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बीजापुरी नंबर-1 में काष्ठ शिल्पियों के कार्यों का शहडोल संभाग की कमिश्नर ने लिया जायजा

बीजापुरी नंबर-1 में काष्ठ शिल्पियों के कार्यों का शहडोल संभाग की कमिश्नर ने लिया जायजा  अनूपपुर  कमिश्नर शहडोल संभाग श्रीमती सुरभि गुप्ता ने जनपद पंचायत पुष्पराजगढ़ के ग्राम बीजापुरी नंबर-1 में स्थित कारीगर वर्कशॉप का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने काष्ठ शिल्पियों द्वारा किए जा रहे कार्यों का अवलोकन कर कलाकारों से उनके कार्यों और आवश्यकताओं के संबंध में जानकारी प्राप्त की। निरीक्षण के दौरान कमिश्नर ने मौके पर उपस्थित ग्रामीण यांत्रिकी सेवा के कार्यपालन यंत्री तथा ग्रामीण आजीविका मिशन के जिला प्रबंधक से कारीगर वर्कशॉप के विकास कार्यों की प्रगति के बारे में जानकारी ली। उन्होंने बताया कि दो बड़े टीन शेड के निर्माण, सामग्री प्रदर्शन हेतु शोकेस और अलमारी की व्यवस्था, पेयजल सुविधा, विद्युत का थ्री-फेज कनेक्शन तथा परिसर की सुरक्षा के लिए बाउंड्रीवाल निर्माण हेतु प्राक्कलन तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। भ्रमण के दौरान जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्रीमती अर्चना कुमारी, ग्रामीण यांत्रिकी सेवा विभाग के कार्यपालन यंत्री श्री अमर साय राम, ग्रामीण आजीविका मिशन के जिला प्रबंधक श्री दशरथ झारिया तथा सहायक खंड प्रबंधक श्री संदीप शर्मा उपस्थित रहे।

लटकते तारों और जर्जर बाउंड्री के बीच पढ़ाई को मजबूर नन्हे कदम

राजेन्द्रग्राम/छबिलाल तहसील पुष्पराजगढ़ मुख्यालय से लगभग 40 किलोमीटर दूर स्थित पाला डिगवार का शासकीय प्राथमिक विद्यालय इन दिनों बुनियादी सुविधाओं के अभाव में जूझ रहा है। कक्षा पहली से पांचवीं तक अध्ययनरत 48 मासूम विद्यार्थी खतरे के साये में शिक्षा ग्रहण करने को मजबूर हैं। विद्यालय परिसर में लगे विद्युत ट्रांसफॉर्मर के तार जमीन पर लटक रहे हैं, जिससे विशेषकर बरसात या जमीन गीली होने की स्थिति में करंट फैलने का खतरा बना रहता है। बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर आशंका के बावजूद जिम्मेदार विभाग मौन नजर आ रहे हैं। हाल ही में पंचायत द्वारा विद्यालय की बाउंड्री वॉल का निर्माण कराया गया, लेकिन निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। दीवारों में जगह-जगह दरारें और छेद दिखाई दे रहे हैं तथा बिना रिंग के खंभे तैयार कर बाउंड्री खड़ी कर दी गई है। लगभग पंद्रह दिन पूर्व कार्य पूर्ण बताकर इसे विद्यालय को सौंप दिया गया, किंतु स्थिति ऐसी है मानो अधूरा काम छोड़ दिया गया हो। कमजोर निर्माण के कारण जहरीले जीव-जंतुओं के प्रवेश का खतरा भी बना हुआ है, जिससे छोटे बच्चों की सुरक्षा को लेकर अभिभावकों में चिंता व्याप्त है। विद्यालय परिसर में लगे हैंडपंप के लिए सोख्ता गड्ढा नहीं बनाए जाने से पानी पूरे बाउंड्री क्षेत्र में फैल जाता है और जलभराव की स्थिति निर्मित हो जाती है। बच्चे इसी परिसर में खेलते हैं, जहां नीचे पानी भरा रहता है और ऊपर बिजली के तार लटक रहे हैं, जिससे खतरा और बढ़ जाता है। विद्यालय के शिक्षक इंद्र सिंह राजपूत के अनुसार स्कूल में अब तक किचन सेट का निर्माण नहीं हो पाया है, जिससे मध्यान्ह भोजन व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर कब तक नन्हे विद्यार्थी मूलभूत सुविधाओं और सुरक्षा के अभाव में पढ़ाई करने को मजबूर रहेंगे और जिम्मेदार अधिकारी इस ओर कब ध्यान देंगे।

विधानसभा में मंत्री विजयवर्गीय का बड़ा बयान: अवैध कॉलोनियों के खिलाफ जल्द होगा कड़ा कदम

