विंटल गेहूं खरीदा जा रहा है। बहुत जल्द हम प्रदेश के किसानों से 2700 रुपए प्रति क्विंटल गेहूं खरीदेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में नरवाई का समुचित प्रबंधन करते हुए जैविक एवं प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित किया जा रहा है। किसान भाई इससे जुड़ें। किसान नरवाई न जलाएं, इससे धरती माता की उर्वरक क्षमता प्रभावित होने लगती है। प्राकृतिक खेती के उत्पादों को मंडी में बेचने के लिए विशेष प्रबंधन किए जा रहे हैं। लघु किसानों को उन्नत कृषि यंत्र किराये पर उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके लिए दुकानें खोलने का निर्णय लिया है। किसान कल्याण वर्ष में प्रदेश के प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में किसान सम्मेलन आयोजित हो रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि नरवाई प्रबंधन के क्षेत्र में नवाचार करते हुए हमने गौशालाओं को नरवाई से भूसा तैयार करने के लिए यंत्र उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। हमारी सरकार गौशालाओं को मिलने वाला अनुदान 20 रुपए प्रति गौमाता से बढ़ाकर 40 रुपए किया है। प्रदेश में गौशाओं की संख्या बढ़ाई जा रही है। आज प्रदेश के 11 शासकीय विश्वविद्यालय और 20 अन्य कॉलेजों में बीएससी एग्रीकल्चर की पढ़ाई के कोर्स शुरू किए गए हैं। इसकी शुरुआत उज्जैन से की गई है। हरदा के कृषक भी बड़े पैमाने पर कृषि उद्योग लगाने के लिए आगे आएं। खेत से लेकर कारखाने तक सभी निर्माण कार्य और सुविधाएं देने के लिए सरकार तैयार है। किसान भाइयों को इसके लिए 50 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में सिंचाई का रकबा बढ़ाने के लिए नदी जोड़ो अभियान की शुरुआत की गई है। पीकेसी परियोजना से प्रदेश के 13 जिलों के किसानों को सिंचाई का लाभ मिल रहा है। प्रदेश में 55 लाख से अधिक सिंचाई का रकबा हो चुका है। पिछले दो साल में 10 लाख हेक्टेयर सिंचित रकबा बढ़ा है। आगामी 5 साल में इसे 100 लाख हेक्टेयर तक करने का लक्ष्य रखा गया है। नील गाय जैसे जानवरों से फसल को बचाने के लिए वन विभाग समुचित प्रबंधन कर रहा है। उन्होंने कहा कि श्योपुर के कूनो नेशनल पार्क में चीतों के पुनर्वास के बाद मध्यप्रदेश की धरती पर अब आगामी 25 मार्च को जंगली भैंसे भी हमारे वनों की शोभा बढ़ाने वाले हैं। खेल एवं सहकारिता मंत्री तथा हरदा जिले के प्रभारी मंत्री  विश्वास कैलाश सारंग ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश को समृद्ध बनाने का संकल्प लिया है। हर क्षेत्र में विकास और जनकल्याण के कार्य तेजी से पूर्ण किए जा रहे हैं। राज्य सरकार ने किसानों के कल्याण के लिए 17 विभागों को एक साथ जोड़ा है। कृषक कल्याण वर्ष में किसान भाइयों को नई-नई सौगातें मिल रही हैं। हमारा लक्ष्य खेती से अधिक से अधिक लाभ दिलवाना है। किसानों की फसलों को उचित मूल्य देने के लिए समर्थन मूल्य और भावांतर भुगतान योजना लागू की गई है। प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विकसित भारत के निर्माण में मध्यप्रदेश महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। हमारा प्रदेश स्वर्णिम बनने की दिशा में अग्रसर है। सरकार खेत और किसान को मजबूती प्रदान कर रही है। हमने सहकारिता विभाग में 75 पदों पर नए सहकारिता निरीक्षकों की भर्ती की है।   पूर्व मंत्री  कमल पटेल ने कहा कि प्रदेश के लाड़ले मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पिछले दो वर्षों के कार्यकाल में मध्यप्रदेश को विकसित राज्यों की कतार में खड़ा कर दिया है। हरदा जिले की कृषि मंडी एक आदर्श मंडी है, जिले … Read more

