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जेपी अस्पताल में आग से हड़कंप, सुरक्षित निकाले गए मरीज; मौके पर दमकल

भोपाल।  राजधानी के प्रमुख शासकीय जय प्रकाश (जेपी) अस्पताल में बुधवार दोपहर उस समय हड़कंप मच गया, जब ओपीडी ब्लॉक की पहली मंजिल पर स्थित स्टोर रूम से अचानक आग की लपटें उठने लगीं। दोपहर में हुई इस घटना ने अस्पताल के सुरक्षा दावों की पोल खोलकर रख दी। प्लास्टिक और सर्जिकल सामान जलने से निकला काला धुआं चंद मिनटों में पूरे परिसर में फैल गया, जिससे ओपीडी में मौजूद डॉक्टर और मरीज जान बचाने के लिए बाहर की ओर भागे। करीब 45 मिनट तक अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी का माहौल बना रहा। सुरक्षा गार्ड हरिदेव का अदम्य साहस… ताला तोड़कर बुझाई आग जब आग लगी, तब स्टोर रूम का गेट बंद था और चाबी नहीं मिल पा रही थी। ऐसे में सुरक्षा गार्ड हरिदेव यादव ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए गेट का ताला तोड़ा और फायर एक्सटिंग्विशर की मदद से आग बुझाने में जुट गया। एक के बाद एक करीब आठ कंटेनर खाली करने के बाद आग पर काबू पाया जा सका। इस दौरान धुआं फेफड़ों में भरने से हरिदेव की तबीयत बिगड़ गई, जिन्हें तत्काल ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा गया। दमकल की गाड़ियां सूचना के 30 मिनट बाद पहुंचीं, तब तक गार्ड आग बुझा चुका था। लाखों के स्प्रिंकलर हुए फेल, सिस्टम का नहीं हुआ था हैंडओवर हैरानी की बात यह है कि बीते साल अस्पताल में लाखों रुपये खर्च कर लगाए गए ऑटोमैटिक वाटर स्प्रिंकलर और फायर डिटेक्शन सिस्टम ने काम ही नहीं किया। जांच में सामने आया कि अस्पताल प्रबंधन ने अब तक फायर सेफ्टी एजेंसी को सिस्टम का हैंडओवर ही नहीं दिया था, जिसके चलते आधुनिक उपकरण केवल दीवार की शोभा बढ़ा रहे थे। जेपी अस्पताल में हुई आगजनी की घटना की प्राथमिक जांच में शॉर्ट सर्किट की बात सामने आ रही है। अस्पताल में फायर सेफ्टी उपकरणों के हैंडओवर और उनके संचालन में हुई देरी को लेकर सिविल सर्जन से रिपोर्ट तलब की गई है। लापरवाही बरतने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। सभी जिला अस्पतालों को पुनः फायर ऑडिट के निर्देश दिए गए हैं। – डॉ. मनीष शर्मा, सीएमएचओ, भोपाल  

कजलीखेड़ा थाने में दर्ज हुई पहली FIR, बाहर का खाना रोकने पर बेटे ने पिता को लहूलुहान किया

 भोपाल भोपाल के कोलार क्षेत्र को विभाजित कर बनाए गए 38वें थाने 'कजलीखेड़ा' में सोमवार रात से कामकाज औपचारिक रूप से शुरू हो गया है। उद्घाटन के कुछ ही घंटों के भीतर थाने में मारपीट और सड़क दुर्घटना के दो अलग-अलग मामले दर्ज किए गए। कजलीखेड़ा थाने की डायरी में दर्ज होने वाला सबसे पहला अपराध एक पारिवारिक विवाद रहा। टावर के पास रहने वाले 45 वर्षीय जगदीश वाल्मीकि ने अपने बेटे देवा के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। विवाद की वजह बेहद मामूली थी, जहां जगदीश ने अपने बेटे को बाहर का खाना खाने से मना किया था। यह बात देवा को इतनी नागवार गुजरी कि उसने अपने पिता की बेरहमी से पिटाई कर दी और उनका सिर दीवार से टकरा दिया। सिर फटने और खून निकलने के बाद पिता ने नवगठित थाने पहुंचकर बेटे के खिलाफ केस दर्ज कराया। दूसरा मामला- तेज रफ्तार कार की टक्कर थाने में दूसरी रिपोर्ट कंप्यूटर ऑपरेटर हर्ष जैन ने दर्ज कराई। सोमवार रात करीब 9:30 बजे कोलार रोड पर उनकी खड़ी कार को एक तेज रफ्तार अज्ञात कार चालक ने पीछे से जोरदार टक्कर मार दी। इस दुर्घटना में हर्ष की कार का पिछला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। पुलिस ने अज्ञात चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।  