भोपाल ध्य प्रदेश की विधानसभा में नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने  अवैध कॉलोनियों को लेकर बड़ी घोषणा की। सीधी विधायक रीति पाठक के प्रश्न काल में पूछे सवाल के जवाब में मंत्री ने कहा कि अब अवैध कॉलोनियों पर कड़ा कानून लागू किया जाएगा। दोषियों के खिलाफ तेज कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि प्रदेश में तीन महीने के भीतर सख्त नियम लागू होंगे।   विजयवर्गीय ने सीधी जिले के सवाल पर कहा कि सरकार ने शहर के पुराने बस स्टैंड को गिराकर नया शॉपिंग कॉम्प्लेक्स बनाने के लिए लगभग 7 करोड़ रुपए की राशि पहले ही स्वीकृत कर दी थी। विकास कार्य में देरी के कारण मंत्री ने बताया कि निविदा प्रक्रिया में समय लगने के कारण अभी तक कार्य प्रारंभ नहीं हो सका है, लेकिन इसे जल्द ही शुरू करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाये जा रहे हैं। मंत्री ने आश्वासन दिया कि शॉपिंग कॉम्प्लेक्स निर्माण का काम अगले कुछ महीनों में प्रारंभ कर दिया जाएगा। अवैध कॉलोनियों पर सख्त रुख सीधी नगरपालिका क्षेत्र में पिछले तीन वर्षों में बिना रेरा (RERA) रजिस्ट्रेशन के कई अवैध कॉलोनियों का निर्माण हुआ है। मंत्री कैलाश विजयवर्गीइसके अलावा, जिन अवैध कॉलोनियों को वैध किया जा सकता है, उन पर विचार किया जाएगा और जो वैध नहीं हो सकतीं, उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि  सीवर लाइन निर्माण परियोजना सीधी नगरपालिका क्षेत्र के लिए लंबे समय से मांग की जा रही सीवर लाइन निर्माण परियोजना की प्रशासकीय स्वीकृति जल्द ही जारी कर दी जाएगी। मंत्री ने बताया कि यह परियोजना शहरवासियों के लिए जीवन स्तर सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। विधायक ने किया इस एलान का स्वागत सीधी विधायक रीति पाठक ने मंत्री के इस एलान का स्वागत करते हुए कहा कि इससे न केवल शहर का विकास होगा, बल्कि अवैध कॉलोनियों की समस्या पर भी सख्त कदम उठाए जाने से नागरिकों को राहत मिलेगी। 

ग्रामीण अंचलों में वर्षों पुरानी ‘बर्तन प्रथा’ बंद, होली पर नियमों का उल्लंघन करने पर जुर्माना

भोपाल  चंद्रवंशी खाती समाज ने सामाजिक सुधार की दिशा में एक बड़ा और साहसिक कदम उठाया है. ग्राम पंचायत खेरी स्थित हनुमान मंदिर में समाज की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि होली के पर्व पर बरसों से चली आ रही 'बर्तन प्रथा' को अब पूरी तरह समाप्त किया जाएगा. समाज के इस निर्णय का उल्लंघन करने वाले परिवार पर 5000 रुपये का आर्थिक दंड लगाने का प्रावधान भी किया गया है. फिजूलखर्ची रोकने के लिए कड़ा फैसला बैठक में ग्राम खेरी के सरपंच प्रतिनिधि धनपाल सिंह वर्मा गांव के पटेल मेहरबान सिंह वर्मा के नेतृत्व में समाज के वरिष्ठजनों और प्रबुद्ध नागरिकों ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि त्योहारों के नाम पर बढ़ती फिजूलखर्ची और उपहारों के लेन-देन की प्रतिस्पर्धा से गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ता है. 'बर्तन प्रथा' जैसी कुरीतियां समाज में भेदभाव पैदा करती हैं. इसी को ध्यान में रखते हुए समाज ने अब इस पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है.  क्या है 'बर्तन प्रथा'? ग्रामीण अंचलों में विशेषकर होली या दीपावली जैसे बड़े त्योहारों पर, शादीशुदा बेटियों और बहनों के घर (ससुराल) जाकर उन्हें उपहार देने की परंपरा रही है. इस परंपरा में कपड़ों और मिठाई के साथ-साथ पीतल, तांबे या स्टील के बर्तनों का सेट (जैसे थाली, लोटा, बाल्टी या कड़ाही) भेंट करना अनिवार्य माना जाने लगा. इसी लेन-देन की प्रक्रिया को 'बर्तन प्रथा' कहा जाता है. समाज में यह एक तरह की होड़ बन गई कि कौन कितने कीमती और बड़े बर्तन देता है. लोग अपनी आर्थिक स्थिति से बाहर जाकर दिखावा करने लगे. आर्थिक दबाव: मध्यम और गरीब परिवारों के लिए हर साल होली पर महंगे बर्तन खरीदना एक बड़ा वित्तीय बोझ बन गया. कई बार इसके लिए कर्ज तक लेना पड़ता था. ससुराल में अपमान का डर: यदि कोई परिवार कम बर्तन देता या साधारण बर्तन ले जाता, तो अक्सर बहू-बेटियों को ससुराल में ताने सुनने पड़ते थे. ग्रामीणों ने किया फैसले का स्वागत ग्राम पंचायत खेरी के इस निर्णय की आसपास के क्षेत्रों में भी सराहना हो रही है. ग्रामीणों का मानना है कि इस प्रकार के कड़े निर्णयों से न केवल समाज में समानता आएगी, बल्कि युवाओं को भी फिजूलखर्ची से दूर रहने की प्रेरणा मिलेगी. समाज के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जुर्माने की राशि का उपयोग समाज के सामूहिक कार्यों और विकास में किया जाएगा. ग्रामीणों का कहना है कि समाज के विकास के लिए पुरानी और बोझिल परंपराओं को त्यागना आवश्यक है. होली खुशियों का त्योहार है, इसे सादगी और प्रेम से मनाया जाना चाहिए. यह फैसला समाज के हर वर्ग के हित में लिया गया है.