राज्य स्तरीय जल महोत्सव 2026 में जल जीवन मिशन की योजनाओं के संचालन एवं संधारण पर हुआ मंथन

भोपाल लोक स्वास्थय यांत्रिकी मंत्री  सम्पतिया उइके ने कहा कि जल जीवन मिशन से ग्रामीण भारत की तस्वीर बदली है, अब आवश्यक इसकी वास्तविक सफलता योजनाओं के नियमित, सुरक्षित और दीर्घकालिक संचालन में निहित है। सामुदायिक जवाबदेही से ही जल जीवन मिशन सफल होगा। उन्होंने कहा कि वर्ष-2019 में जब मिशन प्रारंभ हुआ था तब प्रदेश में लगभग 13 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों तक ही नल से जल की सुविधा थी, वर्तमान 74 प्रतिशत से अधिक ग्रामीण परिवारों तक नल जल पहुँच चुका है। शीघ्र ही शत-प्रतिशत लक्ष्य की प्राप्ति होगी। प्रदेश में 27 हजार 990 से अधिक योजनाएँ स्वीकृत हुईं और अधिकांश योजनाएँ पूर्णता की अवस्था में हैं। मंत्री  उइके ने बुधवार को जल भवन के सभागार में आयोजित राज्य स्तरीय “जल-मंथन – पानी से आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश” कार्यशाला में जल जीवन मिशन की उपलब्धियों के साथ उसके दीर्घकालिक संचालन एवं संधारण पर अपने विचार साझा किये। कार्यशाला में प्रशासनिक, तकनीकी तथा सामुदायिक स्तर के प्रतिनिधियों की सक्रिय सहभागिता रही। मंत्री  उइके ने कहा कि संचालन एवं संधारण केवल विभागीय दायित्व नहीं है, बल्कि ग्राम पंचायत, जल समिति और समुदाय की साझा ज़िम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि राजस्व संग्रहण व्यवस्थित नहीं होगा, विद्युत देयक समय पर जमा नहीं होंगे, मोटर-पंप और पाइपलाइन का रखरखाव नियमित नहीं होगा, तो निर्मित संरचना टिकाऊ नहीं रह पाएगी। मंत्री  उइके ने कहा जल जीवन मिशन के संचालन संधारण का कार्य ग्राम पंचायतों को सौंपा जा रहा है। उन्होंने कहा कि जल स्त्रोतों को सुरक्षित एवं संरक्षित रखते हुए ग्रामीणों को सतत पेयजल उपलब्ध कराने के लिये जन-जन को इससे जोड़ना होगा। उन्होंने बताया कि जल जीवन मिशन-2.0 में मध्यप्रदेश को 19 हजार करोड़ केन्द्र सरकार से मिलेंगे, जिससे जल जीवन मिशन के सभी कार्यों को पूर्ण किया जायेगा। हर घर नल से जल की आपूर्ति होने के कारण ग्रामीणों के समय की बचत हुई है, जिससे उनका समय अन्य सकारात्मक कार्यों में लगने से गाँव में प्रगति हुई है। साथ ही बच्चे अब नियमित रूप से स्कूल जा पा रहे हैं। प्रदेश के जल महोत्सव की पूरे देश में प्रशंसा की जा रही है। उन्होंने जल गुणवत्ता पर विशेष बल देते हुए कहा कि प्रत्येक ग्राम में फील्ड टेस्ट किट का उपयोग नियमित रूप से किया जाए। प्रयोगशाला परीक्षण की व्यवस्था सुदृढ़ हो। मंत्री  उइके ने कहा कि सुरक्षित जल आपूर्ति ही मिशन की आत्मा है। स्रोत स्थिरता को अगले चरण की केंद्रीय प्राथमिकता बताते हुए वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण, परंपरागत जल संरचनाओं के संरक्षण तथा दीर्घकालिक जल सुरक्षा की दिशा में ठोस कदम उठाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने स्पष्ट कहा कि योजनाएँ आने वाले 25 वर्षों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर टिकाऊ रूप में संचालित करने का लक्ष्य है। प्रमुख सचिव पी. नरहरि ने कहा कि प्रदेश में जल जीवन मिशन के अंतर्गत व्यापक पाइपलाइन नेटवर्क, समूह एवं एकल ग्राम नलजल योजनाएँ और गुणवत्ता निगरानी तंत्र स्थापित हुआ है। उन्होंने बताया कि संचालन एवं संधारण की संस्थागत मजबूती से ही जल जीवन मिशन सफल होगा। डिजिटल मॉनिटरिंग, जिला स्तरीय समीक्षा, तकनीकी निरीक्षण, वित्तीय अनुशासन और शिकायत निवारण तंत्र को व्यवस्थित किया जा रहा है। ग्राम स्तर पर पंप ऑपरेटरों का प्रशिक्षण और जल समितियों की क्षमता वृद्धि को प्राथमिकता दी जा रही है।  उइके ने कहा कि तकनीकी दक्षता, वित्तीय पारदर्शिता और सामुदायिक भागीदारी से ही योजनाएँ दीर्घकाल तक सफल रह सकती हैं। खरगोन कलेक्टर सु भव्या मित्तल ने जल जीवन मिशन के सुचारू संचालन एवं संधारण का व्यवहारिक अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि निर्माण के बाद की चुनौतियाँ अधिक जटिल होती हैं। प्रमाणन प्राप्त करना महत्वपूर्ण है, परंतु उसकी निरंतरता बनाए रखना उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है। समस्याओं को सामने लाना और ग्रामीणों से चर्चा और जागरूकता से सकारात्मक परिणाम मिलते हैं। उन्होंने कहा कि संस्थागत स्पष्टता, नियमित राजस्व संग्रहण, पारदर्शी लेखा प्रणाली और सतत तकनीकी निगरानी से हर घर नल से जल आपूर्ति निर्बाध रूप से होती है।। मंत्री  उइके ने राज्य स्तरीय “जल सेवा रत्न” सम्मान समारोह में एकल ग्राम एवं समूह ग्राम नलजल योजनाओं के अंतर्गत उत्कृष्ट कार्य करने वाले सरपंचों, स्व-सहायता समूहों, पंप ऑपरेटरों और ग्राम प्रेरकों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। कार्यशाला में “नलजल योजना में युवा नेतृत्व एवं नवाचार” विषय पर युवा हैकाथॉन आयोजित हुआ, जिसमें भोपाल के प्रमुख विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों की चयनित टीमों ने भाग लिया। पंचायत प्रतिनिधि संवाद में योजना प्रबंधन, जल शुल्क निर्धारण, स्रोत संरक्षण और ग्राम स्तरीय निगरानी व्यवस्था पर विचार रखे गए। महिला प्रतिनिधियों ने संचालन, राजस्व प्रबंधन और गुणवत्ता परीक्षण में अपनी भूमिका और अनुभव साझा किये। “जल-वाणी” विषयक पैनल चर्चा में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में सामुदायिक रेडियो प्लेटफॉर्म के माध्यम से स्थानीय बोलियों में जल साक्षरता के प्रसार की रणनीति पर विस्तृत चर्चा हुई। कार्यशाला में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग एवं मध्यप्रदेश जल निगम के राज्य स्तरीय अधिकारी, प्रमुख अभियंता, मुख्य अभियंता, अधीक्षण यंत्री, कार्यपालन यंत्री, उपयंत्री, गुणवत्ता मॉनिटरिंग अधिकारी, जिला एवं खंड स्तरीय प्रतिनिधि, ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों के सदस्य, सरपंच, पंप ऑपरेटर, स्व-सहायता समूह, ग्रामीण प्रतिनिधि तथा विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों के विद्यार्थी उपस्थित रहे। मंत्री  उइके ने कार्यशाला में उपस्थित जन समूह को सुरक्षित, नियमित और सतत जल आपूर्ति सुनिश्चित करने की शपथ दिलाई।