आत्मनिर्भर और स्वावलंबी बनाने में सक्षम शिक्षा व्यवस्था ही देश के लिए उपयुक्त

भोपाल. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि शिक्षा को जीवन के अनुभवों से जोड़ते हुए समयानुकूल बनाना आवश्यक है। व्यक्ति को आत्मनिर्भर और स्वावलंबी बनाने में सक्षम शिक्षा व्यवस्था ही देश को समृद्ध और सशक्त बनाएगी। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में लागू राष्ट्रीय शिक्षा नीति इन्हीं उद्देश्यों की प्राप्ति की दिशा में सार्थक प्रयास है। शिक्षा व्यवस्था की जटिलता को कम करना भी नीति का उद्देश्य है। प्रसन्नता का विषय है कि मध्यप्रदेश, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को लागू करने में देश में अग्रणी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव "कर्मयोगी बनें" की सर्वोच्च परामर्शदात्री समिति की एक दिवसीय कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में दीप प्रज्ज्वलित करने के साथ माँ सरस्वती के चित्र पर पुष्प अर्पित कर शुभारंभ किया। कार्यक्रम में उच्च शिक्षा मंत्री  इंदर सिंह परमार, अपर मुख्य सचिव  अनुपम राजन उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारे विश्वविद्यालय केवल डिग्री प्रदान करने के केंद्र नहीं है, राष्ट्र के भविष्य की कार्यशालाएं हैं। भगवद्गीता में कहा गया है कि कर्म को उत्कृष्टता और दक्षता के साथ करना ही योग है। आज जब हम "कर्म योगी शिक्षाविद्" की बात करते हैं, तो हम केवल एक आदर्श नहीं गढ़ रहे, बल्कि एक ऐसे शैक्षणिक वातावरण का निर्माण करना चाहते हैं, जहाँ शिक्षक केवल पाठ न पढ़ाए, बल्कि प्रेरणा दें। संस्थान नियमों के साथ उद्देश्य पूर्ति के लिये संचालित हों। विद्यार्थी केवल नौकरी न खोजें, बल्कि राष्ट्र-निर्माण में भागीदार बनें। हमें शिक्षण को अधिक प्रासंगिक और जीवन सापेक्ष बनाना होगा। अनुसंधान की सामाजिक उपयोगिता पर भी और ध्यान अपेक्षित है। डिग्री और रोजगार के बीच जो दूरी है, उसे हमें खत्म करना होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारा प्रदेश कृषि प्रधान राज्य है, इसे दृष्टिगत रखते हुए सभी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में कृषि संकाय आरंभ किया गया है। प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियों का लगातार विस्तार हो रहा है। इससे प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में स्थापित उद्योगों में अलग-अलग दक्षता वाले कर्मियों की आवश्यकता है। राज्य सरकार ऐसे क्षेत्रों में उद्योगों की आवश्यकता के अनुरूप वहां के इंजीनियरिंग कॉलेजों, पॉलिटेक्निक, आईटीआई आदि तकनीकी संस्थाओं में कोर्स आरंभ कर रही है। इससे युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे और युवा अपनी क्षमता और योग्यता का बेहतर उपयोग कर सकेंगे। इन्हीं गतिविधियों से कर्मयोगी बनने का स्वप्न साकार होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में उपलब्ध बजट को 5 वर्ष में दोगुना करने के लक्ष्य के साथ राज्य सरकार कार्य कर रही है। इस उद्देश्य की प्राप्ति के लिए चरणबद्ध रूप से पांच लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं। हर वर्ष एक क्षेत्र पर विशेष ध्यान केन्द्रित किया जा रहा है। इस क्रम में वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है। इसमें ग्रामीण अर्थव्यवस्था से सम्बद्ध 16 विभागों के लक्ष्य समग्र रूप से तय किए गए हैं। इससे किसान की आय को दोगुना करने का राज्य सरकार का संकल्प भी पूर्ण होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमें सहकर्मी संस्कृति को पुनर्जीवित करना होगा। गीता में भगवान कृष्ण कहते हैं कि अपने कर्तव्य का पालन ही श्रेष्ठ है। हमने "अभ्युदय मध्यप्रदेश" का जो संकल्प लिया है, उसमें शिक्षा केंद्रीय भूमिका निभाती है। हम यदि 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करना चाहते हैं, तो हमें विकसित विश्वविद्यालयों का निर्माण करना होगा। मध्यप्रदेश को मूल्य आधारित, गुणवत्ता संपन्न और रोजगार सक्षम शिक्षा का मॉडल राज्य बनाना हमारा लक्ष्य है। 'कर्मयोगी बने' कार्यशाला इसी दिशा में एक गंभीर और प्रतिबद्ध प्रयास है। कार्यशाला में मिशन कर्मयोगी के सदस्य प्रो. आर. बालासुब्रमणियम, जेएनयू नई दिल्ली की कुलपति प्रो. शांति धुलिपुडी पंडित, यूनाइटेड कॉन्शियसनेस के कन्वीयर डॉ. विक्रांत सिंह तोमर, आयुक्त उच्च शिक्षा  प्रबल सिपाहा, एपेक्स एडवाइजरी कमेटी के सदस्य, देश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों के कुलगुरू, कुलसचिव और शिक्षाविद उपस्थित थे।  