कक्षा 1 से 12वीं तक मप्र में सरकारी स्कूलों के नामांकन में लगातार गिरावट दर्ज

भोपाल  मप्र के सरकारी स्कूलों में बच्चों का नामांकन लगातार कम हो रहा है। 2015-16 से 2024-25 के बीच कक्षा 1 से 12वीं तक के नामांकन में 22.03 लाख तक कमी दर्ज की गई है। विधायक प्रताप ग्रेवाल के सवाल पर स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने बताया कि नामांकन में गिरावट की वैज्ञानिक जांच के लिए 8 मई 2025 को 'अटल बिहारी सुशासन संस्थान' को पत्र लिखा गया था। हैरानी की बात यह है कि विभाग द्वारा रिमाइंडर के बावजूद 10 महीने बीत जाने पर भी संस्थान ने अब तक कार्ययोजना पेश नहीं की है। विपक्ष ने आरोप लगाया है कि विभाग 'कागजी छात्र' दिखाकर अपनी पीठ थपथपा रहा है और असली आंकड़ों को छिपाकर हजारों करोड़ का भ्रष्टाचार किया जा रहा है। दस साल में 22 लाख बच्चों ने पढ़ाई छोड़ी जीतू पटवारी ने कहा है कि पिछले 10 सालों में सरकारी स्कूलों से 22 लाख से अधिक बच्चे पढ़ाई छोड़ चुके हैं, जिससे नामांकन में भारी गिरावट आई है। उन्होंने इसे सरकार की शिक्षा नीति की पूरी नाकामी करार देते हुए दावा किया कि जहां दुनिया के विकसित देशों में बच्चे अंतरिक्ष और मंगल ग्रह पर पानी की खोज कर रहे हैं, वहीं मध्यप्रदेश के सरकारी स्कूलों में बच्चे बुनियादी सुविधाओं जैसे शिक्षक, ब्लैकबोर्ड, किताबें और ठीक-ठाक भवन ढूंढने को मजबूर हैं। जीतू पटवारी ने सरकार से किए सवाल बता दें कि विधानसभा में कांग्रेस विधायक प्रताप ग्रेवाल के सवाल के जवाब में स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने जानकारी दी है कि 2015-16 से 2024-25 के बीच कक्षा एक से लेकर बारहवीं तक के स्टूडेंट्स के नामांकन में 22.03 लाख की कमी आई है। इसे लेकर पिछले साल मई में सरकार ने अटल बिहारी सुशासन संस्थान को पत्र लिखकर नामांकन मे गिरावट की वैज्ञानिक जांच करने को कहा था। लेकिन लगभग दस महीने बीत जाने पर भी संस्थान की तरफ से इसे लेकर कोई एक्शन प्लान प्रस्तुत नहीं किया गया है जबकि इस बीच स्कूल शिक्षा विभाग उन्हें रिमाइंडर भी दे चुका है। इसी मामले पर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इन बच्चों को “लापता” की श्रेणी में रखते हुए सरकार से सवाल किया कि इतने बड़े पैमाने पर बच्चे स्कूल क्यों छोड़ रहे हैं। उन्होंने कहा है कि ‘प्रदेश में लाड़ली बहनें लापता होने के बाद अब स्कूल के बच्चे भी लापता हो रहे हैं।’ विपक्ष का आरोप है कि गिरावट का खेल साल 2008-09 से ही शुरू हो गया था, लेकिन सरकार केवल 2015-16 के बाद के समय की जांच करा रही है। आंकड़ों के अनुसार, 2008 से 2015 के बीच ही 40.62 लाख बच्चे कम हो चुके थे, जिसे जांच में शामिल नहीं किया गया है। विधायक ने इस पूरे मामले को शिक्षा के नाम पर हो रहे बड़े 'घोटाले' से जोड़ते हुए इसकी सीबीआई जांच और सरकार से श्वेत पत्र जारी करने की मांग की है। एक साल में ही एक लाख छात्रों का अंतर… जानकारी में सबसे बड़ा खुलासा आंकड़ों की विसंगति को लेकर हुआ है। जानकारी में सामने आई अलग-अलग सूचियों में छात्र संख्या मेल नहीं खा रही है। वर्ष 2015-16 के लिए ही एक सूची में संख्या 22.62 लाख है, तो दूसरी में 23.57 लाख बताई गई है। एक ही साल के डेटा में एक लाख बच्चों का अंतर आया है। आंकड़े छिपाकर करोड़ों का भ्रष्टाचार हैरानी की बात यह है कि विभाग ने बार-बार संस्थान को याद दिलाया है। इसके बाद भी 10 महीने से ज्यादा का वक्त गुजरने के बाद भी संस्थान ने अब तक अपनी योजना नहीं दी है। विपक्ष का कहना है कि विभाग सिर्फ कागजों पर काम दिखाकर वाह-वाही लूट रहा है। असली आंकड़े छिपा कर हजारों करोड़ का भ्रष्टाचार किया जा रहा है। शिक्षा के नाम पर हो रहा घोटाले विपक्ष का कहना है कि बच्चों की संख्या में गिरावट का सिलसिला 2008-09 से ही शुरू हुआ था। सरकार केवल 2015-16 के बाद के आंकड़ों की ही जांच कर रही है। आंकड़ों के मुताबिक 2008 से 2015 तक ही 40.62 लाख बच्चे कम हो गए थे। इस पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। विधायक ने इस मुद्दे को शिक्षा के नाम पर हो रहे बड़े घोटाले से जोड़ा है। साथ ही सीबीआई से जांच कराने और सरकार से श्वेत पत्र* जारी करने की मांग की है। एक साल में एक लाख बच्चों का फर्क जानकारी में एक बड़ा खुलासा हुआ है जो आंकड़ों की गलती को लेकर है। अलग-अलग सूचियों में बच्चों की संख्या मैच नहीं कर रही है। जैसे कि 2015-16 के लिए एक सूची में 22.62 लाख बच्चों की संख्या दी गई है। वहीं दूसरी सूची में यह संख्या 23.57 लाख बताई गई है। यानी एक ही साल के आंकड़ों में एक लाख बच्चों का फर्क है।     *श्वेत पत्र क्या होता है।     श्वेत पत्र एक तरह का दस्तावेज होता है, जिसे किसी खास समस्या को समझने या उसका समाधान बताने के लिए तैयार किया जाता है। ये दस्तावेज सरकार, कंपनियां या गैर-लाभकारी संगठन उस मुद्दे पर अपने विचार और आंकड़े लोगों तक पहुंचाने के लिए जारी करते हैं। इसमें किसी नीति या समस्या का विश्लेषण किया जाता है, और अक्सर इसमें कोई समाधान या सुझाव भी दिए जाते हैं।     इस दस्तावेज को 'श्वेत पत्र' इसलिए कहा जाता है क्योंकि पहले इसके कवर का रंग सफेद होता था। यह दस्तावेज सार्वजनिक जानकारी और पारदर्शिता को दिखाता है, यानी कि यह जानकारी लोगों के लिए खुली होती है।