बम्मनगवां हादसा: सरकारी स्कूल की दीवार गिरने से कक्षा पांच के छात्र की जान गई

कटनी विजयराघवगढ़ जनपद शिक्षा केंद्र व कैमोर थाना क्षेत्र के तिलक चौक के समीप स्थित बम्हनगवां शासकीय प्राथमिक शाला में दोपहर 12 बजे हुए दर्दनाक हादसे में एक 10 वर्षीय छात्र की मौत हो गई। घटना के बाद लोगों में आक्रोश है। बताया जाता है कि रपटा स्थित एमपीईबी कार्यालय से लगी बस्ती में रहने वाला 10 वर्षीय छात्र राजकुमार बंर्मन रोज की तरह बुधवार को भी स्कूल गया था। दोपहर में स्कूल परिसर के भीतर स्थित शौचालय के समीप की बाउंड्री वॉल एकाएक भरभरा कर गिर पड़ी। मासूम छात्र इसकी चपेट में आकर गंभीर रूप से जख्मी हो गया। हादसे के बाद तत्काल एम्बुलेंस को कॉल किया गया। समय पर एम्बुलेंस नहीं मिलने से उसे ऑटो में शासकीय चिकित्सालय विजयराघवगढ़ ले जाया गया, पर उपचार शुरू होने से पहले ही छात्र ने दम तोड़ दिया। हादसे को लेकर नागरिकों में भारी आक्रोश है। पिता का भी हो चुका है निधन बताया गया कि हादसे के शिकार छात्र राजकुमार बर्मन के पिता नहीं थे। एक डेढ़ साल पहले ही बीमारी में उनका निधन हो गया था। मां लोगों के घरों में काम करके और शाम को फुल्की चाट बेचकर अपने बच्चे की परवरिश कर रही थी। विजयराघवगढ़ राजा सरयू प्रसाद मेमोरियल हॉस्पिटल में छात्र की मां और बहन का रो-रो कर बुरा हाल है। वही गुस्साए स्वजन व पड़ोस के लोगों में भारी आक्रोश है। मौके पर विजयराघवगढ़ व कैमोर थाने का पुलिस बल, एसडीएम विवेक गुप्ता, एसडीओपी वीरेंद्र धार्वे, जिला शिक्षा अधिकारी राजेश अग्रहरि, तहसीलदार मनीष शुक्ला सहित अन्य अधिकारी मौजूद हैं। स्वजनों को शव का पीएम करने के लिए समझाइश दी जा रही है लेकिन स्वजन मुआवजा राशि को लेकर अड़े हुए हैं।

एकलव्य हॉस्टल की नाबालिग छात्रा रहस्यमय ढंग से गायब, रात में भागने का दावा, पुलिस जांच तेज