आस्था का महाकुंभ: रतलाम के शीतलतीर्थ कैलाश पर्वत पर आदिनाथ भगवान का महामस्तकाभिषेक आयोजित

रतलाम शहर के शीतलतीर्थ में कैलाश पर्वत पर 18 फीट पद्मासन आदिनाथ भगवान का महामस्तकाभिषेक पंचकल्याण का द्वितीय वार्षिकोत्सव 1 मार्च को होने जा रहा हैं। इसमें शामिल होने के लिए सम्पूर्ण भारत से आने वाले गुरु भक्तों के लिए कलश आवंटन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी हैं। इस आयोजन के लिए 28 फरवरी को श्रुत संवेगी मुनि आदित्य सागर का ससंघ मंगल प्रवेश होगा। आचार्य योगेंद्र सागर का अवतरण दिवस सैलाना रोड स्थित शीतल तीर्थ धामनोद में गुरु भक्तों ने मनाया। धामनोद के शीतल तीर्थ में आयोजित विनयांजलि सभा में क्षेत्र अधिष्ठात्री डॉ. सविता जैन दीदी ने सभी आगंतुकों का अभिवादन करते हुए कहा कि गुरुदेव आज प्रत्यक्ष हमारे बीच नहीं है, गुरुभक्तों की श्रद्धा में आज भी गुरुदेव बसे हुए है और यही कारण है कि प्रत्येक वर्ष गुरुदेव के अवतरण दिवस पर बिना किसी निमंत्रण के गुरुभक्तों का समूह शीतल तीर्थ पर एकत्रित होता है। सही मायने में तो यह अमृत महोत्सव योगी परिवार का शाश्वत पर्व बन गया है। वृद्धों की सेवा-300 गोवंश की सार संभाल होती विख्यात गणितज्ञ जैन मनीषी डॉ. अनुपम जैन इंदौर ने बताया कि समाधिस्थ आचार्य चतुर्थ पट्टाधीश योगीन्द्र सागर गुरुदेव की प्रेरणा से रतलाम के धामनोद में सन् 2009 में शीतल तीर्थ की नींव रखी गई। तभी से गुरुभक्तों का जुड़ाव इस क्षेत्र से हो गया, आज यहां त्यागी वृत्तियों एवं वृद्धों की सेवा के साथ लगभग 300 की संख्या में गोवंश की सार संभाल की जाती है । आज भी इस क्षेत्र पर अतिशय होते हैं। डॉ. भरत जैन ने भी गुरुदेव के निर्भीक व्यक्तित्व के संस्मरण बताए। गुरुदेव का अवतरण दिवस 17 फरवरी को बड़े उल्लास के साथ मनाया जाता है । इस वर्ष आयोजित कार्यक्रम में क्षुल्लिका 105 चंद्रमति माता धार एवं स्वस्ति भट्टारक अरिहंत कीर्ति का भी मंगल सानिध्य प्राप्त हुआ। गुरु प्रतिमा पर जल एवं दुग्ध से अभिषेक तीर्थ प्रवक्ता राकेश पोरवाल ने बताया कि प्रात: काल श्रीक्षेत्र पर कोटा के आदिश महिला दिव्य घोष द्वारा भट्टारक स्वामी की मंगल आगवानी की गई । गुरु मंदिर में अतिशय कारी चैत्यालय का पंचामृत अभिषेक एवं गुरु प्रतिमा पर जल एवं दुग्ध से अभिषेक हुआ, जिसके बाद ऋषि मंडल विधान आयोजित हुआ। विनयांजलि सभा में मुख्य अतिथि रतलाम भाजपा अध्यक्ष प्रदीप उपाध्याय ने कहा कि आचार्य योगीन्द्रसागर महाराज सिर्फ जैन समाज ही नहीं अपितु सर्वधर्म के अनुयायियों में लोकप्रिय संत थे।। नेशनल नॉन वायलेंस यूनिटी फाउण्डेशन ट्रस्ट के अध्यक्ष महेन्द्र गुड़वाले (कोटा) द्वारा सभी आगंतुकों का आभार माना। इस अवसर पर भक्तों द्वारा तीर्थ अधिष्ठात्री डॉ. सविता जैन दीदी का सम्मान पत्र भेंट कर सम्मान किया गया। संचालन राकेश जैन ने किया।