शहडोल  जिले के एकलव्य आवासीय विद्यालय छात्रावास से कक्षा 11वीं की 16 वर्षीय छात्रा किसी बिना बताए चुपके से रात में कही चली गई है।सुबह हाजिरी के दौरान वार्डन को छात्रा के नहीं होने की जानकारी मिली। जानकारी के अनुसार संबंधित छात्रा के कमरे की अन्य छात्राएं छुट्टी पर थीं और वह रात में कमरे में अकेली सो रही थी। बगल के कमरे में रहने वाली एक छात्रा ने बताया कि रात करीब 10 बजे के बाद उसने छात्रा को छात्रावास परिसर में बने सेप्टिक टैंक के पाइप के सहारे नीचे उतरते देखा था। हालांकि, उसने रात में इस संबंध में किसी को सूचना नहीं दी। सुबह जब छात्रा नहीं मिली तो पूरे हड़कंप मच गया।छात्रावास की वार्डन उमंग भारद्वाज ने लिखित शिकायत सोहागपुर थाना में दर्ज कराया है। शिकायत के आधार पर पुलिस ने अपहरण का मामला दर्ज कर लिया है और छात्रा की तलाश की जा रही है। थाना प्रभारी अरुण पांडे के अनुसार प्रकरण दर्ज कर लिया गया है और संभावित स्थानों पर खोजबीन की जा रही है। छात्रावास परिसर और आसपास के क्षेत्रों की भी जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए हर पहलू पर जांच की जा रही है। उल्लेख है कि पूर्व में भी छात्रावासों से छात्राओं के भागने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिससे अभिभावकों में चिंता का माहौल है। पुलिस ने शीघ्र ही छात्रा को सकुशल बरामद करने का भरोसा दिलाया है।

मत्स्य क्षेत्र के विस्तार के लिये बजट में 412 करोड़ 89 लाख रूपये का प्रावधान

भोपाल मत्स्य विकास एवं मछुआ कल्याण मंत्री  नारायण सिंह पंवार ने बजट का स्वागत करते हुए कहा है कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में यह बजट मत्स्य क्षेत्र में 'ब्लू रिवॉल्यूशन' (नीली क्रांति) को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा। उन्होंने कहा कि बढ़ा हुआ बजट आवंटन ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने और मछुआ समुदाय के सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उप मुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री  जगदीश देवड़ा द्वारा विधानसभा में प्रस्तुत वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में गरीब कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। बजट में मत्स्य पालन और मछुआ कल्याण विभाग के लिए 412 करोड़ 89 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है। यह राशि पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में लगभग 70 करोड़ रुपये अधिक है। राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  पंवार ने बताया कि बजट में केन्द्र और राज्य की योजनाओं में संतुलन बनाया गया है ताकि अधोसंरचना का विकास तेजी से हो सके। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के लिए 181 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इससे मत्स्य पालन में आधुनिक तकनीक, कोल्ड चेन और वैल्यू एडिशन को बढ़ावा मिलेगा। राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री मछुआ समृद्धि योजना के लिए 150 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इस राशि का उपयोग मछुआरों को उपकरण वितरण, प्रशिक्षण और स्वरोजगार से जोड़ने में किया जाएगा। राज्यमंत्री  पंवार ने कहा कि सरकार के 2025-26 में किए गए नीतिगत सुधारों के सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं। दिसंबर 2025 तक प्रदेश में 3 लाख मीट्रिक टन से अधिक मत्स्य उत्पादन दर्ज किया गया है। इसके अतिरिक्त, 218 करोड़ स्टैंडर्ड फ्राई मत्स्य बीज का उत्पादन भी एक बड़ी उपलब्धि है, जो प्रदेश की बढ़ती क्षमता का परिचायक है। राज्यमंत्री  पंवार ने कहा कि नवीन बजट प्रावधानों से प्रदेश में तालाबों और जलस्रोतों का विस्तार होगा। आधुनिक तकनीक और उन्नत प्रशिक्षण के माध्यम से न केवल मछली उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि इससे जुड़े परिवारों की आय में भी ठोस वृद्धि होगी। यह बजट प्रदेश को देश में मत्स्य उत्पादन के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने में मील का पत्थर साबित होगा।  

ऊर्जा आत्मनिर्भरता से विकास को मिलेगी नई गति : मंत्री श्री शुक्ला

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में उप मुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री  जगदीश देवड़ा द्वारा विधानसभा में प्रस्तुत वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट का स्वागत करते हुए नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला ने कहा कि यह बजट प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के गरीब कल्याण, युवा, अन्नदाता, नारी शक्ति, इन्फ्रॉस्ट्रक्चर और इंडस्ट्री के सर्वांगीण विकास के संकल्प को धरातल पर साकार करने वाला है। उन्होंने कहा कि ‘रोलिंग बजट’ जैसी नवाचारी पहल से वित्तीय योजना अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और परिणामोन्मुखी बनेगी, जिससे दीर्घकालिक परियोजनाओं का सकारात्मक परिणाम मिलेगा। मंत्री शुक्ला ने बताया कि सामाजिक सुरक्षा, कृषि क्षेत्र में, औद्योगिक निवेश और अधोसंस्थनात्मक विकास के संतुलित संयोजन से प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी। महिलाओं, किसानों और युवाओं के लिए किए गए प्रावधान राज्य को आत्मनिर्भर विकास की दिशा में आगे बढ़ाएंगे। सौर ऊर्जा विस्तार और हरित अधोसंरचना को मजबूत आधार मंत्री  शुक्ला ने विशेष रूप से ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े प्रावधानों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री कृषक मित्र सूर्य योजना के अंतर्गत 343 करोड़ रुपए का प्रावधान किसानों को ऊर्जा आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे सौर ऊर्जा आधारित सौर कृषि पंपों को बढ़ावा मिलेगा। मंत्री  शुक्ला ने बताया कि प्रधानमंत्री जनमन कार्यक्रम में विद्युतीकरण कार्यों के लिए 96 करोड़ रुपए का प्रावधान दूरस्थ और वंचित क्षेत्रों तक विद्युत पहुंच सुनिश्चित करेगा। मंत्री  शुक्ला ने कहा कि यह बजट पारंपरिक ऊर्जा के साथ नवकरणीय ऊर्जा के संतुलित विस्तार का मार्ग प्रशस्त करता है। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ आर्थिक विकास को गति मिलेगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह बजट वर्ष 2047 के विकसित मध्यप्रदेश के लक्ष्य की दिशा में सशक्त आधार सिद्ध होगा।  

धुम्मा गोडरी नदी में रेत का अवैध खनन, प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल

अनूपपुर जिले के भालूमाड़ा थाना तथा फुनगा चौकी क्षेत्र अंतर्गत धुम्मा गोडरी नदी में इन दिनों अवैध रेत उत्खनन का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार एक-एक दिन छोड़कर लगातार रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक रेत माफिया सक्रिय रहते हैं और ट्रैक्टरों के माध्यम से नदी का दोहन किया जा रहा है। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि रात भर ट्रैक्टर नदी से रेत निकालकर विभिन्न स्थानों तक पहुंचाते हैं। आरोप है कि स्थानीय पुलिस प्रशासन एवं खनिज विभाग की शिथिल कार्यप्रणाली के कारण रेत चोरों के हौसले बुलंद हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो नदी का अस्तित्व संकट में पड़ सकता है। बताया जा रहा है कि रेत माफिया प्रशासन से एक कदम आगे रहते हुए रणनीति के तहत काम करते हैं। नदी से मुख्य सड़क तक आने वाले तिराहों और रास्तों पर उनके लोग निगरानी में तैनात रहते हैं। किसी भी प्रकार की आशंका होते ही वे ट्रैक्टर लेकर मौके से फरार हो जाते हैं। स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि रात्रि गश्त बढ़ाई जाए और अवैध खनन पर तत्काल प्रभाव से सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

972 करोड़ की योजना पर हाई कोर्ट भड़का: ‘क्या डायल 112 के लिए मर्सिडीज चलानी है?’

जबलपुर  मध्य प्रदेश में डायल 112 फेज-2 प्रोजेक्ट को लेकर छिड़ा विवाद अब हाई कोर्ट की दहलीज पर पहुंच गया है। 972 करोड़ रुपए की भारी-भरकम लागत और टेंडर की शर्तों को लेकर हाई कोर्ट ने राज्य सरकार पर तीखी टिप्पणी की है। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान परियोजना की लागत पर हैरानी जताई। जब यह तथ्य सामने आया कि 1200 वाहनों के इस प्रोजेक्ट पर 972 करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं, तो कोर्ट ने मौखिक रूप से पूछा- 'क्या आप डायल 112 में मर्सिडीज कार चला रहे हैं?' यह टिप्पणी सीधे तौर पर सरकारी धन के उपयोग और प्रोजेक्ट की प्लानिंग पर सवाल उठाती है। अदालत ने 6 करोड़ 29 लाख रुपए के सीएडी (कंप्यूटर आधारित प्रेषण) सॉफ्टवेयर के लिए जारी नए टेंडर पर अंतरिम रोक लगा दी है। कोर्ट ने सरकार को एक सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है और पुलिस विभाग से वर्तमान सॉफ्टवेयर की कार्यक्षमता पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। विवाद की क्या है मुख्य वजह? ईएमआरआई ग्रीन हेल्थ सर्विसेज (EMRI) के अनुसार, उन्हें मार्च 2025 में सिस्टम इंटीग्रेटर नियुक्त किया गया था और सितंबर 2025 से सेवाएं शुरू हो चुकी हैं। कंपनी का आरोप है कि दिसंबर 2025 में सॉफ्टवेयर के लिए अलग टेंडर जारी करना मूल अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन है। राज्य सरकार और पुलिस विभाग का तर्क है कि 972 करोड़ रुपए में केवल वाहन ही नहीं, बल्कि डेटा सेंटर, तकनीकी ढांचा और परिचालन लागत भी शामिल है। उनका दावा है कि वर्तमान सॉफ्टवेयर में तकनीकी खामियां हैं, जिन्हें दूर करने के लिए नया टेंडर अनिवार्य था। प्रोजेक्ट की क्या है स्थिति? फेज-2 के तहत 1200 वाहनों के माध्यम से पुलिस सहायता को आधुनिक बनाने का लक्ष्य है। हालांकि, तकनीकी और कानूनी पेच ने फिलहाल इस महत्वाकांक्षी परियोजना की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है।