लाड़ली बहना योजना पर ताजातरीन खबर: लाखों बहनों के नाम कटे, मंत्री ने बताया कारण

भोपाल  मध्य प्रदेश की चर्चित योजना लाड़ली बहना योजना एक बार फिर सियासी तूफान के बीच आ गई है। विधानसभा में कांग्रेस विधायक महेश परमार ने सरकार को घेरते हुए बड़ा सवाल उठाया कि योजना से लगातार बहनों के नाम काटे जा रहे हैं और नए पंजीयन पूरी तरह बंद पड़े हैं। वहीं महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने सदन में लिखित जवाब देते हुए चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए। मंत्री के मुताबिक, पहले योजना में 1 करोड़ 31 लाख 6 हजार 525 बहनें पंजीकृत थीं, जो अब घटकर 1 करोड़ 25 लाख 29 हजार 51 रह गई हैं। यानी अब तक 5 लाख 77 हजार 474 बहनों के नाम काटे जा चुके हैं। 60 साल की उम्र होते ही लाडली बहना योजना से कट जाता है महिलाओं का नाम मध्य प्रदेश में लाडली बहना योजना का लाभ 60 साल की उम्र तक की महिलाओं को दिया जाता है. अब बड़ी विडंबना यह है कि जैसे ही इस योजना की पात्र महिलाएं 60 साल की होती हैं. सिस्टम अपने आप लाभार्थी का नाम हटा देता है. इसके बाद यह महिला वृद्धावस्था पेंशन का लाभ ले सकती हैं, लेकिन मौजूदा समय में लाडली बहनों को ₹1500 की राशि दी जा रही है और पेंशन के तहत मात्र ₹600 मिलते हैं. ऐसे में बुजुर्ग महिलाओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती इतने कम पैसे में अपना गुजारा करने की होती है. देखा जाए तो 60 वर्ष की उम्र होते ही सीधे ₹900 प्रति माह की राशि में कटौती हो जाती है. लाडली बहन योजना का लाभ नहीं ले पा रही बहनों के बीच जब न्यूज 18 की टीम पहुंची, तो उन्होंने अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि कई महीने से उनका नाम कटा हुआ है लाडली बहन योजना के पैसे नहीं मिल रहे हैं. वृद्धावस्था पेंशन भी नहीं मिल रही है और कई महिलाओं के घर में दिव्यांग बच्चे हैं उनके पास भी कोई सहायता राशि नहीं आ रही है. कांग्रेस विधायक सतीश सिकरवार ने साधा निशाना महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने विधानसभा में कांग्रेस विधायकों के सवालों के लिखित जवाब में यह जानकारी दी. उन्होंने स्पष्ट किया कि 10 अगस्त 2023 के बाद कोई नया पंजीयन नहीं किया गया है और वर्तमान में नए पंजीयन शुरू करने का कोई प्रस्ताव सरकार के पास विचाराधीन नहीं है. राशि बढ़ाने को लेकर भी कोई प्रस्ताव लंबित नहीं है. कांग्रेस विधायक सतीश सिकरवार ने कहा कि मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार ने बहनों से जो वादा किया था वो नहीं निभा रही है. न तो 3 हजार दे रहे हैं और न नए नाम जोड़ रहे हैं. भाजपा प्रवक्ता ईशान जैन ने कही ये बात लाडली बहन योजना को लेकर जारी सियासत और महिलाओं के सवाल पर भाजपा प्रवक्ता ईशान जैन ने कहा कि योजना की शर्तों के अनुसार सभी बहनों को लाभ दिया जा रहा है. हमारी सरकार सबका ध्यान रखती है. आंकड़ों के अनुसार योजना की शुरुआत में पंजीकृत महिलाओं की संख्या 1 करोड़ 31 लाख 6 हजार 525 थी, जो अब घटकर 1 करोड़ 25 लाख 29 हजार 51 रह गई है. सरकार का कहना है कि 60 वर्ष की आयु पूरी करने पर कई महिलाओं के नाम सूची से हटे हैं, जिसके कारण संख्या में कमी आई है. विधानसभा में लाडली बहना योजना की लाभार्थियों की आयु वर्ग अनुसार स्थिति भी सामने आई है. 55 से 60 वर्ष आयु वर्ग में 7.89 लाख, 35 से 55 वर्ष में 71.63 लाख, 23 से 35 वर्ष में 45.26 लाख महिलाएं लाभ ले रही हैं. इधर, 25,395 महिलाओं का भुगतान समग्र आईडी डिलीट होने के कारण फिलहाल बंद है. सरकार का कहना है कि समग्र आईडी पुनः सक्रिय होने पर भुगतान फिर से शुरू किया जाएगा. विधानसभा में इस मुद्दे पर राजनीतिक घमासान भी देखने को मिला. कांग्रेस ने नए पंजीयन शुरू करने और पात्र महिलाओं को योजना से जोड़ने की मांग की. विपक्ष का आरोप है कि जब नए पंजीयन नहीं हो रहे, तो कुछ जिलों में लाभार्थियों की संख्या बढ़ने के दावे कैसे किए जा रहे हैं. लाडली बहना योजना राज्य सरकार की प्रमुख सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में से एक है. ऐसे में लाभार्थियों की घटती संख्या और भुगतान अटकने का मुद्दा सियासी बहस का केंद्र बन चुका है. नाम कटने की बड़ी वजहें क्या हैं? मंत्री ने साफ कहा कि बहनों के नाम कटने के प्रमुख कारण ये हैं: 60 साल की उम्र पूरी होना (इसके बाद योजना की पात्रता खत्म) लाभार्थी की मृत्यु ,अन्य अपात्रता सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, सिर्फ 60 साल की उम्र पार करने के कारण 1.51 लाख से ज्यादा महिलाएं योजना से बाहर हो चुकी हैं। विपक्ष का बड़ा आरोप कांग्रेस विधायक महेश परमार ने आरोप लगाया कि नाम कटने का सिलसिला लगातार जारी है, जबकि नए पंजीयन बंद हैं। उन्होंने कहा कि 60 साल पूरे होते ही लाड़ली बहना की राशि बंद हो जाती है और दूसरी पेंशन योजनाओं में सिर्फ 600 रुपये महीना मिलता है। बजट में योजना की राशि 3000 रुपये करने का वादा भी अधूरा रह गया है। सवालों के घेरे में सरकार लाखों बहनों के नाम कटने के बाद अब सवाल उठ रहा है कि: क्या भविष्य में नए पंजीयन शुरू होंगे? जिन बहनों के नाम कटे, उनके लिए कोई वैकल्पिक राहत योजना आएगी? 3000 रुपये की घोषणा सिर्फ चुनावी जुमला थी या कभी लागू होगी? इस मुद्दे ने विधानसभा से लेकर सड़कों तक सियासी गर्मी बढ़ा दी है। आने वाले दिनों में लाड़ली बहना योजना पर सरकार को और जवाब देने पड़ सकते हैं।