मध्यप्रदेश के नगरों के युगांतकारी परिवर्तन और आधुनिक अधोसंरचना का मार्ग प्रशस्त करेगा यह बजट : मंत्री कैलाश विजयवर्गीय

भोपाल  नगरीय विकास एवं आवास मंत्री  कैलाश विजयवर्गीय ने विधानसभा में प्रस्तुत वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट का स्वागत करते हुए इसे प्रदेश के शहरी परिदृश्य में अभूतपूर्व परिवर्तन लाने वाला एक दूरदर्शी रोडमैप बताया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार मध्यप्रदेश के नगरों के सुनियोजित विकास हेतु पूर्णतः संकल्पित है, जिसकी स्पष्ट झलक विभागीय बजट प्रावधानों में परिलक्षित होती है। यह बजट न केवल नगरीय क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की गुणवत्ता को संवर्धित करेगा, बल्कि विकास की उपलब्धता को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाकर नागरिकों के जीवन स्तर में गुणात्मक सुधार सुनिश्चित करेगा। मंत्री  विजयवर्गीय ने कहा कि आगामी 'सिंहस्थ-2028' को वैश्विक भव्यता और दिव्यता प्रदान करने के लिए बजट में 3060 करोड़ रूपये का ऐतिहासिक प्रावधान किया गया है, जो हमारी सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक पर्यटन के प्रति शासन की अटूट आस्था को दर्शाता है। नगरीय निकायों को वित्तीय रूप से स्वावलंबी और प्रशासनिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से प्रवेश कर के हस्तांतरण हेतु 3600 करोड़ रूपये तथा 16वें वित्त आयोग की अनुशंसा के अनुरूप स्थानीय निकायों हेतु 2057 करोड़ रूपये के अनुदान का प्रावधान किया गया है, जिससे स्थानीय स्वशासन की नींव और अधिक सुदृढ़ होगी। अधोसंरचना विकास और जन-कल्याणकारी योजनाओं के मध्य अनूठे समन्वय पर बल देते हुए मंत्री  विजयवर्गीय ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना (अर्बन) बी.एल.सी. के अंतर्गत आवंटित 2000 करोड़ रूपये शहरी निर्धनों के 'निज निवास' के स्वप्न को साकार करने में निर्णायक सिद्ध होगी। साथ ही, अमृत 2.0 (मिलियन प्लस शहरों हेतु) 1418 करोड़ रूपये और स्थानीय निकायों को मूलभूत सेवाओं के सुदृढ़ीकरण हेतु 1058 करोड़ रूपये के विशेष अनुदान की व्यवस्था की गई है। महानगरों में त्वरित, सुगम एवं प्रदूषण मुक्त यातायात सुनिश्चित करने हेतु मेट्रो रेल परियोजना के लिए 656 करोड़ रूपये तथा सांस्कृतिक-आध्यात्मिक केंद्रों के उत्थान हेतु गीता भवन योजना के अंतर्गत 60 करोड़ रूपये का प्रावधान किया गया है। मंत्री  विजयवर्गीय ने विश्वास जताया कि यह बजट प्रदेश के 'सर्वस्पर्शी समावेशी विकास' का आधार स्तंभ बनेगा और 'समृद्ध मध्यप्रदेश @2047' के दूरगामी लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में एक सशक्त एवं निर्णायक कदम सिद्ध होगा।