87 शराब दुकानों से 1432 करोड़ का लक्ष्य, कीमतें बढ़ सकती हैं, ड्यूटी नहीं बढ़ेगी, ठेकों को मुनाफे के लिए खपत बढ़ानी होगी

भोपाल  अबकी बार भोपाल की 87 शराब ठेकों से सरकार को 239 करोड़ रुपए या इससे ज्यादा मिल सकते हैं। पिछले साल रिजर्व प्राइस (आरपी) 1073 करोड़ रुपए थी, जबकि उच्चतम ऑफर राशि 1139 करोड़ रुपए मिली थी। इस बार रिजर्व प्राइस ही 1432 करोड़ रुपए रखी गई है। 2 मार्च को 29 दुकानों की नीलामी होगी। बता दें कि राज्य सरकार ने नई आबकारी नीति लागू कर दी है। नई व्यवस्था में शराब दुकानों को छोटे-छोटे समूहों में बांटा गया है। भोपाल की 87 दुकानों को 20 ग्रुप में बांटा है। जिनके आवंटन की प्रक्रिया ई-टेंडर के जरिए होगी। इनमें से 7 ग्रुप की 29 दुकानों के लिए पहले फेज में टेंडर की प्रोसेस शुरू की गई है। 2 मार्च को सुबह 10.30 से दोपहर 2 बजे तक टेंडर सबमिट होंगे। इसी दिन शाम 6 बजे से डिस्ट्रिक कमेटी की मौजूदगी में टेंडर खोलने की कार्रवाई होगी। इन ग्रुपों के लिए प्रक्रिया बागसेवनिया ग्रुप की 5 दुकान, हबीबगंज फाटक ग्रुप की 4 दुकान, भानपुर चौराहा ग्रुप की 5 दुकान, स्टेशन बजरिया ग्रुप की 5 दुकान, खजूरीकलां ग्रुप की 3 दुकान, जहांगीराबाद ग्रुप की 4 दुकान और गुनगा ग्रुप की 3 दुकानों के लिए यह टेंडर प्रक्रिया की जा रही है। 20% बढ़ी ठेके की कीमत वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए नीलामी की प्रक्रिया में ठेके 1193 करोड़ रुपए से ज्यादा में हुए थे, जो टारगेट से 11 प्रतिशत यानी, 120 करोड़ रुपए अधिक थे। इस बार 1432 करोड़ रुपए रिजर्व प्राइस रखी गई है। बता दें कि वर्तमान मूल्य में 20 प्रतिशत बढ़ोतरी कर आरक्षित मूल्य तय किया गया है। इसका असर अब समूहों की कीमतों पर दिखने लगा है। भोपाल में इस बार सबसे महंगा समूह पिपलानी का है। इसमें 4 दुकानें – पिपलानी, अयोध्या नगर, रत्नागिरी तिराहा और पटेल नगर हैं। 20 फीसदी आरक्षित मूल्य बढ़ने के बाद इस समूह की कीमत 127 करोड़ 77 लाख 60 हजार 551 रुपए हो गई है। इससे पहले वर्ष 2025-26 में इन दुकानों का वार्षिक मूल्य 106 करोड़ 48 लाख से ज्यादा था। इसी तरह बागसेवनिया समूह की कीमत करीब 101 करोड़ से बढ़कर 121 करोड़ 89 लाख से ज्यादा हो गई है। आबकारी विभाग के अधिकारियों का कहना है कि नीति में किए गए बदलावों के आधार पर ही ई-टेंडर के जरिए दुकानों का आवंटन होगा। छोटे समूह बनाए जाने से ज्यादा बोलीदाता सामने आएंगे व सरकार को फायदा मिलेगा। इससे नए लोगों को भी भागीदारी का मौका मिलेगा। 239 करोड़ रुपए ज्यादा मिलेंगे विभाग की माने तो नई व्यवस्था से सरकार के खजाने में सीधे 238 करोड़ रुपए ज्यादा मिलेंगे। टेंडर फाइनल होने के बाद यह आंकड़ा और बढ़ सकता है। होटल-बार के लाइसेंस की शर्तों में होगा बदलाव पहले यह थी व्यवस्था     अब तक ज्यादातर जिलों में सिंगल टेंडर के जरिए ठेके दिए गए थे।     प्रदेश में करीब 3500 शराब दुकानें हैं और इनका संचालन लगभग 600 से अधिक समूहों में होता रहा है। बड़े समूहों की वजह से सीमित कंपनियां ही टेंडर प्रक्रिया में हिस्सा ले पाती थीं।     भोपाल का उदाहरण देखें तो यहां 87 शराब दुकानें हैं। इन पर 4 कंपनियों का कब्जा है। यह बदलाव हो सकता है     अब 2 से 5 दुकानों के छोटे समूह बनाए जाएंगे।     प्रदेश में करीब 1,000 समूह बनने की संभावना है।     भोपाल में 25 से 30 समूह बन सकते हैं।     टेंडर के जरिए ठेके दिए जाएंगे।     हाेटल-बार और रेस्तरां बार के लाइसेंस की शर्तों में बदलाव किया जाएगा। होटल-बार में पहले 20 कमरों की संख्या काे घटाकर 10 किया जा सकता है। ठेकों के टेंडर रेंडमाइजेशन सिस्टम से होंगे नई नीति में पहली बार शराब ठेकों के टेंडर रेंडमाइजेशन सिस्टम से होंगे। कौन-सा समूह पहले खुलेगा, यह कंप्यूटराइज्ड ड्रॉ से तय होगा। पहले सभी टेंडर एक साथ जारी होते थे, अब क्रमवार प्रक्रिया अपनाई जाएगी। नई दुकानें या अहाते नहीं खुलेंगे, मौजूदा ढांचे में ही ठेके दिए जाएंगे। सरकार फिलहाल आबकारी ड्यूटी बढ़ाने के पक्ष में नहीं है। पिछले साल के मुकाबले अंग्रेजी की खपत ज्यादा भोपाल में शराब से राज्य सरकार को अब तक करीब 1,015 करोड़ का राजस्व मिल चुका है। बिक्री के आंकड़ों में बढ़ोतरी दिखी है। पिछले साल जहां करीब 1,300 करोड़ रुपए की शराब बिकी थी, वहीं इस साल यह आंकड़ा 1,800 करोड़ पार कर चुका है, यानी करीब 500 करोड़ की वृद्धि। वहीं देशी शराब की खपत 61% घटकर 71.31 लाख प्रूफ लीटर से 27.63 लाख पर आ गई। इसके उलट विदेशी शराब 55% बढ़कर 45.07 लाख से 70.26 लाख प्रूफ लीटर पहुंच गई। बीयर की खपत भी बढ़ी है। सिंगल टेंडर की जगह मल्टी-ग्रुप मॉडल लागू होगा सरकार का मानना है कि छोटे समूह बनने से अधिक प्रतिस्पर्धा होगी और ओवरचार्जिंग की शिकायतें कम होंगी। सिंगल टेंडर व्यवस्था में ओवरचार्जिंग की शिकायतें बढ़ी थीं।

कूनो नेशनल पार्क में 8 चीते होंगे शामिल, आज शनिवार सुबह CM मोहन यादव करेंगे स्वागत और रिलीज

 श्योपुर/ग्वालियर MP के श्योपुर जिले स्थित कूनो नेशनल पार्क में अफ्रीकी महाद्वीप से चीतों का तीसरा बड़ा जत्था भारत आ रहा है. बोत्सवाना से एयरलिफ्ट किए गए इन 8 चीतों (6 मादा और 2 नर) का स्वागत खुद मुख्यमंत्री मोहन यादव और केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव करेंगे. चीता प्रोजेक्ट डायरेक्टर उत्तम शर्मा ने बताया कि बोत्सवाना से छह मादा और दो नर चीतों का बैच शुक्रवार रात 9 बजे से 10 बजे के बीच इंडियन एयर फोर्स (IAF) के एयरक्राफ्ट से ग्वालियर के लिए उड़ान भरी।  ग्वालियर से, दो IAF हेलीकॉप्टर चीतों को कुनो नेशनल पार्क ले जाएंगे, जहां उनके शनिवार सुबह 9 बजे से 10 बजे के बीच पहुंचने की उम्मीद है. उन्होंने कहा कि बोत्सवाना से ग्वालियर तक की उड़ान का समय लगभग नौ से 10 घंटे का रहा . उन्होंने कहा कि यह अफ्रीका से आने वाला चीतों का तीसरा बैच होगा, इससे पहले नामीबिया और साउथ अफ्रीका से चीते लाए गए थे. इसके साथ ही, भारत में चीतों की संख्या बढ़कर 46 हो जाएगी. क्वारंटाइन और सुरक्षा के कड़े इंतजाम चीता प्रोजेक्ट डायरेक्टर ने कहा कि पार्क में बाड़े तैयार किए गए हैं, जहां चीते लगभग एक महीने तक क्वारंटाइन में रहेंगे. उनकी सुरक्षित लैंडिंग के लिए पार्क में 5 हेलीपैड हैं. पिछली बार की तरह, IAF चीतों को अफ्रीका से लाकर उन्हें फिर से बसाने के प्रोग्राम में मदद करेगी, ठीक वैसे ही जैसे उसने फरवरी 2023 में SA से चीते को लाते समय किया था. आबादी को 50 तक बढ़ाना लक्ष्य प्रोजेक्ट डायरेक्टर उत्तम शर्मा ने कहा कि इससे पहले, सितंबर 2022 में एक प्राइवेट जेट से 8 चीतों को नामीबिया से ग्वालियर लाया गया था, जिसके बाद IAF के हेलीकॉप्टरों ने उन्हें पार्क पहुंचाया था. और चीतों के आने से भारत का चीता रिवाइवल प्रोग्राम और मजबूत होगा. केंद्र सरकार के सपोर्ट से, हमारा मकसद जल्द से जल्द आबादी को 50 तक बढ़ाना है. पिछले साल, भारत में 12 शावकों का जन्म हुआ, हालांकि तीन शावकों समेत छह जिंदा नहीं बचे. इस साल, 7 फरवरी से 18 फरवरी के बीच, दो बार में 8 शावक पैदा हुए. KNP में 39 शावक पैदा हो चुके 2023 से KNP में कुल 39 शावक पैदा हुए हैं, जिनमें से 27 जिंदा हैं. नामीबिया में जन्मी ज्वाला और आशा, साउथ अफ्रीका में जन्मी गामिनी, वीरा और निरवा, और भारत में जन्मी मुखी, सभी ने KNP में बच्चे दिए हैं. तीन चीतों को मंदसौर जिले के गांधी सागर वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी में भेज दिया गया है, जबकि 35 अभी भी KNP में हैं. बता दें कि दुनिया का सबसे तेज जमीन पर रहने वाला जानवर चीता, भारत में लगभग सात दशक पहले खत्म हो गया था. दोबारा उसे बसाए जाने का प्रोजेक्ट चल रहा है. इसकी शुरुआत साल 2022 में कर दी गई थी. यह अफ्रीका से आने वाला चीतों का तीसरा बैच है. इससे पहले नामीबिया (2022) और दक्षिण अफ्रीका (2023) से चीते लाए गए थे.

कारों की सबसे ज्यादा बिक्री, उज्जैन मेले में टूटा रिकॉर्ड, 11 दिन में 6,662 वाहन बिके

उज्जैन बाबा महाकाल की नगरी में आयोजित उज्जैन विक्रम व्यापार मेले ने इस बार वाहन बिक्री के मामले में नया रिकॉर्ड बना डाला है। इंजीनियरिंग कॉलेज मैदान पर चल रहे इस मेले में मात्र 11 दिनों के भीतर 6,662 वाहनों की बिक्री हो चुकी है। खास बात यह है कि इनमें चारपहिया वाहनों, विशेषकर कारों की संख्या सबसे अधिक रही है। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग मोटरसाइकिल और अन्य हल्के वाहन खरीदने भी व्यापार मेले में पहुंच रहे हैं। व्यापार मेले का आयोजन विक्रमोत्सव 2026 के अंतर्गत किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशानुरूप शुरू हुए विक्रम व्यापार मेले का तृतीय आयोजन इंजीनियरिंग कॉलेज मैदान पर किया जा रहा है। क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी से मिली जानकारी के अनुसार, विक्रमोत्सव 2026 अंतर्गत आयोजित उज्जैनी विक्रमोत्सव व्यापार मेले के दौरान 15 फरवरी से 19 मार्च तक मेले में गैर-परिवहन वाहनों जैसे मोटरसाइकिल, मोटर कार, ओमनी बस और हल्के वाहनों के रजिस्ट्रेशन पर 50% की छूट मध्य प्रदेश सरकार द्वारा दी जा रही है। 25 फरवरी तक व्यापार मेले में कुल 6,662 वाहनों की बिक्री हुई है, जिसमें 1,212 दोपहिया वाहन, 5,150 चारपहिया वाहन और 300 अन्य वाहन शामिल हैं। व्यापार मेले इस बार बिके रिकॉर्ड वाहन राज्य सरकार ने उज्जैन व्यापार मेले को आकर्षक बनाने के विशेष प्रयास किए हैं। राज्य सरकार ने गैर-परिवहन श्रेणी के वाहनों-जैसे दोपहिया, कार, ओमनी बस और अन्य हल्के मोटर वाहनों-के पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट देने की घोषणा की है। यही छूट लोगों को इस व्यापार मेले से खरीदारी के लिए प्रेरित कर रही है। कम रजिस्ट्रेशन शुल्क के कारण ग्राहकों को सीधा लाभ मिल रहा है। यही वजह है कि वाहन बाजार में उत्साह का माहौल है। 25 तक बिके 5,150 चारपहिया वाहन ताजा आंकड़ों के अनुसार 25 फरवरी तक उज्जैन व्यापार मेले से कुल 6,662 वाहनों की बिक्री दर्ज की गई। इनमें 1,212 दोपहिया वाहन हैं, जबकि 5,150 चारपहिया वाहन खरीदे गए हैं। इसके अलावा 300 अन्य श्रेणी के वाहन भी बेचे गए हैं। यह संख्या बताती है कि चारपहिया वाहनों की मांग इस मेले में सबसे अधिक रही। रजिस्ट्रेशन में दी गई छूट और एक ही स्थान पर विभिन्न कंपनियों के विकल्प उपलब्ध होने से ग्राहकों को निर्णय लेने में आसानी हुई। ग्वालियर की तर्ज पर शुरु किया गया मेला उज्जैन के विक्रम व्यापार मेले की तर्ज पर ग्वालियर मेला भी प्रदेश में व्यापार और सांस्कृतिक गतिविधियों का बड़ा केंद्र माना जाता है। दोनों मेलों में वाहन, घरेलू उत्पाद और विभिन्न व्यावसायिक स्टॉल लोगों को आकर्षित करते हैं। जहां उज्जैन में रजिस्ट्रेशन छूट से वाहन बिक्री को बढ़ावा मिला है, वहीं ग्वालियर मेला भी हर साल कारोबार के नए कीर्तिमान स्थापित करता है। ग्वालियर व्यापार मेला 25 दिसंबर 2025 से शुरू होकर 25 फरवरी 2026 तक चला।